Bihar Board Class 10th Social Science (इतिहास की दुनिया भाग 2) Chapter 2 समाजवाद एवं साम्यवाद) Solutions
Bihar Board Class 10th Social Science (इतिहास की दुनिया भाग 2) Chapter 2 समाजवाद एवं साम्यवाद) Solutions
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बिहार बोर्ड कक्षा 10 सामाजिक विज्ञान (इतिहास की दुनिया भाग 2)
अध्याय 2: समाजवाद एवं साम्यवाद
वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर
नीचे दिये गए प्रश्नों के उत्तर के रूप में चार विकल्प दिये गये हैं। जो आपको सर्वाधिक उपयुक्त लग उनमें सही का चिह्न लगायें।
प्रश्न 1. रूस में कृषक दास प्रथा का अंत कब हुआ?
(क) 1861
(ख) 1862
(ग) 1863
(घ) 1864
उत्तर: (क) 1861
व्याख्या: रूस में कृषक दास प्रथा, जिसे 'सर्फडम' कहा जाता था, का अंत 1861 में जार अलेक्जेंडर द्वितीय द्वारा हस्ताक्षरित एक आधिकारिक घोषणा (एमैन्सिपेशन एडिक्ट) के माध्यम से हुआ। यह एक बड़ा सुधार था, हालाँकि इसके बाद भी किसानों की स्थिति में तुरंत बहुत सुधार नहीं हुआ।
प्रश्न 2. रूस में जार का अर्थ क्या होता था ?
(क) पीने का बर्तन
(ख) पानी रखने का मिट्टी का पात्र
(ग) रूस का सामन्त
(घ) रूस का सम्राट
उत्तर: (घ) रूस का सम्राट
व्याख्या: 'जार' (Czar/Tsar) शब्द रोमन शासक 'सीज़र' से लिया गया है और इसका प्रयोग रूस के सम्राट या राजा के लिए किया जाता था। जार को ईश्वर का प्रतिनिधि माना जाता था और उसके पास पूर्ण और निरंकुश शक्तियाँ होती थीं।
प्रश्न 3. कार्ल मार्क्स का जन्म कहाँ हुआ था?
(क) इंगलैंड
(ख) जर्मनी
(ग) इटली
(घ) रूस
उत्तर: (ख) जर्मनी
व्याख्या: कार्ल मार्क्स का जन्म 5 मई, 1818 को जर्मनी के ट्रायर शहर में हुआ था। वे एक दार्शनिक, अर्थशास्त्री और क्रांतिकारी समाजवादी थे, जिन्हें 'वैज्ञानिक समाजवाद' या मार्क्सवाद के प्रवर्तक के रूप में जाना जाता है।
प्रश्न 4. साम्यवादी शासन का पहला प्रयोग कहाँ हुआ?
(क) रूस
(ख) जापान
(ग) चीन
(घ) क्यूबा
उत्तर: (क) रूस
व्याख्या: साम्यवादी शासन व्यवस्था का पहला सफल और व्यापक प्रयोग 1917 की रूसी क्रांति (बोल्शेविक क्रांति) के बाद रूस में हुआ। व्लादिमीर लेनिन के नेतृत्व में बोल्शेविक पार्टी ने सत्ता पर कब्जा किया और दुनिया का पहला समाजवादी राज्य स्थापित किया।
प्रश्न 5. यूटोपियन समाजवादी कौन नहीं था?
(क) लुई ब्लां
(ख) सेंट साइमन
(ग) कार्ल मार्क्स
(घ) रॉबर्ट ओवन
उत्तर: (ग) कार्ल मार्क्स
व्याख्या: कार्ल मार्क्स यूटोपियन समाजवादी नहीं, बल्कि 'वैज्ञानिक समाजवाद' के प्रणेता थे। यूटोपियन समाजवादी (जैसे सेंट साइमन, चार्ल्स फूरियर, रॉबर्ट ओवन, लुई ब्लां) आदर्शवादी समाज की कल्पना करते थे, जबकि मार्क्स ने वर्ग संघर्ष और ऐतिहासिक भौतिकवाद के वैज्ञानिक विश्लेषण पर आधारित सिद्धांत दिया।
प्रश्न 6. “वार एंड पीस” किसकी रचना है ?
(क) कार्ल मार्क्स
(ख) टॉलस्टाय
(ग) दोस्तोवस्की
(घ) ऐंजल्स
उत्तर: (ख) टॉलस्टाय
व्याख्या: "वार एंड पीस" (युद्ध और शांति) प्रसिद्ध रूसी उपन्यासकार लियो टॉल्स्टॉय की महान रचना है। यह ऐतिहासिक उपन्यास नेपोलियन के रूस पर आक्रमण के दौरान रूसी समाज के विभिन्न वर्गों के जीवन को चित्रित करता है।
प्रश्न 7. बोल्शेविक क्रांति कब हुई?
(क) फरवरी 1947
(ख) नवंबर 1917
(ग) अप्रैल 1917
(घ) अक्टूबर 1905
उत्तर: (ख) नवंबर 1917
व्याख्या: बोल्शेविक क्रांति, जिसे अक्टूबर क्रांति भी कहा जाता है, वास्तव में पुराने जूलियन कैलेंडर के अनुसार 25 अक्टूबर, 1917 को हुई थी। आधुनिक ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार यह तारीख 7 नवंबर, 1917 बनती है। इसी दिन बोल्शेविकों ने अंतरिम सरकार को हटाकर सत्ता पर कब्जा किया।
प्रश्न 8. लाल सेना का गठन किसने किया था?
(क) कार्ल मार्क्स
(ख) स्टालिन
(ग) ट्रॉट्स्की
(घ) करेंसकी
उत्तर: (ग) ट्रॉट्स्की
व्याख्या: लाल सेना (रेड आर्मी) का गठन लियोन ट्रॉट्स्की ने किया था, जो रूसी क्रांति के प्रमुख नेता और सैन्य मामलों के पीपुल्स कमिसार थे। उन्होंने गृहयुद्ध (1918-1922) के दौरान इस सेना को एक शक्तिशाली और अनुशासित बल के रूप में संगठित किया, जिसने श्वेत सेना और विदेशी हस्तक्षेपकारियों को हराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
प्रश्न 9. लेनिन की मृत्यु कब हुई थी?
(क) 1921
(ख) 1922
(ग) 1923
(घ) 1924
उत्तर: (घ) 1924
व्याख्या: रूसी क्रांति के नेता और सोवियत संघ के संस्थापक व्लादिमीर इलिच लेनिन की मृत्यु 21 जनवरी, 1924 को हुई थी। उनकी मृत्यु के बाद सोवियत संघ में सत्ता के लिए संघर्ष शुरू हुआ, जिसमें अंततः जोसेफ स्टालिन विजयी हुए।
प्रश्न 10. ब्रेस्ट-लिटोवस्क की संधि किन देशों के बीच हुआ था ?
(क) रूस और इटली
(ख) रूस और फ्रांस
(ग) रूस और इंगलैंड
(घ) रूस और जर्मनी
उत्तर: (घ) रूस और जर्मनी
व्याख्या: ब्रेस्ट-लिटोवस्क की संधि मार्च 1918 में नवगठित बोल्शेविक सरकार (रूस) और जर्मनी व उसके सहयोगियों के बीच हुई थी। इस संधि के द्वारा रूस ने प्रथम विश्व युद्ध से अपने आप को अलग कर लिया, हालाँकि इसकी कीमत पोलैंड, यूक्रेन, फिनलैंड और बाल्टिक राज्यों सहित विशाल क्षेत्र जर्मनी को सौंपने के रूप में चुकानी पड़ी।
निम्नलिखित में रिक्त स्थानों को भरें :
प्रश्न 1. रूसी क्रांति के समय शासक ............ था।
उत्तर: जार निकोलस द्वितीय
व्याख्या: 1917 की रूसी क्रांति के समय रूस का शासक जार निकोलस द्वितीय था। फरवरी क्रांति के बाद उसे सिंहासन छोड़ने के लिए मजबूर किया गया और बाद में बोल्शेविकों द्वारा उसकी हत्या कर दी गई।
प्रश्न 2. बोल्शेविक क्रांति का नेतृत्व ............ ने किया था।
उत्तर: लेनिन
व्याख्या: बोल्शेविक क्रांति (अक्टूबर क्रांति) का मुख्य नेतृत्व व्लादिमीर इलिच लेनिन ने किया था। उनकी दूरदर्शिता और रणनीति ने बोल्शेविक पार्टी को सत्ता हासिल करने में सफलता दिलाई।
प्रश्न 3. नई आर्थिक नीति ............ ई. में लागू हुआ था।
उत्तर: 1921
व्याख्या: गृहयुद्ध के बाद देश की बर्बाद अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए लेनिन ने 1921 में नई आर्थिक नीति (NEP - New Economic Policy) लागू की। इस नीति में कुछ हद तक निजी व्यापार और पूँजीवादी तरीकों को अपनाने की अनुमति दी गई।
प्रश्न 4. रॉबर्ट ओवन ............ का निवासी था।
उत्तर: ब्रिटेन
व्याख्या: रॉबर्ट ओवन (1771-1858) एक प्रसिद्ध यूटोपियन समाजवादी थे, जो ब्रिटेन (वेल्स) के निवासी थे। वे एक सफल उद्योगपति भी थे, जिन्होंने श्रमिकों के कल्याण और सहकारी समुदायों की स्थापना के लिए काम किया।
प्रश्न 5. वैज्ञानिक समाजवाद का जनक ............ को माना जाता है।
उत्तर: कार्ल मार्क्स
व्याख्या: कार्ल मार्क्स को वैज्ञानिक समाजवाद का जनक माना जाता है क्योंकि उन्होंने फ्रेडरिक एंगेल्स के साथ मिलकर ऐतिहासिक भौतिकवाद और वर्ग संघर्ष के वैज्ञानिक सिद्धांतों पर आधारित समाजवादी विचारधारा का प्रतिपादन किया।
निम्नलिखित समूहों का मिलान करें :
समूह ‘क’
1. दास कैपिटल
2. चेका
3. नई आर्थिक नीति
4. कार्ल मार्क्स की मृत्यु
5. स्टालिन की मृत्यु
समूह ‘ख’
(क) 1953
(ख) कार्ल मार्क्स
(ग) 1883
(घ) गुप्त पुलिस संगठन
(ड) लेनिन
उत्तर:
1. (ख) दास कैपिटल - कार्ल मार्क्स
2. (घ) चेका - गुप्त पुलिस संगठन
3. (ड) नई आर्थिक नीति - लेनिन
4. (ग) कार्ल मार्क्स की मृत्यु - 1883
5. (क) स्टालिन की मृत्यु - 1953
अतिलघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (20 शब्दों में उत्तर दें)
प्रश्न 1. राष्ट्रवाद क्या है ?
उत्तर: राष्ट्रवाद एक ऐसी भावना और विचारधारा है जिसमें लोग अपने राष्ट्र, उसकी संस्कृति, भाषा और हितों के प्रति गहरी निष्ठा और प्रेम रखते हैं तथा उसकी प्रगति और संप्रभुता के लिए प्रयत्नशील रहते हैं।
प्रश्न 2. खूनी रविवार क्या है?
उत्तर: 9 जनवरी, 1905 को रूस के श्रमिकों का एक शांतिपूर्ण जुलूस जार निकोलस द्वितीय से अपनी माँगें रखने के लिए महल की ओर जा रहा था। जार की सेना ने निहत्थे लोगों पर गोलियाँ बरसा दीं, जिसमें सैकड़ों लोग मारे गए। इस घटना को 'खूनी रविवार' के नाम से जाना जाता है और इसने 1905 की क्रांति की शुरुआत की।
प्रश्न 3. अक्टूबर क्रांति क्या है?
उत्तर: अक्टूबर क्रांति वह ऐतिहासिक घटना है जो नवंबर 1917 (पुराने कैलेंडर के अनुसार अक्टूबर) में रूस में हुई, जिसमें लेनिन के नेतृत्व वाली बोल्शेविक पार्टी ने अंतरिम सरकार को हटाकर सत्ता पर कब्जा कर लिया और दुनिया की पहली समाजवादी सरकार की स्थापना की।
प्रश्न 4. सर्वहारा वर्ग किसे कहते हैं?
उत्तर: सर्वहारा वर्ग (Proletariat) उस समाज के वर्ग को कहते हैं जिसके पास उत्पादन के साधन (जैसे जमीन, कारखाने) नहीं होते और जीविका चलाने के लिए उन्हें अपनी मजदूरी बेचनी पड़ती है। इसमें मुख्यतः औद्योगिक मजदूर शामिल हैं।
प्रश्न 5. क्रांति से पूर्व रूसी किसानों की स्थिति कैसी थी?
उत्तर: क्रांति से पूर्व रूसी किसानों की स्थिति अत्यंत दयनीय थी। वे गरीबी, अशिक्षा और जमींदारों के शोषण से जूझ रहे थे। भारी करों के बोझ और 1861 के बाद भी बनी रहने वाली आर्थिक बेड़ियों के कारण उनका जीवन कठिन था।
लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (60 शब्दों में उत्तर दें)
प्रश्न 1. रूसी क्रांति के किन्हीं दो कारणों का वर्णन करें।
उत्तर: रूसी क्रांति के दो प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:
1. जार की निरंकुशता एवं अयोग्य शासन: जार निकोलस द्वितीय एक निरंकुश शासक था जो जनता की समस्याओं के प्रति उदासीन था। उसकी अकुशल नौकरशाही और दमनकारी नीतियों ने जनता में गहरा असंतोष पैदा किया।
2. कृषकों की दयनीय स्थिति: रूस की अधिकांश जनता किसान थी, जो गरीबी, भूमिहीनता और भारी करों से पीड़ित थी। 1861 में दासत्व समाप्त होने के बाद भी उनकी आर्थिक स्थिति में कोई खास सुधार नहीं हुआ था, जिससे उनमें क्रांति की भावना पनपी।
प्रश्न 2. रूसीकरण की नीति क्रांति हेतु कहाँ तक उत्तरदायी थी?
उत्तर: रूसीकरण की नीति रूसी क्रांति के लिए काफी हद तक उत्तरदायी थी। जार निकोलस द्वितीय ने रूसी साम्राज्य में रहने वाले सभी गैर-रूसी लोगों (जैसे पोल, फिन, यहूदी, यूक्रेनियन) पर जबरन रूसी भाषा, संस्कृति और धर्म को थोपने की नीति अपनाई। इस नीति ने अल्पसंख्यक समुदायों में गहरा आक्रोश पैदा किया और राष्ट्रीय स्वतंत्रता के आंदोलनों को बल दिया, जिसने राजशाही के विरुद्ध व्यापक विरोध को जन्म दिया और क्रांति का मार्ग प्रशस्त किया।
प्रश्न 3. साम्यवाद एक नई आर्थिक एवं सामाजिक व्यवस्था थी। कैसे ?
उत्तर: साम्यवाद एक नई आर्थिक एवं सामाजिक व्यवस्था थी क्योंकि इसने पूँजीवादी व्यवस्था को पूरी तरह से बदलने का प्रस्ताव रखा। आर्थिक रूप से, इसने निजी संपत्ति और उत्पादन के साधनों पर व्यक्तिगत स्वामित्व को समाप्त करके उन पर सामूहिक या राज्य का स्वामित्व स्थापित किया। सामाजिक रूप से, इसका लक्ष्य वर्ग विहीन और शोषण मुक्त समाज की स्थापना करना था, जहाँ सभी को उनकी आवश्यकता के अनुसार संसाधन मिलें। यह पूरी तरह से एक क्रांतिकारी और नया विचार था।
प्रश्न 4. नई आर्थिक नीति मार्क्सवादी सिद्धान्तों के साथ समझौता था, कैसे ?
उत्तर: नई आर्थिक नीति (NEP) मार्क्सवादी सिद्धांतों के साथ एक व्यावहारिक समझौता थी। मार्क्सवाद पूर्ण रूप से पूँजीवाद का विरोध करता है, लेकिन गृहयुद्ध के बाद रूस की अर्थव्यवस्था चरमरा गई थी। लेनिन ने व्यावहारिकता दिखाते हुए 1921 में NEP लागू की, जिसमें कुछ पूँजीवादी तत्वों जैसे छोटे पैमाने पर निजी व्यापार, किसानों को अपनी उपज बेचने की स्वतंत्रता आदि को अनुमति दी गई। यह कदम शुद्ध मार्क्सवाद से हटकर था, लेकिन देश की अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने के लिए आवश्यक था।
प्रश्न 5. प्रथम विश्वयुद्ध में रूस की पराजय ने क्रांति हेतु मार्ग प्रशस्त किया, कैसे?
उत्तर: प्रथम विश्वयुद्ध में रूस की पराजय और भारी क्षति ने क्रांति के लिए मार्ग प्रशस्त किया। युद्ध के कारण सैनिकों की भारी हानि हुई, अर्थव्यवस्था चरमरा गई और खाद्यान्न की भारी कमी हो गई। जार निकोलस द्वितीय का सेना का नेतृत्व संभालना विफल रहा। युद्ध की विफलताओं और देश की बदहाली ने जनता के क्रोध को चरम पर पहुँचा दिया। सैनिकों और आम जनता का सरकार से मोहभंग हो गया, जिससे फरवरी 1917 में जार का तख्तापलट हुआ और अंततः नवंबर 1917 में बोल्शेविक क्रांति सफल हुई।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (लगभग 150 शब्दों में उत्तर दें)
प्रश्न 1. रूसी क्रांति के कारणों की विवेचना करें।
उत्तर: 1917 की रूसी क्रांति एक जटिल ऐतिहासिक घटना थी, जिसके लिए दीर्घकालिक और तात्कालिक दोनों प्रकार के कारण जिम्मेदार थे।
दीर्घकालिक कारण:
1. राजनीतिक कारण: जारशाही की निरंकुश और दमनकारी प्रकृति मुख्य कारण थी। जार ईश्वरीय अधिकार से शासन करता था और जनता को कोई राजनीतिक अधिकार नहीं थे। अकुशल और भ्रष्ट नौकरशाही ने स्थिति को और बिगाड़ा।
2. सामाजिक-आर्थिक कारण: समाज जमींदारों (अभिजात वर्ग) और गरीब किसानों में बंटा हुआ था। औद्योगिक क्रांति के बाद शहरों में एक नया मजदूर वर्ग (सर्वहारा) पैदा हुआ, जो भयानक परिस्थितियों में काम करता था। किसान गरीबी और जमींदारों के शोषण से त्रस्त थे।
3. बौद्धिक कारण: कार्ल मार्क्स, लेनिन आदि के समाजवादी और क्रांतिकारी विचारों ने लोगों को प्रभावित किया। साहित्य और विचारधारा ने शोषण के खिलाफ आवाज उठाई।
तात्कालिक कारण:
1. प्रथम विश्वयुद्ध (1914-18): यह सबसे महत्वपूर्ण तात्कालिक कारण था। युद्ध में भारी जन-धन की हानि, अर्थव्यवस्था का पतन, खाद्य संकट और सेना की हार ने जन असंतोष को विस्फोटक बना दिया।
2. खूनी रविवार (1905) और 1905 की क्रांति: इसने जनता में क्रांतिकारी भावना को जगाया और दिखा दिया कि जारशाही दमन से नहीं डरती।
इन सभी कारणों के मेल ने ऐसी परिस्थितियाँ पैदा कीं कि फरवरी 1917 में जार का तख्तापलट हुआ और अंततः नवंबर 1917 में बोल्शेविक क्रांति सफल हुई, जिसने विश्व इतिहास की धारा बदल दी।
प्रश्न 2. नई आथ्थिक नीति कया है ?
उत्तर:
नई आर्थिक नीति (NEP) 1921 में व्लादिमीर लेनिन द्वारा शुरू की गई एक महत्वपूर्ण आर्थिक रणनीति थी। रूस में गृहयुद्ध के बाद 'युद्ध साम्यवाद' की नीतियों से अर्थव्यवस्था बर्बाद हो गई थी और लोगों में भारी असंतोष था। लेनिन ने महसूस किया कि तुरंत पूर्ण समाजवाद लागू करना संभव नहीं है, इसलिए उन्होंने एक ऐसी नीति बनाई जो कुछ पूंजीवादी तरीकों को अस्थायी रूप से अपनाकर अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने का प्रयास करती थी। इस नीति की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित थीं:
- कृषि सुधार: किसानों से जबरन अनाज लेने की प्रथा खत्म कर दी गई। इसके बदले उन पर एक निश्चित कर लगाया गया। कर चुकाने के बाद बचा हुआ अनाज किसान अपने पास रख सकता था और उसे बाजार में बेचकर लाभ कमा सकता था।
- जमीन का अधिकार: यह सिद्धांत तो बना रहा कि जमीन राज्य की है, लेकिन व्यवहार में किसानों को जमीन पर काम करने और उससे लाभ उठाने का पूरा अधिकार दे दिया गया।
- छोटे उद्योगों को छूट: 20 से कम मजदूरों वाले छोटे उद्योगों को निजी व्यक्तियों को वापस दे दिया गया, ताकि उनका प्रबंधन और उत्पादन बेहतर हो सके।
- विकेंद्रीकरण: बड़े उद्योगों का भी विकेंद्रीकरण किया गया, यानी स्थानीय प्रबंधकों को निर्णय लेने और उन्हें लागू करने की अधिक स्वतंत्रता दी गई।
- विदेशी निवेश: देश के विकास के लिए विदेशी पूंजी और तकनीक को सीमित मात्रा में आमंत्रित किया गया।
- बैंकिंग और बीमा: विभिन्न स्तरों पर बैंक खोले गए और व्यक्तिगत संपत्ति व जीवन का बीमा राजकीय एजेंसियों के माध्यम से शुरू किया गया।
- ट्रेड यूनियन: ट्रेड यूनियन की अनिवार्य सदस्यता को समाप्त कर दिया गया, जिससे मजदूरों को अधिक स्वतंत्रता मिली।
इस नीति का मुख्य उद्देश्य युद्धग्रस्त अर्थव्यवस्था को स्थिर करना, खाद्यान्न संकट को दूर करना और औद्योगिक उत्पादन को बढ़ावा देना था। यह नीति 1928 तक चली।
प्रश्न 3. झ्सी क्रांति के प्रभाव की विवेचना करें।
उत्तर:
1917 की रूसी क्रांति (बोल्शेविक क्रांति) ने न केवल रूस बल्कि पूरे विश्व पर गहरा और दूरगामी प्रभाव डाला। इसके प्रमुख प्रभाव निम्नलिखित हैं:
- सर्वहारा वर्ग की सत्ता: रूस में पहली बार श्रमिकों और किसानों (सर्वहारा वर्ग) की सरकार स्थापित हुई। जारशाही और पूंजीवादी व्यवस्था का अंत हुआ। इस सफलता ने दुनिया भर के मजदूरों और शोषित वर्गों में एक नई आशा और क्रांति की लहर पैदा की।
- विश्व का दो खेमों में बंटवारा: क्रांति के बाद विश्व मुख्य रूप से दो विचारधारात्मक गुटों में बंट गया – साम्यवादी विश्व (सोवियत संघ के नेतृत्व में) और पूंजीवादी विश्व (अमेरिका व पश्चिमी यूरोप के नेतृत्व में)। यूरोप भी पूर्वी (साम्यवादी) और पश्चिमी (पूंजीवादी) भागों में विभाजित हो गया।
- शीतयुद्ध की शुरुआत: द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद इन दोनों गुटों के बीच तनाव बढ़ा, जिसे 'शीतयुद्ध' का नाम दिया गया। यह सीधी लड़ाई नहीं, बल्कि वैचारिक प्रतिद्वंद्विता, गुप्तचर गतिविधियों, दूसरे देशों में हस्तक्षेप और हथियारों की होड़ का दौर था, जो लगभग चार दशकों तक चला।
- आर्थिक नियोजन का नया मॉडल: सोवियत संघ ने पंचवर्षीय योजनाओं के माध्यम से राज्य के नियंत्रण वाली केन्द्रीकृत अर्थव्यवस्था का मॉडल पेश किया। इसने तेजी से औद्योगीकरण और आर्थिक विकास का रास्ता दिखाया। बाद में, कई पूंजीवादी देशों ने भी अपनी अर्थव्यवस्थाओं में सरकारी हस्तक्षेप और योजनाबद्ध विकास के तत्वों को अपनाया।
- उपनिवेशवाद-विरोधी आंदोलनों को प्रोत्साहन: सोवियत सरकार ने एशिया और अफ्रीका के उपनिवेशवाद-विरोधी राष्ट्रीय आंदोलनों को नैतिक और वैचारिक समर्थन दिया। इससे इन देशों को स्वतंत्रता प्राप्त करने में मदद मिली और उन्हें वैकल्पिक विकास मॉडल भी दिखा।
प्रश्न 4. कार्ल मार्क्स की जीवनी एवं सिद्धान्तों का वर्णन करें।
उत्तर:
जीवनी: कार्ल मार्क्स का जन्म 5 मई, 1818 को जर्मनी के ट्रियर नगर में एक यहूदी परिवार में हुआ था। उनके पिता हेनरिक मार्क्स एक प्रसिद्ध वकील थे, जिन्होंने बाद में ईसाई धर्म अपना लिया था। मार्क्स ने शुरू में कानून की पढ़ाई की, लेकिन बर्लिन विश्वविद्यालय में उनकी रुचि दर्शन और इतिहास की ओर हो गई। वे दार्शनिक हीगल के विचारों से बहुत प्रभावित थे। 1843 में उन्होंने जेनी वॉन वेस्टफेलन से विवाह किया। पेरिस में 1844 में उनकी मुलाकात फ्रेडरिक एंगेल्स से हुई, जो उनके जीवन भर के सहयोगी और मित्र बने रहे। एंगेल्स के संपर्क में आकर मार्क्स ने मजदूर वर्ग की दशा और पूंजीवादी शोषण का गहन अध्ययन शुरू किया। 1848 में मार्क्स और एंगेल्स ने मिलकर 'कम्युनिस्ट मैनिफेस्टो' (साम्यवादी घोषणापत्र) प्रकाशित किया, जिसे आधुनिक समाजवाद का जन्मदाता माना जाता है। मार्क्स की सबसे महत्वपूर्ण रचना 'दास कैपिटल' (पूंजी) है, जिसका पहला भाग 1867 में प्रकाशित हुआ। इसे अक्सर 'समाजवादियों की बाइबिल' कहा जाता है। मार्क्स का 14 मार्च, 1883 को निधन हो गया।
मुख्य सिद्धांत:
- द्वंद्वात्मक भौतिकवाद: मार्क्स ने हीगल के द्वंद्वात्मक विचार को लेकर उसे भौतिकवादी आधार दिया। उनका मानना था कि समाज के विकास का आधार भौतिक परिस्थितियाँ (जैसे उत्पादन के साधन और संबंध) हैं, न कि विचार या आध्यात्मिकता। इन भौतिक विरोधाभासों के संघर्ष से ही समाज आगे बढ़ता है।
- वर्ग संघर्ष: मार्क्स के अनुसार, इतिहास वर्ग संघर्ष का इतिहास है। हर युग में समाज दो मुख्य वर्गों – शोषक (जैसे पूंजीपति) और शोषित (जैसे मजदूर) – में बंटा रहा है। इनके बीच का संघर्ष ही सामाजिक परिवर्तन लाता है।
- इतिहास की भौतिकवादी व्याख्या: मार्क्स ने कहा कि किसी समय की आर्थिक संरचना (अर्थात उत्पादन के तरीके और संबंध) ही उस समय के राजनीतिक, सामाजिक, कानूनी और सांस्कृतिक ढाँचे (जिसे वह 'अधिरचना' कहते हैं) को निर्धारित करती है।
- अतिरिक्त मूल्य का सिद्धांत: यह मार्क्स के आर्थिक सिद्धांत की आधारशिला है। इसमें कहा गया है कि पूंजीपति मजदूर से उसके श्रम का पूरा मूल्य नहीं देता। मजदूर जितना मूल्य पैदा करता है और उसे जितनी मजदूरी मिलती है, उसके बीच का अंतर 'अतिरिक्त मूल्य' होता है, जिस पर पूंजीपति कब्जा कर लेता है। यही शोषण और पूंजीवादी लाभ का स्रोत है।
- राज्यहीन और वर्गहीन समाज: मार्क्स का सपना एक ऐसे समाज का था जहाँ वर्ग भेद न हो और राज्य जैसी दमनकारी संस्था की कोई जरूरत न रहे। उनका मानना था कि सर्वहारा वर्ग की क्रांति के बाद एक अस्थायी 'सर्वहारा की तानाशाही' आएगी, जो अंततः एक वर्गहीन, शांतिपूर्ण साम्यवादी समाज की स्थापना करेगी, जहाँ हर व्यक्ति अपनी योग्यता के अनुसार काम करेगा और आवश्यकता के अनुसार पाएगा।
प्रश्न 5. यूटोपियन समाजवादियों के विचारों का वर्णन करें।
उत्तर:
यूटोपियन समाजवादी 19वीं सदी के शुरुआती विचारक थे, जिन्होंने पूंजीवादी समाज की क्रूरताओं और असमानताओं को देखकर एक आदर्श (यूटोपियन या स्वप्नदर्शी) समाज की कल्पना की। उनका मानना था कि तर्क, नैतिक अपील और शांतिपूर्ण सुधारों के माध्यम से समाजवाद लाया जा सकता है। इनमें प्रमुख थे:
- सेंट साइमन (फ्रांस): वे पहले यूटोपियन समाजवादी माने जाते हैं। उन्होंने कहा कि समाज का नेतृत्व वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और उद्योगपतियों के हाथ में होना चाहिए, न कि आलसी अभिजात वर्ग के। उनका लक्ष्य एक ऐसा औद्योगिक समाज बनाना था जहाँ उत्पादन सामूहिक कल्याण के लिए हो और हर व्यक्ति को उसकी क्षमता के अनुसार काम मिले।
- चार्ल्स फूरिये (फ्रांस): फूरिये ने 'फालांज्स' नामक आदर्श सहकारी समुदायों का प्रस्ताव रखा। इनमें लगभग 1600 लोग एक साथ रहकर काम करते, जहाँ पूंजी और श्रम के बीच सहयोग होता। उनका मानना था कि ऐसे समुदायों से सामाजिक सद्भाव और खुशहाली आएगी।
- रॉबर्ट ओवन (ब्रिटेन): ओवन एक सफल उद्योगपति थे, जिन्होंने अपने ही कारखाने में सुधार करके दिखाया। उन्होंने मजदूरों के काम के घंटे कम किए, बच्चों के लिए स्कूल खोले और स्वस्थ वातावरण बनाया। उन्होंने 'न्यू लैनार्क' और अमेरिका में 'न्यू हार्मनी' जैसे सहकारी समुदायों की स्थापना की, ताकि यह साबित हो सके कि नैतिक सिद्धांतों पर चलने वाला उद्योग अधिक सफल और मानवीय हो सकता है।
यूटोपियन समाजवादियों के सामान्य विचार:
- वे पूंजीवादी प्रतिस्पर्धा और निजी संपत्ति को सामाजिक बुराइयों का मूल मानते थे।
- उनका लक्ष्य शोषण रहित, सहकारिता और समानता पर आधारित समाज बनाना था।
- वे मानते थे कि समाज के सभी वर्गों को तर्क और नैतिकता से समझाकर शांतिपूर्ण सुधार किए जा सकते हैं। उन्होंने हिंसक क्रांति का समर्थन नहीं किया।
- उन्होंने छोटे-छोटे आदर्श समुदायों के प्रयोगों के माध्यम से अपने विचारों को साकार करने का प्रयास किया।
हालाँकि इनके प्रयोग अधिकांशतः असफल रहे, लेकिन इन विचारकों ने पूंजीवाद की आलोचना करके और एक बेहतर समाज की कल्पना करके बाद के वैज्ञानिक समाजवादियों (जैसे मार्क्स और एंगेल्स) के लिए मार्ग प्रशस्त किया। मार्क्स ने इन्हें 'यूटोपियन' इसलिए कहा क्योंकि उनके पास समाज को बदलने की कोई वैज्ञानिक या व्यावहारिक रणनीति नहीं थी।
Bihar Board Class 10 Social Science (इतिहास) Solutions
प्रश्न. 1854-56 के क्रीमिया युद्ध में किसकी हार हुई थी?
उत्तर: 1854-56 के क्रीमिया युद्ध में रूस की हार हुई थी। यह युद्ध रूसी साम्राज्य और ऑटोमन साम्राज्य, फ्रांस, ब्रिटेन तथा सार्डिनिया के गठबंधन के बीच लड़ा गया था। रूस की इस हार ने उसकी सैन्य कमजोरियों को उजागर किया और देश के भीतर व्यापक सुधारों की माँग को बल दिया।
प्रश्न 2. रूसी क्रांति किसके नेतृत्व में हुई थी?
उत्तर: 1917 की रूसी क्रांति बोल्शेविक दल के नेता व्लादिमीर इलिच लेनिन के नेतृत्व में हुई थी। लेनिन के कुशल नेतृत्व में बोल्शेविकों ने अक्टूबर क्रांति (नवंबर 1917) के माध्यम से अस्थायी सरकार को उखाड़ फेंका और दुनिया की पहली साम्यवादी सरकार की स्थापना की।
प्रश्न 3. जार एलेक्जेंडर द्वितीय की हत्या 1881 ई० में किसने की?
उत्तर: 1881 ई० में निहिलिस्टों (Nihilists) के एक समूह ने जार एलेक्जेंडर द्वितीय की हत्या कर दी। निहिलिस्ट एक क्रांतिकारी संगठन था जो राजशाही व्यवस्था को उखाड़ फेंकने के लिए हिंसक तरीकों का इस्तेमाल करता था।
प्रश्न 4. रूस के सम्राट को क्या कहा जाता था?
उत्तर: रूस के सम्राट को 'जार' (Tsar) कहा जाता था। यह शब्द रोमन शासक 'सीज़र' से लिया गया है और इसका प्रयोग रूसी साम्राज्य के पूर्णत: निरंकुश शासक के लिए किया जाता था।
प्रश्न 5. रूस में किस राजवंश का शासन था ?
उत्तर: 1917 की क्रांति से पहले रूस में रोमनोव वंश (House of Romanov) का शासन था। इस वंश ने 1613 से लेकर 1917 तक, लगभग तीन सौ वर्षों तक रूस पर शासन किया।
प्रश्न 6. रूस की संसद का क्या नाम था ?
उत्तर: रूस की संसद का नाम 'ड्यूमा' (Duma) था। इसे 1905 की क्रांति के बाद जार निकोलस द्वितीय द्वारा स्थापित किया गया था, हालाँकि इसकी शक्तियाँ बहुत सीमित थीं और जार इसे कभी भ�ंग कर सकता था।
प्रश्न 7. रूस में कृषि-दासता की प्रथा किस वर्ष समाप्त हुई।
उत्तर: रूस में कृषि-दासता (सर्फडम) की प्रथा 1861 ईस्वी में समाप्त हुई। जार एलेक्जेंडर द्वितीय ने इस वर्ष एक घोषणा पत्र (एमैन्सिपेशन एडिक्ट) जारी कर करोड़ों सर्फ़ (बंधुआ किसानों) को आजाद किया।
प्रश्न 8. रासपुटिन कौन था ?
उत्तर: रासपुटिन एक रहस्यमय और विवादास्पद रूसी पादरी था। उसका पूरा नाम ग्रिगोरी रासपुटिन था। वह जार निकोलस द्वितीय और उनकी पत्नी एलेक्जेंड्रा के दरबार में बहुत प्रभावशाली हो गया था, क्योंकि उस पर उनके बीमार बेटे के स्वास्थ्य में सुधार लाने का दावा किया जाता था। उसका दरबार में बढ़ता प्रभाव रूसी राजशाही की छवि को नुकसान पहुँचाता था।
प्रश्न 9. वार एंड पीस उपन्यास के लेखक कौन थे?
उत्तर: 'वार एंड पीस' (युद्ध और शांति) उपन्यास के लेखक महान रूसी साहित्यकार लियो टॉल्सटॉय थे। यह ऐतिहासिक उपन्यास नेपोलियन के रूस पर आक्रमण के दौरान रूसी समाज के विभिन्न वर्गों के जीवन का विस्तृत चित्रण करता है।
प्रश्न 10. रूस में कृषि-दासता की प्रथा किसने समाप्त की?
उत्तर: रूस में कृषि-दासता (सर्फडम) की प्रथा को जार एलेक्जेंडर द्वितीय ने समाप्त किया। 1861 में उन्होंने 'मुक्ति घोषणा पत्र' जारी किया, जिसके द्वारा लाखों सर्फ़ (बंधुआ किसान) कानूनी तौर पर स्वतंत्र हो गए। हालाँकि, इस सुधार के बाद भी किसानों को जमीन खरीदने के लिए भारी मुआवजा देना पड़ता था और वे गरीबी में ही जीवन व्यतीत करते रहे। इस कार्य के लिए उन्हें 'मुक्तिदाता जार' भी कहा जाता है।
प्रश्न 11. साम्यवादी शासन का पहला प्रयोग कहाँ हुआ था ?
उत्तर: साम्यवादी शासन का पहला सफल और व्यापक प्रयोग रूस में हुआ था। 1917 की अक्टूबर क्रांति के बाद बोल्शेविक पार्टी ने सत्ता पर कब्जा कर लिया और कार्ल मार्क्स के सिद्धांतों पर आधारित एक साम्यवादी राज्य की स्थापना की। इसने न केवल रूस, बल्कि पूरी दुनिया की राजनीति को गहराई से प्रभावित किया।
प्रश्न 12. किसने सुधार के लिए आतंकवाद का सहारा लिया ?
उत्तर: रूस में निहिलिस्टों (Nihilists) ने सामाजिक-राजनीतिक सुधार लाने के लिए आतंकवाद का सहारा लिया। वे मानते थे कि जारशाही की पुरानी और दमनकारी व्यवस्था को शांतिपूर्ण तरीकों से बदला नहीं जा सकता। इसलिए उन्होंने हिंसक तरीकों, जैसे कि हत्याओं और बम विस्फोटों, का इस्तेमाल किया। 1881 में जार एलेक्जेंडर द्वितीय की हत्या उनकी सबसे प्रसिद्ध कार्रवाई थी।
लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1. समाजवादी दर्शन क्या है ?
उत्तर: समाजवादी दर्शन एक आर्थिक और सामाजिक विचारधारा है जिसका मुख्य लक्ष्य शोषणमुक्त और समतामूलक समाज की स्थापना करना है। इसके प्रमुख सिद्धांत हैं:
- उत्पादन के साधनों पर सामूहिक स्वामित्व: समाजवाद निजी संपत्ति के बजाय कारखानों, जमीन और उद्योगों पर समाज या राज्य के स्वामित्व पर जोर देता है।
- लाभ का समान वितरण: धन और संसाधनों का वितरण सभी की आवश्यकताओं के अनुसार किया जाना चाहिए, न कि केवल कुछ लोगों के लाभ के लिए।
- सहकारिता: यह प्रतिस्पर्धा के बजाय सहयोग और मिल-जुलकर काम करने के सिद्धांत को बढ़ावा देता है।
प्रश्न 2. रॉबर्ट ओवेन का संक्षिप्त परिचय दें?
उत्तर: रॉबर्ट ओवेन (1771-1858) एक ब्रिटिश उद्योगपति और प्रारंभिक समाजवादी विचारक थे, जिन्हें अक्सर 'यूटोपियन समाजवाद का अग्रदूत' कहा जाता है।
- उनका मानना था कि संतुष्ट श्रमिक ही बेहतर उत्पादन दे सकते हैं।
- उन्होंने स्कॉटलैंड के न्यू लैनार्क में अपनी कपड़ा मिल में एक आदर्श समुदाय बनाने का प्रयास किया।
- इसमें उन्होंने श्रमिकों के लिए अच्छे आवास, स्वच्छ परिवेश, उचित मजदूरी, काम के घंटे कम करना और बाल श्रम पर रोक लगाई।
- श्रमिकों के बच्चों के लिए स्कूल और सभी के लिए चिकित्सा सुविधाएँ भी उपलब्ध कराईं।
- दिलचस्प बात यह है कि इन सुधारों के बावजूद उनकी मिल का मुनाफा बढ़ गया, जिससे उनका सिद्धांत सही साबित हुआ कि मानवीय व्यवहार भी लाभदायक हो सकता है।
प्रश्न 3. 1917 ई० की क्रांति के समय रूस में किस राजवंश का शासन था? इस शासन का स्वरूप क्या था ?
उत्तर: 1917 की क्रांति के समय रूस में रोमनोव वंश का शासन था। इस शासन का स्वरूप पूर्ण निरंकुश राजतंत्र (Autocratic Monarchy) था।
- रूस का सम्राट, जार, स्वयं को 'ईश्वर का प्रतिनिधि' मानता था और उसकी सत्ता पर किसी का कोई नियंत्रण नहीं था।
- वह सेना, न्यायपालिका और प्रशासन का सर्वोच्च अधिकारी था।
- वह रूसी ऑर्थोडॉक्स चर्च का भी प्रमुख था, जिससे धर्म और राज्य की शक्ति एक ही व्यक्ति में केंद्रित थी।
- प्रजा को मतदान का अधिकार नहीं था और कोई लोकतांत्रिक संस्था (1905 तक) नहीं थी। पुलिस और गुप्तचर एजेंसियाँ जनता पर निरंतर नजर रखती थीं।
- इस प्रकार, जार की सत्ता पूर्णतः स्वेच्छाचारी थी और आम जनता उसके अत्याचारों से भयभीत रहती थी।
प्रश्न 4. निहिलिज्म से आप क्या समझते हैं ? रूस पर इसका क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर: निहिलिज्म (Nihilism) 19वीं सदी के उत्तरार्ध में रूस में उभरा एक क्रांतिकारी आंदोलन था।
- अर्थ: निहिलिस्टों का मानना था कि रूस की सामंती और निरंकुश व्यवस्था इतनी भ्रष्ट और पुरानी हो चुकी है कि उसे सुधारा नहीं जा सकता, बल्कि पूरी तरह नष्ट कर देना चाहिए। वे धर्म, परंपरा और सामाजिक मूल्यों जैसी सभी स्थापित संस्थाओं को नकारते थे।
- रूस पर प्रभाव:
- राजनीतिक हिंसा को बढ़ावा: निहिलिस्टों ने जारशाही को उखाड़ फेंकने के लिए आतंकवाद को एक तरीके के रूप में अपनाया।
- जार की हत्या: 1881 में निहिलिस्टों ने सुधारवादी जार एलेक्जेंडर द्वितीय की हत्या कर दी। इस घटना ने पूरे देश को हिला दिया।
- प्रतिक्रियावादी शासन: इस हत्या के बाद आने वाले जारों (जैसे अलेक्जेंडर तृतीय) ने और भी कठोर और दमनकारी नीतियाँ अपनाईं, जिससे जन असंतोष और बढ़ा।
- क्रांतिकारी भावना का प्रसार: निहिलिज्म ने युवाओं और बुद्धिजीवियों में क्रांति की भावना को मजबूत किया और भविष्य की क्रांतिकारी गतिविधियों का मार्ग प्रशस्त किया।
प्रश्न 5. बौद्धिक जागरण ने रूसी क्रांति को किस प्रकार प्रभावित किया ?
उत्तर: 19वीं सदी के उत्तरार्ध में रूस में हुए बौद्धिक जागरण ने रूसी क्रांति के लिए वैचारिक आधार तैयार किया।
- साहित्यिक आलोचना: महान लेखकों जैसे लियो टॉल्सटॉय, फ्योदोर दोस्तोवस्की, मैक्सिम गोर्की आदि ने अपनी रचनाओं के माध्यम से सामंतवाद, गरीबी, सामाजिक अन्याय और जारशाही के दमन का मार्मिक चित्रण किया। इससे जनता में जागरूकता और असंतोष फैला।
- समाजवादी विचारधारा का प्रसार: कार्ल मार्क्स के लेखन का रूसी बुद्धिजीवियों पर गहरा प्रभाव पड़ा। उनके वर्ग संघर्ष और शोषणमुक्त समाज के सिद्धांत ने क्रांतिकारियों को एक स्पष्ट लक्ष्य दिया।
- विचारों का संचार: इन लेखकों और विचारकों ने पत्र-पत्रिकाओं, बहसों और गुप्त सभाओं के माध्यम से अपने विचार फैलाए। इससे छात्र, श्रमिक और किसान निरंकुश शासन के खिलाफ संगठित होने लगे।
- संक्षेप में, बौद्धिक जागरण ने लोगों को सोचने, सवाल करने और विरोध करने की प्रेरणा दी, जो अंततः 1917 की क्रांति का कारण बना।
प्रश्न 6. मेन्शिविकों और बोल्शेविकों के विषय में आप क्या जानते हैं ?
उत्तर: मेन्शिविक और बोल्शेविक रूसी सोशल डेमोक्रेटिक लेबर पार्टी के दो प्रमुख गुट थे, जो 1903 में हुए विभाजन के बाद अलग हो गए।
| आधार | मेन्शिविक (Mensheviks) | बोल्शेविक (Bolsheviks) |
|---|---|---|
| नेता | जूलियस मार्टोव | व्लादिमीर लेनिन |
| शाब्दिक अर्थ | 'अल्पमत वाले' | 'बहुमत वाले' |
| सदस्यता | वे एक व्यापक और खुली पार्टी चाहते थे, जिसमें सभी समर्थक शामिल हो सकें। | वे एक अनुशासित, छोटे और क्रांतिकारी कैडरों वाली पार्टी के पक्ष में थे। |
| क्रांति का तरीका | वे मानते थे कि रूस को पहले पूंजीवाद और बुर्जुआ लोकतंत्र से गुजरना चाहिए, उसके बाद धीरे-धीरे समाजवाद आएगा। उनका तरीका धीमा और संवैधानिक था। | वे तुरंत और हिंसक क्रांति के जरिए सीधे समाजवाद लाना चाहते थे। उनका तरीका तेज और क्रांतिकारी था। |
| गठबंधन | मध्यम वर्ग और उदारवादियों के साथ गठबंधन करने के पक्ष में। | किसानों और मजदूरों पर भरोसा; अन्य वर्गों के साथ गठबंधन के विरोधी। |
| 1917 में भूमिका | फरवरी क्रांति के बाद बनी अस्थायी सरकार में शामिल हुए। | अस्थायी सरकार का विरोध किया और अक्टूबर 1917 में सशस्त्र विद्रोह कर सत्ता हासिल की। |
समाजवाद एवं साम्यवाद
1. सही विकल्प चुनें-
(i) समाजवाद का अर्थ है-
(क) समाज का हित
(ख) समाज का अहित
(ग) समाज का विनाश
(घ) समाज का विभाजन
उत्तर- (क) समाज का हित
समाजवाद एक ऐसी आर्थिक एवं सामाजिक व्यवस्था है जिसका मुख्य उद्देश्य समाज के सभी वर्गों का कल्याण और हित सुनिश्चित करना है। इसमें उत्पादन के साधनों पर सामूहिक स्वामित्व या नियंत्रण होता है ताकि आर्थिक असमानता को कम किया जा सके और सभी को उचित अवसर मिल सके।
(ii) साम्यवाद का अर्थ है-
(क) समानता का विचार
(ख) असमानता का विचार
(ग) शोषण का विचार
(घ) उपर्युक्त सभी
उत्तर- (क) समानता का विचार
साम्यवाद समाजवाद की एक उन्नत अवस्था है जिसका केंद्रीय विचार पूर्ण सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक समानता स्थापित करना है। इसमें वर्गविहीन समाज की कल्पना की गई है जहाँ उत्पादन के सभी साधन पूरी तरह से समुदाय के नियंत्रण में होते हैं और प्रत्येक व्यक्ति को उसकी आवश्यकता के अनुसार संसाधन प्राप्त होते हैं।
(iii) समाजवाद के जनक हैं-
(क) कार्ल मार्क्स
(ख) लेनिन
(ग) रॉबर्ट ओवन
(घ) सेंट साइमन
उत्तर- (ग) रॉबर्ट ओवन
रॉबर्ट ओवन (1771-1858) को आधुनिक समाजवाद के प्रमुख जनकों में से एक माना जाता है। वे एक ब्रिटिश सामाजिक सुधारक थे जिन्होंने श्रमिकों की दशा सुधारने, सहकारी समितियों को बढ़ावा देने और शिक्षा के महत्व पर जोर देने के लिए व्यावहारिक प्रयोग किए। उनका मानना था कि मनुष्य का चरित्र उसके परिवेश से बनता है, इसलिए बेहतर वातावरण से एक बेहतर समाज का निर्माण हो सकता है।
(iv) कार्ल मार्क्स का जन्म कब हुआ था?
(क) 5 मई, 1818
(ख) 10 मार्च, 1818
(ग) 5 मई, 1883
(घ) 10 मार्च, 1883
उत्तर- (क) 5 मई, 1818
कार्ल मार्क्स का जन्म 5 मई, 1818 को जर्मनी के ट्रायर शहर में हुआ था। वे एक दार्शनिक, अर्थशास्त्री, इतिहासकार, राजनीतिक सिद्धांतकार और समाजशास्त्री थे जिन्होंने फ्रेडरिक एंगेल्स के साथ मिलकर 'कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो' (1848) लिखा। उनके विचारों ने दुनिया भर में साम्यवादी आंदोलनों को गहराई से प्रभावित किया।
(v) 'दास कैपिटल' के लेखक हैं-
(क) रॉबर्ट ओवन
(ख) कार्ल मार्क्स
(ग) लेनिन
(घ) सेंट साइमन
उत्तर- (ख) कार्ल मार्क्स
'दास कैपिटल' (मूल जर्मन नाम: 'दास कपिटल') के मुख्य लेखक कार्ल मार्क्स हैं। यह पुस्तक राजनीतिक अर्थशास्त्र पर एक मौलिक ग्रंथ है जिसमें पूँजीवादी व्यवस्था की गहन आलोचना की गई है और अतिरिक्त मूल्य के सिद्धांत के माध्यम से शोषण की प्रक्रिया को समझाया गया है। इसका प्रथम खंड 1867 में प्रकाशित हुआ था।
2. रिक्त स्थानों की पूर्ति करें-
(i) समाजवाद का अर्थ है ________ ।
उत्तर- समाज का हित
समाजवाद का मूल अर्थ समाज के सामूहिक कल्याण और हित से है। यह एक ऐसी व्यवस्था पर जोर देता है जहाँ आर्थिक संसाधनों पर समाज का नियंत्रण हो और उत्पादन का लक्ष्य लाभ कमाने के बजाय सामाजिक आवश्यकताओं की पूर्ति करना हो।
(ii) साम्यवाद का अर्थ है ________ ।
उत्तर- समानता का विचार
साम्यवाद समाजवाद की चरम अवस्था है जिसका लक्ष्य एक ऐसे वर्गविहीन समाज की स्थापना करना है जहाँ सभी प्रकार की सामाजिक व आर्थिक असमानताएँ समाप्त हो जाएँ और 'प्रत्येक से उसकी क्षमता के अनुसार, प्रत्येक को उसकी आवश्यकता के अनुसार' का सिद्धांत लागू हो।
(iii) समाजवाद के जनक ________ हैं।
उत्तर- रॉबर्ट ओवन
रॉबर्ट ओवन को उनके व्यावहारिक सामाजिक प्रयोगों और श्रमिक कल्याण के सिद्धांतों के कारण आधुनिक समाजवाद के जनक के रूप में जाना जाता है। उन्होंने सिद्ध किया कि श्रमिकों के लिए बेहतर परिस्थितियाँ न केवल नैतिक रूप से सही हैं बल्कि उत्पादकता बढ़ाने में भी सहायक हैं।
(iv) कार्ल मार्क्स का जन्म ________ को हुआ था।
उत्तर- 5 मई, 1818
कार्ल मार्क्स, जिन्हें वैज्ञानिक समाजवाद का प्रणेता माना जाता है, का जन्म 5 मई, 1818 को हुआ था। उनके विचारों ने बीसवीं सदी की विश्व राजनीति को गहराई से प्रभावित किया और अनेक क्रांतियों को प्रेरित किया।
(v) 'दास कैपिटल' के लेखक ________ हैं।
उत्तर- कार्ल मार्क्स
'दास कैपिटल' कार्ल मार्क्स की सर्वाधिक प्रसिद्ध रचना है। इस ग्रंथ में उन्होंने पूँजीवादी अर्थव्यवस्था के अंतर्विरोधों, शोषण के तंत्र और इसके अंतिम पतन की अनिवार्यता का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया है।
3. सही जोड़ी बनाइए-
(क) समाजवाद - 1. कार्ल मार्क्स
(ख) साम्यवाद - 2. रॉबर्ट ओवन
(ग) समाजवाद के जनक - 3. समानता का विचार
(घ) दास कैपिटल - 4. समाज का हित
उत्तर-
(क) समाजवाद - 4. समाज का हित
(ख) साम्यवाद - 3. समानता का विचार
(ग) समाजवाद के जनक - 2. रॉबर्ट ओवन
(घ) दास कैपिटल - 1. कार्ल मार्क्स
व्याख्या: यह जोड़ी मुख्य अवधारणाओं और उनसे जुड़े व्यक्तियों या विचारों को सही ढंग से मिलाती है। समाजवाद समाज के हित की बात करता है, जबकि साम्यवाद पूर्ण समानता का लक्ष्य रखता है। रॉबर्ट ओवन को समाजवाद के प्रारंभिक प्रवर्तक के रूप में और कार्ल मार्क्स को उनकी प्रसिद्ध पुस्तक 'दास कैपिटल' के लिए जाना जाता है।
4. समाजवाद से आप क्या समझते हैं?
उत्तर-
समाजवाद एक आर्थिक एवं सामाजिक दर्शन है जिसका केंद्रीय विचार यह है कि उत्पादन के साधनों, वितरण और विनिमय पर समाज या राज्य का स्वामित्व या नियंत्रण होना चाहिए। इसके प्रमुख बिंदु निम्नलिखित हैं:
- सामूहिक हित: समाजवाद व्यक्तिगत लाभ के बजाय समाज के सामूहिक कल्याण और हित को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है।
- आर्थिक समानता: इसका उद्देश्य आर्थिक असमानता और वर्ग भेद को कम करना या समाप्त करना है ताकि धन और अवसरों का न्यायपूर्ण वितरण हो सके।
- शोषण का अंत: यह पूँजीवादी व्यवस्था में मजदूरों के शोषण को समाप्त करने का प्रयास करता है।
- राज्य की भूमिका: समाजवाद में राज्य की एक सक्रिय भूमिका होती है, जो आर्थिक नियोजन और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के माध्यम से नागरिकों के कल्याण को सुनिश्चित करता है।
- व्यावहारिक प्रयोग: रॉबर्ट ओवन जैसे समाजवादियों ने इसे केवल सिद्धांत तक सीमित न रखकर सहकारी समितियों और बेहतर कार्यस्थलों के रूप में व्यवहार में लाने का प्रयास किया।
5. साम्यवाद से आप क्या समझते हैं?
उत्तर-
साम्यवाद समाजवाद की एक उन्नत एवं चरम अवस्था है, जिसका अंतिम लक्ष्य एक वर्गविहीन, राज्यविहीन और पूर्णतः समतामूलक समाज की स्थापना करना है। कार्ल मार्क्स और फ्रेडरिक एंगेल्स ने इसे एक वैज्ञानिक सिद्धांत के रूप में प्रस्तुत किया। इसकी प्रमुख विशेषताएँ हैं:
- वर्ग संघर्ष का अंत: मार्क्स के अनुसार, इतिहास वर्ग संघर्ष का इतिहास है। साम्यवाद में पूँजीपति वर्ग (बुर्जुआ) और श्रमिक वर्ग (सर्वहारा) के बीच संघर्ष समाप्त हो जाएगा क्योंकि वर्गों का ही अस्तित्व नहीं रहेगा।
- उत्पादन के साधनों पर सामूहिक स्वामित्व: भूमि, कारखाने, बैंक आदि सभी उत्पादन के साधन पूरे समुदाय की संपत्ति होंगे। निजी संपत्ति का लगभग पूर्ण रूप से उन्मूलन हो जाएगा।
- 'प्रत्येक से क्षमतानुसार, प्रत्येक को आवश्यकतानुसार': यह साम्यवाद का मूलमंत्र है। प्रत्येक व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुसार काम करेगा और उसे उसकी आवश्यकताओं के अनुसार संसाधन प्राप्त होंगे।
- राज्य का विलोपन: मार्क्स का मानना था कि राज्य शासक वर्ग का दमनकारी उपकरण है। वर्गविहीन समाज में राज्य की आवश्यकता स्वतः समाप्त हो जाएगी और यह 'शासन' के बजाय 'प्रशासन' में बदल जाएगा।
- क्रांतिकारी परिवर्तन: साम्यवाद की स्थापना के लिए श्रमिक वर्ग द्वारा एक क्रांतिकारी संघर्ष आवश्यक माना गया है, जिसके बाद पूँजीवादी व्यवस्था का अंत होगा।
6. समाजवाद और साम्यवाद में अंतर स्पष्ट करें।
उत्तर-
समाजवाद और साम्यवाद दोनों ही पूँजीवाद के विकल्प के रूप में उभरे आर्थिक-सामाजिक सिद्धांत हैं, लेकिन इनमें कुछ मौलिक अंतर हैं। इन अंतरों को निम्नलिखित बिंदुओं के आधार पर स्पष्ट किया जा सकता है:
| आधार | समाजवाद | साम्यवाद |
|---|---|---|
| अर्थ एवं लक्ष्य | इसका अर्थ 'समाज का हित' है। इसका लक्ष्य आर्थिक असमानता को कम करके सामाजिक कल्याण की व्यवस्था करना है। | इसका अर्थ 'समानता का विचार' है। इसका चरम लक्ष्य एक वर्गविहीन, राज्यविहीन और पूर्णतः समतामूलक समाज की स्थापना करना है। |
| संपत्ति पर स्वामित्व | इसमें उत्पादन के प्रमुख साधनों (जैसे बड़े उद्योग, बैंक) पर राज्य या सहकारी समितियों का स्वामित्व होता है, लेकिन कुछ निजी संपत्ति की अनुमति हो सकती है। | इसमें सभी उत्पादन के साधनों पर पूर्ण सामूहिक स्वामित्व होता है। निजी संपत्ति का व्यावहारिक रूप से उन्मूलन कर दिया जाता है। |
| राज्य की भूमिका | समाजवाद में राज्य एक सक्रिय भूमिका निभाता है। यह आर्थिक नियोजन, वितरण और सामाजिक सुरक्षा का कार्य करता है। | साम्यवाद का सिद्धांतिक लक्ष्य राज्य का पूर्ण विलोपन है। माना जाता है कि वर्गविहीन समाज में राज्य की आवश्यकता स्वतः समाप्त हो जाएगी। |
| विकास की अवस्था | मार्क्सवादी सिद्धांत के अनुसार, समाजवाद साम्यवाद की ओर बढ़ने की एक संक्रमणकालीन अवस्था है। यह पूँजीवाद और साम्यवाद के बीच का पड़ाव है। | साम्यवाद समाजवाद के बाद आने वाली एक उच्चतर एवं अंतिम अवस्था है, जहाँ समाज पूर्ण परिपक्वता को प्राप्त कर लेता है। |
| वितरण का सिद्धांत | समाजवाद में वितरण का सिद्धांत "प्रत्येक से उसकी क्षमता के अनुसार, प्रत्येक को उसके कार्य के अनुसार" हो सकता है। | साम्यवाद में वितरण का आदर्श सिद्धांत है: "प्रत्येक से उसकी क्षमता के अनुसार, प्रत्येक को उसकी आवश्यकता के अनुसार।" |
| प्रमुख व्यक्ति | रॉबर्ट ओवन, सेंट साइमन, चार्ल्स फूरियर जैसे उत्पूर्व समाजवादी (Utopian Socialists)। | कार्ल मार्क्स और फ्रेडरिक एंगेल्स, जिन्होंने इसे एक वैज्ञानिक सिद्धांत के रूप में प्रस्तुत किया। |
सारांश: समाजवाद एक सुधारवादी और व्यावहारिक दृष्टिकोण है जो मौजूदा व्यवस्था के भीतर ही बदलाव लाना चाहता है, जबकि साम्यवाद एक क्रांतिकारी और आदर्शवादी दर्शन है जो समाज की मूलभूत संरचना को ही बदलने का लक्ष्य रखता है।
प्रश्न 3. 1917 की रूसी क्रांति के प्रमुख कारणों का उल्लेख करें।
उत्तर:
1917 की रूसी क्रांति एक ऐतिहासिक घटना थी जिसने न केवल रूस बल्कि पूरी दुनिया को प्रभावित किया। इस क्रांति के प्रमुख कारण निम्नलिखित थे:
- जार की निरंकुशता एवं अयोग्य शासन: रूस पर रोमनोव राजवंश का शासन था और सम्राट को 'जार' कहा जाता था। जार निकोलस द्वितीय दैवीय अधिकारों में विश्वास रखता था और प्रजा की समस्याओं के प्रति उदासीन था। उसकी अफसरशाही भ्रष्ट, जड़ और अकुशल थी, जिससे जनता में गहरा असंतोष था।
- कृषकों की दयनीय स्थिति: रूस की अधिकांश जनता किसान थी। 1861 में कृषि दासता (सर्फडम) खत्म होने के बावजूद, उनकी हालत नहीं सुधरी। उनके पास छोटे-छोटे खेत थे, पुराने तरीकों से खेती करते थे और सरकार पर भारी करों के बोझ से दबे हुए थे। गरीबी और शोषण ने उन्हें क्रांति के रास्ते पर धकेल दिया।
- औद्योगीकरण की समस्या: रूस का औद्योगीकरण पश्चिमी देशों से अलग था। उद्योग केवल कुछ शहरों में सीमित थे और देश में पूंजी की कमी थी। इसलिए सरकार ने विदेशी पूंजी पर निर्भरता बढ़ा दी, जिससे विदेशी पूंजीपतियों का शोषण बढ़ा और मजदूरों की स्थिति खराब हुई।
- रूसीकरण की नीति: रूस एक बहु-जातीय देश था, जहाँ रूसी, पोल, यहूदी, जर्मन आदि कई समुदाय रहते थे। जार निकोलस द्वितीय ने 'रूसीकरण' की नीति अपनाई, जिसके तहत सभी पर रूसी भाषा, संस्कृति और शिक्षा थोपी गई। इससे अल्पसंख्यक समुदायों में गहरा आक्रोश पैदा हुआ और वे राजशाही के खिलाफ हो गए।
- विदेशी युद्धों में पराजय:
- क्रीमिया का युद्ध (1854-56): इस युद्ध में रूस की हार ने देश की कमजोरियों को उजागर किया और सुधारों की मांग को बल दिया।
- रूस-जापान युद्ध (1904-05): एक एशियाई देश जापान से हार ने रूसी साम्राज्य की प्रतिष्ठा को गहरा झटका दिया और 1905 की क्रांति को जन्म दिया।
- प्रथम विश्वयुद्ध (1914-18): इस युद्ध में रूस की भारी हानि, सैनिकों की मौत और अर्थव्यवस्था की बर्बादी ने जनता का धैर्य खत्म कर दिया और 1917 की क्रांति के लिए सीधा माहौल तैयार किया।
- बौद्धिक कारण: 19वीं सदी के अंत में रूस में बौद्धिक जागरण हुआ। लेखकों जैसे लियो टॉल्सटॉय, दोस्तोवस्की और मैक्सिम गोर्की ने अपनी रचनाओं के माध्यम से सामाजिक अन्याय और भ्रष्ट शासन व्यवस्था का विरोध किया। सबसे महत्वपूर्ण, कार्ल मार्क्स के समाजवादी और वर्ग संघर्ष के सिद्धांतों ने रूस के मजदूरों और बुद्धिजीवियों को गहराई से प्रभावित किया। मार्क्सवाद ने उन्हें शोषण के खिलाफ संगठित होकर लड़ने की प्रेरणा दी।
इन सभी कारणों ने मिलकर वह स्थिति पैदा की जहाँ रूस की जनता के पास जार के निरंकुश शासन को उखाड़ फेंकने के अलावा कोई चारा नहीं बचा था, जिसके परिणामस्वरूप 1917 की महान रूसी क्रांति हुई।
बिहार बोर्ड कक्षा 10 सामाजिक विज्ञान (इतिहास)
अध्याय 2: समाजवाद एवं साम्यवाद
1. कार्ल मार्क्स का जन्म कब और कहाँ हुआ था?
कार्ल मार्क्स का जन्म 5 मई, 1818 को ट्रायर, जर्मनी (प्रशिया राज्य) में एक यहूदी परिवार में हुआ था। उनके पिता एक वकील थे।
2. कम्युनिस्ट घोषणापत्र किसने लिखा था?
कार्ल मार्क्स और फ्रेडरिक एंगेल्स ने मिलकर कम्युनिस्ट घोषणापत्र (Communist Manifesto) लिखा था। यह ऐतिहासिक दस्तावेज 1848 में प्रकाशित हुआ था और इसमें पूंजीवाद की आलोचना करते हुए एक वर्गविहीन समाज की स्थापना का आह्वान किया गया था।
3. दास कैपिटल किसकी रचना है?
दास कैपिटल (Das Kapital) कार्ल मार्क्स की प्रमुख रचना है। इसका पहला खंड 1867 में प्रकाशित हुआ था। इसमें मार्क्स ने पूंजीवादी अर्थव्यवस्था की गहन आलोचना और विश्लेषण प्रस्तुत किया, जिसके कारण इसे अक्सर 'समाजवादियों की बाइबिल' कहा जाता है।
4. प्रथम इंटरनेशनल की स्थापना कब और कहाँ हुई?
प्रथम इंटरनेशनल, जिसे 'अंतर्राष्ट्रीय मजदूर संघ' भी कहा जाता है, की स्थापना 1864 में लंदन, इंग्लैंड में हुई थी। कार्ल मार्क्स इसके संस्थापकों और प्रमुख नेताओं में से एक थे। इसका उद्देश्य दुनिया भर के मजदूर वर्ग को एकजुट करना था।
5. अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस कब मनाया जाता है?
अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस, जिसे मई दिवस भी कहते हैं, प्रतिवर्ष 1 मई को दुनिया भर में मनाया जाता है। यह दिन श्रमिकों के अधिकारों, उनकी एकता और संघर्ष को समर्पित है। इसकी शुरुआत 1886 में अमेरिका के शिकागो शहर में मजदूरों के आंदोलन से जुड़ी हुई है।
6. रूस की क्रांति कब हुई थी?
रूस की महान समाजवादी क्रांति, जिसे अक्टूबर क्रांति के नाम से जाना जाता है, 1917 में हुई थी। व्लादिमीर लेनिन के नेतृत्व में बोल्शेविक पार्टी ने सत्ता पर अधिकार कर लिया और दुनिया का पहला समाजवादी राज्य स्थापित किया।
7. लेनिन द्वारा शुरू की गई नई आर्थिक नीति (NEP) कब लागू की गई?
लेनिन ने 1921 में नई आर्थिक नीति (New Economic Policy - NEP) लागू की। गृहयुद्ध के बाद देश की बर्बाद अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए इस नीति के तहत कुछ हद तक निजी व्यापार और छोटे उद्योगों की अनुमति दी गई, हालांकि बड़े उद्योग और बैंक राज्य के नियंत्रण में ही रहे।
8. 'चेका' क्या था?
'चेका' रूसी क्रांति के बाद बना एक गुप्त पुलिस संगठन था। इसका पूरा नाम 'असाधारण आयोग' था। इसका गठन क्रांति के विरोधियों, जासूसों और तोड़फोड़ करने वालों से निपटने और नए सोवियत राज्य की सुरक्षा के लिए किया गया था।
9. लाल सेना का गठन किसके नेतृत्व में किया गया?
रूसी गृहयुद्ध के दौरान सोवियत सरकार की लाल सेना का गठन और संगठन मुख्य रूप से लियोन ट्रॉट्स्की के नेतृत्व में किया गया था। उन्होंने एक अनुशासित और शक्तिशाली सेना बनाई जिसने श्वेत सेना (विरोधी बलों) को हराने में निर्णायक भूमिका निभाई।
10. सोवियत संघ का विघटन कब हुआ?
सोवियत संघ (USSR) का विघटन दिसंबर, 1991 में हुआ। इसके साथ ही शीत युद्ध का युग समाप्त हो गया और USSR 15 स्वतंत्र देशों में बंट गया, जिनमें रूस सबसे बड़ा था।
11. तृतीय इंटरनेशनल (कॉमिन्टर्न) की स्थापना किसने और कब की?
व्लादिमीर लेनिन ने 1919 में मास्को में तृतीय इंटरनेशनल (कॉमिन्टर्न) की स्थापना की। इसका उद्देश्य दुनिया भर में कम्युनिस्ट आंदोलन को एक केंद्र से निर्देशित करना और समाजवादी क्रांतियों को प्रोत्साहित करना था।
12. शीतयुद्ध किन दो गुटों के बीच हुआ?
शीतयुद्ध पूंजीवादी गुट के नेता संयुक्त राज्य अमेरिका और साम्यवादी गुट के नेता सोवियत संघ के बीच हुआ था। यह द्वितीय विश्व युद्ध के बाद (1945) शुरू हुआ और 1991 तक चला। इसमें सीधी लड़ाई नहीं हुई, बल्कि यह एक वैचारिक, राजनीतिक और सैन्य तनाव का दौर था।
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