Bihar Board Class 10th Hindi (Godhuli Bhag 2 गद्य खण्ड) Chapter 2 विष के दाँत (कहानी)) Solutions
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| Board Name | Bihar Board of Secondary Education |
| Class | Class 10th |
| Content Type | Solution |
| Solution for | Class 10th students |
| Subject | Hindi (Godhuli Bhag 2 गद्य खण्ड) |
| Chapter Name | Chapter 2 विष के दाँत (कहानी)) |
| Total Number of Chapter in this Subject | 11 |
Studying Bihar Board Class 10th Hindi (Godhuli Bhag 2 गद्य खण्ड) Chapter 2 विष के दाँत (कहानी)) solution will help you higher marks in this subject but you need to follow best practices to achieve higher marks, which are given after solutions, go through them once.
Bihar Board Class 10th Hindi (Godhuli Bhag 2 गद्य खण्ड) Chapter 2 विष के दाँत (कहानी)) Solutions
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बिहार बोर्ड कक्षा 10 हिंदी (गोधूलि भाग 2)
पाठ 2 - विष के दाँत (कहानी)
1. लेखक ने किस आधार पर कहा है कि अमरकांत की कहानियाँ समाज का यथार्थ चित्रण करती हैं?
लेखक ने यह बात इस आधार पर कही है कि अमरकांत की कहानियाँ सामान्य जन-जीवन की सच्चाइयों, उनके संघर्षों, दुःख-सुख और सामाजिक विसंगतियों को बिना किसी लाग-लपेट के प्रस्तुत करती हैं। उनकी कहानियों के पात्र हमारे आस-पास के साधारण लोग होते हैं, जिनकी समस्याएँ वास्तविक और प्रामाणिक लगती हैं। उनके कथानक में कृत्रिमता या भावुकतापूर्ण अतिशयोक्ति नहीं होती, बल्कि जीवन का कठोर यथार्थ स्पष्ट दिखाई देता है।
2. 'विष के दाँत' कहानी के शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट करें।
कहानी का शीर्षक 'विष के दाँत' अत्यंत सार्थक और प्रतीकात्मक है। यह शीर्षक समाज में फैले छुआछूत, जातिगत भेदभाव और ऊँच-नीच की भावना को 'विष' के रूप में चित्रित करता है। जिस प्रकार विषैले दाँत जानलेवा होते हैं, उसी प्रकार ये सामाजिक बुराइयाँ समाज के शरीर को अंदर ही अंदर खोखला कर देती हैं, मानवीय संबंधों को जहरीला बना देती हैं और शांति व भाईचारे को नष्ट कर देती हैं। कहानी में यह 'विष' हरकत सिंह, उसके परिवार और पूरे गाँव के व्यवहार में दिखाई देता है।
3. 'विष के दाँत' कहानी का सारांश अपने शब्दों में लिखें।
यह कहानी गाँव की सामाजिक विषमताओं और जातिगत उच्च-नीच की भावना पर प्रकाश डालती है। कहानी के मुख्य पात्र हरकत सिंह एक भूमिहार जमींदार हैं जो अपनी जाति के अहंकार में डूबे रहते हैं। उनके घर एक दलित युवक, बुद्धन, मजदूरी करता है। एक दिन हरकत सिंह का बेटा बीमार पड़ता है और वे बुद्धन को डॉक्टर के पास दवा लाने के लिए शहर भेजते हैं। बुद्धन तेजी से साइकिल चलाता है और दवा लेकर लौटता है, लेकिन थकान के मारे एक पेड़ के नीचे सो जाता है। दवा मिलने में देरी हो जाती है। हरकत सिंह क्रोधित होकर बुद्धन को अपमानित करते हैं और मारने-पीटने लगते हैं। बुद्धन का अपराध केवल इतना था कि वह एक निम्न जाति का था और थककर सो गया था। यह घटना समाज में गहरे पैठे जातिवाद के 'विषैले दाँतों' को उजागर करती है, जो मानवीय संवेदनाओं और करुणा को खत्म कर देते हैं।
4. हरकत सिंह के चरित्र की विशेषताएँ लिखिए।
हरकत सिंह का चरित्र एक छोटे स्तर के जमींदार और रूढ़िवादी सामंती मानसिकता वाले व्यक्ति का प्रतिनिधित्व करता है। उसकी प्रमुख विशेषताएँ हैं:
- जातिगत अहंकारी: वह अपनी उच्च जाति (भूमिहार) होने के गर्व में अंधा है और दलितों को हीन दृष्टि से देखता है।
- क्रूर और निर्दयी: बुद्धन के प्रति उसका व्यवहार अमानवीय है। थोड़ी सी देरी पर वह उसे मारने-पीटने लगता है, उसकी थकान या परिश्रम का कोई मोल नहीं है।
- असंवेदनशील: उसमें दूसरों के प्रति कोई संवेदना या करुणा नहीं है। वह बुद्धन को केवल एक सेवक या मजदूर के रूप में देखता है, एक इंसान के रूप में नहीं।
- अधीर और क्रोधी: उसका स्वभाव उग्र और अधीर है। वह बिना सोचे-समझे हिंसक प्रतिक्रिया दे देता है।
- पारंपरिक सोच वाला: वह सामाजिक बदलाव को स्वीकार नहीं करता और पुरानी रूढ़ियों को ही सही मानता है।
5. बुद्धन के चरित्र की विशेषताएँ लिखिए।
बुद्धन एक दलित युवक है जो सामाजिक ढाँचे के सबसे निचले पायदान पर जीवन यापन कर रहा है। उसके चरित्र की मुख्य विशेषताएँ हैं:
- मेहनती और ईमानदार: वह हरकत सिंह के घर पर पूरी लगन और ईमानदारी से मेहनत करता है। दवा लाने का काम भी वह पूरी जिम्मेदारी से करता है।
- सहनशील और विनम्र: वह हरकत सिंह के अपमान और अत्याचार को चुपचाप सहन करता है, क्योंकि उसकी सामाजिक और आर्थिक स्थिति विरोध करने की अनुमति नहीं देती।
- संवेदनशील: वह हरकत सिंह के बेटे की बीमारी को लेकर चिंतित है और उसकी सेवा करने में कोई कसर नहीं छोड़ता।
- शोषित वर्ग का प्रतिनिधि: बुद्धन का चरित्र उस पूरे वर्ग का प्रतीक है जो सदियों से सामाजिक और आर्थिक शोषण का शिकार रहा है। उसकी मजबूरी और लाचारी उस वर्ग की स्थिति को दर्शाती है।
- मानवीय गरिमा से युक्त: भले ही समाज उसे नीचा समझे, लेकिन उसके भीतर एक सामान्य इंसान की गरिमा और भावनाएँ हैं, जिन्हें नजरअंदाज कर दिया जाता है।
6. 'विष के दाँत' कहानी का प्रतिपाद्य (केंद्रीय भाव) लिखिए।
कहानी का मुख्य प्रतिपाद्य या केंद्रीय भाव है - समाज में व्याप्त जातिवाद और छुआछूत की भावना एक विष के समान है, जो मानवीय संबंधों को जहरीला बना देती है, समाज की एकता को तोड़ती है और निर्दोष लोगों के जीवन को दुःखमय बना देती है। यह कहानी दर्शाती है कि किस तरह यह 'विष' उच्च जाति के लोगों के मन में अहंकार और निर्दयता भर देता है और निम्न जाति के लोगों को लगातार अपमानित व शोषित होने के लिए मजबूर कर देता है। लेखक इसके माध्यम से समाज से इस विषैली सोच को समाप्त करने और मानवीय समानता व भाईचारे को बढ़ावा देने का संदेश देता है।
7. निम्नलिखित वाक्यों की सप्रसंग व्याख्या करें-
(क) "अरे ओ बुद्धन, तू जान बूझकर सोया था न? मेरा लड़का मर जाता और तुझे परवाह नहीं थी?"
(ख) "वह सोच रहा था कि काश! वह किसी ऊँची जाति में पैदा हुआ होता।"
(क) सप्रसंग व्याख्या: यह वाक्य हरकत सिंह द्वारा बुद्धन से कहा गया है। जब बुद्धन दवा लेकर लौटता है और देरी का कारण बताता है कि वह थककर सो गया था, तो हरकत सिंह का क्रोध फूट पड़ता है। इस वाक्य में हरकत सिंह का जातिगत अहंकार और क्रूरता स्पष्ट झलकती है। वह बुद्धन पर जानबूझक� लापरवाही करने का आरोप लगाता है, जबकि सच्चाई यह है कि बुद्धन ने तेजी से साइकिल चलाकर दवा लाने का पूरा प्रयास किया था। हरकत सिंह के लिए बुद्धन की थकान या परिश्रम का कोई मूल्य नहीं है। वह उसे एक 'नीची जाति' का सेवक समझता है, इसलिए उसके प्रति संवेदनशील होना उसकी नजर में अनावश्यक है।
(ख) सप्रसंग व्याख्या: यह वाक्य बुद्धन की मनःस्थिति को दर्शाता है। हरकत सिंह द्वारा मार-पीट और अपमान सहने के बाद बुद्धन के मन में यह विचार आता है। यह वाक्य एक दलित युवक की मानसिक पीड़ा, हताशा और सामाजिक व्यवस्था के प्रति उसकी विवशता को व्यक्त करता है। बुद्धन जानता है कि उसके साथ यह दुर्व्यवहार केवल इसलिए हो रहा है क्योंकि उसका जन्म एक निम्न जाति में हुआ है। उसकी मेहनत, ईमानदारी और इंसानियत का कोई मूल्य नहीं है। इस कारण वह एक कल्पनिक दुनिया में शरण लेता है और सोचता है कि अगर वह किसी ऊँची जाति में पैदा हुआ होता तो आज उसके साथ ऐसा नहीं होता। यह विचार उसकी गहरी मनोवैज्ञानिक चोट और सामाजिक अन्याय के प्रति विरोध की मूक अभिव्यक्ति है।
बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)
1. 'विष के दाँत' कहानी के लेखक कौन हैं?
A) प्रेमचंद
B) मोहन राकेश
C) अमरकांत
D) फणीश्वरनाथ 'रेणु'
2. हरकत सिंह की जाति क्या थी?
A) राजपूत
B) भूमिहार
C) ब्राह्मण
D) कायस्थ
3. बुद्धन हरकत सिंह के घर क्या काम करता था?
A) नौकर
B) खेतिहर मजदूर
C) रसोइया
D) मजदूरी (सामान्य श्रमिक)
4. हरकत सिंह ने बुद्धन को शहर क्यों भेजा?
A) सामान खरीदने के लिए
B) बीमार बेटे की दवा लाने के लिए
C) रिश्तेदार के यहाँ संदेश भेजने के लिए
D) पैसे लेने के लिए
5. बुद्धन को हरकत सिंह ने किस बात का आरोप लगाया?
A) चोरी का
B) झूठ बोलने का
C) जानबूझकर देरी करने और लापरवाही का
D) दवा गुम कर देने का
6. 'विष के दाँत' कहानी किस सामाजिक बुराई पर केंद्रित है?
A) भ्रष्टाचार
B) नशाखोरी
C) जातिवाद और छुआछूत
D) बाल श्रम
छा नहीं है, ऐसे ही लड़के आगे चलकर गुण्डे, चोर और डाकू बनते हैं। गिरधारी लाल तो जी हाँ, जी हाँ कहने में ही लगा हुआ था। ऐसी सीख देते हुए सेन साहब गिरधरी लाल को बच्चे को सँभालने और शरारत छोड़ने की सीख देते हुए चले गए। यह प्रसंग उसी वक्त का है।
इन पंक्तियों में सेन साहब के चरित्र के दोगलेपन का स्पष्ट चित्रण है। एक ओर वे अपने अनुशासनहीन बेटे खोखा (काशू) को इंजीनियर बनाने का सपना देखते हैं और उसकी गलतियों को अनदेखा करते हैं। दूसरी ओर, गिरधारी लाल के बेटे मदन की सामान्य बाल-शरारत को भी बड़ा अपराध बताकर उसे बिगड़ैल बताते हैं। यह समाज के उस मध्यवर्गीय दोगलेपन को दर्शाता है जहाँ अपने बच्चों के दोषों पर पर्दा डाला जाता है, लेकिन गरीब और निर्बल के बच्चों में छोटी-छोटी बातों में भी कुलक्षण दिखाई देते हैं।
(घ) हंस कौओं की जमात में शामिल होने के लिए ललक गया।
उत्तर-
इस पंक्ति का प्रसंग कहानी के उस भाग से है जब सेन साहब का बेटा खोखा (काशू) शाम के समय बँगले के बाहर गली में जाता है। वहाँ वह देखता है कि गिरधारी लाल का बेटा मदन और अन्य आवारा लड़के धूल में लटू खेल रहे हैं। खोखा भी उस खेल में शामिल होने के लिए ललचा जाता है। यहाँ 'हंस' संपन्न और उच्च वर्ग के प्रतीक खोखा के लिए है, जबकि 'कौओं की जमात' गरीब और सामान्य परिवार के बच्चों के लिए है। लेखक इस रूपक के माध्यम से समाज में व्याप्त वर्गभेद और ऊँच-नीच की भावना को दर्शाता है। खोखा का उस खेल में शामिल होने की इच्छा दिखाती है कि बचपन में यह भेद नहीं होता, लेकिन समाज और परिवार इन्हें बनाए रखते हैं। मदन द्वारा खोखा को वहाँ से भगा देना इसी सामाजिक दीवार को दिखाता है।
प्रश्न 6. सेन साहब के और उनके मित्रों के बीच क्या बातचीत हुई और पत्रकार मित्र ने उन्हें किस तरह उत्तर दिया?
उत्तर-
एक दिन सेन साहब के ड्राइंग रूम में कुछ मित्र बैठे थे। उनमें से एक पत्रकार थे, जो सेन साहब के दूर के रिश्तेदार भी थे। उनका अपना एक छोटा बच्चा भी साथ था, जो खोखा से छोटा था लेकिन बहुत समझदार और होनहार लगता था। किसी मित्र ने उस बच्चे की तारीफ करते हुए पत्रकार साहब से पूछा कि क्या बच्चा स्कूल जाता है? इससे पहले कि पत्रकार जवाब देते, सेन साहब ने बात काटकर कहना शुरू कर दिया कि वे अपने खोखा को इंजीनियर बनाने जा रहे हैं और अपने बेटे की बड़ाई करने लगे। पत्रकार साहब चुपचाप मुस्कुराते रहे। जब उनसे दोबारा उनके अपने बेटे के भविष्य के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा, "मैं चाहता हूँ कि वह जेंटिलमैन जरूर बने और जो कुछ बने, उसका काम है, उसे पूरी आजादी रहेगी।" इस उत्तर में एक शिष्ट लेकिन पैने व्यंग्य छिपा था, जो सेन साहब की जबरन थोपी गई महत्वाकांक्षाओं पर चोट करता था। सेन साहब इस व्यंग्य को समझ गए और चुप होकर रह गए।
प्रश्न 7. मदन और ड्राइवर के बीच के विवाद के द्वारा कहानीकार क्या बताना चाहता है ?
उत्तर-
इस विवाद के माध्यम से कहानीकार समाज में व्याप्त सामंती मानसिकता और वर्ग-भेद को उजागर करना चाहता है। मदन एक गरीब कर्मचारी का बच्चा है। सेन साहब की नई कार को केवल छूने भर के 'अपराध' पर, ड्राइवर ने उसे बेरहमी से धक्का दे दिया, जिससे उसे चोट लग गई। यह घटना दिखाती है कि संपन्न वर्ग के पास थोड़ी सी भी शक्ति या अधिकार (जैसे ड्राइवर का) आते ही वह गरीब और कमजोर लोगों के प्रति कितनी क्रूरता दिखा सकता है। ड्राइवर की यह प्रतिक्रिया उस सोच का प्रतीक है जो धन और हैसियत को व्यक्ति की गरिमा से ऊपर मानती है।
प्रश्न 8. काशू और मदन के बीच झगड़े का कारण क्या था ? इस प्रसंग के द्वारा लेखक क्या दिखाना चाहता है ?
उत्तर-
झगड़े का तत्कालिक कारण यह था कि काशू ने मदन से उसका लटू (लट्टू) माँगा। मदन ने देने से इनकार कर दिया, जिस पर काशू ने उसे मारा और फिर मदन ने भी जवाबी प्रहार किया।
लेखक इस प्रसंग के माध्यम से दो महत्वपूर्ण बातें दिखाना चाहता है:
- बचपन की निर्भीकता: छोटी उम्र में बच्चों में सामाजिक ऊँच-नीच या डर का भाव नहीं होता। मदन ने अपने से संपन्न और 'ऊँचे' घर के बच्चे काशू के सामने झुकने या डरने के बजाय उसी की भाषा में जवाब दिया।
- स्वाभिमान की भावना: यह दृश्य दर्शाता है कि दमन और अत्याचार की एक सीमा होती है। मदन का प्रतिकार उसके अंदर के जाग्रत स्वाभिमान और अन्याय के प्रति विद्रोह का प्रतीक है।
प्रश्न 9. महल और झोपड़ी वालों की लड़ाई में अक्सर महल वाले ही जीतते हैं, पर उसी हालत में जब दूसरे झोपड़ी वाले उनकी मदद अपने ही खिलाफ करते हैं। लेखक के इस कथन को कहानी से एक उदाहरण देकर पुष्टि कीजिए।
उत्तर-
लेखक के इस कथन की पुष्टि कहानी की दो घटनाओं से होती है:
- पहली घटना (महल वाले की जीत): जब मदन ने सेन साहब की नई कार को केवल छू लिया, तो न केवल ड्राइवर ने उसे धक्का दिया, बल्कि उसके अपने पिता गिरधर लाल ने भी सेन साहब के डर से मदन की पिटाई कर दी। यहाँ 'झोपड़ी वाला' (गिरधर) 'महल वाले' (सेन) की मदद अपने ही बेटे के खिलाफ करता है, जिससे महल वाले की जीत होती है।
- दूसरी घटना (झोपड़ी वाले की जीत): अगले दिन जब काशू और मदन की लड़ाई होती है, तो इस बार गिरधर लाल ने अपने बेटे का साथ दिया। मदन ने काशू के दाँत तोड़ दिए और गिरधर ने गर्व से मदन को छाती से लगा लिया। यहाँ 'झोपड़ी वाले' ने एकजुट होकर 'महल वाले' का मुकाबला किया, जिसके परिणामस्वरूप झोपड़ी वाले की जीत हुई। यह उदाहरण लेखक के कथन को सही सिद्ध करता है।
प्रश्न 10. रोज-रोज अपने बेटे मदन की पिटाई करने वाला गिरधर मदन द्वारा काशू की पिटाई करने पर उसे दंडित करने के बजाय अपनी छाती से क्यों लगा लेता है ?
उत्तर-
गिरधर लाल एक गरीब कर्मचारी था जो सेन साहब पर निर्भर था और उनके डर से हमेशा उनकी बात मानने को विवश था। इसीलिए जब भी सेन साहब मदन की शिकायत करते, गिरधर मजबूरी में उसकी पिटाई कर देता था।
लेकिन जब मदन ने काशू के अहंकार और दुर्व्यवहार का साहसपूर्वक जवाब देते हुए उसकी पिटाई कर दी और उसके दाँत तोड़ दिए, तो गिरधर के अंदर का दबा हुआ स्वाभिमान और गर्व जाग उठा। उसे लगा कि उसका बेटा वह कर दिखाया जो वह स्वयं अपनी मजबूरी के कारण नहीं कर पाया था—अन्याय का डटकर सामना करना। मदन का यह साहसी कदम गिरधर के लिए प्रतिशोध और आत्मसम्मान की जीत थी। इसीलिए उसने मदन को दंडित करने के बजाय गर्व और उल्लास से अपनी छाती से लगा लिया।
प्रश्न 11. सेन साहब, मदन, काशू और गिरधर का चरित्र-चित्रण करें।
उत्तर-
1. सेन साहब:
- वे कहानी के प्रमुख पात्रों में से एक हैं जो एक संपन्न, मध्यवर्गीय उद्योगपति हैं।
- उनमें दिखावा और ऊपरी आडंबर की प्रवृत्ति बहुत अधिक है।
- वे सामंती मानसिकता के धनी हैं, जो गरीबों और नौकरों को हेय दृष्टि से देखते हैं।
- अपने एकमात्र बेटे काशू के प्रति अंधा प्यार और महत्वाकांक्षा रखते हैं, उसे इंजीनियर बनाने का सपना देखते हैं, लेकिन उसकी शरारतों और अनुशासनहीनता पर आँखें मूंद लेते हैं।
- उनका चरित्र दोगलेपन को दर्शाता है—अपने बेटे की प्रशंसा करते हैं और दूसरे के बेटे में दोष ढूँढ़ते हैं।
- मदन गिरधर लाल का बेटा है, जो सेन साहब के यहाँ काम करता है और उन्हीं के परिसर में रहता है।
- वह एक साहसी, निर्भीक और जीवंत बालक है।
- उसमें बाल-सुलभ शरारतें और उत्साह है।
- वह सामाजिक भेदभाव और अन्याय को स्वीकार नहीं करता। काशू द्वारा मारे जाने पर वह डटकर उसका जवाब देता है, जो उसके स्वाभिमान और विद्रोही चेतना का प्रतीक है।
- मदन का चरित्र दमित वर्ग के प्रतिरोध और आत्मसम्मान का प्रतिनिधित्व करता है।
- काशू सेन साहब का इकलौता बेटा है, जिसे घर में बहुत लाड़-प्यार मिला है।
- अत्यधिक लाड़ के कारण वह बिगड़ैल, शरारती और अनुशासनहीन हो गया है।
- उसमें अहंकार और वर्गीय श्रेष्ठता की भावना घर के माहौल से आ गई है। वह मदन जैसे गरीब बच्चों को हेय दृष्टि से देखता है।
- वह कहानी का वह पात्र है जिसके माध्यम से 'विष' (सामाजिक विषैली मानसिकता) फैलती है।
- गिरधर सेन साहब की फैक्ट्री में एक साधारण कर्मचारी (किरानी) है और उन्हीं के बँगले के एक कोने के छोटे से क्वार्टर में रहता है।
- वह सीधा-सादा, मेहनती और शांत स्वभाव का व्यक्ति है।
- आजीविका और डर के कारण वह सेन साहब की हर बात मानने और उनका गुस्सा झेलने को विवश है, जिसके चलते वह बेबस होकर अपने बेटे मदन को भी पीटता है।
- लेकिन अंत में जब मदन अन्याय का प्रतिकार करता है, तो गिरधर के अंदर का दबा हुआ गर्व और संतोष प्रकट होता है और वह मदन को गले लगा लेता है। उसका चरित्र शोषित वर्ग की मजबूरी और अंतर्निहित गरिमा दोनों को दर्शाता है।
बिहार बोर्ड - हिंदी (गोधूलि भाग 2) गद्य खण्ड
पाठ 2: विष के दाँत (कहानी)
1. लेखक ने किस आधार पर कहा है कि आज के युग में प्रेमचंद की प्रासंगिकता बढ़ गई है?
लेखक का मानना है कि प्रेमचंद की प्रासंगिकता इसलिए बढ़ गई है क्योंकि आज का समाज भी उन समस्याओं से जूझ रहा है जिन्हें प्रेमचंद ने अपनी कहानियों में उठाया था। आज भी गरीबी, शोषण, सामाजिक विषमता और नैतिक मूल्यों का ह्रास जैसे मुद्दे मौजूद हैं। प्रेमचंद ने सामान्य जन के संघर्ष और उनकी मानवीय गरिमा को केंद्र में रखकर लिखा, जो आज के युग में और भी अधिक प्रासंगिक लगता है। उनकी रचनाएँ समाज को एक दर्पण दिखाती हैं और सही दिशा का संकेत देती हैं।
2. 'विष के दाँत' कहानी का सारांश अपने शब्दों में लिखें।
यह कहानी एक गरीब किसान परिवार के संघर्ष और सामंतशाही के शोषण को दर्शाती है। कहानी का मुख्य पात्र धनिया है, जिसकी एकमात्र संपत्ति उसकी गाय है। जमींदार के लड़के उसकी गाय को जानबूझकर मार देते हैं, जो परिवार के लिए आजीविका का साधन थी। धनिया और उसका पति सूरज कानूनी लड़ाई लड़ने का साहस जुटाते हैं, लेकिन अदालत में गरीब की नहीं सुनी जाती। अंततः, न्याय न मिलने की स्थिति में, सूरज जमींदार के लड़के को मार देता है, जो दर्शाता है कि जब व्यवस्था न्याय नहीं देती, तो पीड़ित विद्रोह पर उतर आता है। कहानी शोषण, अन्याय और गरीब के प्रतिरोध की मार्मिक गाथा है।
3. 'विष के दाँत' कहानी के आधार पर जमींदार प्रथा पर प्रकाश डालें।
'विष के दाँत' कहानी के माध्यम से जमींदार प्रथा के क्रूर और शोषणकारी स्वरूप का पता चलता है। इस प्रथा में जमींदारों के पास अत्यधिक शक्ति और संपत्ति होती थी, जबकि किसान गरीबी और भय में जीते थे। जमींदार और उनके परिवार वाले किसानों पर अत्याचार करते थे, उनकी संपत्ति नष्ट कर देते थे और कानूनी व्यवस्था को अपने पक्ष में मोड़ लेते थे। कहानी में जमींदार के लड़के द्वारा धनिया की गाय को मार देना और फिर अदालत में बेगुनाह साबित हो जाना, इस प्रथा की विषमता को स्पष्ट करता है। यह प्रथा समाज में विष का काम करती थी, जिसके 'दाँत' गरीबों को लगातार काटते रहते थे।
4. 'विष के दाँत' कहानी के आधार पर धनिया का चरित्र-चित्रण करें।
धनिया एक साहसी, मेहनती और स्वाभिमानी ग्रामीण महिला का प्रतीक है। वह गरीब है, लेकिन उसके अंदर अपने अधिकारों के प्रति जागरूकता है। उसकी गाय उसके परिवार की रीढ़ की हड्डी है, और उसे खोने का दुःख वह सहन नहीं कर पाती। वह केवल रोने-धोने वाली नारी नहीं, बल्कि अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने वाली स्त्री है। वह अपने पति सूरज को न्याय की लड़ाई लड़ने के लिए प्रेरित करती है। हालाँकि अंत में न्याय नहीं मिलता, लेकिन धनिया का संघर्ष और दृढ़ता उसे कहानी की एक शक्तिशाली नायिका बना देती है। उसका चरित्र गरीबी में भी इंसानी गरिमा और प्रतिरोध की भावना को दर्शाता है।
5. निम्नलिखित वाक्यों की व्याख्या करें:
(क) "गाय ही हमारी माँ है, गाय ही बाप है, गाय ही हमारा सब कुछ है।"
(ख) "अदालत में गरीब आदमी की कौन सुनता है?"
(क) "गाय ही हमारी माँ है, गाय ही बाप है, गाय ही हमारा सब कुछ है।"
इस वाक्य के माध्यम से एक गरीब किसान परिवार के लिए गाय के महत्व को दर्शाया गया है। गाय उनके लिए केवल एक पशु नहीं, बल्कि जीवन का आधार है। वह दूध देकर परिवार का पेट भरती है, खेती में मदद करती है और उसके गोबर से खाद बनती है। इस तरह, गाय उनकी पालनहार (माँ) और रक्षक (बाप) दोनों की भूमिका निभाती है। गाय के बिना उनका जीवन असंभव सा लगता है, यही कारण है कि वह उनके लिए "सब कुछ" है।
(ख) "अदालत में गरीब आदमी की कौन सुनता है?"
यह वाक्य उस समय की न्यायिक व्यवस्था पर एक तीखा प्रहार है। इसका अर्थ है कि अदालतें अमीर और शक्तिशाली लोगों के पक्ष में काम करती थीं। गरीब आदमी के पास न तो पैसा होता था, न ही दबाव डालने की ताकत, इसलिए उसकी बात को गंभीरता से नहीं सुना जाता था। कानूनी प्रक्रिया लंबी और खर्चीली होती थी, जिसे गरीब वहन नहीं कर सकता था। इस वाक्य में समाज में व्याप्त आर्थिक विषमता और न्याय के अभाव की पीड़ा व्यक्त हुई है।
6. सही विकल्प चुनें-
(i) 'विष के दाँत' कहानी के लेखक हैं-
(A) प्रेमचंद
(B) यशपाल
(C) जयशंकर प्रसाद
(D) महादेवी वर्मा
सही उत्तर: (A) प्रेमचंद
(ii) धनिया की गाय को किसने मारा था?
(A) सूरज ने
(B) जमींदार ने
(C) जमींदार के लड़के ने
(D) पड़ोसी ने
सही उत्तर: (C) जमींदार के लड़के ने
(iii) 'विष के दाँत' कहानी में किस सामाजिक समस्या को उजागर किया गया है?
(A) शिक्षा की समस्या
(B) जमींदारी शोषण की समस्या
(C) बेरोजगारी की समस्या
(D) नगरीकरण की समस्या
सही उत्तर: (B) जमींदारी शोषण की समस्या
(iv) प्रेमचंद का जन्म कब हुआ था?
(A) 31 जुलाई, 1880
(B) 31 जुलाई, 1885
(C) 31 जुलाई, 1890
(D) 31 जुलाई, 1895
सही उत्तर: (A) 31 जुलाई, 1880
बिहार बोर्ड - हिंदी (गोधूलि भाग 2) गद्य खण्ड
पाठ 2: विष के दाँत (कहानी)
1. लेखक ने किस घटना को ‘विष के दाँत’ कहा है और क्यों?
लेखक ने साम्प्रदायिक दंगे की घटना को ‘विष के दाँत’ कहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि साम्प्रदायिकता का जहर समाज में फैलकर लोगों के दिलों में नफरत और हिंसा के बीज बोता है, जो एक बार फूटने पर पूरे समाज को विषाक्त कर देता है। यह विष ठीक उसी तरह काम करता है जैसे किसी जहरीले साँप के दाँत, जो शरीर में जहर घोलकर उसे नष्ट कर देते हैं। यह घटना मानवता के लिए एक घातक जहर के समान है जो भाईचारे और सद्भाव को नष्ट कर देती है।
2. साम्प्रदायिक दंगों की जड़ में कौन-कौन से कारण होते हैं?
साम्प्रदायिक दंगों की जड़ में निम्नलिखित कारण प्रमुख रूप से होते हैं:
(क) राजनीतिक स्वार्थ: कुछ स्वार्थी राजनीतिक तत्व वोट बैंक की राजनीति करते हुए धर्म के नाम पर लोगों को भड़काते हैं।
(ख) सामाजिक कटुता एवं पूर्वाग्रह: समाज में एक धर्म के लोगों के मन में दूसरे धर्म के प्रति गलत धारणाएँ और पूर्वाग्रह होते हैं।
(ग) आर्थिक असमानता एवं ईर्ष्या: एक समुदाय की आर्थिक प्रगति से दूसरे समुदाय में ईर्ष्या और असुरक्षा की भावना पनपती है।
(घ) धार्मिक कट्टरता: धार्मिक अन्धविश्वास और कट्टरपंथी विचारधारा लोगों को संकीर्ण बना देती है।
(ङ) प्रचार माध्यमों का दुष्प्रयोग: अफवाहें और भड़काऊ भाषण फैलाकर सामान्य जनता को उकसाया जाता है।
3. ‘विष के दाँत’ कहानी का सारांश अपने शब्दों में लिखें।
‘विष के दाँत’ कहानी साम्प्रदायिक सद्भाव और उसके टूटने की मार्मिक गाथा है। कहानी एक ऐसे शहर की पृष्ठभूमि में शुरू होती है जहाँ हिन्दू और मुसलमान दोनों समुदाय शान्तिपूर्वक साथ-साथ रहते आए हैं। लेकिन कुछ स्वार्थी तत्वों द्वारा फैलाई गई एक छोटी-सी अफवाह सम्पूर्ण वातावरण को विषाक्त कर देती है। अचानक शहर में साम्प्रदायिक दंगे भड़क उठते हैं। लेखक इन हिंसक घटनाओं का सजीव चित्रण करते हैं, जहाँ पागल हिंसक भीड़ घरों और दुकानों को लूटती और जलाती है, निर्दोष लोग मारे जाते हैं। कहानी के माध्यम से लेखक यह दिखाते हैं कि कैसे सदियों पुराना भाईचारा क्षण भर में नफरत की भेंट चढ़ जाता है और समाज ‘विष के दाँत’ यानी साम्प्रदायिकता के जहर से जर्जर हो जाता है। अंत में, दंगा शमन के बाद का मार्मिक दृश्य दिखाया गया है, जहाँ लोग अपने खोए हुए प्रियजनों को ढूँढ रहे हैं और शहर सन्नाटे में डूबा है।
4. साम्प्रदायिक सद्भाव बनाए रखने के लिए हम क्या-क्या उपाय कर सकते हैं?
साम्प्रदायिक सद्भाव बनाए रखने के लिए हम निम्नलिखित उपाय कर सकते हैं:
(क) शिक्षा एवं जागरूकता: बच्चों को स्कूल स्तर से ही धार्मिक सहिष्णुता, एकता और मानवीय मूल्यों की शिक्षा देनी चाहिए।
(ख) सामूहिक सांस्कृतिक कार्यक्रम: विभिन्न समुदायों द्वारा मिल-जुलकर त्योहार मनाने और सांस्कृतिक आदान-प्रदान से आपसी समझ बढ़ती है।
(ग) कानून का सख्ती से पालन: दंगा भड़काने वाले और हिंसा फैलाने वाले तत्वों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई त्वरित और कठोर होनी चाहिए।
(घ) मीडिया की सकारात्मक भूमिका: समाचार पत्र और टीवी चैनलों को साम्प्रदायिक सौहार्द बढ़ाने वाली खबरें प्रसारित करनी चाहिए, न कि भड़काऊ समाचार।
(ङ) नेतृत्व की जिम्मेदारी: धार्मिक व राजनीतिक नेताओं को जनता को एकता का संदेश देना चाहिए और विभाजनकारी बयानबाजी से बचना चाहिए।
(च) आपसी संवाद: विभिन्न समुदायों के बीच नियमित संवाद और बैठकें होनी चाहिए ताकि गलतफहमियाँ दूर हो सकें।
5. बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)
i. ‘विष के दाँत’ कहानी के लेखक कौन हैं?
A. प्रेमचंद
B. फणीश्वरनाथ ‘रेणु’
C. यशपाल
D. भीष्म साहनी
ii. साम्प्रदायिक दंगों की शुरुआत अक्सर किससे होती है?
A. आर्थिक मंदी से
B. एक छोटी सी अफवाह से
C. प्राकृतिक आपदा से
D. खेल प्रतियोगिता से
iii. ‘विष के दाँत’ कहानी में दंगे के बाद शहर का वातावरण कैसा था?
A. सन्नाटा और डर छाया हुआ
B. उत्सव जैसा
C. सामान्य
D. व्यस्त
iv. साम्प्रदायिक सद्भाव बनाए रखने का सबसे प्रभावी उपाय क्या है?
A. पुलिस बल बढ़ाना
B. कर्फ्यू लगाना
C. शिक्षा और आपसी संवाद को बढ़ावा देना
D. सोशल मीडिया बंद करना
v. लेखक के अनुसार, ‘विष के दाँत’ किसका प्रतीक है?
A. गरीबी का
B. बीमारी का
C. साम्प्रदायिक नफरत और हिंसा का
D. प्रदूषण का
(क) पाठ और लेखक का नामोल्लेख करें।
उत्तर:
पाठ का नाम - विष के दाँत
लेखक का नाम - नलिन विलोचन शर्मा
(ख) गिरिधर निष्ठरता के साथ आगे बढ़कर क्यों ठिठक गया?
उत्तर:
गिरधर गुस्से में मदन को मारने के लिए आगे बढ़ा था। लेकिन अचानक उसे याद आया कि सेन साहब की नौकरी अब उसके पास नहीं है। जिस सेन साहब के लड़के के कारण वह मदन को डाँट रहा था, अब उसका कोई डर नहीं रहा। यह सोचकर उसका गुस्सा ठंडा पड़ गया और वह ठिठक गया।
(ग) मदन हक््का-बक्का क्यों हो गया ?
उत्तर:
मदन हमेशा अपने पिता गिरधर से डाँट और मार ही खाता था। जब गिरधर ने अचानक गुस्सा छोड़कर उसे प्यार से हाथों में उठा लिया, तो पिता के इस अचानक बदले हुए व्यवहार को देखकर मदन हैरान और चकित रह गया। उसे समझ नहीं आ रहा था कि ऐसा क्यों हुआ।
(घ) गिरधर ने बेटे मदन को शाबासी क्यों दी? मदन एकाएक गिरिधर के लिए प्यारा क्यों बन गया ?
उत्तर:
गिरधर ने मदन को शाबाशी इसलिए दी क्योंकि मदन ने वह काम कर दिखाया जो गिरधर स्वयं नहीं कर पाया था। सेन साहब के बेटे खोखा के दो दाँत तोड़कर मदन ने गिरधर के मन में छिपे हुए दबे आक्रोश और गुस्से को बाहर निकाल दिया था। नौकरी जाने के बाद सेन साहब का डर खत्म हो गया था, और मदन का यह कार्य गिरधर को बहुत अच्छा लगा। इसलिए मदन अचानक उसका प्यारा बन गया।
वस्तुनिष्ठ प्रश्न सही विकल्प चुनें-
प्रश्न 1. विष के दाँत कहानी के रचयिता कौन हैं ?
(क) अमरकांत
(ख) विनोद कुमार शुक्ल
(ग) नलिन विलोचन शर्मा
(घ) यतीद्द्र मिश्रा
उत्तर: (ग) नलिन विलोचन शर्मा
प्रश्न 2. खोखा का दूसरा नाम क्या था?
(क) मदन
(ख) गिरधर
(ग) काशू
(घ) आलो
उत्तर: (ग) काशू
प्रश्न 3. मदन किसका पुत्र था?
(क) सेन साहब
(ख) गिरधर
(ग) शोफर
(घ) सिंह साहब
उत्तर: (ख) गिरधर
प्रश्न 4. विष के दाँत कैसी कहानी है?
(क) सामाजिक
(ख) ऐतिहासिक
(ग) धार्मिक
(घ) मनोवैज्ञानिक
उत्तर: (घ) मनोवैज्ञानिक
प्रश्न 5. “विष के दाँत' समाज के किस वर्ग की मानसिकता उजागर करती है ?
(क) उच्च वर्ग
(ख) निम्न वर्ग
(ग) मध्य वर्ग
(घ) निम्न-मध्य वर्ग
उत्तर: (ग) मध्य वर्ग
॥. रिक्त स्थानों की पूर्ति
प्रश्न 1. खोखा नाउम्मीद .......... की आँखों का तारा है।
उत्तर: बुढ़ापे
प्रश्न 2. सेन साहब को देखकर औरत ......... गई।
उत्तर: सहम
प्रश्न 3. मदन का ....... रुवन रुक गया था।
उत्तर: दम
प्रश्न 4. दूसरे लड़के जरा हटकर इस ......... युद्ध का मजा लेने लगे।
उत्तर: असमान
प्रश्न 5. मदन के लिए ...... खाना मामूली बात थी।
उत्तर: मार
प्रश्न 6. गिरधर ने लपककर मदन को ...... से उठा लिया।
उत्तर: हाथों
अतिलघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1. सेन साहब को कितनी लड़कियाँ थीं ? उनके क्या नाम थे?
उत्तर:
सेन साहब को कुल पाँच लड़कियाँ थीं। उनके नाम थे - सीमा, रजनी, आलो, शेफाली और आरती।
प्रश्न 2. सेन साहब की लड़कियाँ कठपुतलियाँ किस प्रकार थीं ?
अथवा, लेखक ने सेन साहब की लड़कियों को कठपुतलियाँ क्यों कहा है?
उत्तर:
लेखक ने सेन साहब की लड़कियों को कठपुतलियाँ इसलिए कहा है क्योंकि वे अपने माता-पिता के हर आदेश का बिना किसी सवाल के पालन करती थीं। उनकी अपनी कोई इच्छा या स्वतंत्रता नहीं थी, वे वही करती थीं जो उन्हें करने के लिए कहा जाता था, ठीक कठपुतलियों की तरह।
प्रश्न 3. खोखा सेन दम्पति की नाउम्मीद बुढ़ापे की आँखों का तारा क्यों था?
उत्तर:
खोखा सेन दम्पति के बुढ़ापे में पैदा हुआ संतान था। उसके जन्म के समय तक उन्हें लगने लगा था कि अब उनके घर कोई लड़का नहीं होगा। ऐसी नाउम्मीदी (निराशा) के बीच खोखा का जन्म हुआ, इसलिए वह उनकी आँखों का तारा बन गया।
प्रश्न 4. सेन साहब अपने 'खोखा” को क्या बनाना चाहते थे ?
उत्तर:
सेन साहब अपने बेटे खोखा को एक सफल इंजीनियर बनाना चाहते थे।
प्रश्न 5. गिरधर कौन था?
उत्तर:
गिरधर सेन साहब की फैक्ट्री में एक किरानी (क्लर्क) था।
प्रश्न 6. मदन ड्राइवर के बीच विवाद क्यों हुआ?
उत्तर:
विवाद इसलिए हुआ क्योंकि ड्राइवर के बार-बार मना करने के बावजूद मदन सेन साहब की कार को छू रहा था। ड्राइवर उसे रोकना चाहता था, जबकि मदन नहीं मान रहा था, इसी बात को लेकर दोनों के बीच झगड़ा हो गया।
प्रश्न 7. सेन साहब ने मदन की माँ को क्या हिदायत दी ?
उत्तर:
सेन साहब ने मदन की माँ को सख्त हिदायत दी कि वह मदन को समझाए कि भविष्य में वह कभी भी उनकी कार को हाथ न लगाए। अगर उसने ऐसा किया तो उसे सजा मिलेगी।
प्रश्न 8. काश और मदन की लड़ाई कैसी थी?
उत्तर:
काशू (खोखा) और मदन की लड़ाई बिल्कुल असमान थी। यह लड़ाई हड्डी और मांस की, बंगले के पिल्ले और गली के कुत्ते की लड़ाई जैसी थी, जहाँ एक पक्ष पूरी तरह से संरक्षित और दूसरा पक्ष लड़ने के लिए मजबूर था।
प्रश्न 9. झोपड़ी और महल की लड़ाई में अक्सर कौन जीतता है ?
उत्तर:
झोपड़ी और महल की लड़ाई में अक्सर महल वाले ही जीतते हैं, क्योंकि उनके पास ताकत, पैसा और सामाजिक सत्ता होती है।
प्रश्न 10. आलोचकों के अनुसार प्रयोगवाद का प्रारंभ किसकी कविताओं से हुआ था ?
उत्तर:
आलोचकों के अनुसार हिंदी साहित्य में प्रयोगवाद का वास्तविक प्रारंभ नलिन विलोचन शर्मा की कविताओं से हुआ माना जाता है।
विष के दाँत लेखक परिचय
नलिन विलोचन शर्मा का जन्म 18 फरवरी 1916 को पटना के बदरघाट में हुआ था। वे मूल रूप से भोजपुरी भाषी थे। उनके पिता महामहोपाध्याय पंडित रामावतार शर्मा संस्कृत और दर्शन के प्रसिद्ध विद्वान थे। नलिन जी की शिक्षा पटना कॉलेजिएट स्कूल से हुई और उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से संस्कृत तथा हिंदी में एम.ए. किया। उन्होंने आरा, राँची और अंत में पटना विश्वविद्यालय में प्राध्यापक के रूप में कार्य किया। सन् 1959 में वे पटना विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के अध्यक्ष बने और 12 सितंबर 1961 को उनकी मृत्यु तक इस पद पर रहे।
हिंदी साहित्य में उन्हें प्रयोगवाद का प्रवर्तक और एक नई आलोचना शैली का जनक माना जाता है। उनकी प्रमुख रचनाओं में आलोचना ग्रंथ 'दृष्टिकोण', 'साहित्य का इतिहास दर्शन', 'मानदंड' शामिल हैं। कहानी संग्रह के रूप में 'विष के दाँत' प्रसिद्ध है। उनकी कहानियों में मनोवैज्ञानिक गहराई पाई जाती है। वे कथ्य, शिल्प और भाषा सभी स्तरों पर नवीनता के समर्थक थे।
विष के दाँत (कहानी)
यह कहानी “विष के दाँत तथा अन्य कहानियाँ” नामक कहानी संग्रह से ली गई है। यह कहानी मध्यवर्ग के अनेक अंतर्विरोधों को उजागर करती है। कहानी का जैसा ठोस सामाजिक संदर्भ है, वैसा ही स्पष्ट मनोवैज्ञानिक आशय भी। आर्थिक कारणों से मध्यवर्ग के भीतर ही एक ओर सेन साहब जैसों की एक श्रेणी उभरती है जो अपनी महत्वाकांक्षा और सफेदपोशी के भीतर लिंग-भेद जैसे कुसंस्कार छिपाये हुए हैं, तो दूसरी ओर गिरधर जैसे नौकरीपेशा निम्न मध्यवर्गीय व्यक्ति की श्रेणी है जो अनेक तरह की थोपी गयी बंदिशों के बीच भी अपने अस्तित्व को बहादुरी एवं साहस के साथ बचाये रखने के लिए संघर्षरत है। यह कहानी सामाजिक भेद-भाव, लिंग-भेद, आक्रामक स्वार्थ की छाया में पलते हुए प्यार-दुलार के कुपरिणामों को उभारती हुई सामाजिक समानता एवं मानवाधिकार की महत्त्वपूर्ण बानगी पेश करती है।
पाठ का सारांश
“विष के दाँत” शीर्षक कहानी के लेखक श्री नलिन विलोचन शर्मा हैं। इस कहानी में लेखक ने सामंती मिजाज के एक धनवान परिवार और उसी पर आश्रित एक गरीब परिवार का चरित्र-चित्रण किया है। कहानी में सेन साहब और उनकी पत्नी को कड़े अनुशासन का पालन करने वाला दिखाया गया है। उनके परिवार में पाँच लड़कियों के बाद एक लड़के (खोखा) का जन्म होता है। लड़कियों पर अनुशासन की छड़ी बहुत कड़ी है, जिससे वे मानो मिट्टी की मूर्तियाँ बन चुकी हैं। वहीं लड़का सबसे छोटा है और सारा अनुशासन, घर का नियम-व्यवस्था सब कुछ उसके लिए फे है। लाड़-प्यार में वह बहुत शरारती हो चुका है। अभी उम्र पाँच वर्ष की है लेकिन वह नौकर, बहन आदि पर हाथ चला देता है।
एक दिन सेन साहब अपने दोस्तों के साथ ड्राइंग रूम में गपशप कर रहे थे। उनके एक पत्रकार मित्र भी थे, जिसके साथ उसका छोटा लड़का (काशू बाबू) भी था, जो खोखा के उम्र का ही था। बातचीत के क्रम में किसी ने उस लड़के के बारे में जानकारी चाही, बस सेन साहब अपने पुत्र खोखा के बारे में बोलने लगे कि उसे इंजीनियर बनाना है। सेन साहब का व्यवहार अपने पुत्र खोखा के लिए पूरी तरह बदल चुका था।
उन्हीं अहाते में गिरधर लाल रहता था। उसका छोटा लड़का मदन था, जो खोखा के उम्र का ही था। एक दिन खोखा ने मदन की गाड़ी तोड़ दी। रात में सेन साहब ने गिरधरलाल को बुलाकर काफी डाँटा। परिणामस्वरूप गिरधरलाल ने अपने बेटे मदन को खूब पीटा। रात में सोते वक्त सेन साहब मदन की रोने की आवाज सुनकर काफी खुश हुए।
अगले ही दिन खोखा खेलने के लिए बगल की गली में चला गया, जहाँ मदन और अन्य लड़के लटू नचा रहे थे। खोखा ने मदन से रौब में लटू माँगा। नहीं मिलने पर खोखा ने मदन पर घूँसा चला दिया। बदले में मदन ने भी घूँसा चला दिया और खोखा के दो दाँत टूट गए। यानी विष के दाँत टूट गए।
शब्दार्थ
बरसाती : पोर्टिको, छज्जा
नाज : गर्व, गुमान
तहजीब : सभ्यता, शिष्टाचार
शोफर : ड्राइवर, गाड़ी चालक
शामत : दुर्भाग्य, बदकिस्मती
सख्त : कड़ा, कठोर
ताकीद : जोर देकर कहना, चेतावनी
खोखा-खोखी : बच्चा-बच्ची (बाँग्ला शब्द)
फटकना : निकट आना, पास जाना
तमीज : विवेक, बुद्धि, शिष्टता
तालीम : शिक्षा, ज्ञान
सोसाइटी : शिष्ट समाज, भद्रलोक
ताल्लुक : संबंध
हकीकत : सच्चाई, वास्तविकता
आविर्भाव : उत्पत्ति, प्रकट होना
दुर्ललित : लाड़-प्यार में बिगड़ा हुआ
ट्रेंड : प्रशिक्षित, ढला हुआ
दूरदेशी : दूरदर्शिता, समझदारी
फरमाना : आग्रहपूर्वक कहना, आदेश देना
फिजूल : फालतू, व्यर्थ
वाकिफ : परिचित, जानकार
वाकया : घटना
हेसियत : स्तर, प्रतिष्ठा, सामर्थ्य, औकात
अखबारनवीस : पत्रकार
प्रच्छन्न : छिपा हुआ, गुप्त, अप्रकट
अदब : शिष्टता, सभ्यता
हिकमत : कौशल, योग्यता, चतुराई
रासत : विदाई, रुखसती
निःस्वार्थ : बिना किसी स्वार्थ के
बेयरा : खाना खिलाने वाला सेवक
चीत्कार : क्रंदन, आर्त होकर चीखना
शयनागार : शयनकक्ष, सोने का कमरा
खलल : विघ्न, बाधा, व्यवधान
कातर : आर्त, दुखी
खैरियत : कुशलक्षेम, भलाई
बेतरतीब : बेतरीका, अनगढ़, अव्यवस्थित
आपत्ति : एतराज, विरोध
मजाल : ताकत, हिम्मत, साहस
अक्ल : बुद्धि, समझ
दुर्दमनीय : मुश्किल से जिसका दमन किया जा सके
निष्ठुरता : क्रूरता, निर्ममता
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