Bihar Board Class 12th Hindi (हिन्दी) Chapter 7 ओ सदानीरा) Solutions

Here we have provided Solution for Chapter 7 ओ सदानीरा) of Hindi (हिन्दी) subject for Class 12th students of Bihar Board of Secondary Education. There are various chapters in this Hindi (हिन्दी) such as Chapter 2 उसने कहा था), Chapter 3 संपूर्ण क्रांति), Chapter 5 रोज), Chapter 7 ओ सदानीरा), Chapter 8 सिपाही की माँ), Chapter 9 प्रगीत और समाज) and Chapter 12 तिरिछ). Summary of the same is given below:

Board NameBihar Board of Secondary Education
ClassClass 12th
Content TypeSolution
Solution forClass 12th students
SubjectHindi (हिन्दी)
Chapter NameChapter 7 ओ सदानीरा)
Total Number of Chapter in this Subject7

Studying Bihar Board Class 12th Hindi (हिन्दी) Chapter 7 ओ सदानीरा) solution will help you higher marks in this subject but you need to follow best practices to achieve higher marks, which are given after solutions, go through them once.

Bihar Board Class 12th Hindi (हिन्दी) Chapter 7 ओ सदानीरा) Solutions

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ओ सदानीरा

1. 'ओ सदानीरा' कविता के कवि कौन हैं?

इस कविता के रचयिता जगदीश गुप्त जी हैं।

2. 'ओ सदानीरा' कविता में कवि ने किस नदी का वर्णन किया है?

इस कविता में कवि ने गंगा नदी का मनोहारी वर्णन किया है।

3. 'ओ सदानीरा' कविता में कवि ने गंगा को किस रूप में देखा है?

कवि ने गंगा को एक शाश्वत, जीवंत और पवित्र प्रवाह के रूप में देखा है। वह इसे केवल एक नदी नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, इतिहास और आस्था की साक्षी तथा जीवनदायिनी माता के रूप में चित्रित करते हैं।

4. 'ओ सदानीरा' कविता का प्रतिपाद्य लिखिए।

इस कविता का मुख्य विषय गंगा नदी की महिमा और उसका सांस्कृतिक-ऐतिहासिक महत्व है। कवि गंगा को 'सदानीरा' यानी सदैव बहने वाली कहकर उसकी शाश्वतता को दर्शाता है। वह गंगा को भारत की सभ्यता का आधार, लोगों की आस्था का केंद्र और प्रकृति की अद्भुत देन के रूप में प्रस्तुत करता है। कविता में गंगा के माध्यम से प्रकृति के सौंदर्य, जीवन के प्रवाह और सांस्कृतिक विरासत की अविच्छिन्नता का सुंदर चित्रण हुआ है।

5. 'ओ सदानीरा' कविता के आधार पर गंगा नदी के सौंदर्य का वर्णन कीजिए।

कवि के अनुसार गंगा नदी का सौंदर्य अद्वितीय और मनमोहक है। उसका जल सदैव शीतल, निर्मल और पवित्र बहता है। उसकी लहरें मंद-मंद बहती हुई एक मधुर संगीत सी रचती हैं। नदी के दोनों किनारों पर हरियाली, खेत और वनस्पतियाँ उसके सौंदर्य में चार चाँद लगाते हैं। सूर्य की किरणें जब इसके जल पर पड़ती हैं, तो वह चमकती हुई मोतियों की माला जैसी प्रतीत होती है। इस प्रकार गंगा का सौंदर्य प्राकृतिक, आध्यात्मिक और मन को शांति देने वाला है।

6. 'ओ सदानीरा' कविता के आधार पर गंगा नदी की विशेषताएँ लिखिए।

गंगा नदी की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

  • शाश्वत प्रवाह: वह सदानीरा है, यानी सदैव बहने वाली, कभी न सूखने वाली।
  • पवित्रता एवं आध्यात्मिक महत्व: हिंदू धर्म में इसे मोक्षदायिनी और पापनाशिनी माना जाता है।
  • सांस्कृतिक आधार: भारतीय सभ्यता और संस्कृति का विकास इसके तट पर हुआ है।
  • जीवनदायिनी: यह करोड़ों लोगों के जीवन का आधार है, जो कृषि, पेयजल आदि के लिए इस पर निर्भर हैं।
  • प्राकृतिक सौंदर्य: इसका निर्मल जल और शांत प्रवाह प्रकृति का अनुपम उपहार है।

7. 'ओ सदानीरा' कविता का सारांश लिखिए।

'ओ सदानीरा' कविता में कवि जगदीश गुप्त ने गंगा नदी की महिमा का गुणगान किया है। कवि गंगा को संबोधित करते हुए उसकी शाश्वतता, पवित्रता और सौंदर्य का वर्णन करता है। वह गंगा को भारतीय इतिहास और संस्कृति की साक्षी बताते हैं, जिसने सदियों से लोगों के दुःख-सुख देखे हैं। कवि के अनुसार गंगा का जल केवल पानी नहीं, बल्कि जीवन का प्रवाह, आस्था का प्रतीक और प्रकृति का वरदान है। यह कविता गंगा के प्रति श्रद्धा और प्रकृति प्रेम की भावना से ओत-प्रोत है।

8. 'ओ सदानीरा' कविता के आधार पर गंगा नदी के ऐतिहासिक महत्व का वर्णन कीजिए।

गंगा नदी का ऐतिहासिक महत्व अत्यंत गहरा और व्यापक है। प्राचीन काल से ही इस नदी के तट पर महत्वपूर्ण सभ्यताओं, नगरों और राज्यों का विकास हुआ है। कवि के अनुसार गंगा ने इतिहास के उत्थान-पतन, युद्ध-शांति और विभिन्न युगों के परिवर्तनों को अपने प्रवाह में देखा है। इसके किनारे ही प्राचीन शिक्षा के केंद्र (जैसे नालंदा, तक्षशिला), व्यापारिक मार्ग और सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र रहे हैं। इस प्रकार गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि भारत के गौरवशाली इतिहास की जीवंत धारा है।

9. 'ओ सदानीरा' कविता में कवि ने गंगा को किन-किन विशेषणों से विभूषित किया है?

कवि ने गंगा को अनेक सुंदर और अर्थपूर्ण विशेषणों से विभूषित किया है, जैसे:

  • सदानीरा: सदैव बहने वाली
  • पुण्यसलिला: पवित्र जल वाली
  • मोक्षदायिनी: मोक्ष देने वाली
  • जीवनदायिनी: जीवन प्रदान करने वाली
  • शांत और गंभीर: शांत स्वभाव वाली
ये विशेषण गंगा के प्राकृतिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहलुओं को उजागर करते हैं।

10. 'ओ सदानीरा' कविता का शीर्षक सार्थक है- स्पष्ट कीजिए।

बिल्कुल, 'ओ सदानीरा' कविता का शीर्षक पूर्णतः सार्थक और उपयुक्त है। 'सदानीरा' शब्द का अर्थ है 'सदैव बहने वाली'। गंगा नदी अपने निरंतर और अविरल प्रवाह के कारण सदियों से 'सदानीरा' कहलाती आई है। यह शीर्षक नदी की शाश्वतता, जीवंतता और अमरत्व को दर्शाता है। कविता की पंक्तियों में गंगा के इसी निरंतर प्रवाह, उसके ऐतिहासिक स्थायित्व और सांस्कृतिक अविच्छिन्नता का वर्णन किया गया है। इस प्रकार शीर्षक कविता के केंद्रीय भाव को पूरी तरह व्यक्त करता है।

प्रश्न 7. चंपारण में शिक्षा की व्यवस्था के लिए गाँधीजी ने क्या किया?

उत्तर-

गाँधीजी का मानना था कि चंपारण के ग्रामीणों की आर्थिक समस्याओं का स्थायी समाधान तभी संभव है जब उनके बच्चों को शिक्षित किया जाए। इसलिए उन्होंने शिक्षा के प्रसार के लिए ठोस कदम उठाए। उन्होंने तीन गाँवों—बड़हरवा, मधुबन और भितिहरवा—में आश्रम विद्यालयों की स्थापना की। इन विद्यालयों को चलाने के लिए उन्होंने अपने समर्पित सहयोगियों को नियुक्त किया। बड़हरवा में श्री बवनजी गोखले और उनकी पत्नी अवन्तिकाबाई गोखले ने जिम्मेदारी संभाली। मधुबन में नरहरिदास पारिख, कस्तूरबा गाँधी और महादेव देसाई ने कार्य किया। भितिहरवा आश्रम की देखभाल की जिम्मेदारी पहले डॉक्टर देव और सोपन जी को दी गई, और बाद में पुंडलिक जी को भेजा गया। कस्तूरबा गाँधी ने भी भितिहरवा में रहकर इन स्वयंसेवकों के कार्यों में सहयोग दिया।

प्रश्न 8. गाँधीजी के शिक्षा संबंधी आदर्श कया थे?

उत्तर-

गाँधीजी के लिए शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य था—व्यक्ति को सुसंस्कृत बनाना और उसका निष्कलुष चरित्र निर्माण करना। वे 'आचार्य पद्धति' के समर्थक थे, जिसमें बच्चे सद्गुणी और चरित्रवान शिक्षकों के सान्निध्य में रहकर ज्ञान प्राप्त करते हैं। उनके अनुसार, केवल अक्षर-ज्ञान इस लक्ष्य को प्राप्त करने का एक साधन मात्र था।

वे तत्कालीन शिक्षा पद्धति को 'खौफनाक और हैय' मानते थे, क्योंकि यह पद्धति बच्चों का सर्वांगीण विकास न करके केवल उन्हें रट्टू तोता बनाती थी, ताकि वे भविष्य में क्लर्क बन सकें। गाँधीजी 'औद्योगिक शिक्षा' के पक्षधर थे, जिसमें बच्चे जीविकोपार्जन के लिए आवश्यक हस्तकौशल सीख सकें। उनका यह विचार नहीं था कि पारंपरिक व्यवसायों में कोई कमी है, बल्कि वे चाहते थे कि नया ज्ञान प्राप्त करके लोग अपने पेशे और जीवन को और अधिक समृद्ध बना सकें।

प्रश्न 9. पुंडलीक जी कौन थे?

उत्तर-

पुंडलिक जी भितिहरवा आश्रम विद्यालय के एक समर्पित शिक्षक थे। गाँधीजी ने उन्हें सन् 1917 में बेलगाँव से चंपारण बुलाया था, ताकि वे ग्रामीण बच्चों को शिक्षित करें और स्थानीय लोगों का भय दूर करने में मदद करें।

पुंडलिक जी गाँधीजी के आदर्शों में दृढ़ विश्वास रखने वाले एक निडर व्यक्ति थे। एक घटना प्रसिद्ध है—उस समय एक रिवाज था कि जब कोई अंग्रेज अधिकारी (साहब) आता था, तो गाँव के मुखिया को उसके घोड़े की लगाम पकड़नी पड़ती थी। एक दिन जब एमन साहब (जो एक अत्याचारी अधिकारी थे) आए, तो पुंडलिक जी ने स्पष्ट मना कर दिया और कहा, "यदि उन्हें मुझसे मिलना है तो वे मेरी कक्षा में आ सकते हैं, मैं लगाम पकड़ने नहीं जाऊँगा।" इस प्रकार, पुंडलिक जी ने गाँधीजी से सीखी हुई निर्भीकता का पाठ पूरे गाँव को दिया। यही निर्भीकता चंपारण आंदोलन की सबसे बड़ी देन थी।

प्रश्न 10. गाँधीजी के चम्पारण के आन्दोलन की किन दो सीखों का उल्लेख लेखक ने किया है? इन सीखों को आज आप कितना उपयोगी मानते हैं?

उत्तर-

लेखक ने गाँधीजी के चंपारण आंदोलन से दो मुख्य सीखों का उल्लेख किया है: पहली निर्भीकता और दूसरी सत्य का आचरण

निर्भीकता: यह जीवन का एक अनिवार्य गुण है। बिना निर्भीकता के मनुष्य और पशु में अंतर कर पाना कठिन हो जाता है। सत्य की रक्षा और उसके प्रति अडिग रहने के लिए निर्भीकता आवश्यक है। ध्यान रहे, निर्भीक होना उद्दंड होना नहीं है। उद्दंडता एक नकारात्मक व्यवहार है, जबकि निर्भीकता एक सकारात्मक और साहसिक गुण है।

सत्य का आचरण: यह वह आधारशिला है जिस पर पूरा सामाजिक विश्वास और संसार का अस्तित्व टिका है। बिना तथ्यों की जाँच के कोई बात कहना या अफवाह फैलाना, सत्य के आचरण के विपरीत है। गाँधीजी कभी भी बिना जाँचे कोई बात नहीं कहते थे।

आज के संदर्भ में उपयोगिता: आज के युग में ये दोनों सीखें और भी अधिक प्रासंगिक हैं। सोशल मीडिया और तेजी से फैलने वाली खबरों के दौर में सत्य का आचरण बेहद जरूरी है ताकि गलत सूचना न फैले। वहीं, अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने, भ्रष्टाचार का विरोध करने और अपने अधिकारों के लिए लड़ने के लिए निर्भीकता की सख्त आवश्यकता है। इन गुणों के बिना एक न्यायपूर्ण और ईमानदार समाज की कल्पना नहीं की जा सकती।

प्रश्न 11. यह पाठ आपके समक्ष कैसे प्रश्न खड़े करता है?

उत्तर-

यह पाठ हमारे सामने पर्यावरण और मानवीय जिम्मेदारी से जुड़े गंभीर प्रश्न खड़े करता है। यह पाठ बताता है कि कैसे चंपारण की हरी-भरी, वनों से आच्छादित भूमि अंधाधुंध वनों की कटाई के कारण बंजर होती चली गई। इससे कई समस्याएँ पैदा हुईं:

  1. पर्यावरण असंतुलन: वृक्षों के कटने से मिट्टी की जल धारण करने की क्षमता कम हुई, जिससे नदियों में अचानक बाढ़ आने लगी।
  2. जलवायु परिवर्तन: हरियाली घटने से वर्षा की मात्रा में कमी आई।
  3. नदियों की दुर्दशा: गंडक, पंडई जैसी नदियाँ, जो कभी वनों की गोद में किलकारियाँ भरती थीं, अब सूखी और प्रदूषित हो गई हैं।

यह पाठ हमसे पूछता है कि क्या विकास के नाम पर हम प्रकृति का इस तरह शोषण जारी रख सकते हैं? क्या हमारी वर्तमान पीढ़ी आने वाली पीढ़ियों के लिए एक रहने लायक धरती छोड़ जाएगी? समाधान के रूप में, इस पाठ से हमें यह सीख मिलती है कि वनों की कटाई पर तत्काल रोक लगानी होगी और बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण करना होगा। गंडक घाटी जैसी योजनाएँ अन्य नदियों के लिए भी आवश्यक हैं।

प्रश्न 12. अर्थ स्पष्ट कीजिए

(क) वसुंधरा भोगी मानव और धर्मान्ध मानव एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।

उत्तर-

इस कथन का अर्थ है कि प्रकृति का शोषण करने वाला भौतिकवादी मनुष्य और अंधविश्वासी धर्मान्ध मनुष्य, दोनों ही पर्यावरण को नुकसान पहुँचाने में बराबर के भागीदार हैं। 'वसुंधरा भोगी मानव' वह है जो लालच में आकर जंगल काटता है, नदियों पर बाँध बनाकर उनका प्राकृतिक प्रवाह रोकता है। दूसरी ओर, 'धर्मान्ध मानव' वह है जो नदियों को 'माता' कहकर पूजता तो है, लेकिन उन्हीं में कूड़ा-करकट, पूजन की सामग्री और गंदगी डालकर उन्हें प्रदूषित कर देता है। दोनों ही अपने-अपने तरीके से प्रकृति का विनाश कर रहे हैं, इसलिए वे एक ही सिक्के के दो पहलू कहे गए हैं।

(ख) कैसी है चंपारण की यह भूमि? मानो विस्मृति के हाथों अपनी बड़ी से बड़ी विभूति को गँवा देने की प्रवृत्ति हमारे राष्ट्रीय चरित्र का हिस्सा बन गई है।

उत्तर-

लेखक यहाँ चंपारण की भूमि के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पतन पर दुख व्यक्त कर रहे हैं। चंपारण वह भूमि है जहाँ गाँधीजी ने अपना पहला बड़ा सत्याग्रह शुरू किया था और जो कभी हरे-भरे जंगलों और सुंदर नदियों से भरपूर थी। लेखक का कहना है कि आज यह भूमि उपेक्षा और भुला दिए जाने की मार झेल रही है। फिर वे एक व्यापक राष्ट्रीय समस्या की ओर इशारा करते हैं—हम भारतीयों की यह प्रवृत्ति कि हम 'विस्मृति' यानी भुलावे के शिकार हो जाते हैं और अपनी महान विरासत, प्राकृतिक धरोहर और ऐतिहासिक महापुरुषों की सीखों को भूलकर या नजरअंदाज करके गँवा देते हैं। लेखक कहते हैं कि यह दुर्भाग्यपूर्ण प्रवृत्ति हमारे राष्ट्रीय चरित्र का एक हिस्सा बन गई लगती है।

ओ सदानीरा

बिहार बोर्ड - हिन्दी (हिन्दी) कक्षा 12

1. ओ सदानीरा कविता के कवि कौन हैं?

उत्तर: इस कविता के रचयिता प्रसिद्ध साहित्यकार अज्ञेय (सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन) हैं। उन्हें हिंदी साहित्य में प्रयोगवाद के प्रमुख कवि के रूप में जाना जाता है।

2. अज्ञेय की कविता का मूल स्वर क्या है?

उत्तर: अज्ञेय की कविता का मूल स्वर आधुनिक जीवन की जटिलताओं, अस्तित्ववादी चिंतन, प्रकृति के सूक्ष्म बिंदुओं और मानवीय संवेदनाओं की गहन अभिव्यक्ति है। उनकी कविताएँ बौद्धिकता और कलात्मक प्रयोग से परिपूर्ण होती हैं।

3. 'ओ सदानीरा' कविता का प्रतिपाद्य लिखिए।

उत्तर: 'ओ सदानीरा' कविता में कवि ने एक सदा बहने वाली नदी को संबोधित किया है। यह नदी स्थिरता और गतिशीलता के द्वंद्व का प्रतीक है। कविता का मुख्य विचार यह है कि जिस नदी को हम सदा एक सी, अपरिवर्तित देखते हैं, वास्तव में वह क्षण-क्षण बदलती रहती है। यह परिवर्तन ही उसकी स्थिरता का रहस्य है। यह विचार मानव जीवन और समय की गतिशील प्रकृति पर भी लागू होता है।

4. 'ओ सदानीरा' कविता का सारांश लिखिए।

उत्तर: इस कविता में कवि एक सदानीरा (हमेशा बहने वाली) नदी से बातचीत करता हुआ प्रतीत होता है। वह नदी से कहता है कि तुम सदा एक सी दिखाई देती हो, लेकिन वास्तव में तुम्हारा प्रत्येक क्षण नया है। तुम्हारा पानी, तुम्हारी धारा, तुम्हारे किनारे - सब कुछ लगातार बदल रहा है। तुम्हारी यही निरंतर परिवर्तनशीलता ही तुम्हारी पहचान है। कवि इसके माध्यम से यह दर्शाना चाहता है कि संसार में स्थिर कुछ भी नहीं है, परिवर्तन ही शाश्वत नियम है, और जो चीज़ सदा बहती रहती है (जैसे नदी या समय), वही सदा नई और ताज़ा बनी रहती है।

5. निम्नलिखित में से सही विकल्प चुनिए-
(i) 'ओ सदानीरा' कविता के कवि हैं-
(क) नागार्जुन
(ख) केदारनाथ अग्रवाल
(ग) अज्ञेय
(घ) त्रिलोचन

उत्तर: (ग) अज्ञेय

(ii) 'ओ सदानीरा' कविता में कवि ने किससे संवाद किया है?
(क) पर्वत से
(ख) सागर से
(ग) नदी से
(घ) वृक्ष से

उत्तर: (ग) नदी से

(iii) 'ओ सदानीरा' कविता का मूल भाव है-
(क) प्रकृति प्रेम
(ख) परिवर्तनशीलता
(ग) देश प्रेम
(घ) रहस्यवाद

उत्तर: (ख) परिवर्तनशीलता

6. 'ओ सदानीरा' कविता में नदी किसका प्रतीक है?

उत्तर: 'ओ सदानीरा' कविता में नदी समय, जीवन की निरंतर गति और परिवर्तन के शाश्वत सिद्धांत का प्रतीक है। यह दिखने में एक सी लगती है, लेकिन इसका हर पल नया होता है, ठीक वैसे ही जैसे मानव जीवन और ब्रह्मांड की प्रक्रिया निरंतर चलायमान है।

7. 'ओ सदानीरा' कविता की विशेषताएँ लिखिए।

उत्तर: 'ओ सदानीरा' कविता की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

  1. प्रतीकात्मकता: पूरी कविता में नदी एक शक्तिशाली प्रतीक के रूप में प्रयुक्त हुई है।
  2. दार्शनिक चिंतन: कविता स्थिरता और परिवर्तन के गहन दार्शनिक विचार को प्रस्तुत करती है।
  3. संवाद शैली: कवि ने संवादात्मक शैली का प्रयोग करके कविता को जीवंत बना दिया है।
  4. सरल एवं कलात्मक भाषा: भाषा सहज होते हुए भी गहन अर्थों को व्यक्त करने में सक्षम है।
  5. आधुनिक बोध: कविता में प्रकृति चित्रण के साथ-साथ आधुनिक मन की जिज्ञासा और बौद्धिकता झलकती है।

ओ सदानीरा - प्रश्नोत्तर

1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
(क) ‘ओ सदानीरा’ कविता में कवि ने किस नदी का वर्णन किया है?

इस कविता में कवि ने कोसी नदी का वर्णन किया है। कोसी नदी बिहार के मैदानी इलाकों में बहने वाली एक प्रमुख नदी है, जो अपनी विनाशकारी बाढ़ों के लिए भी जानी जाती है। कवि ने इसके सौंदर्य और उसके द्वारा लाए जाने वाले परिवर्तन दोनों को ही चित्रित किया है।

(ख) कोसी नदी के तट पर कौन-कौन से पक्षी दिखाई देते हैं?

कोसी नदी के तट पर विभिन्न प्रकार के पक्षी दिखाई देते हैं। इनमें बगुला (बगला) और सारस प्रमुख हैं। ये पक्षी नदी के किनारे शांतिपूर्वक विचरण करते हुए, मछलियों का शिकार करते हैं या पानी के किनारे खड़े रहते हैं, जो नदी तट के प्राकृतिक दृश्य को सजीव बनाते हैं।

(ग) कोसी नदी के किनारे कौन-कौन से पेड़-पौधे उगते हैं?

कोसी नदी के उपजाऊ किनारों पर अनेक प्रकार के पेड़-पौधे उगते हैं। इनमें सरकंडा, बेंत और घास विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। ये पौधे नदी की नम मिट्टी में खूब फलते-फूलते हैं और नदी तट के पर्यावरण का एक अभिन्न अंग बन जाते हैं।

(घ) कोसी नदी के किनारे कौन-कौन से जानवर दिखाई देते हैं?

कोसी नदी के किनारे विविध प्रकार के जानवरों का निवास है। यहाँ गाय, भैंस और बकरी जैसे पालतू पशु चरते हुए दिखाई देते हैं। इसके अलावा, जंगली जानवरों में हिरण भी नदी के तट पर घूमते देखे जा सकते हैं, जो इस क्षेत्र की प्राकृतिक समृद्धि को दर्शाता है।

(ङ) कोसी नदी के किनारे कौन-कौन से लोग दिखाई देते हैं?

कोसी नदी के किनारे ग्रामीण जीवन की सजीव झलक दिखाई देती है। यहाँ मछुआरे नदी में मछली पकड़ते हुए, किसान खेतों में काम करते हुए और ग्वाले अपने पशुओं को चराते हुए दिखाई देते हैं। ये सभी लोग नदी और उसके संसाधनों पर निर्भर अपनी दैनिक दिनचर्या में व्यस्त रहते हैं।

(च) कोसी नदी के किनारे कौन-कौन से फल उगते हैं?

कोसी नदी के उपजाऊ मैदानों में अनेक प्रकार के फलों के पेड़ उगते हैं। इनमें आम, लीची और केला प्रमुख हैं। ये फल न केवल स्थानीय लोगों के भोजन का हिस्सा हैं, बल्कि उनकी आजीविका का एक स्रोत भी बनते हैं।

(छ) कोसी नदी के किनारे कौन-कौन सी सब्जियाँ उगती हैं?

नदी के किनारे की उर्वरा भूमि सब्ज़ियों की खेती के लिए आदर्श है। यहाँ लौकी, कद्दू और भिंडी जैसी सब्ज़ियाँ प्रचुर मात्रा में उगाई जाती हैं। ये सब्ज़ियाँ स्थानीय बाजारों में बिकती हैं और लोगों के पोषण का आधार हैं।

(ज) कोसी नदी के किनारे कौन-कौन से अनाज उगते हैं?

कोसी के मैदान कृषि के लिए अत्यंत उपयुक्त हैं। यहाँ मुख्य रूप से धान (चावल), गेहूँ और मक्का जैसे अनाजों की खेती की जाती है। ये अनाज न केवल स्थानीय आबादी का मुख्य भोजन हैं, बल्कि पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था की रीढ़ भी हैं।

(झ) कोसी नदी के किनारे कौन-कौन से फूल उगते हैं?

नदी तट की प्राकृतिक छटा में रंग बिखेरते हुए अनेक फूल देखे जा सकते हैं। इनमें कमल, गुलाब और चमेली प्रमुख हैं। कमल नदी के पानी में खिलता है, जबकि गुलाब और चमेली के पौधे आसपास के बगीचों और खेतों की मेड़ों पर लगे होते हैं।


बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)

1. ‘ओ सदानीरा’ कविता के कवि हैं-
A. सुमित्रानंदन पंत
B. महादेवी वर्मा
C. नागार्जुन
D. रामधारी सिंह दिनकर

उत्तर: C. नागार्जुन

2. ‘ओ सदानीरा’ कविता में किस नदी का वर्णन है?
A. गंगा
B. यमुना
C. कोसी
D. सोन

उत्तर: C. कोसी

3. कोसी नदी के तट पर कौन-सा पक्षी दिखाई देता है?
A. कोयल
B. मोर
C. बगुला
D. तोता

उत्तर: C. बगुला

4. कोसी नदी के किनारे कौन-सा पेड़ उगता है?
A. नारियल
B. सरकंडा
C. बरगद
D. पीपल

उत्तर: B. सरकंडा

5. कोसी नदी के किनारे कौन-सा जानवर दिखाई देता है?
A. शेर
B. हाथी
C. गाय
D. बंदर

उत्तर: C. गाय

6. कोसी नदी के किनारे कौन-सा फल उगता है?
A. सेब
B. संतरा
C. आम
D. अंगूर

उत्तर: C. आम

7. कोसी नदी के किनारे कौन-सी सब्जी उगती है?
A. आलू
B. टमाटर
C. लौकी
D. गोभी

उत्तर: C. लौकी

8. कोसी नदी के किनारे कौन-सा अनाज उगता है?
A. जौ
B. बाजरा
C. धान
D. ज्वार

उत्तर: C. धान

9. कोसी नदी के किनारे कौन-सा फूल उगता है?
A. गुलदाउदी
B. गेंदा
C. कमल
D. सूरजमुखी

उत्तर: C. कमल

10. ‘ओ सदानीरा’ कविता का प्रमुख भाव है-
A. प्रेम
B. वीरता
C. प्रकृति-चित्रण
D. भक्ति

उत्तर: C. प्रकृति-चित्रण

बिहार बोर्ड - हिन्दी (गद्य खण्ड)
पाठ 7: ओ सदानीरा

प्रश्न 1: सदानीरा किस नदी का नाम है ?

सदानीरा प्राचीन समय में गंडक नदी का नाम था। यह नदी नेपाल की हिमालयी श्रृंखला से निकलकर बिहार के मैदानी इलाकों में बहती है और अंत में गंगा नदी में मिल जाती है।

प्रश्न 2: गाँधी जी ने सदानीरा को किसका प्रतीक माना है ?

महात्मा गाँधी जी ने सदानीरा (गंडक नदी) को शाश्वतता, अमरत्व और निरंतर प्रवाह का प्रतीक माना है। उनके लिए यह नदी भारत की सनातन संस्कृति, अटूट एकता और सदियों से चली आ रही सभ्यता की जीवंत धारा का प्रतिनिधित्व करती है।

प्रश्न 3: गाँधी जी सदानीरा के तट पर किस स्थान पर ठहरे थे ?

गाँधी जी सदानीरा (गंडक नदी) के तट पर बिहार राज्य के चंपारण जिले में ठहरे थे। यहीं पर उन्होंने 1917 में 'चंपारण सत्याग्रह' की शुरुआत की थी, जो भारत में उनका पहला बड़ा सत्याग्रह आंदोलन था।

प्रश्न 4: गाँधी जी ने किन दो नदियों के संगम पर प्रार्थना सभा की थी ?

गाँधी जी ने सदानीरा (गंडक) और गंगा नदी के संगम स्थल पर एक विशाल प्रार्थना सभा का आयोजन किया था। यह स्थल धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

प्रश्न 5: 'ओ सदानीरा' पाठ के लेखक कौन हैं ?

'ओ सदानीरा' पाठ के लेखक भारत के राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी हैं। यह रचना उनकी आत्मकथा 'सत्य के प्रयोग' या उनके विभिन्न लेखों और भाषणों का एक अंश है, जिसमें उन्होंने गंडक नदी के प्रति अपनी गहरी भावनाओं को व्यक्त किया है।

प्रश्न 6: निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है ?
(A) गाँधी जी ने सदानीरा को अस्थिरता का प्रतीक माना है।
(B) सदानीरा गंगा नदी का प्राचीन नाम है।
(C) गाँधी जी सदानीरा के तट पर चंपारण में ठहरे थे।
(D) गाँधी जी ने सदानीरा और यमुना के संगम पर प्रार्थना की थी।

सही उत्तर है: (C) गाँधी जी सदानीरा के तट पर चंपारण में ठहरे थे।
व्याख्या: यह कथन पूर्णतः सही है क्योंकि गाँधी जी का चंपारण सत्याग्रह सदानीरा (गंडक) नदी के तट पर ही हुआ था। अन्य विकल्प गलत हैं - गाँधी जी ने सदानीरा को शाश्वतता का प्रतीक माना, न कि अस्थिरता का। सदानीरा गंगा नहीं बल्कि गंडक नदी का नाम है। उन्होंने सदानीरा और गंगा के संगम पर प्रार्थना की थी, यमुना के साथ नहीं।

प्रश्न 7: निम्नलिखित में से कौन-सा कथन गलत है ?
(A) सदानीरा गंडक नदी का दूसरा नाम है।
(B) गाँधी जी ने सदानीरा को भारत की एकता का प्रतीक माना।
(C) गाँधी जी सदानीरा के तट पर दरभंगा में ठहरे थे।
(D) सदानीरा का अर्थ है - सदा बहने वाली नीर (जल) की धारा।

गलत कथन है: (C) गाँधी जी सदानीरा के तट पर दरभंगा में ठहरे थे।
व्याख्या: यह कथन तथ्यात्मक रूप से गलत है। गाँधी जी सदानीरा (गंडक) के तट पर चंपारण में ठहरे थे, न कि दरभंगा में। शेष सभी कथन सही हैं - सदानीरा वास्तव में गंडक नदी का प्राचीन नाम है, गाँधी जी ने इसे भारत की एकता का प्रतीक माना, और 'सदानीरा' शब्द का शाब्दिक अर्थ 'सदा बहने वाली जलधारा' ही है।

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