Bihar Board Class 10th Science (विज्ञान) Chapter 4 कार्बन एवं इसके यौगिक) Solutions

Here we have provided Solution for Chapter 4 कार्बन एवं इसके यौगिक) of Science (विज्ञान) subject for Class 10th students of Bihar Board of Secondary Education. There are various chapters in this Science (विज्ञान) such as Chapter 1 रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण), Chapter 2 अम्ल, क्षारक एवं लवण), Chapter 3 धातु एवं अधातु), Chapter 4 कार्बन एवं इसके यौगिक), Chapter 5 तत्वों का आवर्त वर्गीकरण), Chapter 6 जैव प्रक्रम), Chapter 7 नियंत्रण एवं समन्वय), Chapter 8 जीव जनन कैसे करते है), Chapter 9 अनुवांशिकता एवं जैव विकास), Chapter 10 प्रकाश(परावर्तन तथा अपवर्तन), Chapter 11 मानव नेत्र एवं रंगबिरंगा संसार), Chapter 12 विद्युत), Chapter 13 विद्युत धारा का चुम्बकीय प्रभाव), Chapter 14 उर्जा के स्रोत), Chapter 15 हमारा पर्यावरण) and Chapter 16 प्राकृतिक संसाधनों का संपोषित प्रबंधन). Summary of the same is given below:

Board NameBihar Board of Secondary Education
ClassClass 10th
Content TypeSolution
Solution forClass 10th students
SubjectScience (विज्ञान)
Chapter NameChapter 4 कार्बन एवं इसके यौगिक)
Total Number of Chapter in this Subject16

Studying Bihar Board Class 10th Science (विज्ञान) Chapter 4 कार्बन एवं इसके यौगिक) solution will help you higher marks in this subject but you need to follow best practices to achieve higher marks, which are given after solutions, go through them once.

Bihar Board Class 10th Science (विज्ञान) Chapter 4 कार्बन एवं इसके यौगिक) Solutions

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1. एथेन का आण्विक सूत्र C2H6 है। इसमें —
(a) 6 सहसंयोजक आबंध हैं
(b) 7 सहसंयोजक आबंध हैं
(c) 8 सहसंयोजक आबंध हैं
(d) 9 सहसंयोजक आबंध हैं

उत्तर: (b) 7 सहसंयोजक आबंध हैं

एथेन (C2H6) में दो कार्बन परमाणु एकल आबंध (C-C) से जुड़े होते हैं। प्रत्येक कार्बन परमाणु तीन हाइड्रोजन परमाणुओं से जुड़ा होता है, जिससे प्रति कार्बन तीन C-H आबंध बनते हैं। इस प्रकार कुल आबंध: 1 (C-C) + 6 (C-H) = 7 सहसंयोजक आबंध होते हैं।

2. CH3CH2OH की IUPAC नाम है —
(a) एथेनॉल
(b) एथेनल
(c) एथेनोइक अम्ल
(d) एथेनोन

उत्तर: (a) एथेनॉल

यौगिक CH3CH2OH में दो कार्बन वाले एल्केन श्रृंखला (एथेन) के साथ एक -OH (हाइड्रॉक्सिल) समूह जुड़ा है। -OH समूह की उपस्थिति इसे एक एल्कोहॉल बनाती है। IUPAC नामकरण के अनुसार, इसे एथेनॉल कहा जाता है।

3. साबुन एवं अपमार्जक दोनों का अणु लंबी श्रृंखला वाले कार्बनिक यौगिकों के होते हैं जिनके एक सिरे पर होता है —
(a) सल्फोनेट समूह
(b) सोडियम समूह
(c) कार्बोक्सिलिक समूह
(d) इनमें से कोई नहीं

उत्तर: (c) कार्बोक्सिलिक समूह

पारंपरिक साबुन लंबी हाइड्रोकार्बन श्रृंखला वाले फैटी एसिड के सोडियम या पोटैशियम लवण होते हैं। इन फैटी एसिडों में एक सिरे पर कार्बोक्सिलिक समूह (-COOH) होता है, जो साबुन निर्माण में लवण बनाता है। अपमार्जक भी इसी तरह के संरचनात्मक गुण रखते हैं, हालाँकि उनमें कार्बोक्सिलिक समूह के स्थान पर अन्य समूह (जैसे सल्फोनेट) भी हो सकते हैं।

4. निम्नलिखित में से कौन कार्बन की संयोजकता को प्रदर्शित करता है?
(a) 2
(b) 3
(c) 4
(d) 5

उत्तर: (c) 4

कार्बन परमाणु के बाह्यतम कोश (संयोजकता कोश) में 4 इलेक्ट्रॉन होते हैं। यह अष्टक पूरा करने के लिए 4 और इलेक्ट्रॉनों की आवश्यकता होती है, जिसे यह अन्य परमाणुओं के साथ 4 सहसंयोजक आबंध बनाकर प्राप्त करता है। इसलिए कार्बन की सामान्य संयोजकता 4 होती है।

5. निम्नलिखित में से कौन-सा यौगिक ऑक्सीकरण पर एथेनॉल देता है?
(a) CH3COOH
(b) CH3CHO
(c) CH3COCH3
(d) CH3OCH3

उत्तर: (b) CH3CHO

ऑक्सीकरण की प्रक्रिया में किसी यौगिक में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ती है या हाइड्रोजन की मात्रा घटती है। एथेनल (CH3CHO) का अपचयन (हाइड्रोजनीकरण) करने पर यह एथेनॉल (CH3CH2OH) में बदल जाता है। दूसरे शब्दों में, एथेनल, एथेनॉल के ऑक्सीकरण से बनता है, इसलिए एथेनल के अपचयन से पुनः एथेनॉल प्राप्त होगा।

6. कार्बन के अपररूपों में सबसे कठोर कौन है?
(a) ग्रेफाइट
(b) हीरा
(c) कोक
(d) फुलेरीन

उत्तर: (b) हीरा

हीरा कार्बन का एक अपररूप है जिसमें प्रत्येक कार्बन परमाणु चार अन्य कार्बन परमाणुओं के साथ मजबूत त्रिविमीय सहसंयोजक आबंध बनाता है, जिससे एक अत्यंत कठोर एवं मजबूत जालक संरचना बनती है। यह प्रकृति में पाए जाने वाला सबसे कठोर पदार्थ है।

7. कार्बन के दो गुणधर्म लिखिए जिनके कारण हमारे चारों ओर कार्बन यौगिकों की विशाल संख्या दिखाई देती है।

उत्तर: कार्बन यौगिकों की विशाल संख्या के लिए जिम्मेदार दो प्रमुख गुणधर्म हैं:

  1. शृंखलन (Catenation): कार्बन परमाणु अन्य कार्बन परमाणुओं के साथ मजबूत सहसंयोजक आबंध बनाकर लंबी श्रृंखलाएँ, शाखाएँ या वलय बना सकते हैं। यह गुण विभिन्न आकारों और संरचनाओं वाले असंख्य यौगिकों के निर्माण का आधार है।
  2. चतुःसंयोजकता (Tetravalency): कार्बन की संयोजकता 4 होती है, अर्थात यह चार अन्य परमाणुओं (कार्बन, हाइड्रोजन, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन आदि) के साथ आबंध बना सकता है। इससे एकल, द्वि एवं त्रि-आबंधों के माध्यम से विविध प्रकार के यौगिक बनते हैं।

8. समजातीय श्रेणी क्या है? उदाहरण देकर समझाइए।

उत्तर: समजातीय श्रेणी कार्बनिक यौगिकों का एक ऐसा समूह है जिसके सभी सदस्यों में:

  • एक ही कार्यात्मक समूह उपस्थित होता है।
  • उनके आणविक सूत्र एक निश्चित -CH2- इकाई के अंतर से भिन्न होते हैं।
  • उनके रासायनिक गुण समान होते हैं, परंतु भौतिक गुण क्रमिक रूप से बदलते हैं।

उदाहरण: एल्केन की समजातीय श्रेणी। इसका सामान्य सूत्र CnH2n+2 है।
मेथेन (CH4), एथेन (C2H6), प्रोपेन (C3H8), ब्यूटेन (C4H10) आदि इस श्रेणी के सदस्य हैं। प्रत्येक अगला सदस्य पिछले सदस्य से -CH2- इकाई के अंतर से बढ़ता है और सभी में केवल एकल आबंध (कार्यात्मक समूह) होते हैं।

9. विरंजक चूर्ण के निर्माण की विधि का रासायनिक समीकरण दीजिए। इसके दो उपयोग लिखिए।

उत्तर: विरंजक चूर्ण (ब्लीचिंग पाउडर) का रासायनिक नाम कैल्शियम ऑक्सीक्लोराइड है। इसका सूत्र Ca(OCl)Cl या CaOCl2 है।

निर्माण विधि: शुष्क बुझा हुआ चूना [Ca(OH)2] पर क्लोरीन गैस की क्रिया से विरंजक चूर्ण प्राप्त होता है।

Ca(OH)2 + Cl2 → CaOCl2 + H2O

दो उपयोग:

  1. विरंजक के रूप में: कपड़ा उद्योग, कागज उद्योग में रेशों का विरंजन करने के लिए।
  2. जल के शुद्धिकरण में: पीने के पानी को कीटाणुरहित करने के लिए इसका उपयोग किया जाता है।

10. मंदीकृत दहन क्या है? इसके कोई दो कारण लिखिए।

उत्तर: मंदीकृत दहन वह प्रक्रिया है जिसमें ईंधन का दहन बहुत धीमी गति से होता है, जिससे ऊष्मा ऊर्जा की बजाय मुख्य रूप से प्रकाश उत्पन्न होता है। इसमें आग की लपटें नहीं दिखाई देती हैं।

दो कारण:

  1. ईंधन का निम्न दहन तापमान होना, जिससे वह जल्दी प्रज्वलित नहीं हो पाता।
  2. दहन क्षेत्र में ऑक्सीजन की कमी या अपर्याप्त आपूर्ति होना, जिससे पूर्ण दहन नहीं हो पाता और प्रक्रिया धीमी हो जाती है।

11. ऐल्कोहॉल किसे कहते हैं? ऐल्कोहॉल के दो उपयोग लिखिए।

उत्तर: ऐल्कोहॉल वे कार्बनिक यौगिक हैं जिनमें एक या एक से अधिक हाइड्रॉक्सिल (-OH) समूह, सीधे कार्बन परमाणु (जो कि स्प3 संकरित हो) से जुड़े होते हैं। इनका सामान्य सूत्र R-OH होता है, जहाँ R एल्काइल समूह है।

दो उपयोग:

  1. विलायक के रूप में: इथेनॉल का उपयोग दवाइयाँ, इत्र, पॉलिश, वार्निश आदि बनाने में विलायक के रूप में किया जाता है।
  2. स्वच्छता एवं औषधि में: सर्जिकल उपकरणों और घावों को साफ करने के लिए एंटीसेप्टिक के रूप में इथेनॉल का प्रयोग किया जाता है।

12. कार्बनिक यौगिकों के नामकरण की IUPAC पद्धति क्या है? उदाहरण देकर समझाइए।

उत्तर: IUPAC (अंतर्राष्ट्रीय शुद्ध एवं अनुप्रयुक्त रसायन संघ) पद्धति कार्बनिक यौगिकों के नामकरण के लिए एक वैज्ञानिक एवं सार्वभौमिक नियम है, ताकि प्रत्येक यौगिक का एक अद्वितीय और स्पष्ट नाम हो।

मुख्य चरण एवं उदाहरण:

  1. मूल श्रृंखला की पहचान: सबसे लंबी कार्बन श्रृंखला चुनें जिसमें कार्यात्मक समूह जुड़ा हो। उदाहरण: CH3-CH2-CH2-OH में 3 कार्बन की श्रृंखला है।
  2. कार्बनों की संख्या देना: श्रृंखला के कार्बनों को इस प्रकार क्रमांकित करें कि कार्यात्मक समूह को न्यूनतम संख्या मिले।
  3. नाम लिखना: उपसर्ग (शाखा/प्रतिस्थापी) + मूल नाम (कार्बन संख्या के अनुसार) + प्रत्यय (कार्यात्मक समूह के अनुसार)।
    उदाहरण: CH3-CH2-CH2-OH में मूल श्रृंखला 'प्रोपेन' (3C) है और -OH समूह है, जो एल्कोहॉल दर्शाता है। प्रत्यय 'ऑल' लगता है। अतः IUPAC नाम प्रोपेन-1-ऑल या केवल प्रोपेनॉल है।

1. कार्बन के अपरूप क्या हैं? इनके नाम लिखें।

कार्बन के अपरूप वे विभिन्न रूप हैं जिनमें कार्बन परमाणु विभिन्न तरीकों से आपस में जुड़कर भिन्न-भिन्न भौतिक गुण प्रदर्शित करते हैं, हालाँकि उनके रासायनिक गुण समान रहते हैं। कार्बन के मुख्य अपरूप हैं:

  1. हीरा (Diamond)
  2. ग्रेफाइट (Graphite)
  3. फुलरीन (Fullerene)

इनके अलावा, कोयला और चारकोल भी कार्बन के अनाकार अपरूप माने जाते हैं।

2. हीरा एवं ग्रेफाइट में दो अंतर लिखें।

हीरा ग्रेफाइट
हीरा प्रकृति में पाया जाने वाला सबसे कठोर पदार्थ है। ग्रेफाइट मुलायम और चिकना होता है, जिससे पेंसिल का लेड बनता है।
यह विद्युत का कुचालक है क्योंकि इसमें मुक्त इलेक्ट्रॉन नहीं होते। यह विद्युत का सुचालक है क्योंकि इसकी परतों के बीच मुक्त इलेक्ट्रॉन गति कर सकते हैं।
हीरे में प्रत्येक कार्बन परमाणु चार अन्य कार्बन परमाणुओं से सहसंयोजक बंध द्वारा जुड़ा होता है, जिससे एक त्रिआयामी जालक संरचना बनती है। ग्रेफाइट में कार्बन परमाणु षट्कोणीय वलयों में व्यवस्थित होकर परतें बनाते हैं। प्रत्येक परत में कार्बन तीन अन्य कार्बन परमाणुओं से जुड़ा होता है, जिससे परतों के बीच दुर्बल वान्डरवाल्स बल होते हैं।

3. कार्बन की संयोजकता चार होती है, क्यों?

कार्बन परमाणु के बाह्यतम कक्ष (L-कोश) में 4 इलेक्ट्रॉन होते हैं। अष्टक पूरा करने (8 इलेक्ट्रॉन प्राप्त करने) के लिए इसे 4 और इलेक्ट्रॉनों की आवश्यकता होती है। इसलिए, यह चार अन्य परमाणुओं के साथ सहसंयोजक बंध बनाकर अपनी संयोजकता संतुष्ट करता है। इस प्रकार, कार्बन की संयोजकता 4 होती है।

4. कार्बन यौगिकों के विशेष गुण क्या हैं?

कार्बन यौगिकों के कुछ प्रमुख विशेष गुण निम्नलिखित हैं:

  1. श्रृंखलन (Catenation): कार्बन परमाणु अन्य कार्बन परमाणुओं के साथ सहसंयोजक बंध बनाकर लंबी श्रृंखलाएँ, शाखित श्रृंखलाएँ या वलय बना सकते हैं।
  2. चतुःसंयोजकता (Tetravalency): कार्बन की संयोजकता 4 होने के कारण यह चार अन्य परमाणुओं (कार्बन या अन्य तत्वों के) के साथ बंध बना सकता है, जिससे विविध संरचनाएँ संभव होती हैं।
  3. बहुबंधन (Multiple Bonding): कार्बन द्वि-बंध (C=C) या त्रि-बंध (C≡C) बना सकता है, जिससे असंतृप्त यौगिक बनते हैं।
  4. समावयवता (Isomerism): एक ही अणुसूत्र वाले कार्बन यौगिकों की भिन्न संरचनाएँ हो सकती हैं, जिनके भौतिक एवं रासायनिक गुण अलग-अलग होते हैं।

5. कार्बनिक यौगिकों के नामकरण की IUPAC पद्धति क्या है?

IUPAC (अंतर्राष्ट्रीय शुद्ध एवं अनुप्रयुक्त रसायन संघ) पद्धति कार्बनिक यौगिकों के नामकरण का एक वैज्ञानिक और व्यवस्थित तरीका है ताकि प्रत्येक यौगिक का एक अद्वितीय और सार्वभौमिक नाम हो। इस पद्धति के मुख्य नियम हैं:

  1. मूल श्रृंखला का चयन: यौगिक में उपस्थित कार्बन परमाणुओं की सबसे लंबी निरंतर श्रृंखला को मुख्य श्रृंखला (मूल नाम) के रूप में चुना जाता है।
  2. मूल नाम: कार्बन परमाणुओं की संख्या के आधार पर मूल नाम दिया जाता है (जैसे- मेथेन, एथेन, प्रोपेन, ब्यूटेन आदि)।
  3. प्रतिस्थापनों की पहचान: मुख्य श्रृंखला से जुड़े अन्य परमाणु या समूह (जैसे -CH3, -Cl, -OH) को प्रतिस्थापी कहते हैं। इनके नाम उपसर्ग के रूप में लगाए जाते हैं (जैसे मिथाइल, क्लोरो, हाइड्रॉक्सी)।
  4. संख्या देना: मुख्य श्रृंखला के कार्बन परमाणुओं को इस प्रकार क्रमांकित किया जाता है कि प्रतिस्थापियों को सबसे छोटा संख्या प्राप्त हो।
  5. नाम लिखना: नाम इस क्रम में लिखा जाता है: प्रतिस्थापी की स्थिति-संख्या + प्रतिस्थापी का नाम + मूल श्रृंखला का नाम

उदाहरण: CH3-CH2-CH(Cl)-CH3 का IUPAC नाम 2-क्लोरोब्यूटेन है।

6. समजातीय श्रेणी क्या है? उदाहरण सहित समझाएँ।

समजातीय श्रेणी कार्बनिक यौगिकों का एक ऐसा समूह है जिसके सभी सदस्यों में:

  1. एक ही कार्यात्मक समूह उपस्थित होता है।
  2. उनके अणुसूत्र एक निश्चित समूह (CH2) से भिन्न होते हैं।
  3. उनके रासायनिक गुण समान होते हैं, लेकिन भौतिक गुण (जैसे गलनांक, क्वथनांक) कार्बन श्रृंखला की लंबाई बढ़ने के साथ बदलते हैं।

उदाहरण: एल्केन समजातीय श्रेणी (सामान्य सूत्र: CnH2n+2)

  • मेथेन (CH4)
  • एथेन (C2H6)
  • प्रोपेन (C3H8)
  • ब्यूटेन (C4H10)

इस श्रेणी में प्रत्येक अगला सदस्य पिछले सदस्य से CH2 समूह से अधिक है और सभी में केवल एकल बंध (कार्यात्मक समूह) होते हैं।

7. एल्कोहॉल एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल के बीच अभिक्रिया को रासायनिक समीकरण द्वारा समझाएँ।

एल्कोहॉल (जैसे एथेनॉल) और कार्बोक्सिलिक अम्ल (जैसे एथेनॉइक अम्ल) के बीच अम्ल उत्प्रेरक (जैसे सांद्र H2SO4) की उपस्थिति में होने वाली अभिक्रिया को एस्टरीकरण कहते हैं। इस अभिक्रिया में जल अणु निकलता है और एक एस्टर बनता है।

रासायनिक समीकरण:

CH3COOH + C2H5OH (सांद्र H2SO4 की उपस्थिति में) → CH3COOC2H5 + H2O

(एथेनॉइक अम्ल) + (एथेनॉल) → (एथिल एथेनॉएट / एस्टर) + (जल)

इस अभिक्रिया में बना एस्टर (एथिल एथेनॉएट) सुगंधित गंध वाला यौगिक होता है। इस अभिक्रिया की विपरीत प्रक्रिया, जिसमें एस्टर जल-अपघटन द्वारा वापस अम्ल और एल्कोहॉल में टूटता है, साबुनीकरण कहलाती है।

8. ऑक्सीकरण एवं अपचयन को उदाहरण सहित समझाएँ।

ऑक्सीकरण (Oxidation): वह रासायनिक अभिक्रिया जिसमें किसी पदार्थ में ऑक्सीजन की वृद्धि या हाइड्रोजन की कमी होती है, ऑक्सीकरण कहलाती है। इलेक्ट्रॉन के स्तर पर, ऑक्सीकरण वह प्रक्रिया है जिसमें किसी परमाणु, आयन या अणु द्वारा इलेक्ट्रॉनों का ह्रास होता है।

उदाहरण:

  1. 2Mg + O2 → 2MgO (मैग्नीशियम में ऑक्सीजन की वृद्धि)
  2. 2Cu + O2 → 2CuO (ताँबे का ऑक्सीकरण)
  3. C2H5OH + 2[O] → CH3COOH + H2O (एथेनॉल का एथेनॉइक अम्ल में ऑक्सीकरण, इसमें हाइड्रोजन की कमी होती है)

अपचयन (Reduction): वह रासायनिक अभिक्रिया जिसमें किसी पदार्थ में ऑक्सीजन की कमी या हाइड्रोजन की वृद्धि होती है, अपचयन कहलाती है। इलेक्ट्रॉन के स्तर पर, अपचयन वह प्रक्रिया है जिसमें किसी परमाणु, आयन या अणु द्वारा इलेक्ट्रॉनों का लाभ होता है।

उदाहरण:

  1. CuO + H2 → Cu + H2O (कॉपर ऑक्साइड से ऑक्सीजन की कमी)
  2. ZnO + C → Zn + CO (जिंक ऑक्साइड का अपचयन)
  3. CH3CHO + H2 → C2H5OH (एथेनल में हाइड्रोजन की वृद्धि)

नोट: ऑक्सीकरण और अपचयन सदैव साथ-साथ होते हैं, इसे रेडॉक्स अभिक्रिया कहते हैं।

9. साबुन एवं अपमार्जक में अंतर लिखें।

साबुन (Soap) अपमार्जक (Detergent)
साबुन लंबी श्रृंखला वाले वसीय अम्लों (जैसे स्टीयरिक अम्ल) के सोडियम या पोटैशियम लवण होते हैं। अपमार्जक सल्फोनिक अम्ल या अन्य अम्लों के सोडियम लवण होते हैं, जिनका अणु सूत्र जटिल होता है।
साबुन कठोर जल में अघुलनशील कैल्शियम और मैग्नीशियम लवण बनाते हैं, जिससे सफाई क्षमता कम हो जाती है और स्कम (फेन) बनता है। अपमार्जक कठोर जल में भी घुलनशील लवण बनाते हैं, इसलिए इनकी सफाई क्षमता कठोर जल में भी बनी रहती है और स्कम नहीं बनता।
ये प्राकृतिक स्रोतों (वनस्पति तेल या पशु वसा) से बनाए जाते हैं। ये पेट्रोरसायनों (कृत्रिम/संश्लेषित स्रोतों) से बनाए जाते हैं।
पर्यावरण के लिए अधिक अनुकूल और जैव निम्नीकरणीय होते हैं। कुछ अपमार्जक जैव निम्नीकरणीय नहीं होते और जल प्रदूषण का कारण बन सकते हैं।
उदाहरण: सोडियम स्टीयरेट (C17H35COONa) उदाहरण: सोडियम लॉरिल सल्फेट

10. कार्बनिक यौगिकों के विभिन्न वर्गों के नाम लिखें।

कार्बनिक यौगिकों को उनमें उपस्थित कार्यात्मक समूह के आधार पर विभिन्न वर्गों में बाँटा गया है। कुछ प्रमुख वर्ग निम्नलिखित हैं:

  1. एल्केन (Alkanes) - कार्यात्मक समूह: केवल एकल बंध (C-C)
  2. एल्कीन (Alkenes) - कार्यात्मक समूह: द्वि-बंध (C=C)
  3. एल्काइन (Alkynes) - कार्यात्मक समूह: त्रि-बंध (C≡C)
  4. एल्कोहॉल (Alcohols) - कार्यात्मक समूह: हाइड्रॉक्सिल (-OH)
  5. एल्डिहाइड (Aldehydes) - कार्यात्मक समूह: फॉर्मिल या एल्डिहाइड (-CHO)
  6. कीटोन (Ketones) - कार्यात्मक समूह: कीटोन (-CO-)
  7. कार्बोक्सिलिक अम्ल (Carboxylic Acids) - कार्यात्मक समूह: कार्बोक्सिल (-COOH)
  8. एस्टर (Esters) - कार्यात्मक समूह: एस्टर (-COOR)
  9. ईथर (Ethers) - कार्यात्मक समूह: ईथर (-O-)
  10. एमीन (Amines) - कार्यात्मक समूह: एमीनो (-NH2)

प्रश्न 1.

यदि कार्बन चार एकल बन्ध बनाता है तो किन्हीं दो बन्धों के बीच का कोण कितना होता है ?

उत्तर: कार्बन परमाणु जब चार एकल बंध बनाता है, तो यह एक समचतुष्फलकीय ज्यामिति ग्रहण करता है। इस ज्यामिति में किन्हीं भी दो बंधों के बीच का कोण 109° 28' होता है।

प्रश्न 2.

कार्बनिक यौगिकों में किस प्रकार की संयोजकता होती है ?

उत्तर: कार्बनिक यौगिकों में परमाणु आपस में इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी करके बंध बनाते हैं। इस प्रकार की संयोजकता को सहसंयोजकता (Covalent Bonding) कहते हैं।

प्रश्न 3.

कार्बनिक यौगिकों की विलेयता जल अथवा कार्बनिक विलायकों में से किसमें अधिक होती है ?

उत्तर: अधिकांश कार्बनिक यौगिक ध्रुवीय जल (पानी) में कम घुलनशील होते हैं, क्योंकि वे स्वयं अधिकतर अध्रुवीय या कम ध्रुवीय होते हैं। ये यौगिक कार्बनिक विलायकों जैसे ईथर, बेंजीन, क्लोरोफॉर्म आदि में आसानी से घुल जाते हैं।

प्रश्न 4.

प्रयोगशाला में सर्वप्रथम किस कार्बनिक यौगिक का निर्माण हुआ था? इसका नाम व सूत्र दीजिए। (2012, 16)

उत्तर: प्रयोगशाला में सर्वप्रथम निर्मित कार्बनिक यौगिक यूरिया (Urea) था। इसका रासायनिक सूत्र NH₂CONH₂ या CO(NH₂)₂ है। इसे सन् 1828 में फ्रेडरिक वोहलर ने अमोनियम सायनेट से संश्लेषित किया था।

प्रश्न 5.

दो ऐलिफैटिक असंतृप्त हाइड्रोकार्बनों के नाम व अणु सूत्र लिखिए। (2017)

उत्तर: दो ऐलिफैटिक असंतृप्त हाइड्रोकार्बन हैं:

  1. एथिलीन (Ethene) – अणु सूत्र: C₂H₄
  2. ऐसीटिलीन (Ethyne) – अणु सूत्र: C₂H₂

प्रश्न 6.

ऐल्कीन श्रेणी का सामान्य सूत्र लिखिए। (2012, 13, 14)

उत्तर: ऐल्कीन श्रेणी (जिसमें कार्बन-कार्बन के बीच एक द्वि-बंध होता है) का सामान्य सूत्र CnH2n है, जहाँ 'n' कार्बन परमाणुओं की संख्या है।

प्रश्न 7.

सजातीय श्रेणी में यौगिकों के किस गुण में समानता होती है - 1. भौतिक गुणों में 2. रासायनिक गुणधर्मों में।

उत्तर: सजातीय श्रेणी के यौगिकों के रासायनिक गुणधर्मों में समानता होती है। हालाँकि, उनके भौतिक गुण (जैसे क्वथनांक, गलनांक) अणुभार बढ़ने के साथ नियमित रूप से बदलते हैं।

प्रश्न 8.

CH₃-O-CH₂-CH₃ तथा CH₃-CH₂-CH=CH-CH₃ का IUPAC पद्धति में नाम लिखिए। (2011)

उत्तर:

  1. CH₃-O-CH₂-CH₃ का IUPAC नाम: मेथॉक्सी एथेन (Methoxyethane)
  2. CH₃-CH₂-CH=CH-CH₃ का IUPAC नाम: पेन्ट-2-ईन (Pent-2-ene)

प्रश्न 9.

यौगिक CH₃CH₂OH का IUPAC नाम क्या है? (2017, 18)

उत्तर: यौगिक CH₃CH₂OH का IUPAC नाम एथेनॉल (Ethanol) है। इसे सामान्य भाषा में एथिल ऐल्कोहॉल भी कहते हैं।

प्रश्न 10.

पेट्रोलियम के शोधन के लिए प्रयुक्त विधि का नाम बताइए।

उत्तर: पेट्रोलियम (कच्चा तेल) एक जटिल मिश्रण है। इसके विभिन्न घटकों को उनके भिन्न-भिन्न क्वथनांकों के आधार पर अलग करने के लिए प्रभाजी आसवन (Fractional Distillation) विधि का प्रयोग किया जाता है।

प्रश्न 11.

किसी एक योगात्मक अभिक्रिया की समीकरण लिखिए। (2011, 17, 18) या योगात्मक अभिक्रिया को उदाहरण देकर समझाइए। (2012, 13, 16, 17, 18) या योगात्मक अभिक्रिया पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए। (2013, 15, 18) या एथिलीन गैस की एक योगात्मक अभिक्रिया का समीकरण लिखिए।

उत्तर: योगात्मक अभिक्रिया (Addition Reaction) वह अभिक्रिया है जिसमें दो या दो से अधिक अणु परस्पर संयोग करके केवल एक नया बड़ा अणु बनाते हैं, बिना कोई अन्य उत्पाद बनाए। यह अभिक्रिया आमतौर पर असंतृप्त यौगिकों (जैसे ऐल्कीन, ऐल्काइन) में होती है जिनमें द्वि-बंध या त्रि-बंध होता है।

उदाहरण: एथिलीन (C₂H₄) में हाइड्रोजन का योग करके संतृप्त यौगिक एथेन (C₂H₆) बनाना।

CH₂=CH₂(g) + H₂(g) → CH₃-CH₃(g)
एथिलीन + हाइड्रोजन → एथेन
(यह अभिक्रिया निकल उत्प्रेरक की उपस्थिति में 200°C-300°C ताप पर होती है।)

प्रश्न 12.

एथिलीन की प्रतिस्थापन अभिक्रिया का समीकरण लिखिए। (2013, 15, 18) या एथिलीन की क्लोरीन के साथ रासायनिक अभिक्रिया

उत्तर: एथिलीन (C₂H₄) एक असंतृप्त हाइड्रोकार्बन है जो मुख्य रूप से योगात्मक अभिक्रियाएँ देता है। हालाँकि, उचित परिस्थितियों में, यह प्रतिस्थापन अभिक्रिया (Substitution Reaction) भी कर सकता है। उदाहरण के लिए, एथिलीन क्लोरीन के साथ प्रकाश की उपस्थिति में प्रतिस्थापन अभिक्रिया कर सकती है, जिसमें हाइड्रोजन के परमाणु क्लोरीन द्वारा प्रतिस्थापित हो जाते हैं।

समीकरण:

CH₂=CH₂ + Cl₂ → CHCl=CH₂ + HCl
एथिलीन + क्लोरीन → विनाइल क्लोराइड + हाइड्रोजन क्लोराइड
(यह अभिक्रिया प्रकाश की उपस्थिति में होती है और इसमें क्लोरीन का एक परमाणु हाइड्रोजन को प्रतिस्थापित करके विनाइल क्लोराइड बनाता है।)

या लिखिए। (2018)

उत्तर: 400°C पर एथिलीन अणु के एक हाइड्रोजन परमाणु का विस्थापन, क्लोरीन परमाणु द्वारा हो जाता है और वाइनिल क्लोराइड बनता है। जिसके बहुलकीकरण से पॉली वाइनिल क्लोराइड (P.V.C.) बनाया जाता है।
CH2=CH2 + Cl2 → CH2=CHCl + HCl
वाइनिल क्लोराइड
बहुलकीकरण
n(CH2=CHCl) → (—CH2—CHCl—)n
पॉली वाइनिल क्लोराइड (P.V.C.)

प्रश्न 13. मैथेन की सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में क्लोरीन के साथ क्या अभिक्रिया होती है? (2011, 15, 17) या मेथेन की क्लोरीन के साथ क्रिया लिखिए। (2017)

उत्तर: सूर्य के मंद प्रकाश की उपस्थिति में मेथेन हैलोजनों के साथ विस्थापन अभिक्रियाएँ प्रदर्शित करती है। इस अभिक्रिया में इसके चारों हाइड्रोजन परमाणु एक-एक करके चार हैलोजन परमाणुओं द्वारा विस्थापित हो जाते हैं।
उदाहरणार्थ:
CH4 + Cl2 → HCl + CH3Cl (मेथिल क्लोराइड)
CH3Cl + Cl2 → HCl + CH2Cl2 (मेथिलीन क्लोराइड)
CH2Cl2 + Cl2 → HCl + CHCl3 (क्लोरोफॉर्म)
CHCl3 + Cl2 → HCl + CCl4 (कार्बन टेट्राक्लोराइड)

प्रश्न 14. एथिल ऐल्कोहॉल से आयोडोफार्म तथा डाइएथिल ईथर कैसे प्राप्त करेंगे? केवल समीकरण दीजिए। (2013, 14) या एथिल ऐल्कोहॉल की हैलोफार्म अभिक्रिया का समीकरण लिखिए। (2013)

उत्तर:
1. आयोडोफार्म बनाना: एथिल ऐल्कोहॉल को आयोडीन व सोडियम हाइड्रॉक्साइड के साथ गर्म करने पर आयोडोफार्म बनता है।
C2H5OH + 4I2 + 6NaOH → CHI3 + HCOONa + 5NaI + 5H2O
आयोडोफार्म (पीला अवक्षेप)
इस क्रिया को हैलोफार्म अभिक्रिया कहते हैं।

2. डाइएथिल ईथर बनाना: एथिल ऐल्कोहॉल तथा सांद्र सल्फ्यूरिक अम्ल को 140°C पर गर्म करने पर डाइएथिल ईथर बनता है।
C2H5OH + H2SO4 (140°C) → C2H5HSO4 + H2O
C2H5HSO4 + C2H5OH → C2H5OC2H5 + H2SO4
डाइएथिल ईथर

प्रश्न 15. एथिल ऐल्कोहॉल के ऑक्सीकरण से प्राप्त यौगिकों के नाम व सूत्र लिखिए। (2011)

उत्तर: एथिल ऐल्कोहॉल के ऑक्सीकरण से दो चरणों में दो यौगिक प्राप्त होते हैं:
प्रथम चरण: ऐसीटैल्डिहाइड (CH3CHO)
द्वितीय चरण: ऐसीटिक अम्ल (CH3COOH)

प्रश्न 16. क्या होता है जब (केवल समीकरण दीजिए) (2014, 16, 17, 18)

1. एथिल ऐल्कोहॉल को क्लोरीन व NaOH के साथ गर्म करते हैं?
2. ऐसीटिक अम्ल क्लोरीन से क्रिया करता है?
3. एथिल ऐल्कोहॉल को सोडियम धातु के साथ क्रिया कराते हैं?

उत्तर:
1. क्लोरोफॉर्म बनता है।
C2H5OH + 4Cl2 + 6NaOH → CHCl3 + HCOONa + 5NaCl + 5H2O
क्लोरोफॉर्म

2. लाल फॉस्फोरस की उपस्थिति में ऐसीटिक अम्ल में क्लोरीन प्रवाहित करने पर मेथिल समूह के हाइड्रोजन परमाणु एक-एक करके क्लोरीन परमाणुओं से विस्थापित हो जाते हैं, जिससे क्रमशः मोनो, डाई और ट्राईक्लोरो ऐसीटिक अम्ल बनते हैं।
CH3COOH + Cl2 (लाल P) → CH2ClCOOH + HCl
मोनोक्लोरो ऐसीटिक अम्ल
CH2ClCOOH + Cl2 (लाल P) → CHCl2COOH + HCl
डाइक्लोरो ऐसीटिक अम्ल
CHCl2COOH + Cl2 (लाल P) → CCl3COOH + HCl
ट्राइक्लोरो ऐसीटिक अम्ल

3. सोडियम एथॉक्साइड बनता है तथा हाइड्रोजन गैस निकलती है।
2C2H5OH + 2Na → 2C2H5ONa + H2
सोडियम एथॉक्साइड

प्रश्न 17. एथिल ऐल्कोहॉल के दो प्रमुख उपयोग दीजिए। (2011, 15)

उत्तर:
1. शराब तथा अन्य मादक पेय पदार्थ बनाने में।
2. यह एक उत्तम विलायक है, जिसका उपयोग दवाइयाँ, इत्र, पॉलिश आदि बनाने में किया जाता है।

प्रश्न 18. ऐसीटिक अम्ल का संरचना सूत्र लिखिए। इसकी अपचयन की अभिक्रिया का समीकरण लिखिए। या ऐसीटिक अम्ल से एथिल ऐल्कोहॉल कैसे प्राप्त करेंगे? ( केवल समीकरण दीजिए)

उत्तर:
संरचना सूत्र:

H   O
|   //
H—C—C—OH
|
H

अपचयन अभिक्रिया: ऐसीटिक अम्ल का लीथियम ऐलुमिनियम हाइड्राइड (LiAlH4) द्वारा अपचयन करने पर एथिल ऐल्कोहॉल प्राप्त होता है।
CH3COOH LiAlH4→ CH3CH2OH
एथेनॉल (एथिल ऐल्कोहॉल)

प्रश्न 19. ऐसीटिक अम्ल के निर्जलीकरण की अभिक्रिया का समीकरण लिखिए। (2011, 16) या ऐसीटिक अम्ल से ऐसीटिक एन्हाइड्राइड कैसे प्राप्त करेंगे? (2013)

उत्तर: फॉस्फोरस पेंटॉक्साइड (P2O5) जैसे निर्जलीकारक की उपस्थिति में ऐसीटिक अम्ल के दो अणुओं को गर्म करने पर उनमें से जल का एक अणु निकल जाता है और ऐसीटिक एन्हाइड्राइड बनता है।
CH3COOH + CH3COOH P2O5→ (CH3CO)2O + H2O
ऐसीटिक एन्हाइड्राइड

प्रश्न 20. क्या होता है जब ऐसीटिक अम्ल फॉस्फोरस पेन्टाक्लोराइड से क्रिया करता है? (2014)

उत्तर: ऐसीटिक अम्ल, फॉस्फोरस पेंटाक्लोराइड (PCl5) के साथ क्रिया करके ऐसीटिल क्लोराइड बनाता है।
CH3COOH + PCl5 → CH3COCl + POCl3 + HCl
ऐसीटिल क्लोराइड

प्रश्न 21. आप निम्नलिखित परिवर्तन किस प्रकार करेंगे (केवल रासायनिक समीकरण दीजिए) ऐसीटिक अम्ल से मेथेन। (2012, 13, 14, 16)

उत्तर: ऐसीटिक अम्ल से मेथेन बनाने की क्रिया दो चरणों में पूरी होती है:
चरण 1: ऐसीटिक अम्ल का सोडियम हाइड्रॉक्साइड के साथ उदासीनीकरण कर सोडियम ऐसीटेट बनाना।
CH3COOH + NaOH → CH3COONa + H2O
सोडियम ऐसीटेट

चरण 2: सोडियम ऐसीटेट को सोडा लाइम (NaOH + CaO) के साथ गर्म करने पर मेथेन गैस प्राप्त होती है।
CH3COONa + NaOH CaO, Δ→ CH4↑ + Na2CO3
मेथेन

प्रश्न 22. क्या होता है जबकि ऐसीटिक अम्ल को P2O5 के साथ गर्म किया जाता है? (2017)

उत्तर: ऐसीटिक अम्ल को फॉस्फोरस पेंटॉक्साइड (P2O5) के साथ गर्म करने पर, इसके दो अणुओं के बीच निर्जलीकरण होता है और ऐसीटिक एन्हाइड्राइड बनता है।
CH3COOH + CH3COOH P2O5, Δ→ (CH3CO)2O + H2O
ऐसीटिक एन्हाइड्राइड

प्रश्न 23. ऐसीटिक अम्ल के दो उपयोग लिखिए। (2011)

उत्तर:
1. प्रयोगशाला में एक महत्वपूर्ण अभिकर्मक के रूप में उपयोग।
2. खाद्य पदार्थों में संरक्षक तथा सिरका बनाने में उपयोग।

प्रश्न 24. साबुन क्या है ? किसी एक साबुन का रासायनिक सूत्र व नाम लिखिए। (2018)

उत्तर: साबुन उच्च वसीय अम्लों (जैसे स्टीयरिक अम्ल, ओलिक अम्ल) के सोडियम या पोटैशियम लवण होते हैं। ये जल में सफाई करने का कार्य करते हैं।
उदाहरण: सोडियम स्टीयरेट, जिसका रासायनिक सूत्र C17H35COONa है।

प्रश्न 25. साबुन के निर्माण में प्रयुक्त प्रमुख दो पदार्थों के नाम लिखिए। (2017)

उत्तर: साबुन बनाने के लिए प्रयुक्त दो प्रमुख कच्चे पदार्थ हैं:
1. तेल या वसा (जैसे - वनस्पति तेल या पशु वसा)
2. कास्टिक सोडा (सोडियम हाइड्रॉक्साइड, NaOH)

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1. कार्बनिक परमाणु की चारों संयोजकताओं के बारे में ली बेल तथा वान्टहॉफ की धारणा का सचित्र वर्णन कीजिए। या चित्रों की सहायता से कार्बनिक परमाणु की संयोजकता की चतुष्फलकीय आकृति समझाइए। या कार्बन की चतुष्फलकीय प्रकृति पर टिप्पणी लिखिए। (2013, 15)

उत्तर: ली बेल तथा वान्ट हॉफ (1874) के अनुसार, कार्बन परमाणु की चारों संयोजकताएँ एक ही तल में नहीं होतीं। यदि कार्बन परमाणु को एक समचतुष्फलक (Regular Tetrahedron) के केंद्र में माना जाए, तो इसकी चारों संयोजकताएँ उस समचतुष्फलक के चारों शीर्षों की ओर निर्देशित होती हैं। इस प्रकार किन्हीं भी दो संयोजकताओं के बीच का कोण 109°28' का होता है। इसका अर्थ है कि कार्बन की चारों संयोजकताएँ त्रि-आयामी अंतरिक्ष में सममित रूप से वितरित रहती हैं, जिसे चतुष्फलकीय ज्यामिति कहते हैं। सुविधा के लिए इन्हें समतल में 'T' आकार से दर्शाया जाता है।

प्रश्न 2. कार्बनिक यौगिकों की निम्न विशेषताओं को संक्षेप में समझाइए (2012)
1. समावयवता
2. बन्धनों की प्रकृति

उत्तर:
1. समावयवता: कार्बनिक यौगिकों में एक ही आणविक सूत्र वाले दो या दो से अधिक भिन्न-भिन्न यौगिक पाए जाने की घटना को समावयवता कहते हैं। ऐसे यौगिकों को एक-दूसरे का समावयवी कहा जाता है। यह भिन्नता परमाणुओं के जुड़ने के क्रम या अंतरिक्ष में उनकी व्यवस्था में अंतर के कारण होती है।
उदाहरण: अणुसूत्र C2H6O दो भिन्न यौगिकों - एथिल ऐल्कोहॉल (C2H5OH) और डाइमेथिल ईथर (CH3OCH3) को दर्शाता है। ये दोनों एक-दूसरे के समावयवी हैं।

2. बन्धनों की प्रकृति: कार्बन परमाणु मुख्यतः सहसंयोजक बंध बनाता है। यह अपने चारों संयोजकता इलेक्ट्रॉनों को अन्य परमाणुओं (कार्बन, हाइड्रोजन, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन आदि) के साथ साझा करके स्थिर अष्टक प्राप्त करता है। कार्बन-कार्बन बंध अत्यंत मजबूत होते हैं, जिससे लंबी श्रृंखलाएँ और वलय बनाना संभव हो पाता है। यह एकल (C–C), द्वि (C=C) तथा त्रि (C≡C) बंध बना सकता है।

ऐल्केन, ऐल्कीन तथा एल्काइन से आप क्या समझते हैं? उदाहरण देकर समझाइए। (2012, 18) या संतृप्त तथा असंतृप्त हाइड्रोकार्बन में क्या अन्तर है? उदाहरण द्वारा स्पष्ट कीजिए। (2013, 15) या असंतृप्त हाइड्रोकार्बन पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए। (2013) या संतृप्त तथा असंतृप्त हाइड्रोकार्बनों से आप क्या समझते हैं? उदाहरण द्वारा स्पष्ट करें। (2018)

उत्तर:

संतृप्त हाइड्रोकार्बन (ऐल्केन): वे हाइड्रोकार्बन जिनमें कार्बन परमाणु केवल एकल बंधों (C-C) से जुड़े होते हैं और उनकी सभी चारों संयोजकताएँ हाइड्रोजन या अन्य परमाणुओं से एकल बंध द्वारा संतुष्ट होती हैं, संतृप्त हाइड्रोकार्बन कहलाते हैं। इन्हें ऐल्केन या पैराफिन भी कहते हैं। ये कम क्रियाशील होते हैं और प्रतिस्थापन अभिक्रियाएँ देते हैं। इनका सामान्य सूत्र CnH2n+2 होता है।

उदाहरण:
मेथेन (CH4), एथेन (C2H6), प्रोपेन (C3H8)
H   H   H   H   H
H-C-H   H-C-C-H   H-C-C-C-H
  H   H H   H H H

असंतृप्त हाइड्रोकार्बन: वे हाइड्रोकार्बन जिनमें दो कार्बन परमाणुओं के बीच एक द्वि-बंध (C=C) या त्रि-बंध (C≡C) उपस्थित होता है, असंतृप्त हाइड्रोकार्बन कहलाते हैं। ये संतृप्त हाइड्रोकार्बनों की तुलना में अधिक क्रियाशील होते हैं और योगशील अभिक्रियाएँ देते हैं। इन्हें दो वर्गों में बाँटा गया है:

  1. ऐल्कीन: इनमें दो कार्बन परमाणुओं के बीच एक द्वि-बंध (C=C) होता है। इन्हें ओलीफिन या एथिलीन श्रेणी के हाइड्रोकार्बन भी कहते हैं। इनका सामान्य सूत्र CnH2n होता है।
    उदाहरण: एथीन (C2H4), प्रोपीन (C3H6)
      H   H
    H-C=C-H
  2. ऐल्काइन: इनमें दो कार्बन परमाणुओं के बीच एक त्रि-बंध (C≡C) होता है। इन्हें ऐसीटिलीन श्रेणी के हाइड्रोकार्बन कहते हैं। इनका सामान्य सूत्र CnH2n-2 होता है।
    उदाहरण: एथाइन (C2H2), प्रोपाइन (C3H4)
    H-C≡C-H

विषम चक्रीय यौगिक पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए। (2013)

उत्तर:

वे चक्रीय यौगिक जिनकी संवृत श्रृंखला (रिंग) बनाने में कार्बन के अलावा अन्य तत्वों (जैसे नाइट्रोजन, ऑक्सीजन, सल्फर आदि) के परमाणु भी भाग लेते हैं, विषम चक्रीय यौगिक कहलाते हैं। इन्हें हेटरोसाइक्लिक यौगिक भी कहते हैं।

उदाहरण:
पिरिडीन (C5H5N), थायोफीन (C4H4S), फ्यूरॉन (C4H4O)

समूह या मूलक से आप क्या समझते हैं ? अभिक्रियात्मक समूह का क्या तात्पर्य है ? (2015, 16, 18) या ऐल्किल मूलक पर संक्षिप्त टिप्पणी कीजिए। (2012, 13) या क्रियात्मक समूह पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए। (2017) या क्रियात्मक समूह को उदाहरण सहित समझाइए। (2015)

उत्तर:

कार्बनिक यौगिक प्रायः दो भागों से मिलकर बने होते हैं। इन भागों को समूह या मूलक कहते हैं।

माना एक यौगिक R-X है। इसे दो भागों में बाँटा जा सकता है:

R - X
प्रथम भाग (R) = ऐल्किल मूलक
द्वितीय भाग (X) = अभिक्रियात्मक समूह

ऐल्किल मूलक: यह किसी संतृप्त हाइड्रोकार्बन (ऐल्केन) से एक हाइड्रोजन परमाणु हटाने पर प्राप्त होने वाला समूह है। यह यौगिक के भौतिक गुणों (जैसे गलनांक, क्वथनांक) को प्रभावित करता है। उदाहरण: मेथिल (-CH3), एथिल (-C2H5)।

अभिक्रियात्मक समूह (क्रियात्मक समूह): यह यौगिक का वह विशेष भाग है जो उसके रासायनिक गुणों और अभिक्रियाओं के लिए उत्तरदायी होता है। सभी यौगिक जिनमें एक ही अभिक्रियात्मक समूह होता है, रासायनिक रूप से समान व्यवहार प्रदर्शित करते हैं। उदाहरण: हाइड्रॉक्सिल (-OH), कार्बोक्सिल (-COOH), ऐल्डिहाइड (-CHO)।

निम्नलिखित यौगिकों में उनके मूलकों तथा अभिक्रियात्मक समूहों के नाम लिखिए (i) CH3COOH (ii) CH3COOCH3 (iii) C2H5CHO (iv) C3H7OH (2009, 10, 11, 12)

उत्तर:

यौगिकमूलकअभिक्रियात्मक समूह
(i) CH3COOHमेथिल (-CH3)कार्बोक्सिलिक (-COOH)
(ii) CH3COOCH3मेथिल (-CH3)एस्टर (CH3COO-)
(iii) C2H5CHOएथिल (-C2H5)ऐल्डिहाइड (-CHO)
(iv) C3H7OHप्रोपिल (-C3H7)ऐल्कोहॉल (-OH)

ऐल्कोहॉल, ऐल्डिहाइड, कीटोन तथा कार्बोक्सिलिक समूह के सूत्र लिखिए। (2011)

उत्तर:

  • ऐल्कोहॉल: -OH
  • ऐल्डिहाइड: -CHO
  • कीटोन: >C=O या -CO-
  • कार्बोक्सिलिक: -COOH

निम्नलिखित यौगिकों के I.U.P.A.C. नाम लिखिए (2009, 10, 11, 12, 13, 14, 15, 16, 17)

उत्तर:

  1. CH3COOH – एथेनोइक अम्ल
  2. HCHO – मेथेनल
  3. HCOOH – मेथेनोइक अम्ल
  4. CH3OH – मेथेनॉल
  5. CH3-CH=CH2प्रोपीन
  6. CH3-C≡CH – प्रोपाइन
  7. CH2=CH-CH=CH2ब्यूटा-1,3-डाइईन
  8. CH3-HC=CH-CH3ब्यूट-2-ईन

निम्नलिखित यौगिकों के आई०यू०पी०ए०सी० प्रणाली में नाम लिखिए - (2013) (i) CH3-C(CH3)2-CH2-CH3 (ii) H-C-O-C-C-H (मेथॉक्सी एथेन का संरचना सूत्र)

उत्तर:

  1. 2,2-डाइमेथिल पेन्टेन
  2. मेथॉक्सी एथेन

निम्नलिखित यौगिकों के I.U.P.A.C. में नाम लिखिए (i) CH3-CO-CH2-CH2-CH3 (ii) CH3-CH(CHO)-CH3

उत्तर:

  1. पेन्टेन-2-ओन
  2. 2-मेथिल प्रोपेनल

निम्नलिखित यौगिकों के आई०यू०पी०ए०सी० नाम लिखिए - (i) H-C-COOC2H5 (एथिल एथेनोएट का संरचना सूत्र) (ii) H-C-C-C-OH (प्रोपेनॉल का संरचना सूत्र)

उत्तर:

  1. एथिल एथेनोएट
  2. प्रोपेन-1-ऑल

निम्नलिखित यौगिकों के I.U.P.A.C. में नाम लिखिए। (i) CH3-CH=C(CH3)-CH3 (ii) CH2OH-CH2OH

उत्तर:

  1. 2-मेथिल ब्यूट-2-ईन
  2. एथेन-1,2-डाइऑल

निम्नलिखित यौगिकों के संरचनात्मक सूत्र लिखिए -(2011, 12, 14, 2018) 1. एथेनोइक अम्ल 2. मेथिल ऐसीटिलीन 3. मेथेनल 4. 1 प्रोपाइन 5. 1, 3 ब्यूटाडाइईन

उत्तर:

1. एथेनोइक अम्ल (CH3COOH):
  H   O
  |   ||
H-C-C-O-H
  |
  H

2. मेथिल ऐसीटिलीन (प्रोपाइन, CH3-C≡CH):
  H
  |
H-C-C≡C-H
  |
  H

3. मेथेनल (HCHO):
  O
  ||
  H-C-H

4. 1-प्रोपाइन (CH3-CH2-C≡CH):
  H   H
  |   |
H-C-C-C≡C-H
  |   |
  H   H

5. 1,3-ब्यूटाडाइईन (CH2=CH-CH=CH2):
H2C=CH-CH=CH2

निम्नलिखित यौगिकों के संरचनात्मक सूत्र लिखिए 1. प्रोपेन-2-ऑल (2017) 2. 2-हाइड्रॉक्सी प्रोपेनोइक अम्ल (2015)

उत्तर:

1. प्रोपेन-2-ऑल (CH3-CH(OH)-CH3):
  H   OH   H
  |   |   |
H-C-C-C-H
  |       |
  H       H

2. 2-हाइड्रॉक्सी प्रोपेनोइक अम्ल (CH3-CH(OH)-COOH):
  H   OH   O
  |   |   ||
H-C-C-C-O-H
  |
  H

निम्नलिखित यौगिकों के संरचनात्मक सूत्र लिखिए - 1. पेन्टेनोन-3 (2018) 2. ब्यूटेनोन-2 (2015, 17)

उत्तर:

1. पेन्टेन-3-ओन (CH3-CH2-CO-CH2-CH3):
  H   H   O   H   H
  |   |   ||   |   |
H-C-C-C-C-C-H
  |   |       |   |
  H   H       H   H

2. ब्यूटेन-2-ओन (CH3-CO-CH2-CH3):
  H   O   H   H
  |   ||   |   |
H-C-C-C-C-H
  |       |   |
  H       H   H

मेथेन की ओजोन, नाइट्रिक अम्ल व वायु (ऑक्सीजन के साथ दहन) से अभिक्रिया का समीकरण दीजिए। क्या होता है जब मेथेन की नाइट्रिक अम्ल के साथ 400°C पर क्रिया होती है? (2017) या क्या होता है जबकि मैथेन का ओजोन से ऑक्सीकरण किया जाता है? (2016) या मेथेन के तीन रासायनिक गुण लिखिए। (2011, 13) या मेथेन से मेथेनल कैसे प्राप्त करेंगे? समीकरण दीजिए। (2012) या कैसे प्राप्त करेंगे? मेथेन से नाइट्रो मेथेन (2015)

उत्तर:

मेथेन के रासायनिक गुण:

  1. दहन (वायु/ऑक्सीजन के साथ): मेथेन वायु में जलकर कार्बन डाइऑक्साइड, जलवाष्प और ऊष्मा एवं प्रकाश उत्पन्न करती है।
    CH4(g) + 2O2(g) → CO2(g) + 2H2O(g) + ऊष्मा एवं प्रकाश
  2. ओजोन के साथ ऑक्सीकरण: मेथेन का ओजोन (O3) के साथ नियंत्रित ऑक्सीकरण होने पर मेथेनल (फॉर्मेल्डिहाइड) बनता है।
    CH4 + 2O3 → HCHO + H2O + 2O2
    (मेथेन)   (ओजोन)   (मेथेनल)
  3. नाइट्रिक अम्ल के साथ क्रिया (नाइट्रीकरण): जब मेथेन को नाइट्रिक अम्ल (HNO3) के साथ लगभग 400°C पर गर्म किया जाता है, तो मेथेन का एक हाइड्रोजन परमाणु नाइट्रो (-NO2) समूह द्वारा प्रतिस्थापित हो जाता है और नाइट्रोमेथेन बनता है।
    CH4 + HNO3 → CH3NO2 + H2O
    (मेथेन)   (नाइट्रिक अम्ल)   (नाइट्रोमेथेन)

1. कार्बन के कितने अपररूप हैं? नाम लिखें।

कार्बन के मुख्य रूप से तीन अपररूप हैं। ये हैं: हीरा, ग्रेफाइट और फुलेरीन। इनमें से हीरा और ग्रेफाइट प्राकृतिक रूप से पाए जाते हैं, जबकि फुलेरीन कृत्रिम रूप से बनाया गया एक अपररूप है। प्रत्येक की आणविक संरचना अलग होने के कारण इनके भौतिक गुण भी भिन्न-भिन्न होते हैं।

2. कार्बन की संयोजकता कितनी होती है?

कार्बन की संयोजकता 4 होती है। इसका अर्थ है कि कार्बन का एक परमाणु रासायनिक बंध बनाते समय चार अन्य परमाणुओं (जैसे हाइड्रोजन, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन या अन्य कार्बन परमाणुओं) के साथ सहसंयोजक बंध बना सकता है। यह गुण कार्बन को असंख्य यौगिक बनाने में सक्षम बनाता है।

3. कार्बन डाइऑक्साइड को जल में प्रवाहित करने पर कौन-सा अम्ल बनता है?

जब कार्बन डाइऑक्साइड गैस को जल में प्रवाहित किया जाता है, तो यह जल के साथ मिलकर कार्बोनिक अम्ल (H₂CO₃) बनाती है। यह एक दुर्बल अम्ल है और इसकी उपस्थिति से जल का pH मान कम हो जाता है, जिससे वह अम्लीय हो जाता है।

4. कार्बन के दो गुणधर्म लिखें जिनके कारण हमारे चारों ओर कार्बन के असंख्य यौगिक दिखाई देते हैं।

कार्बन के दो प्रमुख गुणधर्म जो इसे इतने अधिक यौगिक बनाने में सक्षम बनाते हैं, वे हैं:
1. शृंखलन (Catenation): कार्बन परमाणु आपस में मजबूत सहसंयोजक बंध बनाकर लंबी शृंखलाएँ, शाखित शृंखलाएँ या वलय बना सकते हैं।
2. चतुःसंयोजकता (Tetravalency): कार्बन की संयोजकता 4 होती है, जिससे यह चार अन्य परमाणुओं (कार्बन सहित) के साथ बंध बनाकर विविध आकारों वाले अणु बना सकता है।

5. कार्बन के दो मुख्य अपररूपों के नाम लिखें।

कार्बन के दो सबसे प्रसिद्ध और प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले अपररूप हैं:
1. हीरा (Diamond)
2. ग्रेफाइट (Graphite)
हीरा प्रकृति का सबसे कठोर पदार्थ है और विद्युत का कुचालक है, जबकि ग्रेफाइट मुलायम, चिकना और विद्युत का सुचालक है।

6. एथेन का आणविक सूत्र लिखें।

C₂H₆

एथेन एक संतृप्त हाइड्रोकार्बन (एल्केन) है जिसमें दो कार्बन परमाणु एकल बंध से जुड़े होते हैं और प्रत्येक कार्बन तीन हाइड्रोजन परमाणुओं से बंधा होता है।

7. कार्बनिक यौगिकों के नामकरण की सामान्य पद्धति क्या है?

कार्बनिक यौगिकों के नामकरण की सामान्य पद्धति IUPAC (इंटरनेशनल यूनियन ऑफ प्योर एंड एप्लाइड केमिस्ट्री) पद्धति है। इस पद्धति में यौगिक के नाम के तीन मुख्य भाग होते हैं:
1. उपसर्ग (Prefix): मूल शृंखला में कार्बन परमाणुओं की संख्या बताता है (जैसे मेथ-1, एथ-2, प्रोप-3)।
2. मूल शब्द (Word Root): यह बताता है कि यौगिक में कार्बन परमाणुओं के बीच किस प्रकार का बंध है (एल्केन, एल्कीन, एल्काइन)।
3. प्रत्यय (Suffix): यह यौगिक में उपस्थित प्रमुख क्रियात्मक समूह को दर्शाता है (जैसे -ऑल अल्कोहल के लिए, -एल्डिहाइड के लिए)।

8. ऐल्कोहॉल एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल में कौन-सा क्रियात्मक समूह पाया जाता है?

ऐल्कोहॉल में क्रियात्मक समूह हाइड्रॉक्सिल (-OH) पाया जाता है।
कार्बोक्सिलिक अम्ल में क्रियात्मक समूह कार्बोक्सिल (-COOH) पाया जाता है।

9. कार्बनिक यौगिकों के दो प्रमुख स्रोतों के नाम लिखें।

कार्बनिक यौगिकों के दो प्रमुख स्रोत हैं:
1. प्राकृतिक स्रोत: ये प्रकृति में सीधे उपलब्ध होते हैं, जैसे - पेट्रोलियम, कोयला, प्राकृतिक गैस, पौधे एवं जंतु।
2. कृत्रिम/संश्लेषित स्रोत: ये प्रयोगशाला या उद्योगों में मानव द्वारा बनाए जाते हैं, जैसे - प्लास्टिक, रंग, दवाइयाँ, कृत्रिम रेशे आदि।

10. हाइड्रोकार्बन किसे कहते हैं?

हाइड्रोकार्बन वे कार्बनिक यौगिक हैं जिनमें केवल कार्बन (C) और हाइड्रोजन (H) तत्व उपस्थित होते हैं। ये पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस के मुख्य घटक हैं। इन्हें बंध के आधार पर संतृप्त (एल्केन), असंतृप्त (एल्कीन, एल्काइन) और एरोमैटिक हाइड्रोकार्बन में वर्गीकृत किया जाता है।

11. कार्बनिक यौगिकों के विशेषताएँ लिखें।

कार्बनिक यौगिकों की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
1. इनमें कार्बन परमाणु मुख्य रूप से होता है।
2. ये सामान्यतः जल में अविलेय होते हैं, लेकिन कार्बनिक विलायकों (जैसे बेंजीन, ईथर) में विलेय होते हैं।
3. इनके गलनांक और क्वथनांक प्रायः निम्न होते हैं।
4. ये ठंडे एवं तनु अभिकर्मकों से धीमी गति से अभिक्रिया करते हैं।
5. ये सामान्यतः ज्वलनशील होते हैं और जलने पर कार्बन डाइऑक्साइड, जल वाष्प आदि देते हैं।
6. इनकी संरचनाएँ जटिल हो सकती हैं और इनकी संख्या बहुत अधिक (लाखों) है।

12. कार्बनिक यौगिकों के वर्गीकरण को समझाइए।

कार्बनिक यौगिकों को मुख्य रूप से दो आधारों पर वर्गीकृत किया जा सकता है:

1. कार्बन के ढाँचे (संरचना) के आधार पर:
  a. खुली शृंखला या एसाइक्लिक यौगिक: इनमें कार्बन परमाणु खुली शृंखला बनाते हैं। जैसे - एल्केन, एल्कीन।
  b. बंद शृंखला या चक्रीय यौगिक: इनमें कार्बन परमाणु वलय बनाते हैं। जैसे - बेंजीन।

2. क्रियात्मक समूह के आधार पर:
  a. हाइड्रोकार्बन: केवल C और H (जैसे - मीथेन, एथिलीन)।
  b. हाइड्रोकार्बन के व्युत्पन्न: इनमें C, H के अलावा O, N, Halogen आदि अन्य तत्व भी होते हैं। जैसे - अल्कोहल (-OH), एल्डिहाइड (-CHO), कीटोन (-CO-), कार्बोक्सिलिक अम्ल (-COOH)।

13. कार्बन डाइऑक्साइड के दो उपयोग लिखें।

कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) के दो प्रमुख उपयोग हैं:
1. शीतल पेय (Soft Drinks) में: CO₂ गैस को दाब में पेय में घोला जाता है, जिससे वह सोडा वाटर या शीतल पेय बन जाता है और ठंडा करने पर झाग देता है।
2. अग्निशामक (Fire Extinguisher) में: CO₂ भारी गैस है और यह आग के चारों ओर एक परत बना देती है जिससे ऑक्सीजन की आपूर्ति रुक जाती है और आग बुझ जाती है।

14. कार्बन मोनोऑक्साइड के दो उपयोग लिखें।

कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) के दो प्रमुख उपयोग हैं:
1. धातुकर्म (Metallurgy) में: इसका उपयोग धातु के अयस्कों से धातु निष्कर्षण के लिए एक अपचायक (Reducing Agent) के रूप में किया जाता है। जैसे - लौह अयस्क से लोहा प्राप्त करने में।
2. संश्लेषण गैस (Water Gas) के निर्माण में: CO और H₂ के मिश्रण को संश्लेषण गैस या वाटर गैस कहते हैं, जिसका उपयोग ईंधन और मेथनॉल जैसे रसायनों के उत्पादन में किया जाता है।

15. कार्बनिक यौगिकों के नामकरण की IUPAC पद्धति से आप क्या समझते हैं?

IUPAC (अंतर्राष्ट्रीय शुद्ध एवं अनुप्रयुक्त रसायन संघ) पद्धति कार्बनिक यौगिकों के नामकरण की एक वैज्ञानिक, सार्वभौमिक और व्यवस्थित विधि है। इस पद्धति का उद्देश्य प्रत्येक यौगिक का एक अद्वितीय और सार्थक नाम देना है जिससे उसकी संरचना स्पष्ट हो जाए। इस पद्धति में नाम के तीन भाग होते हैं: उपसर्ग (कार्बन शृंखला की लंबाई), मूल नाम (मुख्य क्रियात्मक समूह) और प्रत्यय (बंध की प्रकृति एवं अन्य क्रियात्मक समूह)। उदाहरण के लिए, 'प्रोपेन' में 'प्रोप' तीन कार्बन दर्शाता है और 'एन' यह दर्शाता है कि यह एक एल्केन (एकल बंध) है।

ऐलिफैटिक तथा ऐरोमैटिक यौगिक क्या हैं? स्पष्ट करें। ऐलिफैटिक तथा ऐरोमैटिक यौशिकों में महत्त्वपूर्ण तीन अन्तर लिखें। (2014) या ऐलिफैटिक यौगिक पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए। (2013) या ऐरोमैटिक यौगिक पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए। (2015)

उत्तर:

ऐलिफैटिक यौगिक: वे कार्बनिक यौगिक जिनमें कार्बन परमाणु खुली (सीधी या शाखित) श्रृंखला में जुड़े होते हैं, ऐलिफैटिक यौगिक कहलाते हैं। इनमें संतृप्त (सिंगल बॉन्ड) और असंतृप्त (डबल या ट्रिपल बॉन्ड) दोनों प्रकार के यौगिक शामिल हैं। उदाहरण: मेथेन (CH4), एथेन (C2H6), एथिलीन (C2H4), एसिटिलीन (C2H2)।

ऐरोमैटिक यौगिक: वे कार्बनिक यौगिक जिनमें कार्बन परमाणु एक चक्रीय (बंद) संरचना बनाते हैं और उनमें एकान्तर रूप से एकल एवं द्वि-बंध होते हैं, ऐरोमैटिक यौगिक कहलाते हैं। इनकी एक विशिष्ट सुगंध होती है। इनका सबसे सरल उदाहरण बेंजीन (C6H6) है।

क्र. सं. ऐरोमैटिक यौगिक ऐलिफैटिक यौगिक
1. ये चक्रीय या बंद श्रृंखला वाले यौगिक होते हैं। ये खुली श्रृंखला (सीधी या शाखित) वाले यौगिक होते हैं।
2. ये प्रतिस्थापन अभिक्रियाएँ (जैसे हैलोजनीकरण, नाइट्रीकरण) आसानी से करते हैं। ये प्रतिस्थापन अभिक्रियाओं की तुलना में योगात्मक अभिक्रियाएँ (जैसे हाइड्रोजनीकरण) आसानी से करते हैं।
3. ये धुएँदार ज्वाला के साथ जलते हैं। ये बिना धुएँ की चमकदार ज्वाला के साथ जलते हैं।

प्रश्न 2. निम्नलिखित यौगिकों का आई ०यू०पी०ए०सी० पद्धति में नाम बताइए

1. C6H5CHO (2009, 14, 17)
2. CH3OCH3 (2017)
3. CH3OC2H5 (2011)
4. CH3CH2COOH (2013, 14, 16)
5. C6H5 at CH2 = CH2 (2011)
6. CH3CH2Cl (2009)
7. CH3-CO-CH3 (2016, 17, 18)

उत्तर:

  1. C6H5CHO: बेन्ज़ैल्डिहाइड (Benzaldehyde)
  2. CH3OCH3: मेथॉक्सीमेथेन (Methoxymethane) या डाइमेथिल ईथर (Dimethyl ether)
  3. CH3OC2H5: मेथॉक्सीएथेन (Methoxyethane) या एथिल मेथिल ईथर (Ethyl methyl ether)
  4. CH3CH2COOH: प्रोपेनॉइक अम्ल (Propanoic acid)
  5. C6H5 at CH2 = CH2: स्टाइरीन (Styrene) या एथेनिलबेन्ज़ीन (Ethenylbenzene)
  6. CH3CH2Cl: क्लोरोएथेन (Chloroethane) या एथिल क्लोराइड (Ethyl chloride)
  7. CH3-CO-CH3: प्रोपेनोन (Propanone) या ऐसीटोन (Acetone)

प्रश्न 3, निम्नलिखित यौगिकों के आई०यू०पी०ए० सी० पद्धति में नाम बताइए -

1. CH3 — CH2 — CH2-CH2-CH3 (2014)
2. CH3CHO (ऐसेटेल्डिहाइड) (2009, 16)
3. CH3CH2COCH2CH3(2011)
4. HC ≡ CH
5. C2H5OH (एथिल ऐल्कोहॉल) (2015, 16, 18)
6. CH3C ≡ C-CH3 (201, 16)
7. CH3-CHOH-CH3 (2013)
8. (CH3)2CH-CH2 OH (2012)

उत्तर:

  1. CH3CH2CH2CH2CH3: पेन्टेन (Pentane)
  2. CH3CHO: एथेनल (Ethanal)
  3. CH3CH2COCH2CH3: पेन्टेन-3-ओन (Pentan-3-one)
  4. HC ≡ CH: एथाइन (Ethyne)
  5. C2H5OH: एथेनॉल (Ethanol)
  6. CH3C ≡ C-CH3: ब्यूट-2-ईन (But-2-yne)
  7. CH3-CHOH-CH3: प्रोपेन-2-ऑल (Propan-2-ol)
  8. (CH3)2CH-CH2 OH: 2-मेथिलप्रोपेन-1-ऑल (2-Methylpropan-1-ol)

प्रश्न 4. एथिल ऐल्कोहॉल के निर्माण की प्रमुख विधियों का रासायनिक समीकरण देते हुए संक्षिप्त विवरण दीजिए। इसकी (i) हैलोजन अम्ल (ii) सान्द्र सल्फ्यूरिक अम्ल के साथ 170°C ताप पर क्या अभिक्रिया होती है? (2012, 145, 16, 18) या एथिलीन से एथिल ऐल्कोहॉल बनाने की विधि का रासायनिक समीकरण दीजिए। (2013, 18) या एथिल ऐल्कोहॉल के दो रासायनिक गुणों को लिखिए। (2015) या स्टार्च से एथिल ऐल्कोहॉल के औद्योगिक निर्माण विधि का वर्णन कीजिए। रासायनिक अभिक्रिया के समीकरण भी लिखिए। (2017, 18) या किण्वन द्वारा एथेनॉल के निर्माण पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए। (2012, 13, 14, 15, 16, 17, 18)

उत्तर:

एथिल ऐल्कोहॉल (एथेनॉल) बनाने की विधियाँ:

1. एथिलीन के जलयोजन द्वारा: एथिलीन गैस को सांद्र सल्फ्यूरिक अम्ल (H2SO4) में अवशोषित करवाकर बने एथिल हाइड्रोजन सल्फेट को जल के साथ गर्म करने पर एथेनॉल प्राप्त होता है।

CH2=CH2 + H2SO4 → CH3-CH2-OSO3H
CH3-CH2-OSO3H + H2O → CH3CH2OH + H2SO4

2. किण्वन विधि (औद्योगिक विधि): यह स्टार्च या शर्करा युक्त पदार्थों (जैसे गन्ना, अनाज) पर यीस्ट (खमीर) की क्रिया द्वारा होता है। यह एक जैव-रासायनिक प्रक्रिया है।

(C6H10O5)n + nH2O → nC6H12O6 (एंजाइम द्वारा)
C6H12O6 → 2C2H5OH + 2CO2 (यीस्ट द्वारा)

एथेनॉल के रासायनिक गुण (अभिक्रियाएँ):

(i) हैलोजन अम्ल के साथ: एथेनॉल, हैलोजन अम्ल (HX) के साथ अभिक्रिया करके एथिल हैलाइड बनाता है।

C2H5OH + HX → C2H5X + H2O
(जहाँ X = Cl, Br, I)

(ii) सांद्र H2SO4 के साथ 170°C पर: इस स्थिति में निर्जलीकरण (Dehydration) होता है और एथेनॉल, एथिलीन गैस में परिवर्तित हो जाता है।

C2H5OH → CH2=CH2 + H2O

प्रश्न 5. एथेनॉल से एथेनॉइक अम्ल बनाने की विधि बताइए। एथेनॉइक अम्ल की निम्न के साथ अभिक्रिया लिखिए (2015) 1. सोडियम 2. NaHCO3 3. सान्द्र H2SO4 की उपस्थिति में एथिल ऐल्कोहॉल के साथ (2018) ऐसीटिक अम्ल बनाने की किसी एक विधि का रासायनिक समीकरण लिखिए। इसके तीन प्रमुख रासायनिक गुण भी लिखिए। (201, 13, 14, 16, 18) एथिल ऐल्कोहॉल से ऐसीटिक अम्ल बनाने की विधि का रासायनिक समीकरण लिखिए। (2011, 12) या एथेनॉल की ऑक्सीकरण अभिक्रिया का समीकरण लिखिए। (2013)

उत्तर:

एथेनॉल से एथेनॉइक अम्ल (ऐसीटिक अम्ल) बनाना: एथेनॉल का क्षारीय पोटैशियम परमैंगनेट (KMnO4) या एसिडिक पोटैशियम डाइक्रोमेट (K2Cr2O7) के साथ ऑक्सीकरण करवाया जाता है। पहले एथेनल (एसिटैल्डिहाइड) बनता है जो आगे ऑक्सीकृत होकर एथेनॉइक अम्ल देता है।

CH3CH2OH + [O] → CH3CHO + H2O
CH3CHO + [O] → CH3COOH

एथेनॉइक अम्ल के रासायनिक गुण:

1. सोडियम (Na) के साथ: यह अम्लीय हाइड्रोजन को विस्थापित करके हाइड्रोजन गैस मुक्त करता है और सोडियम एसीटेट बनाता है।

2CH3COOH + 2Na → 2CH3COONa + H2

2. सोडियम बाइकार्बोनेट (NaHCO3) के साथ: इस अभिक्रिया में तेज हिसिंग ध्वनि के साथ कार्बन डाइऑक्साइड गैस निकलती है।

CH3COOH + NaHCO3 → CH3COONa + H2O + CO2

3. एथिल ऐल्कोहॉल के साथ (एस्टरीकरण): सांद्र H2SO4 (उत्प्रेरक) की उपस्थिति में गर्म करने पर एथिल एसीटेट नामक एस्टर बनता है।

CH3COOH + C2H5OH → CH3COOC2H5 + H2O

प्रश्न 6. ऐसीटिक अम्ल बनाने की निम्न विधियों का संक्षिप्त विवरण रासायनिक समीकरण देते हुए दीजिए 1. मेथिल सायनाइड से

उत्तर:

1. मेथिल सायनाइड (मेथेननाइट्राइल, CH3CN) से: मेथिल सायनाइड का जल-अपघटन (हाइड्रोलिसिस) करने पर ऐसीटिक अम्ल प्राप्त होता है। यह अभिक्रिया अम्ल या क्षार की उपस्थिति में होती है।

अम्लीय माध्यम में:
CH3CN + 2H2O + HCl → CH3COOH + NH4Cl

क्षारीय माध्यम में:
CH3CN + H2O + NaOH → CH3COONa + NH3
CH3COONa + HCl → CH3COOH + NaCl
पहले सोडियम एसीटेट बनता है, जिसे बाद में हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के साथ उपचारित करके ऐसीटिक अम्ल प्राप्त किया जाता है।

ऐसीटिक अम्ल निर्माण की दो विधियों का वर्णन समीकरण द्वारा कीजिए। (2013, 16, 17) या किण्वन विधि द्वारा एथिल ऐल्कोहॉल से ऐसीटिक अम्ल बनाने की विधि का रासायनिक समीकरण सहित वर्णन कीजिए। (2017)

उत्तर:
ऐसीटिक अम्ल बनाने की दो प्रमुख विधियाँ निम्नलिखित हैं:

  1. मेथिल सायनाइड से: मेथिल सायनाइड (CH3CN) का तनु अम्ल (जैसे HCl) या तनु क्षार (जैसे NaOH) की उपस्थिति में जल-अपघटन कराने पर ऐसीटिक अम्ल प्राप्त होता है।
    CH3CN + 2H2O + HCl → CH3COOH + NH4Cl
  2. ऐसीटेमाइड से: ऐसीटेमाइड (CH3CONH2) पर नाइट्रस अम्ल (HNO2) की क्रिया कराने पर ऐसीटिक अम्ल बनता है।
    CH3CONH2 + HNO2 → CH3COOH + N2↑ + H2O

मुख्य औद्योगिक विधि (किण्वन विधि): इस विधि में एथिल ऐल्कोहॉल (C2H5OH) का वायु की उपस्थिति में माइकोडर्मा ऐसीटि नामक जीवाणु द्वारा किण्वन कराया जाता है। इस क्रिया में ऐल्कोहॉल, ऑक्सीजन के साथ मिलकर ऐसीटिक अम्ल में ऑक्सीकृत हो जाता है।

C2H5OH + O2 (माइकोडर्मा ऐसीटि) → CH3COOH + H2O

निर्जलीकरण तथा श्मिंट अभिक्रिया:

  1. निर्जलीकरण: ऐसीटिक अम्ल के दो अणुओं को फॉस्फोरस पेन्टाऑक्साइड (P2O5) जैसे निर्जलीकारक की उपस्थिति में गर्म करने पर जल का एक अणु निकल जाता है और ऐसीटिक एन्हाइड्राइड बनता है।
    CH3COOH + HOOCCH3 (P2O5) → (CH3CO)2O + H2O
  2. श्मिंट अभिक्रिया: सान्द्र सल्फ्यूरिक अम्ल की उपस्थिति में ऐसीटिक अम्ल, हाइड्रेजोइक अम्ल (HN3) के साथ अभिक्रिया करके मेथिल ऐमीन (CH3NH2) देता है।
    CH3COOH + HN3 (H2SO4) → CH3NH2 + CO2↑ + N2

प्रश्न 7. एस्टरीकरण से आप क्या समझते हैं ? उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए। एथिल ऐसीटेट के जल-अपघटन की समीकरण दीजिए। ऐसीटिक अम्ल के प्रमुख उपयोगों का उल्लेख कीजिए। (2013, 14, 16) ऐसीटिक अम्ल के एस्टरीकरण की अभिक्रिया का समीकरण लिखिए। (2011, 12) ऐसीटिक अम्ल से एथिल ऐसीटेट कैसे प्राप्त करेंगे? (2013) एस्टरीकरण पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए। (2014, 15, 16, 17, 18) क्या होता है जब ऐसीटिक अम्ल की सान्द्र सल्फ्यूरिक अम्ल की उपस्थिति में एथिल ऐल्कोहॉल से क्रिया कराते हैं?

उत्तर:
एस्टरीकरण: वह रासायनिक अभिक्रिया जिसमें एक कार्बोक्सिलिक अम्ल और एक ऐल्कोहॉल आपस में अभिक्रिया करके एक एस्टर तथा जल का अणु बनाते हैं, एस्टरीकरण कहलाती है। यह अभिक्रिया सामान्यतः सान्द्र सल्फ्यूरिक अम्ल की उपस्थिति में कराई जाती है, जो एक उत्प्रेरक और निर्जलीकारक दोनों का कार्य करता है।

उदाहरण (ऐसीटिक अम्ल से एथिल ऐसीटेट का निर्माण):

CH3COOH + C2H5OH (सान्द्र H2SO4) → CH3COOC2H5 + H2O
ऐसीटिक अम्ल + एथिल ऐल्कोहॉल → एथिल ऐसीटेट (एस्टर) + जल

एथिल ऐसीटेट का जल-अपघटन: एस्टर का जल के साथ विघटन होकर वापस अम्ल और ऐल्कोहॉल बनता है।

CH3COOC2H5 + H2O → CH3COOH + C2H5OH

ऐसीटिक अम्ल के प्रमुख उपयोग:

  1. प्रयोगशाला में एक महत्वपूर्ण अभिकर्मक के रूप में।
  2. सिरका बनाने में (खाद्य परिरक्षक एवं स्वादकारक)।
  3. विनाइल ऐसीटेट, सेलुलोज ऐसीटेट जैसे रसायनों के उत्पादन में कच्चे माल के रूप में।
  4. रंग, प्लास्टिक, रेयॉन, दवाइयाँ तथा सुगन्धित पदार्थ बनाने में।
  5. रबड़ के दूध को जमाने में।

प्रश्न 8. ऐसीटिक अम्ल की निम्न के साथ रासायनिक अभिक्रिया लिखिए (2017) 1. PCl5 2. NaOH 3. N3H 4. Cl2

उत्तर:
ऐसीटिक अम्ल (CH3COOH) की दी गई अभिकर्मकों के साथ अभिक्रियाएँ निम्नलिखित हैं:

  1. फॉस्फोरस पेन्टाक्लोराइड (PCl5) के साथ: यह अभिक्रिया ऐसीटिल क्लोराइड बनाती है।
    CH3COOH + PCl5 → CH3COCl + POCl3 + HCl
  2. सोडियम हाइड्रॉक्साइड (NaOH) के साथ: यह अभिक्रिया सोडियम ऐसीटेट लवण तथा जल बनाती है।
    CH3COOH + NaOH → CH3COONa + H2O
  3. हाइड्रेजोइक अम्ल (HN3) के साथ: यह श्मिंट अभिक्रिया है, जिसमें मेथिल ऐमीन बनती है।
    CH3COOH + HN3 (सान्द्र H2SO4) → CH3NH2 + CO2↑ + N2
  4. क्लोरीन (Cl2) के साथ (लाल फॉस्फोरस की उपस्थिति में): यह अभिक्रिया क्रमिक प्रतिस्थापन द्वारा क्लोरीन युक्त ऐसीटिक अम्ल देती है।
    CH3COOH + Cl2 (लाल P) → CH2ClCOOH + HCl (मोनोक्लोरोऐसीटिक अम्ल)
    CH2ClCOOH + Cl2 (लाल P) → CHCl2COOH + HCl (डाइक्लोरोऐसीटिक अम्ल)
    CHCl2COOH + Cl2 (लाल P) → CCl3COOH + HCl (ट्राइक्लोरोऐसीटिक अम्ल)

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