Bihar Board Class 11th Physics (भौतिक विज्ञान) Chapter 5 (गणित के नियम) Solutions
Here we have provided Solution for Chapter 5 (गणित के नियम) of Physics (भौतिक विज्ञान) subject for Class 11th students of Bihar Board of Secondary Education. There are various chapters in this Physics (भौतिक विज्ञान) such as Chapter 1 (भौतिक जगत), Chapter 2 (मात्रक तथा मापन), Chapter 3 (सरल रेखा में गति), Chapter 4 (समतल में गति), Chapter 5 (गणित के नियम), Chapter 6 (कार्य, उर्जा तथा शक्ति), Chapter 7 (कणों के नियम तथा घूर्णी गति), Chapter 8 (गुरुत्वाकर्षण), Chapter 9 (ठोसों के यांत्रिक गुण), Chapter 10 (तरलों के यांत्रिक गुण), Chapter 11 (द्रव्य के तापीय गुण), Chapter 12 (उष्मागतिकी), Chapter 13 (अणुगति सिद्धांत), Chapter 14 (दोलन) and Chapter 15 (तरंगें). Summary of the same is given below:
| Board Name | Bihar Board of Secondary Education |
| Class | Class 11th |
| Content Type | Solution |
| Solution for | Class 11th students |
| Subject | Physics (भौतिक विज्ञान) |
| Chapter Name | Chapter 5 (गणित के नियम) |
| Total Number of Chapter in this Subject | 15 |
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Bihar Board Class 11th Physics (भौतिक विज्ञान) Chapter 5 (गणित के नियम) Solutions
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प्रश्न 1. सदिश राशि किसे कहते हैं? उदाहरण दीजिए।
जिस भौतिक राशि को व्यक्त करने के लिए परिमाण (मान) के साथ-साथ दिशा की भी आवश्यकता होती है, उसे सदिश राशि कहते हैं। ऐसी राशियों को जोड़ने के लिए सदिश योग के नियमों का पालन करना पड़ता है।
उदाहरण: विस्थापन, वेग, त्वरण, बल, संवेग आदि सदिश राशियाँ हैं।
प्रश्न 2. सदिशों के योग के समान्तर चतुर्भुज नियम को लिखिए।
यदि एक बिंदु पर लगे दो सदिशों को एक समांतर चतुर्भुज की दो आसन्न भुजाओं द्वारा निरूपित किया जाए, तो उनके परिणामी सदिश को उस बिंदु से गुजरने वाले उस समांतर चतुर्भुज के विकर्ण द्वारा निरूपित किया जाता है।
माना दो सदिश P और Q हैं, जिनके बीच का कोण θ है। तब परिणामी सदिश R का परिमाण होगा:
R = √(P² + Q² + 2PQ cosθ)
और परिणामी की दिशा, सदिश P से कोण φ पर होगी, जहाँ
tan φ = (Q sinθ) / (P + Q cosθ)
प्रश्न 3. सदिशों के वियोजन से क्या तात्पर्य है?
किसी एक सदिश को दो या दो से अधिक सदिशों में इस प्रकार तोड़ना कि उन सभी सदिशों का सदिश योग मूल सदिश के बराबर हो, सदिशों का वियोजन कहलाता है। सामान्यतः किसी सदिश को दो परस्पर लंबवत दिशाओं (जैसे X-अक्ष और Y-अक्ष की दिशाओं) में वियोजित किया जाता है।
यदि सदिश A X-अक्ष से θ कोण बनाता है, तो इसके घटक होंगे:
Ax = A cosθ (X-अक्ष के अनुदिश)
Ay = A sinθ (Y-अक्ष के अनुदिश)
प्रश्न 4. अदिश राशि किसे कहते हैं? उदाहरण दीजिए।
जिस भौतिक राशि को व्यक्त करने के लिए केवल परिमाण (मान) की आवश्यकता होती है, दिशा की नहीं, उसे अदिश राशि कहते हैं। ऐसी राशियों को साधारण बीजगणितीय नियमों से जोड़ा, घटाया या गुणा किया जा सकता है।
उदाहरण: दूरी, द्रव्यमान, समय, आयतन, तापमान, ऊर्जा आदि अदिश राशियाँ हैं।
प्रश्न 5. सदिशों के योग के त्रिभुज नियम को लिखिए।
यदि दो सदिशों को एक त्रिभुज की दो क्रमागत भुजाओं द्वारा परिमाण एवं दिशा में निरूपित किया जाए, तो उनका परिणामी सदिश तीसरी भुजा (पहली भुजा के प्रारंभ बिंदु से अंतिम भुजा के अंत बिंदु तक) द्वारा परिमाण एवं दिशा में निरूपित किया जाता है।
इस नियम के अनुसार, सदिश योग A + B = R होता है।
प्रश्न 6. एकांक सदिश किसे कहते हैं?
वह सदिश जिसका परिमाण एक (1) होता है, एकांक सदिश कहलाता है। इसका उपयोग किसी विशेष दिशा को इंगित करने के लिए किया जाता है। किसी सदिश A की दिशा में एकांक सदिश Â (A-हैट) निम्न सूत्र द्वारा प्राप्त होता है:
 = A / |A|
जहाँ |A| सदिश A का परिमाण है। त्रिविमीय निर्देशांक पद्धति में X, Y और Z अक्षों के अनुदिश एकांक सदिश क्रमशः î, ĵ, k̂ होते हैं।
प्रश्न 7. दो सदिशों के अदिश गुणनफल की परिभाषा दीजिए।
दो सदिशों का अदिश गुणनफल एक अदिश राशि होती है, जो उन सदिशों के परिमाणों के गुणनफल तथा उनके बीच के कोण की कोज्या (cosine) के गुणनफल के बराबर होती है। इसे डॉट गुणनफल भी कहते हैं।
यदि दो सदिश A और B हैं तथा उनके बीच का कोण θ है, तो अदिश गुणनफल होगा:
A · B = |A| |B| cosθ
उदाहरण: कार्य (W) = बल (F) · विस्थापन (s) = F s cosθ
प्रश्न 8. दो सदिशों के सदिश गुणनफल की परिभाषा दीजिए।
दो सदिशों का सदिश गुणनफल स्वयं एक सदिश राशि होती है, जिसका परिमाण उन सदिशों के परिमाणों के गुणनफल तथा उनके बीच के कोण की ज्या (sine) के गुणनफल के बराबर होता है, और इसकी दिशा दोनों सदिशों के तल के लंबवत होती है (दाएँ हाथ के नियम द्वारा निर्धारित)। इसे क्रॉस गुणनफल भी कहते हैं।
यदि दो सदिश A और B हैं तथा उनके बीच का कोण θ है, तो सदिश गुणनफल होगा:
A × B = |A| |B| sinθ n̂
जहाँ n̂ एक ऐसा एकांक सदिश है जो A और B के तल के लंबवत है और दाएँ हाथ के नियम की दिशा बताता है।
उदाहरण: बल आघूर्ण (τ) = स्थिति सदिश (r) × बल (F)
प्रश्न 9. निम्नलिखित में से कौन सदिश राशि है?
(A) द्रव्यमान
(B) समय
(C) बल
(D) ताप
उत्तर: (C) बल
बल एक सदिश राशि है क्योंकि इसे व्यक्त करने के लिए परिमाण के साथ-साथ दिशा का ज्ञान भी आवश्यक है। शेष विकल्प (द्रव्यमान, समय, ताप) अदिश राशियाँ हैं।
प्रश्न 10. दो सदिशों के परिणामी का महत्तम मान होता है-
(A) A + B
(B) A – B
(C) √(A² + B²)
(D) √(A² + B² + 2AB cosθ)
उत्तर: (A) A + B
दो सदिशों के परिणामी का महत्तम (अधिकतम) मान तब प्राप्त होता है जब वे एक ही दिशा में हों, अर्थात उनके बीच का कोण θ = 0° हो। इस स्थिति में cos0° = 1 होता है, अतः परिणामी R = √(A² + B² + 2AB) = √(A+B)² = A + B हो जाता है।
प्रश्न 11. दो सदिशों के परिणामी का न्यूनतम मान होता है-
(A) A + B
(B) A – B
(C) √(A² + B²)
(D) √(A² + B² + 2AB cosθ)
उत्तर: (B) A – B
दो सदिशों के परिणामी का न्यूनतम मान तब प्राप्त होता है जब वे परस्पर विपरीत दिशा में हों, अर्थात उनके बीच का कोण θ = 180° हो। इस स्थिति में cos180° = -1 होता है, अतः परिणामी R = √(A² + B² - 2AB) = √(A - B)² = |A - B| हो जाता है। विकल्प में A – B लिखा है, जिसका तात्पर्य परिमाण से है।
प्रश्न 12. यदि दो सदिश परस्पर लंबवत हों तो उनका अदिश गुणनफल होता है-
(A) AB
(B) Zero (शून्य)
(C) (A + B)
(D) (A – B)
उत्तर: (B) Zero (शून्य)
जब दो सदिश परस्पर लंबवत (θ = 90°) होते हैं, तो cos90° = 0 होता है। अदिश गुणनफल A · B = |A||B| cosθ = |A||B| × 0 = 0 हो जाता है।
प्रश्न 13. यदि दो सदिश परस्पर समांतर हों तो उनका सदिश गुणनफल होता है-
(A) AB
(B) Zero (शून्य)
(C) (A + B)
(D) (A – B)
उत्तर: (B) Zero (शून्य)
जब दो सदिश परस्पर समांतर (या एक ही रेखा में) होते हैं, तो उनके बीच का कोण θ = 0° या 180° होता है। दोनों ही स्थितियों में sin0° = 0 और sin180° = 0 होता है। सदिश गुणनफल A × B = |A||B| sinθ n̂ = |A||B| × 0 × n̂ = 0 (शून्य सदिश) हो जाता है।
प्रश्न 14. एक कण का विस्थापन s = (2t² + 3) m है, जहाँ t सेकंड में है। 2 सेकंड पर इसका वेग होगा-
(A) 4 m/s
(B) 8 m/s
(C) 12 m/s
(D) 2 m/s
उत्तर: (B) 8 m/s
विस्थापन s = (2t² + 3) m दिया गया है। वेग, विस्थापन का समय के सापेक्ष अवकलज होता है।
वेग, v = ds/dt = d(2t² + 3)/dt = 4t m/s
t = 2 सेकंड रखने पर, v = 4 × 2 = 8 m/s
प्रश्न 15. किसी कण का वेग v = (3t² + 2t) m/s है। 2 सेकंड पर इसका त्वरण होगा-
(A) 8 m/s²
(B) 10 m/s²
(C) 12 m/s²
(D) 14 m/s²
उत्तर: (D) 14 m/s²
वेग v = (3t² + 2t) m/s दिया गया है। त्वरण, वेग का समय के सापेक्ष अवकलज होता है।
त्वरण, a = dv/dt = d(3t² + 2t)/dt = 6t + 2 m/s²
t = 2 सेकंड रखने पर, a = (6 × 2) + 2 = 12 + 2 = 14 m/s²
प्रश्न 1. सदिश किसे कहते हैं? उदाहरण दीजिए।
वह भौतिक राशि जिसे व्यक्त करने के लिए परिमाण के साथ-साथ दिशा की भी आवश्यकता होती है, सदिश राशि कहलाती है। ऐसी राशियों को जोड़ने का नियम साधारण बीजगणित का नियम नहीं होता।
उदाहरण: विस्थापन, वेग, त्वरण, बल, संवेग आदि सदिश राशियाँ हैं।
प्रश्न 2. सदिशों के योग के त्रिभुज नियम को लिखिए।
यदि दो सदिशों को एक त्रिभुज की दो क्रमागत भुजाओं द्वारा परिमाण व दिशा में निरूपित किया जाए, तो उनके परिणामी सदिश को त्रिभुज की तीसरी भुजा (पहले सदिश के प्रारंभ बिंदु से दूसरे सदिश के अंतिम बिंदु तक) द्वारा पूर्णतः निरूपित किया जा सकता है।
माना दो सदिश A और B हैं। इन्हें एक बिंदु O से आरेखित किया जाता है। सदिश A के सिरे से सदिश B खींचा जाता है। तब प्रारंभ बिंदु O से सदिश B के सिरे तक खींचा गया सदिश R ही इनका परिणामी सदिश होता है, अर्थात् R = A + B।
प्रश्न 3. सदिशों के योग का समांतर चतुर्भुज नियम लिखिए।
यदि दो सदिशों को एक बिंदु से खींचे गए समांतर चतुर्भुज की दो आसन्न भुजाओं द्वारा निरूपित किया जाए, तो उस बिंदु से खींचा गया विकर्ण उन दोनों सदिशों के परिणामी को परिमाण व दिशा में निरूपित करता है।
माना दो सदिश P और Q हैं, जिनके बीच का कोण θ है। इनके परिणामी R का परिमाण निम्न सूत्र से ज्ञात होता है:
R = √(P² + Q² + 2PQ cosθ)
तथा परिणामी की दिशा सदिश P से α कोण बनाती है, जहाँ
tanα = (Q sinθ) / (P + Q cosθ)
प्रश्न 4. सदिशों के वियोजन से क्या तात्पर्य है?
किसी एक सदिश को दो या दो से अधिक सदिशों में इस प्रकार विभाजित करना कि उन सभी सदिशों का परिणामी मूल सदिश के बराबर हो, सदिशों का वियोजन कहलाता है।
सामान्यतः किसी सदिश को दो परस्पर लंबवत दिशाओं (जैसे X-अक्ष व Y-अक्ष की दिशाओं) में वियोजित किया जाता है। यदि सदिश A X-अक्ष से θ कोण बनाता है, तो इसके घटक होंगे:
Ax = A cosθ (X-अक्ष के अनुदिश)
Ay = A sinθ (Y-अक्ष के अनुदिश)
प्रश्न 5. अदिश गुणनफल किसे कहते हैं? उदाहरण दीजिए।
दो सदिशों का अदिश गुणनफल एक अदिश राशि होती है, जिसका परिमाण दोनों सदिशों के परिमाणों के गुणनफल तथा उनके बीच के कोण की कोज्या (cosine) के गुणनफल के बराबर होता है। इसे दोनों सदिशों के बीच एक बिंदु (डॉट) लगाकर दर्शाया जाता है।
परिभाषा: यदि दो सदिश A और B के बीच का कोण θ हो, तो इनका अदिश गुणनफल होगा:
A · B = |A| |B| cosθ
उदाहरण: कार्य (बल एवं विस्थापन का अदिश गुणनफल), शक्ति (बल एवं वेग का अदिश गुणनफल)।
प्रश्न 6. सदिश गुणनफल किसे कहते हैं? उदाहरण दीजिए।
दो सदिशों का सदिश गुणनफल स्वयं एक सदिश राशि होती है। इस सदिश का परिमाण दोनों सदिशों के परिमाणों के गुणनफल तथा उनके बीच के कोण की ज्या (sine) के गुणनफल के बराबर होता है, तथा इसकी दिशा दोनों सदिशों के तल के लंबवत होती है (दाएँ हाथ के नियम द्वारा निर्धारित)। इसे क्रॉस (×) चिह्न से दर्शाया जाता है।
परिभाषा: यदि दो सदिश A और B के बीच का कोण θ हो, तो इनका सदिश गुणनफल होगा:
A × B = |A| |B| sinθ n
जहाँ n इकाई सदिश है जो A व B के तल के लंबवत दिशा बताता है।
उदाहरण: बलाघूर्ण (स्थिति सदिश एवं बल का सदिश गुणनफल), कोणीय संवेग (स्थिति सदिश एवं रेखीय संवेग का सदिश गुणनफल)।
प्रश्न 7. निम्नलिखित में से कौन सदिश है?
(a) दाब - अदिश (केवल परिमाण)
(b) बल - सदिश (परिमाण व दिशा दोनों)
(c) संवेग - सदिश (परिमाण व दिशा दोनों)
(d) कार्य - अदिश (केवल परिमाण)
(e) समय - अदिश (केवल परिमाण)
(f) ऊर्जा - अदिश (केवल परिमाण)
(g) आवेग - सदिश (परिमाण व दिशा दोनों)
(h) भार - सदिश (परिमाण व दिशा दोनों)
(i) घनत्व - अदिश (केवल परिमाण)
प्रश्न 8. सदिशों के योग का साहचर्य नियम लिखिए।
तीन सदिशों के योग में कोष्ठकों का क्रम परिणाम को प्रभावित नहीं करता। अर्थात् सदिश योग साहचर्य (Associative) होता है।
यदि A, B और C तीन सदिश हों, तो
(A + B) + C = A + (B + C)
इस नियम के कारण हम बिना कोष्ठक के केवल A + B + C लिख सकते हैं।
प्रश्न 9. सदिशों के योग का क्रम-विनिमेय नियम लिखिए।
दो सदिशों के योग का क्रम बदलने पर परिणामी सदिश नहीं बदलता। अर्थात् सदिश योग क्रम-विनिमेय (Commutative) होता है।
यदि A और B दो सदिश हों, तो
A + B = B + A
इस नियम का अर्थ है कि सदिशों को किसी भी क्रम में जोड़ा जा सकता है, परिणाम समान रहेगा।
प्रश्न 10. एकांक सदिश किसे कहते हैं?
वह सदिश जिसका परिमाण एक (1) होता है, एकांक सदिश कहलाता है। इसका उपयोग किसी विशेष दिशा को इंगित करने के लिए किया जाता है।
किसी सदिश A की दिशा में एकांक सदिश â निम्न प्रकार प्राप्त होता है:
â = A / |A|
जहाँ |A| सदिश A का परिमाण है।
उदाहरण: कार्तीय निर्देशांक पद्धति में X, Y व Z अक्षों की दिशा में एकांक सदिश क्रमशः î, ĵ और k̂ होते हैं।
हा है।
/ 48 के पश्चात् कण पुनः विरामावस्था में है।
* v=0
आवेग = संवेग में परिवर्तन = m(v - u) = 4(0- 0.75) = -3 kg-m/s
प्रश्न 15. किसी घर्षणरहित मेज पर रखे 10 ४४ तथा 20 ४४ के दो पिण्ड किसी पतली डोरी द्वारा आपस में जुड़े हैं। 600 1४ का कोई क्षैतिज बल 0) 4 पर (४) # पर डोरी के अनुदिश लगाया जाता है। प्रत्येक स्थिति में डोरी में तनाव क्या है?
हल: पिण्ड A का द्रव्यमान (m1) = 10 kg
पिण्ड B का द्रव्यमान (m2) = 20 kg
लगाया गया बल (F) = 600 N
स्थिति (a): जब बल पिण्ड A पर लगाया जाता है।
दोनों पिण्ड एक ही त्वरण 'a' से गति करेंगे।
पिण्ड A के लिए समीकरण: F - T = m1a ...(i)
पिण्ड B के लिए समीकरण: T = m2a ...(ii)
समीकरण (i) और (ii) को जोड़ने पर:
F = (m1 + m2)a
a = F / (m1 + m2) = 600 / (10 + 20) = 600 / 30 = 20 m/s2
'a' का मान समीकरण (ii) में रखने पर:
T = m2a = 20 × 20 = 400 N
स्थिति (b): जब बल पिण्ड B पर लगाया जाता है।
पिण्ड A के लिए समीकरण: T = m1a ...(iii)
पिण्ड B के लिए समीकरण: F - T = m2a ...(iv)
समीकरण (iii) और (iv) को जोड़ने पर:
F = (m1 + m2)a
a = F / (m1 + m2) = 600 / 30 = 20 m/s2
'a' का मान समीकरण (iii) में रखने पर:
T = m1a = 10 × 20 = 200 N
प्रश्न 16, 818 तथा 12 ४४ के दो पिण्डों को किसी हल्की अवितान्य डोरी, जो घर्षणरहित घिरनी पर चढी है, के दो सिरों से बाँधा गया है। पिण्डों को मुक्त रूप से छोड़ने पर उनके त्वरण तथा डोरी में तनाव ज्ञात कीजिए।
हल: द्रव्यमान m1 = 8 kg, द्रव्यमान m2 = 12 kg
माना डोरी में तनाव T है तथा त्वरण a है।
चूँकि m2 > m1, अतः m2 नीचे की ओर तथा m1 ऊपर की ओर गति करेगा।
पिण्ड m1 के लिए समीकरण: T - m1g = m1a ...(i)
पिण्ड m2 के लिए समीकरण: m2g - T = m2a ...(ii)
समीकरण (i) और (ii) को जोड़ने पर:
m2g - m1g = (m1 + m2)a
a = (m2 - m1)g / (m1 + m2)
a = (12 - 8) × 10 / (8 + 12) = (4 × 10) / 20 = 40 / 20 = 2 m/s2
त्वरण 'a' का मान समीकरण (i) में रखने पर:
T = m1g + m1a = m1(g + a)
T = 8 × (10 + 2) = 8 × 12 = 96 N
प्रश्न 17. प्रयोगशाला के निर्देश फ्रेम में कोई नाभिक विराम में है। यदि यह नाभिक दो छोटे नाभिकों में विघटित हो जाता है, तो यह दर्शाइए कि उत्पाद विपरीत दिशाओं में गति करने चाहिए।
हल: नाभिक प्रारम्भ में विराम में है, अतः इसका प्रारम्भिक रेखीय संवेग शून्य है।
माना नाभिक m1 व m2 द्रव्यमान के दो खण्डों में टूटता है जो क्रमशः v1 व v2 वेग से गति करते हैं।
रेखीय संवेग संरक्षण के नियम के अनुसार:
विघटन से पहले का कुल संवेग = विघटन के बाद का कुल संवेग
0 = m1v1 + m2v2
इससे प्राप्त होता है: m1v1 = - m2v2
ऋणात्मक चिह्न यह दर्शाता है कि दोनों खण्डों के वेग परस्पर विपरीत दिशाओं में हैं। अतः दोनों उत्पाद नाभिक विपरीत दिशाओं में गति करेंगे।
प्रश्न 18. दो बिलियर्ड गेंद जिनमें प्रत्येक की संहति 0.05 1८४ @, 6 ms! की चाल से विपरीत दिशाओं में गति करती हुई संघट्ट करती हैं और संघट्ट के पश्चात् उसी चाल से वापस लौटती हैं। प्रत्येक गेंद पर दूसरी गेंद कितना आवेग लगाती है?
हल: प्रत्येक गेंद का द्रव्यमान m = 0.05 kg
प्रत्येक गेंद की चाल v = 6 m/s
संघट्ट से पहले: माना एक गेंद का संवेग धनात्मक दिशा में है।
पहली गेंद का संवेग, pi1 = mv = 0.05 × 6 = 0.30 kg-m/s
दूसरी गेंद का संवेग, pi2 = m(-v) = 0.05 × (-6) = -0.30 kg-m/s
संघट्ट के बाद: प्रत्येक गेंद उसी चाल से विपरीत दिशा में लौटती है।
पहली गेंद का संवेग, pf1 = m(-v) = -0.30 kg-m/s
दूसरी गेंद का संवेग, pf2 = m(v) = +0.30 kg-m/s
पहली गेंद पर लगा आवेग = उसके संवेग में परिवर्तन = pf1 - pi1 = (-0.30) - (0.30) = -0.60 kg-m/s
दूसरी गेंद पर लगा आवेग = pf2 - pi2 = (0.30) - (-0.30) = +0.60 kg-m/s
आवेग का परिमाण 0.60 kg-m/s है। ऋणात्मक व धनात्मक चिह्न आवेग की दिशा को दर्शाते हैं।
प्रश्न 19. 100 kg Bele Bt fave तोप द्वारा 0.020 5४ का गोला दागा जाता है। यदि गोले की नालमुखी चाल 80 9४५7 है, तो तोप की प्रतिक्षेप चाल क्या है?
हल: गोले का द्रव्यमान m1 = 0.020 kg
गोले की चाल v1 = 80 m/s
तोप का द्रव्यमान m2 = 100 kg
माना तोप की प्रतिक्षेप चाल v2 है।
प्रारम्भ में तोप और गोला विराम में थे, अतः कुल प्रारम्भिक संवेग शून्य था।
रेखीय संवेग संरक्षण के नियम से,
विरामावस्था में कुल संवेग = दागने के बाद कुल संवेग
0 = m1v1 + m2v2
m2v2 = - m1v1
v2 = - (m1v1) / m2
v2 = - (0.020 × 80) / 100 = - (1.6) / 100 = -0.016 m/s
ऋणात्मक चिह्न दर्शाता है कि तोप की गति गोले की गति के विपरीत दिशा में है। तोप की प्रतिक्षेप चाल 0.016 m/s है।
प्रश्न 20. कोई बल्लेबाज किसी गेंद को 45" के कोण पर विक्षेपित कर देता है। ऐसा करने में वह गेंद की आरंभिक चाल, जो 54 1:४॥॥ है, में कोई परिवर्तन नहीं करता। गेंद को कितना आवेग दिया जाता है? (गेंद की संहति 0.15 1४ है)
हल: गेंद का द्रव्यमान m = 0.15 kg
गेंद का वेग v = 54 km/h = 54 × (5/18) m/s = 15 m/s
गेंद का प्रारम्भिक संवेग pi = mv (माना क्षैतिज दिशा में)
गेंद का अन्तिम संवेग pf = mv (45° के कोण पर)
चूँकि चाल समान है, केवल दिशा बदलती है।
संवेग परिवर्तन का परिमाण ज्ञात करने के लिए, हम दोनों संवेगों के बीच के कोण (45°) पर विचार करते हैं।
संवेग परिवर्तन Δp = √(pi2 + pf2 + 2 pipf cosθ) जहाँ θ = 180° - 45° = 135°
या सरल विधि: चूँकि दिशा 45° से बदलती है, संवेग के ऊर्ध्वाधर घटक में परिवर्तन होता है।
प्रारम्भिक संवेग का ऊर्ध्वाधर घटक = 0
अन्तिम संवेग का ऊर्ध्वाधर घटक = mv sin45°
ऊर्ध्वाधर दिशा में संवेग परिवर्तन = mv sin45° - 0 = mv sin45°
क्षैतिज घटक में भी परिवर्तन होता है।
परिवर्तन के दोनों घटकों को संयुक्त करने पर आवेग का परिमाण:
Δp = √2 × mv × sin(45°/2) का भी उपयोग किया जा सकता है।
एक अन्य सीधा सूत्र: जब गेंद समान चाल से θ कोण पर विक्षेपित होती है, तो दिया गया आवेग = 2mv sin(θ/2)
यहाँ θ = 45°, अतः θ/2 = 22.5°
आवेग = 2 × m × v × sin(22.5°)
= 2 × 0.15 × 15 × sin(22.5°)
= 4.5 × 0.3827 (लगभग)
≈ 1.72 kg-m/s (गणना सुधार के साथ)
नोट: sin(22.5°) ≈ 0.3827 का प्रयोग करने पर उत्तर 1.72 kg-m/s आता है। पाठ्यपुस्तक में दिए गए मान के अनुसार गणना करने पर उत्तर 4.16 kg-m/s भी प्राप्त हो सकता है, जो cos(22.5°) के प्रयोग पर आधारित है। मूल सिद्धांत यह है कि आवेग, संवेग में परिवर्तन के बराबर होता है।
प्रश्न 21. किसी डोरी के एक सिरे से बँघा 0.25 /४ संहति का कोई पत्थर Sst det A 15m त्रिज्या के वृत्त पर 40 7०४/४४४ की चाल से चक्कर लगाता है? डोरी में तनाव कितना है? यदि डोरी 20010 के अधिकतम तनाव को सहन कर सकती है, तो वह अधिकतम चाल ज्ञात कीजिए जिससे पत्थर को घुमाया जा सकता है।
हल: पत्थर का द्रव्यमान m = 0.25 kg
वृत्त की त्रिज्या r = 1.5 m
आवृत्ति n = 40 चक्कर/मिनट = 40/60 = 2/3 चक्कर/सेकंड
वृत्तीय गति में, अभिकेन्द्र बल डोरी के तनाव द्वारा प्रदान किया जाता है।
(i) डोरी में तनाव: T = m r ω² = m r (2πn)²
T = 0.25 × 1.5 × (2 × 3.14 × 2/3)²
T = 0.375 × (4.1867)² ≈ 0.375 × 17.53 ≈ 6.57 N (लगभग)
(ii) अधिकतम चाल: अधिकतम तनाव Tmax = 200 N
Tmax = m vmax² / r
vmax² = Tmax × r / m
vmax² = (200 × 1.5) / 0.25 = 300 / 0.25 = 1200
vmax = √1200 = 34.64 m/s
अतः पत्थर को घुमाने की अधिकतम चाल ≈ 34.6 m/s है।
प्रश्न 22. यदि प्रश्न 21 में पत्थर की चाल को अधिकतम निर्धारित सीमा से भी अधिक कर दिया जाए तथा डोरी यकायक दूट जाए, तो डोरी के टूटने के पश्चात् पत्थर के प्रक्षेप का सही वर्णन निम्नलिखित में से कौन करता है? (७) वह पत्थर झटके के साथ त्रिज्यतः बाहर को आर जाता है 0) डोरी दूटने के क्षण पत्थर स्पर्शरिखीय पथ पर उड़ जाता है (० पत्थर स्पर्शी से किसी कोण पर, जिसका परिमाण पत्थर की चाल पर निर्भर करता है, उड़ जाता है
हल: जब कोई पिण्ड एकसमान वृत्तीय गति कर रहा होता है, तो किसी भी क्षण उसका वेग उस बिंदु पर वृत्त की स्पर्श रेखा के अनुदिश होता है। यदि डोरी अचानक टूट जाती है, तो पिण्ड पर लगने वाला अभिकेन्द्र बल (तनाव) समाप्त हो जाता है। न्यूटन के गति के प्रथम नियम के अनुसार, पिण्ड उसी सीधी रेखा में गति जारी रखेगा जिस दिशा में उसका वेग था। अतः डोरी टूटने के ठीक बाद पत्थर उस बिंदु पर स्पर्श रेखा के अनुदिश सीधी रेखा में गति करेगा।
सही विकल्प है: (b) डोरी टूटने के क्षण पत्थर स्पर्श रेखीय पथ पर उड़ जाता है।
प्रश्न 23. स्पष्ट कीजिए कि क्यों (a) कोई घोड़ा रिक्त दिकस्थान में किसी गाड़ी को खींचते हुए दौड़ नहीं सकता? (0) किसी तीत्र गति से चल रही बस के यकायक रुकने पर यात्री आगे की ओर गिरते हैं? (०) लान मूबर को धकेलने की तुलना में खींचना आसान होता है? (१9) क्रिकेट का खिलाड़ी गेंद को लपकते समय अपने हाथ गेंद के साथ पीछे को खींचता हैं?
हल:
(a) घोड़ा गाड़ी को खींचने के लिए पृथ्वी पर पीछे की ओर बल लगाता है। न्यूटन के तृतीय नियम के अनुसार, पृथ्वी घोड़े के खुरों पर आगे की ओर प्रतिक्रिया बल लगाती है जो गाड़ी को गति प्रदान करता है। रिक्त दिक्स्थान (निर्वात) में कोई पृथ्वी नहीं है जो यह प्रतिक्रिया बल दे सके, इसलिए घोड़ा गाड़ी को नहीं खींच सकता।
(b) गतिमान बस में यात्री का शरीर भी बस के वेग के साथ गति करता है। जब बस अचानक रुकती है, तो बस के निचले हिस्से (पैरों के संपर्क वाला भाग) तो रुक जाता है, लेकिन जड़त्व के कारण यात्री का ऊपरी भाग गति जारी रखना चाहता है। इस कारण यात्री आगे की ओर झटके के साथ गिरते प्रतीत होते हैं।
(c) लॉन मूवर को खींचते समय, हमारे द्वारा लगाया गया बल ऊपर की ओर एक घटक रखता है जो मूवर के भार को कुछ कम कर देता है, जिससे घर्षण बल कम हो जाता है। धकेलते समय, बल का ऊर्ध्वाधर घटक नीचे की ओर होता है जो मूवर के भार को बढ़ा देता है, जिससे घर्षण बल बढ़ जाता है और धकेलना कठिन हो जाता है।
(d) खिलाड़ी गेंद को लपकते समय हाथ पीछे खींचता है ताकि गेंद को रोकने में लगने वाला समय बढ़ जाए। आवेग = बल × समय = संवेग में परिवर्तन (जो निश्चित है)। समय बढ़ने से गेंद पर लगने वाला माध्यम बल कम हो जाता है, जिससे हाथों में चोट लगने की संभावना कम होती है और गेंद को पकड़ना आसान हो जाता है।
1. सदिश राशि क्या है? उदाहरण दीजिए।
सदिश राशि वह भौतिक राशि है जिसे व्यक्त करने के लिए परिमाण (मात्रा) और दिशा दोनों की आवश्यकता होती है। इन्हें सदिश के नियमों (जैसे त्रिभुज नियम या समान्तर चतुर्भुज नियम) के अनुसार जोड़ा जाता है।
उदाहरण: विस्थापन, वेग, त्वरण, बल, संवेग आदि।
2. अदिश राशि क्या है? उदाहरण दीजिए।
अदिश राशि वह भौतिक राशि है जिसे केवल परिमाण (मात्रा) से ही पूर्णतया व्यक्त किया जा सकता है। इसमें दिशा का कोई महत्व नहीं होता है। इन्हें साधारण बीजगणित के नियमों से जोड़ा-घटाया जा सकता है।
उदाहरण: द्रव्यमान, दूरी, समय, तापमान, कार्य, ऊर्जा आदि।
3. सदिशों के योग का त्रिभुज नियम लिखिए।
सदिशों के योग का त्रिभुज नियम निम्न प्रकार है:
यदि दो सदिशों को परिमाण और दिशा में एक त्रिभुज की दो क्रमागत भुजाओं द्वारा निरूपित किया जाए, तो उनका परिणामी सदिश परिमाण और दिशा में त्रिभुज की तीसरी भुजा (पहले सिरे से अंतिम सिरे की ओर) द्वारा निरूपित किया जाएगा।
चित्रात्मक निरूपण: यदि सदिश \(\vec{A}\) और \(\vec{B}\) हैं, तो परिणामी \(\vec{R} = \vec{A} + \vec{B}\) त्रिभुज की तीसरी भुजा होगी।
4. सदिशों के योग का समान्तर चतुर्भुज नियम लिखिए।
सदिशों के योग का समान्तर चतुर्भुज नियम निम्न प्रकार है:
यदि एक बिंदु से परिमाण और दिशा में दो सदिशों को एक समान्तर चतुर्भुज की दो आसन्न भुजाओं के रूप में निरूपित किया जाए, तो उस बिंदु से निकलने वाला विकर्ण उन दोनों सदिशों के परिणामी सदिश को परिमाण और दिशा में निरूपित करेगा।
सूत्र: यदि सदिश \(\vec{P}\) और \(\vec{Q}\) के बीच का कोण \(\theta\) है, तो परिणामी का परिमाण, \(R = \sqrt{P^2 + Q^2 + 2PQ \cos\theta}\)
5. एक सदिश का दूसरे सदिश पर प्रक्षेप क्या है?
किसी सदिश का दूसरे सदिश पर प्रक्षेप (या अदिश गुणनफल/डॉट गुणनफल का उपयोग करते हुए घटक) वह राशि है जो बताती है कि पहला सदिश दूसरे सदिश की दिशा में कितना प्रभाव डाल रहा है।
गणितीय रूप में: सदिश \(\vec{A}\) का सदिश \(\vec{B}\) की दिशा में प्रक्षेप (घटक) = \(A \cos \theta\) है, जहाँ \(\theta\) दोनों सदिशों के बीच का कोण है। इसे \(\vec{A} \cdot \hat{B}\) के रूप में भी लिखा जा सकता है, जहाँ \(\hat{B}\) \(\vec{B}\) की दिशा में एकांक सदिश है।
6. सदिश गुणनफल क्या है? इसकी दिशा कैसे निर्धारित की जाती है?
दो सदिशों का सदिश गुणनफल (या क्रॉस गुणनफल) स्वयं एक सदिश राशि होती है। इसका परिमाण दोनों सदिशों के परिमाणों के गुणनफल तथा उनके बीच के कोण की ज्या (sine) के गुणनफल के बराबर होता है।
सूत्र: \(\vec{A} \times \vec{B} = AB \sin\theta \, \hat{n}\)
जहाँ \(\hat{n}\) एक ऐसा एकांक सदिश है जो \(\vec{A}\) और \(\vec{B}\) दोनों के तल के लंबवत होता है।
दिशा निर्धारण: सदिश गुणनफल की दिशा दाएँ हाथ के नियम या पेंच के नियम द्वारा निर्धारित की जाती है। यदि आप अपनी दाएँ हाथ की उंगलियों को पहले सदिश (\(\vec{A}\)) से दूसरे सदिश (\(\vec{B}\)) की ओर मोड़ते हैं, तो अंगूठा परिणामी सदिश (\(\vec{A} \times \vec{B}\)) की दिशा बताएगा।
7. निम्नलिखित में से कौन सदिश राशि है?
सही उत्तर: (C) बल
व्याख्या: बल एक सदिश राशि है क्योंकि इसके पूर्ण वर्णन के लिए परिमाण (जैसे 10 न्यूटन) और दिशा (जैसे उत्तर की ओर) दोनों की आवश्यकता होती है। शेष विकल्प—द्रव्यमान, समय और ताप—अदिश राशियाँ हैं जिन्हें केवल परिमाण से व्यक्त किया जाता है।
8. निम्नलिखित में से कौन अदिश राशि है?
सही उत्तर: (C) ऊर्जा
व्याख्या: ऊर्जा एक अदिश राशि है। इसे केवल एक संख्या और मात्रक (जैसे 50 जूल) से व्यक्त किया जा सकता है, इसकी कोई विशिष्ट दिशा नहीं होती। वेग, संवेग और विस्थापन सदिश राशियाँ हैं क्योंकि इनमें दिशा का महत्व होता है।
9. दो सदिशों के योग का अधिकतम मान क्या होता है?
सही उत्तर: (A) A + B
व्याख्या: दो सदिशों के योग का अधिकतम मान तब प्राप्त होता है जब वे दोनों एक ही दिशा में हों, अर्थात उनके बीच का कोण \(\theta = 0^\circ\) हो। इस स्थिति में \(\cos 0^\circ = 1\) होता है, इसलिए परिणामी का परिमाण \(R = \sqrt{A^2 + B^2 + 2AB \cos 0^\circ} = \sqrt{A^2 + B^2 + 2AB} = \sqrt{(A+B)^2} = A + B\) हो जाता है।
10. दो सदिशों के योग का न्यूनतम मान क्या होता है?
सही उत्तर: (B) A – B
व्याख्या: दो सदिशों के योग का न्यूनतम मान तब प्राप्त होता है जब वे दोनों परस्पर विपरीत दिशा में हों, अर्थात उनके बीच का कोण \(\theta = 180^\circ\) हो। इस स्थिति में \(\cos 180^\circ = -1\) होता है, इसलिए परिणामी का परिमाण \(R = \sqrt{A^2 + B^2 + 2AB \cos 180^\circ} = \sqrt{A^2 + B^2 - 2AB} = \sqrt{(A-B)^2} = |A - B|\) हो जाता है। यहाँ (A – B) का तात्पर्य परिमाण से है, जो कि A और B के बीच का धनात्मक अंतर है।
प्रश्न 1. सदिश राशि किसे कहते हैं ? उदाहरण दीजिए।
वे भौतिक राशियाँ जिन्हें व्यक्त करने के लिए परिमाण के साथ-साथ दिशा की भी आवश्यकता होती है, सदिश राशियाँ कहलाती हैं। इनका योग त्रिभुज या समांतर चतुर्भुज के नियम के अनुसार किया जाता है।
उदाहरण: विस्थापन, वेग, त्वरण, बल, संवेग आदि।
प्रश्न 2. अदिश राशि किसे कहते हैं ? उदाहरण दीजिए।
वे भौतिक राशियाँ जिन्हें व्यक्त करने के लिए केवल परिमाण की आवश्यकता होती है, दिशा की नहीं, अदिश राशियाँ कहलाती हैं। इनका योग साधारण बीजगणित के नियमों के अनुसार किया जा सकता है।
उदाहरण: दूरी, चाल, द्रव्यमान, समय, तापमान, कार्य, ऊर्जा आदि।
प्रश्न 3. सदिशों के योगफल का त्रिभुज नियम लिखिए।
यदि दो सदिशों को परिमाण और दिशा में किसी त्रिभुज की दो क्रमागत भुजाओं द्वारा निरूपित किया जाए, तो उनके परिणामी सदिश को परिमाण और दिशा में त्रिभुज की तीसरी भुजा (पहले सदिश के प्रारंभ बिंदु से दूसरे सदिश के अंतिम बिंदु तक) द्वारा निरूपित किया जाता है। इसे सदिश योग का त्रिभुज नियम कहते हैं।
यदि दो सदिश A और B हैं, तो उनका परिणामी R = A + B त्रिभुज नियम द्वारा प्राप्त होता है।
प्रश्न 4. सदिशों के योगफल का समांतर चतुर्भुज नियम लिखिए।
यदि दो सदिशों को परिमाण और दिशा में किसी समांतर चतुर्भुज की दो आसन्न भुजाओं द्वारा निरूपित किया जाए, तो उनके परिणामी सदिश को परिमाण और दिशा में उस समांतर चतुर्भुज के उस विकर्ण द्वारा निरूपित किया जाता है जो उन दोनों भुजाओं के प्रारंभिक बिंदु से होकर गुजरता है।
यदि सदिश P और Q हैं तथा उनके बीच का कोण θ है, तो परिणामी R का परिमाण होगा: R = √(P² + Q² + 2PQ cos θ)
प्रश्न 5. सदिशों के वियोजन से क्या तात्पर्य है ?
किसी एक सदिश को दो या दो से अधिक सदिशों में इस प्रकार विभाजित करने की प्रक्रिया, जिनका योग मूल सदिश के बराबर हो, सदिशों का वियोजन कहलाती है। सामान्यतः किसी सदिश को दो परस्पर लंबवत दिशाओं (जैसे X-अक्ष और Y-अक्ष) के अनुदिश वियोजित किया जाता है। इन वियोजित सदिशों को उस सदिश के घटक कहते हैं।
यदि सदिश A X-अक्ष से θ कोण बनाता है, तो इसके घटक होंगे:
Ax = A cos θ (X-अक्ष के अनुदिश)
Ay = A sin θ (Y-अक्ष के अनुदिश)
प्रश्न 6. सदिश गुणनफल क्या है ?
सदिश गुणनफल दो प्रकार के होते हैं:
1. अदिश गुणनफल (डॉट गुणनफल): दो सदिशों का अदिश गुणनफल एक अदिश राशि होती है। इसका परिमाण दोनों सदिशों के परिमाणों के गुणनफल तथा उनके बीच के कोण की कोज्या के गुणनफल के बराबर होता है।
A · B = |A| |B| cos θ
2. सदिश गुणनफल (क्रॉस गुणनफल): दो सदिशों का सदिश गुणनफल स्वयं एक सदिश राशि होती है। इस सदिश का परिमाण दोनों सदिशों के परिमाणों के गुणनफल तथा उनके बीच के कोण की ज्या के गुणनफल के बराबर होता है, और इसकी दिशा दोनों सदिशों के तल के लंबवत होती है (दाएँ हाथ के नियम द्वारा निर्धारित)।
A × B = |A| |B| sin θ n
जहाँ n इकाई सदिश है जो A और B के तल के लंबवत है।
प्रश्न 7. एकांक सदिश किसे कहते हैं ?
वह सदिश जिसका परिमाण एक (1) होता है, एकांक सदिश कहलाता है। इसका उपयोग किसी विशेष दिशा को इंगित करने के लिए किया जाता है। किसी भी सदिश को उसके परिमाण तथा उसकी दिशा में एकांक सदिश के गुणनफल के रूप में व्यक्त किया जा सकता है।
यदि A कोई सदिश है, तो इसकी दिशा में एकांक सदिश â इस प्रकार है:
â = A / |A|
तथा A = |A| â
कार्तीय निर्देशांक पद्धति में X, Y और Z अक्षों के अनुदिश एकांक सदिश क्रमशः î, ĵ, k̂ होते हैं।
प्रश्न 8. सदिशों के योग के लिए कम्यूटेटिव नियम लिखिए।
सदिशों का योग क्रम-विनिमेय नियम का पालन करता है। इसका अर्थ है कि दो सदिशों को किसी भी क्रम में जोड़ने पर परिणामी सदिश समान रहता है।
गणितीय रूप में, यदि A और B दो सदिश हैं, तो
A + B = B + A
इसे त्रिभुज या समांतर चतुर्भुज नियम द्वारा स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि परिणामी की लंबाई और दिशा दोनों सदिशों के जोड़ने के क्रम पर निर्भर नहीं करती।
प्रश्न 9. सदिशों के योग के लिए साहचर्य नियम लिखिए।
सदिशों का योग साहचर्य नियम का भी पालन करता है। इसका अर्थ है कि तीन या अधिक सदिशों को जोड़ते समय, उन्हें किसी भी समूह में संयोजित करके जोड़ा जा सकता है और परिणामी समान रहेगा।
गणितीय रूप में, यदि A, B और C तीन सदिश हैं, तो
(A + B) + C = A + (B + C)
इस नियम के कारण हम सदिश योग में कोष्ठकों को बिना किसी असर के हटा सकते हैं और सीधे A + B + C लिख सकते हैं।
प्रश्न 10. सदिशों के योग के लिए वितरण नियम लिखिए।
सदिश योग पर अदिश गुणन का वितरण नियम लागू होता है। इस नियम के अनुसार, यदि कोई अदिश m दो सदिशों के योग से गुणा किया जाता है, तो वह प्रत्येक सदिश से अलग-अलग गुणा करके योग करने के बराबर होता है।
गणितीय रूप में, यदि m एक अदिश है और A व B सदिश हैं, तो
m(A + B) = mA + mB
इसी प्रकार, यदि दो अदिश m और n एक सदिश A से गुणा किए जाते हैं, तो वितरण नियम इस प्रकार लिखा जा सकता है:
(m + n)A = mA + nA
प्रश्न 36. चित्र में दर्शाए अनुसार किसी ट्रक का पिछला भाग खुला है तथा 40 ४४ संहति का एक संदूक खुले सिरे से 5 91 दूरी पर रखा है। ट्रक के फर्श तथा संदूक के बीच घर्षण गुणांक 0.15है। किसी सीघी सड़क पर ट्रक विरामावस्था से गति प्रारंभ करके 2 11/5* से त्वरित होता है। आरंभ बिन्दु से कितनी दूरी चलने पर वह संदूक ट्रक से नीचे गिर जाएगा? (संदूक के आमाप की उपेक्षा कीजिए।)
हल:
दिया गया है:
संदूक का द्रव्यमान, m = 40 kg
ट्रक के फर्श तथा संदूक के बीच घर्षण गुणांक, μ = 0.15
ट्रक का त्वरण, aT = 2 m/s²
संदूक की ट्रक के खुले सिरे से दूरी, s = 5 m
ट्रक के त्वरित होने पर, संदूक पर एक छद्म बल (जड़त्वीय बल) पीछे की ओर कार्य करता है।
यह बल, F = m × aT = 40 × 2 = 80 N (पीछे की ओर) है।
संदूक को फिसलने से रोकने के लिए, ट्रक के फर्श द्वारा संदूक पर सीमांत घर्षण बल कार्य करता है।
सीमांत घर्षण बल, fmax = μ × m × g = 0.15 × 40 × 9.8 = 58.8 N (आगे की ओर)।
चूँकि ट्रक द्वारा लगाया गया पीछे की ओर बल (80 N) घर्षण बल (58.8 N) से अधिक है, इसलिए संदूक पीछे की ओर फिसलना शुरू कर देगा।
संदूक पर पीछे की ओर कार्यरत परिणामी बल, Fnet = F - fmax = 80 - 58.8 = 21.2 N (पीछे की ओर)।
संदूक में उत्पन्न त्वरण (ट्रक के सापेक्ष पीछे की ओर), aB = Fnet / m = 21.2 / 40 = 0.53 m/s².
संदूक को 5 m पीछे फिसलकर ट्रक से गिरने में लगा समय (गति के द्वितीय समीकरण से):
s = u t + (1/2) aB t²
5 = 0 × t + (1/2) × 0.53 × t²
t² = (5 × 2) / 0.53 = 10 / 0.53 ≈ 18.8679
t ≈ √18.8679 ≈ 4.34 s.
इस समय (4.34 s) में ट्रक द्वारा तय की गई दूरी (गति के द्वितीय समीकरण से):
sT = u t + (1/2) aT t²
sT = 0 × 4.34 + (1/2) × 2 × (4.34)²
sT = (4.34)² = 18.84 m (लगभग).
अतः आरंभ बिंदु से लगभग 18.84 m की दूरी चलने पर संदूक ट्रक से नीचे गिर जाएगा।
प्रश्न 37. 15 ८७ त्रिज्या का कोई बड़ा ग्रामोफोन रिकार्ड 3222: 7#०४/ए४ की चाल से घूर्णन कर रहा है। रिकार्ड पर उसके केंद्र से 4 ०० तथा 14 ०७ की दूरियों पर दो सिक्के रखे गए हैं। यदि सिक्के तथा रिकार्ड के बीच घर्षण गुणांक 0.15 है तो कौन-सा सिक्का रिकार्ड के साथ परिक्रमा करेगा?
हल:
दिया गया है:
रिकार्ड की त्रिज्या, R = 15 cm = 0.15 m
घूर्णन आवृत्ति, ν = 33⅓ rev/min = 100/3 rev/min.
पहले सिक्के की केंद्र से दूरी, r1 = 4 cm = 0.04 m
दूसरे सिक्के की केंद्र से दूरी, r2 = 14 cm = 0.14 m
घर्षण गुणांक, μ = 0.15
सिक्का रिकार्ड के साथ तभी घूमेगा जब उसे आवश्यक अभिकेंद्र बल, सीमांत घर्षण बल द्वारा प्रदान किया जा सके।
अर्थात्, अभिकेंद्र बल ≤ सीमांत घर्षण बल
m r ω² ≤ μ m g
r ω² ≤ μ g
सबसे पहले कोणीय वेग (ω) ज्ञात करते हैं:
ν = (100/3) rev/min = (100)/(3×60) rev/s = 100/180 = 5/9 rev/s.
ω = 2πν = 2 × (22/7) × (5/9) = (44/7)×(5/9) = 220/63 ≈ 3.49 rad/s.
अब, μ g = 0.15 × 9.8 = 1.47 m/s².
पहले सिक्के (r₁ = 0.04 m) के लिए:
r₁ ω² = 0.04 × (220/63)²
(220/63)² = 48400/3969 ≈ 12.20
r₁ ω² = 0.04 × 12.20 ≈ 0.488 m/s².
चूँकि 0.488 m/s² < 1.47 m/s² (अर्थात r₁ ω² < μ g), इसलिए आवश्यक अभिकेंद्र बल घर्षण बल द्वारा प्रदान किया जा सकता है। अतः पहला सिक्का रिकार्ड के साथ घूमेगा।
दूसरे सिक्के (r₂ = 0.14 m) के लिए:
r₂ ω² = 0.14 × 12.20 ≈ 1.708 m/s².
चूँकि 1.708 m/s² > 1.47 m/s² (अर्थात r₂ ω² > μ g), इसलिए घर्षण बल आवश्यक अभिकेंद्र बल प्रदान करने के लिए पर्याप्त नहीं है। अतः दूसरा सिक्का रिकार्ड के साथ नहीं घूम पाएगा और फिसल जाएगा।
प्रश्न 38. आपने सरकस में मौत के कुएँ (एक खोखला जालयुक्त गोलीय चैम्बर ताकि उसके भीतर के क्रियाकलापों को दर्शक देख सकें) में मोटरसाइकिल सवार को ऊर्ध्वाधर लूप में मोटरसाइकिल चलाते हुए देखा होगा। स्पष्ट कीजिए कि वह मोटरसाइकिल सवार नीचे से कोई सहारा न होने पर भी गोले के उच्चतम बिंदु से नीचे क्यों नहीं मिरता? यदि चैम्बर की त्रिज्या 25 9 है, तो ऊर्ध्वाघर लूप को पूरा करने के लिए मोटरसाइकिल की न्यूनतम चाल कितनी होनी चाहिए?
हल:
भाग 1: उच्चतम बिंदु पर न गिरने का कारण
जब मोटरसाइकिल सवार गोलीय चैम्बर के उच्चतम बिंदु पर होता है, तो उस पर दो बल नीचे की ओर कार्य करते हैं:
1. गुरुत्वाकर्षण बल (mg)
2. चैम्बर द्वारा लगाया गया अभिलंब प्रतिक्रिया बल (R) (यदि वह चैम्बर के संपर्क में है)।
ये दोनों बल मिलकर आवश्यक अभिकेंद्र बल प्रदान करते हैं, जो मोटरसाइकिल को वृत्तीय पथ पर गतिमान रखने के लिए आवश्यक है।
उच्चतम बिंदु पर बलों का समीकरण: R + mg = (m v²) / r
यहाँ v मोटरसाइकिल की चाल तथा r चैम्बर की त्रिज्या है।
चूँकि सभी बल संतुलन में हैं और आवश्यक अभिकेंद्र बल प्रदान कर रहे हैं, इसलिए मोटरसाइकिल सवार नीचे नहीं गिरता।
भाग 2: न्यूनतम चाल का परिकलन
ऊर्ध्वाधर लूप को सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए, उच्चतम बिंदु पर न्यूनतम चाल वह होती है जब अभिलंब प्रतिक्रिया (R) शून्य हो जाती है, और केवल गुरुत्व बल ही आवश्यक अभिकेंद्र बल प्रदान करता है।
अतः, R = 0 रखने पर समीकरण बनता है:
mg = (m vmin²) / r
vmin² = g r
vmin = √(g r)
दिया गया है: चैम्बर की त्रिज्या, r = 25 m, g = 9.8 m/s² मानते हैं।
vmin = √(9.8 × 25) = √245 ≈ 15.65 m/s.
अतः लूप को पूरा करने के लिए मोटरसाइकिल की न्यूनतम चाल लगभग 15.65 m/s होनी चाहिए।
प्रश्न 39. 70 ८४ संहति का कोई व्यक्ति अपने ऊर्ध्वाधर अक्ष पर 200 »०५/४४४॥ की चाल से घूर्णन करती 89 त्रिज्या की किसी बेलनाकार दीवार के साथ उसके संपर्क में खड़ा है। दीवार तथा उसके कपड़ों के बीच घर्षण गुणांक 0.15 है। दीवार की वह न्यूनतम घूर्णन चाल ज्ञात कीजिए, जिससे फर्श को यकायक हटा लेने पर भी, वह व्यक्ति बिना गिरे दीवार से चिपका रह सके।
हल:
दिया गया है:
व्यक्ति का द्रव्यमान, m = 70 kg
बेलनाकार दीवार की त्रिज्या, r = 8 m
घर्षण गुणांक, μ = 0.15
जब दीवार घूमती है, तो वह व्यक्ति पर एक अभिलंब प्रतिक्रिया बल (R) केंद्र की ओर लगाती है, जो आवश्यक अभिकेंद्र बल प्रदान करता है:
R = m r ω² ...(1)
व्यक्ति का भार (mg) नीचे की ओर है, जिसे घर्षण बल (f) संतुलित करता है।
घर्षण बल, f = μ R ...(2)
व्यक्ति के न गिरने की शर्त यह है कि घर्षण बल उसके भार के बराबर या अधिक हो:
f ≥ mg
μ R ≥ mg
समीकरण (1) से R का मान रखने पर:
μ (m r ω²) ≥ mg
μ r ω² ≥ g
ω² ≥ g / (μ r)
न्यूनतम कोणीय चाल के लिए:
ωmin² = g / (μ r)
ωmin = √[ g / (μ r) ]
मान रखने पर:
ωmin = √[ 9.8 / (0.15 × 8) ] = √[ 9.8 / 1.2 ] = √(8.1667) ≈ 2.86 rad/s.
इसे चक्र/सेकंड (rev/s) में बदलने पर:
νmin = ωmin / (2π) = 2.86 / (2 × 3.14) ≈ 2.86 / 6.28 ≈ 0.455 rev/s.
चक्र/मिनट (rpm) में: 0.455 × 60 ≈ 27.3 rpm.
अतः दीवार की न्यूनतम घूर्णन चाल लगभग 27.3 rpm होनी चाहिए।
प्रश्न 40. # त्रिज्या का पतला बृत्तीय तार अपने ऊर्ध्वाधर व्यास के परित: कोणीय आवृत्ति ७ से घूर्णन कर रहा है। यह दर्शाइए कि इस तार में डली कोई माणिका ७३ ,/हवाफ़ के लिए अपने निम्नतम बिंदु पर रहती 1 w= /2g/R के लिए, केंद्र से मनके को जोड़ने वाला त्रिज्य सदिश ऊर्ध्वाधर अधोमुखी दिशा से कितना कोण बनाता है। (घर्षण को उपेक्षणीय मानिए।)
हल:
भाग 1: सामान्य स्थिति का विश्लेषण
माना तार की त्रिज्या R है और वह कोणीय आवृत्ति ω से अपने ऊर्ध्वाधर व्यास के परितः घूम रहा है। मणिका (मनका) किसी क्षण स्थिति P पर है, जहाँ केंद्र से मिलाने वाली रेखा ऊर्ध्वाधर से θ कोण बनाती है।
मणिका पर कार्यरत बल:
1. भार (mg) ऊर्ध्वाधर नीचे की ओर।
2. तार द्वारा लगाया गया अभिलंब प्रतिक्रिया बल (N), जो त्रिज्या के अनुदिश केंद्र की ओर है। इसे दो घटकों में वियोजित किया जा सकता है:
- ऊर्ध्वाधर घटक: N cosθ (ऊपर की ओर)
- क्षैतिज घटक: N sinθ (केंद्र की ओर)
ऊर्ध्वाधर दिशा में साम्य के लिए:
N cosθ = mg ...(1)
क्षैतिज दिशा में, अभिकेंद्र बल प्रदान करने के लिए:
मणिका की कक्षा की त्रिज्या = R sinθ
अभिकेंद्र बल = m (R sinθ) ω²
यह बल N के क्षैतिज घटक (N sinθ) द्वारा प्रदान किया जाता है:
N sinθ = m R ω² sinθ ...(2)
समीकरण (2) से, यदि sinθ ≠ 0, तो:
N = m R ω²
इस मान को समीकरण (1) में रखने पर:
(m R ω²) cosθ = mg
cosθ = g / (R ω²) ...(3)
चूँकि cosθ का मान 1 से अधिक नहीं हो सकता, अतः स्थायी साम्य के लिए:
g / (R ω²) ≤ 1
=> ω² ≥ g/R
=> ω ≥ √(g/R)
यदि ω < √(g/R), तो cosθ > 1 होगा जो असंभव है। इस स्थिति में मणिका निम्नतम बिंदु (θ = 0°) पर ही रह पाएगी, क्योंकि वहाँ sinθ = 0 होता है और समीकरण (2) स्वतः संतुष्ट हो जाता है।
अतः ω ≤ √(g/R) के लिए मणिका अपने निम्नतम बिंदु पर रहती है।
भाग 2: विशेष स्थिति ω = √(2g/R) के लिए कोण θ
दिया गया है: ω = √(2g/R)
इस मान को समीकरण (3) में रखते हैं:
cosθ = g / [ R × (2g/R) ]
cosθ = g / (2g)
cosθ = 1/2
θ = cos⁻¹(1/2) = 60°
अतः जब ω = √(2g/R) होता है, तो केंद्र से मणिका को जोड़ने वाला त्रिज्य सदिश ऊर्ध्वाधर अधोमुखी दिशा से 60° का कोण बनाता है।
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How to download Bihar Board Class 11th Physics (भौतिक विज्ञान) Chapter 5 (गणित के नियम) Solutions
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