Bihar Board Class 10th Science (विज्ञान) Chapter 9 अनुवांशिकता एवं जैव विकास) Solutions
Here we have provided Solution for Chapter 9 अनुवांशिकता एवं जैव विकास) of Science (विज्ञान) subject for Class 10th students of Bihar Board of Secondary Education. There are various chapters in this Science (विज्ञान) such as Chapter 1 रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण), Chapter 2 अम्ल, क्षारक एवं लवण), Chapter 3 धातु एवं अधातु), Chapter 4 कार्बन एवं इसके यौगिक), Chapter 5 तत्वों का आवर्त वर्गीकरण), Chapter 6 जैव प्रक्रम), Chapter 7 नियंत्रण एवं समन्वय), Chapter 8 जीव जनन कैसे करते है), Chapter 9 अनुवांशिकता एवं जैव विकास), Chapter 10 प्रकाश(परावर्तन तथा अपवर्तन), Chapter 11 मानव नेत्र एवं रंगबिरंगा संसार), Chapter 12 विद्युत), Chapter 13 विद्युत धारा का चुम्बकीय प्रभाव), Chapter 14 उर्जा के स्रोत), Chapter 15 हमारा पर्यावरण) and Chapter 16 प्राकृतिक संसाधनों का संपोषित प्रबंधन). Summary of the same is given below:
| Board Name | Bihar Board of Secondary Education |
| Class | Class 10th |
| Content Type | Solution |
| Solution for | Class 10th students |
| Subject | Science (विज्ञान) |
| Chapter Name | Chapter 9 अनुवांशिकता एवं जैव विकास) |
| Total Number of Chapter in this Subject | 16 |
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Bihar Board Class 10th Science (विज्ञान) Chapter 9 अनुवांशिकता एवं जैव विकास) Solutions
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1. मेंडल ने अपने प्रयोगों के लिए किस पौधे को चुना?
2. एक समयुग्मजी लम्बे पौधे (TT) का एक समयुग्मजी बौने पौधे (tt) के साथ संकरण कराने पर F1 पीढ़ी में प्राप्त संतति का जीन प्ररूप लिखिए।
3. निम्नलिखित में से कौन-सा संतति में पैतृक लक्षणों के संयोजन के लिए उत्तरदायी है?
(a) कोशिका विभाजन
(b) लिंग निर्धारण
(c) कोशिका विभाजन एवं युग्मक निर्माण
(d) युग्मक निर्माण
4. जीवाश्म क्या हैं? ये किस प्रकार बनते हैं?
जीवाश्म प्राचीन काल के पौधों, जानवरों और अन्य जीवों के अवशेष या छाप होते हैं, जो चट्टानों की परतों में संरक्षित पाए जाते हैं।
जीवाश्म बनने की प्रक्रिया: जीवाश्म बनने की मुख्य प्रक्रिया को शिलीभवन (पेट्रीफिकेशन) कहते हैं। यह निम्न चरणों में होता है:
- किसी जीव की मृत्यु के बाद उसका शरीर तलछट (रेत, मिट्टी, कीचड़) से ढक जाता है।
- समय के साथ, ये तलछट परत दर परत जमकर कठोर चट्टान में बदल जाती हैं।
- जीव के नरम ऊतक सड़-गल जाते हैं, लेकिन कठोर भाग जैसे हड्डियाँ, दाँत, खोल या लकड़ी बचे रहते हैं।
- धीरे-धीरे भूमिगत खनिज युक्त जल इन कठोर भागों के रिक्त स्थानों में भर जाता है और क्रिस्टल बना देता है, जिससे जीव का एक पत्थर जैसा ढाँचा बन जाता है।
- कभी-कभी जीव पूरी तरह विघटित हो जाता है और चट्टान पर केवल उसकी एक खोखली छाप (मोल्ड) या उस छाप में भरा हुआ पदार्थ (कास्ट) रह जाता है।
जीवाश्म हमें पृथ्वी के इतिहास में रहने वाले जीवों के बारे में जानकारी देते हैं और जैव विकास के साक्ष्य प्रस्तुत करते हैं।
5. समजात अंग क्या हैं? उदाहरण सहित समझाइए।
समजात अंग वे अंग होते हैं जिनकी आधारभूत संरचना एवं उद्गम समान होता है, लेकिन उनके कार्य एवं बाहरी रूप में अंतर हो सकता है। ये अंग एक ही पूर्वज से विकसित हुए हैं, लेकिन विभिन्न पर्यावरणीय परिस्थितियों एवं आवश्यकताओं के अनुसार उनमें विभिन्नताएँ आ गई हैं।
उदाहरण:
- स्तनधारियों के अग्रपाद: मनुष्य का हाथ, बिल्ली का पंजा, घोड़े का अगला पैर, चमगादड़ के पंख और व्हेल मछली की अगली पंख (फ्लिपर) की हड्डियों की मूल संरचना (ह्यूमरस, रेडियस, अल्ना, कार्पल्स, मेटाकार्पल्स और फैलेंजेस) समान है। लेकिन इनका कार्य भिन्न है – पकड़ना, दौड़ना, उड़ना और तैरना।
- पौधों के अंग: आलू का भूमिगत तना (कंद), प्याज का तना (बल्ब), और बरगद के हवाई जड़ों वाले तने की आधारभूत संरचना एक समान (तने की) है, लेकिन उनके कार्य भिन्न हैं।