Bihar Board Class 10th Social Science (इतिहास की दुनिया भाग 2) Chapter 7 व्यापार और भूमंडलीकरण) Solutions
Here we have provided Solution for Chapter 7 व्यापार और भूमंडलीकरण) of Social Science (इतिहास की दुनिया भाग 2) subject for Class 10th students of Bihar Board of Secondary Education. There are various chapters in this Social Science (इतिहास की दुनिया भाग 2) such as Chapter 1 यूरोप में राष्ट्रवाद), Chapter 2 समाजवाद एवं साम्यवाद), Chapter 3 हिन्द(चीन में राष्ट्रवादी आंदोलन), Chapter 4 भारत में राष्ट्रवाद), Chapter 5 अर्थव्यवस्था और आजीविका), Chapter 6 शहरीकरण एवं शहरी जीवन), Chapter 7 व्यापार और भूमंडलीकरण) and Chapter 8 प्रेस एवं सस्कृतिक राष्ट्रवाद). Summary of the same is given below:
| Board Name | Bihar Board of Secondary Education |
| Class | Class 10th |
| Content Type | Solution |
| Solution for | Class 10th students |
| Subject | Social Science (इतिहास की दुनिया भाग 2) |
| Chapter Name | Chapter 7 व्यापार और भूमंडलीकरण) |
| Total Number of Chapter in this Subject | 8 |
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Bihar Board Class 10th Social Science (इतिहास की दुनिया भाग 2) Chapter 7 व्यापार और भूमंडलीकरण) Solutions
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अध्याय 7: व्यापार और भूमंडलीकरण
1. बहुविकल्पीय प्रश्न (Multiple Choice Questions)
(i) भारत में यूरोपीय लोगों के आगमन का मुख्य उद्देश्य क्या था?
उत्तर: (B) मसालों का व्यापार। यूरोपीय देश, विशेषकर पुर्तगाली, डच, अंग्रेज और फ्रांसीसी, भारत मुख्य रूप से मसालों, रेशम, कपास और अन्य कीमती वस्तुओं के व्यापार के लिए आए थे। हालाँकि बाद में उन्होंने साम्राज्य विस्तार और धर्म प्रचार भी किया, लेकिन प्रारंभिक उद्देश्य व्यापारिक लाभ कमाना था।
(ii) भारत में ब्रिटिश साम्राज्य की नींव किसने रखी?
उत्तर: (C) रॉबर्ट क्लाइव। रॉबर्ट क्लाइव को भारत में ब्रिटिश साम्राज्य का संस्थापक माना जाता है। प्लासी के युद्ध (1757) में उनकी जीत ने ईस्ट इंडिया कंपनी को बंगाल पर नियंत्रण दिलाया, जिससे भारत में ब्रिटिश शासन की नींव पड़ी।
(iii) 'सूती कपड़ा' के निर्यात के लिए प्रसिद्ध भारतीय शहर कौन-सा था?
उत्तर: (B) मसूलीपट्टनम। मसूलीपट्टनम (वर्तमान आंध्र प्रदेश में) अपने उत्तम सूती कपड़े, विशेष रूप से चिंट्ज (छपाई वाला कपड़ा) के लिए विश्वविख्यात था और यह एक प्रमुख निर्यात केंद्र था।
(iv) 'ग्लोबलाइजेशन' (भूमंडलीकरण) शब्द का अर्थ है-
उत्तर: (A) देशों के बीच आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक आदान-प्रदान। भूमंडलीकरण एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके द्वारा दुनिया के विभिन्न देश और लोग आपस में जुड़ते हैं। इसमें सिर्फ व्यापार ही नहीं, बल्कि विचारों, प्रौद्योगिकी, संस्कृति और पूँजी का भी स्वतंत्र प्रवाह शामिल है।
2. अति लघु उत्तरीय प्रश्न (Very Short Answer Type Questions)
(i) 'ईस्ट इंडिया कंपनी' की स्थापना कब हुई?
उत्तर: ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना 31 दिसंबर, 1600 को इंग्लैंड की महारानी एलिजाबेथ प्रथम के एक चार्टर द्वारा हुई थी। इसका पूरा नाम 'गवर्नर एंड कंपनी ऑफ मर्चेंट्स ऑफ लंदन ट्रेडिंग इन टू द ईस्ट इंडीज' था।
(ii) 'प्लासी का युद्ध' कब हुआ?
उत्तर: प्लासी का युद्ध 23 जून, 1757 को बंगाल के नवाब सिराजुद्दौला और ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की सेनाओं के बीच लड़ा गया। इस युद्ध में रॉबर्ट क्लाइव के नेतृत्व में कंपनी की जीत हुई।
(iii) 'भूमंडलीकरण' के दो लाभ बताएँ।
उत्तर: भूमंडलीकरण के दो प्रमुख लाभ हैं:
1. आर्थिक विकास एवं रोजगार: इससे अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और निवेश बढ़ता है, जिससे नए उद्योग स्थापित होते हैं और रोजगार के अवसर पैदा होते हैं।
2. प्रौद्योगिकी और वस्तुओं की उपलब्धता: दुनिया भर की उन्नत तकनीक, बेहतर उत्पाद और सेवाएँ आसानी से उपलब्ध हो जाती हैं, जिससे जीवन स्तर में सुधार होता है।
3. लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Type Questions)
(i) 'व्यापारिक क्रांति' से आप क्या समझते हैं?
उत्तर: 'व्यापारिक क्रांति' 16वीं से 18वीं शताब्दी के बीच यूरोप में आए उस बड़े आर्थिक परिवर्तन को कहते हैं, जब यूरोपीय देशों ने एशिया, अफ्रीका और अमेरिका के साथ समुद्री व्यापार मार्ग खोजे और विस्तार किया। इस क्रांति के कारण:
- यूरोप में नई-नई वस्तुएँ (जैसे मसाले, चाय, कॉफी, रेशम) पहुँचीं।
- व्यापारिक कंपनियाँ (जैसे ईस्ट इंडिया कंपनी) स्थापित हुईं।
- पूँजीवाद और बैंकिंग प्रणाली का विकास हुआ।
- यूरोपीय देशों की आर्थिक और राजनीतिक शक्ति में भारी वृद्धि हुई, जिसने औपनिवेशिक साम्राज्यों की नींव रखी।
(ii) 'भूमंडलीकरण' के भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़े प्रभावों की व्याख्या करें।
उत्तर: भूमंडलीकरण का भारतीय अर्थव्यवस्था पर मिश्रित प्रभाव पड़ा है:
सकारात्मक प्रभाव:
1. आर्थिक विकास दर में वृद्धि: विदेशी निवेश और निर्यात बढ़ने से अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ी।
2. सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) और सेवा क्षेत्र का उदय: भारत आईटी और आउटसोर्सिंग का वैश्विक केंद्र बना।
3. उपभोक्ता वस्तुओं की विविधता: बाजार में अंतर्राष्ट्रीय कंपनियों के उत्पाद उपलब्ध होने से उपभोक्ताओं को अधिक विकल्प मिले।
नकारात्मक प्रभाव:
1. छोटे उद्योगों पर संकट: सस्ते आयात और बड़ी कंपनियों के कारण कुटीर एवं लघु उद्योग प्रतिस्पर्धा में टिक नहीं पाए।
2. कृषि संकट: वैश्विक बाजार के दबाव और बहुराष्ट्रीय कंपनियों के कारण किसानों की स्थिति कठिन हुई।
3. आर्थिक असमानता: विकास का लाभ सभी वर्गों तक समान रूप से नहीं पहुँचा, जिससे अमीर-गरीब के बीच का अंतर बढ़ा।
4. दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Type Questions)
(i) भारत में यूरोपीय व्यापारिक कंपनियों के आगमन के कारणों एवं परिणामों की विवेचना करें।
उत्तर: भारत में यूरोपीय व्यापारिक कंपनियों (पुर्तगाली, डच, फ्रांसीसी, अंग्रेज) के आगमन के प्रमुख कारण और उसके दूरगामी परिणाम निम्नलिखित थे:
कारण:
1. मसालों और कीमती वस्तुओं का व्यापार: भारत मसालों, रेशम, सूती कपड़ा, नील आदि के लिए प्रसिद्ध था। यूरोप में इनकी भारी माँग और ऊँची कीमत थी, जिससे मुनाफा कमाने की चाहत प्रमुख कारण बनी।
2. ओटोमन साम्राज्य द्वारा मार्ग अवरुद्ध होना: पारंपरिक भूमि मार्ग (सिल्क रूट) पर तुर्क साम्राज्य का नियंत्रण होने के कारण यूरोपीय देश समुद्री मार्ग खोजने पर मजबूर हुए।
3. साम्राज्यवादी महत्वाकांक्षाएँ: व्यापार के साथ-साथ यूरोपीय देशों की राजनीतिक और सैन्य शक्ति बढ़ाने की इच्छा भी थी।
4. धर्म प्रचार: विशेषकर पुर्तगाली और फ्रांसीसी ईसाई धर्म के प्रचार के लिए भी आए।
परिणाम:
1. भारत का आर्थिक शोषण: यूरोपीय कंपनियों ने भारत के संसाधनों और व्यापार पर एकाधिकार कर लिया। भारत से कच्चा माल सस्ते में ले जाकर तैयार माल महँगे में बेचा गया, जिससे देश की संपदा बाहर चली गई।
2. राजनीतिक पराधीनता: व्यापार से शुरू हुई दखलअंदाजी धीरे-धीरे सैन्य हस्तक्षेप और राजनीतिक नियंत्रण में बदल गई। अंततः लगभग पूरा भारत ब्रिटिश साम्राज्य के अधीन हो गया।
3. पारंपरिक उद्योगों का पतन: भारत के प्रसिद्ध हस्तशिल्प और कपड़ा उद्योग को जानबूझकर नष्ट कर दिया गया ताकि ब्रिटेन के कारखानों के माल के लिए बाजार बन सके।
4. सामाजिक-सांस्कृतिक प्रभाव: पश्चिमी शिक्षा, विचारधारा, कानून और जीवनशैली का प्रभाव पड़ा, जिसने भारतीय समाज में नए परिवर्तनों की शुरुआत की।
(ii) 'भूमंडलीकरण' की प्रक्रिया ने विश्व को किस प्रकार प्रभावित किया है? विस्तार से समझाइए।
उत्तर: भूमंडलीकरण एक ऐसी बहुआयामी प्रक्रिया है जिसने पूरे विश्व के आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक ढाँचे को गहराई से प्रभावित किया है।
1. आर्थिक प्रभाव:
- वैश्विक बाजार का निर्माण: दुनिया एक एकीकृत बाजार बन गई है। कोई भी कंपनी कहीं भी उत्पादन कर सकती है और दुनिया भर में बेच सकती है।
- पूँजी और प्रौद्योगिकी का प्रवाह: विकासशील देशों में विदेशी निवेश (FDI) बढ़ा है, जिससे रोजगार और आधारभूत ढाँचे का विकास हुआ।
- आर्थिक असमानता: इसका लाभ सभी देशों और सभी वर्गों को समान रूप से नहीं मिला। विकसित देश और अमीर वर्ग अधिक लाभान्वित हुए हैं।
2. सामाजिक-सांस्कृतिक प्रभाव:
- सांस्कृतिक आदान-प्रदान: फिल्में, संगीत, भोजन, फैशन और विचारों का वैश्विक प्रसार हुआ है। 'ग्लोबल विलेज' की अवधारणा सच होती दिख रही है।
- पारंपरिक संस्कृति पर खतरा: पश्चिमी संस्कृति के वर्चस्व के कारण कई स्थानीय भाषाएँ, कलाएँ और परंपराएँ लुप्त होने के कगार पर हैं।
- जागरूकता और आंदोलन: मानवाधिकार, पर्यावरण संरक्षण, महिला अधिकार जैसे मुद्दों पर वैश्विक जागरूकता और एकजुटता बढ़ी है।
3. राजनीतिक प्रभाव:
- राष्ट्र-राज्यों की सत्ता में कमी: अंतर्राष्ट्रीय संगठन (जैसे WTO, IMF, UN) और बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ राष्ट्रीय सरकारों की नीतियों को प्रभावित करने लगी हैं।
- वैश्विक सहयोग: आतंकवाद, जलवायु परिवर्तन, महामारी जैसी वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए देशों के बीच सहयोग बढ़ा है।
4. तकनीकी प्रभाव:
- इंटरनेट और संचार प्रौद्योगिकी ने दूरियाँ मिटा दी हैं। सूचना तत्काल और सर्वसुलभ हो गई है।
- इसने शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यापार के क्षेत्र में क्रांति ला दी है।