Bihar Board Class 10th Social Science (खण्ड-क) Chapter 3 निर्माण उद्योग) Solutions

Here we have provided Solution for Chapter 3 निर्माण उद्योग) of Social Science (खण्ड-क) subject for Class 10th students of Bihar Board of Secondary Education. There are various chapters in this Social Science (खण्ड-क) such as Chapter 1 भारत: संसाधन एवं उपयोग), Chapter 1A प्राकृतिक संसाधन), Chapter 1B जल संसाधन), Chapter 1C वन एवं वन्य प्राणी संसाधन), Chapter 1D खनिज संसाधन), Chapter 1E शक्ति (ऊर्जा) संसाधन), Chapter 2 कृषि), Chapter 3 निर्माण उद्योग), Chapter 4 परिवहन, संचार एवं व्यापार), Chapter 5 बिहार: कृषि एवं वन संसाधन), Chapter 5A बिहार: खनिज एवं ऊर्जा संसाधन), Chapter 5B बिहार: उद्योग एवं परिवहन), Chapter 5C बिहार: जनसंख्या एवं नगरीकरण) and Chapter 6 मानचित्र अध्ययन (उच्चावच निरूपण)). Summary of the same is given below:

Board NameBihar Board of Secondary Education
ClassClass 10th
Content TypeSolution
Solution forClass 10th students
SubjectSocial Science (खण्ड-क)
Chapter NameChapter 3 निर्माण उद्योग)
Total Number of Chapter in this Subject14

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Bihar Board Class 10th Social Science (खण्ड-क) Chapter 3 निर्माण उद्योग) Solutions

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निर्माण उद्योग

1. निम्नलिखित में से कौन-सा उद्योग चूना पत्थर को कच्चे माल के रूप में प्रयुक्त करता है ?
A. एल्युमिनियम
B. प्लास्टिक
C. सीमेंट
D. मोटरगाड़ी

उत्तर: C. सीमेंट
सीमेंट उद्योग का मुख्य कच्चा माल चूना पत्थर है। चूना पत्थर को क्लिंकर बनाने के लिए उच्च तापमान पर भट्ठे में पकाया जाता है, जिसे बाद में पीसकर सीमेंट बनाया जाता है। यह निर्माण कार्यों के लिए एक आवश्यक बंधक पदार्थ है।

2. कौन-सा उद्योग स्वच्छ वायु पर आधारित है ?
A. सूती वस्त्र उद्योग
B. लौह-इस्पात उद्योग
C. सीमेंट उद्योग
D. पवन ऊर्जा उद्योग

उत्तर: D. पवन ऊर्जा उद्योग
पवन ऊर्जा उद्योग पूरी तरह से स्वच्छ वायु (हवा) पर निर्भर करता है। यह उद्योग पवन चक्कियों (विंड टर्बाइन) के माध्यम से हवा की गतिज ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदलता है। यह एक नवीकरणीय और प्रदूषण रहित ऊर्जा स्रोत है।

3. कौन-सा उद्योग बॉक्साइट को कच्चे माल के रूप में प्रयुक्त करता है ?
A. सीमेंट उद्योग
B. एल्युमिनियम उद्योग
C. प्लास्टिक उद्योग
D. लौह-इस्पात उद्योग

उत्तर: B. एल्युमिनियम उद्योग
एल्युमिनियम उद्योग का प्रमुख कच्चा माल बॉक्साइट अयस्क है। बॉक्साइट से एल्युमिना निकाला जाता है, जिसे फिर विद्युत अपघटन की प्रक्रिया से शुद्ध एल्युमिनियम धातु में परिवर्तित किया जाता है।

4. निम्नलिखित में से कौन-सा उद्योग सार्वजनिक क्षेत्र में है ?
A. टिस्को
B. बजाज ऑटो
C. सेल
D. रिलायंस

उत्तर: C. सेल
सेल (SAIL - Steel Authority of India Limited) भारत सरकार के स्वामित्व वाली एक प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी है, जो लौह एवं इस्पात का उत्पादन करती है। टिस्को, बजाज ऑटो और रिलायंस निजी क्षेत्र के उद्यम हैं।

5. निम्नलिखित में से कौन-सा उद्योग आधारभूत उद्योग है ?
A. सूती वस्त्र उद्योग
B. चीनी उद्योग
C. लौह-इस्पात उद्योग
D. ऑटोमोबाइल उद्योग

उत्तर: C. लौह-इस्पात उद्योग
लौह-इस्पात उद्योग को आधारभूत उद्योग माना जाता है क्योंकि इसके उत्पाद (लोहा और इस्पात) अनगिनत अन्य उद्योगों जैसे मशीन निर्माण, ऑटोमोबाइल, निर्माण, रक्षा आदि के लिए मूल आधार प्रदान करते हैं। यह किसी देश के औद्योगिक विकास की रीढ़ होता है।

6. निम्नलिखित में से कौन-सा उद्योग आयात-प्रतिस्थापन से सम्बन्धित है ?
A. सूती वस्त्र उद्योग
B. लौह-इस्पात उद्योग
C. इलेक्ट्रॉनिक उद्योग
D. चीनी उद्योग

उत्तर: C. इलेक्ट्रॉनिक उद्योग
इलेक्ट्रॉनिक उद्योग आयात-प्रतिस्थापन से गहराई से जुड़ा है। इसका लक्ष्य वे इलेक्ट्रॉनिक सामान (जैसे मोबाइल, कंप्यूटर, उपकरण), जिन्हें हम विदेश से आयात करते हैं, को देश के भीतर ही उत्पादित करना है ताकि विदेशी मुद्रा की बचत हो और देश आत्मनिर्भर बने।

7. निम्नलिखित में से कौन-सा उद्योग कृषि पर आधारित है ?
A. पेट्रो-रसायन उद्योग
B. सूती वस्त्र उद्योग
C. लौह-इस्पात उद्योग
D. इलेक्ट्रॉनिक उद्योग

उत्तर: B. सूती वस्त्र उद्योग
सूती वस्त्र उद्योग प्रत्यक्ष रूप से कृषि पर आधारित है क्योंकि इसका मुख्य कच्चा माल कपास है, जो एक कृषि उत्पाद है। इस प्रकार के उद्योग कच्चे माल के लिए कृषि क्षेत्र पर निर्भर करते हैं।

8. निम्नलिखित में से कौन-सा उद्योग जनसामान्य के लिए वस्तुओं का उत्पादन करता है ?
A. लौह-इस्पात उद्योग
B. पेट्रो-रसायन उद्योग
C. चीनी उद्योग
D. मशीन टूल्स उद्योग

उत्तर: C. चीनी उद्योग
चीनी उद्योग एक उपभोक्ता उद्योग है जो सीधे जनसामान्य के लिए उपभोग की वस्तु (चीनी) का उत्पादन करता है। लौह-इस्पात, पेट्रो-रसायन और मशीन टूल्स उद्योग भारी उद्योग या पूंजीगत वस्तुएं बनाते हैं, जो सीधे उपभोक्ता के पास नहीं जातीं।

9. निम्नलिखित में से कौन-सा उद्योग सहकारी क्षेत्र से सम्बन्धित है ?
A. मारुति उद्योग
B. टिस्को
C. अमूल
D. बजाज ऑटो

उत्तर: C. अमूल
अमूल (आनंद मिल्क यूनियन लिमिटेड) भारत में सहकारी क्षेत्र का एक प्रसिद्ध और सफल उदाहरण है। यह दुग्ध उत्पादक किसानों के सहकारी संगठन के स्वामित्व में है और दूध व दुग्ध उत्पाद बनाता है।

10. निम्नलिखित में से कौन-सा उद्योग निजी क्षेत्र से सम्बन्धित है ?
A. सेल
B. भेल
C. टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी
D. भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड

उत्तर: C. टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी
टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी (TISCO), जिसे अब टाटा स्टील के नाम से जाना जाता है, भारत की एक प्रमुख निजी क्षेत्र की कंपनी है। सेल, भेल और भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम हैं।

11. निर्माण उद्योग से आप क्या समझते हैं ?

उत्तर: निर्माण उद्योग वह औद्योगिक क्रिया है जिसमें प्राकृतिक संसाधनों या अर्ध-निर्मित सामग्रियों को विभिन्न प्रक्रियाओं से गुजारकर नए, उपयोगी उत्पादों में बदला जाता है। सरल शब्दों में, कच्चे माल को मूल्यवान वस्तुओं में परिवर्तित करना ही निर्माण उद्योग है। उदाहरण के लिए, लौह अयस्क से इस्पात बनाना, कपास से कपड़ा बनाना, गन्ने से चीनी बनाना आदि। यह उद्योग किसी देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ होते हैं, रोजगार पैदा करते हैं और राष्ट्रीय आय बढ़ाते हैं।

12. आधारभूत उद्योग क्या है ?

उत्तर: आधारभूत उद्योग वे उद्योग हैं जिनके उत्पाद अन्य अनेक उद्योगों के विकास के लिए आधार (Foundation) का काम करते हैं। इन उद्योगों के बिना अन्य उद्योगों का चल पाना मुश्किल होता है। इनके उत्पाद मुख्य रूप से पूंजीगत वस्तुएं होती हैं।
मुख्य उदाहरण: लौह-इस्पात उद्योग, मशीन टूल्स उद्योग, पेट्रो-रसायन उद्योग, ऊर्जा उत्पादन उद्योग आदि। उदाहरण के लिए, लौह-इस्पात उद्योग से प्राप्त इस्पात का उपयोग ऑटोमोबाइल, रेल, जहाज, मशीनें, भवन निर्माण आदि में होता है।

13. सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योग क्या हैं ?

उत्तर: सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योग वे औद्योगिक इकाइयाँ हैं जिनका स्वामित्व और प्रबंधन पूरी तरह या अधिकांश हिस्से में सरकार के पास होता है। इनकी स्थापना सामाजिक कल्याण, राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक महत्व के उद्देश्य से की जाती है, न कि केवल मुनाफा कमाने के लिए।
मुख्य विशेषताएं:

  • सरकारी स्वामित्व एवं नियंत्रण।
  • लाभ से अधिक जनहित पर बल।
  • भारी निवेश वाले उद्योग जैसे रेल, रक्षा, इस्पात, भारी मशीनरी आदि।
उदाहरण: सेल (Steel Authority of India Limited), भेल (Bharat Heavy Electricals Limited), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) आदि।

14. निजी क्षेत्र के उद्योग क्या हैं ?

उत्तर: निजी क्षेत्र के उद्योग वे औद्योगिक इकाइयाँ हैं जिनका स्वामित्व, प्रबंधन और नियंत्रण एक या अधिक व्यक्तियों, परिवारों या निजी कंपनियों के हाथ में होता है। इनका मुख्य उद्देश्य लाभ कमाना होता है।
मुख्य विशेषताएं:

  • निजी स्वामित्व एवं पूंजी।
  • लाभ कमाना प्रमुख लक्ष्य।
  • बाजार की मांग के अनुसार उत्पादन।
  • प्रतिस्पर्धा अधिक होती है।
उदाहरण: टाटा स्टील, रिलायंस इंडस्ट्रीज, बजाज ऑटो, विप्रो आदि।

15. संयुक्त क्षेत्र के उद्योग क्या हैं ?

उत्तर: संयुक्त क्षेत्र के उद्योग वे औद्योगिक इकाइयाँ हैं जिनकी स्थापना और संचालन सार्वजनिक क्षेत्र (सरकार) और निजी क्षेत्र (निजी उद्यमी) के संयुक्त सहयोग से होता है। इसमें पूंजी और प्रबंधन का दायित्व दोनों पक्ष मिलकर वहन करते हैं।
मुख्य विशेषताएं:

  • सरकार और निजी कंपनी का संयुक्त स्वामित्व।
  • जोखिम और लाभ दोनों में भागीदारी।
  • बड़ी परियोजनाओं में पूंजी और विशेषज्ञता जुटाने का अच्छा तरीका।
उदाहरण: गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (GAIL), मारुति उद्योग लिमिटेड (शुरुआत में भारत सरकार और सुजुकी का संयुक्त उद्यम) आदि।

16. सहकारी क्षेत्र के उद्योग क्या हैं ?

उत्तर: सहकारी क्षेत्र के उद्योग वे औद्योगिक इकाइयाँ हैं जिनका स्वामित्व, प्रबंधन और लाभ उन उत्पादकों के हाथ में होता है जो स्वेच्छा से एक सहकारी समिति बनाते हैं। इनका उद्देश्य सदस्यों के हितों की रक्षा करना, बिचौलियों को हटाना और उचित मूल्य सुनिश्चित करना है।
मुख्य विशेषताएं:

  • स्वैच्छिक सदस्यता और लोकतांत्रिक नियंत्रण (एक सदस्य, एक वोट)।
  • सदस्य ही उत्पादक, मालिक और लाभार्थी होते हैं।
  • सामाजिक एवं आर्थिक उद्देश्य प्रमुख होते हैं।
उदाहरण: दुग्ध उत्पादन में अमूल (गुजरात), शर्करा उत्पादन में महाराष्ट्र की कई चीनी मिलें, केरल के 'अपेक्स' जैसे हस्तशिल्प सहकारी समितियाँ।

17. लघु उद्योग क्या है ?

उत्तर: लघु उद्योग वे छोटे पैमाने के औद्योगिक इकाइयाँ हैं जहाँ उत्पादन मुख्यतः मानव श्रम के द्वारा और सीमित मशीनों की सहायता से किया जाता है। इनमें पूँजी निवेश, श्रमिकों की संख्या और उत्पादन क्षमता सीमित होती है।
परिभाषा (सामान्य): वे उद्योग जिनमें प्लांट और मशीनरी पर निवेश एक निश्चित सीमा (जैसे 1 करोड़ रुपये) से कम हो और जो स्थानीय कच्चे माल का उपयोग करते हों।
महत्व:

  • अधिक रोजगार सृजन।
  • स्थानीय संसाधनों का उपयोग।
  • क्षेत्रीय विकास में समानता लाना।
  • कम पूंजी में शुरुआत।
उदाहरण: साबुन बनाना, मोमबत्ती निर्माण, खाद्य प्रसंस्करण, हस्तशिल्प, सिलाई कढ़ाई आदि।

18. गृह उद्योग क्या है ?

उत्तर: गृह उद्योग, जिसे कुटीर उद्योग भी कहते हैं, वह उत्पादन प्रणाली है जहाँ उत्पादन कार्य श्रमिकों के अपने घर पर पारिवारिक सदस्यों की सहायता से किया जाता है। इसमें बहुत कम पूंजी और साधारण औजारों का प्रयोग होता है।
मुख्य विशेषताएं:

  • उत्पादन घर पर होता है, कारखाने में नहीं।
  • पारिवारिक श्रम का उपयोग।
  • कम पूंजी निवेश और साधारण तकनीक।
  • उत्पाद अक्सर स्थानीय बाजार के लिए होते हैं।
  • पारंपरिक कौशल एवं शिल्प पर आधारित।
उदाहरण: हथकरघा बुनाई, मिट्टी के बर्तन बनाना, बाँस की टोकरी बनाना, हस्तनिर्मित कागज, खादी कपड़ा बुनाई आदि। ये उद्योग सांस्कृतिक विरासत को बचाए रखने में भी मदद करते हैं।

1. निर्माण उद्योग किसे कहते हैं ?

निर्माण उद्योग वह आर्थिक गतिविधि है जिसमें कच्चे माल या अर्द्ध-निर्मित सामग्री को मशीनों, श्रम और तकनीक की सहायता से नए, उपयोगी उत्पादों में बदला जाता है। ये उद्योग विनिर्माण प्रक्रिया के माध्यम से वस्तुओं का सृजन करते हैं और राष्ट्र की औद्योगिक आधारशिला का निर्माण करते हैं। उदाहरण के लिए, लोहा-इस्पात उद्योग, सीमेंट उद्योग, वस्त्र उद्योग, चीनी उद्योग आदि सभी निर्माण उद्योग के अंतर्गत आते हैं।

2. उद्योगों की अवस्थिति को प्रभावित करने वाले कारकों का उल्लेख करें।

किसी उद्योग की स्थापना कहाँ होगी, यह निम्नलिखित कारकों पर निर्भर करता है:
  • कच्चे माल की उपलब्धता: उद्योग स्थापित करने के लिए कच्चे माल का स्रोत निकट होना आवश्यक है ताकि परिवहन लागत कम रहे।
  • शक्ति के साधन: कोयला, पेट्रोलियम, बिजली जैसे ऊर्जा स्रोतों की निकटता उद्योग के लिए महत्वपूर्ण है।
  • परिवहन की सुविधा: कच्चे माल और तैयार माल के आवागमन के लिए सड़क, रेल, जलमार्ग आदि का विकसित नेटवर्क आवश्यक है।
  • श्रम की उपलब्धता: उद्योग के लिए कुशल एवं अकुशल दोनों प्रकार के श्रमिकों की पर्याप्त आपूर्ति होनी चाहिए।
  • बाजार की निकटता: तैयार उत्पादों को बेचने के लिए बड़े बाजार या उपभोक्ता केंद्रों के समीप उद्योग लगाना लाभप्रद होता है।
  • पूँजी की उपलब्धता: उद्योग स्थापित करने, मशीनें खरीदने और दैनिक कार्य चलाने के लिए पर्याप्त पूँजी की आवश्यकता होती है।
  • सरकारी नीतियाँ: सरकार द्वारा दी जाने वाली सब्सिडी, कर में छूट, औद्योगिक क्षेत्रों का विकास आदि भी अवस्थिति को प्रभावित करते हैं।

3. सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योग क्या हैं ?

सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योग वे उद्योग हैं जिनका स्वामित्व, प्रबंधन और नियंत्रण पूर्ण रूप से या अधिकांश हिस्से में सरकार के पास होता है। इन उद्योगों की स्थापना राष्ट्रीय महत्व के उद्देश्यों, जैसे रोजगार सृजन, आधारभूत वस्तुओं का उत्पादन और क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देने के लिए की जाती है। भारत में सार्वजनिक क्षेत्र के प्रमुख उद्योगों में स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL), भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL) और ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन (ONGC) शामिल हैं।

4. निजी क्षेत्र के उद्योग क्या हैं ?

निजी क्षेत्र के उद्योग वे उद्योग हैं जिनका स्वामित्व, प्रबंधन और नियंत्रण किसी एक व्यक्ति, परिवार या निजी कंपनी के हाथों में होता है। इन उद्योगों का मुख्य उद्देश्य लाभ कमाना होता है। इनमें निवेश, उत्पादन और विपणन संबंधी सभी निर्णय निजी स्वामियों द्वारा लिए जाते हैं। भारत में निजी क्षेत्र के उदाहरणों में टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी (TISCO), रिलायंस इंडस्ट्रीज और बजाज ऑटो जैसी कंपनियाँ शामिल हैं।

5. संयुक्त क्षेत्र के उद्योग क्या हैं ?

संयुक्त क्षेत्र के उद्योग वे उद्योग हैं जिनकी स्थापना और संचालन सार्वजनिक क्षेत्र (सरकार) और निजी क्षेत्र (निजी उद्यमी या कंपनियाँ) के संयुक्त सहयोग से होता है। इनमें पूँजी, प्रबंधन और जोखिम दोनों पक्षों द्वारा साझा किए जाते हैं। इस प्रकार के उद्योग सार्वजनिक और निजी क्षेत्र दोनों के संसाधनों और विशेषज्ञता का लाभ उठाते हैं। भारत में गुजरात स्टेट फर्टिलाइजर्स एंड केमिकल्स लिमिटेड और ऑयल इंडिया लिमिटेड संयुक्त क्षेत्र के उद्योगों के प्रमुख उदाहरण हैं।

6. सहकारी क्षेत्र के उद्योग क्या हैं ?

सहकारी क्षेत्र के उद्योग वे उद्योग हैं जिनका स्वामित्व, प्रबंधन और नियंत्रण उत्पादकों, आपूर्तिकर्ताओं या कर्मचारियों के एक समूह द्वारा सहकारी समिति के रूप में किया जाता है। इन उद्योगों का उद्देश्य सदस्यों के हितों की रक्षा करना, उन्हें उचित मूल्य दिलाना और लाभ का समान वितरण करना होता है। यह मॉडल छोटे उत्पादकों को बड़े बाजार और बेहतर सौदेबाजी की शक्ति प्रदान करता है। भारत में दुग्ध उत्पादन (अमूल), चीनी उत्पादन (महाराष्ट्र के कई चीनी मिलें) और हथकरघा उद्योगों में सहकारी क्षेत्र के सफल उदाहरण देखे जा सकते हैं।

7. कृषि आधारित उद्योग क्या हैं ?

कृषि आधारित उद्योग वे निर्माण उद्योग हैं जो कृषि उत्पादों को कच्चे माल के रूप में प्रयोग करते हैं और उन्हें विभिन्न प्रकार के उपभोक्ता उत्पादों में परिवर्तित करते हैं। चूंकि इन उद्योगों का सीधा संबंध कृषि से होता है, इसलिए इन्हें कृषि-आधारित या कृषि-सम्बद्ध उद्योग भी कहा जाता है। ये उद्योग किसानों को उनकी उपज के लिए बाजार उपलब्ध कराकर कृषि आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। प्रमुख उदाहरणों में चीनी उद्योग, तेल उद्योग, कपड़ा (सूती वस्त्र) उद्योग, रबर उद्योग और फल व सब्जी प्रसंस्करण उद्योग शामिल हैं।

8. खनिज आधारित उद्योग क्या हैं ?

खनिज आधारित उद्योग वे उद्योग हैं जो खनिजों को अपने मुख्य कच्चे माल के रूप में उपयोग करते हैं। ये उद्योग खनन से प्राप्त धात्विक और अधात्विक खनिजों को विभिन्न मूल्यवान उत्पादों में ढालते हैं। ये उद्योग भारी उद्योगों की श्रेणी में आते हैं और देश के औद्योगिक व आर्थिक विकास की रीढ़ माने जाते हैं। प्रमुख उदाहरणों में लोहा-इस्पात उद्योग (लौह अयस्क और कोकिंग कोयले पर आधारित), एल्युमिनियम उद्योग (बॉक्साइट से), सीमेंट उद्योग (चूना पत्थर, जिप्सम आदि से) और उर्वरक उद्योग (फॉस्फेट, पोटाश आदि से) शामिल हैं।

9. लघु उद्योग क्या हैं ?

लघु उद्योग वे छोटे पैमाने के औद्योगिक इकाइयाँ हैं जिनमें पूँजी निवेश, मशीनों की संख्या और कर्मचारियों की संख्या सीमित होती है। भारत सरकार द्वारा निर्धारित परिभाषा के अनुसार, विनिर्माण इकाइयाँ जिनमें प्लांट और मशीनरी में निवेश एक निश्चित सीमा (जो समय-समय पर बदलती रहती है, वर्तमान में आमतौर पर कुछ करोड़ रुपये) से अधिक न हो, लघु उद्योग कहलाती हैं। इन उद्योगों का महत्व रोजगार सृजन, कम पूँजी आवश्यकता, क्षेत्रीय विकास और उद्यमशीलता को बढ़ावा देने में है। उदाहरण: साबुन बनाना, मोमबत्ती निर्माण, कागज के बैग बनाना, छोटे इलेक्ट्रिकल उपकरणों का निर्माण आदि।

10. बड़े पैमाने के उद्योग क्या हैं ?

बड़े पैमाने के उद्योग वे औद्योगिक इकाइयाँ हैं जिनमें बहुत अधिक मात्रा में पूँजी निवेश किया जाता है, उन्नत तकनीक और बड़ी मशीनों का उपयोग होता है तथा बड़ी संख्या में श्रमिक कार्यरत होते हैं। ये उद्योग बड़े पैमाने पर उत्पादन करते हैं और अक्सर राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय बाजारों के लिए उत्पाद तैयार करते हैं। इनका आर्थिक योगदान बहुत महत्वपूर्ण होता है। प्रमुख उदाहरणों में ऑटोमोबाइल उद्योग (जैसे मारुति सुजुकी), इस्पात संयंत्र (जैसे बोकारो स्टील प्लांट), पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स और विद्युत उपकरण निर्माण (जैसे BHEL) शामिल हैं।

11. भारत के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों के नाम लिखें।

भारत के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र
  • हुगली औद्योगिक क्षेत्र: पश्चिम बंगाल में हुगली नदी के किनारे स्थित, जूट, कपास, कागज, इंजीनियरिंग उद्योगों के लिए प्रसिद्ध।
  • मुंबई-पुणे औद्योगिक क्षेत्र: महाराष्ट्र में, कपास वस्त्र, ऑटोमोबाइल, रसायन, फिल्म और आईटी उद्योगों का केंद्र।
  • अहमदाबाद-वडोदरा औद्योगिक क्षेत्र: गुजरात में, सूती वस्त्र, पेट्रोकेमिकल्स, डायमंड पॉलिशिंग और दवा उद्योग प्रमुख।
  • चेन्नई-बेंगलुरु औद्योगिक क्षेत्र: दक्षिण भारत में, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, सूचना प्रौद्योगिकी, विमान निर्माण और वस्त्र उद्योग केंद्रित।
  • दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ औद्योगिक क्षेत्र: उत्तर भारत में, इलेक्ट्रॉनिक्स, कपड़ा, चीनी, साइकिल और हल्के इंजीनियरिंग उद्योग प्रमुख।
  • विशाखापत्तनम-गुंटूर औद्योगिक क्षेत्र: आंध्र प्रदेश में, लौह-इस्पात, पेट्रोलियम परिष्करण, चीनी और सीमेंट उद्योग।
  • गुवाहाटी-नूनमती औद्योगिक क्षेत्र: असम में, पेट्रोलियम परिष्करण, चाय प्रसंस्करण और प्लाईवुड उद्योग।

12. भारत में लोहा-इस्पात उद्योग के वितरण का वर्णन करें।

भारत में लोहा-इस्पात उद्योग का वितरण मुख्य रूप से कच्चे माल (लौह अयस्क, कोकिंग कोयला, चूना पत्थर) की उपलब्धता और परिवहन सुविधाओं पर निर्भर करता है। यह उद्योग मुख्यतः चार क्षेत्रों में केंद्रित है:
  1. झारखंड-पश्चिम बंगाल क्षेत्र: यह सबसे पुराना और प्रमुख क्षेत्र है। कोयला खदानों (झरिया, रानीगंज) और लौह अयस्क (सिंहभूम) की निकटता के कारण यहाँ बड़े संयंत्र स्थापित हैं। जमशेदपुर (टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी - TISCO), बर्नपुर, दुर्गापुर और हीरापुर प्रमुख केंद्र हैं।
  2. ओडिशा-छत्तीसगढ़ क्षेत्र: लौह अयस्क (बैलाडिला, कीँजदार) और कोयले (कोरबा) के समृद्ध भंडार वाला यह क्षेत्र तेजी से विकसित हुआ है। भिलाई (भिलाई स्टील प्लांट), राउरकेला (राउरकेला स्टील प्लांट) और बोकारो (बोकारो स्टील प्लांट) यहाँ के प्रमुख केंद्र हैं।
  3. दक्षिण भारत का क्षेत्र: कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में लौह अयस्क के भंडार हैं। विशाखापत्तनम (विजाग स्टील), बद्रावती (मैसूर आयरन एंड स्टील वर्क्स) और सलेम प्रमुख केंद्र हैं।
  4. पश्चिमी भारत का क्षेत्र: गुजरात और महाराष्ट्र में बंदरगाहों के माध्यम से आयातित कच्चे माल पर आधारित संयंत्र हैं। दोलवी (एस्सार स्टील) और जमनगर प्रमुख केंद्र हैं।
नोट: भारत विश्व के प्रमुख कच्चे इस्पात उत्पादक देशों में से एक है। सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियाँ जैसे SAIL और RINL तथा निजी क्षेत्र की कंपनियाँ जैसे TATA Steel और JSW Steel इस उद्योग की रीढ़ हैं।

13. भारत में सूती वस्त्र उद्योग के विकास का वर्णन करें।

भारत में सूती वस्त्र उद्योग आधुनिक औद्योगिकरण की शुरुआत का प्रतीक है। इसके विकास को निम्नलिखित बिंदुओं में समझा जा सकता है:
  • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: भारत में सूती कपड़ा बुनने की परंपरा प्राचीन काल से रही है। हालाँकि, आधुनिक सूती वस्त्र उद्योग की शुरुआत 1854 में मुंबई में पहली सूती कपड़ा मिल 'बॉम्बे स्पिनिंग एंड विविंग कंपनी' की स्थापना के साथ हुई।
  • प्रारंभिक विकास: मुंबई के आसपास कपास उत्पादक क्षेत्र होने, आर्द्र जलवायु (धागा टूटने से बचाती है) और बंदरगाह सुविधा के कारण यह उद्योग यहाँ तेजी से फैला। अहमदाबाद भी एक प्रमुख केंद्र बना।
  • वर्तमान वितरण: आज यह उद्योग मुख्य रूप से महाराष्ट्र (मुंबई, पुणे), गुजरात (अहमदाबाद, सूरत), तमिलनाडु (कोयंबटूर, मदुरै), उत्तर प्रदेश (कानपुर) और पश्चिम बंगाल (कोलकाता) में केंद्रित है।
  • आर्थिक महत्व: यह उद्योग देश में सबसे अधिक रोजगार देने वाले उद्योगों में से एक है। यह कपास उत्पादक किसानों, मिल श्रमिकों, निर्यातकों और संबद्ध उद्योगों (रंगाई, छपाई, पैकेजिंग) के लिए आजीविका का स्रोत है।
  • चुनौतियाँ एवं भविष्य: पुरानी तकनीक, विद्युत आपूर्ति की कमी, वैश्विक प्रतिस्पर्धा और कभी-कभी कपास की कमी इस उद्योग के सामने प्रमुख चुनौतियाँ हैं। आधुनिकीकरण और उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों पर ध्यान देकर इस उद्योग को और विकसित किया जा रहा है।

14. भारत में चीनी उद्योग के विकास का वर्णन करें।

भारत विश्व का सबसे बड़ा चीनी उत्पादक और दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता देश है। चीनी उद्योग का विकास निम्न प्रकार है:
  • कच्चा माल: यह उद्योग पूरी तरह से गन्ने पर निर्भर है, इसलिए इसका वितरण गन्ना उत्पादक क्षेत्रों के निकट है।
  • प्रमुख राज्य: उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, गुजरात और बिहार चीनी उत्पादन के प्रमुख राज्य हैं। महाराष्ट्र सबसे बड़ा चीनी उत्पादक राज्य है।
  • विकास का स्वरूप: प्रारंभ में चीनी मिलें उत्तरी भारत (UP, बिहार) में केंद्रित थीं। बाद में, दक्षिण और पश्चिमी भारत (महाराष्ट्र, कर्नाटक) में उच्च गन्ना उपज, बेहतर पेराई दक्षता और सहकारी मॉडल के कारण यह उद्योग तेजी से विकसित हुआ।
  • सहकारी मॉडल: महाराष्ट्र और गुजरात में सहकारी समितियों द्वारा संचालित चीनी मिलों ने किसानों को सीधा लाभ पहुँचाया और उद्योग के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • समस्याएँ: इस उद्योग को मौसम पर निर्भरता, गन्ने की कम उत्पादकता, छोटा पेराई सत्र, पुरानी तकनीक और चीनी मिलों पर किसानों का बकाया जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
  • आगे का रास्ता: इथेनॉल उत्पादन जैसे बाय-प्रोडक्ट के उपयोग, गन्ना उत्पादकता बढ़ाने और प्रसंस्करण इकाइयों का आधुनिकीकरण करके इस उद्योग की क्षमता बढ़ाई जा सकती है।

15. बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ)

(क) निर्माण उद्योग क्या है?
A. कच्चे माल को तैयार माल में बदलने की प्रक्रिया
B. खनिजों का खनन
C. कृषि उत्पादन
D. सेवा क्षेत्र की गतिविधियाँ
उत्तर: A. कच्चे माल को तैयार माल में बदलने की प्रक्रिया
(ख) भारत का पहला लौह-इस्पात संयंत्र कहाँ स्थापित किया गया था?
A. जमशेदपुर
B. दुर्गापुर
C. कुल्टी
D. बर्नपुर
उत्तर: C. कुल्टी (पश्चिम बंगाल में 1870 में स्थापित)
(ग) सूती वस्त्र उद्योग के लिए कौन-सा कारक महत्वपूर्ण है?
A. कोयला
B. कपास
C. लौह अयस्क
D. जल विद्युत
उत्तर: B. कपास
(घ) भारत में सबसे बड़ा चीनी उत्पादक राज्य कौन-सा है?
A. उत्तर प्रदेश
B. महाराष्ट्र
C. कर्नाटक
D. तमिलनाडु
उत्तर: B. महाराष्ट्र
(ङ) टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी (TISCO) किस प्रकार का उद्योग है?
A. सार्वजनिक क्षेत्र
B. निजी क्षेत्र
C. संयुक्त क्षेत्र
D. सहकारी क्षेत्र
उत्तर: B. निजी क्षेत्र

अध्याय 3: निर्माण उद्योग

1. निर्माण उद्योग क्या है?

निर्माण उद्योग वह आर्थिक गतिविधि है जिसमें कच्चे माल को विभिन्न प्रक्रियाओं से गुजारकर नए एवं उपयोगी उत्पाद बनाए जाते हैं। यह उद्योग प्राथमिक क्षेत्र (जैसे कृषि, खनन) से प्राप्त कच्चे माल का मूल्यवर्धन करता है। उदाहरण के लिए, लौह अयस्क से इस्पात बनाना, कपास से कपड़ा बनाना, या लकड़ी से फर्नीचर बनाना निर्माण उद्योग के अंतर्गत आते हैं। यह क्षेत्र रोजगार सृजन, राष्ट्रीय आय में वृद्धि और आधुनिकीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

2. निर्माण उद्योग के कोई दो महत्व बताइए।

निर्माण उद्योग के दो प्रमुख महत्व निम्नलिखित हैं:
  1. आर्थिक विकास का आधार: यह उद्योग देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में एक बड़ा योगदान देता है। औद्योगिक उत्पादन में वृद्धि से देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होती है और व्यापार संतुलन में सुधार होता है।
  2. रोजगार के अवसरों का सृजन: यह उद्योग प्रत्यक्ष रूप से लाखों लोगों को कारखानों में रोजगार देता है। साथ ही, अप्रत्यक्ष रूप से यह परिवहन, विपणन, बिक्री और सेवा क्षेत्र में भी अनेक रोजगार पैदा करता है।
ध्यान दें: इसके अलावा निर्माण उद्योग तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देता है, कृषि के विकास में सहायक होता है और देश की रक्षा क्षमता को भी मजबूत करता है।

3. सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योग क्या हैं? उदाहरण दीजिए।

सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योग वे उद्योग हैं जिनका स्वामित्व, प्रबंधन और नियंत्रण सरकार या सरकारी एजेंसियों के पास होता है। इन उद्योगों की स्थापना का मुख्य उद्देश्य लाभ कमाने के बजाय जनकल्याण, राष्ट्रीय विकास और रणनीतिक महत्व के उत्पादन पर ध्यान देना होता है।

उदाहरण: भारत में स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL), भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL), और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) सार्वजनिक क्षेत्र के प्रमुख उद्योग हैं।

4. बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ क्या हैं?

बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ (MNCs) वे बड़ी औद्योगिक इकाइयाँ हैं जो अपने मुख्यालय वाले देश (मूल देश) के अलावा एक या एक से अधिक अन्य देशों में भी अपना उत्पादन एवं व्यवसाय संचालित करती हैं। ये कंपनियाँ विशाल पैमाने पर काम करती हैं और अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी, विपणन कौशल और वित्तीय संसाधनों का उपयोग करती हैं।

मुख्य विशेषताएँ:
  • वैश्विक पहुँच और संचालन।
  • बड़े पैमाने पर पूँजी निवेश।
  • स्थानीय संसाधनों एवं श्रम का उपयोग।
  • विश्व बाजार पर प्रभाव।
उदाहरण: कोका-कोला, सैमसंग, टोयोटा आदि।

5. बिहार के प्रमुख उद्योग कौन-कौन से हैं?

बिहार राज्य कृषि प्रधान है, फिर भी यहाँ कुछ महत्वपूर्ण निर्माण उद्योग स्थापित हैं। राज्य के प्रमुख उद्योग निम्नलिखित हैं:
  • चीनी उद्योग: बिहार में गन्ने की अच्छी पैदावार के कारण अनेक चीनी मिलें स्थापित हैं, जैसे - हाजीपुर, मोतिहारी, सीवान आदि क्षेत्रों में।
  • वस्त्र उद्योग: भागलपुर रेशमी (टसर) साड़ियों के लिए प्रसिद्ध है। इसके अलावा सूती वस्त्र उद्योग भी कुछ हद तक विकसित है।
  • इलेक्ट्रॉनिक उद्योग: बिहार इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BEDCL) द्वारा इलेक्ट्रॉनिक सामान का निर्माण किया जाता है।
  • तेल शोधन उद्योग: बरौनी (बेगूसराय) में एक बड़ा तेल शोधन कारखाना (रिफाइनरी) स्थित है।
  • लेदर (चमड़ा) उद्योग: मोकामा, पटना, हाजीपुर आदि स्थानों पर चमड़ा प्रसंस्करण के छोटे-बड़े इकाइयाँ कार्यरत हैं।

6. बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)

(क) निम्नलिखित में से कौन-सा उद्योग सार्वजनिक क्षेत्र का है?
A. टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी
B. रिलायंस इंडस्ट्रीज
C. स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL)
D. विप्रो
उत्तर: C. स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL)
SAIL एक सरकारी स्वामित्व वाली कंपनी है, जबकि अन्य विकल्प निजी क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं।
(ख) निम्नलिखित में से कौन-सा उद्योग बिहार में स्थित है?
A. टाटा मोटर्स
B. बरौनी रिफाइनरी
C. इन्फोसिस
D. महिंद्रा एंड महिंद्रा
उत्तर: B. बरौनी रिफाइनरी
बरौनी रिफाइनरी बिहार के बेगूसराय जिले में स्थित एक प्रमुख तेल शोधन संयंत्र है। अन्य विकल्प देश के अन्य राज्यों में स्थित हैं।
(ग) निम्नलिखित में से कौन-सा उद्योग कृषि पर आधारित है?
A. सीमेंट उद्योग
B. लौह-इस्पात उद्योग
C. चीनी उद्योग
D. पेट्रो-रसायन उद्योग
उत्तर: C. चीनी उद्योग
चीनी उद्योग का कच्चा माल गन्ना है, जो एक कृषि उत्पाद है। इसलिए यह कृषि पर आधारित (एग्रो-बेस्ड) उद्योग है।
(घ) निम्नलिखित में से कौन-सी कंपनी बहुराष्ट्रीय कंपनी है?
A. बिहार राज्य लघु उद्योग निगम
B. कोका-कोला
C. भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL)
D. सेन्ट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड
उत्तर: B. कोका-कोला
कोका-कोला एक अमेरिकी बहुराष्ट्रीय कंपनी है जो दुनिया के अनेक देशों में अपना व्यवसाय चलाती है। अन्य विकल्प भारतीय सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियाँ हैं।

निर्माण उद्योग (अध्याय 3)

1. विनिर्माण उद्योग किसे कहते हैं?

कच्चे माल को प्रसंस्कृत करके उपयोगी एवं जीवनोपयोगी वस्तुओं के निर्माण की प्रक्रिया को विनिर्माण उद्योग कहते हैं। यह किसी भी राष्ट्र की आर्थिक प्रगति, औद्योगिक विकास और समृद्धि का मुख्य सूचक होता है।

2. भारत में पहला जूट मिल कहाँ और कब स्थापित हुआ था?

भारत में पहला जूट मिल सन् 1855 में कोलकाता के निकट रिसरा नामक स्थान पर स्थापित किया गया था।

3. मुम्बई को सूती वस्त्रों की महानगरी क्यों कहा जाता है?

मुम्बई को सूती वस्त्रों की महानगरी इसलिए कहा जाता है क्योंकि यहाँ सूती वस्त्र उद्योग का प्रारम्भिक केन्द्र था, यहाँ बंदरगाह की सुविधा थी जिससे कच्चे माल (कपास) का आयात और तैयार माल का निर्यात आसान था, तथा यहाँ पर्याप्त आर्द्रता, पूँजी और श्रमिक उपलब्ध थे।

4. भारत में लौह-इस्पात संयंत्रों का प्रबंधन किसके अधीन है?

भारत के सार्वजनिक क्षेत्र के सभी लौह-इस्पात संयंत्रों का प्रबंधन भारतीय इस्पात प्राधिकरण (SAIL) के अधीन है।

5. द्वितीय पंचवर्षीय योजना के दौरान किन-किन स्थानों पर लौह-इस्पात कारखाने लगाए गए?

द्वितीय पंचवर्षीय योजना (1956-61) के दौरान सार्वजनिक क्षेत्र में तीन बड़े लौह-इस्पात संयंत्र स्थापित किए गए:
1. दुर्गापुर (पश्चिम बंगाल)
2. राउरकेला (ओडिशा)
3. भिलाई (छत्तीसगढ़)

6. रेशम किसके रोएँ से बनाया जाता है?

रेशम रेशम के कीड़े (सिल्कवर्म) के कोकून से प्राप्त रेशमी रोएँ (फाइबर) से बनाया जाता है।

7. वर्तमान में भारत में सूती वस्त्र उद्योग की कितनी मिलें हैं?

वर्तमान समय में भारत में सूती वस्त्र उद्योग की 1800 से अधिक मिलें (फैक्ट्रियाँ) हैं।

8. सन् 2000 में चीनी का कुल उत्पादन कितना था?

सन् 2000 में भारत में चीनी का कुल उत्पादन लगभग 182 लाख टन था।

9. पश्चिम बंगाल में जूट मिलें कहाँ-कहाँ स्थापित हैं?

पश्चिम बंगाल में अधिकांश जूट मिलें हुगली नदी के तट पर, बांसबेरिया से लेकर बिर्लापुर तक के क्षेत्र में स्थापित हैं।

10. देश के कुल निर्यात में वस्त्र उद्योग की भागीदारी कितनी है?

देश के कुल निर्यात में वस्त्र उद्योग (सूती, ऊनी, रेशमी, सिंथेटिक सहित) की भागीदारी लगभग 11% से 15% के बीच है। (ध्यान दें: 30% का आँकड़ा पुराना हो सकता है, वर्तमान में यह हिस्सेदारी कम हुई है।)

11. भारत में कागज उद्योग का पहला कारखाना कहाँ और कब स्थापित हुआ?

भारत में कागज उद्योग का पहला सफल कारखाना सन् 1882 में टीटागढ़ (पश्चिम बंगाल) में स्थापित किया गया था।

12. वर्तमान में भारत में कितनी लुगदी व कागज मिलें हैं?

वर्तमान में भारत में 600 से अधिक लुगदी तथा कागज मिलें हैं।

13. भारत में लोहा एवं इस्पात के कितने बड़े और छोटे कारखाने हैं?

भारत में 10 बड़े (वृहत्) इस्पात संयंत्र और 200 से अधिक छोटे (लघु) लोहा एवं इस्पात के कारखाने हैं।

14. सकल राष्ट्रीय उत्पाद (GDP) में निर्माण उद्योगों का हिस्सा कितना है?

सकल राष्ट्रीय उत्पाद (GDP) में निर्माण उद्योगों का हिस्सा लगभग 17% से 20% है।

15. क्या भारत सूती वस्त्र उद्योग में आत्मनिर्भर है?

हाँ, भारत सूती वस्त्र उद्योग में पूर्ण रूप से आत्मनिर्भर है। हमारे पास पर्याप्त कच्चा माल (कपास), श्रमशक्ति, तकनीक और बाजार उपलब्ध है।

16. भारत में वर्तमान में कितनी जूट मिलें हैं और जूट निर्यात में भारत का विश्व में कौन-सा स्थान है?

भारत में वर्तमान में लगभग 70 से 80 जूट मिलें हैं। जूट और जूट उत्पादों के निर्यात में भारत का विश्व में प्रथम स्थान है। (ध्यान दें: दूसरा स्थान बांग्लादेश का है।)

17. भारत में लोहा-इस्पात का आधुनिक कारखाना सबसे पहले कहाँ खोला गया?

भारत में लोहा-इस्पात का आधुनिक ढंग का पहला बड़ा कारखाना सन् 1907 में झारखण्ड की स्वर्णरेखा घाटी में साकची (जमशेदपुर) नामक स्थान पर टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी (TISCO) के रूप में खोला गया।

18. भारत में सीमेंट का पहला कारखाना कहाँ और कब खुला?

भारत में सीमेंट का पहला कारखाना सन् 1904 में तमिलनाडु के चेन्नई (मद्रास) के निकट स्थापित किया गया था।

19. एल्युमिनियम कारखाने सस्ती बिजली क्षेत्र के निकट क्यों स्थापित किए जाते हैं?

एल्युमिनियम बनाने की प्रक्रिया (बॉक्साइट अयस्क से एल्युमिना और फिर एल्युमिनियम बनाना) में बहुत अधिक मात्रा में विद्युत ऊर्जा की आवश्यकता होती है। इसलिए, इन कारखानों को सस्ती बिजली उपलब्ध कराने वाले जलविद्युत केन्द्रों या कोयला खनन क्षेत्रों के निकट स्थापित किया जाता है ताकि उत्पादन लागत कम रहे।

20. ताँबा उद्योग के कारखाने भारत में किन स्थानों पर हैं?

भारत में ताँबा उद्योग के प्रमुख कारखाने निम्नलिखित स्थानों पर स्थित हैं:
1. घाटशिला (झारखण्ड)
2. खेत्री (राजस्थान)
3. तूतीकोरिन (तमिलनाडु)

21. सिंदरी उर्वरक कारखाना कहाँ और कब खुला?

सिंदरी उर्वरक कारखाना झारखण्ड राज्य के सिंदरी नामक स्थान पर सन् 1951 में खोला गया था। यह भारत का पहला सार्वजनिक क्षेत्र का उर्वरक संयंत्र था।

22. भारत प्रतिवर्ष कितना सीमेंट तैयार करता है?

भारत प्रतिवर्ष लगभग 33 से 35 करोड़ टन सीमेंट का उत्पादन करता है और विश्व के अग्रणी सीमेंट उत्पादक देशों में से एक है। (ध्यान दें: 147.81 करोड़ टन का आँकड़ा अत्यधिक प्रतीत होता है, वर्तमान उत्पादन इससे कम है।)

23. उद्योगों के विकास से लोगों का जीवन-स्तर कैसे ऊँचा होता है?

उद्योगों के विकास से लोगों का जीवन-स्तर निम्नलिखित तरीकों से ऊँचा होता है:
1. रोजगार के अवसर बढ़ते हैं, जिससे आय में वृद्धि होती है।
2. विविध प्रकार की उपभोक्ता वस्तुएँ सस्ती दरों पर उपलब्ध होती हैं।
3. आधारभूत संरचना (सड़क, बिजली, संचार) का विकास होता है।
4. शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार आता है।
5. देश की आर्थिक समृद्धि बढ़ती है, जिसका लाभ समाज के सभी वर्गों को मिलता है।

24. उद्योग स्थापित करने के लिए कौन-कौन से कारक आवश्यक हैं?

किसी स्थान पर उद्योग स्थापित करने के लिए निम्नलिखित भौगोलिक एवं आर्थिक कारक आवश्यक होते हैं:
1. कच्चे माल की प्राप्ति: उद्योग के लिए आवश्यक कच्चा माल निकटता में उपलब्ध हो।
2. शक्ति के साधन: कोयला, पेट्रोलियम, बिजली आदि ऊर्जा स्रोतों की उपलब्धता।
3. यातायात की सुविधा: सड़क, रेल, जलमार्ग या वायुमार्ग द्वारा कच्चे माल और तैयार माल के परिवहन की सुविधा।
4. मानव संसाधन: कुशल एवं अकुशल श्रमिकों की उपलब्धता।
5. बाजार: तैयार माल की बिक्री के लिए निकटवर्ती या दूरस्थ बाजार की उपस्थिति।
6. पूँजी: उद्योग स्थापना एवं संचालन के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधन।
7. राजनीतिक स्थिरता: सरकार की स्थिरता और औद्योगिक नीतियों का अनुकूल होना।

25. उद्योगों का वर्गीकरण किन-किन आधारों पर किया जाता है?

उद्योगों का वर्गीकरण निम्नलिखित आधारों पर किया जाता है:
1. स्वामित्व के आधार पर: सार्वजनिक क्षेत्र, निजी क्षेत्र, संयुक्त क्षेत्र, सहकारी क्षेत्र।
2. कच्चे माल के आधार पर: कृषि आधारित, खनिज आधारित, रासायनिक आधारित आदि।
3. प्रमुख कार्य/उत्पाद के आधार पर: आधारभूत उद्योग, उपभोक्ता उद्योग।
4. आकार (पूँजी निवेश, श्रमिक संख्या, उत्पादन) के आधार पर: वृहत् उद्योग, लघु उद्योग, कुटीर उद्योग।
5. कच्चे माल एवं तैयार माल के भार के आधार पर: भारी उद्योग, हल्के उद्योग।

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