Bihar Board Class 10th Social Science (इतिहास की दुनिया भाग 2) Chapter 5 अर्थव्यवस्था और आजीविका) Solutions

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Board NameBihar Board of Secondary Education
ClassClass 10th
Content TypeSolution
Solution forClass 10th students
SubjectSocial Science (इतिहास की दुनिया भाग 2)
Chapter NameChapter 5 अर्थव्यवस्था और आजीविका)
Total Number of Chapter in this Subject8

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Bihar Board Class 10th Social Science (इतिहास की दुनिया भाग 2) Chapter 5 अर्थव्यवस्था और आजीविका) Solutions

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1. बहुविकल्पीय प्रश्न (Multiple Choice Questions)

(क) बिहार में कृषि के अंतर्गत कितने प्रतिशत भूमि आती है ?

(A) 50 प्रतिशत
(B) 70 प्रतिशत
(C) 80 प्रतिशत
(D) 90 प्रतिशत

उत्तर: (B) 70 प्रतिशत
बिहार की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि पर आधारित है। राज्य की लगभग 70 प्रतिशत भूमि कृषि कार्यों के लिए उपयोग में लाई जाती है, जो यहाँ के अधिकांश लोगों के लिए आजीविका का प्रमुख स्रोत है।

(ख) बिहार में कितने प्रतिशत लोग कृषि पर निर्भर हैं ?

(A) 60 प्रतिशत
(B) 70 प्रतिशत
(C) 75 प्रतिशत
(D) 80 प्रतिशत

उत्तर: (D) 80 प्रतिशत
बिहार की लगभग 80 प्रतिशत जनसंख्या प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कृषि पर निर्भर है। यह क्षेत्र न केवल खाद्यान्न उपलब्ध कराता है, बल्कि बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार भी प्रदान करता है।

(ग) बिहार की अर्थव्यवस्था किस पर आधारित है ?

(A) उद्योग
(B) कृषि
(C) व्यापार
(D) सेवा क्षेत्र

उत्तर: (B) कृषि
बिहार की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार कृषि है। राज्य का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी), रोजगार और आजीविका में कृषि क्षेत्र का प्रमुख योगदान है।

(घ) बिहार में सबसे अधिक किस अनाज की खेती होती है ?

(A) गेहूँ
(B) मक्का
(C) धान
(D) जौ

उत्तर: (C) धान
बिहार में सबसे अधिक खेती धान (चावल) की होती है। राज्य की जलवायु और उपजाऊ मिट्टी धान की खेती के लिए बहुत अनुकूल है, और यह यहाँ की प्रमुख फसल है।

(ङ) बिहार में किस फसल को ‘लाल सोना’ कहा जाता है ?

(A) मिर्च
(B) गन्ना
(C) मक्का
(D) अदरक

उत्तर: (B) गन्ना
बिहार में गन्ने की फसल को ‘लाल सोना’ कहा जाता है क्योंकि यह किसानों के लिए आय का एक महत्वपूर्ण स्रोत है और चीनी उद्योग का आधार भी है।

2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दें-

(क) बिहार की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से किस पर आधारित है ?

उत्तर: बिहार की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि पर आधारित है। राज्य की अधिकांश जनसंख्या कृषि और इससे जुड़े कार्यों में लगी हुई है। कृषि क्षेत्र राज्य के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में एक बड़ा योगदान देता है और लोगों के लिए रोजगार व आजीविका का प्राथमिक स्रोत है।

(ख) बिहार की प्रमुख फसलें कौन-कौन सी हैं ?

उत्तर: बिहार की प्रमुख फसलें निम्नलिखित हैं:

  1. धान (चावल): यह राज्य की सबसे महत्वपूर्ण खरीफ फसल है।
  2. गेहूँ: यह प्रमुख रबी फसल है और धान के बाद दूसरा प्रमुख अनाज।
  3. मक्का: इसकी खेती भी बड़े पैमाने पर की जाती है।
  4. दलहन (मसूर, अरहर, चना आदि): प्रोटीन का महत्वपूर्ण स्रोत।
  5. तिलहन (सरसों, मूँगफली): तेल उत्पादन के लिए उगाई जाती हैं।
  6. गन्ना: इसे 'लाल सोना' कहा जाता है और यह चीनी उद्योग का आधार है।
  7. जूट: पूर्वी बिहार के कुछ क्षेत्रों में उगाई जाती है।

(ग) बिहार में औद्योगिक विकास धीमा क्यों है ?

उत्तर: बिहार में औद्योगिक विकास धीमा होने के प्रमुख कारण इस प्रकार हैं:

  1. बुनियादी ढाँचे की कमी: बिढ़, बिजली की निरंतर आपूर्ति, अच्छी सड़कें और परिवहन सुविधाओं का अभाव।
  2. पूँजी की कमी: औद्योगिक निवेश के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधनों का अभाव।
  3. कुशल श्रमिकों का पलायन: शिक्षित और प्रशिक्षित युवा रोजगार की तलाश में अन्य राज्यों में चले जाते हैं।
  4. प्राकृतिक संसाधनों का सीमित दोहन: राज्य में उपलब्ध संसाधनों का पूर्ण उपयोग नहीं हो पाता।
  5. नीतिगत चुनौतियाँ: औद्योगिक नीतियों में स्थिरता और स्पष्टता की कमी तथा जटिल प्रशासनिक प्रक्रियाएँ।
इन कारणों से बिहार का औद्योगिक क्षेत्र वांछित गति से विकसित नहीं हो पाया है।

(घ) बिहार में पशुपालन का क्या महत्व है ?

उत्तर: बिहार में पशुपालन का बहुत अधिक महत्व है, जो निम्नलिखित कारणों से है:

  1. आजीविका का स्रोत: ग्रामीण क्षेत्रों के लाखों परिवारों, विशेषकर छोटे और सीमांत किसानों के लिए आय का एक महत्वपूर्ण स्रोत है।
  2. कृषि में सहायक: बैल आदि पशु खेती में हल चलाने और सामान ढोने जैसे कामों में सहायता करते हैं।
  3. पोषण सुरक्षा: दूध, मांस और अंडे जैसे पशु उत्पाद प्रोटीन का महत्वपूर्ण स्रोत हैं, जो पोषण स्तर सुधारते हैं।
  4. जैविक खाद: पशुओं का गोबर जैविक खाद के रूप में उपयोग होता है, जो मिट्टी की उर्वरता बढ़ाता है और रासायनिक खाद पर निर्भरता कम करता है।
  5. सामाजिक सुरक्षा: संकट के समय पशु एक जीवित बचत के रूप में काम आते हैं, जिन्हें बेचकर तत्काल धन प्राप्त किया जा सकता है।
इस प्रकार, पशुपालन बिहार की ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एक अभिन्न अंग है।

1. बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न (क) भारत में रेलवे की शुरुआत कब हुई?

विकल्प:
A. 1853
B. 1857
C. 1869
D. 1885

उत्तर: A. 1853

व्याख्या: भारत में पहली रेलगाड़ी 16 अप्रैल, 1853 को मुंबई से थाणे के बीच चलाई गई थी। इसने भारत में आधुनिक परिवहन के युग की शुरुआत की।


प्रश्न (ख) भारत में पहली जनगणना कब हुई?

विकल्प:
A. 1872
B. 1881
C. 1891
D. 1901

उत्तर: A. 1872

व्याख्या: भारत में पहली बार व्यवस्थित जनगणना 1872 में हुई थी। हालाँकि, 1881 से नियमित दस वर्षीय जनगणना की शुरुआत हुई।


प्रश्न (ग) निम्नलिखित में से कौन-सा उद्योग आधुनिक भारत का प्रथम उद्योग माना जाता है?

विकल्प:
A. सूती वस्त्र उद्योग
B. लौह-इस्पात उद्योग
C. चीनी उद्योग
D. जूट उद्योग

उत्तर: A. सूती वस्त्र उद्योग

व्याख्या: आधुनिक भारत में सूती वस्त्र उद्योग सबसे पहले स्थापित हुआ। 1854 में मुंबई में पहली सूती वस्त्र मिल की स्थापना हुई, जिसने औद्योगिकरण की नींव रखी।


प्रश्न (घ) भारत में पहली बार रेलवे लाइन किसके शासनकाल में बिछाई गई?

विकल्प:
A. लॉर्ड डलहौजी
B. लॉर्ड कैनिंग
C. लॉर्ड मेयो
D. लॉर्ड रिपन

उत्तर: A. लॉर्ड डलहौजी

व्याख्या: लॉर्ड डलहौजी (1848-1856) के शासनकाल में ही भारत में रेलवे लाइन बिछाने की योजना बनी और कार्य शुरू हुआ, जिसका परिणाम 1853 में पहली ट्रेन का संचालन था।


प्रश्न (ङ) निम्नलिखित में से कौन-सा कारक भारत में अकाल का कारण नहीं था?

विकल्प:
A. सूखा
B. बाढ़
C. अत्यधिक वर्षा
D. उन्नत कृषि तकनीक

उत्तर: D. उन्नत कृषि तकनीक

व्याख्या: उन्नत कृषि तकनीक अकाल रोकने में सहायक होती है, अकाल का कारण नहीं बनती। अकाल मुख्य रूप से प्राकृतिक आपदाएँ (सूखा, बाढ़, अनियमित वर्षा) और ब्रिटिश नीतियों के कारण पैदा हुई खाद्यान्न की कमी से आते थे।


2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दें (लगभग 30 शब्दों में)

प्रश्न (क) भारत में रेलवे के विकास ने अर्थव्यवस्था को किस प्रकार प्रभावित किया?

उत्तर: रेलवे के विकास ने भारतीय अर्थव्यवस्था को गहराई से प्रभावित किया। इसने परिवहन लागत कम की, दूर-दराज के क्षेत्रों को जोड़ा और राष्ट्रीय बाजार के निर्माण में मदद की। कच्चे माल और तैयार माल का आसान आवागमन हुआ, जिससे व्यापार और उद्योगों को बढ़ावा मिला। हालाँकि, इसने ब्रिटिश उद्योगों को भारतीय बाजारों तक पहुँच आसान बनाकर देशी हस्तशिल्प को भी नुकसान पहुँचाया।


प्रश्न (ख) 19वीं सदी में भारत में हुए अकालों के मुख्य कारण क्या थे?

उत्तर: 19वीं सदी के अकालों के मुख्य कारण प्राकृतिक और मानव-निर्मित दोनों थे। प्राकृतिक कारणों में सूखा और अनियमित मानसून शामिल थे। मानव-निर्मित कारणों में ब्रिटिश नीतियाँ प्रमुख थीं, जैसे लगान की अधिक दर, नकदी फसलों पर जोर, खाद्यान्न के निर्यात से भंडारण की कमी, और अकाल राहत के लिए अपर्याप्त उपाय। ये सभी कारण मिलकर भीषण अकाल पैदा करते थे।


प्रश्न (ग) भारत में आधुनिक उद्योगों के विकास में ब्रिटिश सरकार की भूमिका का वर्णन करें।

उत्तर: ब्रिटिश सरकार की भूमिका विरोधाभासी थी। एक ओर, उसने रेलवे, टेलीग्राफ और बंदरगाहों जैसी बुनियादी संरचनाओं का निर्माण किया, जिससे औद्योगिक विकास के लिए आधार तैयार हुआ। दूसरी ओर, उसकी नीतियाँ मुख्यतः ब्रिटेन के औद्योगिक हितों को बढ़ावा देने के लिए थीं। भारतीय उद्योगों को उच्च शुल्क और प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ा, और सरकारी सहायता मुख्य रूप से ब्रिटिश उद्यमियों को मिलती थी, जिससे देशी उद्योगों का विकास धीमा रहा।


3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दें (लगभग 100 शब्दों में)

प्रश्न (क) 19वीं सदी में भारत में कृषि का क्या हाल था? विस्तार से वर्णन करें।

उत्तर: 19वीं सदी में भारतीय कृषि संकट और ठहराव के दौर से गुजर रही थी। जमींदारी और रैयतवाड़ी प्रणालियों के तहत किसानों से लगान की अत्यधिक दर वसूली जाती थी, जिससे वे गरीबी और कर्ज के जाल में फँसते चले गए। किसानों को नकदी फसलें (जैसे नील, कपास, गन्ना) उगाने के लिए मजबूर किया गया, जिससे खाद्यान्न का उत्पादन घटा और अकाल की स्थिति बनी। पारंपरिक कृषि पद्धतियाँ ही प्रचलित थीं, नई तकनीक या सिंचाई सुविधाओं का अभाव था। इस प्रकार, कृषि जीवन-निर्वाह का साधन मात्र रह गई थी और उसमें विकास नहीं हो पा रहा था।


प्रश्न (ख) भारत में रेलवे के विस्तार ने समाज और संस्कृति को कैसे प्रभावित किया?

उत्तर: रेलवे के विस्तार ने भारतीय समाज और संस्कृति पर गहरा प्रभाव डाला। सामाजिक दृष्टि से, इसने लोगों की गतिशीलता बढ़ाई। विभिन्न क्षेत्रों, जातियों और वर्गों के लोग एक साथ यात्रा करने लगे, जिससे सामाजिक मेल-जोल और रूढ़ियों में ढील पड़ने लगी। सांस्कृतिक आदान-प्रदान बढ़ा, साहित्य और विचारों का तेजी से प्रसार हुआ। रेलवे ने तीर्थयात्रा और पर्यटन को आसान बनाया। हालाँकि, इसने सामाजिक असमानता भी पैदा की, क्योंकि अमीर और गरीब के लिए अलग-अलग डिब्बे होते थे। समग्र रूप से, रेलवे ने भारत को जोड़कर एक नए युग की शुरुआत की।


प्रश्न (ग) ब्रिटिश काल में भारत के औद्योगिक विकास की मुख्य विशेषताएँ बताएँ।

उत्तर: ब्रिटिश काल में भारत के औद्योगिक विकास की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित थीं:
1. विदेशी नियंत्रण एवं स्वामित्व: प्रमुख उद्योगों जैसे चाय, जूट, खनन और रेलवे पर ब्रिटिश पूँजीपतियों का दबदबा था।
2. कच्चे माल का निर्यात और तैयार माल का आयात: भारत कच्चा माल (कपास, जूट) निर्यात करता था और महँगा तैयार माल (कपड़ा) आयात करता था, जिससे देश का आर्थिक शोषण हुआ।
3. सीमित एवं असंतुलित विकास: उद्योग केवल कुछ क्षेत्रों (बंबई, कलकत्ता) तक सीमित थे और भारी उद्योगों का अभाव था।
4. देशी उद्योगों का पतन: ब्रिटिश मशीन-निर्मित सामान के कारण पारंपरिक हस्तशिल्प और कुटीर उद्योग बर्बाद हो गए।
5. श्रमिकों की दयनीय दशा: कारखानों में काम करने वाले श्रमिकों को कम मजदूरी, लंबे समय तक काम और खराब परिस्थितियों में रहना पड़ता था।


*** अध्याय के प्रश्नों के उत्तर समाप्त ***

1. बहुविकल्पीय प्रश्न (Multiple Choice Questions)

  1. भारत में रेलवे का विस्तार किस उद्देश्य से किया गया था?
    1. सैनिकों की आवाजाही के लिए
    2. कच्चे माल के परिवहन के लिए
    3. यात्रियों की सुविधा के लिए
    4. उपर्युक्त सभी

    उत्तर: (D) उपर्युक्त सभी। भारत में रेलवे का विस्तार मुख्य रूप से ब्रिटिश साम्राज्य के आर्थिक और सैनिक हितों को पूरा करने के लिए किया गया था। इससे सेना का तेजी से आवागमन संभव हुआ, देश के विभिन्न भागों से कच्चा माल बंदरगाहों तक पहुँचाया जा सका और यात्रियों के लिए भी यह एक साधन बना।

  2. भारत में पहली जनगणना कब हुई थी?
    1. 1871
    2. 1881
    3. 1891
    4. 1901

    उत्तर: (B) 1881। भारत में पहली सम्पूर्ण और व्यवस्थित जनगणना सन् 1881 में हुई थी। हालाँकि इससे पहले 1871-72 में भी एक प्रयास किया गया था, लेकिन 1881 की जनगणना को ही पहली आधिकारिक अखिल भारतीय जनगणना माना जाता है।

  3. भारत में पहली बार रेल कब चली?
    1. 1850
    2. 1853
    3. 1857
    4. 1860

    उत्तर: (B) 1853। भारत में पहली यात्री रेलगाड़ी 16 अप्रैल, 1853 को बॉम्बे (मुंबई) से ठाणे के बीच चलाई गई थी। इसने लगभग 34 किलोमीटर की दूरी तय की और भारत में आधुनिक परिवहन के एक नए युग की शुरुआत की।

  4. भारत में डाक व्यवस्था किसने शुरू की?
    1. लॉर्ड क्लाइव
    2. लॉर्ड कार्नवालिस
    3. लॉर्ड डलहौजी
    4. लॉर्ड कैनिंग

    उत्तर: (C) लॉर्ड डलहौजी। लॉर्ड डलहौजी ने 1854 में भारत में आधुनिक डाक व्यवस्था की शुरुआत की। उन्होंने सम्पूर्ण देश के लिए एक समान डाक दर (आधा आना प्रति पत्र) लागू की, जिससे संचार सस्ता और सुलभ हो गया।

  5. भारत में अंग्रेजों द्वारा स्थापित पहले तीन विश्वविद्यालय कहाँ थे?
    1. दिल्ली, मद्रास, लाहौर
    2. कलकत्ता, मद्रास, बंबई
    3. कलकत्ता, दिल्ली, बंबई
    4. इलाहाबाद, बंबई, मद्रास

    उत्तर: (B) कलकत्ता, मद्रास, बंबई। वर्ष 1857 में, भारतीय शिक्षा पर चार्ल्स वुड की रिपोर्ट (1854) के आधार पर, कलकत्ता (कोलकाता), मद्रास (चेन्नई) और बंबई (मुंबई) में पहले तीन आधुनिक विश्वविद्यालय स्थापित किए गए।

2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दें (Answer the following questions)

  1. भारत में रेलवे के विस्तार के क्या कारण थे?

    उत्तर: भारत में रेलवे के विस्तार के प्रमुख कारण थे:

    1. सैनिक उद्देश्य: देश के विभिन्न भागों में सैनिकों और हथियारों को शीघ्रता से पहुँचाना तथा विद्रोहों को दबाना।
    2. आर्थिक शोषण: भारत के आंतरिक भागों से कच्चा माल (जैसे कपास, लोहा, कोयला) बंदरगाहों तक सस्ते और तेजी से पहुँचाना, ताकि इंग्लैंड भेजा जा सके।
    3. तैयार माल की बिक्री: इंग्लैंड में बने तैयार सामान (कपड़े, मशीनें आदि) को भारत के गाँव-शहरों में बेचने के लिए परिवहन सुविधा प्रदान करना।
    4. प्रशासनिक सुविधा: ब्रिटिश अधिकारियों और व्यापारियों के लिए यात्रा को सरल और तेज बनाना।

  2. भारत में आधुनिक शिक्षा की शुरुआत कैसे हुई?

    उत्तर: भारत में आधुनिक शिक्षा की शुरुआत मुख्यतः ब्रिटिश शासन के दौरान हुई। इसके पीछे कई चरण और कारण थे:

    1. प्रारंभिक मिशनरी स्कूल: सबसे पहले ईसाई मिशनरियों ने भारतीयों को धर्म परिवर्तन के लिए तैयार करने हेतु पाश्चात्य शिक्षा देना शुरू किया।
    2. 1813 का चार्टर एक्ट: इसके तहत भारत में शिक्षा के लिए एक लाख रुपये प्रतिवर्ष खर्च करने का प्रावधान किया गया, हालाँकि यह राशि पर्याप्त नहीं थी।
    3. औपनिवेशिक हित: अंग्रेजों को निम्न-स्तरीय क्लर्क, मुंशी और अधिकारी चाहिए थे जो अंग्रेजी जानते हों और प्रशासन में सहायता कर सकें।
    4. 1835 का मैकाले मिनट: लॉर्ड मैकाले ने भारतीय शिक्षा में अंग्रेजी को माध्यम बनाने और पाश्चात्य ज्ञान-विज्ञान सिखाने की वकालत की। इसने आधुनिक शिक्षा की नींव रखी।
    5. विश्वविद्यालयों की स्थापना: 1857 में कलकत्ता, मद्रास और बंबई में विश्वविद्यालय खोले गए, जो उच्च शिक्षा के केंद्र बने।
    इस प्रकार, भारत में आधुनिक शिक्षा का उद्देश्य एक ऐसा वर्ग तैयार करना था जो "रंग में भारतीय, किन्तु रुचि, विचार और नैतिकता में अंग्रेज" हो।

  3. भारत में डाक व्यवस्था के विकास पर प्रकाश डालें।

    उत्तर: भारत में डाक व्यवस्था के विकास को निम्नलिखित बिंदुओं से समझा जा सकता है:

    1. प्राचीन एवं मध्यकालीन व्यवस्था: राजदूतों, दूतों और धावकों के माध्यम से संदेश भेजे जाते थे। यह व्यवस्था धीमी और सीमित थी।
    2. ईस्ट इंडिया कंपनी का योगदान: कंपनी ने अपने व्यापारिक और प्रशासनिक कार्यों के लिए डाक सेवा शुरू की, लेकिन यह आम जनता के लिए नहीं थी।
    3. लॉर्ड डलहौजी का सुधार (1854): इसे आधुनिक डाक व्यवस्था की वास्तविक शुरुआत माना जाता है। उन्होंने पूरे देश के लिए एक समान डाक दर (आधा आना या 1/32 रुपया) लागू की, जिसे "आधा आना डाक" कहा गया। इससे पत्र भेजना सस्ता और सरल हो गया।
    4. डाक टिकटों का प्रचलन: डाक टिकट जारी किए गए, जिससे भुगतान की प्रक्रिया आसान हुई।
    5. रेलवे और डाक: रेलवे के विस्तार से डाक का परिवहन तेज और विश्वसनीय हो गया। रेल डाक सेवा शुरू हुई।
    6. सामाजिक प्रभाव: सस्ती डाक सेवा ने लोगों के बीच संचार को बढ़ावा दिया, जिससे सामाजिक जागरूकता और राष्ट्रीय एकता को बल मिला।
    इस प्रकार, डाक व्यवस्था ने न केवल प्रशासन और व्यापार को सुगम बनाया, बल्कि देश के सामाजिक-सांस्कृतिक एकीकरण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

1. बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न (क) बिहार में सर्वाधिक कृषि योग्य भूमि पर कौन-सी फसल उगाई जाती है?

(A) गेहूँ
(B) धान
(C) मक्का
(D) गन्ना

उत्तर: (B) धान
बिहार की जलवायु और उपजाऊ मिट्टी, विशेषकर गंगा के मैदानी इलाकों में, धान (चावल) की खेती के लिए आदर्श है। राज्य के अधिकांश किसान मुख्य रूप से खरीफ के मौसम में धान की खेती करते हैं, जिससे यह सबसे अधिक कृषि योग्य भूमि पर उगाई जाने वाली प्रमुख फसल बन जाती है।

प्रश्न (ख) बिहार में कृषि के अंतर्गत कुल भूमि का कितना प्रतिशत भाग है?

(A) 50 प्रतिशत
(B) 60 प्रतिशत
(C) 70 प्रतिशत
(D) 80 प्रतिशत

उत्तर: (B) 60 प्रतिशत
बिहार की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि पर निर्भर है। राज्य की लगभग 60% भूमि कृषि कार्यों के अंतर्गत आती है, जो यह दर्शाता है कि भूमि का एक बड़ा हिस्सा खेती के लिए उपयोग किया जाता है और यहाँ के लोगों की आजीविका का प्रमुख स्रोत कृषि ही है।

प्रश्न (ग) बिहार में सिंचाई का प्रमुख साधन क्या है?

(A) नहर
(B) नलकूप
(C) तालाब
(D) कुआँ

उत्तर: (B) नलकूप
बिहार में सिंचाई का सबसे प्रचलित और प्रमुख साधन नलकूप (ट्यूबवेल) है। भूमिगत जल का दोहन करके चलाए जाने वाले नलकूप किसानों को मौसम पर निर्भरता कम करने और वर्ष भर सिंचाई सुविधा प्रदान करने में मदद करते हैं।

प्रश्न (घ) बिहार में कृषि आधारित उद्योग कौन-सा है?

(A) सीमेंट उद्योग
(B) चीनी उद्योग
(C) लोहा-इस्पात उद्योग
(D) सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग

उत्तर: (B) चीनी उद्योग
चीनी उद्योग एक प्रमुख कृषि आधारित उद्योग है क्योंकि इसका कच्चा माल, गन्ना, एक कृषि उत्पाद है। बिहार के कई जिलों में गन्ने की खेती होती है और वहाँ चीनी मिलें स्थापित हैं, जो इस उद्योग को राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था से सीधे जोड़ती हैं।

प्रश्न (ङ) बिहार में कृषि जोत का औसत आकार क्या है?

(A) 0.5 हेक्टेयर
(B) 0.6 हेक्टेयर
(C) 0.7 हेक्टेयर
(D) 0.8 हेक्टेयर

उत्तर: (C) 0.7 हेक्टेयर
बिहार में भूमि जोत का औसत आकार लगभग 0.7 हेक्टेयर (या 1.73 एकड़ के लगभग) है। यह आकार राष्ट्रीय औसत से छोटा है, जो यह दर्शाता है कि राज्य में जोतों का बँटवारा होता चला गया है और अधिकांश किसानों के पास छोटी-छोटी जोतें हैं।

2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दें

प्रश्न (क) बिहार की अर्थव्यवस्था में कृषि का क्या महत्त्व है?

उत्तर: बिहार की अर्थव्यवस्था में कृषि का अत्यधिक महत्त्व है। यह राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। राज्य की लगभग 60% जनसंख्या प्रत्यक्ष रूप से कृषि पर निर्भर है। सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) में कृषि क्षेत्र का एक बड़ा योगदान है। कृषि न केवल खाद्य सुरक्षा प्रदान करती है बल्कि चीनी, तेल, चावल मिलिंग जैसे कई उद्योगों को कच्चा माल भी उपलब्ध कराती है, जिससे रोजगार सृजन होता है। इस प्रकार, कृषि बिहार की आर्थिक और सामाजिक संरचना का एक मूलभूत आधार है।

प्रश्न (ख) बिहार में हरित क्रांति के प्रभावों की विवेचना करें।

उत्तर: बिहार में हरित क्रांति के मुख्य प्रभाव इस प्रकार हैं:
1. उत्पादन में वृद्धि: उच्च उपज वाले बीज (HYV), रासायनिक उर्वरकों और बेहतर सिंचाई के उपयोग से खाद्यान्न उत्पादन, विशेषकर गेहूँ और धान में, काफी बढ़ोतरी हुई।
2. कृषि आधुनिकीकरण: पारंपरिक खेती के तरीकों में बदलाव आया और यंत्रीकरण (ट्रैक्टर, थ्रेशर आदि) को बढ़ावा मिला।
3. आर्थिक प्रभाव: कुछ किसानों, विशेषकर मध्यम और बड़े जोत वालों की आय में सुधार हुआ और कृषि बाजार का विकास हुआ।
4. नकारात्मक प्रभाव: इसके कारण भूमि की उर्वरा शक्ति में कमी, भूजल स्तर का गिरना, पर्यावरण प्रदूषण और छोटे किसानों पर आर्थिक दबाव जैसी समस्याएँ भी उत्पन्न हुईं।

प्रश्न (ग) बिहार में पशुपालन के महत्त्व को स्पष्ट करें।

उत्तर: बिहार में पशुपालन का बहुत महत्त्व है क्योंकि यह कृषि के साथ-साथ चलने वाली एक पूरक आर्थिक गतिविधि है। इसके महत्त्व को निम्न बिंदुओं से समझा जा सकता है:
- आय का सहायक स्रोत: दूध, मांस, अंडे आदि बेचकर ग्रामीण परिवारों को अतिरिक्त आय प्राप्त होती है।
- कृषि कार्य में सहायक: बैल आज भी कई क्षेत्रों में हल चलाने और गाड़ी खींचने जैसे कृषि कार्यों में उपयोग किए जाते हैं।
- जैविक खाद: पशुओं का गोबर जैविक खाद के रूप में प्रयोग किया जाता है, जो मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में सहायक है।
- रोजगार सृजन: पशुपालन से डेयरी, मुर्गीपालन, चमड़ा उद्योग आदि से जुड़े रोजगार पैदा होते हैं।

प्रश्न (घ) बिहार में मत्स्य पालन की संभावनाओं की विवेचना करें।

उत्तर: बिहार में मत्स्य पालन (मछली पालन) की अपार संभावनाएँ हैं, जिनका पूरा लाभ उठाया जाना बाकी है:
1. प्राकृतिक संसाधन: राज्य में गंगा, कोसी, गंडक जैसी नदियाँ, तालाब और झीलें प्रचुर मात्रा में हैं, जो मछली पालन के लिए अनुकूल हैं।
2. पोषण एवं आय: मछली प्रोटीन का एक सस्ता स्रोत है। इसके उत्पादन से लोगों के पोषण स्तर में सुधार के साथ-साथ मछुआरों और किसानों की आय भी बढ़ सकती है।
3. रोजगार: मत्स्य पालन, प्रसंस्करण और विपणन से बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार मिल सकता है।
4. विकास के प्रयास: सरकार द्वारा तालाबों का पट्टा देने, प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाने और नई तकनीकों को बढ़ावा देने जैसे कदम उठाए जा रहे हैं, जो इस क्षेत्र के विकास की संभावना को और मजबूत करते हैं।

बिहार बोर्ड कक्षा 10 - सामाजिक विज्ञान (इतिहास की दुनिया भाग 2)
अध्याय 5: अर्थव्यवस्था और आजीविका

1. गुमाश्ता कौन थे? उनकी क्या भूमिका थी?

गुमाश्ता यूरोपीय व्यापारियों के एजेंट या दलाल थे। ये भारतीय कारीगरों और यूरोपीय कंपनियों के बीच मध्यस्थ का काम करते थे। इनकी मुख्य भूमिका थी कारीगरों को पेशगी रकम देना और उनसे विशिष्ट वस्तुओं का उत्पादन करवाना। इस प्रणाली से कारीगर कर्ज के बोझ तले दब जाते थे और उन्हें निर्धारित कीमत पर ही अपना माल बेचना पड़ता था, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर होती चली गई।

2. 1835 ई. के चार्टर एक्ट का क्या महत्त्व था?

1835 ई. के चार्टर एक्ट का सबसे बड़ा महत्त्व यह था कि इसने भारत के साथ व्यापार पर ईस्ट इंडिया कंपनी के एकाधिकार को समाप्त कर दिया। इस कानून के बाद भारत में अन्य ब्रिटिश व्यापारियों और कंपनियों के लिए भी व्यापार के द्वार खुल गए। इससे भारत में निजी पूँजी निवेश बढ़ा और औद्योगीकरण की प्रक्रिया को गति मिली।

3. द्वारकानाथ टैगोर ने बंगाल में क्या भूमिका निभाई?

द्वारकानाथ टैगोर बंगाल के एक प्रमुख समाज सुधारक और उद्यमी थे। 1830-40 के दशक में उन्होंने बंगाल में 6 संयुक्त उद्यम कंपनियाँ स्थापित कीं। इन कंपनियों में कोयला खनन, चाय बागान और बैंकिंग जैसे व्यवसाय शामिल थे। उन्होंने भारतीय पूँजीपतियों को औद्योगिक उद्यम शुरू करने के लिए प्रेरित किया और आधुनिक उद्योगों के विकास में अग्रणी भूमिका निभाई।

4. भारत में सूती कपड़े की पहली मिल कहाँ और कब स्थापित की गई?

भारत में सूती कपड़े की पहली आधुनिक मिल की नींव 1851 ई. में बम्बई (अब मुंबई) में रखी गई। इस मिल का नाम 'द बॉम्बे स्पिनिंग एंड वीविंग कंपनी' था। इसकी स्थापना एक पारसी उद्यमी कावसजी नानाभाई दावर ने की थी। इस मिल के स्थापित होने से भारत में मशीनीकृत सूती वस्त्र उद्योग की शुरुआत हुई।

5. भारत में पहली जूट मिल किसने और कब स्थापित की?

भारत में पहली जूट मिल 1917 ई. में कलकत्ता (अब कोलकाता) के निकट रिशरा में स्थापित की गई। इस मिल की स्थापना एक मारवाड़ी व्यवसायी सेठ हुकुमचंद ने की थी। इस मिल का नाम 'द बंगाल जूट मिल्स कंपनी लिमिटेड' था। इसकी स्थापना से भारत में जूट उद्योग का औद्योगिक पैमाने पर विकास शुरू हुआ।

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