Bihar Board Class 11th Physics (भौतिक विज्ञान) Chapter 3 (सरल रेखा में गति) Solutions

Here we have provided Solution for Chapter 3 (सरल रेखा में गति) of Physics (भौतिक विज्ञान) subject for Class 11th students of Bihar Board of Secondary Education. There are various chapters in this Physics (भौतिक विज्ञान) such as Chapter 1 (भौतिक जगत), Chapter 2 (मात्रक तथा मापन), Chapter 3 (सरल रेखा में गति), Chapter 4 (समतल में गति), Chapter 5 (गणित के नियम), Chapter 6 (कार्य, उर्जा तथा शक्ति), Chapter 7 (कणों के नियम तथा घूर्णी गति), Chapter 8 (गुरुत्वाकर्षण), Chapter 9 (ठोसों के यांत्रिक गुण), Chapter 10 (तरलों के यांत्रिक गुण), Chapter 11 (द्रव्य के तापीय गुण), Chapter 12 (उष्मागतिकी), Chapter 13 (अणुगति सिद्धांत), Chapter 14 (दोलन) and Chapter 15 (तरंगें). Summary of the same is given below:

Board NameBihar Board of Secondary Education
ClassClass 11th
Content TypeSolution
Solution forClass 11th students
SubjectPhysics (भौतिक विज्ञान)
Chapter NameChapter 3 (सरल रेखा में गति)
Total Number of Chapter in this Subject15

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Bihar Board Class 11th Physics (भौतिक विज्ञान) Chapter 3 (सरल रेखा में गति) Solutions

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प्रश्न नीचे दिए गए गति के कौन-से ठदाहरणों में वस्तु को लगभग बिंदु वस्तु माना जा सकता

(७) दो स्टेशनों के बीच बिना किसी झटके के चल रही कोई रेलगाड़ी।

(०) किसी वृत्तीय पथ पर साइकिल चला रहे किसी व्यक्ति के ऊपर बैठा कोई बंदर।

(७ जमीन से टकरा कर तेजी से मुड़ने वाली क्रिकेट की कोई फिरकती गेंद।

(०) किसी मेज के किनारे से फिसल कर गिरा कोई बीकर।

हल:

किसी वस्तु को बिंदु वस्तु तभी माना जा सकता है जब उसकी गति के दौरान तय की गई दूरी उस वस्तु के आकार (विमाओं) की तुलना में बहुत अधिक हो।

(क) दो स्टेशनों के बीच की दूरी रेलगाड़ी की लंबाई से बहुत अधिक होती है। चूंकि रेलगाड़ी बिना झटके के चल रही है, इसलिए उसकी गति के विश्लेषण में उसे एक बिंदु के रूप में माना जा सकता है।

(ख) साइकिल चलाने वाले व्यक्ति और उस पर बैठे बंदर द्वारा तय की जाने वाली दूरी (वृत्तीय पथ की परिधि) बंदर के आकार की तुलना में बहुत बड़ी है। इसलिए, गति के अध्ययन के लिए बंदर को भी एक बिंदु वस्तु माना जा सकता है।

(ग) क्रिकेट की गेंद जमीन से टकराकर मुड़ती है। इस प्रक्रिया में गेंद द्वारा तय की गई दूरी उसके व्यास (लगभग 7 cm) के समान कोटि की होती है, जो बहुत अधिक नहीं है। अतः इसे बिंदु वस्तु नहीं माना जा सकता।

(घ) मेज से गिरते हुए बीकर द्वारा तय की गई दूरी (मेज की ऊंचाई, लगभग 1 मीटर) बीकर की ऊंचाई (लगभग 10-15 cm) की तुलना में बहुत अधिक नहीं है। इसलिए, गिरने की प्रक्रिया में बीकर को बिंदु वस्तु नहीं माना जा सकता।

प्रश्न 2. दो बच्चे 4 व 8 अपने विद्यालय 0 से लौट कर अपने-अपने घर क्रमशः ? तथा 6 को जा रहे हैं। उनके स्थिति-समय (» ग्राफ चित्र में दिखाए गए हैं। नीचे लिखे कोष्ठकों में सही प्रतिष्टियों को चुनिए x

(a) (8/4) की तुलना में (4/9) विद्यालय से निकट रहता है।

(0) (9/4) की तुलना में (4/5) विद्यालय से पहले चलता है।

(० (8/4) की तुलना में (4/8) तेज चलता है।

(१) 4 और 2 घर (एक ही / भिन्‍न) समय पर पहुँचते हैं।

(०) (A/B) सड़क पर (8/4) से (एक बार / दो बार) आगे हो जाते हैं।

हल:

स्थिति-समय (x-t) ग्राफ की व्याख्या निम्नलिखित बिंदुओं के आधार पर की जा सकती है:

(क) ग्राफ पर, बच्चे A का घर (बिंदु P) और बच्चे B का घर (बिंदु Q) विद्यालय (मूल बिंदु O) से अलग-अलग दूरी पर हैं। चूंकि OP < OQ, इसलिए बच्चा A, बच्चे B की तुलना में विद्यालय के अधिक निकट रहता है।

(ख) ग्राफ से स्पष्ट है कि बच्चा A, समय t=0 पर ही विद्यालय से चलना शुरू कर देता है, जबकि बच्चा B कुछ समय बाद (t > 0 पर) चलना शुरू करता है। अतः बच्चा A, बच्चे B की तुलना में विद्यालय से पहले चलता है।

(ग) स्थिति-समय ग्राफ का ढलान (slope) वस्तु की चाल को दर्शाता है। बच्चे B के ग्राफ का ढलान, बच्चे A के ग्राफ के ढलान से अधिक तीव्र है। इसका अर्थ है कि बच्चा B, बच्चे A की तुलना में तेज चलता है।

(घ) दोनों बच्चों के ग्राफ अंत में दो अलग-अलग बिंदुओं (P और Q) पर, लेकिन एक ही समय पर पहुंचते हैं। इसलिए, दोनों अपने-अपने घर समान समय पर पहुँचते हैं।

(ङ) चूंकि बच्चा B देर से चलना शुरू करता है लेकिन अधिक तेज चलने के कारण, वह बच्चे A को केवल एक बार पार करता है (ग्राफ का प्रतिच्छेदन बिंदु) और उससे आगे निकल जाता है।

प्रश्न 3. एक महिला अपने घर से प्रात: 9.00 बजे 2.57 दूर अपने कार्यालय के लिए सीधी ASH WS km/h चाल से चलती है। वहाँ वह सायं 5.00 बजे तक रहती है और 25 ;४0/॥४ की चाल से चल रही किसी ऑटो रिक्शा द्वारा अपने घर लौट आती है। उपयुक्त पैमाना चुनिए तथा उसकी गति का «- ४ ग्राफ खींचिए।

हल:

दिया गया है:
घर से कार्यालय की दूरी, x = 2.5 km
कार्यालय जाते समय चाल, v₁ = 5 km/h
वापस आते समय चाल, v₂ = 25 km/h
कार्यालय में रुकने का समय = सुबह 9:30 से शाम 5:00 तक

पैमाना:
समय अक्ष (t-अक्ष): 1 खाना = 1 घंटा
दूरी अक्ष (x-अक्ष): 1 खाना = 0.5 km

गणना:

1. जाते समय:
लगा समय, t₁ = दूरी / चाल = 2.5 km / 5 km/h = 0.5 h = 30 मिनट
अतः महिला सुबह 9:00 बजे चलकर सुबह 9:30 बजे कार्यालय पहुँचती है।
ग्राफ पर यह भाग मूल बिंदु (9:00, 0 km) से बिंदु A (9:30, 2.5 km) तक एक सीधी रेखा होगी।

2. कार्यालय में ठहराव:
सुबह 9:30 से शाम 5:00 तक दूरी में कोई परिवर्तन नहीं होता (x = 2.5 km स्थिर)।
ग्राफ पर यह भाग बिंदु A (9:30, 2.5 km) से बिंदु B (5:00, 2.5 km) तक समय-अक्ष के समानांतर एक सीधी रेखा होगी।

3. वापसी यात्रा:
लगा समय, t₂ = दूरी / चाल = 2.5 km / 25 km/h = 0.1 h = 6 मिनट
अतः महिला शाम 5:00 बजे कार्यालय से चलकर शाम 5:06 बजे घर पहुँचती है।
ग्राफ पर यह भाग बिंदु B (5:00, 2.5 km) से बिंदु C (5:06, 0 km) तक एक सीधी रेखा होगी।

ग्राफ का रेखाचित्र:

दूरी (x in km)

2.5 |-------A-------------------B

| / \

| / \

| / \

| / \

| / \

| / \

|/ \

O----------------------------------C---> समय (t)

9:00 9:30 5:00 5:06

ग्राफ में OA रेखा कार्यालय जाने की गति, AB रेखा कार्यालय में ठहराव और BC रेखा वापस आने की गति को दर्शाती है।

प्रश्न 4, कोई शराबी किसी तंग गली में 5 कदम आगे बढ़ता है और 3 कदम पीछे आता है, उसके बाद फिर 5 कदम आगे बढ़ता है और 3 कदम पीछे आता है, और इसी तरह वह चलता रहता है। उसका हर कदम 1 मीटर लम्बा है और 1 सेकण्ड समय लगता है। उसकी गति का &-६ We खींचिए। ग्राफ से तथा किसी अन्य विधि से यह ज्ञात कीजिए कि वह जहाँ से चलना प्रारम्भ करता है वहाँ से 13 मीटर दूर किसी गड्ढे में कितने समय पश्चात गिरता है?

हल:

दिया गया है:
1 कदम की लंबाई = 1 m
1 कदम में लगा समय = 1 s
गड्ढे की दूरी = 13 m (प्रारंभिक बिंदु से)

गति का विश्लेषण:
शराबी की गति एक चक्र में होती है: 5 कदम आगे + 3 कदम पीछे = 8 कदमों का एक चक्र
एक चक्र में:
- लगा कुल समय = 8 कदम × 1 s/कदम = 8 सेकंड
- तय की गई नेट दूरी = (5 m आगे) - (3 m पीछे) = 2 m आगे

गणना द्वारा हल:
13 m की नेट दूरी तय करने के लिए आवश्यक चक्र:
प्रति चक्र 2 m की प्रगति होती है।
13 m के लिए चक्रों की संख्या = 13 m / 2 m प्रति चक्र = 6.5 चक्र।
पहले 6 पूरे चक्रों (6 × 8 s = 48 s) में तय नेट दूरी = 6 × 2 m = 12 m
अब शराबी प्रारंभिक बिंदु से 12 m दूर है। गड्ढा 13 m पर है, यानी अभी 1 m और आगे जाना है।
7वें चक्र में, वह पहले 5 कदम आगे बढ़ता है। पहले ही आगे के कदम में वह 12m + 1m = 13m की दूरी तय कर लेता है और गड्ढे में गिर जाता है।
7वें चक्र का पहला आगे का कदम 48 s के बाद शुरू होता है और 1 s में पूरा होता है।
कुल लगा समय = 48 s + 1 s = 49 सेकंड

ग्राफ द्वारा सत्यापन:
स्थिति-समय (x-t) ग्राफ एक आरोही-अवरोही (zig-zag) पैटर्न दिखाएगा। ग्राफ पर देखेंगे कि जब स्थिति (x) पहली बार 13 m के मान तक पहुँचती है, तब समय (t) 49 s होता है।

अतः, शराबी प्रारंभिक बिंदु से चलना शुरू करने के 49 सेकंड बाद गड्ढे में गिरेगा।

प्रश्न 5. कोई जेट वायुयान 500 ॥70/७ की चाल से चल रहा है और यह जेट बायुयान के सापेक्ष 1500 17४/४ की चाल से अपने दहन उत्पादों को बाहर निकालता है। जमीन पर खड़े किसी प्रेक्षक के सापेक्ष इन दहन उत्पादों की चाल क्या होगी?

हल:

दिया गया है:
जेट वायुयान की चाल (जमीन के सापेक्ष), vj = 500 km/h (माना यह धनात्मक दिशा में है)
दहन उत्पादों की चाल (जेट के सापेक्ष), vgj = -1500 km/h (ऋणात्मक चिह्न इंगित करता है कि यह जेट की गति की विपरीत दिशा में है)
प्रेक्षक की चाल (जमीन के सापेक्ष), vo = 0 km/h (स्थिर)

सूत्र: सापेक्ष वेग के सिद्धांत से,
दहन उत्पादों का जमीन के सापेक्ष वेग (vg) = जेट का जमीन के सापेक्ष वेग (vj) + दहन उत्पादों का जेट के सापेक्ष वेग (vgj)

गणना:
vg = vj + vgj
vg = 500 km/h + (-1500 km/h)
vg = 500 km/h - 1500 km/h
vg = -1000 km/h

निष्कर्ष: जमीन पर खड़े प्रेक्षक के सापेक्ष दहन उत्पादों की चाल 1000 km/h होगी। ऋणात्मक चिह्न यह दर्शाता है कि यह चाल जेट वायुयान की गति की दिशा के विपरीत दिशा में है (यानी, पीछे की ओर) ।

प्रश्न 6. सीधे राजमार्ग पर कोई कार 126 ;70/॥ की चाल से चल रही है। इसे 200 ० की दूरी पर रोक दिया जाता है। कार के मंदन को एकसमान मानिए और इसका मान निकालिए। कार को रुकने में कितना समय लगा?

हल:

दिया गया है:
कार का प्रारंभिक वेग, u = 126 km/h
अंतिम वेग, v = 0 km/h (रुक जाती है)
तय दूरी, s = 200 m

सबसे पहले, प्रारंभिक वेग को m/s में बदलते हैं:
u = 126 km/h = 126 × (1000 m / 3600 s) = 126 × (5/18) m/s
u = 35 m/s

(क) मंदन (a) ज्ञात करना:
गति के तीसरे समीकरण का उपयोग करते हैं: v² = u² + 2as
(0)² = (35)² + 2 × a × 200
0 = 1225 + 400a
400a = -1225
a = -1225 / 400
a = -3.0625 m/s²
ऋणात्मक चिह्न मंदन (त्वरण की विपरीत दिशा) को दर्शाता है।
अतः कार का मंदन 3.0625 m/s² है।

(ख) रुकने में लगा समय (t) ज्ञात करना:
गति के पहले समीकरण का उपयोग करते हैं: v = u + at
0 = 35 + (-3.0625) × t
3.0625t = 35
t = 35 / 3.0625
t ≈ 11.43 सेकंड

निष्कर्ष: कार का एकसमान मंदन 3.06 m/s² (लगभग) है और उसे रुकने में 11.43 सेकंड (लगभग) का समय लगता है।

प्रश्न 1. एक वस्तु की गति के विषय में आप क्या जानते हैं ?

किसी वस्तु की स्थिति में समय के साथ होने वाले परिवर्तन को गति कहते हैं। गति सापेक्ष होती है, अर्थात एक ही वस्तु अलग-अलग प्रेक्षकों के लिए अलग-अलग प्रकार से गतिमान प्रतीत हो सकती है। गति को दूरी, विस्थापन, चाल, वेग, त्वरण आदि राशियों द्वारा वर्णित किया जाता है।

प्रश्न 2. विस्थापन एवं दूरी में क्या अन्तर है ?

दूरी कुल पथ की लंबाई है जो एक अदिश राशि है, जबकि विस्थापन प्रारंभिक और अंतिम स्थिति के बीच की सीधी दूरी एवं दिशा है जो एक सदिश राशि है। दूरी हमेशा धनात्मक होती है, परंतु विस्थापन धनात्मक, ऋणात्मक या शून्य हो सकता है।

प्रश्न 3. चाल एवं वेग में क्या अन्तर है ?

चाल समय के साथ तय की गई दूरी की दर है और यह एक अदिश राशि है। वेग समय के साथ विस्थापन की दर है और यह एक सदिश राशि है। चाल केवल परिमाण बताती है, जबकि वेग परिमाण और दिशा दोनों बताता है।

प्रश्न 4. त्वरण क्या है ? इसका मात्रक लिखें।

किसी वस्तु के वेग में परिवर्तन की दर को त्वरण कहते हैं। यह एक सदिश राशि है। त्वरण का मात्रक मीटर प्रति सेकंड वर्ग (m/s²) है।

प्रश्न 5. एकसमान गति एवं असमान गति में अन्तर लिखें।

एकसमान गति में वस्तु समान समय अंतरालों में समान दूरी तय करती है, अर्थात इसकी चाल नियत रहती है। असमान गति में वस्तु समान समय अंतरालों में असमान दूरी तय करती है, अर्थात इसकी चाल समय के साथ बदलती रहती है।

प्रश्न 6. गति के समीकरण क्या हैं ? इन्हें लिखें।

नियत त्वरण के अंतर्गत सरल रेखीय गति का वर्णन करने वाले समीकरण गति के समीकरण कहलाते हैं। ये निम्नलिखित हैं:
1. v = u + at (वेग-समय संबंध)
2. s = ut + ½ at² (स्थिति-समय संबंध)
3. v² = u² + 2as (स्थिति-वेग संबंध)
जहाँ u = प्रारंभिक वेग, v = अंतिम वेग, a = त्वरण, t = समय और s = विस्थापन है।

प्रश्न 7. मुक्त पतन से आप क्या समझते हैं ?

जब कोई वस्तु केवल पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बल के प्रभाव में ऊपर से नीचे की ओर गिरती है, तो उसकी इस गति को मुक्त पतन कहते हैं। इसमें वायु का प्रतिरोध नगण्य माना जाता है और सभी वस्तुएँ एक ही त्वरण (g ≈ 9.8 m/s²) से गिरती हैं।

प्रश्न 8. गुरुत्वीय त्वरण क्या है ? इसका मान लिखें।

पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बल के कारण किसी वस्तु में उत्पन्न त्वरण को गुरुत्वीय त्वरण कहते हैं। इसे 'g' से प्रदर्शित किया जाता है। इसका मान पृथ्वी की सतह पर लगभग 9.8 मीटर प्रति सेकंड वर्ग (9.8 m/s²) होता है और यह स्थान के अनुसार थोड़ा बदलता रहता है।

प्रश्न 9. वेग-समय ग्राफ के ढाल से क्या प्राप्त होता है ?

वेग-समय (v-t) ग्राफ का ढाल (slope) वस्तु के त्वरण को प्रदर्शित करता है। ढाल जितना अधिक होगा, त्वरण उतना ही अधिक होगा। यदि ग्राफ एक सीधी रेखा है, तो त्वरण नियत है।

प्रश्न 10. विस्थापन-समय ग्राफ के ढाल से क्या प्राप्त होता है ?

विस्थापन-समय (s-t) ग्राफ का ढाल (slope) वस्तु के वेग को प्रदर्शित करता है। ढाल जितना अधिक होगा, वेग उतना ही अधिक होगा। यदि ग्राफ एक क्षैतिज रेखा है, तो वस्तु विरामावस्था में है।

प्रश्न 1. किसी वस्तु की एकसमान व एकसमाने त्वरित गति के लिए गति-समय ग्राफ कैसा होता है?

उत्तर: एकसमान गति के लिए गति-समय ग्राफ समय अक्ष के समानांतर एक सीधी रेखा होता है, क्योंकि गति समय के साथ नहीं बदलती। एकसमान त्वरित गति के लिए गति-समय ग्राफ एक सीधी रेखा होती है जो समय अक्ष के साथ एक निश्चित कोण बनाती है, क्योंकि गति समय के समानुपाती होती है। इस रेखा का ढाल वस्तु के त्वरण के बराबर होता है।

प्रश्न 2. एक पत्थर ऊर्ध्वाधर ऊपर की ओर फेंका गया है। ऊपर जाते समय उसका त्वरण क्या होगा?

उत्तर: ऊपर जाते समय पत्थर का त्वरण गुरुत्वीय त्वरण के बराबर होगा, जो नीचे की ओर (ऋणात्मक दिशा में) कार्य करता है। इसका मान लगभग 9.8 m/s² होता है। यह त्वरण पत्थर की गति को कम करता है जब तक कि वह शीर्ष बिंदु पर शून्य न हो जाए।

प्रश्न 3. त्वरण का मात्रक क्या है?

उत्तर: त्वरण का मात्रक मीटर प्रति सेकंड वर्ग (m/s²) है। यह वेग में परिवर्तन की दर को दर्शाता है।

प्रश्न 4. किसी वस्तु के एकसमान वृत्तीय गति करने पर उसकी चाल अपरिवर्तित रहती है, फिर भी उसकी गति को त्वरित गति क्यों कहते हैं?

उत्तर: एकसमान वृत्तीय गति में वस्तु की चाल नियत रहती है, परंतु गति की दिशा लगातार बदलती रहती है। चूंकि वेग एक सदिश राशि है जिसमें परिमाण (चाल) और दिशा दोनों शामिल होते हैं, दिशा में परिवर्तन के कारण वेग में परिवर्तन होता है। इस वेग परिवर्तन की दर को त्वरण कहते हैं, जो इस मामले में अभिकेंद्रीय त्वरण होता है और यह सदैव वृत्त के केंद्र की ओर कार्य करता है। इसीलिए इसे त्वरित गति कहा जाता है।

प्रश्न 5. किसी कण की गति का समीकरण x = 4t² + 4t + 4 है, जहाँ x मीटर में तथा t सेकंड में है। कण का प्रारंभिक वेग तथा त्वरण ज्ञात करें।

उत्तर: दिया गया समीकरण है: x = 4t² + 4t + 4
वेग (v), विस्थापन (x) का समय के सापेक्ष अवकलज होता है।
v = dx/dt = d(4t² + 4t + 4)/dt = 8t + 4
प्रारंभिक वेग (t=0 पर) = 8(0) + 4 = 4 m/s
त्वरण (a), वेग का समय के सापेक्ष अवकलज होता है।
a = dv/dt = d(8t + 4)/dt = 8 m/s²
अतः कण का प्रारंभिक वेग 4 m/s और त्वरण 8 m/s² है।

प्रश्न 6. एकसमान त्वरित गति के लिए गति के द्वितीय समीकरण s = ut + ½ at² को ग्राफीय विधि से व्युत्पन्न करें।

उत्तर: माना एक वस्तु प्रारंभिक वेग u से एकसमान त्वरण a से चलना शुरू करती है। इसका वेग-समय ग्राफ एक झुकी हुई सीधी रेखा होगी।
ग्राफ में, समय अक्ष (t) और वेग रेखा के बीच घिरा क्षेत्रफल वस्तु द्वारा तय की गई दूरी (s) को निरूपित करता है।
यह क्षेत्रफल एक समलंब चतुर्भुज OABC के रूप में है।
समलंब का क्षेत्रफल = ½ × (समांतर भुजाओं का योग) × ऊँचाई
यहाँ, समांतर भुजाएँ OA = u (प्रारंभिक वेग) और BC = v (अंतिम वेग) हैं। ऊँचाई = t (समय)।
अतः, s = ½ × (u + v) × t ...(1)
गति के प्रथम समीकरण से, v = u + at। इसे समीकरण (1) में रखने पर:
s = ½ × (u + u + at) × t = ½ × (2u + at) × t = ut + ½ at²
इस प्रकार, गति का द्वितीय समीकरण s = ut + ½ at² ग्राफीय विधि से व्युत्पन्न होता है।

प्रश्न 7. एकसमान त्वरित गति के लिए गति के तृतीय समीकरण v² = u² + 2as को ग्राफीय विधि से व्युत्पन्न करें।

उत्तर: पिछले प्रश्न की भाँति वेग-समय ग्राफ खींचते हैं। वस्तु द्वारा तय दूरी (s) ग्राफ के नीचे का क्षेत्रफल (समलंब OABC) है।
s = समलंब OABC का क्षेत्रफल = ½ × (u + v) × t ...(1)
गति के प्रथम समीकरण से, t = (v - u)/a ...(2)
समीकरण (2) से t का मान समीकरण (1) में रखने पर:
s = ½ × (u + v) × (v - u)/a
=> 2as = (v + u)(v - u)
=> 2as = v² - u² (क्योंकि (a+b)(a-b)=a²-b²)
=> v² = u² + 2as
इस प्रकार, गति का तृतीय समीकरण v² = u² + 2as ग्राफीय विधि से व्युत्पन्न होता है।

प्रश्न 8. एक कार विरामावस्था से चलकर 4 सेकंड में 20 m/s का वेग प्राप्त कर लेती है। कार का त्वरण तथा इस अवधि में तय की गई दूरी ज्ञात करें।

उत्तर: दिया है: प्रारंभिक वेग, u = 0 m/s, अंतिम वेग, v = 20 m/s, समय, t = 4 s
त्वरण, a = (v - u)/t = (20 - 0)/4 = 5 m/s²
तय दूरी ज्ञात करने के लिए गति के द्वितीय समीकरण का उपयोग करते हैं:
s = ut + ½ at² = (0 × 4) + ½ × 5 × (4)² = 0 + ½ × 5 × 16 = 40 m
अतः कार का त्वरण 5 m/s² है और उसने 40 मीटर की दूरी तय की।

प्रश्न 9. एक रेलगाड़ी 72 km/h के वेग से चल रही है। ब्रेक लगाने पर वह 100 m दूरी पर रुक जाती है। रेलगाड़ी का मंदन ज्ञात करें।

उत्तर: दिया है: प्रारंभिक वेग, u = 72 km/h = 72 × (1000/3600) m/s = 20 m/s
अंतिम वेग, v = 0 m/s (रुक जाती है), तय दूरी, s = 100 m
गति के तृतीय समीकरण से: v² = u² + 2as
=> 0² = (20)² + 2 × a × 100
=> 0 = 400 + 200a
=> 200a = -400
=> a = -2 m/s²
ऋणात्मक चिह्न दर्शाता है कि यह मंदन (रेटार्डेशन) है।
अतः रेलगाड़ी का मंदन 2 m/s² है।

प्रश्न 10. एक वस्तु को 40 m/s के वेग से ऊर्ध्वाधर ऊपर फेंका जाता है। वस्तु द्वारा प्राप्त अधिकतम ऊँचाई तथा वापस फेंकने वाले बिंदु पर लौटने में लगा समय ज्ञात करें। (g = 10 m/s²)

उत्तर: दिया है: प्रारंभिक वेग, u = 40 m/s, g = 10 m/s² (नीचे की ओर)
अधिकतम ऊँचाई पर, अंतिम वेग v = 0 होगा।
गति के तृतीय समीकरण से: v² = u² - 2gh (ऋण चिह्न क्योंकि गुरुत्वीय त्वरण गति के विपरीत है)
=> 0² = (40)² - 2 × 10 × h
=> 0 = 1600 - 20h
=> 20h = 1600
=> h = 80 m
वापस आने में लगा कुल समय (T) = 2u/g (उड़ान का समय)
T = (2 × 40) / 10 = 80/10 = 8 s
अतः वस्तु अधिकतम 80 मीटर की ऊँचाई प्राप्त करेगी और वापस आने में 8 सेकंड लगेंगे।

प्रश्न 17. चित्र में किसी कण की एकविमीय गति का x-t ग्राफ दिखाया गया है। ग्राफ से क्या यह कहना ठीक होगा कि यह कण t < 0 के लिए किसी सरल रेखा में और t > 0 के लिए किसी परवलीय पथ में गति करता है। यदि नहीं, तो ग्राफ के संगत किसी उचित भौतिक संदर्भ का सुझाव दीजिए!

नहीं, ग्राफ की सहायता से यह कहना सही नहीं है कि कण समय t < 0 के लिए एक सरल रेखा में तथा समय t > 0 के लिए परवलयाकार पथ पर गति करता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि x-t ग्राफ कण के पथ की आकृति को प्रदर्शित नहीं करता है; यह केवल समय के साथ कण की स्थिति (विस्थापन) को दर्शाता है।

ग्राफ से यह पता चलता है कि कण t = 0 पर x < 0 पर है और उसके बाद x का मान समय के साथ बढ़ रहा है। इस ग्राफ के लिए एक उचित भौतिक संदर्भ गुरुत्व के अंतर्गत मुक्त रूप से गिरती हुई वस्तु का हो सकता है, जहाँ विस्थापन समय के वर्ग के अनुक्रमानुपाती होता है, जिससे ग्राफ परवलयिक आकार का बनता है।

प्रश्न 18. किसी राजमार्ग पर पुलिस की कोई गाड़ी 30 km/h की चाल से चल रही है और यह उसी दिशा में 192 km/h की चाल से जा रही किसी चोर की कार पर गोली चलाती है। यदि गोली की नाल मुखी चाल 150 m/s हो तो चोर की कार को गोली किस चाल के साथ आघात करेगी?

दिया गया:
पुलिस गाड़ी की चाल, \( v_p = 30 \, \text{km/h} \)
चोर की कार की चाल, \( v_t = 192 \, \text{km/h} \)
गोली की नाल मुखी चाल (पुलिस गाड़ी के सापेक्ष), \( v_{b/p} = 150 \, \text{m/s} \)
(सभी वाहन एक ही दिशा में जा रहे हैं।)

चरण 1: सभी चालों को m/s में बदलना।
\( 1 \, \text{km/h} = \frac{5}{18} \, \text{m/s} \)
\( v_p = 30 \times \frac{5}{18} = \frac{25}{3} \, \text{m/s} \)
\( v_t = 192 \times \frac{5}{18} = \frac{160}{3} \, \text{m/s} \)

चरण 2: जमीन के सापेक्ष गोली की चाल ज्ञात करना।
गोली पुलिस गाड़ी से छूटती है, इसलिए उसमें पुलिस गाड़ी की चाल भी जुड़ जाती है।
जमीन के सापेक्ष गोली की चाल, \( v_b = v_{b/p} + v_p \)
\( v_b = 150 + \frac{25}{3} = \frac{450 + 25}{3} = \frac{475}{3} \, \text{m/s} \)

चरण 3: चोर की कार के सापेक्ष गोली की आपेक्षिक चाल ज्ञात करना।
चूँकि दोनों एक ही दिशा में गतिमान हैं,
\( v_{b/t} = v_b - v_t \)
\( v_{b/t} = \frac{475}{3} - \frac{160}{3} = \frac{315}{3} = 105 \, \text{m/s} \)

अतः गोली चोर की कार से 105 m/s की चाल से टकराएगी।

प्रश्न 19. चित्र में दिखाए गए प्रत्येक ग्राफ के लिए किसी उचित भौतिक स्थिति का सुझाव दीजिए।

(क) x-t ग्राफ के लिए:

यह ग्राफ एक ऐसी वस्तु की गति को दर्शा सकता है जो शुरू में विराम में है (भाग AB), फिर एक नियत धनात्मक वेग से गति करती है (भाग BC), उसके बाद एक नियत ऋणात्मक वेग से वापस लौटती है (भाग CD), और अंत में फिर से विराम में आ जाती है (भाग DE)।
उदाहरण: एक गेंद को चिकने फर्श पर लुढ़काया जाता है। वह दीवार से टकराकर वापस लौटती है और विपरीत दिशा की दीवार से टकराकर रुक जाती है।

(ख) v-t ग्राफ के लिए:

यह ग्राफ एक ऐसी वस्तु की गति को दर्शाता है जिसका वेग समय के साथ रेखीय रूप से घटता-बढ़ता है और दिशा बदलता रहता है, जबकि प्रत्येक बार वेग का परिमाण (चाल) कुछ कम हो जाता है।
उदाहरण: एक गेंद को कुछ प्रारंभिक वेग से ऊपर की ओर फेंका जाता है। वह गुरुत्वीय मंदन के कारण ऊपर जाते हुए धीमी होती है, शीर्ष पर वेग शून्य हो जाता है, और फिर नीचे आते हुए त्वरित होती है। जब यह जमीन से टकराती है तो पहले से कम वेग के साथ उछलती है। यह प्रक्रिया दोहराई जा सकती है।

(ग) a-t ग्राफ के लिए:

यह ग्राफ दर्शाता है कि वस्तु शुरू में शून्य त्वरण (नियत वेग) से गतिमान है। फिर एक छोटे समय अंतराल के लिए इसका त्वरण अचानक बढ़ जाता है (धनात्मक या ऋणात्मक) और फिर तुरंत शून्य हो जाता है, और वस्तु पुनः नियत वेग से चलने लगती है।
उदाहरण: एक नियत चाल से गतिमान क्रिकेट की गेंद जब बल्ले से टकराती है, तो टकराने के अत्यंत सूक्ष्म समय के लिए उसमें बहुत अधिक त्वरण उत्पन्न होता है। टक्कर के बाद वह फिर से (अलग वेग के साथ) नियत चाल से गति कर सकती है।

प्रश्न 20. चित्र में किसी कण की एकविमीय सरल आवर्ती गति के लिए v-t ग्राफ दिखाया गया है। (इस गति के बारे में आप अध्याय 14 में पढेंगे) समय t = 0.3 s, 1.2 s, –1.2 s पर कण के स्थिति, वेग व त्वरण के चिह्न क्या होंगे?

सरल आवर्त गति में, त्वरण (a) विस्थापन (x) के अनुक्रमानुपाती होता है और उसकी दिशा के विपरीत होता है। इसे समीकरण \( a = -\omega^2 x \) से दर्शाया जाता है, जहाँ \( \omega \) कोणीय आवृत्ति है। वेग (v) का चिह्न v-t ग्राफ से सीधे देखा जा सकता है।

(क) t = 0.3 s पर:
ग्राफ से, इस समय वेग (v) ऋणात्मक है (कण ऋणात्मक दिशा में गतिमान है)। v-t वक्र का ढलान (जो त्वरण देता है) भी ऋणात्मक है। चूँकि \( a = -\omega^2 x \), और यहाँ a ऋणात्मक है, इसलिए x धनात्मक होना चाहिए।
निष्कर्ष: स्थिति (x) = धनात्मक, वेग (v) = ऋणात्मक, त्वरण (a) = ऋणात्मक।

(ख) t = 1.2 s पर:
ग्राफ से, इस समय वेग (v) धनात्मक है। v-t वक्र का ढलान धनात्मक है, इसलिए त्वरण (a) धनात्मक है। समीकरण \( a = -\omega^2 x \) में a धनात्मक है, तो x ऋणात्मक होगा।
निष्कर्ष: स्थिति (x) = ऋणात्मक, वेग (v) = धनात्मक, त्वरण (a) = धनात्मक।

(ग) t = –1.2 s पर:
यह समय ऋणात्मक है, जो हमें ग्राफ के बाईं ओर (मूल बिंदु से पहले) ले जाता है। ग्राफ के इस हिस्से को देखते हुए, वेग (v) धनात्मक है। v-t वक्र का ढलान ऋणात्मक है, इसलिए त्वरण (a) ऋणात्मक है। समीकरण \( a = -\omega^2 x \) में a ऋणात्मक है, तो x धनात्मक होगा।
निष्कर्ष: स्थिति (x) = धनात्मक, वेग (v) = धनात्मक, त्वरण (a) = ऋणात्मक।

प्रश्न 21. चित्र किसी कण की एकविमीय गति का x-t ग्राफ दर्शाता है। इसमें तीन समान अंतराल दिखाए गए हैं। किस अंतराल में औसत चाल अधिकतम है और किसमें न्यूनतम है? प्रत्येक अंतराल के लिए औसत वेग का चिह्न बताइए।

किसी अंतराल में औसत चाल, उस अंतराल में तय किए गए कुल पथ की लंबाई को समय से भाग देने पर प्राप्त होती है। x-t ग्राफ में, वक्र की तीव्रता (ढलान का परिमाण) जितनी अधिक होगी, चाल उतनी ही अधिक होगी।

  • अंतराल 3 में ग्राफ का ढलान सबसे अधिक तीव्र (steepest) है, जिसका अर्थ है कि इस अंतराल में कण ने सबसे अधिक दूरी तय की है। अतः औसत चाल अधिकतम अंतराल 3 के लिए है।
  • अंतराल 2 में ग्राफ लगभग समतल (ढलान शून्य के निकट) है, जिसका अर्थ है कि कण बहुत कम दूरी तय करता है। अतः औसत चाल न्यूनतम अंतराल 2 के लिए है।

औसत वेग के चिह्न: औसत वेग, विस्थापन में परिवर्तन (\( \Delta x \)) को समय (\( \Delta t \)) से भाग देने पर प्राप्त होता है। ग्राफ के ढलान का चिह्न ही औसत वेग का चिह्न बताता है।

  • अंतराल 1: ढलान धनात्मक है → औसत वेग धनात्मक है।
  • अंतराल 2: ढलान धनात्मक है (बहुत कम) → औसत वेग धनात्मक है।
  • अंतराल 3: ढलान ऋणात्मक है → औसत वेग ऋणात्मक है।

प्रश्न 22. चित्र में किसी नियत (स्थिर) दिशा के अनुदिश चल रहे कण का चाल-समय ग्राफ दिखाया गया है। इसमें तीन समान समयांतराल दिखाए गए हैं। किस अंतराल में औसत त्वरण का परिमाण अधिकतम होगा? किस अंतराल में औसत चाल अधिकतम होगी? धनात्मक दिशा को गति की स्थिर दिशा चुनते हुए तीनों अंतरालों में v तथा a के चिह्न बताइए। A, B, C, व D बिंदुओं पर त्वरण क्या होंगे?

(क) औसत त्वरण का अधिकतम परिमाण:
औसत त्वरण, वेग में परिवर्तन (\( \Delta v \)) को समय (\( \Delta t \)) से भाग देने पर प्राप्त होता है। चूँकि सभी अंतरालों का \( \Delta t \) समान है, इसलिए जिस अंतराल में \( \Delta v \) (वेग परिवर्तन का परिमाण) सबसे अधिक होगा, उसमें औसत त्वरण का परिमाण भी सबसे अधिक होगा।

  • अंतराल 2 में, वेग में गिरावट (B से C) सबसे तेज है। अतः औसत त्वरण का परिमाण अधिकतम अंतराल 2 के लिए है।

(ख) औसत चाल अधिकतम:
औसत चाल, कुल तय दूरी को कुल समय से भाग देने पर प्राप्त होती है। v-t ग्राफ के नीचे का क्षेत्रफल तय दूरी को दर्शाता है।

  • अंतराल 3 के नीचे का क्षेत्रफल (C से D) सबसे अधिक है, क्योंकि इस दौरान चाल का मान सबसे अधिक रहता है। अतः औसत चाल अधिकतम अंतराल 3 के लिए है।

(ग) अंतरालों के लिए v तथा a के चिह्न: (धनात्मक दिशा को गति की दिशा मानते हुए)

  • अंतराल 1 (A से B): चाल (v) हमेशा धनात्मक है। ग्राफ का ढलान धनात्मक है (चाल बढ़ रही है), इसलिए त्वरण (a) भी धनात्मक है।
  • अंतराल 2 (B से C): चाल (v) हमेशा धनात्मक है। ग्राफ का ढलान ऋणात्मक है (चाल घट रही है), इसलिए त्वरण (a) ऋणात्मक है।
  • अंतराल 3 (C से D): चाल (v) हमेशा धनात्मक है। ग्राफ का ढलान शून्य है (चाल नियत है), इसलिए त्वरण (a) शून्य है।

(घ) बिंदुओं पर त्वरण:
त्वरण, v-t ग्राफ के ढलान के बराबर होता है।

  • बिंदु A पर: ग्राफ का ढलान धनात्मक है → त्वरण धनात्मक है।
  • बिंदु B पर: ग्राफ का ढलान ऋणात्मक है → त्वरण ऋणात्मक है।
  • बिंदु C पर: ग्राफ का ढलान शून्य है (वक्र चिकना मोड़ लेता है) → त्वरण शून्य है।
  • बिंदु D पर: ग्राफ का ढलान शून्य है (क्षैतिज रेखा) → त्वरण शून्य है।

प्रश्न 1. एकसमान वेग से गतिमान पिण्ड का त्वरण होता है-

उत्तर: शून्य

जब कोई पिण्ड एकसमान वेग से गति करता है, तो उसकी चाल और दिशा दोनों नियत रहती हैं। वेग में परिवर्तन की दर को त्वरण कहते हैं। चूँकि वेग में कोई परिवर्तन नहीं हो रहा है, इसलिए त्वरण का मान शून्य होता है।

प्रश्न 2. एकसमान त्वरित गति के लिए वेग-समय ग्राफ होता है-

उत्तर: एक सरल रेखा

एकसमान त्वरित गति में त्वरण स्थिर रहता है। वेग, समय के साथ एक नियत दर से बदलता है। इसलिए वेग (v) और समय (t) का ग्राफ एक सीधी रेखा (सरल रेखा) होता है। इस रेखा का ढाल (slope) त्वरण के बराबर होता है।

प्रश्न 3. निम्नलिखित में कौन-सी राशि सदिश है?

उत्तर: विस्थापन

विस्थापन एक सदिश राशि है क्योंकि इसे व्यक्त करने के लिए परिमाण (दूरी) के साथ-साथ दिशा की भी आवश्यकता होती है। दूरी, चाल और समय अदिश राशियाँ हैं जिन्हें केवल परिमाण से व्यक्त किया जा सकता है।

प्रश्न 4. एकसमान वेग से गतिमान वस्तु का त्वरण क्या होगा?

उत्तर: शून्य

एकसमान वेग का अर्थ है कि वस्तु का वेग (परिमाण और दिशा दोनों) समय के साथ नहीं बदलता। त्वरण वेग में परिवर्तन की दर है। यदि वेग में कोई परिवर्तन नहीं है, तो परिवर्तन की दर यानी त्वरण शून्य होगा।

प्रश्न 5. किसी वस्तु की गति का समीकरण x = 6 + 18t + 9t² है। प्रारम्भिक वेग क्या है?

उत्तर: 18 मात्रक

दिया गया समीकरण x = 6 + 18t + 9t² है। इसे एकसमान त्वरित गति के सामान्य समीकरण x = x₀ + u t + (1/2) a t² के साथ तुलना करने पर,
प्रारम्भिक स्थिति (x₀) = 6,
प्रारम्भिक वेग का गुणांक (u) = 18,
और (1/2)a = 9, जिससे a = 18 मात्रक/सेकंड² प्राप्त होता है।
अतः प्रारम्भिक वेग (u) = 18 मात्रक है।

प्रश्न 6. एक वस्तु विरामावस्था से 4 m/s² के त्वरण से चलना प्रारम्भ करती है। 10 सेकण्ड पश्चात् उसका वेग क्या होगा?

उत्तर: 40 m/s

यहाँ प्रारम्भिक वेग (u) = 0 (विरामावस्था), त्वरण (a) = 4 m/s², समय (t) = 10 s.
गति के प्रथम समीकरण v = u + a t का उपयोग करने पर:
v = 0 + (4 m/s²) × (10 s) = 40 m/s.
अतः 10 सेकंड बाद वस्तु का वेग 40 मीटर प्रति सेकंड होगा।

प्रश्न 7. एकसमान त्वरित गति के लिए गति का द्वितीय समीकरण लिखिए।

उत्तर: s = u t + ½ a t²

एकसमान त्वरित गति के लिए गति का द्वितीय समीकरण है: s = u t + (1/2) a t²
जहाँ,
s = t समय में तय की गई दूरी (विस्थापन),
u = प्रारम्भिक वेग,
a = त्वरण,
t = समय अंतराल।
यह समीकरण बताता है कि किसी वस्तु द्वारा t समय में तय की गई दूरी, प्रारम्भिक वेग और त्वरण पर निर्भर करती है।

प्रश्न 8. एकसमान त्वरित गति के लिए वेग-समय ग्राफ का ढाल किस भौतिक राशि को निरूपित करता है?

उत्तर: त्वरण

वेग-समय (v-t) ग्राफ में, किसी भी बिंदु पर वक्र की ढाल (slope) उस क्षण के त्वरण को दर्शाती है। एकसमान त्वरित गति में यह ग्राफ एक सीधी रेखा होता है, जिसकी ढाल नियत रहती है और यही नियत ढाल त्वरण (a) के बराबर होती है। ढाल = (वेग में परिवर्तन) / (समय में परिवर्तन) = Δv/Δt = a

प्रश्न 9. एकसमान त्वरित गति के लिए विस्थापन-समय ग्राफ कैसा होता है?

उत्तर: एक परवलय (Parabola)

एकसमान त्वरित गति के लिए विस्थापन (s) और समय (t) का संबंध s = u t + (1/2) a t² होता है। यह समीकरण समय (t) के द्विघाती (quadratic) फलन का रूप है। गणित में किसी द्विघाती फलन का ग्राफ एक परवलय (Parabola) होता है। इसलिए, एकसमान त्वरित गति के लिए विस्थापन-समय ग्राफ एक परवलयाकार वक्र होता है।

प्रश्न 10. एकसमान त्वरित गति के लिए गति का तृतीय समीकरण लिखिए।

उत्तर: v² = u² + 2 a s

एकसमान त्वरित गति के लिए गति का तृतीय समीकरण है: v² = u² + 2 a s
जहाँ,
v = अंतिम वेग,
u = प्रारम्भिक वेग,
a = त्वरण,
s = तय की गई दूरी (विस्थापन)।
इस समीकरण की विशेषता यह है कि इसमें समय (t) शामिल नहीं है। यह तब उपयोगी होता है जब हमें समय का मान ज्ञात न हो, लेकिन वेग, त्वरण और दूरी के बीच संबंध ज्ञात करना हो।

स समयांतराल के लिए कण की औसत चाल - - ले तय दूरी कुल लगा समय

उत्तर: औसत चाल की परिभाषा के अनुसार, किसी निश्चित समयांतराल में कण की औसत चाल उसके द्वारा तय की गई कुल दूरी तथा कुल लगे समय के अनुपात के बराबर होती है।
इसे सूत्र रूप में इस प्रकार लिखा जा सकता है:

औसत चाल = कुल तय दूरी / कुल लगा समय

(b) fey Te aH के भाग 04 से (त्वरित गति) जब t=0u=0 t=5s Wv=12m/s गति के समीकरण से, v=U+at 12=O0+ax5 12 _ 2 a=—=24m/s 5

उत्तर: यहाँ, प्रारंभिक समय (t=0) पर प्रारंभिक वेग (u) = 0 m/s है।
समय (t=5 s) पर अंतिम वेग (v) = 12 m/s है।
गति के प्रथम समीकरण v = u + at का उपयोग करने पर:
12 = 0 + a × 5
इससे त्वरण (a) = 12 / 5 = 2.4 m/s² प्राप्त होता है।

1-23 के अंत में कण की चाल v’=u + at =0+24x2=48m/s 1-25 से/ 5 58 तक अर्थात्‌ 35 में त्वरित गति में तय की गई दूरी, जिसके लिए प्रारम्भिक वेग ७ ८5 ४/ < 4811/5

उत्तर: पिछले भाग में प्राप्त त्वरण a = 2.4 m/s² है।
अब, t = 2 s के अंत में कण की चाल ज्ञात करने के लिए:
v' = u + at = 0 + (2.4) × 2 = 4.8 m/s
ध्यान दें: यहाँ 24×2=48 लिखा है, जो संभवतः 2.4×2=4.8 का ही प्रतिनिधित्व है, क्योंकि त्वरण 24 m/s² नहीं बल्कि 2.4 m/s² है।
इसके बाद, t = 5s से t = 8s तक, यानी 3 सेकंड के अंतराल में, त्वरित गति में तय दूरी ज्ञात करनी है। इस अंतराल का प्रारंभिक वेग (u) 4.8 m/s है (t=5s पर चाल)।

गति के समीकरण B, s, =ut + zat?

उत्तर: गति का द्वितीय समीकरण है: s = ut + (1/2)at²
यह समीकरण किसी वस्तु द्वारा t समय में तय की गई दूरी (s) बताता है, जहाँ u प्रारंभिक वेग तथा a नियत त्वरण है।

= 48X34 3 xk xo)

उत्तर: यहाँ गणना में कुछ त्रुटि प्रतीत होती है। सही गणना इस प्रकार होनी चाहिए:
माना t = 5s से t = 8s (अर्थात Δt = 3s) में तय दूरी s₁ है।
u = 4.8 m/s, a = 2.4 m/s², t = 3 s
s₁ = u t + (1/2) a t²
s₁ = (4.8 × 3) + (1/2 × 2.4 × 3²)
s₁ = 14.4 + (0.5 × 2.4 × 9)
s₁ = 14.4 + (1.2 × 9)
s₁ = 14.4 + 10.8 = 25.2 m

=144+ 108 =25.2m दिए गए आफ के भाग 48 से (मन्दित गति) समय ( - 55 पर प्रारम्भिक वेग, ७ > 12 1/5 कण द्वारा लिया गया समय / ४ (0-5)- 55 समय ( 5105 पर अंतिम वेग, ४७० गति के समीकरण से, ( >७०+ &

उत्तर: अब ग्राफ के भाग CD पर, अर्थात मंदित गति (रेटार्डेड गति) पर विचार करते हैं।
समय t = 8s पर प्रारंभिक वेग, u = 12 m/s (मान लिया गया है)।
कण द्वारा लिया गया समय, t = (10 - 8) = 2 s
समय t = 10 s पर अंतिम वेग, v = 0 m/s
गति के प्रथम समीकरण से: v = u + at
0 = 12 + a × 2
इससे मंदन (ऋणात्मक त्वरण) a = -12 / 2 = -6 m/s² प्राप्त होता है।

अथवा

उत्तर: या फिर, मंदित गति में तय दूरी सीधे गति के द्वितीय समीकरण से भी ज्ञात की जा सकती है।

कण द्वारा (८ 58 से 1 5 65 अर्थात्‌ 1 8 में मन्दित गति में तय की गई दूरी s, =ut + tat? 2

उत्तर: कण द्वारा t = 8s से t = 10s (अर्थात 2s) में मंदित गति में तय की गई दूरी s₂ है।
s₂ = u t + (1/2) a t²
यहाँ u = 12 m/s, a = -6 m/s², t = 2 s
s₂ = (12 × 2) + (1/2 × (-6) × 2²)
s₂ = 24 + (0.5 × (-6) × 4)
s₂ = 24 + ((-3) × 4)
s₂ = 24 - 12 = 12 m

=12 x14 3-24) x1

उत्तर: उपरोक्त गणना का एक चरण इस प्रकार है: 12 × 2 = 24, और (1/2) × (-6) × (2²) = -12। इनका योग 24 - 12 = 12 m होता है।

=12-12 =108m «« कण द्वारा, / 525 से / 65 तक तय की गई कुल दूरी $55|+ 52 = 25.2 + 108 = 360m

उत्तर: कण द्वारा t = 5s से t = 10s तक तय की गई कुल दूरी, दोनों भागों में तय दूरियों के योग के बराबर होगी।
पहले भाग (त्वरित गति, t=5s से 8s) में दूरी s₁ = 25.2 m
दूसरे भाग (मंदित गति, t=8s से 10s) में दूरी s₂ = 12 m
अतः कुल दूरी S = s₁ + s₂ = 25.2 + 12 = 37.2 m
यहाँ 108m और 360m लिखा है जो संभवतः मुद्रण/अंकन त्रुटि है। सही योग 25.2 + 12 = 37.2 m है।

इस समयांतराल के लिए कण की औसत चाल >_ ईले तय दूरी कुल लगा समय

उत्तर: t = 5s से t = 10s तक के समयांतराल के लिए कण की औसत चाल:
कुल तय दूरी = 37.2 m
कुल लगा समय = 10 - 5 = 5 s
औसत चाल = कुल दूरी / कुल समय = 37.2 / 5 = 7.44 m/s

प्रश्न 28. एकविमीय गति में किसी कण का वेग-समय ग्राफ चित्र में दिखाया गया हैः नीचे दिए सूत्रों में / से /, तक के समयांतराल की अवधि में कण की गति का वर्णन करने के लिए कौन-से सूत्र सही है?

उत्तर: दिए गए विकल्पों का विश्लेषण करने पर:

(a) x(t₂) = x(t₁) + v(t₁)(t₂ - t₁) + (1/2)a(t₂ - t₁)² - यह सूत्र केवल तभी सही है जब त्वरण (a) नियत हो। चूँकि दिए ग्राफ में त्वरण नियत नहीं है, अतः यह सूत्र सही नहीं है।

(b) v(t₂) = v(t₁) + a(t₂ - t₁) - यह सूत्र भी नियत त्वरण की स्थिति के लिए है (v = u + at)। चूँकि यहाँ त्वरण नियत नहीं है, अतः यह सूत्र सही नहीं है।

(c) vऔस = [x(t₂) - x(t₁)] / (t₂ - t₁) - यह सूत्र सदैव सही है। औसत वेग की परिभाषा ही विस्थापन में परिवर्तन और समयांतराल का अनुपात है, चाहे त्वरण कुछ भी हो।

(d) aऔस = [v(t₂) - v(t₁)] / (t₂ - t₁) - यह सूत्र भी सदैव सही है। औसत त्वरण की परिभाषा वेग में परिवर्तन और समयांतराल का अनुपात है।

(e) x(t₂) = x(t₁) + vऔस(t₂ - t₁) + (1/2)aऔस(t₂ - t₁)² - यह सूत्र तभी सही होगा जब त्वरण नियत हो और औसत त्वरण, तात्क्षणिक त्वरण के बराबर हो। चूँकि यहाँ त्वरण नियत नहीं है, अतः यह सूत्र सही नहीं है।

(f) x(t₂) - x(t₁) = t-अक्ष तथा दिखाई गई बिंदुकित रेखा के बीच दर्शाएं गए वक्र के अंतर्गत आने वाला क्षेत्रफल। - यह कथन सही है। वेग-समय ग्राफ के अंतर्गत क्षेत्रफल (चिह्न सहित) विस्थापन को निरूपित करता है।

निष्कर्ष: सही सूत्र (c), (d) और (f) हैं।

हल दिए गए ग्राफ का समयांतराल 8 से ४ तक ढलान न तो नियत है और न ही एकसमान।

उत्तर: वेग-समय ग्राफ का ढलान त्वरण को दर्शाता है। यदि ढलान नियत नहीं है, तो इसका अर्थ है कि त्वरण भी नियत नहीं है। यह गति असमान त्वरित गति है।

इसका तात्पर्य है कि त्वरण न तो नियत है और न ही एकसमान। अतः सम्बन्ध (8), (७) तथा (०) सही नहीं है जोकि एकसमान त्वरित गति के लिए हैं परन्तु सम्बन्ध (0), (9) तथा (6) सही हैं क्योंकि ये सम्बन्ध एकसमान व असमान दोनों प्रकार की गतियों के लिए सत्य हैं।

उत्तर: सही व्याख्या है। चूँकि त्वरण नियत नहीं है, इसलिए वे सभी समीकरण जो नियत त्वरण मानकर प्राप्त किए गए हैं (जैसे (a), (b), (e)), यहाँ लागू नहीं होंगे।
हालाँकि, औसत वेग (c), औसत त्वरण (d) की परिभाषाएँ और विस्थापन के लिए ग्राफ के अंतर्गत क्षेत्रफल (f) का सिद्धांत सभी प्रकार की गतियों (नियत या परिवर्ती त्वरण) के लिए सही रहता है।

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