Bihar Board Class 10th Sanskrit (संस्कृत पीयूषम् भाग 2) Chapter 9 स्वामी दयानन्दः) Solutions

Here we have provided Solution for Chapter 9 स्वामी दयानन्दः) of Sanskrit (संस्कृत पीयूषम् भाग 2) subject for Class 10th students of Bihar Board of Secondary Education. There are various chapters in this Sanskrit (संस्कृत पीयूषम् भाग 2) such as Chapter 1 मङ्गलम्), Chapter 2 पाटलिपुत्रवैभवम्), Chapter 3 अलसकथा), Chapter 4 संस्कृतसाहित्ये लेखिकाः), Chapter 5 भारतमहिमा), Chapter 6 भारतीयसंस्काराः), Chapter 7 नीतिश्लोकाः), Chapter 8 कर्मवीर कथाः), Chapter 9 स्वामी दयानन्दः), Chapter 10 मन्दाकिनीवर्णनम्), Chapter 11 व्याघ्रपथिककथाः), Chapter 13 विश्वशांतिः) and Chapter 14 शास्त्रकाराः). Summary of the same is given below:

Board NameBihar Board of Secondary Education
ClassClass 10th
Content TypeSolution
Solution forClass 10th students
SubjectSanskrit (संस्कृत पीयूषम् भाग 2)
Chapter NameChapter 9 स्वामी दयानन्दः)
Total Number of Chapter in this Subject13

Studying Bihar Board Class 10th Sanskrit (संस्कृत पीयूषम् भाग 2) Chapter 9 स्वामी दयानन्दः) solution will help you higher marks in this subject but you need to follow best practices to achieve higher marks, which are given after solutions, go through them once.

Bihar Board Class 10th Sanskrit (संस्कृत पीयूषम् भाग 2) Chapter 9 स्वामी दयानन्दः) Solutions

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Bihar Board Class 10 Sanskrit (संस्कृत पीयूषम् भाग 2)
Chapter 9 - स्वामी दयानन्दः
Objective Question Answers

प्रश्न 1.
स्वामी: दयानन्दः कः?

(क) पाटलिपुत्रासंस्कृतसंस्थानस्य संस्थापक: (ख) समग्रविकाससंस्थानस्य संस्थापक: (ग) आर्यसमाजस्य संस्थापक ;
(घ) ब्रह्मसमाजस्य संस्थापक:

उत्तर: (ग) आर्यसमाजस्य संस्थापक :
स्पष्टीकरण: स्वामी दयानन्दः 19वीं शताब्दी के महान समाजसुधारक एवं धार्मिक नेता थे। इन्होंने सन् 1875 में आर्यसमाज की स्थापना की थी, जिसका मुख्य उद्देश्य वैदिक सिद्धांतों के आधार पर समाज का सुधार करना था।

प्रश्न 2,
समाजस्य शिक्षाया: उद्धारक: क: ?

(क) स्वामी दयानन्द: (ख) राधारमण ओझा (ग) पं. रामस्वरूप शुक्ल: (घ) राजाराम मोहन राय:

उत्तर: (क) स्वामी दयानन्द:
स्पष्टीकरण: स्वामी दयानन्द ने समाज में फैली कुरीतियों तथा अशिक्षा को दूर करने का महत्वपूर्ण कार्य किया। उन्होंने शिक्षा के प्रचार-प्रसार पर बल दिया और स्त्री शिक्षा तथा सभी वर्गों के लिए शिक्षा की वकालत की, इसलिए उन्हें समाज एवं शिक्षा का उद्धारक माना जाता है।

प्रश्न 3.
स्वामी दयानन्द: अकरोत्‌ ?

(क) वैज्ञानिकतत्त्वज्ञानस्य (ख) सामाजिकज्ञानस्य (ग) नगरव्यवस्थायाः (घ) शुद्धतत्त्वज्ञानस्य

उत्तर: (घ) शुद्धतत्त्वज्ञानस्य
स्पष्टीकरण: स्वामी दयानन्द ने वेदों के मूल तत्त्वज्ञान को सरल एवं शुद्ध रूप में जनसामान्य तक पहुँचाया। उन्होंने मूर्तिपूजा, जातिवाद, छुआछूत जैसी कुरीतियों का विरोध करते हुए शुद्ध वैदिक तत्त्वज्ञान का प्रचार किया।

प्रश्न 4. दयानन्दस्य जन्म कस्मिन्‌ प्रांत अभवत्‌ ?

(क) बिहारप्रांते (ख) महाराष्ट्रप्रांते (ग) गुजरातप्रांते (घ) झारखंडप्रांते

उत्तर: (ग) गुजरातप्रांते
स्पष्टीकरण: स्वामी दयानन्द का जन्म सन् 1824 में गुजरात प्रांत के मोरवी रियासत के टंकारा नामक गाँव में हुआ था। उनके पिता का नाम करशनजी लालजी तिवारी तथा माता का नाम यशोदाबाई था।

प्रश्न 5.
स्वामी दयानन्दस्य रचना कः अस्ति ?

(क) सत्यार्थप्रकाश: (ख) रामायणम्‌ (ग) वेदः (घ) पुराणम्‌

उत्तर: (क) सत्यार्थप्रकाश:
स्पष्टीकरण: स्वामी दयानन्द की सबसे प्रसिद्ध रचना 'सत्यार्थ प्रकाश' है। यह हिंदी भाषा में लिखित एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है जिसमें उन्होंने धर्म, समाज, नीति एवं दर्शन से संबंधित विषयों पर प्रकाश डाला है।

प्रश्न 6.
कस्य स्थापना 1875 ईस्वी वर्षे अभवत्‌ ?

(क) आर्यसमाजस्य (ख) ब्रह्मसमाजस्य (ग) समग्रविकाससंस्थानस्य (घ) पाटलिपुत्रासंस्कृतसंस्थानस्य

उत्तर: (क) आर्यसमाजस्य
स्पष्टीकरण: स्वामी दयानन्द ने सन् 1875 ईस्वी में आर्यसमाज की स्थापना की थी। इसकी स्थापना सर्वप्रथम मुम्बई (तत्कालीन बॉम्बे) में हुई थी। इस संस्था का मुख्य नारा था - "वेदों की ओर लौटो"।

प्रश्न 7.
दयानन्दस्य निधन: कदा अभवत्‌ ?

(क) 1875 ईस्वी वर्षे (ख) 1883 ईस्वी वर्षे (ग) 1945 ईस्वी वर्षे (घ) 1983 ईस्वी वर्षे

उत्तर: (ख) 1883 ईस्वी वर्षे
स्पष्टीकरण: स्वामी दयानन्द का निधन सन् 30 अक्टूबर 1883 को हुआ था। ऐसा माना जाता है कि जोधपुर में उन्हें विष दिया गया था, जिसके कारण उनकी मृत्यु हुई।

प्रश्न 8. स्वामी दयानन्द:......... . -आसीत्‌ । रिक्त स्थानानि पुरयत।

(क) समाजोद्वारक: (ख) कृषक: (ग) द्वारपालक: (घ) लेखक:

उत्तर: (क) समाजोद्वारक:
स्पष्टीकरण: स्वामी दयानन्द एक महान समाजोद्धारक (समाज सुधारक) थे। उन्होंने बाल विवाह, सती प्रथा, जाति भेद, मूर्तिपूजा जैसी सामाजिक बुराइयों के खिलाफ आवाज उठाई और समाज को नई दिशा देने का प्रयास किया।

प्रश्न 9.
स्वामी दयानन्दस्य बाल्यकालीन नाम............... -इति कृतम्‌ । रिक्त स्थानानि पूरयत।

(क) मूलविष्णु: (ख) विष्णु: (ग) मूलशड्करः (घ) ब्रह्मा

उत्तर: (ग) मूलशड्करः
स्पष्टीकरण: स्वामी दयानन्द का बचपन का नाम मूलशंकर था। उनके पिता शिव के उपासक थे, इसलिए उन्होंने अपने पुत्र का नाम 'शंकर' (शिव) के नाम पर रखा। 'मूल' शब्द का अर्थ है 'मूल या आदि'।

प्रश्न 10.
शंकरस्य विग्रहमारुह्य......... विग्रहार्पितानि द्रव्याणि भक्षयन्ति । रिक्त स्थानानि पूरयत।

(क) खगाः (ख) मूषकाः (ग) कुक्कुरः (घ) शावकः

उत्तर: (ख) मूषका:
स्पष्टीकरण: पाठ में वर्णित घटना के अनुसार, जब मूलशंकर (बालक दयानन्द) शिवरात्रि के व्रत में जागरण कर रहे थे, तब उन्होंने देखा कि चूहे (मूषकाः) शिवलिंग पर चढ़ाए गए प्रसाद को खा रहे हैं। इस दृश्य ने उनके मन में मूर्तिपूजा के प्रति संदेह उत्पन्न किया।

प्रश्न 11.
रात्रिजागरणं विहाय मूलशंकर: ......... .गतः । रिक्त स्थानानि पूरयत ।

(क) गृहम्‌ (ख) विद्यालयम्‌ (ग) वस्त्रालयम्‌ (घ) भोजनालयम्‌

उत्तर: (क) गृहम्‌
स्पष्टीकरण: शिवरात्रि के जागरण के दौरान चूहों द्वारा प्रसाद खाए जाने का दृश्य देखकर मूलशंकर का विश्वास डगमगा गया। वे व्रत और जागरण को अधूरा छोड़कर सीधे अपने घर (गृहम्) लौट आए। यह घटना उनके जीवन में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई।

प्रश्न 12.
स्वामी दयानन्द:......... . -संस्थापक: आसीत्‌ । रिक्त स्थानानि पूरयत ।

(क) पारसीसमाजस्य (ख) सिक्खसमाजस्य (ग) आर्यसमाजस्य (घ) जैनसमाजस्य

उत्तर: (ग) आर्यसमाजस्य
स्पष्टीकरण: स्वामी दयानन्द आधुनिक भारत के एक प्रमुख धार्मिक एवं सामाजिक आंदोलन 'आर्यसमाज' के संस्थापक थे। इस संस्था ने हिंदू समाज में सुधार लाने और वैदिक मूल्यों को पुनर्स्थापित करने का कार्य किया।


हिन्दी में वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
स्वामी दयानन्द कौन थे?

(क) आर्य समाज संस्थापक (ख) समग्र विकास संस्थान संस्थापक (ग) ब्रह्म समाज संस्थापक (घ) इनमें से कोई नहीं

उत्तर: (क) आर्य समाज संस्थापक
स्पष्टीकरण: स्वामी दयानन्द (1824-1883) 19वीं सदी के प्रमुख भारतीय समाज सुधारक, दार्शनिक और आर्य समाज के संस्थापक थे। उन्होंने हिंदू धर्म में व्याप्त कुरीतियों के खिलाफ आवाज उठाई और 'वेदों की ओर लौटो' का नारा दिया।

प्रश्न 2.
स्वामी दयानन्द के बचपन का नाम क्या था?

(क) शंकर (ख) शिवशंकर (ग) मूलशंकर (घ) उमाशंकर

उत्तर: (ग) मूलशंकर
स्पष्टीकरण: स्वामी दयानन्द का बचपन में नाम मूलशंकर तिवारी था। 'दयानन्द' नाम उन्हें अपने गुरु स्वामी विरजानन्द से दीक्षा लेने के बाद मिला, जिसका अर्थ है 'दया में आनन्द लेने वाला'।

प्रश्न 3.
स्वामी दयानन्द का जन्म किस ग्राम में हुआ था?

(क) झंकारा (ख) टंकारा (ग) लंकारा (घ) अंकारा

उत्तर: (ख) टंकारा
स्पष्टीकरण: स्वामी दयानन्द का जन्म 12 फरवरी, 1824 को गुजरात के काठियावाड़ क्षेत्र में मोरवी रियासत के टंकारा नामक गाँव में हुआ था। यह स्थान अब गुजरात राज्य के राजकोट जिले में है।

प्रश्न 4.
आर्य समाज की स्थापना किस नगर में हुई?

(क) बंगलोर (ख) मद्रास (ग) मुम्बई (घ) पटना

उत्तर: (ग) मुम्बई
स्पष्टीकरण: आर्य समाज की स्थापना 10 अप्रैल, 1875 को मुम्बई (तब बॉम्बे) में हुई थी। बाद में इसका मुख्यालय लाहौर (अब पाकिस्तान में) स्थानांतरित कर दिया गया। वर्तमान में इसका मुख्य कार्यालय दिल्ली में है।

प्रश्न 5.
समाज सुधारक कौन थे?

(क) स्वामी दयानन्द (ख) राधामोहन ओझा (ग) पंडित रामस्वरूप शुक्ल (घ) गणेश ओझा

उत्तर: (क) स्वामी दयानन्द
स्पष्टीकरण: स्वामी दयानन्द एक प्रसिद्ध समाज सुधारक थे। उनके सुधारवादी कार्यों में छुआछूत का विरोध, स्त्री शिक्षा का समर्थन, विधवा पुनर्विवाह को बढ़ावा देना और अंधविश्वासों के खिलाफ जागरूकता फैलाना शामिल था।

प्रश्न 6.
स्वामी दयानन्द का जन्म किस प्रांत में हुआ था?

(क) गुजरात (ख) बिहार (ग) राजस्थान (घ) पंजाब

उत्तर: (क) गुजरात
स्पष्टीकरण: स्वामी दयानन्द का जन्म वर्तमान गुजरात राज्य में हुआ था। उस समय यह क्षेत्र काठियावाड़ की रियासतों के अंतर्गत आता था, जो ब्रिटिश भारत का हिस्सा था।

प्रश्न 7.
सत्यार्थ प्रकाश किसकी रचना है?

(क) स्वामी दयानन्द (ख) राधामोहन ओझा (ग) पंडित रामस्वरूप शुक्ल (घ) गणेश ओझा

उत्तर: (क) स्वामी दयानन्द
स्पष्टीकरण: 'सत्यार्थ प्रकाश' स्वामी दयानन्द की प्रमुख रचना है, जिसे उन्होंने हिंदी भाषा में लिखा। यह ग्रंथ सत्य के मार्ग को प्रकाशित करने वाला माना जाता है और आर्य समाज का एक मूलभूत ग्रंथ है।

प्रश्न 8.
आर्य समाज की स्थापना कब हुई?

(क) 1985 (ख) 1875 (ग) 1705 (घ) 1930

उत्तर: (ख) 1875
स्पष्टीकरण: आर्य समाज की स्थापना 10 अप्रैल, 1875 को हुई थी। इसकी स्थापना का मुख्य उद्देश्य वैदिक सिद्धांतों के आधार पर हिंदू समाज का सुधार करना और सामाजिक कुरीतियों को दूर करना था।

प्रश्न 9.
मूल शंकर किनका नाम था?

(क) स्वामी दयानन्द (ख) राधामोहन ओझा (ग) पंडित रामस्वरूप शुक्ल (घ) गणेश ओझा

उत्तर: (क) स्वामी दयानन्द
स्पष्टीकरण: मूलशंकर, स्वामी दयानन्द का बचपन का नाम था। यह नाम उनके पिता ने देवता शिव (शंकर) के नाम पर रखा था। उन्होंने 21 वर्ष की आयु में घर त्याग दिया और सन्यासी बन गए।

प्रश्न 10.
स्वामी दयानन्द का जन्म कब हुआ था?

(क) 1985 (ख) 1885 (ग) 1824 (घ) 1930

उत्तर: (ग) 1824
स्पष्टीकरण: स्वामी दयानन्द सरस्वती का जन्म 12 फरवरी, 1824 को हुआ था। उनका जन्मदिन हर साल 'दयानन्द जयन्ती' के रूप में मनाया जाता है।

प्रश्न 11.
किसके कहने पर स्वामी दयानंद ने वैदिक ग्रंथ का प्रचार किया?

(क) गिरिजानन्द (ख) अमृतानन्द (ग) बिरिजानन्द (घ) इनमें से कोई नहीं

उत्तर: (ग) बिरिजानन्द
स्पष्टीकरण: स्वामी दयानन्द ने मथुरा में स्वामी विरजानन्द (कुछ स्रोतों में बिरजानन्द या बिरिजानन्द) से दर्शन, व्याकरण और वेदों की शिक्षा प्राप्त की। अपने अंधे गुरु विरजानन्द के आदेश पर ही उन्होंने देश भर में घूम-घूम कर वैदिक ग्रंथों का प्रचार किया।

प्रश्न 12.
निम्न में कौन मूर्ति पूजा के विरोधी थे?

(क) स्वामी दयानन्द (ख) राधामोहन ओझा (ग) पंडित रामस्वरूप शुक्ल (घ) गणेश ओझा

उत्तर: (क) स्वामी दयानन्द
स्पष्टीकरण: स्वामी दयानन्द मूर्तिपूजा के सख्त विरोधी थे। उनका मानना था कि ईश्वर निराकार है और मूर्तियों की पूजा वेदों के विरुद्ध है। उन्होंने 'सत्यार्थ प्रकाश' में मूर्तिपूजा की कटु आलोचना की है।

प्रश्न 13.
स्वामी दयानन्द के माता-पिता किसके उपासक थे?

(क) शिव (ख) विष्णु (ग) गणेश (घ) इन्द्र

उत्तर: (क) शिव
स्पष्टीकरण: स्वामी दयानन्द के पिता करशनजी लालजी तिवारी तथा माता यशोदाबाई दोनों ही भगवान शिव के परम भक्त थे। इसीलिए उन्होंने अपने पुत्र का नाम भी 'मूलशंकर' (शिव का एक नाम) रखा था।

प्रश्न 14.
स्वामी दयानन्द का निधन कब हुआ था?

(क) 1875 (ख) 1883 (ग) 1945 (घ) 1983

उत्तर: (ख) 1883
स्पष्टीकरण: स्वामी दयानन्द का निधन 30 अक्टूबर, 1883 को राजस्थान के अजमेर में हुआ था। मान्यता है कि जोधपुर में एक विषैले भोजन के कारण उनका स्वास्थ्य बिगड़ गया था, जिसके परिणामस्वरूप उनकी मृत्यु हो गई।

प्रश्न 15.
घर छोड़कर स्वामी दयानन्द कहाँ गये?

(क) काशी (ख) आगरा (ग) मथुरा (घ) दिल्ली

उत्तर: (ग) मथुरा
स्पष्टीकरण: जीवन के सत्य की खोज में और घरेलू जीवन से विरक्त होकर, मूलशंकर (दयानन्द) ने 1846 में घर छोड़ दिया। वे तीर्थयात्रा करते हुए अंततः मथुरा पहुँचे, जहाँ उन्होंने स्वामी विरजानन्द से लगभग तीन वर्ष तक शिक्षा प्राप्त की।

प्रश्न 16.
आर्य समाज के संस्थापक कौन थे?

(क) स्वामी विवेकानन्द (ख) स्वामी सरस्वत्यानन्द (ग) स्वामी रामतीर्थ (घ) स्वामी दयानन्द

उत्तर: (घ) स्वामी दयानन्द
स्पष्टीकरण: स्वामी दयानन्द सरस्वती ही आर्य समाज के संस्थापक हैं। उन्होंने इस संस्था के माध्यम से भारत में एक शक्तिशाली सुधार आंदोलन चलाया, जिसने राष्ट्रीय जागरण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

प्रश्न17.
हिन्दू समाज को छोड़कर किसने धर्मान्तरण अपनाया?

(क) निर्धन (ख) दलित (ग) अल्पसंख्यक (घ) असहाय

उत्तर: (ख) दलित
स्पष्टीकरण: मध्यकाल और ब्रिटिश काल में, हिंदू समाज में व्याप्त छुआछूत और जातिगत भेदभाव के कारण अनेक दलित (शूद्र/अछूत) समुदायों के लोगों ने स्वयं को हीन महसूस किया और समानता की तलाश में उन्होंने अन्य धर्मों को अपना लिया।


संस्कृत में वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
स्वामी दयानन्द: कः आसीत्?

(क) वैज्ञानिक: (ख) प्राध्यापक: (ग) राजनेता (घ) समाजोद्वारक:

उत्तर: (घ) समाजोद्वारक:
स्पष्टीकरण: स्वामी दयानन्दः महानः समाजोद्धारकः (समाजसुधारकः) आसीत्। तेन सतीप्रथा, बालविवाहः, जातिभेदः, मूर्तिपूजा इत्यादयः सामाजिकाः कुरीतयः निरस्ताः।

प्रश्न 2.
मध्यकाले का: भारतीयं समाजम्‌ अदूषयन्‌?

(क) संस्कृत शिक्षा (ख) कुत्सितरीतयः (ग) अनाचारा: (घ) कलहानि

उत्तर: (ख) कुत्सितरीतयः
स्पष्टीकरण: मध्यकाले अनेकाः कुत्सिताः रीतयः (बुरी प्रथाएँ) यथा - अंधविश्वासाः, जातिव्यवस्थायाः कठोरता, स्त्रीशिक्षायाः अभावः इत्यादयः भारतीयसमाजं दूषितवत्यः। स्वामी दयानन्दः एतासां निवारणार्थं प्रयत्नं कृतवान्।

प्रश्न 3,
के हिन्दू समाज तिरस्कृत्य धर्मान्तरणं स्वीकृतवन्तः?

(क) दलिताः (ख) वैदेशिका: (ग) अल्पसंख्यका: (घ) विशेषज्ञाः

उत्तर: (क) दलिताः
स्पष्टीकरण: हिन्दुसमाजे दलितानाम् (शूद्राणाम्) सह भेदभावः, तिरस्कारः च अभवत्। एतस्मात् कारणात् ते स्वधर्मं त्यक्त्वा अन्यधर्मं (ईसाईधर्मं, इस्लामधर्मं च) स्वीकृतवन्त

प्रश्न 12.

अतः अनेके दलिताः हिन्दुसमाज तिरस्कृत्य .............*. स्वीकृतवन्तः। रिक्त स्थानं पूरयता

(अ) धर्मान्तरणम्‌

(ब) स्थानान्तरणम्‌

(स) जनमातरणम्‌

(द) मरणान्तरणम्‌

उत्तर: (अ) धर्मान्तरणम्‌

व्याख्या: अनेक दलित समुदाय के लोगों को हिन्दू समाज में तिरस्कार का सामना करना पड़ा। इस कारण उन्होंने अपना धर्म परिवर्तन कर लिया, अर्थात उन्होंने धर्मान्तरण स्वीकार किया।

प्रश्न 13.

वस्तुतः “” प्रतिमायां नास्ति। रिक्त स्थानम्‌ पूरयत।

(अ) महादेवः

(ब) देवः

(स) भूदेवः

(द) सुखदेव:

उत्तर : (ब) देवः

व्याख्या: स्वामी दयानन्द का मानना था कि ईश्वर निराकार है। वस्तुतः मूर्ति के भीतर कोई सच्चा देवः (ईश्वर) नहीं रहता। ईश्वर सर्वव्यापक है, उसे किसी मूर्ति में सीमित नहीं किया जा सकता।

प्रश्न 14.

ततः मूलशंकरे कः भाव: जात:?

(अ) सन्यासिभावः

(ब) गृहस्थभावः

(स) साधुभावः

(द) वैराग्यभावः

उत्तर: (द) वैराग्यभावः

व्याख्या: जब मूलशंकर (स्वामी दयानन्द का बचपन का नाम) ने अपनी बहन और चाचा की मृत्यु देखी, तो उनके मन में संसार की अनित्यता का भाव जाग्रत हुआ। इससे उनमें वैराग्यभावः (दुनिया से मोह भंग होने की भावना) उत्पन्न हुआ।

प्रश्न 15.

स्वामी दयानन्दः केषाम्‌ ग्रनथानाम्‌ अध्ययन प्रारम्भत?

(अ) धर्मग्रन्थानाम्‌

(ब) आर्षग्रनथानाम्‌

(स) वेदग्रन्थानाम्‌

(द) नीतिग्रनथानाम्‌

उत्तर: (ब) आर्षग्रनथानाम्‌

व्याख्या: स्वामी दयानन्द ने सबसे पहले आर्षग्रन्थानाम्‌ (ऋषियों द्वारा रचित प्राचीन ग्रंथों) का अध्ययन प्रारम्भ किया। इन ग्रंथों में वेद और दर्शन शास्त्र आदि सम्मिलित हैं।

प्रश्न 16.

यत्र-तत्र ” खण्डनमि स चकार। रिक्त स्थानम्‌ पूरयत।

(अ) बाह्याडम्बराणाम्‌

(ब) कर्मकाण्डाणाम्‌

(स) वेदग्रनथानाम्‌

(द) नीतिग्रनथानाम्‌

उत्तर: (ब) कर्मकाण्डाणाम्‌

व्याख्या: स्वामी दयानन्द जहाँ-तहाँ घूमकर अनावश्यक और अर्थहीन कर्मकाण्डाणाम्‌ (धार्मिक अनुष्ठानों और रीति-रिवाजों) का खंडन करते थे। उनका मानना था कि इन कर्मकांडों का वेदों में कोई आधार नहीं है।

प्रश्न 17.

ततः एव मूलशंकरस्य मूर्तिपूजां प्रति ” जाता। रिक्त स्थानम्‌ पूरयत।

(अ) श्रद्धा

(ब) भक्तिः

(स) आस्था

(द) अनास्था

उत्तर: (द) अनास्था

व्याख्या: जब मूलशंकर ने देखा कि चूहे मूर्ति पर चढ़े प्रसाद को खा रहे हैं और मूर्ति उन्हें रोक नहीं पा रही, तो उनके मन में मूर्तिपूजा के प्रति अनास्था (अविश्वास या श्रद्धा की कमी) उत्पन्न हो गई।

प्रश्न 18.

स्वामी दयानन्द: कस्या: संस्थाया: कः?

(अ) ब्रह्मसमाजस्य संस्थापक:

(ब) पाठलिपुत्रसंस्कृतसंस्थानस्य संस्थापक:

(स) आर्यसमाजस्य संस्थापक:

(द) समग्रविकासंस्थनस्य संस्थापक:

उत्तर: (स) आर्यसमाजस्य संस्थापक:

व्याख्या: स्वामी दयानन्द सन् 1875 में मुम्बई में आर्यसमाजस्य संस्थापक: थे। आर्यसमाज एक सामाजिक-धार्मिक आन्दोलन था जिसका उद्देश्य वैदिक मूल्यों की पुनर्स्थापना करना था।

प्रश्न 19.

समाजस्य शिक्षाया: उद्धारक: क:?

(अ) स्वामी दयानन्द:

(ब) राधारमण ओझा

(स) पं. रामस्वरूप शुक्ल:

(द) राजाराम मोहन राय:

उत्तर: (अ) स्वामी दयानन्दः

व्याख्या: स्वामी दयानन्द को समाजस्य शिक्षाया: उद्धारक: (समाज की शिक्षा के उद्धारक) के रूप में जाना जाता है। उन्होंने सभी के लिए शिक्षा, विशेषकर वैदिक ज्ञान के प्रसार पर बल दिया और सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध जागरूकता फैलाई।

प्रश्न 20.

स्वामी दयानन्दः अकरोत्‌?

(अ) वैज्ञानिकतत्वज्ञानस्य

(ब) सामाजिकज्ञानस्य

(स) राजनैतिकज्ञानस्य

(द) शुद्धतत्त्वज्ञानस्य

उत्तर: (द) शुद्धतत्त्वज्ञानस्य

व्याख्या: स्वामी दयानन्द ने शुद्धतत्त्वज्ञानस्य (शुद्ध दार्शनिक सिद्धांतों के ज्ञान) का प्रचार किया। उन्होंने लोगों को वेदों के मूल सिद्धांतों, एक ईश्वर, सत्य और नैतिकता के शुद्ध ज्ञान से परिचित कराया।

प्रश्न 21.

दयानन्दस्य जन्म कस्मिन्‌ प्रांते अभवत्‌?

(अ) बिहारप्रांते

(ब) महाराष्ट्रप्रांते

(स) गुजरातप्रांते

(द) झारखंडप्रांते

उत्तर: (स) गुजरातप्रांते

व्याख्या: स्वामी दयानन्द सरस्वती का जन्म सन् 1824 में गुजरातप्रांते के टंकारा नामक स्थान पर हुआ था।

प्रश्न 22.

स्वामी दयानन्दस्य रचना कः अस्ति?

(अ) सत्यार्थप्रकाश:

(ब) रामायणम्‌

(स) गीता

(द) पुराणम्‌

उत्तर: (अ) सत्यार्थप्रकाश:

व्याख्या: स्वामी दयानन्द की सबसे प्रसिद्ध रचना सत्यार्थप्रकाश: है। यह हिन्दी में लिखित एक महत्वपूर्ण ग्रन्थ है जिसमें उनके धार्मिक, सामाजिक और दार्शनिक विचार समाहित हैं।

प्रश्न 23.

इदं लेखनं 1875 ईसवी वर्षे अभवत्‌?

(अ) आर्यसमाजस्य

(ब) ब्रह्मसमाजस्य

(स) समग्रविकाससंस्थानस्य

(द) पाठलिपुत्रसंस्कृतसंस्थानस्य

उत्तर: (अ) आर्यसमाजस्य

व्याख्या: सन् 1875 ईसवी में आर्यसमाजस्य स्थापना का लेखन (या स्थापना) हुआ था। इस वर्ष स्वामी दयानन्द ने मुम्बई में आर्यसमाज की नींव रखी।

प्रश्न 24.

स्वामी दयानन्द: ... आसीत्‌। रिक्त स्थानानि पूरयत।

(अ) समाजोद्धारक: (ब) कृषक:

(स) द्वारपालकः (द) लेखक:

उत्तर: (अ) समाजोद्धारक:

व्याख्या: स्वामी दयानन्द एक महान समाजोद्धारक: (समाज सुधारक) थे। उन्होंने छुआछूत, बाल विवाह, मूर्तिपूजा जैसी सामाजिक बुराइयों का विरोध किया और नारी शिक्षा तथा वैदिक जीवन पद्धति का प्रचार किया।

प्रश्न 25.

तस्य नाम “..... इति कुतम्‌। रिक्त स्थानानि पूरयत।

(अ) मूलविष्णु: ।

(ब) विष्णु:

(स) मूलशंकरः

(द) ब्रह्मा

उत्तर ; (स) मूलशंकरः

व्याख्या: स्वामी दयानन्द का बचपन का नाम मूलशंकरः था। यह नाम उनके माता-पिता ने रखा था। बाद में सन्यास लेने पर उन्हें 'दयानन्द सरस्वती' नाम मिला।

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