Bihar Board Class 11th Physics (भौतिक विज्ञान) Chapter 11 (द्रव्य के तापीय गुण) Solutions

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प्रश्न 1. निऑन तथा 00; के त्रिक बिंदु क्रमशः 24.57 7 तथा 216.55 ए हैं। इन तापों को सेल्सियस तथा फारेनहाइट मापक्रमों में व्यक्त कीजिए।

हल: हम जानते हैं कि केल्विन (K) और सेल्सियस (°C) तापमान में निम्न संबंध है:
°C = K - 273.15
केल्विन और फारेनहाइट (°F) तापमान में संबंध है:
°F = (K - 273.15) × (9/5) + 32

निऑन के लिए:
त्रिक बिंदु (K में) = 24.57 K
सेल्सियस में: °C = 24.57 - 273.15 = -248.58°C
फारेनहाइट में: °F = (24.57 - 273.15) × (9/5) + 32 = (-248.58 × 9/5) + 32 = -447.444 + 32 = -415.444°F

कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) के लिए:
त्रिक बिंदु (K में) = 216.55 K
सेल्सियस में: °C = 216.55 - 273.15 = -56.60°C
फारेनहाइट में: °F = (216.55 - 273.15) × (9/5) + 32 = (-56.60 × 9/5) + 32 = -101.88 + 32 = -69.88°F

प्रश्न 2. दो परम ताप मापक्रमों 4 तथा 8 पर जल के त्रिक बिन्दु को 200 4 तथा 350 9 द्वारा परिभाषित किया गया है। 7, तथा 1; में क्या सम्बंध है?

हल: दिया गया है:
मापक्रम A पर जल का त्रिक बिंदु = 200 A
मापक्रम B पर जल का त्रिक बिंदु = 350 B
हम जानते हैं कि जल का त्रिक बिंदु परम ताप पैमाने पर 273.16 K होता है।
इसलिए, 200 A = 350 B = 273.16 K
अतः, 1 A = 273.16 / 200 K
और, 1 B = 273.16 / 350 K
मान लीजिए किसी ताप को मापक्रम A पर T_A और मापक्रम B पर T_B मापा जाता है।
चूँकि दोनों पैमाने रैखिक हैं, इसलिए अनुपात समान होगा:
T_A / 200 = T_B / 350
इससे संबंध प्राप्त होता है: T_A / T_B = 200 / 350 = 4/7
या, 7T_A = 4T_B

प्रश्न 3. किसी तापमापी का ओम में विद्युत प्रतिरोध ताप के साथ निम्नलिखित सन्निकट नियम के अनुसार परिवर्तित होता है
R= Roll+ oT -T,)] यदि तापमापी का जल के त्रिक बिन्दु 273.16 £ पर प्रतिरोध 101.69 तथा लैड के सामान्य संगलन बिन्दु (600.5 ८) पर प्रतिरोध 165.5 7 है तो वह ताप ज्ञात कीजिए जिस पर तापमापी का प्रतिरोध 123.4 0 है।

हल: दिया गया है:
जल के त्रिक बिंदु पर: ताप T₀ = 273.16 K, प्रतिरोध R₀ = 101.6 Ω
लेड (सीसा) के संगलन बिंदु पर: ताप T₁ = 600.5 K, प्रतिरोध R₁ = 165.5 Ω
प्रतिरोध-ताप संबंध: R = R₀[1 + α(T - T₀)]
पहले, स्थिरांक α का मान ज्ञात करते हैं। लेड के बिंदु के लिए:
165.5 = 101.6[1 + α(600.5 - 273.16)]
165.5 = 101.6[1 + α(327.34)]
165.5 / 101.6 = 1 + 327.34α
1.6289 = 1 + 327.34α
327.34α = 0.6289
α = 0.6289 / 327.34 ≈ 0.001921 K⁻¹

अब, वह ताप T ज्ञात करना है जहाँ प्रतिरोध R = 123.4 Ω है।
123.4 = 101.6[1 + 0.001921(T - 273.16)]
123.4 / 101.6 = 1 + 0.001921(T - 273.16)
1.2146 = 1 + 0.001921(T - 273.16)
0.2146 = 0.001921(T - 273.16)
T - 273.16 = 0.2146 / 0.001921 ≈ 111.71
T ≈ 111.71 + 273.16 = 384.87 K

प्रश्न 4, निम्नलिखित के उत्तर दीजिए ;
(a) आधुनिक तापमिति में जल का त्रिक बिन्दु एक मानक बिन्दु है, क्यों? हिम के गलनांक तथा जल के क्वथनांक को मानक नियत बिन्दु मानने में (जैसा कि मूल सेल्सियस मापक्रम में किया गया था।) क्या दोष है?
0) जैसा कि ऊपर वर्णन किया जा चुका है कि मूल सेल्सियस मापक्रम में दो नियत बिन्दु थे जिनको क्रमश: 070 तथा 100 ८ संख्याएँ निर्धारित की गई थी। परम ताप मापक्रम पर दो में से एक नियत बिन्दु जल का त्रिक बिन्दु लिया गया है जिसे केल्विन परम ताप मापक्रम पर संख्या 273.16 ए निर्धारित की गई है। इस मापक्रम (केल्विन परम ताप) पर अन्य नियत बिन्दु क्या है?
(० परम . (केल्विन मापक्रम) 7' तथा सेल्सियस मापक्रम पर ताप & में सम्बंध इस प्रकार
t, = T - 27315 इस सम्बंध में हमने 273.15 लिखा है 273.16 क्यों नहीं लिखा?
(a) उस परम ताप मापक्रम पर, जिसके एकांक अंतराल का आमाप फारेनहाइट के एकांक अंतराल की आमाप के बराबर है, जल के त्रिक बिन्दु का ताप क्‍या होगा?

हल:
(a) जल का त्रिक बिंदु एक अद्वितीय स्थिति है जहाँ शुद्ध जल की ठोस (बर्फ), द्रव (जल) और गैस (जल वाष्प) तीनों अवस्थाएँ साम्य में एक साथ विद्यमान रहती हैं। यह स्थिति एक निश्चित ताप (273.16 K) और एक निश्चित दाब (611.657 Pa) पर ही प्राप्त होती है और यह पूर्णतः पुनरुत्पादनीय है। इसके विपरीत, हिम का गलनांक और जल का क्वथनांक वायुमंडलीय दाब पर निर्भर करते हैं और अशुद्धियों की उपस्थिति से भी बदल जाते हैं, इसलिए वे पूर्ण रूप से निश्चित मानक बिंदु नहीं हैं।

(b) केल्विन परम ताप मापक्रम पर दूसरा नियत बिंदु परम शून्य (0 K) है, जो सैद्धांतिक रूप से वह न्यूनतम ताप है जिस पर किसी पदार्थ की आणविक गति पूर्णतः रुक जाती है।

(c) संबंध t = T - 273.15 में हम 273.15 का उपयोग करते हैं, 273.16 नहीं, क्योंकि सेल्सियस पैमाने पर 0°C बर्फ का गलनांक (273.15 K) है, न कि जल का त्रिक बिंदु (273.16 K)। सामान्य उपयोग के लिए, सेल्सियस और केल्विन के बीच रूपांतरण में 273.15 का ही प्रयोग किया जाता है।

(d) फारेनहाइट पैमाने पर, जल के हिमांक (32°F) और क्वथनांक (212°F) के बीच 180 डिग्री का अंतराल है। यदि एक नया परम ताप पैमाना बनाया जाए जिसकी एक डिग्री का आकार फारेनहाइट की एक डिग्री के बराबर हो, तो उस पैमाने पर जल का त्रिक बिंदु ज्ञात करना है।
केल्विन पैमाने पर जल का त्रिक बिंदु = 273.16 K
केल्विन पैमाने पर 0 K से 273.16 K तक के अंतराल को नए पैमाने पर 180 भागों (फारेनहाइट अंतराल के समान) में बाँटा जाएगा।
अतः नए पैमाने पर त्रिक बिंदु का मान = 273.16 × (180/100) = 273.16 × 1.8 = 491.688 (इकाई मान लीजिए 'R')

प्रश्न 5. दो आदर्श गैस तापमापियों .4 तथा 2 में क्रमशः ऑक्सीजन तथा हाइड्रोजन प्रयोग की गई हैं। इनके प्रेक्षण निम्नलिखित है
ताप दाब तापमापी 4 में। दाब तापमापी 8 में जल का त्रिक *ि 1.25010°Pa {0.200 10°Pa WER का सामान्य Wests |1.79710°Pa —_—-|0.287 10°Pa
(a) तापमापियों .4 तथा # के द्वारा लिए गए पादयांकों के अनुसार सल्फर के सामान्य गलनांक के परमताप क्या हैं?
(0) आपके विचार से तापमापियों 4 तथा 7 के उत्तरों में थोड़ा अंतर होने का क्या कारण है? (दोनों तापमापियों में कोई दोष नहीं है)। दो पाठ्यांकों के बीच की विसंगति को कम करने के लिए इस प्रयोग में और क्‍या प्रावधान आवश्यक हैं?

हल:
(a) आदर्श गैस तापमापी के लिए, स्थिर आयतन पर, ताप (T) दाब (P) के समानुपाती होता है।
सूत्र: T = (P / Pₜᵣ) × Tₜᵣ, जहाँ Pₜᵣ और Tₜᵣ जल के त्रिक बिंदु पर दाब और ताप हैं।
यहाँ Tₜᵣ = 273.16 K
तापमापी A (ऑक्सीजन) के लिए:
Pₜᵣ = 1.250 × 10⁵ Pa, P (सल्फर) = 1.797 × 10⁵ Pa
T (सल्फर) = (1.797 × 10⁵ / 1.250 × 10⁵) × 273.16 = 1.4376 × 273.16 ≈ 392.69 K
तापमापी B (हाइड्रोजन) के लिए:
Pₜᵣ = 0.200 × 10⁵ Pa, P (सल्फर) = 0.287 × 10⁵ Pa
T (सल्फर) = (0.287 × 10⁵ / 0.200 × 10⁵) × 273.16 = 1.435 × 273.16 ≈ 391.98 K

(b) दोनों तापमापियों के पाठ्यांकों में अंतर का कारण यह है कि प्रयुक्त गैसें (ऑक्सीजन और हाइड्रोजन) निम्न दाब पर ही पूर्णतः आदर्श गैस की तरह व्यवहार करती हैं। दिए गए दाब (लगभग 10⁵ Pa) पर ये गैसें आदर्श गैस नियम से थोड़ा विचलन दर्शाती हैं, जिसे गैसों का अ-आदर्श व्यवहार कहते हैं। विभिन्न गैसों के लिए यह विचलन अलग-अलग होता है, इसलिए पाठ्यांकों में अंतर आता है।
इस विसंगति को कम करने के लिए प्रयोग को अत्यंत निम्न दाब पर करना चाहिए, क्योंकि अति निम्न दाब पर सभी गैसें आदर्श गैस के समान व्यवहार करने लगती हैं और उनके पाठ्यांक लगभग समान आते हैं।

प्रश्न 6. किसी 179 लम्बे स्टील के फीते का यथार्थ अंशांकन 27.0*८ पर किया गया है। किसी तप्त दिन जब ताप 45०0 था तब इस फीते से किसी स्टील की छड़ की लम्बाई 63.0 ०४ मापी गई। उस दिन स्टील की छड़ की वास्तविक लम्बाई क्या थी? जिस दिन ताप 27.00 होगा उस दिन इसी BE की लम्बाई क्या होगी? स्टील का रेखीय प्रसार गुणांक - 1.20 3८ 10% 71

हल: दिया गया है:
स्टील फीते की वास्तविक लंबाई (27°C पर) L₀ = 100 cm (माना, प्रश्न में 179 एक टाइपो है, सामान्यतः 100 cm माना जाता है।)
रेखीय प्रसार गुणांक α = 1.20 × 10⁻⁵ K⁻¹
ताप में वृद्धि ΔT = 45°C - 27°C = 18°C

45°C पर फीते की वास्तविक लंबाई:
L_tape = L₀ (1 + α ΔT) = 100 [1 + (1.20 × 10⁻⁵ × 18)]
L_tape = 100 [1 + 0.000216] = 100 × 1.000216 = 100.0216 cm
इसका अर्थ है कि 45°C पर, फीते पर अंकित "1 cm" की वास्तविक लंबाई 100.0216/100 = 1.000216 cm है।

45°C पर मापी गई छड़ की लंबाई: फीते से पढ़ा गया मान = 63.0 cm
चूँकि फीता फैला हुआ है, इसलिए यह माप वास्तविकता से कम दिखाएगा।
छड़ की वास्तविक लंबाई (45°C पर) = (फीते की 45°C पर वास्तविक लंबाई / फीते की 27°C पर लंबाई) × पढ़ा गया मान
= (100.0216 / 100) × 63.0 = 1.000216 × 63.0 ≈ 63.0136 cm

27°C पर उसी छड़ की लंबाई: जब ताप 27°C होगा, तो फीता और छड़ दोनों सिकुड़ जाएंगे।
छड़ की लंबाई भी ताप के साथ बदलेगी। 45°C पर छड़ की लंबाई L_rod(45) = 63.0136 cm है।
27°C पर इसकी लंबाई: L_rod(27) = L_rod(45) / [1 + α (45-27)]
L_rod(27) = 63.0136 / [1 + (1.20 × 10⁻⁵ × 18)] = 63.0136 / 1.000216 ≈ 63.00 cm
(नोट: व्यावहारिक रूप से, 27°C पर छड़ की लंबाई वही होगी जो फीते से 27°C पर मापी जाएगी, अर्थात 63.0 cm।)

प्रश्न 7. किसी बड़े स्टील के पहिए को उसी पदार्थ की किसी धुरी पर ठीक बैठाना है। 27९८ : पर धुरी का बाहरी व्यास 8.70 ०० तथा पहिए के केंद्रीय छिद्र का व्यास 8.69 ०४ है। सूखी बर्फ द्वारा धुरी को ठंडा किया गया है। धुरी के किस ताप पर पहिया घुरी पर चढ़ेगा? यह मानिए कि आवश्यक ताप परिसर में स्टील का रैखिक प्रसार गुणांक नियत रहता है
Og = L20x 105K!

हल: दिया गया है:
प्रारंभिक ताप T₁ = 27°C = 300 K
धुरी का बाहरी व्यास D_axle = 8.70 cm
पहिए के छिद्र का व्यास D_hole = 8.69 cm
रेखीय प्रसार गुणांक α = 1.20 × 10⁻⁵ K⁻¹

पहिया धुरी पर तब चढ़ेगा जब ठंडा करने पर धुरी का व्यास, पहिए के छिद्र के व्यास के बराबर या उससे थोड़ा कम हो जाएगा।
माना अंतिम ताप T₂ है जिस पर धुरी का व्यास 8.69 cm हो जाता है।
ठंडा करने पर लंबाई (व्यास) में परिवर्तन का सूत्र: L₂ = L₁ [1 + α (T₂ - T₁)]
यहाँ, L₂ = 8.69 cm, L₁ = 8.70 cm
8.69 = 8.70 [1 + 1.20 × 10⁻⁵ (T₂ - 300)]
8.69 / 8.70 = 1 + 1.20 × 10⁻⁵ (T₂ - 300)
0.9988506 ≈ 1 + 1.20 × 10⁻⁵ (T₂ - 300)
1.20 × 10⁻⁵ (T₂ - 300) = 0.9988506 - 1 = -0.0011494
T₂ - 300 = -0.0011494 / (1.20 × 10⁻⁵) ≈ -95.78
T₂ ≈ 300 - 95.78 = 204.22 K
सेल्सियस में: T₂ = 204.22 - 273 = -68.78°C ≈ -69°C
अतः धुरी को लगभग -69°C तक ठंडा करने पर पहिया धुरी पर चढ़ जाएगा।

प्रश्न 8. ताँबे की चादर Hf us fox fone en 21 27.0°C We PBR HT SA 4.24 cm है। इस धातु की चादर Bl 227°C Teh Ta HUA पर छिद्र के व्यास में क्या परिवर्तन होगा? ताँबे का रेखीय FAR Ws = 170 x 10° KN

हल: दिया गया है:
प्रारंभिक ताप T₁ = 27.0°C
छिद्र का प्रारंभिक व्यास d₁ = 4.24 cm
अंतिम ताप T₂ = 227°C
ताप परिवर्तन ΔT = 227 - 27 = 200°C
ताँबे का रेखीय प्रसार गुणांक α = 1.70 × 10⁻⁵ K⁻¹ (माना)

जब किसी धातु की चादर गर्म की जाती है, तो उसमें बना छिद्र भी उसी दर से फैलता है जिस दर से धातु स्वयं फैलती है। यह मानते हुए कि प्रसार समान रूप से होता है।
व्यास में परिवर्तन Δd = d₁ × α × ΔT
Δd = 4.24 × (1.70 × 10⁻⁵) × 200
Δd = 4.24 × 3.4 × 10⁻³ = 14.416 × 10⁻³ cm = 0.0144 cm

227°C पर छिद्र का नया व्यास d₂ = d₁ + Δd = 4.24 + 0.0144 = 4.2544 cm
अतः छिद्र के व्यास में वृद्धि 0.0144 cm (लगभग) होगी।

प्रश्न 1. ऊष्मा का S.I. मात्रक है

(A) केल्विन (B) जूल (C) कैलोरी (D) एर्ग

उत्तर: (B) जूल
ऊष्मा ऊर्जा का एक रूप है। अंतर्राष्ट्रीय पद्धति (S.I.) में ऊर्जा का मूल मात्रक जूल (Joule) है। इसलिए ऊष्मा का भी S.I. मात्रक जूल ही होता है। कैलोरी ऊष्मा की एक पुरानी इकाई है, जबकि केल्विन ताप का मात्रक है और एर्ग ऊर्जा का CGS मात्रक है।

प्रश्न 2. ऊष्मा का मात्रक कैलोरी है और यह बराबर है

(A) 0.24 जूल (B) 4.18 जूल (C) 1 जूल (D) 1 किलोजूल

उत्तर: (B) 4.18 जूल
एक कैलोरी ऊष्मा की वह मात्रा है जो एक ग्राम शुद्ध पानी का तापमान 1 डिग्री सेल्सियस (या 1 केल्विन) बढ़ाने के लिए आवश्यक होती है। जूल में इसका मान लगभग 4.18 जूल होता है। अधिक सटीक रूप से, 1 कैलोरी = 4.1868 जूल। विकल्प (A) 0.24 जूल गलत है क्योंकि यह 1 जूल के बराबर कैलोरी (लगभग 0.24 कैलोरी) है।

प्रश्न 3. किसी पदार्थ की विशिष्ट ऊष्मा धारिता का S.I. मात्रक है

(A) J kg-1 (B) J kg-1 K-1 (C) J K-1 (D) cal g-1 °C-1

उत्तर: (B) J kg-1 K-1
किसी पदार्थ की विशिष्ट ऊष्मा धारिता (Specific Heat Capacity) वह ऊष्मा की मात्रा है जो उस पदार्थ के एक किलोग्राम द्रव्यमान का तापमान एक केल्विन (या एक डिग्री सेल्सियस) बढ़ाने के लिए आवश्यक होती है। ऊष्मा का मात्रक जूल (J), द्रव्यमान का किलोग्राम (kg) और ताप का केल्विन (K) है। अतः विशिष्ट ऊष्मा धारिता का S.I. मात्रक जूल प्रति किलोग्राम प्रति केल्विन (J kg-1 K-1) होता है।

प्रश्न 4. किसी आदर्श गैस के लिए Cp / Cv का मान होता है

(A) 1 से अधिक (B) 1 से कम (C) 1 के बराबर (D) शून्य

उत्तर: (A) 1 से अधिक
किसी आदर्श गैस के लिए, स्थिर दाब पर मोलर विशिष्ट ऊष्मा (Cp) स्थिर आयतन पर मोलर विशिष्ट ऊष्मा (Cv) से हमेशा अधिक होती है। ऐसा इसलिए क्योंकि स्थिर दाब पर ऊष्मा देने पर गैस का आयतन बढ़ता है और गैस द्वारा कुछ कार्य भी किया जाता है, जिसके लिए अतिरिक्त ऊष्मा की आवश्यकता होती है। इस प्रकार Cp > Cv होता है, अतः अनुपात Cp/Cv (जिसे γ द्वारा दर्शाया जाता है) हमेशा 1 से अधिक होता है।

प्रश्न 5. किसी पदार्थ के तापीय प्रसार गुणांक का S.I. मात्रक है

(A) m (B) m K-1 (C) K-1 (D) m2 K-1

उत्तर: (C) K-1 (या °C-1)
तापीय प्रसार गुणांक (Coefficient of Thermal Expansion) वह दर है जिस पर किसी पदार्थ का आकार (लंबाई, क्षेत्रफल या आयतन) तापमान में परिवर्तन के साथ बदलता है। यह प्रति इकाई तापमान परिवर्तन के अनुरूप आयाम में आंशिक परिवर्तन को दर्शाता है। चूंकि यह तापमान (केल्विन या सेल्सियस) में परिवर्तन से विभाजित एक अनुपात (जिसकी कोई इकाई नहीं होती) है, इसलिए इसका S.I. मात्रक प्रति केल्विन (K-1) होता है।

प्रश्न 6. दो पिंडों के बीच ऊष्मा का आदान-प्रदान तब तक होता रहता है जब तक कि

(A) उनके द्रव्यमान बराबर हो जाएँ (B) उनके आयतन बराबर हो जाएँ (C) उनके घनत्व बराबर हो जाएँ (D) उनके ताप बराबर हो जाएँ

उत्तर: (D) उनके ताप बराबर हो जाएँ
ऊष्मा प्रवाह का मूल सिद्धांत यह है कि ऊष्मा हमेशा उच्च ताप वाले पिंड से निम्न ताप वाले पिंड की ओर प्रवाहित होती है। यह प्रक्रिया तब तक जारी रहती है जब तक कि दोनों पिंडों का ताप समान न हो जाए। इस अवस्था को तापीय साम्य (Thermal Equilibrium) कहते हैं। तापीय साम्य स्थापित होने के बाद दोनों पिंडों के बीच शुद्ध ऊष्मा प्रवाह शून्य हो जाता है।

प्रश्न 7. ऊष्मा चालकता का S.I. मात्रक है

(A) W m-1 K-1 (B) J m-1 K-1 (C) W m2 K-1 (D) J m2 K-1

उत्तर: (A) W m-1 K-1
ऊष्मा चालकता (Thermal Conductivity) किसी पदार्थ की ऊष्मा को संचालित करने की क्षमता का माप है। इसे प्रति इकाई समय (शक्ति, वाट W में), प्रति इकाई मोटाई (मीटर m), प्रति इकाई तापांतर (केल्विन K) में स्थानांतरित ऊष्मा के रूप में परिभाषित किया जाता है। इसलिए इसका S.I. मात्रक वाट प्रति मीटर प्रति केल्विन (W m-1 K-1) होता है।

प्रश्न 8. किसी पदार्थ के तापीय प्रसार गुणांक का मान निर्भर करता है

(A) पदार्थ की प्रारंभिक लंबाई पर (B) तापमान परिवर्तन पर (C) पदार्थ की प्रकृति पर (D) उपर्युक्त सभी पर

उत्तर: (C) पदार्थ की प्रकृति पर
किसी पदार्थ का तापीय प्रसार गुणांक (α, β, या γ) मूल रूप से उस पदार्थ की एक अभिलाक्षणिक गुण है। यह पदार्थ की आंतरिक संरचना और आणविक बलों पर निर्भर करता है। हालांकि प्रसार की वास्तविक मात्रा प्रारंभिक आयाम और तापमान परिवर्तन पर निर्भर करती है, लेकिन प्रसार गुणांक का मान स्वयं मुख्य रूप से पदार्थ की प्रकृति पर ही निर्भर करता है।

प्रश्न 9. किसी ठोस की लंबाई में प्रसार का गुणांक α, क्षेत्रफल प्रसार गुणांक β से किस प्रकार संबंधित है?

(A) β = α (B) β = 2α (C) β = 3α (D) β = α/2

उत्तर: (B) β = 2α
जब किसी ठोस का ताप बढ़ाया जाता है, तो उसके प्रत्येक आयाम (लंबाई, चौड़ाई, ऊँचाई) में वृद्धि होती है। क्षेत्रफल प्रसार गुणांक (β) लगभग दो बार लंबाई प्रसार गुणांक (α) के बराबर होता है, अर्थात β ≈ 2α। यह इसलिए क्योंकि क्षेत्रफल दो आयामों (जैसे लंबाई और चौड़ाई) का गुणनफल होता है और प्रत्येक आयाम α के अनुसार फैलता है।

प्रश्न 10. किसी ठोस के आयतन प्रसार गुणांक γ तथा लंबाई प्रसार गुणांक α में क्या संबंध है?

(A) γ = α (B) γ = 2α (C) γ = 3α (D) γ = α/3

उत्तर: (C) γ = 3α
आयतन प्रसार गुणांक (γ) लगभग तीन गुना लंबाई प्रसार गुणांक (α) के बराबर होता है, अर्थात γ ≈ 3α। यह संबंध इस तथ्य से आता है कि आयतन तीन आयामों (लंबाई, चौड़ाई, ऊँचाई) का गुणनफल है और तापमान बढ़ने पर प्रत्येक आयाम α के अनुसार फैलता है, जिससे कुल आयतन प्रसार लगभग 3α हो जाता है।

1. तापीय प्रसार क्या है? इसके विभिन्न प्रकार लिखिए।

जब किसी पदार्थ का ताप बढ़ाया जाता है, तो उसके आकार (लंबाई, क्षेत्रफल या आयतन) में होने वाली वृद्धि को तापीय प्रसार कहते हैं। तापीय प्रसार मुख्यतः तीन प्रकार का होता है:

1. रैखिक प्रसार: जब ताप बढ़ने पर किसी वस्तु की केवल लंबाई में वृद्धि होती है। उदाहरण: किसी धातु की छड़ का गर्म करने पर लंबा होना।
2. क्षेत्रीय प्रसार: जब ताप बढ़ने पर वस्तु के क्षेत्रफल (सतह) में वृद्धि होती है। उदाहरण: धातु की चादर का गर्म करने पर फैलना।
3. आयतन प्रसार: जब ताप बढ़ने पर वस्तु के आयतन में वृद्धि होती है। यह द्रवों और गैसों में मुख्य रूप से देखा जाता है। उदाहरण: गर्म करने पर पानी का फैलना।

2. रैखिक प्रसार गुणांक को परिभाषित कीजिए। इसका मात्रक लिखिए।

रैखिक प्रसार गुणांक किसी पदार्थ का वह गुण है जो बताता है कि उस पदार्थ की इकाई लंबाई प्रति एक डिग्री सेल्सियस ताप वृद्धि पर कितनी बढ़ जाती है।

इसे ग्रीक अक्षर α (अल्फा) से दर्शाया जाता है। गणितीय रूप में, यदि किसी वस्तु की प्रारंभिक लंबाई L₀ है और ताप में ΔT की वृद्धि पर लंबाई में ΔL की वृद्धि होती है, तो:
α = ΔL / (L₀ × ΔT)

इसका मात्रक प्रति डिग्री सेल्सियस (°C⁻¹) या प्रति केल्विन (K⁻¹) होता है।

3. क्षेत्रीय प्रसार गुणांक तथा आयतन प्रसार गुणांक में संबंध स्थापित कीजिए।

मान लीजिए किसी पदार्थ का रैखिक प्रसार गुणांक α है। यदि पदार्थ समदैशिक (सभी दिशाओं में समान गुण वाला) है, तो:

क्षेत्रीय प्रसार गुणांक (β) रैखिक प्रसार गुणांक का लगभग दोगुना होता है।
β ≈ 2α

आयतन प्रसार गुणांक (γ) रैखिक प्रसार गुणांक का लगभग तीन गुना होता है।
γ ≈ 3α

नोट: यह संबंध केवल छोटे ताप परिवर्तनों और समदैशिक पदार्थों के लिए ही सही होता है। बड़े तापान्तर या असमदैशिक पदार्थों (जैसे क्रिस्टल) के लिए यह संबध सटीक नहीं रहता।

4. जल का अनomalous प्रसार क्या है? समझाइए।

अधिकांश द्रव गर्म करने पर फैलते (आयतन बढ़ाते) हैं और ठंडा करने पर सिकुड़ते (आयतन घटाते) हैं। लेकिन जल का व्यवहार इससे अलग है, इसे ही जल का अनोमेलस प्रसार कहते हैं।

विशेष व्यवहार: जल को 0°C से 4°C तक गर्म करने पर, वह सिकुड़ता है (इसका आयतन घटता है और घनत्व बढ़ता है)। 4°C पर जल का घनत्व अधिकतम होता है। 4°C के बाद गर्म करने पर जल सामान्य तरीके से फैलने लगता है।

महत्व: इसी गुण के कारण सर्दियों में तालाबों की सतह जम जाती है, लेकिन नीचे पानी 4°C पर तरल बना रहता है, जिससे जलीय जीव जीवित रह पाते हैं।

5. निम्नलिखित में से कौन-सा पदार्थ सबसे अधिक तापीय प्रसार गुणांक रखता है?

(A) लोहा
(B) पीतल
(C) काँच
(D) रबर

उत्तर: (D) रबर

व्याख्या: रबर में तापीय प्रसार गुणांक सबसे अधिक होता है। यह धातुओं (लोहा, पीतल) और काँच की तुलना में गर्म करने पर बहुत अधिक फैलता है। रबर एक लचीला पॉलिमर है जिसके अणुओं के बीच बंधन कमजोर होते हैं, इसलिए ताप बढ़ने पर यह आसानी से फैल जाता है।

6. दो धातुओं के लिए रैखिक प्रसार गुणांक α1 तथा α2 हैं। यदि इनकी लंबाई समान है तो किसी निश्चित ताप वृद्धि के लिए इनकी लंबाई में परिवर्तन का अनुपात क्या होगा?

रैखिक प्रसार का सूत्र है: ΔL = α L₀ ΔT

यहाँ, दोनों धातुओं की प्रारंभिक लंबाई (L₀) समान है और ताप वृद्धि (ΔT) भी समान है।
पहली धातु के लिए लंबाई परिवर्तन: ΔL₁ = α₁ L₀ ΔT
दूसरी धातु के लिए लंबाई परिवर्तन: ΔL₂ = α₂ L₀ ΔT

इनका अनुपात होगा:
ΔL₁ / ΔL₂ = (α₁ L₀ ΔT) / (α₂ L₀ ΔT) = α₁ / α₂

अतः लंबाई परिवर्तन का अनुपात, उनके रैखिक प्रसार गुणांकों के अनुपात के बराबर होगा।

7. किसी गैस के लिए आयतन प्रसार गुणांक का मान क्या होता है?

आदर्श गैस के लिए, स्थिर दाब पर, आयतन प्रसार गुणांक का मान सभी गैसों के लिए समान होता है और यह ताप के प्रति बहुत संवेदनशील होता है।

स्थिर दाब पर, आदर्श गैस का आयतन प्रसार गुणांक:
γ = 1 / 273 ≈ 0.00366 °C⁻¹ (या K⁻¹)

दूसरे शब्दों में, 0°C पर किसी गैस का ताप 1°C बढ़ाने पर उसका आयतन उसके 0°C वाले आयतन का लगभग 1/273 वाँ भाग बढ़ जाता है। यह मान केल्विन पैमाने के प्रतिलोम (1/T) के बराबर होता है।

द्रव्य के तापीय गुण

प्रश्न 22. किसी पिण्ड का ताप 5 min में 80°C से 50°C हो जाता है। यदि परिवेश का ताप 20°C है, तो उस समय का परिकलन कीजिए जिसमें उसका ताप 60°C से 30°C हो जाएगा।

हल: दिया गया है:
पहली स्थिति:
पिण्ड का प्रारंभिक ताप, T1 = 80°C
पिण्ड का अंतिम ताप, T2 = 50°C
परिवेश का ताप, T0 = 20°C
लिया गया समय, t = 5 मिनट

न्यूटन के शीतलन नियम के अनुसार, शीतलन की दर परिवेश के साथ तापांतर के समानुपाती होती है।

औसत ताप = (80 + 50)/2 = 65°C
औसत तापांतर = 65°C - 20°C = 45°C
ताप में कमी = 80°C - 50°C = 30°C

न्यूटन का नियम: (ताप में कमी)/समय = K × (औसत तापांतर)
=> 30 / 5 = K × 45
=> 6 = K × 45
=> K = 6/45 = 2/15

दूसरी स्थिति:
पिण्ड का प्रारंभिक ताप, T'1 = 60°C
पिण्ड का अंतिम ताप, T'2 = 30°C
परिवेश का ताप, T0 = 20°C
लिया गया समय, t' = ? (ज्ञात करना है)

औसत ताप = (60 + 30)/2 = 45°C
औसत तापांतर = 45°C - 20°C = 25°C
ताप में कमी = 60°C - 30°C = 30°C

न्यूटन का नियम लगाने पर:
(ताप में कमी)/समय = K × (औसत तापांतर)
=> 30 / t' = (2/15) × 25
=> 30 / t' = 50/15
=> 30 / t' = 10/3

वज्र गुणन करने पर:
=> 10 × t' = 30 × 3
=> 10 × t' = 90
=> t' = 90/10
=> t' = 9 मिनट

अतः: पिण्ड का ताप 60°C से 30°C तक गिरने में 9 मिनट का समय लगेगा।

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