Bihar Board Class 10th Social Science (इतिहास की दुनिया भाग 2) Chapter 7 व्यापार और भूमंडलीकरण) Solutions
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अध्याय 7: व्यापार और भूमंडलीकरण
1. बहुविकल्पीय प्रश्न (Multiple Choice Questions)
(i) भारत में यूरोपीय लोगों के आगमन का मुख्य उद्देश्य क्या था?
उत्तर: (B) मसालों का व्यापार। यूरोपीय देश, विशेषकर पुर्तगाली, डच, अंग्रेज और फ्रांसीसी, भारत मुख्य रूप से मसालों, रेशम, कपास और अन्य कीमती वस्तुओं के व्यापार के लिए आए थे। हालाँकि बाद में उन्होंने साम्राज्य विस्तार और धर्म प्रचार भी किया, लेकिन प्रारंभिक उद्देश्य व्यापारिक लाभ कमाना था।
(ii) भारत में ब्रिटिश साम्राज्य की नींव किसने रखी?
उत्तर: (C) रॉबर्ट क्लाइव। रॉबर्ट क्लाइव को भारत में ब्रिटिश साम्राज्य का संस्थापक माना जाता है। प्लासी के युद्ध (1757) में उनकी जीत ने ईस्ट इंडिया कंपनी को बंगाल पर नियंत्रण दिलाया, जिससे भारत में ब्रिटिश शासन की नींव पड़ी।
(iii) 'सूती कपड़ा' के निर्यात के लिए प्रसिद्ध भारतीय शहर कौन-सा था?
उत्तर: (B) मसूलीपट्टनम। मसूलीपट्टनम (वर्तमान आंध्र प्रदेश में) अपने उत्तम सूती कपड़े, विशेष रूप से चिंट्ज (छपाई वाला कपड़ा) के लिए विश्वविख्यात था और यह एक प्रमुख निर्यात केंद्र था।
(iv) 'ग्लोबलाइजेशन' (भूमंडलीकरण) शब्द का अर्थ है-
उत्तर: (A) देशों के बीच आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक आदान-प्रदान। भूमंडलीकरण एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके द्वारा दुनिया के विभिन्न देश और लोग आपस में जुड़ते हैं। इसमें सिर्फ व्यापार ही नहीं, बल्कि विचारों, प्रौद्योगिकी, संस्कृति और पूँजी का भी स्वतंत्र प्रवाह शामिल है।
2. अति लघु उत्तरीय प्रश्न (Very Short Answer Type Questions)
(i) 'ईस्ट इंडिया कंपनी' की स्थापना कब हुई?
उत्तर: ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना 31 दिसंबर, 1600 को इंग्लैंड की महारानी एलिजाबेथ प्रथम के एक चार्टर द्वारा हुई थी। इसका पूरा नाम 'गवर्नर एंड कंपनी ऑफ मर्चेंट्स ऑफ लंदन ट्रेडिंग इन टू द ईस्ट इंडीज' था।
(ii) 'प्लासी का युद्ध' कब हुआ?
उत्तर: प्लासी का युद्ध 23 जून, 1757 को बंगाल के नवाब सिराजुद्दौला और ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की सेनाओं के बीच लड़ा गया। इस युद्ध में रॉबर्ट क्लाइव के नेतृत्व में कंपनी की जीत हुई।
(iii) 'भूमंडलीकरण' के दो लाभ बताएँ।
उत्तर: भूमंडलीकरण के दो प्रमुख लाभ हैं:
1. आर्थिक विकास एवं रोजगार: इससे अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और निवेश बढ़ता है, जिससे नए उद्योग स्थापित होते हैं और रोजगार के अवसर पैदा होते हैं।
2. प्रौद्योगिकी और वस्तुओं की उपलब्धता: दुनिया भर की उन्नत तकनीक, बेहतर उत्पाद और सेवाएँ आसानी से उपलब्ध हो जाती हैं, जिससे जीवन स्तर में सुधार होता है।
3. लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Type Questions)
(i) 'व्यापारिक क्रांति' से आप क्या समझते हैं?
उत्तर: 'व्यापारिक क्रांति' 16वीं से 18वीं शताब्दी के बीच यूरोप में आए उस बड़े आर्थिक परिवर्तन को कहते हैं, जब यूरोपीय देशों ने एशिया, अफ्रीका और अमेरिका के साथ समुद्री व्यापार मार्ग खोजे और विस्तार किया। इस क्रांति के कारण:
- यूरोप में नई-नई वस्तुएँ (जैसे मसाले, चाय, कॉफी, रेशम) पहुँचीं।
- व्यापारिक कंपनियाँ (जैसे ईस्ट इंडिया कंपनी) स्थापित हुईं।
- पूँजीवाद और बैंकिंग प्रणाली का विकास हुआ।
- यूरोपीय देशों की आर्थिक और राजनीतिक शक्ति में भारी वृद्धि हुई, जिसने औपनिवेशिक साम्राज्यों की नींव रखी।
(ii) 'भूमंडलीकरण' के भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़े प्रभावों की व्याख्या करें।
उत्तर: भूमंडलीकरण का भारतीय अर्थव्यवस्था पर मिश्रित प्रभाव पड़ा है:
सकारात्मक प्रभाव:
1. आर्थिक विकास दर में वृद्धि: विदेशी निवेश और निर्यात बढ़ने से अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ी।
2. सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) और सेवा क्षेत्र का उदय: भारत आईटी और आउटसोर्सिंग का वैश्विक केंद्र बना।
3. उपभोक्ता वस्तुओं की विविधता: बाजार में अंतर्राष्ट्रीय कंपनियों के उत्पाद उपलब्ध होने से उपभोक्ताओं को अधिक विकल्प मिले।
नकारात्मक प्रभाव:
1. छोटे उद्योगों पर संकट: सस्ते आयात और बड़ी कंपनियों के कारण कुटीर एवं लघु उद्योग प्रतिस्पर्धा में टिक नहीं पाए।
2. कृषि संकट: वैश्विक बाजार के दबाव और बहुराष्ट्रीय कंपनियों के कारण किसानों की स्थिति कठिन हुई।
3. आर्थिक असमानता: विकास का लाभ सभी वर्गों तक समान रूप से नहीं पहुँचा, जिससे अमीर-गरीब के बीच का अंतर बढ़ा।
4. दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Type Questions)
(i) भारत में यूरोपीय व्यापारिक कंपनियों के आगमन के कारणों एवं परिणामों की विवेचना करें।
उत्तर: भारत में यूरोपीय व्यापारिक कंपनियों (पुर्तगाली, डच, फ्रांसीसी, अंग्रेज) के आगमन के प्रमुख कारण और उसके दूरगामी परिणाम निम्नलिखित थे:
कारण:
1. मसालों और कीमती वस्तुओं का व्यापार: भारत मसालों, रेशम, सूती कपड़ा, नील आदि के लिए प्रसिद्ध था। यूरोप में इनकी भारी माँग और ऊँची कीमत थी, जिससे मुनाफा कमाने की चाहत प्रमुख कारण बनी।
2. ओटोमन साम्राज्य द्वारा मार्ग अवरुद्ध होना: पारंपरिक भूमि मार्ग (सिल्क रूट) पर तुर्क साम्राज्य का नियंत्रण होने के कारण यूरोपीय देश समुद्री मार्ग खोजने पर मजबूर हुए।
3. साम्राज्यवादी महत्वाकांक्षाएँ: व्यापार के साथ-साथ यूरोपीय देशों की राजनीतिक और सैन्य शक्ति बढ़ाने की इच्छा भी थी।
4. धर्म प्रचार: विशेषकर पुर्तगाली और फ्रांसीसी ईसाई धर्म के प्रचार के लिए भी आए।
परिणाम:
1. भारत का आर्थिक शोषण: यूरोपीय कंपनियों ने भारत के संसाधनों और व्यापार पर एकाधिकार कर लिया। भारत से कच्चा माल सस्ते में ले जाकर तैयार माल महँगे में बेचा गया, जिससे देश की संपदा बाहर चली गई।
2. राजनीतिक पराधीनता: व्यापार से शुरू हुई दखलअंदाजी धीरे-धीरे सैन्य हस्तक्षेप और राजनीतिक नियंत्रण में बदल गई। अंततः लगभग पूरा भारत ब्रिटिश साम्राज्य के अधीन हो गया।
3. पारंपरिक उद्योगों का पतन: भारत के प्रसिद्ध हस्तशिल्प और कपड़ा उद्योग को जानबूझकर नष्ट कर दिया गया ताकि ब्रिटेन के कारखानों के माल के लिए बाजार बन सके।
4. सामाजिक-सांस्कृतिक प्रभाव: पश्चिमी शिक्षा, विचारधारा, कानून और जीवनशैली का प्रभाव पड़ा, जिसने भारतीय समाज में नए परिवर्तनों की शुरुआत की।
(ii) 'भूमंडलीकरण' की प्रक्रिया ने विश्व को किस प्रकार प्रभावित किया है? विस्तार से समझाइए।
उत्तर: भूमंडलीकरण एक ऐसी बहुआयामी प्रक्रिया है जिसने पूरे विश्व के आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक ढाँचे को गहराई से प्रभावित किया है।
1. आर्थिक प्रभाव:
- वैश्विक बाजार का निर्माण: दुनिया एक एकीकृत बाजार बन गई है। कोई भी कंपनी कहीं भी उत्पादन कर सकती है और दुनिया भर में बेच सकती है।
- पूँजी और प्रौद्योगिकी का प्रवाह: विकासशील देशों में विदेशी निवेश (FDI) बढ़ा है, जिससे रोजगार और आधारभूत ढाँचे का विकास हुआ।
- आर्थिक असमानता: इसका लाभ सभी देशों और सभी वर्गों को समान रूप से नहीं मिला। विकसित देश और अमीर वर्ग अधिक लाभान्वित हुए हैं।
2. सामाजिक-सांस्कृतिक प्रभाव:
- सांस्कृतिक आदान-प्रदान: फिल्में, संगीत, भोजन, फैशन और विचारों का वैश्विक प्रसार हुआ है। 'ग्लोबल विलेज' की अवधारणा सच होती दिख रही है।
- पारंपरिक संस्कृति पर खतरा: पश्चिमी संस्कृति के वर्चस्व के कारण कई स्थानीय भाषाएँ, कलाएँ और परंपराएँ लुप्त होने के कगार पर हैं।
- जागरूकता और आंदोलन: मानवाधिकार, पर्यावरण संरक्षण, महिला अधिकार जैसे मुद्दों पर वैश्विक जागरूकता और एकजुटता बढ़ी है।
3. राजनीतिक प्रभाव:
- राष्ट्र-राज्यों की सत्ता में कमी: अंतर्राष्ट्रीय संगठन (जैसे WTO, IMF, UN) और बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ राष्ट्रीय सरकारों की नीतियों को प्रभावित करने लगी हैं।
- वैश्विक सहयोग: आतंकवाद, जलवायु परिवर्तन, महामारी जैसी वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए देशों के बीच सहयोग बढ़ा है।
4. तकनीकी प्रभाव:
- इंटरनेट और संचार प्रौद्योगिकी ने दूरियाँ मिटा दी हैं। सूचना तत्काल और सर्वसुलभ हो गई है।
- इसने शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यापार के क्षेत्र में क्रांति ला दी है।
व्यापार और भूमंडलीकरण
1. बहुविकल्पीय प्रश्न (Multiple Choice Questions)
(i) निम्नलिखित में से कौन-सा कथन भूमंडलीकरण की विशेषता नहीं है?
(A) विश्वव्यापी आर्थिक एकीकरण
(B) सूचना एवं प्रौद्योगिकी का विकास
(C) राष्ट्रीय सीमाओं का महत्त्व बढ़ना
(D) बहुराष्ट्रीय कंपनियों का विस्तार
उत्तर: (C) राष्ट्रीय सीमाओं का महत्त्व बढ़ना
व्याख्या: भूमंडलीकरण की मुख्य विशेषता दुनिया के विभिन्न देशों के बीच आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक एकीकरण है। इस प्रक्रिया में राष्ट्रीय सीमाओं का महत्व कम होता जाता है, न कि बढ़ता है। विश्व व्यापार, पूंजी का प्रवाह और सूचना का आदान-प्रदान बिना किसी रुकावट के होने लगता है। इसलिए, राष्ट्रीय सीमाओं का महत्व बढ़ना भूमंडलीकरण की विशेषता नहीं है, बल्कि इसके विपरीत है।
(ii) 'सिल्क रूट' किससे संबंधित था?
(A) समुद्री व्यापार मार्ग
(B) रेल परिवहन मार्ग
(C) प्राचीन भूमि व्यापार मार्ग
(D) हवाई परिवहन मार्ग
उत्तर: (C) प्राचीन भूमि व्यापार मार्ग
व्याख्या: 'सिल्क रूट' या 'रेशम मार्ग' प्राचीन काल का एक विशाल भूमि व्यापार मार्गों का जाल था। यह एशिया को यूरोप और उत्तरी अफ्रीका से जोड़ता था। इस मार्ग से न केवल रेशम, बल्कि मसाले, कीमती पत्थर, सोना, चीनी मिट्टी के बर्तन और विचारों का भी व्यापार होता था। यह मार्ग चीन से शुरू होकर मध्य एशिया, भारत, फारस और अंत में भूमध्यसागरीय क्षेत्र तक जाता था।
(iii) बहुराष्ट्रीय कंपनियों (MNCs) का प्राथमिक उद्देश्य है-
(A) सामाजिक कल्याण
(B) पर्यावरण संरक्षण
(C) लाभ अधिकतमीकरण
(D) रोजगार सृजन
उत्तर: (C) लाभ अधिकतमीकरण
व्याख्या: बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ (MNCs) ऐसी बड़ी कंपनियाँ हैं जो एक से अधिक देशों में उत्पादन एवं सेवाएँ प्रदान करती हैं। इनका मुख्य और प्राथमिक उद्देश्य अपने निवेश पर अधिकतम लाभ कमाना होता है। वे सस्ते श्रम, कच्चे माल और बड़े बाजारों की तलाश में विभिन्न देशों में अपना व्यवसाय फैलाती हैं। हालाँकि कुछ MNCs सामाजिक जिम्मेदारी के कार्य भी करती हैं, लेकिन उनका मूल उद्देश्य लाभ कमाना ही होता है।
(iv) विश्व व्यापार संगठन (WTO) की स्थापना कब हुई?
(A) 1945
(B) 1947
(C) 1995
(D) 2001
उत्तर: (C) 1995
व्याख्या: विश्व व्यापार संगठन (World Trade Organization - WTO) की स्थापना 1 जनवरी, 1995 को हुई थी। इसका मुख्यालय जिनेवा, स्विट्जरलैंड में है। WTO, GATT (General Agreement on Tariffs and Trade) का उत्तराधिकारी संगठन है। इसका प्रमुख कार्य अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के नियम बनाना, व्यापार समझौतों पर बातचीत करना और सदस्य देशों के बीच व्यापारिक विवादों का निपटारा करना है।
2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
(i) भूमंडलीकरण से आप क्या समझते हैं?
उत्तर: भूमंडलीकरण एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके द्वारा दुनिया के विभिन्न देश आपस में आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक रूप से जुड़ते जा रहे हैं। यह प्रक्रिया व्यापार, प्रौद्योगिकी, पूंजी के प्रवाह और सूचना के आदान-प्रदान के कारण तेज हुई है।
मुख्य विशेषताएँ:
1. आर्थिक एकीकरण: वस्तुओं, सेवाओं और पूंजी का देशों के बीच स्वतंत्र प्रवाह।
2. प्रौद्योगिकी का प्रसार: इंटरनेट और संचार तकनीक ने दूरियाँ कम कर दी हैं।
3. सांस्कृतिक आदान-प्रदान: फिल्में, संगीत, भोजन और विचारों का वैश्विक स्तर पर आदान-प्रदान।
4. बहुराष्ट्रीय कंपनियों (MNCs) की भूमिका: ये कंपनियाँ विभिन्न देशों में उत्पादन करके वैश्विक बाजार बनाती हैं।
इसका प्रभाव सकारात्मक (नई तकनीक, रोजगार) और नकारात्मक (स्थानीय उद्योगों पर दबाव, आर्थिक असमानता) दोनों तरह का होता है।
(ii) बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ (MNCs) विकासशील देशों में निवेश क्यों करती हैं?
उत्तर: बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ (MNCs) विकासशील देशों में निवेश करने के लिए निम्नलिखित कारणों से आकर्षित होती हैं:
1. सस्ता श्रम: विकासशील देशों में श्रम की लागत विकसित देशों की तुलना में काफी कम होती है, जिससे उत्पादन सस्ता पड़ता है और मुनाफा बढ़ता है।
2. विशाल बाजार: इन देशों में जनसंख्या अधिक होती है, जिससे वस्तुओं और सेवाओं के लिए एक बड़ा बाजार उपलब्ध होता है।
3. उदार सरकारी नीतियाँ: विकासशील देश अक्सर विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए कर में छूट, सब्सिडी और अन्य सुविधाएँ प्रदान करते हैं।
4. प्राकृतिक संसाधनों की उपलब्धता: कई विकासशील देश खनिज, कच्चा माल और अन्य प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध होते हैं, जो उत्पादन के लिए जरूरी हैं।
5. कम प्रतिस्पर्धा: कई क्षेत्रों में स्थानीय प्रतिस्पर्धा कमजोर होती है, जिससे MNCs के लिए बाजार में जल्दी पैठ बनाना आसान हो जाता है।
(iii) प्राचीन काल में भारत का विश्व के साथ व्यापारिक संबंध कैसे थे?
उत्तर: प्राचीन काल में भारत का विश्व के साथ व्यापारिक संबंध बहुत समृद्ध और व्यापक थे। भारत रेशम मार्ग (सिल्क रूट) और समुद्री मार्गों के माध्यम से एशिया, यूरोप और अफ्रीका से जुड़ा हुआ था।
मुख्य पहलू:
1. निर्यात: भारत से मसाले (काली मिर्च, इलायची), रेशम, सूती वस्त्र, हाथीदाँत, कीमती पत्थर, नील और चीनी का निर्यात होता था।
2. आयात: भारत में सोना, चाँदी, ताँबा, शराब, शीशा और घोड़ों का आयात किया जाता था।
3. मार्ग: उत्तर-पश्चिम से रेशम मार्ग द्वारा और दक्षिण के बंदरगाहों (जैसे मुजिरिस, आरिकामेडु) से समुद्री मार्ग द्वारा व्यापार होता था।
4. सांस्कृतिक आदान-प्रदान: व्यापार के साथ-साथ भारतीय दर्शन, गणित, खगोल विज्ञान और कला का भी प्रसार हुआ। बौद्ध धर्म का पूर्वी एशिया में फैलना इसी का उदाहरण है।
5. रोमन साम्राज्य के साथ व्यापार: रोमन साम्राज्य के साथ भारत का विशेष रूप से सक्रिय व्यापार था, जिसमें भारत को रोम से सोना प्राप्त होता था।
(iv) विश्व व्यापार संगठन (WTO) के क्या उद्देश्य हैं?
उत्तर: विश्व व्यापार संगठन (WTO) के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं:
1. व्यापार बाधाओं को कम करना: WTO का मुख्य लक्ष्य देशों के बीच व्यापार में आने वाली रुकावटों जैसे आयात शुल्क (टैरिफ) और गैर-टैरिफ बाधाओं (कोटा आदि) को कम करना या खत्म करना है।
2. व्यापार नियम बनाना एवं लागू करना: यह अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के लिए नियम बनाता है और यह सुनिश्चित करता है कि सभी सदस्य देश इन नियमों का पालन करें।
3. व्यापार विवादों का निपटारा: जब दो या अधिक देशों के बीच व्यापार को लेकर झगड़ा होता है, तो WTO एक मंच के रूप में काम करता है और उन विवादों का निपटारा करता है।
4. व्यापार वार्ताएँ आयोजित करना: यह सदस्य देशों के बीच नए व्यापार समझौतों पर बातचीत के लिए मंच प्रदान करता है।
5. विकासशील देशों की सहायता करना: WTO विकासशील और कम विकसित देशों को विशेष और अलग व्यवहार प्रदान करता है ताकि वे वैश्विक व्यापार प्रणाली में बेहतर ढंग से भाग ले सकें।
6. व्यापार को निष्पक्ष एवं प्रतिस्पर्धी बनाना: यह निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने और व्यापार में भेदभाव को रोकने का प्रयास करता है।
व्यापार और भूमंडलीकरण
1. बहुविकल्पीय प्रश्न (Multiple Choice Questions)
(क) भारत में पहली पटसन मिल कहाँ स्थापित की गई?
(A) कोलकाता
(B) मुम्बई
(C) कानपुर
(D) मद्रास
उत्तर: (A) कोलकाता
व्याख्या: भारत में पहली पटसन मिल वर्ष 1855 में कोलकाता (तत्कालीन कलकत्ता) के निकट रिशरा में स्थापित की गई थी। इसने भारत में आधुनिक पटसन उद्योग की नींव रखी।
(ख) भारत में पहली सूती मिल कहाँ स्थापित की गई?
(A) अहमदाबाद
(B) मुम्बई
(C) सूरत
(D) कोलकाता
उत्तर: (B) मुम्बई
व्याख्या: भारत में पहली सूती वस्त्र मिल वर्ष 1854 में मुम्बई (तत्कालीन बॉम्बे) में स्थापित की गई थी। इस मिल की स्थापना ने भारत में मशीनीकृत सूती वस्त्र उद्योग की शुरुआत को चिह्नित किया।
(ग) भारत में पहली जूट मिल कहाँ स्थापित की गई?
(A) कोलकाता
(B) मुम्बई
(C) कानपुर
(D) मद्रास
उत्तर: (A) कोलकाता
व्याख्या: पटसन को ही जूट कहा जाता है। इसलिए, भारत में पहली जूट मिल भी वर्ष 1855 में कोलकाता के रिशरा में ही स्थापित की गई थी, जो पहली पटसन मिल के समान ही है।
(घ) भारत में पहली ऊनी मिल कहाँ स्थापित की गई?
(A) कानपुर
(B) मुम्बई
(C) पंजाब
(D) कोलकाता
उत्तर: (C) पंजाब
व्याख्या: भारत में पहली ऊनी मिल वर्ष 1876 में पंजाब के अमृतसर में स्थापित की गई थी। पंजाब में भेड़ पालन और ऊन उत्पादन की परंपरा के कारण यह उद्योग वहाँ विकसित हुआ।
2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
(क) भारत में औद्योगिक क्रांति क्यों नहीं हो पाई?
उत्तर: भारत में औद्योगिक क्रांति न हो पाने के प्रमुख कारण निम्नलिखित थे:
- ब्रिटिश औपनिवेशिक नीतियाँ: ब्रिटिश सरकार भारत को कच्चे माल का स्रोत और तैयार माल का बाजार बनाना चाहती थी। इसलिए, उसने भारत में उद्योगों के विकास को प्रोत्साहन नहीं दिया।
- प्रतिस्पर्धा में असमर्थता: ब्रिटेन में मशीनों द्वारा बने सस्ते और बेहतर माल से भारत के पारंपरिक हस्तशिल्प उद्योग प्रतिस्पर्धा नहीं कर पाए और नष्ट हो गए।
- पूँजी की कमी: औद्योगीकरण के लिए भारी पूँजी निवेश की आवश्यकता थी, जिसकी भारतीय व्यापारियों के पास कमी थी। बैंकिंग और वित्तीय संस्थानों का भी अभाव था।
- तकनीकी ज्ञान का अभाव: भारत में आधुनिक मशीनों और उत्पादन तकनीकों का ज्ञान एवं प्रशिक्षण का अभाव था।
- बुनियादी ढाँचे की कमी: परिवहन, संचार और ऊर्जा (जैसे कोयला) के बुनियादी ढाँचे का विकास अपर्याप्त था, जो औद्योगीकरण के लिए आवश्यक है।
(ख) भारत में आधुनिक उद्योगों की स्थापना में किन-किन समस्याओं का सामना करना पड़ा?
उत्तर: भारत में आधुनिक उद्योगों की स्थापना में निम्नलिखित समस्याओं का सामना करना पड़ा:
- ब्रिटिश विरोध: ब्रिटिश सरकार और उद्योगपति भारतीय उद्योगों को प्रतिद्वंद्वी के रूप में देखते थे और उनके विकास में अनेक बाधाएँ उत्पन्न करते थे।
- पूँजी एकत्र करने में कठिनाई: भारतीय उद्योगपतियों के लिए पर्याप्त पूँजी जुटाना एक बड़ी चुनौती थी।
- मशीनों एवं तकनीकी ज्ञान का आयात: मशीनें और तकनीकी विशेषज्ञता मुख्यतः ब्रिटेन से मँगानी पड़ती थी, जो बहुत खर्चीला था और ब्रिटिश निर्भरता बढ़ाता था।
- बुनियादी सुविधाओं का अभाव: रेलवे का विकास मुख्यतः ब्रिटिश हितों के लिए हुआ था। बिजली, पानी और परिवहन की सुविधाएँ उद्योगों के लिए पर्याप्त नहीं थीं।
- श्रमिकों की समस्या: प्रशिक्षित श्रमिकों की कमी थी। कारखानों में काम करने के लिए लोगों को ग्रामीण क्षेत्रों से लाना पड़ता था, जिससे आवास और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ उत्पन्न हुईं।
- बाजार में प्रतिस्पर्धा: ब्रिटिश माल से सीधी प्रतिस्पर्धा करनी पड़ती थी, जो अक्सर सस्ता और गुणवत्तापूर्ण होता था।
(ग) भारत में आधुनिक उद्योगों की स्थापना कब हुई?
उत्तर: भारत में आधुनिक उद्योगों की स्थापना का दौर उन्नीसवीं शताब्दी के मध्य (लगभग 1850 के दशक) से शुरू हुआ। इसकी शुरुआत सूती वस्त्र और पटसन (जूट) उद्योगों से हुई। पहली सूती मिल 1854 में मुम्बई में और पहली पटसन मिल 1855 में कोलकाता में स्थापित की गई। इसके बाद धीरे-धीरे लोहा-इस्पात, ऊनी वस्त्र, कागज, सीमेंट आदि उद्योगों की स्थापना हुई।
(घ) भारत में आधुनिक उद्योगों की स्थापना किस प्रकार हुई?
उत्तर: भारत में आधुनिक उद्योगों की स्थापना निम्नलिखित तरीकों से हुई:
- भारतीय उद्यमियों द्वारा: कुछ भारतीय व्यापारियों और बैंकरों (जैसे जमशेदजी टाटा, द्वारकानाथ टैगोर, गोविंदराम सेठ) ने पूँजी लगाकर मिलें स्थापित कीं।
- ब्रिटिश पूँजी निवेश द्वारा: कुछ उद्योग ब्रिटिश पूँजीपतियों द्वारा स्थापित किए गए, विशेषकर वे जो भारतीय कच्चे माल पर आधारित थे, जैसे चाय बागान, पटसन मिलें।
- सरकारी प्रयासों द्वारा: कुछ रणनीतिक उद्योग, जैसे रेलवे का विकास और बाद में लोहा-इस्पात संयंत्र (जैसे टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी को सरकारी अनुबंध मिला), सरकारी सहयोग या आवश्यकता से प्रेरित थे।
- प्रौद्योगिकी का आयात: मशीनें और तकनीकी ज्ञान यूरोप (मुख्यतः ब्रिटेन) से आयात किया गया। विदेशी विशेषज्ञों को भी नियुक्त किया गया।
- कच्चे माल की उपलब्धता के आधार पर: उद्योग उन क्षेत्रों में स्थापित किए गए जहाँ कच्चा माल आसानी से उपलब्ध था, जैसे पटसन मिलें कोलकाता (पूर्वी बंगाल के पटसन क्षेत्र के निकट) और सूती मिलें मुम्बई (कपास उत्पादक क्षेत्रों व बंदरगाह के निकट)।
3. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए।
(क) भारत में पहली सूती मिल ………. में स्थापित की गई।
उत्तर: मुम्बई (बॉम्बे)
(ख) भारत में पहली पटसन मिल ………. में स्थापित की गई।
उत्तर: कोलकाता (रिशरा)
(ग) भारत में पहली ऊनी मिल ………. में स्थापित की गई।
उत्तर: पंजाब (अमृतसर)
(घ) भारत में पहली जूट मिल ………. में स्थापित की गई।
उत्तर: कोलकाता
4. सही जोड़ी बनाइए।
| स्तम्भ 'क' | स्तम्भ 'ख' |
|---|---|
| (क) पहली सूती मिल | 1. कोलकाता |
| (ख) पहली पटसन मिल | 2. मुम्बई |
| (ग) पहली ऊनी मिल | 3. पंजाब |
| (घ) पहली जूट मिल | 4. कोलकाता |
उत्तर:
(क) → 2. मुम्बई
(ख) → 1. कोलकाता
(ग) → 3. पंजाब
(घ) → 4. कोलकाता
5. निम्नलिखित में सत्य/असत्य बताइए।
(क) भारत में पहली सूती मिल मुम्बई में स्थापित की गई।
उत्तर: सत्य
(ख) भारत में पहली पटसन मिल कानपुर में स्थापित की गई।
उत्तर: असत्य (यह कोलकाता में स्थापित की गई थी।)
(ग) भारत में पहली ऊनी मिल पंजाब में स्थापित की गई।
उत्तर: सत्य
(घ) भारत में पहली जूट मिल मुम्बई में स्थापित की गई।
उत्तर: असत्य (यह कोलकाता में स्थापित की गई थी।)
व्यापार और भूमंडलीकरण
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प्रश्न 1. सही विकल्प चुनें-
(i) निम्नलिखित में कौन भूमंडलीकरण का प्रमुख अंग है?
(क) विदेशी व्यापार
(ख) विदेशी पूँजी निवेश
(ग) विदेशी प्रौद्योगिकी
(घ) उपर्युक्त सभी
उत्तर: (घ) उपर्युक्त सभी
व्याख्या: भूमंडलीकरण एक जटिल प्रक्रिया है जिसमें केवल वस्तुओं का आदान-प्रदान ही नहीं, बल्कि पूँजी, प्रौद्योगिकी, विचार और संस्कृति का भी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मुक्त प्रवाह शामिल है। इसलिए विदेशी व्यापार, विदेशी पूँजी निवेश और विदेशी प्रौद्योगिकी सभी भूमंडलीकरण के प्रमुख अंग हैं।
(ii) निम्नलिखित में कौन भूमंडलीकरण का लाभ नहीं है?
(क) उपभोक्ता वस्तुओं की उपलब्धता
(ख) रोजगार में वृद्धि
(ग) विदेशी पूँजी निवेश
(घ) छोटे उद्योगों का पतन
उत्तर: (घ) छोटे उद्योगों का पतन
व्याख्या: भूमंडलीकरण से छोटे और पारंपरिक उद्योगों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है क्योंकि वे बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के साथ प्रतिस्पर्धा नहीं कर पाते, जिससे उनके बंद होने का खतरा रहता है। यह भूमंडलीकरण का एक नकारात्मक परिणाम या चुनौती है, लाभ नहीं।
(iii) विश्व व्यापार संगठन की स्थापना कब हुई?
(क) 1995
(ख) 1990
(ग) 1985
(घ) 2000
उत्तर: (क) 1995
व्याख्या: विश्व व्यापार संगठन (WTO) की स्थापना 1 जनवरी, 1995 को हुई थी। इसका मुख्यालय जिनेवा, स्विट्जरलैंड में है। यह अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के नियम बनाने और देशों के बीच व्यापार विवादों को सुलझाने का काम करता है।
(iv) भारत में नई आर्थिक नीति की शुरुआत कब हुई?
(क) 1990
(ख) 1991
(ग) 1992
(घ) 1985
उत्तर: (ख) 1991
व्याख्या: भारत में गंभीर आर्थिक संकट के बाद, जुलाई 1991 में तत्कालीन वित्त मंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व में नई आर्थिक नीति (उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण) की शुरुआत की गई। इसने भारतीय अर्थव्यवस्था को खोलने और विश्व अर्थव्यवस्था से जोड़ने का मार्ग प्रशस्त किया।
प्रश्न 2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दें-
(i) भूमंडलीकरण क्या है?
उत्तर: भूमंडलीकरण वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा दुनिया के विभिन्न देश आपस में आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक रूप से इतने जुड़ जाते हैं कि एक वैश्विक समुदाय का निर्माण होता है। आर्थिक दृष्टि से, इसका अर्थ है वस्तुओं, सेवाओं, पूँजी, प्रौद्योगिकी और श्रम का देशों की सीमाओं के पार मुक्त प्रवाह। इंटरनेट, परिवहन और संचार के साधनों के तेज विकास ने इस प्रक्रिया को गति दी है।
(ii) भूमंडलीकरण के दो लाभ बताएँ।
उत्तर: भूमंडलीकरण के दो प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं:
1. उपभोक्ताओं को अधिक विकल्प और बेहतर गुणवत्ता: इससे दुनिया भर की वस्तुएँ और सेवाएँ स्थानीय बाजारों में आसानी से उपलब्ध हो जाती हैं। उपभोक्ताओं को विभिन्न ब्रांड, बेहतर गुणवत्ता और प्रतिस्पर्धी कीमतों पर अधिक विकल्प मिलते हैं।
2. आर्थिक विकास और रोजगार के नए अवसर: विदेशी पूँजी निवेश (FDI) और बहुराष्ट्रीय कंपनियों (MNCs) के आगमन से नए उद्योग स्थापित होते हैं, जिससे आर्थिक विकास को गति मिलती है और रोजगार के नए अवसर पैदा होते हैं, विशेषकर सेवा क्षेत्र में।
(iii) भूमंडलीकरण के दो दोष बताएँ।
उत्तर: भूमंडलीकरण के दो प्रमुख दोष या चुनौतियाँ निम्नलिखित हैं:
1. छोटे और घरेलू उद्योगों पर संकट: बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के साथ प्रतिस्पर्धा न कर पाने के कारण छोटे पैमाने के स्थानीय उद्योग और कुटीर उद्योग बंद होने के कगार पर आ जाते हैं, जिससे पारंपरिक रोजगार नष्ट होते हैं।
2. आर्थिक असमानता में वृद्धि: भूमंडलीकरण का लाभ समाज के सभी वर्गों तक समान रूप से नहीं पहुँचता। इससे अमीर और गरीब के बीच की खाई और चौड़ी हो जाती है। साथ ही, विकसित देशों का विकासशील देशों की अर्थव्यवस्था और संसाधनों पर अधिक नियंत्रण हो सकता है।
(iv) विश्व व्यापार संगठन (WTO) के दो उद्देश्य बताएँ।
उत्तर: विश्व व्यापार संगठन (WTO) के दो प्रमुख उद्देश्य हैं:
1. विश्व व्यापार को सुगम, स्वतंत्र और निष्पक्ष बनाना: WTO का मुख्य लक्ष्य देशों के बीच व्यापार के रास्ते में आने वाली बाधाओं (जैसे- आयात शुल्क, कोटा प्रणाली) को कम करना या खत्म करना है, ताकि वस्तुओं और सेवाओं का अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मुक्त प्रवाह सुनिश्चित हो सके।
2. व्यापार संबंधी विवादों का शांतिपूर्ण समाधान करना: WTO सदस्य देशों के बीच व्यापार को लेकर उत्पन्न होने वाले झगड़ों और विवादों को सुलझाने के लिए एक मंच और नियम-कायदे प्रदान करता है, ताकि व्यापार युद्ध की स्थिति से बचा जा सके।
(v) भारत में नई आर्थिक नीति क्यों लागू की गई?
उत्तर: भारत में 1991 में नई आर्थिक नीति (उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण) लागू करने के प्रमुख कारण निम्नलिखित थे:
1. गंभीर आर्थिक संकट: देश पर विदेशी कर्ज का भार बहुत बढ़ गया था और विदेशी मुद्रा भंडार इतना कम हो गया था कि मात्र कुछ हफ्तों के आयात का खर्च ही उठा पाना मुश्किल था।
2. नियंत्रित अर्थव्यवस्था की कमजोरियाँ: लाइसेंस-परमिट राज, सार्वजनिक क्षेत्र का प्रभुत्व, उच्च आयात शुल्क जैसी नीतियों के कारण अर्थव्यवस्था में दक्षता की कमी, निम्न उत्पादकता और प्रतिस्पर्धा का अभाव था।
इन समस्याओं से निपटने, अर्थव्यवस्था को स्थिर करने, विदेशी निवेश को आकर्षित करने और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में शामिल होने के लिए नई आर्थिक नीति लागू की गई।
1. बहुविकल्पीय प्रश्न
(क) भूमंडलीकरण की शुरुआत कब हुई?
| A. 15वीं सदी | B. 16वीं सदी |
| C. 17वीं सदी | D. 18वीं सदी |
उत्तर: A. 15वीं सदी। भूमंडलीकरण की प्रक्रिया की शुरुआत 15वीं सदी में हुई, जब यूरोपीय खोजकर्ताओं ने समुद्री मार्गों की खोज की और विश्व के विभिन्न भागों के बीच व्यापारिक संपर्क स्थापित हुए।
2. निम्नलिखित में सही कथनों पर (✓) तथा गलत कथनों पर (✗) का निशान लगाइए-
(क) भूमंडलीकरण के कारण विश्व के सभी देशों की अर्थव्यवस्था में सुधार हुआ है।
उत्तर: ✗ (गलत)। भूमंडलीकरण से सभी देशों की अर्थव्यवस्था में सुधार नहीं हुआ है। इसके लाभ असमान रूप से वितरित हुए हैं, जिससे कुछ देशों और वर्गों को फायदा हुआ तो कुछ को नुकसान या चुनौतियों का सामना करना पड़ा है।
(ख) भूमंडलीकरण के कारण विश्व संस्कृति का उदय हुआ है।
उत्तर: ✓ (सही)। भूमंडलीकरण ने विभिन्न देशों की संस्कृतियों के आदान-प्रदान और मिश्रण को बढ़ावा दिया है, जिससे एक वैश्विक या 'विश्व संस्कृति' के तत्व उभरे हैं।
(ग) भूमंडलीकरण के कारण राष्ट्रीय सीमाएँ महत्त्वहीन हो गई हैं।
उत्तर: ✗ (गलत)। भूमंडलीकरण के बावजूद राष्ट्रीय सीमाएँ पूरी तरह से महत्त्वहीन नहीं हुई हैं। राजनीतिक, कानूनी और सांस्कृतिक पहचान के लिए ये सीमाएँ अभी भी महत्वपूर्ण बनी हुई हैं।
3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
(क) भूमंडलीकरण क्या है?
उत्तर: भूमंडलीकरण एक ऐसी व्यापक प्रक्रिया है जिसके द्वारा विश्व के विभिन्न देश आपस में आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक, तकनीकी और सांस्कृतिक रूप से जुड़ते जा रहे हैं। यह वस्तुओं, सेवाओं, पूँजी, प्रौद्योगिकी, विचारों और लोगों के आदान-प्रदान में वृद्धि करती है, जिससे एक वैश्विक समुदाय का निर्माण होता है।
(ख) भूमंडलीकरण के दो लाभ बताइए।
उत्तर: भूमंडलीकरण के दो प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं:
1. आर्थिक विकास एवं रोजगार: इसने अंतरराष्ट्रीय व्यापार और निवेश को बढ़ावा देकर कई देशों में आर्थिक विकास तेज किया है और नए रोजगार के अवसर पैदा किए हैं।
2. प्रौद्योगिकी एवं ज्ञान का प्रसार: इसके कारण उन्नत प्रौद्योगिकी, चिकित्सा सुविधाएँ, शैक्षणिक ज्ञान और नवाचार तेजी से पूरे विश्व में फैलते हैं, जिससे जीवन स्तर में सुधार होता है।
(ग) भूमंडलीकरण के दो दोष बताइए।
उत्तर: भूमंडलीकरण के दो प्रमुख दोष निम्नलिखित हैं:
1. आर्थिक असमानता में वृद्धि: इससे धन और संसाधन कुछ विकसित देशों और बड़ी कंपनियों के हाथों में केंद्रित हो गए हैं, जिससे देशों के बीच और देश के भीतर आर्थिक असमानता बढ़ी है।
2. सांस्कृतिक एकरूपता एवं स्थानीय उद्योगों पर संकट: वैश्विक संस्कृति के प्रभाव से स्थानीय संस्कृतियाँ और परंपराएँ कमजोर हो रही हैं। साथ ही, स्थानीय छोटे उद्योग बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के सामने प्रतिस्पर्धा में टिक नहीं पा रहे हैं।
(घ) बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ क्या हैं?
उत्तर: बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ ऐसी बड़ी कॉर्पोरेट इकाइयाँ हैं जिनका मुख्यालय एक देश में होता है, लेकिन उनका व्यवसाय उत्पादन, विपणन और सेवाएँ कई अन्य देशों में फैला होता है। ये कंपनियाँ वैश्विक स्तर पर संचालित होती हैं और विश्व अर्थव्यवस्था पर इनका गहरा प्रभाव पड़ता है।
(ङ) भारत में भूमंडलीकरण की शुरुआत कब हुई?
उत्तर: भारत में भूमंडलीकरण की प्रक्रिया की औपचारिक शुरुआत 1991 में हुई, जब देश ने गंभीर आर्थिक संकट के बाद आर्थिक सुधारों की नीति अपनाई। इन सुधारों में विदेशी निवेश को प्रोत्साहन, आयात-निर्यात नीतियों में उदारीकरण और अर्थव्यवस्था को वैश्विक बाजार के लिए खोलना शामिल था।
बिहार बोर्ड कक्षा 10 - सामाजिक विज्ञान (इतिहास की दुनिया भाग 2)
अध्याय 7: व्यापार और भूमंडलीकरण
1. बहुविकल्पीय प्रश्न (Multiple Choice Questions)
प्रश्न (i). भूमंडलीकरण की प्रक्रिया में सहायक है-
(A) विदेशी पूँजी निवेश
(B) उदारीकरण
(C) निजीकरण
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर: (D) उपर्युक्त सभी
व्याख्या: भूमंडलीकरण एक जटिल प्रक्रिया है जो कई आर्थिक नीतियों और कारकों के संयोजन से संभव होती है। विदेशी पूँजी निवेश अंतर्राष्ट्रीय निवेशकों को आकर्षित करता है, उदारीकरण व्यापार और निवेश पर लगी बाधाओं को हटाता है, और निजीकरण सरकारी उद्यमों को निजी हाथों में देकर बाजार को गतिशील बनाता है। ये तीनों मिलकर ही देशों की अर्थव्यवस्थाओं को वैश्विक स्तर पर जोड़ने का काम करते हैं।
प्रश्न (ii). निम्नलिखित में से कौन-सा भूमंडलीकरण का प्रभाव नहीं है?
(A) सांस्कृतिक आदान-प्रदान
(B) रोजगार के अवसरों में वृद्धि
(C) उपभोक्तावाद में वृद्धि
(D) स्थानीय उद्योगों को संरक्षण
उत्तर: (D) स्थानीय उद्योगों को संरक्षण
व्याख्या: भूमंडलीकरण का मुख्य सिद्धांत बाजार को खोलना और संरक्षणवादी नीतियों को कम करना है। इसके कारण विदेशी कंपनियों और सस्ते आयातित माल के सामने स्थानीय उद्योगों को प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है, जिससे उन्हें संरक्षण मिलना मुश्किल हो जाता है। बाकी विकल्प—सांस्कृतिक आदान-प्रदान, रोजगार के नए अवसर (विशेषकर सेवा क्षेत्र में), और उपभोक्तावाद में वृद्धि—भूमंडलीकरण के स्पष्ट प्रभाव हैं।
प्रश्न (iii). भारत में आर्थिक सुधारों की शुरुआत कब हुई?
(A) 1985
(B) 1991
(C) 1995
(D) 2000
उत्तर: (B) 1991
व्याख्या: 1991 में भारत गंभीर आर्थिक संकट (विदेशी मुद्रा भंडार की कमी, ऊँचा घाटा) से गुजर रहा था। इस संकट से निपटने और अर्थव्यवस्था को स्थिर करने के लिए तत्कालीन सरकार ने नई आर्थिक नीति की शुरुआत की। इन सुधारों में उदारीकरण (नियमों में ढील), निजीकरण और वैश्वीकरण (भूमंडलीकरण) शामिल थे, जिसे अक्सर "LPG मॉडल" कहा जाता है।
प्रश्न (iv). 'रेशम मार्ग' किन दो महाद्वीपों को जोड़ता था?
(A) एशिया और अफ्रीका
(B) एशिया और यूरोप
(C) यूरोप और अफ्रीका
(D) उत्तरी अमेरिका और दक्षिणी अमेरिका
उत्तर: (B) एशिया और यूरोप
व्याख्या: प्राचीन काल का रेशम मार्ग एक जटिल जाल था, जो मुख्य रूप से एशिया (विशेषकर चीन) को यूरोप (भूमध्यसागरीय क्षेत्र) से जोड़ता था। यह केवल रेशम का ही नहीं, बल्कि मसालों, कीमती पत्थरों, विचारों, संस्कृति और तकनीक के आदान-प्रदान का मार्ग था। यह भूमि और समुद्री मार्गों के मिश्रण से बना था और मध्य एशिया, भारतीय उपमहाद्वीप और पश्चिम एशिया से होकर गुजरता था।
प्रश्न (v). वाणिज्यिक क्रांति का कारण था-
(A) भौगोलिक खोजें
(B) पुनर्जागरण
(C) राष्ट्रीय राज्यों का उदय
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर: (D) उपर्युक्त सभी
व्याख्या: 16वीं-17वीं शताब्दी में यूरोप में हुई वाणिज्यिक क्रांति अचानक नहीं आई। यह तीन प्रमुख ऐतिहासिक घटनाओं का परिणाम थी: (1) भौगोलिक खोजें (जैसे अमेरिका का पता लगाना) जिससे नए बाजार और संसाधन मिले, (2) पुनर्जागरण जिसने वैज्ञानिक सोच और उद्यमशीलता को बढ़ावा दिया, और (3) राष्ट्रीय राज्यों का उदय जिन्होंने व्यापारियों और व्यापार कंपनियों (जैसे ईस्ट इंडिया कंपनी) को सैन्य व राजनीतिक समर्थन दिया।
2. अतिलघु उत्तरीय प्रश्न (Very Short Answer Type Questions)
प्रश्न (i). भूमंडलीकरण क्या है?
उत्तर: भूमंडलीकरण वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा दुनिया के विभिन्न देश आपस में आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक, तकनीकी और सांस्कृतिक रूप से इतने जुड़ जाते हैं कि एक वैश्विक समुदाय का निर्माण होता है। सरल शब्दों में, यह "सीमाओं के पार एकीकरण" है, जहाँ वस्तुओं, सेवाओं, पूँजी, प्रौद्योगिकी और विचारों का स्वतंत्र रूप से आदान-प्रदान होता है।
प्रश्न (ii). उदारीकरण से आप क्या समझते हैं?
उत्तर: उदारीकरण का अर्थ है अर्थव्यवस्था पर सरकारी नियंत्रण और प्रतिबंधों को कम करना। इसमें आयात-निर्यात पर लगी बाधाओं (जैसे उच्च सीमा शुल्क) को घटाना, विदेशी निवेश के नियमों को आसान बनाना, और घरेलू उद्योगों पर लाइसेंस-परमिट की पाबंदी को हटाना शामिल है। इसका उद्देश्य बाजार की शक्तियों (माँग और आपूर्ति) को अधिक कार्य करने की स्वतंत्रता देना है।
प्रश्न (iii). निजीकरण किसे कहते हैं?
उत्तर: निजीकरण वह प्रक्रिया है जिसमें सरकार द्वारा चलाए जा रहे उद्यमों (सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों) का स्वामित्व, प्रबंधन या नियंत्रण निजी कंपनियों या व्यक्तियों को हस्तांतरित कर दिया जाता है। उदाहरण के लिए, यदि सरकारी टेलीकॉम कंपनी को बेचकर निजी कंपनी के हाथों में दे दिया जाए, तो यह निजीकरण होगा। इसका लक्ष्य दक्षता बढ़ाना और सरकार पर वित्तीय बोझ कम करना है।
प्रश्न (iv). विश्व व्यापार संगठन (WTO) का मुख्यालय कहाँ है?
उत्तर: विश्व व्यापार संगठन (WTO) का मुख्यालय जेनेवा, स्विट्जरलैंड में स्थित है।
प्रश्न (v). रेशम मार्ग क्या था?
उत्तर: रेशम मार्ग प्राचीन और मध्यकाल में एशिया और यूरोप को जोड़ने वाला एक व्यापारिक मार्गों का विशाल नेटवर्क था। इसका नाम इस पर होने वाले रेशम के मुख्य व्यापार के कारण पड़ा, लेकिन इस पर मसाले, सोना, चीनी मिट्टी के बर्तन, विचार और संस्कृतियाँ भी आदान-प्रदान होती थीं। यह चीन से शुरू होकर मध्य एशिया, भारतीय उपमहाद्वीप, फारस और रोम तक फैला हुआ था।
3. लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Type Questions)
प्रश्न (i). भूमंडलीकरण के दो लाभ और दो हानियाँ लिखिए।
उत्तर:
लाभ:
1. आर्थिक विकास और निवेश: भूमंडलीकरण से विकासशील देशों में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) बढ़ता है, जिससे नई तकनीक, रोजगार के अवसर और आधारभूत ढाँचे का विकास होता है।
2. उपभोक्ताओं को लाभ: उपभोक्ताओं को विविध प्रकार की उच्च गुणवत्ता वाली वस्तुएँ कम कीमत पर उपलब्ध होती हैं और सेवाओं (जैसे संचार, बैंकिंग) में सुधार आता है।
हानियाँ:
1. स्थानीय उद्योगों पर संकट: बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों और सस्ते आयात के कारण छोटे व पारंपरिक स्थानीय उद्योग बंद होने के कगार पर आ सकते हैं, जिससे बेरोजगारी बढ़ सकती है।
2. आर्थिक असमानता: इससे अमीर और गरीब के बीच की खाई चौड़ी हो सकती है। धन और संसाधन कुछ ही हाथों में केंद्रित हो जाते हैं, और विकसित देश विकासशील देशों पर हावी हो सकते हैं।
प्रश्न (ii). भारत में 1991 के आर्थिक सुधारों के कोई दो कारण बताइए।
उत्तर: 1991 में भारत में आर्थिक सुधारों (उदारीकरण, निजीकरण, भूमंडलीकरण) की शुरुआत के प्रमुख कारण थे:
1. गंभीर विदेशी मुद्रा संकट: भारत का विदेशी मुद्रा भंडार इतना कम हो गया था कि मुश्किल से तीन सप्ताह के आयात का खर्चा निकल पाता था। देश दिवालियेपन के कगार पर था और अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं (जैसे IMF) से कर्ज लेने की स्थिति में पहुँच गया था।
2. ऊँचा राजकोषीय घाटा और मुद्रास्फीति: सरकार का खर्च आमदनी से कहीं अधिक था, जिससे घाटा बढ़ रहा था। इसके कारण मुद्रास्फीति की दर भी ऊँची थी। पुरानी 'लाइसेंस-परमिट राज' और बंद अर्थव्यवस्था की नीतियाँ अब काम नहीं कर रही थीं, इसलिए मौलिक सुधार जरूरी हो गए थे।
प्रश्न (iii). वैश्वीकरण के सांस्कृतिक प्रभावों पर प्रकाश डालिए।
उत्तर: भूमंडलीकरण का सांस्कृतिक पक्ष बहुत गहरा और द्वंद्वपूर्ण है:
1. सांस्कृतिक आदान-प्रदान और समृद्धि: इससे दुनिया भर की संस्कृतियाँ, भोजन, फैशन, संगीत, फिल्में और विचार एक-दूसरे के नजदीक आए हैं। उदाहरण के लिए, भारतीय योग और खाना विदेशों में लोकप्रिय हुआ है और हॉलीवुड फिल्में भारत में देखी जाती हैं। इससे सांस्कृतिक समझ बढ़ती है।
2. सांस्कृतिक एकरूपता और पश्चिमीकरण का खतरा: दूसरी ओर, शक्तिशाली मीडिया और बहुराष्ट्रीय कंपनियों के प्रभाव से स्थानीय संस्कृतियाँ और भाषाएँ कमजोर पड़ने लगती हैं। पश्चिमी जीवनशैली का अंधानुकरण बढ़ सकता है, जिससे सांस्कृतिक विविधता को खतरा पैदा हो जाता है। इसे कई बार "सांस्कृतिक साम्राज्यवाद" भी कहा जाता है।
4. दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Type Questions)
प्रश्न (i). भूमंडलीकरण के आर्थिक प्रभावों की विवेचना कीजिए।
उत्तर: भूमंडलीकरण के आर्थिक प्रभाव सकारात्मक और नकारात्मक दोनों रूपों में देखे जा सकते हैं:
सकारात्मक आर्थिक प्रभाव:
1. विदेशी निवेश और पूँजी प्रवाह: देशों की अर्थव्यवस्थाएँ खुलने से विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) और पोर्टफोलियो निवेश बढ़ता है। इससे नए उद्योग लगते हैं, तकनीक का हस्तांतरण होता है और आर्थिक गतिविधियाँ तेज होती हैं।
2. व्यापार में वृद्धि: व्यापार बाधाओं के हटने से अंतर्राष्ट्रीय व्यापार का आयतन और विविधता बढ़ी है। देश अपनी तुलनात्मक शक्ति के अनुसार वस्तुओं का उत्पादन और निर्यात करने लगे हैं।
3. आर्थिक विकास दर में वृद्धि: बहुत से विकासशील देशों, जैसे भारत और चीन, ने भूमंडलीकरण के बाद उच्च आर्थिक विकास दर हासिल की है। सेवा क्षेत्र (आईटी, आउटसोर्सिंग) का तेजी से विस्तार हुआ है।
4. उपभोक्ता को लाभ: प्रतिस्पर्धा बढ़ने से वस्तुओं की गुणवत्ता में सुधार और कीमतों में कमी आती है। उपभोक्ता के पास चुनाव के अधिक विकल्प होते हैं।
नकारात्मक आर्थिक प्रभाव:
1. आर्थिक अस्थिरता और संकट का फैलाव: एक देश में आया आर्थिक संकट (जैसे 2008 की मंदी) तेजी से पूरी दुनिया में फैल जाता है, क्योंकि अर्थव्यवस्थाएँ आपस में जुड़ी होती हैं।
2. छोटे उद्योगों का पतन: बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के सामने छोटे व कुटीर उद्योग टिक नहीं पाते, जिससे स्थानीय स्तर पर बेरोजगारी और आर्थिक संकट पैदा हो सकता है।
3. आय में असमानता: भूमंडलीकरण का लाभ समाज के सभी वर्गों तक समान रूप से नहीं पहुँचता। इससे अमीर और गरीब के बीच की खाई और चौड़ी हुई है, तथा देशों के बीच भी आर्थिक विषमता बढ़ सकती है।
4. प्राकृतिक संसाधनों का दोहन: लाभ कमाने की होड़ में बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ विकासशील देशों के प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन कर सकती हैं, जिससे पर्यावरण को नुकसान पहुँचता है।
प्रश्न (ii). प्राचीन काल से लेकर आधुनिक काल तक अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के विकास की विवेचना कीजिए।
उत्तर: अंतर्राष्ट्रीय व्यापार का विकास मानव सभ्यता के विकास के साथ-साथ हुआ है। इसे निम्नलिखित चरणों में समझा जा सकता है:
1. प्राचीन काल: इस दौर में व्यापार स्थल और जल मार्गों द्वारा होता था। रेशम मार्ग सबसे प्रसिद्ध व्यापार मार्ग था, जो चीन को यूरोप से जोड़ता था और रेशम, मसालों, विचारों का आदान-प्रदान करता था। भारत का रोमन साम्राज्य और दक्षिण-पूर्व एशिया के साथ समुद्री व्यापार (मसाला मार्ग) फल-फूल रहा था। व्यापार बैरटर (वस्तु विनिमय) और सिक्कों दोनों से होता था।
2. मध्यकाल: इस युग में इस्लामिक साम्राज्य ने एशिया, अफ्रीका और यूरोप के बीच व्यापार को बढ़ावा दिया। यूरोप में मेले और हाट व्यापार के केंद्र थे। भारत में मुगल काल में कपड़ा, मसाले आदि का निर्यात होता था। हालाँकि, यात्रा मुश्किल और खतरनाक थी।
3. आधुनिक काल (16वीं-18वीं शताब्दी): यूरोप में भौगोलिक खोजों (कोलंबस, वास्को डी गामा) ने व्यापार के नए आयाम खोले। अमेरिका, अफ्रीका और एशिया के साथ व्यापार शुरू हुआ। व्यापारिक कंपनियाँ जैसे ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी स्थापित हुईं, जो व्यापार से शुरू होकर राजनीतिक शक्ति बन गईं। वाणिज्यिक क्रांति हुई और उपनिवेशवाद का युग शुरू हुआ, जहाँ यूरोपीय देश एशिया व अफ्रीका के संसाधनों का दोहन करने लगे।
4. औद्योगिक क्रांति के बाद (18वीं-20वीं शताब्दी): औद्योगिक क्रांति ने व्यापार की गति और पैमाना बदल दिया। बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए कच्चे माल की जरूरत और तैयार माल के लिए नए बाजारों की तलाश ने अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को अनिवार्य बना दिया। रेल और जहाजों ने परिवहन को सस्ता व तेज बनाया। हालाँकि, दो विश्व युद्धों और 1930 की महामंदी के दौरान संरक्षणवादी नीतियों ने व्यापार को झटका दिया।
5. समकालीन युग (20वीं-21वीं शताब्दी): द्वितीय विश्व युद्ध के बाद GATT और फिर विश्व व्यापार संगठन (WTO) जैसी संस्थाओं का गठन हुआ, जिन्होंने व्यापार बाधाओं को कम करने का काम किया। 1990 के दशक से भूमंडलीकरण, उदारीकरण और डिजिटल क्रांति ने व्यापार को एक नया रूप दिया। आज ई-कॉमर्स के जरिए छोटा व्यवसायी भी वैश्विक बाजार तक पहुँच बना सकता है और सेवाओं का व्यापार (जैसे आईटी, बीपीओ) वस्तुओं के व्यापार जितना ही महत्वपूर्ण हो गया है।
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Chapter 1 यूरोप में राष्ट्रवाद)
Chapter 2 समाजवाद एवं साम्यवाद)
Chapter 3 हिन्द(चीन में राष्ट्रवादी आंदोलन)
Chapter 4 भारत में राष्ट्रवाद)
Chapter 5 अर्थव्यवस्था और आजीविका)
Chapter 6 शहरीकरण एवं शहरी जीवन)
Chapter 8 प्रेस एवं सस्कृतिक राष्ट्रवाद)
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