Bihar Board Class 10th Science (विज्ञान) Chapter 12 विद्युत) Solutions

Here we have provided Solution for Chapter 12 विद्युत) of Science (विज्ञान) subject for Class 10th students of Bihar Board of Secondary Education. There are various chapters in this Science (विज्ञान) such as Chapter 1 रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण), Chapter 2 अम्ल, क्षारक एवं लवण), Chapter 3 धातु एवं अधातु), Chapter 4 कार्बन एवं इसके यौगिक), Chapter 5 तत्वों का आवर्त वर्गीकरण), Chapter 6 जैव प्रक्रम), Chapter 7 नियंत्रण एवं समन्वय), Chapter 8 जीव जनन कैसे करते है), Chapter 9 अनुवांशिकता एवं जैव विकास), Chapter 10 प्रकाश(परावर्तन तथा अपवर्तन), Chapter 11 मानव नेत्र एवं रंगबिरंगा संसार), Chapter 12 विद्युत), Chapter 13 विद्युत धारा का चुम्बकीय प्रभाव), Chapter 14 उर्जा के स्रोत), Chapter 15 हमारा पर्यावरण) and Chapter 16 प्राकृतिक संसाधनों का संपोषित प्रबंधन). Summary of the same is given below:

Board NameBihar Board of Secondary Education
ClassClass 10th
Content TypeSolution
Solution forClass 10th students
SubjectScience (विज्ञान)
Chapter NameChapter 12 विद्युत)
Total Number of Chapter in this Subject16

Studying Bihar Board Class 10th Science (विज्ञान) Chapter 12 विद्युत) solution will help you higher marks in this subject but you need to follow best practices to achieve higher marks, which are given after solutions, go through them once.

Bihar Board Class 10th Science (विज्ञान) Chapter 12 विद्युत) Solutions

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प्रश्न 1.
विद्युत परिपथ का क्या अर्थ है?

किसी भी विद्युत धारा के सतत (लगातार) और बंद मार्ग को विद्युत परिपथ कहते हैं। एक सरल परिपथ में विद्युत स्रोत (जैसे सेल), चालक तार, एक विद्युत उपकरण (जैसे बल्ब) और एक स्विच (कुंजी) होते हैं, जो सभी मिलकर धारा के प्रवाह के लिए एक पूरा रास्ता बनाते हैं।

प्रश्न 2.
विद्युत धारा के मात्रक की परिभाषा लिखिए।

विद्युत धारा का SI मात्रक ऐम्पियर (A) है। 1 ऐम्पियर को इस प्रकार परिभाषित किया जाता है: यदि किसी चालक से 1 सेकंड में 1 कूलॉम आवेश प्रवाहित होता है, तो उस चालक में प्रवाहित विद्युत धारा का मान 1 ऐम्पियर होगा।

प्रश्न 3.
एक कूलाँम आवेश की रचना करने वाले इलेक्ट्रॉनों की संख्या परिकलित कीजिए।

हम जानते हैं कि एक इलेक्ट्रॉन पर आवेश, \( e = 1.6 \times 10^{-19} \) कूलॉम होता है।
माना 1 कूलॉम आवेश बनाने के लिए आवश्यक इलेक्ट्रॉनों की संख्या \(n\) है।
तब, कुल आवेश = एक इलेक्ट्रॉन का आवेश × इलेक्ट्रॉनों की संख्या
\( 1 = n \times 1.6 \times 10^{-19} \)
इसलिए, \( n = \frac{1}{1.6 \times 10^{-19}} = \frac{10^{19}}{1.6} = 6.25 \times 10^{18} \)
उत्तर: 1 कूलॉम आवेश में लगभग \( 6.25 \times 10^{18} \) इलेक्ट्रॉन होते हैं।

प्रश्न 1.
उस युक्ति का नाम लिखिए जो किसी चालक के सिरों पर विभवांतर बनाए रखने में सहायता करती है।

वह युक्ति विद्युत सेल (Cell) है। सेल रासायनिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदलकर परिपथ में लगातार विद्युत धारा प्रवाहित करता है और चालक के दोनों सिरों के बीच एक निश्चित विभवांतर बनाए रखता है।

प्रश्न 2.
यह कहने का कया तात्पर्य है कि दो बिंदुओं के बीच विभवांतर 1 V है?

इसका तात्पर्य है कि परिपथ के उन दो बिंदुओं के बीच 1 कूलॉम आवेश को एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक ले जाने में 1 जूल कार्य किया जाता है। दूसरे शब्दों में, प्रति कूलॉम आवेश पर खर्च की गई ऊर्जा 1 जूल है।

प्रश्न 3.
6 V बैटरी से गुजरने वाले हर एक कूलॉम आवेश को कितनी ऊर्जा दी जाती है?

हम जानते हैं: दी गई ऊर्जा (किया गया कार्य), \( W = V \times Q \)
यहाँ, विभवांतर \( V = 6 \) V तथा आवेश \( Q = 1 \) C है।
अतः \( W = 6 \times 1 = 6 \) जूल
उत्तर: 6 V बैटरी से गुजरने वाले प्रत्येक कूलॉम आवेश को 6 जूल ऊर्जा प्राप्त होती है।

प्रश्न 1.
किसी चालक का प्रतिरोध किन कारकों पर निर्भर करता है?

किसी चालक का प्रतिरोध निम्नलिखित कारकों पर निर्भर करता है:
1. पदार्थ की प्रकृति: अलग-अलग पदार्थों की प्रतिरोधकता अलग-अलग होती है।
2. चालक की लंबाई (l): प्रतिरोध चालक की लंबाई के समानुपाती होता है (\( R \propto l \))। लंबा तार = अधिक प्रतिरोध।
3. चालक के अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल (A): प्रतिरोध क्षेत्रफल के व्युत्क्रमानुपाती होता है (\( R \propto \frac{1}{A} \))। मोटा तार = कम प्रतिरोध।
4. तापमान: अधिकांश धातुओं के लिए, तापमान बढ़ने पर प्रतिरोध बढ़ जाता है।

प्रश्न 2.
समान पदार्थ के दो तारों में यदि एक पतला तथा दूसरा मोटा हो तो इनमें से किसमें विद्युत धारा आसानी से प्रवाहित होगी जबकि उन्हें समान विद्युत स्रोत से संयोजित किया जाता है? क्यों?

मोटे तार में विद्युत धारा आसानी से प्रवाहित होगी।
कारण: मोटे तार का अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल अधिक होता है। चूँकि प्रतिरोध (R) क्षेत्रफल (A) के व्युत्क्रमानुपाती होता है (\( R \propto \frac{1}{A} \)), इसलिए मोटे तार का प्रतिरोध पतले तार की तुलना में कम होगा। कम प्रतिरोध होने के कारण, समान विभवांतर पर मोटे तार में अधिक धारा प्रवाहित होगी।

प्रश्न 3.
मान लीजिए किसी वैद्युत अवयव के दो सिरों के बीच विभवांतर को उसके पूर्व के विभवांतर की तुलना में घटाकर आधा कर देने पर भी उसका प्रतिरोध नियत रहता है। तब उस अवयव से प्रवाहित होने वाली विद्युत धारा में क्या परिवर्तन होगा?

ओम के नियम के अनुसार, \( V = I R \)
यदि प्रतिरोध (R) नियत (constant) है, तो विभवांतर (V), धारा (I) के समानुपाती होता है (\( V \propto I \))।
अतः यदि विभवांतर को आधा कर दिया जाए (\( V' = \frac{V}{2} \)), तो उस अवयव में प्रवाहित धारा भी आधी हो जाएगी (\( I' = \frac{I}{2} \))।

प्रश्न 4. विद्युत टोस्टरों तथा विद्युत इस्तरियों के तापन अवयव शुद्ध धातु के न बनाकर किसी मिश्रातु के क्यों बनाए जाते हैं?

विद्युत टोस्टर और इस्तरी के तापन अवयव (हीटिंग एलिमेंट) मिश्रातु (मिश्रधातु) के बनाए जाते हैं, क्योंकि:
1. मिश्रातुओं (जैसे नाइक्रोम) की प्रतिरोधकता शुद्ध धातुओं (जैसे ताँबा) की तुलना में बहुत अधिक होती है।
2. उच्च प्रतिरोध के कारण, जब इनमें विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तो ये आसानी से गर्म हो जाते हैं और अधिक ऊष्मा उत्पन्न करते हैं।
3. मिश्रातु उच्च तापमान पर जलते नहीं हैं और उनका ऑक्सीकरण (Oxidation) भी कम होता है, जिससे वे लंबे समय तक टिकाऊ रहते हैं।

प्रश्न 5.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर तालिका 12.2 में दिए गए आँकड़ों के आधार पर दीजिए -
(क) आयरन (Fe) तथा मर्करी (Hg) में कौन अच्छा विद्युत चालक है?
(ख) कौन-सा पदार्थ सर्वश्रेष्ठ चालक है?

(क) आयरन (लोहा) मर्करी (पारा) की तुलना में एक बेहतर चालक है।
कारण: किसी पदार्थ की विद्युत चालकता उसकी प्रतिरोधकता के व्युत्क्रमानुपाती होती है। तालिका के अनुसार, आयरन की प्रतिरोधकता (\(10.0 \times 10^{-8} \Omega m\)) मर्करी की प्रतिरोधकता (\(94.0 \times 10^{-8} \Omega m\)) से कम है। कम प्रतिरोधकता का अर्थ है बेहतर चालकता।

(ख) चाँदी (Silver) सर्वश्रेष्ठ विद्युत चालक है।
कारण: तालिका 12.2 के आँकड़ों के अनुसार, चाँदी की प्रतिरोधकता (\(1.60 \times 10^{-8} \Omega m\)) सभी पदार्थों में सबसे कम है। सबसे कम प्रतिरोधकता का मतलब सबसे अधिक चालकता होता है।

प्रश्न 1.
किसी विद्युत परिपथ का व्यवस्था आरेख खींचिए जिसमें 2 V के तीन सेलों की बैटरी, एक 5 Ω प्रतिरोधक, एक 8 Ω प्रतिरोधक, एक 12 Ω प्रतिरोधक तथा एक प्लग कुंजी सभी श्रेणीक्रम में संयोजित हों।

निम्नलिखित आरेख में सभी अवयव श्रेणीक्रम में जुड़े हुए हैं:

+ ||---||---||---[ 5 Ω ]---[ 8 Ω ]---[ 12 Ω ]---[ K (कुंजी) ]--- -
(2V) (2V) (2V)

(नोट: उपरोक्त एक सरलीकृत रेखा आरेख है। वास्तविक आरेख में सेलों को लंबवत रेखाओं द्वारा, प्रतिरोधकों को आयताकार बक्सों द्वारा और कुंजी को एक खुला/बंद स्विच द्वारा दर्शाया जाता है।)

प्रश्न 2. प्रश्न 1 का परिपथ दुबारा खींचिए तथा इसमें प्रतिरोधकों से प्रवाहित विद्युत धारा को मापने के लिए ऐमीटर तथा 12 Ω के प्रतिरोधक के सिरों के बीच विभवांतर मापने के लिए वोल्टमीटर लगाइए। ऐमीटर तथा वोल्टमीटर के क्या पाठ्यांक होंगे?

हल:
दिया है: तीन सेल, प्रत्येक 2 V, श्रेणीक्रम में।
कुल विभवांतर, \( V = 2+2+2 = 6 \, V \)
प्रतिरोधक: \( R_1 = 5 \Omega, \, R_2 = 8 \Omega, \, R_3 = 12 \Omega \) (श्रेणीक्रम में)
श्रेणीक्रम में तुल्य प्रतिरोध, \( R_s = R_1 + R_2 + R_3 = 5 + 8 + 12 = 25 \, \Omega \)

परिपथ में कुल धारा (ऐमीटर का पाठ्यांक) ओम के नियम से:
\( I = \frac{V}{R_s} = \frac{6}{25} = 0.24 \, A \)

12 Ω प्रतिरोधक के सिरों पर विभवांतर (वोल्टमीटर का पाठ्यांक):
\( V_{12} = I \times R_3 = 0.24 \times 12 = 2.88 \, V \)

उत्तर: ऐमीटर का पाठ्यांक = 0.24 A तथा वोल्टमीटर का पाठ्यांक = 2.88 V होगा।

प्रश्न 1.
(क) 1 Ω तथा 10⁶ Ω के प्रतिरोध पार्श्वक्रम में संयोजित किए जाते हैं तो इनके तुल्य प्रतिरोध के संबंध में आप क्या निर्णय करेंगे?
(ख) 1 Ω, 10³ Ω तथा 10⁶ Ω के प्रतिरोध पार्श्वक्रम में संयोजित किए जाते हैं तो इनके तुल्य प्रतिरोध के संबंध में आप क्या निर्णय करेंगे?

(क) हल:
दिया है: \( R_1 = 1 \Omega, \, R_2 = 10^6 \Omega = 1,000,000 \Omega \)
पार्श्वक्रम के सूत्र से: \( \frac{1}{R_p} = \frac{1}{R_1} + \frac{1}{R_2} = \frac{1}{1} + \frac{1}{10^6} = 1 + 0.000001 = 1.000001 \)
इसलिए, \( R_p = \frac{1}{1.000001} \approx 0.999999 \, \Omega \)
यह मान 1 Ω से थोड़ा ही कम है।

(ख) हल:
दिया है: \( R_1 = 1 \Omega, \, R_2 = 10^3 \Omega = 1000 \Omega, \, R_3 = 10^6 \Omega = 1,000,000 \Omega \)
पार्श्वक्रम के सूत्र से:
\( \frac{1}{R_p} = \frac{1}{1} + \frac{1}{1000} + \frac{1}{1000000} = 1 + 0.001 + 0.000001 = 1.001001 \)
इसलिए, \( R_p = \frac{1}{1.001001} \approx 0.999 \, \Omega \)

निर्णय: दोनों ही स्थितियों में, पार्श्वक्रम का तुल्य प्रतिरोध (Rp) संयोजन में लगे सबसे छोटे प्रतिरोध (1 Ω) से भी कम आता है। यह पार्श्वक्रम का एक महत्वपूर्ण गुण है।

प्रश्न 2.
100 Ω का एक विद्युत लैम्प, 50 Ω का एक विद्युत टोस्टर तथा 500 Ω का एक जल फिल्टर 220 V के विद्युत स्रोत से पार्श्वक्रम में संयोजित हैं। उस विद्युत इस्तरी का प्रतिरोध क्या है जिसे यदि समान स्रोत के साथ संयोजित कर दें तो वह उतनी ही विद्युत धारा लेती है जितनी तीनों युक्तियाँ लेती हैं। यह भी ज्ञात कीजिए कि इस विद्युत इस्तरी से कितनी विद्युत धारा प्रवाहित होती है?

हल:
दिया है: लैम्प \( R_1 = 100 \Omega \), टोस्टर \( R_2 = 50 \Omega \), फिल्टर \( R_3 = 500 \Omega \), स्रोत \( V = 220 V \)
तीनों युक्तियाँ पार्श्वक्रम में हैं। वह इस्तरी जो अकेली इतनी ही धारा ले, उसका प्रतिरोध इन तीनों के तुल्य प्रतिरोध (R) के बराबर होगा।

पार्श्वक्रम के सूत्र से:
\( \frac{1}{R} = \frac{1}{R_1} + \frac{1}{R_2} + \frac{1}{R_3} = \frac{1}{100} + \frac{1}{50} + \frac{1}{500} \)
\( \frac{1}{R} = 0.01 + 0.02 + 0.002 = 0.032 \)
इसलिए, \( R = \frac{1}{0.032} = 31.25 \, \Omega \)

अतः इस्तरी का प्रतिरोध \( = \mathbf{31.25 \, \Omega} \) होगा।

अब, इस इस्तरी द्वारा ली गई धारा (जो तीनों युक्तियों द्वारा ली गई कुल धारा के बराबर है):
ओम के नियम से, \( I = \frac{V}{R} = \frac{220}{31.25} = 7.04 \, A \)

उत्तर: विद्युत इस्तरी का प्रतिरोध = 31.25 Ω तथा उसमें प्रवाहित धारा = 7.04 A है।

प्रश्न 3.
श्रेणीक्रम में संयोजित करने के स्थान पर वैद्युत युक्तियों को पार्श्वक्रम में संयोजित करने के क्या लाभ हैं?

पार्श्वक्रम में संयोजन के प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं:
1. स्वतंत्र कार्यप्रणाली: पार्श्वक्रम में प्रत्येक उपकरण सीधे स्रोत के साथ जुड़ा होता है। यदि एक उपकरण खराब हो जाए या बंद कर दिया जाए, तो दूसरे उपकरण बिना किसी रुकावट के काम करते रहते हैं। श्रेणीक्रम में एक उपकरण के खराब होने से पूरा परिपथ टूट जाता है।

2. समान विभवांतर: पार्श्वक्रम में जुड़े सभी उपकरणों के सिरों पर वोल्टेज समान रहता है (स्रोत के वोल्टेज के बराबर)। इससे प्रत्येक उपकरण अपनी आवश्यकता के अनुसार ठीक से कार्य कर पाता है।

3. धारा का विभाजन: प्रत्येक उपकरण अपने प्रतिरोध के अनुसार अलग-अलग मात्रा में धारा लेता है। इससे कम शक्ति वाले उपकरण (जैसे LED बल्ब) और अधिक शक्ति वाले उपकरण (जैसे हीटर) एक ही स्रोत से एक साथ चलाए जा सकते हैं।

4. सुरक्षा: श्रेणीक्रम में तुल्य प्रतिरोध बहुत बढ़ जाता है, जिससे अत्यधिक ऊष्मा उत्पन्न होने और आग लगने का खतरा रहता है। पार्श्वक्रम में यह खतरा नहीं होता।

Wa 4. 2 0, 3 ० तथा 60 के तीन प्रतिरोधकों को किस प्रकार संयोजित करेंगे कि संयोजन का कुल प्रतिरोध - (a) 40

(a) 40 प्रतिरोध प्राप्त करने के लिए:
हमें 3Ω और 6Ω के प्रतिरोधकों को पार्श्वक्रम (समानांतर) में जोड़ना होगा, और फिर इस संयोजन को 2Ω के प्रतिरोधक के साथ श्रेणीक्रम (श्रृंखला) में जोड़ना होगा।

चरण 1: 3Ω और 6Ω का पार्श्वक्रम तुल्य प्रतिरोध (Rp)

1/Rp = 1/3 + 1/6 = (2+1)/6 = 3/6 = 1/2
इसलिए, Rp = 2Ω

चरण 2: अब Rp (2Ω) को 2Ω के प्रतिरोधक के साथ श्रेणीक्रम में जोड़ने पर कुल प्रतिरोध (R)
R = 2Ω + 2Ω =
इस प्रकार, कुल प्रतिरोध 4Ω प्राप्त हो जाता है।

(०) 10 हो?

(b) 1Ω प्रतिरोध प्राप्त करने के लिए:
सभी तीनों प्रतिरोधकों (2Ω, 3Ω, और 6Ω) को पार्श्वक्रम (समानांतर) में जोड़ना होगा।

चरण: पार्श्वक्रम का तुल्य प्रतिरोध (Rtotal)

1/Rtotal = 1/2 + 1/3 + 1/6
1/Rtotal = (3 + 2 + 1)/6 = 6/6 = 1
इसलिए, Rtotal =
इस प्रकार, कुल प्रतिरोध 1Ω प्राप्त हो जाता है।

प्रश्न 5. 40, 80, 10 तथा 240 प्रतिरोध की चार कुंडलियों को किस प्रकारसंयोजित करें कि संयोजन से - (9) अधिकतम (0०) निम्नतम प्रतिरोध प्राप्त हो सके?

(a) अधिकतम प्रतिरोध प्राप्त करने के लिए:
सभी प्रतिरोधों (4Ω, 8Ω, 12Ω, 24Ω) को श्रेणीक्रम (श्रृंखला) में जोड़ना होगा।

चरण: श्रेणीक्रम का कुल प्रतिरोध (Rs)

Rs = 4Ω + 8Ω + 12Ω + 24Ω = 48Ω
इस प्रकार, अधिकतम प्रतिरोध 48Ω प्राप्त होगा।

(b) निम्नतम प्रतिरोध प्राप्त करने के लिए:
सभी प्रतिरोधों (4Ω, 8Ω, 12Ω, 24Ω) को पार्श्वक्रम (समानांतर) में जोड़ना होगा।

चरण: पार्श्वक्रम का तुल्य प्रतिरोध (Rp)

1/Rp = 1/4 + 1/8 + 1/12 + 1/24
1/Rp = (6 + 3 + 2 + 1)/24 = 12/24 = 1/2
इसलिए, Rp =
इस प्रकार, न्यूनतम प्रतिरोध 2Ω प्राप्त होगा।

प्रश्न. किसी विद्युत हीठर की डोरी क्‍यों उत्तप्त नहीं होती जबकि उसका तापन अवयव उत्तप्त हो जाता है?

उत्तर:
विद्युत हीटर में उत्पन्न ऊष्मा (H) प्रतिरोध (R) के समानुपाती होती है (H ∝ I²Rt, जहाँ I स्थिर है)। हीटर के तापन अवयव (जैसे नाइक्रोम की कुंडली) का प्रतिरोध बहुत अधिक होता है, जिससे अधिकांश विद्युत ऊर्जा ऊष्मा में बदल जाती है और वह उत्तप्त (लाल-गर्म) हो जाता है। इसके विपरीत, हीटर की आपूर्ति करने वाली डोरी (तार) का प्रतिरोध बहुत कम होता है, इसलिए उसमें नगण्य ऊष्मा उत्पन्न होती है और वह उत्तप्त नहीं होती।

प्रश्न 2. एक घंटे में 50५ विभवांतर से 96000 कूलॉम आवेश को स्थानांतरित करने में उत्पन्न ऊष्मा परिकलित कीजिए।

हल:
दिया है: आवेश (Q) = 96000 C, विभवांतर (V) = 50 V, समय (t) = 1 घंटा (जो ऊष्मा के सूत्र में प्रत्यक्ष रूप से आवश्यक नहीं है क्योंकि Q दिया हुआ है)।

उत्पन्न ऊष्मा (H) = आवेश × विभवांतर = Q × V

H = 96000 C × 50 V = 48,00,000 J (जूल)
जूल को किलोजूल में बदलने पर:
H = 48,00,000 J = 4.8 × 10³ kJ
इस प्रकार, उत्पन्न ऊष्मा 4.8 × 10³ किलोजूल है।

प्रश्न 3. 20 ० प्रतिरोध की कोई विद्युत इस्तरी 5 # विद्युत धारा लेती है। 30 & में उत्पन्न ऊष्मा परिकलित कीजिए।

हल:
दिया है: प्रतिरोध (R) = 20 Ω, विद्युत धारा (I) = 5 A, समय (t) = 30 s.

उत्पन्न ऊष्मा के लिए सूत्र: H = I² × R × t

H = (5)² × 20 × 30
H = 25 × 20 × 30
H = 25 × 600 = 15000 J (जूल)
जूल को किलोजूल में बदलने पर:
H = 15000 J = 15 kJ
इस प्रकार, 30 सेकंड में उत्पन्न ऊष्मा 15 किलोजूल है।

प्रश्न 1. विद्युत धारा द्वारा प्रदत्त ऊर्जा की दर का निर्धारण कैसे किया जाता है?

उत्तर:
विद्युत धारा द्वारा प्रदत्त ऊर्जा की दर को विद्युत शक्ति कहते हैं। इसे वाट (W) में मापा जाता है। शक्ति का सूत्र P = V × I है, जहाँ V विभवांतर और I विद्युत धारा है। यह बताता है कि प्रति सेकंड कितनी ऊर्जा खपत या आपूर्ति हो रही है।

प्रश्न 2. कोई विद्युत मोटर 2209 के विद्युत स्रोत से 5.0 » विद्युत धारा लेता है।मोटर की शक्ति निर्धारित कीजिए तथा 2 घंटे में मोटर द्वारा उपभुक्त ऊर्जा परिकलित कीजिए।

हल:
दिया है: विभवांतर (V) = 220 V, विद्युत धारा (I) = 5.0 A, समय (t) = 2 घंटे।

चरण 1: मोटर की शक्ति (P)

P = V × I = 220 V × 5.0 A = 1100 W (या 1.1 kW)

चरण 2: 2 घंटे में उपभुक्त ऊर्जा (E)
ऊर्जा = शक्ति × समय
E = 1.1 kW × 2 h = 2.2 kWh (किलोवाट-घंटा)
इस प्रकार, मोटर की शक्ति 1100 W है और 2 घंटे में उपभुक्त ऊर्जा 2.2 kWh है।

Bihar Board Class 10 Science fdgq Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1. प्रतिरोध |? के किसी तार के टुकड़े को पाँच बराबर भागों में काठा जाता है। इन टुकड़ों को फिर पार्यक्रम में संयोजित कर देते हैं। यदि संयोजन का तुल्य प्रतिरोध [२' है तो 1२/ [२ अनुपात का मान क्या है? (a) 1/25 (b) 1/5 (c) 5 (d) 25

हल:
माना मूल तार का प्रतिरोध R है।
पाँच बराबर भागों में काटने पर प्रत्येक टुकड़े का प्रतिरोध = R/5 होगा।

इन पाँचों टुकड़ों (प्रत्येक R/5) को पार्श्वक्रम (समानांतर) में जोड़ा गया है। माना इस संयोजन का तुल्य प्रतिरोध R' है।

1/R' = 5/(R/5) = 5 × (5/R) = 25/R
इसलिए, R' = R/25
अब, R/R' का अनुपात:
R / R' = R / (R/25) = 25
अतः सही विकल्प (d) 25 है।

प्रश्न 2. निम्नलिखित में से कौन-सा पद विद्युत परिपथ में विद्युत शक्ति को निरूपित नहीं करता? (a) I?R (b) IR2 (c) VI (d) V2/R

उत्तर:
विद्युत शक्ति (P) के मुख्य सूत्र हैं: P = V×I, P = I²R, और P = V²/R.
विकल्प (b) IR² एक गलत व्यंजक है क्योंकि इसमें R का वर्ग है, जबकि सही सूत्र I²R है।

अतः सही विकल्प (b) IR² है।

प्रश्न 3. किसी विद्युत बल्ब का अनुमतांक 220 ४; 100 ५ है। जब इसे 110 ५ पर प्रचालित करते हैं तब इसके द्वारा उपभुक्त शक्ति कितनी होती है? (a) 100 W (b) 75 W (c) 50 W (१) 25 ५४

हल:
बल्ब का अनुमतांक 220 V; 100 W है।
सबसे पहले बल्ब के प्रतिरोध (R) की गणना करते हैं।

P = V²/R ⇒ R = V²/P
R = (220)² / 100 = 48400 / 100 = 484 Ω
प्रतिरोध का मान स्थिर रहता है। अब जब बल्ब 110 V पर चलाया जाता है, तो उपभुक्त शक्ति (P') होगी:
P' = V'² / R = (110)² / 484 = 12100 / 484 = 25 W
अतः सही विकल्प (d) 25 W है।

प्रश्न 4. दो चालक तार जिनके पदार्थ, लंबाई तथा व्यास समान हैं, किसी विद्युत परिपथ में पहले श्रेणीक्रम में और फिर पार्श्क्रम में संयोजित किए जाते हैं। श्रेणीक्रम तथा पार्श्रक्रम संयोजन में उत्पन्न ऊष्माओं का अनुपात क्या होगा? (9) 1: 2 (b) 2:1 (c)1:4 (d) 4:1

हल:
माना प्रत्येक तार का प्रतिरोध R है।

श्रेणीक्रम में: कुल प्रतिरोध Rs = R + R = 2R
पार्श्वक्रम में: कुल प्रतिरोध Rp = (R × R)/(R + R) = R²/2R = R/2

माना परिपथ में विभवांतर V स्थिर है।
ऊष्मा (H) = V²t / R (चूँकि V और t दोनों स्थितियों में समान हैं, इसलिए H ∝ 1/R)

ऊष्माओं का अनुपात:

Hश्रेणी / Hपार्श्व = (1/Rs) / (1/Rp) = Rp / Rs = (R/2) / (2R) = 1/4
अतः अनुपात 1 : 4 होगा।
सही विकल्प (c) 1:4 है।

प्रश्न 5. किसी विद्युत परिपथ में दो बिंदुओं के बीच विभवांतर मापने के लिए वोल्टमीटर को किस प्रकार संयोजित किया जाता है?

उत्तर:
किसी विद्युत परिपथ में दो बिंदुओं के बीच विभवांतर मापने के लिए वोल्टमीटर को उन दोनों बिंदुओं के बीच पार्श्वक्रम (समानांतर) में संयोजित किया जाता है।

प्रश्न 6. किसी ताँबे के तार का व्यास 0.5 117 तथा प्रतिरोधकता 1.6 १५ 1075 0 - ॥है।100 प्रतिरोध का प्रतिरोधक बनाने के लिए कितने लंबे तार की आवश्यकता होगी? यदि इससे दोगुने व्यास का तार लें तो प्रतिरोध में क्या अंतर आएगा?

हल:
दिया है: प्रतिरोधकता (ρ) = 1.6 × 10⁻⁸ Ωm, अभीष्ट प्रतिरोध (R) = 10 Ω, व्यास (d) = 0.5 mm = 0.5 × 10⁻³ m.

चरण 1: तार की त्रिज्या (r) और अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल (A)

त्रिज्या r = d/2 = (0.5 × 10⁻³)/2 = 0.25 × 10⁻³ m = 2.5 × 10⁻⁴ m
क्षेत्रफल A = πr² = 3.14 × (2.5 × 10⁻⁴)² = 3.14 × 6.25 × 10⁻⁸ = 1.9625 × 10⁻⁷ m² (लगभग)

चरण 2: आवश्यक तार की लंबाई (l)
सूत्र R = ρl / A ⇒ l = (R × A) / ρ
l = (10 × 1.9625 × 10⁻⁷) / (1.6 × 10⁻⁸)
l = (1.9625 × 10⁻⁶) / (1.6 × 10⁻⁸) = 122.66 m (लगभग)
अतः लगभग 122.7 मीटर लंबे तार की आवश्यकता होगी।

चरण 3: यदि व्यास दोगुना कर दिया जाए
नया व्यास d' = 2d, तो नई त्रिज्या r' = 2r होगी।
क्षेत्रफल A' = π(r')² = π(2r)² = 4πr² = 4A (मूल क्षेत्रफल का चार गुना)।

प्रतिरोध सूत्र R ∝ 1/A के अनुसार, यदि क्षेत्रफल चार गुना हो जाता है, तो प्रतिरोध एक-चौथाई रह जाएगा (लंबाई समान मानते हुए)।
नया प्रतिरोध R' = R / 4 = 10 / 4 = 2.5 Ω
इस प्रकार, दोगुने व्यास के तार का प्रतिरोध मूल प्रतिरोध का एक-चौथाई, यानी 2.5 Ω होगा।

प्रश्न 7. किसी प्रतिरोधक के सिरों के बीच विभवांतर ५ के विभिन्न मानों के लिए उससे प्रवाहित विद्युत धाराओं । के संगत मान नीचे दिए गए हैं
1 ( ऐम्पियर ) 0.5 1.0 2.0 3.0 4.0
V 1.6 3.4 6.7 10.2 13.2
४ तथा। के बीच ग्राफ खींचकर इस प्रतिरोधक का प्रतिरोध ज्ञात कीजिए।

हल:
V और I के दिए गए मानों से स्पष्ट है कि प्रतिरोधक ओम के नियम का पालन करता है। ग्राफ खींचने पर V-I ग्राफ एक सरल रेखा होगी जो मूलबिंदु से गुजरती है। इस सरल रेखा की प्रवणता (ढाल) प्रतिरोध (R) देती है।

प्रतिरोध ज्ञात करना: हम किसी भी एक बिंदु का उपयोग कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, V = 3.4 V और I = 1.0 A लेते हैं।

R = V / I = 3.4 / 1.0 = 3.4 Ω
अन्य बिंदुओं से भी प्रतिरोध का मान लगभग समान (3.3Ω से 3.5Ω के बीच) आता है। औसत मान लगभग 3.35 Ω है।

V-I Graph
(यहाँ V-I ग्राफ का सचित्र प्रतिनिधित्व है। वास्तविक ग्राफ कागज पर बनाना होगा।)

प्रश्न 8. किसी अज्ञात प्रतिरोध के प्रतिशेधक के सिरों से 12 ५ की बैठरी को संयोजित करने पर परिपथ में 2.5 11» विद्युत धारा प्रवाहित होती है। प्रतिरोधक का प्रतिरोध परिकलित कीजिए।

हल:
दिया है: विभवांतर (V) = 12 V, विद्युत धारा (I) = 2.5 mA = 2.5 × 10⁻³ A.

ओम के नियम के अनुसार:

R = V / I
R = 12 / (2.5 × 10⁻³) = (12 × 10³) / 2.5 = 12000 / 2.5 = 4800 Ω
अतः प्रतिरोधक का प्रतिरोध 4800 Ω या 4.8 kΩ है।

प्रश्न 9. 9 ७ की किसी बैटरी को 0.2 0, 0.3 0, 0.4 ०, 0.5 ० तथा 120 के प्रतिरोधकों के साथ श्रेणीक्रम में संयोजित किया गया है। 120 के प्रतिरोधक से कितनी विद्युत धारा प्रवाहित होगी?

हल:
श्रेणीक्रम में सभी प्रतिरोधकों में समान धारा प्रवाहित होती है। पहले परिपथ का कुल प्रतिरोध ज्ञात करते हैं।

कुल प्रतिरोध (Rtotal) = 0.2Ω + 0.3Ω + 0.4Ω + 0.5Ω + 12Ω = 13.4 Ω

ओम के नियम से, परिपथ में कुल धारा (I):

I = V / Rtotal = 9 V / 13.4 Ω ≈ 0.67 A
चूँकि श्रेणीक्रम में धारा समान रहती है, इसलिए 12Ω प्रतिरोधक से भी 0.67 A की ही धारा प्रवाहित होगी।

प्रश्न 10. 176 ८ प्रतिरोध के कितने प्रतिरोधकों को पार्यक्रम में संयोजित करें कि 220५ के विद्युत स्नोत से संयोजन से 5 » विद्युत धारा प्रवाहित हो?

हल:
दिया है: प्रत्येक प्रतिरोधक का प्रतिरोध (r) = 176 Ω, स्रोत का विभवांतर (V) = 220 V, परिपथ में अभीष्ट कुल धारा (I) = 5 A.

सबसे पहले, पूरे संयोजन का आवश्यक तुल्य प्रतिरोध (Req) ज्ञात करते हैं।

ओम के नियम से: Req = V / I = 220 V / 5 A = 44 Ω
अब, माना 'n' एकसमान प्रतिरोधक (प्रत्येक 176 Ω) पार्श्वक्रम में जुड़े हैं। पार्श्वक्रम में n समान प्रतिरोधों का तुल्य प्रतिरोध Req = r/n होता है।
44 = 176 / n
n = 176 / 44 = 4
अतः 4 प्रतिरोधकों को पार्श्वक्रम में जोड़ने पर संयोजन का तुल्य प्रतिरोध 44 Ω होगा और 220 V स्रोत से 5 A धारा प्रवाहित होगी।

प्रश्न 11.

यह दर्शाइए कि आप 60 प्रतिरोध के तीन प्रतिरोधकों को किस प्रकार संयोजित करेंगे कि प्राप्त संयोजन का प्रतिरोध - 1. 90, 2. 40 हो।

हल:

1. 9 Ω प्रतिरोध प्राप्त करने के लिए:

दो 6 Ω के प्रतिरोधकों को समान्तर (पार्श्वक्रम) में जोड़ते हैं। समान्तर संयोजन का तुल्य प्रतिरोध:

1/R' = 1/6 + 1/6 = 2/6 = 1/3
इसलिए, R' = 3 Ω

अब इस 3 Ω के तुल्य प्रतिरोध को तीसरे 6 Ω के प्रतिरोधक के साथ श्रेणीक्रम में जोड़ते हैं। श्रेणीक्रम में कुल प्रतिरोध:

Rकुल = R' + 6 = 3 + 6 = 9 Ω

2. 4 Ω प्रतिरोध प्राप्त करने के लिए:

दो 6 Ω के प्रतिरोधकों को श्रेणीक्रम में जोड़ते हैं। श्रेणीक्रम में कुल प्रतिरोध:

Rश्रेणी = 6 + 6 = 12 Ω

अब इस 12 Ω के संयोजन को तीसरे 6 Ω के प्रतिरोधक के साथ समान्तर (पार्श्वक्रम) में जोड़ते हैं। समान्तर संयोजन का तुल्य प्रतिरोध:

1/Rकुल = 1/12 + 1/6 = 1/12 + 2/12 = 3/12 = 1/4
इसलिए, Rकुल = 4 Ω

प्रश्न 12.

220 ५ की विद्युत लाइन पर उपयोग किए जाने वाले बहुत-से बल्बों का अनुमतांक 10 ५४ है। यदि 220४ लाइन से अनुमत अधिकतम विद्युत धारा 5 » है तो इस लाइन के दो तारों के बीच कितने बल्ब पार्श्रक्रम में संयोजित किए जा सकते हैं?

हल:

प्रत्येक बल्ब का प्रतिरोध (R):

शक्ति (P) = V² / R

10 = (220)² / R
R = 48400 / 10 = 4840 Ω

माना पार्श्वक्रम में जुड़े बल्बों की संख्या n है। प्रत्येक बल्ब का प्रतिरोध समान (4840 Ω) है, इसलिए पार्श्वक्रम में तुल्य प्रतिरोध Req = 4840 / n होगा।

ओम के नियम से, I = V / Req

5 = 220 / (4840 / n)
5 = 220 × n / 4840
5 × 4840 = 220 × n
24200 = 220 × n
n = 24200 / 220 = 110

अतः, अधिकतम 110 बल्ब पार्श्वक्रम में संयोजित किए जा सकते हैं।

प्रश्न 13.

किसी विद्युत भट्टी की तप्त प्लेट दी प्रतिरोधक कुंडलियों ॥ तथा 8 की बनी हैं जिनमें प्रत्येक का प्रतिरोध 24 62 है तथा इन्हें पृथक्‌- पृथक, श्रेणीक्रम में अथवा पार्श्रक्रम में संयोजित करके उपयोग किया जा सकता है। यदि यह भट्ठी 2209 विद्युत स्रोत से संयोजित की जाती है तो तीनों प्रकरणों में प्रवाहित विद्युत धाराएँ क्या हैं?

हल:

दिया है: वोल्टेज (V) = 220 V, प्रत्येक कुंडली का प्रतिरोध R = 24 Ω

स्थिति 1: जब दोनों कुंडलियाँ श्रेणीक्रम में जुड़ी हों

कुल प्रतिरोध Rs = 24 + 24 = 48 Ω
धारा Is = V / Rs = 220 / 48 ≈ 4.58 A

स्थिति 2: जब दोनों कुंडलियाँ पार्श्वक्रम में जुड़ी हों

तुल्य प्रतिरोध: 1/Rp = 1/24 + 1/24 = 2/24 = 1/12
इसलिए, Rp = 12 Ω
धारा Ip = V / Rp = 220 / 12 ≈ 18.33 A

स्थिति 3: जब केवल एक कुंडली जुड़ी हो

प्रतिरोध R = 24 Ω
धारा I = V / R = 220 / 24 ≈ 9.17 A

प्रश्न 14. निम्नलिखित परिपथों में प्रत्येक में 202 प्रतिरोधक द्वारा उपभुक्त शक्तियों की तुलना कीजिए:

1. 6 शकी बैटरी से संयोजित 10 तथा 20 श्रेणीक्रम संयोजन

2. 4 ४ बैटरी से संयोजित 1200 तथा 20 का पावक्रम संयोजन।

हल:

परिपथ 1: V = 6V, R1 = 1 Ω, R2 = 2 Ω (श्रेणीक्रम में)

कुल प्रतिरोध R = 1 + 2 = 3 Ω
परिपथ में धारा I = V / R = 6 / 3 = 2 A

2 Ω प्रतिरोधक द्वारा उपभुक्त शक्ति P1 = I² × R2 = (2)² × 2 = 4 × 2 = 8 W


परिपथ 2: V = 4V, R1 = 1 Ω, R2 = 2 Ω (पार्श्वक्रम में)

पार्श्वक्रम में प्रत्येक प्रतिरोधक के सिरों के बीच विभवांतर समान (4V) होता है।
2 Ω प्रतिरोधक द्वारा उपभुक्त शक्ति P2 = V² / R2 = (4)² / 2 = 16 / 2 = 8 W


तुलना: दोनों परिपथों में 2 Ω प्रतिरोधक द्वारा उपभुक्त शक्ति समान है, अर्थात 8 W

प्रश्न 15.

दो विद्युत लैम्प जिनमें से एक का अनुमतांक 100 ७५; 220 ५ तथा दूसरे का 60 ५४; 220 है, विद्युत मेंस के साथ पार्यक्रम में संयोजित हैं। यदि विद्युत आपूर्ति की वोल्टता 220 ७ है तो विद्युत में से कितनी धारा ली जाती है?

हल:

प्रत्येक लैम्प का प्रतिरोध ज्ञात करते हैं। सूत्र P = V²/R का उपयोग करते हुए:

लैम्प 1: P1 = 100 W, V = 220 V

R1 = V² / P1 = (220)² / 100 = 48400 / 100 = 484 Ω

लैम्प 2: P2 = 60 W, V = 220 V

R2 = V² / P2 = (220)² / 60 = 48400 / 60 ≈ 806.67 Ω

चूँकि लैम्प पार्श्वक्रम में जुड़े हैं, तुल्य प्रतिरोध (R) होगा:

1/R = 1/R1 + 1/R2 = 1/484 + 1/806.67
1/R ≈ 0.002066 + 0.001240 ≈ 0.003306
R ≈ 1 / 0.003306 ≈ 302.5 Ω

मेन्स से ली गई कुल धारा (I):

I = V / R = 220 / 302.5 ≈ 0.727 A

प्रश्न 16.

किसमें अधिक विद्यत ऊर्जा उपभक्त होती है : 250५0का टी०्वी० सेट जो एक घंटे तक चलाया जाता है अथवा 120 ५४ का विद्युत हीटर जो 10 मिनट के लिए चलाया जाता है?

हल:

उपभुक्त ऊर्जा (E) = शक्ति (P) × समय (t)

टी.वी. सेट के लिए:
P1 = 250 W = 250 J/s
t1 = 1 घंटा = 3600 सेकंड
E1 = 250 × 3600 = 900,000 J (या 9 × 10⁵ J)

विद्युत हीटर के लिए:
P2 = 1200 W = 1200 J/s
t2 = 10 मिनट = 600 सेकंड
E2 = 1200 × 600 = 720,000 J (या 7.2 × 10⁵ J)

तुलना: E1 (9,00,000 J) > E2 (7,20,000 J)
अतः टी.वी. सेट में अधिक विद्युत ऊर्जा उपभुक्त होती है।

प्रश्न 17.

80 प्रतिरोध का कोई विद्युत हीठर विद्युत मेंस से 2 घंटे तक 15 » विद्युत घारा लेता है। हीटर में उत्पन्न ऊष्मा की दर परिकलित कीजिए।

हल:

ऊष्मा उत्पन्न होने की दर का अर्थ है विद्युत शक्ति (P) जो ऊष्मा के रूप में व्यय हो रही है।
दिया है: प्रतिरोध R = 8 Ω, धारा I = 15 A
सूत्र: P = I²R
P = (15)² × 8 = 225 × 8 = 1800 W (या J/s)

अतः हीटर में 1800 J/s की दर से ऊष्मा उत्पन्न हो रही है।

प्रश्न 18. निम्नलिखित को स्पष्ट कीजिए

(9) विद्युत लैम्पों के तंतुओं के निर्माण में प्रायः एकमात्र टंगस्टन का ही उपयोग क्‍यों किया जाता है?

उत्तर: टंगस्टन धातु का उपयोग इसलिए किया जाता है क्योंकि इसका गलनांक बहुत उच्च (लगभग 3422°C) होता है, जिससे यह उच्च ताप पर भी पिघलता नहीं है। साथ ही, इसकी प्रतिरोधकता भी अधिक होती है, जिसके कारण विद्युत धारा प्रवाहित होने पर यह अत्यधिक गर्म होकर चमकदार प्रकाश उत्सर्जित करता है।

(०) विद्यत तापन युक्तियों जैसे ब्रेड-टोस्टर तथा विद्युत इस्तरी के चालक शुद्ध घातुओं के स्थान पर मिश्रातुओं के क्‍यों बनाए जाते हैं?

उत्तर: मिश्रधातुओं (जैसे नाइक्रोम) की प्रतिरोधकता शुद्ध धातुओं की तुलना में अधिक होती है और उनका गलनांक भी उच्च होता है। अधिक प्रतिरोधकता के कारण ये अधिक ऊष्मा उत्पन्न करती हैं, जो तापन के लिए आवश्यक है। उच्च गलनांक के कारण ये अधिक तापमान पर भी अपना आकार बनाए रखती हैं और जल्दी नहीं पिघलतीं।

(०) घरेलू विद्युत परिपथों में श्रेणीक्रम संयोजन का उपयोग क्‍यों नहीं किया जाता है?

उत्तर: श्रेणीक्रम में सभी उपकरणों से एक ही धारा प्रवाहित होती है। यदि एक उपकरण खराब हो जाए या बंद कर दिया जाए, तो पूरा परिपथ टूट जाता है और अन्य सभी उपकरण भी काम करना बंद कर देते हैं। साथ ही, प्रत्येक उपकरण को अलग-अलग वोल्टेज की आवश्यकता होती है, जो श्रेणीक्रम में संभव नहीं है। इसलिए घरेलू परिपथों में सुविधा और स्वतंत्र नियंत्रण के लिए पार्श्वक्रम संयोजन का ही उपयोग किया जाता है।

(d) किसी तार का प्रतिरोध उसकी अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल में परिवर्तन के साथ किस प्रकार परिवर्तित होता है?

उत्तर: किसी तार का प्रतिरोध (R) उसकी अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल (A) के व्युत्क्रमानुपाती होता है, यदि लंबाई और पदार्थ समान रहें। सूत्र R = ρl/A के अनुसार, यदि तार का क्षेत्रफल बढ़ता है तो प्रतिरोध घटता है और यदि क्षेत्रफल घटता है तो प्रतिरोध बढ़ता है। मोटे तार का प्रतिरोध कम और पतले तार का प्रतिरोध अधिक होता है।

(९) विद्युत संचारण के लिए प्राय: कॉपर तथा ऐलुमिनियम के तारों का उपयोग क्‍यों किया जाता है?

उत्तर: ताँबा (कॉपर) और एल्युमिनियम विद्युत के उत्कृष्ट सुचालक हैं, अर्थात इनकी प्रतिरोधकता बहुत कम होती है जिससे ऊर्जा का ह्रास कम होता है। ये धातुएँ लचीली होती हैं और आसानी से तार के रूप में खींची जा सकती हैं। साथ ही, चाँदी जैसे अन्य उत्कृष्ट चालकों की तुलना में ये अपेक्षाकृत सस्ती और प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं।

Bihar Board Class 10 Science (विज्ञान) अतिरिक्त महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1. विद्युत आवेश का मात्रक है - (2014)

(a) जूल
(७) कूलॉम
(८) वोल्ट
(५) ऐम्पियर

उत्तर: (७) कूलॉम

प्रश्न 2. ऐम्पियर-सेकण्ड मात्रक है - (2013, 14)

(9) विद्युत ऊर्जा का
(०) वि० वा० बल का
(८) आवेश का
(५) धारा का

उत्तर: (८) आवेश का

प्रश्न 3, एक प्रोटॉन पर विद्युत आवेश की मात्रा होती है - (2013, 18)

(9) 1.0 ५५107? कूलॉम
(b) 6.25 x 10!9 peta
(८) 1.6 ५» 10? कूलॉम
(d) 1.6 x10 कुलॉम

उत्तर: (d) 1.6 × 10⁻¹⁹ कूलॉम

1. विद्युत परिपथ को परिभाषित करें।

एक विद्युत परिपथ एक बंद पथ या लूप है जिसके माध्यम से विद्युत धारा का प्रवाह होता है। इसमें विद्युत ऊर्जा का स्रोत (जैसे सेल या बैटरी), संयोजक तार, एक विद्युत उपकरण (जैसे बल्ब, पंखा या मोटर) और एक स्विच शामिल होता है। जब स्विच 'ऑन' होता है, तो परिपथ पूरा हो जाता है और इलेक्ट्रॉन स्रोत के ऋणात्मक टर्मिनल से धनात्मक टर्मिनल की ओर प्रवाहित होते हैं, जिससे उपकरण कार्य करने लगता है।

2. विद्युत धारा को परिभाषित करें। इसका मात्रक बताएँ।

विद्युत धारा किसी चालक के किसी बिंदु से प्रति सेकंड गुजरने वाले आवेश (इलेक्ट्रॉनों) की मात्रा है। दूसरे शब्दों में, यह आवेश प्रवाह की दर है।

विद्युत धारा का SI मात्रक एम्पियर (A) है। इसे प्रतीक 'I' से दर्शाया जाता है। 1 एम्पियर धारा तब होती है जब किसी चालक के किसी अनुप्रस्थ काट से 1 सेकंड में 1 कूलॉम आवेश प्रवाहित होता है (1 A = 1 C/s)।

3. एक कूलॉम आवेश की रचना कितने इलेक्ट्रॉनों से होती है?

एक इलेक्ट्रॉन पर आवेश $1.6 \times 10^{-19}$ कूलॉम होता है।
इसलिए, 1 कूलॉम आवेश की रचना इलेक्ट्रॉनों की संख्या: $$ \text{इलेक्ट्रॉनों की संख्या} = \frac{1 \text{ C}}{1.6 \times 10^{-19} \text{ C/इलेक्ट्रॉन}} = 6.25 \times 10^{18} \text{ इलेक्ट्रॉन} $$ अतः, 1 कूलॉम आवेश लगभग $6.25 \times 10^{18}$ इलेक्ट्रॉनों से मिलकर बनता है।

4. उस युक्ति का नाम बताएँ जो किसी चालक के सिरों पर विभवांतर बनाए रखने में सहायता करती है।

सेल (या बैटरी) वह युक्ति है जो किसी चालक के सिरों पर एक स्थिर विभवांतर बनाए रखती है। यह रासायनिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करके कार्य करती है। सेल के भीतर होने वाली रासायनिक अभिक्रिया इलेक्ट्रॉनों को एक टर्मिनल (ऋणात्मक) से दूसरे टर्मिनल (धनात्मक) की ओर धकेलती है, जिससे दोनों टर्मिनलों के बीच एक विभवांतर उत्पन्न होता है। जब इससे एक बाह्य परिपथ जोड़ा जाता है, तो यह विभवांतर इलेक्ट्रॉनों को प्रवाहित करने के लिए आवश्यक 'दबाव' प्रदान करता है।

5. यह कहने का क्या तात्पर्य है कि दो बिंदुओं के बीच विभवांतर 1 V है?

इसका तात्पर्य है कि उन दो बिंदुओं के बीच 1 जूल कार्य करने पर 1 कूलॉम आवेश एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक स्थानांतरित होता है।

सरल शब्दों में: यदि किसी चालक के दो सिरों A और B के बीच विभवांतर 1 वोल्ट है, तो इसका मतलब है कि 1 कूलॉम आवेश को A से B तक ले जाने में 1 जूल ऊर्जा खर्च होती है (या प्राप्त होती है)। विभवांतर ही वह 'बल' है जो विद्युत धारा को परिपथ में प्रवाहित करता है।

6. 6 V बैटरी से गुजरने वाले प्रत्येक कूलॉम आवेश को कितनी ऊर्जा दी जाती है?

हम जानते हैं: विभवांतर (V) = दी गई ऊर्जा (W) / आवेश (Q)
या, W = V × Q

यहाँ, V = 6 V और Q = 1 C
तो, W = 6 V × 1 C = 6 जूल (J)

अतः, 6 V बैटरी से गुजरने वाले प्रत्येक कूलॉम आवेश को 6 जूल ऊर्जा प्रदान की जाती है। यह ऊर्जा आवेश के साथ परिपथ में जाती है और बल्ब को जलाने, पंखा घुमाने आदि में उपयोग होती है।

7. किसी चालक का प्रतिरोध किन कारकों पर निर्भर करता है?

किसी चालक का प्रतिरोध निम्नलिखित कारकों पर निर्भर करता है:
  1. चालक की लंबाई (l): प्रतिरोध चालक की लंबाई के समानुपाती होता है। (R ∝ l) – लंबा तार = अधिक प्रतिरोध।
  2. चालक के अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल (A): प्रतिरोध क्षेत्रफल के व्युत्क्रमानुपाती होता है। (R ∝ 1/A) – मोटा तार = कम प्रतिरोध।
  3. चालक के पदार्थ की प्रकृति: अलग-अलग पदार्थों की विद्युत चालकता अलग-अलग होती है। उदाहरण के लिए, तांबे का प्रतिरोध लोहे से कम होता है।
  4. चालक का तापमान: अधिकांश धातुओं के लिए, तापमान बढ़ने पर प्रतिरोध बढ़ता है। अर्धचालकों और विद्युत अपघट्यों में यह घट सकता है।
सूत्र के रूप में: R = ρ (l/A), जहाँ ρ (रो) पदार्थ की प्रतिरोधकता है, जो पदार्थ की प्रकृति और तापमान पर निर्भर करती है।

8. समान पदार्थ के दो तारों में यदि एक पतला तथा दूसरा मोटा है तो इनमें से किसमें विद्युत धारा आसानी से प्रवाहित होगी जबकि उन्हें समान विद्युत स्रोत से संयोजित किया जाए? कारण बताएँ।

मोटे तार में विद्युत धारा आसानी से प्रवाहित होगी।

कारण: किसी तार का प्रतिरोध उसके अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल (मोटाई) के व्युत्क्रमानुपाती होता है। मोटे तार का अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल अधिक होता है, इसलिए उसका प्रतिरोध कम होगा। पतले तार का क्षेत्रफल कम होने के कारण उसका प्रतिरोध अधिक होगा। चूँकि दोनों तारों को समान विद्युत स्रोत (समान वोल्टेज) से जोड़ा गया है, ओम के नियम (I = V/R) के अनुसार, कम प्रतिरोध वाले मोटे तार में अधिक धारा प्रवाहित होगी। इसलिए, मोटे तार में विद्युत धारा का प्रवाह आसान होगा।

9. मान लीजिए किसी परिपथ में 1Ω प्रतिरोध के अनेक प्रतिरोधक हैं और प्रत्येक को 2 A की विद्युत धारा की आवश्यकता है। 6 V की बैटरी जो 5 A धारा दे सकती है, से आप कितने प्रतिरोधक उन्हें किस प्रकार संयोजित कर सकते हैं?

दिया है: प्रत्येक प्रतिरोधक (R) = 1 Ω, प्रत्येक के लिए आवश्यक धारा (I_req) = 2 A, बैटरी वोल्टेज (V) = 6 V, बैटरी की अधिकतम धारा क्षमता = 5 A.

चरण 1: एक प्रतिरोधक के लिए आवश्यक वोल्टेज
ओम के नियम से, V_req = I_req × R = 2 A × 1 Ω = 2 V.
इसका मतलब है कि प्रत्येक 1 Ω प्रतिरोधक को 2 A धारा प्रवाहित करने के लिए उसके सिरों पर 2 V विभवांतर होना चाहिए।

चरण 2: संयोजन की योजना
हमारे पास बैटरी 6 V की है। यदि हम प्रतिरोधकों को श्रेणीक्रम में जोड़ेंगे, तो वोल्टेज विभाजित हो जाएगा। यदि हम उन्हें समानांतर क्रम में जोड़ेंगे, तो धारा विभाजित होगी।
चूँकि प्रत्येक प्रतिरोधक को 2 V चाहिए, हम 6 V को 2 V के बराबर भागों में बाँट सकते हैं। 6 V / 2 V = 3।
इसलिए, हम तीन प्रतिरोधकों को श्रेणीक्रम में जोड़ सकते हैं। श्रेणीक्रम में कुल प्रतिरोध जुड़ जाता है, और वोल्टेज प्रत्येक में विभाजित हो जाता है।

चरण 3: गणना और सत्यापन
तीन 1 Ω प्रतिरोधक श्रेणीक्रम में: कुल प्रतिरोध R_total = 1+1+1 = 3 Ω.
बैटरी से खींची गई कुल धारा, I_total = V / R_total = 6 V / 3 Ω = 2 A.
श्रेणीक्रम में धारा समान रहती है, इसलिए प्रत्येक प्रतिरोधक से 2 A ही प्रवाहित होगी, जो आवश्यकता के अनुरूप है।
बैटरी की धारा क्षमता 5 A है, और हम केवल 2 A ले रहे हैं, इसलिए यह सुरक्षित है।

परिपथ आरेख का सार:
[बैटरी (+) --- [R1] --- [R2] --- [R3] --- बैटरी (-)]
अतः, हम तीन प्रतिरोधकों को श्रेणीक्रम में जोड़कर आवश्यक शर्तों को पूरा कर सकते हैं।

10. ओम का नियम लिखें तथा इसकी सीमाएँ बताएँ।

ओम का नियम: किसी निश्चित तापमान पर, किसी चालक से प्रवाहित होने वाली विद्युत धारा (I) उसके सिरों पर लगाए गए विभवांतर (V) के समानुपाती होती है।
गणितीय रूप में: V ∝ I, या V = I × R, जहाँ R चालक का नियत प्रतिरोध है।

ओम के नियम की सीमाएँ (या अपवाद):
  1. तापमान स्थिर होना चाहिए: यह नियम केवल तभी मान्य होता है जब चालक का तापमान स्थिर रहे। तापमान बदलने पर अधिकांश धातुओं का प्रतिरोध बदल जाता है, इसलिए V और I का अनुपात (R) स्थिर नहीं रहता।
  2. सभी पदार्थों पर लागू नहीं: यह नियम केवल उन्हीं चालकों के लिए सही है जो ओमीय चालक कहलाते हैं (जैसे धातुएँ, कार्बन रेजिस्टर)। अनेक अर्धचालक (जैसे डायोड, ट्रांजिस्टर) और गैसों में V और I का संबंध समानुपाती नहीं होता – इन्हें अन-ओमीय चालक कहते हैं।
  3. भौतिक दशाएँ स्थिर होनी चाहिए: चालक की लंबाई, अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल और पदार्थ की प्रकृति अपरिवर्तित रहनी चाहिए।
  4. अतिउच्च वोल्टेज और धारा पर लागू नहीं: बहुत अधिक वोल्टेज या धारा पर, चालक गर्म होकर पिघल सकता है या उसके गुण बदल सकते हैं, जिससे नियम लागू नहीं होता।

11. विद्युत शक्ति से आप क्या समझते हैं? 100 W – 220 V लिखे बल्ब से क्या तात्पर्य है?

विद्युत शक्ति: विद्युत शक्ति वह दर है जिस पर विद्युत उपकरण विद्युत ऊर्जा का उपयोग करता है (या जिस दर से विद्युत ऊर्जा, कार्य या ऊष्मा में परिवर्तित होती है)।
सूत्र: शक्ति (P) = कार्य/ऊर्जा की खपत की दर = V × I
इसका SI मात्रक वाट (W) है। 1 W = 1 जूल/सेकंड = 1 वोल्ट × 1 एम्पियर।

"100 W – 220 V" लिखे बल्ब का तात्पर्य:
यह लेबल बताता है कि यदि बल्ब को 220 वोल्ट के विद्युत स्रोत से जोड़ा जाए, तो यह 100 वाट की दर से विद्युत ऊर्जा खपत करेगा (और उतनी ही दर से प्रकाश और ऊष्मा ऊर्जा उत्पन्न करेगा)।
इससे हम बल्ब के प्रतिरोध और उसमें प्रवाहित धारा की भी गणना कर सकते हैं:
P = V²/R ⇒ R = V²/P = (220)² / 100 = 48400/100 = 484 Ω
P = V × I ⇒ I = P/V = 100 W / 220 V ≈ 0.45 A

12. निम्नलिखित के सूत्र लिखें-
(क) विद्युत धारा
(ख) विभवांतर
(ग) प्रतिरोध
(घ) विद्युत शक्ति

राशि सूत्र प्रतीकों का अर्थ
(क) विद्युत धारा (I) I = Q / t Q = आवेश (कूलॉम), t = समय (सेकंड)
(ख) विभवांतर (V) V = W / Q W = किया गया कार्य/दी गई ऊर्जा (जूल), Q = आवेश (कूलॉम)
(ग) प्रतिरोध (R) [ओम के नियम से] R = V / I V = विभवांतर (वोल्ट), I = धारा (एम्पियर)
(घ) विद्युत शक्ति (P) P = V × I
या P = I²R
या P = V²/R
V = विभवांतर, I = धारा, R = प्रतिरोध

13. 5 Ω प्रतिरोध के कितने प्रतिरोधक समान्तर क्रम में संयोजित किए जाएँ कि 220 V स्रोत से संयोजन से 5 A विद्युत धारा प्रवाहित हो?

दिया है: प्रत्येक प्रतिरोधक (R) = 5 Ω, स्रोत वोल्टेज (V) = 220 V, परिपथ से प्रवाहित होने वाली अभीष्ट कुल धारा (I_total) = 5 A.
प्रतिरोधकों को समान्तर (समानांतर) क्रम में जोड़ा जाना है।

चरण 1: आवश्यक कुल प्रतिरोध ज्ञात करना
ओम के नियम से, V = I_total × R_total
⇒ R_total = V / I_total = 220 V / 5 A = 44 Ω
यह 44 Ω, समानांतर संयोजन का तुल्य प्रतिरोध (R_eq) होगा।

चरण 2: समानांतर संयोजन का सूत्र
यदि 'n' समान प्रतिरोधक (प्रत्येक R) समानांतर में जुड़े हैं, तो तुल्य प्रतिरोध: R_eq = R / n
⇒ 44 Ω = 5 Ω / n
⇒ n = 5 Ω / 44 Ω ≈ 0.1136
यह गलत है क्योंकि n एक पूर्ण संख्या होनी चाहिए। मैंने सूत्र गलत लगाया!

सही सूत्र: समानांतर में, तुल्य प्रतिरोध घटता है। 'n' समान प्रतिरोधकों के लिए: 1/R_eq = n × (1/R) या R_eq = R / n.
यहाँ R_eq = 44 Ω और R = 5 Ω.
तो, 44 = 5 / n ⇒ n = 5 / 44 ≈ 0.1136 (फिर वही)। इसका मतलब है कि तुल्य प्रतिरोध 44 Ω प्राप्त करने के लिए हमें 5 Ω से बड़े प्रतिरोध की आवश्यकता है, लेकिन समानांतर में जोड़ने पर तुल्य प्रतिरोध सबसे छोटे अलग-अलग प्रतिरोध से भी कम हो जाता है। 5 Ω के किसी भी संख्या में प्रतिरोधकों को समानांतर में जोड़ने पर तुल्य प्रतिरोध 5 Ω से कम ही होगा, 44 Ω कभी नहीं।

पुनर्विचार: प्रश्न में कुछ गड़बड़ है। 220 V पर 5 A धारा के लिए आवश्यक कुल प्रतिरोध 44 Ω है। 5 Ω के प्रतिरोधकों को समानांतर में जोड़ने पर तुल्य प्रतिरोध हमेशा 5 Ω से कम रहेगा, जो 44 Ω से बहुत कम है। इसलिए, 5 Ω के प्रतिरोधकों के केवल समानांतर संयोजन से 44 Ω का तुल्य प्रतिरोध प्राप्त करना असंभव है।

संभावित समाधान: यदि प्रश्न का आशय 5 A धारा प्राप्त करना है, तो हमें श्रेणीक्रम या मिश्रित संयोजन की आवश्यकता होगी। लेकिन चूँकि प्रश्न विशेष रूप से "समान्तर क्रम" पूछ रहा है, इसलिए उत्तर है कि ऐसा कोई पूर्णांक 'n' नहीं है जो शर्त को पूरा करे।

14. 220 V पर एक विद्युत बल्ब 10 A विद्युत धारा लेता है। बल्ब की शक्ति तथा प्रतिरोध ज्ञात करें।

दिया है: वोल्टेज (V) = 220 V, धारा (I) = 10 A

(i) बल्ब की शक्ति (P):
सूत्र: P = V × I
P = 220 V × 10 A = 2200 वाट (W) या 2.2 किलोवाट (kW)

(ii) बल्ब का प्रतिरोध (R):
ओम के नियम से: R = V / I
R = 220 V / 10 A = 22 ओम (Ω)

नोट: यह एक बहुत शक्तिशाली बल्ब है (जैसे कोई बड़ा हीटर या इंडस्ट्रियल लैंप), सामान्य घरेलू बल्ब नहीं।

15. 5 Ω, 10 Ω तथा 15 Ω के तीन प्रतिरोधकों को श्रेणीक्रम में 6 V की बैटरी से जोड़ा गया है। परिपथ का कुल प्रतिरोध, परिपथ में प्रवाहित धारा तथा प्रत्येक प्रतिरोधक के सिरों पर विभवांतर ज्ञात करें।

दिया है: R1 = 5 Ω, R2 = 10 Ω, R3 = 15 Ω, बैटरी वोल्टेज V = 6 V. सभी श्रेणीक्रम में हैं।

(i) परिपथ का कुल प्रतिरोध (R_total):
श्रेणीक्रम में कुल प्रतिरोध सभी प्रतिरोधों के योग के बराबर होता है।
R_total = R1 + R2 + R3 = 5 Ω + 10 Ω + 15 Ω = 30 Ω

(ii) परिपथ में प्रवाहित धारा (I):
पूरे परिपथ में धारा समान होगी (श्रेणीक्रम का नियम)।
ओम के नियम से: I = V / R_total = 6 V / 30 Ω = 0.2 A (या 200 mA)

(iii) प्रत्येक प्रतिरोधक के सिरों पर विभवांतर:
ओम के नियम का प्रत्येक प्रतिरोधक पर प्रयोग करें: V = I × R
  • R1 (5 Ω) के सिरों पर: V1 = I × R1 = 0.2 A × 5 Ω = 1 V
  • R2 (10 Ω) के सिरों पर: V2 = I × R2 = 0.2 A × 10 Ω = 2 V
  • R3 (15 Ω) के सिरों पर: V3 = I × R3 = 0.2 A × 15 Ω = 3 V
जाँच: श्रेणीक्रम में कुल वोल्टेज विभाजन = V1 + V2 + V3 = 1V + 2V + 3V = 6V, जो बैटरी वोल्टेज के बराबर है।

16. 2 Ω, 3 Ω तथा 6 Ω के तीन प्रतिरोधकों को समान्तर क्रम में 10 V की बैटरी से जोड़ा गया है। परिपथ का कुल प्रतिरोध, परिपथ में प्रवाहित कुल धारा तथा प्रत्येक प्रतिरोधक में प्रवाहित धारा ज्ञात करें।

दिया है: R1 = 2 Ω, R2 = 3 Ω, R3 = 6 Ω, बैटरी वोल्टेज V = 10 V. सभी समान्तर (समानांतर) क्रम में हैं।

(i) परिपथ का कुल प्रतिरोध (R_total या R_eq):
समानांतर संयोजन के लिए: 1/R_total = 1/R1 + 1/R2 + 1/R3
1/R_total = 1/2 + 1/3 + 1/6 = (3/6) + (2/6) + (1/6) = 6/6 = 1
⇒ R_total = 1 Ω

(ii) परिपथ में प्रवाहित कुल धारा (

प्रश्न 13. 5 × 1019 इलेक्ट्रॉन 8 सेकण्ड में किसी चालक के अनुप्रस्थ काट से प्रवाहित होते हैं। चालक में प्रवाहित विद्युत धारा का मान ज्ञात कीजिए। (इलेक्ट्रॉन पर आवेश = 1.6 × 10-19 कूलाम) (2009, 17, 18)

हल:
विद्युत धारा (I) प्रति सेकंड प्रवाहित होने वाले आवेश (Q) की मात्रा के बराबर होती है।
सूत्र: I = Q / t
यहाँ,
इलेक्ट्रॉनों की संख्या (n) = 5 × 1019
एक इलेक्ट्रॉन पर आवेश (e) = 1.6 × 10-19 कूलॉम
कुल आवेश (Q) = n × e = (5 × 1019) × (1.6 × 10-19) = 8 कूलॉम
समय (t) = 8 सेकंड
धारा (I) = Q / t = 8 कूलॉम / 8 सेकंड = 1 ऐम्पियर
अतः चालक में प्रवाहित विद्युत धारा 1 ऐम्पियर है।

प्रश्न 14. बिन्दु A से B की ओर 1019 इलेक्ट्रॉन 10-3 सेकण्ड में प्रवाहित होते हैं। कितनी विद्युत धारा किस दिशा में प्रवाहित होगी? इलेक्ट्रॉन पर आवेश = 1.6 × 10-19 कूलॉम है। (2015, 16)

हल:
धारा (I) = प्रति सेकंड प्रवाहित आवेश = (इलेक्ट्रॉनों की संख्या × एक इलेक्ट्रॉन का आवेश) / समय
यहाँ,
n = 1019
e = 1.6 × 10-19 C
t = 10-3 s
कुल आवेश Q = n × e = 1019 × 1.6 × 10-19 = 1.6 कूलॉम
धारा I = Q / t = 1.6 C / 10-3 s = 1.6 × 103 ऐम्पियर = 1600 ऐम्पियर
दिशा: इलेक्ट्रॉन A से B की ओर बह रहे हैं। चूँकि इलेक्ट्रॉन ऋणावेशित होते हैं, इसलिए विद्युत धारा की दिशा इलेक्ट्रॉनों के प्रवाह की विपरीत दिशा में यानी B से A की ओर होगी।

प्रश्न 15. 1 ओम प्रतिरोध से क्या तात्पर्य है ?

उत्तर:
यदि किसी चालक के सिरों के बीच 1 वोल्ट का विभवान्तर लगाने पर उसमें 1 ऐम्पियर की धारा प्रवाहित होती है, तो उस चालक का प्रतिरोध 1 ओम कहलाता है।

प्रश्न 16. किसी चालक के विशिष्ट प्रतिरोध से क्या तात्पर्य है ?

उत्तर:
किसी पदार्थ के 1 मीटर लम्बाई तथा 1 वर्ग मीटर अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल वाले तार के प्रतिरोध को उस पदार्थ का विशिष्ट प्रतिरोध या प्रतिरोधकता कहते हैं। इसका मात्रक ओम-मीटर (Ω m) है।

प्रश्न 17. किसी धात्विक चालक के प्रतिरोध पर ताप-परिवर्तन का क्या प्रभाव पड़ता है? (2011)

उत्तर:
धात्विक चालकों का प्रतिरोध ताप बढ़ने पर बढ़ जाता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि ताप बढ़ने पर चालक में मुक्त इलेक्ट्रॉनों की गति में अव्यवस्था उत्पन्न होती है, जिससे उनका प्रवाह अवरुद्ध होता है और प्रतिरोध बढ़ जाता है।

प्रश्न 18. ओम, ऐम्पियर तथा वोल्ट में क्या सम्बन्ध है ?

उत्तर:
ओम के नियम के अनुसार, V = I × R
अर्थात्, वोल्ट = ऐम्पियर × ओम
इस सूत्र से तीनों इकाइयों का आपसी संबंध स्पष्ट होता है।

प्रश्न 19. किसी चालक में 0.5 ऐम्पियर की धारा प्रवाहित होती है जब उसके सिरों के बीच विभवान्तर 2 वोल्ट है। चालक का प्रतिरोध बताइए।

हल:
ओम के नियम से, R = V / I
दिया है: V = 2 वोल्ट, I = 0.5 ऐम्पियर
प्रतिरोध R = 2 V / 0.5 A = 4 ओम
अतः चालक का प्रतिरोध 4 ओम है।

प्रश्न 20. 24 ओम प्रतिरोध के एक चालक में 0.2 ऐम्पियर की धारा बह रही है। इस चालक के सिरों के बीच क्या विभवान्तर है ?

हल:
ओम के नियम से, V = I × R
दिया है: I = 0.2 ऐम्पियर, R = 24 ओम
विभवान्तर V = 0.2 A × 24 Ω = 4.8 वोल्ट
अतः चालक के सिरों के बीच विभवान्तर 4.8 वोल्ट है।

प्रश्न 21. दो तार जिनके प्रतिरोध 4 ओम और 2 ओम हैं, श्रेणीक्रम में एक बैटरी से जुड़े हैं। पहले तार में 2 ऐम्पियर की धारा बह रही है। दूसरे तार में धारा का मान कितना होगा? (2014)

हल:
श्रेणीक्रम में जुड़े सभी प्रतिरोधों में से समान धारा प्रवाहित होती है। चूँकि पहले तार में 2 ऐम्पियर धारा है, इसलिए दूसरे तार में भी धारा का मान 2 ऐम्पियर ही होगा।

प्रश्न 22. तीन चालक तार जिनके प्रतिरोध क्रमशः 5, 7 तथा 13 ओम हैं, श्रेणीक्रम में जोड़े गये हैं। इनके संयोजन का तुल्य प्रतिरोध ज्ञात कीजिए।

हल:
श्रेणीक्रम में तुल्य प्रतिरोध (Rs) सभी प्रतिरोधों के योग के बराबर होता है।
Rs = R1 + R2 + R3
Rs = 5 Ω + 7 Ω + 13 Ω = 25 ओम
अतः संयोजन का तुल्य प्रतिरोध 25 ओम है।

प्रश्न 23. 5 ओम तथा 10 ओम के प्रतिरोधों को समान्तर-क्रम में जोड़ा गया है। इस संयोजन का तुल्य प्रतिरोध ज्ञात कीजिए।

हल:
समान्तर क्रम में तुल्य प्रतिरोध (Rp) का सूत्र:
1/Rp = 1/R1 + 1/R2
यहाँ, R1 = 5 Ω, R2 = 10 Ω
1/Rp = 1/5 + 1/10 = (2 + 1)/10 = 3/10
इसलिए, Rp = 10/3 = 3.33 ओम (लगभग)
अतः संयोजन का तुल्य प्रतिरोध 10/3 ओम या 3.33 ओम है।

प्रश्न 24. दिये गये विद्युत परिपथ में धारा का मान बताइए।

[यहाँ एक परिपथ आरेख होना चाहिए था जिसमें 2Ω और 8Ω के प्रतिरोध समान्तर में और एक बैटरी जुड़ी है। धारा I पूछी गई है।]

हल:
माना बैटरी का विभवान्तर V है। चूँकि 2Ω और 8Ω के प्रतिरोध समान्तर क्रम में हैं, इसलिए दोनों के सिरों पर विभवान्तर समान (V) होगा।
माना 2Ω में धारा I1 और 8Ω में धारा I2 है।
ओम के नियम से, V = I1 × 2 और V = I2 × 8
इसलिए, I1 = V/2 और I2 = V/8
परिपथ में कुल धारा I = I1 + I2 = V/2 + V/8 = (4V + V)/8 = 5V/8
विभवान्तर V का मान दिए बिना धारा I का संख्यात्मक मान नहीं निकाला जा सकता। यदि V = 8 वोल्ट मान लें, तो I = 5 × 8 / 8 = 5 ऐम्पियर होगी।

प्रश्न 25. A एवं B के मध्य दिए गए परिपथ का तुल्य प्रतिरोध ज्ञात कीजिए। (2015)

[यहाँ एक परिपथ आरेख होना चाहिए था जिसमें दो 2Ω प्रतिरोध समान्तर में और फिर एक 2Ω प्रतिरोध श्रेणी में जुड़ा है।]

हल:
परिपथ के अनुसार, दो 2Ω के प्रतिरोध (मान लें R1 और R2) समान्तर क्रम में हैं।
इनका तुल्य प्रतिरोध Rp हो, तो
1/Rp = 1/2 + 1/2 = 1
अतः Rp = 1 Ω
यह तुल्य प्रतिरोध Rp (1 Ω) एक अन्य 2Ω के प्रतिरोध (मान लें R3) के साथ श्रेणीक्रम में जुड़ा है।
A और B के बीच कुल तुल्य प्रतिरोध RAB = Rp + R3 = 1 Ω + 2 Ω = 3 Ω
अतः A और B के मध्य तुल्य प्रतिरोध 3 ओम है।

प्रश्न 26. विद्युत धारा के ऊष्मीय प्रभाव से आप क्या समझते हैं? (2013)

उत्तर:
जब किसी चालक में विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तो चालक का प्रतिरोध इलेक्ट्रॉनों के प्रवाह में बाधा उत्पन्न करता है, जिसके कारण ऊर्जा का कुछ भाग ऊष्मा के रूप में व्यय होता है और चालक गर्म हो जाता है। विद्युत धारा के कारण चालक में ऊष्मा उत्पन्न होने की इस घटना को ही विद्युत धारा का ऊष्मीय प्रभाव कहते हैं।

प्रश्न 27. विद्युत ऊर्जा से आप क्या समझते हैं? (2013)

उत्तर:
विद्युत परिपथ में आवेश को प्रवाहित करने में जो कार्य किया जाता है या जो ऊर्जा व्यय होती है, उसे विद्युत ऊर्जा कहते हैं। यह ऊर्जा विभिन्न रूपों जैसे ऊष्मा, प्रकाश या यांत्रिक ऊर्जा में परिवर्तित हो सकती है। इसका SI मात्रक जूल (J) है। व्यावहारिक उपयोग के लिए इसे किलोवाट-घंटा (kWh) में भी मापा जाता है।

प्रश्न 28. यदि R प्रतिरोध वाले चालक में t सेकण्ड के लिए I ऐम्पियर धारा प्रवाहित की जाये तो उसमें उत्पन्न हुई ऊष्मा का सूत्र H, I, R तथा t के पदों में लिखिए।

उत्तर:
जूल के ऊष्मीय नियम के अनुसार, उत्पन्न ऊष्मा (H) का सूत्र है:
H = I2 R t जूल
यदि ऊष्मा कैलोरी में चाहिए, तो (1 कैलोरी = 4.2 जूल)
H = (I2 R t) / 4.2 कैलोरी

प्रश्न 29. जूल, वोल्ट तथा कूलॉम में क्या सम्बन्ध है? (2009, 14)

उत्तर:
विद्युत ऊर्जा (कार्य) = विभवान्तर × आवेश
जूल = वोल्ट × कूलॉम
अर्थात्, 1 जूल = 1 वोल्ट × 1 कूलॉम

प्रश्न 30. विद्युत हीटर बनाने के लिए किस पदार्थ के तार को प्रयुक्त करना चाहिए तथा क्यों? या नाइक्रोम के तार के तन्तु का उपयोग विद्युत ऊष्मक में क्यों किया जाता है? (2015)

उत्तर:
विद्युत हीटर बनाने के लिए नाइक्रोम (निकेल और क्रोमियम की मिश्रधातु) के तार का प्रयोग किया जाता है। इसके निम्नलिखित कारण हैं:

  1. इसका प्रतिरोध उच्च होता है, जिससे अधिक मात्रा में ऊष्मा उत्पन्न होती है।
  2. इसका गलनांक बहुत अधिक (लगभग 1400°C) होता है, इसलिए यह अधिक ताप पर भी पिघलता नहीं है।
  3. यह उच्च ताप पर ऑक्सीकृत नहीं होता, अर्थात हवा में जलकर नष्ट नहीं होता।

प्रश्न 31. धारा के ऊष्मीय प्रभाव पर आधारित चार विद्युत संयन्त्रों के नाम लिखिए।

उत्तर:
धारा के ऊष्मीय प्रभाव पर आधारित चार उपकरण हैं:

  1. विद्युत बल्ब (बिजली का बल्ब)
  2. विद्युत ऊष्मक (हीटर)
  3. विद्युत इस्तरी
  4. विद्युत केतली (गीजर)

प्रश्न 32. विद्युत परिपथ के सामान्य तार तथा फ्यूज के तार में क्या अन्तर होता है? (2017, 18)

उत्तर:

विद्युत परिपथ का सामान्य तारफ्यूज का तार
इसका गलनांक उच्च होता है।इसका गलनांक बहुत कम होता है।
यह ताँबे या एल्युमिनियम जैसी उच्च चालकता वाली धातु का बना होता है।यह सीसा, टिन व ताँबे की मिश्रधातु जैसी निम्न गलनांक वाली धातु का बना होता है।
इसका प्रतिरोध कम होता है।इसका प्रतिरोध सामान्य तार से अधिक होता है।
यह सामान्य धारा पर नहीं पिघलता।निर्धारित सीमा से अधिक धारा प्रवाहित होने पर यह पिघलकर परिपथ को तोड़ देता है।

प्रश्न 33. विद्युत फ्यूज किस धातु का बनाया जाता है तथा क्यों? (2011)

उत्तर:
विद्युत फ्यूज सामान्यतः टिन और सीसे की मिश्रधातु (जैसे 63% टिन, 37% सीसा) का बनाया जाता है। इसका उपयोग इसलिए किया जाता है क्योंकि:

  1. इस मिश्रधातु का गलनांक बहुत कम (लगभग 200°C) होता है।
  2. जब परिपथ में अनावश्यक रूप से अधिक धारा (ओवरलोड या शॉर्ट सर्किट के कारण) प्रवाहित होती है, तो फ्यूज का तार इस ऊष्मा से तुरंत पिघल जाता है।
  3. पिघलने पर यह परिपथ को तोड़ देता है, जिससे बाकी उपकरणों और तारों को नुकसान से बचाया जा सकता है।

प्रश्न 34. 400 W एवं 100 W के बल्बों में प्रयुक्त फिलामेन्ट के तारों में कौन पतला होगा और क्यों? (2012)

उत्तर:
100 W वाले बल्ब का फिलामेंट पतला होगा। कारण: एक ही वोल्टेज (जैसे 220 V) के लिए, शक्ति (P) = V2/R के सूत्र से, प्रतिरोध R = V2/P होता है। 100 W बल्ब का प्रतिरोध (R100), 400 W बल्ब के प्रतिरोध (R400) से अधिक होगा क्योंकि शक्ति कम है। प्रतिरोध (R) तार की लंबाई के समानुपाती और उसके अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल (मोटाई) के व्युत्क्रमानुपाती होता है। समान लंबाई के लिए, अधिक प्रतिरोध के लिए तार पतला (कम क्षेत्रफल) होना चाहिए। इसलिए 100 W बल्ब का फिलामेंट पतला होगा।

प्रश्न 35. विद्युत सामर्थ्य की परिभाषा लिखिए। या विद्युत शक्ति किसे कहते हैं ?

उत्तर:
किसी विद्युत परिपथ में विद्युत ऊर्जा के व्यय होने की दर को विद्युत सामर्थ्य या विद्युत शक्ति कहते हैं।
सूत्र: विद्युत शक्ति (P) = व्यय हुई विद्युत ऊर्जा (W) / समय (t)
या P = V × I (जहाँ V विभवान्तर और I धारा है)
इसका SI मात्रक वाट (W) है।

प्रश्न 36. एक हीटर पर 1 kWh - 220V अंकित है। इसका क्या अर्थ है?

उत्तर:
"1 kWh - 220V" अंकन का अर्थ है कि:

  1. हीटर 220 वोल्ट के विभवान्तर पर कार्य करने के लिए बना है।
  2. जब इसे 220 V पर चलाया जाता है, तो यह 1 घंटे (1 h) में 1 किलोवाट-घंटा (1 kWh) विद्युत ऊर्जा व्यय करता है।
  3. 1 kWh = 1000 वाट-घंटा, इसलिए इसकी शक्ति 1000 वाट या 1 किलोवाट है।

प्रश्न 37. एक विद्युत हीटर में 120 वोल्ट विभवान्तर पर 12 कूलॉम आवेश प्रवाहित होता है। हीटर में कितनी ऊर्जा व्यय होगी?

हल:
व्यय ऊर्जा (W) = विभवान्तर (V) × प्रवाहित आवेश (Q)
दिया है: V = 120 वोल्ट, Q = 12 कूलॉम
W = 120 V × 12 C = 1440 जूल
अतः हीटर में 1440 जूल ऊर्जा व्यय होगी।

प्रश्न 38. 10 वोल्ट तथा 0.5 ऐम्पियर के बल्ब से प्रति सेकण्ड कितने जूल ऊष्मा उत्पन्न होती है?

हल:
प्रति सेकंड उत्पन्न ऊष्मा का अर्थ है विद्युत शक्ति (P), क्योंकि शक्ति = ऊर्जा/समय।
शक्ति P = V × I
दिया है: V = 10 वोल्ट, I = 0.5 ऐम्पियर
P = 10 V × 0.5 A = 5 वाट (या 5 जूल/सेकंड)
अतः बल्ब से प्रति सेकंड 5 जूल ऊष्मा उत्पन्न होती है।

प्रश्न 39. किसी चालक तार के सिरों का विभवान्तर 30 वोल्ट है तथा धारा का मान 3 ऐम्पियर है। तार में ऊष्मा प्रवाह की दर की गणना कीजिए। (2017)

हल:
ऊष्मा प्रवाह की दर का अर्थ है प्रति सेकंड उत्पन्न ऊष्मा अर्थात विद्युत शक्ति (P)।
P = V × I
दिया है: V = 30 वोल्ट, I = 3 ऐम्पियर
P = 30 V × 3 A = 90 वाट या 90 जूल/सेकंड
यदि ऊष्मा कैलोरी/सेकंड में चाहिए, तो (1 कैलोरी = 4.2 जूल)
दर = 90 जूल/सेकंड ÷ 4.2 (जूल/कैलोरी) ≈ 21.43 कैलोरी/सेकंड
अतः तार में ऊष्मा प्रवाह की दर 90 जूल/सेकंड या लगभग 21.43 कैलोरी/सेकंड है।

प्रश्न 40. 250 वोल्ट, 5 ऐम्पियर फ्यूज वाले परिपथ में 25 वाट के कितने बल्ब जल सकते हैं? (2009, 11, 13, 14, 15, 17)

हल:
फ्यूज 5 A धारा सहन कर सकता है, इसलिए परिपथ की अधिकतम सुरक्षित शक्ति (Pmax) होगी:
Pmax = V × I = 250 V × 5 A = 1250 वाट
माना 'n' संख्या में 25 W के बल्ब जल सकते हैं।
कुल खपत शक्ति = n × 25 W
यह अधिकतम शक्ति से अधिक नहीं होनी चाहिए:
n × 25 W ≤ 1250 W
n ≤ 1250 / 25
n ≤ 50
अतः ऐसे 50 बल्ब जल सकते हैं। (ध्यान दें: व्यवहार में थोड़ा कम बल्ब लगाना सुरक्षित रहता है)।

प्रश्न 41.

एक विद्युत हीटर में 250 वोल्ट विभवान्तर पर 4.5 ऐम्पियर धारा प्रवाहित होती है। हीटर की सामर्थ्य की गणना कीजिए। (2013)

हल:
दिया गया है:
विभवान्तर (V) = 250 वोल्ट
धारा (I) = 4.5 ऐम्पियर

विद्युत सामर्थ्य (P) = विभवान्तर × धारा
P = V × I
P = 250 वोल्ट × 4.5 ऐम्पियर
P = 1125 वाट

अतः, हीटर की सामर्थ्य 1125 वाट (या 1.125 किलोवाट) है।

प्रश्न 42.

किसी परिपथ में 10 ऐम्पियर की धारा प्रवाहित की जाती है। परिपथ में लगे 2 ओम प्रतिरोध वाले चालक में प्रति सेकण्ड उत्पन्न ऊष्मा की गणना कीजिए। (2012)

हल:
दिया गया है:
धारा (I) = 10 ऐम्पियर
प्रतिरोध (R) = 2 ओम
समय (t) = 1 सेकण्ड

जूल के नियम से, उत्पन्न ऊष्मा (जूल में) H = I² × R × t
H = (10)² × 2 × 1
H = 100 × 2 × 1 = 200 जूल

चूँकि 1 कैलोरी = 4.2 जूल,
अतः ऊष्मा (कैलोरी में) = 200 जूल / 4.2 (जूल/कैलोरी)
H ≈ 47.62 कैलोरी

इस प्रकार, चालक में प्रति सेकण्ड लगभग 47.62 कैलोरी ऊष्मा उत्पन्न होती है।

प्रश्न 43.

किसी चालक के दो बिन्दुओं के बीच विभवान्तर 10 वोल्ट है। चालक में धारा का मान ज्ञात कीजिए। यदि उसमें उत्पन्न ऊष्मा 15 जूल प्रति सेकण्ड हो। (2014, 16)

हल:
दिया गया है:
विभवान्तर (V) = 10 वोल्ट
प्रति सेकण्ड उत्पन्न ऊष्मा (शक्ति, P) = 15 जूल/सेकण्ड = 15 वाट

हम जानते हैं, विद्युत शक्ति P = V × I
इसलिए, 15 = 10 × I
धारा (I) = 15 / 10 = 1.5 ऐम्पियर

अतः, चालक में प्रवाहित धारा का मान 1.5 ऐम्पियर है।

प्रश्न 1. विद्युत धारा से क्या तात्पर्य है ? इसका मात्रक बताइए। (2014)

उत्तर:
विद्युत धारा से तात्पर्य किसी चालक में आवेश के प्रवाह की दर से है। अर्थात्, एकांक समय में चालक के किसी अनुप्रस्थ काट से गुजरने वाले आवेश की मात्रा को विद्युत धारा कहते हैं। इसे 'I' से प्रदर्शित किया जाता है।
गणितीय रूप में: I = Q / t, जहाँ Q आवेश है और t समय है।
इसका मात्रक ऐम्पियर (या कूलॉम/सेकण्ड) है। यह एक अदिश राशि है।

प्रश्न 2. विद्युत विभव की परिभाषा दीजिए तथा चालक के विभवान्तर एवं धारा में सम्बन्ध लिखिए। (2012)

उत्तर:
विद्युत विभव: अनन्त से एकांक धनावेश को विद्युत क्षेत्र के किसी बिन्दु तक लाने में किए गए कार्य को उस बिन्दु का विद्युत विभव कहते हैं। इसका मात्रक वोल्ट है।

विभवान्तर एवं धारा में सम्बन्ध: ओम के नियम के अनुसार, किसी चालक के सिरों पर आरोपित विभवान्तर (V) तथा उसमें प्रवाहित धारा (I) का अनुपात एक नियतांक होता है, जिसे प्रतिरोध (R) कहते हैं।
अर्थात्, V / I = R (नियतांक) या V = I × R

प्रश्न 3. किसी विद्युत परिपथ में अमीटर और वोल्टमीटर क्यों लगाये जाते हैं ? इन्हें परिपथ में किन क्रमों में जोड़ा जाता है? (2015) या अमीटर का क्या कार्य है? इसे परिपथ में किस प्रकार जोड़ते हैं? (2016)

उत्तर:
अमीटर विद्युत परिपथ में प्रवाहित धारा को मापने के लिए लगाया जाता है।
वोल्टमीटर परिपथ के किन्हीं दो बिन्दुओं (या किसी उपकरण के सिरों) के बीच विभवान्तर (वोल्टेज) मापने के लिए लगाया जाता है।

जोड़ने का तरीका:
1. अमीटर को परिपथ में हमेशा श्रेणीक्रम में जोड़ा जाता है ताकि पूरी धारा इससे होकर गुजरे।
2. वोल्टमीटर को उन दो बिन्दुओं के बीच समान्तर क्रम (पार्श्वक्रम) में जोड़ा जाता है, जिनके बीच विभवान्तर मापना होता है।

प्रश्न 4. विद्युत प्रतिरोध का क्या अर्थ है ? एक धातु के तार का प्रतिरोध किन-किन बातों पर निर्भर करता है? या प्रतिरोध से क्या तात्पर्य है ? यह किन-किन बातों पर निर्भर करता है? (2011) या विद्युत प्रतिरोध क्या है ? इसका मात्रक लिखिए। (2012, 15)

उत्तर:
विद्युत प्रतिरोध: किसी चालक का वह गुण जो विद्युत धारा के प्रवाह का विरोध करता है, उस चालक का विद्युत प्रतिरोध कहलाता है। इसे 'R' से दर्शाया जाता है। ओम के नियमानुसार, प्रतिरोध चालक के सिरों के विभवान्तर (V) तथा उसमें प्रवाहित धारा (I) के अनुपात के बराबर होता है।
R = V / I
इसका मात्रक ओम (Ω) है।

धातु के तार के प्रतिरोध पर निर्भरता:
1. तार की लम्बाई (l): एक ही पदार्थ एवं समान मोटाई के तार का प्रतिरोध उसकी लम्बाई के समानुपाती होता है। R ∝ l
2. तार की अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल (A): एक ही पदार्थ एवं समान लम्बाई के तार का प्रतिरोध उसके अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल के व्युत्क्रमानुपाती होता है। R ∝ 1/A
3. तार के पदार्थ की प्रकृति एवं तापमान भी प्रतिरोध को प्रभावित करते हैं।

प्रश्न 5. एक चालक का प्रतिरोध 3.0 ओम है। इसमें 0.5 ऐम्पियर की धारा प्रवाहित करने से कितना विभवान्तर उत्पन्न होगा? यदि इस तार के सिरों पर उत्पन्न विभवान्तर 2.4 वोल्ट हो, तो इसमें कितनी धारा प्रवाहित होगी?

हल:
भाग (i):
दिया है: प्रतिरोध (R) = 3.0 ओम, धारा (I) = 0.5 ऐम्पियर
ओम के नियम से, विभवान्तर (V) = I × R
V = 0.5 ऐम्पियर × 3.0 ओम = 1.5 वोल्ट

भाग (ii):
दिया है: विभवान्तर (V) = 2.4 वोल्ट, प्रतिरोध (R) = 3.0 ओम
ओम के नियम से, धारा (I) = V / R
I = 2.4 वोल्ट / 3.0 ओम = 0.8 ऐम्पियर

अतः, 0.5 A धारा पर 1.5 V विभवान्तर उत्पन्न होगा और 2.4 V पर 0.8 A धारा प्रवाहित होगी।

प्रश्न 6. दिए गए परिपथ में 1.5 ऐम्पियर की धारा प्रवाहित हो रही है। निम्न को ज्ञात कीजिए (2013, 17)

Circuit Diagram
(नोट: यहाँ मूल प्रश्न में एक परिपथ आरेख था। उसे दर्शाने के लिए एक सामान्य चित्र का नाम दिया गया है।)

(i) प्रतिरोध R का मान (ii) A तथा B के बीच विभवान्तर

हल:
मान लीजिए परिपथ में तीन प्रतिरोध श्रेणीक्रम में जुड़े हैं: R, 2Ω और 4Ω। पूरे परिपथ में धारा (I) = 1.5 A है।

(i) प्रतिरोध R का मान:
चूँकि प्रतिरोध श्रेणीक्रम में हैं, सभी में समान धारा 1.5 A बहती है।
R प्रतिरोध के सिरों पर विभवान्तर 3 वोल्ट दिया है (मान लिया)।
ओम के नियम से, V = I × R
3 V = 1.5 A × R
R = 3 V / 1.5 A = 2 ओम

(ii) A तथा B के बीच विभवान्तर:
A और B के बीच कुल प्रतिरोध (श्रेणीक्रम में) RAB = R + 2Ω + 4Ω = 2Ω + 2Ω + 4Ω = 8 ओम
A व B के बीच विभवान्तर VAB = I × RAB
VAB = 1.5 A × 8 Ω = 12 वोल्ट

(नोट: यदि मूल आरेख में प्रतिरोध मान भिन्न थे, तो उनके अनुसार गणना करें। यहाँ एक संभावित हल प्रस्तुत किया गया है।)

प्रश्न 7. दो प्रतिरोधों के मान क्रमशः 6 ओम एवं 3 ओम हैं। इनके संयोजन से बनने वाले अधिकतम व न्यूनतम प्रतिरोध की गणना कीजिए। (2014)

उत्तर:
दिया है: R1 = 6 Ω, R2 = 3 Ω

अधिकतम प्रतिरोध: यह तब प्राप्त होता है जब प्रतिरोधों को श्रेणीक्रम में जोड़ा जाता है।
तुल्य प्रतिरोध Rs = R1 + R2 = 6 Ω + 3 Ω = 9 ओम

न्यूनतम प्रतिरोध: यह तब प्राप्त होता है जब प्रतिरोधों को समान्तर क्रम में जोड़ा जाता है।
1 / Rp = 1 / R1 + 1 / R2 = 1/6 + 1/3 = 1/6 + 2/6 = 3/6 = 1/2
इसलिए, Rp = 2 ओम

अतः, अधिकतम प्रतिरोध 9 ओम और न्यूनतम प्रतिरोध 2 ओम होगा।

प्रश्न 8. दो प्रतिरोध 4 ओम तथा 12 ओम के हैं। इन्हें 10 वोल्ट के सेल से जोड़ने पर परिपथ में कुल कितनी धारा बहेगी, यदि प्रतिरोधों को - (i) श्रेणीक्रम में (ii) समान्तर क्रम में जोड़ा जाये? (2016)

हल:
दिया है: R1 = 4 Ω, R2 = 12 Ω, विभवान्तर (V) = 10 वोल्ट

(i) श्रेणीक्रम में जोड़ने पर:
तुल्य प्रतिरोध Rs = R1 + R2 = 4 Ω + 12 Ω = 16 Ω
परिपथ में धारा (I) = V / Rs = 10 V / 16 Ω = 0.625 ऐम्पियर

(ii) समान्तर क्रम में जोड़ने पर:
तुल्य प्रतिरोध Rp का मान: 1/Rp = 1/R1 + 1/R2 = 1/4 + 1/12 = (3+1)/12 = 4/12 = 1/3
इसलिए, Rp = 3 Ω
परिपथ में धारा (I) = V / Rp = 10 V / 3 Ω ≈ 3.33 ऐम्पियर

अतः, श्रेणीक्रम में धारा 0.625 A और समान्तर क्रम में लगभग 3.33 A होगी।

प्रश्न 9. निम्न विद्युत परिपथ में सेल का आन्तरिक प्रतिरोध ज्ञात कीजिए। (2011, 16, 17)

Circuit with internal resistance
(नोट: मूल प्रश्न में एक परिपथ आरेख था जिसमें 6Ω के दो समान्तर प्रतिरोध, एक अज्ञात आंतरिक प्रतिरोध 'r' और 2V का सेल दिखाया गया था। कुल धारा 0.5 A दी गई थी।)

हल:
माना सेल का विद्युत वाहक बल (emf) E = 2 वोल्ट है और आंतरिक प्रतिरोध 'r' है।
बाह्य परिपथ में 6Ω के दो प्रतिरोध समान्तर क्रम में जुड़े हैं।
इनका तुल्य प्रतिरोध Rp: 1/Rp = 1/6 + 1/6 = 2/6 = 1/3. अतः Rp = 3 Ω

अब, पूरे परिपथ का कुल प्रतिरोध = आंतरिक प्रतिरोध (r) + बाह्य तुल्य प्रतिरोध (Rp) = (r + 3) Ω
परिपथ में कुल धारा (I) = 0.5 A

सेल के टर्मिनल विभवान्तर के सूत्र से: E = I × (R + r)
2 = 0.5 × (3 + r)
2 / 0.5 = 3 + r
4 = 3 + r
इसलिए, आंतरिक प्रतिरोध r = 4 - 3 = 1 ओम

अतः, सेल का आन्तरिक प्रतिरोध 1 ओम है।

प्रश्न 10. निम्न परिपथ में प्रवाहित विद्युत धारा का मान ज्ञात कीजिए। (2015, 17)

Circuit for current calculation
(नोट: मूल प्रश्न में एक परिपथ आरेख था जिसमें 4Ω के दो समान्तर प्रतिरोध और एक 2Ω का श्रेणी प्रतिरोध 10V के सेल से जुड़े थे।)

हल:
दिया है: सेल का विभवान्तर V = 10 वोल्ट
परिपथ में 4Ω के दो प्रतिरोध समान्तर क्रम में हैं।
इनका तुल्य प्रतिरोध Rp: 1/Rp = 1/4 + 1/4 = 2/4 = 1/2. अतः Rp = 2 Ω

यह तुल्य प्रतिरोध (2Ω) एक अन्य 2Ω के प्रतिरोध के साथ श्रेणीक्रम में जुड़ा है।
अतः पूरे परिपथ का कुल प्रतिरोध Rtotal = 2Ω + 2Ω = 4 Ω

ओम के नियम से, परिपथ में प्रवाहित कुल धारा I = V / Rtotal
I = 10 V / 4 Ω = 2.5 ऐम्पियर

अतः, परिपथ में प्रवाहित विद्युत धारा का मान 2.5 ऐम्पियर है।

प्रश्न 11. नीचे दिये गये चित्र में दिये गये विद्युत परिपथ में A तथा B बिन्दुओं के बीच परिणामी प्रतिरोध का मान ज्ञात कीजिए। (2014, 15, 17, 18)

Circuit for equivalent resistance
(नोट: मूल प्रश्न में एक परिपथ आरेख था जिसमें 2Ω, 3Ω, 4Ω श्रेणीक्रम में और इस संयोजन के समान्तर एक 9Ω का प्रतिरोध A और B बिन्दुओं के बीच जुड़ा था।)

हल:
सर्वप्रथम, श्रेणीक्रम में जुड़े प्रतिरोधों 2Ω, 3Ω और 4Ω का तुल्य प्रतिरोध ज्ञात करते हैं।
Rs = 2Ω + 3Ω + 4Ω = 9 Ω

अब, यह 9Ω का प्रतिरोध (Rs) दूसरे 9Ω के प्रतिरोध के साथ बिन्दु A और B के बीच समान्तर क्रम में जुड़ा है।
समान्तर संयोजन का तुल्य प्रतिरोध RAB:
1/RAB = 1/9 + 1/9 = 2/9
इसलिए, RAB = 9/2 = 4.5 ओम

अतः, A तथा B बिन्दुओं के बीच परिणामी (तुल्य) प्रतिरोध 4.5 ओम है।

प्रश्न 12. संलग्न विद्युत परिपथ में बहने वाली विद्युत धारा की गणना कीजिए।

Final circuit for current
(नोट: मूल प्रश्न में एक परिपथ आरेख था जिसमें 1Ω, 4Ω, 1Ω श्रेणीक्रम में और यह संयोजन एक 6Ω के प्रतिरोध के समान्तर था। यह सब 12V के सेल से जुड़ा था।)

हल:
सर्वप्रथम, श्रेणीक्रम में जुड़े प्रतिरोधों 1Ω, 4Ω और 1Ω का तुल्य प्रतिरोध ज्ञात करते हैं।
Rs = 1Ω + 4Ω + 1Ω = 6 Ω

अब, यह 6Ω का प्रतिरोध (Rs) दूसरे 6Ω के प्रतिरोध के साथ समान्तर क्रम में जुड़ा है।
इनका तुल्य प्रतिरोध Rp:
1/Rp = 1/6 + 1/6 = 2/6 = 1/3
इसलिए, Rp = 3 Ω

यह तुल्य प्रतिरोध (3Ω) 12V के सेल से सीधे जुड़ा है।
ओम के नियम से, परिपथ में बहने वाली कुल धारा I = V / Rp
I = 12 V / 3 Ω = 4 ऐम्पियर

अतः, परिपथ में बहने वाली विद्युत धारा 4 ऐम्पियर है।

प्रश्न 13,
ऊष्मा उत्पादन सम्बन्धी जूल का नियम लिखिए। या किसी चालक तार में धारा प्रवाहित करने पर उसमें उत्पन्न ऊष्मा किन-किन कारकों पर निर्भर करती है? स्पष्ट कीजिए। (2016)

उत्तर:
जूल के नियम के अनुसार, जब किसी चालक तार में विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तो उत्पन्न ऊष्मा (Q) तीन कारकों पर निर्भर करती है। यदि चालक का प्रतिरोध R हो, उसमें प्रवाहित धारा I हो और समय t हो, तो उत्पन्न ऊष्मा का सूत्र है:

Q = I² R t जूल
इसे जूल का ऊष्मीय प्रभाव का नियम कहते हैं।
स्पष्ट है कि उत्पन्न ऊष्मा:
  1. चालक के प्रतिरोध (R) के अनुक्रमानुपाती होती है: Q ∝ R
  2. प्रवाहित धारा के वर्ग (I²) के अनुक्रमानुपाती होती है: Q ∝ I²
  3. धारा प्रवाह के समय (t) के अनुक्रमानुपाती होती है: Q ∝ t

प्रश्न 14.
तार में कुछ देर तक धारा प्रवाहित करने से तार का ताप 3°C बढ़ जाता है। यदि धारा को दोगुना कर दें तो उतनी ही देर में तार का ताप कितना बढ़ जायेगा? (2012)

हल:
जूल के नियम से, उत्पन्न ऊष्मा (Q) ∝ धारा का वर्ग (I²)।
प्रारंभ में, धारा = I, ताप वृद्धि = 3°C
जब धारा दोगुनी (2I) कर दी जाती है, तो उत्पन्न ऊष्मा (2I)² = 4I² के अनुक्रमानुपाती होगी, यानी ऊष्मा चार गुनी हो जाएगी।
चूँकि ताप वृद्धि उत्पन्न ऊष्मा के अनुक्रमानुपाती होती है, इसलिए ताप वृद्धि भी चार गुनी हो जाएगी।
अतः नई ताप वृद्धि = 4 × 3°C = 12°C होगी।

प्रश्न 15.
R₁ तथा R₂ प्रतिरोधों के दो चालक एक सेल से समान्तर-क्रम में संयोजित हैं। किसी निश्चित समय में चालकों में व्यय हुई विद्युत ऊर्जाओं का अनुपात कितना होगा?

उत्तर:
दोनों चालक R₁ ओम तथा R₂ ओम एक सेल से समान्तर क्रम में जुड़े हैं। समान्तर क्रम में प्रत्येक चालक के सिरों पर विभवान्तर (V) समान होता है।
किसी चालक में t समय में व्यय विद्युत ऊर्जा (W) का सूत्र है: W = (V² / R) × t
पहले चालक के लिए: W₁ = (V² / R₁) × t
दूसरे चालक के लिए: W₂ = (V² / R₂) × t
दोनों का अनुपात लेने पर:

W₁ / W₂ = (V² / R₁) × t / (V² / R₂) × t = R₂ / R₁
अतः, व्यय ऊर्जाओं का अनुपात उनके प्रतिरोधों के अनुपात का प्रतिलोम (व्युत्क्रम) होता है। जिस चालक का प्रतिरोध कम होगा, उसमें अधिक ऊर्जा व्यय होगी।

प्रश्न 16.
स्विच किसे कहते हैं? इसे परिपथ में किस क्रम में लगाते हैं?

उत्तर:
स्विच एक ऐसी विद्युत युक्ति है जिसका उपयोग किसी परिपथ में विद्युत धारा के प्रवाह को चालू (ON) या बंद (OFF) करने के लिए किया जाता है। जब स्विच ON होता है तो परिपथ पूरा होता है और धारा प्रवाहित होती है। जब स्विच OFF होता है तो परिपथ टूट जाता है और धारा का प्रवाह रुक जाता है।
स्विच को हमेशा परिपथ में श्रेणीक्रम में लगाया जाता है, ताकि यह मुख्य धारा प्रवाह को नियंत्रित कर सके।

प्रश्न 17.
घरों की वायरिंग के परिपथ में फ्यूज का क्या महत्त्व है ? आवश्यक परिपथ बनाकर स्पष्ट कीजिए (2011, 12, 13, 14, 16, 17, 18)

उत्तर:
फ्यूज घरों की विद्युत वायरिंग में एक सुरक्षा युक्ति के रूप में कार्य करता है। इसका मुख्य कार्य विद्युत परिपथ और उपकरणों को अत्यधिक धारा से होने वाली क्षति से बचाना है।
जब कभी शॉर्ट सर्किट होता है (तारों का आवरण हटने से तार आपस में छू जाते हैं) या अतिभारण होता है (बहुत सारे उपकरण एक साथ चलाने पर), तो परिपथ में प्रतिरोध बहुत कम हो जाता है और धारा का मान खतरनाक स्तर तक बढ़ जाता है। इस अत्यधिक धारा से तार गर्म होकर आग पकड़ सकते हैं या उपकरण जल सकते हैं।
फ्यूज एक पतला तार होता है जिसकी एक निश्चित धारा वहन क्षमता होती है। जब परिपथ में धारा इस सीमा से अधिक हो जाती है, तो फ्यूज का तार अपने गलनांक पर पिघल (गल) जाता है। इससे परिपथ टूट जाता है और धारा का प्रवाह रुक जाता है, जिससे बड़ी दुर्घटना होने से बच जाती है।

फ्यूज युक्त एक साधारण परिपथ आरेख:
[सेल] --- [स्विच] --- [फ्यूज] --- [बल्ब] --- [सेल]

प्रश्न 18.
विद्युत बल्ब में कौन-सी गैस भरी जाती है और क्यों?

उत्तर:
उच्च सामर्थ्य वाले विद्युत बल्बों में प्राय: नाइट्रोजन (N₂) या आर्गन (Ar) जैसी निष्क्रिय (अक्रिय) गैसें भरी जाती हैं।
इसका कारण यह है कि बल्ब का टंगस्टन तंतु बहुत अधिक ताप (लगभग 2500°C) पर चमकता है। निर्वात में यह तंतु तेजी से वाष्पीकृत होक� पतला हो जाता और जल्दी टूट जाता। इन निष्क्रिय गैसों को भरने से तंतु के वाष्पीकरण की दर कम हो जाती है। इससे तंतु का जीवनकाल बढ़ जाता है और बल्ब की दक्षता व चमक बनी रहती है।

प्रश्न 19.
वाट की परिभाषा दीजिए। किलोवाट-घण्टा तथा जूल में सम्बन्ध स्थापित कीजिए। (2011, 12, 14)
या किलोवाट-घण्टा (यूनिट) क्या है? इसकी परिभाषा दीजिए। या किलोवाट-घण्टा से क्या अर्थ है ?
या किलोवाट-घण्टा तथा जूल में सम्बन्ध स्थापित कीजिए। (2013) किलोवाट को परिभाषित कीजिए। (2011, 12, 17)
या किलोवाट-घण्टा को जूल में बदलिए। (2018)

उत्तर:
वाट की परिभाषा: वाट शक्ति (सामर्थ्य) का मात्रक है। 1 वाट उस स्रोत की शक्ति है जो 1 सेकंड में 1 जूल कार्य करता है। अर्थात, 1 W = 1 J/s.
विद्युत में, शक्ति P = V × I, इसलिए 1 वाट = 1 वोल्ट × 1 ऐम्पियर भी होता है।

किलोवाट-घंटा (kWh) की परिभाषा: यह विद्युत ऊर्जा का बड़ा मात्रक है, जिसे सामान्य भाषा में 'यूनिट' कहते हैं। 1 किलोवाट-घंटा वह ऊर्जा है जो 1 किलोवाट (1000 वाट) शक्ति वाले स्रोत द्वारा 1 घंटे में व्यय की जाती है।

किलोवाट-घंटा और जूल में संबंध:

1 kWh = 1 kW × 1 h
= 1000 W × 3600 s     [∵ 1 घंटा = 3600 सेकंड]
= 1000 J/s × 3600 s     [∵ 1 W = 1 J/s]
= 3,600,000 J
= 3.6 × 10⁶ जूल

प्रश्न 20.
दो विद्युत बल्बों में समान धातु एवं समान लम्बाई के तन्तु लगे हैं, परन्तु एक बल्ब का तन्तु दूसरे की अपेक्षा अधिक मोटा है। किस बल्ब की सामर्थ्य अधिक होगी तथा क्यों? (बल्बों की वोल्टता समान है) (2014,18)

उत्तर:
बल्ब की सामर्थ्य (शक्ति) P = V² / R के सूत्र से दी जाती है, जहाँ V विभवान्तर (जो दोनों के लिए समान है) और R तंतु का प्रतिरोध है।
प्रतिरोध (R) तार की लंबाई (l), अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल (A) और पदार्थ की प्रतिरोधकता (ρ) पर निर्भर करता है: R = ρ l / A.
चूंकि दोनों तंतु समान धातु (समान ρ) और समान लंबाई (l) के हैं, इसलिए उनका प्रतिरोध केवल उनके क्षेत्रफल (A) पर निर्भर करेगा।
मोटे तंतु का क्षेत्रफल अधिक होता है। क्षेत्रफल अधिक होने से प्रतिरोध (R) कम हो जाता है (R ∝ 1/A)।
सामर्थ्य के सूत्र P = V² / R में, V समान है और R कम है, तो सामर्थ्य (P) अधिक होगी।
अतः मोटे तंतु वाले बल्ब की सामर्थ्य अधिक होगी और वह अधिक चमकीला होगा।

प्रश्न 21. एक नामांकित विद्युत परिपथ बनाइए जिसमें रेगुलेटर, स्विच, पंखा तथा वैद्युत बल्ब घर में मेन्स से जुड़े दिखाये गये हैं। (2011, 17)

उत्तर:

घरेलू विद्युत परिपथ का नामांकित आरेख

[मेन्स का लाइव (गर्म) तार] --- [मुख्य फ्यूज] --- [विद्युत मीटर] ---
|
+---[स्विच 1]---[रेगुलेटर]---[पंखा]---[न्यूट्रल तार]
|
+---[स्विच 2]---[विद्युत बल्ब]---[न्यूट्रल तार]

(नोट: आरेख में दिखाया गया है कि मेन्स के दो तारों - लाइव (गर्म) और न्यूट्रल - से विभिन्न उपकरण समान्तर क्रम में जुड़े हैं। प्रत्येक उपकरण के साथ एक स्विच श्रेणीक्रम में लगा है। पंखे के साथ रेगुलेटर लगा है जो उसकी गति नियंत्रित करता है।)

प्रश्न 22. 5 ओम प्रतिरोध तथा 10 ओम प्रतिरोध के तारों में समान विद्युत धारा समान समय तक प्रवाहित करने पर तारों में उत्पन्न हुई ऊष्माओं में क्या अनुपात होगा?

हल:
जूल के ऊष्मीय नियम के अनुसार, उत्पन्न ऊष्मा H = I²Rt (जूल में)।
यहाँ, दोनों तारों में धारा (I) समान है और समय (t) भी समान है।
अतः उत्पन्न ऊष्मा केवल प्रतिरोध (R) के अनुक्रमानुपाती होगी: H ∝ R.
पहले तार के लिए: H₁ ∝ R₁ = 5 Ω
दूसरे तार के लिए: H₂ ∝ R₂ = 10 Ω
अतः ऊष्माओं का अनुपात होगा:

H₁ : H₂ = R₁ : R₂ = 5 : 10 = 1 : 2

किसी विद्युत मोटर की सामर्थ्य 7.5 किलोवाट है। इसने 8 घण्टा प्रतिदिन की दर से 15 दिन कार्य किया। कितने यूनिट (किलोवाट- घण्टा) विद्युत ऊर्जा व्यय हुई? इसका मान जूल में भी ज्ञात कीजिए। (2011, 13, 14, 18)

हल:
व्यय विद्युत ऊर्जा (किलोवाट-घण्टा में) = सामर्थ्य (किलोवाट में) × समय (घंटों में)
सामर्थ्य = 7.5 किलोवाट
प्रतिदिन समय = 8 घंटे
दिनों की संख्या = 15
व्यय ऊर्जा = 7.5 × 8 × 15 = 900 किलोवाट-घंटा (यूनिट)
1 किलोवाट-घंटा = 3.6 × 106 जूल
अतः जूल में ऊर्जा = 900 × 3.6 × 106 = 3.24 × 109 जूल

1.5 किलोवाट सामर्थ्य के हीटर का उपयोग 30 मिनट तक करने में कितनी ऊष्मा प्राप्त होगी? (2009, 1)

हल:
सामर्थ्य (P) = 1.5 किलोवाट = 1500 वाट
समय (t) = 30 मिनट = 30 × 60 = 1800 सेकंड
प्राप्त ऊष्मीय ऊर्जा (H) = सामर्थ्य × समय = P × t
H = 1500 वाट × 1800 सेकंड = 2,700,000 जूल (या 2.7 × 106 जूल)
1 कैलोरी = 4.18 जूल (लगभग)
अतः कैलोरी में ऊष्मा = 2,700,000 / 4.18 ≈ 6.46 × 105 कैलोरी

दो बल्बों जिनमें एक पर 100 वाट-220 वोल्ट तथा दूसरे पर 60 वाट-220 वोल्ट लिखा है को 220 वोल्ट की सप्लाई लाइन से समान्तर क्रम में जोड़ा गया है। सप्लाई लाइन से निर्गत धारा की गणना कीजिए। (2009, 14)

हल:
समान्तर क्रम में जुड़े होने के कारण, प्रत्येक बल्ब 220 V पर ही कार्य करेगा।
पहले बल्ब (100 W) द्वारा ली गई धारा, I1 = P1/V = 100/220 ≈ 0.4545 A
दूसरे बल्ब (60 W) द्वारा ली गई धारा, I2 = P2/V = 60/220 ≈ 0.2727 A
सप्लाई लाइन से निर्गत कुल धारा, I = I1 + I2 = 0.4545 + 0.2727 = 0.7272 ऐम्पियर (लगभग 0.73 A)

एक विद्युत बल्ब पर 250 V-200 W लिखा है। इसे 250 वोल्ट के मेन्स से जोड़ने पर बल्ब में कितनी अधिकतम धारा प्रवाहित होगी? बल्ब के प्रतिरोध की भी गणना कीजिए। (2012, 13, 14, 15, 16, 17, 18)

हल:
विभवान्तर (V) = 250 वोल्ट, सामर्थ्य (P) = 200 वाट
सूत्र P = V × I का उपयोग करने पर,
अधिकतम धारा (I) = P / V = 200 / 250 = 0.8 ऐम्पियर
बल्ब का प्रतिरोध (R) = V / I = 250 / 0.8 = 312.5 ओम
(या सूत्र P = V²/R से, R = V²/P = (250 × 250)/200 = 62500/200 = 312.5 ओम)

25 वाट तथा 100 वाट के दो बल्बों के प्रतिरोधों की तुलना कीजिए, यदि इनकी वोल्टता समान हो। (2014)

हल:
माना दोनों बल्बों की कार्य वोल्टता V वोल्ट है।
सामर्थ्य (P) = V² / R, इसलिए प्रतिरोध R = V² / P
25 वाट के बल्ब का प्रतिरोध, R25 = V² / 25
100 वाट के बल्ब का प्रतिरोध, R100 = V² / 100
प्रतिरोधों का अनुपात: R25 : R100 = (V²/25) : (V²/100) = (1/25) : (1/100) = 4 : 1
अतः 25 वाट के बल्ब का प्रतिरोध, 100 वाट के बल्ब के प्रतिरोध से 4 गुना अधिक होगा।

एक बल्ब पर 60 W-220 V लिखा है। इसको 220 वोल्ट के विद्युत मेन्स में लगाने पर कितनी धारा प्रवाहित होगी? बल्ब द्वारा 5 मिनट में उत्पन्न ऊष्मा की गणना कीजिए। (2011, 18)

हल:
विभवान्तर (V) = 220 V, सामर्थ्य (P) = 60 W
धारा (I) = P / V = 60 / 220 = 3/11 ऐम्पियर ≈ 0.273 A
समय (t) = 5 मिनट = 5 × 60 = 300 सेकंड
उत्पन्न ऊष्मा (जूल में) = सामर्थ्य × समय = P × t = 60 W × 300 s = 18000 जूल
1 कैलोरी ≈ 4.18 जूल
अतः कैलोरी में ऊष्मा = 18000 / 4.18 ≈ 4306 कैलोरी (लगभग)

एक घर में 220 V-100 W के 5 बल्ब प्रतिदिन 8 घण्टे जलते हैं तो 2 रुपये प्रति यूनिट की दर से एक माह (30 दिन) का खर्च ज्ञात कीजिए। (2014)

हल:
एक बल्ब की सामर्थ्य = 100 W = 0.1 kW
बल्बों की संख्या = 5
प्रतिदिन उपयोग का समय = 8 घंटे
दिनों की संख्या = 30
व्यय विद्युत ऊर्जा (यूनिट में) = (कुल सामर्थ्य kW में) × (घंटे) × (दिन)
= (5 × 0.1) × 8 × 30 = 0.5 × 8 × 30 = 120 किलोवाट-घंटा (यूनिट)
1 यूनिट का मूल्य = ₹ 2
कुल खर्च = 120 × 2 = ₹ 240

एक विद्युत बल्ब का प्रतिरोध 1000 ओम है। इसको 200 वोल्ट के मेन्स से जोड़कर 10 घण्टे तक जलाने में कितने यूनिट विद्युत ऊर्जा व्यय होगी?

हल:
प्रतिरोध (R) = 1000 ओम, विभवान्तर (V) = 200 वोल्ट
बल्ब में प्रवाहित धारा (I) = V / R = 200 / 1000 = 0.2 ऐम्पियर
बल्ब की सामर्थ्य (P) = V × I = 200 × 0.2 = 40 वाट = 0.04 किलोवाट
समय (t) = 10 घंटे
व्यय विद्युत ऊर्जा = सामर्थ्य (kW में) × समय (घंटे) = 0.04 × 10 = 0.4 किलोवाट-घंटा (यूनिट)

200 ओम प्रतिरोध के तार में 1.5 ऐम्पियर की धारा प्रवाहित करने से ऊर्जा व्यय की दर ज्ञात कीजिए। यदि उपर्युक्त तार में ऊर्जा व्यय की दर 1250 वाट लें, तो तार के सिरों का विभवान्तर कितना होगा? (2014, 18)

हल:
भाग 1:
प्रतिरोध (R) = 200 Ω, धारा (I) = 1.5 A
ऊर्जा व्यय की दर (सामर्थ्य, P) = I² × R = (1.5)² × 200 = 2.25 × 200 = 450 वाट
भाग 2:
प्रतिरोध (R) = 200 Ω, सामर्थ्य (P) = 1250 W
सूत्र P = V² / R से,
V² = P × R = 1250 × 200 = 250000
V = √250000 = 500 वोल्ट
अतः तार के सिरों का विभवान्तर 500 V होगा।

आपके घर में विद्युत कटौती के दौरान आवश्यक विद्युत आपूर्ति के लिए 12 वोल्ट/150 ऐम्पियर-घण्टा की एक बैटरी लगायी गयी है। यदि विद्युत कटौती के दौरान आप इस पूर्णतया आवेशित बैटरी से एक 60 वाट का पंखा एवं एक 40 वाट का बल्ब प्रयोग में लाते हैं, तो यह कब तक कार्य करेंगे? किसी भी अन्य ऊर्जा की हानि को नगण्य मानें। (2017)

हल:
बैटरी की क्षमता = 12 V, 150 Ah (ऐम्पियर-घंटा)
बैटरी में संचित कुल ऊर्जा = वोल्टेज × ऐम्पियर-घंटा = 12 V × 150 Ah = 1800 वाट-घंटा (Wh)
उपकरणों की कुल सामर्थ्य = पंखा (60 W) + बल्ब (40 W) = 100 वाट
माना उपकरण T घंटे तक चलते हैं।
उपकरणों द्वारा उपभुक्त ऊर्जा = कुल सामर्थ्य × समय = 100 W × T घंटे
बैटरी की ऊर्जा = उपभुक्त ऊर्जा
1800 Wh = 100 W × T
T = 1800 / 100 = 18 घंटे
अतः उपकरण पूर्ण आवेशित बैटरी से 18 घंटे तक कार्य करेंगे।

दो प्रतिरोध 3 ओम तथा 5 ओम के हैं। इन्हें किसी सेल से जोड़ने पर कौन-सा प्रतिरोध अधिक गर्म होगा, यदि इन्हें परस्पर (i) श्रेणीक्रम में (ii) समान्तर क्रम में जोड़ा जाये? (2017)

हल:
(i) श्रेणीक्रम में: श्रेणीक्रम में दोनों प्रतिरोधों में समान धारा प्रवाहित होती है।
उत्पन्न ऊष्मा (H) ∝ प्रतिरोध (R) [चूँकि H = I²Rt और I समान है]
अतः ऊष्माओं का अनुपात H3 : H5 = R3 : R5 = 3 : 5
इसका अर्थ है कि 5 ओम का प्रतिरोध अधिक गर्म होगा।
(ii) समान्तर क्रम में: समान्तर क्रम में दोनों प्रतिरोधों के सिरों पर विभवान्तर समान होता है।
उत्पन्न ऊष्मा (H) ∝ 1/प्रतिरोध (R) [चूँकि H = V²t/R और V समान है]
अतः ऊष्माओं का अनुपात H3 : H5 = 1/R3 : 1/R5 = 1/3 : 1/5 = 5 : 3
इसका अर्थ है कि 3 ओम का प्रतिरोध अधिक गर्म होगा।

ओम का नियम क्या है ? इसके सत्यापन के लिए आवश्यक प्रयोग का वर्णन परिपथ आरेख खींचकर कीजिए। (2011, 12, 13, 14, 15) या ओम के नियम की व्याख्या कीजिए। प्रतिरोध का मात्रक भी बताइए।

उत्तर:
ओम का नियम: ओम के नियम के अनुसार, किसी चालक की भौतिक अवस्थाएँ (जैसे ताप, लंबाई, अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल) अपरिवर्तित रहने पर, उसके सिरों के बीच विभवान्तर (V) उसमें प्रवाहित धारा (I) के समानुपाती होता है।
गणितीय रूप में: V ∝ I या V = R × I
जहाँ R एक स्थिरांक है, जिसे चालक का प्रतिरोध कहते हैं।
प्रतिरोध का मात्रक ओम (Ω) है। 1 ओम = 1 वोल्ट / 1 ऐम्पियर।
प्रयोग द्वारा सत्यापन:

[परिपथ आरेख: एक बैटरी, एक कुंजी, एक धारा नियंत्रक (रिओस्टेट), एक अमीटर, एक प्रतिरोधक (R) और एक वोल्टमीटर को चित्र के अनुसार जोड़ा जाता है। वोल्टमीटर प्रतिरोधक के समान्तर क्रम में और अमीटर श्रेणीक्रम में जुड़ा होता है।]

विधि:
  1. परिपथ को चित्रानुसार जोड़कर कुंजी बंद करें।
  2. धारा नियंत्रक की सहायता से परिपथ में धारा का मान बदलते हुए, प्रत्येक स्थिति के लिए अमीटर से धारा (I) और वोल्टमीटर से विभवान्तर (V) का पाठ्यांक नोट करें।
  3. V और I के मानों को एक ग्राफ पेपर पर आलेखित करें, जहाँ X-अक्ष पर धारा (I) और Y-अक्ष पर विभवान्तर (V) लें।
  4. प्राप्त बिंदु एक सरल रेखा में आते हैं, जो यह दर्शाता है कि V और I एक-दूसरे के समानुपाती हैं। इस सरल रेखा की प्रवणता (ढाल) ही प्रतिरोध (R) का मान देती है।
इस प्रकार ओम के नियम का सत्यापन होता है।

प्रश्न 2.

यदि तीन प्रतिरोधों को श्रेणीक्रम में जोड़ दिया जाये तो इस संयोग के लिए उनके तुल्य प्रतिरोध का सूत्र स्थापित कीजिए। (2012) श्रेणीक्रम में प्रतिरोधों को किस प्रकार जोड़ा जाता है? प्रतिरोधों के इस समायोजन के लिए सूत्र प्राप्त कोजिए। (2015, 17)

उत्तर:

श्रेणीक्रम में प्रतिरोधों को एक के बाद एक इस प्रकार जोड़ा जाता है कि पहले प्रतिरोध का एक सिरा दूसरे प्रतिरोध के एक सिरे से, दूसरे का दूसरा सिरा तीसरे के एक सिरे से जुड़ा रहे। इस तरह सभी प्रतिरोधों में एक ही धारा प्रवाहित होती है।

मान लीजिए तीन प्रतिरोध R1, R2 और R3 श्रेणीक्रम में जुड़े हैं और इनसे I एम्पियर की धारा बह रही है। ओम के नियमानुसार, प्रत्येक प्रतिरोध के सिरों पर विभवान्तर होगा:

V1 = I × R1
V2 = I × R2
V3 = I × R3

परिपथ का कुल विभवान्तर V, सभी प्रतिरोधों पर विभवान्तरों के योग के बराबर होगा:

V = V1 + V2 + V3 = I R1 + I R2 + I R3 = I (R1 + R2 + R3)

यदि इन तीनों प्रतिरोधों के तुल्य प्रतिरोध को Rs मान लें, तो ओम के नियम से:

V = I × Rs

दोनों समीकरणों की तुलना करने पर:

I × Rs = I (R1 + R2 + R3)
Rs = R1 + R2 + R3

अतः श्रेणीक्रम में जुड़े प्रतिरोधों का तुल्य प्रतिरोध (Rs) सभी प्रतिरोधों के योग के बराबर होता है।

प्रश्न 3.

समान्तर क्रम में जुड़े तीन प्रतिरोधों के तुल्य प्रतिरोध के लिए सूत्र का निगमन कीजिए। (2011, 16, 17)

उत्तर:

समान्तर क्रम में प्रतिरोधों को इस प्रकार जोड़ा जाता है कि उनके सभी प्रारम्भिक सिरे एक बिंदु पर और सभी अंतिम सिरे दूसरे बिंदु पर मिलते हैं। इस प्रकार सभी प्रतिरोधों के सिरों के बीच विभवान्तर समान रहता है, लेकिन उनमें प्रवाहित धारा अलग-अलग हो सकती है।

मान लीजिए तीन प्रतिरोध R1, R2 और R3 समान्तर क्रम में दो बिंदुओं A और B के बीच जुड़े हैं। बिंदुओं A और B के बीच विभवान्तर V है।

ओम के नियम से, प्रत्येक प्रतिरोध में प्रवाहित धारा होगी:

I1 = V / R1
I2 = V / R2
I3 = V / R3

परिपथ में बिंदु A से प्रवेश करने वाली कुल धारा I, सभी शाखाओं में बहने वाली धाराओं के योग के बराबर होगी:

I = I1 + I2 + I3 = V/R1 + V/R2 + V/R3 = V (1/R1 + 1/R2 + 1/R3)

यदि इन तीनों प्रतिरोधों का तुल्य प्रतिरोध Rp हो, तो ओम के नियम से:

I = V / Rp

दोनों समीकरणों की तुलना करने पर:

V / Rp = V (1/R1 + 1/R2 + 1/R3)
1 / Rp = 1/R1 + 1/R2 + 1/R3

अतः समान्तर क्रम में जुड़े प्रतिरोधों के लिए, तुल्य प्रतिरोध के व्युत्क्रम (1/Rp) का मान सभी प्रतिरोधों के व्युत्क्रमों के योग के बराबर होता है। इसका मतलब है कि तुल्य प्रतिरोध का मान किसी भी अलग-अलग प्रतिरोध से कम हो जाता है।

प्रश्न 4.

एक परिपथ में 10 ओम, 6 ओम तथा 4 ओम के तीन प्रतिरोध श्रेणीक्रम में संयोजित हैं। पूरे संयोजन के सिरों का विभवान्तर 10.0 वोल्ट है। प्रत्येक प्रतिरोध में घारा एवं विभवान्त्तर ज्ञात कीजिए। (2011)

हल:

दिया गया है:
R1 = 10 Ω, R2 = 6 Ω, R3 = 4 Ω (श्रेणीक्रम में)
कुल विभवान्तर, V = 10.0 V

चरण 1: कुल तुल्य प्रतिरोध ज्ञात करना
श्रेणीक्रम में तुल्य प्रतिरोध Rs = R1 + R2 + R3
Rs = 10 Ω + 6 Ω + 4 Ω = 20 Ω

चरण 2: परिपथ में धारा ज्ञात करना
ओम के नियम से, I = V / Rs
I = 10.0 V / 20 Ω = 0.5 A
श्रेणीक्रम में सभी प्रतिरोधों में धारा समान होती है। अतः प्रत्येक प्रतिरोध में धारा = 0.5 एम्पियर

चरण 3: प्रत्येक प्रतिरोध के सिरों पर विभवान्तर ज्ञात करना
सूत्र V = I × R का प्रयोग करते हैं:
10 Ω प्रतिरोध के सिरों पर विभवान्तर, V1 = 0.5 A × 10 Ω = 5.0 V
6 Ω प्रतिरोध के सिरों पर विभवान्तर, V2 = 0.5 A × 6 Ω = 3.0 V
4 Ω प्रतिरोध के सिरों पर विभवान्तर, V3 = 0.5 A × 4 Ω = 2.0 V

सत्यापन: कुल विभवान्तर V = V1 + V2 + V3 = 5.0 + 3.0 + 2.0 = 10.0 V (दिया गया मान)

प्रश्न 5.

दो विद्यत प्रतिरोधों को श्रेणीक्रम में जोड़ने पर उनका तुल्य प्रतिरोध 25 ओम आता है। इनको समान्तर क्रम में जोड़ने पर तुल्य प्रतिरोध 4 ओम आता है। प्रत्येक विद्युत प्रतिरोध का प्रतिरोध ज्ञात कीजिए। (2011,12, 18)

हल:

माना दो प्रतिरोध P ओम और Q ओम हैं।

श्रेणीक्रम में: तुल्य प्रतिरोध Rs = P + Q
दिया है: P + Q = 25 Ω ............ (समीकरण 1)

समान्तर क्रम में: तुल्य प्रतिरोध Rp का सूत्र: 1/Rp = 1/P + 1/Q
दिया है: Rp = 4 Ω
अतः, 1/4 = 1/P + 1/Q
या, 1/P + 1/Q = 1/4 ............ (समीकरण 2)

समीकरण (2) से:
(P + Q) / (P × Q) = 1/4
समीकरण (1) से P+Q = 25 रखने पर:
25 / (P × Q) = 1/4
अतः, P × Q = 25 × 4 = 100 ............ (समीकरण 3)

अब हमारे पास दो समीकरण हैं:
P + Q = 25
P × Q = 100

माना P और Q, द्विघात समीकरण x² - (P+Q)x + (P×Q) = 0 के मूल हैं।
x² - 25x + 100 = 0
x² - 20x - 5x + 100 = 0
x(x - 20) - 5(x - 20) = 0
(x - 20)(x - 5) = 0
अतः, x = 20 या x = 5

इसलिए, दोनों प्रतिरोध 20 ओम और 5 ओम हैं।

प्रश्न 6.

नीचे दिये गये चित्र में ज्ञात कीजिए (2012, 13, 14, 16)

1. तुल्य प्रतिरोध
2. परिपथ की धारा
3. 30 प्रतिरोध वाले चालक के सिरों का विभवान्तर

हल:

दिए गए परिपथ के अनुसार (जहाँ 10Ω और 10Ω समान्तर में, और फिर उनका तुल्य प्रतिरोध 3Ω के साथ श्रेणी में है), सेल का विभवान्तर 10 वोल्ट है।

1. तुल्य प्रतिरोध:
पहले, दो 10Ω प्रतिरोध समान्तर क्रम में हैं। इनका तुल्य प्रतिरोध Rp:
1/Rp = 1/10 + 1/10 = 2/10 = 1/5
अतः Rp = 5 Ω

अब, यह Rp (5 Ω) और 3 Ω का प्रतिरोध श्रेणीक्रम में जुड़ा है।
कुल तुल्य प्रतिरोध R = Rp + 3 = 5 + 3 = 8 Ω

2. परिपथ की धारा:
ओम के नियम से, I = V / R = 10 V / 8 Ω = 1.25 A
परिपथ में कुल धारा 1.25 एम्पियर है।

3. 3Ω प्रतिरोध के सिरों का विभवान्तर:
चूँकि 3Ω प्रतिरोध श्रेणीक्रम में है, इसमें भी पूरी धारा 1.25 A ही बहेगी।
विभवान्तर V = I × R = 1.25 A × 3 Ω = 3.75 V

प्रश्न 7.

दिये गये परिपथ में ज्ञात कीजिए (2018)

1. A तथा B के मध्य प्रतिरोध
2. परिपथ में प्रवाहित धारा। (2015)
3. A तथा B के मध्य विभवान्तर
4. 3Ω के प्रतिरोध के सिरों का विभवान्तर (2013, 14, 15, 17)

हल:

दिए गए परिपथ के अनुसार (जहाँ A और B के बीच 4Ω व 2Ω श्रेणी में, और 2Ω व 1Ω श्रेणी में हैं, और ये दोनों शाखाएँ एक-दूसरे के समान्तर हैं), और फिर इस तुल्य प्रतिरोध के साथ एक 3Ω प्रतिरोध श्रेणी में जुड़ा है। सेल का विभवान्तर 10 V है।

1. A तथा B के मध्य प्रतिरोध:
शाखा 1: 4Ω + 2Ω = 6Ω (श्रेणीक्रम)
शाखा 2: 2Ω + 1Ω = 3Ω (श्रेणीक्रम)
ये दोनों शाखाएँ (6Ω और 3Ω) A और B के बीच समान्तर क्रम में हैं।
तुल्य प्रतिरोध RAB के लिए:
1/RAB = 1/6 + 1/3 = 1/6 + 2/6 = 3/6 = 1/2
अतः RAB = 2 Ω

2. परिपथ में प्रवाहित धारा:
पूरे परिपथ में, RAB (2 Ω) और 3 Ω श्रेणीक्रम में हैं।
कुल तुल्य प्रतिरोध R = RAB + 3 = 2 + 3 = 5 Ω
कुल धारा I = V / R = 10 V / 5 Ω = 2 A

3. A तथा B के मध्य विभवान्तर:
A और B के बीच तुल्य प्रतिरोध 2 Ω है और इसमें से पूरी धारा 2 A प्रवाहित नहीं होती (क्योंकि यह समान्तर संयोजन है)। A और B के बीच विभवान्तर ज्ञात करने के लिए, हम पूरे परिपथ को देखते हैं।
3Ω प्रतिरोध के सिरों पर विभवान्तर V = I × 3 = 2 A × 3 Ω = 6 V
चूँकि सेल का कुल विभवान्तर 10 V है, A और B के बीच विभवान्तर शेष विभवान्तर के बराबर होगा:
VAB = कुल विभवान्तर - V = 10 V - 6 V = 4 V
(या, VAB = I × RAB = 2 A × 2 Ω = 4 V)

4. 3Ω के प्रतिरोध के सिरों का विभवान्तर:
जैसा ऊपर गणना की गई, V = 6 V

प्रश्न 8.

विद्युत बल्ब का सिद्धान्त, रचना एवं कार्य-विधि समझाइए। इसका नामांकित चित्र बनाइए। विद्युत बल्ब में वायु के स्थान पर नाइट्रोजन HAT SPT FA भरी जाती है ? (2011, 13) विद्युत बल्ब से प्रकाश प्राप्त होने के सिद्धान्त को समझाइए। (2012)

उत्तर:

सिद्धान्त: विद्युत बल्ब, विद्युत धारा के ऊष्मीय प्रभाव पर कार्य करता है। जब किसी चालक तार में विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तो तार का प्रतिरोध ऊष्मा उत्पन्न करता है, जिससे तार का ताप बहुत अधिक (लगभग 2500°C) बढ़ जाता है। इस उच्च ताप पर तार दहकने लगता है और प्रकाश उत्सर्जित करता है। यही प्रकाश हमें बल्ब से प्राप्त होता है।

रचना एवं कार्य-विधि:
1. काँच का बल्ब: यह बल्ब का बाहरी आवरण होता है जो हवा से बचाता है।
2. फिलामेंट: यह टंगस्टन धातु की एक पतली कुंडलित तार होती है, जो बल्ब के अंदर काँच की छड़ से लटकी रहती है। यही वह भाग है जो गर्म होकर प्रकाश देता है। टंगस्टन का चुनाव इसलिए किया जाता है क्योंकि इसका गलनांक बहुत उच्च (लगभग 3422°C) होता है।
3. सम्पर्क तार: दो मोटे ताँबे के तार फिलामेंट को बल्ब के बाहरी धातु आधार (पीतल की टोपी) से जोड़ते हैं।
4. धातु आधार: पीतल की बनी टोपी जिसमें दो पिन होते हैं। यह बल्ब को बिजली के होल्डर में लगाने और विद्युत संपर्क बनाने में सहायक होती है।
5. अक्रिय गैस: बल्ब के अंदर से हवा निकालकर नाइट्रोजन या आर्गन जैसी अक्रिय गैस भरी जाती है।

नाइट्रोजन क्यों भरी जाती है?
बल्ब में नाइट्रोजन या आर्गन गैस भरने के दो मुख्य कारण हैं:
1. ऑक्सीकरण को रोकना: यदि बल्ब में साधारण वायु (ऑक्सीजन युक्त) होगी, तो उच्च ताप पर गर्म टंगस्टन का फिलामेंट ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया करके जल जाएगा और टूट जाएगा। अक्रिय गैसें रासायनिक रूप से निष्क्रिय होती हैं और फिलामेंट को जलने से बचाती हैं।
2. वाष्पीकरण को कम करना: उच्च ताप पर टंगस्टन के वाष्पीकरण की दर को ये गैसें कम कर देती हैं, जिससे फिलामेंट का जीवन लंबा हो जाता है और बल्ब काले नहीं पड़ते।

कार्यविधि सरल है: जब बल्ब को विद्युत स्रोत से जोड़ा जाता है, तो धारा फिलामेंट से होकर बहती है। फिलामेंट का उच्च प्रतिरोध इसे अत्यधिक गर्म कर देता है, जिससे वह चमकने लगता है और प्रकाश देता है।

प्रश्न 9. विद्युत परिपथ में व्यय सामर्थ्य से क्या अभिप्राय है? इसका मात्रक लिखिए। यदि परिपथ में ५ वोल्ट विभवान्तर पर। ऐम्पियर धारा प्रवाहित हो रही हो तो सामर्थ्य के लिए व्यंजक प्राप्त कीजिए। या सिद्ध कीजिए कि किसी विद्युत बल्ब की सामर्थ्य उसके प्रतिरोध के व्युत्क्रमानुपाती होती है। (2011, 12, 13, 16)

उत्तर:
विद्युत परिपथ में विद्युत सामर्थ्य का अर्थ है - विद्युत ऊर्जा के व्यय होने की दर। इसे सामान्य भाषा में बिजली की खपत की रफ़्तार भी कह सकते हैं।
इसका मात्रक वाट (W) है। 1 वाट = 1 जूल/सेकंड।

सामर्थ्य का व्यंजक:
मान लीजिए किसी परिपथ में V वोल्ट के विभवांतर पर I ऐम्पियर की धारा प्रवाहित हो रही है।
सामर्थ्य (P) = व्यय ऊर्जा / समय
हम जानते हैं, व्यय ऊर्जा (W) = V × I × t (जहाँ t समय है)
इसलिए, सामर्थ्य P = (V × I × t) / t = V × I
अतः सामर्थ्य का व्यंजक है: P = V I

सिद्ध करना कि सामर्थ्य प्रतिरोध के व्युत्क्रमानुपाती होती है:
ओम के नियम से, V = I R होता है।
सामर्थ्य के सूत्र P = V I में V का मान रखने पर, P = (I R) × I = I² R
परन्तु यदि हम I = V / R रखें, तो P = V × (V / R) = V² / R
इस सूत्र P = V² / R से स्पष्ट है कि यदि विभवांतर (V) स्थिर रखा जाए (जैसे घरों में 220V), तो सामर्थ्य (P) प्रतिरोध (R) के व्युत्क्रमानुपाती होती है। अर्थात, जितना अधिक प्रतिरोध होगा, सामर्थ्य उतनी ही कम होगी और इसका उल्टा भी सही है।

***

प्रश्न 10. एक बर्तन में 100 ग्राम जल 10" ८ पर रखा है, इसमें 42 ओम प्रतिरोध का एक तार जल में डालकर 2.0 ऐम्पियर की धारा 5 मिनट तक प्रवाहित की जाती है। यदि बर्तन की ऊष्माधारिता 50 कैलोरी /” ८ हो, तो जल में ताप-वृद्धि का मान बनाइए। (2014)

हल:
दिया गया है:
• जल का द्रव्यमान, m = 100 ग्राम
• प्रारंभिक ताप = 10°C (यहाँ केवल तापवृद्धि पूछी गई है, अतः प्रारंभिक ताप का उपयोग नहीं होगा)
• तार का प्रतिरोध, R = 42 ओम
• धारा, I = 2.0 ऐम्पियर
• समय, t = 5 मिनट = 5 × 60 = 300 सेकंड
• बर्तन की ऊष्माधारिता, C = 50 कैलोरी/°C

चरण 1: उत्पन्न ऊष्मा की गणना
विद्युत धारा द्वारा उत्पन्न ऊष्मा, H = I² R t जूल
H = (2.0)² × 42 × 300 = 4 × 42 × 300 = 50400 जूल
इसे कैलोरी में बदलने पर (1 कैलोरी ≈ 4.2 जूल):
H = 50400 / 4.2 = 12000 कैलोरी

चरण 2: तापवृद्धि की गणना
यह ऊष्मा पूरी तरह से बर्तन और जल को मिलती है। माना तापवृद्धि ΔT °C है।
• बर्तन द्वारा ली गई ऊष्मा = ऊष्माधारिता × तापवृद्धि = 50 × ΔT कैलोरी
• जल द्वारा ली गई ऊष्मा = द्रव्यमान × विशिष्ट ऊष्मा × तापवृद्धि = 100 × 1 × ΔT = 100 ΔT कैलोरी
कुल ली गई ऊष्मा = बर्तन की ऊष्मा + जल की ऊष्मा = 50ΔT + 100ΔT = 150ΔT कैलोरी

यह कुल ऊष्मा, उत्पन्न ऊष्मा के बराबर होगी:
150 ΔT = 12000
ΔT = 12000 / 150 = 80°C
अतः जल (और बर्तन) में ताप-वृद्धि 80°C होगी।

***

प्रश्न 11. एक घर में 50 वाट की 2 ट्यूबलाइट, 50 वाट के 2 पंखे, 200 वाट का एक फ्रिज तथा 1 किलोवाट का एक हीटर समय-समय पर प्रयुक्त होता है। यदि घर को विद्युत आपूर्ति 250 वोल्ट पर की जा रही हो तो हीटर से ली जाने वाली अधिकतम धारा की गणना कीजिए जिससे उपयुक्त रेटिंग का फ्यूज परिपथ में लगाया जा सके। आवश्यक परिपथ बनाकर इनके संयोजन को भी दिखाइए। (2012, 18)

हल:
चरण 1: कुल विद्युत सामर्थ्य की गणना
सभी उपकरण एक साथ चल सकते हैं, इस स्थिति में कुल सामर्थ्य अधिकतम होगी।
• 2 ट्यूबलाइट: 2 × 50 W = 100 W
• 2 पंखे: 2 × 50 W = 100 W
• 1 फ्रिज: 1 × 200 W = 200 W
• 1 हीटर: 1 × 1000 W = 1000 W (1 kW = 1000 W)
कुल सामर्थ्य, Pकुल = 100 + 100 + 200 + 1000 = 1400 वाट

चरण 2: परिपथ में अधिकतम धारा की गणना
आपूर्ति वोल्टेज, V = 250 वोल्ट
सामर्थ्य का सूत्र, P = V I
अतः कुल धारा, Iकुल = Pकुल / V = 1400 / 250 = 5.6 ऐम्पियर
यह धारा हीटर सहित सभी उपकरणों के एक साथ चलने पर प्रवाहित होगी।

चरण 3: हीटर से ली जाने वाली अधिकतम धारा
हीटर की सामर्थ्य Pहीटर = 1000 W
हीटर से धारा, Iहीटर = Pहीटर / V = 1000 / 250 = 4.0 ऐम्पियर
नोट: प्रश्न के अनुसार, फ्यूज की रेटिंग कुल धारा (5.6 A) से थोड़ी अधिक रखनी चाहिए ताकि सभी उपकरण सुरक्षित रूप से चल सकें।

चरण 4: परिपथ संयोजन
घर के सभी विद्युत उपकरण समानांतर क्रम में जुड़े होते हैं। इससे प्रत्येक उपकरण को पूरा वोल्टेज (250V) मिलता है और वे स्वतंत्र रूप से चालू-बंद किए जा सकते हैं। फ्यूज मुख्य आपूर्ति लाइन में लगाया जाता है।

(मुख्य आपूर्ति 250V) --- [फ्यूज] ---
    ├─── ट्यूबलाइट 1 (50W)
    ├─── ट्यूबलाइट 2 (50W)
    ├─── पंखा 1 (50W)
    ├─── पंखा 2 (50W)
    ├─── फ्रिज (200W)
    └─── हीटर (1000W)

***

प्रश्न 12. एक घर में 220 वोल्ट, 40 वाट के 5 बल्ब लगे हैं। बल्ब 30 दिन तक 5 घण्टे प्रतिदिन की दर से जलते हैं। यदि वैद्युत ऊर्जा का मूल्य ₹ 4 प्रति यूनिट हो तो ज्ञात कीजिए - (i) बल्बों के संयोग का तुल्य प्रतिरोध (ii) व्यय वैद्युत यूनिटों की संख्या (iii) व्यय वैद्युत ऊर्जा का मूल्य (2017)

हल:
दिया गया है:
प्रत्येक बल्ब के लिए: वोल्टेज V = 220 V, सामर्थ्य P = 40 W
बल्बों की संख्या = 5
प्रतिदिन उपयोग का समय = 5 घंटे
दिनों की संख्या = 30
1 यूनिट (किलोवाट-घंटा) की कीमत = ₹4

(i) बल्बों के संयोग का तुल्य प्रतिरोध:
घरों में बल्ब समानांतर क्रम में जुड़े होते हैं।
सबसे पहले एक बल्ब का प्रतिरोध ज्ञात करते हैं:
सूत्र P = V²/R से, R = V²/P
एक बल्ब का प्रतिरोध, R1 = (220)² / 40 = 48400 / 40 = 1210 ओम
5 समान प्रतिरोधों (R1 = 1210 Ω) के समानांतर संयोजन का तुल्य प्रतिरोध Req हो, तो:
1/Req = 1/R1 + 1/R1 + 1/R1 + 1/R1 + 1/R1 = 5 / R1
1/Req = 5 / 1210
अतः Req = 1210 / 5 = 242 ओम

(ii) व्यय वैद्युत यूनिटों की संख्या:
कुल सामर्थ्य, Pकुल = 5 बल्ब × 40 W = 200 W = 0.2 kW
कुल समय (घंटों में) = 5 घंटे/दिन × 30 दिन = 150 घंटे
व्यय ऊर्जा (यूनिट में) = किलोवाट × घंटे = 0.2 kW × 150 h = 30 यूनिट

(iii) व्यय वैद्युत ऊर्जा का मूल्य:
कुल मूल्य = यूनिटों की संख्या × प्रति यूनिट मूल्य = 30 × 4 = ₹120

***

प्रश्न 13. आपके घर में 10 वाट के पाँच एलईडी बल्ब, 100 वाट का एक तंतु बल्ब, 50 वाट के चार पंखे एवं 1.5 किलोवाट का एक एयर-कण्डीशनर लगा है। यदि बल्ब प्रतिदिन 5 घण्टे तथा पंखे एवं एयर-कण्डीशनर 20 घण्टे प्रयोग किये जा रहे हैं तो एक महीने (30 दिन) में ₹ 5 प्रति यूनिट की दर से विद्युत ऊर्जा का व्यय ज्ञात कीजिए। (2013, 15, 17)

हल:
सबसे पहले प्रत्येक प्रकार के उपकरण द्वारा एक महीने में खपत की गई ऊर्जा (किलोवाट-घंटा में) अलग-अलग ज्ञात करते हैं।

1. पाँच एलईडी बल्ब:
• कुल सामर्थ्य = 5 × 10 W = 50 W = 0.05 kW
• प्रतिदिन उपयोग = 5 घंटे
• 30 दिन में कुल घंटे = 5 × 30 = 150 घंटे
• खपत ऊर्जा = 0.05 kW × 150 h = 7.5 kWh (यूनिट)

2. एक तंतु बल्ब:
• सामर्थ्य = 100 W = 0.1 kW
• प्रतिदिन उपयोग = 5 घंटे
• 30 दिन में कुल घंटे = 5 × 30 = 150 घंटे
• खपत ऊर्जा = 0.1 kW × 150 h = 15 kWh (यूनिट)

3. चार पंखे:
• कुल सामर्थ्य = 4 × 50 W = 200 W = 0.2 kW
• प्रतिदिन उपयोग = 20 घंटे
• 30 दिन में कुल घंटे = 20 × 30 = 600 घंटे
• खपत ऊर्जा = 0.2 kW × 600 h = 120 kWh (यूनिट)

4. एक एयर-कंडीशनर:
• सामर्थ्य = 1.5 kW
• प्रतिदिन उपयोग = 20 घंटे
• 30 दिन में कुल घंटे = 20 × 30 = 600 घंटे
• खपत ऊर्जा = 1.5 kW × 600 h = 900 kWh (यूनिट)

कुल खपत ऊर्जा:
कुल यूनिट = 7.5 + 15 + 120 + 900 = 1042.5 यूनिट

विद्युत ऊर्जा का व्यय:
दर = ₹5 प्रति यूनिट
कुल व्यय = 1042.5 × 5 = ₹5212.50

***

प्रश्न 14. 1000 वाट सामर्थ्य वाले एक विद्युत हीटर को 250 वोल्ट के विद्युत मेन्स से जोड़ा जाता है। गणना कीजिए - (i) हीटर से प्रवाहित धारा (ii) हीटर के तार का प्रतिरोध (iii) हीटर से प्रति मिनट उत्पन्न ऊष्मीय ऊर्जा (iv) हीटर को 2 घण्टे उपयोग में लाने से किलो-वाट घण्टा में ऊर्जा व्यय (2016)

हल:
दिया गया है:
हीटर की सामर्थ्य, P = 1000 W
वोल्टेज, V = 250 V

(i) हीटर से प्रवाहित धारा:
सूत्र P = V I से,
I = P / V = 1000 / 250 = 4 ऐम्पियर

(ii) हीटर के तार का प्रतिरोध:
ओम के नियम से, V = I R
R = V / I = 250 / 4 = 62.5 ओम
(या सूत्र P = V²/R से भी निकाल सकते हैं: R = V²/P = (250)²/1000 = 62500/1000 = 62.5 Ω)

(iii) प्रति मिनट उत्पन्न ऊष्मीय ऊर्जा:
समय, t = 1 मिनट = 60 सेकंड
उत्पन्न ऊष्मा (जूल में), H = I² R t
H = (4)² × 62.5 × 60 = 16 × 62.5 × 60
H = 1000 × 60 = 60000 जूल
इसे कैलोरी में व्यक्त करने पर (1 कैलोरी ≈ 4.2 जूल):
H = 60000 / 4.2 ≈ 14286 कैलोरी (लगभग 1.43 × 10⁴ कैलोरी)

(iv) 2 घंटे में ऊर्जा व्यय (किलोवाट-घंटा में):
हीटर की सामर्थ्य = 1000 W = 1 kW
उपयोग का समय = 2 घंटे
व्यय ऊर्जा = सामर्थ्य (kW) × समय (h) = 1 kW × 2 h = 2 किलोवाट-घंटा (यूनिट)

***

प्रश्न 15. 220 वोल्ट व 10 ऐम्पियर धारा वाले विद्युत मोटर द्वारा आधे घण्टे में 40 मीटर की ऊँचाई पर स्थित एक पानी की टंकी में कितना पानी चढ़ाया जा सकता है? मोटर की कार्य दक्षता 80% है। पृथ्वी का गुरुत्वीय त्वरण g = 10 मी/से² है। (2014, 15, 17)

हल:
दिया गया है:
वोल्टेज, V = 220 V
धारा, I = 10 A
समय, t = आधा घंटा = 0.5 h = 30 मिनट = 30 × 60 = 1800 सेकंड
ऊँचाई, h = 40 m
मोटर की दक्षता, η = 80% = 80/100 = 0.8
गुरुत्वीय त्वरण, g = 10 m/s²

चरण 1: मोटर द्वारा खपत की गई कुल विद्युत ऊर्जा
खपत ऊर्जा (जूल में), Wखपत = V I t
Wखपत = 220 × 10 × 1800 = 3,960,000 जूल (या 3.96 × 10⁶ J)

चरण 2: मोटर द्वारा दी गई उपयोगी यांत्रिक ऊर्जा
दक्षता η = (उपयोगी ऊर्जा आउटपुट) / (कुल ऊर्जा इनपुट)
उपयोगी ऊर्जा आउटपुट, Wउपयोगी = η × Wखपत = 0.8 × 3,960,000 = 3,168,000 जूल

चरण 3: चढ़ाए जा सकने वाले पानी का द्रव्यमान
यह उपयोगी ऊर्जा पानी को स्थितिज ऊर्जा देने में खर्च होगी।
स्थितिज ऊर्जा, P.E. = m g h
अतः, m g h = Wउपयोगी
m × 10 × 40 = 3,168,000
400 m = 3,168,000
m = 3,168,000 / 400 = 7920 kg

अतः, मोटर द्वारा 7920 किलोग्राम (लगभग 7.92 × 10³ kg) पानी 40 मीटर ऊँची टंकी में चढ़ाया जा सकता है।

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