Bihar Board Class 10th Sanskrit (संस्कृत पीयूषम् भाग 2) Chapter 1 मङ्गलम्) Solutions
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| Board Name | Bihar Board of Secondary Education |
| Class | Class 10th |
| Content Type | Solution |
| Solution for | Class 10th students |
| Subject | Sanskrit (संस्कृत पीयूषम् भाग 2) |
| Chapter Name | Chapter 1 मङ्गलम्) |
| Total Number of Chapter in this Subject | 13 |
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Bihar Board Class 10th Sanskrit (संस्कृत पीयूषम् भाग 2) Chapter 1 मङ्गलम्) Solutions
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बिहार बोर्ड कक्षा 10 संस्कृत (पीयूषम् भाग 2)
अध्याय 1 - मङ्गलम्
वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1.
उपनिषदस्य रचनाकार: क: अस्ति १ (») महात्मा विदुरः
(8) महर्षि: वेदव्यासः
(८) भर्तृहरिः
(0) चाणक्य:
उत्तर: (8) महर्षि: वेदव्यासः
व्याख्या: उपनिषदों की रचना का श्रेय प्राचीन ऋषियों को जाता है, जिनमें महर्षि वेदव्यास प्रमुख माने जाते हैं। उन्होंने ही वैदिक ज्ञान को व्यवस्थित किया था।
प्रश्न 2.
उपनिषदः काजू प्रकट्यन्ति ? (A) बौद्धसिद्धान्तान्
(8) जैनसिद्धान्तान्
(८) दर्शनशास्त्र सिद्धान्तान् (0) सांख्य सिद्धांतः
उत्तर: (८) दर्शनशास्त्र सिद्धान्तान्
व्याख्या: उपनिषद वेदों के अंतिम भाग हैं जिनमें आध्यात्मिक दर्शन, ब्रह्म, आत्मा और मोक्ष के गूढ़ सिद्धांतों की व्याख्या की गई है।
प्रश्न 3.
'मड्लम् पाठस्य रचनाकार: कः अस्ति १ (A) चाणक्य:
(8) भवभूति
(८) महर्षि वेदव्यास:
(0) महर्षि वाल्मीकि:
उत्तर: (८) महर्षि वेदव्यास:
व्याख्या: पाठ्यपुस्तक में संकलित 'मङ्गलम्' पाठ उपनिषदों से लिया गया है, जिनके संकलनकर्ता महर्षि वेदव्यास माने जाते हैं।
प्रश्न 4.
उपनिषदः कस्य अंतिम भागे अस्ति १ (A) रामायणस्य
(8) लौकिक साहित्यस्य ।
(८) वैदिक age ।
(0) आधुनिक साहित्यस्य
उत्तर: (८) वैदिक age |
व्याख्या: उपनिषद वैदिक साहित्य का अंतिम भाग हैं, इसलिए इन्हें 'वेदान्त' भी कहा जाता है। ये वैदिक काल की रचनाएँ हैं।
प्रश्न 5.
उपनिषदे कस्य महिमा प्रधानतया गीयते ? (A) स्वविषयस्य
(8) परपुरुषस्य
(८) देवपुरुषस्य
(0) परमपुरुषस्य
उत्तर: (0) परमपुरुषस्य
व्याख्या: उपनिषदों में सर्वोच्च सत्ता, यानी परमात्मा या ब्रह्म की महिमा और उसकी प्राप्ति के मार्ग का मुख्य रूप से वर्णन किया गया है।
प्रश्न 6.
'मड्नलम् पाठे कति मन्त्रा: संकलिताः सन्ति ? (४) दश
(8) अष्ट
(८) पञ्च
(0) त्रयोदश
उत्तर : (८) पञ्च
व्याख्या: 'मङ्गलम्' पाठ में पाँच विभिन्न उपनिषदों से लिए गए पाँच मंत्र संकलित हैं, जो मंगलकारी विचार प्रस्तुत करते हैं।
प्रश्न 7.
ब्रह्मण: मुखं केन आच्छादितमस्ति ? (») पात्रेण
(8) सरोवरे
(८) समुद्र
(0) तडागे
उत्तर: (») पात्रेण
व्याख्या: इस प्रश्न में कुछ भ्रम है। सही प्रश्न होना चाहिए: 'सत्यस्य मुखं केन आच्छादितमस्ति?' और उसका उत्तर है 'हिरण्मयेन पात्रेण' (स्वर्णिम पात्र से)।
प्रश्न 8.
महतो महीयात् कः ? (A) aay
(8) ब्रह्म:
(८) देवः
(0) राक्षसम्
उत्तर: (/) तत्त्वम्
व्याख्या: प्रश्न विकल्पों में त्रुटि है। सही प्रश्न ऋषि उपनिषद से है: "अणोरणीयान् महतो महीयान्" (अणु से भी सूक्ष्म और महान से भी महान)। इसका उत्तर 'आत्मा' है।
प्रश्न 9,
HUT: SONATE कः १ (A) aay
(8) राक्षसम्
(८) देवः
(0) ब्ह्मः
उत्तर: (/) तत्त्वम्
व्याख्या: प्रश्न अस्पष्ट है। संभवतः यह पूछा जा रहा है कि 'अणोरणीयान्' (अणु से भी सूक्ष्म) कौन है? जिसका सही उत्तर 'आत्मा' होगा।
प्रश्न 10.
किं जयं न प्राप्रोति ? (A) aay
(8) असत्यम्
(८) क्रोधम्
(0) मोहः
उत्तर: (8) असत्यम्
व्याख्या: मुण्डकोपनिषद के श्लोक "सत्यमेव जयते" के अनुसार केवल सत्य की ही विजय होती है। असत्य को कभी स्थायी जय नहीं मिलती।
प्रश्न 11.
कः महतो महीयान् अस्ति ? (/) ब्रह्म:
(8) आत्मा
(८) परमात्मा
(0) संसार:
उत्तर: (/) ब्रह्म:
व्याख्या: इस प्रश्न के संदर्भ में, ब्रह्म (परमात्मा) ही सबसे महान है। वही महान से भी महान (महतो महीयान) है।
प्रश्न 12.
कि जयते १ (A) aay (8) असत्यम् (९) क्रोधम् (0) मोहः
उत्तर: (A) aay
व्याख्या: प्रसिद्ध उपनिषदीय वाक्य "सत्यमेव जयते" का अर्थ है - केवल सत्य की ही विजय होती है। यह भारत का राष्ट्रीय आदर्श वाक्य भी है।
प्रश्न 13.
HUT: SONATE कः १ (A) PT:
(8) आत्मा
(८) परमात्मा (0) संसार:
उत्तर: (8) आत्मा
व्याख्या: प्रश्न अस्पष्ट लिखा है। लेकिन "अणोरणीयान्" (अणु से भी सूक्ष्म) कथन का उल्लेख करते हुए, वह आत्मा ही है जो अत्यंत सूक्ष्म है।
प्रश्न 14,
किं जयं प्राप्रोति ? (A) aay
(8) असत्यम् (८) क्रोधम्
(0) मोहः।
उत्तर: (A) aay
व्याख्या: सत्य ही एकमात्र ऐसा तत्व है जो स्थायी विजय प्राप्त करता है। असत्य, क्रोध और मोह अंततः पराजित होते हैं।
प्रश्न 15.
स्यन्दमाना: नद्यः कुत्र मिलन्ति ? (/) नध्याम्
(8) सरोवरे
(८) समुद्र
(0) तडागे
उत्तर: (८) समुद्र
व्याख्या: बहती हुई नदियाँ अंततः समुद्र में ही जाकर मिलती हैं और उसी में लीन हो जाती हैं। यह एक प्राकृतिक नियम है।
प्रश्न16.
जन्तो: गुहायां कः निहितः ? . (A) wea
(8) शरीरम्
(C) ea:
(0) राक्षसम्
उत्तर: (A) area
व्याख्या: प्राणी के हृदय रूपी गुफा में आत्मा निहित रहता है। कठोपनिषद में इसी गूढ़ रहस्य का वर्णन किया गया है।
प्रश्न 17.
.--------सेत्यस्यापिहितं मुखम् । रिक्त स्थानानि पूरयत । (») हिरण्मयेन पात्रेण
(8) पात्रेण
(८) हरण्य
(0) हिरण्यमेण
उत्तर: (») हिरण्मयेन पात्रेण
व्याख्या: पूरा वाक्य है - "हिरण्मयेन पात्रेण सत्यस्यापिहितं मुखम्"। अर्थात, सत्य का मुख एक स्वर्णिम पात्र (चमकदार आवरण) से ढका हुआ है।
प्रश्न 18.
vee UG | Re स्थानानि पूरयत । (४) असत्यमेव
(8) असत्यमेव जयते
(८) सत्यमेव जयते
(0) जयते
उत्तर: (८) सत्यमेव जयते
व्याख्या: यह भारत का राष्ट्रीय आदर्श वाक्य है जो मुण्डकोपनिषद से लिया गया है। इसका अर्थ है "सत्य की ही विजय होती है।"
प्रश्न 19.
यथा......... स्यन्दमानाः समुद्रे । रिक्त स्थानानि पूरयत । (A) विहाय
(8) समुद्र
(८) aa:
(0) नद्य
उत्तर: (८) aa:
व्याख्या: पूरा वाक्यांश है "यथा नद्यः स्यन्दमानाः समुद्रे"। जिस प्रकार बहती हुई नदियाँ समुद्र में जा मिलती हैं, उसी प्रकार... (यहाँ एक उपमा दी गई है)।
प्रश्न 20.
तमेव...........मृत्युमेति । रिक्त स्थानानि पूरयत | (/) विदित्वा
(8) आत्मा
(९) मृत्यु
(0) विदित
उत्तर: (/) विदित्वा
व्याख्या: पूरा वाक्य है "तमेव विदित्वा मृत्युमेति"। इसका अर्थ है - उस (परमात्मा) को जानकर ही मनुष्य मृत्यु को पार कर जाता है, यानी मोक्ष प्राप्त करता है।
हिन्दी में वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1.
'मड्लम्' कहाँ से संकलित है? (A) aga
(8) पुराण से
(८) उपनिषद् से
(0) वेदाड़ से
उत्तर: (८) उपनिषद् से
व्याख्या: पाठ्यपुस्तक में दिया गया 'मङ्गलम्' पाठ विभिन्न उपनिषदों से लिए गए मंत्रों का संकलन है।
प्रश्न 2.
'मड्नलम्' पाठ में कितने मंत्र हैं? (A) चत्वारः
(8) पज्च (८) सप्त (0) अष्ट
उत्तर: (8) पज्च
व्याख्या: इस पाठ में पाँच अलग-अलग उपनिषदों के पाँच मंत्र शामिल किए गए हैं, जिनसे जीवन के मंगलमय पथ का बोध होता है।
प्रश्न 3.
उपनिषद के रचनाकार कौन हैं? (») महात्मा विदुर
(8) महर्षि वाल्मीकि
(८) महर्षि वेदव्यास
(0) कालिदास
उत्तर: (८) महर्षि वेदव्यास
व्याख्या: परंपरा के अनुसार, महर्षि वेदव्यास को समस्त वैदिक साहित्य (वेद, उपनिषद, पुराण) का व्यवस्थाकार माना जाता है।
प्रश्न 4.
मंगलम पाठ के रचनाकार कौन हैं? (») महात्मा विदुर
(8) महर्षि वाल्मीकि
(८) महर्षि वेद॒व्यास
(0) कालिदास
उत्तर: (८) महर्षि वेदव्यास
व्याख्या: चूंकि यह पाठ उपनिषदों से लिया गया है, इसलिए इसके मूल रचनाकार के रूप में उपनिषदों के संकलनकर्ता महर्षि वेदव्यास का नाम लिया जाता है।
प्रश्न 5.
अणु से छोटा कौन है? (») आकाश
(8) आत्मा
(८) परमात्मा
(0) संसार
उत्तर: (8) आत्मा
व्याख्या: कठोपनिषद में आत्मा को "अणोरणीयान्" कहा गया है, यानी वह अणु से भी अधिक सूक्षम है। उसे इंद्रियों से नहीं देखा जा सकता।
प्रश्न 6.
किसकी जय होती है? (A) aa
(8) असत्य
(८) क्रोध
(0) मोह
उत्तर: (A) aa
व्याख्या: मुण्डकोपनिषद का यह सिद्धांत हमें सिखाता है कि अंततः सत्य ही सफल होता है और टिकता है। असत्य की विजय क्षणिक होती है।
प्रश्न 7.
बहती नदी कहाँ मिलती है? (») सरोवर
(8) नदी
(८) समद्र
(0) तालाब
उत्तर: (८) समद्र
व्याख्या: सभी नदियों का अंतिम गंतव्य समुद्र ही होता है। उपनिषद में इस उदाहरण का प्रयोग आत्मा के परमात्मा में लीन होने को समझाने के लिए किया गया है।
प्रश्न 8.
जंतु के हृदय रूपी गुफा में क्या स्थित है? (A) a
(8) शरीर
(८) देवता
(0) राक्षस
उत्तर: (A) a
व्याख्या: प्रत्येक प्राणी के हृदय (गुफा) में आत्मा का निवास होता है। यही जीवन का मूल स्रोत और चेतना का केंद्र है।
प्रश्न 9.
ब्रह्मा को प्राप्त करने के विषय में बताया गया है (A) कठोपनिषद
(8) ईशावास्योपनिषद्
(८) श्रेताश्वतर
(0) मुण्डकोपनिषद्
उत्तर: (0) मुण्डकोपनिषद्
व्याख्या: मुण्डकोपनिषद में ब्रह्म (परमात्मा) के स्वरूप, उसकी प्राप्ति के साधन और ज्ञान-अज्ञान के भेद को विस्तार से समझाया गया है।
प्रश्न 10.
देव लोक का मार्ग किससे प्राप्त होता है? (A) aa
(8) असत्य
(८) क्रोध
(0) मोह
उत्तर: (A) aa
व्याख्या: सत्य के आचरण से ही देवलोक (उच्चतर अवस्था या स्वर्ग) का मार्ग प्रशस्त होता है। असत्य मनुष्य को पतन की ओर ले जाता है।
प्रश्न 11.
सत्य से क्या प्राप्त होता है?
(») पृथ्वी लोक (8) नरकलोक (८) देवलोक (0) कोई नहीं
उत्तर: (८) देवलोक
व्याख्या: सत्य का पालन करने वाला व्यक्ति पुण्य अर्जित करता है, जो उसे देवलोक (उन्नत और शुभ गति) की प्राप्ति कराता है।
प्रश्न 12.
मृत्यु को वश में कौन कर लेते हैं? (A)
(8) अज्ञानी
(८) विद्वान
(0) कोई नहीं
उत्तर: (८) विद्वान
व्याख्या: जो विद्वान व्यक्ति आत्मतत्त्व को जान लेता है, वह मृत्यु के भय से मुक्त हो जाता है। उसके लिए मृत्यु शरीर का अंत मात्र है, आत्मा का नहीं।
प्रश्न 13.
उपनिषद् एक कैसा ग्रंथ है? (») आध्यात्मिक
(8) आदर्शरूपी
(८) आत्मकथा
(0) साधारण
उत्तर: (») आध्यात्मिक
व्याख्या: उपनिषद मुख्य रूप से आध्यात्मिक ज्ञान का भंडार हैं। इनमें ब्रह्म, आत्मा, मोक्ष और जीवन के परम लक्ष्य का दार्शनिक विवेचन किया गया है।
प्रश्न 14.
उपनिषद् में किस महिमा का वर्णन किया गया है? (A) स्वविषय
(8) परपुरुष
(८) देवपुरुष
(0) परमपुरुष
उत्तर: (0) परमपुरुष
व्याख्या: उपनिषदों का केंद्रीय विषय परमपुरुष अर्थात ब्रह्म की महिमा का गान करना है। उसी की प्राप्ति को परम लक्ष्य बताया गया है।
प्रश्न 15.
उपनिषदों की संख्या कितनी है? । (A) 109
(B) 108
(C) 105
(D) 111
उत्तर: (8) 108
व्याख्या: परंपरागत रूप से उपनिषदों की संख्या 108 मानी जाती है, हालाँकि मुख्य उपनिषद 10-12 ही हैं। 108 का आंकड़ा पवित्र माना जाता है।
प्रश्न16.
आत्मा के गूढ़ रहस्य की किसमें व्याख्या की गई है? . (A) कठोपनिषद
(8) ईशावास्योपनिषद्
(८) श्रेताश्वतर
(0) मुण्डकोपनिषद्
उत्तर: (A) कठोपनिषद
व्याख्या: कठोपनिषद में नचिकेता और यम के संवाद के माध्यम से आत्मा के स्वरूप, उसकी अमरता और गूढ़ता का सुंदर विवेचन किया गया है।
प्रश्न 17.
परमात्मा की महिमा का वर्णन किसमें किया गया है? (A) कठोपनिषद
(8) ईशावास्योपनिषद्
(८) श्रेताश्वतर
(0) मुण्डकोपनिषद्
उत्तर: (8) ईशावास्यौपनिषद्
व्याख्या: ईशावास्योपनिषद (या ईशोपनिषद) बहुत छोटा है लेकिन इसमें संपूर्ण ब्रह्मांड में व्याप्त परमात्मा की महिमा का सारगर्भित वर्णन मिलता है।
प्रश्न 18.
ज्ञानी लोक और अज्ञानी लोग में अंतर किसमें बताया गया है? (A) कठोपनिषद
(8) ईशावास्योपनिषद्
(८) श्रेताश्वतर
(0) मुण्डकोपनिषद्
उत्तर: (८) श्रेताश्वतर
व्याख्या: श्वेताश्वतरोपनिषद में ज्ञानी (विद्वान) और अज्ञानी के गति के भेद, उनके लक्ष्य और परिणामों के अंतर को स्पष्ट किया गया है।
प्रश्न 19.
सत्य का मुँह किस पात्र से ढंका हुआ है? । (») हिरण्मय पात्र से
(8) मृण्मय पात्र से
(८) रजतमय पात्र से
(0) ताम्रपात्र से
उत्तर: (») हिरण्मय पात्र से
व्याख्या: इसका आशय यह है कि सत्य सदैव प्रकट रूप में नहीं होता। वह एक चमकदार आवरण (मोह, लोभ, अज्ञान) से ढका रहता है, जिसे हटाने पर ही उसका दर्शन होता है।
प्रश्न 20.
सत्य का खजाना कहाँ है? ।
(») पृथ्वी लोक (8) नरकलोक (८) देवलोक (0) कोई नहीं
उत्तर: (८) देवलोक
व्याख्या: सत्य का वास्तविक भंडार (खजाना) देवलोक में है, अर्थात जहाँ दिव्य गुण और पवित्रता होती है, वहीं सत्य का पूर्ण प्रकाश होता है।
संस्कृत में वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1.
जन््तो: गुहायां कः निहितः? (A) ay
(8) शरीरम्
(८) देवः
(0) दानवम्
उत्तर: (१) तत्वम्
व्याख्या: प्राणी के हृदय रूपी गुफा में आत्मतत्त्व निहित रहता है। 'तत्त्वम्' शब्द यहाँ आत्मा के लिए प्रयुक्त हुआ है।
प्रश्न 2,
अणोः अणीयान् कः? (A) aa:
(8) आत्मा
(८) संसार:
(0) गगनः
उत्तर: (8) आत्मा
व्याख्या: "अणोरणीयान्" - अणु से भी सूक्ष्म। यह आत्मा का विशेषण है, क्योंकि आत्मा इतनी सूक्ष्म है कि उसे भौतिक इंद्रियों से नहीं जाना जा सकता।
प्रश्न 3.
हिरण्मयेन पात्रेण किम् अपिहितम्? (१) सत्यम्
(8) असत्यम्
(८) सत्यस्यमुखम्
(0) असत्यस्य मुखम्
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