Bihar Board Class 10th Social Science (खण्ड-क) Chapter 5A बिहार: खनिज एवं ऊर्जा संसाधन) Solutions

Here we have provided Solution for Chapter 5A बिहार: खनिज एवं ऊर्जा संसाधन) of Social Science (खण्ड-क) subject for Class 10th students of Bihar Board of Secondary Education. There are various chapters in this Social Science (खण्ड-क) such as Chapter 1 भारत: संसाधन एवं उपयोग), Chapter 1A प्राकृतिक संसाधन), Chapter 1B जल संसाधन), Chapter 1C वन एवं वन्य प्राणी संसाधन), Chapter 1D खनिज संसाधन), Chapter 1E शक्ति (ऊर्जा) संसाधन), Chapter 2 कृषि), Chapter 3 निर्माण उद्योग), Chapter 4 परिवहन, संचार एवं व्यापार), Chapter 5 बिहार: कृषि एवं वन संसाधन), Chapter 5A बिहार: खनिज एवं ऊर्जा संसाधन), Chapter 5B बिहार: उद्योग एवं परिवहन), Chapter 5C बिहार: जनसंख्या एवं नगरीकरण) and Chapter 6 मानचित्र अध्ययन (उच्चावच निरूपण)). Summary of the same is given below:

Board NameBihar Board of Secondary Education
ClassClass 10th
Content TypeSolution
Solution forClass 10th students
SubjectSocial Science (खण्ड-क)
Chapter NameChapter 5A बिहार: खनिज एवं ऊर्जा संसाधन)
Total Number of Chapter in this Subject14

Studying Bihar Board Class 10th Social Science (खण्ड-क) Chapter 5A बिहार: खनिज एवं ऊर्जा संसाधन) solution will help you higher marks in this subject but you need to follow best practices to achieve higher marks, which are given after solutions, go through them once.

Bihar Board Class 10th Social Science (खण्ड-क) Chapter 5A बिहार: खनिज एवं ऊर्जा संसाधन) Solutions

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Bihar Board Class 10 Geography Solutions

Chapter 5A: बिहार: खनिज एवं ऊर्जा संसाधन

प्रश्न 1.
बिहार में खनिज तेल मिलने की संभावनाएँ हैं- (क) हिमालय क्षेत्र में
(ख) दक्षिण बिहार के मैदान में
(ग) दक्षिण बिहार के पहाड़ी क्षेत्र में
(घ) गंगा के द्रोणी में

उत्तर-
(घ) गंगा के द्रोणी में

व्याख्या: बिहार में खनिज तेल की संभावना मुख्य रूप से गंगा नदी की घाटी यानी गंगा द्रोणी में मानी जाती है। यह एक विशाल तलछटी बेसिन है जहाँ प्राचीन काल के जीवों के अवशेष दबकर पेट्रोलियम में बदल सकते हैं। तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम (ONGC) इस क्षेत्र में अन्वेषण कार्य कर रहा है।

प्रश्न 2.
चूना पत्थर का उपयोग मुख्य रूप से किस उद्योग में होता है ? (क) सीमेंट उद्योग
(ख) लोहा इस्पात उद्योग
(ग) सीसा उद्योग
(घ) इनमें से किसी में नहीं

उत्तर-
(क) सीमेंट उद्योग

व्याख्या: चूना पत्थर (लाइमस्टोन) सीमेंट उद्योग का एक प्रमुख और अनिवार्य कच्चा माल है। सीमेंट बनाने की प्रक्रिया में चूना पत्थर को क्लिंकर में बदला जाता है। हालाँकि इसका उपयोग लोहा-इस्पात उद्योग में भी फ्लक्स के रूप में होता है, लेकिन मुख्य और सबसे बड़ा उपयोग सीमेंट उद्योग में ही होता है।

प्रश्न 3.
पाइराइट खनिज है (क) धात्विक (ख) अधात्विक (ग) परमाणु
(घ) ईंधन

उत्तर-
(ख) अधात्विक

व्याख्या: पाइराइट, जिसे 'फूल सोना' भी कहते हैं, एक अधात्विक खनिज है। यह लोहे और सल्फर का यौगिक (FeS₂) है। इसका चमकीला पीला रंग सोने जैसा दिखता है, लेकिन यह सोना नहीं है। इसका उपयोग मुख्य रूप से सल्फ्यूरिक अम्ल बनाने में किया जाता है।

प्रश्न 4.
बिहार के सोना अयस्क से प्रतिटन शुद्ध सोना प्राप्त होता है (क) 05 से 06 ग्राम
(ख) 0.1 से 0.6 ग्राम
(ग) 00.00 से 0.1 ग्राम
(घ) 0.001 से 0.003 ग्राम

उत्तर-
(ख) 0.1 से 0.6 ग्राम

व्याख्या: बिहार में सोना अयस्क बहुत ही निम्न श्रेणी का है। यहाँ सोना धातु नदियों की रेत (प्लासर निक्षेप) में बहुत कम मात्रा में मिलता है। प्रति टन रेत या अयस्क से केवल 0.1 से 0.6 ग्राम ही शुद्ध सोना निकाला जा सकता है, जो व्यावसायिक दृष्टि से लाभकारी नहीं है। इसलिए बिहार में सोने का व्यापारिक उत्पादन नहीं होता।

प्रश्न 5.
कहलगांव तापीय विद्युत परियोजना किस जिला में अवस्थित है २ (क) भागलपुर
(ख) मुंगेर
(ग) जमुई
(घ) साहेबगंज

उत्तर-
(क) भागलपुर

व्याख्या: कहलगांव सुपर थर्मल पावर स्टेशन बिहार की सबसे बड़ी तापीय विद्युत परियोजना है, जो भागलपुर जिले में स्थित है। इसकी स्थापना 1979 में हुई थी और इसकी कुल उत्पादन क्षमता लगभग 840 मेगावाट है। यह कोयले से चलने वाला पावर प्लांट है।

प्रश्न 6.
कांटी तापीय विद्यत परियोजना किस जिला में स्थापित है? (क) पूर्णिया
(ख) सिवान
(ग) मुजफ्फरपुर
(घ) पूर्वी चम्पारण

उत्तर-
(ग) मुजफ्फरपुर

व्याख्या: कांटी तापीय विद्युत परियोजना मुजफ्फरपुर जिले में स्थित है। यह बिहार का एक महत्वपूर्ण बिजलीघर है जो कोयले से बिजली पैदा करता है। इसकी उत्पादन क्षमता लगभग 120 मेगावाट है और यह राज्य के पावर ग्रिड को बिजली आपूर्ति में योगदान देता है।

प्रश्न 7.
बिहार में बी. एच. पी. सी. द्वारा वृहत्‌ परियोजनाओं की संख्या कितनी है २ (क) 3
(ख) 10
(ग) 5
(a) 7

उत्तर-
(ख) 10

व्याख्या: बिहार हाइड्रो पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BHPCL) राज्य में जल विद्युत परियोजनाओं के विकास के लिए जिम्मेदार निकाय है। BHPCL द्वारा प्रबंधित वृहत (बड़े पैमाने की) जल विद्युत परियोजनाओं की कुल संख्या 10 है। इनमें से कुछ परियोजनाएँ पूर्ण हो चुकी हैं, जबकि कुछ निर्माणाधीन या प्रस्तावित अवस्था में हैं।

प्रश्न 8.
बिहार में कार्यरत जल विद्युत परियोजनाओं की कुल विद्युत उत्पादन क्षमता कितनी (क) 35.60 मेगावाट
(ख) 44.20 मेगावाट
(ग) 50.60 मेगावाट (घ) 30 मेगावाट

उत्तर-
(ख) 44.20 मेगावाट

व्याख्या: बिहार में वर्तमान में कार्यरत जल विद्युत परियोजनाओं से कुल मिलाकर लगभग 44.20 मेगावाट बिजली का उत्पादन होता है। यह उत्पादन मुख्य रूप से सोन, गंडक और कोसी नदी घाटी परियोजनाओं से होता है। बिहार एक मैदानी राज्य होने के कारण बड़े जल विद्युत संयंत्रों के लिए अनुकूल नहीं है, इसलिए यहाँ छोटी परियोजनाएँ ही संचालित हैं।

लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
अभ्रक कहाँ मिलता है ? इसका कया उपयोग है ?

उत्तर-
वितरण: बिहार में अभ्रक (मस्कोवाइट प्रकार का) मुख्य रूप से झारखंड से सटे जिलों यानी नवादा, जमुई और बाँका के क्षेत्रों में पाया जाता है। ये क्षेत्र प्राचीन क्रिस्टलीय चट्टानों से बने हैं जहाँ अभ्रक के निक्षेप मिलते हैं।

उपयोग: अभ्रक के निम्नलिखित महत्वपूर्ण उपयोग हैं-

  1. विद्युत एवं इलेक्ट्रॉनिक उद्योग: अभ्रक एक उत्कृष्ट विद्युतरोधी (इन्सुलेटर) है। इसका उपयोग कैपेसिटर, ट्रांसफार्मर, विद्युत प्रेस, हीटर, रेडियो, टेलीविज़न, कंप्यूटर आदि के पुर्जों में किया जाता है।
  2. ऊष्मारोधी: यह ऊष्मा का भी कुचालक है, इसलिए भट्टियों और उच्च तापमान वाले उपकरणों में इसका उपयोग होता है।
  3. अन्य उपयोग: चमकदार और पारदर्शी होने के कारण इसका उपयोग सजावटी सामान, खिड़कियों (स्टोव की), लिपस्टिक, नेल पॉलिश, पेंट और कृत्रिम फूलों में भी किया जाता है।

प्रश्न 2,
बिहार में ग्रेफाइट एवं यूरेनियम के वितरण को लिखिए।

उत्तर-
ग्रेफाइट का वितरण: बिहार में ग्रेफाइट (काजल/पेंसिल लीड) के निक्षेप मुख्य रूप से मुंगेर और रोहतास जिलों में पाए जाते हैं। यह एक नरम, चिकना और काला खनिज है जिसका उपयोग पेंसिल, लुब्रिकेंट, इलेक्ट्रोड और रिफ्रैक्टरी में होता है।

यूरेनियम का वितरण: बिहार में यूरेनियम के किसी भी ज्ञात या आर्थिक रूप से व्यवहार्य भंडार की जानकारी नहीं है। यूरेनियम एक दुर्लभ और रेडियोधर्मी धात्विक खनिज है जो परमाणु ऊर्जा एवं हथियारों के लिए आवश्यक है। भारत में यूरेनियम के प्रमुख भंडार झारखंड, आंध्र प्रदेश और मेघालय आदि राज्यों में हैं।

प्रश्न 3,
बिहार में तापीय विद्युत केन्द्रों का उल्लेख कीजिए।

उत्तर-
बिहार में कोयला या गैस से चलने वाले प्रमुख तापीय विद्युत केंद्र निम्नलिखित हैं-

  1. कहलगाँव तापीय विद्युत केंद्र: भागलपुर जिले में स्थित, यह बिहार की सबसे बड़ी (840 मेगावाट) तापीय परियोजना है।
  2. कांटी तापीय विद्युत केंद्र: मुजफ्फरपुर जिले में स्थित, इसकी क्षमता लगभग 120 मेगावाट है।
  3. बरौनी तापीय विद्युत केंद्र: बेगूसराय जिले में स्थित, यह रिफाइनरी से जुड़ा है और इसकी क्षमता लगभग 145 मेगावाट है।
निर्माणाधीन परियोजनाएँ: बिहार में बिजली उत्पादन बढ़ाने के लिए दो नए तापीय विद्युत केंद्र बन रहे हैं-
  • बाढ़ तापीय विद्युत केंद्र: पटना जिले में।
  • नवीनगर तापीय विद्युत केंद्र: औरंगाबाद जिले में।

प्रश्न 4.
सोन नदी घाटी परियोजना से उत्पादित जल विद्युत का वर्णन करें।

उत्तर-
सोन नदी घाटी परियोजना एक बहुउद्देशीय योजना है जिसमें सिंचाई के साथ-साथ जल विद्युत उत्पादन भी शामिल है। इस परियोजना से जल विद्युत का उत्पादन नहर प्रणाली पर बने पावर हाउसों से किया जाता है।

  • पश्चिमी नहर पावर हाउस: सोन नदी से निकाली गई पश्चिमी नहर पर स्थित पनबिजली घर से 6.6 मेगावाट बिजली का उत्पादन होता है।
  • पूर्वी नहर पावर हाउस: सोन नदी से निकाली गई पूर्वी नहर पर स्थित पनबिजली घर से 3.3 मेगावाट बिजली का उत्पादन होता है।
इस प्रकार, सोन नदी घाटी परियोजना से कुल 9.9 मेगावाट (6.6 + 3.3) जल विद्युत का उत्पादन हो रहा है। यह बिहार की एक महत्वपूर्ण जल विद्युत परियोजना है।

प्रश्न 5.
बिहार में जल विद्युत के विकास पर प्रकाश डालें।

उत्तर-
बिहार मुख्यतः एक समतल मैदानी राज्य है, इसलिए यहाँ बड़े बाँध बनाकर जल विद्युत उत्पादन की संभावनाएँ सीमित हैं। फिर भी, राज्य में जल विद्युत के विकास के लिए निम्नलिखित प्रयास किए गए हैं:

  1. संस्थागत प्रयास: जल विद्युत परियोजनाओं के विकास के लिए बिहार राज्य जल विद्युत निगम (Bihar State Hydroelectric Power Corporation) की स्थापना 1982 में की गई थी।
  2. वर्तमान स्थिति: वर्तमान में सोन, गंडक और कोसी नदी घाटी परियोजनाओं से लगभग 44.20 मेगावाट जल विद्युत का उत्पादन हो रहा है।
  3. भविष्य की संभावनाएँ एवं निर्माणाधीन परियोजनाएँ: राज्य के दक्षिणी पहाड़ी क्षेत्रों (कैमूर, रोहतास, औरंगाबाद, अरवल आदि जिलों) में छोटी नदियों एवं झरनों पर कई मिनी और माइक्रो हाइडल परियोजनाओं पर काम चल रहा है। इनमें शामिल हैं:
    • कलेर (अरवल)
    • अगबूर बगहा (पश्चिमी चम्पारण)
    • त्रिवेणी, ओगरा (औरंगाबाद)
    • तेजपुर टिहरी, डेलबाग, नासरीगंज, नोखा (रोहतास)
    इन परियोजनाओं के पूरा होने पर बिहार की जल विद्युत उत्पादन क्षमता में वृद्धि होगी।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1. बिहार में पाए जाने वाले खनिजों को वर्गीकृत कर किसी एक वर्ग के खनिज का वितरण एवं उपयोगिता लिखिए।

उत्तर-
बिहार में पाए जाने वाले खनिजों का वर्गीकरण:
बिहार में पाए जाने वाले खनिजों को मुख्य रूप से दो वर्गों में बाँटा जा सकता है-

  1. धात्विक खनिज: इन खनिजों से धातु निकाली जाती है। बिहार में इनकी मात्रा बहुत कम है। उदाहरण: बॉक्साइट (एल्युमिनियम का अयस्क), मैग्नेटाइट (लोहे का अयस्क) और सोना अयस्क (नदी रेत में अल्प मात्रा में)।
  2. अधात्विक खनिज: इन खनिजों से धातु नहीं निकलती। बिहार में इनकी उपलब्धता अपेक्षाकृत अधिक है। उदाहरण: चूना पत्थर, अभ्रक, डोलोमाइट, सिलिका सैंड, पाइराइट, क्वार्ट्ज, फेल्सपार, चीनी मिट्टी (काओलिन), नमक (शोरा) इत्यादि।

अधात्विक खनिज: चूना पत्थर का वितरण एवं उपयोगिता
वितरण: चूना पत्थर बिहार का एक प्रमुख अधात्विक खनिज है। यह मुख्य रूप से राज्य के दक्षिणी भाग के जिलों में पाया जाता है, जहाँ प्राचीन क्रिस्टलीय एवं अवसादी चट्टानें हैं। इसके प्रमुख भंडार कैमूर, रोहतास, जमुई, मुंगेर और नवादा जिलों में स्थित हैं।

उपयोगिता: चूना पत्थर की उपयोगिता बहुत व्यापक है-
  1. सीमेंट उद्योग: यह सीमेंट बनाने का मुख्य कच्चा माल है। बिहार में कई सीमेंट फैक्ट्रियाँ चूना पत्थर पर निर्भर हैं।
  2. लोहा-इस्पात उद्योग: इसमें अशुद्धियों (स्लैग) को दूर करने के लिए फ्लक्स के रूप में प्रयोग किया जाता है।
  3. रासायनिक उद्योग: कैल्शियम कार्बाइड, सोडा ऐश, कास्टिक सोडा, चूना (लाइम) आदि बनाने में इसका उपयोग होता है।
  4. कागज, चीनी, फर्टिलाइजर, काँच और रबर उद्योगों में भी इसका प्रयोग होता है।
  5. निर्माण कार्य: इमारतों की नींव, सड़क निर्माण और मूर्तिकला में भी इसका उपयोग किया जाता है।
इस प्रकार, चूना पत्थर बिहार के औद्योगिक विकास के लिए एक महत्वपूर्ण खनिज संसाधन है।

प्रश्न 2.
बिहार के प्रमुख ऊर्जा स्रोतों का वर्णन कीजिए और किसी एक स्रोत का विस्तार से चर्चा कीजिए।

उत्तर-
बिहार के प्रमुख ऊर्जा स्रोत:
बिहार मुख्यतः पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भर है और गैर-पारंपरिक स्रोतों का विकास अभी प्रारंभिक अवस्था में है।

  1. तापीय ऊर्जा (कोयला/गैस आधारित): यह बिहार का सबसे बड़ा ऊर्जा स्रोत है। प्रमुख केंद्र- कहलगाँव (भागलपुर), कांटी (मुजफ्फरपुर), बरौनी (बेगूसराय)। निर्माणाधीन: बाढ़ (पटना) और नवीनगर (औरंगाबाद)।
  2. जल विद्युत (पनबिजली): यह एक नवीकरणीय स्रोत है। सोन, गंडक और कोसी नदी घाटी परियोजनाओं से कुल लगभग 44.20 मेगावाट बिजली का उत्पादन होता है।
  3. गैर-पारंपरिक ऊर्जा स्रोत:
    • बायोगैस: ग्रामीण क्षेत्रों में पशुओं के गोबर से बायोगैस संयंत्रों द्वारा ऊर्जा प्राप्त की जाती है। अब तक लगभग 1.25 लाख संयंत्र लगाए जा चुके हैं।
    • सौर ऊर्जा: बिहार में सौर ऊर्जा की अपार संभावनाएँ हैं, लेकिन इसका बड़े पैमाने पर विकास अभी होना बाकी है।
    • पवन ऊर्जा: मैदानी क्षेत्र होने के कारण पवन ऊर्जा की संभावनाएँ सीमित हैं।

तापीय ऊर्जा स्रोत का विस्तृत विवरण:
बिहार में बिजली उत्पादन का सबसे बड़ा और मुख्य आधार तापीय ऊर्जा है। यहाँ कोयले या प्राकृतिक गैस को जलाकर भाप बनाई जाती है, जो टरबाइन घुमाकर बिजली पैदा करती है।
  • कहलगाँव तापीय विद्युत केंद्र: भागलपुर जिले में स्थित यह बिहार की सबसे बड़ी (840 मेगावाट क्षमता) तापीय परियोजना है। इसकी स्थापना 1979 में हुई थी। यह कोयले से चलता है और राज्य ग्रिड को बिजली आपूर्ति का एक प्रमुख स्रोत है।
  • कांटी तापीय विद्युत केंद्र: मुजफ्फरपुर जिले में स्थित इसकी क्षमता लगभग 120 मेगावाट है। यह भी कोयला आधारित है।
  • बरौनी तापीय विद्युत केंद्र: बेगूसराय जिले में स्थित यह केंद्र बरौनी तेल रिफाइनरी से जुड़ा है और पेट्रोलियम उत्पादों (जैसे फर्नेस ऑयल) या गैस से चल सकता है। इसकी क्षमता लगभग 145 मेगावाट है।
महत्व एवं चुनौतियाँ: तापीय ऊर्जा विश्वसनीय और निरंतर बिजली आपूर्ति करती है। हालाँकि, इसके लिए बिहार को कोयला अन्य राज्यों से आयात करना पड़ता है, जिससे लागत बढ़ती है। साथ ही, यह प्रदूषण फैलाती है और ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन करती है। फिर भी, वर्तमान में बिहार की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में तापीय ऊर्जा की भूमिका सबसे अहम है।


अध्याय सारांश

* खनिज एवं ऊर्जा संसाधनों के मामले में बिहार एक कम विकसित राज्य है।
* यहाँ चूना पत्थर और पाइराईट ही दो ऐसे खनिज हैं जो पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं।
* गंगा द्रोणी में खनिज तेल मिलने की संभावना है। तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम के सहयोग और केनर्स बहुराष्ट्रीय कम्पनी की मदद से इस ओर प्रयास जारी है।
* कहलगाँव सुपर थर्मल पावर बिहार की सबसे बड़ी तापीय विद्युत परियोजना है। इसकी स्थापना 1979 में की गई थी।

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