Bihar Board Class 10th Social Science (खण्ड-क) Chapter 1B जल संसाधन) Solutions

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Bihar Board Class 10th Social Science (खण्ड-क) Chapter 1B जल संसाधन) Solutions

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1. बहुविकल्पीय प्रश्न (Multiple Choice Questions)

प्रश्न (i) निम्नलिखित में से कौन-सा जल संसाधन का प्रमुख स्रोत है?

(A) नदी
(B) झील
(C) भूमिगत जल
(D) उपर्युक्त सभी

उत्तर: (D) उपर्युक्त सभी
व्याख्या: जल संसाधन के प्रमुख स्रोतों में नदियाँ, झीलें, तालाब और भूमिगत जल सभी शामिल हैं। ये स्रोत मिलकर हमारी जल आपूर्ति का आधार बनाते हैं और विभिन्न कार्यों के लिए उपयोग किए जाते हैं।

प्रश्न (ii) विश्व में मीठे जल की कितनी प्रतिशत मात्रा उपलब्ध है?

(A) 2.7 प्रतिशत
(B) 3.5 प्रतिशत
(C) 4.5 प्रतिशत
(D) 5.5 प्रतिशत

उत्तर: (A) 2.7 प्रतिशत
व्याख्या: पृथ्वी पर उपलब्ध कुल जल का केवल लगभग 2.7 प्रतिशत ही मीठा जल (Fresh Water) है। इसका अधिकांश भाग हिमनदों और बर्फ के रूप में जमा है, जबकि एक छोटा हिस्सा ही नदियों, झीलों और भूजल के रूप में उपयोग के लिए सुलभ है।

प्रश्न (iii) बिहार में सिंचाई का प्रमुख साधन क्या है?

(A) नहर
(B) कुआँ
(C) नलकूप
(D) तालाब

उत्तर: (B) कुआँ
व्याख्या: बिहार में सिंचाई का सबसे प्रमुख और पारंपरिक साधन कुआँ है। राज्य के विस्तृत कृषि क्षेत्रों में भूमिगत जल निकालने के लिए कुओं का बड़े पैमाने पर उपयोग किया जाता है, जो किसानों को सिंचाई के लिए जल उपलब्ध कराता है।

प्रश्न (iv) निम्नलिखित में से कौन-सा जल संरक्षण की पारंपरिक विधि है?

(A) बाँध
(B) नहर
(C) तालाब
(D) नलकूप

उत्तर: (C) तालाब
व्याख्या: तालाब या पोखर जल संरक्षण की एक प्राचीन और पारंपरिक विधि है। बारिश के पानी को इनमें एकत्र करके सिंचाई, पीने और अन्य घरेलू कार्यों के लिए संग्रहित किया जाता था, जो जल संरक्षण का एक सरल और प्रभावी तरीका है।

प्रश्न (v) भारत में कितने प्रतिशत लोगों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध है?

(A) 50 प्रतिशत
(B) 65 प्रतिशत
(C) 80 प्रतिशत
(D) 90 प्रतिशत

उत्तर: (C) 80 प्रतिशत
व्याख्या: भारत में लगभग 80 प्रतिशत लोगों तक स्वच्छ पेयजल की पहुँच सुनिश्चित की गई है। हालाँकि, ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में अभी भी चुनौतियाँ बनी हुई हैं, और सरकार इस पहुँच को और बढ़ाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

2. अति लघु उत्तरीय प्रश्न (Very Short Answer Type Questions)

प्रश्न (i) जल संसाधन से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: जल संसाधन से तात्पर्य पृथ्वी पर उपलब्ध उन सभी प्राकृतिक जल स्रोतों से है जिनका उपयोग मानव अपनी विभिन्न आवश्यकताओं जैसे पीने, सिंचाई, उद्योग और बिजली उत्पादन आदि के लिए करता है। इसमें नदी, झील, भूमिगत जल, वर्षा जल आदि शामिल हैं।

प्रश्न (ii) जल संरक्षण के दो उपाय बताइए।

उत्तर: जल संरक्षण के दो प्रमुख उपाय हैं:
1. वर्षा जल संचयन: घरों की छतों, स्कूलों और सार्वजनिक भवनों पर वर्षा के पानी को एकत्र करके भूजल को रिचार्ज करना या भंडारण करना।
2. सिंचाई की आधुनिक विधियाँ अपनाना: ड्रिप इरिगेशन और स्प्रिंकलर सिस्टम जैसी विधियों से सिंचाई करके पानी की बर्बादी को रोकना।

प्रश्न (iii) बिहार में जल संसाधन के प्रमुख स्रोत कौन-कौन से हैं?

उत्तर: बिहार में जल संसाधन के प्रमुख स्रोत निम्नलिखित हैं:
- गंगा, कोसी, गंडक, सोन जैसी नदियाँ।
- विभिन्न प्राकृतिक एवं मानव निर्मित तालाब व झीलें।
- भूमिगत जल, जिसे कुओं और नलकूपों के माध्यम से निकाला जाता है।
- वार्षिक वर्षा भी एक महत्वपूर्ण स्रोत है।

3. लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Type Questions)

प्रश्न (i) जल संरक्षण क्यों आवश्यक है? समझाइए।

उत्तर: जल संरक्षण निम्नलिखित कारणों से अत्यंत आवश्यक है:
1. सीमित संसाधन: पृथ्वी पर उपयोग योग्य मीठे जल की मात्रा सीमित है, जबकि माँग लगातार बढ़ रही है।
2. बढ़ती जनसंख्या: जनसंख्या वृद्धि के साथ पीने, सफाई और कृषि के लिए जल की आवश्यकता बढ़ती जा रही है।
3. जल प्रदूषण: औद्योगिक और घरेलू कचरे के कारण नदियों और भूजल का प्रदूषण बढ़ रहा है, जिससे स्वच्छ जल की उपलब्धता कम हो रही है।
4. अनियमित वर्षा: मानसून की अनिश्चितता और सूखे की स्थिति से निपटने के लिए जल का संचयन और संरक्षण जरूरी है।
5. भविष्य की सुरक्षा: आने वाली पीढ़ियों के लिए जल की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु आज से ही इसका विवेकपूर्ण उपयोग और संरक्षण आवश्यक है।

प्रश्न (ii) बिहार में जल संसाधन के विकास के लिए कौन-कौन से कदम उठाए गए हैं?

उत्तर: बिहार में जल संसाधन के विकास एवं प्रबंधन के लिए निम्नलिखित कदम उठाए गए हैं:
1. नहर परियोजनाएँ: राज्य में सोन नहर, कोसी नहर, गंडक नहर जैसी बड़ी नहर परियोजनाओं का निर्माण किया गया है, जो सिंचाई के लिए जल उपलब्ध कराती हैं।
2. तालाबों का जीर्णोद्धार: पुराने और सूखे तालाबों को पुनर्जीवित करके उनमें वर्षा जल संचयन को बढ़ावा दिया जा रहा है।
3. नलकूप योजनाएँ: कृषि एवं पेयजल आपूर्ति के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में नलकूप लगाए गए हैं।
4. बाढ़ नियंत्रण: कोसी और अन्य नदियों पर बाँध एवं तटबंध बनाकर बाढ़ पर नियंत्रण करने और जल के उपयोगी दोहन का प्रयास किया गया है।
5. जल संरक्षण अभियान: 'जल-जीवन-हरियाली' जैसे अभियानों के माध्यम से वर्षा जल संचयन, जलाशय निर्माण और जागरूकता फैलाई जा रही है।

4. दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Type Questions)

प्रश्न (i) जल संसाधन के महत्त्व पर प्रकाश डालिए।

उत्तर: जल संसाधन मानव जीवन और पृथ्वी के पारिस्थितिकी तंत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इसके महत्त्व को निम्न बिंदुओं से समझा जा सकता है:

1. जीवन का आधार: जल सभी सजीवों के लिए एक मूलभूत आवश्यकता है। मानव शरीर का लगभग 70% भाग जल से बना है, और यह शरीर के सभी कार्यों के लिए अनिवार्य है।

2. कृषि एवं खाद्य सुरक्षा: कृषि उत्पादन पूरी तरह से सिंचाई पर निर्भर करता है। देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त जल संसाधनों का होना आवश्यक है। बिहार जैसे कृषि प्रधान राज्य में इसका महत्व और भी अधिक है।

3. औद्योगिक विकास: लगभग सभी उद्योगों, जैसे स्टील, कागज, रसायन और ताप विद्युत संयंत्रों को अपने उत्पादन प्रक्रिया के लिए बड़ी मात्रा में जल की आवश्यकता होती है।

4. ऊर्जा उत्पादन: जलविद्युत परियोजनाओं के माध्यम से जल से स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा का उत्पादन किया जाता है, जो देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में सहायक है।

5. परिवहन एवं व्यापार: नदियाँ और समुद्र प्राचीन काल से ही परिवहन के महत्वपूर्ण मार्ग रहे हैं, जो व्यापार और संस्कृति के आदान-प्रदान में सहायक होते हैं।

6. पारिस्थितिकी संतुलन: जलाशय, आर्द्रभूमि और नदियाँ विभिन्न प्रकार के पौधों और जंतुओं का आवास होती हैं और पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन को बनाए रखती हैं।

7. स्वच्छता एवं स्वास्थ्य: स्वच्छ पेयजल और पर्याप्त जल आपूर्ति स्वच्छता बनाए रखने और बीमारियों को फैलने से रोकने के लिए आवश्यक है।

इस प्रकार, जल संसाधन न केवल आर्थिक विकास बल्कि सामाजिक कल्याण और पर्यावरणीय स्थिरता की कुंजी है। इनके विवेकपूर्ण उपयोग और संरक्षण पर ही हमारा भविष्य निर्भर करता है।

प्रश्न 5. वर्षा जल संग्रहण के ढांचों को हर घर में बनाना किस राज्य में कानूनन अनिवार्य है ? (क) बिहार में (ख) तमिलनाडु में (ग) पश्चिम बंगाल में (घ) मध्य प्रदेश में

उत्तर-

(घ) मध्य प्रदेश में। मध्य प्रदेश सरकार ने वर्षा जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए एक कानून बनाया है जिसके तहत नए बनने वाले घरों में वर्षा जल संग्रहण की व्यवस्था करना अनिवार्य है। इसका मुख्य उद्देश्य भूजल स्तर को बढ़ाना और पानी की कमी से निपटना है।

प्रश्न 1. विश्व में उपलब्ध जल का कितना प्रतिशत महासागरों में जमा है ?

उत्तर-

विश्व में उपलब्ध कुल जल का लगभग 96.5% भाग महासागरों में पाया जाता है। यह जल खारा होने के कारण पीने, सिंचाई या औद्योगिक उपयोग के लिए सीधे तौर पर उपयोगी नहीं है। शेष 3.5% जल ही मीठा जल है जो हमारे उपयोग के लिए उपलब्ध है।

प्रश्न 2. दिल्ली में 14वीं सदी में जल संग्रहण के लिए बने विशिष्ट तालाब का नाम क्या है?

उत्तर-

दिल्ली में 14वीं सदी (लगभग 1354 ईस्वी) में जल संग्रहण के लिए बने विशिष्ट तालाब का नाम 'हौज-ए-खास' है। इसे सुल्तान फिरोज शाह तुगलक ने बनवाया था। यह एक ऐतिहासिक जलाशय है जो उस समय दिल्ली के निवासियों को पानी उपलब्ध कराता था।

प्रश्न 3. टिहरी बाँध किस राज्य में स्थित है ?

उत्तर-

टिहरी बाँध उत्तराखंड राज्य में स्थित है। यह भारत का सबसे ऊँचा बाँध है जो भागीरथी और भिलंगना नदियों के संगम पर बना है। यह एक बहुउद्देशीय परियोजना है जो बिजली उत्पादन, सिंचाई और दिल्ली जैसे शहरों को पेयजल उपलब्ध कराने का काम करती है।

प्रश्न 4. राजस्थान में भूमिगत टकियों में एकत्रित वर्षा जल का दूसरा स्थानीय नाम क्या है ?

उत्तर-

राजस्थान में भूमिगत टंकियों में एकत्रित वर्षा जल के लिए प्रचलित दूसरा स्थानीय नाम 'टांका' है। टांका एक पारंपरिक जल संग्रहण प्रणाली है जिसमें छत या खुले आँगन के वर्षा जल को पाइप के माध्यम से भूमिगत पक्के टैंक में जमा किया जाता है। इस पानी का उपयोग शुष्क मौसम में किया जाता है।

प्रश्न 5. पश्चिमी हिमाचल क्षेत्र में पानी की धारा बदलकर सिंचाई के लिए प्रवाहित करनेवाली प्रणाली का क्या नाम है ?

उत्तर-

पश्चिमी हिमाचल प्रदेश के क्षेत्र (विशेषकर कुल्लू और कांगड़ा जिलों) में पानी की धारा बदलकर सिंचाई के लिए प्रवाहित करने वाली पारंपरिक प्रणाली को 'कुल' या 'गुल' कहा जाता है। यह एक नहर जैसी व्यवस्था होती है जो पहाड़ी ढलानों पर बहते झरनों या नालों के पानी को मोड़कर दूर के खेतों तक ले जाती है।

प्रश्न 1. जल किस प्रकार एक दुर्लभ संसाधन है ?

उत्तर-

जल को दुर्लभ संसाधन मानने के निम्नलिखित कारण हैं:

  1. उपयोगी जल की सीमित मात्रा: पृथ्वी का लगभग 71% भाग जल से ढका है, परन्तु इसमें से 96.5% जल महासागरों में खारे रूप में है जो सीधे उपयोग के लायक नहीं है। केवल 2.5% जल ही मीठा है।
  2. मीठे जल का असमान वितरण: इस 2.5% मीठे जल का भी लगभग 70% भाग ध्रुवीय क्षेत्रों और हिमनदों में बर्फ के रूप में जमा है। केवल 1% से भी कम जल नदियों, झीलों और भूजल के रूप में उपलब्ध है।
  3. बढ़ती माँग: बढ़ती जनसंख्या, औद्योगीकरण और शहरीकरण के कारण पानी की माँग तेजी से बढ़ रही है, जबकि उपलब्धता सीमित है।
  4. प्रदूषण: औद्योगिक कचरा, कृषि में रसायनों का प्रयोग और घरेलू गंदगी नदियों और भूजल को प्रदूषित कर रही है, जिससे उपयोगी जल की मात्रा और कम हो रही है।
  5. भारत की स्थिति: भारत में विश्व की लगभग 18% जनसंख्या निवास करती है, लेकिन दुनिया के कुल मीठे जल का केवल 4% ही भारत में उपलब्ध है। प्रति व्यक्ति जल उपलब्धता लगातार घट रही है, जिससे भविष्य में जल संकट गहराने की आशंका है।

इन सभी कारणों से स्पष्ट है कि जल एक मूल्यवान और दुर्लभ संसाधन है जिसके संरक्षण की अत्यंत आवश्यकता है।

प्रश्न 2. भारत में जल के प्रमुख स्रोत कौन-कौन हैं ?

उत्तर-

भारत में जल के प्रमुख स्रोत निम्नलिखित हैं:

  1. वर्षा: भारत में जल का सबसे महत्वपूर्ण स्रोत मानसूनी वर्षा है। यही वर्षा का जल नदियों, झीलों को भरता है और भूजल को रिचार्ज करता है। वर्षा जल संचयन इसके संरक्षण का एक प्रमुख तरीका है।
  2. नदियाँ: भारत में गंगा, यमुना, ब्रह्मपुत्र, गोदावरी, कृष्णा, नर्मदा आदि अनेक नदियाँ हैं। इन नदियों के जल का उपयोग सिंचाई, पेयजल, उद्योगों और जलविद्युत उत्पादन के लिए किया जाता है।
  3. भूमिगत जल (भूजल): यह वर्षा के जल के भूमि में रिसने से बनता है। कुओं, बोरवेल और हैंडपम्पों के माध्यम से इस जल को निकालकर पीने, सिंचाई और औद्योगिक कार्यों में उपयोग किया जाता है।
  4. हिमनद (ग्लेशियर): हिमालय पर स्थित हिमनद गर्मियों में पिघलकर गंगा, सिंधु, ब्रह्मपुत्र जैसी प्रमुख नदियों को जल प्रदान करते हैं। ये नदियाँ उत्तरी भारत के लिए जीवनरेखा का काम करती हैं।
  5. झीलें, तालाब एवं जलाशय: देश के विभिन्न भागों में प्राकृतिक झीलें (जैसे डल, वूलर, चिल्का) और मानव निर्मित तालाब व बाँध (जैसे गोबिंद सागर, हीराकुंड) जल के महत्वपूर्ण भंडार हैं। ये स्थानीय जल आपूर्ति, सिंचाई और मत्स्य पालन में सहायक होते हैं।

प्रश्न 3. बहु-उद्देशीय नदीघाटी परियोजनाएं किस प्रकार लाभप्रद हैं ? यह भी बताएं कि वे किस प्रकार हानिकारक हैं?

उत्तर-

बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजनाओं के लाभ:

  1. सिंचाई: बाँधों से निकाली गई नहरों के माध्यम से सूखा प्रभावित और कम वर्षा वाले क्षेत्रों में खेती के लिए पानी उपलब्ध कराया जाता है।
  2. जल विद्युत उत्पादन: बाँधों पर जल विद्युत संयंत्र लगाकर स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा का उत्पादन किया जाता है, जो देश की बिजली की जरूरतों को पूरा करता है।
  3. बाढ़ नियंत्रण: बाँध बरसात के मौसम में अतिरिक्त पानी को रोककर निचले इलाकों में बाढ़ की संभावना को कम करते हैं।
  4. पेयजल आपूर्ति: इन परियोजनाओं से शहरों और गाँवों को पीने का पानी उपलब्ध कराया जाता है।
  5. अन्य लाभ: इनसे मत्स्य पालन, नौका परिवहन, पर्यटन को बढ़ावा मिलता है और रोजगार के अवसर पैदा होते हैं।

बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजनाओं की हानियाँ:

  1. पारिस्थितिक असंतुलन: बड़े बाँध नदी के प्राकृतिक प्रवाह को रोक देते हैं, जिससे नदी की जैव विविधता, तलछट के बहाव पर बुरा प्रभाव पड़ता है और डेल्टा क्षेत्र सिकुड़ने लगते हैं।
  2. विस्थापन: बाँध बनाने से बड़े क्षेत्र के डूबने के कारण हजारों गाँवों और लोगों का विस्थापन होता है, जिससे उनकी आजीविका और सामाजिक जीवन प्रभावित होता है।
  3. मृदा अपरदन एवं लवणीकरण: नहर सिंचाई के अत्यधिक उपयोग से भूमि में लवण की मात्रा बढ़ सकती है (लवणीकरण) और भूमि की उर्वरता कम हो सकती है।
  4. जलजमाव एवं मच्छरजनित रोग: नहरों के आसपास जलजमाव से मलेरिया, डेंगू जैसी बीमारियाँ फैलने का खतरा बढ़ जाता है।
  5. अंतर-राज्यीय विवाद: नदी के पानी के बँटवारे को लेकर अक्सर अलग-अलग राज्यों के बीच विवाद पैदा हो जाते हैं।

प्रश्न 1. बड़े-बड़े बाँधों और तटबंधों की आवश्यकता पर जोर देते हुए इनकी उपयोगिता का वर्णन करें।

उत्तर-

बड़े बाँध और तटबंध जल संसाधनों के प्रबंधन में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनकी आवश्यकता और उपयोगिता निम्नलिखित बिंदुओं से स्पष्ट होती है:

1. जल संग्रहण एवं भंडारण: बाँध नदियों के बहते पानी को रोककर विशाल जलाशय बनाते हैं। यह भंडारण वर्ष भर, विशेषकर शुष्क मौसम में, जल की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करता है। तटबंध नदियों के किनारे बने दीवारनुमा ढाँचे होते हैं जो बाढ़ के पानी को बस्तियों और खेतों में फैलने से रोकते हैं।

2. कृषि विकास (सिंचाई): बाँधों से निकाली गई नहरें दूर-दूर तक सिंचाई का पानी पहुँचाती हैं। इससे कृषि उत्पादन में वृद्धि होती है, फसल चक्र में विविधता आती है और देश की खाद्य सुरक्षा मजबूत होती है।

3. ऊर्जा उत्पादन (जलविद्युत): बाँधों से उत्पन्न जलविद्युत एक स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत है। यह कोयले जैसे जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करके पर्यावरण संरक्षण में भी मदद करती है और देश की औद्योगिक प्रगति के लिए आवश्यक बिजली उपलब्ध कराती है।

4. बाढ़ नियंत्रण: बाँध बरसात के मौसम में अतिरिक्त पानी को अपने जलाशय में रोक लेते हैं, जिससे निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा कम हो जाता है। तटबंध सीधे तौर पर बाढ़ के पानी को रोकने का काम करते हैं।

5. पेयजल एवं औद्योगिक जल आपूर्ति: इन जलाशयों से बड़े शहरों और औद्योगिक इकाइयों को पानी की नियमित आपूर्ति की जाती है, जो शहरीकरण और औद्योगीकरण के लिए जरूरी है।

6. अन्य आर्थिक लाभ:

  • मत्स्य पालन: जलाशय मछली पालन के लिए उपयुक्त स्थान बन जाते हैं, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार और पोषण मिलता है।
  • पर्यटन: बाँध और उनके आसपास के क्षेत्र सुंदर पर्यटन स्थल बन जाते हैं, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को लाभ होता है।
  • नौका परिवहन: कुछ जलाशयों में नौकाओं द्वारा यातायात और माल ढुलाई की सुविधा भी विकसित की जा सकती है।

निष्कर्ष: इस प्रकार, बड़े बाँध और तटबंध बहुउद्देशीय परियोजनाओं के माध्यम से देश के आर्थिक विकास, कृषि सुरक्षा, ऊर्जा उत्पादन और आपदा प्रबंधन में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। हालाँकि, इनके निर्माण से होने वाले पारिस्थितिक नुकसान और सामाजिक विस्थापन के मुद्दों को ध्यान में रखते हुए इनका संतुलित और विवेकपूर्ण नियोजन आवश्यक है।

प्रश्न 2.

भारत के आर्थिक विकास में जल संसाधन का योगदान बताएँ।


उत्तर:
भारत की अर्थव्यवस्था के विभिन्न आयामों में जल संसाधन एक मूलभूत आधार का काम करता है। इसके योगदान को निम्नलिखित बिंदुओं से समझा जा सकता है:

  1. कृषि एवं खाद्य सुरक्षा: भारत की अर्थव्यवस्था कृषि पर बहुत अधिक निर्भर है। देश में मानसून की अनिश्चितता और वर्षा के असमान वितरण के कारण, सिंचाई के लिए नदियों, तालाबों, कुओं और नलकूपों के जल पर निर्भरता बहुत अधिक है। जल संसाधनों के प्रबंधन से सिंचाई सुविधाओं का विस्तार होता है, जिससे खाद्यान्न और नकदी फसलों का उत्पादन बढ़ता है। यह न केवल किसानों की आय बढ़ाता है बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा भी सुनिश्चित करता है, जो आर्थिक स्थिरता के लिए जरूरी है।
  2. ऊर्जा उत्पादन (जलविद्युत): जल संसाधनों का उपयोग पनबिजली (हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर) उत्पादन के लिए किया जाता है। जलविद्युत एक स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत है। यह ऊर्जा देश के उद्योगों, कारखानों, घरों और कृषि क्षेत्र को शक्ति प्रदान करती है, जिससे औद्योगिक उत्पादन बढ़ता है और राष्ट्रीय आय में वृद्धि होती है।
  3. उद्योगों के लिए आधारभूत आवश्यकता: लगभग सभी प्रमुख उद्योग जैसे स्टील, रसायन, कागज, वस्त्र आदि के उत्पादन प्रक्रिया में बड़ी मात्रा में जल की आवश्यकता होती है। जल संसाधनों की उपलब्धता इन उद्योगों की स्थापना और संचालन को संभव बनाती है, जिससे रोजगार सृजन और आर्थिक विकास को गति मिलती है।
  4. परिवहन एवं व्यापार: नदियों और नहरों के जलमार्गों का उपयोग सस्ते और कुशल परिवहन के लिए किया जाता है। यह माल के परिवहन की लागत को कम करता है, जिससे व्यापार और वाणिज्य को बढ़ावा मिलता है और देश की आर्थिक गतिविधियाँ सुचारू रूप से चलती हैं।
  5. पर्यटन एवं मनोरंजन: बाँधों, झीलों और नदियों के किनारे पर्यटन के आकर्षण केन्द्र विकसित होते हैं। यह पर्यटन उद्योग को बढ़ावा देता है, जिससे विदेशी मुद्रा की प्राप्ति होती है और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होते हैं।
  6. जल आपूर्ति एवं स्वच्छता: घरेलू और नगरीय जल आपूर्ति तथा स्वच्छता व्यवस्था पूरी तरह से जल संसाधनों पर निर्भर है। एक स्वस्थ कार्यबल देश की उत्पादकता के लिए आवश्यक है, और यह जल की उपलब्धता से ही संभव है।

इस प्रकार, जल संसाधन कृषि, उद्योग, ऊर्जा, परिवहन और सेवा क्षेत्रों के माध्यम से भारत के समग्र आर्थिक विकास में एक अनिवार्य और महत्वपूर्ण योगदान देता है। इसके समुचित प्रबंधन और संरक्षण से ही देश की अर्थव्यवस्था को टिकाऊ और संतुलित विकास का मार्ग मिल सकता है।

प्रश्न 3.

भारत की चार प्रमुख नदी घाटी परियोजनाओं का वर्णन करें।


उत्तर:
भारत में विभिन्न उद्देश्यों जैसे सिंचाई, बाढ़ नियंत्रण, जलविद्युत उत्पादन और पेयजल आपूर्ति की पूर्ति के लिए अनेक बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजनाएँ शुरू की गई हैं। इनमें से चार प्रमुख परियोजनाएँ निम्नलिखित हैं:

  1. भाखड़ा नांगल परियोजना:

    • यह भारत की सबसे बड़ी और प्रमुख बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजनाओं में से एक है।
    • यह परियोजना सतलुज नदी पर स्थित है और इसका मुख्य बाँध हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में है।
    • भाखड़ा बाँध विश्व के सबसे ऊँचे गुरुत्वीय बाँधों में से एक है, जिसकी ऊँचाई लगभग 225 मीटर है।
    • इससे पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश और दिल्ली को लाभ मिलता है।
    • लाभ:
      • लगभग 14 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई होती है, जिससे इन राज्यों में कृषि क्रांति आई है।
      • इससे लगभग 1200-1500 मेगावाट जलविद्युत का उत्पादन होता है, जिसने उत्तर भारत के औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
      • बाढ़ नियंत्रण में सहायक है।
      • गोबिंद सागर जलाशय पर्यटन को भी बढ़ावा देता है।
  2. दामोदर घाटी परियोजना:

    • इस परियोजना को "भारत का शोक" कही जाने वाली दामोदर नदी पर बाढ़ नियंत्रण और विकास के लिए शुरू किया गया था।
    • यह मुख्य रूप से झारखंड और पश्चिम बंगाल राज्यों में फैली हुई है।
    • इसमें दामोदर नदी और उसकी सहायक नदियों पर कई बाँध (जैसे तिलैया, कोनार, मैथन, पंचेत) बनाए गए हैं।
    • लाभ:
      • नदी पर नियंत्रण से बाढ़ की विभीषिका में कमी आई है।
      • लगभग 4 लाख हेक्टेयर से अधिक भूमि की सिंचाई की सुविधा मिलती है।
      • नहरों द्वारा नौका परिवहन की सुविधा उपलब्ध है।
      • लगभग 100 मेगावाट से अधिक जलविद्युत का उत्पादन होता है, जो इस कोयला क्षेत्र के औद्योगीकरण में सहायक है।
  3. हीराकुंड परियोजना:

    • यह परियोजना उड़ीसा (ओडिशा) राज्य में महानदी पर स्थित है।
    • हीराकुंड बाँध विश्व के सबसे लंबे बाँधों में से एक है, जिसकी मुख्य लंबाई लगभग 4.8 किलोमीटर है।
    • लाभ:
      • लगभग 1.5 लाख हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि को सिंचाई जल उपलब्ध कराता है।
      • महानदी घाटी में बाढ़ पर प्रभावी नियंत्रण प्रदान करता है।
      • इसकी जलविद्युत इकाइयों से लगभग 270 मेगावाट बिजली का उत्पादन होता है, जो राज्य के विकास में सहायक है।
      • हीराकुंड जलाशय मत्स्य पालन और पर्यटन को भी बढ़ावा देता है।
  4. तुंगभद्रा परियोजना:

    • यह एक संयुक्त परियोजना है जो कर्नाटक और आंध्र प्रदेश (अब तेलंगाना सहित) राज्यों द्वारा संचालित की जाती है।
    • यह परियोजना कृष्णा नदी की सहायक नदी तुंगभद्रा पर स्थित है। मुख्य बाँध कर्नाटक के होसपेट के पास है।
    • लाभ:
      • इससे दोनों राज्यों में लगभग 4 लाख हेक्टेयर (लगभग 3.35 लाख हेक्टेयर से अधिक) भूमि की सिंचाई होती है, जिससे कपास, गन्ना आदि नकदी फसलों के उत्पादन में वृद्धि हुई है।
      • परियोजना से उत्पन्न जलविद्युत दोनों राज्यों के उद्योगों और ग्रामीण विद्युतीकरण में सहायक है।
      • तुंगभद्रा जलाशय मछली पालन के लिए एक महत्वपूर्ण स्रोत बन गया है, जिससे स्थानीय लोगों को आजीविका के अवसर मिले हैं।

इन चारों परियोजनाओं ने न केवल क्षेत्रीय विकास को गति दी है बल्कि राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

जल संसाधन - प्रश्नोत्तर

1. पृथ्वी पर जल का वितरण किस प्रकार है?

पृथ्वी की सतह का लगभग 71% भाग जल से ढका है, जिसे हम जलमंडल कहते हैं। इस विशाल जलराशि का लगभग 97.5% भाग खारा जल है जो महासागरों और समुद्रों में पाया जाता है। मनुष्यों के उपयोग के लिए उपयुक्त मीठा जल केवल 2.5% ही है। इस 2.5% मीठे जल का भी अधिकांश भाग (लगभग 70%) हिमनदों और ध्रुवीय बर्फ की चादरों के रूप में जमा है। शेष भाग भूमिगत जल, नदियों, झीलों और वायुमंडल में नमी के रूप में उपलब्ध है।

2. जल संसाधन क्या है? इसके प्रकार बताइए।

जल संसाधन से तात्पर्य पृथ्वी पर उपलब्ध उन सभी जल स्रोतों से है जिनका उपयोग मानव अपनी विभिन्न आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए कर सकता है। यह एक अमूल्य प्राकृतिक संसाधन है जिस पर सभी जीवन निर्भर करता है।

जल संसाधन के प्रकार निम्नलिखित हैं:

(क) सतही जल: यह पृथ्वी की सतह पर पाया जाने वाला जल है, जैसे- नदियाँ, झीलें, तालाब, झरने और महासागर।
(ख) भूमिगत जल: यह जल पृथ्वी की सतह के नीचे चट्टानों की परतों के बीच जमा रहता है, जिसे कुओं और नलकूपों द्वारा निकाला जाता है।
(ग) वायुमंडलीय जल: यह जल वायुमंडल में जलवाष्प, बादलों, वर्षा, हिमपात आदि के रूप में उपलब्ध रहता है।

3. भारत में जल संसाधन की स्थिति क्या है?

भारत में जल संसाधन की स्थिति चुनौतीपूर्ण है। विश्व की लगभग 16% आबादी भारत में निवास करती है, जबकि देश के पास विश्व के कुल उपयोगी मीठे जल का केवल 4% ही उपलब्ध है। इसका अर्थ है कि प्रति व्यक्ति जल की उपलब्धता विश्व औसत से काफी कम है। देश में जल का वितरण भी असमान है; कुछ क्षेत्रों में बाढ़ आती है तो कुछ क्षेत्र सूखे से ग्रस्त रहते हैं। देश के कुल सतही जल का लगभग दो-तिहाई भाग केवल तीन बड़ी नदी प्रणालियों – सिंधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र – में प्रवाहित होता है।

4. जल संकट क्या है? इसके कारण बताइए।

जल संकट से तात्पर्य ऐसी स्थिति से है जब किसी क्षेत्र में पीने, सिंचाई, उद्योग और अन्य आवश्यक कार्यों के लिए पर्याप्त स्वच्छ जल उपलब्ध नहीं होता। विशेषज्ञ फॉल्कन मार्क के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति को प्रतिदिन 1000 घन मीटर से कम जल उपलब्ध हो, तो उसे जल संकट की स्थिति माना जाता है।

जल संकट के प्रमुख कारण हैं:
1. जल की मांग में तेजी से वृद्धि होना, क्योंकि जनसंख्या और औद्योगीकरण बढ़ रहा है।
2. जल का असमान वितरण और मौसमी वर्षा पर निर्भरता।
3. जल संसाधनों का अतिदोहन और अक्षम प्रबंधन।
4. जल प्रदूषण में वृद्धि, जिससे उपलब्ध जल का बड़ा हिस्सा उपयोग के योग्य नहीं रह जाता।
5. वनों की कटाई और भूमि के गलत उपयोग से भूमिगत जल का पुनर्भरण कम होना।

5. बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजना से क्या अभिप्राय है? भारत की किन्हीं दो प्रमुख परियोजनाओं के नाम बताइए।

बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजना एक ऐसी योजना है जिसमें एक ही नदी पर बांध बनाकर कई उद्देश्यों को एक साथ पूरा किया जाता है। इन परियोजनाओं को "आधुनिक भारत के मंदिर" भी कहा गया है।

इनके प्रमुख उद्देश्य हैं: सिंचाई के लिए जल उपलब्ध कराना, जलविद्युत उत्पादन, बाढ़ नियंत्रण, मत्स्य पालन, नौकायन, भूमिगत जल स्तर में सुधार और कभी-कभी पेयजल आपूर्ति भी।

भारत की दो प्रमुख बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजनाएँ हैं:
1. भाखड़ा नांगल परियोजना: यह सतलज नदी (हिमाचल प्रदेश व पंजाब) पर स्थित है। भाखड़ा बांध एशिया का सबसे ऊँचा गुरुत्वीय बांध है।
2. हीराकुंड परियोजना: यह महानदी (ओडिशा) पर स्थित है। हीराकुंड बांध विश्व का सबसे लंबा मिट्टी का बांध है।

6. बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजनाओं के लाभ बताइए।

बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजनाओं के निम्नलिखित लाभ हैं:
1. सिंचाई: इनसे नहरों के जाल द्वारा बड़े क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा मिलती है, जिससे कृषि उत्पादन बढ़ता है।
2. बाढ़ नियंत्रण: बांधों द्वारा नदी के बहाव को नियंत्रित कर बाढ़ की विभीषिका को कम किया जा सकता है।
3. जलविद्युत उत्पादन: इन परियोजनाओं से स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा का उत्पादन होता है, जो औद्योगिक विकास के लिए आवश्यक है।
4. मत्स्य पालन: बांधों से बने जलाशयों में मछली पालन को बढ़ावा मिलता है, जो रोजगार और पोषण का स्रोत है।
5. नौकायन व पर्यटन: बड़े जलाशय नौकायन के लिए उपयुक्त होते हैं और पर्यटन को बढ़ावा देते हैं।
6. भूमिगत जल स्तर: इनसे आस-पास के क्षेत्रों में भूमिगत जल के स्तर में वृद्धि होती है।

7. जल संरक्षण क्यों आवश्यक है? इसके उपाय बताइए।

जल संरक्षण इसलिए आवश्यक है क्योंकि जल एक सीमित और अनमोल संसाधन है। बढ़ती जनसंख्या, औद्योगीकरण और प्रदूषण के कारण उपयोगी जल की मात्रा तेजी से घट रही है। जल संकट से बचने और भविष्य की पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षित रखने के लिए इसका संरक्षण जरूरी है।

जल संरक्षण के प्रमुख उपाय निम्नलिखित हैं:
1. वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देना चाहिए। घरों, स्कूलों और सार्वजनिक भवनों की छतों से वर्षा जल को एकत्र कर भूमिगत टैंकों में संग्रहित किया जा सकता है।
2. सिंचाई की आधुनिक तकनीकें जैसे ड्रिप सिंचाई और स्प्रिंकलर सिस्टम अपनाना, जिससे पानी की बर्बादी रुके।
3. घरेलू स्तर पर जल का विवेकपूर्ण उपयोग करना, जैसे- नल टपकने न देना, शॉवर की जगह बाल्टी से नहाना, ब्रश करते समय नल बंद रखना।
4. नदियों, तालाबों और भूमिगत जल को प्रदूषित होने से बचाना। औद्योगिक और घरेलू कचरे को सीधे जल स्रोतों में नहीं बहाना चाहिए।
5. वृक्षारोपण को बढ़ावा देना, क्योंकि पेड़ वर्षा जल को भूमि में रिसने में मदद करते हैं और भूमिगत जल का पुनर्भरण करते हैं।

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