Bihar Board Class 11th Physics (भौतिक विज्ञान) Chapter 2 (मात्रक तथा मापन) Solutions

Here we have provided Solution for Chapter 2 (मात्रक तथा मापन) of Physics (भौतिक विज्ञान) subject for Class 11th students of Bihar Board of Secondary Education. There are various chapters in this Physics (भौतिक विज्ञान) such as Chapter 1 (भौतिक जगत), Chapter 2 (मात्रक तथा मापन), Chapter 3 (सरल रेखा में गति), Chapter 4 (समतल में गति), Chapter 5 (गणित के नियम), Chapter 6 (कार्य, उर्जा तथा शक्ति), Chapter 7 (कणों के नियम तथा घूर्णी गति), Chapter 8 (गुरुत्वाकर्षण), Chapter 9 (ठोसों के यांत्रिक गुण), Chapter 10 (तरलों के यांत्रिक गुण), Chapter 11 (द्रव्य के तापीय गुण), Chapter 12 (उष्मागतिकी), Chapter 13 (अणुगति सिद्धांत), Chapter 14 (दोलन) and Chapter 15 (तरंगें). Summary of the same is given below:

Board NameBihar Board of Secondary Education
ClassClass 11th
Content TypeSolution
Solution forClass 11th students
SubjectPhysics (भौतिक विज्ञान)
Chapter NameChapter 2 (मात्रक तथा मापन)
Total Number of Chapter in this Subject15

Studying Bihar Board Class 11th Physics (भौतिक विज्ञान) Chapter 2 (मात्रक तथा मापन) solution will help you higher marks in this subject but you need to follow best practices to achieve higher marks, which are given after solutions, go through them once.

Bihar Board Class 11th Physics (भौतिक विज्ञान) Chapter 2 (मात्रक तथा मापन) Solutions

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प्रश्न 1. SI मात्रकों में लम्बाई का मात्रक क्या है?

उत्तर: SI मात्रकों में लम्बाई का मूल मात्रक मीटर (m) है। एक मीटर को प्रकाश द्वारा निर्वात में 1/299,792,458 सेकंड के समय में तय की गई दूरी के रूप में परिभाषित किया गया है।

प्रश्न 2. किसी भौतिक राशि का मापन उसके ……….. के साथ तुलना करके किया जाता है।

उत्तर: किसी भौतिक राशि का मापन उसके मानक मात्रक (Standard Unit) के साथ तुलना करके किया जाता है। मात्रक एक निश्चित और सार्वभौमिक मान है जिसके साथ तुलना करके हम किसी राशि के परिमाण को संख्यात्मक रूप में व्यक्त करते हैं।

प्रश्न 3. मात्रकों की अन्तर्राष्ट्रीय पद्धति को क्या कहते हैं?

उत्तर: मात्रकों की अन्तर्राष्ट्रीय पद्धति को SI पद्धति कहते हैं, जहाँ SI का पूरा नाम Système International d'Unités (International System of Units) है। यह मापन की आधुनिक मीट्रिक प्रणाली है जो वैज्ञानिक और तकनीकी कार्यों के लिए वैश्विक मानक है।

प्रश्न 4. एक प्रकाश वर्ष क्या है?

उत्तर: एक प्रकाश वर्ष लम्बाई का एक बड़ा मात्रक है। यह वह दूरी है जो प्रकाश निर्वात में एक वर्ष में तय करता है। चूंकि प्रकाश की गति लगभग 3 × 108 m/s है, इसलिए एक प्रकाश वर्ष लगभग 9.46 × 1015 मीटर के बराबर होता है। इसका उपयोग खगोलीय दूरियाँ मापने के लिए किया जाता है।

प्रश्न 5. निम्नलिखित में से कौन-सा मात्रक मूल मात्रक नहीं है?

(A) किलोग्राम
(B) मीटर
(C) सेकण्ड
(D) न्यूटन

उत्तर: (D) न्यूटन
न्यूटन बल का व्युत्पन्न मात्रक है, जबकि किलोग्राम (द्रव्यमान), मीटर (लम्बाई) और सेकण्ड (समय) SI पद्धति के सात मूल मात्रकों में से हैं। न्यूटन को किलोग्राम, मीटर और सेकण्ड के संयोजन (kg m s-2) से व्यक्त किया जाता है।

प्रश्न 6. निम्नलिखित में से कौन-सा मात्रक लम्बाई का मात्रक नहीं है?

(A) एंगस्ट्रॉम
(B) फर्मी
(C) बार्न
(D) प्रकाश वर्ष

उत्तर: (C) बार्न
बार्न क्षेत्रफल का मात्रक है, जो 10-28 वर्ग मीटर के बराबर होता है और इसका उपयोग नाभिकीय भौतिकी में अनुप्रस्थ-काट क्षेत्रफल मापने के लिए किया जाता है। एंगस्ट्रॉम (10-10 m), फर्मी या फर्मीमीटर (10-15 m) और प्रकाश वर्ष (लगभग 9.46 × 1015 m) सभी लम्बाई के मात्रक हैं।

प्रश्न 7. निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म सही नहीं है?

(A) दाब - बार
(B) शक्ति - वाट
(C) बल - न्यूटन
(D) आवेश - कूलॉम

उत्तर: (A) दाब - बार
यह युग्म सही नहीं है क्योंकि दाब का SI मात्रक पास्कल (Pa) है, जो एक न्यूटन प्रति वर्ग मीटर (N/m²) के बराबर होता है। बार दाब का एक गैर-SI मात्रक है (1 बार = 105 Pa)। अन्य सभी युग्म सही हैं: शक्ति का मात्रक वाट, बल का न्यूटन और आवेश का मात्रक कूलॉम है।

प्रश्न 8. निम्नलिखित में से कौन-सा मात्रक ताप का मात्रक नहीं है?

(A) केल्विन
(B) कैलोरी
(C) डिग्री सेल्सियस
(D) जूल

उत्तर: (D) जूल
जूल ऊर्जा या कार्य का SI मात्रक है, ताप का नहीं। ताप के मात्रक केल्विन (SI मूल मात्रक), डिग्री सेल्सियस (सामान्य उपयोग) और कैलोरी (ऊष्मा ऊर्जा की मात्रा को व्यक्त करने वाला एक मात्रक, अक्सर ताप से जुड़ा हुआ) हैं।

प्रश्न 9. 1 पारसेक (Parsec) बराबर है

(A) 3.26 प्रकाश वर्ष
(B) 3.26 × 106 km
(C) 3.26 × 1012 km
(D) 3.26 × 1015 km

उत्तर: (A) 3.26 प्रकाश वर्ष
1 पारसेक (Parallax Second) वह दूरी है जिस पर खगोलीय वस्तु से देखने पर 1 खगोलीय इकाई (पृथ्वी-सूर्य की औसत दूरी) की चाप की लम्बाई 1 सेकंड के कोण के बराबर होती है। यह लगभग 3.26 प्रकाश वर्ष या 3.086 × 1016 मीटर के बराबर होता है।

प्रश्न 10. निम्नलिखित में से कौन-सा मात्रक समय का मात्रक नहीं है?

(A) सेकण्ड
(B) वर्ष
(C) प्रकाश वर्ष
(D) शताब्दी

उत्तर: (C) प्रकाश वर्ष
प्रकाश वर्ष, जैसा कि पहले बताया गया है, लम्बाई का एक बड़ा मात्रक है, समय का नहीं। सेकण्ड समय का SI मूल मात्रक है, जबकि वर्ष और शताब्दी समय के बड़े मात्रक हैं।

अध्याय 2: मात्रक तथा मापन

1. राशियों के मापन की क्या आवश्यकता है?

भौतिक राशियों के मापन की आवश्यकता निम्नलिखित कारणों से है:
  • मात्रात्मक विवरण: किसी भी भौतिक घटना का सटीक और संख्यात्मक विवरण देने के लिए मापन आवश्यक है। केवल गुणात्मक वर्णन (जैसे बड़ा, छोटा, तेज) पर्याप्त नहीं होता।
  • वैज्ञानिक संचार: वैज्ञानिक खोजों और सिद्धांतों को दुनिया भर के वैज्ञानिकों के साथ साझा करने और समझने के लिए एक मानकीकृत मापन प्रणाली जरूरी है।
  • प्रयोगों की पुष्टि: किसी सिद्धांत या परिकल्पना की जाँच प्रयोगों द्वारा की जाती है, और प्रयोगों के परिणाम मापन पर ही आधारित होते हैं।
  • प्रौद्योगिकी विकास: इंजीनियरिंग, चिकित्सा, निर्माण आदि सभी क्षेत्रों में सटीक मापन के बिना कोई भी डिजाइन या उपकरण बनाना संभव नहीं है।

2. मूल राशियाँ क्या हैं? उदाहरण सहित समझाइए।

वे राशियाँ जिन्हें अन्य राशियों के संदर्भ में परिभाषित नहीं किया जा सकता और जो स्वतंत्र होती हैं, मूल राशियाँ कहलाती हैं। इन राशियों के मात्रक मूल मात्रक होते हैं। अंतर्राष्ट्रीय मात्रक प्रणाली (SI) में सात मूल राशियाँ हैं।

उदाहरण:
  • लंबाई (Length): इसका मूल मात्रक मीटर (m) है। यह किसी वस्तु के आकार का माप है।
  • द्रव्यमान (Mass): इसका मूल मात्रक किलोग्राम (kg) है। यह किसी वस्तु में पदार्थ की मात्रा का माप है।
  • समय (Time): इसका मूल मात्रक सेकंड (s) है। यह घटनाओं के क्रम और अवधि का माप है।
अन्य सभी राशियाँ (जैसे वेग, बल, ऊर्जा) इन्हीं मूल राशियों के संयोजन से व्युत्पन्न की जाती हैं।

3. व्युत्पन्न राशियाँ क्या हैं? उदाहरण दीजिए।

वे राशियाँ जो एक या एक से अधिक मूल राशियों के गणितीय संयोजन (जैसे गुणा, भाग) से प्राप्त होती हैं, व्युत्पन्न राशियाँ कहलाती हैं। इनके मात्रक, मूल मात्रकों के संयोजन से बनते हैं और इन्हें व्युत्पन्न मात्रक कहते हैं।

उदाहरण:
  • वेग (Velocity): यह लंबाई और समय से व्युत्पन्न राशि है। वेग = विस्थापन / समय। इसका मात्रक मीटर/सेकंड (m/s) है।
  • बल (Force): यह द्रव्यमान और त्वरण से व्युत्पन्न है (न्यूटन के द्वितीय नियम से, F = m × a)। इसका मात्रक न्यूटन (N) है, जो kg m/s² के बराबर है।
  • क्षेत्रफल (Area): यह लंबाई का वर्ग है (लंबाई × लंबाई)। इसका मात्रक वर्ग मीटर (m²) है।

4. मात्रकों की अंतर्राष्ट्रीय पद्धति (SI) के मूल मात्रक कौन-कौन से हैं?

अंतर्राष्ट्रीय मात्रक प्रणाली (SI) में सात मूल मात्रक हैं, जो सात मूल राशियों के लिए परिभाषित किए गए हैं। ये हैं:
क्रमांक मूल राशि मूल मात्रक संकेत
1. लंबाई (Length) मीटर m
2. द्रव्यमान (Mass) किलोग्राम kg
3. समय (Time) सेकंड s
4. विद्युत धारा (Electric Current) एम्पियर A
5. तापमान (Thermodynamic Temperature) केल्विन K
6. पदार्थ की मात्रा (Amount of Substance) मोल mol
7. ज्योति तीव्रता (Luminous Intensity) कैंडेला cd

5. लम्बाई का मात्रक मीटर कैसे परिभाषित किया जाता है?

मीटर की परिभाषा समय के साथ वैज्ञानिक प्रगति के अनुसार बदली गई है। वर्तमान में (1983 से), मीटर को प्रकाश की गति के आधार पर परिभाषित किया जाता है:

"एक मीटर वह दूरी है जो निर्वात में प्रकाश द्वारा 1/299,792,458 सेकंड के समय अंतराल में तय की जाती है।"

इस परिभाषा के महत्वपूर्ण बिंदु:
  • यह परिभाषा अत्यंत स्थिर और सार्वभौमिक प्राकृतिक स्थिरांक (प्रकाश की गति) पर आधारित है।
  • प्रकाश की गति (c) का मान निश्चित है: c = 299,792,458 m/s.
  • इससे मीटर की परिभाषा किसी भौतिक वस्तु (जैसे पहले प्रयोग किए जाने वाले प्लैटिनम-इरीडियम मीटर के स्टैंडर्ड) पर निर्भर नहीं रह गई है और अधिक सटीक तथा पुनरुत्पादनीय है।

बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)

निर्देश: निम्नलिखित प्रश्नों में दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प चुनिए। प्रश्नों और विकल्पों के क्रम को बिल्कुल वैसा ही रखा गया है।

1. निम्नलिखित में से कौन-सी राशि मूल राशि नहीं है?

(A) लम्बाई
(B) द्रव्यमान
(C) बल
(D) समय

उत्तर: (C) बल

व्याख्या: लंबाई, द्रव्यमान और समय तीनों SI प्रणाली की मूल राशियाँ हैं। बल एक व्युत्पन्न राशि है, जो द्रव्यमान और त्वरण (F = m × a) के गुणनफल से प्राप्त होती है। इसलिए बल मूल राशि नहीं है।

2. प्रकाश वर्ष मात्रक है-

(A) समय का
(B) दूरी का
(C) चाल का
(D) आयु का

उत्तर: (B) दूरी का

व्याख्या: प्रकाश वर्ष समय का नहीं, बल्कि दूरी का एक बड़ा मात्रक है। यह वह दूरी है जो प्रकाश निर्वात में एक वर्ष में तय करता है। 1 प्रकाश वर्ष ≈ 9.46 × 10¹⁵ मीटर। इसका उपयोग खगोल विज्ञान में तारों और आकाशगंगाओं के बीच की विशाल दूरियों को मापने के लिए किया जाता है।

3. निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म सही सुमेलित है?

(A) दाब - न्यूटन
(B) बल - जूल
(C) कार्य - वाट
(D) शक्ति - जूल/सेकंड

उत्तर: (D) शक्ति - जूल/सेकंड

व्याख्या:
  • (A) दाब - न्यूटन: गलत है। दाब का मात्रक पास्कल (Pa) है, जो न्यूटन/मीटर² (N/m²) के बराबर होता है। केवल 'न्यूटन' बल का मात्रक है।
  • (B) बल - जूल: गलत है। बल का मात्रक न्यूटन (N) है। जूल ऊर्जा या कार्य का मात्रक है।
  • (C) कार्य - वाट: गलत है। कार्य का मात्रक जूल (J) है। वाट शक्ति का मात्रक है।
  • (D) शक्ति - जूल/सेकंड: सही है। शक्ति, कार्य करने की दर है। इसका मात्रक वाट (W) है, और 1 वाट = 1 जूल/सेकंड के बराबर होता है।

प्रश्न 1: राशि के मापन के लिए मात्रक की आवश्यकता क्यों होती है?

किसी भी भौतिक राशि को मापने के लिए एक मानक या संदर्भ की आवश्यकता होती है, जिसे मात्रक कहते हैं। मात्रक के बिना मापन संभव नहीं है क्योंकि यह हमें बताता है कि राशि की मात्रा कितनी है। उदाहरण के लिए, यदि हम कहें "लंबाई 5 है", तो यह अर्थहीन है। लेकिन यदि हम कहें "लंबाई 5 मीटर है", तो यह स्पष्ट हो जाता है। इस प्रकार, मात्रक मापन को मानकीकृत, सार्वभौमिक रूप से समझने योग्य और तुलना करने योग्य बनाता है।

प्रश्न 2: मात्रकों की अंतर्राष्ट्रीय पद्धति (SI) में सात मूल मात्रक कौन-कौन से हैं? उनके नाम एवं प्रतीक लिखिए।

अंतर्राष्ट्रीय मात्रक पद्धति (SI) में सात मूल मात्रक निम्नलिखित हैं, जिनसे अन्य सभी व्युत्पन्न मात्रक प्राप्त किए जाते हैं:
क्रमांक मूल राशि मूल मात्रक का नाम प्रतीक
1. लंबाई मीटर m
2. द्रव्यमान किलोग्राम kg
3. समय सेकंड s
4. विद्युत धारा एम्पियर A
5. तापमान केल्विन K
6. पदार्थ की मात्रा मोल mol
7. ज्योति तीव्रता कैंडेला cd

प्रश्न 3: लंबाई के मात्रक मीटर को कैसे परिभाषित किया जाता है?

मीटर की आधुनिक परिभाषा प्रकाश की गति पर आधारित है, जो एक सार्वभौमिक नियतांक है। वर्तमान में, 1 मीटर को उस पथ की लंबाई के रूप में परिभाषित किया जाता है, जो निर्वात में प्रकाश द्वारा 1/299,792,458 सेकंड के समय अंतराल में तय किया जाता है। यह परिभाषा अत्यंत सटीक और पुनरुत्पादनीय है, क्योंकि प्रकाश की गति एक अपरिवर्तनीय मूलभूत नियतांक है।

प्रश्न 4: 1 नैनोमीटर में कितने मीटर होते हैं?

उपसर्ग 'नैनो' का अर्थ है 10⁻⁹। अतः,

1 नैनोमीटर (nm) = 10⁻⁹ मीटर (m)

इसका अर्थ है कि एक मीटर में एक अरब (1,000,000,000) नैनोमीटर होते हैं। नैनोमीटर का उपयोग अणुओं, परमाणुओं और प्रकाश की तरंगदैर्ध्य जैसी अत्यंत सूक्ष्म लंबाइयों को मापने के लिए किया जाता है।

प्रश्न 5: परिशुद्धता और यथार्थता में क्या अंतर है?

परिशुद्धता और यथार्थता मापन की दो अलग-अलग अवधारणाएँ हैं:
यथार्थता (Accuracy): यह बताती है कि मापा गया मान वास्तविक या स्वीकृत मान के कितना निकट है। उच्च यथार्थता का अर्थ है माप का वास्तविक मान के बहुत करीब होना।

परिशुद्धता (Precision): यह बताती है कि एक ही राशि के बार-बार किए गए मापनों के परिणाम एक-दूसरे के कितने निकट हैं। उच्च परिशुद्धता का अर्थ है मापों में बहुत कम फैलाव या विचलन होना।
सरल शब्दों में: यथार्थता का संबंध सही मान से है, जबकि परिशुद्धता का संबंध मापों की संगति से है। एक माप जो यथार्थ है वह परिशुद्ध नहीं हो सकता और इसका विपरीत भी सत्य हो सकता है। आदर्श मापन वह है जो यथार्थ और परिशुद्ध दोनों हो।

प्रश्न 6: वैज्ञानिक संकेतन में 0.0000456 को कैसे लिखेंगे?

वैज्ञानिक संकेतन में किसी संख्या को a × 10b के रूप में लिखा जाता है, जहाँ 1 ≤ a < 10 और b एक पूर्णांक होता है।

0.0000456 को वैज्ञानिक संकेतन में लिखने के लिए, दशमलव बिंदु को दाईं ओर 5 स्थान स्थानांतरित करना पड़ता है ताकि हमें 4.56 प्राप्त हो। चूँकि मूल संख्या 1 से छोटी थी, इसलिए घातांक ऋणात्मक होगा।

0.0000456 = 4.56 × 10-5

प्रश्न 7: किसी भौतिक राशि के मापन में त्रुटि के मुख्य स्रोत क्या हैं?

किसी भौतिक राशि के मापन में त्रुटि के निम्नलिखित मुख्य स्रोत हो सकते हैं:
  1. यादृच्छिक त्रुटियाँ: ये अनियमित और अप्रत्याशित कारकों से उत्पन्न होती हैं, जैसे तापमान या दबाव में उतार-चढ़ाव, माप लेते समय थोड़ा अलग दृष्टिकोण, या उपकरण में हल्का कंपन। इन्हें बार-बार मापन करके और औसत निकालकर कम किया जा सकता है।
  2. क्रमबद्ध त्रुटियाँ: ये त्रुटियाँ एक निश्चित पैटर्न या दिशा में होती हैं। इनके कारण हैं:
    • उपकरणीय त्रुटि: मापन यंत्र का खराब कैलिब्रेशन या शून्यांक त्रुटि।
    • प्रेक्षण संबंधी त्रुटि: प्रयोगकर्ता की व्यक्तिगत आदत, जैसे स्केल पढ़ने में कोण से देखना (लंबन त्रुटि)।
    • परिवेशीय त्रुटि: प्रयोग के वातावरण की स्थितियों (ताप, आर्द्रता) में परिवर्तन।
  3. स्थूल त्रुटियाँ: ये बड़ी भूलों के कारण होती हैं, जैसे गलत स्केल पढ़ना, गलत गणना करना, या उपकरण का गलत उपयोग करना। इन्हें सावधानीपूर्वक कार्य करके समाप्त किया जा सकता है।

प्रश्न 8: बहुविकल्पीय प्रश्न: SI पद्धति में समय का मूल मात्रक क्या है?

(A) मिनट
(B) घंटा
(C) दिन
(D) सेकंड

व्याख्या: अंतर्राष्ट्रीय मात्रक पद्धति (SI) में समय का मूल मात्रक सेकंड (s) है। मिनट, घंटा और दिन समय के बड़े मात्रक हैं, लेकिन वे SI मूल मात्रक नहीं हैं। 1 मिनट = 60 सेकंड, 1 घंटा = 3600 सेकंड के रूप में परिभाषित किए जाते हैं।

प्रश्न 9: बहुविकल्पीय प्रश्न: निम्नलिखित में से कौन लंबाई का सबसे बड़ा मात्रक है?

(A) माइक्रोमीटर
(B) मिलीमीटर
(C) किलोमीटर
(D) सेंटीमीटर

व्याख्या: दिए गए विकल्पों में लंबाई के मात्रकों की तुलना करने पर:
  • 1 माइक्रोमीटर (μm) = 10⁻⁶ m
  • 1 मिलीमीटर (mm) = 10⁻³ m
  • 1 सेंटीमीटर (cm) = 10⁻² m
  • 1 किलोमीटर (km) = 10³ m
स्पष्ट है कि किलोमीटर सबसे बड़ा मात्रक है, क्योंकि 1 किलोमीटर में 1000 मीटर होते हैं।

प्रश्न 10: 5.0 cm त्रिज्या वाले एक वृत्त की परिधि ज्ञात कीजिए। (π = 3.14 लीजिए)

वृत्त की परिधि का सूत्र है: C = 2πr, जहाँ 'r' वृत्त की त्रिज्या है।

दिया गया है: त्रिज्या, r = 5.0 cm और π = 3.14

गणना:
C = 2 × 3.14 × 5.0 cm
C = 31.4 cm

अतः, 5.0 cm त्रिज्या वाले वृत्त की परिधि 31.4 cm है।
ध्यान दें: चूँकि त्रिज्या में दो सार्थक अंक (5.0) हैं और π का मान 3.14 (तीन सार्थक अंक) दिया गया है, इसलिए उत्तर में भी उचित सार्थक अंक रखने चाहिए। यहाँ उत्तर 31.4 cm (तीन सार्थक अंक) है।

प्रश्न 22. जिस प्रकार विज्ञान में परिशुद्ध मापन आवश्यक है, उसी प्रकार अल्पविकसित विचारों तथा सामान्य प्रेक्षणों को उपयोग करने वाली राशियों के स्थूल आकलन कर सकना भी उतना हई महत्वपूर्ण है। उन उपायों को सोचिए जिनके द्वारा आप निम्नलिखित का अनुमान लगा सकते हैं : (जहाँ अनुमान लगाना कठिन है वहाँ राशि की उपरिसीमा पता लगाने का प्रयास कीजिए)।

(क) मानसून की अवधि में भारत के ऊपर वर्षाधारी मेघों का कुल द्रव्यमान।
हल: मानसून के दौरान भारत में औसत वर्षा लगभग 10 सेमी (0.1 मीटर) मानी जा सकती है। भारत का कुल क्षेत्रफल लगभग 3.3 × 106 वर्ग किमी यानी 3.3 × 1012 वर्ग मीटर है।
वर्षा जल का कुल आयतन = क्षेत्रफल × वर्षा की ऊँचाई = (3.3 × 1012 m²) × (0.1 m) = 3.3 × 1011 घन मीटर।
पानी का घनत्व 1000 kg/m³ होता है।
अतः वर्षा जल का कुल द्रव्यमान = आयतन × घनत्व = (3.3 × 1011 m³) × (1000 kg/m³) = 3.3 × 1014 kg
यह द्रव्यमान ही वर्षाधारी मेघों के कुल द्रव्यमान का एक स्थूल अनुमान देता है।

(ख) किसी हाथी का द्रव्यमान।
हल: हाथी का द्रव्यमान आर्किमिडीज के सिद्धांत का उपयोग करके ज्ञात किया जा सकता है। एक बड़ी नाव लीजिए जिसका तल का क्षेत्रफल 'A' ज्ञात है। खाली नाव को पानी में तैरने दीजिए और उसके डूबे हुए भाग की गहराई (d₁) नाप लीजिए। अब हाथी को नाव पर चढ़ाइए और नाव के डूबे हुए भाग की नई गहराई (d₂) नापिए।
हाथी के कारण अतिरिक्त डूबी गहराई = d₂ - d₁।
हाथी द्वारा विस्थापित पानी का आयतन = A × (d₂ - d₁)।
पानी का घनत्व (ρ) लगभग 1000 kg/m³ है।
अतः हाथी का द्रव्यमान = विस्थापित पानी का द्रव्यमान = A × (d₂ - d₁) × ρ।

(ग) किसी तूफान की अवधि में वायु की चाल।
हल: वायु की चाल मापने का एक सरल तरीका है हीलियम से भरा एक गुब्बारा उपयोग करना। गुब्बारे को एक निश्चित ऊँचाई (जैसे किसी इमारत की छत) से छोड़िए। गुब्बारा हवा की दिशा में बहने लगेगा। एक निश्चित समय (मान लीजिए t सेकंड) के बाद गुब्बारे द्वारा तय की गई क्षैतिज दूरी (d) माप लीजिए।
वायु की चाल (v) = गुब्बारे द्वारा तय की गई क्षैतिज दूरी / लिया गया समय = d/t।

(घ) आपके सिर के बालों की संख्या।
हल: सिर के बालों की संख्या का अनुमान लगाने के लिए, पहले सिर के औसत क्षेत्रफल का पता लगाइए। मान लीजिए सिर की त्रिज्या लगभग 8 सेमी है।
सिर का सतही क्षेत्रफल = 4πr² ≈ 4 × 3.14 × (8 cm)² ≈ 800 वर्ग सेमी।
एक बाल के अनुप्रस्थ काट (cross-section) का क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए। बाल की मोटाई लगभग 5 × 10-3 सेमी मान सकते हैं।
एक बाल के अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल ≈ π × (मोटाई/2)² ≈ 3.14 × (2.5×10-3 cm)² ≈ 2 × 10-5 वर्ग सेमी।
बालों की कुल संख्या ≈ सिर का कुल क्षेत्रफल / एक बाल के अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल।
≈ (800 cm²) / (2 × 10-5 cm²) ≈ 4 × 107 (यानी लगभग 4 करोड़)।

(ङ) आपकी कक्षा के कमरे में वायु के अणुओं की संख्या।
हल: पहले कक्षा के कमरे का आयतन ज्ञात कीजिए। मान लीजिए कमरे की लंबाई (l), चौड़ाई (b) और ऊँचाई (h) क्रमशः 10 m, 8 m और 3 m हैं।
कमरे का आयतन V = l × b × h = 10 × 8 × 3 = 240 घन मीटर।
हम जानते हैं कि मानक ताप व दाब (STP) पर किसी गैस के एक मोल का आयतन 22.4 लीटर या 0.0224 घन मीटर होता है।
कमरे में वायु के मोलों की संख्या = कमरे का आयतन / एक मोल का आयतन = 240 m³ / 0.0224 m³/mol ≈ 10714 मोल।
एक मोल में अणुओं की संख्या आवोगाद्रो संख्या (NA ≈ 6.022 × 1023) के बराबर होती है।
अतः कमरे में वायु के अणुओं की कुल संख्या ≈ 10714 × 6.022 × 10236.45 × 1027

प्रश्न 23. सूर्य एक ऊष्म प्लाज्मा (आयनीकृत पदार्थ) है जिसके आन्तरिक क्रोड का ताप 107 K से अधिक और बाह्य पृष्ठ का ताप लगभग 6000 K है। इतने अधिक ताप पर कोई भी पदार्थ ठोस या तरल प्रावस्था में नहीं रह सकता। आपको सूर्य का द्रव्यमान घनत्व किस परिसर में होने की आशा है? क्या यह ठोसों, तरलों या गैसों के घनत्वों के परिसर में है? क्या आपका अनुमान सही है, इसकी जांच आप निम्नलिखित आंकड़ों के आधार पर कर सकते हैं : सूर्य का द्रव्यमान = 2.0 × 1030 kg : सूर्य की त्रिज्या = 7.0 × 108 m

हल:
सूर्य का द्रव्यमान (M) = 2.0 × 1030 kg
सूर्य की त्रिज्या (R) = 7.0 × 108 m
सूर्य का आयतन (V) = (4/3)πR³ = (4/3) × 3.14 × (7.0 × 108 m)³ ≈ 1.44 × 1027
सूर्य का औसत घनत्व (ρ) = द्रव्यमान / आयतन = (2.0 × 1030 kg) / (1.44 × 1027 m³) ≈ 1400 kg/m³ या 1.4 g/cm³
यह घनत्व पानी के घनत्व (1 g/cm³) के करीब है और कई ठोस पदार्थों/द्रवों के घनत्व की कोटि (order) में आता है, न कि गैसों के घनत्व (जो लगभग 0.001 g/cm³ की कोटि का होता है) की।
हालाँकि, सूर्य का पदार्थ अत्यधिक उच्च ताप के कारण ठोस या द्रव अवस्था में नहीं है, बल्कि आयनीकृत प्लाज्मा अवस्था में है। इसके इतने उच्च घनत्व का कारण सूर्य के विशाल गुरुत्वाकर्षण बल के कारण प्लाज्मा का अत्यधिक संपीडन है।

प्रश्न 24. जब बृहस्पति ग्रह पृथ्वी से 824.7 लाख किलोमीटर दूर होता है, तो इसके व्यास की कोणीय माप 35.72" का चाप है। बृहस्पति का व्यास परिकलित कीजिए।

हल:
पृथ्वी से बृहस्पति की दूरी (d) = 824.7 लाख km = 824.7 × 105 km = 8.247 × 108 km।
बृहस्पति का कोणीय व्यास (θ) = 35.72 सेकंड (arcsecond)।
हम जानते हैं कि 1 सेकंड = (1/3600) डिग्री और 1 डिग्री = π/180 रेडियन।
अतः, θ (रेडियन में) = 35.72 × (1/3600) × (π/180)
π ≈ 3.14 रखने पर, θ ≈ 35.72 × (1/206265) rad ≈ 1.732 × 10-4 rad (क्योंकि 1 rad ≈ 206265 सेकंड)।
किसी वस्तु का कोणीय व्यास (θ), उसके वास्तविक व्यास (D) और दूरी (d) से इस प्रकार संबंधित है: θ = D/d (जब θ बहुत छोटा हो)।
अतः, बृहस्पति का व्यास D = θ × d = (1.732 × 10-4 rad) × (8.247 × 108 km)
D ≈ 1.428 × 105 km या लगभग 142,800 km

विविध प्रश्नावली

प्रश्न 25. वर्षा के समय में कोई व्यक्ति चाल v के साथ तेजी से चला जा रहा है। उसे अपने छाते को टेढ़ा करके ऊर्ध्व के साथ θ कोण बनाना पड़ता है। कोई विद्यार्थी कोण θ व v के बीच निम्नलिखित सम्बन्ध व्युत्पन्न करता है :
tan θ = v
और वह इस सम्बन्ध के औचित्य की सीमा का पता लगाता है : जैसे कि आशा की जाती है यदि v → 0 तो θ → 0 (हम यह मान रहे हैं कि तेज हवा नहीं चल रही है और किसी खड़े व्यक्ति के लिए वर्षा ऊर्ध्वाधरत: पड़ रही है)। क्या आप सोचते हैं कि यह सम्बन्ध सही हो सकता है? यदि ऐसा नहीं है तो सही सम्बन्ध का अनुमान लगाइए।

हल:
दिया गया संबंध tan θ = v सही नहीं है क्योंकि इसके दोनों पक्षों की विमाएँ (dimensions) समान नहीं हैं।
बायाँ पक्ष tan θ एक विमाहीन (dimensionless) राशि है क्योंकि यह एक कोण का त्रिकोणमितीय फलन है।
दायाँ पक्ष v (चाल) की विमा [LT-1] है, जो विमाहीन नहीं है।
किसी भी भौतिक समीकरण के दोनों पक्षों की विमाएँ अवश्य समान होनी चाहिए।
सही संबंध प्राप्त करने के लिए, व्यक्ति की चाल (v) को वर्षा की ऊर्ध्वाधर चाल (मान लीजिए u) से विभाजित करना होगा ताकि दायाँ पक्ष भी विमाहीन हो जाए।
अतः सही संबंध होना चाहिए: tan θ = v / u
जहाँ u वर्षा की बूंदों की ऊर्ध्वाधर गति की चाल है। जब v = 0 (व्यक्ति स्थिर है), तो θ = 0 होगा, जो उम्मीद के अनुरूप है।

प्रश्न 26. यह दावा किया जाता है कि यदि बिना किसी बाधा के 100 वर्षों तक दो सीजियम घड़ियों को चलने दिया जाए, तो उनके समयों में केवल 0.02 s का अंतर हो सकता है। मानक सीजियम घड़ी द्वारा 1s के समय अंतराल को मापने में यथार्थता के लिए इसका क्या अभिप्राय है?

हल:
कुल समय (t) = 100 वर्ष।
सेकंड में व्यक्त करने पर: t = 100 वर्ष × 365 दिन/वर्ष × 24 घंटे/दिन × 3600 सेकंड/घंटा
t = 100 × 365 × 24 × 3600 s = 3.1536 × 109 s (लगभग)।
इस लंबी अवधि में दो घड़ियों के समय में अंतर (Δt) = 0.02 s।
घड़ी की यथार्थता या अनिश्चितता को प्रति सेकंड के संदर्भ में इस प्रकार व्यक्त किया जा सकता है:
1 सेकंड के मापन में अनिश्चितता = (0.02 s) / (3.1536 × 109 s) ≈ 6.34 × 10-12 s
इसका अभिप्राय है कि एक मानक सीजियम घड़ी 1 सेकंड के मापन में लगभग 10-11 सेकंड (दस अरबवें हिस्से के करीब) की अत्यधिक उच्च यथार्थता रखती है।

प्रश्न 27. एक सोडियम परमाणु का आमाप लगभग 2.5 Å मानते हुए उसके माध्य द्रव्यमान घनत्व का अनुमान लगाइए। (सोडियम के परमाण्वीय द्रव्यमान तथा आवोगाद्रो संख्या के ज्ञात मान प्रयोग किए जा सकते हैं।) इस घनत्व की क्रिस्टलीय प्रावस्था में सोडियम के घनत्व (970 kg m-3) के साथ तुलना कीजिए। क्या इन दोनों घनत्वों के परिमाण की कोटि समान है? यदि हाँ, तो क्यों?

हल:
सोडियम परमाणु का व्यास ≈ 2.5 Å = 2.5 × 10-10 m।
अतः त्रिज्या (r) = 1.25 × 10-10 m।
एक परमाणु का आयतन (V) = (4/3)πr³ = (4/3) × 3.14 × (1.25 × 10-10)³ ≈ 8.18 × 10-30 m³।
सोडियम का परमाण्वीय द्रव्यमान (M) = 23 g/mol = 0.023 kg/mol।
एक मोल में परमाणुओं की संख्या = आवोगाद्रो संख्या (NA) = 6.022 × 1023
अतः एक सोडियम परमाणु का द्रव्यमान (m) = M / NA = 0.023 kg/mol / 6.022 × 1023 mol-1 ≈ 3.82 × 10-26 kg।
परमाणु का माध्य द्रव्यमान घनत्व = एक परमाणु का द्रव्यमान / एक परमाणु का आयतन
ρपरमाणु = (3.82 × 10-26 kg) / (8.18 × 10-30 m³) ≈ 4.67 × 103 kg m-3 (लगभग 4670 kg m-3)।
क्रिस्टलीय प्रावस्था में सोडियम का घनत्व (ρक्रिस्टल) = 970 kg m-3
दोनों घनत्वों की कोटि (order of magnitude) देखें: ρपरमाणु ~ 103 kg m-3 और ρक्रिस्टल ~ 103 kg m-3
हाँ, दोनों घनत्वों के परिमाण की कोटि समान (103 kg m-3) है।
इसका कारण यह है कि ठोस अवस्था में परमाणु एक-दूसरे के बहुत निकट पैक होते हैं। हालाँकि, क्रिस्टल जालक (lattice) में परमाणुओं के बीच कुछ रिक्त स्थान होते हैं, जिसके कारण ठोस का आयतन केवल परमाणुओं के कुल आयतन से कुछ अधिक होता है। इसलिए ठोस का घनत्व (970 kg/m³) परमाणु के स्वयं के घनत्व (4670 kg/m³) से कम, लेकिन उसी कोटि का होता है।

प्रश्न 1. SI मात्रक पद्धति में लम्बाई का मात्रक है –

(A) मीटर (B) सेंटीमीटर
(C) फुट (D) गज

उत्तर – (A) मीटर

अंतर्राष्ट्रीय मात्रक पद्धति (SI) में लम्बाई का मूल मात्रक मीटर (m) है। इसे प्रकाश द्वारा निर्वात में एक निश्चित समय में तय की गई दूरी के आधार पर परिभाषित किया गया है। अन्य विकल्प जैसे सेंटीमीटर, फुट और गज SI मूल मात्रक नहीं हैं, बल्कि ये मीटर से प्राप्त इकाइयाँ या अन्य पद्धतियों की इकाइयाँ हैं।

प्रश्न 2. निम्नलिखित में कौन-सा मूल मात्रक नहीं है?

(A) किलोग्राम (B) न्यूटन
(C) सेकेण्ड (D) केल्विन

उत्तर – (B) न्यूटन

SI पद्धति में सात मूल मात्रक होते हैं: मीटर (लम्बाई), किलोग्राम (द्रव्यमान), सेकेण्ड (समय), एम्पियर (विद्युत धारा), केल्विन (ताप), मोल (पदार्थ की मात्रा) और कैण्डेला (ज्योति तीव्रता)। न्यूटन बल का व्युत्पन्न मात्रक है, जो किलोग्राम, मीटर और सेकेण्ड से मिलकर बनता है (1 N = 1 kg m/s²)। इसलिए, यह एक मूल मात्रक नहीं है।

प्रश्न 3. प्रकाश वर्ष मात्रक है –

(A) समय का (B) दूरी का
(C) आयु का (D) प्रकाश की चाल का

उत्तर – (B) दूरी का

प्रकाश वर्ष दूरी या लम्बाई मापन का एक विशाल मात्रक है। इसे एक वर्ष में प्रकाश द्वारा निर्वात में तय की गई दूरी के रूप में परिभाषित किया जाता है। चूँकि प्रकाश की चाल लगभग 3 × 10⁸ m/s है, इसलिए एक प्रकाश वर्ष लगभग 9.46 × 10¹⁵ मीटर के बराबर होता है। इसका उपयोग खगोलीय दूरियाँ जैसे तारों के बीच की दूरी मापने में किया जाता है।

प्रश्न 4. निम्नलिखित में कौन-सा युग्म सही सुमेलित नहीं है?

(A) दाब – न्यूटन/मीटर² (B) कार्य – जूल
(C) बल – न्यूटन (D) शक्ति – न्यूटन-सेकेण्ड

उत्तर – (D) शक्ति – न्यूटन-सेकेण्ड

विकल्प (D) का युग्म सही नहीं है। शक्ति का SI मात्रक वाट (W) होता है, जो एक जूल प्रति सेकेण्ड के बराबर है। न्यूटन-सेकेण्ड (N s) संवेग या आवेग का मात्रक है, शक्ति का नहीं। अन्य सभी युग्म सही हैं: दाब का मात्रक पास्कल (N/m²), कार्य का जूल और बल का न्यूटन होता है।

प्रश्न 5. 1 पारसेक (Parsec) बराबर है –

(A) 3.25 प्रकाश वर्ष (B) 3.25 × 10⁶ km
(C) 3.05 × 10¹³ km (D) 3.05 × 10¹⁶ m

उत्तर – (A) 3.25 प्रकाश वर्ष

पारसेक (pc) खगोल विज्ञान में प्रयुक्त दूरी का एक बड़ा मात्रक है। इसे पैरेलैक्स (लंबन) के एक सेकंड के कोण के आधार पर परिभाषित किया जाता है। एक पारसेक लगभग 3.26 प्रकाश वर्ष (सटीक रूप से 3.26156 प्रकाश वर्ष) के बराबर होता है। यह विकल्प (A) में दिए गए अनुमानित मान 3.25 प्रकाश वर्ष से मेल खाता है। अन्य विकल्पों में दूरी के मान सही नहीं हैं।

प्रश्न 6. निम्नलिखित में कौन-सा मात्रक ऊर्जा का मात्रक नहीं है?

(A) जूल (B) न्यूटन-मीटर
(C) किलोवाट-घंटा (D) वाट

उत्तर – (D) वाट

वाट (W) शक्ति का SI मात्रक है, न कि ऊर्जा का। शक्ति, ऊर्जा के उपभोग या रूपांतरण की दर है (1 W = 1 J/s)। जूल (J) ऊर्जा का SI मात्रक है। न्यूटन-मीटर (N m) भी जूल के बराबर ही होता है और कार्य या ऊर्जा को दर्शाता है। किलोवाट-घंटा (kWh) विद्युत ऊर्जा मापने का एक व्यावहारिक मात्रक है।

प्रश्न 7. 1 नैनोमीटर = ………. मीटर

(A) 10⁻⁹ (B) 10⁻¹⁰
(C) 10⁻⁸ (D) 10⁻¹²

उत्तर – (A) 10⁻⁹

उपसर्ग "नैनो" का अर्थ 10⁻⁹ होता है। इसलिए, 1 नैनोमीटर (1 nm) = 10⁻⁹ मीटर (m) होता है। नैनोमीटर का उपयोग अत्यंत सूक्ष्म दूरियाँ जैसे परमाणुओं, अणुओं के आकार या प्रकाश की तरंगदैर्ध्य मापने में किया जाता है।

प्रश्न 8. 1 इलेक्ट्रॉन वोल्ट (eV) बराबर है –

(A) 1.6 × 10⁻¹⁹ जूल (B) 3.2 × 10⁻¹⁹ जूल
(C) 1.6 × 10⁻¹⁶ जूल (D) 1.6 × 10⁻¹⁰ जूल

उत्तर – (A) 1.6 × 10⁻¹⁹ जूल

इलेक्ट्रॉन वोल्ट (eV) ऊर्जा का एक छोटा मात्रक है, जिसका उपयोग परमाणु और कण भौतिकी में होता है। इसे एक इलेक्ट्रॉन द्वारा एक वोल्ट के विभवांतर से त्वरित होने पर प्राप्त ऊर्जा के रूप में परिभाषित किया जाता है। इसका मान लगभग 1.602 × 10⁻¹⁹ जूल होता है। विकल्प (A) में दिया गया मान 1.6 × 10⁻¹⁹ जूल इसका सही अनुमानित मान है।

प्रश्न 9. किलोग्राम का मानक कहाँ रखा गया है?

(A) नेशनल फिजिकल लेबोरेटरी, दिल्ली (B) इंटरनेशनल ब्यूरो ऑफ वेट्स एंड मेजर्स, पेरिस
(C) राष्ट्रीय मानक संस्थान, कोलकाता (D) भारतीय मानक ब्यूरो, नई दिल्ली

उत्तर – (B) इंटरनेशनल ब्यूरो ऑफ वेट्स एंड मेजर्स, पेरिस

ऐतिहासिक रूप से, किलोग्राम के अंतर्राष्ट्रीय मानक (एक प्लेटिनम-इरीडियम मिश्र धातु का सिलेंडर) को इंटरनेशनल ब्यूरो ऑफ वेट्स एंड मेजर्स (BIPM) के मुख्यालय, सेवर, पेरिस (फ्रांस) में संरक्षित रखा गया था। हालाँकि, 2019 में SI मात्रकों की पुनर्परिभाषा के बाद, किलोग्राम को अब प्लांक स्थिरांक के आधार पर परिभाषित किया जाता है, न कि किसी भौतिक वस्तु के आधार पर।

प्रश्न 10. निम्नलिखित में कौन-सा मात्रक ताप का मात्रक नहीं है?

(A) केल्विन (B) डिग्री सेल्सियस
(C) जूल (D) डिग्री फारेनहाइट

उत्तर – (C) जूल

जूल ऊर्जा या कार्य का मात्रक है, न कि ताप का। ताप (थर्मोडायनामिक तापमान) का SI मात्रक केल्विन (K) है। डिग्री सेल्सियस (°C) और डिग्री फारेनहाइट (°F) तापमान की सामान्य इकाइयाँ हैं, लेकिन SI मूल मात्रक केल्विन है।

अध्याय 2: मात्रक तथा मापन

वैद्युत शीलता (ε₀) = 8.85 × 10⁻¹² N⁻¹ m⁻² C²?

इन मूल नियतांकों का उपयोग करके, हम एक ऐसी राशि 'x' की खोज कर सकते हैं जिसकी विमा समय की विमा [T] के समान हो। ऐसी ही एक राशि निम्नलिखित संयोजन से प्राप्त होती है:

x = (e⁶) / (16 π⁶ ε₀² mₚ mₑ² c³ G)

जहाँ,
e = इलेक्ट्रॉन का आवेश,
ε₀ = वैद्युत शीलता,
mₚ = प्रोटॉन का द्रव्यमान,
mₑ = इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान,
c = प्रकाश की चाल,
G = सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियतांक।

दाएँ पक्ष में प्रत्येक राशि की विमाएँ रखकर हम पाते हैं कि संपूर्ण व्यंजक की विमा [T] आती है, जो समय की विमा है।

सभी नियतांकों के संख्यात्मक मान रखने पर:

x = (1.6 × 10⁻¹⁹)⁶ / [16 × (3.14)⁶ × (8.854 × 10⁻¹²)² × (1.67 × 10⁻²⁷) × (9.1 × 10⁻³¹)² × (3 × 10⁸)³ × (6.67 × 10⁻¹¹)]

इस गणना का परिणाम लगभग 2.18 × 10¹⁷ सेकंड प्राप्त होता है।

इसे वर्षों में बदलने पर:
x ≈ 6.9 × 10⁹ वर्ष ≈ 10⁹ वर्ष ≈ 1 अरब वर्ष।

इस प्रकार, इस राशि का परिकलित मान ब्रह्मांड की अनुमानित आयु के काफी निकट है, जो एक रोचक संयोग है।

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