Bihar Board Class 10th Social Science (खण्ड-क) Chapter 5 बिहार: कृषि एवं वन संसाधन) Solutions
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| Board Name | Bihar Board of Secondary Education |
| Class | Class 10th |
| Content Type | Solution |
| Solution for | Class 10th students |
| Subject | Social Science (खण्ड-क) |
| Chapter Name | Chapter 5 बिहार: कृषि एवं वन संसाधन) |
| Total Number of Chapter in this Subject | 14 |
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Bihar Board Class 10th Social Science (खण्ड-क) Chapter 5 बिहार: कृषि एवं वन संसाधन) Solutions
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प्रश्न 1.
बिहार में कितने प्रतिशत क्षेत्र में खेती की जाती है? (क) 50 (ख) 60 (ग) 80 (घ) 36.5
उत्तर- (ख) 60
बिहार का लगभग 60 प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्र कृषि के अंतर्गत आता है। यह राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण आधार है।
प्रश्न 2.
राज्य की कितनी प्रतिशत जनसंख्या कृषि कार्य में लगी हुई है 2 (क) 805 (ख) 75 (ग) 65 (घ) 86
उत्तर- (क) 80
बिहार की लगभग 80 प्रतिशत जनसंख्या अपनी आजीविका के लिए प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कृषि कार्यों पर निर्भर है। यह आंकड़ा राज्य में कृषि के महत्व को दर्शाता है।
प्रश्न 3.
इनमें से कौन गन्ना उत्पादक जिला वहीं है? (क) दरभंगा (ख) पश्चिमी चम्पारण (ग) मुजफ्फरपुर (घ) रोहतास
उत्तर- (घ) रोहतास
रोहतास जिला बिहार का एक प्रमुख गन्ना उत्पादक क्षेत्र है। यहाँ की उपजाऊ मिट्टी और सिंचाई की पर्याप्त सुविधाएँ गन्ने की खेती के लिए अनुकूल हैं।
प्रश्न 4.
बिहार के जूट उत्पादन में- (क) वृद्धि हो रही है (ख) गिरावट हो रहा है (ग) स्थिर है (घ) इनमें कोई नहीं उत्तर-
उत्तर- (ख) गिरावट हो रहा है
बिहार में जूट उत्पादन में गिरावट देखी जा रही है। इसके प्रमुख कारण हैं - सिंथेटिक उत्पादों का बढ़ता उपयोग, कम लाभ और किसानों का अन्य नकदी फसलों की ओर रुख करना।
प्रश्न 5.
तम्बाकू उत्पादन क्षेत्र है- (क) गंगा का उत्तरी मैदान (ख) गंगा का दक्षिणी मैदान (ग) हिमालय की तराई (घ) गंगा का दियारा
उत्तर- (घ) गंगा का दियारा
बिहार में तम्बाकू की खेती मुख्य रूप से गंगा के दियारा क्षेत्र (नदी के किनारे की रेतीली जमीन) में की जाती है। इस क्षेत्र की मिट्टी तम्बाकू की खेती के लिए उपयुक्त है।
प्रश्न 6.
कोसी नदी घाटी परियोजना का आरम्भ हुआ- (क) 1950 में (ख) 1948 में (ग) 1952 में (घ) 1954 में
उत्तर- (घ) 1954 में
बिहार और नेपाल की संयुक्त परियोजना, कोसी नदी घाटी परियोजना का शुभारंभ 1954 में हुआ था। इसका मुख्य उद्देश्य बाढ़ नियंत्रण, सिंचाई और पनबिजली उत्पादन है।
प्रश्न 7.
गण्डक परियोजना का निर्माण किस स्थान पर हुआ? (क) बेतिया (ख) वाल्मीकिनगर (ग) मोतिहारी (घ) छपरा
उत्तर- (ख) वाल्मीकिनगर
गण्डक परियोजना का निर्माण बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले में वाल्मीकिनगर के पास हुआ है। यह भारत और नेपाल की एक संयुक्त सिंचाई एवं बिजली परियोजना है।
प्रश्न 8.
बिहार में नहरों द्वारा सर्वाधिक सिंचाई किस जिले में होती है ? (क) रोहतास (ख) सिवान (ग) गया (घ) पश्चिमी चम्पारण उत्तर-
उत्तर- (क) रोहतास
रोहतास जिले में बिहार में नहरों द्वारा सर्वाधिक सिंचाई होती है। यहाँ सोन नहर प्रणाली सिंचाई के लिए एक प्रमुख स्रोत है, जिससे कृषि क्षेत्र को लाभ मिलता है।
प्रश्न 9.
बिहार में कुल कितने अधिसूचित क्षेत्र में वन का विस्तार है (क) 6374 किमी०. (ख) 6370 किमी०. (ग) 6380 किमी० (घ) 6350 किमी०.
उत्तर- (क) 6374 किमी०.
बिहार में अधिसूचित वन क्षेत्र का कुल विस्तार लगभग 6374 वर्ग किलोमीटर है। यह राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का एक छोटा हिस्सा है।
प्रश्न 10.
कुशैश्वर स्थान किस जिला में स्थित है ? (क) वैशाली में (ख) दरभंगा में (ग) बेगुसराय में (घ) भागलपुर में
उत्तर- (ख) दरभंगा में
कुशेश्वर स्थान (कुशेश्वरस्थान) बिहार के दरभंगा जिले में स्थित है। यह एक महत्वपूर्ण पक्षी अभयारण्य और धार्मिक स्थल के रूप में जाना जाता है।
प्रश्न 11.
कॉवर झील स्थित है.- (क) दरभंगा जिला में (ख) भागलपुर जिला में (ग) बेगूसराय जिला में (घ) मुजफ्फरपुर जिला में । उत्तर-
उत्तर- (ग) बेगूसराय जिला में
कावर झील (कावर झील) बिहार के बेगूसराय जिले में स्थित है। यह एशिया की सबसे बड़ी मीठे पानी की ऑक्सबो झीलों में से एक है और एक प्रसिद्ध पक्षी अभयारण्य है।
प्रश्न 12.
संजय गांधी जैविक उद्यान किस नगर में स्थित हैं ९ (क) राजगीर (ख) बोधगया (ग) बिहारशरीफ (घ) पटना
उत्तर- (घ) पटना
संजय गांधी जैविक उद्यान (पटना चिड़ियाघर) बिहार की राजधानी पटना में स्थित है। यह राज्य का एकमात्र राष्ट्रीय उद्यान और एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल है।
लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1.
बिहार में धान की फसल के लिए उपयुक्त भौगोलिक दशाओं का उल्लेख करें।
उत्तर:
बिहार में धान की खेती के लिए निम्नलिखित भौगोलिक दशाएँ उपयुक्त हैं:
- तापमान: 20°C से 27°C के बीच का उष्णकटिबंधीय तापमान आदर्श होता है।
- वर्षा: 100 से 200 सेंटीमीटर के बीच वार्षिक वर्षा की आवश्यकता होती है।
- मिट्टी: गहरी चिकनी या दोमट मिट्टी, विशेषकर जलोढ़ मिट्टी सर्वोत्तम मानी जाती है।
- भूमि: समतल तथा नीची भूमि जहाँ पानी का जमाव हो सके, धान की खेती के लिए अनुकूल है।
- श्रम: धान की रोपाई एवं कटाई के लिए पर्याप्त श्रमिकों की उपलब्धता भी आवश्यक है।
प्रश्न 2.
बिहार में दलहन के उत्पादन एवं वितरण का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर:
बिहार में उगाई जाने वाली प्रमुख दलहन फसलों में चना, मसूर, खेसारी, मटर, मूंग, अरहर (तूर), उड़द और कुल्थी शामिल हैं। ये प्रोटीन का एक महत्वपूर्ण स्रोत हैं।
उत्पादन एवं वितरण:
- राज्य में दलहन उत्पादन में पटना जिला का स्थान सबसे आगे है।
- औरंगाबाद जिला दूसरे स्थान पर है।
- कैमूर जिला तीसरे स्थान पर आता है।
- इनके अलावा, रोहतास, भोजपुर, गया और नालंदा जिले भी दलहन के महत्वपूर्ण उत्पादक हैं।
प्रश्न 3.
कृषि बिहार की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। इस कथन की व्याख्या करें।
उत्तर:
यह कथन पूर्णतः सही है कि कृषि बिहार की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। इसके निम्नलिखित कारण हैं:
- रोजगार: राज्य की लगभग 80% जनसंख्या प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कृषि पर निर्भर है।
- सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी): राज्य की जीडीपी में कृषि क्षेत्र का एक बड़ा योगदान है।
- झारखंड पृथक्करण: वर्ष 2000 में झारखंड के अलग हो जाने के बाद बिहार में औद्योगिक एवं खनिज संसाधनों की कमी हो गई, जिससे कृषि का महत्व और भी बढ़ गया।
- खाद्य सुरक्षा: राज्य की खाद्यान्न आवश्यकताओं की पूर्ति मुख्यतः कृषि से ही होती है।
- वैकल्पिक रोजगार का अभाव: कृषि के अलावा अन्य रोजगार के साधन सीमित हैं, इसलिए यह अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार बना हुआ है।
प्रश्न 4.
नदी घाटी परियोजनाओं के मुख्य उद्देश्यों को लिखें।
उत्तर:
बिहार में नदी घाटी परियोजनाओं के निम्नलिखित बहुउद्देशीय लक्ष्य हैं:
- पनबिजली उत्पादन: जल से विद्युत उत्पन्न करना ताकि औद्योगिक एवं घरेलू ऊर्जा की मांग पूरी हो सके।
- बाढ़ नियंत्रण: नदियों पर बांध बनाकर बाढ़ के पानी को रोकना और नियंत्रित करना।
- सिंचाई सुविधा: नहरों के माध्यम से कृषि भूमि को सिंचाई जल उपलब्ध कराना, जिससे कृषि उत्पादन बढ़े।
- मृदा अपरदन रोकथाम: बांधों से पानी के वेग को कम करके भूमि के कटाव को रोकना।
- मत्स्य पालन: जलाशयों में मछली पालन को बढ़ावा देना, जिससे रोजगार और पोषण में सहायता मिले।
- पर्यटन विकास: बने हुए जलाशय और उनके आसपास के क्षेत्रों को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करना।
प्रश्न 5.
बिहार के नहरों के विकास से सम्बंधित समस्याओं को लिखिए।
उत्तर:
बिहार में नहरों के विकास में निम्नलिखित समस्याएँ आती हैं:
- जल का असमान वितरण: राज्य के कुछ क्षेत्रों (जैसे दक्षिण बिहार) में नहरों का जाल कम विकसित है, जिससे सिंचाई सुविधा असमान रूप से वितरित है।
- पूंजी का अभाव: नई नहर परियोजनाएं बनाने और पुरानी नहर प्रणालियों के रखरखाव के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधनों की कमी है।
- भू-आकृति (घरातल) की समस्या: दक्षिण बिहार के पहाड़ी और पठारी क्षेत्रों में नहरें बनाना तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण और महंगा है।
- नहरों की सिल्टेशन (गाद जमाव): नदियों से गाद आकर नहरों में जमा हो जाती है, जिससे उनकी जल धारण क्षमता कम हो जाती है और रखरखाव की लागत बढ़ती है।
प्रश्न 6.
बिहार के किस भाग में सिंचाई की आवश्यकता है और क्यों?
उत्तर:
बिहार के दक्षिणी भाग (जिसमें कैमूर, रोहतास, औरंगाबाद, गया, नवादा, जहानाबाद, अरवल आदि जिले शामिल हैं) में सिंचाई की सबसे अधिक आवश्यकता है।
कारण:
- अपर्याप्त वर्षा: यह क्षेत्र उत्तरी बिहार की तुलना में कम वर्षा प्राप्त करता है और अक्सर सूखे की स्थिति का सामना करता है।
- नहर सिंचाई का अभाव: यहाँ नदी घाटी परियोजनाओं और नहरों का जाल कम विकसित है।
- भूजल स्तर का नीचे होना: पठारी क्षेत्र होने के कारण यहाँ भूजल स्तर गहरा है, जिससे नलकूपों द्वारा सिंचाई भी महंगी और सीमित है।
- कृषि की प्रकृति: इस क्षेत्र में गेहूं, दलहन, तिलहन जैसी रबी फसलों की खेती अधिक होती है, जिनके लिए विशेष रूप से सिंचाई की आवश्यकता होती है।
प्रश्न 7.
बिहार में वनों के अभाव के चार कारणों को लिखिए।
उत्तर:
बिहार में वनों के अभाव के प्रमुख चार कारण निम्नलिखित हैं:
- राज्य का विभाजन: वर्ष 2000 में बिहार से झारखंड के अलग होने पर राज्य के अधिकांश वनाच्छादित क्षेत्र झारखंड में चले गए, जिससे बिहार में वन क्षेत्र बहुत कम रह गया।
- कृषि एवं आवासीय विस्तार: बढ़ती जनसंख्या के दबाव में खेती के लिए और बस्तियाँ बसाने के लिए वनों की अंधाधुंध कटाई की गई।
- वन संरक्षण के प्रति जागरूकता का अभाव: आम जनता और कुछ हद तक प्रशासन में भी वनों के पारिस्थितिकी और आर्थिक महत्व के प्रति पर्याप्त जागरूकता का अभाव रहा है।
- अवैध कटाई एवं चराई: ईंधन की लकड़ी, इमारती लकड़ी के लिए अवैध रूप से पेड़ काटे जाने और पशुओं द्वारा अत्यधिक चराई से वनों का ह्रास हुआ है।
प्रश्न 8.
संक्षेप में शष्क पतझड़ वन की चर्चा कीजिए।
उत्तर:
शुष्क पतझड़ वन (Dry Deciduous Forests) बिहार में पाए जाने वाले वनों का एक प्रमुख प्रकार है।
- विस्तार: ये वन मुख्यतः बिहार के दक्षिण-पश्चिमी पहाड़ी भागों तथा पूर्वी मध्यवर्ती क्षेत्रों में पाए जाते हैं। कैमूर और रोहतास जिलों में इनका सबसे अधिक विस्तार है।
- विशेषता: इन वनों के पेड़ गर्मी के शुष्क मौसम में अपनी पत्तियाँ गिरा देते हैं ताकि जल का संरक्षण कर सकें।
- प्रमुख वृक्ष प्रजातियाँ: इन वनों में पाए जाने वाले प्रमुख वृक्ष हैं - खैर, बहेड़ा, पलास, महुआ, अमलतास, शीशम, नीम, हर्र, बबूल आदि। ये वृक्ष कम वर्षा वाले क्षेत्रों में उगने के लिए अनुकूलित हैं।
प्रश्न 9.
बिहार में ऐसे जिलों का नाम लिखिए जहाँ वन विस्तार एक प्रतिशत से भी कम है।
उत्तर:
बिहार के निम्नलिखित जिलों में वन क्षेत्र का विस्तार कुल भौगोलिक क्षेत्र के एक प्रतिशत से भी कम है:
सिवान, सारण, भोजपुर, बक्सर, पटना, गोपालगंज, वैशाली, मुजफ्फरपुर, पूर्वी चम्पारण (मोतीहारी), दरभंगा, मधुबनी, समस्तीपुर, बेगूसराय, मधेपुरा, खगड़िया, नालन्दा।
इन जिलों में अत्यधिक सघन जनसंख्या और कृषि के व्यापक विस्तार के कारण वनों का लगभग अभाव है।
प्रश्न 10.
बिहार में स्थित राष्ट्रीय उद्यान एवं अभयारण्यों की संख्या बतायें और दो अभयारण्यों की चर्चा करें।
उत्तर:
बिहार में वन्य जीव संरक्षण के लिए निम्नलिखित स्थिति है:
- राष्ट्रीय उद्यान: केवल 1 (एक) - संजय गांधी जैविक उद्यान, पटना।
- अभयारण्य (वन्यजीव अभयारण्य): कुल 14 (चौदह)।
दो अभयारण्यों का विवरण:
- कावर झील पक्षी अभयारण्य (बेगूसराय): यह एशिया की सबसे बड़ी मीठे पानी की ऑक्सबो झीलों में से एक है। यहाँ प्रवासी और स्थानीय दोनों प्रकार के पक्षी पाए जाते हैं। लगभग 300 से अधिक पक्षी प्रजातियों का यहाँ अध्ययन किया जा सकता है, जिसमें साइबेरियन सारस भी शामिल है।
- कुशेश्वरस्थान पक्षी अभयारण्य (दरभंगा): यह अभयारण्य कोसी नदी के बाढ़ के मैदान में स्थित है। यह विभिन्न प्रकार के जलपक्षियों, विशेषकर प्रवासी पक्षियों के लिए एक महत्वपूर्ण आवास स्थल है। यहाँ कई दुर्लभ और संकटग्रस्त पक्षी प्रजातियाँ देखी जा सकती हैं।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1.
बिहार की कृषि की समस्याओं पर विस्तार से चर्चा करें।
उत्तर:
बिहार एक कृषि प्रधान राज्य है, लेकिन यहाँ की कृषि अनेक गंभीर समस्याओं से जूझ रही है, जो निम्नलिखित हैं:
- परंपरागत कृषि पद्धतियाँ: अधिकांश किसान आज भी पुराने ढंग के औजार और पारंपरिक तरीकों से खेती करते हैं, जिससे उत्पादकता कम रहती है।
- सिंचाई की समस्या: कृषि अभी भी काफी हद तक मानसून पर निर्भर है। नहरों और ट्यूबवेल जैसी सिंचाई सुविधाओं का अभाव है, विशेषकर दक्षिण बिहार में।
- जोतों का विखंडन एवं छोटा आकार: जनसंख्या वृद्धि और विरासत में बंटवारे के कारण खेत दूर-दूर और बहुत छोटे-छोटे टुकड़ों में बंट गए हैं, जिससे आधुनिक मशीनों का प्रयोग मुश्किल है।
- किसानों की आर्थिक दुर्बलता: अधिकांश किसान गरीब और कर्जदार हैं। उनके पास उन्नत बीज, रासायनिक खाद, कीटनाशक खरीदने के लिए पर्याप्त पूंजी नहीं है।
- उन्नत बीज एवं तकनीक का अ
प्रश्न 3.
बिहार की मुख्य नदी घाटी परियोजनाओं का नाम बतायें एवं सोन अथवा कोसी परियोजना के महत्व पर प्रकाश डालें।
उत्तर: बिहार की प्रमुख नदी घाटी परियोजनाएँ निम्नलिखित हैं:
- सोन नदी घाटी परियोजना
- गण्डक नदी घाटी परियोजना
- कोसी नदी घाटी परियोजना
- दुर्गावती जलाशय परियोजना
- चन्दन बहुउद्देशीय परियोजना
- बागमती परियोजना
- बरनार जलाशय परियोजना
सोन नदी घाटी परियोजना का महत्व:
सोन नदी घाटी परियोजना बिहार की सबसे पुरानी और पहली नदी घाटी परियोजना है। इसकी शुरुआत 1874 में अंग्रेज सरकार ने सिंचाई के उद्देश्य से की थी। डेहरी के पास से पूर्वी और पश्चिमी दिशा में नहरें निकाली गई हैं। इस परियोजना से पटना, गया, औरंगाबाद, भोजपुर, बक्सर, रोहतास आदि जिलों में सिंचाई होती है, जिससे इस क्षेत्र में धान की खेती बहुतायत में होती है। इसीलिए इस क्षेत्र को 'बिहार का चावल का कटोरा' कहा जाता है।
इस परियोजना के अंतर्गत जलविद्युत उत्पादन के लिए भी शक्ति गृह स्थापित किए गए हैं। पश्चिमी नहर पर डेहरी के पास 6.6 मेगावाट क्षमता का और पूर्वी नहर शाखा पर बारूण में 3.3 मेगावाट क्षमता का शक्ति गृह है। सोन नदी पर इन्द्रपुरी के पास एक बड़े बाँध का प्रस्ताव है, जिससे लगभग 450 मेगावाट पनबिजली उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है।
कोसी नदी घाटी परियोजना का महत्व:
कोसी परियोजना नेपाल, बिहार और भारत सरकारों के संयुक्त प्रयास का परिणाम है। इसके प्रमुख उद्देश्य हैं: नदी के बदलते मार्ग को रोकना, उपजाऊ भूमि की बर्बादी रोकना, भयंकर बाढ़ से होने वाली क्षति को कम करना, सिंचाई का विकास, पनबिजली उत्पादन, मत्स्य पालन, नौका परिवहन और पर्यावरण संतुलन बनाए रखना।
इस परियोजना के पहले चरण में नदी के मार्ग पर नियंत्रण, बिहार-नेपाल सीमा पर हनुमाननगर में बैराज का निर्माण, बाढ़ नियंत्रण के लिए तटबंध बनाना और पूर्वी व पश्चिमी कोसी नहरों का निर्माण शामिल था। पूर्वी नहर से पूर्णिया, सहरसा, मधेपुरा और अररिया जिलों में सिंचाई होती है, जबकि पश्चिमी नहर से नेपाल और बिहार के मधुबनी व दरभंगा जिलों को लाभ मिलता है।
प्रश्न 4.
बिहार में वन्य जीवों के संरक्षण पर विस्तार से चर्चा करें।
उत्तर: बिहार में वन और वन्य जीवों के संरक्षण की परंपरा बहुत पुरानी है। यहाँ कई सामाजिक रीति-रिवाज और धार्मिक मान्यताएँ प्रकृति संरक्षण को बढ़ावा देती हैं। उदाहरण के लिए, वट, पीपल, आँवला और तुलसी जैसे पौधों की पूजा की जाती है। चींटी से लेकर साँप तक को भोजन दिया जाता है और उनकी पूजा की जाती है। पक्षियों को दाना डालने की भी परंपरा है।
वन्य जीवों के संरक्षण के लिए राज्य में कई संस्थागत प्रयास भी किए जा रहे हैं। यहाँ संजय गाँधी जैविक उद्यान (पटना चिड़ियाघर) और लगभग 14 अभयारण्य स्थित हैं। इनमें बेगुसराय जिले की कांवर झील पक्षी अभयारण्य और दरभंगा जिले का कुशेश्वरस्थान पक्षी अभयारण्य प्रमुख हैं।
इस कार्य में राज्य का वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग अग्रणी भूमिका निभाता है। इसके अलावा, कई स्वयंसेवी संस्थाएँ (NGOs) भी सक्रिय हैं, जैसे कि 'प्रयास', 'तरुमित्र' और भागलपुर का 'मंदार नेचर क्लब' आदि। ये संस्थाएँ जन जागरूकता अभियान चलाती हैं, वृक्षारोपण कराती हैं और वन्य जीवों के अवैध शिकार व तस्करी के खिलाफ काम करती हैं।
Bihar Board Class 10 Geography : अतिरिक्त महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1.
बिहार राज्य की उत्तरी सीमा के पश्चिमी छोर का अक्षांश क्या है ?
(क) 25° 30′ N
(ख) 27° 31′ N
(ग) 37° 11′ N
(घ) 30° Nउत्तर: (ख) 27° 31′ N प्रश्न 2.
सबसे कम वर्षा का जिला कौन है ?
(क) किशनगंज
(ख) पूर्णिया
(ग) बक्सर
(घ) पश्चिमी चम्पारणउत्तर: (ग) बक्सर प्रश्न 3.
संप्रति बिहार में जिलों की संख्या कितनी है ?
(क) 30
(ख) 31
(ग) 35
(घ) 38उत्तर: (घ) 38 प्रश्न 4.
बिहार में विद्युत का उत्पादन सबसे अधिक कहाँ होता है ?
(क) बरौनी
(ख) बक्सर
(ग) गोपालगंज
(घ) अररियाउत्तर: (ग) गोपालगंज प्रश्न 5.
बिहार में सबसे बड़ा ताल-क्षेत्र कौन है ?
(क) बड़हिया
(ख) राजगीर
(ग) दरभंगा
(घ) कैमूरउत्तर: (क) बड़हिया अतिलघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1.
बिहार की पूर्वी सीमा पर स्थित राज्य का नाम लियें।
उत्तर: बिहार की पूर्वी सीमा पर पश्चिम बंगाल राज्य स्थित है।
प्रश्न 2.
बिहार के किस भाग में सोमेश्वर की पहाड़ियाँ स्थित हैं ?
उत्तर: सोमेश्वर की पहाड़ियाँ बिहार के गंगा के उत्तरी मैदान के पश्चिमोत्तर कोने में स्थित हैं।
प्रश्न 3.
बिहार राज्य से झारखण्ड कब अलग हुआ? सही तिथि का उल्लेख करें।
उत्तर: झारखण्ड राज्य बिहार से 15 नवंबर, 2000 को अलग हुआ था।
प्रश्न 4.
बिहार में सबसे बड़ा ताल क्षेत्र कहाँ स्थित है ?
उत्तर: बिहार का सबसे बड़ा ताल क्षेत्र मोकामा (पटना जिला) में स्थित है, जिसे बड़हिया ताल के नाम से भी जाना जाता है।
प्रश्न 5.
बिहार में सिंचाई का सबसे बड़ा साधन क्या है ?
उत्तर: बिहार में सिंचाई के तीन प्रमुख साधन हैं:
- नहरें (सबसे महत्वपूर्ण)
- कुएँ और नलकूप
- तालाब, आहर और पईन
लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1.
बिहार में गेहूं के पाँच प्रमुख उत्पादक जिलों के नाम लिखें।
उत्तर: बिहार में गेहूँ उत्पादन करने वाले पाँच प्रमुख जिले हैं:
- दरभंगा
- रोहतास
- गया
- सिवान
- औरंगाबाद
प्रश्न 2.
बिहार के दक्षिण की ओर बहने वाली नदियों के नाम लिखें।
उत्तर: बिहार के दक्षिण से उत्तर की ओर बहकर गंगा में मिलने वाली प्रमुख नदियाँ हैं:
- सोन
- पुनपुन
- फल्गु
- चानन
- चीर
प्रश्न 3.
बिहार राज्य के सबसे अधिक वर्षा वाले दो जिलों के नाम लें।
उत्तर: बिहार के सबसे अधिक वर्षा वाले दो जिले हैं:
- किशनगंज: यहाँ औसतन 200-300 सेंटीमीटर या इससे भी अधिक वर्षा होती है।
- कटिहार: यहाँ औसतन 150-200 सेंटीमीटर के बीच वर्षा होती है।
प्रश्न 4.
गंगा के दक्षिण के मैदान की मिट्टी का संक्षिप्त वर्णन करें।
उत्तर: गंगा के दक्षिणी मैदान में मुख्य रूप से केवल या बांगर (पुरानी जलोढ़) मिट्टी पाई जाती है। यह मिट्टी बक्सर, भोजपुर, रोहतास, औरंगाबाद, जहानाबाद, पटना, नालंदा, बाढ़, मुंगेर और भागलपुर के मैदानी भागों में मिलती है। यह मिट्टी कम उपजाऊ होती है और इसमें कंकड़-पत्थर भी पाए जाते हैं। इस क्षेत्र में कुछ स्थानों पर बाढ़ का पानी जमा होने से विशाल तालों का निर्माण होता है, जिनमें बड़हिया ताल (मोकामा ताल) सबसे बड़ा है।
बिहार: कृषि एवं वन संसाधन
प्रश्न 5.
बिहार राज्य के किस जिले में चूना-पत्थर अधिक मिलता है ?
उत्तर:
बिहार में चूना-पत्थर का भंडार मुख्य रूप से दो जिलों में पाया जाता है: रोहतास और मुंगेर। ये क्षेत्र राज्य के दक्षिणी भाग में स्थित हैं जहाँ पहाड़ी इलाके हैं। चूना-पत्थर एक महत्वपूर्ण खनिज है जिसका उपयोग सीमेंट उद्योग, लौह-इस्पात उद्योग और रासायनिक उद्योगों में किया जाता है।
प्रश्न 1.
प्राकृतिक संसाधनों का नाम दें। किसी एक का बिहार में वितरण बताएँ।
उत्तर:
बिहार के प्रमुख प्राकृतिक संसाधन निम्नलिखित हैं:- मिट्टी
- खनिज
- वन और वन्य प्राणी
- जल संसाधन
मिट्टी का बिहार में वितरण:
बिहार के मैदानी भाग में मुख्यतः नदियों द्वारा लाई गई जलोढ़ मिट्टी पाई जाती है। इस मिट्टी को उसकी विशेषताओं और स्थान के आधार पर निम्न उपवर्गों में बाँटा जा सकता है:(i) तराई या दलदली क्षेत्र की जलोढ़ मिट्टी: यह मिट्टी राज्य के सबसे उत्तरी भाग में एक संकरी पट्टी (लगभग 5-10 किमी चौड़ी) में मिलती है। यह क्षेत्र हिमालय की तराई में आता है जहाँ अधिक वर्षा और नमी के कारण दलदली परिस्थितियाँ बनी रहती हैं। इस मिट्टी का रंग गहरा भूरा होता है और इसमें चूने की मात्रा कम होती है। यहाँ धान, जूट, गन्ना, आम और लीची की खेती की जाती है।
(ii) बाँगर या पुरानी जलोढ़ मिट्टी: इसका विस्तार गंडक नदी के पूर्वी और पश्चिमी दोनों क्षेत्रों में है। यह अपेक्षाकृत पुरानी और ऊँची जमीन पर पाई जाने वाली मिट्टी है। इसमें चूना और कंकड़ अधिक मात्रा में मिलते हैं। रंग हल्का भूरा या कालापन लिए होता है। यह मिट्टी गन्ने की खेती के लिए बहुत उपयुक्त मानी जाती है। इसके अलावा इसमें मक्का, जौ और गेहूँ भी उगाए जाते हैं।
(iii) खादर या नई जलोढ़ मिट्टी: यह मिट्टी बूढ़ी गंडक नदी के पूर्वी भाग में पाई जाती है। यह एक उपजाऊ दोमट मिट्टी है। यह क्षेत्र प्रायः बाढ़ से प्रभावित रहता है, जिससे हर साल नई उपजाऊ तलछट जमा होती रहती है। यहाँ जूट की खेती प्रमुख है। पश्चिमी भागों में गन्ना और धान की भी अच्छी खेती होती है।
(iv) गंगा के दक्षिणी मैदान की केवर/केवाल मिट्टी: यह मिट्टी गंगा नदी के दक्षिण के मैदानी भागों में मिलती है। इस क्षेत्र के पश्चिमी भाग में बाँगर प्रकार की मिट्टी पाई जाती है, जबकि पूर्वी निचले भागों में दलदली क्षेत्र (जैसे बड़हिया का ताल) हैं। यह मिट्टी दोमट और केवाल किस्म की है और दलहन (जैसे चना, मसूर, अरहर) की पैदावार के लिए विख्यात है।
प्रश्न 2.
आई पर्णपाती और शुष्क पर्णपाती वनों में क्या अन्तर है ? इनके पेड़ों के तीन-तीन उदाहरण दें।
उत्तर:
आई पर्णपाती (नम पर्णपाती) और शुष्क पर्णपाती वनों में अंतर:आधार आई पर्णपाती वन (नम पर्णपाती वन) शुष्क पर्णपाती वन वर्षा अधिक वर्षा (लगभग 120-150 सेमी से अधिक) वाले क्षेत्रों में पाए जाते हैं। कम वर्षा (लगभग 70-120 सेमी) वाले क्षेत्रों में पाए जाते हैं। वृक्षों का घनत्व वृक्ष घने और ऊँचे होते हैं। वृक्ष कम घने और अपेक्षाकृत छोटे होते हैं। पत्तों का गिरना पत्ते शुष्क ऋतु में धीरे-धीरे गिरते हैं, कुछ वृक्ष सदाबहार भी हो सकते हैं। ग्रीष्म ऋतु के प्रारंभ में ही पत्ते तेजी से गिर जाते हैं। बिहार में विस्तार मुख्यतः उत्तरी बिहार के चम्पारण, सहरसा, पूर्णिया, अररिया जिलों के नेपाल सीमा से लगे तराई क्षेत्रों में। मुख्यतः दक्षिणी बिहार के गया, भागलपुर, मुंगेर आदि जिलों के पहाड़ी और कम वर्षा वाले क्षेत्रों में। आई पर्णपाती वनों के तीन उदाहरण: सखुआ (साल), सेमल, जामुन।
शुष्क पर्णपाती वनों के तीन उदाहरण: शीशम, महुआ, बबूल।
महत्वपूर्ण तथ्य (Chapter Notes)
- बिहार एक कृषि प्रधान राज्य है, यहाँ की लगभग 80 प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर है।
- धान, गेहूँ, मक्का, जूट, गन्ना, तम्बाकू, दलहन और तेलहन यहाँ की मुख्य फसलें हैं।
- मोटे अनाज के उत्पादन में मधुबनी एवं किशनगंज जिले क्रमशः प्रथम एवं द्वितीय स्थान पर हैं।
- बिहार देश का एक प्रमुख सब्जी उत्पादक राज्य है।
- सोन, गंडक एवं कोसी यहाँ की प्रमुख नदी घाटी परियोजनाएँ हैं।
- बिहार का कुल भौगोलिक क्षेत्रफल लगभग 94,163 वर्ग किमी है, लेकिन इसमें से केवल लगभग 6.87% भाग पर ही वन हैं।
- पटना स्थित संजय गाँधी जैविक उद्यान राज्य का एकमात्र राष्ट्रीय उद्यान है।
- बिहार की सीमा उत्तर में नेपाल और अन्य भारतीय राज्यों - झारखण्ड, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश से लगती है।
- राज्य की मुख्य नदी गंगा है, जो इसे उत्तरी और दक्षिणी मैदान में विभाजित करती है।
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