Bihar Board Class 11th Physics (भौतिक विज्ञान) Chapter 6 (कार्य, उर्जा तथा शक्ति) Solutions

Here we have provided Solution for Chapter 6 (कार्य, उर्जा तथा शक्ति) of Physics (भौतिक विज्ञान) subject for Class 11th students of Bihar Board of Secondary Education. There are various chapters in this Physics (भौतिक विज्ञान) such as Chapter 1 (भौतिक जगत), Chapter 2 (मात्रक तथा मापन), Chapter 3 (सरल रेखा में गति), Chapter 4 (समतल में गति), Chapter 5 (गणित के नियम), Chapter 6 (कार्य, उर्जा तथा शक्ति), Chapter 7 (कणों के नियम तथा घूर्णी गति), Chapter 8 (गुरुत्वाकर्षण), Chapter 9 (ठोसों के यांत्रिक गुण), Chapter 10 (तरलों के यांत्रिक गुण), Chapter 11 (द्रव्य के तापीय गुण), Chapter 12 (उष्मागतिकी), Chapter 13 (अणुगति सिद्धांत), Chapter 14 (दोलन) and Chapter 15 (तरंगें). Summary of the same is given below:

Board NameBihar Board of Secondary Education
ClassClass 11th
Content TypeSolution
Solution forClass 11th students
SubjectPhysics (भौतिक विज्ञान)
Chapter NameChapter 6 (कार्य, उर्जा तथा शक्ति)
Total Number of Chapter in this Subject15

Studying Bihar Board Class 11th Physics (भौतिक विज्ञान) Chapter 6 (कार्य, उर्जा तथा शक्ति) solution will help you higher marks in this subject but you need to follow best practices to achieve higher marks, which are given after solutions, go through them once.

Bihar Board Class 11th Physics (भौतिक विज्ञान) Chapter 6 (कार्य, उर्जा तथा शक्ति) Solutions

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प्रश्न 1. कार्य किसे कहते हैं ? इसका मात्रक लिखें।

जब किसी वस्तु पर बल लगाया जाता है और वह वस्तु बल की दिशा में विस्थापित होती है, तो बल द्वारा कार्य किया गया कहा जाता है। कार्य की मात्रा बल के परिमाण और बल की दिशा में हुए विस्थापन के गुणनफल के बराबर होती है।
कार्य का मात्रक जूल (J) है। 1 जूल = 1 न्यूटन × 1 मीटर।

प्रश्न 2. कार्य एक अदिश राशि है, क्यों ?

कार्य एक अदिश राशि है क्योंकि इसमें केवल परिमाण होता है, दिशा नहीं होती। कार्य, बल (एक सदिश राशि) और विस्थापन (एक सदिश राशि) का अदिश गुणनफल या डॉट गुणनफल होता है। डॉट गुणनफल का परिणाम हमेशा एक अदिश राशि ही होता है।

प्रश्न 3. 1 kWh को जूल में व्यक्त करें।

1 किलोवाट-घंटा (kWh) विद्युत ऊर्जा का एक व्यावहारिक मात्रक है।
1 kW = 1000 वाट (W)
1 घंटा = 3600 सेकंड
चूँकि, 1 वाट = 1 जूल/सेकंड
अतः, 1 kWh = (1000 वाट) × (3600 सेकंड) = 1000 × 3600 जूल/सेकंड × सेकंड
1 kWh = 3.6 × 10⁶ जूल (J)

प्रश्न 4. स्प्रिंग की स्थितिज ऊर्जा का सूत्र लिखें।

जब किसा स्प्रिंग को उसकी प्राकृतिक लम्बाई से खींचा या दबाया जाता है, तो उसमें स्थितिज ऊर्जा संचित हो जाती है। यदि स्प्रिंग का बल नियतांक k है और उसे उसकी माध्य स्थिति से x दूरी तक विस्थापित किया जाता है, तो संचित स्थितिज ऊर्जा का सूत्र है:

U = (1/2) k x²

प्रश्न 5. शक्ति की परिभाषा दें। इसका मात्रक क्या है ?

शक्ति कार्य करने की दर या ऊर्जा रूपान्तरण की दर है। अर्थात, इकाई समय में किए गए कार्य की मात्रा को शक्ति कहते हैं।
शक्ति (P) = किया गया कार्य (W) / लिया गया समय (t)
शक्ति का मात्रक वाट (W) है। 1 वाट = 1 जूल/सेकंड।
व्यावहारिक उपयोग के लिए बड़े मात्रक किलोवाट (kW), मेगावाट (MW) आदि भी प्रयोग किए जाते हैं।

प्रश्न 6. किसी पिण्ड की गतिज ऊर्जा क्या है ?

किसी पिण्ड में उसकी गति के कारण निहित ऊर्जा को उसकी गतिज ऊर्जा कहते हैं। यह पिण्ड के द्रव्यमान (m) और उसके वेग (v) पर निर्भर करती है। यदि कोई पिण्ड गतिमान है, तो उसमें गतिज ऊर्जा होती है। विरामावस्था में किसी पिण्ड की गतिज ऊर्जा शून्य होती है। गतिज ऊर्जा का सूत्र है: K.E. = (1/2) m v²

प्रश्न 7. ऊर्जा संरक्षण का नियम लिखें।

ऊर्जा संरक्षण का नियम: ऊर्जा न तो उत्पन्न की जा सकती है और न ही नष्ट की जा सकती है। इसे केवल एक रूप से दूसरे रूप में परिवर्तित किया जा सकता है। किसी भी पृथक् निकाय (जिस पर बाह्य बल कार्य नहीं कर रहा हो) की कुल ऊर्जा सदैव नियत रहती है।
अर्थात, कुल ऊर्जा (गतिज ऊर्जा + स्थितिज ऊर्जा + अन्य सभी रूपों में ऊर्जा) = नियतांक।

प्रश्न 8. कार्य-ऊर्जा प्रमेय क्या है ?

कार्य-ऊर्जा प्रमेय के अनुसार, किसी वस्तु पर किया गया कुल कार्य उस वस्तु की गतिज ऊर्जा में परिवर्तन के बराबर होता है।
यदि किसी वस्तु पर किया गया नेट कार्य W है, प्रारंभिक गतिज ऊर्जा K₁ और अंतिम गतिज ऊर्जा K₂ है, तो:

W = K₂ - K₁ = ΔK

यह प्रमेय बलों के प्रकार (संरक्षी या असंरक्षी) पर निर्भर नहीं करता और यांत्रिकी में एक मौलिक सिद्धांत है।

प्रश्न 9. संरक्षी बल किसे कहते हैं ?

वे बल जिनके द्वारा किसी वस्तु पर किया गया कार्य केवल प्रारंभिक और अंतिम स्थितियों पर निर्भर करता है, न कि उस पथ पर जिससे वस्तु गुजरती है, संरक्षी बल कहलाते हैं।
उदाहरण: गुरुत्वाकर्षण बल, स्प्रिंग का प्रत्यानयन बल, स्थिर विद्युत बल।
संरक्षी बल के लिए, एक बंद पथ पर किया गया कुल कार्य शून्य होता है।

प्रश्न 10. 1 अश्व शक्ति (Horse Power) में कितने वाट होते हैं ?

अश्व शक्ति (HP) शक्ति का एक पुराना मात्रक है, जो अभी भी इंजनों की शक्ति बताने के लिए प्रयोग किया जाता है।

1 अश्व शक्ति (HP) = 746 वाट (W)

लगभग, 1 HP ≈ 750 W भी माना जाता है, लेकिन सटीक मान 746 वाट है।

प्रश्न 1. कार्य का विमीय सूत्र है :

(A) [MLT-2] (B) [ML2T-2]
(C) [ML2T-3] (D) [ML3T-3]

उत्तर: (B) [ML2T-2]

व्याख्या: कार्य का सूत्र W = बल × विस्थापन है। बल का विमीय सूत्र [MLT-2] और विस्थापन का [L] होता है। दोनों को गुणा करने पर कार्य का विमीय सूत्र [ML2T-2] प्राप्त होता है, जो ऊर्जा के विमीय सूत्र के समान है।

प्रश्न 2. किसी वस्तु की गतिज ऊर्जा उसके रेखीय संवेग p तथा द्रव्यमान m के पदों में होगी :

(A) p2m (B) p2/m
(C) p2/(2m) (D) p/(2m)

उत्तर: (C) p2/(2m)

व्याख्या: हम जानते हैं कि गतिज ऊर्जा K = (1/2)mv2 और रेखीय संवेग p = mv होता है। इन दोनों समीकरणों से v = p/m प्राप्त होता है। v का यह मान गतिज ऊर्जा के सूत्र में रखने पर, K = (1/2)m × (p/m)2 = (1/2)m × (p2/m2) = p2/(2m) प्राप्त होता है।

प्रश्न 3. किसी पिण्ड का द्रव्यमान m तथा वेग v है। इसकी गतिज ऊर्जा होगी :

(A) mv2 (B) (1/2)mv2
(C) mgh (D) m2v

उत्तर: (B) (1/2)mv2

व्याख्या: किसी गतिमान वस्तु की गतिज ऊर्जा उसके द्रव्यमान (m) और वेग (v) के वर्ग के गुणनफल के आधे के बराबर होती है। यह भौतिकी का एक मौलिक सूत्र है, जो K.E. = (1/2)mv2 द्वारा व्यक्त किया जाता है।

प्रश्न 4. किसी पिण्ड की स्थितिज ऊर्जा निर्भर करती है :

(A) केवल द्रव्यमान पर (B) केवल ऊँचाई पर
(C) द्रव्यमान तथा ऊँचाई पर (D) द्रव्यमान, ऊँचाई तथा गुरुत्वीय त्वरण पर

उत्तर: (D) द्रव्यमान, ऊँचाई तथा गुरुत्वीय त्वरण पर

व्याख्या: गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा का सूत्र U = mgh होता है, जहाँ m वस्तु का द्रव्यमान, g गुरुत्वीय त्वरण और h संदर्भ बिंदु से ऊँचाई है। इसलिए, स्थितिज ऊर्जा इन तीनों राशियों—द्रव्यमान, ऊँचाई और गुरुत्वीय त्वरण—पर निर्भर करती है।

प्रश्न 5. किसी पिण्ड का द्रव्यमान दोगुना कर दिया जाए तथा उसका वेग आधा कर दिया जाए, तो उसकी गतिज ऊर्जा हो जाएगी :

(A) आधी (B) दोगुनी
(C) चौथाई (D) अपरिवर्तित

उत्तर: (A) आधी

व्याख्या: मान लीजिए प्रारंभिक गतिज ऊर्जा K1 = (1/2)mv2 है। द्रव्यमान दोगुना (2m) और वेग आधा (v/2) करने पर नई गतिज ऊर्जा K2 = (1/2)(2m)(v/2)2 = (1/2)×2m×(v2/4) = (1/2)mv2 × (1/2) = K1/2 होगी। अर्थात, गतिज ऊर्जा आधी रह जाएगी।

प्रश्न 6. कार्य-ऊर्जा प्रमेय के अनुसार किया गया कार्य बराबर होता है :

(A) गतिज ऊर्जा में परिवर्तन के (B) स्थितिज ऊर्जा में परिवर्तन के
(C) संवेग में परिवर्तन के (D) वेग में परिवर्तन के

उत्तर: (A) गतिज ऊर्जा में परिवर्तन के

व्याख्या: कार्य-ऊर्जा प्रमेय के अनुसार, किसी वस्तु पर किया गया नेट कार्य उस वस्तु की गतिज ऊर्जा में परिवर्तन के बराबर होता है। इसे गणितीय रूप में Wnet = ΔK = Kfinal - Kinitial से व्यक्त किया जाता है।

प्रश्न 7. शक्ति का S.I. मात्रक है :

(A) जूल (B) वाट
(C) अर्ग (D) न्यूटन

उत्तर: (B) वाट

व्याख्या: शक्ति को कार्य करने की दर या ऊर्जा रूपांतरण की दर के रूप में परिभाषित किया जाता है। इसका S.I. मात्रक वाट (W) है, जो प्रति सेकंड एक जूल के बराबर होता है (1 W = 1 J/s)।

प्रश्न 8. 1 किलोवाट-घंटा (kWh) बराबर होता है :

(A) 3.6 × 103 J (B) 3.6 × 106 J
(C) 103 J (D) 106 J

उत्तर: (B) 3.6 × 106 J

व्याख्या: 1 किलोवाट-घंटा, ऊर्जा का एक व्यावहारिक मात्रक है। 1 kW = 1000 W और 1 घंटा = 3600 सेकंड होता है। इसलिए, 1 kWh = (1000 J/s) × (3600 s) = 3,600,000 J = 3.6 × 106 जूल होता है।

प्रश्न 9. किसी पिण्ड का द्रव्यमान m तथा ऊँचाई h है। इसकी स्थितिज ऊर्जा होगी :

(A) mgh (B) (1/2)mv2
(C) mv2 (D) (1/2)mgh

उत्तर: (A) mgh

व्याख्या: किसी वस्तु की पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र में स्थितिज ऊर्जा उसके द्रव्यमान (m), गुरुत्वीय त्वरण (g) और एक निश्चित संदर्भ स्तर से ऊँचाई (h) के गुणनफल के बराबर होती है। इसका सूत्र U = mgh है।

प्रश्न 10. किसी पिण्ड का द्रव्यमान m तथा वेग v है। इसका संवेग होगा :

(A) mv2 (B) (1/2)mv2
(C) mv (D) mgh

उत्तर: (C) mv

व्याख्या: किसी वस्तु का रेखीय संवेग उसके द्रव्यमान और वेग के गुणनफल के बराबर होता है। इसे p = mv से निरूपित किया जाता है। यह एक सदिश राशि है जिसकी दिशा वेग की दिशा में होती है।

प्रश्न 9. कोई पिण्ड जो विरामावस्था में है, अचर त्वरण से एकविमीय गति करता है। इसको किसी / समय पर दी गई शक्ति अनुक्रमानुपाती है। 6) ४: Ge 09) ४४2 (२) ४

हल: (c) माना कि द्रव्यमान m की एक वस्तु बल F के प्रभाव में अचर त्वरण a से एकविमीय गति करती है।
गति के समीकरण से, वेग v = u + at होता है।
चूँकि प्रारंभिक वेग u = 0 है, इसलिए v = at होगा।
शक्ति का सूत्र है: P = F × v
बल के लिए, F = m × a
इस मान को रखने पर: P = (m × a) × (a × t) = m a2 t
चूँकि द्रव्यमान m और त्वरण a नियत (constant) हैं, इसलिए शक्ति P समय t के अनुक्रमानुपाती होती है।
अतः सही विकल्प (c) t है।

प्रश्न 10. एक पिण्ड अचर शक्ति के स्रोत के प्रभाव में एक ही दिशा में गतिमान है। इसका ८ समय में विस्थापन, अनुक्रमानुपाती है। (a) t1/2, (b) t, (c) t3/2, (d) t2

हल: (c) माना पिण्ड का द्रव्यमान m है और उस पर अचर शक्ति P कार्य कर रही है।
समय t में किया गया कार्य W = P × t होता है।
कार्य-ऊर्जा प्रमेय के अनुसार, यह कार्य पिण्ड की गतिज ऊर्जा में वृद्धि के बराबर होता है।
यदि प्रारंभिक वेग शून्य है, तो (1/2) m v2 = P t
इससे वेग v = √(2P t / m) प्राप्त होता है।
वेग, विस्थापन के परिवर्तन की दर है, अर्थात v = dx/dt
इसलिए, dx/dt = √(2P t / m)
पुनर्व्यवस्थित करने पर: dx = √(2P / m) × t1/2 dt
दोनों ओर समाकलन करने पर: x = √(2P / m) × (2/3) t3/2 + constant
चूँकि P और m नियत हैं, इसलिए विस्थापन x ∝ t3/2 होता है।
अतः सही विकल्प (c) t3/2 है।

प्रश्न 11. किसी पिण्ड पर नियत बल लगाकर उसे किसी निर्देशांक प्रणाली के अनुसार z-अक्ष के अनुदिश गति करने के लिए बाध्य किया गया है जो इस प्रकार है।
F=(-i+ 2j+ 3k)N जहाँ; ,] तथा £ क्रमशः x, y एवं z-अक्ष के अनुदिश एकांक सदिश हैं। इस वस्तु को z-अक्ष के अनुदिश 4 मी की दूरी तक गति कराने के लिए आरोपित बल द्वारा किया गया कार्य कितना होगा?

हल: बल द्वारा किया गया कार्य, बल सदिश और विस्थापन सदिश के अदिश गुणनफल के बराबर होता है।
दिया गया बल सदिश: F = (-1 i + 2 j + 3 k) N
वस्तु केवल z-अक्ष के अनुदिश 4 मीटर विस्थापित होती है। अतः विस्थापन सदिश: s = (0 i + 0 j + 4 k) m
कार्य, W = F . s
अदिश गुणनफल करने पर:
W = [(-1)×0] + [(2)×0] + [(3)×4] = 0 + 0 + 12 = 12 J
अतः आरोपित बल द्वारा किया गया कार्य 12 जूल है।

प्रश्न 12. किसी अंतरिक्ष किरण प्रयोग में एक इलेक्ट्रॉन और एक प्रोटॉन का संसूचन होता है जिसमें पहले कण की गतिज ऊर्जा 10 keV है और दूसरे कण की गतिज ऊर्जा 100 keV है। इनमें कौन-सा तीब्रगामी है, इलेक्ट्रॉन या प्रोटॉन? इनकी चालों का अनुपात ज्ञात कीजिए। (इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान = 9.11×10-31 kg, प्रोटॉन का द्रव्यमान = 1.67×10-27 kg, 1 eV = 1.60×10-19 J)

हल:
चरण 1: इलेक्ट्रॉन की गणना
इलेक्ट्रॉन की गतिज ऊर्जा, Ke = 10 keV = 10 × 103 eV = 104 eV
जूल में परिवर्तन: Ke = 104 × 1.60 × 10-19 = 1.60 × 10-15 J
गतिज ऊर्जा सूत्र: Ke = (1/2) me ve2
=> ve2 = (2 × 1.60 × 10-15) / (9.11 × 10-31)
=> ve2 ≈ 3.512 × 1015
=> ve ≈ √(3.512 × 1015) ≈ 5.93 × 107 m/s

चरण 2: प्रोटॉन की गणना
प्रोटॉन की गतिज ऊर्जा, Kp = 100 keV = 100 × 103 eV = 105 eV
जूल में परिवर्तन: Kp = 105 × 1.60 × 10-19 = 1.60 × 10-14 J
गतिज ऊर्जा सूत्र: Kp = (1/2) mp vp2
=> vp2 = (2 × 1.60 × 10-14) / (1.67 × 10-27)
=> vp2 ≈ 1.916 × 1013
=> vp ≈ √(1.916 × 1013) ≈ 4.38 × 106 m/s

निष्कर्ष: ve (≈ 5.93 × 107 m/s) > vp (≈ 4.38 × 106 m/s)
इसलिए, इलेक्ट्रॉन तीब्रगामी (तेज) है
चालों का अनुपात: ve / vp ≈ (5.93 × 107) / (4.38 × 106) ≈ 13.54
अतः इलेक्ट्रॉन की चाल प्रोटॉन की चाल से लगभग 13.54 गुना अधिक है।

प्रश्न 13. 2 मिमी त्रिज्या की वर्षा की कोई बूँद 500 मी की ऊँचाई से पृथ्वी पर गिरती है। यह अपनी आरम्भिक ऊँचाई के आधे हिस्से तक (वायु के श्यान प्रतिरोध के कारण) घटते त्वरण के साथ गिरती है और अपनी अधिकतम (सीमान्त) चाल प्राप्त कर लेती है और उसके बाद एकसमान चाल से गति करती है। वर्षा की बूँद पर उसकी यात्रा के पहले व दूसरे अर्ध भागों में गुरुत्वीय बल द्वारा किया गया कार्य कितना होगा? यदि बूँद की चाल पृथ्वी तक पहुँचने पर 10 मी/से हो तो सम्पूर्ण यात्रा में प्रतिरोधी बल द्वारा किया गया कार्य कितना होगा?

हल:
चरण 1: बूँद का द्रव्यमान ज्ञात करना
त्रिज्या, r = 2 mm = 2 × 10-3 m
बूँद का आयतन, V = (4/3)πr3 = (4/3) × 3.14 × (2 × 10-3)3 ≈ 3.35 × 10-8 m3
पानी का घनत्व, ρ = 1000 kg/m3
द्रव्यमान, m = ρ × V = 1000 × 3.35 × 10-8 = 3.35 × 10-5 kg

चरण 2: गुरुत्वीय बल द्वारा प्रत्येक अर्ध भाग में किया गया कार्य
कुल ऊँचाई = 500 m, प्रत्येक अर्ध भाग की ऊँचाई = 250 m
गुरुत्वीय बल, F = m × g = 3.35 × 10-5 × 9.8 ≈ 3.28 × 10-4 N
कार्य, W = बल × विस्थापन
पहले अर्ध भाग में कार्य, W1 = F × 250 = 3.28 × 10-4 × 250 = 8.20 × 10-2 J = 0.082 J
चूँकि गुरुत्वीय बल नियत है और दूसरे अर्ध भाग में विस्थापन भी 250 m है, इसलिए
दूसरे अर्ध भाग में कार्य, W2 = 0.082 J

चरण 3: प्रतिरोधी बल द्वारा सम्पूर्ण यात्रा में किया गया कार्य
गुरुत्वीय बल द्वारा कुल कार्य, Wg = W1 + W2 = 0.082 + 0.082 = 0.164 J
पृथ्वी पर पहुँचने पर बूँद की गतिज ऊर्जा, K = (1/2) m v2 = 0.5 × 3.35 × 10-5 × (10)2 = 1.675 × 10-3 J = 0.001675 J
कार्य-ऊर्जा प्रमेय के अनुसार:
गुरुत्वीय बल द्वारा कुल कार्य + प्रतिरोधी बल द्वारा कुल कार्य = गतिज ऊर्जा में परिवर्तन
=> 0.164 + Wr = 0.001675
=> Wr = 0.001675 - 0.164 = -0.162325 J-0.162 J
ऋणात्मक चिह्न दर्शाता है कि प्रतिरोधी बल द्वारा कार्य किया गया (ऊर्जा का क्षय हुआ)।
अतः प्रतिरोधी बल द्वारा किया गया कार्य लगभग -0.162 जूल है।

प्रश्न 14. किसी गैस-पात्र में कोई अणु 200 मी/से की चाल से अभिलंब के साथ 30° का कोण बनाता हुआ क्षेतिज दीवार से टकराकर पुनः उसी चाल से वापस लौट जाता है। क्या इस संघटट में संवेग संरक्षित है? यह संघट्ट प्रत्यास्थ है या अप्रत्यास्थ?

हल:
हाँ, इस संघट्ट में रेखीय संवेग संरक्षित रहता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि दीवार पर कोई बाह्य बल क्षैतिज दिशा में कार्य नहीं कर रहा है (गुरुत्व बल ऊर्ध्वाधर है)। इसलिए, अणु-दीवार तंत्र का क्षैतिज दिशा में रेखीय संवेग संरक्षित रहता है।

यह संघट्ट प्रत्यास्थ है। क्योंकि संघट्ट से पहले और बाद में अणु की चाल (200 m/s) समान है। चूँकि गतिज ऊर्जा चाल के वर्ग के अनुक्रमानुपाती होती है, इसलिए गतिज ऊर्जा भी संरक्षित रहती है। गतिज ऊर्जा का संरक्षण प्रत्यास्थ संघट्ट की पहचान है।

प्रश्न 15. किसी भवन के भूतल पर लगा कोई पम्प 30 मी3 आयतन की पानी की टंकी को 15 मिनट में भर देता है। यदि टंकी पृथ्वी तल से 40 मीटर ऊपर हो और पंप की दक्षता 30% हो तो पंप द्वारा कितनी विद्युत शक्ति का उपयोग किया गया?

हल:
चरण 1: उपयोगी कार्य (आउटपुट) की गणना
पानी का आयतन, V = 30 m3
पानी का द्रव्यमान, m = आयतन × घनत्व = 30 × 1000 = 30000 kg
ऊँचाई, h = 40 m
गुरुत्वीय त्वरण, g = 9.8 m/s2
पंप द्वारा किया गया उपयोगी कार्य = पानी को ऊपर उठाने में लगी स्थितिज ऊर्जा = m g h
Wout = 30000 × 9.8 × 40 = 1.176 × 107 J

चरण 2: आवश्यक इनपुट ऊर्जा की गणना
पंप की दक्षता, η = 30% = 0.30
दक्षता = (उपयोगी आउटपुट ऊर्जा) / (कुल इनपुट ऊर्जा)
=> 0.30 = (1.176 × 107) / Ein
=> Ein = (1.176 × 107) / 0.30 = 3.92 × 107 J

चरण 3: उपयोग की गई विद्युत शक्ति की गणना
समय, t = 15 मिनट = 15 × 60 = 900 सेकंड
शक्ति, P = ऊर्जा / समय
P = Ein / t = (3.92 × 107) / 900 ≈ 43555.56 W
इसे किलोवाट में व्यक्त करने पर: P ≈ 43.56 kW
अतः पंप द्वारा उपयोग की गई विद्युत शक्ति लगभग 43.6 किलोवाट है।

प्रश्न 10. दो समरूपी बॉल-बियरिंग एक-दूसरे के सम्पर्क में हैं और किसी घर्षणरहित मेज पर विरामावस्था में हैं। इनके साथ समान द्रव्यमान का कोई दूसरा बॉल-बियरिंग, जो आरम्भ में ० चाल से गतिमान है, सम्मुख संघट्ट करता है। यदि संघट्ट प्रत्यास्थ है तो संघट्ट के पश्चात्‌ निम्नलिखित (चित्र) में से कौन-सा परिणाम सम्भव है?

हल: मान लीजिए प्रत्येक बॉल-बियरिंग का द्रव्यमान m है। संघट्ट से पहले, गतिमान बॉल-बियरिंग की गतिज ऊर्जा = (1/2)mv² होती है।

चूँकि संघट्ट पूर्णतः प्रत्यास्थ है और सभी द्रव्यमान समान हैं, इसलिए संवेग और गतिज ऊर्जा दोनों संरक्षित रहेंगे।

संघट्ट के बाद, केवल वही परिणाम संभव है जहाँ गतिमान बॉल-बियरिंग विराम अवस्था में आ जाता है और उसका संवेग तथा ऊर्जा दोनों विरामावस्था में पड़े दोनों बॉल-बियरिंग्स में स्थानांतरित हो जाते हैं। इस स्थिति में, दोनों बॉल-बियरिंग एक साथ समान वेग से गति करेंगे।

गतिज ऊर्जा संरक्षण के अनुसार: (1/2)mv² = (1/2)*(2m)*V'², जहाँ V' नया वेग है।
इससे V' = v/√2 प्राप्त होता है।

अतः संघट्ट के पश्चात्, दो बॉल-बियरिंग एक साथ v/√2 वेग से गति करेंगे और तीसरा (टकराने वाला) बॉल-बियरिंग रुक जाएगा। यह स्थिति दिए गए चित्रों में द्वितीय विकल्प के अनुरूप है।

प्रश्न 17. किसी लोलक के गोलक 4 को, जो ऊर्ध्वाधर से 30 का कोण बनाता है, छोड़े जाने पर मेज पर, विरामावस्था में रखे दूसरे गोलक 2 से टकराता है जैसा कि चित्र में प्रदर्शित है। ज्ञात कीजिए कि संघट्ट के पश्चात्‌ गोलक 4 कितना ऊँचा उठता है? गोलकों के आकारों की उपेक्षा कीजिए और मान लीजिए कि संघटूट प्रत्यास्थ है।

हल: यहाँ दोनों गोलकों के द्रव्यमान समान हैं और संघट्ट पूर्णतः प्रत्यास्थ है।

समान द्रव्यमान की वस्तुओं के बीच होने वाले पूर्णतः प्रत्यास्थ संघट्ट में, यदि दूसरी वस्तु प्रारंभ में विरामावस्था में है, तो टकराने के बाद वस्तुएं अपने वेगों का आदान-प्रदान कर लेती हैं।

इस स्थिति में:
- गोलक A एक निश्चित वेग से गतिमान है और गोलक B विराम में है।
- संघट्ट के पश्चात्, गोलक A का संपूर्ण वेग गोलक B को मिल जाता है, जिससे गोलक B उसी वेग से गति करने लगता है।
- गोलक A विरामावस्था में आ जाता है।

चूँकि संघट्ट के बाद गोलक A का वेग शून्य हो जाता है, इसलिए उसकी गतिज ऊर्जा भी शून्य होगी। अतः गोलक A संघट्ट के पश्चात् बिल्कुल भी ऊँचा नहीं उठेगा और वहीं रुक जाएगा।

प्रश्न 18. किसी लोलक के गोलक को क्षैतिज अवस्था से छोड़ा गया है। यदि लोलक की लम्बाई 1.5 मी है तो निम्नतम बिन्दु पर आने पर गोलक की चाल क्‍या होगी? यह दिया गया है कि इसकी प्रारम्पिक ऊर्जा का 5% अंश वायु प्रतिरोध के विरुद्ध क्षय हो जाता है।

हल: लोलक की लंबाई, L = 1.5 m
माना गोलक का द्रव्यमान m है।

क्षैतिज अवस्था में गोलक की ऊँचाई, h = L = 1.5 m
इस स्थिति में गोलक की प्रारंभिक स्थितिज ऊर्जा, P.E. = mgh = mg × 1.5

वायु प्रतिरोध के कारण ऊर्जा का 5% क्षय हो जाता है। अतः निम्नतम बिंदु पर उपलब्ध गतिज ऊर्जा, प्रारंभिक स्थितिज ऊर्जा का 95% होगी।

ऊर्जा संरक्षण के नियमानुसार:
(95/100) × mgh = (1/2)mv²
दोनों ओर 'm' कट जाता है।
(95/100) × g × h = (1/2)v²
v² = 2 × (95/100) × g × h
v² = (190/100) × 9.8 × 1.5
v² = 1.9 × 9.8 × 1.5 = 27.93
v = √27.93 ≈ 5.28 m/s

अतः निम्नतम बिंदु पर गोलक की चाल लगभग 5.28 m/s होगी।

प्रश्न 19. 300 किग्रा द्रव्यमान की कोई ट्रॉली, 25 किग्रा रेत का बोरा लिए हुए किसी घर्षणरहित पथ पर 27 किमी/घण्टा की एकसमान चाल से गतिमान है। कुछ समय पश्चात्‌ बोरे में किसी छिद्र से रेत 0.05 किग्रा/सेकण्ड की दर से निकलकर ट्रॉली के फर्श पर रिसने लगती है। रेत का बोरा खाली होने के पश्चात्‌ ट्रॉली की चाल क्या होगी?

हल: ट्रॉली का द्रव्यमान, M = 300 kg
रेत के बोरे का द्रव्यमान, m = 25 kg
प्रारंभिक चाल, u = 27 km/h = 27 × (5/18) = 7.5 m/s

चूँकि पथ घर्षणरहित है और रेत ट्रॉली के अंदर ही रिसकर फर्श पर गिरती है, इस प्रक्रिया में कोई बाह्य बल कार्य नहीं करता। रेत ट्रॉली के सिस्टम का ही हिस्सा बनी रहती है।

संवेग संरक्षण के नियम के अनुसार, बाह्य बल की अनुपस्थिति में किसी निकाय का कुल संवेग संरक्षित रहता है।

रिसने की प्रक्रिया आंतरिक है, अतः यह ट्रॉली के सिस्टम के कुल संवेग को प्रभावित नहीं करती।
प्रारंभिक संवेग = अंतिम संवेग
(M + m) × u = (M + m) × v (चूँकि रेत अभी भी सिस्टम में है)
इससे स्पष्ट है कि v = u

अतः रेत का बोरा खाली होने के पश्चात् भी ट्रॉली की चाल 7.5 m/s ही बनी रहेगी।

प्रश्न 20. 0.5 किग्रा द्रव्यमान का एक कण ० - ax” वेग से सरल रेखीय गति करता है जहाँ a=5m थक है। ४- 0 से ४- 2 मी तथा इसके विस्थापन में कुल बल द्वारा किया गया कार्य कितना होगा?

हल: कण का द्रव्यमान, m = 0.5 kg
वेग, v = a x^(3/2), जहाँ a = 5 m^(1/2)/s (दिया है a=5m थक, जिसे हम a=5 m^(1/2)/s मान रहे हैं)
विस्थापन: x = 0 से x = 2 m तक।

x=0 पर वेग, v₁ = 5 × (0)^(3/2) = 0 m/s
x=2 m पर वेग, v₂ = 5 × (2)^(3/2) = 5 × (2√2) = 10√2 m/s

कार्य-ऊर्जा प्रमेय के अनुसार, किसी वस्तु पर कुल बल द्वारा किया गया कार्य उसकी गतिज ऊर्जा में परिवर्तन के बराबर होता है।

किया गया कार्य, W = ΔK.E. = (1/2)m(v₂² - v₁²)
W = (1/2) × 0.5 × [(10√2)² - (0)²]
W = (1/2) × 0.5 × [100 × 2]
W = (1/2) × 0.5 × 200
W = (1/2) × 100 = 50 J

अतः विस्थापन में कुल बल द्वारा किया गया कार्य 50 जूल होगा।

प्रश्न 21. किसी पवनचक्की के ब्लेड, क्षेत्रफल 4 के वृत्त जितना क्षेत्रफल प्रसर्प करते हैं। (a) यदि हवा ० वेग से वृत्त के लम्बवत्‌ दिशा में बहती है तो / समय में इससे गुजरने वाली वायु का द्रव्यमान FA होगा? (७) वायु की गतिज ऊर्जा क्या होगी? (०) मान लीजिए कि पवनचक्की हवा की 25% ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में रूपान्तरित कर देती है। यदि 4 - 30792 और ०- 36 107 और वायु का घनत्व 1.2 ४४ ४17 है तो उत्पन्न विद्युत शक्ति का परिकलन कीजिए।

हल:
(a) t समय में गुजरने वाली वायु का द्रव्यमान:
पवनचक्की द्वारा घेरा गया क्षेत्रफल = A
हवा का वेग = v
हवा का घनत्व = ρ
1 सेकंड में पवनचक्की से गुजरने वाली हवा का आयतन = A × v
t सेकंड में गुजरने वाला आयतन = A × v × t
द्रव्यमान = आयतन × घनत्व
अतः t समय में गुजरने वाली वायु का द्रव्यमान, m = A v ρ t

(b) वायु की गतिज ऊर्जा:
उपरोक्त द्रव्यमान की गतिज ऊर्जा, K.E. = (1/2) m v² = (1/2) (A v ρ t) v² = (1/2) A ρ t v³
प्रति सेकंड गतिज ऊर्जा (शक्ति) = (1/2) A ρ v³

(c) उत्पन्न विद्युत शक्ति:
दिया है: A = 30 m², v = 36 km/h, ρ = 1.2 kg/m³, दक्षता = 25%
सबसे पहले वेग को m/s में बदलते हैं:
v = 36 km/h = 36 × (1000 m / 3600 s) = 36 × (5/18) = 10 m/s

हवा द्वारा प्रदान की गई कुल शक्ति, Pinput = (1/2) × A × ρ × v³
Pinput = (1/2) × 30 × 1.2 × (10)³
Pinput = (1/2) × 30 × 1.2 × 1000
Pinput = 15 × 1200 = 18000 W = 18 kW

उत्पन्न विद्युत शक्ति (25% दक्षता पर):
Pelectric = 25% of Pinput = (25/100) × 18000 = 4500 W = 4.5 kW

अतः उत्पन्न विद्युत शक्ति 4.5 किलोवाट है।

प्रश्न 22. कोई व्यक्ति वजन कम करने के लिए 10 किग्रा द्रव्यमान को 0.5 मी की ऊँचाई तक 1000 बार उठाता है। मान लीजिए कि प्रत्येक बार द्रव्यमान को नीचे लाने में खोई हुई ऊर्जा क्षयित हो जाती है। (a) वह गुरुत्वाकर्षण बल के विरुद्ध कितना कार्य करता है? (b) यदि वसा 3.8 /< 10” ० ऊर्जा प्रति किलोग्राम आपूर्ति करता हो जो कि 20% दक्षता की दर से यांत्रिक ऊर्जा में परिवर्तित हो जाती है तो वह कितनी वसा खर्च कर डालेगा?

हल:
द्रव्यमान, m = 10 kg
ऊँचाई, h = 0.5 m
दोहराव की संख्या, n = 1000
गुरुत्वीय त्वरण, g = 9.8 m/s² (माना)

(a) गुरुत्वाकर्षण बल के विरुद्ध किया गया कार्य:
एक बार उठाने में किया गया कार्य = m g h
1000 बार उठाने में कुल कार्य, W = n × m × g × h
W = 1000 × 10 × 9.8 × 0.5
W = 1000 × 49 = 49000 J

(b) खर्च की गई वसा की मात्रा:
दिया है: 1 kg वसा द्वारा आपूर्ति की गई कुल ऊर्जा = 3.8 × 10⁷ J
यांत्रिक ऊर्जा में रूपांतरण की दक्षता = 20%
अतः 1 kg वसा द्वारा प्राप्त उपयोगी यांत्रिक ऊर्जा = (20/100) × 3.8 × 10⁷ = 0.2 × 3.8 × 10⁷ = 7.6 × 10⁶ J

कुल आवश्यक यांत्रिक ऊर्जा (किया गया कार्य) = 49000 J
खर्च की गई वसा की मात्रा = (कुल आवश्यक ऊर्जा) / (1 kg वसा से प्राप्त उपयोगी ऊर्जा)
वसा की मात्रा = 49000 / (7.6 × 10⁶) kg
= 4.9 × 10⁴ / (7.6 × 10⁶) = (4.9 / 7.6) × 10⁻²
≈ 0.6447 × 10⁻² = 6.447 × 10⁻³ kg

ग्राम में परिवर्तित करने पर:
6.447 × 10⁻³ kg = 6.447 × 10⁻³ × 1000 g = 6.447 g

अतः व्यक्ति द्वारा खर्च की गई वसा की मात्रा लगभग 6.45 ग्राम है।

प्रश्न 23. कोई परिवार 81५7 विद्युत-शक्ति का उपभोग करता है। (७) किसी क्षितिज सतह पर सीधे आपतित होने वाली सौर ऊर्जा की औसत दर 200 Wm है। यदि इस ऊर्जा का 20% भाग लाभदायक विद्युत ऊर्जा में रूपान्तरित किया जा सकता है तो 819 की विद्युत आपूर्ति के लिए कितने क्षेत्रफल की आवश्यकता होगी? 0) इस क्षेत्रफल की तुलना किसी विशिष्ट भवन की छत के क्षेत्रफल से कीजिए।

हल: परिवार द्वारा उपभुक्त विद्युत शक्ति, Prequired = 8 kW = 8000 W
(माना प्रश्न में 81५7, 8 kW है)

(a) आवश्यक क्षेत्रफल:
क्षैतिज सतह पर सौर ऊर्जा की औसत दर = 200 W/m²
विद्युत ऊर्जा में रूपांतरण दक्षता = 20%
अतः प्रति वर्ग मीटर प्राप्त उपयोगी विद्युत शक्ति = 200 W/m² का 20% = (20/100) × 200 = 40 W/m²

8000 W विद्युत शक्ति प्राप्त करने के लिए आवश्यक क्षेत्रफल:
क्षेत्रफल (A) = (आवश्यक कुल शक्ति) / (प्रति वर्ग मीटर प्राप्त शक्ति)
A = 8000 W / (40 W/m²) = 200 m²

अतः 8 kW विद्युत आपूर्ति के लिए 200 वर्ग मीटर क्षेत्रफल की आवश्यकता होगी।

(b) तुलना:
एक सामान्य मकान की छत का क्षेत्रफल लगभग 100 से 250 वर्ग मीटर के बीच हो सकता है।
200 m² का क्षेत्रफल लगभग 20 मीटर लंबाई और 10 मीटर चौड़ाई वाले एक बड़े आवासीय भवन की छत के क्षेत्रफल के बराबर है। यह एक बड़े विला या दो मंजिला भवन की छत का आकार हो सकता है।

विविध प्रश्नावली

प्रश्न 24. 0.012 15४ द्रव्यमान की कोई गोली 70 ५७/७ की क्षैतिज चाल से चलते हुए 0.4 ४४ द्रव्यमान के लकड़ी के गुटके से

हल: प्रश्न पूर्ण नहीं है। आमतौर पर ऐसे प्रश्न में गोली लकड़ी के गुटके में धंस जाती है और उसकी अंतिम चाल या निकाय द्वारा उठाई गई ऊँचाई पूछी जाती है। यदि हम मान लें कि गोली गुटके में धंसकर उसके साथ एक हो जाती है, तो हम संवेग संरक्षण का नियम लगा सकते हैं।

गोली का द्रव्यमान, m1 = 0.012 kg
गोली का प्रारंभिक वेग, u1 = 70 m/s
गुटके का द्रव्यमान, m2 = 0.4 kg
गुटके का प्रारंभिक वेग, u2 = 0 (विरामावस्था)
माना टक्कर के बाद संयुक्त निकाय का वेग V है।

संवेग संरक्षण के नियम से:
m1u1 + m2u2 = (m1 + m2)V
0.012 × 70 + 0.4 × 0 = (0.012 + 0.4)V
0.84 = 0.412 V
V = 0.84 / 0.412 ≈ 2.04 m/s

अतः टक्कर के बाद गुटके और अंदर फंसी गोली का संयुक्त वेग लगभग 2.04 m/s होगा।

टकराकर गुटके के सापेक्ष तुरन्त ही विरामावस्था में आ जाती है। गुटके को छत से पतली तारों द्वारा लटकाया गया है। परिकलन कीजिए कि गुटका किस ऊँचाई तक ऊपर उठता है? गुटके में पैदा हुई ऊष्मा की मात्रा का भी अनुमान लगाइए।

हल:

गोली का द्रव्यमान (m₁) = 0.012 kg

गोली का क्षैतिज वेग (u₁) = 70 m/s

लकड़ी के गुटके का द्रव्यमान (m₂) = 0.4 kg

प्रारंभ में लकड़ी के गुटके का वेग (u₂) = 0 m/s

माना गोली तथा लकड़ी के गुटके का संयुक्त वेग v है।

संवेग संरक्षण के नियम के अनुसार,

(गोली + गुटके) का संघट्ट से पहले रेखीय संवेग = (गोली + गुटके) का संघट्ट के बाद रेखीय संवेग

m₁u₁ + m₂u₂ = (m₁ + m₂)v

0.012 × 70 + 0.4 × 0 = (0.012 + 0.4)v

0.84 = 0.412v

v = 0.84 / 0.412 ≈ 2.04 m/s

माना लकड़ी का गुटका गोली के साथ h ऊँचाई तक उठता है।

ऊर्जा संरक्षण के नियमानुसार,

उच्चतम बिंदु पर (गोली + गुटके) की गतिज ऊर्जा = निम्नतम बिंदु पर (गोली + गुटके) की गतिज ऊर्जा

(m₁ + m₂)gh = ½ (m₁ + m₂)v²

gh = v²/2

h = v²/(2g)

h = (2.04)² / (2 × 9.8)

h = 4.1616 / 19.6 ≈ 0.212 m

गुटके में उत्पन्न ऊष्मा = गतिज ऊर्जा में कमी

= गोली की प्रारंभिक गतिज ऊर्जा - (गोली + गुटके) की अंतिम गतिज ऊर्जा

= ½ m₁u₁² - ½ (m₁ + m₂)v²

= ½ × 0.012 × (70)² - ½ × (0.412) × (2.04)²

= ½ × 0.012 × 4900 - ½ × 0.412 × 4.1616

= 29.4 - 0.857 ≈ 28.543 J

कैलोरी में ऊष्मा = 28.543 / 4.18 ≈ 6.83 cal

प्रश्न 25. दो घर्षणरहित आनत पथ, जिनमें से एक की ढाल अधिक है और दूसरे की ढाल कम है, बिन्दु 4 पर मिलते हैं। बिन्दु 4 से प्रत्येक पथ पर एक-एक पत्थर को विरामावस्था से नीचे सरकाया जाता है (चित्र)। क्या ये पत्थर एक ही समय पर नीचे पहुँचेंगे? क्या वे वहाँ एक ही चाल से पहुँचेंगे? व्याख्या कीजिए। यदि 6, 5 30९, 6, - 60" और # 10 7घ7 दिया है तो दोनों पत्थरों की चाल एवं उनके द्वारा नीचे पहुँचने में लिए गए समय क्‍या हैं?

हल:

माना AB तथा AC दो घर्षणरहित आनत तल हैं जो क्रमशः θ₁ (=30°) तथा θ₂ (=60°) कोण पर झुके हैं। AB उत्तरोत्तर पथ है तथा AC निम्नोत्तर पथ है।

माना दो समान द्रव्यमान m के दो पत्थर विरामावस्था से नीचे की ओर फिसलना आरम्भ करते हैं।

उत्तरोत्तर पथ (θ₁ = 30°)
निम्नोत्तर पथ (θ₂ = 60°)

प्रत्येक तल पर A बिंदु की ऊँचाई h = 10 m है।

ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांत के अनुसार, स्थितिज ऊर्जा में कमी = गतिज ऊर्जा में वृद्धि

पहले पत्थर के लिए, mgh = ½ mv₁² ⇒ v₁ = √(2gh)

दूसरे पत्थर के लिए, mgh = ½ mv₂² ⇒ v₂ = √(2gh)

अतः v₁ = v₂ = √(2gh)

इसलिए, दोनों पत्थर समान चाल से नीचे पहुँचेंगे।

अब, पत्थरों के त्वरण ज्ञात करते हैं।

पत्थर पर लगने वाला नेट बल = mg sinθ (घर्षण नहीं है)

त्वरण a = F/m = g sinθ

पहले पत्थर के लिए, a₁ = g sin30° = g × (1/2) = g/2

दूसरे पत्थर के लिए, a₂ = g sin60° = g × (√3/2) = (√3 g)/2

चूँकि sin60° > sin30°, इसलिए a₂ > a₁

गति की समीकरण से, v = u + at (u = 0)

v = a t ⇒ t = v / a

चूँकि दोनों का अंतिम वेग v समान है, इसलिए

t₁ = v / a₁ और t₂ = v / a₂

a₂ > a₁ होने के कारण, t₂ < t₁

अतः दूसरा पत्थर (60° ढाल वाला) पहले पत्थर (30° ढाल वाला) से कम समय में नीचे पहुँचेगा।

संख्यात्मक मान रखने पर:

g = 9.8 m/s², h = 10 m

दोनों की चाल v = √(2gh) = √(2 × 9.8 × 10) = √196 = 14 m/s

पहले पत्थर का समय t₁ = v / a₁ = 14 / (9.8/2) = 14 / 4.9 ≈ 2.86 s

दूसरे पत्थर का समय t₂ = v / a₂ = 14 / (9.8 × √3/2) = 14 / (9.8 × 0.866) ≈ 14 / 8.4868 ≈ 1.65 s

प्रश्न 26. किसी रूक्ष आनत तल पर रखा हुआ 1 ४४ द्रव्यमान का गुटका किसी 100 का स्प्रिंग नियतांक वाले स्थ्रिंग से दिए गए चित्र के अनुसार जुड़ा है। गुटके को स्थ्रिंग की बिना खिंची स्थिति में, विरामावस्था से छोड़ा जाता है। गुटका विरामावस्था में आने से पहले आनत तल पर 10 सेमी नीचे खिसक जाता है। गुटके और आनत तल के मध्य घर्षण गुणांक ज्ञात कीजिए। मान लीजिए कि स्प्रंग का द्रव्यमान उपेक्षणीय है और घिरनी घर्षणरहित है!

हल:

गुटके का द्रव्यमान (m) = 1 kg

स्प्रिंग नियतांक (k) = 100 N/m

गुटके द्वारा तय दूरी (x) = 10 cm = 0.1 m

आनत तल का कोण (θ) = 37°

गुरुत्वीय त्वरण (g) = 10 m/s²

गुटके पर कार्यरत बल:

  1. भार (mg) नीचे की ओर, जिसका आनत तल के अनुदिश घटक = mg sinθ
  2. स्प्रिंग का प्रत्यानयन बल (kx) ऊपर की ओर
  3. घर्षण बल (μR) ऊपर की ओर, जहाँ R = mg cosθ (अभिलंब प्रतिक्रिया)

गुटका जब 0.1 m नीचे खिसककर रुक जाता है, तब नेट बल शून्य होता है।

आनत तल के अनुदिश सन्तुलन की स्थिति में,

नीचे की ओर लगा बल = ऊपर की ओर लगा बल

mg sinθ = kx + μ mg cosθ

μ mg cosθ = mg sinθ - kx

μ = (mg sinθ - kx) / (mg cosθ)

मान रखने पर:

sin37° ≈ 0.6018, cos37° ≈ 0.7996

μ = (1 × 10 × 0.6018 - 100 × 0.1) / (1 × 10 × 0.7996)

μ = (6.018 - 10) / 7.996

μ = (-3.982) / 7.996 ≈ -0.498

ऋणात्मक चिह्न दर्शाता है कि हमारी धारणा (घर्षण बल ऊपर की ओर) सही है, और इसका परिमाण लगभग 0.498 है।

अतः घर्षण गुणांक μ ≈ 0.5

प्रश्न 27. 3 ४६ द्रव्यमान का कोई बोल्ट 7 छ४ की एकसमान चाल से नीचे आ रही किसी लिफ्ट की छत से गिरता है। यह लिफ्ट के फर्श से टकराता है (लिफ्ट की लम्बाई - 370) और वापस नहीं लौटता है। टक्कर द्वारा कितनी ऊष्मा उत्पन्न हुई? यदि लिफ्ट स्थिर होती तो क्या आपका उत्तर इससे भिन्‍न होता?

हल:

बोल्ट का द्रव्यमान (m) = 0.3 kg

लिफ्ट की लंबाई/ऊँचाई (h) = 3 m

चूँकि बोल्ट टकराने के बाद उछाल नहीं लेता, इसलिए बोल्ट की सम्पूर्ण स्थितिज ऊर्जा ऊष्मा में परिवर्तित हो जाती है।

उत्पन्न ऊष्मा (Q) = बोल्ट की प्रारंभिक स्थितिज ऊर्जा

Q = mgh

Q = 0.3 × 9.8 × 3

Q = 8.82 J

यदि लिफ्ट स्थिर होती, तब भी बोल्ट की छत के सापेक्ष प्रारंभिक ऊँचाई 3 m ही होती। गुरुत्वीय त्वरण सभी जड़त्वीय निर्देश तंत्रों (स्थिर लिफ्ट और एकसमान वेग से गतिमान लिफ्ट दोनों) में समान रहता है। इसलिए उत्पन्न ऊष्मा का मान वही 8.82 J रहेगा। उत्तर में कोई परिवर्तन नहीं होगा।

प्रश्न 28. 200 15४ द्रव्यमान की कोई ट्रॉली क्रिसी भर्षणरहित पथ पर 3617४ की एकसमान चाल से गतिमान है। 20 1 द्रव्यमान का कोई बच्चा ट्रॉली के एक सिरे से दूसरे सिरे तक (10 9 दूर) ट्रॉली के सापेक्ष 4 9४7 की चाल से ट्रॉली की गति की विपरीत दिशा में दौड़ता है और ट्रॉली से बाहर कूद जाता है। ट्रॉली की अन्तिम चाल क्या है? बच्चे के दौड़ना आरम्भ करने के समय से ट्रॉली ने कितनी दूरी तय की?

हल:

ट्रॉली का द्रव्यमान (M) = 200 kg

ट्रॉली की प्रारंभिक चाल (u) = 36 km/h = 36 × (5/18) = 10 m/s

बच्चे का द्रव्यमान (m) = 20 kg

बच्चे की ट्रॉली के सापेक्ष चाल = 4 m/s (ट्रॉली की गति के विपरीत)

बच्चे के दौड़ना शुरू करने से पहले निकाय (ट्रॉली+बच्चा) का प्रारंभिक संवेग:

Pi = (M + m)u = (200 + 20) × 10 = 2200 kg m/s

माना बच्चे के दौड़ने के बाद ट्रॉली का वेग v' है (जमीन के सापेक्ष)।

चूँकि बच्चा ट्रॉली के विपरीत दिशा में दौड़ रहा है, इसलिए जमीन के सापेक्ष बच्चे का वेग = v' - 4

निकाय का अंतिम संवेग:

Pf = Mv' + m(v' - 4) = 200v' + 20(v' - 4) = 220v' - 80

संवेग संरक्षण के नियम से, Pi = Pf

2200 = 220v' - 80

220v' = 2280

v' = 2280 / 220 = 10.36 m/s

ट्रॉली की अंतिम चाल ≈ 10.36 m/s

बच्चे द्वारा ट्रॉली पर 10 m दौड़ने में लगा समय:

बच्चे की ट्रॉली के सापेक्ष चाल = 4 m/s

समय (t) = दूरी / सापेक्ष चाल = 10 / 4 = 2.5 s

इस समय में ट्रॉली द्वारा तय की गई दूरी:

दूरी = ट्रॉली का वेग × समय = 10.36 × 2.5 = 25.9 m

ट्रॉली द्वारा तय दूरी ≈ 25.9 m

प्रश्न 29. नीचे दिए गए चित्रों में स्थितिज ऊर्जा बक्रों में से कौन-सा वक्र संभवत: दो बिलियर्ड-गेंदों के प्रत्यास्थ संघट्ट का वर्णन नहीं करेगा? यहाँ + गेंदों के केन्द्र

हल: (नोट: प्रश्न अधूरा प्रतीत होता है। सामान्यतः, दो बिलियर्ड गेंदों के पूर्ण प्रत्यास्थ संघट्ट में, जब गेंदें पास आती हैं तो स्थितिज ऊर्जा बढ़ती है (प्रतिकर्षण के कारण), और जब वे दूर जाती हैं तो स्थितिज ऊर्जा घटती है। स्थितिज ऊर्जा बनाम पृथक्करण दूरी का ग्राफ सममित (सymmetric) होना चाहिए, क्योंकि संघट्ट प्रत्यास्थ है और ऊर्जा संरक्षित रहती है। कोई भी ग्राफ जो सममित नहीं है या जिसमें ऊर्जा हानि दिखती है, वह प्रत्यास्थ संघट्ट का वर्णन नहीं करेगा। विशिष्ट विकल्पों के अभाव में, यह सामान्य स्पष्टीकरण दिया जा सकता है।)

प्रश्न 30. विरामावस्था में किसी मुक्त न्यूट्रॉन के क्षय पर विचार कीजिए n → p + e⁻। प्रदर्शित कीजिए कि इस प्रकार के द्विपिंड क्षय से नियत ऊर्जा का कोई इलेक्ट्रॉन अवश्य उत्सर्जित होना चाहिए और इसलिए यह किसी न्यूट्रॉन या किसी नाभिक के β-क्षय में प्रेक्षित सतत ऊर्जा वितरण का स्पष्टीकरण नहीं दे सकता।

हल: मुक्त न्यूट्रॉन का क्षय इस प्रकार होता है: n → p + e⁻

इस प्रक्रिया में ऊर्जा संरक्षण के नियम का पालन होना चाहिए। न्यूट्रॉन विरामावस्था में है, इसलिए इसकी प्रारंभिक गतिज ऊर्जा शून्य है।

माना न्यूट्रॉन का द्रव्यमान = mn, प्रोटॉन का द्रव्यमान = mp, इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान = me

द्रव्यमान क्षति (Δm) = mn - (mp + me)

यह द्रव्यमान क्षति, ऊर्जा (Q) में परिवर्तित होती है: Q = Δm.c²

यह ऊर्जा उत्पादों (प्रोटॉन और इलेक्ट्रॉन) की गतिज ऊर्जा के रूप में प्रकट होगी। संवेग संरक्षण के कारण, उत्पन्न प्रोटॉन और इलेक्ट्रॉन विपरीत दिशाओं में गति करेंगे और उनकी गतिज ऊर्जाओं का मान निश्चित (एकसमान) होगा।

इसका अर्थ है कि इस द्विपिंड क्षय से उत्सर्जित प्रत्येक इलेक्ट्रॉन की गतिज ऊर्जा हमेशा एक निश्चित मान (एकल रेखा) की होनी चाहिए।

लेकिन प्रयोगों में देखा गया है कि β-क्षय (न्यूट्रॉन या नाभिक के) से निकलने वाले इलेक्ट्रॉनों की ऊर्जा एक सतत वितरण (continuous spectrum) दिखाती है, शून्य से लेकर एक अधिकतम मान तक।

इस प्रकार, साधारण द्विपिंड क्षय (n → p + e⁻) प्रयोग में देखे गए सतत ऊर्जा वितरण की व्याख्या नहीं कर सकता। इस विसंगति को हल करने के लिए पॉली ने एक तीसरे कण, न्यूट्रिनो (ν), के अस्तित्व का प्रस्ताव रखा। सही क्षय प्रक्रिया है: n → p + e⁻ + νe (एंटीन्यूट्रिनो)। ऊर्जा अब तीन कणों में बँट जाती है, जिससे इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा का सतत वितरण संभव हो पाता है।

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