Bihar Board Class 10th Social Science (खण्ड-क) Chapter 1C वन एवं वन्य प्राणी संसाधन) Solutions

Here we have provided Solution for Chapter 1C वन एवं वन्य प्राणी संसाधन) of Social Science (खण्ड-क) subject for Class 10th students of Bihar Board of Secondary Education. There are various chapters in this Social Science (खण्ड-क) such as Chapter 1 भारत: संसाधन एवं उपयोग), Chapter 1A प्राकृतिक संसाधन), Chapter 1B जल संसाधन), Chapter 1C वन एवं वन्य प्राणी संसाधन), Chapter 1D खनिज संसाधन), Chapter 1E शक्ति (ऊर्जा) संसाधन), Chapter 2 कृषि), Chapter 3 निर्माण उद्योग), Chapter 4 परिवहन, संचार एवं व्यापार), Chapter 5 बिहार: कृषि एवं वन संसाधन), Chapter 5A बिहार: खनिज एवं ऊर्जा संसाधन), Chapter 5B बिहार: उद्योग एवं परिवहन), Chapter 5C बिहार: जनसंख्या एवं नगरीकरण) and Chapter 6 मानचित्र अध्ययन (उच्चावच निरूपण)). Summary of the same is given below:

Board NameBihar Board of Secondary Education
ClassClass 10th
Content TypeSolution
Solution forClass 10th students
SubjectSocial Science (खण्ड-क)
Chapter NameChapter 1C वन एवं वन्य प्राणी संसाधन)
Total Number of Chapter in this Subject14

Studying Bihar Board Class 10th Social Science (खण्ड-क) Chapter 1C वन एवं वन्य प्राणी संसाधन) solution will help you higher marks in this subject but you need to follow best practices to achieve higher marks, which are given after solutions, go through them once.

Bihar Board Class 10th Social Science (खण्ड-क) Chapter 1C वन एवं वन्य प्राणी संसाधन) Solutions

View the following solutions for Bihar Board Class 10th Social Science (खण्ड-क) Chapter 1C वन एवं वन्य प्राणी संसाधन). These solutions are available for viewing online.

1. निम्नलिखित में से कौन-सा वन्य प्राणी अभ्यारण्य बिहार में स्थित नहीं है?

(A) गौतम बुद्ध वन्य प्राणी अभ्यारण्य
(B) भीमबंध वन्य प्राणी अभ्यारण्य
(C) उदयपुर वन्य प्राणी अभ्यारण्य
(D) वाल्मीकि वन्य प्राणी अभ्यारण्य

उत्तर: (C) उदयपुर वन्य प्राणी अभ्यारण्य
व्याख्या: उदयपुर वन्य प्राणी अभ्यारण्य बिहार में नहीं, बल्कि राजस्थान राज्य में स्थित है। बिहार के प्रमुख वन्यजीव अभ्यारण्यों में गौतम बुद्ध (गया), भीमबंध (मुंगेर) और वाल्मीकि (पश्चिम चंपारण) शामिल हैं।

2. भारत में वनों का कुल क्षेत्रफल देश के कुल भौगोलिक क्षेत्र का कितना प्रतिशत है?

(A) 20.55 प्रतिशत
(B) 21.05 प्रतिशत
(C) 21.55 प्रतिशत
(D) 22.05 प्रतिशत

उत्तर: (C) 21.55 प्रतिशत
व्याख्या: भारत सरकार के वन सर्वेक्षण रिपोर्ट (2021) के अनुसार, देश का कुल वन आवरण 21.55 प्रतिशत है। यह आंकड़ा देश के कुल भौगोलिक क्षेत्र के प्रतिशत के रूप में वनों के फैलाव को दर्शाता है।

3. बिहार में वनों का कुल क्षेत्रफल राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्र का कितना प्रतिशत है?

(A) 6.87 प्रतिशत
(B) 7.27 प्रतिशत
(C) 7.77 प्रतिशत
(D) 8.27 प्रतिशत

उत्तर: (C) 7.77 प्रतिशत
व्याख्या: बिहार राज्य में वनों का विस्तार राज्य के कुल क्षेत्रफल का लगभग 7.77 प्रतिशत है। यह राष्ट्रीय औसत (21.55%) से काफी कम है, जो राज्य में वन संसाधनों के सीमित होने का संकेत देता है।

4. निम्नलिखित में से कौन-सा राष्ट्रीय उद्यान बिहार में स्थित है?

(A) काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान
(B) वाल्मीकि राष्ट्रीय उद्यान
(C) कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान
(D) दुधवा राष्ट्रीय उद्यान

उत्तर: (B) वाल्मीकि राष्ट्रीय उद्यान
व्याख्या: वाल्मीकि राष्ट्रीय उद्यान बिहार राज्य के पश्चिम चंपारण जिले में स्थित है। यह राज्य का एकमात्र राष्ट्रीय उद्यान है और यह नेपाल की सीमा से लगा हुआ है। अन्य विकल्प असम (काजीरंगा), उत्तराखंड (कॉर्बेट) और उत्तर प्रदेश (दुधवा) में स्थित हैं।

5. वन संरक्षण अधिनियम कब पारित किया गया?

(A) 1950
(B) 1960
(C) 1970
(D) 1980

उत्तर: (D) 1980
व्याख्या: भारत सरकार ने वनों के तेजी से हो रहे विनाश को रोकने और उनके संरक्षण के लिए वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980 पारित किया। इस अधिनियम के तहत वन भूमि को गैर-वन उद्देश्यों के लिए उपयोग करने पर कड़े नियंत्रण लगाए गए।

6. वनों के महत्व को समझाइए।

उत्तर: वन हमारे पर्यावरण और अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उनके प्रमुख महत्व इस प्रकार हैं:
1. पारिस्थितिक महत्व: वन जलवायु को नियंत्रित करते हैं, वर्षा लाने में सहायक होते हैं, मिट्टी के कटाव को रोकते हैं और बाढ़ नियंत्रण में भूमिका निभाते हैं। वे ऑक्सीजन का उत्पादन करते और कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित कर जलवायु परिवर्तन को कम करते हैं।
2. आर्थिक महत्व: वन लकड़ी, ईंधन, कागज, रबर, गोंद, लाख, औषधीय पौधे आदि जैसे विभिन्न उत्पाद प्रदान करते हैं, जो लाखों लोगों की आजीविका का आधार हैं।
3. सामाजिक महत्व: वन आदिवासी और स्थानीय समुदायों के जीवन और संस्कृति का अभिन्न अंग हैं। ये लोग वनों से भोजन, आवास और दवाएं प्राप्त करते हैं।
4. वन्यजीव आवास: वन विभिन्न प्रकार के पौधों और जानवरों को आवास प्रदान करके जैव विविधता के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

7. वन संरक्षण के उपायों को लिखिए।

उत्तर: वनों के संरक्षण के लिए निम्नलिखित उपाय किए जा सकते हैं:
1. वनों की कटाई पर रोक: वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980 जैसे कानूनों का सख्ती से पालन करके वन भूमि को गैर-वन उद्देश्यों के लिए परिवर्तित करने पर रोक लगाना।
2. वनरोपण एवं सामाजिक वानिकी: खाली पड़ी भूमि, सड़कों के किनारे और बंजर भूमि पर नए पेड़ लगाना। सामाजिक वानिकी कार्यक्रमों के माध्यम से समुदायों को वृक्षारोपण के लिए प्रोत्साहित करना।
3. जन-जागरूकता: लोगों को वनों के महत्व, उनके विनाश के दुष्परिणामों और संरक्षण की आवश्यकता के बारे में शिक्षित करना।
4. वैकल्पिक ईंधन का प्रयोग: ग्रामीण क्षेत्रों में लकड़ी के चूल्हे के स्थान पर गोबर गैस, सौर ऊर्जा और एलपीजी जैसे वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देना।
5. संरक्षित क्षेत्रों का निर्माण: राष्ट्रीय उद्यान, वन्यजीव अभ्यारण्य और बायोस्फीयर रिजर्व स्थापित करके वनों और वन्यजीवों की रक्षा करना।
6. समुदाय आधारित प्रबंधन: वन संरक्षण में स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना, जैसे संयुक्त वन प्रबंधन (JFM) के माध्यम से।

8. बिहार में वन्य प्राणी अभ्यारण्यों के नाम लिखिए।

उत्तर: बिहार राज्य में कई वन्यजीव अभ्यारण्य स्थित हैं, जो विभिन्न प्रकार के पशु-पक्षियों को संरक्षण प्रदान करते हैं। इनमें से प्रमुख हैं:
1. वाल्मीकि वन्य प्राणी अभ्यारण्य - पश्चिम चंपारण जिले में स्थित है।
2. गौतम बुद्ध वन्य प्राणी अभ्यारण्य - गया जिले में स्थित है।
3. भीमबंध वन्य प्राणी अभ्यारण्य - मुंगेर जिले में स्थित है।
4. कैमूर वन्य प्राणी अभ्यारण्य - कैमूर जिले में स्थित है।
5. उदयपुर वन्य प्राणी अभ्यारण्य - यह बिहार में नहीं है (यह राजस्थान में है)। बिहार के अन्य अभ्यारण्यों में राजगीर वन्यजीव अभ्यारण्य (नालंदा) और कोसी वन्यजीव अभ्यारण्य (सुपौल) भी शामिल हैं।

9. वनों के विनाश के कारणों को लिखिए।

उत्तर: वनों के विनाश (वनोन्मूलन) के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:
1. कृषि विस्तार: बढ़ती जनसंख्या के लिए अधिक अनाज उगाने के लिए वनों को काटकर कृषि योग्य भूमि में बदल दिया जाता है।
2. विकास परियोजनाएं: बड़ी सड़कों, बांधों, बिजलीघरों, खनन और उद्योगों के निर्माण के लिए बड़े पैमाने पर वनों की कटाई की जाती है।
3. लकड़ी की माँग: इमारती लकड़ी, ईंधन की लकड़ी और कागज उद्योग के लिए कच्चे माल की बढ़ती माँग के कारण वन काटे जाते हैं।
4. अवैध कटाई एवं अतिक्रमण: अवैध रूप से पेड़ों की कटाई और वन भूमि पर अवैध कब्जा भी वनों के विनाश का एक बड़ा कारण है।
5. प्राकृतिक आपदाएँ: वनों में लगने वाली आग, बाढ़, कीटों का प्रकोप और बीमारियाँ भी वनों को नुकसान पहुँचाती हैं।
6. पशुचारण: अत्यधिक पशुचारण से वनों में नए पौधे उग नहीं पाते, जिससे वनों का प्राकृतिक पुनर्जनन रुक जाता है।

10. वन संरक्षण अधिनियम, 1980 की मुख्य विशेषताएँ लिखिए।

उत्तर: वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980 की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
1. केंद्र सरकार की अनुमति: इस अधिनियम के तहत, किसी भी वन भूमि को गैर-वन उद्देश्यों (जैसे खेती, उद्योग, निर्माण) के लिए उपयोग करने के लिए केंद्र सरकार से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य है।
2. वन भूमि का हस्तांतरण प्रतिबंधित: राज्य सरकार बिना केंद्र सरकार की मंजूरी के किसी भी आरक्षित वन या उसके हिस्से को किसी निजी व्यक्ति या संस्था को हस्तांतरित नहीं कर सकती।
3. अनिवार्य पुनर्वनीकरण: अगर किसी वन भूमि का गैर-वन उद्देश्यों के लिए उपयोग किया जाता है, तो उसके बदले में समान या अधिक क्षेत्र में पुनर्वनीकरण (नए पेड़ लगाना) करना अनिवार्य है।
4. अपराध एवं दंड: इस अधिनियम के उल्लंघन पर कड़े दंड का प्रावधान है, जिसमें जुर्माना और कारावास दोनों शामिल हो सकते हैं।
5. वन संरक्षण हेतु सलाहकार समिति: केंद्र सरकार को वन संरक्षण से संबंधित मामलों पर सलाह देने के लिए एक समिति गठित करने का अधिकार दिया गया है।
इस अधिनियम का मुख्य उद्देश्य देश में वनों के तेजी से हो रहे ह्रास को रोकना और उनके संरक्षण व विकास को सुनिश्चित करना है।

खण्ड-क : भारत : संसाधन एवं उपयोग

अध्याय 1C : वन एवं वन्य प्राणी संसाधन

1. बिहार में वनों का कुल क्षेत्रफल कितना है?

बिहार में वनों का कुल क्षेत्रफल राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का लगभग 7.76% है। यह क्षेत्रफल लगभग 7,306 वर्ग किलोमीटर के बराबर है। यह राष्ट्रीय वन नीति के अनुसार निर्धारित 33% लक्ष्य से काफी कम है, जो राज्य में वन संसाधनों के संरक्षण और विस्तार की आवश्यकता को दर्शाता है।

2. बिहार के किन जिलों में वनों का विस्तार है?

बिहार में वन मुख्य रूप से कुछ विशिष्ट जिलों में केंद्रित हैं। इनमें शामिल हैं:

  • कैमूर – यहाँ सबसे बड़ा वन क्षेत्र है।
  • रोहतास
  • नवादा
  • औरंगाबाद
  • गया
  • जमुई
  • पश्चिमी चंपारण

ये जिले मुख्यतः राज्य के दक्षिणी और दक्षिण-पश्चिमी पहाड़ी एवं पठारी क्षेत्रों में स्थित हैं, जहाँ वनस्पति के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ पाई जाती हैं।

3. बिहार में वनों के प्रकार बताइए।

बिहार में पाए जाने वाले वनों को मुख्यतः दो प्रकारों में वर्गीकृत किया जा सकता है:

  1. उष्णकटिबंधीय शुष्क पतझड़ वन (ट्रॉपिकल ड्राई डिसिड्यूअस फॉरेस्ट्स): ये राज्य के अधिकांश वन क्षेत्रों में पाए जाते हैं। इन वनों के पेड़ गर्मी के मौसम में अपनी पत्तियाँ गिरा देते हैं ताकि पानी की कमी से बचा जा सके। इनमें साल, शीशम, महुआ, खैर, सेमल आदि प्रमुख वृक्ष पाए जाते हैं।
  2. नदी तटीय या आर्द्र वन (रिवराइन या डैम्प फॉरेस्ट्स): ये वन गंगा, कोसी, गंडक, सोन आदि नदियों के किनारे और तराई क्षेत्रों में पाए जाते हैं। यहाँ की मिट्टी में नमी अधिक होती है। इन वनों में बाँस, खस, सबाई घास और विभिन्न प्रकार की झाड़ियाँ पाई जाती हैं।

4. बिहार में वनों के महत्व को स्पष्ट कीजिए।

बिहार में वनों का बहुत अधिक आर्थिक, पारिस्थितिक और सामाजिक महत्व है:

  • आर्थिक महत्व: वन लकड़ी, ईंधन, लाख, गोंद, महुआ के फूल, तेंदू पत्ता, औषधीय पौधे आदि प्रदान करते हैं, जो स्थानीय लोगों की आजीविका का स्रोत हैं।
  • पारिस्थितिक महत्व: वन मिट्टी का कटाव रोकते हैं, बाढ़ पर नियंत्रण करते हैं, जलवायु को संतुलित रखते हैं और भूजल स्तर को बढ़ाते हैं। ये वायुमंडल से कार्बन डाइऑक्साइड अवशोषित कर ऑक्सीजन प्रदान करते हैं।
  • वन्य जीवों का आवास: वन बाघ, तेंदुआ, भालू, हिरण, नीलगाय और विभिन्न पक्षियों सहित कई वन्य प्राणियों को आश्रय और भोजन प्रदान करते हैं।
  • सामाजिक-सांस्कृतिक महत्व: कई आदिवासी और स्थानीय समुदायों की जीवनशैली और संस्कृति वनों से जुड़ी हुई है।

5. बिहार में वन संरक्षण के उपाय बताइए।

बिहार में वनों के संरक्षण और विस्तार के लिए निम्नलिखित उपाय किए जा रहे हैं और किए जाने चाहिए:

  1. वन संरक्षण अधिनियमों का कड़ाई से पालन: वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980 और वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 जैसे कानूनों को प्रभावी ढंग से लागू करना।
  2. सामाजिक वानिकी को बढ़ावा: सड़कों, नहरों और रेलवे लाइनों के किनारे, स्कूलों और सार्वजनिक स्थानों पर अधिक से अधिक पेड़ लगाने के कार्यक्रम चलाना।
  3. वन्यजीव अभयारण्य और राष्ट्रीय उद्यान स्थापित करना: वाल्मीकि टाइगर रिजर्व, भीमबंध, गौतम बुद्ध वन्यजीव अभयारण्य आदि को और मजबूत करना।
  4. जन जागरूकता: लोगों को वनों के महत्व के बारे में शिक्षित करना और उन्हें संरक्षण के प्रयासों में शामिल करना।
  5. वैकल्पिक ईंधन की व्यवस्था: ग्रामीण क्षेत्रों में लकड़ी के कोयले और लकड़ी पर निर्भरता कम करने के लिए गोबर गैस (बायोगैस) और सौर ऊर्जा जैसे विकल्पों को बढ़ावा देना।
  6. वन अपराधों पर रोक: अवैध कटाई, अतिक्रमण और अवैध शिकार पर कड़ी निगरानी और कानूनी कार्रवाई करना।

6. बिहार के प्रमुख वन्य प्राणी अभयारण्यों के नाम बताइए।

बिहार में वन्य जीवन के संरक्षण के लिए कई अभयारण्य और एक राष्ट्रीय उद्यान स्थापित किए गए हैं। प्रमुख हैं:

  1. वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (वाल्मीकि नेशनल पार्क): यह बिहार का एकमात्र टाइगर रिजर्व है जो पश्चिमी चंपारण जिले में स्थित है। यहाँ बाघ, तेंदुआ, गौर, भौंकने वाले हिरण आदि पाए जाते हैं।
  2. भीमबंध वन्यजीव अभयारण्य: यह मुंगेर और जमुई जिले में स्थित है। यह अपने घने जंगलों और पहाड़ियों के लिए जाना जाता है।
  3. गौतम बुद्ध वन्यजीव अभयारण्य: यह गया और नवादा जिले में स्थित है। इसे 'बखोर' अभयारण्य के नाम से भी जाना जाता है।
  4. कैमूर वन्यजीव अभयारण्य: यह कैमूर जिले में स्थित है और राज्य के सबसे बड़े वन क्षेत्र का हिस्सा है।
  5. उदयपुर वन्यजीव अभयारण्य (वाल्मीकि नगर): यह भी वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के आसपास का क्षेत्र है।
  6. कोसी वन्यजीव अभयारण्य (प्रस्तावित/विकासाधीन): कोसी नदी के आसपास के क्षेत्र में पक्षियों के लिए एक संरक्षित क्षेत्र के रूप में विकसित किया जा रहा है।

7. बहुविकल्पीय प्रश्न

i. बिहार में वनों का कुल क्षेत्रफल कितना है?
A. 15.3%
B. 10.5%
C. 7.76%
D. 5.2%

ii. बिहार का एकमात्र टाइगर रिजर्व कौन-सा है?
A. भीमबंध
B. वाल्मीकि टाइगर रिजर्व
C. गौतम बुद्ध अभयारण्य
D. कैमूर अभयारण्य

iii. बिहार में सर्वाधिक वन क्षेत्र किस जिले में है?
A. गया
B. कैमूर
C. पटना
D. पूर्णिया

iv. बिहार में पाए जाने वाले वनों का प्रकार है-
A. उष्णकटिबंधीय सदाबहार वन
B. उष्णकटिबंधीय शुष्क पतझड़ वन
C. टुंड्रा वन
D. कोणधारी वन

v. वन संरक्षण अधिनियम कब पारित हुआ?
A. 1952
B. 1972
C. 1980
D. 1992

वन एवं वन्य प्राणी संसाधन

1. बिहार में वनों का कितना प्रतिशत भाग है ?
(क) 7.1 प्रतिशत
(ख) 7.2 प्रतिशत
(ग) 7.3 प्रतिशत
(इ) 7.4 प्रतिशत

उत्तर: (क) 7.1 प्रतिशत
बिहार राज्य में भौगोलिक क्षेत्रफल का लगभग 7.1% हिस्सा ही वनों से आच्छादित है। यह राष्ट्रीय वन नीति द्वारा निर्धारित 33% लक्ष्य से काफी कम है। राज्य में वनों का वितरण असमान है, जिसमें पश्चिमी चंपारण, कैमूर और औरंगाबाद जैसे जिलों में अपेक्षाकृत अधिक वन क्षेत्र है।

2. बिहार में वन्य प्राणी अभयारण्य कहाँ स्थित है ?
(क) भागलपुर
(ख) गया
(ग) कैमूर
(इ) सारण

उत्तर: (ग) कैमूर
बिहार का प्रमुख वन्य प्राणी अभयारण्य कैमूर जिले में स्थित है, जिसे कैमूर वन्यजीव अभयारण्य के नाम से जाना जाता है। यह अभयारण्य राज्य के दक्षिण-पश्चिमी भाग में स्थित है और यहाँ बाघ, तेंदुआ, चीतल, सांभर, नीलगाय तथा विभिन्न प्रकार के पक्षियों सहित कई वन्य प्राणी पाए जाते हैं।

3. बिहार में वन संरक्षण के लिए कौन-सी योजना चलाई जा रही है ?
(क) सामाजिक वानिकी
(ख) ग्रामीण वानिकी
(ग) शहरी वानिकी
(इ) इनमें से कोई नहीं

उत्तर: (क) सामाजिक वानिकी
बिहार में वन संरक्षण और वृक्षारोपण को बढ़ावा देने के लिए सामाजिक वानिकी की योजना चलाई जा रही है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य सार्वजनिक भूमि, सड़कों के किनारे, नहरों के तट और गाँवों की बंजर भूमि पर सामुदायिक भागीदारी से वृक्ष लगाना है। इससे न केवल हरियाली बढ़ती है, बल्कि लोगों को लकड़ी, फल-फूल और चारा भी मिलता है।

4. बिहार में वन संपदा के विकास के लिए क्या आवश्यक है ?

उत्तर: बिहार में वन संपदा के सतत विकास के लिए निम्नलिखित उपाय आवश्यक हैं:
1. वन क्षेत्र में वृद्धि: राज्य के वन आच्छादन को बढ़ाने के लिए बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण अभियान चलाना चाहिए, खासकर बंजर और अनुपयोगी भूमि पर।
2. सामुदायिक भागीदारी: सामाजिक वानिकी और जन-भागीदारी को बढ़ावा देकर लोगों को वन संरक्षण से जोड़ना।
3. वन्यजीव संरक्षण: कैमूर अभयारण्य और अन्य संरक्षित क्षेत्रों की सुरक्षा मजबूत करना तथा शिकार पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना।
4. जागरूकता एवं शिक्षा: लोगों को वनों के पर्यावरणीय और आर्थिक महत्व के बारे में शिक्षित करना।
5. वैकल्पिक ईंधन की व्यवस्था: ग्रामीण क्षेत्रों में लकड़ी के इस्तेमाल को कम करने के लिए गोबर गैस, सौर ऊर्जा जैसे विकल्प उपलब्ध कराना।

5. बिहार में वनों की कमी के क्या कारण हैं ?

उत्तर: बिहार में वनों की कमी के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:
1. घनी जनसंख्या एवं कृषि विस्तार: बिहार भारत के सबसे घनी आबादी वाले राज्यों में से एक है। खेती के लिए भूमि की मांग और बस्तियों के विस्तार के कारण वनों की कटाई हुई है।
2. अनियंत्रित वन कटाई: ईंधन, इमारती लकड़ी और कृषि योग्य भूमि हासिल करने के लिए वनों का अंधाधुंध दोहन हुआ है।
3. वन भूमि का अतिक्रमण: बढ़ती जनसंख्या के दबाव में वन भूमि पर अवैध कब्जा और अतिक्रमण होता रहा है।
4. प्राकृतिक आपदाएँ: बाढ़, भूस्खलन और नदियों के कटाव से भी वन क्षेत्र प्रभावित हुए हैं।
5. संरक्षण के प्रति उदासीनता: वन संरक्षण के प्रति लोगों में जागरूकता की कमी और प्रभावी नीतियों का अभाव भी एक बड़ा कारण है।

6. बिहार में वन संपदा के संरक्षण के उपाय लिखें।

उत्तर: बिहार में वन संपदा के संरक्षण के लिए निम्नलिखित उपाय किए जा सकते हैं:
1. वृक्षारोपण अभियान: सड़कों, नहरों, रेलवे लाइनों के किनारे, स्कूल-कॉलेज परिसरों और सार्वजनिक स्थानों पर व्यापक पैमाने पर वृक्षारोपण करना।
2. सामाजिक वानिकी को बढ़ावा: ग्रामीणों और स्थानीय समुदायों को वन लगाने और उनकी देखभाल करने के लिए प्रोत्साहित करना, ताकि वे वनों से प्रत्यक्ष लाभ प्राप्त कर सकें।
3. कानूनी सुरक्षा: वन संरक्षण अधिनियम का कड़ाई से पालन करना और वन भूमि के अतिक्रमण तथा अवैध कटाई पर रोक लगाना।
4. वन्यजीव अभयारण्यों का विकास: मौजूदा अभयारण्यों का बेहतर प्रबंधन और नए संरक्षित क्षेत्रों की स्थापना करना।
5. जन-जागरूकता: शिक्षा के माध्यम से लोगों, विशेषकर युवा पीढ़ी, को वनों के महत्व के बारे में बताना और संरक्षण के प्रति प्रेरित करना।
6. वैकल्पिक संसाधन: ग्रामीणों को रसोई ईंधन के लिए लकड़ी पर निर्भरता कम करने हेतु एलपीजी, गोबर गैस आदि की सुविधा उपलब्ध कराना।

प्रश्न 1.

विभिन्न प्रकार के भारतीय वनों का तुलनात्मक विवरण प्रस्तुत करें। इनमें किसे सबसे अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है और क्यों ?

उत्तर:

भारत की विविध भौगोलिक परिस्थितियों के कारण यहाँ कई प्रकार के वन पाए जाते हैं। इनका तुलनात्मक विवरण निम्नलिखित है:

  1. सदाबहार वन (चिरहरित वन): ये वन अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों जैसे पश्चिमी घाट, अंडमान-निकोबार द्वीप समूह और असम के कुछ भागों में मिलते हैं। इनमें वृक्ष साल भर हरे-भरे रहते हैं। ये अत्यंत सघन होते हैं और इनकी लकड़ी कठोर एवं मूल्यवान होती है, जैसे महोगनी एवं एबोनी।
  2. पर्णपाती वन (पतझड़ वन): ये भारत के सबसे व्यापक वन हैं, जो मध्य भारत, दक्कन के पठार और हिमालय की तराई में पाए जाते हैं। इनके पेड़ गर्मी में अपनी पत्तियाँ गिरा देते हैं। इनकी लकड़ी आर्थिक दृष्टि से बहुत उपयोगी है। सागवान, साल, बाँस, आम, नीम आदि यहाँ के मुख्य वृक्ष हैं।
  3. पर्वतीय वन (कोणधारी वन): हिमालय के 1500 मीटर से अधिक ऊँचाई वाले क्षेत्रों में पाए जाते हैं। इनमें शंकुधारी वृक्ष जैसे देवदार, चीड़, स्प्रूस आदि मिलते हैं। इनकी लकड़ी नरम होती है और इसका उपयोग लुगदी बनाने, फर्नीचर आदि में होता है।
  4. ज्वारीय वन (डेल्टाई वन): ये वन गंगा, ब्रह्मपुत्र, गोदावरी, कृष्णा आदि नदियों के डेल्टा क्षेत्रों और तटीय भागों में पाए जाते हैं। इनमें मैंग्रोव वनस्पति जैसे सुंदरी वृक्ष प्रमुख हैं। ये वन तटों को कटाव से बचाते हैं और मछलियों के प्रजनन के लिए आवास प्रदान करते हैं।
  5. कंटीले वन (मरुस्थलीय वन): राजस्थान, गुजरात आदि शुष्क क्षेत्रों में पाए जाते हैं। इनमें कम ऊँचाई वाले कंटीले पेड़-झाड़ियाँ जैसे बबूल, खेजड़ी, नागफनी और थोहर मिलते हैं। ये वन मिट्टी के कटाव को रोकने में सहायक होते हैं।

सबसे अधिक महत्वपूर्ण वन: भारत में पर्णपाती वनों (पतझड़ वनों) को सबसे अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके प्रमुख कारण हैं:

  1. ये देश के सबसे बड़े क्षेत्र (लगभग 65% वन क्षेत्र) में फैले हुए हैं।
  2. इनसे प्राप्त होने वाली लकड़ी (जैसे सागवान, साल) अत्यंत मूल्यवान और व्यावसायिक उपयोग की है, जो फर्नीचर, निर्माण कार्य आदि में काम आती है।
  3. ये वन लाखों लोगों को रोजगार प्रदान करते हैं और वनोपज जैसे लाख, गोंद, तेंदूपत्ता, औषधियाँ आदि का स्रोत हैं।
  4. ये वन देश की मृदा और जल संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

प्रश्न 2.

भारत में वन संपदा की वृद्धि के उपायों पर प्रकाश डालें।

उत्तर:

भारत में वन संपदा को बढ़ाने और संरक्षित करने के लिए निम्नलिखित उपाय किए जा सकते हैं:

  1. वनरोपण एवं पुनर्वनीकरण: कटे हुए वन क्षेत्रों और बंजर भूमि पर नए पेड़ लगाना चाहिए। साथ ही, एक पेड़ काटने पर कम से कम दस पेड़ लगाने की नीति का पालन करना चाहिए।
  2. वैज्ञानिक वन प्रबंधन: वनों से केवल परिपक्व और पुराने पेड़ों को ही काटना चाहिए। युवा पेड़ों को बचाकर रखना चाहिए ताकि वन प्राकृतिक रूप से पुनर्जीवित हो सकें।
  3. वन अग्नि नियंत्रण: वनों में आग लगने से रोकने के लिए अग्निरोधक पट्टी (फायर लाइन) बनानी चाहिए और आग बुझाने के आधुनिक उपकरणों की व्यवस्था करनी चाहिए।
  4. रोग एवं कीट नियंत्रण: वृक्षों को बीमारियों और कीटों से बचाने के लिए समय-समय पर हवाई जहाज या अन्य माध्यमों से दवा का छिड़काव करना चाहिए।
  5. सामाजिक वानिकी को बढ़ावा: स्कूलों, कॉलेजों, सड़कों के किनारे और सार्वजनिक स्थानों पर पेड़ लगाने के लिए लोगों को प्रोत्साहित करना चाहिए। 'वन महोत्सव' जैसे कार्यक्रम आयोजित करने चाहिए।
  6. अवैध कटाई पर रोक: वनों की चोरी और अवैध कटाई रोकने के लिए सख्त कानून बनाने चाहिए और वन रक्षक दल को मजबूत करना चाहिए।
  7. जन जागरूकता: लोगों को वनों के महत्व, पेड़ों के लाभ और पर्यावरण संतुलन में उनकी भूमिका के बारे में शिक्षित करना चाहिए।
  8. वन संरक्षण नीतियाँ: सरकार को वन संरक्षण के लिए प्रभावी नीतियाँ बनानी चाहिए और उन्हें ठीक से लागू करना चाहिए। राष्ट्रीय स्तर पर 'पेड़ लगाओ' अभियान को तेजी से चलाना चाहिए।
  9. वैकल्पिक ईंधन का प्रयोग: ग्रामीण क्षेत्रों में लकड़ी के जलावन पर निर्भरता कम करने के लिए गोबर गैस (बायोगैस), सौर ऊर्जा आदि के उपयोग को बढ़ावा देना चाहिए।

प्रश्न 3.

वन्य प्राणियों के संरक्षण की आवश्यकता बताते हुए इनके संरक्षण के उपाय बताएँ।

उत्तर:

वन्य प्राणियों के संरक्षण की आवश्यकता:

  1. पारिस्थितिक संतुलन: वन्य प्राणी खाद्य श्रृंखला का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। शेर, बाघ जैसे मांसाहारी जानवर शाकाहारी जानवरों की संख्या नियंत्रित रखते हैं, जिससे पारिस्थितिकी तंत्र का संतुलन बना रहता है।
  2. जैव विविधता का संरक्षण: प्रत्येक जीव प्रजाति प्रकृति की एक अनमोल धरोहर है। किसी एक प्रजाति के विलुप्त होने से पूरा पारिस्थितिक तंत्र प्रभावित हो सकता है।
  3. आर्थिक महत्व: वन्य प्राणी पर्यटन का आकर्षण हैं, जिससे देश को विदेशी मुद्रा प्राप्त होती है और स्थानीय लोगों को रोजगार मिलता है।
  4. वैज्ञानिक एवं शैक्षणिक महत्व: वन्य जीवों का अध्ययन करके वैज्ञानिक नई दवाइयाँ खोजते हैं और प्रकृति के रहस्य समझते हैं। ये छात्रों के लिए ज्ञान का स्रोत हैं।
  5. सांस्कृतिक एवं सौंदर्यात्मक महत्व: कई वन्य प्राणी हमारी संस्कृति और धर्म का हिस्सा हैं (जैसे बाघ, हाथी, मोर)। ये प्रकृति की सुंदरता बढ़ाते हैं।

संरक्षण के उपाय:

  1. संरक्षित क्षेत्रों का विस्तार: राष्ट्रीय उद्यान, वन्यजीव अभयारण्य और बायोस्फीयर रिजर्व की संख्या बढ़ानी चाहिए। भारत में प्रोजेक्ट टाइगर और प्रोजेक्ट एलिफेंट जैसे कार्यक्रम सफल रहे हैं।
  2. शिकार पर पूर्ण प्रतिबंध: वन्य जीवों के अवैध शिकार और तस्करी के खिलाफ सख्त कानून बनाने चाहिए और दोषियों को कड़ी सजा देनी चाहिए।
  3. आवास संरक्षण: वनों की कटाई रोककर और नदी, झील आदि जल स्रोतों को साफ रखकर वन्य प्राणियों के प्राकृतिक आवास को बचाना चाहिए।
  4. प्रजनन कार्यक्रम: चिड़ियाघरों और प्रजनन केंद्रों में संकटग्रस्त प्रजातियों के प्रजनन पर विशेष ध्यान देना चाहिए ताकि उनकी संख्या बढ़ सके।
  5. जन-जागरूकता: लोगों को वन्य जीवों के महत्व के बारे में शिक्षित करने के लिए सेमिनार, कार्यशाला, फिल्म और पोस्टर आदि के माध्यम से अभियान चलाने चाहिए।
  6. स्थानीय समुदाय की भागीदारी: वनों के आस-पास रहने वाले लोगों को वन्य जीव संरक्षण से जोड़ना चाहिए और उन्हें इसका लाभ भी देना चाहिए, ताकि वे स्वयं संरक्षक बनें।
  7. अंतर्राष्ट्रीय सहयोग: विलुप्तप्राय प्रजातियों के संरक्षण के लिए CITES (साइट्स) जैसे अंतर्राष्ट्रीय समझौतों में सक्रिय भागीदारी करनी चाहिए।

वन एवं वन्य प्राणी संसाधन

1. वन किसे कहते हैं?

वन उस विस्तृत भू-भाग को कहते हैं जो प्राकृतिक रूप से उगे हुए पेड़ों, झाड़ियों, लताओं तथा अन्य वनस्पतियों से घना आच्छादित होता है। यह एक जटिल पारिस्थितिकी तंत्र है जहाँ विभिन्न प्रकार के पौधे और जीव-जन्तु एक-दूसरे पर निर्भर रहते हुए सहजीवन बनाए रखते हैं।

2. वनों के प्रमुख उत्पाद कौन-कौन से हैं?

वनों से प्राप्त होने वाले प्रमुख उत्पादों को दो श्रेणियों में बाँटा जा सकता है:

(क) मुख्य उत्पाद: इसमें लकड़ी (इमारती लकड़ी, ईंधन की लकड़ी), बाँस, प्लाईवुड, कागज का लुगदी (पल्प) और रबर जैसे उत्पाद शामिल हैं।

(ख) गौण उत्पाद: इसमें वनों से प्राप्त होने वाले ऐसे उत्पाद आते हैं जो पेड़ों को काटे बिना हासिल किए जाते हैं, जैसे - लाख, गोंद, तेंदूपत्ता, शहद, जड़ी-बूटियाँ, फल, बीज, रेशे और तेल आदि।

3. वनों के महत्व को स्पष्ट करें।

वनों का मानव जीवन और पर्यावरण के लिए अत्यधिक महत्व है:

  • पारिस्थितिक संतुलन: वन वायुमंडल में ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड का संतुलन बनाए रखते हैं, जलवायु को नियंत्रित करते हैं और वर्षा लाने में सहायक होते हैं।
  • मृदा संरक्षण: वन मिट्टी के कटाव को रोकते हैं, भूजल स्तर को बढ़ाते हैं और बाढ़ की तीव्रता को कम करते हैं।
  • आर्थिक महत्व: वन लाखों लोगों को रोजगार देते हैं और लकड़ी, कागज, दवाइयाँ, फल आदि जैसे अनेक आवश्यक उत्पाद प्रदान करते हैं।
  • वन्य जीवों का आवास: वन विभिन्न प्रकार के पशु-पक्षियों और जीव-जन्तुओं का प्राकृतिक घर हैं, जो जैव विविधता को बनाए रखते हैं।

4. वनों के ह्रास के क्या कारण हैं?

वनों के कम होने या नष्ट होने के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:

  • कृषि विस्तार: बढ़ती जनसंख्या के लिए खाद्यान्न उपजाने हेतु वनों की भूमि को कृषि योग्य भूमि में बदला जाना।
  • विकास परियोजनाएँ: बड़े बाँधों, सड़कों, खनन और औद्योगिक परिसरों के निर्माण के लिए वनों की कटाई।
  • अनियंत्रित लकड़ी कटाई: ईंधन, फर्नीचर और निर्माण कार्यों के लिए व्यावसायिक स्तर पर वृक्षों का अंधाधुंध काटा जाना।
  • जलावन की लकड़ी की माँग: ग्रामीण क्षेत्रों में ईंधन के रूप में लकड़ी की निरंतर बढ़ती आवश्यकता।
  • वनों में आग: प्राकृतिक या मानवजनित कारणों से लगने वाली आग से बड़े पैमाने पर वन नष्ट हो जाते हैं।

5. वन संरक्षण के उपाय बताइए।

वनों को बचाने और उनका संरक्षण करने के लिए निम्नलिखित उपाय किए जा सकते हैं:

  • सामाजिक वानिकी को बढ़ावा: सड़कों, नहरों और रेलवे लाइनों के किनारे तथा बंजर भूमि पर सामुदायिक सहभागिता से वृक्षारोपण करना।
  • जन-जागरूकता: वनों के महत्व के बारे में लोगों को शिक्षित करना और चिपको आंदोलन जैसे जन-आंदोलनों को प्रोत्साहित करना।
  • कानूनी सुरक्षा: वन संरक्षण अधिनियम (1980) जैसे कड़े कानूनों को लागू करके वन भूमि के गैर-वानिकी उपयोग पर रोक लगाना।
  • संरक्षित क्षेत्रों का निर्माण: राष्ट्रीय उद्यान, वन्यजीव अभयारण्य और बायोस्फीयर रिजर्व स्थापित करके वनों और वन्य जीवों की सुरक्षा करना।
  • वैकल्पिक ईंधन का उपयोग: ग्रामीण क्षेत्रों में गोबर गैस (बायोगैस) और सौर ऊर्जा जैसे वैकल्पिक ईंधन के उपयोग को बढ़ावा देना ताकि लकड़ी पर निर्भरता कम हो।

6. वन्य प्राणियों के संरक्षण के लिए क्या कदम उठाए गए हैं?

भारत में वन्य प्राणियों के संरक्षण के लिए अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं:

  • संरक्षित क्षेत्रों का नेटवर्क: देश भर में राष्ट्रीय उद्यान, वन्यजीव अभयारण्य और बायोस्फीयर रिजर्व स्थापित किए गए हैं जहाँ जीवों और उनके प्राकृतिक आवास की सुरक्षा की जाती है।
  • वन्यजीव संरक्षण अधिनियम (1972): इस कानून के तहत शिकार पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है और लुप्तप्राय प्रजातियों के व्यापार पर नियंत्रण किया गया है।
  • प्रोजेक्ट टाइगर (1973): बाघों की घटती संख्या को देखते हुए इस विशेष परियोजना की शुरुआत की गई, जिसने बाघों के संरक्षण में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की है।
  • प्रोजेक्ट एलीफेंट (1992): हाथियों और उनके गलियारों के संरक्षण के लिए यह परियोजना शुरू की गई।
  • प्रजनन कार्यक्रम: चिड़ियाघरों और प्रजनन केंद्रों में लुप्तप्राय प्रजातियों के प्रजनन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
  • अंतर्राष्ट्रीय सहयोग: सी.आई.टी.ई.एस. (CITES) जैसे अंतर्राष्ट्रीय समझौतों में शामिल होकर वन्यजीवों के अवैध अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को रोकने का प्रयास किया जा रहा है।

All Bihar Board Class 10th Social Science (खण्ड-क) Chapter 1C वन एवं वन्य प्राणी संसाधन) Solutions on this page can be viewed free of cost. Follow the best practices given after the solutions to achieve higher marks.

How to achieve higher marks in Bihar Board Class 10th Social Science (खण्ड-क):

How to download Bihar Board Class 10th Social Science (खण्ड-क) Chapter 1C वन एवं वन्य प्राणी संसाधन) Solutions

  1. Visit https://biharboardbook.com
  2. Home page of Bihar Board Book will be loaded. Here select Solutions from the navigation bar at top.
  3. List of classes for which solution is available for Bihar Board students will be loaded. Now select the class which is relevant for you – in this case we will select Class 10th from this list.
  4. List of subjects for which solution is available for Bihar Board Class 10th students will display here. Now select the subject for which you want to download the solution – here we will select Social Science (खण्ड-क) (you can choose any subject which is relevant for you).
  5. List of chapters will start displaying here for Social Science (खण्ड-क) for Class 10th students of Bihar Board. Now select the chapter for which you want the solution. We will select Chapter 1C वन एवं वन्य प्राणी संसाधन) in this case; you can opt based on your requirements.
  6. Solution for Class 10th Social Science (खण्ड-क) of Bihar Board for Chapter 1C वन एवं वन्य प्राणी संसाधन) will load here. If you are on desktop, right-click and save the image (all solutions here are given as images). If you are on mobile, long-press the image to save it. This will download the solution.

Other Chapters of Social Science (खण्ड-क)

Browse other chapters of Bihar Board Class 10th Social Science (खण्ड-क) Solutions. Click on any chapter below to view its content.