Bihar Board Class 10th Social Science (खण्ड-क) Chapter 1D खनिज संसाधन) Solutions
Here we have provided Solution for Chapter 1D खनिज संसाधन) of Social Science (खण्ड-क) subject for Class 10th students of Bihar Board of Secondary Education. There are various chapters in this Social Science (खण्ड-क) such as Chapter 1 भारत: संसाधन एवं उपयोग), Chapter 1A प्राकृतिक संसाधन), Chapter 1B जल संसाधन), Chapter 1C वन एवं वन्य प्राणी संसाधन), Chapter 1D खनिज संसाधन), Chapter 1E शक्ति (ऊर्जा) संसाधन), Chapter 2 कृषि), Chapter 3 निर्माण उद्योग), Chapter 4 परिवहन, संचार एवं व्यापार), Chapter 5 बिहार: कृषि एवं वन संसाधन), Chapter 5A बिहार: खनिज एवं ऊर्जा संसाधन), Chapter 5B बिहार: उद्योग एवं परिवहन), Chapter 5C बिहार: जनसंख्या एवं नगरीकरण) and Chapter 6 मानचित्र अध्ययन (उच्चावच निरूपण)). Summary of the same is given below:
| Board Name | Bihar Board of Secondary Education |
| Class | Class 10th |
| Content Type | Solution |
| Solution for | Class 10th students |
| Subject | Social Science (खण्ड-क) |
| Chapter Name | Chapter 1D खनिज संसाधन) |
| Total Number of Chapter in this Subject | 14 |
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Bihar Board Class 10th Social Science (खण्ड-क) Chapter 1D खनिज संसाधन) Solutions
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1. निम्नलिखित में से कौन-सा खनिज ऊर्जा का स्रोत नहीं है?
- लिग्नाइट
- पेट्रोलियम
- जस्ता
- प्राकृतिक गैस
उत्तर: जस्ता ऊर्जा का स्रोत नहीं है। यह एक धात्विक खनिज है जिसका उपयोग गैल्वनीकरण और मिश्र धातु बनाने में होता है। लिग्नाइट, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस सभी ऊर्जा के प्रमुख स्रोत हैं।
2. निम्नलिखित में से कौन-सा खनिज 'भूरा हीरा' के नाम से जाना जाता है?
- लौह अयस्क
- लिग्नाइट
- सोना
- चाँदी
उत्तर: लिग्नाइट को 'भूरा हीरा' के नाम से जाना जाता है। यह एक निम्न कोटि का कोयला है जिसका रंग भूरा या कालेपन लिए होता है और इसका कार्बन प्रतिशत कम होता है।
3. निम्नलिखित में से कौन-सा खनिज 'काले हीरे' के नाम से जाना जाता है?
- कोयला
- लौह अयस्क
- पेट्रोलियम
- बॉक्साइट
उत्तर: कोयला को 'काले हीरे' के नाम से जाना जाता है। यह उद्योगों की रीढ़ है और ऊर्जा का एक प्रमुख स्रोत होने के कारण इसे यह उपनाम दिया गया है।
4. निम्नलिखित में से कौन-सा खनिज परमाणु ऊर्जा का स्रोत है?
- बॉक्साइट
- यूरेनियम
- लौह अयस्क
- ताँबा
उत्तर: यूरेनियम परमाणु ऊर्जा का प्रमुख स्रोत है। इसके परमाणु विखंडन से भारी मात्रा में ऊर्जा उत्पन्न होती है, जिसका उपयोग परमाणु रिएक्टरों में बिजली बनाने के लिए किया जाता है।
5. निम्नलिखित में से कौन-सा खनिज मैग्नीशियम का अयस्क है?
- बॉक्साइट
- डोलोमाइट
- जिप्सम
- चूना पत्थर
उत्तर: डोलोमाइट मैग्नीशियम का एक प्रमुख अयस्क है। यह कैल्शियम और मैग्नीशियम कार्बोनेट से बना होता है और इसका उपयोग सीमेंट उद्योग तथा मैग्नीशियम धातु प्राप्त करने में किया जाता है।
6. निम्नलिखित में से कौन-सा खनिज अलौह खनिज है?
- लौह अयस्क
- ताँबा
- मैंगनीज
- टिन
उत्तर: ताँबा एक अलौह खनिज है। अलौह खनिज वे होते हैं जिनमें लोहा नहीं होता। ताँबा एक महत्वपूर्ण अलौह धातु है जिसका उपयोग बिजली के तार, सिक्के और मिश्र धातु बनाने में होता है।
7. भारत में सबसे अधिक लौह अयस्क किस राज्य में पाया जाता है?
- झारखण्ड
- ओडिशा
- कर्नाटक
- गोवा
उत्तर: ओडिशा भारत में सबसे अधिक लौह अयस्क का उत्पादन करने वाला राज्य है। यहाँ की प्रमुख खदानें क्योंझर, मयूरभंज और बोनाई क्षेत्र में स्थित हैं।
8. भारत में सबसे अधिक बॉक्साइट किस राज्य में पाया जाता है?
- झारखण्ड
- गुजरात
- ओडिशा
- महाराष्ट्र
उत्तर: ओडिशा भारत में बॉक्साइट का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है। यहाँ के कोरापुट, कालाहांडी और संबलपुर जिलों में बॉक्साइट के विशाल भंडार हैं।
9. भारत में सबसे अधिक मैंगनीज किस राज्य में पाया जाता है?
- मध्य प्रदेश
- महाराष्ट्र
- ओडिशा
- आंध्र प्रदेश
उत्तर: मध्य प्रदेश भारत में मैंगनीज का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है। बालाघाट और छिंदवाड़ा जिले यहाँ के प्रमुख उत्पादक क्षेत्र हैं।
10. भारत में सबसे अधिक ताँबा किस राज्य में पाया जाता है?
- झारखण्ड
- मध्य प्रदेश
- राजस्थान
- आंध्र प्रदेश
उत्तर: राजस्थान भारत में ताँबे का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है। खेतड़ी (झुंझुनू जिला) यहाँ की प्रसिद्ध ताँबे की खान है।
प्रश्न 2. धात्विक एवं अधात्विक खनिजों में क्या अंतर है ? तुलना करें।
| धात्विक खनिज | अधात्विक खनिज |
|---|---|
| 1. इन खनिजों को गलाने (पिघलाने) पर धातु प्राप्त होती है। | 1. इन खनिजों को गलाने पर धातु प्राप्त नहीं होती है। |
| 2. ये कठोर, चमकीले होते हैं और इनमें अपनी धात्विक चमक होती है। | 2. ये प्रायः चमकहीन होते हैं, हालाँकि कुछ (जैसे अभ्रक) में चमक हो सकती है। |
| 3. ये मुख्य रूप से आग्नेय एवं कायांतरित चट्टानों में पाए जाते हैं। | 3. ये मुख्य रूप से परतदार (अवसादी) चट्टानों में पाए जाते हैं। |
| 4. इन्हें पीटकर पतली चादर या तार बनाया जा सकता है, ये आघातवर्धनीय होते हैं और पीटने पर नहीं टूटते। | 4. इन्हें पीटकर तार नहीं बनाया जा सकता। ये भंगुर होते हैं और पीटने पर चूर-चूर हो जाते हैं। |
| 5. उदाहरण: लोहा, ताँबा, सोना, चाँदी, बॉक्साइट। | 5. उदाहरण: अभ्रक, चूना पत्थर, कोयला, ग्रेफाइट, नमक। |
प्रश्न 3. भारत के खनिज पट्टियों का नाम लिखकर किन्हीं दो का वर्णन करें।
भारत की प्रमुख खनिज पट्टियाँ:
- उत्तर-पूर्वी पठार की खनिज पट्टी
- दक्षिणी-पश्चिमी पठार की खनिज पट्टी
- उत्तर-पश्चिमी प्रदेश की खनिज पट्टी
1. उत्तर-पूर्वी पठार की खनिज पट्टी: यह भारत की सबसे धनी खनिज पट्टी है। इसमें छोटानागपुर का पठार (झारखंड), उड़ीसा का पठार, छत्तीसगढ़ का पठार और पूर्वी आंध्र प्रदेश के क्षेत्र शामिल हैं। इस पट्टी में लौह अयस्क, मैंगनीज, अभ्रक, बॉक्साइट, चूना पत्थर, डोलोमाइट, ताँबा, थोरियम, यूरेनियम, क्रोमाइट, सिलिमेनाइट और फॉस्फेट जैसे खनिजों के विशाल भंडार पाए जाते हैं। यह क्षेत्र भारत के औद्योगिक विकास का आधार है।
2. दक्षिणी-पश्चिमी पठार की खनिज पट्टी: इस पट्टी का विस्तार गुजरात की खंभात की खाड़ी से लेकर राजस्थान के अरावली पर्वत श्रृंखलाओं तक है। यहाँ मुख्य रूप से अलौह धातुएँ जैसे चाँदी, सीसा, जस्ता और ताँबा पाई जाती हैं। इसके अलावा, यहाँ बलुआ पत्थर, ग्रेनाइट, संगमरमर, जिप्सम, मुल्तानी मिट्टी, डोलोमाइट, चूना पत्थर और नमक के भी पर्याप्त भंडार हैं। राजस्थान का इस पट्टी में महत्वपूर्ण योगदान है।
प्रश्न 4. लौह अयस्क का वर्गीकरण कर उनकी विशेषताओं को लिखें।
लौह अयस्क मुख्य रूप से तीन प्रकार के होते हैं, जिनका वर्गीकरण और विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
| क्रम | प्रकार | लौह अंश | विशेषताएँ एवं अन्य नाम |
|---|---|---|---|
| 1. | हेमेटाइट | लगभग 60% से 68% | इसमें लौह की मात्रा सबसे अधिक होती है। इसे लाल अयस्क भी कहते हैं क्योंकि इसका रंग लालिमा लिए हुए भूरा या लाल होता है। यह भारत में सबसे अधिक पाया जाने वाला लौह अयस्क है। |
| 2. | मैग्नेटाइट | लगभग 60% से 72% | यह सबसे उच्च कोटि का चुंबकीय लौह अयस्क है। इसे काला अयस्क कहा जाता है। इसका रंग काला होता है और यह चुंबकीय गुण रखता है। |
| 3. | लिमोनाइट | लगभग 40% से 60% | इसमें लौह की मात्रा कम होती है और अशुद्धियाँ अधिक होती हैं। इसे पीला अयस्क या बादामी अयस्क भी कहते हैं क्योंकि इसका रंग पीला या भूरा होता है। |
महत्व: लौह अयस्क को 'उद्योगों की जननी' और 'आधुनिक सभ्यता की रीढ़' कहा जाता है, क्योंकि इस्पात निर्माण और भारी उद्योगों का आधार यही है।
प्रश्न 5. भारत में लौह अयस्क के वितरण पर प्रकाश डालें।
भारत लौह अयस्क के विशाल भंडार वाला देश है। देश के कुल भंडार का लगभग 96% भाग केवल पाँच राज्यों – ओडिशा, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, झारखंड और गोवा – में केंद्रित है। शेष भंडार तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र आदि राज्यों में हैं।
प्रमुख उत्पादक राज्य:
- कर्नाटक: देश का सबसे बड़ा लौह अयस्क उत्पादक राज्य है (कुल उत्पादन का लगभग 25%)। प्रमुख खानें बेल्लारी, होस्पेट और सुदूर क्षेत्रों में स्थित हैं।
- छत्तीसगढ़: दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक राज्य (लगभग 20%)। दंतेवाड़ा जिले की बैलाडिला खानें प्रसिद्ध हैं। दुर्ग जिले में डल्ली-राजहरा क्षेत्र भी महत्वपूर्ण है। यहाँ का अधिकांश लौह अयस्क विशाखापत्तनम बंदरगाह से जापान को निर्यात किया जाता है।
- ओडिशा: तीसरा बड़ा उत्पादक राज्य (लगभग 19%)। प्रमुख खानें गुरुमहिसानी, बादामपहाड़ (मयूरभंज) और किरीबुरु में हैं।
- गोवा: चौथा बड़ा उत्पादक राज्य (लगभग 16%)। यहाँ की प्रमुख खानें सांक्वालिम, पिरना, वेरेन आदि में हैं। मर्मुगाओ बंदरगाह से लौह अयस्क का निर्यात होता है।
- झारखंड: पाँचवाँ बड़ा उत्पादक राज्य (लगभग 15% से अधिक)। प्रमुख उत्पादक जिले पश्चिम सिंहभूम, पलामू, धनबाद, हजारीबाग और राँची हैं।
अन्य राज्य: महाराष्ट्र (चंद्रपुर, रत्नागिरि), आंध्र प्रदेश (करिमनगर, खम्मम) और तमिलनाडु (सलेम, नीलगिरि) में भी लौह अयस्क के भंडार हैं।
प्रश्न 6. मैंगनीज तथा बॉक्साइट की उपयोगिता तथा देश में इनके वितरण का वर्णन कीजिए।
(क) मैंगनीज:
उपयोगिता: मैंगनीज एक रणनीतिक खनिज है। इसका सबसे महत्वपूर्ण उपयोग जंगरोधी इस्पात बनाने में होता है। इसके अलावा इसका उपयोग लोहे और मैंगनीज की मिश्रधातु बनाने, शुष्क सेल (बैटरी), फोटोग्राफी, चमड़ा व माचिस उद्योग, पेंट और कीटनाशक दवाओं के निर्माण में भी किया जाता है। भारत के कुल उत्पादन का लगभग 85% भाग मिश्रधातु बनाने में खपत होता है।
भारत में वितरण: मैंगनीज उत्पादन में भारत का विश्व में तीसरा स्थान है। देश के प्रमुख उत्पादक राज्य हैं:
- ओडिशा: अग्रणी उत्पादक राज्य (कुल उत्पादन का लगभग 37.6%)। प्रमुख जिले – सुंदरगढ़, कालाहांडी, रायगढ़, मयूरभंज।
- महाराष्ट्र: दूसरा बड़ा उत्पादक (लगभग एक-चौथाई)। प्रमुख क्षेत्र – नागपुर और भंडारा जिलों की पट्टी। रत्नागिरि में भी उच्च कोटि का मैंगनीज मिलता है।
- मध्य प्रदेश: तीसरा बड़ा उत्पादक (लगभग 21%)। प्रमुख जिले – बालाघाट और छिंदवाड़ा।
- कर्नाटक: प्रमुख जिले – शिमोगा, बेल्लारी, चित्रदुर्ग।
- आंध्र प्रदेश: प्रमुख जिले – श्रीकाकुलम, विशाखापत्तनम।
(ख) बॉक्साइट:
उपयोगिता: बॉक्साइट एल्युमिनियम धातु का प्रमुख अयस्क है। एल्युमिनियम हल्की, मजबूत, संक्षारण-रोधी और विद्युत की सुचालक धातु है। इसका उपयोग वायुयान, ऑटोमोबाइल, रेलगाड़ी, बिजली के तार, पैकेजिंग (एल्युमिनियम फॉयल), बर्तन, निर्माण सामग्री आदि के निर्माण में होता है।
भारत में वितरण: भारत में बॉक्साइट के विशाल भंडार हैं, जो हमें एल्युमिनियम उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाते हैं। प्रमुख उत्पादक राज्य हैं:
- ओडिशा: सबसे बड़ा उत्पादक राज्य। कोरापुट, कालाहांडी, संबलपुर और बोलांगीर प्रमुख जिले हैं।
- गुजरात: भारत का दूसरा सबसे बड़ा बॉक्साइट उत्पादक राज्य है। जामनगर और कच्छ जिले प्रमुख हैं।
- झारखंड: लोहरदगा और गुमला प्रमुख जिले हैं।
- महाराष्ट्र: कोल्हापुर, रत्नागिरि और सतारा जिले प्रमुख हैं।
- छत्तीसगढ़: मुख्य भंडार अमरकंटक पठार के क्षेत्र में हैं।
प्रश्न 7.
अभ्रक की उपयोगिता एवं वितरण पर प्रकाश डालें।।
उत्तर:
अभ्रक एक महत्वपूर्ण अधात्विक खनिज है जो अपने विशेष गुणों के कारण विभिन्न उद्योगों में उपयोगी है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह एक उत्कृष्ट विद्युत रोधक (Insulator) है और उच्च तापमान को भी सहन कर सकता है। इसीलिए पारंपरिक रूप से इसका सबसे अधिक उपयोग विद्युत और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, जैसे कि कंडेंसर, ट्रांसफार्मर और हीटर बनाने में किया जाता रहा है। इसके अलावा, इसका उपयोग खिड़कियों के रूप में भट्ठियों (फर्नेस) में, कुछ प्रकार के सीमेंट, पेंट, प्लास्टिक और कॉस्मेटिक्स में चमक पैदा करने के लिए भी होता है। आयुर्वेद में भी इसका प्रयोग किया जाता है। हालाँकि, अब कई सिंथेटिक विकल्प उपलब्ध होने से इसकी मांग में कुछ कमी आई है।
भारत में अभ्रक का वितरण: भारत दुनिया में शीट अभ्रक का एक प्रमुख उत्पादक रहा है। अभ्रक के भंडार मुख्य रूप से तीन पट्टियों (बेल्ट) में पाए जाते हैं:
- बिहार-झारखंड पट्टी: यह भारत की सबसे महत्वपूर्ण अभ्रक पट्टी है, जो देश के कुल उत्पादन का लगभग 80% हिस्सा देती है। यह पट्टी पश्चिम में गया (बिहार) से शुरू होकर हजारीबाग, कोडरमा, मुंगेर, भागलपुर (बिहार) और राँची, पलामू, धनबाद, सिंहभूम (झारखंड) तक फैली हुई है। यहाँ उच्च गुणवत्ता वाला रूबी अभ्रक मिलता है।
- राजस्थान पट्टी: यह देश का दूसरा प्रमुख उत्पादक क्षेत्र है। अभ्रक की यह पट्टी जयपुर, उदयपुर, भीलवाड़ा, अजमेर और टोंक जिलों में फैली है।
- आंध्र प्रदेश पट्टी: यहाँ अभ्रक के भंडार नेल्लोर (पूर्व में नैगूर) जिले में पाए जाते हैं।
भारत से अभ्रक का निर्यात किया जाता था, जिसके प्रमुख ग्राहक अमेरिका (यू.एस.ए.), यूनाइटेड किंगडम (यू.के.), जापान आदि देश थे।
प्रश्न 8. खनिजों के संरक्षण के उपाय सुझायें।
उत्तर:
खनिज अनवीकरणीय संसाधन हैं, यानी एक बार इनका दोहन हो जाने के बाद इनका पुनर्निर्माण नहीं हो सकता। औद्योगिक विकास के लिए इनकी आवश्यकता है, लेकिन इनके अंधाधुंध दोहन से ये जल्द ही समाप्त हो सकते हैं। इसलिए इनका विवेकपूर्ण उपयोग और संरक्षण अत्यंत जरूरी है। खनिजों के संरक्षण के लिए निम्नलिखित उपाय सुझाए जा सकते हैं:
- खनन पर नियंत्रण एवं वैज्ञानिक तकनीक: खनन गतिविधियों पर सख्त नियंत्रण रखा जाए और केवल आवश्यकता के अनुसार ही खनन की अनुमति दी जाए। आधुनिक वैज्ञानिक तरीकों से खनन करके कचरे को कम किया जा सकता है और खनिज का अधिकतम दोहन सुनिश्चित किया जा सकता है।
- पुनर्चक्रण (Recycling): धातुओं जैसे लोहा, ताँबा, एल्युमीनियम, सीसा आदि का पुनर्चक्रण करके उनका बार-बार उपयोग किया जा सकता है। इससे नए खनिजों पर निर्भरता कम होती है।
- विकल्पों की खोज: दुर्लभ या महंगे खनिजों के स्थान पर सस्ते और प्रचुर मात्रा में उपलब्ध विकल्पों का उपयोग बढ़ाना चाहिए। उदाहरण के लिए, प्लास्टिक, फाइबर ग्लास या सिरेमिक का उपयोग कई जगह धातु के विकल्प के रूप में किया जा सकता है।
- कुशल उपयोग एवं बचत: उद्योगों और दैनिक जीवन में खनिजों का कुशलतापूर्वक और मितव्ययिता से उपयोग करना चाहिए ताकि बर्बादी रोकी जा सके।
- पर्यावरणीय प्रबंधन: खनन से होने वाले पर्यावरणीय नुकसान, जैसे मिट्टी का कटाव, जल प्रदूषण और वनों की कटाई, को रोकने के उपाय करने चाहिए। खदानों के पुनर्ग्रहण (Reclamation) का कार्य किया जाना चाहिए।
- जन जागरूकता: आम लोगों और उद्योगपतियों को खनिजों के संरक्षण के महत्व के बारे में शिक्षित करना चाहिए।
मानचित्र कार्य
प्रश्न 1.
भारत क एक मानचित्र पर महत्वपूर्ण खनिजों के वितरण को दर्शाइये।
उत्तर:
छात्र स्वयं भारत के रेखा मानचित्र पर निम्नलिखित प्रमुख खनिजों और उनके उत्पादक क्षेत्रों को अंकित करें: लौह अयस्क (ओडिशा, झारखंड, छत्तीसगढ़), मैंगनीज (ओडिशा, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र), बॉक्साइट (ओडिशा, गुजरात, झारखंड), ताँबा (झारखंड, मध्य प्रदेश, राजस्थान), अभ्रक (झारखंड, राजस्थान, आंध्र प्रदेश), कोयला (झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा)।
प्रश्न 2.
लौह अयस्क के मुख्य उत्पादक केन्द्रों को भारत के मानचित्र में अंकित कीजिये।
उत्तर:
छात्र स्वयं भारत के मानचित्र पर लौह अयस्क के प्रमुख उत्पादक केंद्रों जैसे - ओडिशा में क्योंझर, मयूरभंज, बोनाई; झारखंड में सिंहभूम, पश्चिमी एवं पूर्वी सिंहभूम; छत्तीसगढ़ में बस्तर, दुर्ग, राजनांदगाँव; कर्नाटक में बेल्लारी, चिकमगलूर; और गोवा में प्रमुख खदानों को अंकित करें।
प्रश्न 3.
पूरे पृष्ठ पर भारत का मानचित्र बनाकर निम्नलिखित को दिखाइये : मैंगनीज, बॉक्साइट तथा ताँबा उत्पादक क्षेत्र।
उत्तर:
छात्र स्वयं एक बड़े भारत के मानचित्र पर तीन अलग-अलग रंगों या चिन्हों का प्रयोग करके निम्न क्षेत्र दर्शाएँ:
मैंगनीज: ओडिशा (क्योंझर, सुंदरगढ़), मध्य प्रदेश (बालाघाट, छिंदवाड़ा), महाराष्ट्र (नागपुर, भंडारा)।
बॉक्साइट: ओडिशा (कालाहांडी, संबलपुर), गुजरात (जामनगर, कच्छ), झारखंड (लोहरदगा, पलामू)।
ताँबा: झारखंड (सिंहभूम), मध्य प्रदेश (बालाघाट), राजस्थान (झुंझुनू, अलवर)।
प्रश्न 4.
विभिन्न चट्टानों तथा खनिजों के टुकड़े उपलब्ध कर भूगोल प्रयोगशाला में संग्रह कीजिये।
उत्तर:
छात्र स्वयं अपने शिक्षक/शिक्षिका के मार्गदर्शन में स्थानीय स्तर पर उपलब्ध विभिन्न प्रकार की चट्टानों (आग्नेय-ग्रेनाइट, बेसाल्ट; अवसादी-बलुआ पत्थर, चूना पत्थर; रूपांतरित-संगमरमर, स्लेट) और खनिजों (क्वार्ट्ज, अभ्रक, फेल्डस्पार, लौह अयस्क का नमूना, चूना पत्थर आदि) के छोटे-छोटे नमूने एकत्रित करके उन्हें सही लेबल लगाकर प्रयोगशाला में संग्रहित करें।
Bihar Board Class 10 Geography last Bare Additional Important Questions and Answers
वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1.
निम्नांकित किस खनिज में भारत सुसम्पन्न है ?
(क) तांबा
(ख) लोहा
(ग) सोना
(घ) चाँदी
उत्तर: (ख) लोहा
प्रश्न 2.
इनमें कौन लौह अयस्क वहीं है ?
(क) हैमाठाइट
(ख) मैग्नेठाइट
(ग) ऐंथ्रासाइट
(घ) लाइमोनाइट
उत्तर: (ग) ऐंथ्रासाइट
(नोट: ऐंथ्रासाइट कोयले का एक प्रकार है, लौह अयस्क नहीं। अन्य तीनों विकल्प लौह अयस्क के प्रकार हैं।)
प्रश्न 3.
इनमें कौन लोहे का निर्यात व्यापार नहीं करता है ?
(क) मुंबई
(ख) कोलकाता
(ग) पारादीप
(घ) विशाखापत्तनम
उत्तर: (क) मुंबई
प्रश्न 4.
इनमें कौन मैग्नीज का महत्वपूर्ण उत्पादक वहीं है ?
(क) उड़ीसा
(ख) कर्नाटक
(ग) तमिलनाडु
(घ) महाराष्ट्र
उत्तर: (ग) तमिलनाडु
प्रश्न 5.
झारखण्ड का कोडरमा किस खनिज उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है ?
(क) तांबा
(ख) बॉक्साइट
(ग) अबरख
(घ) लौह अयस्क
उत्तर: (ग) अबरख
प्रश्न 6.
किस प्रकार की चट्टानों में खनिजों का जमाव परतों में मिलता है ?
(क) आग्रनेय
(ख) अवसादी
(ग) रूपान्तरित
(घ) इनमें किसी में नहीं
उत्तर: (ख) अवसादी
अतिलघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1.
क्लोरीन, ब्रोमीन और आयोडीन का सामूहिक नाम क्या है ?
उत्तर: क्लोरीन, ब्रोमीन और आयोडीन का सामूहिक नाम हैलोजन है।
प्रश्न 2.
पीतल और काँसे में किस मूल घातु का उपयोग होता है?
उत्तर: पीतल बनाने के लिए ताँबा और जस्ता मूल धातुओं का उपयोग होता है, जबकि काँसा बनाने के लिए ताँबे में टिन मिलाया जाता है।
प्रश्न 3.
जहाजों के ढाँचे के निर्माण में किस.घातु का उपयोग होता है ?
उत्तर: जहाजों के ढाँचे (हुल) के निर्माण में मुख्य रूप से इस्पात (लोहा और कार्बन का मिश्रधातु) का उपयोग होता है। बॉक्साइट से बनने वाला एल्युमीनियम भी हल्के जहाजों और नावों में प्रयुक्त होता है।
प्रश्न 4.
स्टेनलेस स्टील में लोहे के साथ किस धातु को मिलाया जाता है ?
उत्तर: स्टेनलेस स्टील बनाने के लिए लोहे के साथ निकेल और क्रोमियम धातु मिलाई जाती है, जो इसे जंगरोधी और चमकदार बनाती है।
प्रश्न 5.
दक्षिण अमेरिकी देश अर्जेटीना का नाम किस घातु की उपलब्धता के कारण रखा गया है?
उत्तर: दक्षिण अमेरिकी देश अर्जेंटीना का नाम चाँदी धातु के लैटिन नाम 'अर्जेंटम' (Argentum) से लिया गया है, क्योंकि उस क्षेत्र में चाँदी के भंडार पाए गए थे।
1. निम्नलिखित में से कौन-सा खनिज ऊर्जा का अनवीकरणीय स्रोत है?
कोयला (Coal) ऊर्जा का एक अनवीकरणीय स्रोत है। अनवीकरणीय संसाधन वे हैं जो प्रकृति में सीमित मात्रा में उपलब्ध हैं और एक बार उपयोग करने के बाद लाखों वर्षों में ही बन पाते हैं। कोयला, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस जीवाश्म ईंधन हैं जो अनवीकरणीय हैं।
2. निम्नलिखित में से कौन-सा खनिज 'भूरा हीरा' कहलाता है?
लिग्नाइट (Lignite) को 'भूरा हीरा' कहा जाता है। यह कोयले का एक निम्न कोटि का प्रकार है जिसमें कार्बन की मात्रा कम (लगभग 60-70%) होती है और यह नरम, भूरे रंग का होता है। इसका उपयोग मुख्य रूप से बिजली उत्पादन के लिए किया जाता है।
3. निम्नलिखित में से कौन-सा खनिज मैग्मा के ठंडा होने से बनता है?
ग्रेनाइट (Granite) एक आग्नेय चट्टान है जो पृथ्वी की सतह के नीचे मैग्मा के धीरे-धीरे ठंडा होने और ठोस होने से बनती है। इस प्रक्रिया में बड़े-बड़े क्रिस्टल बनते हैं, जिससे ग्रेनाइट का दानेदार बनावट वाला ढाँचा तैयार होता है।
4. निम्नलिखित में से कौन-सा खनिज बॉक्साइट का अयस्क है?
एल्युमिनियम (Aluminium) का प्रमुख अयस्क बॉक्साइट है। बॉक्साइट एक चट्टान है जिसमें एल्युमिनियम के खनिज जैसे गिब्साइट, बोहमाइट और डायस्पोर मिले होते हैं। एल्युमिनियम धातु को इसी अयस्क से प्राप्त किया जाता है।
5. निम्नलिखित में से कौन-सा खनिज परिवहन उद्योग के लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण है?
पेट्रोलियम (Petroleum) परिवहन उद्योग के लिए सबसे महत्वपूर्ण खनिज है। पेट्रोलियम से प्राप्त पेट्रोल, डीजल और एविएशन फ्यूल वाहनों, जहाजों और विमानों को चलाने का प्रमुख ईंधन है। आधुनिक परिवहन प्रणाली काफी हद तक पेट्रोलियम उत्पादों पर निर्भर है।
6. निम्नलिखित में से कौन-सा खनिज 'जीवाश्म ईंधन' नहीं है?
यूरेनियम (Uranium) एक जीवाश्म ईंधन नहीं है। जीवाश्म ईंधन (जैसे कोयला, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस) प्राचीन जीवों के अवशेषों से बने हैं, जबकि यूरेनियम एक रेडियोधर्मी धात्विक खनिज है जिसका उपयोग परमाणु ऊर्जा के उत्पादन में किया जाता है।
7. निम्नलिखित में से कौन-सा खनिज 'काला सोना' कहलाता है?
पेट्रोलियम (Petroleum) को अक्सर 'काला सोना' कहा जाता है। यह नाम इसकी अत्यधिक आर्थिक महत्ता, काले रंग और तरल स्वरूप के कारण दिया गया है। पेट्रोलियम आधुनिक औद्योगिक अर्थव्यवस्था की रीढ़ है।
8. निम्नलिखित में से कौन-सा खनिज 'प्लेटिनम समूह' से संबंधित है?
इरिडियम (Iridium) प्लेटिनम समूह का एक दुर्लभ और मूल्यवान धात्विक खनिज है। प्लेटिनम समूह के खनिजों (PGMs) में प्लेटिनम, पैलेडियम, रोडियम, रुथेनियम, ऑस्मियम और इरिडियम शामिल हैं। ये धातुएँ उच्च तापमान और संक्षारण प्रतिरोधी होती हैं।
9. निम्नलिखित में से कौन-सा खनिज 'अलौह खनिज' है?
ताँबा (Copper) एक अलौह खनिज है। अलौह खनिज वे हैं जिनमें लोहा (Iron) नहीं होता। ताँबा एक अच्छा विद्युत और ताप का संवाहक है और इसका उपयोग बिजली के तार, इलेक्ट्रॉनिक्स और मिश्र धातु बनाने में किया जाता है।
10. निम्नलिखित में से कौन-सा खनिज 'चुंबकीय गुण' रखता है?
मैग्नेटाइट (Magnetite) एक लौह अयस्क है जिसमें प्रबल चुंबकीय गुण पाए जाते हैं। यह आयरन ऑक्साइड (Fe3O4) से बना होता है और प्राकृतिक रूप से चुंबकीय होता है, इसीलिए इसका नाम मैग्नेटाइट पड़ा है।
11. खनिज किसे कहते हैं? खनिजों के वर्गीकरण का वर्णन करें।
खनिज (Mineral): खनिज प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले ऐसे अकार्बनिक पदार्थ हैं जिनकी एक निश्चित रासायनिक संरचना और भौतिक गुण होते हैं। ये पृथ्वी की पपड़ी में विभिन्न प्रकार की चट्टानों में पाए जाते हैं।
खनिजों का वर्गीकरण (Classification of Minerals): खनिजों को उनके रासायनिक और उपयोगिता के आधार पर निम्नलिखित वर्गों में बाँटा जा सकता है:
- धात्विक खनिज (Metallic Minerals): इनमें धातु होती है और ये चमकदार होते हैं।
- लौह खनिज (Ferrous): इनमें लोहा प्रमुख होता है। जैसे – लौह अयस्क, मैंगनीज, निकल, कोबाल्ट।
- अलौह खनिज (Non-Ferrous): इनमें लोहा नहीं होता। जैसे – ताँबा, सीसा, जस्ता, बॉक्साइट (एल्युमिनियम)।
- कीमती खनिज (Precious): ये दुर्लभ और उच्च मूल्य वाले होते हैं। जैसे – सोना, चाँदी, प्लेटिनम।
- अधात्विक खनिज (Non-Metallic Minerals): इनमें धातु नहीं होती और ये चमकरहित होते हैं।
- जैसे – चूना पत्थर, जिप्सम, अभ्रक, पोटाश, नमक, फॉस्फेट।
- ऊर्जा खनिज (Energy Minerals): ये ऊर्जा के स्रोत के रूप में उपयोग किए जाते हैं।
- जैसे – कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, यूरेनियम।
12. भारत में लौह-अयस्क के वितरण का वर्णन करें।
भारत लौह-अयस्क के विशाल भंडार वाला देश है और इसका वितरण मुख्य रूप से प्रायद्वीपीय पठार के क्षेत्रों में है। मुख्य वितरण क्षेत्र इस प्रकार हैं:
- ओडिशा-झारखंड क्षेत्र: यह भारत का सबसे महत्वपूर्ण लौह-अयस्क क्षेत्र है।
- ओडिशा: मयूरभंज और क्योंझर जिलों में बड़े भंडार। गुरुमहिसानी, सुलाएपत, बादामपहाड़ प्रमुख खदानें हैं।
- झारखंड: सिंहभूम जिले में नोआमुंडी और गुआ प्रमुख खदानें हैं। पश्चिमी सिंहभूम में लौह अयस्क की उच्च गुणवत्ता वाली पट्टी है।
- दुर्ग-बस्तर-चंद्रपुर पट्टी (छत्तीसगढ़-महाराष्ट्र):
- छत्तीसगढ़: बैलाडिला पहाड़ियों (बस्तर) में विश्व के सर्वोत्तम हेमेटाइट अयस्क के विशाल भंडार हैं। दल्ली-राजहरा भी प्रमुख क्षेत्र है।
- महाराष्ट्र: चंद्रपुर, भंडारा और रत्नागिरि जिलों में लौह अयस्क पाया जाता है।
- बेल्लारी-चित्रदुर्ग-चिकमगलूर पट्टी (कर्नाटक): बेल्लारी, होसपेट, चिकमगलूर और चित्रदुर्ग जिलों में लौह अयस्क के भंडार हैं।
- अन्य राज्य:
- गोआ: गोआ में भी लौह अयस्क का उत्पादन होता है, हालाँकि यहाँ के अयस्क की गुणवत्ता कम होती है।
- तमिलनाडु: सेलम और नीलगिरि जिलों में कुछ मात्रा में लौह अयस्क पाया जाता है।
- आंध्र प्रदेश: कुरनूल, कडप्पा और अनंतपुर जिलों में भंडार हैं।
भारत में पाए जाने वाले लौह अयस्क मुख्यतः दो प्रकार के हैं – हेमेटाइट (उच्च गुणवत्ता, लाल रंग) और मैग्नेटाइट (चुंबकीय गुण वाला)।
13. ताँबा उत्पादन में भारत के प्रमुख राज्यों का वर्णन करें।
भारत में ताँबे के उत्पादन और भंडार मुख्य रूप से निम्नलिखित राज्यों में केंद्रित हैं:
- मध्य प्रदेश (सबसे बड़ा उत्पादक): मध्य प्रदेश का मालनजखंड खनन क्षेत्र (बालाघाट जिला) देश का सबसे बड़ा ताँबा उत्पादक है। यहाँ ताँबे के विशाल भंडार हैं।
- राजस्थान: राजस्थान ताँबा उत्पादन में दूसरे स्थान पर है।
- खेतड़ी-सिंघाना क्षेत्र (झुंझुनू जिला): यह एक प्रमुख ताँबा खनन क्षेत्र है।
- अलवर, भीलवाड़ा और उदयपुर जिलों में भी ताँबे के भंडार पाए जाते हैं।
- झारखंड: झारखंड के सिंहभूम जिले (विशेषकर मोसाबनी और राखा क्षेत्र) में ताँबे की खदानें हैं। यह क्षेत्र देश के प्राचीनतम ताँबा उत्पादक क्षेत्रों में से एक है।
- आंध्र प्रदेश: आंध्र प्रदेश के अग्निगुंडला क्षेत्र (प्रकाशम जिला) में ताँबे का उत्पादन होता है।
- गुजरात और कर्नाटक: इन राज्यों में भी ताँबे के छोटे भंडार हैं और सीमित उत्पादन होता है।
भारत में ताँबे का उत्पादन देश की आवश्यकता को पूरा नहीं कर पाता, इसलिए हमें ताँबा आयात भी करना पड़ता है। ताँबे का उपयोग बिजली के तार, इलेक्ट्रॉनिक्स, मिश्र धातुएँ (जैसे पीतल, कांसा) और औद्योगिक मशीनों में किया जाता है।
14. खनिज संरक्षण के उपाय लिखें।
खनिज अनवीकरणीय संसाधन हैं, इसलिए इनका विवेकपूर्ण उपयोग और संरक्षण अत्यंत आवश्यक है। खनिज संरक्षण के प्रमुख उपाय निम्नलिखित हैं:
- खनन में आधुनिक तकनीक का उपयोग: पारंपरिक तरीकों की जगह वैज्ञानिक और उन्नत खनन तकनीकों का प्रयोग करना चाहिए ताकि खनिज का न्यूनतम अपव्यय हो और अयस्क का अधिकतम निष्कर्षण हो सके।
- पुनर्चक्रण (Recycling): धातुओं (जैसे लोहा, ताँबा, एल्युमिनियम, सीसा) का पुनर्चक्रण करके उनका पुनः उपयोग किया जा सकता है। इससे नए खनिजों पर निर्भरता कम होती है और ऊर्जा की बचत भी होती है।
- विकल्पों का उपयोग: जहाँ संभव हो, खनिजों के स्थान पर वैकल्पिक सामग्री का उपयोग करना चाहिए। उदाहरण के लिए, प्लास्टिक पाइप के लिए धातु के पाइप के स्थान पर, या सौर ऊर्जा के लिए कोयले के स्थान पर।
- क्षय को रोकना: खनिजों के भंडारण और परिवहन के दौरान होने वाले क्षय (जैसे जंग लगना) को रोकने के उपाय करने चाहिए।
- जन जागरूकता: आम जनता और उद्योगों को खनिजों के संरक्षण के महत्व के बारे में शिक्षित करना चाहिए।
- कुशल उपयोग एवं नियंत्रण: खनिजों का उपयोग अधिक कुशलता से करना चाहिए और उनके दुरुपयोग पर रोक लगानी चाहिए। सरकार को नीतियाँ बनाकर खनिजों के उपयोग को नियंत्रित करना चाहिए।
- अन्वेषण एवं सर्वेक्षण: नए भंडारों की खोज के लिए वैज्ञानिक सर्वेक्षण को बढ़ावा देना चाहिए ताकि मौजूदा भंडारों पर दबाव कम हो।
- पर्यावरणीय प्रबंधन: खनन से होने वाले पर्यावरणीय नुकसान (जैसे मृदा अपरदन, वनों की कटाई, जल प्रदूषण) को कम करने के उपाय करने चाहिए और खदानों के पुनर्ग्रहण (Reclamation) पर ध्यान देना चाहिए।
इन उपायों को अपनाकर ही हम खनिज संसाधनों को भविष्य की पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रख सकते हैं।
Bihar Board Class 10 Social Science (खण्ड-क)
Chapter 1D: खनिज संसाधन
1. खनिज किसे कहते हैं?
खनिज एक प्राकृतिक रूप से बना हुआ ऐसा पदार्थ है जिसकी एक निश्चित रासायनिक संरचना और भौतिक गुण होते हैं। यह पृथ्वी की पपड़ी में विभिन्न प्रकार की चट्टानों में पाया जाता है। खनिज दो प्रकार के होते हैं – धात्विक (जैसे लोहा, ताँबा) और अधात्विक (जैसे कोयला, अभ्रक)।
2. भारत में कितने प्रकार के खनिज पाए जाते हैं?
भारत खनिज संपदा से भरपूर देश है। यहाँ लगभग 100 से अधिक विभिन्न प्रकार के खनिज पाए जाते हैं। इनमें ऊर्जा के स्रोत (कोयला, पेट्रोलियम), धातु अयस्क (लौह अयस्क, बॉक्साइट) और अधात्विक खनिज (चूना पत्थर, अभ्रक) शामिल हैं।
3. अयस्क किसे कहते हैं?
वे खनिज पदार्थ जिनसे व्यावसायिक रूप से धातु को आसानी और लाभकारी ढंग से निकाला जा सकता है, अयस्क कहलाते हैं। उदाहरण के लिए, हेमेटाइट और मैग्नेटाइट लोहे के अयस्क हैं, क्योंकि इनसे लोहा प्राप्त किया जाता है। अयस्क में धातु की मात्रा पर्याप्त होनी चाहिए।
4. भारत में कितनी खानें हैं?
भारत में खनिज उत्पादन करने वाली लगभग 3,000 (तीन हजार) खानें हैं। ये खानें बड़े पैमाने की (जैसे बेलाडिला की लौह खान) और छोटे पैमाने की दोनों प्रकार की हैं, जो देश के विभिन्न राज्यों में फैली हुई हैं।
5. भारत के प्रमुख खनिज क्षेत्र कौन-कौन से हैं?
भारत के प्रमुख खनिज क्षेत्रों को तीन भागों में बाँटा जा सकता है:
- पूर्वी एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र: इस क्षेत्र में झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और छत्तीसगढ़ आते हैं। यहाँ लौह अयस्क, कोयला, मैंगनीज, अभ्रक, ताँबा आदि प्रमुख खनिज मिलते हैं।
- पश्चिमोत्तर क्षेत्र: राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र इस क्षेत्र में आते हैं। यहाँ अधात्विक खनिज जैसे संगमरमर, जिप्सम, लिग्नाइट कोयला, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस के भंडार हैं।
- दक्षिणी क्षेत्र: कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और केरल इसके अंतर्गत आते हैं। यह क्षेत्र लौह अयस्क, बॉक्साइट, सोना, चूना पत्थर और अभ्रक के लिए प्रसिद्ध है।
6. भारत में खनिजों की खोज एवं विकास से जुड़े संगठनों के नाम लिखें।
भारत में खनिजों की खोज, अन्वेषण, विकास और संरक्षण के लिए निम्नलिखित प्रमुख संगठन कार्यरत हैं:
- भारतीय भूगर्भिक सर्वेक्षण (Geological Survey of India - GSI)
- भारतीय खान ब्यूरो (Indian Bureau of Mines - IBM)
- भारतीय खनिज अन्वेषण निगम (Mineral Exploration Corporation Limited - MECL)
- परमाणु खनिज विभाग (Atomic Minerals Directorate - AMD)
- इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (Indian Oil Corporation - IOC)
- तेल एवं प्राकृतिक गैस आयोग (Oil and Natural Gas Corporation - ONGC)
7. कर्नाटक भारत का लगभग एक चौथाई लोहा उत्पादन करता है।
यह कथन सही है। कर्नाटक राज्य भारत के कुल लौह अयस्क उत्पादन का लगभग 25% (एक चौथाई) हिस्सा उत्पादित करता है। यहाँ बेल्लारी, होसपेट और सांडूर जैसे क्षेत्र प्रमुख लौह अयस्क उत्पादक हैं, जो देश के लौह-इस्पात उद्योग की रीढ़ हैं।
8. एंथ्रासाइट किस प्रकार का कोयला है?
एंथ्रासाइट सर्वोत्तम किस्म का कोयला है। इसमें कार्बन की मात्रा सबसे अधिक (लगभग 90% या इससे भी ज्यादा) और नमी तथा अशुद्धियाँ सबसे कम होती हैं। यह कठोर, चमकदार और धुआँ रहित जलता है, जिससे यह ऊष्मा का उत्तम स्रोत है। भारत में इसका भंडार सीमित है।
9. जम्मू और कश्मीर में किस स्थान से कोयला निकाला जाता है?
जम्मू और कश्मीर राज्य में कोयला कालाकोट नामक स्थान से निकाला जाता है। यहाँ पाए जाने वाले कोयले की गुणवत्ता अन्य प्रमुख कोयला क्षेत्रों की तुलना में कम होती है, लेकिन स्थानीय ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति में इसका योगदान है।
10. लौह अयस्क का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य कौन-सा है?
कर्नाटक भारत में लौह अयस्क का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है। इसके बाद ओडिशा, छत्तीसगढ़ और झारखंड का स्थान आता है। कर्नाटक की प्रसिद्ध खानें बेल्लारी, होसपेट और चिकमगलूर जिलों में स्थित हैं।
11. मैंगनीज का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य कौन-सा है?
ओडिशा भारत में मैंगनीज अयस्क का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है। ओडिशा के केओन्झर, सुंदरगढ़ और कालाहांडी जिलों में मैंगनीज के विशाल भंडार हैं। मैंगनीज इस्पात निर्माण और रासायनिक उद्योग के लिए एक आवश्यक खनिज है।
12. बॉक्साइट का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य कौन-सा है?
ओडिशा ही बॉक्साइट (एल्युमिनियम का अयस्क) का भी सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है। ओडिशा के कोरापुट, कालाहांडी और सम्बलपुर जिलों में बॉक्साइट के प्रमुख भंडार स्थित हैं। बॉक्साइट से एल्युमिनियम धातु प्राप्त की जाती है।
13. बिहार-झारखंड भारत का कितना अभ्रक उत्पादन करता है?
बिहार और झारखंड का क्षेत्र (विशेषकर झारखंड का कोडरमा और गिरिडीह जिला) मिलकर भारत के कुल अभ्रक उत्पादन का लगभग 80% हिस्सा उत्पादित करते हैं। भारत दुनिया में अभ्रक के प्रमुख उत्पादकों और निर्यातकों में से एक है।
14. धात्विक खनिजों के नाम लिखें।
धात्विक खनिज वे हैं जिनसे धातु प्राप्त की जाती है। इनके दो उपवर्ग हैं:
- लौह धात्विक खनिज: इनमें लोहा मुख्य घटक होता है। जैसे – लौह अयस्क (हेमेटाइट, मैग्नेटाइट), मैंगनीज अयस्क, क्रोमाइट, निकेल, कोबाल्ट।
- अलौह धात्विक खनिज: इनमें लोहा नहीं होता। जैसे – ताँबा, सोना, बॉक्साइट (एल्युमिनियम), टिन, सीसा, जस्ता आदि।
15. मैग्नेटाइट में कौन-सा गुण पाया जाता है?
मैग्नेटाइट लौह अयस्क में चुंबकीय गुण पाया जाता है। यह लोहे का सबसे शुद्ध अयस्क माना जाता है, जिसमें लगभग 70-72% तक लोहा होता है। इसका रंग काला होता है और यह एक प्रबल चुंबक की तरह लोहे के टुकड़ों को अपनी ओर आकर्षित कर सकता है।
16. मेघाहटू क्या है?
मेघाहटू (या मेघाहतुबुरू) विश्व की सबसे बड़ी लौह अयस्क की खानों में से एक है। यह ओडिशा राज्य के मयूरभंज जिले में स्थित है। यहाँ उच्च किस्म का लौह अयस्क बड़ी मात्रा में पाया जाता है, जिसका खनन बड़े पैमाने पर किया जाता है।
17. बेलाडिला खान किस लिए प्रसिद्ध है?
बेलाडिला खान (छत्तीसगढ़ में स्थित) आधुनिक यंत्रों और मशीनों से सुसज्जित एशिया की सबसे बड़ी लौह अयस्क की खानों में से एक है। यहाँ से निकाले गए उच्च गुणवत्ता वाले लौह अयस्क का बड़ा हिस्सा जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों को निर्यात किया जाता है।
18. विश्व के लौह अयस्क उत्पादक देशों में भारत का कौन-सा स्थान है?
विश्व के प्रमुख लौह अयस्क उत्पादक देशों में भारत का स्थान पाँचवाँ है। भारत से पहले ऑस्ट्रेलिया, ब्राज़ील, चीन और रूस जैसे देश आते हैं। भारत न केवल लौह अयस्क का बड़ा उत्पादक है बल्कि एक महत्वपूर्ण निर्यातक भी है।
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