Bihar Board Class 10th Social Science (खण्ड-क) Chapter 2 कृषि) Solutions

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Bihar Board Class 10th Social Science (खण्ड-क) Chapter 2 कृषि) Solutions

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1. बहुविकल्पीय प्रश्न (Multiple Choice Questions)

  1. निम्नलिखित में से कौन-सी रबी की फसल है?
    1. धान
    2. मोटे अनाज
    3. चना
    4. कपास

    उत्तर: (C) चना। रबी की फसलें सर्दियों के मौसम में बोई जाती हैं और गर्मियों की शुरुआत में काटी जाती हैं। चना, गेहूं, जौ, सरसों आदि प्रमुख रबी फसलें हैं।

  2. निम्नलिखित में से कौन-सी खाद्य फसल नहीं है?
    1. गेहूँ
    2. चाय
    3. चावल
    4. मक्का

    उत्तर: (B) चाय। चाय एक पेय पदार्थ है और इसे एक नकदी फसल (Cash Crop) के रूप में उगाया जाता है। गेहूँ, चावल और मक्का प्रमुख खाद्यान्न फसलें हैं जो सीधे भोजन के रूप में उपयोग की जाती हैं।

  3. भारत में कॉफी उत्पादन में कौन-सा राज्य अग्रणी है?
    1. केरल
    2. तमिलनाडु
    3. कर्नाटक
    4. आंध्र प्रदेश

    उत्तर: (C) कर्नाटक। कर्नाटक राज्य भारत में कॉफी का सबसे बड़ा उत्पादक है। राज्य के कोडागु (कूर्ग), चिकमगलूर और हसन जैसे क्षेत्र कॉफी की खेती के लिए प्रसिद्ध हैं।

  4. निम्नलिखित में से कौन-सी मिट्टी कपास की खेती के लिए सर्वाधिक उपयुक्त है?
    1. लाल मिट्टी
    2. काली मिट्टी
    3. जलोढ़ मिट्टी
    4. लैटेराइट मिट्टी

    उत्तर: (B) काली मिट्टी। काली मिट्टी, जिसे रेगुर मिट्टी भी कहते हैं, में नमी को लंबे समय तक रोककर रखने की क्षमता होती है। यह गुण कपास की खेती के लिए आदर्श है, इसलिए इसे 'कपास की मिट्टी' भी कहा जाता है।

  5. भारत में हरित क्रांति का प्रारंभ कब हुआ?
    1. 1960 के दशक में
    2. 1970 के दशक में
    3. 1980 के दशक में
    4. 1990 के दशक में

    उत्तर: (A) 1960 के दशक में। भारत में हरित क्रांति की शुरुआत 1960 के दशक में हुई। इसका उद्देश्य उच्च उपज वाले बीजों (HYV), रासायनिक उर्वरकों और बेहतर सिंचाई सुविधाओं के उपयोग से खाद्यान्न उत्पादन में क्रांतिकारी वृद्धि करना था।

2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए (Answer the following questions)

  1. भारत में कृषि की क्या विशेषताएँ हैं?

    उत्तर: भारत में कृषि की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

    • जीवन निर्वाह कृषि: देश के बड़े हिस्से में किसान अपने परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए खेती करते हैं।
    • मानसून पर निर्भरता: अधिकांश कृषि कार्य वर्षा पर निर्भर है, जिससे यह जोखिम भरा बन जाता है।
    • फसलों की विविधता: भारत की विभिन्न जलवायु और मिट्टी के प्रकारों के कारण यहाँ अनाज, दलहन, तिलहन, नकदी फसलें, फल और सब्जियाँ सभी प्रकार की फसलें उगाई जाती हैं।
    • छोटे आकार के खेत: जनसंख्या के दबाव के कारण जोतों का आकार छोटा है, जो आधुनिक तकनीक के उपयोग में बाधक है।
    • रोजगार का प्रमुख स्रोत: देश की अधिकांश जनसंख्या अभी भी कृषि और संबंधित गतिविधियों पर निर्भर है।

  2. भारत में कृषि के विकास के लिए सरकार द्वारा किए गए प्रयासों का वर्णन कीजिए।

    उत्तर: भारत सरकार ने कृषि के विकास के लिए अनेक प्रयास किए हैं:

    • हरित क्रांति (1960 के दशक): उच्च उपज वाले बीज, रासायनिक खाद और बेहतर सिंचाई सुविधाओं को बढ़ावा देकर खाद्यान्न उत्पादन में वृद्धि की।
    • श्वेत क्रांति (ऑपरेशन फ्लड): दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए शुरू की गई यह पहल, जिससे भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश बन गया।
    • किसान क्रेडिट कार्ड योजना: किसानों को आसान और सस्ते ब्याज पर ऋण उपलब्ध कराना।
    • न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP): सरकार द्वारा निश्चित की गई कीमत पर किसानों से फसल खरीदने की व्यवस्था, ताकि उन्हें नुकसान न हो।
    • प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना: 'हर खेत को पानी' के लक्ष्य के साथ सिंचाई सुविधाओं का विस्तार करना।
    • मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना: किसानों को उनकी मिट्टी की गुणवत्ता की जानकारी देकर उचित उर्वरक के उपयोग के लिए प्रेरित करना।

  3. भारत में कृषि के समक्ष चुनौतियों का वर्णन कीजिए।

    उत्तर: भारतीय कृषि के सामने प्रमुख चुनौतियाँ इस प्रकार हैं:

    • मानसून पर अत्यधिक निर्भरता: अनिश्चित और असमान वर्षा से फसल उत्पादन प्रभावित होता है।
    • छोटे और बिखरे हुए खेत: जोतों का छोटा आकार आधुनिक मशीनों और तकनीक के प्रयोग को कठिन बनाता है।
    • मृदा उर्वरता में कमी: लगातार एक ही फसल उगाने और रासायनिक खादों के असंतुलित उपयोग से मिट्टी की उर्वरता घट रही है।
    • सिंचाई सुविधाओं का अभाव: देश के बड़े हिस्से में अभी भी पर्याप्त सिंचाई की सुविधा नहीं है।
    • किसानों की आत्महत्या: फसल खराब होना, कर्ज का बोझ और उचित मूल्य न मिलना जैसे कारणों से किसानों में निराशा बढ़ रही है।
    • भंडारण और विपणन की समस्या: उपज का उचित भंडारण न होने और बिचौलियों के कारण किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पाता।

3. सही जोड़ी बनाइए (Match the following)

स्तम्भ 'क' स्तम्भ 'ख'
1. चावल (क) रबी फसल
2. गेहूँ (ख) खरीफ फसल
3. कपास (ग) बागवानी फसल
4. आम (घ) रेशेदार फसल

उत्तर:

  1. चावल → (ख) खरीफ फसल
  2. गेहूँ → (क) रबी फसल
  3. कपास → (घ) रेशेदार फसल
  4. आम → (ग) बागवानी फसल

प्रश्न 1.

इनमें कौन गेहूँ का प्रमुख उत्पादक नहीं है ? (क) पश्चिम बंगाल

(ख) मध्य प्रदेश

(ग) तमिलनाडु

(घ) राजस्थान

उत्तर- (ग) तमिलनाडु

तमिलनाडु में गेहूँ का उत्पादन बहुत कम होता है क्योंकि यहाँ की जलवायु गर्म और आर्द्र है, जो गेहूँ की खेती के लिए उपयुक्त नहीं है। गेहूँ की खेती मुख्य रूप से उत्तर भारत के राज्यों जैसे पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में होती है।

प्रश्न 2.

किस राज्य में घान के संचित क्षेत्र अधिक मिलते हैं ? (क) पश्चिम बंगाल में

(ख) तमिलनाडु में

(ग) आशख्मर प्रदेश में

(घ) उत्तर प्रदेश में

उत्तर- (ख) तमिलनाडु में

तमिलनाडु राज्य में धान (चावल) के संचित क्षेत्र अधिक मिलते हैं। यहाँ पर नहरों, तालाबों और अन्य सिंचाई साधनों का अच्छा विकास हुआ है, जिससे धान की खेती के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध रहता है और क्षेत्रफल भी अधिक है।

प्रश्न 3.

भारत में ग्वार की सबसे अधिक खेती कहाँ होती है ? (क) महाराष्ट्र में

(ख) गुजरात में

(ग) उत्तर प्रदेश में

(घ) तमिलनाडु में

उत्तर- (क) महाराष्ट्र में

भारत में ग्वार (ग्वार फली) की सबसे अधिक खेती महाराष्ट्र राज्य में होती है। यह एक मोटे अनाज की फसल है जो शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में अच्छी उगती है। महाराष्ट्र के मराठवाड़ा और विदर्भ क्षेत्र इसके प्रमुख उत्पादक हैं।

प्रश्न 4.

अधिक दिनों तक वर्षा का वियोग सहना किस फसल के लिए घातक होता है ? (क) धान

(ख) गेहूँ

(ग) चाय

(घ) कपास

उत्तर- (ग) चाय

चाय की फसल के लिए लगातार और नियमित वर्षा या नमी बहुत जरूरी है। अगर लंबे समय तक वर्षा न हो (वर्षा का वियोग), तो मिट्टी में नमी की कमी हो जाती है, जिससे चाय के पौधे सूखने लगते हैं और पत्तियाँ खराब हो जाती हैं। इसलिए यह स्थिति चाय के लिए घातक होती है।

प्रश्न 5.

किस फसल की खेती के लिए ढालू भूमि आवश्यक है ? (क) गैहूँ

(ख) कपास

(ग) कहवा

(घ) गन्ना

उत्तर- (ग) कहवा

कॉफी (कहवा) की खेती के लिए ढालू भूमि आवश्यक है। ढलान वाली जमीन पर पानी जमा नहीं हो पाता है, जिससे जल-निकासी अच्छी रहती है। कॉफी के पौधों की जड़ों में पानी भरने से सड़न हो सकती है, इसलिए अच्छी जल निकासी वाली ढलानदार भूमि इसकी खेती के लिए आदर्श मानी जाती है।

अतिलघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1. स्थानांतरी कृषि को झारखण्ड में किस नाम से पुकारा जाता है ? ।

उत्तर- झारखण्ड में स्थानांतरी कृषि को 'कुरूवा' या 'कुरवा' के नाम से पुकारा जाता है। यह एक पारंपरिक कृषि पद्धति है जिसमें जंगल के एक हिस्से को साफ करके वहाँ फसल उगाई जाती है और कुछ वर्षों बाद उस जमीन को छोड़कर दूसरे स्थान पर खेती शुरू कर दी जाती है।

प्रश्न 2.

भूदान आन्दोलन के प्रवर्तक कौन थे?

उत्तर- भूदान आन्दोलन के प्रवर्तक आचार्य विनोबा भावे थे। उन्होंने सन् 1951 में यह आंदोलन शुरू किया था, जिसका मुख्य उद्देश्य धनी जमींदारों से भूमि का दान लेकर भूमिहीन किसानों और गरीबों में बाँटना था, ताकि सामाजिक समानता लाई जा सके।

प्रश्न 3.

भारत के किन राज्यों को मसालों का राज्य कहा जाता है? उत्तर-

उत्तर- भारत में केरल और कर्नाटक राज्यों को अक्सर 'मसालों का राज्य' कहा जाता है। इन राज्यों की जलवायु मसालों की खेती के लिए बहुत अनुकूल है। केरल विशेष रूप से काली मिर्च, इलायची और लौंग के उत्पादन के लिए, जबकि कर्नाटक भी इन मसालों के साथ-साथ धनिया और मेथी के उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है।

प्रश्न 4.

रबर का पौधा किस देश से लाकर भारत मैं उगाया गया था? ,

उत्तर- रबर के पौधे को मूल रूप से ब्राजील (दक्षिण अमेरिका) से लाकर भारत में उगाया गया था। सन् 1873 में ब्रिटिश अधिकारी सर हेनरी विकम (कुछ स्रोतों के अनुसार) ने ब्राजील से रबर के बीज लाकर केरल के कोट्टायम जिले में पहली बार इसकी खेती शुरू करवाई थी।

प्रश्न 5.

ग्रामदान से आप क्‍या समझते हैं ?

उत्तर- ग्रामदान का अर्थ है - 'गाँव का दान'। यह भूदान आंदोलन का ही एक विस्तार था। इसमें पूरा गाँव अपनी सामूहिक भूमि और संसाधन गाँव के सभी लोगों की भलाई के लिए समर्पित कर देता था। इसका उद्देश्य गाँव के स्तर पर सामूहिक स्वामित्व और सहकारी खेती को बढ़ावा देना था, ताकि गाँव का सामाजिक और आर्थिक विकास हो सके।

लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.

भारत में कृषि के लिए कौन-सी भौगोलिक सुविधाएँ प्राप्य हैं ?

उत्तर- भारत में कृषि के लिए निम्नलिखित अनुकूल भौगोलिक सुविधाएँ उपलब्ध हैं:

  1. विशाल कृषि योग्य भूमि: भारत के कुल क्षेत्रफल का लगभग आधा भाग (50% से अधिक) कृषि योग्य है, जो एक बहुत बड़ा क्षेत्र है।
  2. उपजाऊ मिट्टी: देश में गंगा-सतलज के मैदान की जलोढ़ मिट्टी, काली मिट्टी, लाल मिट्टी जैसी विभिन्न उपजाऊ मिट्टियाँ पाई जाती हैं।
  3. अनुकूल जलवायु: यहाँ उष्णकटिबंधीय मानसूनी जलवायु है, जिसमें गर्मी, वर्षा और सर्दी तीनों ऋतुएँ मिलती हैं। इससे विभिन्न प्रकार की फसलें उगाई जा सकती हैं।
  4. पर्याप्त सूर्य का प्रकाश: पूरे साल अधिकांश दिनों में धूप मिलती है, जो फसलों के विकास के लिए जरूरी है।
  5. लंबा वर्धन काल: देश के अधिकांश हिस्सों में पूरे साल तापमान इतना अधिक रहता है कि फसलें बढ़ती रहें, इससे एक ही साल में एक से अधिक फसलें ली जा सकती हैं।
  6. वर्षा की पर्याप्त मात्रा: दक्षिण-पश्चिम मानसून से देश के अधिकांश भागों में पर्याप्त वर्षा होती है, जो खेती के लिए जल का मुख्य स्रोत है।
इन सभी सुविधाओं के कारण भारत एक कृषि प्रधान देश बना हुआ है।

प्रश्न 2. भारत किन कृषि जन्य पदार्थों का निर्यात करता है ? किन्‍्हीं पाँच का उल्लेख करें। उत्तर-

उत्तर- भारत विश्व के अग्रणी कृषि उत्पादक देशों में से एक है और अनेक कृषि जन्य पदार्थों का निर्यात करता है, जिससे देश को विदेशी मुद्रा प्राप्त होती है। पाँच प्रमुख कृषि निर्यात इस प्रकार हैं:

  1. चावल (बासमती सहित): भारत विश्व में चावल का सबसे बड़ा निर्यातक है। विशेषकर बासमती चावल की विदेशों में बहुत माँग है।
  2. मसाले: भारत 'मसालों का देश' कहलाता है। काली मिर्च, इलायची, हल्दी, धनिया और लाल मिर्च जैसे मसालों का बड़े पैमाने पर निर्यात किया जाता है।
  3. चाय: भारत चाय का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक और एक प्रमुख निर्यातक है। असम और दार्जिलिंग की चाय पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है।
  4. कपास और सूती वस्त्र: भारत कपास का एक बड़ा उत्पादक है और कपास के साथ-साथ सूती कपड़े, धागे आदि का भी निर्यात करता है।
  5. ताजे फल और सब्जियाँ: आम, अंगूर, केला, प्याज, टमाटर आदि का निर्यात मध्य पूर्व, यूरोप और दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों को किया जाता है।
इनके अलावा, गन्ना उत्पाद (चीनी), मूंगफली, समुद्री उत्पाद और कॉफी भी महत्वपूर्ण निर्यात वस्तुएँ हैं।

प्रश्न 3.

भारत में कृषि की दो प्रमुख ऋतुएं कौन-कौन हैं ? उनमें उगायी जानेबाली फसलों को किन अलग-अलग दो नामों से पुकारा जाता है २ उत्तर-

उत्तर- भारत में कृषि की दो प्रमुख ऋतुएँ हैं:

  1. खरीफ ऋतु
  2. रबी ऋतु
इन ऋतुओं में उगाई जाने वाली फसलों को क्रमशः 'खरीफ फसलें' और 'रबी फसलें' कहा जाता है।

1. खरीफ ऋतु और फसलें:
  • समय: यह ऋतु मानसून के साथ जून-जुलाई में शुरू होती है और सितंबर-अक्टूबर तक चलती है।
  • फसलें: इन्हें 'मानसूनी फसलें' भी कहते हैं क्योंकि इन्हें वर्षा के पानी की जरूरत होती है। मुख्य फसलें हैं - धान (चावल), मक्का, ज्वार, बाजरा, कपास, जूट, मूंगफली और सोयाबीन
2. रबी ऋतु और फसलें:
  • समय: यह ऋतु ठंड के मौसम में अक्टूबर-नवंबर में शुरू होती है और मार्च-अप्रैल तक चलती है।
  • फसलें: इन्हें 'शीतकालीन फसलें' भी कहते हैं। इनकी सिंचाई के लिए अक्सर नहरों और ट्यूबवेल के पानी पर निर्भर रहना पड़ता है। मुख्य फसलें हैं - गेहूँ, जौ, चना, मटर, सरसों और मसूर
इन दोनों के अलावा, कुछ क्षेत्रों में गर्मियों (जायद) में भी तरबूज, खीरा, ककड़ी जैसी फसलें उगाई जाती हैं।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1. भारतीय अर्थतंत्र में कृषि का निम्नलिखित महत्त्व है? उत्तर- भारतीय अर्थतंत्र में कृषि का निम्नलिखित महत्त्व है।

उत्तर- भारतीय अर्थतंत्र में कृषि का बहुत अधिक महत्व है, भले ही सेवा क्षेत्र के बढ़ने के साथ इसके सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में योगदान का प्रतिशत कम हुआ है। इसके प्रमुख महत्व निम्नलिखित हैं:

  1. रोजगार का प्रमुख स्रोत: भारत की लगभग 50% से अधिक आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से अपनी आजीविका के लिए कृषि पर निर्भर है। यह देश का सबसे बड़ा रोजगार प्रदाता क्षेत्र है।
  2. खाद्य सुरक्षा: कृषि देश की 140 करोड़ से अधिक जनसंख्या के लिए खाद्यान्न (चावल, गेहूँ, दालें आदि) उपलब्ध कराकर खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करती है। भारत अब खाद्यान्न के मामले में आत्मनिर्भर है और सार्वजनिक वितरण प्रणाली के लिए अनाज का भंडार भी रखता है।
  3. औद्योगिक विकास का आधार: कई प्रमुख उद्योगों को कच्चा माल कृषि से ही मिलता है, जैसे कपड़ा (कपास, जूट), चीनी (गन्ना), वनस्पति तेल (तिलहन), सिगरेट (तम्बाकू) और चाय उद्योग। इन्हें 'कृषि-आधारित उद्योग' कहा जाता है।
  4. विदेशी मुद्रा का स्रोत: चाय, कॉफी, मसाले, बासमती चावल, समुद्री उत्पाद और कपास जैसे कृषि उत्पादों के निर्यात से देश को अरबों डॉलर की विदेशी मुद्रा प्राप्त होती है, जो अर्थव्यवस्था को मजबूत करती है।
  5. पूँजी निर्माण में योगदान: कृषि क्षेत्र से प्राप्त आय और बचत देश में पूँजी निर्माण में मदद करती है। सरकार को कृषि उत्पादों पर लगने वाले टैक्स से भी राजस्व मिलता है।
  6. परिवहन और व्यापार को गति: कृषि उत्पादों को खेत से बाजार तक ले जाने के लिए परिवहन सेवाओं (ट्रक, रेलवे) की आवश्यकता होती है, जिससे इन क्षेत्रों का विकास होता है। इसी तरह कृषि व्यापार भी अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा है।
  7. सामाजिक स्थिरता: एक स्वस्थ कृषि क्षेत्र ग्रामीण क्षेत्रों में आय और रोजगार पैदा करके सामाजिक स्थिरता लाने में मदद करता है और शहरों की ओर होने वाले पलायन को कम कर सकता है।
संक्षेप में, कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था की 'रीढ़ की हड्डी' कहलाती है क्योंकि यह देश की अधिकांश जनसंख्या को जीविका प्रदान करती है और औद्योगिक विकास का आधार बनती है।

प्रश्न 2.

निम्नांकित फसल की खेती के लिए उपयुक्त दशाओं और प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों का वर्णन करें गेहूँ, कपास, गन्ना, चाय, जूट।

उत्तर-

1. गेहूँ:

  • उपयुक्त दशाएँ:
    • जलवायु: शीतोष्ण जलवायु। यह एक रबी की फसल है।
    • तापमान: बुआई के समय 10°C से 15°C और पकते समय 20°C से 25°C तापमान उपयुक्त है। पाला हानिकारक होता है।
    • वर्षा: 50 से 75 सेमी वार्षिक वर्षा। अधिक वर्षा या फसल पकने के समय बारिश नुकसानदायक है।
    • मिट्टी: दोमट मिट्टी जिसमें जल निकासी की अच्छी व्यवस्था हो।
  • प्रमुख उत्पादक क्षेत्र: उत्तर भारत का 'गेहूँ का कटोरा' कहलाने वाला क्षेत्र। मुख्य राज्य हैं - उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश और राजस्थान

2. कपास:

  • उपयुक्त दशाएँ:
    • जलवायु: उष्णकटिबंधीय और उपोष्ण कटिबंधीय जलवायु। यह एक खरीफ की फसल है।
    • तापमान: 21°C से 30°C के बीच तापमान आवश्यक है। पकते समय शुष्क और धूप वाला मौसम चाहिए।
    • वर्षा: 50 से 100 सेमी वार्षिक वर्षा। अधिक वर्षा हानिकारक है।
    • मिट्टी: काली कपास मिट्टी (रेगुर) सबसे उपयुक्त है क्योंकि यह नमी को लंबे समय तक रोके रखती है।
  • प्रमुख उत्पादक क्षेत्र: मुख्य रूप से दक्कन के पठार के क्षेत्र में। प्रमुख राज्य हैं - गुजरात, महाराष्ट्र, तेलंगाना, कर्नाटक, मध्य प्रदेश और पंजाब

3. गन्ना:

  • उपयुक्त दशाएँ:
    • जलवायु: उष्णकटिबंधीय और उपोष्ण कटिबंधीय जलवायु। यह 10 से 12 महीने की लंबी अवधि वाली फसल है।
    • तापमान: 21°C से 27°C के बीच तापमान उपयुक्त है। पकते समय ठंडा और शुष्क मौसम चाहिए ताकि गन्ने में शर्करा (चीनी) की मात्रा बढ़े।
    • वर्षा: 75 से 150 सेमी वार्षिक वर्षा। सिंचाई की भी आवश्यकता पड़ती है।
    • मिट्टी: गहरी उपजाऊ दोमट मिट्टी, जैसे जलोढ़ मिट्टी, सबसे अच्छी मानी जाती है।
  • प्रमुख उत्पादक क्षेत्र: भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा गन्ना उत्पादक देश है। प्रमुख राज्य हैं - उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु और बिहार

4. चाय:

  • उपयुक्त दशाएँ:
    • जलवायु: उष्णकटिबंधीय और उपोष्ण कटिबंधीय जलवायु।
    • तापमान: 20°C से 30°C के बीच तापमान उपयुक्त है। कोहरा और ठंडक चाय की पत्तियों की गुणवत्ता बढ़ाते हैं।
    • वर्षा: 150 से 250 सेमी वार्षिक वर्षा, जो पूरे साल समान रूप से वितरित हो। सूखा हानिकारक है।
    • मिट्टी: गहरी, उपजाऊ, ह्यूमस युक्त और अम्लीय प्रकृति की दोमट मिट्टी। ढलानदार भूमि जहाँ पानी जमा न हो, आदर्श है।
  • प्रमुख उत्पादक क्षेत्र: भारत चाय का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है। प्रमुख राज्य हैं - असम (सबसे बड़ा), पश्चिम बंगाल (दार्जिलिंग), तमिलनाडु (नीलगिरि) और केरल

5. जूट (पटसन):

  • उपयुक्त दशाएँ:
    • जलवायु: उष्णकटिबंधीय जलवायु। यह एक खरीफ की फसल है।
    • तापमान: 24°C से 35°C के बीच उच्च तापमान की आवश्यकता होती है।
    • वर्षा: 150 से 200 सेमी वार्षिक वर्षा। बाढ़ग्रस्त क्षेत्र उपयुक्त होते हैं।
    • मिट्टी: नदियों के बाढ़ वाले मैदानों की उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी स

      1. बिहार में कृषि के लिए सबसे महत्त्वपूर्ण क्या है?

      बिहार में कृषि के लिए सबसे महत्त्वपूर्ण जलवायु एवं मिट्टी की उर्वरता है। राज्य की जलवायु विविध फसलों के अनुकूल है और गंगा के मैदानों की जलोढ़ मिट्टी अत्यंत उपजाऊ है, जो कृषि को यहाँ की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनाती है।

      2. बिहार की प्रमुख फसलें कौन-कौन सी हैं?

      बिहार की प्रमुख फसलों में धान (चावल), गेहूँ, मक्का, दलहन (मसूर, चना), तिलहन (सरसों) और गन्ना शामिल हैं। ये फसलें राज्य के विभिन्न कृषि-जलवायु क्षेत्रों में उगाई जाती हैं और राज्य की खाद्य सुरक्षा व आर्थिकी में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं।

      3. बिहार में कृषि के विकास के लिए क्या-क्या कदम उठाए जा रहे हैं?

      बिहार में कृषि विकास के लिए निम्नलिखित कदम उठाए जा रहे हैं:
      • सिंचाई सुविधाओं का विस्तार (नहर, तालाब, नलकूप)।
      • उन्नत बीज एवं रासायनिक खादों का वितरण।
      • किसानों को ऋण सुविधा एवं बीमा योजनाएँ।
      • कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा।
      • मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना।
      • किसान मार्गदर्शन के लिए कृषि विस्तार सेवाएँ।

      4. बिहार में कृषि के सामने क्या-क्या चुनौतियाँ हैं?

      बिहार में कृषि के सामने प्रमुख चुनौतियाँ हैं:
      • प्राकृतिक आपदाएँ (बाढ़, सूखा)।
      • जोतों का छोटा आकार एवं खंडित होना।
      • सिंचाई की अपर्याप्त सुविधा।
      • उन्नत तकनीक एवं आधुनिक यंत्रों का अभाव।
      • विपणन एवं भंडारण की समस्या।
      • किसानों को उचित मूल्य न मिलना।

      5. बिहार में कृषि के विकास के लिए सुझाव दीजिए।

      बिहार में कृषि विकास के लिए निम्नलिखित सुझाव दिए जा सकते हैं:
      • सिंचाई साधनों का और अधिक विकास करना।
      • किसानों को उन्नत बीज, खाद व तकनीकी ज्ञान उपलब्ध कराना।
      • सहकारी खेती को बढ़ावा देकर जोतों का समेकन करना।
      • कृषि आधारित उद्योग स्थापित करना।
      • फसल बीमा योजना को प्रभावी ढंग से लागू करना।
      • किसानों को विपणन सुविधा एवं न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी देना।

      6. बहुविकल्पीय प्रश्न

      i. बिहार की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार क्या है?
      A. उद्योग
      B. कृषि
      C. व्यापार
      D. पर्यटन
      उत्तर: B. कृषि

      ii. बिहार की प्रमुख नकदी फसल कौन-सी है?
      A. गेहूँ
      B. धान
      C. गन्ना
      D. मक्का
      उत्तर: C. गन्ना

      iii. बिहार में कृषि योग्य भूमि का कितना प्रतिशत भाग है?
      A. लगभग 50%
      B. लगभग 60%
      C. लगभग 70%
      D. लगभग 80%
      उत्तर: B. लगभग 60%

      iv. बिहार में 'कृषि रोड मैप' कब लागू किया गया?
      A. 2005 में
      B. 2008 में
      C. 2012 में
      D. 2015 में
      उत्तर: B. 2008 में

      v. बिहार में सबसे अधिक किस फसल का उत्पादन होता है?
      A. गेहूँ
      B. धान
      C. मक्का
      D. गन्ना
      उत्तर: B. धान

      प्रश्न 1. भारत में कृषि का क्या महत्त्व है?

      भारत में कृषि का बहुत अधिक महत्त्व है। यह देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है क्योंकि देश की अधिकांश जनसंख्या कृषि पर निर्भर है। यह लोगों को खाद्यान्न उपलब्ध कराने के साथ-साथ रोजगार का एक प्रमुख स्रोत भी है। कृषि उत्पादों से विदेशी मुद्रा अर्जित होती है और यह कई उद्योगों के लिए कच्चा माल प्रदान करती है।

      प्रश्न 2. भारत में कृषि के लिए उत्तरदायी प्रमुख कारक कौन-कौन से हैं?

      भारत में कृषि के लिए उत्तरदायी प्रमुख कारक निम्नलिखित हैं:

      1. भूमि की प्रकृति: समतल मैदानी क्षेत्र कृषि के लिए अधिक उपयुक्त होते हैं।
      2. मृदा: उपजाऊ मिट्टी, जैसे जलोढ़ मिट्टी, अच्छी फसल उत्पादन में सहायक होती है।
      3. जलवायु: तापमान, वर्षा और सूर्य के प्रकाश की अवधि फसल के प्रकार को निर्धारित करती है।
      4. सिंचाई: पर्याप्त जल की उपलब्धता कृषि को सुनिश्चित करती है, खासकर कम वर्षा वाले क्षेत्रों में।
      5. श्रम: कृषि कार्यों के लिए पर्याप्त मानव श्रम की आवश्यकता होती है।
      6. प्रौद्योगिकी: आधुनिक बीज, उर्वरक, मशीनें और सिंचाई के साधन उत्पादन बढ़ाने में मदद करते हैं।

      प्रश्न 3. भारत में कृषि के प्रकारों का वर्णन कीजिए।

      भारत में विभिन्न भौगोलिक परिस्थितियों के कारण कृषि के कई प्रकार प्रचलित हैं:

      1. निर्वाह कृषि: इसमें किसान अपने और अपने परिवार के भरण-पोषण के लिए फसलें उगाते हैं। जोत छोटी और उत्पादन सीमित होता है।
      2. व्यापारिक कृषि: इसका मुख्य उद्देश्य बाजार में बेचकर लाभ कमाना होता है। इसमें बड़े खेत, अधिक पूंजी और आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जाता है।
      3. रोपण कृषि: यह एक प्रकार की व्यापारिक कृषि है जिसमें चाय, कॉफी, रबर जैसी बड़ी मात्रा में एक ही फसल उगाई जाती है। इसमें बहुत अधिक पूंजी और श्रम की आवश्यकता होती है।
      4. शुष्क कृषि: यह कम वर्षा वाले क्षेत्रों में की जाती है, जहाँ नमी संरक्षण पर ध्यान दिया जाता है। मोटे अनाज जैसे बाजरा, ज्वार उगाए जाते हैं।
      5. आर्द्र कृषि: अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में की जाती है, जहाँ धान जैसी फसलें मुख्य रूप से उगाई जाती हैं।

      प्रश्न 4. भारत में उगाई जाने वाली प्रमुख फसलों के नाम लिखिए।

      भारत में उगाई जाने वाली प्रमुख फसलों को निम्नलिखित श्रेणियों में बाँटा जा सकता है:

      1. खाद्यान्न फसलें: धान, गेहूँ, मक्का, ज्वार, बाजरा, रागी।
      2. दलहन फसलें: चना, अरहर (तूर), मसूर, उड़द, मूंग।
      3. तिलहन फसलें: सरसों, मूंगफली, तिल, सोयाबीन, सूरजमुखी।
      4. नकदी फसलें: गन्ना, कपास, जूट, तम्बाकू, चाय, कॉफी, रबर।
      5. फल एवं सब्जियाँ: आम, केला, संतरा, सेब, आलू, टमाटर, प्याज आदि।

      प्रश्न 5. भारत में चावल उत्पादन की दशा का वर्णन कीजिए।

      भारत में चावल (धान) एक प्रमुख खाद्यान्न फसल है। यह देश के अधिकांश लोगों का मुख्य भोजन है। इसकी खेती के लिए उच्च तापमान (25°C से अधिक), अधिक वर्षा (100 सेमी से अधिक) और चिकनी मिट्टी की आवश्यकता होती है। पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, पंजाब, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश प्रमुख उत्पादक राज्य हैं। भारत चावल उत्पादन में चीन के बाद विश्व में दूसरे स्थान पर है।

      प्रश्न 6. भारत में गेहूँ उत्पादन की दशा का वर्णन कीजिए।

      गेहूँ भारत की दूसरी प्रमुख खाद्यान्न फसल है। इसकी खेती के लिए शीत ऋतु में वर्षा (50-75 सेमी) और समतल उपजाऊ जमीन की आवश्यकता होती है। रबी की फसल के रूप में उगाए जाने वाले गेहूँ के लिए पकते समय शुष्क और गर्म मौसम अनुकूल होता है। उत्तर प्रदेश, पंजाब, मध्य प्रदेश और हरियाणा प्रमुख गेहूँ उत्पादक राज्य हैं। हरित क्रांति के बाद से गेहूँ के उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

      प्रश्न 7. भारत में मोटे अनाजों के उत्पादन की दशा का वर्णन कीजिए।

      मोटे अनाजों में ज्वार, बाजरा और रागी जैसी फसलें शामिल हैं। ये फसलें कम वर्षा और कम उपजाऊ मिट्टी वाले शुष्क क्षेत्रों में उगाई जाती हैं। ये पोषक तत्वों से भरपूर होती हैं।

      • ज्वार: इसका सबसे अधिक उत्पादन महाराष्ट्र, कर्नाटक और मध्य प्रदेश में होता है।
      • बाजरा: राजस्थान, गुजरात और हरियाणा इसके प्रमुख उत्पादक राज्य हैं। यह सबसे कम वर्षा वाले क्षेत्रों में उगाया जाता है।
      • रागी: कर्नाटक, तमिलनाडु और उत्तराखंड में इसकी खेती की जाती है। इसमें कैल्शियम और लौह तत्व अधिक मात्रा में पाए जाते हैं।

      भारत विश्व में मोटे अनाजों का सबसे बड़ा उत्पादक देश है।

      प्रश्न 8. भारत में चाय उत्पादन की दशा का वर्णन कीजिए।

      चाय एक महत्त्वपूर्ण रोपण कृषि की पेय फसल है। इसके लिए गर्म और आर्द्र जलवायु, भरपूर वर्षा और ढलानदार जमीन की आवश्यकता होती है। असम, पश्चिम बंगाल (दार्जिलिंग), तमिलनाडु और केरल प्रमुख चाय उत्पादक राज्य हैं। भारत विश्व में चाय का सबसे बड़ा उत्पादक और उपभोक्ता देश है। दार्जिलिंग की चाय अपनी विशिष्ट सुगंध के लिए विश्व प्रसिद्ध है।

      प्रश्न 9. भारत में कॉफी उत्पादन की दशा का वर्णन कीजिए।

      कॉफी भी एक प्रमुख रोपण कृषि की फसल है। इसकी खेती के लिए गर्म और आर्द्र जलवायु, ढलानदार पहाड़ी भूमि और गहरी उपजाऊ मिट्टी की आवश्यकता होती है। भारत में मुख्य रूप से दो प्रकार की कॉफी उगाई जाती है: अरेबिका (बेहतर गुणवत्ता) और रोबस्टा। कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु प्रमुख कॉफी उत्पादक राज्य हैं। भारत से कॉफी का निर्यात किया जाता है और यह विदेशी मुद्रा अर्जित करने का एक स्रोत है।

      प्रश्न 10. भारत में कृषि की प्रमुख समस्याएँ क्या हैं?

      भारत में कृषि की प्रमुख समस्याएँ निम्नलिखित हैं:

      1. जोतों का छोटा आकार: अधिकांश किसानों के पास बहुत छोटे खेत हैं, जिससे आधुनिक तकनीक का प्रयोग कठिन हो जाता है और उत्पादन लागत बढ़ जाती है।
      2. मौसम पर निर्भरता: अभी भी बहुत सी खेती मानसून की अनिश्चितता पर निर्भर है। सिंचाई सुविधाओं का अभाव एक बड़ी समस्या है।
      3. मृदा अपरदन एवं उर्वरता में कमी: भूमि के अत्यधिक दोहन और रासायनिक उर्वरकों के असंतुलित उपयोग से मिट्टी की उर्वरता कम हो रही है।
      4. कृषि ऋणग्रस्तता: किसान अक्सर साहूकारों या बैंकों से ऋण लेते हैं और कई बार उसे चुका नहीं पाते, जिससे वे आर्थिक संकट में फंस जाते हैं।
      5. उचित मूल्य का अभाव: किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पाता क्योंकि बिचौलिए अधिकांश लाभ ले लेते हैं।
      6. पुरानी कृषि पद्धतियाँ: अभी भी कई क्षेत्रों में पुराने बीज और परंपरागत तरीकों का ही उपयोग हो रहा है।

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