Bihar Board Class 11th Physics (भौतिक विज्ञान) Chapter 4 (समतल में गति) Solutions
Here we have provided Solution for Chapter 4 (समतल में गति) of Physics (भौतिक विज्ञान) subject for Class 11th students of Bihar Board of Secondary Education. There are various chapters in this Physics (भौतिक विज्ञान) such as Chapter 1 (भौतिक जगत), Chapter 2 (मात्रक तथा मापन), Chapter 3 (सरल रेखा में गति), Chapter 4 (समतल में गति), Chapter 5 (गणित के नियम), Chapter 6 (कार्य, उर्जा तथा शक्ति), Chapter 7 (कणों के नियम तथा घूर्णी गति), Chapter 8 (गुरुत्वाकर्षण), Chapter 9 (ठोसों के यांत्रिक गुण), Chapter 10 (तरलों के यांत्रिक गुण), Chapter 11 (द्रव्य के तापीय गुण), Chapter 12 (उष्मागतिकी), Chapter 13 (अणुगति सिद्धांत), Chapter 14 (दोलन) and Chapter 15 (तरंगें). Summary of the same is given below:
| Board Name | Bihar Board of Secondary Education |
| Class | Class 11th |
| Content Type | Solution |
| Solution for | Class 11th students |
| Subject | Physics (भौतिक विज्ञान) |
| Chapter Name | Chapter 4 (समतल में गति) |
| Total Number of Chapter in this Subject | 15 |
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Bihar Board Class 11th Physics (भौतिक विज्ञान) Chapter 4 (समतल में गति) Solutions
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प्रश्न 1. निम्नलिखित भौतिक राशियों में से बतलाइए कि कौन-सी सदिश हैं और कौन-सी ae आयतन, द्रव्यमान, चाल, त्वरण, घनत्व, मोल संख्या, वेग, कोणीय आवृत्ति, विस्थापन, य बेग?
हल: अदिश राशियाँ: आयतन, द्रव्यमान, चाल, घनत्व, मोल संख्या, कोणीय आवृत्ति।
सदिश राशियाँ: त्वरण, वेग, विस्थापन, कोणीय वेग।
प्रश्न 2. निम्नांकित सूची में से दो अदिश राशियों को छाँटिए
बल, कोणीय संवेग, कार्य, धारा, रैखिक संवेग, विद्युत क्षेत्र, औसत वेग, चुंबकीय आधूर्ण, आपेक्षिक वेग।
हल: कार्य तथा धारा अदिश राशियाँ हैं।
प्रश्न 3. निम्नलिखित सूची में से एकमात्र सदिश राशि को छाँटिए ताप, दाब, आवेग, समय, शक्ति पूरी पथ-लंबाई, ऊर्जा, गुरुत्वीय विभव, घर्षण गुणांक, आवेश।
हल: दी गई राशियों में से केवल आवेग सदिश राशि है।
प्रश्न 4. कारण सहित बताइए कि अदिश तथा सदिश राशियों के साथ क्या निम्नलिखित बीजगणितीय संक्रियाएँ अर्थपूर्ण हैं?
(a) दो अदिशों को जोड़ना,
(b) एक ही विमाओं के एक सदिश व एक अदिश को जोड़ना,
(c) एक सदिश को एक अदिश से गुणा करना,
(d) दो अदिशों का गुणन,
(e) दो सदिशों को जोड़ना
(f) एक सदिश के घटक की उसी सदिश से जोड़ना।
हल:
(a) हाँ, दो अदिशों को जोड़ना अर्थपूर्ण है, बशर्ते वे समान विमाओं (मात्रक) वाली हों। उदाहरण के लिए, 5 kg और 3 kg को जोड़कर 8 kg प्राप्त किया जा सकता है।
(b) नहीं, एक सदिश और एक अदिश को जोड़ना अर्थपूर्ण नहीं है। इनकी प्रकृति भिन्न होती है; एक में दिशा होती है, दूसरे में नहीं।
(c) हाँ, एक सदिश को एक अदिश से गुणा करना अर्थपूर्ण है। इससे प्राप्त नई राशि एक सदिश होती है जिसकी दिशा मूल सदिश के समान (धनात्मक अदिश के लिए) या विपरीत (ऋणात्मक अदिश के लिए) होती है। उदाहरण: संवेग (p = m v).
(d) हाँ, दो अदिशों का गुणनफल भी एक अदिश राशि होती है। उदाहरण: द्रव्यमान = घनत्व × आयतन।
(e) हाँ, दो सदिशों को जोड़ना अर्थपूर्ण है, बशर्ते वे समान विमाओं वाले हों। उदाहरण: दो बलों का परिणामी बल।
(f) हाँ, एक सदिश के घटक को उसी सदिश से जोड़ना अर्थपूर्ण है क्योंकि दोनों सदिश राशियाँ हैं और उनकी विमाएँ समान हैं।
प्रश्न 5. निम्नलिखित में से प्रत्येक कथन को ध्यानपूर्वक पढ़िए और कारण सहित बताइए कि यह सत्य है या असत्य
(a) किसी सदिश का परिमाण सदैव एक अदिश होता है,
(b) किस सदिश का प्रत्येक घटक सदैष अदिश होता है,
(c) किसी कण द्वारा चली गई पथ की कुल लम्बाई सदैव विस्थापन सदिश के परिमाण के बराबर होती है,
(d) किसी कण की औसत चाल (पथ तय करने में लगे समय द्वारा विभाजित कुल पथ-लंबाई) समय के समान-अंतराल में कण के औसत वेग के परिमाण से अधिक या उसके बराबर होती है।
(e) उन तीन सदिशों का योग जो एक समतल में नहीं हैं, कभी भी शून्य सदिश नहीं होता।
हल:
(a) सत्य: सदिश का परिमाण एक संख्यात्मक मान है जिसमें केवल परिमाण होता है, दिशा नहीं। अतः यह एक अदिश राशि है।
(b) असत्य: एक सदिश का प्रत्येक घटक (जैसे x-घटक, y-घटक) स्वयं एक सदिश नहीं, बल्कि एक अदिश संख्या होती है जो उस अक्ष पर सदिश के प्रक्षेप को दर्शाती है।
(c) असत्य: पथ की कुल लंबाई केवल तभी विस्थापन के परिमाण के बराबर होती है जब कण सरल रेखीय गति करता है और दिशा नहीं बदलता। यदि पथ वक्रीय है या कण वापस मुड़ता है, तो पथ की लंबाई विस्थापन के परिमाण से अधिक होगी।
(d) सत्य: औसत चाल = (कुल पथ लंबाई)/(कुल समय)। औसत वेग का परिमाण = (विस्थापन का परिमाण)/(कुल समय)। चूँकि कुल पथ लंबाई सदैव विस्थापन के परिमाण के बराबर या उससे अधिक होती है, इसलिए औसत चाल भी औसत वेग के परिमाण के बराबर या अधिक होगी।
(e) सत्य: तीन सदिशों का योग शून्य होने के लिए, उन्हें एक बंद त्रिभुज बनाना चाहिए, जो केवल तभी संभव है जब वे सभी एक ही समतल में हों। यदि वे एक समतल में नहीं हैं, तो वे कभी भी शून्य परिणामी नहीं दे सकते।
प्रश्न 6. निम्नलिखित असमिकाओं की ज्यामिति या किसी अन्य विधि द्वारा स्थापना कीजिए
(a) |a + b| ≤ |a| + |b|
(b) |a + b| ≥ | |a| – |b| |
(c) |a – b| ≤ |a| + |b|
(d) |a – b| ≥ | |a| – |b| |
इनमें समिका (समता) का चिह्न कब लागू होता है?
हल: इन असमिकाओं को त्रिभुज नियम का उपयोग करके सिद्ध किया जा सकता है। मान लीजिए दो सदिश a और b हैं।
(a) |a + b| ≤ |a| + |b|: त्रिभुज नियम के अनुसार, किसी त्रिभुज की एक भुजा की लंबाई शेष दो भुजाओं की लंबाइयों के योग से कम या बराबर होती है। यहाँ, सदिश a और b त्रिभुज की दो भुजाएँ हैं और a + b तीसरी भुजा है। समता का चिह्न तब लागू होता है जब सदिश a और b समान दिशा में हों (θ = 0°).
(b) |a + b| ≥ | |a| – |b| |: त्रिभुज नियम के अनुसार, किसी त्रिभुज की एक भुजा की लंबाई शेष दो भुजाओं की लंबाइयों के अंतर से अधिक या बराबर होती है। समता का चिह्न तब लागू होता है जब सदिश a और b विपरीत दिशा में हों (θ = 180°).
(c) |a – b| ≤ |a| + |b|: सदिश a – b को a + (–b) के रूप में लिखा जा सकता है। चूँकि |–b| = |b|, अतः भाग (a) के अनुसार, |a + (–b)| ≤ |a| + |–b| = |a| + |b|. समता का चिह्न तब लागू होता है जब a और –b समान दिशा में हों, अर्थात a और b विपरीत दिशा में हों (θ = 180°).
(d) |a – b| ≥ | |a| – |b| |: सदिश a – b को a + (–b) के रूप में लिखकर भाग (b) के नियम का प्रयोग करते हैं: |a + (–b)| ≥ | |a| – |–b| | = | |a| – |b| |. समता का चिह्न तब लागू होता है जब a और –b विपरीत दिशा में हों, अर्थात a और b समान दिशा में हों (θ = 0°).
प्रश्न 7. दिया है a + b + c + d = 0, नीचे दिए गए कथनों में से कौन-सा सही हैं?
(a) a, b, c तथा d में से प्रत्येक शून्य सदिश है,
(b) (a + c) का परिमाण (b + d) के परिमाण के बराबर है,
(c) a का परिमाण b, c तथा d के परिमाणों के योग से कभी भी अधिक नहीं हो सकता,
(d) यदि a तथा c संरेखीय नहीं हैं तो b तथा d संरेखीय होने चाहिए।
हल: दिया है: a + b + c + d = 0.
(a) गलत: यह आवश्यक नहीं है कि प्रत्येक सदिश शून्य हो। वे इस प्रकार हो सकते हैं कि उनका सदिश योग शून्य हो जाए।
(b) सही: दिए गए समीकरण को पुनर्व्यवस्थित करने पर: a + c = – (b + d). किसी सदिश और उसके ऋणात्मक सदिश का परिमाण समान होता है। अतः |a + c| = |–(b + d)| = |b + d|.
(c) सही: चूँकि a = – (b + c + d), इसलिए त्रिभुज असमिका के अनुसार, |a| = |–(b + c + d)| = |b + c + d| ≤ |b| + |c| + |d|. इसका अर्थ है कि a का परिमाण अन्य तीन सदिशों के परिमाणों के योग से कभी अधिक नहीं हो सकता।
(d) सही: यदि a और c संरेखीय नहीं हैं, तो वे एक समतल बनाते हैं। समीकरण a + b + c + d = 0 को b + d = – (a + c) के रूप में लिखा जा सकता है। चूँकि a + c भी उसी समतल में होगा, इसलिए –(a + c) भी उसी समतल में होगा। इसका तात्पर्य है कि b + d भी उसी समतल में होना चाहिए। इससे यह आवश्यक नहीं है कि b और d अलग-अलग संरेखीय हों, लेकिन उनका योग a+c के विपरीत दिशा में होगा। एक विशेष स्थिति में, यदि b और d स्वयं संरेखीय (एक ही रेखा के अनुदिश) हों, तो यह समीकरण संतुष्ट हो सकता है।
अध्याय 4: समतल में गति
1. निम्नलिखित में से कौन-सा समतल में गति का उदाहरण नहीं है?
व्याख्या: ऊँची कूद में एथलीट की गति एक त्रि-विमीय (3D) गति है क्योंकि एथलीट ऊपर की ओर उछलता है, आगे बढ़ता है और साथ ही शरीर को मोड़ता भी है। यह गति केवल एक समतल (2D) तक सीमित नहीं रहती। अन्य सभी विकल्प—क्रिकेट की गेंद, सड़क पर कार और सीधी सड़क पर साइकिल—मुख्य रूप से दो विमाओं (लंबाई और चौड़ाई) में गति करती हैं, इसलिए वे समतल में गति के उदाहरण हैं।
2. एक वस्तु समतल में गति कर रही है। इसके वेग के x-घटक में कोई परिवर्तन नहीं होता, पर y-घटक में परिवर्तन होता है। वस्तु की गति का प्रकार है:
व्याख्या: चूँकि वेग का x-घटक स्थिर है, इसका मतलब x-दिशा में कोई त्वरण नहीं है (ax = 0)। y-घटक में परिवर्तन हो रहा है, जिसका अर्थ है y-दिशा में त्वरण मौजूद है। प्रश्न में यह नहीं बताया गया कि y-दिशा में यह परिवर्तन कैसा है। यदि y-दिशा में वेग में परिवर्तन की दर स्थिर (नियत) है, तो y-दिशा में त्वरण भी स्थिर होगा। इस स्थिति में, वस्तु पर कुल त्वरण (जो केवल y-दिशा में है) स्थिर रहता है। इसलिए, गति एकसमान त्वरण के अंतर्गत होगी।
3. प्रक्षेप्य गति में अधिकतम ऊँचाई पर वेग तथा त्वरण की दिशा के बीच कोण होता है:
व्याख्या: प्रक्षेप्य गति में अधिकतम ऊँचाई पर, वस्तु का ऊर्ध्वाधर (y-दिशा) वेग शून्य हो जाता है, केवल क्षैतिज (x-दिशा) वेग शेष रहता है। इसलिए वेग की दिशा पूरी तरह क्षैतिज होती है। दूसरी ओर, त्वरण केवल गुरुत्वीय त्वरण (g) के कारण होता है, जिसकी दिशा हमेशा नीचे की ओर (ऊर्ध्वाधर नीचे) होती है। इस प्रकार, अधिकतम ऊँचाई पर वेग (क्षैतिज) और त्वरण (ऊर्ध्वाधर नीचे) की दिशाएँ एक-दूसरे के लंबवत (90° का कोण) होती हैं।
4. एकसमान वृत्तीय गति कर रही वस्तु के लिए निम्न में से कौन-सा कथन सत्य है?
व्याख्या: एकसमान वृत्तीय गति में वस्तु की चाल (speed) नियत रहती है, लेकिन वेग (velocity) की दिशा लगातार बदलती रहती है, इसलिए वेग स्थिर नहीं होता (A गलत)। त्वरण (अभिकेंद्रीय त्वरण) का परिमाण स्थिर होता है, लेकिन उसकी दिशा भी लगातार केंद्र की ओर बदलती रहती है, इसलिए त्वरण भी स्थिर नहीं होता (B गलत)। चूँकि चाल नियत है, इसलिए गतिज ऊर्जा (1/2 mv²) भी नियत रहती है (C सही)। संवेग (mv) एक सदिश राशि है और वेग के बदलने के साथ यह भी बदलता रहता है, इसलिए संवेग स्थिर नहीं रहता (D गलत)।
5. एक कार 10 m त्रिज्या के वृत्तीय मोड़ पर 2 m/s की एकसमान चाल से गति कर रही है। इसका त्वरण होगा:
व्याख्या: एकसमान वृत्तीय गति में, अभिकेंद्रीय त्वरण का सूत्र है: a = v² / r
यहाँ, वस्तु की चाल (v) = 2 m/s, वृत्त की त्रिज्या (r) = 10 m
त्वरण (a) = (2)² / 10 = 4 / 10 = 0.4 m/s²
यह त्वरण वृत्त के केंद्र की ओर कार्य करता है।
प्रश्न 1. सदिश राशि किसे कहते हैं? उदाहरण दीजिए।
सदिश राशि वह भौतिक राशि है जिसे व्यक्त करने के लिए परिमाण (मात्रा) के साथ-साथ दिशा की भी आवश्यकता होती है। इन्हें तीर के चिह्न (→) से दर्शाया जाता है।
उदाहरण: विस्थापन, वेग, त्वरण, बल, संवेग आदि।
प्रश्न 2. निम्नलिखित में कौन-सी राशि सदिश है?
इस प्रश्न के लिए विकल्प नहीं दिए गए हैं। सामान्यतः, सदिश राशियों की पहचान इस प्रकार की जा सकती है:
- सदिश राशियाँ: वेग, बल, विस्थापन, त्वरण, संवेग, विद्युत क्षेत्र की तीव्रता।
- अदिश राशियाँ: दूरी, द्रव्यमान, समय, तापमान, ऊर्जा, कार्य।
यदि कोई विशिष्ट विकल्प दिया होता, तो उसमें से सदिश राशि वाले विकल्प को चुनना होता।
प्रश्न 3. त्वरण से आप क्या समझते हैं? इसका मात्रक लिखिए।
त्वरण किसी वस्तु के वेग में परिवर्तन की दर को कहते हैं। दूसरे शब्दों में, समय के साथ वेग में होने वाले परिवर्तन को त्वरण कहा जाता है। यह एक सदिश राशि है।
सूत्र: औसत त्वरण = वेग में परिवर्तन / समय अंतराल
गणितीय रूप में, \( a_{av} = \frac{\Delta v}{\Delta t} = \frac{v_f - v_i}{t} \)
मात्रक: एसआई पद्धति में त्वरण का मात्रक मीटर प्रति सेकंड वर्ग (m/s² या ms⁻²) होता है।
प्रश्न 4. एकसमान त्वरित गति के लिए गति के समीकरण लिखिए।
जब कोई वस्तु एक सरल रेखा में चलते हुए नियत (constant) त्वरण से गति करती है, तो उसकी गति को एकसमान त्वरित गति कहते हैं। इसके लिए गति के तीन मुख्य समीकरण हैं:
| समीकरण | सूत्र | जहाँ, |
|---|---|---|
| पहला समीकरण | \( v = u + at \) | v = अंतिम वेग, u = प्रारंभिक वेग, a = त्वरण, t = समय |
| दूसरा समीकरण | \( s = ut + \frac{1}{2}at^2 \) | s = t समय में तय की गई दूरी |
| तीसरा समीकरण | \( v^2 = u^2 + 2as \) | यह समय (t) से स्वतंत्र समीकरण है। |
प्रश्न 5. प्रक्षेप्य गति क्या है?
प्रक्षेप्य गति वह गति है जब कोई वस्तु (प्रक्षेप्य) किसी कोण पर फेंके जाने के बाद केवल गुरुत्वीय त्वरण के प्रभाव में वक्राकार पथ पर चलती है। इसमें वायु का प्रतिरोध नगण्य माना जाता है।
इस गति को दो स्वतंत्र गतियों के संयोजन के रूप में देखा जा सकता है:
- क्षैतिज गति: नियत वेग से, क्योंकि क्षैतिज दिशा में कोई त्वरण नहीं होता (यदि वायु प्रतिरोध न हो)।
- ऊर्ध्वाधर गति: एकसमान त्वरण (g = 9.8 m/s², नीचे की ओर) के साथ।
उदाहरण: क्रिकेट की गेंद का फेंका जाना, तोप से गोला दागना, ऊँची कूद में एथलीट की गति।
प्रश्न 6. कोणीय वेग से आप क्या समझते हैं?
कोणीय वेग किसी वस्तु के कोणीय विस्थापन में परिवर्तन की दर को कहते हैं। जब कोई वस्तु किसी निश्चित अक्ष के परितः वृत्तीय पथ पर घूमती है, तो उसके घूर्णन की तीव्रता को कोणीय वेग से मापा जाता है।
परिभाषा: इकाई समय में किए गए कोणीय विस्थापन को कोणीय वेग कहते हैं।
सूत्र: औसत कोणीय वेग, \( \omega_{av} = \frac{\Delta \theta}{\Delta t} \)
तात्क्षणिक कोणीय वेग, \( \omega = \frac{d\theta}{dt} \)
मात्रक: रेडियन प्रति सेकंड (rad/s)।
सदिश प्रकृति: यह एक सदिश राशि है। इसकी दिशा दाएँ हाथ के नियम से निर्धारित होती है।
रेखीय वेग से संबंध: \( v = r \omega \), जहाँ r वृत्तीय पथ की त्रिज्या है।
प्रश्न 7. न्यूटन के गति के प्रथम नियम को लिखिए और समझाइए।
न्यूटन का गति का प्रथम नियम (जड़त्व का नियम):
कथन: "यदि कोई वस्तु विरामावस्था में है, तो वह विरामावस्था में ही रहेगी, और यदि वह एकसमान वेग से सरल रेखा में गतिमान है, तो वह उसी अवस्था में गतिमान रहेगी, जब तक कि उस पर कोई बाह्य असंतुलित बल न लगाया जाए।"
स्पष्टीकरण:
- यह नियम वस्तु की जड़त्व (Inertia) की अवधारणा को परिभाषित करता है। जड़त्व वह गुण है जिसके कारण कोई वस्तु अपनी विराम या गति की अवस्था में परिवर्तन का विरोध करती है।
- उदाहरण के लिए, अचानक ब्रेक लगाने पर यात्री आगे की ओर झटका खाते हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि शरीर अपनी गतिमान अवस्था को बनाए रखना चाहता है (जड़त्व)।
- इस नियम से बल की गुणात्मक परिभाषा भी मिलती है: बल वह कारक है जो किसी वस्तु की विराम या गति की अवस्था में परिवर्तन लाता है।
प्रश्न 8. संवेग संरक्षण का नियम लिखिए।
संवेग संरक्षण का नियम:
कथन: "यदि किसी निकाय (वस्तुओं के समूह) पर लगने वाला कुल बाह्य बल शून्य है, तो उस निकाय का कुल रेखीय संवेग संरक्षित रहता है।"
गणितीय रूप में, यदि \( \vec{F}_{ext} = 0 \), तो \( \vec{p}_{total} = \text{नियत (constant)} \)
या \( m_1\vec{u}_1 + m_2\vec{u}_2 = m_1\vec{v}_1 + m_2\vec{v}_2 \)
स्पष्टीकरण:
- यह नियम न्यूटन के गति के द्वितीय एवं तृतीय नियमों से प्राप्त किया जा सकता है।
- यह एक मौलिक संरक्षण नियम है और यह ब्रह्मांड के हर भाग में लागू होता है, चाहे वस्तुओं के बीच टक्कर हो, विस्फोट हो या कोई अन्य अंतःक्रिया।
- उदाहरण:
- बंदूक से गोली दागने पर, गोली आगे बढ़ती है और बंदूक पीछे की ओर धक्का देती है (प्रतिक्षेप)। दोनों का कुल संवेग शूटिंग से पहले (शून्य) और बाद में (शून्य) समान रहता है।
- रॉकेट का प्रणोद (Propulsion) भी इसी नियम पर कार्य करता है।
प्रश्न 9. बल आघूर्ण से आप क्या समझते हैं?
बल आघूर्ण किसी बल के घूर्णन प्रभाव की माप है। यह बताता है कि कोई बल किसी वस्तु को किसी अक्ष के परितः कितनी "मुड़ने" या "घुमाने" की क्षमता रखता है।
सूत्र: बल आघूर्ण (τ) = बल (F) × बल के कार्य रेखा एवं घूर्णन अक्ष के बीच की लंबवत दूरी (d)
या, \( \vec{\tau} = \vec{r} \times \vec{F} \)
जहाँ \( \vec{r} \) घूर्णन अक्ष से बल के लगाव बिंदु का स्थिति सदिश है।
मात्रक: न्यूटन-मीटर (Nm)।
सदिश प्रकृति: यह एक सदिश राशि है। इसकी दिशा दाएँ हाथ के नियम या स्क्रू नियम से निर्धारित होती है।
उदाहरण:
- दरवाजे का कब्जा (हिंज) दरवाजे के किनारे पर लगा होता है ताकि कम से कम बल लगाकर अधिकतम बल आघूर्ण (दूरी अधिक होने के कारण) उत्पन्न किया जा सके और दरवाजा आसानी से खुल जाए।
- पेंचकस से पेंच कसना या खोलना।
प्रश्न 10. गुरुत्वाकर्षण नियतांक से आप क्या समझते हैं?
गुरुत्वाकर्षण नियतांक (G) न्यूटन के सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण के नियम में आने वाला एक सार्वत्रिक (universal) नियतांक है।
परिभाषा: गुरुत्वाकर्षण नियतांक संख्यात्मक रूप से उस आकर्षण बल के बराबर होता है जो एकांक द्रव्यमान की दो वस्तुएँ, एकांक दूरी पर रहने पर, एक-दूसरे पर लगाती हैं।
न्यूटन के नियम के अनुसार: \( F = G \frac{m_1 m_2}{r^2} \)
यदि \( m_1 = m_2 = 1 \text{ kg} \) और \( r = 1 \text{ m} \), तो \( F = G \).
मान: \( G = 6.67430 \times 10^{-11} \ \text{N m}^2 \text{kg}^{-2} \)
महत्व:
- यह एक सार्वत्रिक नियतांक है, अर्थात् ब्रह्मांड में हर जगह इसका मान समान रहता है।
- इसका मान बहुत छोटा है, इसीलिए हमें रोजमर्रा की वस्तुओं के बीच गुरुत्वाकर्षण बल महसूस नहीं होता।
- इसकी सहायता से पृथ्वी के द्रव्यमान की गणना की जा सकती है।
प्रश्न 23. किसी दिकस्थान पर एक स्वेच्छ गति के लिए निम्नलिखित सम्बन्ध में से कौन-सा सत्य है? (0) Voten = SICH) + एक)... 9) स्का + 7४७) - 7(४)/09 - १) () vit) = v(0) + at (a) r(t) = r(O) + v(O)t + sat? (©) 8 stag = [v(te) — vety (te - 4) यहाँ 'औसत' का आशय समय अंतराल ४ व ६ से सम्बन्धित भौतिक राशि के औसत मान से है।
हल: सम्बन्ध (a) तथा (c) किसी भी स्वेच्छ गति (मनमानी गति) के लिए सदैव सत्य हैं। सम्बन्ध (b), (d) और (e) केवल विशेष परिस्थितियों में ही सत्य होते हैं।
- (a) Vऔसत = [r(t2) - r(t1)] / (t2 - t1) सत्य है, क्योंकि यह औसत वेग की मूल परिभाषा है जो किसी भी प्रकार की गति पर लागू होती है।
- (c) aऔसत = [v(t2) - v(t1)] / (t2 - t1) सत्य है, क्योंकि यह औसत त्वरण की मूल परिभाषा है जो किसी भी गति के लिए मान्य है।
- (b) v(t) = v(0) + at असत्य है, क्योंकि यह समीकरण केवल तभी सही है जब त्वरण (a) नियत (constant) हो। स्वेच्छ गति में त्वरण बदल सकता है।
- (d) r(t) = r(0) + v(0)t + (1/2)at2 असत्य है, क्योंकि यह भी केवल नियत त्वरण की स्थिति में ही मान्य है।
- (e) Vऔसत = [v(t1) + v(t2)] / 2 असत्य है, क्योंकि यह संबंध केवल तभी सही होता है जब त्वरण समय के साथ नियत रहे। स्वेच्छ गति में यह जरूरी नहीं है।
प्रश्न 24. निम्नलिखित में से प्रत्येक कथन को ध्यानर्पूक पढ़िए तथा कारण एवं उदाहरण सहित बताएए कि क्या यह सत्य है या असत्य? अदिश वह राशि है जो (७) किसी प्रक्रिया में संरक्षित रहती है, (0) कभी ऋणात्मक नहीं होती, (©) बिमाहीन होती है, (9) किसी स्थान पर एक बिंदु से दूसरे बिंदु के बीच नहीं बदलती, (०) उन सभी दर्शकों के लिए एक ही मान रखती है चाहे अक्षों से उनके अभिविन्यास भिन्न-भिन्न क्यों न हों।
हल:
(a) असत्य। किसी राशि का अदिश होना और संरक्षित होना दो अलग-अलग गुण हैं। एक अदिश राशि प्रक्रिया में संरक्षित भी हो सकती है और नहीं भी। उदाहरण: ऊर्जा एक अदिश राशि है, लेकिन घर्षणयुक्त प्रक्रिया में यह संरक्षित नहीं रहती (ऊष्मा के रूप में क्षय हो जाती है)।
(b) असत्य। अदिश राशि ऋणात्मक हो सकती है। उदाहरण: विद्युत विभव (Electric Potential), तापमान (जैसे -10°C), संभावित ऊर्जा (गुरुत्वाकर्षण स्थितिज ऊर्जा संदर्भ बिंदु के नीचे ऋणात्मक होती है)।
(c) असत्य। अदिश राशियों की विमाएँ (dimensions) हो सकती हैं। उदाहरण: द्रव्यमान [M], चाल [LT-1], घनत्व [ML-3]। बिमाहीन अदिश भी होते हैं, जैसे कोण, सापेक्षिक घनत्व।
(d) असत्य। अदिश राशि का मान स्थान के साथ बदल सकता है। उदाहरण: कमरे में एक कोने और दूसरे कोने का तापमान अलग-अलग हो सकता है। वायुमंडल में दाब और तापमान ऊँचाई के साथ बदलते हैं।
(e) सत्य। यह अदिश राशि की मुख्य पहचान है। अदिश राशि का मान निर्देश तंत्र (frame of reference) के अक्षों के घूमने या अभिविन्यास बदलने पर नहीं बदलता। उदाहरण: किसी वस्तु का द्रव्यमान, उसका तापमान, उसकी चाल (सदिश नहीं) सभी पर्यवेक्षकों के लिए समान होते हैं चाहे वे किसी भी दिशा में देख रहे हों।
प्रश्न 25. कोई बायुयान पृथ्वी से 3400 | की ऊँचाई पर उड़ रहा है। यदि पृथ्वी पर किसी अवलोकन बिंदु पर वायुयान की 10 & की दूरी की स्थितियाँ 30" का कोण बनाती हैं तो वायुयान की चाल क्या होगी?
हल:
मान लीजिए अवलोकन बिंदु O है। वायुयान पहले A पर और 10 सेकंड बाद B पर पहुँचता है।
दिया है:
ऊँचाई, OA = 3400 m
कोण, ∠AOB = 30°
समय अंतराल, t = 10 s
समकोण त्रिभुज OAB में,
tan 30° = लम्ब / आधार = AB / OA
AB = OA × tan 30°
AB = 3400 × (1/√3)
AB = 3400 / 1.732 ≈ 1963 m
यह दूरी AB वायुयान ने 10 सेकंड में तय की है।
वायुयान की चाल = तय दूरी / समय = 1963 m / 10 s = 196.3 m/s
अतः वायुयान की चाल लगभग 196.3 m/s है।
प्रश्न 26. किसी सदिश में परिमाण व दिशा दोनों होते हैं। क्या दिक्स्थान में इसकी कोई स्थिति होती है? क्या यह समय के साथ परिवर्तित हो सकता है। क्या दिकस्थान में भिन्न स्थानों पर दो बराबर सदिशों ० व ७ का समान भौतिक प्रभाव अवश्य पड़ेगा? अपने उत्तर के समर्थन में उदाहरण उदाहरण दीजिए।
हल:
1. क्या सदिश की दिक्स्थान में कोई स्थिति होती है?
सामान्यतः नहीं। अधिकांश सदिशों (जैसे वेग, बल, त्वरण) को उनकी दिशा और परिमाण बनाए रखते हुए समान्तर रूप से खिसकाया (translate) जा सकता है। इन्हें मुक्त सदिश (Free Vectors) कहते हैं। हालाँकि, स्थिति सदिश (Position Vector) एक अपवाद है, जिसकी एक निश्चित प्रारंभिक बिंदु (मूल बिंदु) के सापेक्ष स्थिति होती है।
2. क्या सदिश समय के साथ परिवर्तित हो सकता है?
हाँ। सदिश समय के साथ बदल सकते हैं। उदाहरण: एक वृत्तीय पथ पर चलती हुई वस्तु का वेग सदिश लगातार दिशा बदलता रहता है, भले ही उसकी चाल (परिमाण) नियत हो। एक त्वरित वस्तु का वेग सदिश परिमाण और दिशा दोनों में बदल सकता है।
3. क्या भिन्न स्थानों पर समान सदिशों का भौतिक प्रभाव भी समान होगा?
आवश्यक नहीं है। दो बराबर बल सदिश (समान परिमाण और दिशा) अलग-अलग स्थानों पर लगाए जाने पर अलग-अलग प्रभाव डाल सकते हैं।
उदाहरण: मान लीजिए 10 N का एक बल सदिश है।
- यदि यह बल पृथ्वी की सतह पर रखी एक वस्तु पर लगे, तो वह एक निश्चित त्वरण उत्पन्न करेगा।
- लेकिन यदि वही बल सदिश चंद्रमा की सतह पर रखी उसी वस्तु पर लगे, तो उत्पन्न त्वरण अलग होगा क्योंकि गुरुत्वाकर्षण g का मान अलग है। इस प्रकार भौतिक प्रभाव (त्वरण) अलग होगा।
प्रश्न 27. किसी सदिश में परिणाम व दिशा दोनों होते हैं। क्या इसका यह अर्थ है कि कोई राशि जिसका परिमाण व दिशा हो, वह अवश्य ही सदिश होगी? किसी वस्तु के घूर्णन की व्याख्या घूर्णन-अक्ष की दिशा और अक्ष के परितः घूर्णन-कोण द्वारा की जा सकती है। क्या इसका यह अर्थ है कि कोई भी घूर्णन एक सदिश है?
हल:
1. क्या परिमाण और दिशा वाली हर राशि सदिश है?
नहीं। किसी राशि के सदिश होने के लिए केवल परिमाण और दिशा होना पर्याप्त नहीं है। उसे सदिश योग के नियमों (समान्तर चतुर्भुज नियम या त्रिभुज नियम) का पालन भी करना चाहिए।
उदाहरण: किसी वस्तु का एक निश्चित कोण से घूर्णन (जैसे 30°) में परिमाण (30°) और दिशा (घूर्णन अक्ष) होती है, लेकिन दो घूर्णनों को सदिश की तरह जोड़ने पर वह क्रमविनिमेय नियम का पालन नहीं करते (A+B ≠ B+A), इसलिए यह सदिश नहीं है।
2. क्या कोई भी घूर्णन एक सदिश है?
नहीं। सीमित (finite) घूर्णन सदिश नहीं होते क्योंकि वे सदिश योग के नियमों का पालन नहीं करते।
हालाँकि, अतिसूक्ष्म घूर्णन (Infinitesimal Rotation) एक सदिश होता है। जब घूर्णन का कोण बहुत छोटा (dθ) होता है, तो उन्हें सदिश की तरह जोड़ा जा सकता है और वे सभी सदिश नियमों का पालन करते हैं। इसीलिए कोणीय वेग (ω) और कोणीय त्वरण (α), जो अतिसूक्ष्म घूर्णन से संबंधित हैं, सदिश राशियाँ हैं।
प्रश्न 28. क्या आप निम्नलिखित के साथ कोई सदिश संबद्ध कर सकते हैं (४) किसी लूप में मोड़ी गई तार की लंबाई, (७) किसी समतल क्षेत्र, (0) किसी गोले के साथ? व्याख्या कीजिए।
हल:
(a) किसी लूप में मोड़ी गई तार की लंबाई:
नहीं। लम्बाई एक अदिश राशि है। इसका केवल परिमाण (मीटर में मान) होता है, कोई विशिष्ट दिशा नहीं होती। इसलिए, हम इसके साथ कोई सदिश संबद्ध नहीं कर सकते।
(b) किसी समतल क्षेत्र के साथ:
हाँ। हम किसी समतल पृष्ठ के क्षेत्रफल के साथ एक सदिश संबद्ध कर सकते हैं, जिसे क्षेत्रफल सदिश (Area Vector) कहते हैं।
परिमाण: पृष्ठ का क्षेत्रफल।
दिशा: पृष्ठ के तल के लम्बवत (अभिलम्ब) दिशा में। दिशा का चुनाव सम्मेलन (convention) द्वारा तय होता है, जैसे बंद पृष्ठ के लिए बाहर की ओर।
उदाहरण: विद्युत फ्लक्स की गणना में क्षेत्रफल सदिश का उपयोग होता है।
(c) किसी गोले के साथ:
गोले के आयतन के साथ: नहीं। आयतन एक अदिश राशि है, इसकी कोई दिशा नहीं होती।
गोले के पृष्ठीय क्षेत्रफल के साथ: हाँ। गोले के पृष्ठ के प्रत्येक अतिसूक्ष्म क्षेत्रखंड के लिए एक क्षेत्रफल सदिश परिभाषित किया जा सकता है, जिसकी दिशा गोले के केंद्र से बाहर की ओर (त्रिज्या के अनुदिश) होती है।
प्रश्न 29. कोई गोली क्षैतिज से 30" के कोण पर दागी गई है और वह धरातल पर 3 57 दूर गिरती है। इसके प्रक्षेप्प के कोण का समायोजन करके क्या 5 1७ दूर स्थित किसी लक्ष्य का भेद किया जा सकता है? गोली की नालमुख चाल को नियत तथा वायु के प्रतिरोध को नगण्य मानिए।
हल:
दिया है:
प्रक्षेपण कोण, θ₁ = 30°
क्षैतिज परास, R₁ = 3 km = 3000 m
माना गोली का प्रारंभिक वेग (नालमुख चाल) = u
गुरुत्वीय त्वरण, g = 10 m/s² (मान लिया गया है)
प्रक्षेप्य गति के सूत्र से: R = (u² sin 2θ) / g
पहली स्थिति के लिए:
3000 = [u² × sin(2×30°)] / 10
3000 = [u² × sin 60°] / 10
3000 = [u² × (√3/2)] / 10
u² = (3000 × 10 × 2) / √3 = 60000 / 1.732 ≈ 34641
u ≈ √34641 ≈ 186.1 m/s
अब, हमें ज्ञात करना है कि क्या इसी चाल u से 5 km (=5000 m) दूर के लक्ष्य को भेदा जा सकता है।
किसी दिए गए u के लिए अधिकतम परास प्राप्त होती है जब sin 2θ अधिकतम हो यानी 2θ = 90° या θ = 45°.
अधिकतम परास, Rmax = u² / g
Rmax = (34641) / 10 = 3464.1 m ≈ 3.464 km
चूँकि अधिकतम संभव परास (3.464 km) दिए गए लक्ष्य की दूरी (5 km) से कम है, इसलिए इस नालमुख चाल से 5 km दूर के लक्ष्य को भेदा नहीं जा सकता। लक्ष्य को भेदने के लिए गोली की प्रारंभिक चाल (u) बढ़ानी होगी।
प्रश्न 30. कोई लड़ाकु जहाज 1.5 5७ की ऊँचाई पर 720 17010 की चाल से क्षैतिज दिशा में उड़ रहा है और किसी वायुयान भेदी तोप के ठीक ऊपर से गुजरता है। ऊर्ध्वाधर से तोप की नाल का क्या कोण हो जिससे 600 ७//४ की चाल से दागा गया गोला वायुयान पर वार कर सके? वायुयान के चालक को किस न्यूनतम ऊँचाई पर जहाज को उड़ाना चाहिए जिससे गोला लगने से Wa WH? (g = 10 m/s”)
हल:
दिया है:
वायुयान की ऊँचाई, h = 1.5 km = 1500 m
वायुयान की चाल, v = 720 km/h = 720 × (5/18) = 200 m/s
गोले की प्रारंभिक चाल, u = 600 m/s
g = 10 m/s²
भाग 1: तोप की नाल का कोण (θ)
माना तोप से गोला ऊर्ध्वाधर से θ कोण पर दागा जाता है। गोले के वेग के घटक:
क्षैतिज घटक, ux = u sin θ
ऊर्ध्वाधर घटक, uy = u cos θ
गोले को वायुयान से टकराने के लिए, दोनों की क्षैतिज स्थिति और ऊर्ध्वाधर स्थिति एक समय t पर समान होनी चाहिए।
क्षैतिज गति: वायुयान की चाल = गोले के क्षैतिज वेग का घटक
अतः, u sin θ = v
600 × sin θ = 200
sin θ = 200/600 = 1/3
θ = sin⁻¹(1/3) ≈ 19.47°
अतः तोप की नाल को ऊर्ध्वाधर से लगभग 19.47° के कोण पर रखना चाहिए।
भाग 2: वायुयान की न्यूनतम सुरक्षित ऊँचाई
यदि वायुयान इस ऊँचाई से नीचे उड़े, तो गोला उससे पहले ही टकरा जाएगा। न्यूनतम सुरक्षित ऊँचाई वह है जब गोला अपने प्रक्षेप पथ के शीर्ष (maximum height) पर वायुयान से टकराए।
गोले द्वारा प्राप्त अधिकतम ऊँचाई, Hmax = (uy²) / (2g)
uy = u cos θ = 600 × cos(19.47°) ≈ 600 × 0.9428 ≈ 565.68 m/s
Hmax = (565.68)² / (2×10) = 319990 / 20 ≈ 15999.5 m ≈ 16 km
यह बहुत अधिक ऊँचाई है। व्यावहारिक रूप से, गोले की गति के समीकरण से, टक्कर के समय t पर गोले की ऊर्ध्वाधर ऊँचाई h' = uyt - (1/2)gt² होगी और वायुयान की ऊँचाई स्थिर 1500m है। टक्कर के लिए h' = 1500 होना चाहिए। इस समीकरण से t निकालकर क्षैतिज गति की शर्त (u sin θ = v) लगाने पर हमें वही θ प्राप्त होता है।
निष्कर्ष: दिए गए प्रारंभिक आँकड़ों (u=600 m/s, v=200 m/s, h=1500m) के लिए, गोला वायुयान से टकरा सकता है। वायुयान को गोले से बचने के लिए या तो बहुत अधिक ऊँचाई (सैद्धांतिक रूप से ~16 km से अधिक) पर उड़ना होगा, या फिर अपनी चाल v को बदलना होगा।
प्रश्न 31. एक साइकिल सवार 27 km/h की चाल से साइकिल चला रहा है। जैसे ही सड़क पर वह 80 m त्रिज्या के वृत्तीय मोड़ पर पहुँचता है, यह ब्रेक लगाता है और अपनी चाल को 0.5 m/s की एकसमान दर से कम कर लेता है। वृत्तीय मोड़ पर साइकिल सवार के नेट त्वरण का परिमाण और उसकी दिशा निकालिए।
हल:
साइकिल सवार की प्रारंभिक चाल, v = 27 km/h
इसे m/s में बदलने पर:
v = 27 × (5/18) m/s = 7.5 m/s
वृत्तीय मोड़ की त्रिज्या, r = 80 m
ब्रेक लगाने पर स्पर्शरेखीय त्वरण, at = -0.5 m/s² (ऋणात्मक चिह्न चाल कम होने को दर्शाता है)
अभिकेंद्र त्वरण (ac):
ac = v² / r = (7.5)² / 80 = 56.25 / 80 = 0.703125 m/s²
नेट त्वरण का परिमाण (a):
चूँकि अभिकेंद्र त्वरण (ac) और स्पर्शरेखीय त्वरण (at) एक-दूसरे के लंबवत होते हैं, इसलिए परिणामी त्वरण:
a = √(ac² + at²)
a = √( (0.703125)² + (0.5)² )
a = √(0.4944 + 0.25)
a = √0.7444 ≈ 0.863 m/s²
नेट त्वरण की दिशा (θ):
माना परिणामी त्वरण, स्पर्शरेखीय दिशा (अर्थात वेग की दिशा) से θ कोण बनाता है।
tan θ = (अभिकेंद्र त्वरण) / (स्पर्शरेखीय त्वरण) = ac / |at|
tan θ = 0.703125 / 0.5 = 1.40625
θ = tan⁻¹(1.40625) ≈ 54.7°
अतः नेट त्वरण का परिमाण लगभग 0.86 m/s² है और यह साइकिल के वेग की दिशा से लगभग 54.7° का कोण बनाता है (अभिकेंद्र की ओर झुका हुआ)।
प्रश्न 32. (a) सिद्ध कीजिए कि किसी प्रक्षेप्य के x-अक्ष तथा उसके वेग के बीच के कोण θ को समय के फलन के रूप में निम्न प्रकार से व्यक्त कर सकते हैं
θ(t) = tan⁻¹ (v0y - gt / v0x)
(b) सिद्ध कीजिए कि मूल बिंदु से फेंके गए प्रक्षेप्य के लिए θ0 का मान
θ0 = tan⁻¹ (4hm / R)
होगा। यहाँ प्रयुक्त प्रतीकों के अर्थ सामान्य हैं।
हल (a):
माना प्रक्षेप्य को प्रारंभिक वेग u से क्षितिज से θ0 कोण पर प्रक्षेपित किया जाता है।
प्रारंभिक वेग के घटक:
v0x = u cosθ0 (क्षैतिज)
v0y = u sinθ0 (ऊर्ध्वाधर)
किसी क्षण t पर, वेग के घटक:
क्षैतिज दिशा में त्वरण शून्य है, अतः vx(t) = v0x = u cosθ0
ऊर्ध्वाधर दिशा में गुरुत्वीय त्वरण कार्य करता है, अतः vy(t) = v0y - gt = u sinθ0 - gt
अब, क्षण t पर वेग सदिश x-अक्ष के साथ जो कोण θ(t) बनाता है, उसका tangent होगा:
tan θ(t) = (ऊर्ध्वाधर वेग घटक) / (क्षैतिज वेग घटक) = vy(t) / vx(t)
tan θ(t) = (v0y - gt) / v0x
∴ θ(t) = tan⁻¹ [ (v0y - gt) / v0x ]
इस प्रकार सिद्ध हुआ।
हल (b):
प्रक्षेप्य गति के सूत्रों से:
1. महत्तम ऊँचाई, hm = (u² sin²θ0) / (2g)
2. परास, R = (u² sin 2θ0) / g = (u² * 2 sinθ0 cosθ0) / g
अब, hm और R का अनुपात लेते हैं:
hm / R = [ (u² sin²θ0)/(2g) ] / [ (2u² sinθ0 cosθ0)/(g) ]
hm / R = (sin²θ0 / 2g) × (g / 2 sinθ0 cosθ0)
hm / R = (sinθ0) / (4 cosθ0) = (1/4) tanθ0
उपरोक्त समीकरण को पुनर्व्यवस्थित करने पर:
tanθ0 = 4hm / R
∴ θ0 = tan⁻¹ (4hm / R)
इस प्रकार सिद्ध हुआ।
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