Bihar Board Class 10th Science (विज्ञान) Chapter 1 रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण) Solutions
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| Board Name | Bihar Board of Secondary Education |
| Class | Class 10th |
| Content Type | Solution |
| Solution for | Class 10th students |
| Subject | Science (विज्ञान) |
| Chapter Name | Chapter 1 रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण) |
| Total Number of Chapter in this Subject | 16 |
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Bihar Board Class 10th Science (विज्ञान) Chapter 1 रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण) Solutions
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प्रश्न 1. वायु में जलाने से पहले मैग्नीशियम रिबन को साफ क्यों किया जाता है?
मैग्नीशियम रिबन की सतह पर वायुमंडल के संपर्क में आकर मैग्नीशियम ऑक्साइड (MgO) और मैग्नीशियम कार्बोनेट (MgCO₃) की एक पतली परत जम जाती है। जलाने से पहले इसे साफ करने का उद्देश्य इस अशुद्ध परत को हटाना है ताकि शुद्ध मैग्नीशियम सीधे ऑक्सीजन के संपर्क में आ सके और एक स्पष्ट, तीव्र दहन प्रतिक्रिया हो सके। यदि रिबन साफ न किया जाए तो यह परत प्रतिक्रिया में बाधा डाल सकती है।
प्रश्न 2. निम्नलिखित रासायनिक अभिक्रियाओं के लिए संतुलित समीकरण लिखिए:
(i) हाइड्रोजन + क्लोरीन → हाइड्रोजन क्लोराइड
संतुलित समीकरण: H₂(g) + Cl₂(g) → 2HCl(g)
(ii) बेरियम क्लोराइड + ऐलुमिनियम सल्फेट → बेरियम सल्फेट + ऐलुमिनियम क्लोराइड
संतुलित समीकरण: 3BaCl₂(aq) + Al₂(SO₄)₃(aq) → 3BaSO₄(s)↓ + 2AlCl₃(aq)
(iii) सोडियम + जल → सोडियम हाइड्रॉक्साइड + हाइड्रोजन
संतुलित समीकरण: 2Na(s) + 2H₂O(l) → 2NaOH(aq) + H₂(g)↑
प्रश्न 3. निम्नलिखित अभिक्रियाओं के लिए उनकी अवस्था के संकेतों के साथ संतुलित रासायनिक समीकरण लिखिए:
(i) जल में बेरियम क्लोराइड तथा सोडियम सल्फेट के विलयन अभिक्रिया करके सोडियम क्लोराइड का विलयन तथा अघुलनशील बेरियम सल्फेट का अवक्षेप बनाते हैं।
संतुलित समीकरण: BaCl₂(aq) + Na₂SO₄(aq) → BaSO₄(s)↓ + 2NaCl(aq)
(ii) सोडियम हाइड्रॉक्साइड का विलयन (जल में) हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के विलयन (जल में) से अभिक्रिया करके सोडियम क्लोराइड का विलयन तथा जल बनाता है।
संतुलित समीकरण: NaOH(aq) + HCl(aq) → NaCl(aq) + H₂O(l)
प्रश्न 4. किसी पदार्थ ‘X’ के विलयन का उपयोग सफेदी करने के लिए होता है।
(i) पदार्थ ‘X’ का नाम तथा इसका सूत्र लिखिए।
पदार्थ 'X' का नाम कैल्शियम ऑक्साइड (बिना बुझा हुआ चूना) है। इसका सूत्र CaO है।
(ii) उपरोक्त पदार्थ ‘X’ की जल के साथ अभिक्रिया लिखिए।
जल के साथ अभिक्रिया: CaO(s) + H₂O(l) → Ca(OH)₂(aq) + ऊष्मा
यह एक उष्माक्षेपी अभिक्रिया है जिसमें बुझा हुआ चूना [कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड, Ca(OH)₂] बनता है।
प्रश्न 5. क्रियाकलाप 1.7 में एक परखनली में एकत्रित गैस की मात्रा दूसरी में दोगुनी क्यों है? उस गैस का नाम बताइए।
क्रियाकलाप 1.7 में जल का विद्युत् अपघटन (विद्युत् अपघटनी सेल द्वारा) किया जाता है। जल (H₂O) के एक अणु में हाइड्रोजन के दो परमाणु और ऑक्सीजन का एक परमाणु होता है। विद्युत् अपघटन के दौरान, जल के प्रत्येक दो अणु टूटकर हाइड्रोजन के दो अणु (H₂) और ऑक्सीजन का एक अणु (O₂) बनाते हैं। इसलिए, उत्पन्न हाइड्रोजन गैस की मात्रा ऑक्सीजन गैस की मात्रा से दोगुनी होती है।
गैस का नाम: हाइड्रोजन गैस (जो दोगुनी मात्रा में एकत्रित होती है)।
प्रश्न 6. जब लोहे की कील को कॉपर सल्फेट के विलयन में डुबोया जाता है तो विलयन का रंग क्यों बदल जाता है?
लोहे की कील (Fe) कॉपर सल्फेट (CuSO₄) के विलयन में डालने पर एक विस्थापन अभिक्रिया होती है। लोहा, कॉपर से अधिक क्रियाशील होता है, इसलिए यह कॉपर सल्फेट से कॉपर को विस्थापित कर देता है। अभिक्रिया के फलस्वरूप फेरस सल्फेट (FeSO₄) का हल्का हरा विलयन बनता है और कॉपर धातु कील की सतह पर जमा हो जाती है। कॉपर सल्फेट का विलयन नीले रंग का होता है, जबकि फेरस सल्फेट का विलयन हल्के हरे रंग का होता है। इसीलिए विलयन का रंग नीले से हल्के हरे में बदल जाता है।
रासायनिक समीकरण: Fe(s) + CuSO₄(aq) → FeSO₄(aq) + Cu(s)
प्रश्न 7. द्वि-विस्थापन अभिक्रिया से आप क्या समझते हैं? उदाहरण देकर समझाइए।
वह रासायनिक अभिक्रिया जिसमें दो अलग-अलग यौगिकों के बीच आयनों का आदान-प्रदान होता है और दो नए यौगिक बनते हैं, द्वि-विस्थापन अभिक्रिया कहलाती है। इसमें अभिकारकों के धनायन (कैटायन) और ऋणायन (ऐनायन) आपस में बदल जाते हैं।
उदाहरण: सिल्वर नाइट्रेट और सोडियम क्लोराइड के विलयनों की अभिक्रिया।
AgNO₃(aq) + NaCl(aq) → AgCl(s)↓ + NaNO₃(aq)
यहाँ, सिल्वर (Ag⁺) और सोडियम (Na⁺) आयन आपस में बदल जाते हैं, जिससे अघुलनशील सिल्वर क्लोराइड (AgCl) का सफेद अवक्षेप और सोडियम नाइट्रेट (NaNO₃) का विलयन बनता है।
प्रश्न 8. ऑक्सीकरण और अपचयन की परिभाषा दीजिए। उदाहरण दीजिए।
ऑक्सीकरण: वह रासायनिक प्रक्रिया जिसमें किसी पदार्थ द्वारा ऑक्सीजन का योग, हाइड्रोजन का निष्कासन अथवा इलेक्ट्रॉनों का त्याग होता है, ऑक्सीकरण कहलाती है।
उदाहरण: 2Mg(s) + O₂(g) → 2MgO(s) (यहाँ Mg का MgO में ऑक्सीकरण होता है)।
अपचयन: वह रासायनिक प्रक्रिया जिसमें किसी पदार्थ से ऑक्सीजन का निष्कासन, हाइड्रोजन का योग अथवा इलेक्ट्रॉनों का ग्रहण होता है, अपचयन कहलाती है।
उदाहरण: CuO(s) + H₂(g) → Cu(s) + H₂O(g) (यहाँ CuO का Cu में अपचयन होता है)।
ध्यान दें: ऑक्सीकरण और अपचयन सदैव साथ-साथ होते हैं, इसलिए इन्हें संयुक्त रूप से रेडॉक्स अभिक्रिया कहते हैं।
प्रश्न 9. निम्नलिखित पदों का वर्णन कीजिए तथा प्रत्येक का एक-एक उदाहरण दीजिए-
(i) संयोजन अभिक्रिया
वह अभिक्रिया जिसमें दो या दो से अधिक पदार्थ मिलकर एक नया पदार्थ बनाते हैं, संयोजन अभिक्रिया कहलाती है।
उदाहरण: C(s) + O₂(g) → CO₂(g)
(ii) वियोजन अभिक्रिया
वह अभिक्रिया जिसमें एक पदार्थ टूटकर दो या दो से अधिक सरल पदार्थ बनाता है, वियोजन अभिक्रिया कहलाती है।
उदाहरण: 2H₂O(l) → विद्युत् धारा → 2H₂(g) + O₂(g)
(iii) विस्थापन अभिक्रिया
वह अभिक्रिया जिसमें एक अधिक क्रियाशील तत्व किसी यौगिक से कम क्रियाशील तत्व को विस्थापित करके नया यौगिक बनाता है, विस्थापन अभिक्रिया कहलाती है।
उदाहरण: Zn(s) + CuSO₄(aq) → ZnSO₄(aq) + Cu(s)
(iv) द्वि-विस्थापन अभिक्रिया
वह अभिक्रिया जिसमें दो यौगिकों के बीच आयनों का आदान-प्रदान होकर दो नए यौगिक बनते हैं, द्वि-विस्थापन अभिक्रिया कहलाती है।
उदाहरण: BaCl₂(aq) + Na₂SO₄(aq) → BaSO₄(s)↓ + 2NaCl(aq)
प्रश्न 10. निम्नलिखित अभिक्रियाओं में अपचयित पदार्थ की पहचान कीजिए-
(i) 4Na(s) + O₂(g) → 2Na₂O(s)
इस अभिक्रिया में ऑक्सीजन (O₂) अपचयित हो रही है क्योंकि यह Na के साथ संयोग करके Na₂O बना रही है (ऑक्सीजन का यौगिकीकरण)। ऑक्सीजन का अपचयन होता है।
(ii) CuO(s) + H₂(g) → Cu(s) + H₂O(l)
इस अभिक्रिया में कॉपर ऑक्साइड (CuO) अपचयित हो रहा है क्योंकि इसमें से ऑक्सीजन निकलकर कॉपर (Cu) धातु मुक्त हो रही है। CuO का Cu में अपचयन होता है।
प्रश्न 11. निम्नलिखित अभिक्रियाओं के लिए संतुलित रासायनिक समीकरण लिखिए एवं प्रत्येक अभिक्रिया का प्रकार बताइए-
(i) पोटैशियम ब्रोमाइड(aq) + बेरियम आयोडाइड(aq) → पोटैशियम आयोडाइड(aq) + बेरियम ब्रोमाइड(s)
संतुलित समीकरण: 2KBr(aq) + BaI₂(aq) → 2KI(aq) + BaBr₂(s)
प्रकार: द्वि-विस्थापन अभिक्रिया (साथ ही अवक्षेपण अभिक्रिया)।
(ii) जिंक कार्बोनेट(s) → जिंक ऑक्साइड(s) + कार्बन डाइऑक्साइड(g)
संतुलित समीकरण: ZnCO₃(s) → गर्म करने पर → ZnO(s) + CO₂(g)
प्रकार: वियोजन अभिक्रिया (तापीय वियोजन)।
(iii) हाइड्रोजन(g) + क्लोरीन(g) → हाइड्रोजन क्लोराइड(g)
संतुलित समीकरण: H₂(g) + Cl₂(g) → 2HCl(g)
प्रकार: संयोजन अभिक्रिया (साथ ही यह एक ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया भी है)।
(iv) मैग्नीशियम(s) + हाइड्रोक्लोरिक अम्ल(aq) → मैग्नीशियम क्लोराइड(aq) + हाइड्रोजन(g)
संतुलित समीकरण: Mg(s) + 2HCl(aq) → MgCl₂(aq) + H₂(g)↑
प्रकार: विस्थापन अभिक्रिया (साथ ही यह एक ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया भी है)।
प्रश्न 12. ऊष्माक्षेपी एवं ऊष्माशोषी अभिक्रिया से आप क्या समझते हैं? उदाहरण दीजिए।
ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया: वह रासायनिक अभिक्रिया जिसमें ऊष्मा उत्सर्जित होती है, ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया कहलाती है। इन अभिक्रियाओं में तापमान बढ़ जाता है।
उदाहरण: CH₄(g) + 2O₂(g) → CO₂(g) + 2H₂O(g) + ऊष्मा (दहन अभिक्रिया)।
ऊष्माशोषी अभिक्रिया: वह रासायनिक अभिक्रिया जिसमें ऊष्मा अवशोषित होती है, ऊष्माशोषी अभिक्रिया कहलाती है। इन अभिक्रियाओं में तापमान कम हो जाता है या बाहर से ऊष्मा देनी पड़ती है।
उदाहरण: N₂(g) + O₂(g) + ऊष्मा → 2NO(g) (नाइट्रिक ऑक्साइड का निर्माण)।
प्रश्न 13. श्वसन को ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया क्यों कहते हैं? वर्णन कीजिए।
श्वसन एक जैव-रासायनिक प्रक्रिया है जिसमें हमारी कोशिकाओं में भोजन (मुख्यतः ग्लूकोज) ऑक्सीजन की उपस्थिति में टूटता है और कार्बन डाइऑक्साइड, जल तथा ऊर्जा मुक्त करता है। यह अभिक्रिया निरंतर होती रहती है। चूंकि इस प्रक्रिया में ऊर्जा (ऊष्मा के रूप में) मुक्त होती है, इसलिए इसे ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया कहा जाता है। यह मुक्त ऊर्जा हमारे शरीर के विभिन्न कार्यों जैसे काम करने, सोचने और शरीर का तापमान बनाए रखने के लिए उपयोग होती है।
समीकरण: C₆H₁₂O₆(aq) + 6O₂(g) → 6CO₂(g) + 6H₂O(l) + ऊर्जा (ATP के रूप में)
प्रश्न 14. वियोजन अभिक्रिया को संयोजन अभिक्रिया के विपरीत क्यों कहा जाता है? इन अभिक्रियाओं के लिए समीकरण लिखिए।
संयोजन अभिक्रिया में दो या अधिक पदार्थ मिलकर एक नया पदार्थ बनाते हैं, जबकि वियोजन अभिक्रिया में एक ही पदार्थ टूटकर दो या अधिक सरल पदार्थ बनाता है। दोनों अभिक्रियाएँ एक-दूसरे की विपरीत दिशा में होती हैं, इसीलिए वियोजन अभिक्रिया को संयोजन अभिक्रिया के विपरीत कहा जाता है।
उदाहरण:
संयोजन: 2H₂(g) + O₂(g) → 2H₂O(l)
वियोजन: 2H₂O(l) → विद्युत् अपघटन → 2H₂(g) + O₂(g)
जैसा कि देखा जा सकता है, पहली अभिक्रिया (संयोजन) में हाइड्रोजन और ऑक्सीजन मिलकर जल बना रहे हैं, जबकि दूसरी अभिक्रिया (वियोजन) में जल टूटकर हाइड्रोजन और ऑक्सीजन बना रहा है।
प्रश्न 15. निम्नलिखित अभिक्रियाओं के लिए एक-एक संतुलित रासायनिक समीकरण दीजिए-
(i) जब कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड जल में घुलता है तो कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड का विलयन बनता है।
Ca(OH)₂(s) + जल → Ca(OH)₂(aq) (यह एक भौतिक परिवर्तन है, रासायनिक अभिक्रिया नहीं। विलयन बनने का वर्णन करने के लिए समीकरण लिखा जा सकता है।)
(ii) हाइड्रोजन सल्फाइड गैस का वायु में दहन होता है।
2H₂S(g) + 3O₂(g) → 2H₂O(g) + 2SO₂(g)
(iii) भाप के साथ आयरन की अभिक्रिया होती है।
3Fe(s) + 4H₂O(g) → गर्म करने पर → Fe₃O₄(s) + 4H₂(g)
(iv) एलुमिनियम सल्फेट के साथ अमोनियम हाइड्रॉक्साइड की अभिक्रिया होती है।
Al₂(SO₄)₃(aq) + 6NH₄OH(aq) → 2Al(OH)₃(s)↓ + 3(NH₄)₂SO₄(aq)
प्रश्न 16. निम्नलिखित अभिक्रियाओं में रेडॉक्स अभिक्रिया की पहचान कीजिए तथा अपचयित एवं ऑक्सीकृत पदार्थ बताइए-
(i) 4Na(s) + O₂(g) → 2Na₂O(s)
रेडॉक्स अभिक्रिया: हाँ, यह एक रेडॉक्स अभिक्रिया है।
ऑक्सीकृत पदार्थ: सोडियम (Na) क्योंकि यह ऑक्सीजन के साथ संयोग कर रहा है (Na⁰ से Na⁺)।
अपचयित पदार्थ: ऑक्सीजन (O₂) क्योंकि यह सोडियम के साथ संयोग करके ऑक्साइड बना रही है (O⁰ से O²⁻)।
(ii) CuO(s) + H₂(g) → Cu(s) + H₂O(l)
रेडॉक्स अभिक्रिया: हाँ, यह एक रेडॉक्स अभिक्रिया है।
ऑक्सीकृत पदार्थ: हाइड्रोजन (H₂) क्योंकि यह ऑक्सीजन के साथ संयोग करके जल बना रहा है (H⁰ से H⁺)।
अपचयित पदार्थ: कॉपर ऑक्साइड (CuO) क्योंकि इसमें से ऑक्सीजन निकल रही है और कॉपर धातु मुक्त हो रही है (Cu²⁺ से Cu⁰)।
(iii) Fe₂O₃(s) + 3CO(g) → 2Fe(s) + 3CO₂(g)
रेडॉक्स अभिक्रिया: हाँ, यह एक रेडॉक्स अभिक्रिया है।
ऑक्सीकृत पदार्थ: कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) क्योंकि इसमें कार्बन का ऑक्सीकरण स्तर +2 से +4 (CO₂ में) हो जाता है।
अपचयित पदार्थ: आयरन ऑक्साइड (Fe₂O₃) क्योंकि इसमें आयरन का ऑक्सीकरण स्तर +3 से 0 (Fe धातु में) हो जाता है।
(iv) 2H₂S(g) + SO₂(g) → 3S(s) + 2H₂O(l)
रेडॉक्स अभिक्रिया: हाँ, यह एक रेडॉक्स अभिक्रिया है।
ऑक्सीकृत पदार्थ: हाइड्रोजन सल्फाइड (H₂S) में सल्फर (S²⁻ का ऑक्सीकरण स्तर -2 से 0 (S में) हो जाता है।
अपचयित पदार्थ: सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂) में सल्फर (S⁴⁺ का ऑक्सीकरण स्तर +4 से 0 (S में) हो जाता है।
(ध्यान दें: इस अभिक्रिया में दोनों अभिकारकों से सल्फर मुक्त होकर प्रारंभिक अवस्था (0) में आ जाता है। H₂S का S ऑक्सीकृत होता है और SO₂ का S अपचयित होता है।)
) (०)जिंक कार्बोनेट (3) -> जिंक ऑक्साइड (5) + कार्बन डाइऑक्साइड (8)
उत्तर:
यह एक वियोजन अभिक्रिया का उदाहरण है। जिंक कार्बोनेट (ZnCO₃) गर्म करने पर जिंक ऑक्साइड (ZnO) और कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) गैस में टूट जाता है। संतुलित रासायनिक समीकरण इस प्रकार है:
(०) हाइड्रोजन (8) + क्लोरीन (8) -> हाइड्रोजन क्लोराइड (8)
उत्तर:
यह एक संयोजन अभिक्रिया है। हाइड्रोजन (H₂) और क्लोरीन (Cl₂) गैसें आपस में संयोग करके हाइड्रोजन क्लोराइड (HCl) गैस बनाती हैं। संतुलित समीकरण है:
(0) मैग्नीशियम (5) + हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (94) -> मैग्नीशियम Feiss (aq) + हाइड्रोजन (8)
उत्तर:
यह एक विस्थापन अभिक्रिया है। मैग्नीशियम धातु (Mg) हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) से हाइड्रोजन को विस्थापित कर देती है, जिससे मैग्नीशियम क्लोराइड (MgCl₂) और हाइड्रोजन गैस (H₂) बनती है। संतुलित समीकरण है:
प्रश्न 9.
ऊष्माक्षेपी एवं ऊष्माशोषी अभिक्रिया का क्या अर्थ है? उदाहरण दीजिए। (2010)
उत्तर:
ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया: वे रासायनिक अभिक्रियाएँ जिनमें अभिक्रिया के दौरान ऊष्मा उत्पन्न होती है और वातावरण को मिलती है, ऊष्माक्षेपी अभिक्रियाएँ कहलाती हैं।
उदाहरण: प्राकृतिक गैस (मुख्यतः मीथेन) का वायु में दहन।
ऊष्माशोषी अभिक्रिया: वे रासायनिक अभिक्रियाएँ जिनमें अभिक्रिया को संपन्न करने के लिए बाहर से ऊष्मा अवशोषित करनी पड़ती है, ऊष्माशोषी अभिक्रियाएँ कहलाती हैं।
उदाहरण: नाइट्रोजन और ऑक्सीजन गैस का संयोग।
प्रश्न 10.
श्वसन को ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया क्यों कहते हैं? वर्णन कीजिए।
उत्तर:
श्वसन को ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया इसलिए कहते हैं क्योंकि इस प्रक्रिया में हमारी कोशिकाओं में ग्लूकोज का ऑक्सीजन की उपस्थिति में विघटन होता है। इस विघटन के परिणामस्वरूप कार्बन डाइऑक्साइड, जल और सबसे महत्वपूर्ण, ऊर्जा उत्पन्न होती है। यही ऊर्जा हमारे शरीर को विभिन्न कार्यों को करने की क्षमता प्रदान करती है। श्वसन की रासायनिक अभिक्रिया को इस समीकरण द्वारा दर्शाया जा सकता है:
प्रश्न 11.
वियोजन अभिक्रिया को संयोजन अभिक्रिया के विपरीत क्यों कहा जाता है? इन अभिक्रियाओं के लिए समीकरण लिखिए।
उत्तर:
वियोजन अभिक्रिया को संयोजन अभिक्रिया के विपरीत इसलिए कहा जाता है क्योंकि ये दोनों एक-दूसरे के उलट प्रक्रियाएँ हैं।
- संयोजन अभिक्रिया में दो या दो से अधिक पदार्थ मिलकर एक नया और एकल उत्पाद बनाते हैं।
- वियोजन अभिक्रिया में एक ही पदार्थ (यौगिक) टूटकर दो या दो से अधिक सरल पदार्थों में बदल जाता है।
वियोजन अभिक्रिया: कैल्शियम कार्बोनेट का गर्म करने पर वियोजन।
संयोजन अभिक्रिया: कैल्शियम ऑक्साइड का जल के साथ संयोग।
प्रश्न 12.
उन वियोजन अभिक्रियाओं के एक-एक समीकरण लिखिए जिनमें ऊष्मा, प्रकाश एवं विद्युत के रूप में ऊर्जा प्रदान की जाती है।
उत्तर:
- ऊष्मा द्वारा वियोजन: कैल्शियम कार्बोनेट को गर्म करने पर यह कैल्शियम ऑक्साइड और कार्बन डाइऑक्साइड में टूट जाता है।
CaCO₃(s) → गर्म करने पर → CaO(s) + CO₂(g) - प्रकाश द्वारा वियोजन: प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया में, प्रकाश की ऊर्जा से कार्बन डाइऑक्साइड और जल टूटकर ग्लूकोज और ऑक्सीजन बनाते हैं।
6CO₂(g) + 12H₂O(l) → सूर्य के प्रकाश व क्लोरोफिल की उपस्थिति में → C₆H₁₂O₆(aq) + 6O₂(g) + 6H₂O(l) - विद्युत द्वारा वियोजन (विद्युत अपघटन): जल में विद्युत धारा प्रवाहित करने पर यह हाइड्रोजन और ऑक्सीजन गैसों में विघटित हो जाता है।
2H₂O(l) → विद्युत धारा → 2H₂(g) + O₂(g)
प्रश्न 13.
विस्थापन एवं द्विविस्थापन अभिक्रियाओं में क्या अंतर है? इन अभिक्रियाओं के समीकरण लिखिए।
उत्तर:
विस्थापन और द्विविस्थापन अभिक्रिया में अंतर:
- विस्थापन अभिक्रिया में, एक अधिक क्रियाशील तत्व किसी यौगिक से कम क्रियाशील तत्व को हटाकर उसका स्थान ले लेता है। इसमें केवल एक तत्व का स्थानांतरण होता है।
- द्विविस्थापन अभिक्रिया में, दो अलग-अलग यौगिकों के बीच उनके आयनों (धनायन या ऋणायन) का आदान-प्रदान होता है, जिससे दो नए यौगिक बनते हैं।
विस्थापन अभिक्रिया: जिंक द्वारा कॉपर सल्फेट से कॉपर का विस्थापन।
द्विविस्थापन अभिक्रिया: सिल्वर नाइट्रेट और सोडियम क्लोराइड के बीच अभिक्रिया।
प्रश्न 14.
सिल्वर के शोधन में, सिल्वर नाइट्रेट के विलयन से सिल्वर प्राप्त करने के लिए कॉपर धातु द्वारा विस्थापन किया जाता है। इस प्रक्रिया के लिए अभिक्रिया लिखिए।
उत्तर:
सिल्वर के शोधन की यह प्रक्रिया एक विस्थापन अभिक्रिया है। इसमें कॉपर (Cu), जो सिल्वर (Ag) से अधिक क्रियाशील है, सिल्वर नाइट्रेट के विलयन से सिल्वर को विस्थापित कर देता है। इस अभिक्रिया का संतुलित रासायनिक समीकरण है:
प्रश्न 15.
अवक्षेपण अभिक्रिया से आप क्या समझते हैं? उदाहरण देकर समझाइए।
उत्तर:
अवक्षेपण अभिक्रिया वह रासायनिक अभिक्रिया है जिसमें दो विलयनों को मिलाने पर एक अघुलनशील ठोस पदार्थ बनता है, जिसे अवक्षेप कहते हैं। यह अवक्षेप विलयन में नीचे बैठ जाता है।
उदाहरण: जब सोडियम सल्फेट का विलयन बेरियम क्लोराइड के विलयन में मिलाया जाता है, तो सफेद रंग का बेरियम सल्फेट का अवक्षेप बनता है।
प्रश्न 16.
ऑक्सीजन के योग या हास के आधार पर निम्न पदों की व्याख्या कीजिए। प्रत्येक के लिए दो उदाहरण दीजिए - (a) उपचयन (b) अपचयन
उत्तर:
(a) उपचयन: किसी पदार्थ में ऑक्सीजन का योग या हाइड्रोजन का ह्रास उपचयन कहलाता है।
उदाहरण:
- ताँबे पर हवा की उपस्थिति में गर्म करने पर कॉपर ऑक्साइड की काली परत चढ़ना (ऑक्सीजन का योग)।
- हाइड्रोजन गैस का कॉपर ऑक्साइड से अभिक्रिया करके जल बनाना (हाइड्रोजन का ह्रास)।
उदाहरण:
- कार्बन द्वारा जिंक ऑक्साइड से ऑक्सीजन हटाकर जिंक धातु प्राप्त करना (ऑक्सीजन का ह्रास)।
- हाइड्रोजन गैस द्वारा कॉपर ऑक्साइड से ऑक्सीजन हटाकर कॉपर धातु प्राप्त करना (हाइड्रोजन का योग भी माना जा सकता है)।
प्रश्न 17.
एक भूरे रंग का चमकदार तत्त्व X को वायु की उपस्थिति में गर्म करने पर वह काले रंग का हो जाता है। इस तत्त्व X एवं उस काले रंग के यौगिक का नाम बताइए।
उत्तर:
तत्त्व X ताँबा (कॉपर, Cu) है, जो ताजा अवस्था में भूरे-लाल रंग का चमकदार धातु होता है। जब इसे वायु (ऑक्सीजन) की उपस्थिति में गर्म किया जाता है, तो यह ऑक्सीजन के साथ संयोग करके कॉपर ऑक्साइड (CuO) बनाता है, जो काले रंग का होता है।
प्रश्न 18.
लोहे की वस्तुओं को हम पेंट क्यों करते हैं?
उत्तर:
लोहे की वस्तुओं पर पेंट करने का मुख्य उद्देश्य उन्हें जंग लगने से बचाना है। पेंट की परत लोहे की सतह और वायुमंडल के बीच एक सुरक्षात्मक आवरण बना देती है। यह आवरण वायु में उपस्थित ऑक्सीजन और नमी को लोहे के संपर्क में आने से रोकता है, जिससे लोहे का संक्षारण (जंग लगना) नहीं हो पाता और वस्तु लंबे समय तक सुरक्षित रहती है।
प्रश्न 19.
तेल एवं वसायुक्त खाद्य पदार्थों को नाइट्रोजन से प्रभावित क्यों किया जाता है? (2009)
उत्तर:
तेल और वसायुक्त खाद्य पदार्थों को नाइट्रोजन गैस से प्रभावित (पैक) करने का कारण उनमें विकृतगंधिता (Rancidity) को रोकना है। जब ये पदार्थ वायु की ऑक्सीजन के संपर्क में आते हैं, तो ऑक्सीकृत होकर खराब होने लगते हैं और उनकी गंध व स्वाद बिगड़ जाता है। नाइट्रोजन एक निष्क्रिय गैस है। पैकेट से ऑक्सीजन को हटाकर नाइट्रोजन भरने से खाद्य पदार्थ ऑक्सीजन के संपर्क में नहीं आ पाते, जिससे वे लंबे समय तक ताजा और सुरक्षित रहते हैं।
प्रश्न 20.
निम्न पदों का वर्णन कीजिए तथा प्रत्येक का एक-एक उदाहरण दीजिए (2009)
(a) संक्षारण
(b) विकृतगंधिता
उत्तर:
(a) संक्षारण: वह प्रक्रिया जिसमें धातुएँ वायुमंडल में उपस्थित नमी, ऑक्सीजन, अम्ल आदि के साथ धीमी गति से रासायनिक अभिक्रिया करके अपनी सतह पर अवांछित यौगिकों (जैसे ऑक्साइड, कार्बोनेट) की परत बना लेती हैं, संक्षारण कहलाती है। इससे धातु का क्षय होता है और उसकी चमक व मजबूती कम हो जाती है।
उदाहरण: लोहे पर लगने वाला भूरा जंग (आयरन ऑक्साइड), ताँबे पर हरी परत (कॉपर कार्बोनेट) का चढ़ना।
(b) विकृतगंधिता: तेल और वसायुक्त खाद्य पदार्थों का वायु की ऑक्सीजन के साथ ऑक्सीकरण होने के कारण उनके स्वाद और गंध का खराब हो जाना, विकृतगंधिता कहलाता है। यह एक अवांछित परिवर्तन है जो खाद्य पदार्थ को अखाद्य बना देता है।
उदाहरण: बिना ढके रखे घी या चिप्स का स्वाद बदल जाना और उसमें से तीखी गंध आना।
Bihar Board Class 10 Science रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण - Additional Important Questions and Answers
बहुविकल्पीय प्रश्न
प्रश्न 1.
2KBr + BaI₂ → 2KI + BaBr₂ किस प्रकार की अभिक्रिया है?
(a) संयोजन अभिक्रिया
(b) वियोजन अभिक्रिया
(c) विस्थापन अभिक्रिया
(d) द्विविस्थापन अभिक्रिया
उत्तर: (d) द्विविस्थापन अभिक्रिया
व्याख्या: इस अभिक्रिया में पोटैशियम ब्रोमाइड (KBr) और बेरियम आयोडाइड (BaI₂) के बीच आयनों का आदान-प्रदान हो रहा है। K⁺ का आयन I⁻ के साथ और Ba²⁺ का आयन Br⁻ के साथ जुड़ रहा है, इसलिए यह एक द्विविस्थापन अभिक्रिया है।
प्रश्न 2.
घरों में सफेदी करने के लिए निम्न में से किस यौगिक का प्रयोग होता है?
(a) Ca(OH)₂
(b) CaCO₃
(c) CuO
(d) NaNO₃
उत्तर: (a) Ca(OH)₂
व्याख्या: घरों में दीवारों पर सफेदी करने के लिए चूने का पानी यानी कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड [Ca(OH)₂] के विलयन का उपयोग किया जाता है। यह हवा में मौजूद कार्बन डाइऑक्साइड से क्रिया करके कैल्शियम कार्बोनेट (CaCO₃) की एक सफेद, चमकदार और टिकाऊ परत बना देता है।
प्रश्न 3.
अपचयन की प्रक्रिया में
(a) ऑक्सीजन का ह्रास होता है
(b) हाइड्रोजन का ह्रास होता है
(c) ऑक्सीजन का योग होता है
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर: (a) ऑक्सीजन का ह्रास होता है
व्याख्या: अपचयन की परिभाषा के अनुसार, किसी पदार्थ से ऑक्सीजन का निकलना (ह्रास) या हाइड्रोजन का जुड़ना (योग) अपचयन कहलाता है। दिए गए विकल्पों में से (a) सही है।
प्रश्न 4.
2FeCl₃ + SO₂ + 2H₂O → 2FeCl₂ + H₂SO₄ + 2HCl रासायनिक अभिक्रिया में SO₂ है (2018)
(a) उपचायक
(b) अपचायक
(c) उत्प्रेरक
(d) अवक्षेप
उत्तर: (b) अपचायक
व्याख्या: इस अभिक्रिया में, सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂) फेरिक क्लोराइड (FeCl₃) को फेरस क्लोराइड (FeCl₂) में बदल रहा है। FeCl₃ में आयरन की संयोजकता +3 है जो FeCl₂ में +2 हो जाती है, यानी आयरन का अपचयन हो रहा है। जो पदार्थ दूसरे का अपचयन करवाता है, वह स्वयं उपचयित होता है और अपचायक कहलाता है। अतः SO₂ इस अभिक्रिया में अपचायक की भूमिका निभा रहा है।
अतिलघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1.
[नोट: प्रश्न पूरा नहीं दिया गया था। कृपया पूरा प्रश्न प्रदान करें ताकि उसका उत्तर दिया जा सके।]
प्रश्न 1. वायु में जलाने से पहले मैग्नीशियम रिबन को साफ क्यों किया जाता है?
मैग्नीशियम रिबन की सतह पर वायु के संपर्क में आने से मैग्नीशियम ऑक्साइड (MgO) की एक पतली परत बन जाती है। इस परत को साफ करने का उद्देश्य यह है कि शुद्ध मैग्नीशियम वायु में जले और अभिक्रिया ठीक से हो सके। यदि रिबन साफ न किया जाए, तो यह ऑक्साइड परत अभिक्रिया में बाधा डाल सकती है और प्रयोग का प्रेक्षण स्पष्ट नहीं होगा।
प्रश्न 2. निम्नलिखित रासायनिक अभिक्रियाओं के लिए संतुलित समीकरण लिखिए:
(i) हाइड्रोजन + क्लोरीन → हाइड्रोजन क्लोराइड
H₂(g) + Cl₂(g) → 2HCl(g)
(ii) बेरियम क्लोराइड + ऐलुमिनियम सल्फेट → बेरियम सल्फेट + ऐलुमिनियम क्लोराइड
3BaCl₂(aq) + Al₂(SO₄)₃(aq) → 3BaSO₄(s) + 2AlCl₃(aq)
(iii) सोडियम + जल → सोडियम हाइड्रॉक्साइड + हाइड्रोजन
2Na(s) + 2H₂O(l) → 2NaOH(aq) + H₂(g)
प्रश्न 3. निम्नलिखित अभिक्रियाओं के लिए उनकी अवस्था के संकेतों के साथ संतुलित रासायनिक समीकरण लिखिए:
(i) जल में बेरियम क्लोराइड तथा सोडियम सल्फेट के विलयन अभिक्रिया करके सोडियम क्लोराइड का विलयन तथा अघुलनशील बेरियम सल्फेट का अवक्षेप बनाते हैं।
BaCl₂(aq) + Na₂SO₄(aq) → BaSO₄(s) + 2NaCl(aq)
(ii) सोडियम हाइड्रॉक्साइड का विलयन (जल में) हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के विलयन (जल में) से अभिक्रिया करके सोडियम क्लोराइड का विलयन तथा जल बनाता है।
NaOH(aq) + HCl(aq) → NaCl(aq) + H₂O(l)
प्रश्न 4. ऊष्माक्षेपी एवं ऊष्माशोषी अभिक्रिया का क्या अर्थ है? उदाहरण दीजिए।
ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया: वे रासायनिक अभिक्रियाएँ जिनमें अभिक्रिया के दौरान ऊष्मा उत्सर्जित होती है, ऊष्माक्षेपी अभिक्रियाएँ कहलाती हैं।
उदाहरण: कोयले का वायु में जलना (C + O₂ → CO₂ + ऊष्मा)।
ऊष्माशोषी अभिक्रिया: वे रासायनिक अभिक्रियाएँ जिनमें अभिक्रिया के दौरान ऊष्मा का अवशोषण होता है, ऊष्माशोषी अभिक्रियाएँ कहलाती हैं।
उदाहरण: बेकिंग सोडा और सिरके की अभिक्रिया (NaHCO₃ + CH₃COOH → CH₃COONa + H₂O + CO₂), यह अभिक्रिया ठंडक पैदा करती है।
प्रश्न 5. श्वसन को ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया क्यों कहते हैं? वर्णन कीजिए।
श्वसन एक जैव-रासायनिक प्रक्रिया है जिसमें हमारी कोशिकाओं में भोजन (ग्लूकोज) ऑक्सीजन की उपस्थिति में टूटता है और कार्बन डाइऑक्साइड, जल तथा ऊर्जा उत्पन्न करता है। चूंकि इस प्रक्रिया में ऊर्जा (ऊष्मा के रूप में) निरंतर मुक्त होती रहती है, इसलिए इसे एक ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया कहा जाता है। यह ऊर्जा शरीर के विभिन्न कार्यों को करने के लिए उपयोग में आती है।
प्रश्न 6. वियोजन अभिक्रिया को संयोजन अभिक्रिया के विपरीत क्यों कहा जाता है? इन अभिक्रियाओं के लिए समीकरण लिखिए।
संयोजन अभिक्रिया में दो या दो से अधिक पदार्थ मिलकर एक नया पदार्थ बनाते हैं, जबकि वियोजन अभिक्रिया में एक ही पदार्थ टूटकर दो या दो से अधिक सरल पदार्थ बनाता है। चूंकि ये दोनों प्रक्रियाएँ एक-दूसरे की विपरीत हैं, इसलिए वियोजन अभिक्रिया को संयोजन अभिक्रिया के विपरीत कहा जाता है।
संयोजन अभिक्रिया का उदाहरण: CaO(s) + H₂O(l) → Ca(OH)₂(aq)
वियोजन अभिक्रिया का उदाहरण: 2H₂O(l) → 2H₂(g) + O₂(g) (विद्युत अपघटन द्वारा)
प्रश्न 7. उस वियोजन अभिक्रिया का एक समीकरण दीजिए जिसमें ऊष्मा के रूप में ऊर्जा प्रदान की जाती है।
कैल्शियम कार्बोनेट (चूना पत्थर) को गर्म करने पर यह वियोजित होकर कैल्शियम ऑक्साइड (बिना बुझा चूना) और कार्बन डाइऑक्साइड गैस देता है। यह एक ऊष्माशोषी वियोजन अभिक्रिया है जिसमें ऊष्मा प्रदान की जाती है।
प्रश्न 8. विस्थापन एवं द्विविस्थापन अभिक्रियाओं में क्या अंतर है? इन अभिक्रियाओं के लिए समीकरण लिखिए।
विस्थापन अभिक्रिया: इसमें एक अधिक अभिक्रियाशील तत्व किसी यौगिक से कम अभिक्रियाशील तत्व को विस्थापित करके स्वयं उसका स्थान ले लेता है।
उदाहरण: Fe(s) + CuSO₄(aq) → FeSO₄(aq) + Cu(s)
द्विविस्थापन अभिक्रिया: इसमें दो भिन्न यौगिकों के बीच आयनों का आदान-प्रदान होता है, जिससे दो नए यौगिक बनते हैं। इसमें अवक्षेपण या गैस का निकलना देखा जा सकता है।
उदाहरण: AgNO₃(aq) + NaCl(aq) → AgCl(s) + NaNO₃(aq)
प्रश्न 9. ऑक्सीकरण और अपचयन की परिभाषा दीजिए। उदाहरण सहित समझाइए।
ऑक्सीकरण: किसी पदार्थ द्वारा ऑक्सीजन का योग या हाइड्रोजन का ह्रास या इलेक्ट्रॉनों का त्याग करने की प्रक्रिया को ऑक्सीकरण कहते हैं।
उदाहरण: 2Mg(s) + O₂(g) → 2MgO(s) (मैग्नीशियम का ऑक्सीजन से योग)
अपचयन: किसी पदार्थ द्वारा ऑक्सीजन का ह्रास या हाइड्रोजन का योग या इलेक्ट्रॉनों का ग्रहण करने की प्रक्रिया को अपचयन कहते हैं।
उदाहरण: CuO(s) + H₂(g) → Cu(s) + H₂O(l) (कॉपर ऑक्साइड से ऑक्सीजन का ह्रास)
प्रश्न 10. निम्नलिखित अभिक्रियाओं में से किस अभिक्रिया में पदार्थ का ऑक्सीकरण तथा अपचयन हुआ है? इसकी पहचान कीजिए-
(i) 4Na(s) + O₂(g) → 2Na₂O(s)
इस अभिक्रिया में सोडियम (Na) ऑक्सीजन से संयुक्त हो रहा है, अतः सोडियम का ऑक्सीकरण हो रहा है। ऑक्सीजन (O₂) सोडियम से संयुक्त हो रही है, अतः ऑक्सीजन का अपचयन हो रहा है।
(ii) CuO(s) + H₂(g) → Cu(s) + H₂O(l)
इस अभिक्रिया में कॉपर ऑक्साइड (CuO) से ऑक्सीजन हट रही है, अतः कॉपर ऑक्साइड का अपचयन हो रहा है। हाइड्रोजन (H₂) ऑक्सीजन से संयुक्त हो रहा है, अतः हाइड्रोजन का ऑक्सीकरण हो रहा है।
प्रश्न 11. लोहे की वस्तुओं को हम पेंट क्यों करते हैं?
लोहे की वस्तुओं पर पेंट करने का मुख्य उद्देश्य उन्हें संक्षारण (जंग लगने) से बचाना है। पेंट की परत लोहे की सतह और वायु तथा नमी के बीच एक अवरोधक परत बना देती है। इससे लोहा वायु में उपस्थित ऑक्सीजन और नमी के सीधे संपर्क में नहीं आ पाता, जिससे जंग लगने की रासायनिक अभिक्रिया रुक जाती है और वस्तु लंबे समय तक सुरक्षित रहती है।
प्रश्न 12. तेल एवं वसायुक्त खाद्य पदार्थों को नाइट्रोजन से प्रभावित क्यों किया जाता है?
तेल और वसायुक्त खाद्य पदार्थों को नाइट्रोजन गैस से प्रभावित (पैक) करने का कारण यह है कि नाइट्रोजन एक अक्रिय गैस है। यह वायु में मौजूद ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया नहीं करती। जब इन खाद्य पदार्थों के पैकेट से वायु (ऑक्सीजन) को हटाकर नाइट्रोजन भरी जाती है, तो खाद्य पदार्थ का ऑक्सीकरण (रैंसिडिटी) नहीं हो पाता। इससे उनका स्वाद, गंध और पोषक तत्व लंबे समय तक सुरक्षित रहते हैं और शेल्फ लाइफ बढ़ जाती है।
प्रश्न 13. निम्नलिखित पदों का वर्णन कीजिए तथा प्रत्येक का एक-एक उदाहरण दीजिए-
(क) संक्षारण
संक्षारण वह प्रक्रिया है जिसमें धातुएँ (विशेषकर लोहा) वायु की नमी और ऑक्सीजन के साथ धीमी गति से रासायनिक अभिक्रिया करके अपने यौगिक (जैसे ऑक्साइड या हाइड्रॉक्साइड) बनाती हैं, जिससे धातु का क्षय होता है।
उदाहरण: लोहे पर जंग लगना (4Fe + 3O₂ + xH₂O → 2Fe₂O₃.xH₂O)।
(ख) विकृतगंधिता
विकृतगंधिता तेलों और वसायुक्त खाद्य पदार्थों के लंबे समय तक रखे रहने पर उनके ऑक्सीकृत हो जाने की प्रक्रिया है। इससे खाद्य पदार्थों का स्वाद और गंध बदल जाता है (खराब हो जाता है)।
उदाहरण: बासी मक्खन या तेल में बनी चिप्स का स्वाद खराब होना।
प्रश्न 1. वायु में जलाने से पहले मैग्नीशियम रिबन को साफ क्यों किया जाता है?
मैग्नीशियम रिबन की सतह पर वायु की उपस्थिति में एक पतली परत मैग्नीशियम ऑक्साइड (MgO) की बन जाती है। यदि रिबन को जलाने से पहले साफ नहीं किया जाए, तो यह ऑक्साइड परत मैग्नीशियम और ऑक्सीजन के बीच सीधे संपर्क में बाधा डालती है, जिससे अभिक्रिया ठीक से नहीं हो पाती। साफ करने से यह परत हट जाती है और मैग्नीशियम तेजी से वायु में उपस्थित ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया करके जलने लगता है, जिससे चमकदार सफेद प्रकाश निकलता है।
प्रश्न 2. रासायनिक समीकरण को संतुलित करना क्यों आवश्यक है?
रासायनिक समीकरण को संतुलित करना इसलिए आवश्यक है क्योंकि यह द्रव्यमान के संरक्षण के नियम का पालन करता है। इस नियम के अनुसार, किसी रासायनिक अभिक्रिया में न तो पदार्थ का सृजन होता है और न ही विनाश। अभिक्रिया में भाग लेने वाले तत्वों के परमाणुओं की संख्या, अभिक्रिया के बाद बने उत्पादों में उन्हीं तत्वों के परमाणुओं की संख्या के बराबर होनी चाहिए। एक संतुलित समीकरण इस बात की पुष्टि करता है कि अभिक्रिया के दोनों ओर प्रत्येक तत्व के परमाणुओं की संख्या समान है।
प्रश्न 3. निम्न कथनों को रासायनिक समीकरण के रूप में लिखकर संतुलित कीजिए-
(a) नाइट्रोजन + हाइड्रोजन → अमोनिया
संतुलित रासायनिक समीकरण:
(b) हाइड्रोजन + क्लोरीन → हाइड्रोजन क्लोराइड
संतुलित रासायनिक समीकरण:
(c) बेरियम क्लोराइड + ऐलुमिनियम सल्फेट → बेरियम सल्फेट + ऐलुमिनियम क्लोराइड
संतुलित रासायनिक समीकरण:
(d) पोटैशियम + जल → पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड + हाइड्रोजन
संतुलित रासायनिक समीकरण:
प्रश्न 4. निम्न अभिक्रियाओं के लिए संतुलित रासायनिक समीकरण लिखिए-
(a) कैल्सियम हाइड्रॉक्साइड + कार्बन डाइऑक्साइड → कैल्सियम कार्बोनेट + जल
संतुलित रासायनिक समीकरण:
(b) जिंक + सिल्वर नाइट्रेट → जिंक नाइट्रेट + सिल्वर
संतुलित रासायनिक समीकरण:
(c) ऐलुमिनियम + कॉपर क्लोराइड → ऐलुमिनियम क्लोराइड + कॉपर
संतुलित रासायनिक समीकरण:
(d) बेरियम क्लोराइड + पोटैशियम सल्फेट → बेरियम सल्फेट + पोटैशियम क्लोराइड
संतुलित रासायनिक समीकरण:
प्रश्न 5. निम्न अभिक्रियाओं के लिए संतुलित रासायनिक समीकरण लिखिए एवं अभिक्रिया का प्रकार बताइए-
(a) पोटैशियम ब्रोमाइड (aq) + बेरियम आयोडाइड (aq) → पोटैशियम आयोडाइड (aq) + बेरियम ब्रोमाइड (s)
संतुलित समीकरण:
(b) जिंक कार्बोनेट (s) → जिंक ऑक्साइड (s) + कार्बन डाइऑक्साइड (g)
संतुलित समीकरण:
(c) हाइड्रोजन (g) + क्लोरीन (g) → हाइड्रोजन क्लोराइड (g)
संतुलित समीकरण:
(d) मैग्नीशियम (s) + हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (aq) → मैग्नीशियम क्लोराइड (aq) + हाइड्रोजन (g)
संतुलित समीकरण:
प्रश्न 6. ऊष्माक्षेपी एवं ऊष्माशोषी अभिक्रिया से आप क्या समझते हैं? उदाहरण दीजिए।
ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया: वे रासायनिक अभिक्रियाएँ जिनमें अभिक्रिया के दौरान ऊष्मा उत्सर्जित होती है, ऊष्माक्षेपी अभिक्रियाएँ कहलाती हैं। इन अभिक्रियाओं में तापमान बढ़ जाता है।
उदाहरण: कोयला या मोमबत्ती का वायु में जलना।
ऊष्माशोषी अभिक्रिया: वे रासायनिक अभिक्रियाएँ जिनमें अभिक्रिया के दौरान ऊष्मा अवशोषित होती है, ऊष्माशोषी अभिक्रियाएँ कहलाती हैं। इन अभिक्रियाओं में तापमान कम हो जाता है या ठंडक महसूस होती है।
उदाहरण: बेकिंग सोडा और सिरका की अभिक्रिया।
प्रश्न 7. श्वसन को ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया क्यों कहते हैं?
श्वसन एक जैव-रासायनिक प्रक्रिया है जिसमें हमारी कोशिकाएँ भोजन (मुख्यतः ग्लूकोज) का वायु में उपस्थित ऑक्सीजन के साथ उपापचय करती हैं। इस अभिक्रिया में ग्लूकोज का पूर्ण ऑक्सीकरण होता है, जिसके परिणामस्वरूप कार्बन डाइऑक्साइड, जल और पर्याप्त मात्रा में ऊर्जा (ऊष्मा के रूप में) मुक्त होती है। यह मुक्त ऊर्जा ही हमारे शरीर के विभिन्न कार्यों को करने के लिए उपयोग होती है। चूंकि इस अभिक्रिया में ऊष्मा निरंतर मुक्त होती रहती है, इसलिए श्वसन को एक ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया कहा जाता है।
प्रश्न 8. वियोजन अभिक्रिया को संयोजन अभिक्रिया के विपरीत क्यों कहा जाता है? इन अभिक्रियाओं के लिए समीकरण लिखिए।
वियोजन अभिक्रिया और संयोजन अभिक्रिया एक-दूसरे के विपरीत (उलट) प्रक्रियाएँ हैं।
संयोजन अभिक्रिया में दो या दो से अधिक पदार्थ मिलकर एक नया एकल पदार्थ बनाते हैं।
वियोजन अभिक्रिया में एक ही पदार्थ टूटकर दो या दो से अधिक सरल पदार्थ बनाता है।
उदाहरण:
संयोजन: कैल्सियम ऑक्साइड (चूना) और जल की अभिक्रिया से कैल्सियम हाइड्रॉक्साइड (बुझा चूना) बनता है।
वियोजन: कैल्सियम हाइड्रॉक्साइड को गर्म करने पर वह वियोजित होकर फिर से कैल्सियम ऑक्साइड और जल देता है।
इस प्रकार, एक अभिक्रिया दूसरी की विपरीत है।
प्रश्न 9. उन वियोजन अभिक्रियाओं के एक-एक समीकरण लिखिए जिनमें ऊष्मा, प्रकाश एवं विद्युत के रूप में ऊर्जा प्रदान की जाती है।
(a) ऊष्मा द्वारा वियोजन: कैल्सियम कार्बोनेट (चूना पत्थर) को गर्म करने पर यह कैल्सियम ऑक्साइड और कार्बन डाइऑक्साइड में वियोजित हो जाता है।
(b) प्रकाश द्वारा वियोजन: सिल्वर क्लोराइड (AgCl) सूर्य के प्रकाश के संपर्क में आने पर वियोजित होकर सिल्वर धातु और क्लोरीन गैस देता है। यह अभिक्रिया फोटोग्राफी में उपयोग होती है।
(c) विद्युत द्वारा वियोजन (विद्युत-अपघटन): जल में विद्युत धारा प्रवाहित करने पर यह हाइड्रोजन और ऑक्सीजन गैसों में वियोजित हो जाता है।
प्रश्न 10. विस्थापन एवं द्वि-विस्थापन अभिक्रियाओं में क्या अंतर है? इन अभिक्रियाओं के समीकरण लिखिए।
विस्थापन अभिक्रिया: इसमें एक अधिक अभिक्रियाशील तत्व (सामान्यतः धातु) किसी यौगिक से कम अभिक्रियाशील तत्व को हटाकर उसका स्थान ले लेता है।
उदाहरण: लोहे की कील को कॉपर सल्फेट के विलयन में डालने पर लोहा, कॉपर को विस्थापित कर देता है।
द्वि-विस्थापन अभिक्रिया: इसमें दो अभिकारक यौगिक आपस में आयनों का आदान-प्रदान करते हैं, जिससे दो नए यौगिक बनते हैं। इसमें अवक्षेपण (Precipitate) बनना एक सामान्य लक्षण है।
उदाहरण: सोडियम सल्फेट और बेरियम क्लोराइड के विलयनों की अभिक्रिया से सफेद अवक्षेप बेरियम सल्फेट बनता है।
मुख्य अंतर: विस्थापन अभिक्रिया में एक तत्व और एक यौगिक अभिकारक होते हैं, जबकि द्वि-विस्थापन अभिक्रिया में दोनों अभिकारक यौगिक होते हैं जिनके आयन आपस में स्थान बदलते हैं।
प्रश्न 11. सिल्वर के शोधन में सिल्वर नाइट्रेट के विलयन से सिल्वर प्राप्त करने के लिए कॉपर धातु द्वारा विस्थापन किया जाता है। इस प्रक्रिया के लिए अभिक्रिया लिखिए।
जब कॉपर की प्लेट या तार को सिल्वर नाइट्रेट (AgNO3) के विलयन में डुबोया जाता है, तो कॉपर (Cu), जो सिल्वर (Ag) से अधिक अभिक्रियाशील है, सिल्वर नाइट्रेट से सिल्वर को विस्थापित कर देता है। इस अभिक्रिया में सिल्वर धातु चमकदार परत के रूप में कॉपर की सतह पर जमा हो जाती है और कॉपर नाइट्रेट का विलयन बनता है।
इस प्रक्रिया में, नीले-हरे रंग का कॉपर नाइट्रेट विलयन बनता है और सिल्वर की चमकदार परत दिखाई देती है।
प्रश्न 12. निम्न पदों का वर्णन कीजिए, उदाहरण सहित-
(a) संक्षारण
(b) विकृतगंधिता
(a) संक्षारण (Corrosion): यह एक धातु की वह अवांछनीय अभिक्रिया है जो वायु, नमी या किसी रासायनिक पदार्थ (जैसे अम्ल) के संपर्क में आने पर धीरे-धीरे उसके सतह को नष्ट कर देती है। सबसे आम उदाहरण लोहे पर जंग लगना है। लोहा वायु में उपस्थित ऑक्सीजन और नमी के साथ अभिक्रिया करके हाइड्रेटेड आयरन ऑक्साइड (Fe2O3.xH2O) बनाता है, जिसे हम जंग कहते हैं। यह प्रक्रिया धातु को कमजोर और खराब कर देती है।
(b) विकृतगंधिता (Rancidity): यह वह प्रक्रिया है जिसमें वसा और तेल युक्त खाद्य पदार्थ लंबे समय तक वायु, नमी या प्रकाश के संपर्क में रहने पर उनका ऑक्सीकरण हो जाता है। इससे खाद्य पदार्थ की गंध और स्वाद बदल जाता है, वह बासी हो जाता है। यह एक धीमी ऑक्सीकरण अभिक्रिया है।
उदाहरण: खुले में रखा चिप्स या नमकीन, मक्खन आदि का बासी हो जाना।
रोकथाम: विकृतगंधिता को रोकने के लिए खाद्य पदार्थों को वायुरोधी बर्तनों में रखा जाता है, उनमें प्रतिऑक्सीकारक (एंटीऑक्सीडेंट) मिलाए जाते हैं, या नाइट्रोजन जैसी अक्रिय गैस से भरकर पैक किया जाता है।
रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण
प्रश्न 3. निम्नलिखित अभिक्रियाओं में पहचान कीजिए कि किस पदार्थ का उपचयन (ऑक्सीकरण) और किस पदार्थ का अपचयन होता है? पदार्थ के उपचयन और अपचयन की आयनिक अभिक्रियाएँ लिखिए -
- H2(g) + Cl2(g) → 2HCl(g)
- H2(g) + CuO(s) → Cu(s) + H2O(l)
- 2H2S(g) + SO2(g) → 3S(s) + 2H2O(l)
- Zn(s) + 2AgNO3(aq) → Zn(NO3)2(aq) + 2Ag(s)
- 2Al(s) + 6HCl(aq) → 2AlCl3(aq) + 3H2(g)
उत्तर:
-
H2(g) + Cl2(g) → 2HCl(g)
इस अभिक्रिया में, हाइड्रोजन (H2) का उपचयन (ऑक्सीकरण) होता है क्योंकि यह इलेक्ट्रॉन त्यागकर H+ आयन बनाता है। क्लोरीन (Cl2) का अपचयन होता है क्योंकि यह इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके Cl- आयन बनाती है।
आयनिक अभिक्रियाएँ:
उपचयन (H2): H2 → 2H+ + 2e-
अपचयन (Cl2): Cl2 + 2e- → 2Cl-
संयुक्त अभिक्रिया: H2 + Cl2 → 2H+ + 2Cl- (या 2HCl) -
H2(g) + CuO(s) → Cu(s) + H2O(l)
इस अभिक्रिया में, हाइड्रोजन (H2) का उपचयन होता है क्योंकि यह CuO से ऑक्सीजन लेकर H2O बनाता है और स्वयं ऑक्सीकृत हो जाता है। कॉपर ऑक्साइड (CuO) का अपचयन होता है क्योंकि यह अपनी ऑक्सीजन खोकर ताँबे (Cu) में परिवर्तित हो जाता है।
आयनिक अभिक्रियाएँ:
उपचयन (H2): H2 → 2H+ + 2e-
अपचयन (CuO): Cu2+ (CuO में) + 2e- → Cu(s)
(ध्यान दें: CuO, Cu2+ और O2- आयनों से बना है। H2 द्वारा दिए गए इलेक्ट्रॉन Cu2+ ग्रहण करते हैं।) -
2H2S(g) + SO2(g) → 3S(s) + 2H2O(l)
इस अभिक्रिया में, हाइड्रोजन सल्फाइड (H2S) का उपचयन होता है क्योंकि इसमें सल्फर की ऑक्सीकरण अवस्था -2 से बढ़कर 0 (मुक्त सल्फर) हो जाती है। सल्फर डाइऑक्साइड (SO2) का अपचयन होता है क्योंकि इसमें सल्फर की ऑक्सीकरण अवस्था +4 से घटकर 0 हो जाती है।
आयनिक अभिक्रियाएँ (सरलीकृत):
उपचयन (H2S में S): S2- → S + 2e-
अपचयन (SO2 में S): S4+ + 4e- → S
(वास्तव में यह एक सह-उपचयन-अपचयन अभिक्रिया है जहाँ दोनों स्रोतों से आया सल्फर मुक्त सल्फर में बदलता है।) -
Zn(s) + 2AgNO3(aq) → Zn(NO3)2(aq) + 2Ag(s)
इस अभिक्रिया में, जिंक (Zn) का उपचयन होता है क्योंकि यह इलेक्ट्रॉन त्यागकर Zn2+ आयन बनाता है। सिल्वर आयन (Ag+) का अपचयन होता है क्योंकि यह इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके सिल्वर धातु (Ag) में बदल जाता है।
आयनिक अभिक्रियाएँ:
उपचयन (Zn): Zn(s) → Zn2+(aq) + 2e-
अपचयन (Ag+): 2Ag+(aq) + 2e- → 2Ag(s)
कुल अभिक्रिया: Zn(s) + 2Ag+(aq) → Zn2+(aq) + 2Ag(s) -
2Al(s) + 6HCl(aq) → 2AlCl3(aq) + 3H2(g)
इस अभिक्रिया में, ऐलुमिनियम (Al) का उपचयन होता है क्योंकि यह इलेक्ट्रॉन त्यागकर Al3+ आयन बनाता है। हाइड्रोजन आयन (H+ अम्ल में) का अपचयन होता है क्योंकि यह इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके हाइड्रोजन गैस (H2) में बदल जाता है।
आयनिक अभिक्रियाएँ:
उपचयन (Al): 2Al(s) → 2Al3+(aq) + 6e-
अपचयन (H+): 6H+(aq) + 6e- → 3H2(g)
कुल अभिक्रिया: 2Al(s) + 6H+(aq) → 2Al3+(aq) + 3H2(g)
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