Bihar Board Class 11th Physics (भौतिक विज्ञान) Chapter 15 (तरंगें) Solutions
Bihar Board Class 11th Physics (भौतिक विज्ञान) Chapter 15 (तरंगें) Solutions
View the following solutions for Bihar Board Class 11th Physics (भौतिक विज्ञान) Chapter 15 (तरंगें). These solutions are available for viewing online.
1. तरंग क्या है? तरंग के विभिन्न प्रकारों के नाम लिखें।
एक तरंग एक विक्षोभ या कंपन है जो ऊर्जा को एक स्थान से दूसरे स्थान तक स्थानांतरित करती है, बिना पदार्थ के स्थायी स्थानांतरण के। तरंगें माध्यम के कणों के दोलन के कारण उत्पन्न होती हैं।
तरंगों के प्रमुख प्रकार:
- यांत्रिक तरंगें: इन्हें संचरण के लिए एक भौतिक माध्यम (जैसे वायु, जल, ठोस) की आवश्यकता होती है। उदाहरण: ध्वनि तरंगें, जल की तरंगें।
- विद्युत चुम्बकीय तरंगें: इन्हें संचरण के लिए किसी भौतिक माध्यम की आवश्यकता नहीं होती; ये निर्वात में भी चल सकती हैं। उदाहरण: प्रकाश, रेडियो तरंगें, एक्स-रे।
- अनुदैर्ध्य तरंगें: इनमें माध्यम के कणों का कंपन तरंग संचरण की दिशा के समानांतर होता है। उदाहरण: ध्वनि तरंगें।
- अनुप्रस्थ तरंगें: इनमें माध्यम के कणों का कंपन तरंग संचरण की दिशा के लंबवत होता है। उदाहरण: डोरी पर तरंग, प्रकाश तरंगें।
2. अनुदैर्ध्य तथा अनुप्रस्थ तरंगों में अंतर स्पष्ट करें।
| आधार | अनुदैर्ध्य तरंग | अनुप्रस्थ तरंग |
|---|---|---|
| कणों के कंपन की दिशा | माध्यम के कण तरंग संचरण की दिशा के समानांतर कंपन करते हैं। | माध्यम के कण तरंग संचरण की दिशा के लंबवत कंपन करते हैं। |
| उदाहरण | ध्वनि तरंगें, स्प्रिंग पर दबाव तरंग। | डोरी पर तरंग, प्रकाश तरंग, जल की सतह पर तरंग। |
| माध्यम | ठोस, द्रव और गैस तीनों में संचरित हो सकती हैं। | आमतौर पर केवल ठोस और द्रवों की सतह पर; गैसों में नहीं (क्योंकि गैसें अपरूपण प्रतिबल सहन नहीं कर सकतीं)। |
| तरंग रूप | संपीडन और विरलन के क्षेत्र बनते हैं। | शिखर (क्रेस्ट) और गर्त (ट्रफ) बनते हैं। |
| ध्रुवण | ध्रुवित नहीं की जा सकतीं। | ध्रुवित की जा सकती हैं। |
3. तरंगदैर्ध्य, आवृत्ति, आयाम तथा वेग को परिभाषित करें। इनके बीच संबंध लिखें।
परिभाषाएँ:
- तरंगदैर्ध्य (λ): तरंग में दो क्रमागत समान कला के बिंदुओं (जैसे दो शिखरों या दो गर्तों) के बीच की दूरी। इसका SI मात्रक मीटर (m) है।
- आवृत्ति (ν): एक सेकंड में किसी निश्चित बिंदु से गुजरने वाली पूर्ण तरंगों की संख्या। इसका SI मात्रक हर्ट्ज़ (Hz) है।
- आयाम (A): माध्यम के कण के माध्य स्थिति से अधिकतम विस्थापन। यह तरंग की तीव्रता से संबंधित है।
- वेग (v): वह दर जिससे तरंग का एक विशेष कला (जैसे शिखर) माध्यम में गति करता है। इसका SI मात्रक मीटर प्रति सेकंड (m/s) है।
संबंध: तरंग का वेग (v), उसकी आवृत्ति (ν) और तरंगदैर्ध्य (λ) का गुणनफल होता है।
v = ν × λ
बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)
1. अनुप्रस्थ तरंगें संचरित हो सकती हैं:
स्पष्टीकरण: सामान्यतः अनुप्रस्थ तरंगें केवल ठोसों और द्रवों में संचरित होती हैं क्योंकि इनमें अपरूपण प्रतिबल उत्पन्न होता है जिसे गैसें सहन नहीं कर पातीं। हालाँकि, विद्युत चुम्बकीय तरंगें (जो अनुप्रस्थ हैं) निर्वात सहित सभी माध्यमों में चल सकती हैं। दिए गए विकल्पों के संदर्भ में, सबसे उपयुक्त उत्तर (C) है, लेकिन प्रश्न के संदर्भ के अनुसार, यदि केवल यांत्रिक तरंगों की बात हो रही है तो (C) सही है।
2. ध्वनि तरंगें हैं:
स्पष्टीकरण: ध्वनि तरंगें यांत्रिक तरंगें हैं जिनमें माध्यम के कण संपीडन और विरलन बनाते हुए, तरंग संचरण की दिशा के समानांतर कंपन करते हैं। इसलिए ये अनुदैर्ध्य तरंगें होती हैं।
3. तरंग का वेग निर्भर करता है:
स्पष्टीकरण: किसी दिए गए माध्यम में तरंग का वेग उस माध्यम के भौतिक गुणों जैसे लोच (Elasticity) और जड़त्व (Inertia या घनत्व) पर निर्भर करता है। आवृत्ति स्रोत द्वारा निर्धारित होती है, और तरंगदैर्ध्य सूत्र v = νλ के द्वारा वेग और आवृत्ति से निकलती है।
4. निम्नलिखित में से कौन-सी विद्युत चुम्बकीय तरंग नहीं है?
स्पष्टीकरण: विद्युत चुम्बकीय तरंगें विद्युत और चुंबकीय क्षेत्रों के दोलन से बनती हैं और इन्हें संचरण के लिए माध्यम की आवश्यकता नहीं होती। एक्स-रे, पराबैंगनी किरणें और रेडियो तरंगें इसी के उदाहरण हैं। ध्वनि तरंगें यांत्रिक तरंगें हैं जिन्हें चलने के लिए एक भौतिक माध्यम (वायु, जल आदि) चाहिए।
कलान्तर कितना है जिनके बीच की दूरी है? (ale (4) 3/4
(a) 4m
(b) 0.5 m
दी गई समीकरण की मानक समीकरण से तुलना करने पर अज्ञात राशि ज्ञात की जा सकती है।
दी गई समीकरण:
y(x, t) = 2.0 cos(2π (10t – 0.0080x + 0.35))
= 2.0 cos(20πt – 0.016πx + 0.7π)
मानक समीकरण y(x, t) = A cos(ωt – kx + φ) से तुलना करने पर:
A = 2.0 cm, ω = 20π rad/s, k = 0.016π rad/cm, φ = 0.7π rad
कलान्तर Δφ = k Δx के सूत्र से ज्ञात किया जा सकता है।
(a) Δx = 4 m = 400 cm के लिए:
Δφ = k Δx = 0.016π × 400 = 6.4π rad
(b) Δx = 0.5 m = 50 cm के लिए:
Δφ = 0.016π × 50 = 0.8π rad
(c) Δx = 3λ/4 के लिए:
k = 2π/λ ⇒ Δφ = (2π/λ) × (3λ/4) = 3π/2 rad
(d) Δx = λ/2 के लिए:
Δφ = (2π/λ) × (λ/2) = π rad
प्रश्न 11. दोनों सिरों पर परिबद्ध किसी तानित डोरी पर अनुप्रस्थ विस्थापन को इस प्रकार व्यक्त किया गया है।
y(x, t) = 0.06 sin (2πx/3) cos(120πt)
जिसमें x तथा y को m तथा t को s में लिया गया है। इसमें डोरी की लम्बाई 1.5 m है जिसकी संहति 3.0 × 10⁻² kg है। निम्नलिखित का उत्तर दीजिए।
(a) यह फलन प्रगामी तरंग अथवा अप्रगामी तरंग में से किसे निरूपित करता है?
(b) इसकी व्याख्या विपरीत दिशाओं में गमन करती दो तरंगों के अध्यारोपण के रूप में करते हुए प्रत्येक तरंग की तरंगदैर्ध्य, आवृत्ति तथा चाल ज्ञात कीजिए।
(c) डोरी में तनाव ज्ञात कीजिए।
(a) दिया गया फलन y(x, t) = 0.06 sin(kx) cos(ωt) के रूप में है, जो अप्रगामी तरंग का मानक समीकरण है। अतः यह अप्रगामी तरंग को निरूपित करता है।
(b) इस अप्रगामी तरंग को दो विपरीत दिशाओं में चलने वाली प्रगामी तरंगों के अध्यारोपण के रूप में माना जा सकता है:
y₁ = 0.03 sin(ωt – kx) तथा y₂ = 0.03 sin(ωt + kx)
दिए गए समीकरण से:
k = 2π/3 rad/m ⇒ तरंगदैर्ध्य λ = 2π/k = 3 m
ω = 120π rad/s ⇒ आवृत्ति ν = ω/(2π) = 60 Hz
तरंग की चाल v = νλ = 60 × 3 = 180 m/s
(c) डोरी का रैखिक द्रव्यमान घनत्व μ = द्रव्यमान/लम्बाई = (3.0 × 10⁻² kg)/(1.5 m) = 2 × 10⁻² kg/m
तरंग की चाल v = √(T/μ) ⇒ T = v²μ
T = (180)² × (2 × 10⁻²) = 32400 × 0.02 = 648 N
प्रश्न 12. प्रश्न 11 में वर्णित डोरी पर तरंग के लिए बताइए कि क्या डोरी के सभी बिन्दु समान (a) आवृत्ति (b) कला (c) आयाम से कम्पन करते हैं? अपने उत्तरों को स्पष्ट कीजिए। (d) एक सिरे से 0.375 m दूर के बिन्दु का आयाम कितना है?
अप्रगामी तरंग में:
- आवृत्ति: डोरी के सभी बिन्दु (निस्पन्दों को छोड़कर) समान आवृत्ति से कम्पन करते हैं।
- कला: दो क्रमागत प्रस्पन्दों के बीच के सभी बिन्दु समान कला में कम्पन करते हैं, लेकिन एक प्रस्पन्द के दोनों ओर के बिन्दुओं की कला में π का अन्तर होता है।
- आयाम: सभी बिन्दुओं का आयाम समान नहीं होता। निस्पन्दों पर आयाम शून्य होता है तथा प्रस्पन्दों पर अधिकतम होता है।
(d) दिया गया समीकरण: y(x, t) = 0.06 sin(2πx/3) cos(120πt)
किसी बिन्दु का आयाम A(x) = 0.06 |sin(2πx/3)|
x = 0.375 m रखने पर:
A = 0.06 sin(2π × 0.375 / 3) = 0.06 sin(π/4) = 0.06 × (1/√2) ≈ 0.0424 m
प्रश्न 13. नीचे किसी प्रत्यास्थ तरंग (अनुप्रस्थ अथवा अनुदैर्ध्य) के विस्थापन को निरूपित करने वाले x तथा t के फलन दिए गए हैं। यह बताइए कि इनमें से कौन (a) प्रगामी तरंग को, (b) अप्रगामी तरंग को, (c) किसी भी तरंग को निरूपित नहीं करता है?
(a) y = 2 cos(3x) sin(10t)
(b) y = 2√(x – vt)
(c) y = 3 sin(5x – 0.5t) + 4 cos(5x – 0.5t)
(d) y = cos x sin t + cos 2x sin 2t
(a) y = 2 cos(3x) sin(10t) यह फलन अलग-अलग स्थानिक एवं कालिक पदों के गुणनफल के रूप में है, जो अप्रगामी तरंग का प्रतिनिधित्व करता है।
(b) y = 2√(x – vt) यह फलन (x – vt) के रूप में है, परन्तु √(x – vt) एक रैखिक फलन नहीं है और यह तरंग समीकरण को संतुष्ट नहीं करता। अतः यह किसी भी तरंग को निरूपित नहीं करता।
(c) y = 3 sin(5x – 0.5t) + 4 cos(5x – 0.5t) दोनों पद (5x – 0.5t) के रूप में हैं, अर्थात एक ही दिशा में चलने वाली प्रगामी तरंगों का योग है। अतः यह प्रगामी तरंग को निरूपित करता है।
(d) y = cos x sin t + cos 2x sin 2t यह दो अलग-अलग अप्रगामी तरंगों (cos x sin t तथा cos 2x sin 2t) का योग है। पूरा फलन स्वयं एक जटिल अप्रगामी तरंग को निरूपित करता है, इसलिए यह अप्रगामी तरंग को निरूपित करता है।
प्रश्न 14. दो दृढ़ टैंकों के बीच तानित तार अपनी मूल विधा में 45 Hz आवृत्ति से कम्पन करता है। इस तार का द्रव्यमान 3.5 × 10⁻² kg तथा रैखिक द्रव्यमान घनत्व 4.0 × 10⁻² kg/m है। (a) तार पर अनुप्रस्थ तरंग की चाल क्या है, तथा (b) तार में तनाव कितना है?
मूल अवस्था में, तार की लम्बाई L तरंगदैर्ध्य λ की आधी होती है: L = λ/2 ⇒ λ = 2L
पहले तार की लम्बाई ज्ञात करते हैं:
रैखिक द्रव्यमान घनत्व μ = 4.0 × 10⁻² kg/m, कुल द्रव्यमान m = 3.5 × 10⁻² kg
लम्बाई L = m/μ = (3.5 × 10⁻²) / (4.0 × 10⁻²) = 0.875 m
(a) तरंग की चाल v = νλ = ν × (2L) = 45 × (2 × 0.875) = 45 × 1.75 = 78.75 m/s
(b) तरंग की चाल v = √(T/μ) ⇒ T = v²μ
T = (78.75)² × (4.0 × 10⁻²) = 6201.5625 × 0.04 ≈ 248.06 N
प्रश्न 15. एक सिरे पर खुली तथा दूसरे सिरे पर चलायमान पिस्टन लगी 1 m लम्बी नलिका किसी नियत आवृत्ति के स्रोत (340 Hz आवृत्ति का स्वरित्र द्विभुज) के साथ, जब नलिका में वायु स्तम्भ 25.5 cm अथवा 79.3 cm होता है, तब अनुनाद दर्शाती है। प्रयोगशाला के ताप पर वायु में ध्वनि की चाल का आकलन कीजिए। कोर के प्रभाव को नगण्य मान सकते हैं।
यह एक बन्द ऑर्गन पाइप है। प्रथम अनुनाद की लम्बाई L₁ = 25.5 cm, द्वितीय अनुनाद की लम्बाई L₂ = 79.3 cm
बन्द ऑर्गन पाइप में, दो क्रमागत अनुनादों की लम्बाइयों का अन्तर λ/2 के बराबर होता है:
L₂ – L₁ = λ/2
λ = 2(L₂ – L₁) = 2(79.3 – 25.5) = 2 × 53.8 = 107.6 cm = 1.076 m
स्रोत की आवृत्ति ν = 340 Hz है।
ध्वनि की चाल v = νλ = 340 × 1.076 = 365.84 m/s
प्रश्न 16. 100 cm लम्बी स्टील-छड़ अपने मध्य बिन्दु पर परिबद्ध है। इसके अनुदैर्ध्य कम्पनों की मूल आवृत्ति 2.53 kHz है। स्टील में ध्वनि की चाल क्या है?
जब छड़ मध्य बिन्दु पर परिबद्ध (clamped) होती है, तो मध्य बिन्दु पर निस्पन्द तथा दोनों मुक्त सिरों पर प्रस्पन्द बनते हैं। मूल अवस्था में, छड़ की लम्बाई L तरंगदैर्ध्य λ की आधी होती है: L = λ/2 ⇒ λ = 2L
दिया है: L = 100 cm = 1 m, मूल आवृत्ति ν = 2.53 kHz = 2530 Hz
ध्वनि की चाल v = νλ = ν × (2L) = 2530 × (2 × 1) = 2530 × 2 = 5060 m/s = 5.06 km/s
प्रश्न 17. 20 cm लम्बाई के पाइप का एक सिरा बन्द है। 430 Hz आवृत्ति का कोई स्रोत बन्द सिरे के पास वायु स्तम्भ की कौन-सी गुणावृत्ति विधा अनुनाद द्वारा उत्तेजित की जाती है? यदि इस पाइप के दोनों सिरे खुले हों तो भी क्या यह स्रोत इस पाइप के साथ अनुनाद करेगा? वायु में ध्वनि की चाल 340 m/s है।
स्थिति 1: एक सिरा बन्द पाइप
पाइप की लम्बाई L = 20 cm = 0.2 m, ध्वनि की चाल v = 340 m/s
बन्द ऑर्गन पाइप की मूल आवृत्ति (प्रथम सन्नादी) ν₁ = v/(4L) = 340/(4 × 0.2) = 340/0.8 = 425 Hz
बन्द पाइप में केवल विषम गुणज की आवृत्तियाँ होती हैं: νₙ = nν₁, जहाँ n = 1, 3, 5, ...
स्रोत की आवृत्ति = 430 Hz
n = 1 के लिए ν₁ = 425 Hz, n = 3 के लिए ν₃ = 3 × 425 = 1275 Hz
430 Hz, 425 Hz के काफी निकट है, अतः यह मूल आवृत्ति (n=1) के साथ ही अनुनाद करेगी।
स्थिति 2: दोनों सिरे खुले पाइप
खुले ऑर्गन पाइप की मूल आवृत्ति ν₁' = v/(2L) = 340/(2 × 0.2) = 340/0.4 = 850 Hz
खुले पाइप में सभी गुणज (n = 1, 2, 3, ...) संभव हैं।
स्रोत की आवृत्ति 430 Hz, मूल आवृत्ति 850 Hz से बहुत कम है तथा इसका कोई पूर्ण गुणज नहीं है। अतः खुले पाइप के साथ अनुनाद नहीं होगा।
प्रश्न 18. सितार की दो डोरियाँ A तथा B एक साथ ‘गा’ स्वर बजा रही हैं तथा थोड़ी सी बेसुरी होने के कारण 6 Hz आवृत्ति के विस्पन्द उत्पन्न कर रही हैं। डोरी A का तनाव कुछ घटाने पर विस्पन्द की आवृत्ति घटकर 3 Hz रह जाती है। यदि A की मूल आवृत्ति 324 Hz है तो B की आवृत्ति क्या है?
माना डोरी A की आवृत्ति ν_A = 324 Hz, डोरी B की आवृत्ति ν_B है।
विस्पन्द आवृत्ति = |ν_A – ν_B| = 6 Hz
अतः दो संभावनाएँ हैं:
स्थिति 1: ν_B = ν_A + 6 = 324 + 6 = 330 Hz
स्थिति 2: ν_B = ν_A – 6 = 324 – 6 = 318 Hz
जब डोरी A का तनाव घटाया जाता है, तो उसकी आवृत्ति भी घटती है (क्योंकि आवृत्ति ∝ √(तनाव))।
यदि ν_B = 330 Hz हो, तो तनाव घटाने पर ν_A घटकर 324 से कम हो जाएगी, जिससे ν_A और ν_B के बीच का अन्तर 6 Hz से बढ़ जाएगा। परन्तु प्रश्नानुसार विस्पन्द आवृत्ति घटकर 3 Hz हो जाती है।
यदि ν_B = 318 Hz हो, तो तनाव घटाने पर ν_A घटेगी, जिससे ν_A और ν_B (318 Hz) के बीच का अन्तर 6 Hz से घटकर 3 Hz हो सकता है।
अतः सही संभावना है: ν_B = 318 Hz
प्रश्न 19. स्पष्ट कीजिए क्यों (अथवा कैसे)
(a) किसी ध्वनि तरंग में विस्थापन निस्पन्द दाब प्रस्पन्द होता है और विस्थापन प्रस्पन्द दाब निस्पन्द होता है?
(b) आँख न होने पर भी चमगादड़ अवरोधकों की दूरी, दिशा, प्रकृति तथा आकार सुनिश्चित कर लेते हैं?
(c) वायलिन तथा सितार के स्वरों की आवृत्तियाँ समान होने पर भी हम दोनों से उत्पन्न स्वरों में भेद कर लेते हैं?
(d) ठोस अनुदैर्ध्य तथा अनुप्रस्थ दोनों प्रकार की तरंगों का पोषण कर सकते हैं जबकि गैसों में केवल अनुदैर्ध्य तरंगें ही संचरित हो सकती हैं, तथा
(e) परिक्षेपी माध्यम में संचरण के समय स्पन्द की आकृति विकृत हो जाती है?
(a) ध्वनि तरंग में विस्थापन और दाब में 90° का कलान्तर होता है। जहाँ विस्थापन शून्य (निस्पन्द) होता है, वहाँ वायु के कण अधिकतम संपीडन और विरलन से गुजरते हैं, जिससे दाब में अधिकतम परिवर्तन (प्रस्पन्द) होता है। इसके विपरीत, जहाँ विस्थापन अधिकतम (प्रस्पन्द) होता है, वहाँ कण एक स्थान से दूसरे स्थान तक गति करते हैं लेकिन संपीडन-विरलन न्यूनतम होता है, अतः दाब में परिवर्तन भी न्यूनतम (निस्पन्द) होता है।
(b) चमगादड़ पराश्रव्य ध्वनि तरंगें (लगभग 20 kHz से 100 kHz) उत्सर्जित करते हैं। ये तरंगें रास्ते में आने वाली वस्तुओं से टकराकर परावर्तित होती हैं। चमगादड़ इन परावर्तित तरंगों (प्रतिध्वनि) का समय, तीव्रता और दिशा का विश्लेषण करके वस्तु की दूरी, दिशा, आकार और यहाँ तक कि उसकी गति का भी पता लगा लेते हैं। यह प्रक्रिया इकोलोकेशन (प्रतिध्वनि स्थान निर्धारण) कहलाती है।
(c) यद्यपि वायलिन और सितार का मूल स्वर (आवृत्ति) समान हो सकता है, लेकिन दोनों वाद्यों द्वारा उत्पन्न ध्वनि की गुणवत्ता या तान (टिम्बर) भिन्न होती है। तान वाद्य के अधिस्वरकों (हार्मोनिक्स) के सापेक्षिक प्रबलता और उनके संयोजन पर निर्भर करती है। प्रत्येक वाद्य यंत्र की विशिष्ट बनावट और ध्वनि उत्पन्न करने की विधि के कारण अलग-अलग अधिस्वरक प्रबल होते हैं, जिससे हम उनकी ध्वनि में अंतर पहचान लेते हैं।
(d) अनुप्रस्थ तरंगों के संचरण के लिए माध्यम में अपरूपण प्रत्यास्थता (शियर एलास्टिसिटी) का गुण होना आवश्यक है। ठोस पदार्थों में आणविक बल मजबूत होते हैं, जिससे वे आकार बदलने का प्रतिरोध करते हैं और अपरूपण प्रत्यास्थता रखते हैं। इसलिए ठोस में अनुप्रस्थ तरंगें (जैसे डोरी पर तरंग) संचरित हो सकती हैं। दूसरी ओर, गैसों और द्रवों में अपरूपण प्रत्यास्थता नहीं होती, वे आसानी से फिसल जाते हैं। इसलिए इनमें केवल अनुदैर्ध्य तरंगें (संपीडन-विरलन) ही संचरित हो पाती हैं।
(e) एक स्पन्द विभिन्न आवृत्तियों वाली तरंगों का मिश्रण होता है। परिक्षेपी माध्यम में, भिन्न-भिन्न आवृत्तियों की तरंगें भिन्न-भिन्न चाल से चलती हैं। जब स्पन्द ऐसे माध्यम में यात्रा करता है, तो उसके विभिन्न आवृत्ति घटक अलग-अलग गति से आगे बढ़ते हैं। इससे स्पन्द के आकार में विरूपण (फैलाव या विकृति) आ जाता है, क्योंकि उसके घटक एक-दूसरे से अलग हो जाते हैं।
प्रश्न 20. रेलवे स्टेशन के बाह्य सिग्नल पर खड़ी कोई रेलगाड़ी शान्त वायु में 400 Hz आवृत्ति की सीटी बजाती है। (a) प्लेटफॉर्म पर खड़े प्रेक्षक के लिए सीटी की आवृत्ति क्या होगी जबकि रेलगाड़ी (i) 10 m/s चाल से प्लेटफॉर्म की ओर गतिशील है तथा (ii) 10 m/s की चाल से प्लेटफॉर्म से दूर जा रही है? (b) दोनों ही प्रकरणों में ध्वनि की चाल क्या है? शांत वायु में ध्वनि की चाल 340 m/s लीजिए।
दिया है:
स्रोत की वास्तविक आवृत्ति, ν₀ = 400 Hz
ध्वनि की चाल, v = 340 m/s
स्रोत (ट्रेन) की चाल, vₛ = 10 m/s
श्रोता (प्रेक्षक) स्थिर है, अतः vₒ = 0
(a) डॉप्लर प्रभाव के सूत्र का उपयोग:
श्रोता द्वारा सुनी गई आभासी आवृत्ति, ν' = ν₀ [ v / (v ∓ vₛ) ]
(ऊपरी चिह्न तब, जब स्रोत श्रोता से दूर जा रहा हो; निचला चिह्न तब, जब स्रोत श्रोता की ओर आ रहा हो।)
(i) जब रेलगाड़ी प्लेटफॉर्म की ओर आ रही है:
ν' = ν₀ [ v / (v - vₛ) ]
ν' = 400 [ 340 / (340 - 10) ]
ν' = 400 [ 340 / 330 ]
ν' = 400 × 1.0303
ν' ≈ 412.12 Hz
(ii) जब रेलगाड़ी प्लेटफॉर्म से दूर जा रही है:
ν' = ν₀ [ v / (v + vₛ) ]
ν' = 400 [ 340 / (340 + 10) ]
ν' = 400 [ 340 / 350 ]
ν' = 400 × 0.9714
ν' ≈ 388.57 Hz
(b) ध्वनि की चाल माध्यम (वायु) के गुणों पर निर्भर करती है। दोनों ही स्थितियों में माध्यम (वायु) समान है और उसके गुणों में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है। इसलिए दोनों प्रकरणों में ध्वनि की चाल 340 m/s ही रहेगी।
प्रश्न 21. स्टेशन यार्ड में खड़ी कोई रेलगाड़ी शान्त वायु में 400 Hz आवृत्ति की सीटी बजा रही है। तभी 10 m/s चाल से यार्ड से स्टेशन की ओर वायु बहने लगती है। स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर खड़े किसी प्रेक्षक के लिए ध्वनि की आवृत्ति, तरंगदैर्ध्य तथा चाल क्या हैं? क्या यह स्थिति तथ्यतः उस स्थिति के समरूप है जिसमें वायु शान्त हो तथा प्रेक्षक 10 m/s चाल से यार्ड की ओर दौड़ रहा हो? शान्त वायु में ध्वनि की चाल 340 m/s ले सकते हैं।
स्थिति 1: वायु 10 m/s की चाल से श्रोता (प्रेक्षक) की ओर बह रही है।
स्रोत (ट्रेन) और श्रोता दोनों स्थिर हैं। केवल माध्यम (वायु) गतिशील है।
जब माध्यम गतिशील होता है, तो ध्वनि की प्रभावी चाल बदल जाती है, लेकिन आवृत्ति नहीं बदलती क्योंकि स्रोत और श्रोता के बीच सापेक्ष गति नहीं है।
- ध्वनि की प्रभावी चाल: v' = v + vwind = 340 + 10 = 350 m/s
- आवृत्ति: श्रोता द्वारा सुनी गई आवृत्ति स्रोत की आवृत्ति के बराबर होगी, अर्थात ν' = 400 Hz.
- तरंगदैर्ध्य: λ' = v' / ν' = 350 / 400 = 0.875 m
स्थिति 2: वायु शांत है और श्रोता 10 m/s की चाल से स्रोत (ट्रेन) की ओर दौड़ रहा है।
इस स्थिति में स्रोत और श्रोता के बीच सापेक्ष गति है, इसलिए डॉप्लर प्रभाव लागू होगा।
v = 340 m/s, vₛ = 0 (स्रोत स्थिर), vₒ = 10 m/s (श्रोता स्रोत की ओर गतिमान)
डॉप्लर सूत्र: ν'' = ν₀ [ (v + vₒ) / v ]
ν'' = 400 [ (340 + 10) / 340 ]
ν'' = 400 [ 350 / 340 ]
ν'' = 400 × 1.0294
ν'' ≈ 411.76 Hz
- आवृत्ति: ≈ 411.76 Hz
- तरंगदैर्ध्य: स्रोत स्थिर है, इसलिए माध्यम में उत्सर्जित तरंगदैर्ध्य नहीं बदलती। λ = v / ν₀ = 340/400 = 0.85 m
- ध्वनि की चाल: माध्यम के सापेक्ष श्रोता की गति के कारण, श्रोता के लिए ध्वनि की आपेक्षिक चाल v + vₒ = 340 + 10 = 350 m/s होगी।
तुलना: दोनों स्थितियों में प्रेक्षक द्वारा मापी गई आवृत्ति और तरंगदैर्ध्य भिन्न हैं। पहली स्थिति में आवृत्ति 400 Hz है, जबकि दूसरी में 411.76 Hz है। इस प्रकार, ये दोनों स्थितियाँ समरूप नहीं हैं। पहली स्थिति में केवल माध्यम गतिशील है, जबकि दूसरी में श्रोता गतिशील है जिससे डॉप्लर प्रभाव उत्पन्न होता है।
प्रश्न 22. किसी डोरी पर कोई प्रगामी गुणावृत्ति तरंग इस प्रकार व्यक्त की गई है? y(x, t) = 7.5 sin (0.0050x + 12t + π/4) (a) x=1.0 cm तथा t=1s पर किसी बिन्दु का विस्थापन तथा दोलन की चाल ज्ञात कीजिए। क्या यह चाल तरंग-संचरण की चाल के बराबर है? (b) डोरी के उन बिन्दुओं की अवस्थिति ज्ञात कीजिए जिनका अनुप्रस्थ विस्थापन तथा चाल उतनी ही है जितनी x=1.0 cm पर स्थित बिन्दु की समय t=2s, 5s तथा 11s पर है।
दी गई तरंग समीकरण: y(x, t) = 7.5 sin (0.0050x + 12t + π/4)
इसकी तुलना मानक प्रगामी तरंग समीकरण y = a sin(kx + ωt + φ) से करने पर:
आयाम, a = 7.5 cm
कोणीय तरंग संख्या, k = 0.0050 rad/cm
कोणीय आवृत्ति, ω = 12 rad/s
प्रारम्भिक कला, φ = π/4 rad
(a) x = 1.0 cm, t = 1s पर:
- विस्थापन (y):
y(1, 1) = 7.5 sin(0.0050×1 + 12×1 + π/4)
= 7.5 sin(0.005 + 12 + 0.7854)
= 7.5 sin(12.7904 rad)
चूँकि 12.7904 rad = 732.8° (लगभग)
sin(732.8°) = sin(732.8° - 720°) = sin(12.8°) ≈ 0.2215
अतः y(1, 1) = 7.5 × 0.2215 ≈ 1.661 cm - दोलन की चाल (vp):
किसी कण का वेग, vp = ∂y/∂t = aω cos(kx + ωt + φ)
vp = 7.5 × 12 × cos(12.7904 rad)
cos(12.7904 rad) = cos(732.8°) = cos(12.8°) ≈ 0.975
अतः vp = 90 × 0.975 ≈ 87.75 cm/s - तरंग संचरण की चाल (v):
v = ω / k = 12 / 0.0050 = 2400 cm/s = 24 m/s
स्पष्ट है कि कण का दोलन वेग (87.75 cm/s) तरंग संचरण के वेग (2400 cm/s) के बराबर नहीं है। तरंग वेग ऊर्जा के स्थानांतरण की चाल है, जबकि कण का वेग उसकी सरल आवर्त गति की चाल है।
(b) तरंग गुणावृत्ति है, अतः प्रत्येक तरंगदैर्ध्य पर स्थित वे सभी बिन्दु जिनके बीच कलान्तर 2π का पूर्ण गुणज है, समान विस्थापन और वेग रखेंगे।
तरंगदैर्ध्य, λ = 2π/k = 2π / 0.0050 ≈ 1256 cm = 12.56 m
x = 1.0 cm पर बिन्दु की कला, Φ = (0.0050×1 + 12t + π/4) है।
अन्य बिन्दुओं की स्थिति ज्ञात करने के लिए, हमें उन बिन्दुओं के x-निर्देशांक ज्ञात करने हैं जहाँ कला, मूल बिन्दु की कला के समान है या 2π, 4π, ... के अंतर से भिन्न है। चूँकि तरंग समय के साथ गतिमान है, x=1.0 cm पर बिन्दु की कला समय t=2s, 5s, 11s पर अलग-अलग होगी। इसलिए, उन बिन्दुओं की स्थिति भी अलग-अलग होगी जो उस क्षण उसी अवस्था में हैं।
सामान्य रूप से, यदि किसी क्षण t पर बिन्दु x₁ पर कला Φ₁ है, तो वही कला किसी अन्य बिन्दु x₂ पर होगी यदि k(x₂ - x₁) = 2nπ, जहाँ n एक पूर्णांक है।
अतः x₂ = x₁ + nλ
चूँकि λ = 1256 cm और x₁ = 1.0 cm है।
इसलिए, वे बिन्दु जिनका विस्थापन और चाल x=1.0 cm वाले बिन्दु के समान है, निम्नलिखित स्थितियों पर होंगे:
x ≈ 1 cm, 1257 cm, 2513 cm, 3769 cm, ... (अर्थात 1 cm + n × 1256 cm)
प्रश्न 23. ध्वनि का कोई सीमित स्पन्द (उदाहरणार्थ सीटी की 'पिप') माध्यम में भेजा जाता है। (a) क्या इस स्पन्द की कोई निश्चित (i) आवृत्ति, (ii) तरंगदैर्घ्य, (iii) संचरण की चाल है? (b) यदि स्पन्द दर 1 स्पन्द प्रति 20 सेकण्ड है अर्थात् सीटी प्रत्येक 20 s के पश्चात् सेकण्ड के कुछ अंश के लिए बजती है, तो क्या सीटी द्वारा उत्पन्न स्वर की आवृत्ति (1/20) Hz अथवा 0.05 Hz के बराबर होगी?
(a) एक स्पन्द एक अकेला संकुचित विक्षोभ है जो माध्यम में यात्रा करता है।
- आवृत्ति: एक एकल स्पन्द की कोई निश्चित, एकल आवृत्ति नहीं होती। यह विभिन्न आवृत्तियों के सुपरपोजिशन (अध्यारोपण) से बना होता है। हालाँकि, यदि स्पन्द बहुत संकीर्ण है, तो उसका आवृत्ति स्पेक्ट्रम बहुत चौड़ा होता है।
- तरंगदैर्घ्य: चूँकि कोई एकल आवृत्ति नहीं है, इसलिए एक निश्चित तरंगदैर्घ्य भी परिभाषित नहीं किया जा सकता।
- संचरण की चाल: हाँ, स्पन्द की संचरण चाल निश्चित होती है। यह चाल उस माध्यम के गुणों पर निर्भर करती है जिसमें स्पन्द यात्रा कर रहा है। उदाहरण के लिए, वायु में ध्वनि स्पन्द की चाल लगभग 340 m/s होगी।
(b) नहीं, 0.05 Hz (1/20 Hz) स्पन्दों की पुनरावृत्ति दर है, न कि स्पन्द स्वयं की आवृत्ति। यह बताता है कि स्पन्द हर 20 सेकंड में एक बार उत्पन्न हो रहा है। स्पन्द के अंदर की ध्वनि (जैसे सीटी की 'पिप') की वास्तविक आवृत्ति बहुत अधिक (श्रव्य परास में, जैसे कि 1000 Hz या अधिक) हो सकती है। पुनरावृत्ति दर और ध्वनि की आवृत्ति दो अलग-अलग अवधारणाएँ हैं।
प्रश्न 24. 8.0 × 10⁻³ kg/m रैखिक द्रव्यमान घनत्व की किसी लम्बी डोरी का एक सिरा 256 Hz आवृत्ति के विद्युत चालित स्वरित्र द्विभुज से जुड़ा है। डोरी का दूसरा सिरा किसी स्थिर घिरनी के ऊपर गुजरता हुआ किसी तुला के पलड़े से बंधा है जिस पर 90 kg के बाट लटके हैं। घिरनी वाला सिरा सारी आवक ऊर्जा को अवशोषित कर लेता है जिसके कारण इस सिरे से परावर्तित तरंगों का आयाम नगण्य होता है। t = 0 पर डोरी के बाएँ सिरे (द्विभुज वाले सिरे) x = 0 पर अनुप्रस्थ विस्थापन y = 0 है तथा धनात्मक x-दिशा की ओर गति कर रहा है। इस सिरे पर अनुप्रस्थ विस्थापन y को इस प्रकार व्यक्त किया गया है- y (x, t) = a sin (ωt - kx)। तरंग के अन्य पैरामीटर a, ω, k ज्ञात कीजिए।
दिया है:
डोरी का रैखिक द्रव्यमान घनत्व, μ = 8.0 × 10⁻³ kg/m
आवृत्ति, ν = 256 Hz
लटकाया गया द्रव्यमान, M = 90 kg
गुरुत्वीय त्वरण, g = 9.8 m/s² मानते हैं।
तरंग समीकरण: y(x, t) = a sin(ωt - kx)
चरणबद्ध हल:
- डोरी में तनाव (T) ज्ञात करना:
तनाव लटके हुए भार के वजन के बराबर होगा।
T = Mg = 90 × 9.8 = 882 N - डोरी में तरंग की चाल (v) ज्ञात करना:
v = √(T/μ) = √(882 / (8.0 × 10⁻³))
v = √(110250) ≈ 332.04 m/s - कोणीय आवृत्ति (ω) ज्ञात करना:
ω = 2πν = 2 × π × 256
ω ≈ 1608.5 rad/s - तरंग संख्या (k) ज्ञात करना:
k = ω / v = 1608.5 / 332.04
k ≈ 4.84 rad/m - आयाम (a) ज्ञात करना:
प्रश्न में आयाम 'a' का मान सीधे नहीं दिया गया है। आयाम स्रोत (द्विभुज) के कंपन के आयाम और ऊर्जा हस्तांतरण की दक्षता पर निर्भर करता है। चूँकि यह मान दिया नहीं गया है, हम इसे प्रतीक 'a' ही रहने देते हैं। आमतौर पर ऐसे प्रयोगों में, आयाम छोटा होता है और इसे द्विभुज के कंपन आयाम से निर्धारित किया जाता है।
अतः अभीष्ट पैरामीटर हैं:
a = a (स्रोत द्वारा निर्धारित आयाम)
ω ≈ 1608.5 rad/s
k ≈ 4.84 rad/m
४-0 पर अनुप्रस्थ विस्थापन शून्य है (/-0) तथा वह » की धनात्मक दिशा के अनुदिश गतिशील है। तरंग का आयाम 5.0 ८॥ है। डोरी पर इस तरंग का वर्णन करने वाले अनुप्रस्थ विस्थापन »को »तथा £ के फलन के रूप में लिखिए।
तरंग x-अक्ष की धनात्मक दिशा में गतिमान है। चूँकि दिया गया है कि t=0 पर विस्थापन y=0 है और कण धनात्मक दिशा में गतिशील है, इसलिए तरंग फलन ज्या (sine) फलन के रूप में होगा।
आयाम, a = 5.0 cm = 0.05 m
आवृत्ति, ν = 256 Hz
डोरी में तनाव, T = 90 × 9.8 = 882 N
डोरी का द्रव्यमान, m = 0.06 kg
डोरी की लंबाई, L = 2 m
डोरी का रैखिक द्रव्यमान घनत्व, μ = m/L = 0.06/2 = 0.03 kg/m
अनुप्रस्थ तरंग का वेग, v = √(T/μ) = √(882 / 0.03) = √(29400) ≈ 171.46 m/s
कोणीय आवृत्ति, ω = 2πν = 2 × 3.14 × 256 ≈ 1607.68 rad/s ≈ 1.608 × 10³ rad/s
तरंग संख्या, k = ω/v = (1607.68) / (171.46) ≈ 9.38 rad/m
अतः, तरंग का समीकरण है:
y(x, t) = 0.05 sin(1.608 × 10³ t - 9.38 x) मीटर
प्रश्न 25. किसी पनडुब्बी के आबद्ध कोई 'सोनार' निकाय 40.0 ४2 आवृत्ति पर प्रचालन करता है। कोई शत्नु-पनडुब्बी 360 &71// चाल से इस सोनार की ओर गति करती है। पनडुब्बी से परावर्तित ध्वनि की आवृत्ति क्या है? जल में ध्वनि की चाल 1450 ४/७ लीजिए।
यह एक डॉप्लर प्रभाव से संबंधित प्रश्न है। इसे दो चरणों में हल किया जाता है: पहले, शत्रु पनडुब्बी द्वारा ग्रहण की गई आवृत्ति, और फिर उसी पनडुब्बी से परावर्तित होकर सोनार तक वापस आने वाली आवृत्ति।
दिया है:
सोनार की आवृत्ति, ν₀ = 40.0 kHz = 40 × 10³ Hz
शत्रु पनडुब्बी की चाल, vₛ = 360 km/h = (360 × 1000) / 3600 = 100 m/s
जल में ध्वनि की चाल, v = 1450 m/s
चरण 1: शत्रु पनडुब्बी द्वारा ग्रहण की गई आवृत्ति (ν')
यहाँ स्रोत (सोनार) स्थिर है और प्रेक्षक (पनडुब्बी) गतिमान है। प्रेक्षक स्रोत की ओर बढ़ रहा है।
ν' = ν₀ [(v + vₛ) / v] = 40 × 10³ × [(1450 + 100) / 1450]
ν' = 40000 × [1550 / 1450] = 40000 × 1.06897 ≈ 42759 Hz ≈ 42.76 kHz
चरण 2: परावर्तित ध्वनि की आवृत्ति (ν'')
अब शत्रु पनडुब्बी एक नया स्रोत बन जाती है जो आवृत्ति ν' के साथ ध्वनि उत्सर्जित करती है। यह स्रोत (पनडुब्बी) गतिमान है और प्रेक्षक (मूल सोनार) स्थिर है। स्रोत प्रेक्षक की ओर बढ़ रहा है।
ν'' = ν' [v / (v - vₛ)] = 42759 × [1450 / (1450 - 100)]
ν'' = 42759 × [1450 / 1350] = 42759 × 1.07407 ≈ 45930 Hz ≈ 45.93 kHz
अतः, पनडुब्बी से परावर्तित होकर सोनार तक पहुँचने वाली ध्वनि की आवृत्ति लगभग 45.93 kHz होगी।
प्रश्न 26. भूकम्प पृथ्वी के भीतर तरंगें उत्पन्न करते हैं। गैसों के विपरीत, पृथ्वी अनुप्रस्थ (5) तथा अनुदैर्घ्य (70) दोनों प्रकार की तरंगों की अनुभूति कर सकती है। 5 तरंगों की प्रतिरूपी चाल लगभग 4.0 ४18, तथा 2 तरंगों की प्रतिरूपी चाल लगभग 8.0 ॥॥/8 है। कोई भूकम्प-लेखी किसी भूकम्प की 2 तथा 5 तरंगों का रिकॉर्ड करता है। पहली 2 तरंग पहली Ss तरंग की तुलना में 4 मिनट पहले पहुँचती है। यह मानते हुए कि तरंगें सरल रेखा में गमन करती हैं यह ज्ञात कीजिए कि भूकम्प घटित होने वाले स्थान की दूरी क्या है?
माना भूकम्प के केंद्र (स्रोत) से संसूचक (भूकम्प-लेखी) की दूरी D है।
दिया है:
P-तरंग की चाल, vₚ = 8.0 km/s = 8000 m/s
S-तरंग की चाल, vₛ = 4.0 km/s = 4000 m/s
P-तरंग और S-तरंग के आने के समय में अंतर, tₛ - tₚ = 4 मिनट = 4 × 60 = 240 सेकंड
दूरी = चाल × समय
P-तरंग के लिए: D = vₚ × tₚ
S-तरंग के लिए: D = vₛ × tₛ
चूँकि दूरी समान है,
vₚ tₚ = vₛ tₛ
8000 × tₚ = 4000 × tₛ
इससे प्राप्त होता है: tₛ = 2 tₚ
अब, दिए गए समय के अंतर में रखने पर:
tₛ - tₚ = 240
2 tₚ - tₚ = 240
tₚ = 240 सेकंड
अतः, भूकम्प केंद्र की दूरी:
D = vₚ × tₚ = 8000 m/s × 240 s = 1,920,000 m = 1920 km
भूकम्प घटित होने वाले स्थान की संसूचक से दूरी 1920 किलोमीटर है।
प्रश्न 27. कोई चमगादड़ किसी गुफा में फड़फड़ाते हुए पराश्रव्य ध्वनि उत्पन्न करते हुए उड़ रहा है। मान लीजिए चमगादड़ द्वारा उत्सर्जित ध्वनि की आवृत्ति 40 :प० है। किसी दीवार की ओर सीधा तीत्र झपट्टा मारते समय चमगादड़ की चाल ध्वनि की चाल की 0.08 गुनी है। चमगादड़ द्वारा सुनी गई दीवार से परावर्तित ध्वनि की आवृत्ति क्या है?
यह भी डॉप्लर प्रभाव का प्रश्न है। इसमें चमगादड़ स्वयं ध्वनि का स्रोत और प्रेक्षक दोनों है।
दिया है:
चमगादड़ द्वारा उत्सर्जित ध्वनि की आवृत्ति, ν₀ = 40 kHz = 40000 Hz
चमगादड़ की चाल, v₆ = 0.08 v (जहाँ v ध्वनि की चाल है)
चरण 1: दीवार द्वारा ग्रहण की गई आवृत्ति (ν')
यहाँ स्रोत (चमगादड़) गतिमान है और प्रेक्षक (दीवार) स्थिर है। स्रोत प्रेक्षक की ओर बढ़ रहा है।
ν' = ν₀ [v / (v - v₆)] = 40000 × [v / (v - 0.08v)]
ν' = 40000 × [v / (0.92v)] = 40000 × (1 / 0.92)
ν' ≈ 40000 × 1.08696 ≈ 43478 Hz
चरण 2: परावर्तित ध्वनि की आवृत्ति (ν'') जो चमगादड़ सुनता है
अब दीवार स्थिर स्रोत बन जाती है जो आवृत्ति ν' की ध्वनि परावर्तित करती है। प्रेक्षक (चमगादड़) इस स्रोत की ओर गतिमान है।
ν'' = ν' [(v + v₆) / v] = 43478 × [(v + 0.08v) / v]
ν'' = 43478 × [1.08v / v] = 43478 × 1.08
ν'' ≈ 46956 Hz ≈ 46.96 kHz
वैकल्पिक रूप से, दोनों चरणों को एक सूत्र में मिलाकर भी हल किया जा सकता है:
ν'' = ν₀ × [(v + v₆) / (v - v₆)] = 40000 × [(1 + 0.08) / (1 - 0.08)]
ν'' = 40000 × [1.08 / 0.92] = 40000 × 1.1739 ≈ 46956 Hz
अतः, चमगादड़ द्वारा सुनी गई दीवार से परावर्तित ध्वनि की आवृत्ति लगभग 46.96 kHz होगी।
Our Bihar Board Class 11th Physics (भौतिक विज्ञान) Chapter 15 (तरंगें) Solutions section provides clear, step-by-step answers for textbook questions in the Chapter 15 (तरंगें) chapter. These solutions help students understand concepts better and learn the correct way to write answers in exams.
Prepared in simple language and exam-oriented format, the solutions cover all topics in the Chapter 15 (तरंगें) chapter. Whether you are revising at home or checking your practice work, Bihar Board Solutions help you learn accurately and prepare with confidence.
All Bihar Board Class 11th Physics (भौतिक विज्ञान) Chapter 15 (तरंगें) Solutions available on our platform can be viewed completely free of cost. There's no registration required, no payment needed, and no hidden charges.
Other Chapters of Physics (भौतिक विज्ञान)
Browse other chapters of Bihar Board Class 11th Physics (भौतिक विज्ञान) Solutions. Click on any chapter below to view its content.
Chapter 1 (भौतिक जगत)
Chapter 2 (मात्रक तथा मापन)
Chapter 3 (सरल रेखा में गति)
Chapter 4 (समतल में गति)
Chapter 5 (गणित के नियम)
Chapter 6 (कार्य, उर्जा तथा शक्ति)
Chapter 7 (कणों के नियम तथा घूर्णी गति)
Chapter 8 (गुरुत्वाकर्षण)
Chapter 9 (ठोसों के यांत्रिक गुण)
Chapter 10 (तरलों के यांत्रिक गुण)
Chapter 11 (द्रव्य के तापीय गुण)
Chapter 12 (उष्मागतिकी)
Chapter 13 (अणुगति सिद्धांत)
Chapter 14 (दोलन)
Continue Your Bihar Board Class 11th Physics (भौतिक विज्ञान) Exam Preparation
Continue your exam preparation by exploring other chapters and resources. Combine these solutions with our other resources like Bihar Board Books, Previous Year Papers, and Revision Notes for a complete and effective preparation strategy.
If you have any questions or need assistance, feel free to contact us. We're here to help you succeed in your Bihar Board examinations.