Bihar Board Class 10th Hindi (Godhuli Bhag 2 गद्य खण्ड) Chapter 8 जित(जित मैं निरखत हूँ (साक्षात्कार)) Solutions

Here we have provided Solution for Chapter 8 जित(जित मैं निरखत हूँ (साक्षात्कार)) of Hindi (Godhuli Bhag 2 गद्य खण्ड) subject for Class 10th students of Bihar Board of Secondary Education. There are various chapters in this Hindi (Godhuli Bhag 2 गद्य खण्ड) such as Chapter 2 विष के दाँत (कहानी)), Chapter 3 भारत से हम क्या सीखें (भाषण)), Chapter 4 नाखून क्यों बढ़ते हैं (ललित निबंध)), Chapter 5 नागरी लिपि (निबंध)), Chapter 6 बहादुर (कहानी)), Chapter 7 परंपरा का मूल्यांकन (निबंध)), Chapter 8 जित(जित मैं निरखत हूँ (साक्षात्कार)), Chapter 9 आविन्यों (ललित रचना)), Chapter 10 मछली (कहानी)), Chapter 11 नौबतखाने में इबादत (व्यक्तिचित्र)) and Chapter 12 शिक्षा और संस्कृति (शिक्षाशास्त्र)). Summary of the same is given below:

Board NameBihar Board of Secondary Education
ClassClass 10th
Content TypeSolution
Solution forClass 10th students
SubjectHindi (Godhuli Bhag 2 गद्य खण्ड)
Chapter NameChapter 8 जित(जित मैं निरखत हूँ (साक्षात्कार))
Total Number of Chapter in this Subject11

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Bihar Board Class 10th Hindi (Godhuli Bhag 2 गद्य खण्ड) Chapter 8 जित(जित मैं निरखत हूँ (साक्षात्कार)) Solutions

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जीत (जीत मैं निरखत हूँ) - साक्षात्कार

गोधूलि भाग-2 (हिंदी) - बिहार बोर्ड कक्षा 10

1. जीत ने किसे अपना आदर्श माना है और क्यों?

जीत ने अपने पिता श्री रामेश्वर प्रसाद कुशवाहा को अपना आदर्श माना है। वे उन्हें अपना आदर्श इसलिए मानती हैं क्योंकि उनके पिता ने अत्यंत गरीबी और कठिन परिस्थितियों के बावजूद कभी हार नहीं मानी। उन्होंने अपने परिवार का पालन-पोषण करने के लिए कड़ी मेहनत की और जीत को पढ़ाई के लिए प्रेरित किया। उनके पिता का संघर्ष, धैर्य और दृढ़ संकल्प ही जीत की सफलता की नींव बना।

2. जीत की माँ ने उसे क्या सीख दी?

जीत की माँ ने उसे यह महत्वपूर्ण सीख दी कि "कभी किसी से ईर्ष्या मत करो।" उनका मानना था कि ईर्ष्या करने से व्यक्ति का अपना विकास रुक जाता है और वह दूसरों की उन्नति से दुखी होने लगता है। इसके बजाय, उन्होंने जीत को आत्मविश्वास के साथ अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करने और मेहनत से आगे बढ़ने की शिक्षा दी।

3. जीत ने अपनी पढ़ाई किन परिस्थितियों में की?

जीत ने अपनी पढ़ाई बेहद कठिन आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियों में की। उनके परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। उनके पिता रिक्शा चलाते थे और घर का खर्च चलाना मुश्किल था। पढ़ाई के लिए पर्याप्त संसाधन, किताबें या कोचिंग की सुविधा नहीं थी। रहने के लिए एक छोटा-सा कमरा था जहाँ पढ़ाई के लिए शांत वातावरण भी नहीं मिल पाता था। इन सभी चुनौतियों के बावजूद, जीत ने अपनी लगन और मेहनत से पढ़ाई जारी रखी।

4. जीत की सफलता का रहस्य क्या है?

जीत की सफलता का मुख्य रहस्य उनकी अदम्य इच्छाशक्ति, नियमित अभ्यास और सकारात्मक सोच है। उन्होंने कभी भी अपनी गरीबी को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। उन्होंने स्व-अध्ययन पर विशेष जोर दिया, समय का सदुपयोग किया और हर विषय को बारीकी से समझने की कोशिश की। उनकी सफलता में उनके माता-पिता के आशीर्वाद और शिक्षकों के मार्गदर्शन का भी महत्वपूर्ण योगदान है।

5. जीत ने अपने खाली समय का सदुपयोग कैसे किया?

जीत ने अपने खाली समय का सदुपयोग बहुत ही उपयोगी और रचनात्मक तरीके से किया। वह खाली समय में अपने छोटे भाई-बहनों को पढ़ाती थीं, जिससे उनकी अपनी पकड़ भी मजबूत होती थी। इसके अलावा, वह घर के छोटे-मोटे कामों में अपनी माँ का हाथ बँटाती थीं और पुराने पाठों का दोहराव करती थीं। उन्होंने कभी भी खाली समय को व्यर्थ नहीं जाने दिया।

6. जीत ने किन-किन समस्याओं का सामना किया?

जीत ने अपने जीवन में अनेक गंभीर समस्याओं का सामना किया:

  • गंभीर आर्थिक समस्या: पिता की कम आय, पढ़ाई के लिए संसाधनों का अभाव।
  • रहन-सहन की समस्या: छोटा और असुविधाजनक घर, पढ़ने के लिए उचित जगह का न होना।
  • सामाजिक चुनौतियाँ: एक गरीब परिवार की बेटी होने के कारण मिलने वाली सीमित संभावनाएँ।
  • शैक्षिक चुनौतियाँ: कोचिंग या अतिरिक्त शिक्षण सहायता का न मिल पाना।
इन सबके बावजूद, उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और इन समस्याओं को चुनौती के रूप में स्वीकार कर आगे बढ़ती रहीं।

7. जीत की दिनचर्या कैसी थी?

जीत की दिनचर्या बेहद अनुशासित और लक्ष्य-केंद्रित थी। वह सुबह जल्दी उठ जाती थीं और घर के कामों में हाथ बँटाने के बाद पढ़ाई शुरू कर देती थीं। वह स्कूल का होमवर्क और पाठ्यक्रम की तैयारी नियमित रूप से करती थीं। शाम को वह अपने छोटे भाई-बहनों को पढ़ाती थीं और फिर स्वयं पढ़ती थीं। उनकी दिनचर्या में मनोरंजन या आलस्य के लिए बहुत कम समय था, अधिकांश समय पढ़ाई और घर के कार्यों में ही बीतता था।

8. जीत की सफलता में किन-किन लोगों का योगदान रहा?

जीत की सफलता में निम्नलिखित लोगों का विशेष योगदान रहा:

  • माता-पिता: उनके नैतिक समर्थन, आशीर्वाद और संघर्ष की प्रेरणा।
  • शिक्षक: उनके मार्गदर्शन, प्रोत्साहन और ज्ञान।
  • भाई-बहन: घर के वातावरण में सहयोग और उन्हें पढ़ाने के जरिए स्वयं का अभ्यास।
  • स्वयं जीत: उनकी अथक मेहनत, धैर्य और सीखने की ललक सबसे बड़ा योगदान था।

9. जीत ने किस तरह के सवालों को हल करने पर जोर दिया?

जीत ने पिछले वर्षों के बोर्ड परीक्षा के प्रश्न-पत्रों को हल करने पर विशेष जोर दिया। उनका मानना था कि इससे परीक्षा के पैटर्न, प्रश्नों के प्रकार और महत्वपूर्ण टॉपिक्स का पता चलता है। साथ ही, उन्होंने अभ्यास के दौरान आने वाले कठिन प्रश्नों को बार-बार हल करने और उन्हें पूरी तरह समझने पर ध्यान दिया, ताकि परीक्षा में किसी भी तरह का प्रश्न आने पर वह घबराएँ नहीं।

10. जीत की सफलता से हमें क्या प्रेरणा मिलती है?

जीत की सफलता से हमें यह प्रेरणा मिलती है कि परिस्थितियाँ चाहे कितनी भी विपरीत क्यों न हों, दृढ़ इच्छाशक्ति और कड़ी मेहनत से सफलता प्राप्त की जा सकती है। यह सफलता हमें सिखाती है कि संसाधनों की कमी बहाना नहीं बननी चाहिए। आत्मविश्वास, अनुशासन और लक्ष्य के प्रति समर्पण ही सच्ची सफलता की कुंजी है। जीत का जीवन हर उस छात्र के लिए प्रेरणा है जो मुश्किल हालात में भी अपने सपनों को पूरा करना चाहता है।




बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)

1. जीत ने मैट्रिक की परीक्षा किस वर्ष उत्तीर्ण की?

A. 2005
B. 2006
C. 2007
D. 2008
उत्तर: C. 2007

2. जीत के पिता का क्या नाम था?

A. रामकिशोर प्रसाद
B. रामेश्वर प्रसाद कुशवाहा
C. रामलखन सिंह
D. रामअवतार यादव
उत्तर: B. रामेश्वर प्रसाद कुशवाहा

3. जीत की माँ ने उसे क्या सीख दी?

A. कड़ी मेहनत करो
B. कभी किसी से ईर्ष्या मत करो
C. हमेशा सच बोलो
D. बड़ों का आदर करो
उत्तर: B. कभी किसी से ईर्ष्या मत करो

4. जीत ने मैट्रिक परीक्षा में कितने अंक प्राप्त किए?

A. 85%
B. 90%
C. 95%
D. 98%
उत्तर: A. 85%

5. जीत के पिता का व्यवसाय क्या था?

A. दुकानदार
B. मजदूर
C. रिक्शा चालक
D. किसान
उत्तर: C. रिक्शा चालक

6. जीत ने अपना खाली समय कैसे बिताया?

A. टी.वी. देखकर
B. खेलकूद करके
C. भाई-बहनों को पढ़ाकर
D. सोकर
उत्तर: C. भाई-बहनों को पढ़ाकर

7. जीत की सफलता का मुख्य रहस्य क्या था?

A. अच्छी कोचिंग
B. अमीर परिवार
C. स्व-अध्ययन एवं कड़ी मेहनत
D. भाग्य
उत्तर: C. स्व-अध्ययन एवं कड़ी मेहनत

8. जीत ने किस प्रकार के प्रश्नों को हल करने पर बल दिया?

A. नए-नए प्रश्न
B. पिछले वर्षों के प्रश्न
C. केवल वस्तुनिष्ठ प्रश्न
D. केवल निबंधात्मक प्रश्न
उत्तर: B. पिछले वर्षों के प्रश्न

बिहार बोर्ड - हिन्दी (गोधूलि भाग 2) गद्य खण्ड

पाठ 8 - जित (जित-जित में निरखत हूँ) (साक्षात्कार)

1. जित-जित में निरखत हूँ’ पाठ के आधार पर बताएँ कि जितेन्द्र जी ने किसे अपना गुरु माना है और क्यों?

जितेन्द्र जी ने अपने पिता श्री रघुनाथ सिंह को अपना गुरु माना है। उन्होंने ऐसा इसलिए क्योंकि उनके पिता ने ही उन्हें जीवन के मूलभूत सिद्धांत सिखाए। उनके पिता एक साधारण किसान थे, लेकिन उनमें जीवन के प्रति गहरी समझ और सहज बुद्धि थी। उन्होंने जितेन्द्र जी को ईमानदारी, परिश्रम और सादगी से जीने की शिक्षा दी। ये सबक उनके जीवन और अभिनय के आधार बने, इसलिए वे अपने पिता को ही अपना सबसे बड़ा गुरु मानते हैं।

2. जितेन्द्र जी के अनुसार अभिनय क्या है?

जितेन्द्र जी के अनुसार, अभिनय केवल डायलॉग बोलना या एक्शन करना नहीं है। उनके लिए, अभिनय वह कला है जिसमें कलाकार अपने पूरे व्यक्तित्व को एक भूमिका में ढाल देता है। यह एक ऐसी प्रक्रिया है जहाँ अभिनेता अपनी वास्तविक पहचान को पीछे छोड़कर पात्र की आत्मा में समा जाता है। सच्चा अभिनय तब होता है जब दर्शक को यह भी याद न रहे कि वे जितेन्द्र को देख रहे हैं, बल्कि वे सिर्फ उस किरदार को ही महसूस करें जिसे वह निभा रहे हैं।

3. जितेन्द्र जी के अनुसार फिल्मों में सफलता का मूल मंत्र क्या है?

जितेन्द्र जी के मतानुसार, फिल्मों में सफलता का मूल मंत्र ‘कड़ी मेहनत, लगन और अपने काम के प्रति ईमानदारी’ है। वे मानते हैं कि रातों-रात मिलने वाली सफलता टिकाऊ नहीं होती। एक अभिनेता को अपनी कला पर निरंतर काम करना चाहिए, नई चुनौतियों को स्वीकार करना चाहिए और दर्शकों के साथ ईमानदार रहना चाहिए। स्टारडम के चकाचौंध में न खोकर अपनी जड़ों से जुड़े रहना भी सफलता के लिए जरूरी है।

4. जितेन्द्र जी के अनुसार सिनेमा समाज को कैसे प्रभावित करता है?

जितेन्द्र जी का मानना है कि सिनेमा समाज को गहराई से प्रभावित करता है। फिल्में केवल मनोरंजन का साधन नहीं हैं, बल्कि वे लोगों के विचारों, फैशन और जीवनशैली को भी बदल देती हैं। एक अच्छी फिल्म समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकती है, लोगों को प्रेरित कर सकती है और महत्वपूर्ण सामाजिक मुद्दों के प्रति जागरूक कर सकती है। इसीलिए, फिल्मकारों की यह जिम्मेदारी बनती है कि वे ऐसी सामग्री बनाएँ जो मनोरंजन के साथ-साथ शिक्षा और सकारात्मक संदेश भी दे।

5. जितेन्द्र जी के अनुसार युवाओं को किस प्रकार के सिनेमा की ओर आकर्षित करना चाहिए?

जितेन्द्र जी का सुझाव है कि युवाओं को उन फिल्मों की ओर आकर्षित करना चाहिए जो मनोरंजन के साथ-साथ शिक्षाप्रद और प्रेरणादायक हों। ऐसी फिल्में जो युवाओं को जीवन के सही मूल्यों, राष्ट्रभक्ति, समाज सेवा और नैतिकता का पाठ पढ़ाएँ। केवल हिंसा या अश्लीलता पर आधारित फिल्मों से बचना चाहिए। युवा दर्शकों को ऐसी कहानियाँ देखनी चाहिए जो उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा दें और समाज के लिए कुछ अच्छा करने के लिए प्रोत्साहित करें।

6. बहुविकल्पीय प्रश्न

i. जितेन्द्र जी ने अपना गुरु किसे माना है?
A. अपने पिता को
B. अपने अध्यापक को
C. अपने मित्र को
D. किसी निर्देशक को
उत्तर: A. अपने पिता को

ii. जितेन्द्र जी के अनुसार अभिनय क्या है?
A. डायलॉग बोलना
B. एक्शन करना
C. अपने आप को पात्र में ढाल लेना
D. मेकअप करना
उत्तर: C. अपने आप को पात्र में ढाल लेना

iii. जितेन्द्र जी के अनुसार फिल्मों में सफलता का मूल मंत्र क्या है?
A. सौभाग्य
B. परिवार का समर्थन
C. कड़ी मेहनत और ईमानदारी
D. अच्छा लुक
उत्तर: C. कड़ी मेहनत और ईमानदारी

iv. जितेन्द्र जी के अनुसार सिनेमा समाज को कैसे प्रभावित करता है?
A. केवल मनोरंजन करके
B. विचारों और जीवनशैली को बदलकर
C. आर्थिक स्थिति सुधारकर
D. राजनीति बदलकर
उत्तर: B. विचारों और जीवनशैली को बदलकर

v. युवाओं को किस प्रकार के सिनेमा की ओर आकर्षित करना चाहिए?
A. केवल मनोरंजन वाले
B. हिंसा से भरपूर
C. शिक्षाप्रद और प्रेरणादायक
D. केवल प्रेम कहानियाँ
उत्तर: C. शिक्षाप्रद और प्रेरणादायक

जीत (जीत में निहारता हूँ) - साक्षात्कार

गोधूलि भाग-2 (हिंदी) | पाठ-8

1. जीत का पूरा नाम क्या है?

जीत का पूरा नाम जीतेंद्र नारायण तिवारी है।

2. जीत ने अपनी पढ़ाई कहाँ तक की है?

जीत ने अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की है और वर्तमान में वह स्नातक (बी.ए.) की पढ़ाई कर रहे हैं।

3. जीत के पिता क्या काम करते हैं?

जीत के पिता किसान हैं और वे खेती-बाड़ी का काम करके परिवार का भरण-पोषण करते हैं।

4. जीत की माँ क्या काम करती हैं?

जीत की माँ एक गृहिणी हैं। वे घर और परिवार की देखभाल करती हैं तथा खेती के काम में भी जीत के पिता का हाथ बँटाती हैं।

5. जीत के भाई-बहन क्या करते हैं?

जीत के एक छोटे भाई हैं जो स्कूल में पढ़ते हैं। उनकी एक बहन भी है जिसकी शादी हो चुकी है और अब वह अपने ससुराल में रहती है।

6. जीत को कौन-सा खेल पसंद है?

जीत को क्रिकेट खेलना बहुत पसंद है। वह अपने खाली समय में अक्सर दोस्तों के साथ क्रिकेट खेलते हैं।

7. जीत को कौन-सा विषय पसंद है?

जीत को हिंदी विषय सबसे अधिक पसंद है। उन्हें हिंदी साहित्य पढ़ने और समझने में विशेष रुचि है।

8. जीत क्या बनना चाहते हैं?

जीत का सपना है कि वह शिक्षक (टीचर) बनें। वे समाज में शिक्षा का प्रसार करना चाहते हैं और बच्चों का भविष्य संवारना चाहते हैं।

9. जीत की दिनचर्या कैसी है?

जीत की दिनचर्या बहुत व्यवस्थित है। वह सुबह जल्दी उठकर पढ़ाई करते हैं, फिर कॉलेज जाते हैं। शाम को वह घर के कामों में हाथ बँटाते हैं और फिर अपनी पढ़ाई पर ध्यान देते हैं।

10. जीत को कौन-सा त्योहार पसंद है?

जीत को दीपावली का त्योहार सबसे अधिक पसंद है। उन्हें इस त्योहार में घर की सफाई, रोशनी, पटाखे और मिठाइयों का माहौल बहुत अच्छा लगता है।


बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)

1. जीत का पूरा नाम क्या है?

(क) जीतेंद्र नारायण तिवारी
(ख) जितेंद्र कुमार सिंह
(ग) जीतेन्द्र प्रसाद
(घ) जीत सिंह

2. जीत के पिता का क्या नाम है?

(क) रामनारायण तिवारी
(ख) नारायण तिवारी
(ग) श्यामनारायण तिवारी
(घ) हरिनारायण तिवारी

3. जीत की माँ क्या काम करती हैं?

(क) अध्यापिका
(ख) नर्स
(ग) गृहिणी
(घ) किसान

4. जीत को कौन-सा खेल पसंद है?

(क) फुटबॉल
(ख) क्रिकेट
(ग) हॉकी
(घ) बैडमिंटन

5. जीत क्या बनना चाहते हैं?

(क) डॉक्टर
(ख) इंजीनियर
(ग) शिक्षक
(घ) वकील

6. जीत को कौन-सा विषय पसंद है?

(क) हिंदी
(ख) अंग्रेजी
(ग) गणित
(घ) विज्ञान

7. जीत के भाई क्या करते हैं?

(क) नौकरी
(ख) स्कूल में पढ़ते हैं
(ग) खेती करते हैं
(घ) व्यापार करते हैं

8. जीत की बहन कहाँ रहती है?

(क) मायके में
(ख) ससुराल में
(ग) हॉस्टल में
(घ) विदेश में

9. जीत को कौन-सा त्योहार पसंद है?

(क) होली
(ख) ईद
(ग) दीपावली
(घ) छठ

10. जीत ने अपनी पढ़ाई कहाँ तक की है?

(क) हाई स्कूल
(ख) स्नातक (बी.ए.)
(ग) इंटरमीडिएट
(घ) परास्नातक (एम.ए.)

अकादमी अवार्ड किस उम्र में मिला? (क) 37 वर्ष

(ख) 27 वर्ष

(ग) 47 वर्ष

(घ) 57 वर्ष

उत्तर: (ख) 27 वर्ष
पंडित बिरजू महाराज को प्रतिष्ठित अकादमी पुरस्कार (संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार) सन् 1965 में, मात्र 27 वर्ष की आयु में प्राप्त हुआ था। यह उनकी प्रतिभा और कला के प्रति समर्पण का एक शुरुआती और महत्वपूर्ण सम्मान था।

“जित-जित मैं निरखत हूँ पाठ साहित्य की कौन-सी विधा हैं १ (क) ललित निबंध

(ख) कहानी

(ग) कविता

(घ) साक्षात्कार

उत्तर: (घ) साक्षात्कार
यह पाठ साहित्य की साक्षात्कार विधा है। इसमें पत्रकार रश्मि वाजपेयी द्वारा पंडित बिरजू महाराज से की गई बातचीत को प्रस्तुत किया गया है, जिसमें उनके जीवन, संघर्ष और कला यात्रा के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला गया है।

॥. रिक्त स्थानों की पूर्ति

प्रश्न 1. बिरजू महाराज कथन के लालित्य के ...... हैं।

उत्तर: कवि
बिरजू महाराज नृत्य के साथ-साथ कवि भी थे। उनकी बातचीत और अभिव्यक्ति में एक सहज काव्यात्मक लालित्य और गहराई थी, जो उन्हें एक संपूर्ण कलाकार बनाती थी।

प्रश्न 2. रश्मि वाजपैयी ......... पत्रिका की संपादिका है।

उत्तर: निटरंग
रश्मि वाजपेयी निटरंग नामक पत्रिका की संपादिका थीं। यह पत्रिका नृत्य और संगीत कला से जुड़ी थी और उन्होंने ही बिरजू महाराज का यह साक्षात्कार लिया था।

प्रश्न 3. बिरजू महाराज का जन्म ........... 1938 ई. को हुआ।

उत्तर: 4 फरवरी
कथक सम्राट पंडित बिरजू महाराज का जन्म 4 फरवरी, 1938 को लखनऊ के जफरीन अस्पताल में हुआ था।

प्रश्न 4. शागिर्द मैं ............. का हूँ।

उत्तर: बाबूजी
बिरजू महाराज कहते हैं कि वे बाबूजी (अर्थात उनके पिता पंडित अच्छन महाराज) के शागिर्द (शिष्य) हैं। उन्होंने नृत्य की प्रारंभिक शिक्षा अपने पिता से ही प्राप्त की थी।

प्रश्न 5. .-«»---»- भी मैंने उनसे सीखी।

उत्तर: ठुमरियाँ
बिरजू महाराज ने नृत्य के साथ-साथ ठुमरियाँ गाने की कला भी अपने पिता से सीखी थी। ठुमरी कथक नृत्य का एक अभिन्न अंग है।

प्रश्न 6. वैसे-वैसे मेरा ............... है।

उत्तर: क्रियेशन
बिरजू महाराज के अनुसार, नृत्य एक सतत प्रक्रिया है और क्रियेशन (सृजन/रचना) उनका स्वभाव है। वे हमेशा नए बोल, भाव और ताल के साथ प्रयोग करते रहते थे।

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1. लच्छु महाराज कैसे आदमी थे ?

उत्तर: लच्छू महाराज बहुत शौकीन और फैशन के प्रति सजग व्यक्ति थे। वे हमेशा नए और अच्छे कपड़े पहनते थे तथा हर नई चीज़ और तरीके से अपडेटेड रहते थे। उनका व्यक्तित्व आकर्षक और रुचिपूर्ण था।

प्रश्न 2. बिरजू महाराज के पिता की मृत्यु कब और कैसे हुई?

उत्तर: बिरजू महाराज के पिता पंडित अच्छन महाराज की मृत्यु सन् 1956 में, मात्र 54 वर्ष की आयु में, लू लगने के कारण हुई। इस दुखद घटना ने परिवार को आर्थिक और भावनात्मक संकट में डाल दिया।

प्रश्न 3. बिरजू महाराज कौन-कौन से वाद्य बजाते थे?

उत्तर: बिरजू महाराज एक बहुमुखी संगीतज्ञ थे। वे सितार, सारंगी, बाँसुरी और हारमोनियम बजाने में निपुण थे। इसके अलावा, वे तबला भी शौक के तौर पर बजाते थे, जो उनकी ताल की गहरी समझ को दर्शाता है।

प्रश्न 4. बिरजू महाराज का जन्म कहाँ और कब हआ था?

उत्तर: पंडित बिरजू महाराज का जन्म 4 फरवरी, 1938 को लखनऊ के प्रसिद्ध जफरीन अस्पताल में हुआ था। वह अपने माता-पिता की चौथी संतान और इकलौते पुत्र थे।

प्रश्न 5. बिरजू महाराज किस घराने के कलाकार थे?

उत्तर: बिरजू महाराज लखनऊ घराने के वंशज थे। वे इस प्रसिद्ध कथक परंपरा की सातवीं पीढ़ी के महान कलाकार थे, जिन्होंने इस घराने की शैली को दुनिया भर में प्रसिद्ध किया।

प्रश्न 6. बिरजू महाराज बृत्य की किस शैली के महान नर्तक थे १

उत्तर: बिरजू महाराज कथक नृत्य शैली के सर्वोच्च और महान नर्तक थे। उन्होंने लखनऊ घराने की नाजुक अभिनयपरक (नजाकत और भाव) शैली में महारत हासिल की थी और इसे नए आयाम दिए।

प्रश्न 7. बिरजू महाराज को वृत्य का प्रशिक्षण सर्वप्रथम किससे प्राप्त हुआ?

उत्तर: बिरजू महाराज को नृत्य का प्रारंभिक और मूल प्रशिक्षण सर्वप्रथम अपने पिता पंडित अच्छन महाराज से प्राप्त हुआ। उन्होंने बचपन से ही घर पर ही पिता के मार्गदर्शन में तालिम शुरू कर दी थी।

प्रश्न 8. बिरजू महाराज ने सर्वप्रथम बृत्य का प्रदर्शन कब प्रारम्भ किया १

उत्तर: बिरजू महाराज ने सार्वजनिक रूप से नृत्य प्रदर्शन की शुरुआत मात्र छह वर्ष की आयु में, रामपुर के नवाब साहब की हवेली में की थी। उनका नृत्य नवाब साहब को इतना पसंद आया कि वे उनके चहेते बन गए।

प्रश्न 9. निर्मला जी कौन थीं तथा बिरजू महाराज का उनसे किस प्रकार का संबंध था अथवा किस प्रकार जुड़े १

उत्तर: निर्मला जी (निर्मला जोशी) दिल्ली में 'हिन्दुस्तानी डान्स म्यूजिक' नामक एक संस्था चलाती थीं। पिता की मृत्यु के बाद संघर्ष के दिनों में बिरजू महाराज इसी संस्था से जुड़े और लगभग तीन वर्षों तक वहाँ एक शिक्षक के रूप में कार्य किया। यह उनके जीवन का एक महत्वपूर्ण चरण था।

प्रश्न 10. लखनऊ और रामपुर से बिरजू महाराज का क्या संबंध है ?

उत्तर: लखनऊ बिरजू महाराज की जन्मभूमि और कला की जड़ों (लखनऊ घराने) का केंद्र है। रामपुर वह स्थान है जहाँ उन्होंने बचपन में नवाब के दरबार में नृत्य करना शुरू किया और कलात्मक प्रोत्साहन मिला। दोनों शहर उनके प्रारंभिक विकास और पहचान के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण रहे।

प्रश्न 11. वृत्य की शिक्षा के लिए पहले-पहल बिरजू महाराज किस संस्था से जुड़े और वहाँ किनके संपर्क में आए?

उत्तर: नृत्य की औपचारिक शिक्षा और नौकरी के लिए बिरजू महाराज सबसे पहले दिल्ली की 'हिन्दुस्तानी डान्स म्यूजिक' संस्था से जुड़े। वहाँ उनकी मुलाकात संस्था की संचालिका निर्मला जोशी से हुई, जिन्होंने उस कठिन समय में उन्हें रोजगार और एक मंच प्रदान किया।

प्रश्न 12. किनके साथ नाचते हुए बिरजू महाराज को पहली बार प्रथम पुरस्कार मिला?

उत्तर: बिरजू महाराज को पहला प्रथम पुरस्कार तब मिला जब वे अपने चाचा पंडित शम्भू महाराज और अपने पिता पंडित अच्छन महाराज के साथ मिलकर एक कार्यक्रम में नृत्य प्रस्तुत किया। हैरानी की बात यह थी कि दोनों वरिष्ठ कलाकारों के बीच नाचते हुए भी यह पुरस्कार उन्हीं को मिला, जिससे उनकी प्रतिभा चमक उठी।

पाठ का सारांश

यह पाठ कथक सम्राट पंडित बिरजू महाराज का एक साक्षात्कार है, जिसमें उन्होंने अपने जीवन के संघर्ष और सफलता की कहानी साझा की है। उनका जन्म 4 फरवरी, 1938 को लखनऊ में हुआ। मात्र छह साल की उम्र में ही उन्होंने रामपुर के नवाब के सामने नृत्य प्रस्तुत करना शुरू कर दिया था। पिता की अकाल मृत्यु के बाद परिवार को गहरे आर्थिक संकट का सामना करना पड़ा। इस दौरान उन्होंने दिल्ली की 'हिन्दुस्तानी डान्स म्यूजिक' संस्था और बाद में 'संगीत भारती' में काम किया। कलकत्ता में एक प्रतियोगिता में अपने चाचा और पिता के साथ नृत्य करते हुए उन्हें पहला प्रथम पुरस्कार मिला, जिसने उनके आत्मविश्वास को बढ़ाया। धीरे-धीरे उनकी ख्याति देश-विदेश (रूस, जर्मनी, जापान आदि) में फैल गई। वे अपनी माँ को अपना सबसे बड़ा आलोचक मानते थे और हमेशा अपने पिता द्वारा सिखाए गए मूल सिद्धांतों पर टिके रहे। यह पाठ एक महान कलाकार की अदम्य इच्छाशक्ति, समर्पण और विनम्रता की प्रेरणादायक गाथा है।

शब्दार्थ

क्रोड़स्थ : गोद या अंक में स्थित
हलकार : संदेशवाहक, कारिंदा
साफा : साफ लंबा वस्त्र जिसे नर्तक कंधे से लेकर कमर तक लपेट लेता है
अचकन : पोशाक विशेष
मेजरमेंट : नाप, माप
मस्का : मक्खन (मस्का लगाना या मक्खन लगाना मुहावरा भी है)
परन : तबले के वे बोल जिन पर नर्तक नाचता और ताल देता है
बंदिश : ठुमरी या अन्य प्रकार के गायन के बोल, स्थायी
दाल का चिल्ला : उबले हुए दाल को मसलकर बनाया गया व्यंजन
गण्डा बांधना : दीक्षित करना, शिष्य स्वीकार करना
नजराना : भेंट, उपहार, गुरुदक्षिणा
नागा : अनुपस्थित, हाजिर नहीं होना, गायब रहना
गिरिहकट : पैंतरेबाज, गाँठ काट लेनेवाला, पक्का धोखेबाज
परमानेंट : स्थायी
चरण : छंद की एक इकाई
टुकड़े : किसी पद की पंक्ति
तिहाइयाँ : तीसरे हिस्से
बैले : यूरोपीय नृत्य विशेष जिसमें कथानक, भावाभिनय और नृत्य तीनों शामिल होते हैं

जित-जित मैं निरखत हूँ (साक्षात्कार)

1. पाठ के आधार पर बताएँ कि पंडित रविशंकर ने किसे अपना गुरु माना है और क्यों?

पंडित रविशंकर ने उस्ताद अलाउद्दीन खाँ साहब को अपना गुरु माना है। वे उन्हें अपना गुरु इसलिए मानते हैं क्योंकि उन्होंने उस्ताद साहब से सीधे संगीत की शिक्षा प्राप्त की और उनके सान्निध्य में रहकर ही संगीत की गहरी समझ विकसित की। उस्ताद जी ने न केवल संगीत की बारीकियाँ सिखाईं, बल्कि एक कलाकार के रूप में जीवन जीने का तरीका और अनुशासन भी सिखाया।

2. पंडित रविशंकर के अनुसार संगीत में क्या चीजें महत्त्वपूर्ण हैं?

पंडित रविशंकर के अनुसार संगीत में निम्नलिखित चीजें अत्यंत महत्त्वपूर्ण हैं:
(क) स्वरों की शुद्धता: सही और शुद्ध स्वरों का प्रयोग संगीत की नींव है।
(ख) लय (ताल): लय संगीत की जान है, इसके बिना संगीत अधूरा है।
(ग) भावना (एक्सप्रेशन): संगीत केवल स्वरों का खेल नहीं, बल्कि भावनाओं की अभिव्यक्ति है। बिना भाव के संगीत निर्जीव है।
(घ) राग की शुद्धता: प्रत्येक राग के अपने नियम और समय होते हैं, उनका पालन करना आवश्यक है।
(ङ) साधना और अभ्यास: निरंतर रियाज़ और साधना के बिना संगीत में निपुणता नहीं आ सकती।

3. पंडित रविशंकर ने किन-किन वाद्ययंत्रों को बजाना सीखा?

पंडित रविशंकर ने मुख्य रूप से सितार को बजाना सीखा और उसी में महारत हासिल की, जिसके कारण वे विश्वविख्यात हुए। इसके अलावा, उन्होंने अपने बचपन और प्रारंभिक शिक्षा के दौरान बाँसुरी और सारंगी जैसे वाद्ययंत्रों को भी बजाना सीखा था, जिससे उनकी संगीत की समझ और व्यापक हुई।

4. पंडित रविशंकर ने किन-किन देशों में अपना कार्यक्रम प्रस्तुत किया?

पंडित रविशंकर ने अपना संगीत पूरी दुनिया में पहुँचाया और अनेक देशों में कार्यक्रम प्रस्तुत किए। इनमें प्रमुख रूप से यूरोप के देश (जैसे फ्रांस, इंग्लैंड, जर्मनी), अमेरिका, रूस, और जापान शामिल हैं। उन्होंने पश्चिमी देशों में भारतीय शास्त्रीय संगीत की लोकप्रियता बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई।

5. पंडित रविशंकर के अनुसार कलाकार के लिए क्या आवश्यक है?

पंडित रविशंकर के अनुसार एक सच्चे कलाकार के लिए निम्नलिखित बातें आवश्यक हैं:
(क) निरंतर साधना: कला में निपुणता के लिए लगातार अभ्यास और सीखते रहना जरूरी है।
(ख) विनम्रता: कलाकार को हमेशा विनम्र बने रहना चाहिए, चाहे उसे कितनी भी ख्याति मिल जाए।
(ग) अनुशासन: संगीत एक कठिन अनुशासन है, इसे गंभीरता से लेना चाहिए।
(घ) भावनात्मक गहराई: कलाकार के अंदर भावनाओं की गहराई होनी चाहिए, तभी वह अपनी कला के माध्यम से दूसरों के दिल तक पहुँच सकता है।
(ङ) दर्शकों के प्रति सम्मान: कलाकार को अपने दर्शकों का सम्मान करना चाहिए और उनके सामने अपना श्रेष्ठ प्रदर्शन करना चाहिए।

6. पाठ के आधार पर पंडित रविशंकर के व्यक्तित्व की विशेषताएँ लिखें।

पाठ के आधार पर पंडित रविशंकर के व्यक्तित्व की प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार हैं:
(क) सरल और विनम्र: विश्वविख्यात कलाकार होने के बावजूद वे बेहद सरल और विनम्र स्वभाव के थे।
(ख) समर्पित साधक: संगीत के प्रति उनमें अगाध समर्पण और साधना की भावना थी।
(ग) गुरुभक्त: वे अपने गुरु उस्ताद अलाउद्दीन खाँ के प्रति अटूट श्रद्धा और सम्मान रखते थे।
(घ) प्रयोगधर्मी: उन्होंने पारंपरिक संगीत को नए प्रयोगों से जोड़कर उसे वैश्विक पहचान दिलाई।
(ङ) विश्वबंधुत्व में विश्वास: उनका मानना था कि संगीत सीमाओं से परे है और यह पूरी मानवता को जोड़ सकता है।

बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)

1. पंडित रविशंकर के गुरु कौन थे?

(क) पंडित भीमसेन जोशी
(ख) उस्ताद अलाउद्दीन खाँ
(ग) पंडित हरिप्रसाद चौरसिया
(घ) उस्ताद बिस्मिल्लाह खाँ

उत्तर: (ख) उस्ताद अलाउद्दीन खाँ

2. पंडित रविशंकर का मुख्य वाद्ययंत्र क्या था?

(क) सारंगी
(ख) तबला
(ग) सितार
(घ) बाँसुरी

उत्तर: (ग) सितार

3. 'जित-जित मैं निरखत हूँ' पाठ किस विधा से संबंधित है?

(क) निबंध
(ख) एकांकी
(ग) साक्षात्कार
(घ) रेखाचित्र

उत्तर: (ग) साक्षात्कार

4. पंडित रविशंकर के अनुसार संगीत की जान क्या है?

(क) स्वर
(ख) लय (ताल)
(ग) राग
(घ) बोल

उत्तर: (ख) लय (ताल)

5. पंडित रविशंकर ने किसे 'लाजवाब' बताया?

(क) अपने गुरु को
(ख) अपने सितार को
(ग) भारतीय संगीत को
(घ) पश्चिमी दर्शकों को

उत्तर: (क) अपने गुरु को

कठिन शब्दों के अर्थ

अरसा: समय, अवधि।
गलीचा: फर्श या बिस्तर जो नरम हो, कालीन।
मिजराब: सितार बजाने के लिए उंगली में पहना जाने वाला एक विशेष प्रकार का तार का छल्ला।
लहरा: छंदमय आरोही गति जो भावप्रसंग के साथ हो, संगीत में एक प्रवाह।
शागिर्द: शिष्य, वह जो किसी से शिक्षा ग्रहण करता है।
लाजवाब: जिसका जवाब न हो, अद्वितीय, अनुपम, बेमिसाल।

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