Bihar Board Class 10th Hindi (Godhuli Bhag 2 गद्य खण्ड) Chapter 5 नागरी लिपि (निबंध)) Solutions

Here we have provided Solution for Chapter 5 नागरी लिपि (निबंध)) of Hindi (Godhuli Bhag 2 गद्य खण्ड) subject for Class 10th students of Bihar Board of Secondary Education. There are various chapters in this Hindi (Godhuli Bhag 2 गद्य खण्ड) such as Chapter 2 विष के दाँत (कहानी)), Chapter 3 भारत से हम क्या सीखें (भाषण)), Chapter 4 नाखून क्यों बढ़ते हैं (ललित निबंध)), Chapter 5 नागरी लिपि (निबंध)), Chapter 6 बहादुर (कहानी)), Chapter 7 परंपरा का मूल्यांकन (निबंध)), Chapter 8 जित(जित मैं निरखत हूँ (साक्षात्कार)), Chapter 9 आविन्यों (ललित रचना)), Chapter 10 मछली (कहानी)), Chapter 11 नौबतखाने में इबादत (व्यक्तिचित्र)) and Chapter 12 शिक्षा और संस्कृति (शिक्षाशास्त्र)). Summary of the same is given below:

Board NameBihar Board of Secondary Education
ClassClass 10th
Content TypeSolution
Solution forClass 10th students
SubjectHindi (Godhuli Bhag 2 गद्य खण्ड)
Chapter NameChapter 5 नागरी लिपि (निबंध))
Total Number of Chapter in this Subject11

Studying Bihar Board Class 10th Hindi (Godhuli Bhag 2 गद्य खण्ड) Chapter 5 नागरी लिपि (निबंध)) solution will help you higher marks in this subject but you need to follow best practices to achieve higher marks, which are given after solutions, go through them once.

Bihar Board Class 10th Hindi (Godhuli Bhag 2 गद्य खण्ड) Chapter 5 नागरी लिपि (निबंध)) Solutions

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बिहार बोर्ड कक्षा 10 हिंदी (गोधूलि भाग 2)
पाठ 5 - नागरी लिपि (निबंध)

1. नागरी लिपि का प्रचार-प्रसार किन-किन माध्यमों से हुआ?

उत्तर: नागरी लिपि के प्रचार-प्रसार में विभिन्न माध्यमों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सबसे पहले, धार्मिक एवं साहित्यिक ग्रंथों के प्रसार ने इसे जन-जन तक पहुँचाया। दूसरा, मुद्रण कला (प्रिंटिंग प्रेस) के आगमन ने पुस्तकों, समाचार पत्रों और पत्रिकाओं के माध्यम से इस लिपि को देश के कोने-कोने में फैलाया। तीसरा, ब्रिटिश शासन काल में शिक्षा नीति और सरकारी कार्यालयों में इसके प्रयोग ने इसे आधिकारिक मान्यता दिलाई। अंत में, स्वतंत्रता के बाद शिक्षा के व्यापक प्रसार, रेडियो, टेलीविजन और अब डिजिटल मीडिया ने नागरी लिपि को राष्ट्रीय एकता का प्रमुख सूत्र बना दिया है।

2. नागरी लिपि की विशेषताएँ लिखिए।

उत्तर: नागरी लिपि की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

  1. वैज्ञानिकता: यह लिपि पूर्णतः ध्वनि-आधारित (फोनेटिक) है, जिसमें जैसा बोला जाता है, वैसा ही लिखा जाता है। इससे इसे सीखना और पढ़ना आसान हो जाता है।
  2. स्पष्टता एवं सुडौलता: इसके अक्षर स्पष्ट, सुन्दर और सुडौल होते हैं। प्रत्येक अक्षर की एक निश्चित रूपरेखा होती है, जिससे भ्रम की स्थिति नहीं बनती।
  3. सरलता: इसमें अधिकांश अक्षरों का ऊपरी भाग एक सीधी रेखा से जुड़ा होता है, जिससे शब्दों को लिखते समय एक क्रमबद्ध रेखा बनती रहती है और लेखन में सुविधा होती है।
  4. व्यापकता: यह लिपि केवल हिंदी तक सीमित नहीं है, बल्कि संस्कृत, मराठी, नेपाली, सिन्धी आदि कई भाषाओं को लिखने के लिए प्रयोग में लाई जाती है।
  5. राष्ट्रीय एकता का प्रतीक: विविधताओं से भरे भारत में नागरी लिपि एक साझा संपर्क सूत्र का कार्य करती है, जो राष्ट्रीय एकता को मजबूत करती है।

3. नागरी लिपि के विकास में किन-किन का योगदान रहा?

उत्तर: नागरी लिपि के विकास में अनेक व्यक्तियों, संस्थाओं और ऐतिहासिक घटनाओं का योगदान रहा है:

  • प्राचीन विद्वान एवं लिपिक: प्राचीन काल में गुप्त लिपि और कुटिल लिपि से इसका विकास हुआ, जिसमें अनाम लिपिकों और विद्वानों का योगदान रहा।
  • धर्माचार्य एवं संत: संत कबीर, तुलसीदास, सूरदास आदि ने जनभाषा में रचना करके इस लिपि को लोकप्रिय बनाया।
  • मुद्रणालय एवं प्रकाशक: सन् 1800 के बाद कोलकाता, वाराणसी, लखनऊ आदि स्थानों पर स्थापित मुद्रणालयों ने पुस्तकों के प्रकाशन द्वारा इस लिपि को स्थायित्व प्रदान किया।
  • ब्रिटिश प्रशासन एवं विद्वान: फोर्ट विलियम कॉलेज और अन्य शैक्षणिक संस्थानों ने इसे मानक रूप देने में भूमिका निभाई। सर जॉर्ज ग्रियर्सन जैसे विद्वानों ने भारतीय भाषाओं के अध्ययन में इसके महत्व को रेखांकित किया।
  • स्वतंत्रता सेनानी एवं राष्ट्रवादी नेता: स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान महात्मा गांधी, राजेंद्र प्रसाद आदि ने हिंदी और नागरी लिपि को राष्ट्रभाषा और राष्ट्रलिपि के रूप में प्रतिष्ठित करने का प्रयास किया।
  • शिक्षाविद एवं आधुनिक तकनीक: स्वतंत्रता के बाद शिक्षा के प्रसार और अब कंप्यूटर, इंटरनेट, यूनिकोड जैसी तकनीकों ने नागरी लिपि को वैश्विक पहचान दिलाई है।

4. नागरी लिपि को राष्ट्रलिपि क्यों कहा जाता है?

उत्तर: नागरी लिपि को राष्ट्रलिपि कहने के पीछे कई ठोस कारण हैं:

सर्वाधिक प्रयोग: यह भारत में सबसे अधिक बोली और समझी जाने वाली भाषा, हिंदी, की लिपि है। देश की अधिकांश जनसंख्या इसी के माध्यम से शिक्षा ग्रहण करती है और दैनिक जीवन में इसका उपयोग करती है।

बहुभाषिक स्वभाव: यह लिपि केवल हिंदी तक सीमित नहीं है। संस्कृत, मराठी, नेपाली, सिन्धी, कोंकणी, डोगरी, मैथिली, भोजपुरी आदि कई भारतीय भाषाएँ नागरी लिपि में ही लिखी जाती हैं। इस प्रकार यह विविध भाषाई समूहों को जोड़ने वाली एक साझा लिपि है।

ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत: इस लिपि की जड़ें प्राचीन ब्राह्मी लिपि से जुड़ी हैं, जो भारत की सांस्कृतिक और बौद्धिक परंपरा की धरोहर है। देश के अधिकांश प्राचीन और मध्यकालीन ज्ञान-विज्ञान के ग्रंथ इसी या इससे मिलती-जुलती लिपि में उपलब्ध हैं।

राष्ट्रीय एकता का सूत्र: भारत जैसे विविधता भरे देश में, जहाँ सैकड़ों बोलियाँ और दर्जनों लिपियाँ प्रचलित हैं, नागरी लिपि एक ऐसा सशक्त माध्यम बन गई है जो पूरे राष्ट्र को एक सूत्र में पिरोती है। यह सांस्कृतिक एकता और राष्ट्रीय पहचान को मजबूत करने का कार्य करती है।

5. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दें-
(क) नागरी लिपि की उत्पत्ति किस लिपि से हुई है?
(ख) नागरी लिपि का प्रचार किस प्रकार हुआ?
(ग) नागरी लिपि को और अधिक सुडौल एवं सरल बनाने के लिए क्या प्रयास किए गए?

उत्तर (क): नागरी लिपि की उत्पत्ति प्राचीन ब्राह्मी लिपि से हुई मानी जाती है। ब्राह्मी लिपि से ही समय के साथ-साथ शारदा, गुप्त लिपि, कुटिल लिपि आदि का विकास हुआ। इन्हीं कुटिल लिपि से आगे चलकर लगभग 11वीं शताब्दी के आसपास नागरी लिपि का स्वरूप स्पष्ट रूप से उभर कर सामने आया।

उत्तर (ख): नागरी लिपि का प्रचार एक लंबी ऐतिहासिक प्रक्रिया के तहत हुआ। प्रारंभ में इसका प्रसार धार्मिक ग्रंथों, शिलालेखों और ताम्रपत्रों के माध्यम से हुआ। मध्यकाल में संत-कवियों ने जनसामान्य की भाषा में रचनाएँ करके इसे लोकप्रिय बनाया। आधुनिक काल में मुद्रण कला के आगमन ने पुस्तकों, समाचार पत्रों के जरिए, ब्रिटिश शासन ने शिक्षा और प्रशासन के माध्यम से, और स्वतंत्रता के बाद शिक्षा के सार्वभौमीकरण, रेडियो-टीवी और अंततः डिजिटल मीडिया ने इस लिपि को देश-विदेश तक पहुँचा दिया।

उत्तर (ग): नागरी लिपि को और अधिक सुडौल एवं सरल बनाने के लिए निम्नलिखित प्रयास किए गए:

  • मानकीकरण: विद्वानों और शिक्षाविदों ने अक्षरों के आकार, मात्राओं के स्थान और लेखन शैली को एक मानक रूप दिया ताकि सीखने और पढ़ने में सुविधा हो।
  • टाइपफेस डिजाइन: मुद्रण के युग में, कोणिया, देवनागरी, आदि जैसे स्पष्ट और सुडौल टाइपफेस (फॉन्ट) डिजाइन किए गए जिनसे छपाई में सुधार हुआ।
  • तकनीकी अनुकूलन: कंप्यूटर के युग में, नागरी लिपि को की-बोर्ड पर टाइप करने योग्य बनाने के लिए इनस्क्रिप्ट, फोनेटिक जैसी लेआउट प्रणालियाँ विकसित की गईं। यूनिकोड मानक ने इसे इंटरनेट पर सर्वव्यापी बना दिया।
  • शैक्षिक सुधार: स्कूली पाठ्यपुस्तकों में अक्षरों को धीरे-धीरे और सरल ढंग से पेश किया गया, जिससे बच्चों को इसे सीखने में आसानी हो।

6. सही विकल्प चुनें-
(i) नागरी लिपि का विकास किस लिपि से हुआ?
(अ) खरोष्ठी
(ब) ब्राह्मी
(स) अरबी
(द) फारसी

(ii) नागरी लिपि किस प्रकार की लिपि है?
(अ) चित्रात्मक
(ब) भावात्मक
(स) ध्वन्यात्मक
(द) इनमें से कोई नहीं

(iii) नागरी लिपि का प्रचार-प्रसार किस युग में अधिक हुआ?
(अ) प्राचीन युग में
(ब) मध्य युग में
(स) अर्वाचीन युग में
(द) आधुनिक युग में

(iv) नागरी लिपि को राष्ट्रलिपि किस आधार पर कहा जाता है?
(अ) सर्वाधिक प्रयोग
(ब) सुडौलता
(स) वैज्ञानिकता
(द) उपर्युक्त सभी

उत्तर:
(i) (ब) ब्राह्मी
(ii) (स) ध्वन्यात्मक
(iii) (द) आधुनिक युग में
(iv) (द) उपर्युक्त सभी

नागरी लिपि (निबंध) - प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.

निम्नलिखित शब्दों की संधि-विच्छेद करें -

उत्तर:

शब्द संधि-विच्छेद संधि का नाम
स्वागत सु + आगत यण स्वर संधि
पवित्र पौ + इत्र वृद्धि स्वर संधि
महर्षि महा + ऋषि दीर्घ स्वर संधि
सूर्योदय सूर्य + उदय गुण स्वर संधि
नमस्ते नमः + ते विसर्ग संधि (सत्व)

प्रश्न 2.

निम्नलिखित शब्दों का समास-विग्रह कर समास का नाम लिखें -

उत्तर:

शब्द समास-विग्रह समास का नाम
राजकुमार राजा का कुमार तत्पुरुष (षष्ठी तत्पुरुष)
पीताम्बर पीला है जो अम्बर (वस्त्र) बहुव्रीहि समास
तुलसीदास तुलसी को दास (भक्त) तत्पुरुष (चतुर्थी तत्पुरुष)
शिरोरेखा शिर (सिर) पर रेखा तत्पुरुष (सप्तमी तत्पुरुष)
हस्तलिपि हस्त (हाथ) की लिपि तत्पुरुष (षष्ठी तत्पुरुष)
दोहाकोश दोहा का कोश (संग्रह) तत्पुरुष (षष्ठी तत्पुरुष)
पहले-पहल पहला पहला अव्ययीभाव समास

प्रश्न 3.

निम्नलिखित शब्दों के पर्यायवाची लिखें -

उत्तर:

  • अद्: समुद्र, सागर, जलधि, रत्नाकर।
  • वचन: कथन, उक्ति, बोल, आश्वासन, प्रतिज्ञा।
  • सार्वदेशिक: राष्ट्रीय, देशव्यापी, समस्त देश का, अखिल भारतीय।
  • अनुकरण: नकल, अनुगमन, अनुसरण, अनुपालन, देखा-देखी।
  • व्यवहार: आचरण, बर्ताव, संबंध, लेन-देन, चाल-चलन।
  • शासक: राजा, सम्राट, बादशाह, अधिपति, शासनकर्ता।

प्रश्न 4.

निम्नलिखित भिन्नार्थक शब्दों के अर्थ स्पष्ट करें।

उत्तर:

शब्द-युग्म अर्थ
प्रयत्न / प्रयास प्रयत्न: किसी लक्ष्य को पाने के लिए किया गया गंभीर और नियोजित उद्यम।
प्रयास: कोशिश, किसी कार्य को करने का प्रारंभिक या सामान्य प्रयत्न।
लिपि / लिप्ति लिपि: लिखने की पद्धति, वर्णमाला, जैसे देवनागरी लिपि।
लिप्ति: लिपटना, संलग्न होना, किसी चीज में फँसा होना या डूबा होना।
नागरी / नागरिक नागरी: एक प्राचीन और व्यापक भारतीय लिपि का नाम, जिससे देवनागरी का विकास हुआ।
नागरिक: किसी नगर या देश का निवासी, राज्य का सदस्य जिसके अधिकार और कर्तव्य हों।
पट / पट्ट पट: पर्दा, परदा, वस्त्र का एक टुकड़ा, पटल।
पट्ट: तख्ती, फलक, पट्टिका, सनद या अधिकारपत्र।

गद्यांशों पर आधारित अर्थग्रहण-संबंधी प्रश्नोत्तर

गद्यांश 1 के प्रश्न

(क) पाठ तथा लेखक का नाम लिखिए।
उत्तर: पाठ का नाम - 'नागरी लिपि'। लेखक का नाम - गुणाकर मुले

(ख) हिंदी किस लिपि में लिखी जाती है?
उत्तर: हिंदी भाषा देवनागरी लिपि में लिखी जाती है। यह लिपि भारत की सबसे अधिक प्रयोग होने वाली लिपियों में से एक है।

(ग) नेपाल में कौन-सी भाषाएँ देवनागरी में लिखी जाती हैं?
उत्तर: नेपाल में नेपाली (खसकुरा) तथा नेवारी भाषाएँ देवनागरी लिपि में लिखी जाती हैं। नेपाली यहाँ की राजभाषा है।

(घ) मराठी भाषा की लिपि क्या है?
उत्तर: मराठी भाषा की लिपि भी देवनागरी ही है। मराठी में देवनागरी के सभी अक्षरों के साथ एक अतिरिक्त अक्षर 'ळ' का प्रयोग होता है।

(ङ) प्राचीन काल में किन भाषाओं में देवनागरी की ध्वनि थी?
उत्तर: प्राचीन काल में संस्कृत तथा प्राकृत भाषाओं में देवनागरी लिपि की ध्वनियाँ (वर्ण) विद्यमान थीं। प्राचीन अभिलेखों में इसके प्रमाण मिलते हैं।

गद्यांश 2 के प्रश्न

(क) पाठ तथा लेखक का नाम लिखिए।
उत्तर: पाठ का नाम - 'नागरी लिपि'। लेखक का नाम - गुणाकर मुले

(ख) विजयनगर के शासकों ने अपने लेखों की लिपि को क्या कहा है?
उत्तर: विजयनगर साम्राज्य (चौदहवीं-पंद्रहवीं सदी) के शासकों ने अपने शिलालेखों और दस्तावेजों में प्रयुक्त लिपि को 'नंदिनागरी' कहा है।

(ग) विजयनगर के लेख किस लिपि में मिलते हैं?
उत्तर: विजयनगर साम्राज्य के लेख मुख्यतः कन्नड़, तेलुगु और नागरी (नंदिनागरी) लिपियों में मिलते हैं, जो उसकी बहुभाषी संस्कृति को दर्शाता है।

(घ) किसके शासन काल में पहले-पहल वेदों को लिपिबद्ध किया गया?
उत्तर: विद्वानों के अनुसार, विजयनगर के राजाओं के शासनकाल में ही सर्वप्रथम वेदों को मौखिक परंपरा से उठाकर लिपिबद्ध (लिखित रूप में संरक्षित) किया गया था।

(ङ) नागरी लिपि का नंदिनागरी नाम क्यों पड़ा?
उत्तर: एक मत के अनुसार, महाराष्ट्र के प्रसिद्ध नंदिनगर (वर्तमान नांदेड़) नामक स्थान की लिपि होने के कारण इसका नाम 'नंदिनागरी' पड़ा। यह स्थान वाकाटक और राष्ट्रकूट शासकों के समय महत्वपूर्ण था।

गद्यांश 3 के प्रश्न

(क) पाठ तथा लेखक का नाम लिखिए।
उत्तर: पाठ का नाम - 'नागरी लिपि'। लेखक का नाम - गुणाकर मुले

(ख) अनेक विद्वान नागरी लिपि का प्राचीनतम लेख किसे मानते हैं और वह किस काल का है?
उत्तर: अनेक विद्वानों का मानना है कि दक्षिण भारत में नागरी लिपि का सबसे प्राचीन ज्ञात लेख राष्ट्रकूट राजा दंतिदुर्ग का 'सामंगड दानपत्र' है। यह लेख 754 ईस्वी (आठवीं शताब्दी) का है।

(ग) राष्ट्रकूट शासन की नींव किसने डाली थी?
उत्तर: राजा दंतिदुर्ग ने ही राष्ट्रकूट वंश के शासन की नींव रखी और एक शक्तिशाली साम्राज्य की स्थापना की।

(घ) राष्ट्रकूट शासक मूलत: कहाँ के रहनेवाले थे?
उत्तर: राष्ट्रकूट शासक मूल रूप से कर्नाटक प्रदेश के निवासी थे।

(ङ) राष्ट्रकूट शासकों की मातृभाषा क्या थी?
उत्तर: राष्ट्रकूट शासकों की मातृभाषा कन्नड़ थी, हालाँकि वे संस्कृत और अन्य भाषाओं का भी संरक्षण करते थे।

(च) दंतिदुर्ग के बाद राष्ट्रकूटों की गद्दी पर कौन बैठा?
उत्तर: दंतिदुर्ग के बाद राष्ट्रकूटों की गद्दी पर उसका चाचा कृष्ण प्रथम बैठा, जो एक प्रतापी शासक सिद्ध हुआ।

(छ) किसके शासनकाल में एलोरा में कैलाश मन्दिर बनाया गया?
उत्तर: राजा कृष्ण प्रथम के शासनकाल में ही एलोरा (महाराष्ट्र) में पहाड़ काटकर विश्वप्रसिद्ध कैलाशनाथ मंदिर का निर्माण कराया गया था।

(ज) जैन गणितज्ञ महावीराचार्य ने किसके शासन काल में और कौन-से ग्रंथ की रचना की?
उत्तर: प्रसिद्ध जैन गणितज्ञ महावीराचार्य ने राजा अमोघवर्ष प्रथम (एक प्रख्यात राष्ट्रकूट शासक) के शासनकाल में 'गणितसार संग्रह' नामक महत्वपूर्ण गणितीय ग्रंथ की रचना की थी।

गद्यांश 4 के प्रश्न

(क) महमूद गजनवी के बाद किन-किन शासकों ने अपने सिक्कों पर नागरी शब्द खुदवाए थे?
उत्तर: महमूद गजनवी के बाद मुहम्मद गोरी, अलाउद्दीन खिलजी और शेरशाह सूरी जैसे मुस्लिम शासकों ने भी अपने सिक्कों (मुद्राओं) पर नागरी लिपि में शब्द अंकित करवाए थे।

(ख) सम्राट अकबर ने अपने सिक्के पर कौन-सी आकृति अंकित की थी और उस पर नागरी लिपि में कौन-सा शब्द अंकित है?
उत्तर: मुगल सम्राट अकबर ने एक विशेष सिक्का चलाया था, जिस पर भगवान राम और देवी सीता की आकृति बनी हुई थी और नागरी लिपि में 'राम-सीया' शब्द अंकित था। यह उनकी धार्मिक सहिष्णुता को दर्शाता है।

(ग) उत्तर भारत में किन-किन शासकों के लेख नागरी लिपि में हैं?
उत्तर: उत्तर भारत में निम्नलिखित राजवंशों के अभिलेख नागरी लिपि में मिलते हैं:

  • मेवाड़ के गुहिल (सिसोदिया)
  • सांभर-अजमेर के चौहान
  • कन्नौज के गाहड़वाल (राठौर)
  • काठियावाड़-गुजरात के सोलंकी
  • आबू के परमार
  • बुंदेलखंड (जेजाकभुक्ति) के चंदेल
  • त्रिपुरी (जबलपुर क्षेत्र) के कलचुरि

(घ) उत्तर भारत की नागरी लिपि को हम किस लिपि के नाम से जानते हैं?
उत्तर: उत्तर भारत में प्रचलित और विकसित हुई नागरी लिपि को हम आज 'देवनागरी लिपि' के नाम से जानते हैं। यह हिंदी, मराठी, संस्कृत आदि भाषाओं की लिपि है।

नागरी लिपि (निबंध) - प्रश्नोत्तर

नोट: सभी प्रश्नों को उनके मूल रूप में ही रखा गया है। केवल उत्तरों को स्पष्ट और विस्तृत किया गया है।

प्रश्न (क) पाठ और लेखक के नाम लियखें।

पाठ: नागरी लिपि
लेखक: गुणाकर मुले

(ख) ब्राह्मी लिपि और सिद्धम लिपि की शिरसंस्थाएँ कै

गुप्तकाल की ब्राह्मी लिपि और उसके बाद विकसित सिद्धम लिपि के अक्षरों के सिरों (शीर्ष भाग) पर छोटी आड़ी रेखाएँ या ठोस त्रिकोण (Solid Triangles) बने होते थे। यह उन लिपियों की एक प्रमुख शारीरिक विशेषता थी।

(ग) नागरी लिपि की मुख्य पहचान क्या है ?

नागरी लिपि की सबसे प्रमुख पहचान यह है कि इसके सभी अक्षरों के शीर्ष पर एक सीधी, पूरी क्षैतिज रेखा खिंची होती है, जिसे शिरोरेखा कहते हैं। यह रेखा अक्षर की चौड़ाई के बराबर लंबी होती है। हालाँकि कुछ प्राचीन लेखों में अभी भी त्रिकोण जैसे चिह्न दिखाई देते हैं, लेकिन पूर्ण शिरोरेखा ही नागरी लिपि का विशिष्ट लक्षण है।

(घ) प्राचीन नागरी लिपि और आधुनिक नागरी लिपि में क्या साम्य है?

प्राचीन नागरी लिपि और आधुनिक देवनागरी लिपि के अक्षरों का आकार और संरचना लगभग समान है। आधुनिक लिपि प्राचीन लिपि से ही विकसित हुई है, इसलिए दोनों में बहुत अधिक समानता है। थोड़े से अभ्यास से कोई भी व्यक्ति प्राचीन नागरी लेखों को आसानी से पढ़ सकता है।

प्रश्न (क) पाठ और लेख का नामोल्लेख करें।

पाठ: नागरी लिपि
लेखक: गुणाकर मुले

(ख) नागरी शब्द किससे संबंधित है ?

'नागरी' शब्द किसी 'नगर' यानी बड़े शहर से संबंध रखता है। ऐतिहासिक साक्ष्य बताते हैं कि प्राचीन काल में पाटलिपुत्र (आधुनिक पटना) को 'नगर' कहा जाता था। इसी प्रकार उत्तर भारत की वास्तुकला की एक शैली को भी 'नागर शैली' कहते हैं। अतः यह शब्द उत्तर भारत के किसी प्रमुख नगर से जुड़ा हुआ है।

(ग) 'देवनागरी' नाम के संबंध में लेखक का क्या अनुमान है ?

लेखक गुणाकर मुले का अनुमान है कि 'देवनागरी' नाम का संबंध गुप्त सम्राट चंद्रगुप्त द्वितीय (विक्रमादित्य) से हो सकता है, जिनका व्यक्तिगत नाम 'देव' था। उनकी राजधानी पाटलिपुत्र को 'देवनगर' कहा जाता होगा। वहाँ प्रचलित लिपि इसलिए 'देवनागरी' (देवनगर की लिपि) कहलाई। हालाँकि, लेखक स्पष्ट करते हैं कि यह केवल एक संभावित मत है और इसका कोई निर्णायक प्रमाण उपलब्ध नहीं है।

प्रश्न (क) पाठ और लेखक के नाम लियखें।

पाठ: नागरी लिपि
लेखक: गुणाकर मुले

(ख) हिन्दी का आरम्भिक साहित्य कब से मिलता है?

हिंदी भाषा का आरंभिक साहित्यिक स्वरूप लगभग आठवीं-नौवीं शताब्दी से उपलब्ध होने लगता है। यह वह काल था जब आधुनिक भारतीय भाषाएँ अपना साहित्यिक रूप ले रही थीं।

(ग) हिन्दी के आदिकवि कौन थे और उनकी कौन-सी पुस्तक किस लिपि में उपलब्ध है?

हिंदी के आदिकवि (पहले कवि) सरहपाद (आठवीं शताब्दी) माने जाते हैं। उनकी प्रसिद्ध रचना 'दोहाकोश' है। इस पुस्तक की एक हस्तलिपि तिब्बत से प्राप्त हुई है, जो दसवीं-ग्यारहवीं शताब्दी की नागरी लिपि में लिखी गई है।

(घ) आधुनिक भारतीय भाषाओं में किनका जन्म इस काल में हुआ?

आठवीं-नौवीं शताब्दी के आसपास ही आधुनिक भारतीय आर्य भाषाओं का जन्म हुआ। इसी काल में मराठी, बंगला, असमिया, उड़िया आदि भाषाएँ संस्कृत और प्राकृत से अलग होकर स्वतंत्र भाषाओं के रूप में विकसित होने लगीं। इन भाषाओं के प्रारंभिक लेख भी इसी समय से मिलते हैं।

प्रश्न (क) पाठ और लेखक के नाम लिखें।

पाठ: नागरी लिपि
लेखक: गुणाकर मुले

(ख) नागरी लिपि के लेख कबसे मिलने लगते हैं?

नागरी लिपि में लिखे गए स्पष्ट और पुष्ट ऐतिहासिक लेख (जैसे शिलालेख, ताम्रपत्र) ग्यारहवीं शताब्दी से मिलने लगते हैं। हालाँकि, इस लिपि का विकास इससे पहले ही हो चुका था।

(ग) गद्यांश का सारांश प्रस्तुत कीजिए।

इस गद्यांश से पता चलता है कि ग्यारहवीं शताब्दी से नागरी लिपि में मराठी भाषा के लेख मिलने लगे। उदाहरण के लिए, 1012 ईस्वी का शिलाहार शासक केशिदेव प्रथम का एक शिलालेख अक्सा (कुलाबा जिला) से मिला है, जो संस्कृत और मराठी में है और उसकी लिपि नागरी है। एक और महत्वपूर्ण दस्तावेज 1060 ईस्वी का 'दिवे-आगर ताम्रपत्र' है, जो पूरी तरह से मराठी में है और नागरी लिपि में लिखा गया है। इसे अक्सर मराठी भाषा का प्रथम प्रामाणिक लेख माना जाता है।

प्रश्न- (क) पाठ और लेखक के नाम लियखें।

पाठ: नागरी लिपि
लेखक: गुणाकर मुले

(ख) उत्तर भारत में सर्वप्रथम नागरी के लेख किनके शासन-काल में मिलते हैं ?

उत्तर भारत में सबसे पहले गुर्जर-प्रतिहार वंश के राजाओं के शासनकाल के दौरान लिखे गए अभिलेखों (लेखों) में नागरी लिपि देखने को मिलती है। यह वंश आठवीं शताब्दी के पूर्वार्ध में अवंती (मालवा) क्षेत्र में सत्ता में आया और बाद में कन्नौज पर भी अधिकार कर लिया।

(ग) किस गुर्जर-प्रतीहार की प्रशस्ति नागरी लिपि में है

प्रसिद्ध गुर्जर-प्रतिहार शासक मिहिर भोज (840-881 ईस्वी) की 'ग्वालियर प्रशस्ति' (ग्वालियर अभिलेख) नागरी लिपि में उत्कीर्ण है। यह प्रशस्ति संस्कृत भाषा में लिखी गई है और ऐतिहासिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQ)

1. सही विकल्प चुनें -
प्रश्न 1. गुणाकर मूले किस निबंध के रचयिता हैं ?
(क) नाखून क्यों बढ़ते हैं
(ख) नागरी लिपि
(ग) परंपरा का मूल्यांकन
(घ) आविन्यों
उत्तर: (ख) नागरी लिपि
प्रश्न 2. देवनागरी लिपि में मुद्रण के ठाइप कब बने ?
(क) दो सदी पहले
(ख) दो दशक पहले
(ग) बीसवीं सदी में
(घ) 11वीं सदी में
उत्तर: (क) दो सदी पहले
(अर्थात लगभग 19वीं शताब्दी के आरंभ में)
प्रश्न 3. नागरी लिपि कब एक सार्वदेशिक लिपि थी?
(क) पन्द्रहवीं सदी में
(ख) ईसा पूर्व काल में
(ग) 8वीं-11वीं सदी में
(घ) कभी नहीं
उत्तर: (ग) 8वीं-11वीं सदी में
(यह वह काल था जब नागरी लिपि का उत्तर से दक्षिण तक व्यापक प्रचलन था।)
प्रश्न 4. पहले दक्षिण भारत की नागरी लिपि क्या कहलाती थी?
(क) नंदिनागरी
(ख) कोंकणी
(ग) ब्राह्मी
(घ) सिद्धम
उत्तर: (घ) सिद्धम
(दक्षिण भारत में नागरी लिपि के प्रारंभिक रूप को 'सिद्धम' या 'सिद्धमातृका' लिपि कहा जाता था।)

बिहार बोर्ड कक्षा 10 हिंदी (गोधूलि भाग 2)
पाठ 5 - नागरी लिपि (निबंध)

1. नागरी लिपि के विकास में किन-किन का योगदान रहा है ?

नागरी लिपि के विकास में अनेक विद्वानों, भाषाविदों और समाज सुधारकों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। इनमें प्रमुख हैं:

  • भारतेन्दु हरिश्चन्द्र: इन्होंने हिंदी भाषा और नागरी लिपि के प्रचार-प्रसार के लिए अथक प्रयास किए।
  • महात्मा गांधी: उन्होंने राष्ट्रीय एकता के सूत्र के रूप में हिंदी और नागरी लिपि को स्वीकार किया और इसे जन-जन तक पहुँचाने का आह्वान किया।
  • डॉ. राजेन्द्र प्रसाद: भारत के प्रथम राष्ट्रपति के रूप में उन्होंने नागरी लिपि को संवैधानिक मान्यता दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • आचार्य किशोरीदास वाजपेयी: इन्होंने हिंदी और नागरी लिपि के वैज्ञानिक स्वरूप को स्थापित करने में योगदान दिया।
  • विभिन्न प्रेस एवं मुद्रक: छापाखानों के विकास ने नागरी लिपि को मानक रूप देने और उसे व्यापक रूप से फैलाने में सहायता की।

2. नागरी लिपि की विशेषताएँ लिखिए ।

नागरी लिपि विश्व की सर्वाधिक वैज्ञानिक और सुव्यवस्थित लिपियों में से एक है। इसकी प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

  • वैज्ञानिकता: इसमें प्रत्येक ध्वनि के लिए एक निश्चित चिह्न (वर्ण) है, जिससे उच्चारण और लेखन में एकरूपता बनी रहती है।
  • सरलता एवं सुबोधता: इसके अक्षर स्पष्ट, आकर्षक और सीखने में आसान हैं। इनका आकार इतना स्पष्ट है कि भ्रम की स्थिति नहीं बनती।
  • पूर्णता: यह लिपि हिंदी भाषा की सभी ध्वनियों को पूरी तरह से व्यक्त करने में सक्षम है।
  • सौंदर्य: नागरी लिपि के अक्षरों में एक स्वाभाविक कलात्मकता और सौंदर्यबोध है, जो इसे पठनीय और आकर्षक बनाता है।
  • राष्ट्रीय एकता का प्रतीक: यह लिपि विभिन्न भारतीय भाषाओं को जोड़ने वाली कड़ी का काम करती है और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करती है।

3. नागरी लिपि की वर्तमान स्थिति पर प्रकाश डालिए ।

वर्तमान समय में नागरी लिपि की स्थिति अत्यंत सुदृढ़ और व्यापक है। यह न केवल हिंदी की आधिकारिक लिपि है, बल्कि संस्कृत, मराठी, नेपाली, सिन्धी आदि अनेक भाषाओं को लिखने का माध्यम भी है। संविधान द्वारा देवनागरी लिपि में लिखी गई हिंदी को राजभाषा का दर्जा प्रदान किया गया है। कंप्यूटर और डिजिटल युग में यूनिकोड के माध्यम से नागरी लिपि ने अंतर्राष्ट्रीय पहचान बनाई है और इंटरनेट, मोबाइल एप्स तथा सोशल मीडिया पर इसका प्रयोग बढ़ता जा रहा है। शिक्षा, प्रशासन, मीडिया और प्रकाशन के क्षेत्र में इसका वर्चस्व है, जो इसकी लोकप्रियता और उपयोगिता को प्रमाणित करता है।

4. नागरी लिपि को राष्ट्रलिपि क्यों कहा जाता है ?

नागरी लिपि को 'राष्ट्रलिपि' का सम्मान इसलिए दिया जाता है क्योंकि यह भारत की सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है। यह लिपि किसी एक क्षेत्र या समुदाय तक सीमित न होकर पूरे देश में व्यापक रूप से प्रयोग में लाई जाती है। यह अनेक भारतीय भाषाओं को लिखने का आधार है, जिससे यह देश के विविधतापूर्ण भाषाई परिदृश्य को जोड़ने वाली एक सशक्त कड़ी बन गई है। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान भी इस लिपि ने राष्ट्रीय चेतना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इसकी वैज्ञानिकता और सरलता इसे सभी के लिए सुलभ बनाती है, इसीलिए यह राष्ट्रलिपि के गौरवपूर्ण पद पर आसीन है।

5. निम्नलिखित वाक्यों में रेखांकित शब्दों के अर्थ लिखिए :
(क) नागरी लिपि का इतिहास अत्यंत प्राचीन है ।
(ख) यह लिपि वैज्ञानिक है ।
(ग) इस लिपि का स्वरूप सुडौल है ।
(घ) नागरी लिपि राष्ट्रलिपि है ।

(क) प्राचीन: बहुत पुराना, प्रागैतिहासिक काल से चला आ रहा।
(ख) वैज्ञानिक: तर्क और व्यवस्था पर आधारित, जिसमें हर नियम स्पष्ट और क्रमबद्ध हो।
(ग) सुडौल: सुंदर, आकर्षक और समानुपातिक आकार वाला, जो देखने में अच्छा लगे।
(घ) राष्ट्रलिपि: वह लिपि जो पूरे राष्ट्र की पहचान बने, राष्ट्रीय एकता का प्रतीक हो।

6. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए :
(क) लिपि किसे कहते हैं ?
(भ) नागरी लिपि कितनी प्राचीन है ?
(ग) नागरी लिपि को और किन नामों से जाना जाता है ?
(घ) नागरी लिपि की मूलभूत विशेषता क्या है ?

(क) लिपि किसे कहते हैं?
लिपि ध्वनियों या भाषा को लिखित रूप में प्रकट करने की एक व्यवस्थित प्रणाली है। यह विभिन्न चिह्नों, अक्षरों या वर्णों का ऐसा समूह है, जिसके माध्यम से मनुष्य अपने विचारों को लिखकर स्थायी रूप दे सकता है और दूसरे उसे पढ़कर समझ सकते हैं।

(ख) नागरी लिपि कितनी प्राचीन है?
नागरी लिपि का इतिहास अत्यंत प्राचीन है। इसकी जड़ें ब्राह्मी लिपि से जुड़ी हैं, जो ईसा पूर्व तीसरी शताब्दी से प्रचलित थी। समय के साथ ब्राह्मी से विकसित गुप्त लिपि (चौथी-छठी शताब्दी) से होते हुए यह लगभग ग्यारहवीं शताब्दी के आसपास अपने वर्तमान स्वरूप में आई।

(ग) नागरी लिपि को और किन नामों से जाना जाता है?
नागरी लिपि को मुख्य रूप से दो अन्य नामों से भी जाना जाता है:

  1. देवनागरी लिपि: यह सबसे प्रचलित नाम है, जिसका अर्थ है 'देवताओं के नगर की लिपि'।
  2. राष्ट्रलिपि: इसे भारत की राष्ट्रीय एकता को दर्शाने वाली लिपि के रूप में भी जाना जाता है।

(घ) नागरी लिपि की मूलभूत विशेषता क्या है?
नागरी लिपि की सबसे प्रमुख और मूलभूत विशेषता इसकी वैज्ञानिक प्रकृति है। इसमें प्रत्येक ध्वनि के लिए एक निश्चित और अलग चिह्न (वर्ण) होता है, जिससे उच्चारण और लेखन में पूर्ण सामंजस्य बना रहता है और कोई भ्रम नहीं होता।

महत्वपूर्ण स्मरणीय तथ्य

  • नागरी लिपि ब्राह्मी लिपि से विकसित हुई है।
  • इसे 'देवनागरी' और 'राष्ट्रलिपि' भी कहते हैं।
  • यह हिंदी, संस्कृत, मराठी, नेपाली आदि भाषाओं की लिपि है।
  • इसकी सबसे बड़ी विशेषता इसकी वैज्ञानिकता है।
  • महात्मा गांधी, भारतेन्दु हरिश्चन्द्र आदि ने इसके प्रचार में योगदान दिया।

नागरी लिपि (निबंध)

1. नागरी लिपि का प्रचार-प्रसार किन-किन देशों में हुआ?

नागरी लिपि का प्रचार-प्रसार मुख्य रूप से भारतीय उपमहाद्वीप में हुआ। इसके अलावा, यह लिपि पड़ोसी देशों जैसे नेपाल, तिब्बत, श्रीलंका और दक्षिण-पूर्व एशिया के कई हिस्सों में भी पहुँची और प्रयोग में लाई गई। प्राचीन काल में व्यापार, धर्म (विशेषकर बौद्ध और हिंदू धर्म) और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के माध्यम से यह लिपि इन क्षेत्रों में फैली।

2. नागरी लिपि का विकास किस लिपि से हुआ है?

नागरी लिपि का विकास प्राचीन ब्राह्मी लिपि से हुआ है। ब्राह्मी लिपि को भारत की अधिकांश लिपियों की जननी माना जाता है। समय के साथ, ब्राह्मी लिपि के विभिन्न रूप उत्तर भारत में विकसित हुए, जिनमें से एक प्रमुख रूप गुप्त लिपि थी। इस गुप्त लिपि से ही आगे चलकर नागरी लिपि का स्पष्ट रूप विकसित हुआ।

3. नागरी लिपि के प्राचीनतम उदाहरण कहाँ मिलते हैं?

नागरी लिपि के प्राचीनतम उदाहरण विभिन्न शिलालेखों और सिक्कों पर मिलते हैं। इनमें प्रमुख हैं:
(क) ग्वालियर प्रशस्ति (लगभग 875 ईस्वी): यह मिहिर भोज (प्रतिहार शासक) के समय का एक प्रसिद्ध शिलालेख है।
(ख) दक्षिण भारत के शिलालेख: कर्नाटक के श्रवणबेलगोला जैसे स्थानों से मिले जैन लेख, जो दक्षिणी शैली की नागरी में हैं।
(ग) प्राचीन सिक्के: केरल, श्रीलंका और उत्तर भारत के विभिन्न शासकों के सिक्कों पर नागरी अक्षर अंकित मिलते हैं।

4. नागरी लिपि के नामकरण के बारे में विद्वानों के क्या मत हैं?

नागरी लिपि के नामकरण के बारे में विद्वानों के मुख्यतः दो मत प्रचलित हैं:
(क) नागर ब्राह्मणों से संबंध: एक मत यह है कि गुजरात के नागर ब्राह्मणों ने सबसे पहले इस लिपि का व्यापक प्रयोग किया, इसलिए इसका नाम 'नागरी' पड़ा।
(ख) नगर (शहर) से संबंध: दूसरा मत यह है कि 'नागरी' शब्द 'नगर' से बना है, जिसका अर्थ है शहर। यह लिपि शिक्षा और प्रशासन के केंद्र रहे बड़े नगरों (जैसे प्राचीन पाटलिपुत्र या पटना) में विकसित हुई। बाद में 'देवनागरी' नाम 'देवनगर' (देवताओं का नगर) शब्द से जुड़ा हो सकता है।

5. निम्नलिखित वाक्यों में आए शब्दों के अर्थ स्पष्ट कीजिए-
(क) लिपि
(ख) नागरी
(ग) ब्राह्मी
(घ) पोथियाँ
(ङ) टकसाल

(क) लिपि: ध्वनियों या भाषा को लिखित रूप में प्रस्तुत करने के लिए प्रयोग किए जाने वाले निश्चित चिह्नों या अक्षरों की व्यवस्था। जैसे- देवनागरी लिपि, रोमन लिपि।
(ख) नागरी: 'नगर' से संबंधित। यह उत्तर भारत की वह प्रमुख लिपि है जिससे हिंदी, संस्कृत, मराठी आदि भाषाएँ लिखी जाती हैं। इसे देवनागरी भी कहते हैं।
(ग) ब्राह्मी: भारत की सबसे प्राचीन और मौलिक लिपि, जिससे नागरी सहित देश की अधिकांश लिपियों का विकास हुआ। इसके प्राचीनतम उदाहरण अशोक के शिलालेखों में मिलते हैं।
(घ) पोथियाँ: हस्तलिखित पुस्तकें या ग्रंथ, जो प्रायः ताड़ के पत्तों या भोजपत्र पर लिखे जाते थे।
(ङ) टकसाल: वह स्थान या कारखाना जहाँ सरकारी अनुमति से सिक्के और मुद्राएँ ढाली जाती हैं।

6. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
(क) नागरी लिपि की विशेषताएँ लिखिए।
(ख) दक्षिण भारत में नागरी लिपि का प्रयोग कहाँ-कहाँ हुआ?

(क) नागरी लिपि की विशेषताएँ:

  1. यह एक वैज्ञानिक लिपि है, क्योंकि इसमें ध्वनि और लिपि चिह्न में घनिष्ठ संबंध है।
  2. इसमें स्वर और व्यंजनों के लिए स्पष्ट और अलग-अलग चिह्न हैं।
  3. इसकी लेखन शैली बाएँ से दाएँ की ओर है।
  4. अक्षरों के ऊपर एक सीधी रेखा (शिरोरेखा) खींची जाती है, जो इसकी पहचान है।
  5. यह लिपि अत्यंत सुडौल और सुंदर है तथा इसे सीखना अपेक्षाकृत आसान है।

(ख) दक्षिण भारत में नागरी लिपि का प्रयोग: दक्षिण भारत में नागरी लिपि का प्रयोग व्यापक रूप से हुआ, जिसके प्रमाण मिलते हैं:

  1. शिलालेखों में: कर्नाटक के श्रवणबेलगोला के जैन लेख, देवगिरि के यादव राजाओं के लेख, कल्याण के चालुक्य नरेशों के लेख।
  2. सिक्कों पर: केरल के शासकों के सिक्कों पर (जैसे 'वीरकेरलस्य')।
  3. पोथियाँ (ग्रंथ) लिखने में: दक्षिण में पुस्तकें लिखने के लिए 'नंदिनागरी' नामक एक शैली का प्रयोग होता था।
  4. उड़ीसा (कलिंग) में: गंगवंश के कुछ शासकों के लेख भी नागरी लिपि में मिलते हैं।

7. सही विकल्प चुनिए-
(क) नागरी लिपि का विकास किस लिपि से हुआ?
(i) खरोष्ठी से
(ii) ब्राह्मी से
(iii) अरबी से
(iv) उर्दू से

सही उत्तर: (ii) ब्राह्मी से

(ख) दक्षिण भारत की नागरी लिपि क्या कहलाती थी?
(i) गुरुमुखी
(ii) नंदिनागरी
(iii) कैथी
(iv) मोडी

सही उत्तर: (ii) नंदिनागरी

(ग) ग्वालियर प्रशस्ति किस लिपि में है?
(i) ब्राह्मी
(ii) नागरी
(iii) खरोष्ठी
(iv) अरबी

सही उत्तर: (ii) नागरी

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