Bihar Board Class 10th Social Science (इतिहास की दुनिया भाग 2) Chapter 1 यूरोप में राष्ट्रवाद) Solutions
Bihar Board Class 10th Social Science (इतिहास की दुनिया भाग 2) Chapter 1 यूरोप में राष्ट्रवाद) Solutions
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यूरोप में राष्ट्रवाद
1. फ्रांसीसी क्रांति के दौरान राष्ट्र का प्रतीक क्या था?
फ्रांसीसी क्रांति के दौरान राष्ट्र के प्रतीक के रूप में कई चीजों को अपनाया गया था। इनमें टोपी (लाल टोपी), तिरंगा झंडा (नीला, सफेद, लाल), और राष्ट्रीय गान (ला मार्सेइयेज़) शामिल थे। इसके अलावा, नारा "स्वतंत्रता, समानता, बंधुत्व" भी राष्ट्र की भावना का एक शक्तिशाली प्रतीक बन गया। ये सभी प्रतीक फ्रांस के नए नागरिकों में एकता और साझी पहचान की भावना पैदा करने के लिए थे।
2. नेपोलियन ने प्रशासनिक क्षेत्र में क्या सुधार किए?
नेपोलियन बोनापार्ट ने फ्रांस की प्रशासनिक व्यवस्था में कई महत्वपूर्ण सुधार किए, जिन्हें नेपोलियन कोड या नागरिक संहिता के नाम से जाना जाता है। इन सुधारों में शामिल हैं:
- समान कानून: पूरे देश के लिए एक समान कानूनी व्यवस्था लागू की गई, जिसने स्थानीय विविधताओं और विशेषाधिकारों को समाप्त कर दिया।
- जन्म के आधार पर विशेषाधिकार का अंत: अब किसी को जन्म के आधार पर कोई विशेष अधिकार नहीं मिलते थे।
- संपत्ति का अधिकार: निजी संपत्ति के अधिकार को सुरक्षित बनाया गया।
- सुव्यवस्थित प्रशासन: एक केंद्रीकृत और कुशल प्रशासनिक तंत्र स्थापित किया गया।
- दशमलव प्रणाली: माप और तौल की एक समान दशमलव प्रणाली लागू की गई।
3. वियना कांग्रेस क्या थी?
वियना कांग्रेस वर्ष 1815 में आयोजित यूरोपीय शक्तियों का एक महत्वपूर्ण सम्मेलन था। इसका मुख्य उद्देश्य नेपोलियन के युद्धों के बाद यूरोप में राजनीतिक स्थिरता लाना और पुरानी राजशाही व्यवस्था को फिर से स्थापित करना था। इस कांग्रेस में ऑस्ट्रिया, प्रशिया, रूस और ब्रिटेन जैसी प्रमुख शक्तियों ने भाग लिया। कांग्रेस ने फ्रांस की सीमाओं को कम कर दिया और यूरोप के मानचित्र को फिर से बनाया ताकि किसी भी देश को फिर से इतना शक्तिशाली न बनने दिया जाए कि वह शांति भंग कर सके। इसने यूरोप में रूढ़िवादी व्यवस्था की वापसी को चिह्नित किया।
4. यूरोप में उदारवादी राष्ट्रवाद से आप क्या समझते हैं?
19वीं सदी के यूरोप में उदारवादी राष्ट्रवाद एक ऐसी राजनीतिक विचारधारा थी जो राष्ट्र-राज्य के विचार को व्यक्तिगत स्वतंत्रता, संवैधानिक सरकार और कानून के शासन जैसे उदारवादी सिद्धांतों के साथ जोड़ती थी। उदारवादी राष्ट्रवादियों का मानना था कि एक राष्ट्र ऐसे लोगों का समूह है जो एक साझी संस्कृति, इतिहास और भाषा से बंधे हैं, और उन्हें अपनी सरकार चुनने का अधिकार होना चाहिए। वे निरंकुश राजतंत्र, विशेषाधिकारों और सामंती व्यवस्था के विरोधी थे। उनकी माँगें थीं: संविधान, संसदीय शासन, प्रेस की स्वतंत्रता और संघ बनाने की आजादी। यह विचारधारा 1830 और 1848 की क्रांतियों का आधार बनी।
5. जर्मनी के एकीकरण में बिस्मार्क की भूमिका का वर्णन करें।
ऑटो वॉन बिस्मार्क जर्मनी के एकीकरण का मुख्य वास्तुकार था। प्रशिया के चांसलर के रूप में, उसने "रक्त और लौह" (Blood and Iron) की नीति अपनाई, जिसका अर्थ था कि जर्मनी का एकीकरण युद्ध और सैन्य शक्ति के माध्यम से ही हो सकता है, भाषणों और संधियों से नहीं। उसकी कूटनीतिक चालों और सैन्य अभियानों ने जर्मन राज्यों को एकजुट करने में निर्णायक भूमिका निभाई:
- उसने पहले डेनमार्क (1864), फिर ऑस्ट्रिया (1866) के खिलाफ युद्ध जीते, जिससे प्रशिया जर्मन दुनिया में प्रमुख शक्ति बन गया।
- अंत में, 1870-71 के फ्रांस-प्रशिया युद्ध में फ्रांस की हार ने दक्षिणी जर्मन राज्यों को भी प्रशिया के साथ जुड़ने के लिए प्रेरित किया।
- 18 जनवरी, 1871 को वर्साय के शीशमहल में विलियम प्रथम को जर्मन साम्राज्य का सम्राट घोषित किया गया, और इस प्रकार जर्मनी का एकीकरण पूरा हुआ।
6. इटली के एकीकरण में मेजिनी, कावूर और गैरीबाल्डी की भूमिका का वर्णन करें।
इटली के एकीकरण में तीन प्रमुख व्यक्तियों ने अलग-अलग भूमिकाएँ निभाईं:
- ज्युसेपे मेजिनी: वह "इटली के एकीकरण का आध्यात्मिक पिता" कहलाता है। उसने "यंग इटली" नामक एक गुप्त संगठन बनाया जिसका लक्ष्य इटली को विदेशी नियंत्रण से मुक्त कराना और एक गणतंत्र की स्थापना करना था। उसने इतालवी युवाओं में राष्ट्रवाद की भावना जगाई।
- काउंट कामिल्लो दि कावूर: वह सार्डिनिया-पीडमॉन्ट के प्रधानमंत्री थे और एक कुशल राजनयिक एवं योजनाकार थे। उन्होंने इटली के एकीकरण के लिए कूटनीति और अंतर्राष्ट्रीय गठजोड़ों का रास्ता अपनाया। उन्होंने फ्रांस के साथ गठबंधन कर ऑस्ट्रिया के खिलाफ युद्ध जीता, जिससे उत्तरी इटली के कई राज्य एकीकृत हो गए।
- ज्युसेपे गैरीबाल्डी: वह एक वीर योद्धा और देशभक्त थे। उन्होंने "रक्तिम कमीज" पहने हुए हज़ारों स्वयंसेवकों की एक सेना (दि रेड शर्ट्स) बनाई और सिसिली और दक्षिणी इटली को स्पेनिश शासन से मुक्त कराया। बाद में, उन्होंने अपने विजित प्रदेशों को कावूर के नेतृत्व वाले सार्डिनिया राज्य में मिला दिया, जिससे इटली का एकीकरण लगभग पूरा हो गया।
7. ब्रिटेन में राष्ट्र राज्य का निर्माण कैसे हुआ?
ब्रिटेन में राष्ट्र-राज्य का निर्माण एक लंबी और शांतिपूर्ण संवैधानिक प्रक्रिया के माध्यम से हुआ, न कि अचानक हुए क्रांतिकारी उथल-पुथल से। इस प्रक्रिया की मुख्य विशेषताएँ थीं:
- संवैधानिक राजशाही: 1688 की गौरवपूर्ण क्रांति के बाद, इंग्लैंड में संसदीय सर्वोच्चता और संवैधानिक राजशाही स्थापित हुई। राजा की शक्तियाँ सीमित कर दी गईं।
- विधायी एकीकरण: 1707 में इंग्लैंड और स्कॉटलैंड के बीच एक्ट ऑफ यूनियन पारित हुआ, जिससे ग्रेट ब्रिटेन का राज्य बना। इसने एक समान संसद और झंडा स्थापित किया।
- आयरलैंड का विलय: 1801 में आयरलैंड को बलपूर्वक ब्रिटेन में मिला लिया गया, जिससे "यूनाइटेड किंगडम ऑफ ग्रेट ब्रिटेन और आयरलैंड" का गठन हुआ।
- साझी संस्कृति का प्रसार: ब्रिटिश पहचान को बढ़ावा देने के लिए अंग्रेजी भाषा और ब्रिटिश संस्कृति को प्रोत्साहित किया गया।
8. बाल्कन क्षेत्र यूरोप में उग्र राष्ट्रवाद का क्षेत्र क्यों बन गया?
बाल्कन प्रायद्वीप 19वीं सदी के अंत और 20वीं सदी की शुरुआत में उग्र राष्ट्रवाद का केंद्र बन गया, जिसके कई कारण थे:
- ऑटोमन साम्राज्य का पतन: यह क्षेत्र लंबे समय से ऑटोमन (तुर्की) साम्राज्य के अधीन था। जैसे-जैसे ऑटोमन साम्राज्य कमजोर हुआ, बाल्कन में रहने वाले विभिन्न जातीय समूहों जैसे सर्ब, बुल्गार, रोमानियाई, यूनानी आदि ने स्वतंत्रता के लिए संघर्ष शुरू कर दिया।
- जातीय और धार्मिक विविधता: इस क्षेत्र में कई अलग-अलग जातीय और धार्मिक समूह एक-दूसरे के साथ मिले-जुले थे, जिससे सीमाओं को लेकर तीव्र प्रतिस्पर्धा और संघर्ष पैदा हुआ।
- यूरोपीय शक्तियों का हस्तक्षेप: रूस, ऑस्ट्रिया-हंगरी, ब्रिटेन और जर्मनी जैसी बड़ी शक्तियों ने अपने-अपने हित साधने के लिए इन छोटे राष्ट्रों को समर्थन देना या उनके बीच झगड़े भड़काना शुरू कर दिया।
- 'बाल्कनकरण' की प्रक्रिया: इस प्रक्रिया में बड़े साम्राज्य के टूटने से कई छोटे-छोटे राष्ट्र बने, जो अक्सर एक-दूसरे से शत्रुता रखते थे।
9. फ्रांसीसी क्रांति ने फ्रांसीसी लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को किस प्रकार प्रभावित किया?
फ्रांसीसी क्रांति ने आम फ्रांसीसी नागरिकों के दैनिक जीवन को गहराई से बदल दिया:
- सामाजिक समानता: जन्म के आधार पर मिलने वाले विशेषाधिकार समाप्त हो गए। अब सभी पुरुषों को कानून की नजर में समान माना जाने लगा।
- धार्मिक स्वतंत्रता में बदलाव: चर्च की संपत्ति जब्त कर ली गई और पादरियों को राज्य के कर्मचारी बना दिया गया। नागरिकों को धर्म चुनने की स्वतंत्रता दी गई, लेकिन चर्च का राजनीतिक प्रभाव कम हो गया।
- भाषा और प्रतीक: पेरिस की फ्रेंच भाषा पूरे देश की आधिकारिक भाषा बन गई। नए राष्ट्रीय प्रतीकों जैसे तिरंगा झंडा और राष्ट्रगान ने रोजमर्रा की जिंदगी में प्रवेश किया।
- कानूनी एकरूपता: नेपोलियन कोड ने पूरे देश के लिए एक समान कानून लागू किया, जिससे न्याय प्रणाली सरल और समान हो गई।
- संपत्ति और व्यापार: सामंती करों के अंत से किसानों को राहत मिली। आंतरिक व्यापार पर लगे सभी अवरोध हटा दिए गए, जिससे व्यापार करना आसान हो गया।
10. 1830 की क्रांति के क्या कारण थे?
1830 की क्रांतियाँ यूरोप के विभिन्न हिस्सों में फैली हुई थीं, विशेष रूप से फ्रांस में। इनके प्रमुख कारण थे:
- वियना कांग्रेस की रूढ़िवादी व्यवस्था: 1815 की वियना कांग्रेस ने यूरोप में पुरानी राजशाही को फिर से स्थापित कर दिया था, जिससे उदारवादी और राष्ट्रवादी ताकतें असंतुष्ट थीं।
- फ्रांस में चार्ल्स X की नीतियाँ: फ्रांस के राजा चार्ल्स X ने संसद को भंग कर दिया, प्रेस की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लगा दिया और मताधिकार सीमित कर दिया। उसने पुराने विशेषाधिकारों को वापस लाने की कोशिश की।
- उदारवादी और मध्य वर्ग का असंतोष: औद्योगिक क्रांति से पैदा हुए नए मध्य वर्ग और बुद्धिजीवियों को राजनीतिक अधिकार नहीं मिल रहे थे। वे संवैधानिक राजशाही चाहते थे।
- राष्ट्रवादी आकांक्षाएँ: बेल्जियम, पोलैंड, इटली और जर्मनी के कुछ हिस्सों में लोग विदेशी नियंत्रण से मुक्त होकर अपने राष्ट्र-राज्य बनाना चाहते थे।
- आर्थिक संकट: कुछ क्षेत्रों में खराब फसल और बेरोजगारी ने जन असंतोष को बढ़ाया।
11. 1848 की क्रांति के क्या कारण थे?
1848 की क्रांतियाँ यूरोप भर में हुईं और इन्हें 'राष्ट्रों का वसंत' कहा जाता है। इनके मुख्य कारण थे:
- उदारवादी असंतोष: मध्य वर्ग और बुद्धिजीवी अभी भी निरंकुश राजशाही, सेंसरशिप और राजनीतिक भागीदारी की कमी से असंतुष्ट थे। वे संविधान, नागरिक अधिकार और संसदीय शासन चाहते थे।
- सामाजिक और आर्थिक संकट: यूरोप में भीषण खाद्य संकट (जैसे आयरलैंड में आलू का अकाल) और व्यापक बेरोजगारी थी। औद्योगिक मजदूर, जिनकी हालत बहुत खराब थी, भी विद्रोह में शामिल हुए।
- राष्ट्रवाद की तीव्र इच्छा: जर्मनी, इटली, पोलैंड और ऑस्ट्रियाई साम्राज्य के अधीन क्षेत्रों में लोग अपने अलग राष्ट्र-राज्य बनाना चाहते थे। वे विदेशी शासन से मुक्ति चाहते थे।
- फ्रांस में प्रेरणा: फरवरी 1848 में फ्रांस में एक बार फिर क्रांति हुई, जिसमें राजा लुई फिलिप को गद्दी छोड़नी पड़ी और द्वितीय गणराज्य की स्थापना हुई। इस सफलता ने पूरे यूरोप में क्रांतिकारियों को प्रेरित किया।
- राजशाही की कमजोरी: कई यूरोपीय राजशाहियाँ आर्थिक और सामाजिक समस्याओं से जूझ रही थीं और प्रारंभिक विरोध को दबाने में असमर्थ थीं।
बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)
1. फ्रांसीसी क्रांति कब हुई थी?
A. 1789
B. 1798
C. 1804
D. 1815
2. नेपोलियन का जन्म कहाँ हुआ था?
A. पेरिस
B. कोर्सिका
C. रोम
D. वियना
3. वियना कांग्रेस कब हुई थी?
A. 1815
B. 1820
C. 1830
D. 1848
4. जर्मनी का एकीकरण कब हुआ?
A. 1861
B. 1871
C. 1881
D. 1891
5. इटली का एकीकरण कब हुआ?
A. 1851
B. 1861
C. 1871
D. 1881
6. यूरोप में राष्ट्रवाद का पहला अभिव्यक्ति किस क्रांति में हुआ?
A. अमेरिकी क्रांति
B. फ्रांसीसी क्रांति
C. रूसी क्रांति
D. औद्योगिक क्रांति
7. बिस्मार्क किस देश का चांसलर था?
A. ऑस्ट्रिया
B. प्रशिया
C. फ्रांस
D. रूस
8. 'यंग इटली' संगठन की स्थापना किसने की?
A. कावूर
B. गैरीबाल्डी
C. मेजिनी
D. विक्टर इमैनुएल
9. प्रथम विश्व युद्ध का तात्कालिक कारण क्या था?
A. फ्रांसीसी क्रांति
B. बाल्कन संकट
C. जर्मनी का एकीकरण
D. इटली का एकीकरण
10. 1830 की क्रांति कहाँ से शुरू हुई?
A. जर्मनी
B. इटली
C. फ्रांस
D. रूस
प्रश्न 1.
इटली के एकीकरण में मेजिनी, गैरीबाल्डी और कावूर के योगदान का वर्णन करें।
उत्तर-
इटली के एकीकरण में मेजिनी, गैरीबाल्डी और कावूर ने अलग-अलग तरीकों से महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
ज्युसेपे मेजिनी: उन्हें "इटली का आत्मा" कहा जाता है। उन्होंने "यंग इटली" नामक एक क्रांतिकारी संगठन की स्थापना की, जिसका उद्देश्य इटली को विदेशी नियंत्रण से मुक्त कर एक गणतंत्रात्मक राष्ट्र बनाना था। उनके विचारों और आदर्शों ने इतालवी युवाओं में राष्ट्रीयता की भावना जगाई और एकीकरण के लिए जन-आंदोलन का आधार तैयार किया।
काउंट कामिल्लो दे कावूर: उन्हें "इटली का मस्तिष्क" कहा जाता है। वह सार्डिनिया-पीडमॉन्ट के प्रधानमंत्री थे। उन्होंने कूटनीतिक और सैन्य दोनों तरीकों से एकीकरण को आगे बढ़ाया। उन्होंने फ्रांस के सम्राट नेपोलियन तृतीय से मित्रता की और आस्ट्रिया के खिलाफ युद्ध में उसकी सहायता प्राप्त की। उनकी नीतियों से उत्तरी इटली के अधिकांश राज्य सार्डिनिया में शामिल हो गए।
ज्युसेपे गैरीबाल्डी: उन्हें "इटली का तलवार" कहा जाता है। वह एक वीर योद्धा और देशभक्त थे। उन्होंने अपने स्वयंसेवकों के दल "रेड शर्ट्स" के साथ दक्षिणी इटली और सिसिली को विजित किया और उन क्षेत्रों को सार्डिनिया के राजा विक्टर इमैनुएल द्वितीय को सौंप दिया। यह एक बहुत बड़ा त्याग था जिसने इटली के एकीकरण को पूरा करने में निर्णायक भूमिका निभाई।
इस प्रकार, मेजिनी ने विचार दिए, कावूर ने कूटनीति और राजनीति का रास्ता अपनाया और गैरीबाल्डी ने सैन्य शक्ति से एकीकरण को अंतिम रूप दिया। इन तीनों के संयुक्त प्रयासों से 1871 में इटली का एकीकरण पूरा हुआ और इसका नाम इटली राज्य कर दिया गया।
प्रश्न 2.
जर्मनी के एकीकरण में बिस्मार्क की भूमिका का वर्णन करें।
उत्तर-
जर्मनी के एकीकरण में ऑटो वॉन बिस्मार्क की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण थी। 1848 की क्रांति की विफलता के बाद यह स्पष्ट हो गया था कि जर्मनी का एकीकरण जनता के आंदोलन से नहीं, बल्कि शक्तिशाली राज्य प्रशा के नेतृत्व में ही हो सकता है।
1861 में विलियम प्रथम प्रशा का राजा बना और उसने 1862 में बिस्मार्क को अपना चांसलर (प्रधानमंत्री) नियुक्त किया। बिस्मार्क का लक्ष्य प्रशा के नेतृत्व में जर्मनी का एकीकरण करना था, लेकिन आस्ट्रिया इसका विरोध कर रहा था।
बिस्मार्क का मानना था कि इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए "रक्त और लौह" (Blood and Iron) की नीति अपनानी होगी, यानी सैन्य शक्ति और युद्ध के बल पर। उन्होंने प्रशा की सेना को मजबूत बनाया और अनिवार्य सैन्य सेवा लागू की।
बिस्मार्क ने तीन निर्णायक युद्धों के माध्यम से जर्मनी का एकीकरण पूरा किया:
- डेनमार्क के विरुद्ध युद्ध (1864): प्रशा और आस्ट्रिया ने मिलकर डेनमार्क को हराया और श्लेस्विग-होल्स्टीन क्षेत्रों पर कब्जा किया।
- आस्ट्रिया-प्रशा युद्ध (1866): बिस्मार्क ने आस्ट्रिया को हराकर उसे जर्मन मामलों से बाहर कर दिया। इसके बाद उत्तरी जर्मन राज्यों का एक संघ बना।
- फ्रांस-प्रशा युद्ध (1870-71): बिस्मार्क ने चतुर कूटनीति से फ्रांस को युद्ध के लिए उकसाया। प्रशा की जीत हुई और दक्षिणी जर्मन राज्य भी प्रशा में शामिल हो गए।
प्रश्न 3.
राष्ट्रवाद के उदय के कारणों एवं प्रभावों की चर्चा करें।
उत्तर-
राष्ट्रवाद के उदय के मुख्य कारण:
- फ्रांसीसी क्रांति (1789): इस क्रांति ने "राजा का राज्य" की जगह "जनता का राष्ट्र" का विचार दिया। इसने समान नागरिक संहिता, राष्ट्रीय ध्वज, राष्ट्रगान जैसे प्रतीकों के माध्यम से लोगों में सामूहिक पहचान की भावना पैदा की।
- नेपोलियन का प्रभाव: नेपोलियन ने अपने विजित क्षेत्रों में प्रशासनिक सुधार किए और कानून का एक समान कोड लागू किया। इससे इटली और जर्मनी जैसे क्षेत्रों में लोगों ने एक समान प्रशासन के तहत रहने का अनुभव किया, जिससे राष्ट्रीय एकता की भावना मजबूत हुई। हालाँकि, उसकी विजय नीति ने विजित देशों में फ्रांसीसी विरोधी राष्ट्रवाद को भी जन्म दिया।
- वियना कांग्रेस (1815) की प्रतिक्रियावादी नीतियाँ: नेपोलियन के पतन के बाद, वियना कांग्रेस ने यूरोप में पुराने राजवंशों और सामंती व्यवस्था को फिर से स्थापित करने की कोशिश की। इसने उदारवादी और राष्ट्रवादी आंदोलनों को दबा दिया, जिससे इन आंदोलनों ने भूमिगत रूप से और तेजी से फैलना शुरू कर दिया।
- सांस्कृतिक कारक: भाषा, साहित्य, लोकगीतों और कलाओं ने लोगों में एक साझी सांस्कृतिक विरासत की भावना जगाई। कवियों, लेखकों और कलाकारों ने राष्ट्रीय गौरव को बढ़ावा दिया।
राष्ट्रवाद के प्रभाव:
- राष्ट्र-राज्यों का निर्माण: इसके परिणामस्वरूप इटली और जर्मनी जैसे नए एकीकृत राष्ट्र-राज्यों का उदय हुआ।
- बहुराष्ट्रीय साम्राज्यों का विघटन: ऑस्ट्रो-हंगेरियन साम्राज्य, ओटोमन साम्राज्य जैसे बहुराष्ट्रीय साम्राज्यों में राष्ट्रवादी आंदोलनों ने तनाव पैदा किया, जो बाद में उनके विघटन का कारण बना।
- उपनिवेशवाद और साम्राज्यवाद: तीव्र राष्ट्रवाद ने यूरोपीय देशों में प्रतिस्पर्धा बढ़ाई, जिससे उन्होंने एशिया और अफ्रीका में उपनिवेश स्थापित करने की होड़ शुरू कर दी।
- युद्धों को प्रोत्साहन: अति-राष्ट्रवाद और देशों के बीच प्रतिद्वंद्विता ने प्रथम विश्व युद्ध जैसे विनाशकारी संघर्षों को जन्म दिया।
- स्वतंत्रता आंदोलनों को प्रेरणा: यूरोप में राष्ट्रवाद ने एशिया और अफ्रीका के उपनिवेशित देशों में भी स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करने वाले लोगों को प्रेरणा दी।
प्रश्न 4.
जुलाई 1830 की क्रांति का विवरण दें।
उत्तर-
जुलाई 1830 की क्रांति फ्रांस में हुई एक महत्वपूर्ण घटना थी, जिसने वहाँ के शासन में बड़ा परिवर्तन किया।
कारण: वियना कांग्रेस (1815) के बाद फ्रांस में बूबों राजवंश का शासन फिर से स्थापित हुआ। राजा चार्ल्स दशम (1824-1830) एक निरंकुश और प्रतिक्रियावादी शासक था। उसने संसद (प्रतिनिधि सदन) की शक्तियों को कम करने और प्रेस की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लगाने का प्रयास किया। उसने अपने एक अल्पमत में आने वाले मंत्री, प्रिंस डी पोलिग्नेक को प्रधानमंत्री बनाया, जो अभिजात्य वर्ग के विशेषाधिकारों को बहाल करना चाहता था।
क्रांति की शुरुआत: 25 जुलाई, 1830 को राजा चार्ल्स दशम ने चार अध्यादेश (आर्डिनेंस) जारी किए, जिनमें प्रेस की स्वतंत्रता समाप्त करना, नए चुनाव कराना और मताधिकार सीमित करना शामिल था। यह संवैधानिक लोकतंत्र पर सीधा हमला था।
घटनाक्रम: इन अध्यादेशों के विरोध में पेरिस की जनता सड़कों पर उतर आई। छात्रों, मजदूरों, पत्रकारों और उदारवादियों ने विरोध प्रदर्शन किया, जो जल्द ही एक हिंसक विद्रोह में बदल गया। तीन दिनों तक चले संघर्ष को "ग्लोरियस थ्री डेज" कहा जाता है।
परिणाम:
- राजा चार्ल्स दशम को सिंहासन छोड़कर इंग्लैंड भागना पड़ा। इसके साथ ही फ्रांस में बूबों राजवंश के शासन का स्थायी रूप से अंत हो गया।
- उदारवादियों और धनी मध्यम वर्ग ने मिलकर लुई फिलिप को नया "नागरिक राजा" (King of the French) बनाया। उसका शासन "जुलाई राजशाही" कहलाया।
- यह क्रांति केवल फ्रांस तक सीमित नहीं रही। इसने पूरे यूरोप में उदारवादी और राष्ट्रवादी आंदोलनों को प्रेरणा दी, जैसे बेल्जियम का स्वतंत्रता आंदोलन।
प्रश्न 5.
यूनानी स्वतंत्रता आन्दोलन का संक्षिप्त विवरण दें।
उत्तर-
यूनानी स्वतंत्रता आंदोलन (1821-1832) यूरोप में राष्ट्रवाद का पहला सफल आंदोलन था, जिसने ओटोमन (तुर्की) साम्राज्य के शासन से यूनान को मुक्त कराया।
पृष्ठभूमि: 15वीं शताब्दी से यूनान ओटोमन साम्राज्य के अधीन था। 19वीं शताब्दी की शुरुआत में, फ्रांसीसी क्रांति और राष्ट्रवाद के विचारों से प्रभावित होकर यूनानियों में स्वतंत्रता की भावना जागृत हुई।
आंदोलन की शुरुआत: 1821 में, अलेक्जेंडर यिप्सिलांती के नेतृत्व में यूनान में विद्रोह शुरू हुआ। यूनानी क्रांतिकारियों ने तुर्की शासन के खिलाफ संघर्ष छेड़ दिया।
यूरोपीय समर्थन: यूनान यूरोप की प्राचीन सभ्यता का जन्मस्थान था, इसलिए पूरे यूरोप के शिक्षित वर्ग में यूनान के प्रति गहरी सहानुभूति थी। इंग्लैंड के कवि लॉर्ड बायरन जैसे कई यूरोपीय स्वयंसेवक यूनान की लड़ाई में शामिल हुए। यह समर्थन केवल सांस्कृतिक ही नहीं था; रूस धार्मिक एकता (दोनों ईसाई) और राजनीतिक लाभ के लिए भी यूनान का समर्थन कर रहा था।
अंतर्राष्ट्रीय हस्तक्षेप: शुरू में यूरोप की प्रतिक्रियावादी शक्तियाँ (जैसे आस्ट्रिया का मेटरनिख) इस आंदोलन के विरोध में थीं। लेकिन तुर्की द्वारा यूनानियों के दमन और रूस के दबाव के कारण स्थिति बदली। 1827 में, रूस, ब्रिटेन और फ्रांस ने लंदन संधि पर हस्ताक्षर किए और तुर्की के खिलाफ संयुक्त कार्रवाई करने का फैसला किया।
निर्णायक युद्ध: अक्टूबर 1827 में, इन तीनों देशों की संयुक्त नौसेना ने नवारिनो की खाड़ी में तुर्की-मिस्र की संयुक्त बेड़े को नष्ट कर दिया। यह निर्णायक जीत थी।
स्वतंत्रता: इसके बाद, रूस ने तुर्की के खिलाफ अलग से युद्ध छेड़ दिया और उसे हराया। 1829 की एड्रियानोपल संधि के बाद यूनान को स्वायत्तता मिली। अंततः, 1832 की कॉन्स्टेंटिनोपल संधि के तहत यूनान को एक पूर्ण स्वतंत्र राष्ट्र घोषित कर दिया गया। बवेरिया के राजकुमार ओटो को यूनान का पहला राजा बनाया गया।
महत्व: यूनान की स्वतंत्रता ने वियना कांग्रेस द्वारा स्थापित प्रतिक्रियावादी व्यवस्था को पहली बड़ी चुनौती दी और यूरोप के अन्य राष्ट्रवादी आंदोलनों के लिए आशा की किरण बनी।
अतिलघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1.
'रक्त और तलवार' की नीति किसने अपनाई ?
उत्तर-
ऑटो वॉन बिस्मार्क ने जर्मनी के एकीकरण के लिए 'रक्त और तलवार' (Blood and Iron) की नीति अपनाई।
प्रश्न 2.
अर्नेस्ट रेनन ने राष्ट्रवाद को किस रूप में परिभाषित किया ?
उत्तर-
फ्रांसीसी विचारक अर्नेस्ट रेनन ने राष्ट्रवाद को एक "रोजाना होने वाली जनमत संग्रह" के रूप में परिभाषित किया। उनके अनुसार, राष्ट्र लोगों की एक सामूहिक इच्छा से बनता है, जो एक साझे अतीत में विश्वास करते हैं और भविष्य में एक साथ रहने की इच्छा रखते हैं। यह एक बड़ी और व्यापक आध्यात्मिक एकता है।
प्रश्न 3.
वियना कांग्रेस (सम्मेलन) में फ्रांस में किस राजवंश की पुनर्स्थापना की गई?
उत्तर-
वियना कांग्रेस (1814-15) द्वारा फ्रांस में बूबों राजवंश की पुनर्स्थापना की गई और लुई अठारहवें को राजा बनाया गया।
प्रश्न 4.
जर्मन राइन महासंघ की स्थापना किसने की?
उत्तर-
नेपोलियन बोनापार्ट ने 1806 में जर्मन राइन महासंघ (Confederation of the Rhine) की स्थापना की। यह जर्मनी के कई छोटे राज्यों का एक संघ था, जो फ्रांस के अधीन था।
प्रश्न 5.
चार्टिस्ट आंदोलन किस देश में हुआ?
उत्तर-
चार्टिस्ट आंदोलन इंग्लैंड (ग्रेट ब्रिटेन) में हुआ। यह 1838 से 1858 तक चला एक जन-आंदोलन था, जिसका उद्देश्य राजनीतिक सुधार लाकर सामान्य लोगों को मताधिकार दिलाना था।
1. फ्रांसीसी क्रांति कब हुई थी?
उत्तर: फ्रांसीसी क्रांति का प्रारंभ वर्ष 1789 में हुआ था। इस क्रांति ने राजशाही को समाप्त करके लोकतांत्रिक सिद्धांतों की नींव रखी और यूरोप में राष्ट्रवाद के उदय का मार्ग प्रशस्त किया।
2. नेपोलियन कोड क्या था?
उत्तर: नेपोलियन कोड, जिसे 1804 में लागू किया गया, फ्रांस का एक नागरिक संहिता था। इसने कानूनी प्रणाली को सरल बनाया, जन्म पर आधारित विशेषाधिकारों को समाप्त किया, संपत्ति के अधिकार को सुरक्षित किया और कानून के समक्ष समानता का सिद्धांत स्थापित किया। यह कोड फ्रांसीसी क्रांति के कई आदर्शों को व्यावहारिक रूप देता था।
3. वियना कांग्रेस कब हुई थी?
उत्तर: वियना कांग्रेस वर्ष 1815 में आयोजित की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य नेपोलियन के युद्धों के बाद यूरोप की राजनीतिक सीमाओं को पुनर्निर्धारित करना और पुरानी राजशाही व्यवस्था को पुनर्स्थापित करना था।
4. यूरोप में राष्ट्रवाद के उदय में किन तत्वों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई?
उत्तर: यूरोप में राष्ट्रवाद के उदय में निम्नलिखित तत्वों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई:
- फ्रांसीसी क्रांति: इसने स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के विचार फैलाए।
- नेपोलियन का शासन: उसके सुधारों और युद्धों ने पूरे यूरोप में राष्ट्रीय एकता की भावना को प्रोत्साहित किया।
- सांस्कृतिक आंदोलन: भाषा, साहित्य, संगीत और कला ने एक साझी पहचान बनाने में मदद की।
- क्रांतियाँ (1830-1848): इन क्रांतियों ने लोकतंत्र और राष्ट्रीय स्वतंत्रता की मांग को और मजबूत किया।
- आर्थिक एकीकरण: व्यापार की बाधाओं को दूर करने और एक सामान्य बाजार बनाने से राष्ट्रीय एकता को बल मिला।
5. जर्मनी का एकीकरण किसने किया?
उत्तर: जर्मनी के एकीकरण का नेतृत्व मुख्य रूप से प्रशिया के चांसलर ऑटो वॉन बिस्मार्क ने किया। उन्होंने 'रक्त और लौह' (Blood and Iron) की नीति अपनाई और कूटनीति तथा युद्धों के माध्यम से विभिन्न जर्मन रियासतों को एकीकृत करके 1871 में जर्मन साम्राज्य की स्थापना की।
6. इटली का एकीकरण किसने किया?
उत्तर: इटली के एकीकरण में कई नेताओं का योगदान था। इसमें ज्युसेपे मेत्सिनी (विचारक), काउंट कैमिलो दि कावूर (प्रधानमंत्री, जिन्होंने कूटनीति और गठबंधनों का नेतृत्व किया), ज्युसेपे गैरीबाल्डी (जिन्होंने सैन्य अभियान चलाए) और राजा विक्टर इमैनुएल द्वितीय प्रमुख थे। अंततः 1871 में इटली का एकीकरण पूरा हुआ।
7. राष्ट्रवाद क्या है?
उत्तर: राष्ट्रवाद एक ऐसी विचारधारा और भावना है जो लोगों को एक साझी पहचान—जैसे कि इतिहास, संस्कृति, भाषा, क्षेत्र या राजनीतिक लक्ष्य—के आधार पर एक सामूहिक समुदाय (राष्ट्र) के रूप में बांधती है। यह व्यक्तियों में अपने राष्ट्र के प्रति गर्व, निष्ठा और एकता की भावना पैदा करता है और अक्सर स्वशासन या स्वतंत्रता की आकांक्षा से जुड़ा होता है।
8. 19वीं सदी के यूरोप में राष्ट्रवाद के विकास में फ्रांसीसी क्रांति की क्या भूमिका थी?
उत्तर: 19वीं सदी के यूरोप में राष्ट्रवाद के विकास में फ्रांसीसी क्रांति की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण थी:
- इसने सार्वभौमिक सिद्धांतों—स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व—को जन्म दिया, जो राष्ट्रवाद का आधार बने।
- इसने संप्रभुता का स्रोत राजा के बजाय राष्ट्र की जनता को माना।
- नेपोलियन के माध्यम से फ्रांसीसी क्रांति के विचार और सुधार पूरे यूरोप में फैले, जिसने वहाँ के लोगों में भी राष्ट्रीय चेतना जगाई।
- इसने पुरानी सामंती व्यवस्था को चुनौती दी और नए राष्ट्र-राज्यों के निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया।
9. वियना कांग्रेस के प्रमुख उद्देश्य क्या थे?
उत्तर: वियना कांग्रेस (1815) के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित थे:
- नेपोलियन युद्धों के बाद यूरोप की राजनीतिक एवं क्षेत्रीय सीमाओं का पुनर्निर्धारण करना।
- फ्रांसीसी क्रांति और नेपोलियन द्वारा उत्पन्न परिवर्तनों को रोककर यूरोप में पुरानी राजशाही व्यवस्था को पुनर्स्थापित करना।
- भविष्य में क्रांतियों और युद्धों को रोकने के लिए शक्ति संतुलन (Balance of Power) की व्यवस्था कायम करना।
- फ्रांस को कमजोर करके उसे अपनी पुरानी सीमाओं में वापस लाना, ताकि वह फिर से यूरोप के लिए खतरा न बन सके।
10. 19वीं सदी में यूरोप में राष्ट्रवाद के उदय के क्या कारण थे?
उत्तर: 19वीं सदी में यूरोप में राष्ट्रवाद के उदय के प्रमुख कारण थे:
- फ्रांसीसी क्रांति का प्रभाव: इससे उत्पन्न स्वतंत्रता और राष्ट्रीयता के विचारों ने जनता को प्रेरित किया।
- नेपोलियन के सुधार: उसके द्वारा लागू किए गए कानूनी और प्रशासनिक सुधारों ने विभिन्न क्षेत्रों में एकरूपता लाई।
- सांस्कृतिक जागरण: भाषा, लोकगीतों, इतिहास और कला के माध्यम से एक सामूहिक राष्ट्रीय पहचान का निर्माण हुआ।
- आर्थिक कारण: सामंती व्यवस्था के टूटने और औद्योगीकरण के कारण एक समान आर्थिक नीतियों और बाजार की मांग बढ़ी।
- वियना कांग्रेस की प्रतिक्रियावादी नीतियाँ: इन नीतियों के विरोध ने क्रांतिकारी आंदोलनों और राष्ट्रवादी भावनाओं को और मजबूत किया।
- 1830 और 1848 की क्रांतियाँ: इन क्रांतियों ने लोकतंत्र और राष्ट्रीय स्वतंत्रता के संघर्ष को गति दी।
बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)
1. फ्रांसीसी क्रांति कब हुई थी?
A. 1789
B. 1799
C. 1815
D. 1848
उत्तर: A. 1789
2. नेपोलियन कोड किस वर्ष लागू हुआ?
A. 1789
B. 1804
C. 1815
D. 1830
उत्तर: B. 1804
3. वियना कांग्रेस कब आयोजित की गई?
A. 1789
B. 1804
C. 1815
D. 1848
उत्तर: C. 1815
4. जर्मनी के एकीकरण का नेतृत्व किसने किया?
A. ज्युसेपे गैरीबाल्डी
B. ऑटो वॉन बिस्मार्क
C. काउंट कैवूर
D. मेत्सिनी
उत्तर: B. ऑटो वॉन बिस्मार्क
5. इटली के एकीकरण में किसने 'लाल कुर्ती' दल का नेतृत्व किया?
A. राजा विक्टर इमैनुएल द्वितीय
B. ज्युसेपे मेत्सिनी
C. ज्युसेपे गैरीबाल्डी
D. काउंट कैवूर
उत्तर: C. ज्युसेपे गैरीबाल्डी
6. राष्ट्रवाद का मुख्य आधार क्या है?
A. धार्मिक एकता
B. सामूहिक पहचान और एकता की भावना
C. आर्थिक लाभ
D. सैन्य शक्ति
उत्तर: B. सामूहिक पहचान और एकता की भावना
7. 19वीं सदी में यूरोप में राष्ट्रवाद के उदय का प्रमुख कारण क्या था?
A. औद्योगिक क्रांति
B. फ्रांसीसी क्रांति
C. धार्मिक युद्ध
D. जनसंख्या वृद्धि
उत्तर: B. फ्रांसीसी क्रांति
8. वियना कांग्रेस का आयोजन किसने किया?
A. नेपोलियन बोनापार्ट
B. क्लेमेंस वॉन मेटरनिख
C. ऑटो वॉन बिस्मार्क
D. ज्युसेपे मेत्सिनी
उत्तर: B. क्लेमेंस वॉन मेटरनिख
प्रश्न 5.
नेपोलियन की राष्ट्रवाद के विकास में क्या भूमिका थी?
उत्तर-
नेपोलियन बोनापार्ट ने फ्रांस और यूरोप में राष्ट्रवाद के विकास में एक जटिल और महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। एक ओर, उसने फ्रांस में क्रांतिकारी सिद्धांतों को सुव्यवस्थित करके राष्ट्र-निर्माण की नींव रखी। दूसरी ओर, उसकी विजयवादी और साम्राज्यवादी नीतियों ने अन्य यूरोपीय देशों में राष्ट्रीय प्रतिरोध की भावना को जन्म दिया।
नेपोलियन की प्रमुख भूमिकाएँ इस प्रकार थीं:
- नेपोलियन संहिता (1804): इसने कानून के समक्ष समानता, संपत्ति के अधिकार और प्रशासनिक एकरूपता जैसे सिद्धांत स्थापित किए। यह संहिता फ्रांसीसी राष्ट्र की एकता का प्रतीक बनी और यूरोप के कई देशों में प्रभाव डाला।
- प्रशासनिक सुधार: उसने एक केंद्रीकृत और कुशल प्रशासनिक व्यवस्था बनाई, आंतरिक चुंगी समाप्त की और एक समान माप-तौल की प्रणाली लागू की। इससे फ्रांस एक आर्थिक इकाई के रूप में मजबूत हुआ।
- सामंती व्यवस्था का अंत: उसने किसानों को भू-दासत्व से मुक्त किया और विशेषाधिकारों को समाप्त कर समानता को बढ़ावा दिया।
- शिक्षा प्रणाली: नेपोलियन ने शिक्षा पर राज्य का नियंत्रण स्थापित किया और एक समान शिक्षा प्रणाली विकसित की, जिससे राष्ट्रीय नागरिकों का निर्माण हुआ।
- विरोधाभासी भूमिका: जहाँ नेपोलियन ने फ्रांस में राष्ट्रवाद को संगठित किया, वहीं उसने इटली, जर्मनी, स्पेन आदि पर अपना आधिपत्य स्थापित किया। इस विदेशी प्रभुत्व के विरुद्ध इन देशों के लोगों में राष्ट्रीय अस्मिता और स्वतंत्रता की भावना मजबूत हुई। इस प्रकार, अनजाने में ही सही, उसने सम्पूर्ण यूरोप में राष्ट्रवाद की लहर को प्रेरित किया।
प्रश्न 1.
यूरोपीय राष्ट्रवाद के विकास में संस्कृति का क्या योगदान था?
उत्तर-
यूरोप में राष्ट्रवाद के उदय और प्रसार में संस्कृति ने एक मौलिक और शक्तिशाली भूमिका निभाई। कला, साहित्य, संगीत और लोक परंपराओं ने अमूर्त राष्ट्रीय भावनाओं को मूर्त रूप दिया, एक साझी पहचान का निर्माण किया और जन-जन में देशभक्ति का संचार किया। इसके प्रमुख आयाम निम्नलिखित थे:
- कला एवं प्रतीकवाद: फ्रांसीसी कलाकार फ्रेडरिक सारयू जैसे चित्रकारों ने अपनी कृतियों में राष्ट्र को एक व्यक्ति (अक्सर नारी रूप में) के रूप में चित्रित किया। फ्रांस में मारीआन और जर्मनी में जर्मेनिया राष्ट्रवाद के प्रतीक बन गए। इन चित्रों ने राष्ट्र की एकता, स्वतंत्रता और बलिदान की भावना को दृश्य रूप प्रदान किया।
- रूमानीवाद (Romanticism): यह एक सांस्कृतिक आंदोलन था जिसने तर्क और विज्ञान के बजाय भावना, कल्पना और ऐतिहासिक विरासत पर बल दिया। रूमानी कवियों, लेखकों और कलाकारों ने राष्ट्र को एक सजीव सांस्कृतिक इकाई के रूप में देखा, जिसकी जड़ें सामूहिक इतिहास, लोककथाओं और परंपराओं में हैं। इसने राष्ट्रीय गौरव की भावना को प्रबल बनाया।
- लोक संस्कृति का संकलन: जर्मन दार्शनिक योहान गॉटफ्रीड हर्डर जैसे विचारकों का मानना था कि राष्ट्र की असली आत्मा आम जनता (डास फोल्क) में बसती है। इस विचार ने लोकगीतों, लोकगाथाओं, लोकनृत्यों और लोकसंगीत के संकलन और प्रचार को प्रेरित किया। इन्हें राष्ट्रीय पहचान का आधार बनाया गया।
- संगीत एवं साहित्य: संगीतकारों ने राष्ट्रीय संघर्ष को स्वर दिए। उदाहरण के लिए, कार्ल मारिया वॉन वेबर के ओपेरा ने जर्मन लोककथाओं को जीवंत किया। पोलैंड में, फ्रेडरिक शोपां के संगीत ने देशभक्ति की भावना को मुखर किया। साहित्य ने भी राष्ट्रीय नायकों और ऐतिहासिक घटनाओं के माध्यम से राष्ट्रवाद को बढ़ावा दिया।
- भाषा: भाषा राष्ट्रवाद का सबसे शक्तिशाली हथियार साबित हुई। जब रूस ने पोलैंड पर कब्जा कर वहाँ पोलिश भाषा पर प्रतिबंध लगाया, तो चर्च और गुप्त शिक्षण के माध्यम से पोलिश भाषा का संरक्षण ही राष्ट्रीय प्रतिरोध का रूप बन गया। इसी प्रकार, जर्मनी और इटली में भाषाई एकता ने राष्ट्रीय एकीकरण में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
इस प्रकार, संस्कृति ने यूरोप के लोगों को एक साझी भावनात्मक और सांस्कृतिक जमीन प्रदान की, जिस पर राजनीतिक राष्ट्रवाद की इमारत खड़ी हुई।
प्रश्न 2.
1848 में उदारवादी क्रांतिकारियों ने किन राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक मुद्दों को बढ़ावा दिया?
उत्तर-
1848 का वर्ष यूरोप में 'क्रांतियों का वर्ष' कहलाता है। इस वर्ष फ्रांस, जर्मनी, इटली, ऑस्ट्रिया-हंगरी आदि देशों में हुई क्रांतियों में उदारवादी क्रांतिकारियों ने प्रमुख भूमिका निभाई। उन्होंने निरंकुश राजतंत्रों के विरुद्ध संघर्ष करते हुए निम्नलिखित राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक मुद्दों को आगे बढ़ाया:
राजनीतिक मुद्दे:
- संवैधानिक शासन: उदारवादियों की सबसे प्रमुख माँग थी - निरंकुश राजतंत्र को समाप्त कर एक लिखित संविधान के आधार पर शासन स्थापित करना।
- लोकतांत्रिक अधिकार: प्रेस की स्वतंत्रता, संगठन बनाने की स्वतंत्रता और विचार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जैसे मूल अधिकारों की माँग की गई।
- सार्वभौमिक मताधिकार: उन्होंने संपत्ति या शिक्षा के आधार पर सीमित न रहकर, सभी वयस्क पुरुषों को मतदान का अधिकार देने की वकालत की।
- राष्ट्रीय एकीकरण: विखंडित राज्यों (जैसे जर्मनी और इटली) में उदारवादियों ने राष्ट्रीय एकीकरण की माँग को संवैधानिक सुधारों से जोड़ दिया। उनका सपना एक ऐसा राष्ट्र-राज्य बनाना था जो लोकतांत्रिक सिद्धांतों पर आधारित हो।
सामाजिक मुद्दे:
- कानूनी समानता: समाज में विशेषाधिकारों और जन्म के आधार पर भेदभाव को समाप्त करने की माँग की गई।
- सामंती प्रथाओं का अंत: किसानों से जुड़ी शेष सामंती व्यवस्थाओं, जैसे बेगार या विशेष करों, को पूरी तरह समाप्त करने की माँग उठाई गई।
- महिलाओं के अधिकार: हालाँकि यह मुख्यधारा नहीं थी, फिर भी कुछ उदारवादी समूहों ने महिलाओं को राजनीतिक अधिकार देने की बात शुरू की।
आर्थिक मुद्दे:
- आर्थिक स्वतंत्रता: उदारवादी मध्यम वर्ग व्यापार और उद्योग पर लगे प्रतिबंधों और आंतरिक चुंगी को हटाना चाहता था, ताकि आर्थिक विकास हो सके।
- काम के अधिकार एवं श्रम सुधार: 1848 के दौरान बढ़ी बेरोजगारी और आर्थिक संकट के कारण श्रमिक वर्ग भी सड़कों पर उतर आया। उदारवादियों ने रोजगार सृजन और श्रमिकों की बेहतर स्थिति जैसे मुद्दों को भी अपने एजेंडे में शामिल किया।
- सामाजिक न्याय: समाजवादी विचारों के उदय के साथ, आर्थिक असमानता को दूर करने और शोषण रहित समाज की स्थापना की चर्चा भी शुरू हुई, जिसने उदारवादी कार्यक्रम को और विस्तृत किया।
हालाँकि 1848 की अधिकांश क्रांतियाँ अंततः दबा दी गईं, लेकिन इन्होंने यूरोप में लोकतांत्रिक और राष्ट्रवादी आकांक्षाओं की नींव मजबूत कर दी, जिसका परिणाम आगे चलकर देखने को मिला।
प्रश्न 3.
इटली के एकीकरण के विभिन्न चरणों को इंगित करें।p>
उत्तर-
इटली का एकीकरण (रिसोर्जिमेंटो) एक लंबी और जटिल प्रक्रिया थी, जो मुख्य रूप से चार चरणों में पूरी हुई। प्रत्येक चरण में अलग-अलग नेताओं, विचारधाराओं और घटनाओं ने योगदान दिया।
- प्रथम चरण: राष्ट्रीय चेतना का उदय एवं प्रारंभिक प्रयास (1830-1848):
- इस चरण का नेतृत्व ज्युसेपे मेजिनी और उसकी गुप्त क्रांतिकारी संस्था 'यंग इटली' ने किया।
- मेजिनी का लक्ष्य था - इटली को विदेशी (ऑस्ट्रियाई) नियंत्रण से मुक्त कर एक गणतंत्रीय राष्ट्र बनाना।
- 1848 की क्रांतियों के दौरान इटली के विभिन्न राज्यों में विद्रोह हुए, लेकिन ऑस्ट्रिया की सैन्य शक्ति के आगे ये प्रयास असफल रहे। इससे यह स्पष्ट हो गया कि केवल जन-विद्रोह से एकीकरण संभव नहीं है।
- द्वितीय चरण: सार्डिनिया-पीडमॉन्ट का नेतृत्व एवं कूटनीतिक संघर्ष (1849-1859):
- इस चरण का नेतृत्व सार्डिनिया-पीडमॉन्ट के प्रधानमंत्री काउंट कावूर ने संभाला। उनका दृष्टिकोण व्यावहारिक और कूटनीतिक था।
- कावूर ने इटली के एकीकरण के लिए सैन्य शक्ति के बजाय अंतर्राष्ट्रीय गठजोड़ और राजनय पर जोर दिया।
- उन्होंने फ्रांस के सम्राट नेपोलियन तृतीय से मित्रता की और 1859 में ऑस्ट्रिया के खिलाफ फ्रांस का सहयोग प्राप्त किया। इस युद्ध के परिणामस्वरूप लोम्बार्डी इटली को मिल गया।
- इसी दौरान मध्य इटली के राज्यों (पार्मा, मोडेना, टस्कनी) में जनमत संग्रह हुए, जिनमें लोगों ने सार्डिनिया में शामिल होने का फैसला किया।
- तृतीय चरण: ज्युसेपे गैरीबाल्डी का सैन्य अभियान (1860):
- यह चरण सबसे नाटकीय था। क्रांतिकारी नेता ज्युसेपे गैरीबाल्डी ने अपने स्वयंसेवकों ('रेड शर्ट्स') की एक सेना तैयार की।
- मई 1860 में, उन्होंने सिसिली पर आक्रमण किया और नेपल्स के राजा को पराजित कर दक्षिणी इटली पर कब्जा कर लिया।
- गैरीबाल्डी एक गणतंत्र चाहते थे, लेकिन राष्ट्रीय एकता के हित में उन्होंने अपने विजित प्रदेशों को सार्डिनिया के राजा विक्टर इमैनुएल द्वितीय के हवाले कर दिया। इससे इटली का अधिकांश भाग एक हो गया।
- चतुर्थ चरण: एकीकरण का पूर्ण होना (1861-1870):
- 17 मार्च, 1861 को विक्टर इमैनुएल द्वितीय को इटली का राजा घोषित किया गया। अब रोम (पोप के अधीन) और वेनिस (ऑस्ट्रिया के अधीन) को छोड़कर शेष इटली एक हो चुका था।
- 1866 में प्रशिया-ऑस्ट्रिया युद्ध में प्रशिया की मदद करने के बदले इटली को वेनिस प्राप्त हुआ।
- अंततः, 1870 में फ्रांस-प्रशिया युद्ध के दौरान, जब फ्रांसीसी सैनिक रोम से हट गए, तो इतालवी सेनाओं ने रोम पर कब्जा कर लिया। 1871 में रोम को इटली की राजधानी घोषित किया गया और इटली का एकीकरण पूरा हुआ।
इस प्रकार, इटली के एकीकरण में मेजिनी के आदर्शवाद, कावूर की कूटनीति, गैरीबाल्डी की वीरता और सामान्य जनता की राष्ट्रभक्ति - सभी का संयुक्त योगदान रहा।
बिहार बोर्ड कक्षा 10 सामाजिक विज्ञान (इतिहास की दुनिया भाग 2)
पाठ 1 - यूरोप में राष्ट्रवाद
प्रश्न 1. फ्रांसीसी क्रांति के समय फ्रांसीसी नागरिकों के लिए कौन-सा नारा दिया गया?
उत्तर: फ्रांसीसी क्रांति के दौरान नागरिकों को प्रेरित करने के लिए एक शक्तिशाली नारा दिया गया: "स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व"। यह नारा राजशाही, विशेषाधिकार और सामाजिक असमानता के विरुद्ध संघर्ष का प्रतीक बन गया। स्वतंत्रता से तात्पर्य व्यक्तिगत अधिकारों से था, समानता से कानून के समक्ष सबकी एक समान स्थिति से, और बंधुत्व से सभी नागरिकों के बीच एकता और सहयोग की भावना से था।
प्रश्न 2. नेपोलियन कोड क्या है?
उत्तर: नेपोलियन कोड, जिसे आधिकारिक तौर पर 'फ्रांसीसी नागरिक संहिता' कहा जाता है, वर्ष 1804 में नेपोलियन बोनापार्ट द्वारा लागू किया गया एक व्यापक कानूनी संहिता था। इसका मुख्य उद्देश्य फ्रांस के विभिन्न क्षेत्रों में फैले भिन्न-भिन्न और जटिल कानूनों को एक सरल, समान और राष्ट्रीय कानूनी प्रणाली में बदलना था। इस कोड ने जन्म के आधार पर विशेषाधिकार समाप्त कर दिए, संपत्ति के अधिकार को सुरक्षित किया और कानून के समक्ष सभी की समानता स्थापित की। हालाँकि, यह पुरुषों को महिलाओं पर अधिक अधिकार देता था और श्रमिक संघों पर प्रतिबंध लगाता था।
प्रश्न 3. यूरोप में राष्ट्रवाद के उदय में संस्कृति के क्षेत्र में रोमांटिववाद ने क्या भूमिका निभाई?
उत्तर: रोमांटिववाद एक सांस्कृतिक आंदोलन था जिसने यूरोप में राष्ट्रवाद की भावना को गहराई से प्रभावित किया। इसने राष्ट्र को एक सजीव सांस्कृतिक इकाई के रूप में देखा, जिसकी पहचान साझा इतिहास, लोककथाओं, लोकगीतों, भाषा और कला से होती है। कलाकारों, कवियों और लेखकों ने स्थानीय संस्कृति और परंपराओं को महिमामंडित करके राष्ट्रीय भावना को जगाने का कार्य किया। उदाहरण के लिए, जर्मन दार्शनिक योहान गॉटफ्रीड हर्डर ने जनमानस की संस्कृति को राष्ट्रीय चेतना का आधार बताया। इस प्रकार, रोमांटिववाद ने भावनात्मक और सांस्कृतिक बंधन के माध्यम से लोगों को एक सामूहिक राष्ट्रीय पहचान में बाँधने का काम किया।
प्रश्न 4. जर्मनी के एकीकरण में बिस्मार्क की क्या भूमिका थी?
उत्तर: ऑटो वॉन बिस्मार्क, प्रशिया के चांसलर, जर्मनी के एकीकरण के प्रमुख वास्तुकार थे। उन्होंने "रक्त और लौह" की नीति का पालन किया, जिसका अर्थ था कि जर्मन एकीकरण युद्ध और सैन्य शक्ति के माध्यम से ही प्राप्त किया जा सकता है, भाषणों और संधियों से नहीं। उनकी कूटनीतिक चालों और सैन्य अभियानों ने जर्मनी के एकीकरण का मार्ग प्रशस्त किया:
- डेनमार्क के विरुद्ध युद्ध (1864): ऑस्ट्रिया के साथ मिलकर श्लेस्विग और होल्स्टीन क्षेत्रों पर अधिकार किया।
- ऑस्ट्रो-प्रशियाई युद्ध (1866): ऑस्ट्रिया को हराकर उत्तरी जर्मन राज्यों का एकीकरण किया और ऑस्ट्रिया को जर्मन मामलों से बाहर कर दिया।
- फ्रांस-प्रशिया युद्ध (1870-71): फ्रांस को पराजित कर दक्षिणी जर्मन राज्यों (बवेरिया, वुर्टेमबर्ग आदि) को एकीकरण के लिए राजी किया।
प्रश्न 5. इटली के एकीकरण में मेजिनी की क्या भूमिका थी?
उत्तर: ज्युसेपे मेजिनी, जिन्हें "इटली का आध्यात्मिक पिता" कहा जाता है, इटली के एकीकरण में एक क्रांतिकारी विचारक और प्रेरणास्रोत थे। उन्होंने 1831 में 'यंग इटली' नामक एक गुप्त संगठन की स्थापना की, जिसका लक्ष्य इटली को विदेशी नियंत्रण (विशेषकर ऑस्ट्रिया) से मुक्त कराकर एक गणतंत्रीय राष्ट्र बनाना था। मेजिनी का मानना था कि एकीकरण शांतिपूर्ण तरीकों से नहीं, बल्कि जनता के विद्रोह और क्रांति के माध्यम से होगा। उनके विचारों और आह्वान ने इतालवी युवाओं में देशभक्ति की ज्वाला जलाई और राष्ट्रीय एकता के लिए संघर्ष का मार्ग प्रशस्त किया। हालाँकि उनकी सीधी सैन्य योजनाएँ पूरी तरह सफल नहीं हुईं, लेकिन उन्होंने इटली के एकीकरण के लिए आवश्यक जनमत तैयार किया।
प्रश्न 6. बाल्कन क्षेत्र यूरोप के लिए समस्या क्यों बन गया?
उत्तर: 19वीं सदी के अंत में बाल्कन क्षेत्र यूरोप के लिए एक गंभीर समस्या और तनाव का केंद्र बन गया, जिसे "बाल्कन प्रश्न" कहा जाता था। इसके प्रमुख कारण थे:
- ऑटोमन साम्राज्य का पतन: इस क्षेत्र पर नियंत्रण रखने वाला ऑटोमन साम्राज्य कमजोर हो रहा था, जिससे शक्ति शून्य उत्पन्न हुआ।
- राष्ट्रवाद की उग्र भावना: बाल्कन में रहने वाले विभिन्न जातीय समूह (जैसे सर्ब, बुल्गार, रोमानियन आदि) अपने स्वतंत्र राष्ट्र-राज्य बनाना चाहते थे, जिससे आपसी संघर्ष पैदा हुआ।
- यूरोपीय शक्तियों का हस्तक्षेप: बड़ी यूरोपीय शक्तियाँ जैसे रूस, ऑस्ट्रिया-हंगरी, ब्रिटेन और जर्मनी इस क्षेत्र में अपना प्रभाव बढ़ाना चाहती थीं। रूस स्लाव लोगों का संरक्षक बनना चाहता था, जबकि ऑस्ट्रिया इस क्षेत्र में विस्तार चाहता था।
- टकराव और युद्ध: इन सभी प्रतिस्पर्धी महत्वाकांक्षाओं के कारण क्षेत्र में लगातार संघर्ष और युद्ध होते रहे, जो अंततः प्रथम विश्व युद्ध के प्रमुख कारणों में से एक बना।
प्रश्न 7. राष्ट्रवाद के विकास में भाषा ने क्या भूमिका निभाई?
उत्तर: भाषा ने राष्ट्रवाद के विकास में एक मौलिक और शक्तिशाली भूमिका निभाई। यह लोगों के बीच साझा पहचान और एकता का सबसे प्रभावी माध्यम बनी।
- सांस्कृतिक पहचान: एक साझी भाषा ने साहित्य, लोकगीतों और इतिहास को संरक्षित करने में मदद की, जिससे एक सामूहिक सांस्कृतिक विरासत का निर्माण हुआ।
- संचार और एकजुटता: एक ही भाषा बोलने वाले लोग आसानी से विचारों का आदान-प्रदान कर सकते थे और राष्ट्रीय आंदोलनों में शामिल हो सकते थे।
- विदेशी प्रभाव का विरोध: कई क्षेत्रों में, स्थानीय भाषा को बढ़ावा देकर विदेशी शासन (जैसे पोलैंड में रूसी भाषा के विरुद्ध पोलिश भाषा) का प्रतिरोध किया गया।
- राजनीतिक अभिव्यक्ति: भाषा के माध्यम से ही राष्ट्रीय नेताओं ने अपने विचारों को जनता तक पहुँचाया और उन्हें संगठित किया।
प्रश्न 8. 1830 ई. की क्रांति के क्या कारण थे?
उत्तर: 1830 ई. की क्रांति यूरोप में उदारवादी और राष्ट्रवादी आंदोलन का एक महत्वपूर्ण चरण थी। इसके प्रमुख कारण निम्नलिखित थे:
- वियना कांग्रेस (1815) की रूढ़िवादी व्यवस्था: नेपोलियन के पतन के बाद, वियना कांग्रेस ने यूरोप में पुरानी राजशाही को बहाल कर दिया और उदारवादी एवं राष्ट्रवादी आकांक्षाओं को दबाने की कोशिश की। यह व्यवस्था जनता के लिए असहनीय हो गई।
- फ्रांस में चार्ल्स एक्स की नीतियाँ: फ्रांस के राजा चार्ल्स एक्स ने संसद को भंग कर दिया, प्रेस की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लगाया और मताधिकार सीमित कर दिया, जिससे जनता में रोष फैल गया।
- बेल्जियम में राष्ट्रवाद: बेल्जियम, जो नीदरलैंड्स के साथ जबरन मिला दिया गया था, अपनी स्वतंत्रता चाहता था क्योंकि उसकी संस्कृति और भाषा अलग थी।
- आर्थिक संकट: कई क्षेत्रों में आर्थिक मंदी और बेरोजगारी ने जन असंतोष को बढ़ावा दिया।
- उदारवादी विचारों का प्रसार: संवैधानिक सरकार, नागरिक अधिकार और राष्ट्रीय स्वतंत्रता के विचारों ने युवाओं और बुद्धिजीवियों को प्रभावित किया था।
प्रश्न 9. फ्रांसीसी क्रांति के बाद फ्रांस में कौन-कौन से परिवर्तन हुए?
उत्तर: फ्रांसीसी क्रांति (1789) ने न केवल फ्रांस बल्कि पूरे यूरोप को गहराई से बदल दिया। फ्रांस में हुए प्रमुख परिवर्तन इस प्रकार थे:
- राजशाही का अंत और गणतंत्र की स्थापना: सदियों पुरानी निरंकुश राजशाही समाप्त हो गई और फ्रांस एक गणतंत्र बना। राजा लुई सोलहवें को फाँसी दे दी गई।
- सामंती व्यवस्था का उन्मूलन: कुलीन वर्ग और पादरियों के विशेषाधिकार समाप्त कर दिए गए। सभी नागरिक कानून के समक्ष समान हो गए।
- राष्ट्रीय संप्रभुता का सिद्धांत: यह स्थापित हुआ कि सत्ता का स्रोत राजा नहीं, बल्कि राष्ट्र के नागरिक हैं।
- नए प्रतीकों और अनुष्ठानों का निर्माण: तिरंगा झंडा, राष्ट्रीय गान (ला मार्सेइए), और राष्ट्रीय त्योहारों जैसे नए प्रतीकों ने सामूहिक पहचान को मजबूत किया।
- केंद्रीकृत प्रशासनिक व्यवस्था: देश को समान कानून और प्रशासन के तहत लाने के लिए एक समान प्रशासनिक ढाँचा बनाया गया।
- नागरिकों के अधिकारों की घोषणा: 'मनुष्य और नागरिक के अधिकारों की घोषणा' को अपनाया गया, जिसने स्वतंत्रता, समानता, संपत्ति के अधिकार और न्याय की माँग जैसे मूलभूत सिद्धांत स्थापित किए।
प्रश्न 10. यूरोप में राष्ट्रवाद के विकास में नेपोलियन की क्या भूमिका थी?
उत्तर: नेपोलियन बोनापार्ट की भूमिका यूरोप में राष्ट्रवाद के विकास के संदर्भ में द्वंद्वात्मक थी। एक ओर उसने फ्रांसीसी राष्ट्रवाद को मजबूत किया और कुछ प्रगतिशील सुधार लागू किए, तो दूसरी ओर उसके साम्राज्यवादी विस्तार ने अन्य देशों में राष्ट्रवादी प्रतिक्रिया को जन्म दिया।
- फ्रांस में राष्ट्रवाद को मजबूती: उसने फ्रांस को एक सशक्त और केंद्रीकृत राष्ट्र-राज्य के रूप में संगठित किया। नेपोलियन कोड जैसे सुधारों ने कानूनी समानता और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा दिया।
- यूरोप में प्रशासनिक सुधार: उसने जीते हुए यूरोपीय क्षेत्रों में सामंती व्यवस्था समाप्त की, किसानों को जमींदारी से मुक्त किया और नागरिक समानता के सिद्धांत को लागू किया। इससे उन क्षेत्रों में आधुनिकीकरण हुआ।
- विदेशी प्रभुत्व के विरुद्ध प्रतिक्रिया: नेपोलियन की विजय और नियंत्रण की नीतियों (जैसे महाद्वीपीय व्यवस्था) ने स्पेन, जर्मनी, इटली और अन्य जगहों के लोगों में रोष पैदा किया। इस विदेशी दमन के विरोध ने उन देशों में राष्ट्रीय चेतना और स्वतंत्रता के संघर्ष को तीव्र किया।
- राष्ट्रवाद का बीजारोपण: इस प्रकार, नेपोलियन के शासन ने, अनजाने में ही सही, यूरोप के विभिन्न क्षेत्रों में राष्ट्रीय एकता और आत्मनिर्णय की भावना के बीज बो दिए, जो बाद में 19वीं सदी के राष्ट्रवादी आंदोलनों के रूप में फले-फूले।
बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)
1. फ्रांसीसी क्रांति कब हुई थी?
(A) 1789
(B) 1798
(C) 1779
(D) 1769
उत्तर: (A) 1789
2. नेपोलियन कोड किस वर्ष लागू हुआ?
(A) 1804
(B) 1815
(C) 1789
(D) 1905
उत्तर: (A) 1804
3. यूरोप के किस देश को 'राष्ट्रों की जेल' कहा जाता था?
(A) फ्रांस
(B) रूस
(C) जर्मनी
(D) ऑस्ट्रिया
उत्तर: (B) रूस
4. जर्मनी का एकीकरण कब हुआ?
(A) 1861
(B) 1871
(C) 1851
(D) 1881
उत्तर: (B) 1871
5. इटली का एकीकरण कब हुआ?
(A) 1859-60
(B) 1866-71
(C) 1870-71
(D) 1848-49
उत्तर: (C) 1870-71
6. 'यंग इटली' संगठन की स्थापना किसने की?
(A) गैरीबाल्डी
(B) काउंट कावूर
(C) मेजिनी
(D) विक्टर इमैनुएल
उत्तर: (C) मेजिनी
7. वियना कांग्रेस कब हुई?
(A) 1815
(B) 1820
(C) 1830
(D) 1848
उत्तर: (A) 1815
8. जर्मनी के एकीकरण का नेतृत्व किस राज्य ने किया?
(A) ऑस्ट्रिया
(B) बवेरिया
(C) प्रशिया
(D) सैक्सोनी
उत्तर: (C) प्रशिया
9. बाल्कन समस्या मुख्यतः किस कारण से उत्पन्न हुई?
(A) औद्योगिक क्रांति
(B) ऑटोमन साम्राज्य का पतन
(C) फ्रांसीसी क्रांति
(D) नेपोलियन का उदय
उत्तर: (B) ऑटोमन साम्राज्य का पतन
10. 'स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व' का नारा किस क्रांति से जुड़ा है?
(A) रूसी क्रांति
(B) अमेरिकी क्रांति
(C) फ्रांसीसी क्रांति
(D) औद्योगिक क्रांति
उत्तर: (C) फ्रांसीसी क्रांति
बिहार बोर्ड कक्षा 10 सामाजिक विज्ञान (इतिहास)
अध्याय 1: यूरोप में राष्ट्रवाद
1. निम्नलिखित में कौन सही है?
(क) 1848 की क्रांति – यह क्रांति फ्रांस में शुरू हुई और पूरे यूरोप में फैल गई। इसका मुख्य उद्देश्य उदारवादी राष्ट्रवाद और लोकतांत्रिक अधिकारों को स्थापित करना था। इसने मेटरनिख की प्रतिक्रियावादी व्यवस्था को गंभीर रूप से कमजोर कर दिया।
(ख) रक्त और लौह की नीति – यह प्रशा के चांसलर ऑटो वॉन बिस्मार्क की नीति थी। इस नीति के तहत उन्होंने यह माना कि जर्मनी का एकीकरण भाषणों और संसदीय प्रस्तावों से नहीं, बल्कि युद्ध और सैन्य शक्ति (रक्त और लोहे) के माध्यम से ही संभव है।
(ग) यंग इटली – इसकी स्थापना 1831 में ज्युसेपे मेत्सिनी ने की थी। यह एक गुप्त क्रांतिकारी संगठन था जिसका लक्ष्य इटली को विभिन्न राज्यों में बंटने से मुक्त कराकर एक एकीकृत गणतंत्र बनाना था। इसने युवाओं में राष्ट्रवाद की भावना जगाई।
(घ) जोसेफ मेटरनिख – वह ऑस्ट्रिया साम्राज्य का चांसलर था। वह एक कट्टर प्रतिक्रियावादी था जो फ्रांसीसी क्रांति के विचारों और राष्ट्रवाद का विरोध करता था। 1815 के बाद यूरोप में स्थापित रूढ़िवादी व्यवस्था को ही ‘मेटरनिख व्यवस्था’ कहा जाता है।
2. रिक्त स्थानों की पूर्ति करें।
(क) फ्रांसीसी क्रांति 1789 ई. में हुई।
(ख) नेपोलियन ने 1804 ई. में स्वयं को फ्रांस का सम्राट घोषित किया।
(ग) वियना सम्मेलन 1815 ई. में हुआ।
(घ) यूनान को तुर्की से 1832 ई. में स्वतंत्रता मिली।
(ङ) फ्रैंकफर्ट संसद का अधिवेशन 1848 ई. में हुआ।
(च) इटली के एकीकरण का श्रेय काउंट कावूर को है।
(छ) जर्मनी का एकीकरण 1871 ई. में हुआ।
(ज) बाल्कन क्षेत्र यूरोप महाद्वीप का एक संवेदनशील क्षेत्र था।
3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दें।
(क) फ्रांसीसी क्रांति ने राष्ट्रवाद के विकास में क्या भूमिका निभाई?
फ्रांसीसी क्रांति ने राष्ट्रवाद के विकास में निम्नलिखित मुख्य भूमिकाएँ निभाईं:
- समान नागरिकता की अवधारणा: इसने राजशाही और विशेषाधिकारों को समाप्त करके इस विचार को जन्म दिया कि देश के सभी नागरिक कानून की नजर में समान हैं और उनके अधिकार एक जैसे हैं।
- संप्रभुता का स्थानांतरण: क्रांति ने यह घोषणा की कि देश की सर्वोच्च सत्ता (संप्रभुता) राजा में नहीं, बल्कि राष्ट्र के नागरिकों में निहित है।
- राष्ट्रीय प्रतीकों का निर्माण: तिरंगा झंडा, राष्ट्रगान (ला मार्सेइए), और ‘स्वतंत्रता, समानता, बंधुत्व’ जैसे नारों ने लोगों में सामूहिक पहचान की भावना पैदा की।
- विचारों का प्रसार: नेपोलियन के युद्धों के माध्यम से क्रांति के ये उदारवादी और राष्ट्रवादी विचार पूरे यूरोप में फैले, जिसने वहाँ के लोगों को भी अपने शासकों के खिलाफ प्रेरित किया।
(ख) नेपोलियन द्वारा लागू किए गए सुधारों का वर्णन करें।
नेपोलियन बोनापार्ट ने फ्रांस और उसके अधीनस्थ क्षेत्रों में निम्नलिखित महत्वपूर्ण सुधार लागू किए:
- नेपोलियन की संहिता (1804): इसे ‘सिविल कोड’ भी कहा जाता है। इसने जन्म पर आधारित सभी विशेषाधिकारों को समाप्त कर दिया, कानून के समक्ष समानता स्थापित की, संपत्ति के अधिकार को सुरक्षित किया और देश भर में एक समान कानूनी व्यवस्था लागू की।
- प्रशासनिक सुधार: उसने एक केंद्रीकृत और कुशल प्रशासनिक तंत्र बनाया। स्थानीय स्वशासन को समाप्त कर दिया गया और सभी नगरों पर केन्द्रीय सरकार का सीधा नियंत्रण स्थापित किया गया।
- आर्थिक सुधार: उसने एक नया बैंक ऑफ फ्रांस स्थापित किया, एक स्थिर मुद्रा (फ्रैंक) चलाई और व्यापार एवं उद्योग को बढ़ावा देने के लिए सड़कों और नहरों का जाल बिछाया।
- शिक्षा व्यवस्था: नेपोलियन ने शिक्षा प्रणाली पर राज्य का नियंत्रण स्थापित किया और लिसे (माध्यमिक विद्यालय) प्रणाली शुरू की।
नोट: ये सुधार प्रगतिशील थे, लेकिन नेपोलियन ने प्रेस की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लगाकर और महिलाओं को पुरुषों के अधीन रखकर क्रांति के कुछ लोकतांत्रिक सिद्धांतों का उल्लंघन भी किया।
(ग) 1830 और 1848 की क्रांतियों के क्या कारण थे?
1830 की क्रांतियों के कारण:
- वियना समझौते की रूढ़िवादी व्यवस्था: 1815 के बाद यूरोप में पुरानी राजशाही को फिर से स्थापित कर दिया गया था, जिससे उदारवादियों और राष्ट्रवादियों में असंतोष था।
- फ्रांस में चार्ल्स X की नीतियाँ: फ्रांस के राजा चार्ल्स X ने संसद को भंग कर दिया, प्रेस की स्वतंत्रता छीन ली और मताधिकार सीमित कर दिया, जिससे जुलाई 1830 में क्रांति भड़क उठी।
- बेल्जियम का विद्रोह: नीदरलैंड्स के साथ जबरन मिलाए जाने के विरोध में बेल्जियम के लोगों ने विद्रोह कर दिया और 1831 में स्वतंत्रता प्राप्त की।
1848 की क्रांतियों के कारण:
- आर्थिक संकट: 1840 के दशक में यूरोप में खाद्यान्न की कमी (अकाल) और बेरोजगारी फैली हुई थी, जिससे गरीबों में भयंकर असंतोष था।
- उदारवादी आकांक्षाएँ: मध्यम वर्ग के लोग संवैधानिक राजतंत्र, प्रेस की स्वतंत्रता और संसदीय शासन चाहते थे।
- राष्ट्रवादी भावनाएँ: जर्मनी, इटली, पोलैंड, ऑस्ट्रो-हंगेरियन साम्राज्य आदि में राष्ट्रीय एकता और स्वतंत्रता की माँग तेज हो गई थी।
- फ्रांस में राजशाही का पतन: फ्रांस में राजा लुई फिलिप की अलोकप्रिय सरकार के खिलाफ फरवरी 1848 में विद्रोह हुआ, जिसने दूसरे देशों के लोगों को भी प्रेरित किया। इस क्रांति ने मेटरनिख व्यवस्था को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया।
4. सही जोड़ी बनाइए।
(क) मेजिनी – (iii) यंग इटली
(ख) बिस्मार्क – (iv) रक्त और लौह की नीति
(ग) कावूर – (i) इटली का एकीकरण
(घ) यूनान – (ii) तुर्की से स्वतंत्रता
(ङ) फ्रैंकफर्ट संसद – (v) जर्मन एकीकरण का प्रयास
5. निम्नलिखित में सही कथन पर (✓) तथा गलत कथन पर (✗) का निशान लगाएँ।
(क) फ्रांसीसी क्रांति 1789 ई. में हुई। ✓
(ख) नेपोलियन का जन्म इटली में हुआ था। ✓ (कोर्सिका द्वीप में, जो उस समय जेनोआ गणराज्य का हिस्सा था)
(ग) वियना कांग्रेस का अध्यक्ष मेटरनिख था। ✓
(घ) जर्मनी का एकीकरण बिस्मार्क ने किया। ✓
(ङ) इटली के एकीकरण में गैरीबाल्डी का योगदान था। ✓
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Chapter 2 समाजवाद एवं साम्यवाद)
Chapter 3 हिन्द(चीन में राष्ट्रवादी आंदोलन)
Chapter 4 भारत में राष्ट्रवाद)
Chapter 5 अर्थव्यवस्था और आजीविका)
Chapter 6 शहरीकरण एवं शहरी जीवन)
Chapter 7 व्यापार और भूमंडलीकरण)
Chapter 8 प्रेस एवं सस्कृतिक राष्ट्रवाद)
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