Bihar Board Class 10th Science (विज्ञान) Chapter 2 अम्ल, क्षारक एवं लवण) Solutions
Here we have provided Solution for Chapter 2 अम्ल, क्षारक एवं लवण) of Science (विज्ञान) subject for Class 10th students of Bihar Board of Secondary Education. There are various chapters in this Science (विज्ञान) such as Chapter 1 रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण), Chapter 2 अम्ल, क्षारक एवं लवण), Chapter 3 धातु एवं अधातु), Chapter 4 कार्बन एवं इसके यौगिक), Chapter 5 तत्वों का आवर्त वर्गीकरण), Chapter 6 जैव प्रक्रम), Chapter 7 नियंत्रण एवं समन्वय), Chapter 8 जीव जनन कैसे करते है), Chapter 9 अनुवांशिकता एवं जैव विकास), Chapter 10 प्रकाश(परावर्तन तथा अपवर्तन), Chapter 11 मानव नेत्र एवं रंगबिरंगा संसार), Chapter 12 विद्युत), Chapter 13 विद्युत धारा का चुम्बकीय प्रभाव), Chapter 14 उर्जा के स्रोत), Chapter 15 हमारा पर्यावरण) and Chapter 16 प्राकृतिक संसाधनों का संपोषित प्रबंधन). Summary of the same is given below:
| Board Name | Bihar Board of Secondary Education |
| Class | Class 10th |
| Content Type | Solution |
| Solution for | Class 10th students |
| Subject | Science (विज्ञान) |
| Chapter Name | Chapter 2 अम्ल, क्षारक एवं लवण) |
| Total Number of Chapter in this Subject | 16 |
Studying Bihar Board Class 10th Science (विज्ञान) Chapter 2 अम्ल, क्षारक एवं लवण) solution will help you higher marks in this subject but you need to follow best practices to achieve higher marks, which are given after solutions, go through them once.
Bihar Board Class 10th Science (विज्ञान) Chapter 2 अम्ल, क्षारक एवं लवण) Solutions
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प्रश्न 1.
आपको तीन परखनलियाँ दी गई हैं। इनमें स्ते एक में आसवित जल एवं शेष दो में से एक में अम्लीय विलयन तथा दूसरे में क्षारकीय विलयन है। यदि आपको केवल लाल लिट्मस पत्र दिया जाता है तो आप प्रत्येक परखनली में रखे गए पदार्थों की पहचान कैसे करेंगे?
उत्तर देखें
सबसे पहले, तीनों परखनलियों में लाल लिटमस पेपर की एक-एक पट्टी डालेंगे। जिस परखनली में लाल लिटमस पेपर का रंग नीला हो जाता है, उसमें क्षारकीय विलयन है। बाकी दोनों परखनलियों में लिटमस पेपर लाल ही रहता है, जिसका अर्थ है कि उनमें या तो आसवित जल है या अम्लीय विलयन।
अब, क्षारकीय विलयन वाली परखनली से थोड़ा विलयन लेकर बची हुई दोनों परखनलियों में अलग-अलग डालेंगे और फिर से लाल लिटमस पेपर डालेंगे। जिस परखनली में लाल लिटमस पेपर फिर से नीला हो जाता है, उसमें आसवित जल है (क्योंकि आसवित जल उदासीन होता है और क्षारक मिलाने पर क्षारकीय हो जाता है)। जिस परखनली में लाल लिटमस पेपर का रंग लाल ही रहता है, उसमें अम्लीय विलयन है (क्योंकि अम्ल, क्षारक को उदासीन कर देता है)।
प्रश्न 1.
पीतल एवं ताँबे के बर्तनों में दही एवं खट्टे पदार्थ क्यों नहीं रखने चाहिए?
उत्तर देखें
दही और खट्टे पदार्थ (जैसे अचार, चटनी) में अम्ल होते हैं। जब इन्हें पीतल या ताँबे जैसी धातुओं के बर्तनों में रखा जाता है, तो अम्ल धातु के साथ रासायनिक अभिक्रिया करके धात्विक लवण बनाते हैं। ये लवण भोजन में मिल जाते हैं और उसे दूषित कर देते हैं। इस दूषित भोजन के सेवन से पेट में जलन, दर्द या अन्य स्वास्थ्य समस्याएँ हो सकती हैं। इसीलिए खट्टे पदार्थों को काँच, स्टील या चीनी मिट्टी के बर्तनों में रखना चाहिए।
प्रश्न 2.
धातु के साथ अम्ल की अभिक्रिया होने पर सामान्यतः कौन-सी गैस निकलती है? एक उदाहरण के द्वारा समझाइए। इस गैस की उपस्थिति की जाँच आप कैसे करेंगे?
उत्तर देखें
धातु के साथ अम्ल की अभिक्रिया होने पर सामान्यतः हाइड्रोजन गैस (H₂) निकलती है।
उदाहरण: जब जिंक (Zn) धातु की पतली पट्टी को सल्फ्यूरिक अम्ल (H₂SO₄) में डालते हैं, तो हाइड्रोजन गैस बुदबुदाहट के साथ निकलती है और जिंक सल्फेट बनता है।
जाँच की विधि: निकलने वाली गैस को एक परखनली में इकट्ठा करके उसके पास एक जलती हुई मोमबत्ती ले जाएँ। यदि गैस हाइड्रोजन है, तो वह मोमबत्ती की लौ के साथ मिलकर एक तेज 'पॉप' की आवाज के साथ जलेगी या लौ तेज हो जाएगी।
प्रश्न 3.
कोई धातु यौगिक 'A' तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के साथ अभिक्रिया करता है तो बुदबुदाहट उत्पन्न होती है। इससे उत्पन्न गैस जलती मोमबत्ती को बुझा देती है। यदि उत्पन्न यौगिकों में से एक कैल्सियम क्लोराइड है, तो इस अभिक्रिया के लिए संतुलित रासायनिक समीकरण लिखिए।
उत्तर देखें
यहाँ धातु यौगिक 'A' कैल्सियम कार्बोनेट (CaCO₃) है, जो संगमरमर या चॉक का मुख्य घटक है। यह तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) के साथ अभिक्रिया करके कैल्सियम क्लोराइड (CaCl₂), पानी (H₂O) और कार्बन डाइऑक्साइड गैस (CO₂) देता है। कार्बन डाइऑक्साइड गैस जलती हुई मोमबत्ती को बुझा देती है।
संतुलित रासायनिक समीकरण:
प्रश्न 1.
HCl, HNO3 आदि जलीय विलयन में अम्लीय अभिलक्षण क्यों प्रदर्शित करते हैं, जबकि ऐल्कोहॉल एवं ग्लूकोज जैसे यौगिकों के विलयनों में अम्लीयता के अभिलक्षण वहीं प्रदर्शित होते हैं?
उत्तर देखें
HCl और HNO₃ जैसे अम्ल जल में घुलने पर आयनित होकर हाइड्रोजन आयन (H⁺) उत्पन्न करते हैं। ये H⁺ आयन ही अम्लीय गुणों (जैसे लिटमस पेपर का रंग बदलना, धातुओं से अभिक्रिया) के लिए जिम्मेदार होते हैं।
वहीं, ग्लूकोज और एल्कोहॉल जैसे यौगिक भी जल में घुल जाते हैं, लेकिन वे आयनित नहीं होते और H⁺ आयन मुक्त नहीं करते। इसलिए, भले ही ये यौगिक कार्बनिक पदार्थ हैं, पर वे अम्लीय गुण प्रदर्शित नहीं करते।
प्रश्न 2.
अम्ल का जलीय विलयन क्यों विद्युत का चालन करता है?
उत्तर देखें
अम्ल का जलीय विलयन विद्युत का चालन इसलिए करता है क्योंकि जल में घुलने पर अम्ल आयनों में विभाजित हो जाता है। उदाहरण के लिए, HCl जल में H⁺ और Cl⁻ आयन देता है। विद्युत धारा का प्रवाह इन्हीं मुक्त आयनों के कारण संभव हो पाता है, क्योंकि ये आयन विद्युत के वाहक (Charge Carriers) का काम करते हैं।
प्रश्न 3.
शुष्क हाइड्रोक्लोरिक गैस शुष्क लिठमस पत्र के रंग को क्यों नहीं बदलती है?
उत्तर देखें
शुष्क हाइड्रोक्लोरिक (HCl) गैस शुष्क लिटमस पेपर का रंग इसलिए नहीं बदलती क्योंकि अम्लीय गुण केवल हाइड्रोजन आयन (H⁺) की उपस्थिति में ही प्रकट होते हैं। शुष्क HCl गैस में HCl अणु होते हैं, जो आयनित नहीं होते। H⁺ आयन केवल तभी बनते हैं जब HCl गैस जल के संपर्क में आती है। बिना नमी के, लिटमस पेपर पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
प्रश्न 4.
अम्ल को तनुकृत करते समय यह क्यों अनुशंसित करते हैं कि अम्ल को जल में मिलाना चाहिए, न कि जल को अम्ल में?
उत्तर देखें
अम्ल को जल में मिलाने की सलाह इसलिए दी जाती है क्योंकि अम्ल और जल की मिलाने की क्रिया एक अत्यधिक ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया है, यानी इसमें बहुत अधिक ऊष्मा निकलती है। यदि जल को सांद्र अम्ल में डाला जाए, तो अचानक उत्पन्न हुई भारी मात्रा में ऊष्मा के कारण मिश्रण उबलने लगता है और छिटक सकता है, जिससे गंभीर जलन या दुर्घटना हो सकती है।
वहीं, अम्ल को धीरे-धीरे जल में मिलाने पर ऊष्मा धीरे-धीरे निकलती है और जल की अधिक मात्रा उसे सुरक्षित रूप से अवशोषित कर लेती है।
प्रश्न 5.
अम्ल के विलयन को तनुकृत करते समय हाइड्रोनियम आयन (H3O⁺) की सांद्रता कैसे प्रभावित हो जाती है?
उत्तर देखें
जब अम्ल के विलयन में जल मिलाकर उसे तनु (पतला) किया जाता है, तो विलयन का कुल आयतन बढ़ जाता है, लेकिन H⁺ (या H₃O⁺) आयनों की संख्या वही रहती है। इसका मतलब है कि प्रति इकाई आयतन में H₃O⁺ आयनों की संख्या कम हो जाती है। इस प्रकार, तनुकरण से हाइड्रोनियम आयनों की सांद्रता घट जाती है और विलयन की अम्लीय प्रबलता कम हो जाती है।
प्रश्न 6.
जब सोडियम हाइड्रॉक्साइड विलयन में आधिक्य क्षारक मिलाते हैं तो हाइड्रॉक्साइड आयन (OH⁻) की सांद्रता कैसे प्रभावित होती है?
उत्तर देखें
सोडियम हाइड्रॉक्साइड (NaOH) स्वयं एक प्रबल क्षारक है जो जल में OH⁻ आयन देता है। जब इसके विलयन में और अधिक क्षारक (जैसे और NaOH या कोई अन्य क्षारक) मिलाया जाता है, तो विलयन में OH⁻ आयनों की कुल संख्या बढ़ जाती है। चूंकि विलयन का आयतन ज्यादा नहीं बदलता, इसलिए OH⁻ आयनों की सांद्रता बढ़ जाती है, जिससे विलयन और अधिक क्षारकीय हो जाता है।
प्रश्न 1.
आपके पास दो विलयन 'A' एवं 'B' हैं। विलयन 'A' के pH का मान 6 है एवं विलयन 'B' के pH का मान 8 है। किस विलयन में हाइड्रोजन आयन की सांद्रता अधिक है? इनमें से कौन अम्लीय है तथा कौन क्षारकीय?
उत्तर देखें
pH पैमाने पर, 7 से कम pH वाला विलयन अम्लीय होता है और 7 से अधिक pH वाला विलयन क्षारकीय होता है। pH का मान जितना कम होगा, H⁺ आयनों की सांद्रता उतनी ही अधिक होगी।
- विलयन 'A' का pH = 6 (7 से कम) है, इसलिए यह अम्लीय है और इसमें H⁺ आयनों की सांद्रता अधिक है।
- विलयन 'B' का pH = 8 (7 से अधिक) है, इसलिए यह क्षारकीय है और इसमें H⁺ आयनों की सांद्रता कम है।
प्रश्न 2.
H⁺ (aq) आयन की सांद्रता का विलयन की प्रकृति पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर देखें
विलयन में H⁺ (aq) आयनों की सांद्रता विलयन की अम्लीय या क्षारकीय प्रकृति निर्धारित करती है।
- यदि H⁺ आयनों की सांद्रता अधिक है (pH < 7), तो विलयन अम्लीय होता है।
- यदि H⁺ आयनों की सांद्रता कम है (pH > 7), तो विलयन क्षारकीय होता है।
- यदि H⁺ और OH⁻ आयनों की सांद्रता बराबर है (pH = 7), तो विलयन उदासीन होता है।
प्रश्न 3.
क्या क्षारकीय विलयन में H⁺ (aq) आयन होते हैं? अगर हाँ, तो यह क्षारकीय क्यों होते हैं?
उत्तर देखें
हाँ, क्षारकीय विलयन में भी H⁺ (aq) आयन होते हैं, लेकिन उनकी मात्रा बहुत कम होती है। जल में हमेशा कुछ मात्रा में H⁺ और OH⁻ आयन होते हैं। क्षारकीय विलयन की प्रकृति इसलिए होती है क्योंकि उसमें OH⁻ आयनों की सांद्रता, H⁺ आयनों की सांद्रता से बहुत अधिक होती है। दूसरे शब्दों में, क्षारकीय विलयन में H⁺ आयन तो होते हैं, लेकिन उन पर OH⁻ आयनों का प्रभाव हावी रहता है, जिससे विलयन का pH 7 से अधिक हो जाता है।
प्रश्न 4.
कोई किसान खेत की मृदा की किस परिस्थिति में बिना बुझा हुआ चूना (कैल्सियम ऑक्साइड), बुझा हुआ चूना (कैल्सियम हाइड्रॉक्साइड) या चॉक (कैल्सियम कार्बोनेट) का उपयोग करेगा?
उत्तर देखें
जब खेत की मिट्टी अधिक अम्लीय हो जाती है (अर्थात् उसका pH मान 7 से कम, जैसे 5 या 4 हो जाता है), तो फसलों की वृद्धि प्रभावित होती है। ऐसी अम्लीय मिट्टी को सुधारने (उदासीन करने) के लिए किसान इन क्षारकीय पदार्थों का उपयोग करेगा:
1. बिना बुझा चूना (कैल्सियम ऑक्साइड - CaO)
2. बुझा हुआ चूना (कैल्सियम हाइड्रॉक्साइड - Ca(OH)₂)
3. चॉक (कैल्सियम कार्बोनेट - CaCO₃)
ये सभी पदार्थ मिट्टी के अम्ल के साथ अभिक्रिया करके उसे उदासीन बनाते हैं और मिट्टी की उर्वरता बढ़ाते हैं।
प्रश्न 1.
CaOCl₂ यौगिक का प्रचलित नाम क्या है?
उत्तर देखें
CaOCl₂ यौगिक का प्रचलित नाम ब्लीचिंग पाउडर या विरंजक चूर्ण है। इसका रासायनिक नाम कैल्सियम ऑक्सीक्लोराइड या कैल्सियम हाइपोक्लोराइट भी है।
प्रश्न 2.
उस पदार्थ का नाम बताइए जो क्लोरीन से क्रिया करके विरंजक चूर्ण बनाता है।
उत्तर देखें
बुझा हुआ चूना [Ca(OH)₂] जब शुष्क क्लोरीन गैस (Cl₂) के साथ अभिक्रिया करता है, तो विरंजक चूर्ण (CaOCl₂) बनता है।
रासायनिक अभिक्रिया: Ca(OH)₂ + Cl₂ → CaOCl₂ + H₂O
प्रश्न 3.
कठोर जल को मृदु करने के लिए किस सोडियम यौगिक का उपयोग किया जाता है?
उत्तर देखें
कठोर जल को मृदु (नरम) करने के लिए सोडियम कार्बोनेट (Na₂CO₃.10H₂O) का उपयोग किया जाता है, जिसे धोने का सोडा या वॉशिंग सोडा भी कहते हैं। यह जल में उपस्थित कैल्सियम (Ca²⁺) और मैग्नीशियम (Mg²⁺) आयनों से अभिक्रिया करके अघुलनशील कार्बोनेट का अवक्षेप बनाता है, जिसे छानकर अलग कर दिया जाता है। इससे जल मृदु हो जाता है।
प्रश्न 4. सोडियम हाइड़ोजनकार्बोनेट के विलयन को गर्म करने पर क्या होगा? इस अभिक्रिया के लिए समीकरण लिखिए।
जब सोडियम हाइड्रोजनकार्बोनेट (बेकिंग सोडा) के विलयन को गर्म किया जाता है, तो यह विघटित होकर तीन पदार्थ बनाता है: सोडियम कार्बोनेट, जल और कार्बन डाइऑक्साइड गैस। यह कार्बन डाइऑक्साइड गैस ही बुलबुले बनाती है।
रासायनिक समीकरण:
2NaHCO3(s) ⟶ Na2CO3(s) + H2O(l) + CO2(g)
(सोडियम हाइड्रोजनकार्बोनेट) (सोडियम कार्बोनेट) (जल) (कार्बन डाइऑक्साइड)
प्रश्न 5. प्लास्टर ऑफ पेरिस की जल के साथ अभिक्रिया के लिए समीकरण लिखिए।
प्लास्टर ऑफ पेरिस (केल्सियम सल्फेट हेमीहाइड्रेट) जल के साथ तीव्रता से अभिक्रिया करके जिप्सम (केल्सियम सल्फेट डाइहाइड्रेट) बनाता है, जो एक कठोर ठोस पदार्थ है। यही कारण है कि इसका उपयोग प्लास्टर बनाने में किया जाता है।
रासायनिक समीकरण:
CaSO4 . 1/2H2O + 11/2H2O ⟶ CaSO4 . 2H2O
(प्लास्टर ऑफ पेरिस) (जल) (जिप्सम)
प्रश्न 1. कोई विलयन लाल लिटमस को नीला कर देता है, इसका pH संभवतः क्या होगा?
(a) 1
(b) 4
(c) 5
(d) 10
(d) 10
लाल लिटमस पेपर नीला हो जाता है जब विलयन क्षारीय (एल्कलाइन) होता है। क्षारीय विलयनों का pH मान 7 से अधिक होता है। दिए गए विकल्पों में, केवल 10 ही 7 से बहुत अधिक है, जो एक प्रबल क्षारीय विलयन का संकेत देता है।
प्रश्न 2. कोई विलयन अंडे के पिसे हुए कवच से अभिक्रिया कर एक गैस उत्पन्न करता है जो चूने के पानी को दूधिया कर देती है। इस विलयन में क्या होगा?
(a) NaCl
(b) HCl
(c) LiCl
(d) KCl
(b) HCl
अंडे के कवच का मुख्य घटक कैल्शियम कार्बोनेट (CaCO3) है। जब यह हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) से अभिक्रिया करता है, तो कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) गैस निकलती है। यही CO2 गैस चूने के पानी [Ca(OH)2] से अभिक्रिया करके कैल्शियम कार्बोनेट का सफेद अवक्षेप बनाती है, जिससे चूने का पानी दूधिया दिखाई देने लगता है।
प्रश्न 3. NaOH का 10 mL विलयन, HCl के 8 mL विलयन से पूर्णतः उदासीन हो जाता है। यदि हम NaOH के उसी विलयन का 20 mL लें तो इसे उदासीन करने के लिए HCl के उसी विलयन की कितनी मात्रा की आवश्यकता होगी?
(a) 4 mL
(b) 8 mL
(c) 12 mL
(d) 16 mL
(d) 16 mL
यह एक सरल अनुपात का प्रश्न है। 10 mL NaOH को उदासीन करने के लिए 8 mL HCl लगता है।
अतः, 1 mL NaOH को उदासीन करने के लिए (8/10) mL HCl लगेगा।
इसलिए, 20 mL NaOH को उदासीन करने के लिए आवश्यक HCl = 20 × (8/10) = 16 mL होगा।
प्रश्न 4. अपच का उपचार करने के लिए निम्न में से किस औषधि का उपयोग होता है?
(a) एंटीबायोटिक (प्रतिजैविक)
(b) ऐनालजेसिक (पीड़ाहारी)
(c) ऐन्टैसिड
(d) एंटीसेप्टिक (प्रतिरोधी)
(c) ऐन्टैसिड
अपच (एसिडिटी) पेट में अम्ल की अधिकता के कारण होता है। ऐन्टैसिड दवाएं (जैसे मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड) क्षारीय प्रकृति की होती हैं जो अतिरिक्त अम्ल को उदासीन करके राहत प्रदान करती हैं।
प्रश्न 5. निम्न अभिक्रिया के लिए पहले शब्द-समीकरण लिखिए तथा उसके बाद संतुलित समीकरण लिखिए
(a) तनु सल्फ्यूरिक अम्ल दानेदार जिंक के साथ अभिक्रिया करता है।
(b) तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल मैग्नीशियम पट्टी के साथ अभिक्रिया करता है।
(c) तनु सल्फ्यूरिक अम्ल ऐलुमिनियम चूर्ण के साथ अभिक्रिया करता है।
(d) तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल लौह के रेतन के साथ अभिक्रिया करता है।
(a) शब्द-समीकरण: जिंक + तनु सल्फ्यूरिक अम्ल → जिंक सल्फेट + हाइड्रोजन गैस
संतुलित समीकरण: Zn(s) + H2SO4(aq) → ZnSO4(aq) + H2(g)
(b) शब्द-समीकरण: मैग्नीशियम + तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल → मैग्नीशियम क्लोराइड + हाइड्रोजन गैस
संतुलित समीकरण: Mg(s) + 2HCl(aq) → MgCl2(aq) + H2(g)
(c) शब्द-समीकरण: ऐलुमिनियम + तनु सल्फ्यूरिक अम्ल → ऐलुमिनियम सल्फेट + हाइड्रोजन गैस
संतुलित समीकरण: 2Al(s) + 3H2SO4(aq) → Al2(SO4)3(aq) + 3H2(g)
(d) शब्द-समीकरण: आयरन + तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल → आयरन क्लोराइड + हाइड्रोजन गैस
संतुलित समीकरण: Fe(s) + 2HCl(aq) → FeCl2(aq) + H2(g)
प्रश्न 6. ऐल्कोहॉल एवं ग्लूकोज जैसे यौगिकों में भी हाइड्रोजन होते हैं लेकिन इनका वर्गीकरण अम्ल की तरह नहीं होता है। एक क्रियाकलाप द्वारा इसे साबित कीजिए।
सिद्ध करने का तरीका (क्रियाकलाप):
1. एक बीकर में दो ग्राफाइट की इलेक्ट्रोड (कीलें) लगे हुए कॉर्क रखें।
2. इन इलेक्ट्रोडों को एक बल्ब और स्विच के माध्यम से 6 वोल्ट की बैटरी से जोड़ दें।
3. अब बीकर में ऐल्कोहॉल (या ग्लूकोज) का विलयन डालें और स्विच चालू करें।
प्रेक्षण: बल्ब नहीं जलता है।
निष्कर्ष: बल्ब के न जलने का अर्थ है कि ऐल्कोहॉल या ग्लूकोज के विलयन में विद्युत का चालन नहीं होता। विद्युत चालन के लिए विलयन में मुक्त आयनों (जैसे H+) का होना आवश्यक है। अम्ल जल में आयनित होकर H+ आयन देते हैं, इसलिए वे विद्युत का चालन करते हैं। चूंकि ऐल्कोहॉल और ग्लूकोज जल में H+ आयन मुक्त नहीं करते, इसलिए इन्हें अम्लों की श्रेणी में नहीं रखा जाता।
प्रश्न 7. आसवित जल विद्युत का चालक क्यों नहीं होता जबकि वर्षा जल होता है?
आसवित जल शुद्ध जल (H2O) होता है, जिसमें कोई अशुद्धि या आयन नहीं होते। विद्युत चालन के लिए मुक्त आयनों का होना जरूरी है, और शुद्ध जल में H+ और OH- आयनों की सांद्रता बहुत कम होती है। इसलिए यह विद्युत का चालन नहीं करता।
दूसरी ओर, वर्षा जल वायुमंडल में घुली कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) के साथ अभिक्रिया करके कार्बोनिक अम्ल (H2CO3) बनाता है। यह अम्ल जल में आयनित होकर H+ और HCO3- आयन देता है। ये मुक्त आयन ही वर्षा जल को विद्युत का चालक बना देते हैं।
प्रश्न 8. जल की अनुपस्थिति में अम्ल का व्यवहार अम्लीय क्यों नहीं होता है?
अम्ल की अम्लीय प्रकृति का कारण हाइड्रोजन आयन (H+) होता है। जब अम्ल जल में घुलता है, तो वह आयनित होकर H+ आयन मुक्त करता है (उदाहरण: HCl → H+ + Cl-)। ये H+ आयन ही नीले लिटमस को लाल करते हैं या धातुओं से अभिक्रिया करते हैं।
जल की अनुपस्थिति में, अम्ल आयनित नहीं हो पाता और H+ आयन मुक्त नहीं कर पाता। इसलिए, बिना जल के अम्ल अपनी विशिष्ट अम्लीय प्रकृति नहीं दिखा पाता।
प्रश्न 9. पाँच विलयन A,B,C,D व E की जब सार्वत्रिक सूचक से जाँच की जाती है तो pH के मान क्रमशः 4,1,11,7 एवं 9 प्राप्त होते हैं। कौन-सा विलयन
(a) उदासीन है?
(b) प्रबल क्षारीय है?
(c) प्रबल अम्लीय है?
(d) दुर्बल अम्लीय है?
(e) दुर्बल क्षारीय है?
pH के मानों को हाइड्रोजन आयन की सांद्रता के आरोही क्रम में व्यवस्थित कीजिए।
विलयनों की पहचान:
A (pH=4), B (pH=1), C (pH=11), D (pH=7), E (pH=9)
(a) उदासीन विलयन: D (pH=7)
(b) प्रबल क्षारीय विलयन: C (pH=11)
(c) प्रबल अम्लीय विलयन: B (pH=1)
(d) दुर्बल अम्लीय विलयन: A (pH=4)
(e) दुर्बल क्षारीय विलयन: E (pH=9)
हाइड्रोजन आयन सांद्रता [H+] का आरोही क्रम (कम से ज्यादा):
pH का मान जितना अधिक होगा, [H+] उतना ही कम होगा।
इसलिए, [H+] का बढ़ता क्रम है: C (pH=11) < E (pH=9) < D (pH=7) < A (pH=4) < B (pH=1)
प्रश्न 10. परखनली 'A' एवं 'B' में समान लंबाई की मैग्नीशियम की पट्टी लीजिए। परखनली 'A' में हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) तथा परखनली 'B' में ऐसिटिक अम्ल (CH3COOH) डालिए। दोनों अम्लों की मात्रा तथा सांद्रता समान हैं। किस परखनली में अधिक तेजी से बुदबुदाहट होगी तथा क्यों?
परखनली 'A' में अधिक तेजी से बुदबुदाहट होगी।
बुदबुदाहट हाइड्रोजन गैस (H2) के निकलने के कारण होती है। HCl एक प्रबल अम्ल है जो जल में पूर्णतः आयनित होकर अधिक H+ आयन देता है। जबकि CH3COOH एक दुर्बल अम्ल है जो आंशिक रूप से आयनित होता है और कम H+ आयन देता है।
चूंकि मैग्नीशियम (Mg) की अभिक्रिया H+ आयनों के साथ होती है, इसलिए अधिक H+ आयनों वाले HCl में अभिक्रिया तेज गति से होगी और अधिक तेजी से हाइड्रोजन गैस के बुलबुले (बुदबुदाहट) दिखाई देंगे।
प्रश्न 11. ताजे दूध के pH का मान 6 होता है। दही बन जाने पर इसके pH के मान में क्या परिवर्तन होगा? अपना उत्तर समझाइए।
दही बन जाने पर दूध का pH मान घटेगा (6 से कम हो जाएगा) और यह अधिक अम्लीय हो जाएगा।
कारण: दही बनने की प्रक्रिया में, दूध में उपस्थित लैक्टोज नामक शर्करा का किण्वन (फरमेंटेशन) होता है। इस किण्वन के दौरान लैक्टिक अम्ल (Lactic acid) बनता है। इस लैक्टिक अम्ल के जमा होने के कारण दही का स्वाद खट्टा होता है और उसकी अम्लीयता बढ़ जाती है, जिससे pH मान कम हो जाता है।
प्रश्न 12. एक ग्वाला ताजे दूध में थोड़ा बेकिंग सोडा मिलाता है।
(a) ताजा दूध के pH के मान को 6 से बदलकर थोड़ा क्षारीय क्यों बना देता है?
(b) इस दूध को दही बनने में अधिक समय क्यों लगता है?
(a) बेकिंग सोडा (सोडियम हाइड्रोजनकार्बोनेट, NaHCO3) एक क्षारीय पदार्थ है। जब इसे दूध में मिलाया जाता है, तो यह दूध की हल्की अम्लीयता (pH≈6) को उदासीन करके थोड़ा क्षारीय (pH >7) बना देता है। ऐसा करने से दूध में हानिकारक बैक्टीरिया का विकास धीमा हो जाता है और दूध अधिक समय तक खराब नहीं होता, जिससे विक्रेता को फायदा होता है।
(b) दही बनने के लिए दूध का अम्लीय होना जरूरी है ताकि लैक्टिक अम्ल बैक्टीरिया सक्रिय हो सकें। जब दूध को बेकिंग सोडा मिलाकर क्षारीय बना दिया जाता है, तो इसे पहले फिर से उस अम्लीय स्तर (pH≈6) तक पहुंचना पड़ता है जहां दही जमाने वाले बैक्टीरिया काम कर सकें। इस अतिरिक्त समय के कारण क्षारीय दूध को दही बनने में सामान्य दूध की तुलना में अधिक समय लगता है।
प्रश्न 13. प्लास्टर ऑफ पेरिस को आर्द्रता-रोधी बर्तन में क्यों रखा जाना चाहिए? इसकी व्याख्या कीजिए।
प्लास्टर ऑफ पेरिस (केल्सियम सल्फेट हेमीहाइड्रेट) को हवाबंद (आर्द्रता-रोधी) बर्तन में रखा जाता है क्योंकि यह वायु में उपस्थित नमी (जलवाष्प) के प्रति अत्यंत संवेदनशील होता है।
जब यह नमी के संपर्क में आता है, तो तेजी से जल के अणुओं को अवशोषित कर लेता है और जिप्सम (केल्सियम सल्फेट डाइहाइड्रेट) में बदल जाता है। यह जिप्सम एक कठोर ठोस पदार्थ है। इस अभिक्रिया के कारण प्लास्टर ऑफ पेरिस का गुण बदल जाता है और वह बेकार हो जाता है। इसीलिए इसे सूखा रखने के लिए आर्द्रता-रोधी डिब्बे में संग्रहित किया जाता है।
समीकरण:
CaSO4 . 1/2H2O + 11/2H2O → CaSO4 . 2H2O
(प्लास्टर ऑफ पेरिस) (जल) (जिप्सम - कठोर ठोस)
प्रश्न 14. उदासीनीकरण अभिक्रिया क्या है? दो उदाहरण दीजिए।
उदासीनीकरण अभिक्रिया वह रासायनिक अभिक्रिया है जिसमें एक अम्ल और एक क्षारक पूर्णतः अभिक्रिया करके लवण और जल बनाते हैं। इस अभिक्रिया में अम्ल और क्षारक एक-दूसरे की प्रकृति को समाप्त (उदासीन) कर देते हैं।
सामान्य रूप: अम्ल + क्षारक → लवण + जल
उदाहरण 1: हाइड्रोक्लोरिक अम्ल और सोडियम हाइड्रॉक्साइड की अभिक्रिया
HCl(aq) + NaOH(aq) → NaCl(aq) + H2O(l)
(अम्ल) (क्षारक) (सोडियम क्लोराइड - लवण) (जल)
उदाहरण 2: सल्फ्यूरिक अम्ल और मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड की अभिक्रिया (पेट की अम्लता की दवा में)
H2SO4(aq) + Mg(OH)2(s) → MgSO4(aq) + 2H2O(l)
(अम्ल) (क्षारक - ऐन्टैसिड) (मैग्नीशियम सल्फेट - लवण) (जल)
प्रश्न 15. धोने का सोडा एवं बेकिंग सोडा के दो-दो प्रमुख उपयोग बताइए।
धोने का सोडा (सोडियम कार्बोनेट, Na2CO3) के दो प्रमुख उपयोग:
- इसका उपयोग काँच, साबुन एवं कागज़ उद्योगों में एक कच्चे माल के रूप में किया जाता है।
- इसका उपयोग बोरेक्स (Na2B4O7·10H2O) जैसे अन्य सोडियम यौगिकों के उत्पादन में किया जाता है।
बेकिंग सोडा (सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट, NaHCO3) के दो प्रमुख उपयोग:
- इसका उपयोग बेकिंग पाउडर बनाने में किया जाता है, जो खमीर उठाने (फुलाने) का कार्य करता है।
- इसका उपयोग सोडा-अम्ल अग्निशामक में किया जाता है, क्योंकि गर्म होने पर यह कार्बन डाइऑक्साइड गैस उत्पन्न करता है जो आग को बुझाने में मदद करती है।
प्रश्न 1. अम्ल नीले लिटमस को करते हैं (a) नीला (b) रंगहीन (c) लाल (d) कोई प्रभाव नहीं
उत्तर: (c) लाल
स्पष्टीकरण: अम्ल का एक मूलभूत गुण यह है कि यह नीले लिटमस पेपर का रंग लाल कर देता है।
प्रश्न 2. क्षारीय विलयन में फिनॉल्फथेलीन सूचक का रंग होता है (a) लाल (b) पीला (c) नीला (d) रंगहीन।
उत्तर: (a) लाल
स्पष्टीकरण: फिनॉल्फथेलीन सूचक क्षारीय विलयन में गुलाबी या लाल रंग दिखाता है, जबकि अम्लीय या उदासीन विलयन में यह रंगहीन रहता है।
प्रश्न 3. प्रबल अम्लीय विलयन में मिथाइल ऑरेंज का रंग होता है - (2011) (a) लाल (b) पीला (c) नीला (d) रंगहीन
उत्तर: (a) लाल
स्पष्टीकरण: मिथाइल ऑरेंज सूचक प्रबल अम्लीय विलयन (pH 3.1 से कम) में लाल रंग दिखाता है और क्षारीय विलयन में पीला रंग दिखाता है।
प्रश्न 4. निम्न में प्रबल क्षार है - (2015) (a) Ca(OH)2 (b) KOH (c) Mg(OH)2 (d) NH4OH
उत्तर: (b) KOH
स्पष्टीकरण: पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड (KOH) एक प्रबल क्षारक है क्योंकि यह जल में पूर्णतः आयनित होकर OH- आयन देता है। Ca(OH)2 और Mg(OH)2 दुर्बल क्षारक हैं, और NH4OH भी एक दुर्बल क्षारक है।
प्रश्न 5. निम्नलिखित में दुर्बल अम्ल है - (2017) (a) HCl (b) HCN (c) HNO3 (d) H2SO4
उत्तर: (b) HCN
स्पष्टीकरण: हाइड्रोसायनिक अम्ल (HCN) एक दुर्बल अम्ल है क्योंकि यह जल में बहुत कम मात्रा में आयनित होता है। HCl, HNO3, और H2SO4 प्रबल अम्ल हैं।
प्रश्न 6. ऐसीटिक अम्ल एक दुर्बल अम्ल है, क्योंकि (2018) (a) इसमें पानी की मात्रा अधिक होती है (b) इसके आयनन की मात्रा कम होती है (c) यह एक कार्बनिक अम्ल है (d) यह एक अकार्बनिक अम्ल है
उत्तर: (b) इसके आयनन की मात्रा कम होती है
स्पष्टीकरण: ऐसीटिक अम्ल (CH3COOH) जल में घुलने पर केवल थोड़ी मात्रा में हाइड्रोजन आयन (H+) देने के लिए आयनित होता है, इसलिए यह दुर्बल अम्ल है। यह गुण इसके कार्बनिक या अकार्बनिक होने से सीधे संबंधित नहीं है।
प्रश्न 7. प्रबल अम्ल के जलीय विलयन में किसका आधिक्य होता है? (2013) (a) H+ आयनों का (b) OH- आयनों का (c) Cl- आयनों का (d) Na+ आयनों का
उत्तर: (a) H+ आयनों का
स्पष्टीकरण: प्रबल अम्ल जल में पूरी तरह से आयनित हो जाते हैं, जिससे विलयन में हाइड्रोजन आयनों (H+) की सांद्रता बहुत अधिक हो जाती है।
प्रश्न 8. H2SO4 विलयन का pH मान है - (2011, 14) अम्लीय विलयन का pH मान है (2016) (a) 1 (b) 7 (c) 7 से कम (d) 7 से अधिक
उत्तर: (c) 7 से कम
स्पष्टीकरण: सल्फ्यूरिक अम्ल (H2SO4) एक प्रबल अम्ल है, इसलिए इसके विलयन का pH मान 7 से कम (अम्लीय क्षेत्र में) होगा। सामान्यतः किसी भी अम्लीय विलयन का pH मान 7 से कम होता है।
प्रश्न 9. उदासीन विलयन के लिए कौन-सा कथन असत्य है? (2013) (a) हाइड्रोजन आयन सान्द्रण का मान 10-7 मोल/लीटर होता है (b) हाइड्रॉक्सिल आयन सान्द्रण का मान 10-7 मोल/लीटर होता है (c) pH मान 0 होता है (d) pH मान 7 होता है
उत्तर: (c) pH मान 0 होता है
स्पष्टीकरण: उदासीन विलयन (जैसे शुद्ध जल) में H+ और OH- आयनों की सांद्रता बराबर (10-7 मोल/लीटर) होती है और इसका pH मान 7 होता है। pH मान 0 अत्यधिक प्रबल अम्लीय विलयन के लिए होता है, उदासीन के लिए नहीं।
प्रश्न 10. एक विलयन का pH मान 5 है। यह विलयन है - (2017) (a) अम्लीय (b) क्षारीय (c) उदासीन (d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर: (a) अम्लीय
स्पष्टीकरण: pH पैमाने पर, 7 से कम मान अम्लीय प्रकृति को दर्शाता है। चूंकि pH=5 है जो 7 से कम है, इसलिए विलयन अम्लीय है।
प्रश्न 11. 10-6 M HCl विलयन का pH मान होगा (2014) (a) 7 (b) 6 (c) 0 (d) -6
उत्तर: (b) 6
स्पष्टीकरण: HCl एक प्रबल अम्ल है जो पूर्णतः आयनित होता है। इसलिए, [H+] = 10-6 M होगा। pH = -log[H+] = -log(10-6) = 6.
प्रश्न 12. एक विलयन में हाइड्रोजन आयन का सान्द्रण 1 × 10-7 मोल प्रति लीटर है। विलयन का pH मान होगा (2015) (a) 0 (b) 7 (c) 8 (d) 6
उत्तर: (b) 7
स्पष्टीकरण: pH = -log[H+] = -log(1 × 10-7) = 7. यह मान उदासीन विलयन (जैसे शुद्ध जल) का pH है।
प्रश्न 13. सल्फ्यूरिक अम्ल में अम्लीय हाइड्रोजन परमाणुओं की संख्या है। (2016) (a) 2 (b) 1 (c) 3 (d) शून्य
उत्तर: (a) 2
स्पष्टीकरण: सल्फ्यूरिक अम्ल (H2SO4) के अणु में दो हाइड्रोजन परमाणु होते हैं जो आयनित होकर H+ आयन दे सकते हैं, इसलिए इसमें दो अम्लीय हाइड्रोजन परमाणु हैं।
प्रश्न 14. अम्ल तथा क्षार की परस्पर अभिक्रिया को कहते हैं - (a) जल-विच्छेदन (b) अपघटन (c) उदासीनीकरण (d) आयनन
उत्तर: (c) उदासीनीकरण
स्पष्टीकरण: जब अम्ल और क्षारक आपस में अभिक्रिया करके लवण और जल बनाते हैं, तो इस अभिक्रिया को उदासीनीकरण अभिक्रिया कहते हैं।
प्रश्न 15. निम्नलिखित में से अम्लीय लवण है - (2013, 15) (a) NaCl (b) NaHSO4 (c) Na2SO4 (d) KCN
उत्तर: (b) NaHSO4
स्पष्टीकरण: सोडियम हाइड्रोजन सल्फेट (NaHSO4) एक अम्लीय लवण है क्योंकि यह द्विक्षारकीय अम्ल H2SO4 से बना है और इसमें एक प्रतिस्थापनीय H+ आयन बचा रहता है, जो विलयन को अम्लीय बनाता है। NaCl और Na2SO4 उदासीन लवण हैं, जबकि KCN क्षारीय लवण है।
प्रश्न 16. संकर लवण है (2016) (a) FeSO4.(NH4)2SO4.6H2O (b) Na2HPO4 (c) Na3[Fe(CN)6] (d) NaNH4HPO4
उत्तर: (c) Na3[Fe(CN)6]
स्पष्टीकरण: सोडियम फेरिसायनाइड, Na3[Fe(CN)6], एक संकर लवण है क्योंकि इसमें एक केंद्रीय धातु आयन (Fe3+) लिगैंड (CN-) से जुड़ा हुआ है और एक जटिल आयन [Fe(CN)6]3- बनाता है। विकल्प (a) एक द्विक लवण है।
प्रश्न 17. फिटकरी का सही अणुसूत्र है पोटाश एलम का सही रासायनिक सूत्र होता है (2013) (a) Al2(SO4)3 . 24H2O (b) Al2(SO4)3 . 5H2O (c) K2SO4 . Al2(SO4)3 . 24H2O (d) K2SO4 . Al2(SO4)3 . 7H2O
उत्तर: (c) K2SO4 . Al2(SO4)3 . 24H2O
स्पष्टीकरण: पोटाश एलम या फिटकरी एक द्विक लवण है जिसका सामान्य सूत्र K2SO4.Al2(SO4)3.24H2O है। इसे पोटैशियम एलुमिनियम सल्फेट के रूप में भी जाना जाता है।
प्रश्न 18. K2SO4 . Al2(SO4)3 . 24H2O को जल में घोलने पर बनने वाले आयन हैं - (2012) (a) K+, Al3+ (b) OH-, SO42- (c) K+, Al3+, SO42- (d) K+, SO42-
उत्तर: (c) K+, Al3+, SO42-
स्पष्टीकरण: फिटकरी जल में घुलने पर अपने घटक आयनों में पृथक् हो जाती है, जो K+, Al3+ और SO42- आयन होते हैं। यह एक द्विक लवण की विशेषता है।
प्रश्न 19. नौसादर का रासायनिक सूत्र है - (2017) (a) NaCl (b) Na2CO3 (c) Na2SO4 (d) NH4Cl
उत्तर: (d) NH4Cl
स्पष्टीकरण: नौसादर अमोनियम क्लोराइड (NH4Cl) का सामान्य नाम है। यह एक रंगहीन, क्रिस्टलीय लवण है।
प्रश्न 20. बहते हुए रक्त को रोकने में उपयोगी यौगिक है - (2012, 14) (a) खाने का सोडा (b) नौसादर (c) धोवन सोडा (d) फिटकरी
उत्तर: (d) फिटकरी
स्पष्टीकरण: फिटकरी (पोटाश एलम) एक स्टाइप्टिक (रक्तस्राव रोकने वाला) पदार्थ है। यह रक्त वाहिनियों को संकुचित करके रक्त के बहाव को रोकने में मदद करती है।
प्रश्न 21. निम्न में से कौन-सा पदार्थ ऊर्ध्वपातन का गुण प्रदर्शित करता है? (2012) (a) NaCl (b) Na2CO3 (c) NH4Cl (d) CaOCl2
उत्तर: (c) NH4Cl
स्पष्टीकरण: अमोनियम क्लोराइड (NH4Cl) ऊर्ध्वपातन का गुण दर्शाता है, अर्थात गर्म करने पर यह सीधे ठोस अवस्था से गैसीय अवस्था में परिवर्तित हो जाता है और ठंडा करने पर वापस ठोस बन जाता है।
प्रश्न 22. पेयजल को जीवाणु रहित करने में प्रयोग किया जाता है। (2011, 14, 17) (a) CaOCl2(ब्लीचिंग पाउडर) (b) CaCl2 (c) CaSO4 (d) CaCO3
उत्तर: (a) CaOCl2(ब्लीचिंग पाउडर)
स्पष्टीकरण: ब्लीचिंग पाउडर (कैल्शियम ऑक्सीक्लोराइड) का उपयोग पेयजल को कीटाणुरहित (जीवाणु रहित) करने के लिए किया जाता है क्योंकि यह क्लोरीन गैस मुक्त करता है जो एक शक्तिशाली कीटाणुनाशक है।
प्रश्न 23. विरंजक चूर्ण पर तनु सल्फ्यूरिक अम्ल की अभिक्रिया से गैस निकलती है (2014) (a) H2 (b) O2 (c) Cl2 (d) CO2
उत्तर: (c) Cl2
स्पष्टीकरण: जब ब्लीचिंग पाउडर (CaOCl2) पर तनु सल्फ्यूरिक अम्ल (H2SO4) की अभिक्रिया कराई जाती है, तो क्लोरीन गैस (Cl2) निकलती है।
प्रश्न 24. खाने के सोडे का रासायनिक सूत्र है - (2015) (a) Na2CO3 (b) NaHCO3 (c) NaCl (d) NH4Cl
उत्तर: (b) NaHCO3
स्पष्टीकरण: खाने का सोडा या बेकिंग सोडा सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट (NaHCO3) है।
प्रश्न 25. सोडियम कार्बोनेट के जलीय विलयन में कार्बन डाइ-ऑक्साइड अधिकता में प्रवाहित करने पर प्राप्त होता है - (2012) (a) NaOH (b) NaHCO3 (c) Na2CO3.10H2O (d) Na2CO3. H2O
उत्तर: (b) NaHCO3
स्पष्टीकरण: सोडियम कार्बोनेट (Na2CO3) के विलयन में CO2 गुजारने पर सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट (NaHCO3) बनता है, जो कम घुलनशील है और अवक्षेपित हो सकता है। अभिक्रिया: Na2CO3 + CO2 + H2O → 2NaHCO3
प्रश्न 26. प्लास्टर ऑफ पेरिस में कितने अणु क्रिस्टलन जल के होते हैं? (2017) (a) एक (b) दो (c) तीन (d) चार
उत्तर: (a) एक
स्पष्टीकरण: प्लास्टर ऑफ पेरिस का रासायनिक सूत्र CaSO4.1/2H2O या (CaSO4)2.H2O होता है। इसका मतलब है कि दो कैल्शियम सल्फेट अणुओं के साथ क्रिस्टलीकरण का एक जल अणु जुड़ा होता है, या प्रति CaSO4 इकाई पर आधा जल अणु होता है।
प्रश्न 1. ऐसे दो क्षारकों के नाम लिखिए जो क्षार भी हों।
उत्तर: सोडियम हाइड्रॉक्साइड (NaOH) तथा पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड (KOH)।
स्पष्टीकरण: सभी क्षार क्षारक होते हैं (क्योंकि वे OH- आयन देते हैं), लेकिन सभी क्षारक क्षार नहीं होते। NaOH और KOH जल में घुलनशील क्षारक हैं, इसलिए ये क्षार की श्रेणी में आते हैं।
प्रश्न 2. हाइड्रोजन आयन सान्द्रण से क्या तात्पर्य है? उदासीन विलयन में हाइड्रोजन आयन सान्द्रण का मान कितना होता है? (2012, 13)
उत्तर: किसी विलयन के एक लीटर में उपस्थित हाइड्रोजन आयनों (H+) के मोलों की संख्या को उस विलयन का हाइड्रोजन आयन सान्द्रण कहते हैं। उदासीन विलयन (जैसे शुद्ध जल) में हाइड्रोजन आयन सान्द्रण 10-7 मोल प्रति लीटर होता है।
प्रश्न 3. pH की परिभाषा दीजिए। इसका हाइड्रोजन आयन सान्द्रण से क्या सम्बन्ध है? (2014, 16)
उत्तर: pH अम्लों एवं क्षारकों के जलीय विलयन की अम्लीयता या क्षारीयता मापने का एक पैमाना है। यह विलयन में हाइड्रोजन आयन सान्द्रण [H+] के ऋणात्मक लघुगणक (बेस 10) के बराबर होता है।
प्रश्न 4. एक विलयन में हाइड्रोजन आयनों की सान्द्रता 10-9 M है। इस विलयन का pH मान परिकलित कीजिए तथा बताइए कि विलयन अम्लीय है या क्षारीय। (2016)
उत्तर:
प्रश्न 5. एक विलयन में हाइड्रॉक्सिल आयन का सान्द्रण 1 × 10-10 मोल/लीटर है। इस विलयन का pH मान ज्ञात कीजिए। (2012, 13, 14, 18)
उत्तर: हम जानते हैं कि 25°C पर, pH + pOH = 14.
प्रश्न 6. एक विलयन का pH मान 5 है। हाइड्रो
प्रश्न 1. निम्नलिखित में से कौन-सा पदार्थ लिटमस विलयन को लाल कर देता है?
- खाने का सोडा
- अमोनियम हाइड्रॉक्साइड
- सिरका
- बुझा हुआ चूना
- खाने का सोडा
- अमोनियम हाइड्रॉक्साइड
- सिरका
- बुझा हुआ चूना
उत्तर: सिरका (विकल्प C)। सिरका में एसिटिक अम्ल होता है, जो एक अम्ल है। अम्ल लिटमस विलयन को नीले रंग से लाल रंग में बदल देते हैं।
प्रश्न 2. निम्नलिखित में से कौन-सा पदार्थ अम्लीय नहीं है?
- नींबू का रस
- टमाटर का रस
- दूध
- साबुन का विलयन
उत्तर: साबुन का विलयन (विकल्प D)। साबुन का विलयन क्षारीय प्रकृति का होता है क्योंकि यह क्षारक के साथ वसा अम्लों की अभिक्रिया से बनता है। नींबू का रस, टमाटर का रस और दूध सभी में अम्लीय गुण होते हैं।
प्रश्न 3. अम्ल का जलीय विलयन क्या करता है?
- लिटमस को लाल से नीला कर देता है
- फिनॉल्फथेलिन को गुलाबी कर देता है
- मिथाइल ऑरेंज को पीला कर देता है
- लिटमस को नीले से लाल कर देता है
उत्तर: लिटमस को नीले से लाल कर देता है (विकल्प D)। अम्ल का जलीय विलयन हाइड्रोनियम आयन (H₃O⁺) देता है, जो नीले लिटमस पत्र को लाल कर देता है। यह अम्लों का एक मुख्य गुण है।
प्रश्न 4. निम्नलिखित में से कौन-सा अम्ल खाद्य पदार्थों के परिरक्षण में प्रयुक्त होता है?
- सल्फ्यूरिक अम्ल
- नाइट्रिक अम्ल
- बेंजोइक अम्ल
- हाइड्रोक्लोरिक अम्ल
उत्तर: बेंजोइक अम्ल (विकल्प C)। बेंजोइक अम्ल और इसके लवण (बेंजोएट्स) का उपयोग जैम, जेली, फलों के रस आदि जैसे खाद्य पदार्थों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए परिरक्षक के रूप में किया जाता है। यह बैक्टीरिया और फफूंद के विकास को रोकता है।
प्रश्न 5. निम्नलिखित में से कौन-सा अम्ल पेट में अम्लता बढ़ने पर प्रयुक्त होता है?
- ऐसीटिक अम्ल
- फॉर्मिक अम्ल
- लैक्टिक अम्ल
- मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड
उत्तर: मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड (विकल्प D)। पेट में अम्लता (एसिडिटी) बढ़ने पर, हमें एक क्षारक या प्रतिअम्ल (एंटासिड) की आवश्यकता होती है जो अतिरिक्त अम्ल को उदासीन कर दे। मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड [Mg(OH)₂], जिसे मिल्क ऑफ मैग्नीशिया भी कहते हैं, एक प्रतिअम्ल है। अन्य विकल्प स्वयं अम्ल हैं।
प्रश्न 6. निम्नलिखित में से कौन-सा अम्ल ऐंटिफ्रीज के रूप में प्रयुक्त होता है?
- ग्लूकोनिक अम्ल
- मैलिक अम्ल
- टार्टरिक अम्ल
- ऑक्जैलिक अम्ल
उत्तर: ग्लूकोनिक अम्ल (विकल्प A)। ग्लूकोनिक अम्ल का उपयोग कभी-कभी ऐंटिफ्रीज (हिमरोधक) विलयन में किया जाता है। यह विलयन कार रेडिएटर में डाला जाता है ताकि सर्दियों में पानी जमने न पाए। हालांकि, आजकल एथिलीन ग्लाइकॉल का अधिक प्रयोग होता है।
प्रश्न 7. निम्नलिखित में से कौन-सा अम्ल सिरका में पाया जाता है?
- सल्फ्यूरिक अम्ल
- नाइट्रिक अम्ल
- ऐसीटिक अम्ल
- फॉर्मिक अम्ल
उत्तर: ऐसीटिक अम्ल (विकल्प C)। सिरका मुख्य रूप से पानी और ऐसीटिक अम्ल (CH₃COOH) का तनु विलयन होता है, जो एथेनॉल के किण्वन से बनता है। यही सिरके को उसकी खट्टी गंध और स्वाद देता है।
प्रश्न 8. निम्नलिखित में से कौन-सा अम्ल चींटी के डंक में पाया जाता है?
- सल्फ्यूरिक अम्ल
- फॉर्मिक अम्ल
- ऐसीटिक अम्ल
- नाइट्रिक अम्ल
उत्तर: फॉर्मिक अम्ल (विकल्प B)। चींटी के डंक में फॉर्मिक अम्ल (HCOOH) होता है। जब चींटी काटती है, तो यह अम्ल त्वचा में इंजेक्ट हो जाता है, जिससे जलन और दर्द होता है।
प्रश्न 9. निम्नलिखित में से कौन-सा अम्ल नींबू एवं संतरे में पाया जाता है?
- ऐसीटिक अम्ल
- फॉर्मिक अम्ल
- सिट्रिक अम्ल
- लैक्टिक अम्ल
उत्तर: सिट्रिक अम्ल (विकल्प C)। नींबू, संतरे, मौसमी आदि खट्टे फलों में सिट्रिक अम्ल प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। यही उन्हें खट्टा स्वाद देता है।
प्रश्न 10. निम्नलिखित में से कौन-सा अम्ल दूध के खट्टा होने पर बनता है?
- ऐसीटिक अम्ल
- फॉर्मिक अम्ल
- सिट्रिक अम्ल
- लैक्टिक अम्ल
उत्तर: लैक्टिक अम्ल (विकल्प D)। जब दूध खट्टा होता है, तो उसमें उपस्थित लैक्टोज नामक शर्करा पर लैक्टिक अम्ल जीवाणुओं की क्रिया से लैक्टिक अम्ल बनता है। इसी के कारण दूध का स्वाद खट्टा हो जाता है और वह फट जाता है।
प्रश्न 4.
अमोनियम क्लोराइड से माइक्रोकॉस्मिक लवण कैसे बनाते हैं? इसके क्या उपयोग (2017, 18)
या माइक्रोकॉस्मिक लवण का सूत्र लिखिए। (2018)
माइक्रोकॉस्मिक लवण का रासायनिक सूत्र Na(NH₄)HPO₄·4H₂O है। इसे बनाने की विधि इस प्रकार है:
डाइसोडियम हाइड्रोजन फॉस्फेट (Na₂HPO₄) और अमोनियम क्लोराइड (NH₄Cl) की समान अणुक मात्राओं को थोड़ी मात्रा में गर्म जल में घोला जाता है। इस अभिक्रिया में सोडियम क्लोराइड (NaCl) अवक्षेपित हो जाता है। इस अवक्षेप को फिल्टर करके अलग कर लिया जाता है। शेष फिल्ट्रेट को ठंडा करके क्रिस्टलन कराने पर माइक्रोकॉस्मिक लवण के क्रिस्टल प्राप्त हो जाते हैं।
Na₂HPO₄ + NH₄Cl + 4H₂O → Na(NH₄)HPO₄·4H₂O + NaCl
उपयोग:
- इसका उपयोग फॉस्फेट बीड के रूप में गुणात्मक विश्लेषण में किया जाता है, विशेषकर रंगीन धातु आयनों (बेसिक मूलकों) के परीक्षण के लिए।
- फॉस्फेट बीड का उपयोग सिलिका (SiO₂) के परीक्षण में भी होता है। जब फॉस्फेट बीड को सिलिका के साथ गर्म किया जाता है, तो बीड घुंधली (अपारदर्शी) हो जाती है क्योंकि उसमें सिलिका के कण तैरने लगते हैं।
प्रश्न 5.
सोडियम हाइड्रॉक्साइड के निर्माण की विधि का वर्णन कीजिए। इसके प्रमुख उपयोग भी दीजिए।
सोडियम हाइड्रॉक्साइड (NaOH) का औद्योगिक निर्माण मुख्य रूप से सोडियम क्लोराइड (NaCl) के जलीय विलयन का विद्युत-अपघटन करके किया जाता है। इस विधि को क्लोर-क्षार प्रक्रिया कहते हैं, क्योंकि इसके मुख्य उत्पाद क्लोरीन गैस (Cl₂) और क्षार (NaOH) हैं।
2NaCl(aq) + 2H₂O(l) → 2NaOH(aq) + Cl₂(g) + H₂(g)
प्रक्रिया: सोडियम क्लोराइड के संतृप्त विलयन में विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है। कैथोड पर हाइड्रोजन गैस मुक्त होती है और NaOH बनता है, जबकि एनोड पर क्लोरीन गैस मुक्त होती है।
उपयोग:
- धातुओं की सतह से ग्रीस और तेल हटाने के लिए (डिग्रीसिंग एजेंट)।
- साबुन, डिटर्जेंट और अन्य अपमार्जक बनाने में।
- कागज और सेल्यूलोज उद्योग में।
- कृत्रिम रेशे (जैसे रेयन) के निर्माण में।
- पेट्रोलियम शोधन और विभिन्न रासायनिक यौगिकों के संश्लेषण में।
प्रश्न 1.
अम्ल, क्षार तथा लवण की परिभाषा एक-एक उदाहरण सहित दीजिए। या अम्ल तथा क्षार की आधुनिक अवधारणा कया है ? प्रत्येक को एक-एक उदाहरण देते हुए स्पष्ट कीजिए। (2011, 14, 17, 18) आयबनन सिद्धान्त के आधार पर समझाइए कि ।1८। अम्ल क्यों है तथा |३७७1+ क्षार क्यों है? (2011) अम्ल तथा भस्म की आधुनिक अवधारणा दीजिए। एक प्रबल अम्ल तथा एक दुर्बल भस्म का नाम लिखिए। (2012)
अम्ल की परिभाषा (आधुनिक अवधारणा): वे पदार्थ जो जलीय विलयन में हाइड्रोजन आयन (H⁺) या हाइड्रोनियम आयन (H₃O⁺) दान करते हैं, अम्ल कहलाते हैं। H⁺ आयन जल के अणु से जुड़कर H₃O⁺ बनाता है।
उदाहरण: HCl (हाइड्रोक्लोरिक अम्ल) जल में घुलकर H₃O⁺ आयन देता है।
HCl + H₂O → H₃O⁺ + Cl⁻
क्षार की परिभाषा (आधुनिक अवधारणा): वे पदार्थ जो जलीय विलयन में हाइड्रॉक्सिल आयन (OH⁻) दान करते हैं, क्षार कहलाते हैं। जल में घुलनशील क्षारकों को विशेष रूप से 'क्षार' कहा जाता है।
उदाहरण: NaOH (सोडियम हाइड्रॉक्साइड) जल में घुलकर OH⁻ आयन देता है।
NaOH → Na⁺ + OH⁻
लवण की परिभाषा: वे पदार्थ जो जलीय विलयन में H⁺ आयन (अम्ल का लक्षण) और OH⁻ आयन (क्षार का लक्षण) के अलावा किसी अन्य धनायन और ऋणायन से बने होते हैं, लवण कहलाते हैं। ये अम्ल और क्षार की उदासीनीकरण अभिक्रिया से बनते हैं।
उदाहरण: NaCl (सोडियम क्लोराइड), CuSO₄ (कॉपर सल्फेट), KNO₃ (पोटैशियम नाइट्रेट)।
NaCl → Na⁺ + Cl⁻
आयनन सिद्धांत के आधार पर:
HCl एक अम्ल है क्योंकि यह जलीय विलयन में H⁺ आयन देता है (HCl → H⁺ + Cl⁻)।
NH₄OH एक क्षार है क्योंकि यह जलीय विलयन में OH⁻ आयन देता है (NH₄OH ⇌ NH₄⁺ + OH⁻)।
एक प्रबल अम्ल: हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl)
एक दुर्बल भस्म (क्षार): अमोनियम हाइड्रॉक्साइड (NH₄OH) या मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड [Mg(OH)₂]
प्रश्न 2.
फिटकरी का रासायनिक नाम व अणुसूत्र बताइए। फिटकरी पर ताप के प्रभाव का वर्णन करते हुए उसके प्रमुख गुण व उपयोग बताइए। पोठाश फिटकरी बनाने की रासायनिक समीकरण तथा इसके दो उपयोग लिखिए। (2017) फिटकरी क्या होती है? पोठाश फिटकरी बनाने की विधि लिखिए। समीकरण भी दीजिए। इसके दो मुख्य उपयोग लिखिए। (2012, 16, 18) फिटकरी को बनाने का समीकरण दीजिए। इसकी क्षार के साथ अभिक्रिया को लिखिए। (2011) फिटकरी (पोठाश एलम) का रासायनिक नाम व सूत्र लिखिए। इस पर ऊष्मा के प्रभाव की विवेचना कीजिए। (2011, 13) ऐलुमिनियम सल्फेट से पोठाश फिटकरी कैसे प्राप्त करेंगे? (2013, 17, 18) क्या होता है जब पोठाश फिटकरी (एलम) को रक्त तप्त ताप पर गर्म करते हैं? (2015, 18)
रासायनिक नाम: पोटैशियम ऐलुमिनियम सल्फेट डोडेकाहाइड्रेट।
अणुसूत्र: K₂SO₄.Al₂(SO₄)₃.24H₂O या KAl(SO₄)₂.12H₂O
बनाने की विधि: पोटाश फिटकरी, पोटैशियम सल्फेट (K₂SO₄) और ऐलुमिनियम सल्फेट [Al₂(SO₄)₃] के संतृप्त विलयनों को उचित अनुपात में मिलाकर क्रिस्टलन करने से प्राप्त होती है।
K₂SO₄ + Al₂(SO₄)₃ + 24H₂O → K₂SO₄.Al₂(SO₄)₃.24H₂O
प्रमुख गुण:
- यह एक सफेद रंग का क्रिस्टलीय ठोस पदार्थ है जो जल में आसानी से घुल जाता है। इसका जलीय विलयन अम्लीय होता है।
- क्षार के साथ अभिक्रिया: इसके जलीय विलयन में सोडियम हाइड्रॉक्साइड (NaOH) मिलाने पर ऐलुमिनियम हाइड्रॉक्साइड [Al(OH)₃] का सफेद जेली जैसा अवक्षेप बनता है, जो NaOH की अधिकता में घुलकर सोडियम मेटा-ऐलुमिनेट (NaAlO₂) बनाता है।
Al₂(SO₄)₃ + 6NaOH → 2Al(OH)₃↓ + 3Na₂SO₄
Al(OH)₃ + NaOH → NaAlO₂ + 2H₂O
ताप का प्रभाव:
- 92°C पर: फिटकरी अपना क्रिस्टलन जल खोकर पिघल जाती है।
- 200°C पर: यह पूरी तरह निर्जल हो जाती है और फूल जाती है, इसे 'दुग्ध फिटकरी' या 'फिटकरी के फूल' कहते हैं।
- रक्त तप्त ताप (लगभग 800°C) पर: ऐलुमिनियम सल्फेट अपघटित होकर ऐलुमिना (Al₂O₃) और सल्फर ट्राइऑक्साइड (SO₃) गैस देता है।
Al₂(SO₄)₃ → Al₂O₃ + 3SO₃
उपयोग:
- कपड़ों और चमड़े को रंगने (डाईंग) तथा उनके विरंजन में।
- आँखों की दवाई और कटने-छिलने पर लगाने वाली दवा बनाने में।
- जल को शुद्ध करने (साफ करने) में, क्योंकि यह अशुद्धियों को जमा कर नीचे बैठा देती है।
- खून बहने को रोकने (रक्तस्तंभन) में।
प्रश्न 3.
विरंजक चूर्ण (ब्लीचिंग पाउडर) का रासायनिक नाम, अणुसूत्र तथा उपयोग बताइए। (2013, 17) विरंजक चूर्ण के निर्माण का रासायनिक समीकरण लिखें तथा इसके विरंजन गुण की व्याख्या रासायनिक समीकरण देते हुए लिखें। (2017) ब्लीचिंग पाउडर का रासायनिक नाम, बनाने की विधि एवं एक रासायनिक गुण लिखिए। सम्बन्धित समीकरण दीजिए। विरंजक चूर्ण के चार रासायनिक गुण लिखिए। (2011) या क्या होता है जब शुष्क बुझे चूने पर ८।9 गैस प्रवाहित करते हैं? (2015) या ब्लीचिंग पाउडर की निर्माण विधि लिखिए। (2018)
रासायनिक नाम: कैल्सियम ऑक्सीक्लोराइड या कैल्सियम हाइपोक्लोराइट।
अणुसूत्र: CaOCl₂ या Ca(OCl)Cl
निर्माण विधि (बनाने का समीकरण): विरंजक चूर्ण शुष्क बुझे हुए चूने [कैल्सियम हाइड्रॉक्साइड, Ca(OH)₂] पर क्लोरीन गैस (Cl₂) प्रवाहित करके बनाया जाता है।
Ca(OH)₂ + Cl₂ → CaOCl₂ + H₂O
विरंजन गुण की व्याख्या: विरंजक चूर्ण का विरंजन गुण उसमें उपस्थित उपलब्ध क्लोरीन के कारण होता है। जब यह वायु में उपस्थित कार्बन डाइऑक्साइड या किसी अम्ल के साथ अभिक्रिया करता है, तो सक्रिय ऑक्सीजन मुक्त करता है। यह ऑक्सीजन रंगीन पदार्थों के रंजकों को ऑक्सीकृत करके उनका रंग नष्ट कर देती है।
CaOCl₂ + H₂O + CO₂ → CaCO₃ + 2HClO
HClO → HCl + [O] (सक्रिय ऑक्सीजन)
रंगीन पदार्थ + [O] → रंगहीन ऑक्सीकृत उत्पाद
रासायनिक गुण:
- अम्ल के साथ अभिक्रिया: तनु अम्ल (जैसे HCl) के साथ अभिक्रिया करके क्लोरीन गैस मुक्त करता है।
CaOCl₂ + 2HCl → CaCl₂ + H₂O + Cl₂↑ - विरंजन क्रिया: ऊपर वर्णित विधि से सक्रिय ऑक्सीजन मुक्त करके कपड़े, लकड़ी के गूदे आदि का विरंजन करता है।
- जल के साथ अभिक्रिया: जल के साथ अभिक्रिया करके कैल्सियम हाइड्रॉक्साइड और हाइपोक्लोरस अम्ल बनाता है।
2CaOCl₂ + 2H₂O → Ca(OH)₂ + CaCl₂ + 2HClO - ऑक्सीकारक गुण: यह एक प्रबल ऑक्सीकारक के रूप में कार्य करता है।
उपयोग:
- कपड़ों, कागज और लकड़ी के गूदे का विरंजन करने में।
- जल को कीटाणुरहित (डिसइन्फेक्ट) करने में।
- रासायनिक उद्योग में ऑक्सीकारक के रूप में।
- क्लोरोफॉर्म जैसे कार्बनिक यौगिक बनाने में।
प्रश्न 4.
बेकिंग पाउडर ( खाने का सोडा) का रासायनिक नाम एवं अणुसूत्र क्या है ? इसको बनाने की विधि एवं दो भौतिक गुण तथा दो रासायनिक गुण समीकरण देते हुए लिखिए। (2011, 12, 14, 15)
या खाने का सोडा बनाने की विधि का रासायनिक समीकरण लिखिए। इस पर ताप का प्रभाव भी लिखिए। (2012)
या कैसे प्राप्त करेंगे बेकिंग सोडा से घावन सोडा? (2016)
या सोडियम बाइकार्बोनेट पर ताप का प्रभाव क्या होता है? (2017)
रासायनिक नाम: सोडियम बाइकार्बोनेट (या सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट)।
अणुसूत्र: NaHCO3.
बनाने की विधि: इसे सोडियम हाइड्रॉक्साइड (NaOH) के सान्द्र विलयन में अधिक मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) गैस प्रवाहित करके बनाया जाता है। पहले सोडियम कार्बोनेट (Na2CO3) बनता है, जो अधिक CO2 के साथ क्रिया करके सोडियम बाइकार्बोनेट देता है।
Na2CO3 + H2O + CO2 → 2NaHCO3
दो भौतिक गुण:
1. यह एक सफेद, क्रिस्टलीय ठोस पदार्थ है।
2. यह जल में कम घुलनशील (अल्प विलेय) होता है।
दो रासायनिक गुण (समीकरण सहित):
1. ताप का प्रभाव (बेकिंग सोडा से धावन सोडा प्राप्त करना): गर्म करने पर यह विघटित होकर सोडियम कार्बोनेट (धावन सोडा), जल और कार्बन डाइऑक्साइड गैस देता है।
प्रश्न 5. धावन सोडा (सोडियम कारबोनेट) बनाने की विधि लिखिए। इसकी - 1. BaCl2 तथा
2. SO2 के साथ होने वाली अभिक्रियाओं के रासायनिक समीकरण भी लिखिए। (2014)
धावन सोडा बनाने की विधि (सोल्वे विधि का सरलीकृत रूप): सोडियम हाइड्रॉक्साइड (कॉस्टिक सोडा) के सान्द्र विलयन में कार्बन डाइऑक्साइड गैस प्रवाहित करने पर सोडियम कार्बोनेट (Na2CO3) का विलयन बनता है। इस विलयन को वाष्पित करने पर सोडियम कार्बोनेट के क्रिस्टल (Na2CO3.10H2O) प्राप्त होते हैं।
1. BaCl2 के साथ अभिक्रिया: सोडियम कार्बोनेट के विलयन में बेरियम क्लोराइड मिलाने पर सफेद रंग का बेरियम कार्बोनेट अवक्षेप बनता है और सोडियम क्लोराइड विलयन में रह जाता है।
2. SO2 के साथ अभिक्रिया: सोडियम कार्बोनेट के विलयन में सल्फर डाइऑक्साइड गैस प्रवाहित करने पर दो चरणों में अभिक्रिया हो सकती है।
a) सीमित मात्रा में SO2 देने पर सोडियम सल्फाइट और CO2 गैस बनती है।
प्रश्न 6.
प्लास्टर ऑफ पेरिस किसे कहते हैं? इसे बनाने की विधि, गुण व उपयोग बताइए। या प्लास्टर ऑफ पेरिस पर ताप का कया प्रभाव पड़ता है? (2018)
परिभाषा: प्लास्टर ऑफ पेरिस, जिप्सम (CaSO4.2H2O) को एक निश्चित ताप पर गर्म करके बनाया जाने वाला एक सफेद चूर्ण है, जिसका रासायनिक सूत्र (CaSO4)2.H2O या CaSO4.1/2H2O है।
बनाने की विधि: जिप्सम को 120°C - 130°C पर सावधानीपूर्वक गर्म करने पर यह अपने क्रिस्टलन के जल का तीन-चौथाई भाग खो देता है और प्लास्टर ऑफ पेरिस बन जाता है।
गुण:
1. यह एक महीन, सफेद चूर्ण होता है।
2. जल के साथ क्रिया (सेटिंग): जल मिलाने पर यह पुनः जिप्सम में बदल जाता है और एक कठोर ठोस द्रव्यमान बनाता है। इस प्रक्रिया में थोड़ी ऊष्मा निकलती है।
उपयोग:
1. टूटी हड्डियों को स्थिर रखने के लिए प्लास्टर बनाने (शल्य चिकित्सा) में।
2. भवन निर्माण में दीवारों और छतों की सतह को चिकना बनाने में।
3. मूर्तियाँ, सजावटी सामान, खिलौने और दंत चिकित्सा में मॉडल बनाने में।
4. अग्निरोधक पदार्थों के निर्माण में।
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