Bihar Board Class 10th Social Science (खण्ड-क) Chapter 1 भारत: संसाधन एवं उपयोग) Solutions

Here we have provided Solution for Chapter 1 भारत: संसाधन एवं उपयोग) of Social Science (खण्ड-क) subject for Class 10th students of Bihar Board of Secondary Education. There are various chapters in this Social Science (खण्ड-क) such as Chapter 1 भारत: संसाधन एवं उपयोग), Chapter 1A प्राकृतिक संसाधन), Chapter 1B जल संसाधन), Chapter 1C वन एवं वन्य प्राणी संसाधन), Chapter 1D खनिज संसाधन), Chapter 1E शक्ति (ऊर्जा) संसाधन), Chapter 2 कृषि), Chapter 3 निर्माण उद्योग), Chapter 4 परिवहन, संचार एवं व्यापार), Chapter 5 बिहार: कृषि एवं वन संसाधन), Chapter 5A बिहार: खनिज एवं ऊर्जा संसाधन), Chapter 5B बिहार: उद्योग एवं परिवहन), Chapter 5C बिहार: जनसंख्या एवं नगरीकरण) and Chapter 6 मानचित्र अध्ययन (उच्चावच निरूपण)). Summary of the same is given below:

Board NameBihar Board of Secondary Education
ClassClass 10th
Content TypeSolution
Solution forClass 10th students
SubjectSocial Science (खण्ड-क)
Chapter NameChapter 1 भारत: संसाधन एवं उपयोग)
Total Number of Chapter in this Subject14

Studying Bihar Board Class 10th Social Science (खण्ड-क) Chapter 1 भारत: संसाधन एवं उपयोग) solution will help you higher marks in this subject but you need to follow best practices to achieve higher marks, which are given after solutions, go through them once.

Bihar Board Class 10th Social Science (खण्ड-क) Chapter 1 भारत: संसाधन एवं उपयोग) Solutions

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1. निम्नलिखित में से कौन-सा संसाधन नवीकरणीय है?

  1. कोयला
  2. पेट्रोलियम
  3. जल
  4. प्राकृतिक गैस

उत्तर: जल एक नवीकरणीय संसाधन है क्योंकि यह जल चक्र के माध्यम से प्राकृतिक रूप से पुनः भरता रहता है। सूर्य की ऊर्जा से महासागरों, नदियों और झीलों का पानी वाष्प बनकर वायुमंडल में जाता है और फिर वर्षा के रूप में वापस आ जाता है। इस प्रकार, यदि समझदारी से उपयोग किया जाए तो जल का भंडार समाप्त नहीं होता। कोयला, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस गैर-नवीकरणीय संसाधन हैं क्योंकि इनके निर्माण में लाखों वर्ष लगते हैं और एक बार उपयोग के बाद ये दोबारा नहीं बन पाते।

2. निम्नलिखित में से कौन-सा मानव निर्मित संसाधन है?

  1. वन
  2. भवन
  3. वायु
  4. खनिज

उत्तर: भवन एक मानव निर्मित संसाधन है। मानव निर्मित संसाधन वे होते हैं जिनका निर्माण मनुष्य अपनी बुद्धि, तकनीक और श्रम के द्वारा प्राकृतिक संसाधनों से करता है। भवन बनाने के लिए ईंट, सीमेंट, लोहा, लकड़ी आदि प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग किया जाता है। वन, वायु और खनिज प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले संसाधन हैं, इसलिए ये प्राकृतिक संसाधन की श्रेणी में आते हैं।

3. निम्नलिखित में से कौन-सा खनिज 'लौह-अयस्क' है?

  1. बॉक्साइट
  2. मैंगनीज
  3. सोना
  4. लौह-अयस्क

उत्तर: लौह-अयस्क एक प्रमुख खनिज है जिससे लोहा प्राप्त किया जाता है। यह एक धात्विक खनिज है जिसमें लोहे की मात्रा अधिक होती है। भारत में लौह-अयस्क के प्रमुख भंडार ओडिशा, झारखंड, छत्तीसगढ़ और कर्नाटक में पाए जाते हैं। बॉक्साइट एल्युमिनियम का अयस्क है, मैंगनीज एक अलग धात्विक खनिज है, और सोना एक बहुमूल्य धातु है।

4. भारत में सबसे अधिक लौह-अयस्क किस राज्य में पाया जाता है?

  1. झारखंड
  2. मध्य प्रदेश
  3. कर्नाटक
  4. ओडिशा

उत्तर: ओडिशा राज्य में भारत का सबसे अधिक लौह-अयस्क पाया जाता है। ओडिशा के क्योंझर और सुंदरगढ़ जिलों में विशाल लौह-अयस्क के भंडार हैं। यहाँ पाया जाने वाला अयस्क उच्च गुणवत्ता वाला है, जिसमें लोहे की मात्रा 60% से अधिक होती है। इसके बाद झारखंड, छत्तीसगढ़ और कर्नाटक का स्थान आता है। लौह-अयस्क इस्पात उद्योग की रीढ़ है और देश के औद्योगिक विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

5. निम्नलिखित में से कौन-सा ऊर्जा का अनवीकरणीय स्रोत है?

  1. जल
  2. सूर्य
  3. कोयला
  4. पवन

उत्तर: कोयला ऊर्जा का एक अनवीकरणीय स्रोत है। अनवीकरणीय संसाधन वे हैं जो सीमित मात्रा में उपलब्ध हैं और एक बार उपयोग करने के बाद समाप्त हो जाते हैं या इनके पुनः निर्माण में लाखों वर्ष लग जाते हैं। कोयला एक जीवाश्म ईंधन है जो प्राचीन वनस्पतियों के दबने और लाखों वर्षों के दबाव से बना है। जल (जलविद्युत), सूर्य (सौर ऊर्जा) और पवन (पवन ऊर्जा) नवीकरणीय ऊर्जा के स्रोत हैं क्योंकि ये प्रकृति में लगातार पुनःपूर्ति होते रहते हैं।

6. निम्नलिखित में से कौन-सा खनिज 'मोनाजाइट' रेत में पाया जाता है?

  1. लौह
  2. यूरेनियम
  3. थोरियम
  4. ताँबा

उत्तर: थोरियम खनिज मोनाजाइट रेत में पाया जाता है। मोनाजाइट एक फॉस्फेट खनिज है जिसमें दुर्लभ मृदा तत्वों के साथ-साथ थोरियम की महत्वपूर्ण मात्रा पाई जाती है। भारत के केरल, तमिलनाडु और ओडिशा के तटीय क्षेत्रों में मोनाजाइट रेत के बड़े भंडार हैं। थोरियम एक रेडियोएक्टिव तत्व है और इसका उपयोग परमाणु ऊर्जा के उत्पादन में किया जा सकता है। भारत के पास थोरियम के विशाल भंडार हैं, जो भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

7. निम्नलिखित में से कौन-सा राज्य भारत का अग्रणी ताँबा उत्पादक राज्य है?

  1. बिहार
  2. झारखंड
  3. मध्य प्रदेश
  4. राजस्थान

उत्तर: मध्य प्रदेश भारत का अग्रणी ताँबा उत्पादक राज्य है। मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में स्थित मलान्जखंड खान देश की सबसे बड़ी ताँबे की खान है। ताँबा एक महत्वपूर्ण अलौह धातु है जिसका उपयोग बिजली के तार, इलेक्ट्रॉनिक्स, सिक्के और विभिन्न मिश्रधातुएँ बनाने में किया जाता है। राजस्थान (खेतड़ी) और झारखंड (सिंहभूम) में भी ताँबे के भंडार हैं, लेकिन उत्पादन में मध्य प्रदेश सबसे आगे है।

8. निम्नलिखित में से कौन-सा खनिज झारखंड में नहीं पाया जाता है?

  1. कोयला
  2. लौह-अयस्क
  3. बॉक्साइट
  4. ताँबा

उत्तर: बॉक्साइट खनिज झारखंड राज्य में नहीं पाया जाता है। झारखंड खनिज संपदा से भरपूर राज्य है जहाँ कोयला (झरिया, बोकारो), लौह-अयस्क (नोआमुंडी, पश्चिम सिंहभूम) और ताँबा (सिंहभूम) के प्रमुख भंडार हैं। हालाँकि, बॉक्साइट (एल्युमिनियम का अयस्क) के प्रमुख भंडार ओडिशा, गुजरात, झारखंड के पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में पाए जाते हैं। झारखंड में बॉक्साइट के महत्वपूर्ण भंडार नहीं हैं।

9. भारत में सबसे अधिक बॉक्साइट किस राज्य में पाया जाता है?

  1. मध्य प्रदेश
  2. झारखंड
  3. ओडिशा
  4. गुजरात

उत्तर: ओडिशा राज्य में भारत का सबसे अधिक बॉक्साइट पाया जाता है। ओडिशा के कोरापुट, कालाहांडी और संबलपुर जिलों में बॉक्साइट के विशाल भंडार हैं। भारत के कुल बॉक्साइट उत्पादन का लगभग 50% से अधिक हिस्सा अकेले ओडिशा से आता है। बॉक्साइट एल्युमिनियम का प्राथमिक अयस्क है और इसका उपयोग एल्युमिनियम बनाने, रसायन उद्योग और सीमेंट उद्योग में किया जाता है। गुजरात और छत्तीसगढ़ अन्य प्रमुख उत्पादक राज्य हैं।

10. निम्नलिखित में से कौन-सा खनिज हज़ारीबाग में पाया जाता है?

  1. लौह-अयस्क
  2. बॉक्साइट
  3. माइका
  4. ताँबा

उत्तर: माइका (अभ्रक) खनिज हज़ारीबाग (झारखंड) में पाया जाता है। हज़ारीबाग क्षेत्र भारत में अभ्रक उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है। अभ्रक एक अधात्विक खनिज है जो पतली, लचीली परतों में मिलता है। इसका उपयोग विद्युत और इलेक्ट्रॉनिक उद्योग में इन्सुलेटर के रूप में, पेंट उद्योग में चमक देने के लिए और सौंदर्य प्रसाधनों में किया जाता है। झारखंड के हज़ारीबाग, कोडरमा और गिरिडीह जिले अभ्रक के लिए मुख्य केंद्र हैं।

1. निम्नलिखित में से कौन-सा संसाधन नवीकरण योग्य है?

  1. कोयला
  2. पेट्रोलियम
  3. जल
  4. प्राकृतिक गैस

उत्तर: जल एक नवीकरण योग्य संसाधन है क्योंकि यह जल चक्र के माध्यम से प्राकृतिक रूप से पुनः भर जाता है। कोयला, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस जीवाश्म ईंधन हैं जो लाखों वर्षों में बनते हैं और एक बार उपयोग करने के बाद खत्म हो जाते हैं, इसलिए ये अनवीकरण योग्य संसाधन हैं।

2. निम्नलिखित में से कौन-सा मानव निर्मित संसाधन है?

  1. वन
  2. भवन
  3. वायु
  4. खनिज

उत्तर: भवन एक मानव निर्मित संसाधन है। मनुष्य अपनी बुद्धि और तकनीक का उपयोग करके प्राकृतिक संसाधनों से भवनों का निर्माण करता है। वन, वायु और खनिज प्रकृति द्वारा प्रदत्त प्राकृतिक संसाधन हैं।

3. भारत में सबसे अधिक किस प्रकार की मृदा पाई जाती है?

  1. जलोढ़ मृदा
  2. काली मृदा
  3. लाल मृदा
  4. लैटेराइट मृदा

उत्तर: भारत में सबसे अधिक जलोढ़ मृदा पाई जाती है। यह मृदा उत्तरी मैदानों और नदी घाटियों में नदियों द्वारा लाई गई बारीक गाद से बनी है। यह बहुत उपजाऊ होती है और गेहूँ, चावल, गन्ना आदि फसलों के लिए उत्तम मानी जाती है।

4. भारत में सबसे अधिक लौह अयस्क किस राज्य में पाया जाता है?

  1. झारखंड
  2. ओडिशा
  3. कर्नाटक
  4. छत्तीसगढ़

उत्तर: भारत में सबसे अधिक लौह अयस्क ओडिशा राज्य में पाया जाता है। ओडिशा के क्योंझर और सुंदरगढ़ जिले प्रमुख उत्पादक क्षेत्र हैं। इसके बाद झारखंड, कर्नाटक और छत्तीसगढ़ का स्थान आता है।

5. संसाधन किसे कहते हैं?

उत्तर: संसाधन वे सभी प्राकृतिक, मानव निर्मित या मानवीय तत्व हैं जिनका उपयोग मानव की आवश्यकताओं और इच्छाओं की पूर्ति के लिए किया जा सकता है। किसी वस्तु को संसाधन बनाने के लिए तीन बातें जरूरी हैं: उपयोगिता, प्रौद्योगिकी द्वारा उपयोग की क्षमता, और मानवीय इच्छा। उदाहरण के लिए, नदी का पानी एक संसाधन है क्योंकि हम उसे पीने, सिंचाई करने और बिजली बनाने के लिए उपयोग कर सकते हैं।

6. संसाधनों का वर्गीकरण किन आधारों पर किया जाता है?

उत्तर: संसाधनों का वर्गीकरण मुख्य रूप से निम्नलिखित आधारों पर किया जाता है:

  1. उत्पत्ति के आधार पर: (क) जैव संसाधन (जैसे- वन, जीव-जंतु) (ख) अजैव संसाधन (जैसे- पत्थर, खनिज)।
  2. समाप्यता के आधार पर: (क) नवीकरण योग्य संसाधन (जैसे- सौर ऊर्जा, वायु) (ख) अनवीकरण योग्य संसाधन (जैसे- कोयला, तेल)।
  3. स्वामित्व के आधार पर: (क) व्यक्तिगत संसाधन (जैसे- घर, जमीन) (ख) सामुदायिक संसाधन (जैसे- चरागाह) (ग) राष्ट्रीय संसाधन (जैसे- नदियाँ, खनिज) (घ) अंतर्राष्ट्रीय संसाधन (जैसे- महासागर)।
  4. विकास के स्तर के आधार पर: (क) संभावी संसाधन (जिनका अभी पूरा उपयोग नहीं हुआ) (ख) विकसित संसाधन (जिनका सर्वेक्षण हो चुका है और उपयोग किया जा रहा है)।

7. मृदा निर्माण को प्रभावित करने वाले कारकों का वर्णन करें।

उत्तर: मृदा के निर्माण को निम्नलिखित कारक प्रभावित करते हैं:

  1. मूल चट्टान: जिस चट्टान के टूटने-फूटने से मृदा बनती है, उसके खनिज और गुण मृदा की उर्वरता और रंग को निर्धारित करते हैं।
  2. जलवायु (तापमान एवं वर्षा): तापमान में परिवर्तन से चट्टानें फटती और टूटती हैं। वर्षा चट्टानों के कणों को बहाकर ले जाती है और रासायनिक अपक्षय में सहायक होती है।
  3. स्थलाकृति (ढाल): तेज ढाल वाले क्षेत्रों में मृदा की परत पतली होती है क्योंकि पानी उसे बहा ले जाता है, जबकि मैदानी क्षेत्रों में गहरी और उपजाऊ मृदा जमा होती है।
  4. जैविक कारक (वनस्पति एवं जीव): पेड़-पौधों की जड़ें चट्टानों को तोड़ती हैं। मृत पौधों और जीवों के अवशेष मृदा में ह्यूमस मिलाकर उसे उपजाऊ बनाते हैं। कीड़े और केंचुए मृदा को हवादार और भुरभुरा बनाते हैं।
  5. समय: मृदा निर्माण एक लंबी प्रक्रिया है। सैकड़ों से हजारों वर्षों में मोटी मृदा की परत बनती है।

8. भारत में पाए जाने वाले प्रमुख खनिजों के नाम बताएँ।

उत्तर: भारत खनिज संपदा में धनी देश है। यहाँ पाए जाने वाले प्रमुख खनिज निम्नलिखित हैं:

  1. धात्विक खनिज:
    • लौह अयस्क: ओडिशा, झारखंड, छत्तीसगढ़, कर्नाटक में पाया जाता है।
    • मैंगनीज: ओडिशा, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक में पाया जाता है।
    • बॉक्साइट (एल्युमिनियम अयस्क): ओडिशा, गुजरात, झारखंड, महाराष्ट्र में पाया जाता है।
    • ताँबा: मध्य प्रदेश, राजस्थान, झारखंड में पाया जाता है।
    • सोना: कर्नाटक (कोलार की खान), आंध्र प्रदेश में पाया जाता है।
  2. अधात्विक खनिज:
    • चूना पत्थर: मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, राजस्थान, गुजरात में पाया जाता है।
    • माइका: झारखंड, आंध्र प्रदेश, राजस्थान में पाया जाता है।
    • जिप्सम: राजस्थान, तमिलनाडु, गुजरात में पाया जाता है।
  3. ऊर्जा खनिज:
    • कोयला: झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल में पाया जाता है।
    • पेट्रोलियम: असम, गुजरात, मुंबई हाई (अरब सागर), कृष्णा-गोदावरी डेल्टा में पाया जाता है।
    • प्राकृतिक गैस: मुंबई हाई, त्रिपुरा, कृष्णा-गोदावरी बेसिन में पाई जाती है।

9. संसाधन संरक्षण क्यों आवश्यक है?

उत्तर: संसाधन संरक्षण निम्नलिखित कारणों से अत्यंत आवश्यक है:

  1. सीमित प्रकृति: अधिकांश संसाधन, विशेष रूप से जीवाश्म ईंधन और खनिज, सीमित मात्रा में हैं। अंधाधुंध दोहन से ये जल्दी खत्म हो जाएंगे।
  2. भावी पीढ़ियों के लिए: हमारा कर्तव्य है कि हम आने वाली पीढ़ियों के लिए भी संसाधनों को सुरक्षित रखें ताकि उनकी आवश्यकताएँ भी पूरी हो सकें।
  3. पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए: संसाधनों का अत्यधिक दोहन वनों की कटाई, मृदा अपरदन, जल प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन जैसी गंभीर समस्याएँ पैदा करता है। संरक्षण से पर्यावरण संतुलन बना रहता है।
  4. आर्थिक स्थिरता के लिए: कई उद्योग और रोजगार संसाधनों पर निर्भर हैं। संसाधनों के खत्म होने से अर्थव्यवस्था को गंभीर झटका लगेगा।
  5. राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए: ऊर्जा और खनिज संसाधनों पर आत्मनिर्भरता राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी है।

इसलिए, संसाधनों का विवेकपूर्ण और टिकाऊ (सतत) उपयोग करना चाहिए।

10. सतत पोषणीय विकास क्या है?

उत्तर: सतत पोषणीय विकास वह विकास है जो वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं को पूरा करते हुए भविष्य की पीढ़ियों की अपनी आवश्यकताएँ पूरी करने की क्षमता से समझौता नहीं करता। दूसरे शब्दों में, यह ऐसा विकास है जो पर्यावरण को नुकसान पहुँचाए बिना, संसाधनों का समझदारी से उपयोग करके आर्थिक प्रगति और सामाजिक कल्याण को बढ़ावा देता है।

इसके मुख्य सिद्धांत हैं:

  1. प्राकृतिक संसाधनों का दोहन उनके पुनर्जनन की दर से अधिक नहीं होना चाहिए।
  2. प्रदूषण और कचरे का स्तर पर्यावरण की स्वयं को साफ करने की क्षमता के भीतर होना चाहिए।
  3. विकास लाभ सभी लोगों तक न्यायपूर्ण ढंग से पहुँचने चाहिए।

उदाहरण के लिए, पारंपरिक ईंधन के स्थान पर सौर ऊर्जा का उपयोग, वनों की कटाई के बजाय वृक्षारोपण, और जल संरक्षण के उपाय सतत विकास के तरीके हैं।

प्रश्न 2.

स्वामित्व के आधार पर संसाधन के प्रकारों का वर्णन करें।


उत्तर:
स्वामित्व के आधार पर संसाधनों को चार मुख्य श्रेणियों में बाँटा जा सकता है:

  1. व्यक्तिगत संसाधन: ये वे संसाधन हैं जिन पर किसी एक व्यक्ति या परिवार का स्वामित्व होता है। उदाहरण के लिए, किसी व्यक्ति के पास जमीन, उसका घर, उसकी निजी कार, उसके बगीचे में लगे पेड़-पौधे आदि।
  2. सामुदायिक संसाधन: ये संसाधन किसी पूरे समुदाय या गाँव की साझी संपत्ति होते हैं। इनका उपयोग समुदाय के सभी सदस्य कर सकते हैं। जैसे - गाँव का चारागाह, सार्वजनिक तालाब, श्मशान भूमि, गाँव का पार्क या खेल का मैदान।
  3. राष्ट्रीय संसाधन: ये संसाधन पूरे देश की संपत्ति होते हैं और इन पर राष्ट्रीय सरकार का अधिकार होता है। देश की सीमा के भीतर पाए जाने वाले सभी खनिज (कोयला, लोहा, तेल आदि), जंगल, नदियाँ, सरकारी भूमि, राष्ट्रीय राजमार्ग, रेलवे लाइन और सरकारी भवन राष्ट्रीय संसाधन हैं।
  4. अंतर्राष्ट्रीय संसाधन: ये संसाधन किसी एक देश के नहीं, बल्कि पूरे अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के होते हैं। इनके प्रबंधन और उपयोग के लिए अंतर्राष्ट्रीय समझौते होते हैं। खुले महासागरों के संसाधन (जैसे मछलियाँ), अंटार्कटिका महाद्वीप, और बाहरी अंतरिक्ष इसके प्रमुख उदाहरण हैं।

प्रश्न 3.

भारत में संसाधन-नियोजन की प्रक्रिया को लिखें।


उत्तर:
संसाधन नियोजन एक व्यवस्थित प्रक्रिया है जिसके माध्यम से देश के सीमित संसाधनों का विवेकपूर्ण और टिकाऊ उपयोग सुनिश्चित किया जाता है। भारत में संसाधन नियोजन की प्रक्रिया निम्नलिखित चरणों में पूरी की जाती है:

  1. संसाधनों की पहचान एवं सर्वेक्षण: सबसे पहले देश के विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्ध संसाधनों (जैसे भूमि, जल, वन, खनिज) की खोज और पहचान की जाती है। इसके लिए भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण, मृदा सर्वेक्षण, वन सर्वेक्षण आदि किए जाते हैं।
  2. मानचित्रण एवं मूल्यांकन: सर्वेक्षण के बाद प्राप्त जानकारी के आधार पर संसाधन मानचित्र तैयार किए जाते हैं। फिर इन संसाधनों का गुणात्मक (किस्म) और मात्रात्मक (कितनी मात्रा में) दोनों तरह से आकलन किया जाता है।
  3. योजना बनाना: संसाधनों के विकास और उपयोग के लिए एक विस्तृत योजना तैयार की जाती है। इसमें यह तय किया जाता है कि किस संसाधन का विकास कैसे किया जाएगा, उसके लिए कौन-सी तकनीक और कौशल की जरूरत होगी, और किस संस्थागत ढाँचे की आवश्यकता है।
  4. राष्ट्रीय विकास योजनाओं के साथ समन्वय: संसाधन विकास की योजनाओं को देश की बड़ी राष्ट्रीय विकास योजनाओं (जैसे पंचवर्षीय योजनाएँ) के साथ जोड़ा जाता है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि संसाधनों का उपयोग देश के समग्र विकास लक्ष्यों को हासिल करने में मदद करे।
  5. कार्यान्वयन एवं निगरानी: अंत में, बनाई गई योजनाओं को जमीन पर लागू किया जाता है और उनकी प्रगति की नियमित निगरानी की जाती है ताकि आवश्यकता पड़ने पर सुधार किए जा सकें।

भारत में आजादी के बाद से ही, पहली पंचवर्षीय योजना से लेकर अब तक, संसाधन नियोजन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है ताकि देश का संतुलित और टिकाऊ विकास हो सके।

1. संसाधन किसे कहते हैं? उदाहरण सहित समझाइए।

संसाधन प्रकृति के वे उपहार हैं जिनका उपयोग मानव अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए करता है। किसी भी वस्तु को संसाधन तभी माना जाता है जब उसमें उपयोगिता और मूल्य हो। उदाहरण के लिए, नदी का पानी एक संसाधन है क्योंकि इससे पीने, सिंचाई करने और बिजली बनाने जैसे कई काम लिए जा सकते हैं। इसी तरह, खनिज, वन, मिट्टी और मानव श्रम भी संसाधन के महत्वपूर्ण उदाहरण हैं।

2. संसाधनों का वर्गीकरण किन आधारों पर किया जाता है? विस्तार से समझाइए।

संसाधनों का वर्गीकरण मुख्य रूप से तीन आधारों पर किया जाता है:

(क) उत्पत्ति के आधार पर: इसमें दो प्रकार के संसाधन होते हैं - जैव संसाधन (जैसे वन, जीव-जंतु, मानव) और अजैव संसाधन (जैसे चट्टानें, खनिज, भूमि)।

(ख) समाप्यता के आधार पर: इसके अंतर्गत नवीकरणीय संसाधन (जैसे सौर ऊर्जा, वायु, जल) और अनवीकरणीय संसाधन (जैसे कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस) आते हैं।

(ग) स्वामित्व के आधार पर: इन्हें चार भागों में बाँटा जाता है - व्यक्तिगत (जैसे घर, जमीन), सामुदायिक (जैसे चरागाह, कुआँ), राष्ट्रीय (जैसे नदियाँ, खनिज) और अंतर्राष्ट्रीय (जैसे महासागरों का खुला भाग)।

3. सतत पोषणीय विकास से आप क्या समझते हैं?

सतत पोषणीय विकास एक ऐसी विकास प्रक्रिया है जिसमें वर्तमान पीढ़ी अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति तो करती है, लेकिन भविष्य की पीढ़ियों की आवश्यकताओं को पूरा करने की क्षमता से समझौता नहीं करती। इसका अर्थ है कि हम प्राकृतिक संसाधनों का इस तरह उपयोग करें कि वे समाप्त न हों और आने वाले समय में भी उपलब्ध रहें। उदाहरण के लिए, पेड़ काटने के साथ-साथ नए पेड़ लगाना, जल संरक्षण करना और नवीकरणीय ऊर्जा के स्रोतों जैसे सौर ऊर्जा का अधिक उपयोग करना सतत पोषणीय विकास के तरीके हैं।

4. निम्नलिखित बहुविकल्पीय प्रश्नों के उत्तर दीजिए-

(i) निम्नलिखित में से कौन-सा मानव निर्मित संसाधन है?
A. वन
B. कोयला
C. सड़क
D. वायु

उत्तर: C. सड़क
वन, कोयला और वायु प्रकृति द्वारा प्रदत्त संसाधन हैं, जबकि सड़क मानव द्वारा निर्मित एक संसाधन है।

(ii) निम्नलिखित में से कौन-सा अनवीकरणीय संसाधन है?
A. जल
B. वन
C. सौर ऊर्जा
D. खनिज तेल

उत्तर: D. खनिज तेल
खनिज तेल (पेट्रोलियम) एक अनवीकरणीय संसाधन है क्योंकि इसके बनने में लाखों वर्ष लगते हैं और एक बार समाप्त होने पर इसे दोबारा नहीं बनाया जा सकता। जल, वन और सौर ऊर्जा नवीकरणीय संसाधन हैं।

(iii) संसाधन नियोजन की आवश्यकता क्यों है?
A. संसाधनों के समान वितरण के लिए
B. संसाधनों के संरक्षण के लिए
C. दोनों (A) और (B)
D. इनमें से कोई नहीं

उत्तर: C. दोनों (A) और (B)
संसाधन नियोजन इसलिए आवश्यक है ताकि सीमित संसाधनों का देश के सभी क्षेत्रों और लोगों के बीच समान वितरण हो सके और उनका दीर्घकालीन उपयोग सुनिश्चित करने के लिए उनका संरक्षण भी किया जा सके।

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