Bihar Board Class 11th Physics (भौतिक विज्ञान) Chapter 1 (भौतिक जगत) Solutions

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Board NameBihar Board of Secondary Education
ClassClass 11th
Content TypeSolution
Solution forClass 11th students
SubjectPhysics (भौतिक विज्ञान)
Chapter NameChapter 1 (भौतिक जगत)
Total Number of Chapter in this Subject15

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Bihar Board Class 11th Physics (भौतिक विज्ञान) Chapter 1 (भौतिक जगत) Solutions

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Chapter-1 भौतिक जगत (Physical World)

प्रश्न 1.1. विज्ञान की प्रकृति से संबंधित कुछ अत्यंत पारंगत प्रकथन आज तक के महानतम वैज्ञानिकों में से एक अल्बर्ट आइंस्टीन द्वारा प्रदान किए गए हैं। आपके विचार से आइंस्टाइन का उस समय क्या तात्पर्य था, जब उन्होंने कहा था “संसार के बारे में सबसे अधिक अबोधगम्य विषय यह है कि यह बोधगम्य है।”

उत्तर: आइंस्टीन का कथन विश्व की प्रकृति के एक गहन सत्य को दर्शाता है। हमारे चारों ओर का ब्रह्मांड अत्यंत जटिल और विविधतापूर्ण प्रतीत होता है—ग्रहों की गति से लेकर परमाणुओं के व्यवहार तक। इतनी जटिलता के बावजूद, आश्चर्य की बात यह है कि इन सभी प्राकृतिक घटनाओं को कुछ मूलभूत और सरल वैज्ञानिक नियमों (जैसे गुरुत्वाकर्षण का नियम, विद्युत-चुंबकीय सिद्धांत) के द्वारा समझा और व्याख्यायित किया जा सकता है। यही 'बोधगम्यता' है। आइंस्टीन का तात्पर्य यह था कि यह ब्रह्मांड इतना व्यवस्थित और नियमबद्ध है कि मानव मस्तिष्क उसकी कार्यप्रणाली को जान सकता है, यह स्वयं में एक आश्चर्यजनक और 'अबोधगम्य' तथ्य है।

प्रश्न 1.2. “प्रत्येक महान भौतिक सिद्धान्त अपसिद्धान्त से आरंभ होकर धर्मसिद्धान्त के रूप में समाप्त होता है”। इस तीक्ष्ण टिप्पणी की वैधता के लिए विज्ञान के इतिहास से कुछ उदाहरण लिखिए।

उत्तर: यह टिप्पणी वैज्ञानिक सिद्धांतों के विकास की प्रक्रिया को सटीक रूप से दर्शाती है। आरंभ में, एक नया विचार स्थापित मान्यताओं के विपरीत होने के कारण 'अपसिद्धांत' (विरोधी सिद्धांत) लगता है, लेकिन प्रयोगों और प्रमाणों द्वारा सत्यापित होने पर वही 'धर्मसिद्धांत' (सर्वमान्य सिद्धांत) बन जाता है।

उदाहरण:

  1. सूर्यकेंद्रित मॉडल: प्राचीन काल में पृथ्वी को ब्रह्मांड का केंद्र माना जाता था (भूकेंद्रित सिद्धांत)। कोपरनिकस और गैलीलियो द्वारा प्रस्तावित सूर्यकेंद्रित सिद्धांत शुरू में एक कट्टरपंथी और खतरनाक अपसिद्धांत था। गैलीलियो को इसके प्रचार के लिए दंडित भी किया गया। लेकिन बाद के प्रमाणों ने इसे सिद्ध किया और आज यह खगोल विज्ञान का एक मूलभूत धर्मसिद्धांत है।
  2. प्रकाश का तरंग सिद्धान्त: न्यूटन ने प्रकाश को कणों का प्रवाह माना। टॉमस यंग के द्वार-छिद्र प्रयोग से प्रकाश के तरंग स्वरूप का प्रमाण मिला। शुरू में यह विचार विवादास्पद था, परंतु अंततः प्रकाश का तरंग सिद्धांत स्वीकार कर लिया गया और यह धर्मसिद्धांत बन गया।
  3. द्रव्यमान-ऊर्जा तुल्यता: आइंस्टीन के समीकरण E=mc² ने यह सिद्धांत दिया कि द्रव्यमान और ऊर्जा परस्पर परिवर्तनीय हैं। यह विचार शुरू में अविश्वसनीय लगा, लेकिन परमाणु ऊर्जा और नाभिकीय अभिक्रियाओं के प्रमाणों ने इसे भौतिकी के सबसे मजबूत धर्मसिद्धांतों में से एक बना दिया।

प्रश्न 1.3. “संभव की कला ही राजनीति है”। इसी प्रकार “समाधान की कला ही विज्ञान है”। विज्ञान की प्रकृति तथा व्यवहार पर इस सुन्दर सूक्ति की व्याख्या कीजिए।

उत्तर: यह सूक्ति विज्ञान के मूल उद्देश्य और कार्यप्रणाली को स्पष्ट करती है। राजनीति में, नेता अक्सर जनता को यह विश्वास दिलाते हैं कि हर चीज संभव है, भले ही वास्तविकता कुछ भी हो। दूसरी ओर, विज्ञान प्रकृति के प्रेक्षणों और प्रयोगों पर आधारित है। एक वैज्ञानिक प्रकृति में घटित विभिन्न जटिल घटनाओं (जैसे ग्रहों की गति, प्रकाश का व्यवहार, पदार्थ की संरचना) का सावधानीपूर्वक अध्ययन करता है। इन प्रेक्षणों के आधार पर वह सिद्धांत और नियम बनाता है जो इन घटनाओं के लिए एक तार्किक और सुसंगत समाधान (व्याख्या) प्रदान करते हैं। उदाहरण के लिए, केप्लर ने टाइको ब्राहे के वर्षों के प्रेक्षणों का विश्लेषण करके ग्रहों की गति के तीन नियम दिए, जो इन गतियों का 'समाधान' थे। इस प्रकार, विज्ञान विविधता में एकता ढूंढने और प्रकृति की पहेलियों का व्यवस्थित समाधान प्रस्तुत करने की कला है।

प्रश्न 1.4. यद्यपि अब भारत में विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी का विस्तृत आधार है तथा यह तीव्रता से फैल भी रहा है, परन्तु फिर भी इसे विज्ञान के क्षेत्र में विश्वनेता बनने की अपनी क्षमता को कार्यान्वित करने में काफी दूरी तय करनी है। ऐसे कुछ महत्त्वपूर्ण कारक लिखिए, जो आपके विचार से भारत में विज्ञान के विकास में बाधक रहे हैं।

उत्तर: भारत ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है, लेकिन अभी भी कुछ चुनौतियाँ हैं जो इसे एक वैश्विक अग्रणी बनने से रोकती हैं:

  1. मौलिक अनुसंधान के लिए अपर्याप्त धन एवं संसाधन: अनुसंधान एवं विकास (R&D) पर सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का प्रतिशत अभी भी विकसित देशों की तुलना में कम है।
  2. शैक्षणिक ढाँचे की कमियाँ: स्कूल और कॉलेज स्तर पर रटंत प्रणाली पर जोर, प्रयोगात्मक शिक्षा और विश्लेषणात्मक सोच को बढ़ावा देने में कमी।
  3. उन्नत तकनीक पर निर्भरता: हम अभी भी कई क्षेत्रों में आयातित या पुरानी तकनीक पर निर्भर हैं, मौलिक नवाचार सीमित है।
  4. उद्योग-शैक्षणिक संस्थान सहयोग की कमी: उद्योगों और शोध संस्थानों के बीच प्रभावी सहयोग का अभाव, जिससे शोध के व्यावहारिक अनुप्रयोग सीमित हो जाते हैं।
  5. प्रतिभा पलायन: बेहतर अवसरों, संसाधनों और मान्यता की तलाश में प्रतिभाशाली शोधकर्ताओं और वैज्ञानिकों का विदेशों में चले जाना।
  6. अनुसंधान प्रकाशन और पेटेंट प्रक्रिया में देरी: शोध पत्रों के प्रकाशन और नए आविष्कारों के पेटेंट कराने की प्रक्रिया धीमी और जटिल है।
  7. वैज्ञानिक प्रशासन में नौकरशाही बाधाएँ: वैज्ञानिक निर्णय प्रक्रियाओं और धन आवंटन में अत्यधिक प्रशासनिक हस्तक्षेप और लालफीताशाही।
  8. समाज में वैज्ञानिक दृष्टिकोण का अभाव: अंधविश्वास और अवैज्ञानिक सोच का प्रचलन, जो वैज्ञानिक तर्क को कमजोर करता है।

प्रश्न 1.5. किसी भी भौतिक विज्ञानी ने इलेक्ट्रॉन के कभी भी दर्शन नहीं किए हैं। परन्तु फिर भी सभी भौतिक विज्ञानियों का इलेक्ट्रॉन के अस्तित्व में विश्वास है। कोई बुद्धिमान परन्तु अन्धविश्वासी व्यक्ति इसी तुल्यरूपता को इस तर्क के साथ आगे बढ़ाता है कि यद्यपि किसी ने “देखा” नहीं है, परन्तु “भूतों” का अस्तित्व है। आप इस तर्क का खंडन किस प्रकार करेंगे?

उत्तर: इलेक्ट्रॉन के अस्तित्व और भूतों के अस्तित्व के तर्क में मूलभूत अंतर वैज्ञानिक प्रमाण और पुष्टि की कसौटी है।

  • इलेक्ट्रॉन: हालाँकि हम इलेक्ट्रॉन को सीधे आँखों से नहीं देख सकते, लेकिन इसके अस्तित्व के अप्रत्यक्ष लेकिन ठोस प्रमाण हैं। इसके आवेश, द्रव्यमान और व्यवहार को असंख्य प्रयोगों (जैसे कैथोड किरण नलिका प्रयोग, मिलिकन का तेल-बूंद प्रयोग, विद्युत धारा, रसायनिक बंधन) द्वारा मापा और सिद्ध किया गया है। इलेक्ट्रॉन के बिना आधुनिक विद्युत चुंबकत्व, क्वांटम यांत्रिकी और रसायन विज्ञान की व्याख्या असंभव है।
  • भूत: भूतों के अस्तित्व का दावा वैज्ञानिक पद्धति द्वारा सत्यापित नहीं किया जा सका है। इनके पीछे कोई प्रयोगसिद्ध सिद्धांत, मापने योग्य गुण या पुनरुत्पादन योग्य प्रमाण नहीं है। भूतों की अवधारणा आमतौर पर व्यक्तिगत अनुभवों, कहानियों या सांस्कृतिक मान्यताओं पर आधारित है, जो वैज्ञानिक मानदंडों पर खरी नहीं उतरतीं।
निष्कर्ष: विज्ञान में विश्वास प्रत्यक्ष दर्शन पर नहीं, बल्कि प्रयोगों और तर्क से प्राप्त प्रमाणों पर आधारित होता है। इलेक्ट्रॉन इस कसौटी पर खरा उतरता है, जबकि भूतों का अस्तित्व नहीं।

प्रश्न 1.6. जापान के एक विशेष समुद्र तटीय क्षेत्र में पाए जाने वाले केकड़े के कबचों (खोल) में से अधिकांश समुरई के अनुश्रुत चेहरे से मिलते-जुलते प्रतीत होते हैं। नीचे इस प्रेक्षित तथ्य की दो व्याख्याएँ दी गई हैं। इनमें से आपको कौन-सा वैज्ञानिक स्पष्टीकरण लगता है?

(क) कई शताब्दियों पूर्व किसी भयानक समुद्री दुर्घटना में एक युवा समुरई डूब गया। उसकी बहादुरी के लिए श्रद्धांजली के रूप में प्रकृति ने अबोधगम्य ढंगों द्वारा उसके चेहरे को केकड़े के कबचों पर अंकित करके उसे उस क्षेत्र में अमर बना दिया।

(ख) समुद्री दुर्घटना के पश्चात् उस क्षेत्र में मछुआरे अपने मृत नेता के सम्मान में सदभावना प्रदर्शन करने के लिए, उस हर केकड़े के कबच को जिसकी आकृति संयोगवश समुरई से मिलती-जुलती प्रतीत होती है, उसे वापस समुद्र में फेंक देते थे। परिणामस्वरूप केकड़े के कबचों की इस प्रकार की आकृति वाले केकड़ों के जीवित रहने तथा प्रजनन की अधिक संभावना हो गई। कई पीढ़ियों के पश्चात्‌ इस आकृति के कबच वाले केकड़ों की संख्या अत्यधिक बढ़ गई।

उत्तर: दूसरा स्पष्टीकरण (ख) वैज्ञानिक है। यह स्पष्टीकरण चार्ल्स डार्विन के प्राकृतिक वरण (Natural Selection) के सिद्धांत पर आधारित है, जो जैव विकास की एक मूलभूत अवधारणा है।

  • मछुआरों द्वारा समुरई जैसे निशान वाले केकड़ों को वापस समुद्र में छोड़ने का कार्य एक मानवजनित चयन (Artificial Selection) का रूप ले लेता है।
  • इस प्रक्रिया में, वे केकड़े जिनके खोल पर ऐसे निशान नहीं थे, उन्हें पकड़ लिया गया और खा लिया गया, जिससे उनके जीन आगे नहीं बढ़े।
  • दूसरी ओर, 'समुरई-चेहरे' वाले केकड़ों को जीवित रहने और प्रजनन करने का अवसर मिल गया।
  • कई पीढ़ियों के बाद, यह लक्षण (समुरई जैसा निशान) आबादी में प्रबल हो गया क्योंकि उसे चयनात्मक लाभ मिला था।

पहला स्पष्टीकरण (क) अलौकिक और अवैज्ञानिक है, क्योंकि यह प्रकृति को एक चेतन श्रद्धांजली देने वाली शक्ति मानता है, जिसका कोई प्रमाण या तंत्र नहीं है।

प्रश्न 1.7. दो शताब्दियों से भी अधिक समय पूर्व इंग्लैंड तथा पश्चिमी यूरोप में जो औद्योगिक क्रांति हुई थी, उसकी चिंगारी का कारण कुछ प्रमुख वैज्ञानिक तथा प्रौद्योगिक उपलब्धियाँ थीं। ये उपलब्धियाँ क्‍या थीं?

उत्तर: दो शताब्दी से अधिक पहले इंग्लैंड और पश्चिमी यूरोप में हुई औद्योगिक क्रांति की नींव कई महत्वपूर्ण वैज्ञानिक खोजों और तकनीकी आविष्कारों ने रखी थी। ये उपलब्धियाँ निम्नलिखित थीं:

  1. भाप इंजन का विकास: जेम्स वाट द्वारा सुधारे गए भाप इंजन ने कारखानों, खानों और परिवहन (रेलवे, जहाज़) में शक्ति का एक नया स्रोत प्रदान किया, जिससे बड़े पैमाने पर उत्पादन संभव हुआ।
  2. कपास ओटाई मशीन (कॉटन जिन): एली व्हिटनी द्वारा बनाई गई यह मशीन कपास से बीजों को हाथ की तुलना में सैकड़ों गुना तेजी से अलग कर सकती थी, जिससे वस्त्र उद्योग में क्रांति आ गई।
  3. लोहे और इस्पात उत्पादन में प्रगति: बेसेमर प्रक्रिया जैसी नई तकनीकों ने सस्ते और उच्च गुणवत्ता वाले इस्पात के बड़े पैमाने पर उत्पादन का मार्ग प्रशस्त किया, जो मशीनों, पुलों और रेलवे के निर्माण के लिए आवश्यक था।
  4. यांत्रिक करघा (पावर लूम): इस आविष्कार ने कपड़ा बुनने की प्रक्रिया को स्वचालित और तेज़ कर दिया, जिससे वस्त्र उत्पादन में भारी वृद्धि हुई।
  5. विद्युत की खोज और प्रयोग: बैटरी और डायनेमो जैसे आविष्कारों ने ऊर्जा के एक नए रूप की शुरुआत की, हालाँकि इसका पूर्ण प्रभाव बाद के वर्षों में देखने को मिला।
  6. यांत्रिकी और गति के नियम: न्यूटन के गति के नियमों और गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांत ने इंजीनियरिंग और मशीन डिजाइन को एक वैज्ञानिक आधार प्रदान किया।

प्रश्न 1.8. प्रायः यह कहा जाता है कि संसार अब दूसरी औद्योगिकी क्रान्ति के दौर से गुजर रहा है, जो समाज में पहली क्रान्ति की भाँति आमूल परिवर्तन ला देगी। विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी के उन प्रमुख समकालीन क्षेत्रों की सूची बनाइए, जो इस क्रान्ति के लिए उत्तरदायी हैं।

उत्तर: वर्तमान में हो रही दूसरी औद्योगिक क्रांति, जिसे अक्सर "डिजिटल क्रांति" या "उद्योग 4.0" कहा जाता है, निम्नलिखित विज्ञान और प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में प्रगति पर आधारित है:

  1. सूचना प्रौद्योगिकी (IT) और कंप्यूटर विज्ञान: उच्च गति वाले कंप्यूटर, इंटरनेट, क्लाउड कंप्यूटिंग और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) ने डेटा प्रसंस्करण और स्वचालन को बदल दिया है।
  2. डिजिटल संचार और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT): उपग्रह संचार, 5G नेटवर्क और उपकरणों के आपस में जुड़ने से एक स्मार्ट, स्वचालित दुनिया का निर्माण हो रहा है।
  3. बायोटेक्नोलॉजी और आनुवंशिक इंजीनियरिंग: जीन एडिटिंग (CRISPR), जीनोमिक्स और जैव-चिकित्सा में प्रगति ने स्वास्थ्य सेवा और कृषि को नया रूप दिया है।
  4. नैनोप्रौद्योगिकी: परमाणु और आणविक स्तर पर पदार्थों में हेरफेर कर नई सामग्रियाँ और उपकरण बनाए जा रहे हैं।
  5. रोबोटिक्स और ऑटोमेशन: स्वचालित रोबोट और कोबोट्स (सहयोगी रोबोट) उत्पादन लाइनों, सर्जरी और घरेलू कार्यों में मदद कर रहे हैं।
  6. अक्षय ऊर्जा प्रौद्योगिकी: सौर सेल, पवन टर्बाइन और बेहतर बैटरी भंडारण प्रणालियों का विकास ऊर्जा क्षेत्र को बदल रहा है।
  7. उन्नत सामग्री विज्ञान: अतिचालक पदार्थ, अत्यधिक मजबूत और हल्की मिश्र धातुएँ, और स्मार्ट सामग्रियाँ नए उत्पादों को संभव बना रही हैं।
  8. क्वांटम कंप्यूटिंग: यह उभरती हुई तकनीक भविष्य में गणना की शक्ति को अभूतपूर्व स्तर तक बढ़ा सकती है।
  9. स्पेस टेक्नोलॉजी और एक्सप्लोरेशन: निजी कंपनियों द्वारा संचालित अंतरिक्ष यान, उपग्रह नेविगेशन (GPS) और ग्रहों की खोज नए अवसर पैदा कर रही है।
  10. 3D प्रिंटिंग और एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग: यह तकनीक जटिल वस्तुओं को परत दर परत बनाने में सक्षम है, जिससे डिजाइन और उत्पादन में क्रांति आ रही है।

प्रश्न 1.9. बाइसवीं शताब्दी के विज्ञान तथा प्रौद्योगिको पर अपनी निराधार कल्पनाओं को आधार मान कर लगभग 1000 शब्दों में कोई कथा लिखिए।

उत्तर (काल्पनिक कथा):

वर्ष 2199। 'आकाशगंगा-एक्स्प्लोरर-7' नामक एक अंतरिक्ष यान प्रकाश की गति के एक बड़े अंश की गति से अल्फा सेंटॉरी तारा समूह की ओर बढ़ रहा था। इस यान को चलाने वाला मुख्य इंजन क्वांटम फ्यूजन प्रणाली पर आधारित था, जिसे पृथ्वी स्थित एक सुपरकंप्यूटर द्वारा नियंत्रित किया जा रहा था। यान का बाहरी आवरण ग्रेफीन और कार्बन नैनोट्यूब से बना था, जो उसे अंतरिक्ष की कठोर परिस्थितियों से बचाता था।

यात्रा के मध्य में, यान अचानक एक अज्ञात 'डार्क मैटर तूफान' के क्षेत्र में प्रवेश कर गया। इस क्षेत्र में भौतिक नियम विचित्र तरीके से काम कर रहे थे। यान की क्वांटम फ्यूजन प्रणाली अचानक बंद हो गई, और सभी इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम बेकार होने लगे। यान के भीतर सवार सात वैज्ञानिकों की जान खतरे में पड़ गई। उन्होंने पृथ्वी को संकट की सूचना भेजी, लेकिन संचार प्रणाली भी ध्वस्त हो चुकी थी।

तभी, यान के कमांडर डॉ. अरुण ने एक प्रायोगिक 'इमरजेंसी ड्राइव' सिस्टम को सक्रिय करने का निर्णय लिया। यह सिस्टम 'एंटीमैटर' के सूक्ष्म कणों का उपयोग करके ऊर्जा उत्पन्न करता था। सिस्टम सक्रिय हुआ और यान ने धीरे-धीरे गति पकड़नी शुरू की। हालाँकि, इस प्रक्रिया में यान का एक बूस्टर मॉड्यूल नष्ट हो गया, लेकिन उसने मुख्य यान को आगे बढ़ने के लिए पर्याप्त संवेग प्रदान कर दिया।

अगले चरण में, दो वैज्ञानिकों ने स्वचालित मरम्मत रोबोट्स की मदद से यान के बाहर जाकर क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत की। उनके सूट में लगे 'बायो-स्टेसिस फ़ील्ड' ने उन्हें अंतरिक्ष के चरम तापमान और विकिरण से बचाया। मरम्मत के बाद, यान फिर से अपने निर्धारित मार्ग पर चल पड़ा।

अल्फा सेंटॉरी के निकट पहुँचने पर, यान को एक विशाल ग्रह के चारों ओर घूमते हुए एक चंद्रमा पर उतरना था, जहाँ जीवन के संकेत मिले थे। लैंडिंग के दौरान, स्थानीय वातावरण में मौजूद अजीबोगरीब विद्युत चुम्बकीय तरंगों ने यान के कंप्यूटर सिस्टम में गड़बड़ी पैदा कर दी। यान का नियंत्रण लगभग खोने के कगार पर था।

तभी, यान के कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) सहायक, जिसका नाम 'सिन्थिया' था, ने स्वयं ही एक नया एल्गोरिदम चलाकर समस्या का समाधान ढूंढ निकाला और यान को सुरक्षित लैंडिंग करवाई। चंद्रमा की सतह पर उतरकर वैज्ञानिकों ने पाया कि वहाँ सूक्ष्म जीवन के रूप में जीवन मौजूद है, जो सिलिकॉन आधारित था, न कि कार्बन आधारित। यह एक अभूतपूर्व खोज थी।

वापसी की यात्रा शुरू हुई। पृथ्वी से इतनी दूर और इतने वर्षों की यात्रा के बाद भी, यान के भीतर 'क्रायो-स्लीप चैंबर्स' और 'हाइड्रोपोनिक फार्म' के कारण वैज्ञानिक स्वस्थ और सक्रिय थे। उन्होंने अपनी सारी खोजों और डेटा को क्वांटम एन्क्रिप्शन के माध्यम से पृथ्वी पर भेज दिया था।

अंत में, जब 'आकाशगंगा-एक्स्प्लोरर-7' पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश कर रहा था, तो उसके ऊष्मारोधी आवरण ने पुनः प्रवेश के दौरान उत्पन्न भीषण गर्मी को सफलतापूर्वक सहन किया। यान सुरक्षित उतरा और मानवता के लिए एक नए युग की शुरुआत हुई। इस मिशन ने साबित कर दिया कि बाइसवीं शताब्दी के विज्ञान और प्रौद्योगिकी ने मनुष्य को न केवल अपने ग्रह, बल्कि तारों तक की यात्रा करने की क्षमता प्रदान कर दी है।

(यह एक काल्पनिक कथा है जो भविष्य की संभावित वैज्ञानिक प्रगति पर आधारित है।)

भौतिक विज्ञान - अध्याय 1: भौतिक जगत

प्रश्न 1. भौतिकी का क्या अर्थ है?

भौतिकी प्राकृतिक विज्ञान की एक मौलिक शाखा है जो पदार्थ, ऊर्जा और इनके बीच परस्पर क्रिया का अध्ययन करती है। यह ब्रह्मांड के मूलभूत नियमों, जैसे गति, बल, ऊर्जा के रूपांतरण, तरंगों और कणों के व्यवहार को समझने का प्रयास करती है। सरल शब्दों में, भौतिकी यह जानने का विज्ञान है कि प्रकृति कैसे काम करती है।

प्रश्न 2. भौतिकी की प्रकृति क्या है?

भौतिकी की प्रकृति मात्रात्मक, प्रयोगसिद्ध और सैद्धांतिक है। यह प्राकृतिक घटनाओं को मापने योग्य राशियों (जैसे लंबाई, द्रव्यमान, समय) के माध्यम से समझाती है। इसके नियम प्रयोगों और अवलोकनों पर आधारित होते हैं और गणितीय समीकरणों के रूप में व्यक्त किए जाते हैं। भौतिकी की प्रकृति में निरंतर विकास और नए सिद्धांतों का समावेश होता रहता है जो पहले के सिद्धांतों को और अधिक सटीक या विस्तृत बनाते हैं।

प्रश्न 3. भौतिकी के दो मुख्य प्रकार कौन-कौन से हैं?

भौतिकी को मुख्य रूप से दो व्यापक श्रेणियों में बाँटा जा सकता है:

  1. शास्त्रीय भौतिकी (Classical Physics): इसमें उन सिद्धांतों का अध्ययन किया जाता है जो सामान्य दैनिक जीवन में देखे जाने वाले पैमाने (मैक्रोस्कोपिक दुनिया) पर लागू होते हैं। इसमें यांत्रिकी, ऊष्मागतिकी, ध्वनि, प्रकाशिकी और विद्युत चुंबकत्व जैसे विषय आते हैं।
  2. आधुनिक भौतिकी (Modern Physics): यह अत्यंत उच्च गतियों (प्रकाश की गति के करीब), अत्यंत सूक्ष्म कणों (परमाणु और उसके भीतर) और अत्यधिक ऊर्जाओं से संबंधित घटनाओं की व्याख्या करती है। इसमें सापेक्षता सिद्धांत, क्वांटम यांत्रिकी, परमाणु एवं नाभिकीय भौतिकी शामिल हैं।

प्रश्न 4. भौतिकी का अन्य विज्ञानों से क्या संबंध है?

भौतिकी को अक्सर 'मौलिक विज्ञान' कहा जाता है क्योंकि यह अन्य सभी प्राकृतिक विज्ञानों के लिए आधार प्रदान करती है।

  • रसायन विज्ञान (Chemistry): परमाणुओं और अणुओं की संरचना, बंधन और रासायनिक अभिक्रियाओं को समझने के लिए भौतिकी के क्वांटम सिद्धांत और ऊष्मागतिकी के नियम आवश्यक हैं।
  • जीव विज्ञान (Biology): प्रकाश संश्लेषण में प्रकाश की भूमिका, तंत्रिका आवेगों का संचरण, हड्डियों का यांत्रिकी और दृष्टि की प्रक्रिया जैसी जैविक घटनाएँ भौतिकी के सिद्धांतों पर निर्भर करती हैं।
  • खगोल विज्ञान (Astronomy) और भूविज्ञान (Geology): तारों का विकास, ग्रहों की गति, भूकंपीय तरंगें और पृथ्वी की आंतरिक संरचना का अध्ययन गुरुत्वाकर्षण, तरंग और ऊष्मा के भौतिक नियमों के बिना संभव नहीं है।

इस प्रकार, भौतिकी अन्य विज्ञानों को एक सैद्धांतिक ढाँचा और मापन के उपकरण प्रदान करती है।

प्रश्न 5. भौतिकी का समाज और प्रौद्योगिकी पर क्या प्रभाव पड़ा है?

भौतिकी के सिद्धांतों ने समाज और प्रौद्योगिकी में क्रांतिकारी परिवर्तन लाए हैं।

  • ऊर्जा: भाप के इंजन, विद्युत जनरेटर, सौर सेल और परमाणु ऊर्जा संयंत्रों का विकास ऊष्मागतिकी और नाभिकीय भौतिकी पर आधारित है।
  • संचार: रेडियो, टेलीविजन, मोबाइल फोन, इंटरनेट और फाइबर ऑप्टिक्स विद्युत चुंबकत्व और क्वांटम भौतिकी की देन हैं।
  • चिकित्सा: एक्स-रे, एमआरआई, सीटी स्कैन, लेजर सर्जरी और रेडियोथेरेपी भौतिकी के अनुप्रयोगों से ही संभव हुए हैं।
  • परिवहन: हवाई जहाज, रॉकेट, गाड़ियाँ और ऑटोमोबाइल यांत्रिकी और ऊष्मागतिकी के सिद्धांतों पर काम करते हैं।
  • गणना: कंप्यूटर, ट्रांजिस्टर और अर्धचालक उपकरण क्वांटम भौतिकी और ठोस-अवस्था भौतिकी पर आधारित हैं।

इस प्रकार, भौतिकी ने आधुनिक जीवनशैली की नींव रखी है और तकनीकी प्रगति का मुख्य चालक बनी हुई है।

बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)

1. भौतिकी है-

(A) पदार्थ का अध्ययन
(B) ऊर्जा का अध्ययन
(C) पदार्थ और ऊर्जा का अध्ययन
(D) जीवन का अध्ययन

उत्तर: (C) पदार्थ और ऊर्जा का अध्ययन
भौतिकी प्राकृतिक विज्ञान की वह शाखा है जो ब्रह्मांड में पदार्थ (उसकी संरचना, गति) और ऊर्जा (उसके विभिन्न रूपों और रूपांतरणों) तथा इन दोनों के बीच परस्पर क्रिया के मूलभूत सिद्धांतों का अध्ययन करती है।

2. निम्नलिखित में से कौन-सा भौतिकी का भाग नहीं है?

(A) यांत्रिकी
(B) प्रकाशिकी
(C) ऊष्मागतिकी
(D) आनुवंशिकी

उत्तर: (D) आनुवंशिकी
यांत्रिकी, प्रकाशिकी और ऊष्मागतिकी भौतिकी की प्रमुख उप-शाखाएँ हैं। आनुवंशिकी (जेनेटिक्स) जीव विज्ञान की एक शाखा है जो जीन, आनुवंशिकता और जीवों में विविधता का अध्ययन करती है, इसलिए यह भौतिकी का भाग नहीं है।

3. भौतिकी का अन्य विज्ञानों से संबंध है-

(A) अप्रत्यक्ष
(B) प्रत्यक्ष
(C) कोई संबंध नहीं
(D) इनमें से कोई नहीं

उत्तर: (B) प्रत्यक्ष
भौतिकी का अन्य विज्ञानों जैसे रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान, खगोल विज्ञान और भूविज्ञान से सीधा और गहरा संबंध है। भौतिकी के सिद्धांत इन विज्ञानों में होने वाली घटनाओं को समझने के लिए मौलिक आधार प्रदान करते हैं। उदाहरण के लिए, रसायन विज्ञान में अणुओं की संरचना क्वांटम भौतिकी पर निर्भर करती है।

4. निम्नलिखित में से कौन-सा भौतिकी का उदाहरण नहीं है?

(A) गुरुत्वाकर्षण
(B) प्रकाश संश्लेषण
(C) विद्युत
(D) चुंबकत्व

उत्तर: (B) प्रकाश संश्लेषण
गुरुत्वाकर्षण, विद्युत और चुंबकत्व भौतिकी में अध्ययन की जाने वाली मौलिक प्रक्रियाएँ या बल हैं। प्रकाश संश्लेषण (फोटोसिंथेसिस) एक जैव-रासायनिक प्रक्रिया है जिसमें पौधे सूर्य के प्रकाश की ऊर्जा का उपयोग कर कार्बन डाइऑक्साइड और पानी से भोजन (ग्लूकोज) बनाते हैं। यह एक जैविक प्रक्रिया है, इसलिए यह भौतिकी का सीधा उदाहरण नहीं है (हालाँकि इसमें प्रकाश ऊर्जा का उपयोग जरूर होता है)।

5. भौतिकी का समाज पर प्रभाव है-

(A) सकारात्मक
(B) नकारात्मक
(C) दोनों
(D) इनमें से कोई नहीं

उत्तर: (C) दोनों
भौतिकी के आविष्कारों और प्रौद्योगिकियों का समाज पर दोहरा प्रभाव पड़ा है। सकारात्मक प्रभाव के रूप में इसने चिकित्सा, संचार, परिवहन और ऊर्जा के क्षेत्र में अभूतपूर्व सुविधाएँ प्रदान की हैं। नकारात्मक प्रभाव के रूप में परमाणु हथियारों, पर्यावरण प्रदूषण और संसाधनों के अति-दोहन जैसी चुनौतियाँ भी पैदा हुई हैं। इसलिए, भौतिकी का प्रभाव दोनों प्रकार का रहा है।

प्रश्न 1.14. “भौतिकी के समीकरणों में सुन्दरता होना उनका प्रयोगों के साथ सहमत होने की अपेक्षा अधिक महत्त्वपूर्ण है।” यह मत महान्‌ ब्विटिश वैज्ञानिक पी०ए०एम० डिरैक का था। इस दृष्टिकोण की समीक्षा कीजिए। इस पुस्तक में ऐसे संबंधों तथा समीकरणों को खोजिए, जो आपको सुन्दर लगते हैं।

उत्तर: डिरैक का यह दृष्टिकोण इस विचार पर आधारित है कि प्रकृति के मूलभूत नियम सरलता और सुंदरता से परिपूर्ण होते हैं। एक सुंदर और सुसंगत गणितीय समीकरण अक्सर प्रकृति की गहरी सच्चाई को दर्शाता है, भले ही प्रारंभ में उसका प्रायोगिक सत्यापन न भी हो। हालांकि, अंततः किसी भी भौतिक सिद्धांत की कसौटी प्रयोग ही होता है। इसलिए, एक आदर्श भौतिकी का समीकरण वह है जो गणितीय सुंदरता और प्रायोगिक सत्य दोनों का सामंजस्यपूर्ण मेल हो।

इस पुस्तक में कुछ सुंदर समीकरण निम्नलिखित हैं:

  1. आइंस्टाइन का द्रव्यमान-ऊर्जा समतुल्यता समीकरण: E = mc² यह समीकरण अत्यंत सरल है, परंतु इसने ऊर्जा और द्रव्यमान के बीच के गहन संबंध को उजागर करके विज्ञान की दिशा ही बदल दी।
  2. न्यूटन का सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण का नियम: F = G(m₁m₂/r²) यह समीकरण ब्रह्मांड के हर कण के बीच कार्यरत बल को एक साधारण सूत्र में बाँध देता है, जो इसकी सार्वभौमिकता और सुंदरता को दर्शाता है।
  3. दे-ब्रॉग्ली का तरंग-कण द्वैत समीकरण: λ = h/p यह समीकरण सूक्ष्म कणों की तरंग और कण दोनों प्रकृति को दर्शाता है, जो क्वांटम यांत्रिकी की आधारशिला है।

प्रश्न 1.15. यद्यपि उपरोक्त कथन विवादास्पद हो सकता है, परन्तु अधिकांश भौतिक विज्ञानियों का यह मत है कि भौतिकी के महान नियम एक ही साथ सरल एवं सुन्दर होते हैं। डिरिक के अतिरिक्त जिन सुप्रसिद्ध भौतिक विज्ञानियों ने ऐसा अनुभव किया उनमें से कुछ के नाम इस प्रकार हैं-- आईइंस्टाइन, बोर, हाइसेनबर्ग, चन्द्रशेखर तथा फाइमैन। आपसे अनुरोध है कि आप भौतिकी के इन विद्वानों तथा अन्य महानायकों द्वारा रचित सामान्य पुस्तकों एवं लेखों तक पहुँचने के लिए विशेष प्रयास अवश्य करें। ( इस पुस्तक के अंत में दी गई ग्रंथ सूची देखिए )। इनके लेख सचमुच प्रेरक हैं।

उत्तर: निश्चित रूप से, भौतिकी के मूलभूत नियम अक्सर गहरी सरलता और सौंदर्य से युक्त होते हैं। यहाँ कुछ ऐसे ही उदाहरण दिए गए हैं:

  1. दे-ब्रॉग्ली का संबंध (λ = h/p): यह समीकरण बताता है कि प्रत्येक गतिमान कण एक तरंग से जुड़ा होता है। इसकी सरलता के बावजूद, इसने पदार्थ की प्रकृति के बारे में हमारी समझ में क्रांतिकारी बदलाव किया।
  2. बोर का क्वांटीकरण नियम: परमाणु में इलेक्ट्रॉन केवल कुछ विशिष्ट कक्षाओं में ही चक्कर लगा सकते हैं, जहाँ उनका कोणीय संवेग (mvr) h/2π का पूर्णांक गुणज होता है। यह सरल शर्त परमाण्विक स्पेक्ट्रा की जटिलता को स्पष्ट करती है।
  3. हाइजेनबर्ग का अनिश्चितता सिद्धांत: Δx.Δp ≥ h/4π. यह समीकरण बताता है कि किसी कण की स्थिति और संवेग को एक साथ पूर्ण निश्चितता के साथ नहीं मापा जा सकता। यह प्रकृति की एक मौलिक सीमा को दर्शाता है और क्वांटम सिद्धांत का एक सुंदर आधार स्तंभ है।
  4. आइंस्टाइन का द्रव्यमान-ऊर्जा समीकरण (E = mc²): यह समीकरण इस बात का प्रतीक है कि द्रव्यमान और ऊर्जा एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। इसकी सरलता और गहराई अद्वितीय है।
  5. न्यूटन का गति का द्वितीय नियम (F = dp/dt): यह बल, द्रव्यमान और त्वरण के बीच संबंध स्थापित करने वाला मौलिक नियम है, जो असंख्य यांत्रिक घटनाओं की व्याख्या करता है।
  6. केप्लर का ग्रहीय गति का तृतीय नियम (T² ∝ R³): यह नियम बताता है कि सूर्य से किसी ग्रह की औसत दूरी (R) का घन, उसके परिक्रमण काल (T) के वर्ग के अनुक्रमानुपाती होता है। यह सौर मंडल की गति में एक सुंदर गणितीय नियमितता दर्शाता है।

इन सभी उदाहरणों से स्पष्ट है कि भौतिकी के महान नियम प्रायः सरल, सुसंगत और सौंदर्यपूर्ण गणितीय रूप में प्रकट होते हैं।

प्रश्न 1.16, विज्ञान की पाठ्य पुस्तकें आपके मन में यह गलत धारणा उत्पन्न कर सकती हैं कि विज्ञान पढ़ना शुष्क तथा पूर्णतः अत्यन्त गंभीर है एवं वैज्ञानिक भुलक्कड़, अंतर्मुखी, कभी न हँसने वाले अथवा खीसें निकालने वाले व्यक्ति होते हैं। विज्ञान तथा वैज्ञानिकों का यह चित्रण पूर्णतः: आधारहीन है। अन्य समुदाय के मनुष्यों की भाँति वैज्ञानिक भी विनोदी होते हैं तथा बहुत-से वैज्ञानिकों ने तो अपने वैज्ञानिक कार्यों को गंभीरता से पूरा करते हुए अत्यंत विनोदी प्रकृति तथा साहसिक कार्य करके अपना जीवन व्यतीत किया है। गैमो तथा फाइनमैन इसी श्रेणी के दो भौतिक विज्ञानी हैं। ग्रंथ सूची में इनके द्वारा रचित पुस्तकों को पढ़ने में आपको आनन्द प्राप्त होगा।

उत्तर: यह बिल्कुल सही है कि वैज्ञानिकों का स्टीरियोटाइप चित्रण (भुलक्कड़, गंभीर) पूरी तरह से गलत है। विज्ञान खोज, जिज्ञासा और रचनात्मकता का एक रोमांचक क्षेत्र है। वैज्ञानिक भी समाज के अन्य लोगों की तरह होते हैं—उनमें हास्य-विनोद की भावना होती है, वे कला, संगीत और साहसिक कार्यों में रुचि रखते हैं। उदाहरण के लिए:

  • रिचर्ड फाइनमैन न केवल एक महान भौतिक विज्ञानी थे, बल्कि वे बांगो बजाने के शौकीन, चित्रकार और एक शानदार कहानीकार भी थे। उनकी पुस्तकें (जैसे "सरली, आप मजाक कर रहे हैं, मि. फाइनमैन!") उनके रोमांचक और विनोदी व्यक्तित्व को दर्शाती हैं।
  • जॉर्ज गैमो ने विज्ञान को लोकप्रिय बनाने के लिए कई मनोरंजक पुस्तकें लिखीं।
  • भारतीय वैज्ञानिकों में सर सी.वी. रमण संगीत प्रेमी थे, डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम कविताएँ लिखते थे और वीणा बजाते थे, तथा प्रो. सत्येंद्र नाथ बोस साहित्य, संगीत और चित्रकला में गहरी रुचि रखते थे।

इस प्रकार, विज्ञान की खोज एक रोमांचक सफर है और वैज्ञानिक इस सफर के ऐसे यात्री हैं जो जीवन के हर पहलू का आनंद लेते हैं।

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