Bihar Board Class 10th Science (विज्ञान) Chapter 8 जीव जनन कैसे करते है) Solutions

Here we have provided Solution for Chapter 8 जीव जनन कैसे करते है) of Science (विज्ञान) subject for Class 10th students of Bihar Board of Secondary Education. There are various chapters in this Science (विज्ञान) such as Chapter 1 रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण), Chapter 2 अम्ल, क्षारक एवं लवण), Chapter 3 धातु एवं अधातु), Chapter 4 कार्बन एवं इसके यौगिक), Chapter 5 तत्वों का आवर्त वर्गीकरण), Chapter 6 जैव प्रक्रम), Chapter 7 नियंत्रण एवं समन्वय), Chapter 8 जीव जनन कैसे करते है), Chapter 9 अनुवांशिकता एवं जैव विकास), Chapter 10 प्रकाश(परावर्तन तथा अपवर्तन), Chapter 11 मानव नेत्र एवं रंगबिरंगा संसार), Chapter 12 विद्युत), Chapter 13 विद्युत धारा का चुम्बकीय प्रभाव), Chapter 14 उर्जा के स्रोत), Chapter 15 हमारा पर्यावरण) and Chapter 16 प्राकृतिक संसाधनों का संपोषित प्रबंधन). Summary of the same is given below:

Board NameBihar Board of Secondary Education
ClassClass 10th
Content TypeSolution
Solution forClass 10th students
SubjectScience (विज्ञान)
Chapter NameChapter 8 जीव जनन कैसे करते है)
Total Number of Chapter in this Subject16

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Bihar Board Class 10th Science (विज्ञान) Chapter 8 जीव जनन कैसे करते है) Solutions

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प्रश्न 1.

डी०एन०ए० प्रतिकृति का प्रजनन में क्या महत्त्व है?

उत्तर:

प्रजनन की सबसे मूलभूत घटना डी०एन०ए० अणु की दो सटीक प्रतिकृतियाँ (कॉपी) बनाना है। कोशिका विभिन्न रासायनिक अभिक्रियाओं के माध्यम से अपने डी०एन०ए० की नकल तैयार करती है। ये दोनों प्रतिकृतियाँ अलग-अलग होकर दो अलग-अलग कोशिकाओं के निर्माण का आधार बनती हैं। इस प्रकार, संतति कोशिकाओं में आनुवंशिक सामग्री का स्थानांतरण सुनिश्चित करने के लिए डी०एन०ए० प्रतिकृति बनाना प्रजनन के लिए एक अनिवार्य कदम है।

प्रश्न 2.

जीवों में विभिन्नता स्पीशीज़ के लिए तो लाभदायक है परंतु व्यष्टि के लिए आवश्यक वहीं है, क्यों?

उत्तर:

किसी एक व्यष्टि (व्यक्तिगत जीव) के लिए जीवित रहने और अपनी दैनिक क्रियाएँ चलाने के लिए आनुवंशिक विभिन्नताएँ अनिवार्य नहीं हैं। वास्तव में, स्थिर और अनुकूलित लक्षण ही उसके अस्तित्व में मदद करते हैं। हालाँकि, जब डी०एन०ए० की प्रतिकृति बनती है, तो उसमें थोड़ी-बहुत त्रुटियाँ (विविधताएँ) आ जाती हैं। ये विविधताएँ पीढ़ी-दर-पीढ़ी जमा होती रहती हैं। लंबे समय में, यही विविधताएँ नई प्रजातियों (स्पीशीज़) के उद्भव में मदद करती हैं और जैव विकास का आधार बनती हैं। इसलिए, विविधताएँ प्रजाति के दीर्घकालिक अस्तित्व और अनुकूलन के लिए फायदेमंद हैं, न कि किसी एक जीव के तात्कालिक जीवन के लिए।

प्रश्न 1.

हद्विखंडन बहुखंडन से किस प्रकार भिन्न है?

उत्तर:

द्विखंडन और बहुखंडन में निम्नलिखित अंतर हैं:

द्विखंडन: इसमें एक एककोशिकीय जीव (जैसे अमीबा) विभाजित होकर केवल दो समान संतति कोशिकाएँ बनाता है। प्रत्येक नई कोशिका एक स्वतंत्र जीव बन जाती है।

बहुखंडन: इसमें एक एककोशिकीय जीव का केन्द्रक बार-बार विभाजित होता है, जिसके परिणामस्वरूप एक साथ अनेक नए संतति कोशिकाएँ (बीजाणु) बनती हैं। उदाहरण के लिए, मलेरिया परजीवी (प्लैज़्मोडियम) इसी विधि से प्रजनन करता है।

प्रश्न 2.

बीजाणु द्वारा जनन से जीव किस प्रकार लाभान्वित होता है?

उत्तर:

बीजाणु द्वारा जनन से जीव को निम्नलिखित लाभ होते हैं:

1. बड़ी संख्या में प्रजनन: एक ही बीजाणुधानी (स्पोरेंजियम) में हजारों की संख्या में हल्के और सूक्ष्म बीजाणु बनते हैं, जिससे एक बार में बहुत अधिक संतति उत्पन्न हो सकती है।

2. प्रतिकूल परिस्थितियों में जीवित रहना: बीजाणुओं की दीवार मोटी होती है, जो उन्हें गर्मी, सर्दी या सूखे जैसी प्रतिकूल परिस्थितियों में लंबे समय तक जीवित रहने में मदद करती है।

3. विसरण में सहायता: बीजाणु हल्के और छोटे होते हैं, जो हवा, पानी या जानवरों द्वारा आसानी से दूर-दूर तक फैल जाते हैं। इससे जीव का विस्तार नए क्षेत्रों में हो पाता है। राइजोपस (कपड़े पर लगने वाली फफूंद) इसका एक अच्छा उदाहरण है।

प्रश्न 3,

क्या आप कुछ कारण सोच सकते हैं सकते?

उत्तर:

जिससे पता चलता हो कि जटिल संरचना वाले जीव पुनरुद्भवन द्वारा नयी संतति उत्पन्न नहीं कर सकते?
हाँ, जटिल बहुकोशिकीय जीव (जैसे मनुष्य, पक्षी, स्तनधारी) पुनरुद्भवन द्वारा नई संतति उत्पन्न नहीं कर सकते, क्योंकि:

1. विशिष्टीकृत अंग तंत्र: इन जीवों के शरीर में विभिन्न कार्यों के लिए अत्यधिक विशिष्ट और जटिल अंग तंत्र (जैसे हृदय, मस्तिष्क, फेफड़े) होते हैं, जिनका पुनर्निर्माण सरलता से नहीं हो सकता।

2. श्रम विभाजन: इनकी कोशिकाएँ विशिष्ट कार्यों के लिए विभेदित हो चुकी होती हैं। पुनरुद्भवन के लिए आवश्यक है कि कोशिकाएँ विभेदित न हों और सभी प्रकार की कोशिकाएँ बनाने की क्षमता रखती हों, जो जटिल जीवों में नहीं होता।

3. कोशिकाओं का स्थान: पुनरुद्भवन के लिए विशेष प्रकार की अविभेदित कोशिकाओं (जैसे स्टेम सेल) की आवश्यकता होती है, जो शरीर के विशिष्ट स्थानों पर ही पाई जाती हैं। पूरे जीव का एक छोटा सा भाग पूरा नया जीव नहीं बना सकता।

प्रश्न 4.

कुछ पौधों को उगाने के लिए कायिक प्रवर्धन का उपयोग क्यों किया जाता है?

उत्तर:

कायिक प्रवर्धन का उपयोग निम्नलिखित कारणों से किया जाता है:

1. बीजरहित पौधे: केला, अनानास, अंगूर की कुछ किस्में आदि पौधे या तो बीज नहीं बनाते या उनके बीज अनुपयोगी होते हैं। ऐसे पौधों को केवल कायिक प्रवर्धन (जैसे रनर, कलम लगाना) द्वारा ही उगाया जा सकता है।

2. समान गुणों वाले पौधे: बीजों से उगाए गए पौधों में आनुवंशिक विविधता आ सकती है। कायिक प्रवर्धन से प्राप्त पौधे जनक पौधे के क्लोन होते हैं, यानी उनमें फलों का स्वाद, रंग, आकार आदि सभी गुण बिल्कुल वैसे ही होते हैं। यह फलों और फूलों की खेती के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

3. तेजी से वृद्धि: कायिक प्रवर्धन से प्राप्त पौधे बीज से उगने वाले पौधों की तुलना में जल्दी बड़े होकर फल देने लगते हैं।

प्रश्न 5.

डी०एन०ए० की प्रतिकृति बनाना जनन के लिए आवश्यक क्यों है?

उत्तर:

डी०एन०ए० आनुवंशिक सूचनाओं का भंडार है, जो जीव के सभी लक्षणों को नियंत्रित करता है। जनन के दौरान, यह आवश्यक है कि संतति कोशिकाओं या जीवों को भी वही आनुवंशिक सूचनाएँ मिलें। इसके लिए जनक कोशिका का डी०एन०ए० स्वयं की एक सटीक प्रतिकृति बनाता है। कोशिका विभाजन के समय ये दोनों प्रतिकृतियाँ अलग-अलग हो जाती हैं और दो नई कोशिकाओं में चली जाती हैं। इस प्रक्रिया के बिना, संतति में आनुवंशिक सामग्री का स्थानांतरण नहीं हो पाएगा और जनन संभव नहीं होगा।

प्रश्न 1.

परागण क्रिया निषेचन से किस प्रकार भिन्न है?

उत्तर:

परागण और निषेचन में प्रमुख अंतर निम्नलिखित हैं:

परागण:

  • यह एक भौतिक क्रिया है जिसमें परागकण (नर युग्मक) परागकोष से निकलकर हवा, पानी, कीट या अन्य माध्यमों से उसी या दूसरे फूल के वर्तिकाग्र (स्त्री भाग) तक पहुँचते हैं।
  • इसमें कोशिकाओं का संलयन नहीं होता।
  • यह निषेचन से पहले होने वाली क्रिया है।
निषेचन:
  • यह एक जैविक क्रिया है जिसमें वर्तिकाग्र तक पहुँचे परागकण से निकला नर युग्मक (शुक्राणु) अंडाशय में स्थित मादा युग्मक (अंड कोशिका) से मिलकर एक कोशिका युग्मनज बनाता है।
  • इसमें दो युग्मकों का संलयन होता है।
  • यह परागण के बाद होने वाली क्रिया है।

प्रश्न 2.

शुक्राशय एवं प्रोस्टेट ग्रंथि की क्या भूमिका है?

उत्तर:

नर जनन तंत्र में शुक्राशय और प्रोस्टेट ग्रंथियाँ महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं:

1. शुक्र द्रव का निर्माण: ये ग्रंथियाँ एक चिपचिपा, क्षारीय द्रव स्रावित करती हैं जो शुक्राणुओं के साथ मिलकर वीर्य (सीमेन) बनाता है।

2. शुक्राणुओं का पोषण व सुरक्षा: यह द्रव शुक्राणुओं को ऊर्जा (फ्रुक्टोज शर्करा के रूप में) प्रदान करता है, जिससे उनकी गतिशीलता बनी रहती है। साथ ही, यह द्रव महिला जनन मार्ग की अम्लीय प्रकृति को निष्प्रभावी करके शुक्राणुओं की रक्षा करता है।

3. स्थानांतरण में सहायक: यह द्रव शुक्राणुओं को एक तरल माध्यम प्रदान करता है, जिससे वे आसानी से गति कर सकें और स्थानांतरित हो सकें।

प्रश्न 3,

यौवनारंभ के समय लड़कियों में कौन से परिवर्तन दिखाई देते हैं?

उत्तर:

यौवनारंभ (किशोरावस्था की शुरुआत) के समय लड़कियों में निम्नलिखित शारीरिक और मनोवैज्ञानिक परिवर्तन दिखाई देते हैं:

1. द्वितीयक लैंगिक लक्षणों का विकास: स्तनों का आकार बढ़ने लगता है और स्तनाग्र (निपल्स) के आसपास की त्वचा का रंग गहरा हो जाता है।

2. रजोधर्म (मासिक धर्म) का प्रारंभ: अंडाशय परिपक्व होने लगते हैं और मासिक धर्म चक्र शुरू हो जाता है।

3. शारीरिक आकार में परिवर्तन: कूल्हों (श्रोणि) का विस्तार होता है, जिससे शरीर का आकार स्त्रीलिंगी हो जाता है। शरीर पर वसा का वितरण बदल जाता है।

4. त्वचा और बालों में परिवर्तन: त्वचा तैलीय हो सकती है, जिससे चेहरे पर मुहांसे निकल सकते हैं। बगल और जननांग क्षेत्र में बाल आने लगते हैं।

5. आवाज में परिवर्तन: आवाज पतली और मधुर हो जाती है (लड़कों की तरह भारी नहीं होती)।

6. भावनात्मक परिवर्तन: मनोदशा में उतार-चढ़ाव, नए विचार और भावनाएँ आना आम बात है।

प्रश्न 4.

माँ के शरीर में गर्भस्थ भ्रण को पोषण किस प्रकार प्राप्त होता है?

उत्तर:

गर्भ में पल रहे भ्रूण को पोषण माँ के रक्त से एक विशेष अंग प्लेसेंटा (गर्भनाल) के माध्यम से मिलता है। प्लेसेंटा एक तश्तरीनुमा संरचना है जो गर्भाशय की भित्ति में स्थित होती है।

कार्य प्रणाली:
1. प्लेसेंटा में माँ के रक्त वाहिकाओं और भ्रूण की रक्त वाहिकाओं की बारीक उंगलीनुमा संरचनाएँ (विलाई) आपस में घनिष्ठ संपर्क में होती हैं, लेकिन सीधे जुड़ी नहीं होतीं।
2. इस संपर्क सतह के माध्यम से परासरण और विसरण द्वारा माँ के रक्त से भ्रूण के रक्त में ऑक्सीजन और पचे हुए पोषक तत्व (जैसे ग्लूकोज, अमीनो अम्ल) प्रवेश करते हैं।
3. साथ ही, भ्रूण द्वारा उत्पन्न कार्बन डाइऑक्साइड और अन्य अपशिष्ट पदार्थ वापस माँ के रक्त में स्थानांतरित हो जाते हैं, जिन्हें माँ का शरीर बाहर निकाल देता है।
इस प्रकार, प्लेसेंटा भ्रूण के लिए पोषण, श्वसन और उत्सर्जन का कार्य करता है।

प्रश्न 5.

यदि कोई महिला कॉपर-टी का प्रयोग कर रही है तो क्या यह उसकी यौन-संचरित रोगों से रक्षा करेगा?

उत्तर:

नहीं, कॉपर-टी (इंट्रायूटरिन डिवाइस) यौन-संचरित रोगों (STDs) से बचाव नहीं करती है। कॉपर-टी एक गर्भनिरोधक उपाय है जिसका मुख्य कार्य शुक्राणु को अंडे को निषेचित करने से रोकना और निषेचित अंडे के गर्भाशय में प्रत्यारोपण (इम्प्लांटेशन) को रोकना है। यह एक यांत्रिक अवरोध नहीं बनाती, इसलिए यह संक्रमण फैलाने वाले जीवों (बैक्टीरिया, वायरस) को एक साथी से दूसरे साथी तक जाने से नहीं रोक सकती। यौन-संचरित रोगों (जैसे एड्स, सिफलिस, गोनोरिया) से बचाव के लिए कंडोम जैसे अवरोधक उपायों का प्रयोग करना चाहिए।

प्रश्न 1.

अलैंगिक जनन मुकुलन द्वारा होता है - (9) अमीबा में
(७) यीस्ट में
(८) प्लैज्मोडियम में
(५) लेस्मानिया में

उत्तर:

(७) यीस्ट में
व्याख्या: मुकुलन अलैंगिक जनन की वह विधि है जिसमें जनक जीव के शरीर पर एक छोटी सी कली (बड) के रूप में उभार निकलता है, जो धीरे-धीरे बढ़कर एक नया जीव बन जाता है और अलग हो सकता है या जुड़ा रह सकता है। यीस्ट नामक कवक (फंजाई) इसी विधि से प्रजनन करता है। अमीबा द्विखंडन से, प्लैज्मोडियम बहुखंडन से और लेस्मानिया द्विखंडन से प्रजनन करते हैं।

बिहार बोर्ड कक्षा 10 विज्ञान

अध्याय 8: जीव जनन कैसे करते हैं

प्रश्न 1. अलैंगिक जनन मुकुलन द्वारा होता है :

(क) अमीबा
(ख) यीस्ट
(ग) प्लाज्मोडियम
(घ) लेस्मानिया

उत्तर: (ख) यीस्ट
व्याख्या: मुकुलन अलैंगिक जनन की एक विधि है जिसमें जीव के शरीर पर एक छोटी सी कली या उभार (बड) बनता है। यह बड धीरे-धीरे बढ़कर एक नया जीव बन जाता है और फिर मूल जीव से अलग हो सकता है या जुड़ा रह सकता है। यीस्ट नामक कवक (फंजाई) इसी विधि से जनन करता है। अमीबा द्विखंडन से, प्लाज्मोडियम बहुखंडन से और लेस्मानिया द्विखंडन द्वारा जनन करते हैं।

प्रश्न 2. निम्न में कौन मानव में मादा जनन तंत्र का भाग नहीं है?

(क) अंडाशय
(ख) शुक्राणु
(ग) गर्भाशय
(घ) डिंबवाहिनी नलिका

उत्तर: (ख) शुक्राणु
व्याख्या: शुक्राणु नर युग्मक (गैमीट) होते हैं और ये मानव के नर जनन तंत्र (वृषण) में बनते हैं। मादा जनन तंत्र के मुख्य भाग अंडाशय (जहाँ अंडाणु बनते हैं), डिंबवाहिनी नलिका (फैलोपियन ट्यूब, जो अंडाणु को अंडाशय से गर्भाशय तक ले जाती है) और गर्भाशय (जहाँ भ्रूण का विकास होता है) होते हैं। इसलिए, शुक्राणु मादा जनन तंत्र का भाग नहीं है।

प्रश्न 3. परागकोश में होते हैं :

(क) अंडप
(ख) परागकण
(ग) बीजांड
(घ) वर्तिकाग्र

उत्तर: (ख) परागकण
व्याख्या: परागकोश पुंकेसर का वह भाग होता है जिसमें परागकणों का निर्माण होता है। परागकण नर युग्मकधारी संरचनाएँ हैं। अंडप, बीजांड और वर्तिकाग्र स्त्रीकेसर के भाग हैं। अंडप अंडाशय को सहारा देता है, बीजांड अंडाशय के अंदर स्थित होते हैं जहाँ से अंडाणु बनते हैं, और वर्तिकाग्र वह स्थान है जहाँ परागकण गिरते हैं।

प्रश्न 4. मानव में निषेचन की क्रिया कहाँ होती है?

उत्तर: मानव में निषेचन की क्रिया मादा के डिंबवाहिनी नलिका (फैलोपियन ट्यूब) में होती है।
व्याख्या: निषेचन वह प्रक्रिया है जिसमें नर युग्मक (शुक्राणु) और मादा युग्मक (अंडाणु) का संलयन होता है और युग्मनज (ज़ाइगोट) बनता है। अंडाशय से मुक्त हुआ अंडाणु डिंबवाहिनी नलिका में प्रवेश करता है। संभोग के दौरान, योनि में पहुँचे शुक्राणु गर्भाशय से होते हुए डिंबवाहिनी नलिका तक पहुँचते हैं। यहीं पर एक शुक्राणु अंडाणु से मिलकर निषेचन करता है।

प्रश्न 5. बाह्य निषेचन क्या है? दो उदाहरण दें।

उत्तर: बाह्य निषेचन वह प्रक्रिया है जिसमें नर और मादा युग्मकों (शुक्राणु और अंडाणु) का संलयन मादा जीव के शरीर के बाहर होता है। यह प्रक्रिया आमतौर पर जलीय वातावरण में होती है।
उदाहरण:
1. मछली: मादा मछली पानी में अंडे (अंडाणु) देती है और नर मछली उन पर अपने शुक्राणु छोड़ता है। निषेचन पानी में ही होता है।
2. मेंढक: मादा मेंढक पानी में अंडे देती है और नर मेंढक उन पर शुक्राणु छोड़ता है, जिससे बाह्य निषेचन होता है।

प्रश्न 6. यौन प्रजनन एवं अयौनिक प्रजनन में क्या अंतर है?

उत्तर: यौन और अलैंगिक जनन में अंतर निम्नलिखित हैं:

अयौनिक (अलैंगिक) जनन यौन (लैंगिक) जनन
इसमें केवल एक ही जनक (माता-पिता) शामिल होता है। इसमें दो जनक (नर और मादा) शामिल होते हैं।
युग्मकों (गैमीट्स) का निर्माण नहीं होता। नर (शुक्राणु) और मादा (अंडाणु) युग्मक बनते हैं और उनका संलयन (निषेचन) होता है।
संतति (बच्चे) आनुवंशिक रूप से जनक के समान या क्लोन होते हैं। विविधता नहीं आती। संतति में आनुवंशिक विविधता पाई जाती है क्योंकि उन्हें दोनों जनकों के गुण मिलते हैं।
यह तेजी से होता है और कम ऊर्जा खर्च करता है। यह प्रक्रिया धीमी होती है और अधिक ऊर्जा की खपत होती है।
उदाहरण: अमीबा का द्विखंडन, यीस्ट का मुकुलन, आलू के कंद से नया पौधा। उदाहरण: मनुष्य, बिल्ली, कुत्ता, अधिकांश पौधे (फूल वाले)।

प्रश्न 7. गर्भनिरोधक की विधियाँ कौन-कौन सी हैं?

उत्तर: गर्भनिरोधक की विधियाँ वे तरीके हैं जिनका उपयोग गर्भधारण को रोकने या नियोजित करने के लिए किया जाता है। इन्हें मुख्य रूप से तीन श्रेणियों में बाँटा जा सकता है:

  1. अवरोधक विधियाँ (Barrier Methods): ये नर और मादा युग्मकों के मिलन को शारीरिक रूप से रोकती हैं।
    • कंडोम (निरोध): नर और मादा दोनों के लिए अलग-अलग कंडोम उपलब्ध हैं। ये यौन संचारित रोगों से भी बचाते हैं।
    • डायाफ्राम और गर्भाशय ग्रीवा टोपी: ये मादा द्वारा उपयोग की जाने वाली अवरोधक संरचनाएँ हैं।
  2. हार्मोनल विधियाँ (Hormonal Methods): ये हार्मोन के माध्यम से अंडोत्सर्ग (ओवुलेशन) को रोकती हैं।
    • गर्भनिरोधक गोलियाँ: इनमें एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन होते हैं जो अंडाणु के निर्माण को रोकते हैं।
    • इंजेक्शन और इम्प्लांट: ये लंबे समय तक काम करने वाले हार्मोन जारी करते हैं।
    • आपातकालीन गोलियाँ: असुरक्षित संभोग के बाद गर्भधारण रोकने के लिए।
  3. शल्य चिकित्सा विधियाँ (Surgical Methods): ये स्थायी गर्भनिरोधक विधियाँ हैं।
    • नसबंदी (पुरुष): वास डिफेरेंस (शुक्रवाहिनी) को बाँध दिया जाता है, जिससे वीर्य में शुक्राणु नहीं आते।
    • ट्यूबेक्टॉमी (महिला): डिंबवाहिनी नलिकाओं को बाँध दिया जाता है, जिससे अंडाणु गर्भाशय तक नहीं पहुँच पाते।
  4. अन्य विधियाँ: अंतर्गर्भाशयी उपकरण (आईयूडी), प्राकृतिक विधियाँ (मासिक चक्र का ध्यान रखना), शुक्राणुनाशक रसायनों का उपयोग आदि।

प्रश्न 8. एक-अंडाणुज जुड़वाँ तथा द्वि-अंडाणुज जुड़वाँ में क्या अंतर है?

उत्तर: एक-अंडाणुज और द्वि-अंडाणुज जुड़वाँ में निम्नलिखित अंतर हैं:

एक-अंडाणुज (मोनोजाइगोटिक) जुड़वाँ द्वि-अंडाणुज (डाइजाइगोटिक) जुड़वाँ
ये एक ही निषेचित अंडाणु (युग्मनज) से बनते हैं जो विकास के प्रारंभिक चरण में दो अलग-अलग भ्रूणों में विभाजित हो जाता है। ये दो अलग-अलग अंडाणुओं का दो अलग-अलग शुक्राणुओं द्वारा निषेचन होने से बनते हैं।
इनका आनुवंशिक संरचना (DNA) समान होता है, इसलिए ये हमेशा एक ही लिंग के होते हैं (दोनों लड़के या दोनों लड़कियाँ)। इनका आनुवंशिक संरचना समान नहीं होता, बल्कि सामान्य भाई-बहनों जैसा होता है। इनका लिंग समान या अलग हो सकता है।
इनकी रक्त समूह, रंग, चेहरे की बनावट आदि लगभग एक जैसी होती है। इनमें शारीरिक समानता सामान्य भाई-बहनों जितनी ही हो सकती है।
इन्हें आइडेंटिकल ट्विन्स भी कहते हैं। इन्हें फ्रेटरनल ट्विन्स भी कहते हैं।

प्रश्न 9. पुष्प की अनुदैर्ध्य काट का नामांकित चित्र बनाइए।

उत्तर: पुष्प की अनुदैर्ध्य काट (लॉन्गिट्यूडिनल सेक्शन) का नामांकित चित्र:

[छात्रों के लिए निर्देश: नीचे दिए गए विवरण के आधार पर अपनी नोटबुक में साफ-सुथरा चित्र बनाएँ।]

चित्र में दर्शाए जाने वाले मुख्य भाग:

  1. वर्तिकाग्र (Stigma): स्त्रीकेसर का सबसे ऊपरी चिपचिपा भाग जो परागकणों को ग्रहण करता है।
  2. वर्तिका (Style): वह लंबा, पतला भाग जो वर्तिकाग्र को अंडाशय से जोड़ता है।
  3. अंडाशय (Ovary): स्त्रीकेसर का निचला फूला हुआ भाग जिसमें बीजांड (Ovules) होते हैं।
  4. परागकोश (Anther): पुंकेसर का वह भाग जहाँ परागकण (Pollen grains) बनते हैं।
  5. पुंतंतु (Filament): पतला डंठल जो परागकोश को फूल से जोड़ता है।
  6. दलपुंज (Corolla): सभी पंखुड़ियों (Petals) का समूह, जो रंगीन होती हैं और कीटों को आकर्षित करती हैं।
  7. बाह्यदलपुंज (Calyx): सभी हरी पुष्पकोश (Sepals) का समूह, जो कली अवस्था में फूल की रक्षा करता है।
  8. वृंत (Pedicle): फूल का डंठल जो इसे तने से जोड़ता है।
  9. बीजांड (Ovule): अंडाशय के अंदर की संरचना जहाँ अंडाणु बनते हैं और बाद में बीज में विकसित होते हैं।

(ध्यान दें: चित्र में इन सभी भागों को स्पष्ट रेखाओं से दिखाकर उनके नाम एक रेखा खींचकर लिखने चाहिए।)

प्रश्न 10. शुक्राणु तथा अंडाणु में क्या अंतर है?

उत्तर: शुक्राणु (नर युग्मक) और अंडाणु (मादा युग्मक) में निम्नलिखित अंतर हैं:

शुक्राणु (Sperm) अंडाणु (Ovum / Egg)
यह नर युग्मक है जो नर जनन अंग वृषण (Testes) में बनता है। यह मादा युग्मक है जो मादा जनन अंग अंडाशय (Ovary) में बनता है।
यह आकार में बहुत छोटा और सूक्ष्मदर्शी से देखा जा सकता है। यह आकार में बड़ा होता है (मानव में यह नग्न आँख से बिंदु के समान दिख सकता है)।
इसकी संरचना तीन भागों – शीर्ष, मध्य भाग और पूँछ से मिलकर बनी होती है। इसकी संरचना गोलाकार या अंडाकार होती है, जिसके चारों ओर सुरक्षात्मक परतें होती हैं।
यह गतिशील होता है। इसकी पूँछ की गति के कारण यह तैरकर अंडाणु तक पहुँच सकता है। यह अगतिशील होता है। यह अपने स्थान से हिल नहीं सकता।
इसमें कोशिका द्रव्य (साइटोप्लाज्म) बहुत कम मात्रा में होता है। इसमें कोशिका द्रव्य प्रचुर मात्रा में होता है, जिसमें भ्रूण के प्रारंभिक विकास के लिए पोषक पदार्थ संचित रहते हैं।
इसका निर्माण यौवनारंभ के बाद लगातार होता रहता है। मादा में प्रत्येक मासिक चक्र में सामान्यतः एक अंडाणु परिपक्व होता है और मुक्त होता है।

1. अलैंगिक जनन मुकुलन द्वारा होता है |

(a) अमीबा
(b) यीस्ट
(c) प्लाज्मोडियम
(d) लेस्मानिया

उत्तर: (b) यीस्ट
अमीबा में अलैंगिक जनन विखंडन द्वारा होता है। प्लाज्मोडियम और लेशमानिया में भी विखंडन ही होता है। मुकुलन द्वारा अलैंगिक जनन यीस्ट (खमीर) नामक कवक में होता है, जिसमें मातृ कोशिका की सतह पर एक छोटी कली (बड) बनती है जो बढ़कर अलग हो जाती है और नया जीव बनाती है।

2. निम्न में से कौन मानव में मादा जनन तंत्र का भाग नहीं है?

(a) अंडाशय
(b) गर्भाशय
(c) शुक्रवाहिका
(d) डिंबवाहिनी

उत्तर: (c) शुक्रवाहिका
अंडाशय, गर्भाशय और डिंबवाहिनी (अंडवाहिनी) सभी मानव मादा जनन तंत्र के अंग हैं। शुक्रवाहिका (वास डिफेरेंस) नर जनन तंत्र का एक महत्वपूर्ण भाग है जो शुक्राणुओं को वृषण से बाहर ले जाती है।

3. परागकोश में होते हैं |

(a) अंडप
(b) परागकण
(c) अंडाशय
(d) बीजांड

उत्तर: (b) परागकण
परागकोश पुंकेसर का वह भाग होता है जिसमें परागकणों का निर्माण होता है। अंडप, अंडाशय और बीजांड सभी पुष्प के स्त्रीकेसर के भाग हैं।

4. मानव में निषेचन की क्रिया कहाँ होती है?

(a) वृषण में
(b) अंडाशय में
(c) डिंबवाहिनी में
(d) गर्भाशय में

उत्तर: (c) डिंबवाहिनी में
मानव में निषेचन (शुक्राणु द्वारा अंडाणु का निषेचन) डिंबवाहिनी (फैलोपियन ट्यूब) के ऊपरी भाग में होता है। निषेचित अंडाणु (युग्मनज) तब गर्भाशय की ओर बढ़ता है और वहाँ प्रत्यारोपित होकर विकसित होता है।

5. लैंगिक जनन में उत्पन्न संतति आनुवंशिक रूप से ......... होती है |

(a) जनक से भिन्न
(b) जनक के समान
(c) (a) और (b) दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं

उत्तर: (c) (a) और (b) दोनों
लैंगिक जनन में दो जनकों के युग्मकों के संयोजन से नया जीव बनता है। इससे आनुवंशिक विविधता उत्पन्न होती है, इसलिए संतति जनकों से आनुवंशिक रूप से भिन्न होती है। हालाँकि, वह जनकों के आनुवंशिक लक्षणों को भी साझा करती है, इसलिए उनके समान भी होती है। यह विकल्प सबसे संपूर्ण उत्तर है।

6. अलैंगिक जनन की अपेक्षा लैंगिक जनन के क्या लाभ हैं?

उत्तर: लैंगिक जनन के प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं:
1. आनुवंशिक विविधता: दो अलग-अलग जनकों के जीन्स के मिलने से संतति में नए आनुवंशिक संयोग बनते हैं। यह विविधता जीवों को बदलते पर्यावरण के अनुकूल ढलने और नई चुनौतियों (जैसे रोगों) से लड़ने में मदद करती है।
2. विकास में सहायक: आनुवंशिक विविधता प्राकृतिक वरण (नेचुरल सेलेक्शन) के लिए आधार प्रदान करती है, जिससे प्रजातियों का दीर्घकालिक विकास और उन्नति संभव हो पाती है।
3. हानिकारक उत्परिवर्तनों का निवारण: लैंगिक जनन की प्रक्रिया में पुनर्संयोजन होता है, जिससे हानिकारक जीन अक्सर दब जाते हैं या उनका प्रभाव कम हो जाता है।

7. मानव में नर जनन तंत्र के विभिन्न अंगों के नाम संक्षेप में लिखिए |

उत्तर: मानव नर जनन तंत्र के प्रमुख अंग निम्नलिखित हैं:
1. वृषण (Testes): यह जोड़ीदार अंग हैं जो वृषण कोष (Scrotum) में स्थित होते हैं। इनमें शुक्राणुओं का निर्माण होता है और टेस्टोस्टेरॉन हार्मोन स्रावित होता है।
2. शुक्रवाहिनी (Vas Deferens): यह नलिका वृषण से शुक्राणुओं को ले जाकर मूत्रमार्ग में खुलती है।
3. शुक्राशय (Seminal Vesicles) और प्रोस्टेट ग्रंथि (Prostate Gland): ये ग्रंथियाँ एक तरल स्रावित करती हैं जो शुक्राणुओं को पोषण देता है और उनकी गतिशीलता बढ़ाता है। यह तरल शुक्राणु के साथ मिलकर वीर्य (Semen) बनाता है।
4. मूत्रमार्ग (Urethra): यह एक नलिका है जो मूत्र और वीर्य दोनों को शरीर से बाहर निकालने का काम करती है।
5. शिश्न (Penis): यह बाह्य अंग है जो मूत्रमार्ग को घेरे रहता है और संभोग के दौरान वीर्य को स्त्री की योनि में स्थानांतरित करता है।

8. गर्भनिरोधक की विभिन्न विधियाँ कौन-कौन सी हैं?

उत्तर: गर्भनिरोधक की विधियों को मुख्यतः दो श्रेणियों में बाँटा जा सकता है:

(A) प्राकृतिक या अस्थायी विधियाँ
1. संयम विधि: संभोग से पूर्ण रूप से दूर रहना।
2. लय विधि (Rhythm Method): मासिक धर्म चक्र के उन दिनों में संभोग से बचना जब गर्भधारण की संभावना सबसे अधिक होती है (आमतौर पर ऋतुस्राव के 10वें से 17वें दिन तक)।
3. सहवास-निरोध (Withdrawal Method): संभोग के दौरान स्खलन से पहले शिश्न को योनि से बाहर निकाल लेना।
(B) कृत्रिम या स्थायी/अर्ध-स्थायी विधियाँ
1. यांत्रिक अवरोधक: कंडोम (नर और मादा दोनों प्रकार), डायाफ्राम, गर्भाशय ग्रीवा टोपी आदि। ये शुक्राणुओं को गर्भाशय में प्रवेश करने से रोकते हैं।
2. रासायनिक विधियाँ: गर्भनिरोधक गोलियाँ (हार्मोनल पिल्स), इंजेक्शन, इम्प्लांट, योनि में प्रयुक्त होने वाले शुक्राणुनाशक (क्रीम, जेली, फोम) आदि।
3. अंतर्गर्भाशयी युक्तियाँ (IUDs): कॉपर-टी आदि, जिन्हें गर्भाशय में डाला जाता है।
4. स्थायी शल्य चिकित्सा विधियाँ: नर में नसबंदी (वेसेक्टोमी) और मादा में ट्यूबेक्टोमी। इनमें शुक्रवाहिनी या डिंबवाहिनी को बाँध दिया जाता है या काट दिया जाता है।

9. मादा जनन तंत्र का सचित्र वर्णन कीजिए |

उत्तर: मानव मादा जनन तंत्र मुख्यतः श्रोणि क्षेत्र में स्थित होता है और इसके प्रमुख अंग निम्नलिखित हैं:

[यहाँ एक स्पष्ट रेखाचित्र की कल्पना करें]
1. अंडाशय (Ovaries): यह जोड़ीदार, बादाम के आकार की ग्रंथियाँ हैं जो गर्भाशय के दोनों ओर स्थित होती हैं। इनका कार्य अंडाणु (डिंब) उत्पन्न करना और स्त्री हार्मोन (एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन) स्रावित करना है।
2. डिंबवाहिनी (Fallopian Tubes or Oviducts): ये दो पतली, लंबी नलिकाएँ हैं जो अंडाशय को गर्भाशय से जोड़ती हैं। इनके अंदर ही निषेचन (अंडाणु और शुक्राणु का मिलन) होता है। इनके सिरे पर उंगली जैसे प्रवर्ध होते हैं जो अंडाशय से मुक्त हुए अंडाणु को ग्रहण करते हैं।
3. गर्भाशय (Uterus): यह एक मोटी दीवारों वाली, नाशपाती के आकार की पेशीय थैली है। इसका मुख्य कार्य निषेचित अंडाणु (भ्रूण) को गर्भावस्था के दौरान पोषण देना और उसके विकास के लिए स्थान प्रदान करना है।
4. गर्भाशय ग्रीवा (Cervix): यह गर्भाशय का निचला संकरा हिस्सा है जो योनि में खुलता है। यह गर्भावस्था के दौरान भ्रूण को सुरक्षित रखने में मदद करती है।
5. योनि (Vagina): यह एक लचीली, नलिकाकार संरचना है जो गर्भाशय ग्रीवा को बाह्य जननांगों से जोड़ती है। यह संभोग के लिए मार्ग, मासिक धर्म रक्त के बहाव का मार्ग और प्रसव के समय शिशु के जन्म का मार्ग है।
6. बाह्य जननांग (Vulva): इसमें लेबिया मेजा और माइनर (होठे), भगशेफ (क्लिटोरिस) और योनि द्वार शामिल हैं।

10. निषेचन की परिभाषा लिखिए | निषेचन की क्रिया स्पष्ट कीजिए |

उत्तर:
परिभाषा: निषेचन वह जैविक प्रक्रिया है जिसमें नर युग्मक (शुक्राणु) और मादा युग्मक (अंडाणु) आपस में संयुक्त होकर एक एकल कोशिका, युग्मनज (जाइगोट) का निर्माण करते हैं। यह लैंगिक जनन का एक महत्वपूर्ण चरण है।

निषेचन की क्रिया (मानव में):
1. युग्मकों का निर्माण: नर में वृषण में शुक्राणु और मादा में अंडाशय में अंडाणु बनते हैं।
2. युग्मकों का स्थानांतरण: संभोग के दौरान, नर का वीर्य योनि में स्थानांतरित होता है, जिसमें लाखों शुक्राणु होते हैं। ये शुक्राणु योनि से होते हुए गर्भाशय में और फिर डिंबवाहिनी में तैरते हुए जाते हैं।
3. मिलन: इसी समय, अंडाशय से एक परिपक्व अंडाणु मुक्त होता है जिसे डिंबवाहिनी के प्रवर्ध ग्रहण कर लेते हैं।
4. निषेचन: डिंबवाहिनी में, अंडाणु के चारों ओर पहुँचने वाले शुक्राणु उसके बाहरी आवरण को तोड़ने का प्रयास करते हैं। केवल एक शुक्राणु अंडाणु की कोशिका झिल्ली में प्रवेश कर पाता है।
5. युग्मनज का निर्माण: शुक्राणु के प्रवेश करते ही अंडाणु की बाह्य सतह पर एक परिवर्तन होता है जो अन्य शुक्राणुओं के प्रवेश को रोक देता है। शुक्राणु और अंडाणु के केंद्रक आपस में मिल जाते हैं, जिससे एक द्विगुणित (46 गुणसूत्रों वाली) कोशिका, युग्मनज, बन जाती है। यही नए जीव की पहली कोशिका होती है।

11. पुष्प के विभिन्न भागों के नाम चित्र सहित लिखिए |

उत्तर: एक पूर्ण पुष्प के चार मुख्य भाग होते हैं:

[यहाँ एक स्पष्ट पुष्प का रेखाचित्र दिखाई देता है]
1. बाह्यदलपुंज (Calyx): यह पुष्प का सबसे बाहरी हरा भाग होता है, जिसके अलग-अलग भागों को बाह्यदल (Sepals) कहते हैं। यह कली अवस्था में पुष्प की रक्षा करता है।
2. दलपुंज (Corolla): यह बाह्यदलपुंज के अंदर स्थित रंगीन और सुगंधित भाग है, जिसके अलग-अलग भागों को दल (Petals) कहते हैं। यह कीटों को आकर्षित कर परागण में सहायता करता है।
3. पुंकेसर (Androecium): यह पुष्प का नर जनन भाग है। प्रत्येक पुंकेसर के दो भाग होते हैं:
- परागकोश (Anther): यह सिरे पर स्थित पीले रंग की थैलीनुमा संरचना है जिसमें परागकण बनते हैं।
- तंतु (Filament): यह लंबा, धागे जैसा भाग है जो परागकोश को आधार प्रदान करता है।
4. स्त्रीकेसर (Gynoecium): यह पुष्प का मादा जनन भाग है, जो पुष्प के केंद्र में स्थित होता है। इसके तीन मुख्य भाग हैं:
- वर्तिकाग्र (Stigma): यह चिपचिपा सिरा होता है जो परागकणों को ग्रहण करता है।
- वर्तिका (Style): यह एक लंबी नलिका है जो वर्तिकाग्र को अंडाशय से जोड़ती है।
- अंडाशय (Ovary): यह स्त्रीकेसर का फूला हुआ निचला भाग है जिसमें बीजांड (Ovules) होते हैं। निषेचन के बाद अंडाशय फल और बीजांड बीज में बदल जाते हैं।

बिहार बोर्ड कक्षा 10 विज्ञान

अध्याय 8: जीव जनन कैसे करते हैं

प्रश्न 1. अलैंगिक जनन मुकुलन द्वारा होता है :

(A) अमीबा
(B) यीस्ट
(C) प्लाज्मोडियम
(D) लेस्मानिया

उत्तर: (B) यीस्ट
व्याख्या: यीस्ट एक एककोशिकीय जीव है जो अलैंगिक जनन की मुकुलन विधि द्वारा जनन करता है। इस प्रक्रिया में यीस्ट की कोशिका की सतह पर एक छोटा सा उभार (कली या मुकुल) बनता है। यह उभार धीरे-धीरे बढ़ता है और अंत में मूल कोशिका से अलग होकर एक नया स्वतंत्र जीव बन जाता है। अमीबा द्विखंडन द्वारा, जबकि प्लाज्मोडियम और लेस्मानिया बहुखंडन द्वारा जनन करते हैं।

प्रश्न 2. निम्न में से कौन मानव में मादा जनन तंत्र का भाग नहीं है?

(A) अंडाशय
(B) गर्भाशय
(C) शुक्रवाहिका
(D) डिंबवाहिनी

उत्तर: (C) शुक्रवाहिका
व्याख्या: शुक्रवाहिका (वास डिफेरेंस) नर जनन तंत्र का एक महत्वपूर्ण भाग है, जो शुक्राणुओं को अंडकोष से मूत्रमार्ग तक ले जाती है। मानव मादा जनन तंत्र के मुख्य भाग अंडाशय, डिंबवाहिनी (फैलोपियन ट्यूब), गर्भाशय और योनि हैं। अंडाशय अंडे बनाते हैं, डिंबवाहिनी अंडे को गर्भाशय तक पहुँचाती है और गर्भाशय भ्रूण के विकास का स्थान है।

प्रश्न 3. परागकोश में होते हैं :

(A) अंडप
(B) बीजांड
(C) परागकण
(D) वर्तिकाग्र

उत्तर: (C) परागकण
व्याख्या: परागकोश पुंकेसर का वह भाग है जिसमें परागकणों का निर्माण होता है। परागकण नर युग्मक धारण करते हैं और परागण की प्रक्रिया द्वारा वर्तिकाग्र तक पहुँचते हैं। अंडप और बीजांड पुष्प के स्त्रीकेसर के भाग हैं, जबकि वर्तिकाग्र स्त्रीकेसर का वह शीर्ष भाग है जो परागकणों को ग्रहण करता है।

प्रश्न 4. लैंगिक जनन में उत्पन्न संतति आनुवंशिक रूप से :

(A) एक-दूसरे के समान होती है
(B) एक-दूसरे से भिन्न होती है
(C) माता-पिता के समान होती है
(D) इनमें से कोई नहीं

उत्तर: (B) एक-दूसरे से भिन्न होती है
व्याख्या: लैंगिक जनन में दो जनक (नर और मादा) भाग लेते हैं और उनके युग्मकों (शुक्राणु और अंडाणु) के संलयन से युग्मनज बनता है। इस प्रक्रिया में जनकों के आनुवंशिक पदार्थ (DNA) का पुनर्संयोजन होता है, जिसके कारण उत्पन्न संतति में आनुवंशिक विविधता आती है और वे एक-दूसरे से तथा अपने जनकों से भिन्न होती हैं। यह विविधता जीवों को बदलते पर्यावरण के अनुकूल ढलने में मदद करती है।

प्रश्न 5. आई. वी. एफ. (IVF) तकनीक में निषेचन होता है :

(A) शरीर के बाहर
(B) शरीर के भीतर
(C) डिंबवाहिनी में
(D) गर्भाशय में

उत्तर: (A) शरीर के बाहर
व्याख्या: आई. वी. एफ. (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) एक सहायक प्रजनन तकनीक है। इसमें मादा के अंडाशय से अंडाणु और नर से शुक्राणु लेकर प्रयोगशाला में एक विशेष पात्र (पेट्री डिश) में रखा जाता है, जहाँ निषेचन की प्रक्रिया शरीर के बाहर होती है। निषेचन के बाद बने भ्रूण को कुछ दिनों तक विकसित करने के बाद सीधे मादा के गर्भाशय में स्थानांतरित कर दिया जाता है।

प्रश्न 6. बाह्य निषेचन होता है :

(A) मनुष्य में
(B) कुत्ते में
(C) मेंढक में
(D) चिड़िया में

उत्तर: (C) मेंढक में
व्याख्या: बाह्य निषेचन वह प्रक्रिया है जिसमें नर और मादा युग्मकों का संलयन जनक के शरीर के बाहर होता है। मेंढक जैसे जलचर जंतुओं में नर और मादा पानी में ही अंडे और शुक्राणु छोड़ते हैं, और निषेचन पानी में ही होता है। इसके विपरीत, मनुष्य, कुत्ते और चिड़िया जैसे स्थलचर जंतुओं में आंतरिक निषेचन होता है, जहाँ निषेचन मादा के शरीर के भीतर होता है।

प्रश्न 7. गर्भनिरोधक गोलियां सम्बन्धित होती हैं :

(A) एस्ट्रोजन हार्मोन से
(B) टेस्टोस्टेरोन हार्मोन से
(C) इन्सुलिन हार्मोन से
(D) थायरॉक्सिन हार्मोन से

उत्तर: (A) एस्ट्रोजन हार्मोन से
व्याख्या: गर्भनिरोधक गोलियाँ मुख्यतः स्त्री हार्मोन एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन के संयोजन से बनी होती हैं। ये हार्मोन शरीर में प्राकृतिक हार्मोनल चक्र को प्रभावित करते हैं। ये गोलियाँ अंडाशय से अंडे के मुक्त होने (अण्डोत्सर्ग) को रोकती हैं, गर्भाशय ग्रीवा के बलगम को गाढ़ा करके शुक्राणुओं के प्रवेश में बाधा डालती हैं और गर्भाशय की आंतरिक परत को इस प्रकार बदल देती हैं कि निषेचित अंडे का इसमें प्रत्यारोपण नहीं हो पाता।

प्रश्न 8. अलैंगिक जनन की कोई दो विधियों के नाम लिखें।

उत्तर: अलैंगिक जनन की दो प्रमुख विधियाँ हैं:
1. द्विखंडन: यह विधि अमीबा, पैरामीशियम और लेस्मानिया जैसे एककोशिकीय जीवों में पाई जाती है। इसमें जनक कोशिका का केन्द्रक और कोशिकाद्रव्य दो बराबर भागों में बँट जाता है, जिससे दो नई संतति कोशिकाएँ बनती हैं।
2. मुकुलन: यह विधि हाइड्रा और यीस्ट जैसे जीवों में देखी जाती है। इसमें जनक के शरीर पर एक छोटी कली (मुकुल) के रूप में उभार बनता है। यह कली धीरे-धीरे विकसित होकर एक नया जीव बन जाती है और अंत में जनक से अलग हो सकती है या जुड़ी रह सकती है।

प्रश्न 9. पुष्प के किस भाग में अंडप और बीजांड होते हैं?

उत्तर: अंडप और बीजांड पुष्प के स्त्रीकेसर के भाग होते हैं।
व्याख्या: स्त्रीकेसर पुष्प का मादा जनन अंग है। इसके तीन मुख्य भाग होते हैं: वर्तिकाग्र, वर्तिका और अंडप। अंडप स्त्रीकेसर का फूला हुआ निचला भाग होता है जिसके अंदर एक या अधिक बीजांड स्थित होते हैं। प्रत्येक बीजांड के भीतर मादा युग्मक (अंडाणु) होता है। निषेचन के बाद बीजांड ही बीज में विकसित होता है और अंडप फल बन जाता है।

प्रश्न 10. गर्भनिरोधक के दो साधनों के नाम लिखें।

उत्तर: गर्भनिरोधक के दो साधन हैं:
1. यांत्रिक अवरोधक विधियाँ: इनमें नर और मादा युग्मकों के मिलने को रोकने के लिए यांत्रिक साधनों का उपयोग किया जाता है। उदाहरण: कंडोम (निरोध), जो शुक्राणुओं को योनि में प्रवेश करने से रोकता है।
2. हार्मोनल विधियाँ: इनमें स्त्री के हार्मोनल संतुलन को बदलकर अण्डोत्सर्ग को रोका जाता है। उदाहरण: गर्भनिरोधक गोलियाँ, इंजेक्शन या प्रत्यारोपण, जिनमें एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन होते हैं।

प्रश्न 11. लैंगिक जनन के क्या लाभ हैं?

उत्तर: लैंगिक जनन के प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं:
1. आनुवंशिक विविधता: दो अलग-अलग जनकों के आनुवंशिक पदार्थ के मिलने से संतति में नए आनुवंशिक संयोजन बनते हैं। इससे प्रत्येक संतति आनुवंशिक रूप से अद्वितीय होती है और अपने जनकों से भिन्न होती है।
2. विकासवादी लाभ: यह विविधता जीवों को बदलते पर्यावरण, नई बीमारियों या परजीवियों के प्रति अनुकूलन करने में मदद करती है, जिससे प्रजाति के लम्बे समय तक जीवित रहने की संभावना बढ़ जाती है।
3. दोषपूर्ण जीनों की क्षतिपूर्ति: यदि एक जनक से आने वाले जीन में कोई दोष है, तो दूसरे जनक से आने वाला सामान्य जीन उसकी क्षतिपूर्ति कर सकता है, जिससे संतति स्वस्थ रहती है।

प्रश्न 12. अलैंगिक जनन की परिभाषा दें। इसकी कोई दो विशेषताएँ लिखें।

उत्तर:
परिभाषा: वह जनन प्रक्रिया जिसमें केवल एक ही जनक भाग लेता है और बिना युग्मकों के निर्माण व संलयन के नई संतति उत्पन्न होती है, अलैंगिक जनन कहलाती है।
विशेषताएँ:
1. इसमें केवल एक जनक शामिल होता है।
2. इससे उत्पन्न संतति आनुवंशिक रूप से जनक के समान या क्लोन होती हैं, क्योंकि कोई आनुवंशिक पदार्थ का पुनर्संयोजन नहीं होता।
3. यह प्रक्रिया सामान्यतः तेज गति से होती है और बड़ी संख्या में संतति उत्पन्न कर सकती है।
4. यह विधि उन जीवों में अधिक सफल है जो स्थिर पर्यावरण में रहते हैं, क्योंकि इसमें विविधता नहीं होती।

प्रश्न 13. पुरुष प्रजनन तंत्र का नामांकित चित्र बनाएँ।

नोट: यहाँ एक सैद्धांतिक विवरण दिया जा रहा है। छात्र अपनी नोटबुक में निम्नलिखित भागों को दर्शाते हुए एक स्पष्ट चित्र बनाएँ।

पुरुष प्रजनन तंत्र के मुख्य भाग:

  1. वृषण (अंडकोष): यह जोड़ीदार अंग हैं जो शुक्राणु और टेस्टोस्टेरोन हार्मोन का निर्माण करते हैं।
  2. शुक्रवाहिका (वास डिफेरेंस): यह नलिका शुक्राणुओं को वृषण से मूत्रमार्ग तक ले जाती है।
  3. शुक्राशय और प्रोस्टेट ग्रंथि: ये ग्रंथियाँ शुक्राणुओं को पोषण और तरल माध्यम प्रदान करने वाला द्रव (वीर्य) स्रावित करती हैं।
  4. मूत्रमार्ग: यह नलिका मूत्र और वीर्य दोनों को शरीर से बाहर निकालती है।
  5. शिश्न: यह बाह्य अंग है जो मूत्रमार्ग को घेरे रहता है और संभोग में सहायक होता है।

(छात्र कृपया अपनी पाठ्यपुस्तक में दिए गए चित्र का अवलोकन करें और उसी के अनुरूप एक साफ-सुथरा नामांकित चित्र बनाएँ।)

प्रश्न 14. मादा प्रजनन तंत्र का नामांकित चित्र बनाएँ।

नोट: यहाँ एक सैद्धांतिक विवरण दिया जा रहा है। छात्र अपनी नोटबुक में निम्नलिखित भागों को दर्शाते हुए एक स्पष्ट चित्र बनाएँ।

मादा प्रजनन तंत्र के मुख्य भाग:

  1. अंडाशय: यह जोड़ीदार अंग हैं जो अंडाणु (डिंब) और स्त्री हार्मोन (एस्ट्रोजन, प्रोजेस्टेरोन) का निर्माण करते हैं।
  2. डिंबवाहिनी (फैलोपियन ट्यूब): यह नलिका अंडाशय से अंडाणु को गर्भाशय तक ले जाती है। इसमें निषेचन होता है।
  3. गर्भाशय: यह एक मांसल, नाशपाती के आकार की थैली है जहाँ निषेचित अंडे (भ्रूण) का विकास होता है।
  4. गर्भाशय ग्रीवा: गर्भाशय का निचला संकरा हिस्सा जो योनि में खुलता है।
  5. योनि: यह एक नलिका है जो गर्भाशय ग्रीवा को बाहरी वातावरण से जोड़ती है। यह मासिक धर्म के रक्त के बहाव, संभोग और शिशु के जन्म का मार्ग है।

(छात्र कृपया अपनी पाठ्यपुस्तक में दिए गए चित्र का अवलोकन करें और उसी के अनुरूप एक साफ-सुथरा नामांकित चित्र बनाएँ।)

प्रश्न 15. पादप में निषेचन की प्रक्रिया का वर्णन करें।

उत्तर: पादपों में निषेचन एक जटिल प्रक्रिया है जिसमें नर युग्मक (परागकण में स्थित) का मादा युग्मक (बीजांड में स्थित) से संलयन होता है। इसकी प्रमुख अवस्थाएँ निम्नलिखित हैं:
1. परागण: परागकोश से परागकणों का स्थानांतरण वर्तिकाग्र तक होता है। यह कीट, पवन, जल आदि के द्वारा हो सकता है।
2. परागकण का अंकुरण: वर्तिकाग्र पर पहुँचने के बाद परागकण अंकुरित होता है और एक लंबी नलिका बनाता है जिसे परागनली कहते हैं। यह नली वर्तिका से होती हुई अंडप तक बढ़ती है और अंततः बीजांड तक पहुँचती है।
3. युग्मकों का संलयन: परागनली बीजांड के भीतर प्रवेश करती है। परागकण के भीतर दो नर युग्मक होते हैं।
- पहला नर युग्मक, बीजांड में स्थित मादा युग्मक (अंडाणु) से मिलकर युग्मनज बनाता है, जो भ्रूण में विकसित होता है।
- दूसरा नर युग्मक, बीजांड के केंद्रक से मिलकर भ्रूणपोष बनाता है, जो भ्रूण के विकास के लिए भोजन का कार्य करता है।
इस दोहरे निषेचन की प्रक्रिया केवल आवृतबीजी पादपों (फूल वाले पौधों) में ही पाई जाती है। निषेचन के बाद बीजांड बीज में और अंडप फल में परिवर्तित हो जाता है।

प्रश्न 16. मानव में निषेचन की प्रक्रिया का वर्णन करें।

उत्तर: मानव में निषेचन एक आंतरिक प्रक्रिया है जो मादा के प्रजनन तंत्र में होती है।
प्रक्रिया:
1. अण्डोत्सर्ग: मादा के अंडाशय से हर महीने एक परिपक्व अंडाणु मुक्त होता है, जिसे डिंबवाहिनी (फैलोपियन ट्यूब) द्वारा ग्रहण कर लिया जाता है।
2. शुक्राणुओं का स्थानांतरण: संभोग के दौरान नर के शिश्न से लाखों शुक्राणु योनि में स्थानांतरित होते हैं। ये शुक्राणु योनि से गर्भाशय में और वहाँ से डिंबवाहिनी की ओर तैरते हुए जाते हैं।
3. युग्मकों का मिलन: केवल कुछ सौ शुक्राणु ही अंडाणु तक पहुँच पाते हैं। अंडाणु के चारों ओर एक सुरक्षात्मक परत होती है।
4. शुक्राणु का प्रवेश: शुक्राणु अपने सिर में उपस्थित एंजाइमों की सहायता से अंडाणु की बाहरी परत को तोड़ते हैं। केवल एक शुक्राणु ही अंडाणु की कोशिका झिल्ली में प्रवेश कर पाता है। जैसे ही एक शुक्राणु प्रवेश करता है, अंडाणु की झिल्ली में ऐसा परिवर्तन होता है कि कोई अन्य शुक्राणु प्रवेश नहीं कर सकता।
5. निषेचन: अंडाणु के भीतर प्रवेश करने के बाद, शुक्राणु का सिर (जिसमें नर के आनुवंशिक पदार्थ होते हैं) फूल जाता है और अंडाणु के केन्द्रक की ओर बढ़ता है। अंत में नर और मादा केन्द्रक आपस में मिल जाते हैं, जिससे युग्मनज का निर्माण होता है। यह युग्मनज ही एक नए मानव जीवन की शुरुआत है।

प्रश्न 3. प्रजनन क्या है? नामांकित चित्र की सहायता से नर अथवा मादा मानव जनन तंत्र का वर्णन कीजिए। (2012, 14)

नर जनन तंत्र का नामांकित चित्र

उत्तर: जीवधारियों द्वारा अपने जैसे नए जीवों (सन्तानों) को उत्पन्न करने की जैविक प्रक्रिया को प्रजनन कहते हैं। यह जीवों की निरंतरता बनाए रखने के लिए आवश्यक है।

नर मानव जनन तंत्र का वर्णन: नर जनन तंत्र में मुख्य रूप से वृषण, शुक्रवाहिनियाँ तथा कुछ सहायक ग्रंथियाँ होती हैं जो शुक्राणु बनाने, उनका परिवहन करने और उन्हें पोषण देने का कार्य करती हैं।

  1. वृषण (Testes): ये दो अंडाकार, गुलाबी रंग की ग्रंथियाँ होती हैं जो वृषण कोष (Scrotum) नामक थैली में स्थित होती हैं। ये शरीर के बाहर इसलिए होते हैं ताकि शुक्राणु निर्माण के लिए आवश्यक शरीर के ताप से कम तापमान बना रहे। वृषण के अंदर शुक्रजनन नलिकाएँ होती हैं जहाँ शुक्राणुओं का निर्माण होता है।
  2. अधिवृषण (Epididymis): यह प्रत्येक वृषण के ऊपर लिपटी हुई एक लंबी व कुंडलित नली होती है। यहाँ पर शुक्राणु परिपक्व होते हैं और कुछ समय के लिए संग्रहित रहते हैं।
  3. शुक्रवाहिनी (Vas Deferens): यह अधिवृषण से शुरू होकर उदर गुहा में प्रवेश करने वाली एक नली है। यह परिपक्व शुक्राणुओं को अधिवृषण से बाहर ले जाती है।
  4. शुक्राशय (Seminal Vesicles): ये मूत्राशय के पीछे स्थित दो थैलीनुमा ग्रंथियाँ हैं। ये एक चिपचिपा, क्षारीय द्रव स्रावित करती हैं जो वीर्य का मुख्य भाग बनाता है और शुक्राणुओं को ऊर्जा प्रदान करता है।
  5. प्रोस्टेट ग्रंथि (Prostate Gland): यह ग्रंथि मूत्राशय के नीचे स्थित होती है। यह एक पतला, दूधिया द्रव स्रावित करती है जो वीर्य को तरल बनाता है और शुक्राणुओं की सुरक्षा करता है।
  6. शिश्न (Penis): यह नर का बाह्य जनन अंग है जो संभोग के दौरान स्त्री की योनि में वीर्य स्थानांतरित करने का कार्य करता है। इसमें रक्त कोशिकाओं का जाल होता है जो उत्तेजना के समय रक्त से भरकर इसे कठोर बनाता है।

इन सभी अंगों से स्राव मिलकर वीर्य बनाते हैं, जो शुक्राणुओं को पोषण और सुरक्षा प्रदान करने वाला एक तरल माध्यम है।

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