Bihar Board Class 12th Hindi (हिन्दी) Chapter 12 तिरिछ) Solutions
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| Board Name | Bihar Board of Secondary Education |
| Class | Class 12th |
| Content Type | Solution |
| Solution for | Class 12th students |
| Subject | Hindi (हिन्दी) |
| Chapter Name | Chapter 12 तिरिछ) |
| Total Number of Chapter in this Subject | 7 |
Studying Bihar Board Class 12th Hindi (हिन्दी) Chapter 12 तिरिछ) solution will help you higher marks in this subject but you need to follow best practices to achieve higher marks, which are given after solutions, go through them once.
Bihar Board Class 12th Hindi (हिन्दी) Chapter 12 तिरिछ) Solutions
View the following solutions for Bihar Board Class 12th Hindi (हिन्दी) Chapter 12 तिरिछ). These solutions are available for viewing online.
प्रश्न 1.
उदय प्रकाश का जन्म हुआ था। (क) 1 जनवरी, 1952 ई,
(ख) 5 जनवरी, 1950 ई. (ग) 2 मार्च, 1940 ई.
(घ) 5 जनवरी, 1955 ई.
उत्तर- (क) 1 जनवरी, 1952 ई.
प्रश्न 2.
सुनो कारीगर, अबूतर-कबूतर, रात में हारमोनियम उदय प्रकाश की कैसी कृतियाँ हैं? (क) कविता-संग्रह
(ख) नाटक-संग्रह
(ग) एकांकी-संग्रह
(घ) निबंध-संग्रह
उत्तर- (क) कविता-संग्रह
प्रश्न 3.
“तिरिछ” लेख का संबंध किनसे है? (क) लेखक के पिताजी से
(ख) लेखक के मित्र से
(ग) लेखक के बेटे से
(घ) लेखक की पत्नी से
उत्तर- (क) लेखक के पिताजी से
प्रश्न 4.
उदय प्रकाश जी किस पत्रिका का सहायक संपादक थे? (क) संडेमेल (नई दिल्ली)
(ख) इंडिया टुडे
(ग) फिल्म-स्टार
(घ) अमरकांत
उत्तर- (क) संडेमेल (नई दिल्ली)
प्रश्न 5.
जवाहर लाल नेहरु विश्वविद्यालय के भारतीय भाषा विभाग में उदय प्रकाश ने क्या किया? (क) अध्ययन
(ख) अध्यापन
(ग) लिपिकीय कार्य
(घ) शोध-कार्य
उत्तर- (ख) अध्यापन
प्रश्न 6.
दरियाई घोड़ा, तिरिछ, पीली छतरी वाली लड़की किनकी कृतियाँ हैं? (क) मोहन राकेश
(ख) रांगेय राघव
(ग) उदय प्रकाश
(घ) अमरकांत
उत्तर- (ग) उदय प्रकाश
रिक्त स्थानों की पूर्ति करें
प्रश्न 1.
उदय प्रकाश का जन्म ............ अनूपपुर म. प्र. में हुआ था।
उत्तर- सीतापुर
प्रश्न 2.
उदय प्रकाश के पिताजी ........ थे।
उत्तर- प्रेमकुमार सिंह
प्रश्न 3.
उदय प्रकाश की माताजी ...... थीं।
उत्तर- गंगादेवी
प्रश्न 4.
उदय प्रकाश का जन्म | जनवरी .......... को हुआ था।
उत्तर- 1952 ई.
प्रश्न 5.
‘तिरिछ’ के लेखक ............ हैं।
उत्तर- उदय प्रकाश
प्रश्न 6.
‘तिरिछ’ एकबार मैंने ............ था।
उत्तर- देखा
तिरिछ अति लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1.
‘तिरिछ’ क्या है?
उत्तर- तिरिछ एक विषैला जीव है जो छिपकली की प्रजाति से संबंधित है। यह अत्यंत खतरनाक होता है और इसके काटने से व्यक्ति की मृत्यु हो सकती है।
प्रश्न 2.
‘तिरिछ’ के लेखक कौन हैं?
उत्तर- ‘तिरिछ’ कहानी के लेखक उदय प्रकाश जी हैं।
प्रश्न 3.
“तिरिछ” किसका पर्याय बनकर उभरा है?
उत्तर- कहानी में ‘तिरिछ’ आतंक, भय और मृत्यु का पर्याय बनकर उभरा है। यह उस अदृश्य भय का प्रतीक है जो व्यवस्था और समाज द्वारा साधारण मनुष्य पर डाला जाता है।
प्रश्न 4.
“तिरिछ” कहानी किस शैली में लिखी गई है?
उत्तर- ‘तिरिछ’ कहानी आत्मकथात्मक शैली में लिखी गई है। इसमें लेखक ने अपने पिता के साथ हुई एक वास्तविक घटना को कहानी का रूप दिया है।
प्रश्न 5.
उदय प्रकाश ने किस पत्रिका के संपादन विभाग में काम किया?
उत्तर- उदय प्रकाश जी ने ‘दिनमान’ पत्रिका के संपादन विभाग में काम किया था।
प्रश्न 6.
‘अमेद्य’ शब्द का अर्थ लिखिए।
उत्तर- ‘अमेद्य’ शब्द का अर्थ है – जिसे भेदा न जा सके, अर्थात अभेद्य या अटूट।
तिरिछ पाठ्य पुस्तक के प्रश्न एवं उनके उत्तर
प्रश्न 1.
लेखक के पिता के चरित्र का वर्णन अपने शब्दों में करें।
उत्तर- लेखक उदय प्रकाश के पिता श्री प्रेमकुमार सिंह एक सीधे-सादे और गंभीर स्वभाव के व्यक्ति थे। वे ग्रामीण संस्कारों से ओत-प्रोत, मितभाषी और अंतर्मुखी थे। शहरी जीवन की जटिलताओं और चालाकियों से वे पूरी तरह अनभिज्ञ थे। उनकी सहजता और भोलापन कई बार उनके लिए मुसीबत का कारण बन जाता था। वे अपने बच्चों के लिए एक सुरक्षित आश्रय थे, लेकिन बाहरी दुनिया के सामने वे स्वयं असहाय और लाचार महसूस करते थे। उनका चरित्र एक ऐसे सामान्य भारतीय का प्रतिनिधित्व करता है जो बदलते समय और कठोर सामाजिक व्यवस्था के बीच अपनी पहचान और इज्जत बचाने के लिए संघर्ष करता है। उनकी दयनीय स्थिति समाज की अमानवीयता और न्याय व्यवस्था के खोखलेपन को उजागर करती है।
प्रश्न 2.
तिरिछ क्या है? कहानी में यह किसका प्रतीक है?
उत्तर- तिरिछ एक अत्यंत विषैला जीव है जो देखने में छिपकली जैसा लगता है। मान्यता है कि यदि यह किसी व्यक्ति को काट ले और फिर कहीं पेशाब करके उसमें लेट जाए, तो उस व्यक्ति का बचना असंभव हो जाता है। यह तभी हमला करता है जब कोई उससे आँख मिला ले।
कहानी में ‘तिरिछ’ केवल एक जानवर नहीं है, बल्कि एक शक्तिशाली प्रतीक है। यह अचानक आने वाली आपदा, मृत्यु के भय और अदृश्य आतंक का प्रतीक है। विशेष रूप से, यह उस क्रूर और भ्रष्ट सामाजिक-प्रशासनिक व्यवस्था का प्रतीक बनकर उभरता है जो सीधे-साधे लोगों को निगल जाती है, जैसे लेखक के पिता के साथ हुआ। यह वह अमूर्त भय है जो व्यक्ति का पीछा नहीं छोड़ता।
प्रश्न 3.
अगर तिरिछ को देखो तो उससे कभी आँख मत मिलाओ। आँख मिलते ही वह आदमी की गंध पहचान लेता है और फिर पीछे लग जाता है। फिर तो आदमी चाहे पूरी पृथ्वी का चक्कर लगा ले, तिरिछ पीछे-पीछे आता है। क्या यहाँ तिरिछ केवल जानवर भर है? यदि नहीं, तो उससे आँख क्यों नहीं मिलानी चाहिए?
उत्तर- नहीं, यहाँ ‘तिरिछ’ केवल एक जानवर नहीं है। यह एक गहन प्रतीकात्मक अर्थ रखता है।
तिरिछ से आँख न मिलाने की सलाह का आशय है कि हमें बुराई, क्रूरता और दुर्जनता के साथ सीधा टकराव नहीं करना चाहिए। ‘आँख मिलाना’ यहाँ समझौता करने, चुनौती देने या उलझने का प्रतीक है। जिस प्रकार तिरिछ आँख मिलाते ही शिकार का पीछा शुरू कर देता है, उसी प्रकार समाज में मौजूद दुर्जन, शोषक तत्व या दमनकारी व्यवस्था भी यदि आप पर संदेह कर ले या आपको चुनौती देता हुआ पा ले, तो वह आपका पीछा नहीं छोड़ेगी। वह आपको तब तक परेशान करेगी जब तक आप नष्ट नहीं हो जाते। इसलिए, कभी-कभी बुद्धिमानी इसी में है कि ऐसी खतरनाक शक्तियों से दूरी बनाकर रखी जाए, उनसे उलझा न जाए।
प्रश्न 4.
“तिरिछ” लेखक के सपने में आया था और वह इतनी परिचित आँखों से देखता था कि लेखक अपने आपको रोक नहीं पाता था। यहाँ परिचित आँखों से क्या आशय है?
उत्तर- ‘परिचित आँखों’ से आशय है उन चेहरों और शक्तियों से जो हमारे अपने जीवन का हिस्सा रही हैं, जिन्हें हम जानते-पहचानते हैं, लेकिन जो अचानक ही खतरनाक और विध्वंसक रूप धारण कर लेती हैं।
लेखक के सपने में आने वाला तिरिछ उन्हीं लोगों का प्रतिनिधित्व करता है जिन्होंने उसके पिता के साथ अन्याय किया – पुलिस, डॉक्टर, वकील या वे सभी लोग जो व्यवस्था का हिस्सा थे। ये आँखें परिचित इसलिए हैं क्योंकि ये हमारे आस-पास के समाज में ही मौजूद हैं। यह भय किसी अनजान जंगली जानवर का नहीं, बल्कि उस ‘सभ्य’ समाज का है जो अपनों को ही निगल जाता है। लेखक इस आतंक को पहचानता है, इसलिए वह स्वयं को रोक नहीं पाता।
अध्याय 12 - तिरिछ (उमाशंकर जोशी)
1. तिरिछ क्या है?
2. लेखक ने तिरिछ को देखकर क्या प्रतिक्रिया व्यक्त की?
3. तिरिछ के काटने पर क्या होता है?
4. इस पाठ का मुख्य संदेश क्या है?
5. बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ):
i. 'तिरिछ' कहानी के लेखक कौन हैं?
ii. लेखक ने तिरिछ को देखकर सबसे पहले क्या किया?
iii. तिरिछ किसका प्रतीक है?
iv. इस पाठ से हमें क्या सीख मिलती है?
बिहार बोर्ड कक्षा 12 हिन्दी (हिन्दी) पाठ 12 - तिरिछ
1. तिरिछ कहानी का सारांश लिखें।
उमा शंकर चौधरी की कहानी ‘तिरिछ’ एक ग्रामीण परिवेश में घटित एक दुखद घटना पर आधारित है। कहानी का मुख्य पात्र बालक सुखिया है, जो अपने पिता के साथ खेत में काम करते समय एक जहरीले साँप (तिरिछ) के काटने का शिकार हो जाता है। पिता बेटे को बचाने के लिए हर संभव प्रयास करता है, लेकिन गाँव की अंधविश्वासी मान्यताएँ, ओझा-गुनी का पाखंड और समय पर चिकित्सा सुविधा का अभाव सुखिया की मृत्यु का कारण बन जाता है। कहानी ग्रामीण जीवन में फैले अज्ञान, अंधविश्वास और सामाजिक कुरीतियों पर करारा प्रहार करती है तथा वैज्ञानिक सोच और समय पर इलाज की आवश्यकता को रेखांकित करती है।
2. तिरिछ कहानी का उद्देश्य स्पष्ट करें।
इस कहानी का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण समाज में व्याप्त अंधविश्वास, रूढ़िवादिता और अज्ञानता के खतरों को उजागर करना है। लेखक यह दिखाना चाहता है कि कैसे इन कुरीतियों के कारण एक मासूम बच्चे की जान चली जाती है। कहानी पाठकों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने, तर्कसंगत सोच रखने और आपात स्थिति में समय रहते उचित चिकित्सकीय सहायता लेने का संदेश देती है। साथ ही, यह समाज में फैले ढोंगी बाबाओं और ओझाओं के शोषण पर भी प्रकाश डालती है।
3. सुखिया के पिता का चरित्र-चित्रण करें।
सुखिया का पिता एक साधारण, मेहनती किसान है जो अपने परिवार से गहरा प्यार करता है। वह अपने बेटे सुखिया को बहुत चाहता है। दुर्घटना के बाद वह बेटे को बचाने के लिए अत्यंत व्याकुल और विवश दिखाई देता है। एक ओर वह पारंपरिक उपचार के लिए ओझा के पास जाता है, तो दूसरी ओर डॉक्टर की तलाश भी करता है, जो उसकी मजबूरी और द्वंद्व को दर्शाता है। वह सामाजिक दबाव और आर्थिक तंगी के बीच फँसा एक ऐसा पिता है जो हर संभव कोशिश करता है, लेकिन व्यवस्था और अंधविश्वासों के आगे उसकी हार हो जाती है। उसका चरित्र एक सामान्य ग्रामीण पिता की ममता और विवशता का प्रतिनिधित्व करता है।
4. ‘तिरिछ’ कहानी के आधार पर ग्रामीण जीवन की विसंगतियों पर प्रकाश डालिए।
‘तिरिछ’ कहानी के माध्यम से ग्रामीण जीवन की कई विसंगतियाँ सामने आती हैं:
(क) अंधविश्वास का बोलबाला: बीमारी या दुर्घटना होने पर लोग डॉक्टर के बजाय ओझा-गुनी पर भरोसा करते हैं।
(ख) चिकित्सा सुविधाओं का अभाव: गाँवों में अस्पताल या डॉक्टर नहीं होते, जिससे समय पर इलाज नहीं मिल पाता।
(ग) गरीबी और अशिक्षा: गरीबी के कारण लोग महंगा इलाज नहीं करा पाते और अशिक्षा उन्हें अंधविश्वासी बनाए रखती है।
(घ) सामाजिक रूढ़ियाँ: समाज पुराने रीति-रिवाजों से बंधा है, नए और वैज्ञानिक तरीकों को अपनाने में संकोच करता है।
(ङ) ढोंगी बाबाओं का शोषण: ओझा लोग गरीब और मजबूर लोगों की भावनाओं का फायदा उठाकर उनका शोषण करते हैं।
5. ‘तिरिछ’ कहानी का नामकरण कितना सार्थक है? स्पष्ट करें।
कहानी का नामकरण पूर्णतः सार्थक और प्रतीकात्मक है। सतही तौर पर ‘तिरिछ’ एक जहरीले साँप को कहते हैं, जिसके काटने से कहानी की घटना शुरू होती है। लेकिन गहरे अर्थ में ‘तिरिछ’ समाज में फैले उन सभी जहरीले और घातक रिवाजों, अंधविश्वासों और कुरीतियों का प्रतीक है, जो गरीब और असहाय लोगों का जीवन निगल जाते हैं। जिस तरह तिरिछ का जहर शरीर में फैलता है, उसी तरह अज्ञान और रूढ़िवादिता का जहर पूरे समाज में फैला हुआ है। इसलिए कहानी का शीर्षक केवल एक साँप तक सीमित न होकर एक व्यापक सामाजिक समस्या की ओर संकेत करता है।
6. बहुविकल्पीय प्रश्न
i. ‘तिरिछ’ कहानी के लेखक कौन हैं?
A. फणीश्वरनाथ रेणु
B. उमा शंकर चौधरी
C. मनोहर श्याम जोशी
D. अमरकांत
ii. सुखिया किसके काटने का शिकार हुआ?
A. बिच्छू
B. मधुमक्खी
C. तिरिछ (साँप)
D. कुत्ता
iii. सुखिया के पिता क्या काम करते थे?
A. मजदूर
B. किसान
C. दुकानदार
D. शिक्षक
iv. सुखिया को बचाने के लिए सबसे पहले किसके पास ले जाया गया?
A. डॉक्टर के पास
B. वैद्य के पास
C. ओझा के पास
D. अस्पताल
v. ‘तिरिछ’ कहानी किस विषय पर केंद्रित है?
A. प्रेम
B. रोमांच
C. सामाजिक अंधविश्वास
D. ऐतिहासिक घटना
प्रश्न 11.
लेखक के पिता अपना परिचय हमेशा, 'राम स्वारथ प्रसाद ......... एक्स स्कूल हेडमास्टर ........... एंड विलेज हेड ऑफ बकेली के रूप में देते थे, ऐसा क्यों? स्कूलऔर गाँव के बिना वे अपना परिचय क्यों नहीं देते?
उत्तर:
लेखक के पिता एक ग्रामीण पृष्ठभूमि के व्यक्ति थे। शहर के वातावरण में वे स्वयं को एक अजनबी और असुरक्षित महसूस करते थे। उनके लिए, उनकी पहचान और सम्मान उनके पद – स्कूल के प्रधानाध्यापक और गाँव के मुखिया – से ही जुड़ा हुआ था। शहरी समाज में, जहाँ लोग अक्सर जल्दबाजी में रहते हैं और दूसरों की पूरी बात सुने बिना ही निर्णय ले लेते हैं, वहाँ अपने इन पदों का परिचय देना उनके लिए एक ढाल का काम करता था। यह परिचय उन्हें एक सम्मानजनक अस्तित्व और सामाजिक वजूद प्रदान करता था, जिसके बिना वे स्वयं को शहर की संवेदनहीन भीड़ में गुम पाते। इस प्रकार, स्कूल और गाँव का उल्लेख करके वे न केवल अपनी पहचान बनाए रखते थे, बल्कि शहरी लोगों का ध्यान आकर्षित करके अपनी बात कहने का एक मौका भी पाते थे।
प्रश्न 12.
हालाँकि थान कहता है कि अब तो यह तय हो गया कि तिरिछ के जहर से कोई नहीं बच सकता। ठीक चौबीस घंटे बाद उसने अपना करिश्मा दिखाया और पिताजी की मृत्यु हुई। इस अवतरण का अभिप्राय स्पष्ट करें।p>
उत्तर:
इस अवतरण का अभिप्राय अंधविश्वास और क्रूर यथार्थ के बीच के टकराव को दर्शाना है। थाना (लेखक का दोस्त) का यह कथन कि तिरिछ के जहर से कोई नहीं बच सकता, एक गहरे पैठे अंधविश्वास को दर्शाता है। यह विश्वास इतना प्रबल है कि वह एक 'नियति' या 'करिश्मे' का रूप ले लेता है। पिता की मृत्यु ठीक चौबीस घंटे बाद होना, इस अंधविश्वास को मजबूती प्रदान करता प्रतीत होता है।
लेकिन वास्तविकता यह है कि पिता की मृत्यु का कारण सीधे तौर पर तिरिछ का जहर नहीं, बल्कि शहरी समाज की अमानवीयता, संवेदनहीनता और हिंसा थी। तिरिछ के काटने के बाद उन्हें घटूरे का काढ़ा पिलाना एक और अंधविश्वास था। इसके बाद, शहर में उनके साथ हुई मारपीट और उपहास ने उनकी त्रासदी को पूरा किया। इस प्रकार, यह अवतरण दिखाता है कि कैसे पुरानी मान्यताएँ और अंधविश्वास, आधुनिक समाज की क्रूरता के साथ मिलकर एक सामान्य व्यक्ति की जान ले सकते हैं। यह समय के दो सत्यों – अतीत के अंधविश्वास और वर्तमान की निर्ममता – के टकराव की ओर भी इशारा करता है।
प्रश्न 13.
लेखक को अब तिरिछ का सपना नहीं आता, क्यों?
उत्तर:
लेखक को अब तिरिछ का सपना नहीं आता क्योंकि अब उन्होंने सपने और यथार्थ के बीच के अंतर को स्पष्ट रूप से पहचान लिया है। पहले, पिता की दर्दनाक मृत्यु और उससे जुड़ी घटनाएँ उनके लिए एक डरावने दुःस्वप्न जैसी थीं, जो बार-बार सच लगती थीं और उन्हें सताती थीं। तिरिछ का सपना उस पीड़ा और आघात का प्रतीक था।
लेकिन समय के साथ, जब लेखक ने इस घटना को स्वीकार कर लिया और उसके सभी पहलुओं – अंधविश्वास, सामाजिक क्रूरता, निजी दुःख – को समझ लिया, तो उनका भ्रम टूट गया। अब वे जान गए हैं कि यह सब एक कड़वा यथार्थ था, न कि कोई सपना जो टल सकता है। सच्चाई को पूरी तरह से जान और समझ लेने के बाद, उससे उपजा डर और चिंता कम हो जाती है। इसलिए, अब वह दुःस्वप्न उन्हें परेशान नहीं करता।
तिरिछ भाषा की बात
प्रश्न 1.
निम्नलिखित पदों में कौन-सा समास है
जन्मजात, भारी-भरकम, संवाददाता, बीचो-बीच, नीलकंठ, चौराहा, ठेढ़ा-मेढ़ा, इधर-उधर, चुंगीनाका।
उत्तर:
जन्मजात - जन्म से जुड़ा हुआ (तत्पुरुष समास)
भारी-भरकम - भारी और भरकम (द्वंद्व समास)
संवाददाता - संवाद का दाता (तत्पुरुष समास)
बीचो-बीच - बीच और बीच (द्वंद्व समास)
नीलकंठ - कंठ नीला है जिसका (बहुव्रीहि समास)
चौराहा - चार राहों का समाहार (द्विगु समास)
ठेढ़ा-मेढ़ा - टेढ़ा और मेढ़ा (द्वंद्व समास)
इधर-उधर - इधर या उधर (वैकल्पिक द्वंद्व समास)
चुंगीनाका - चुंगी के लिए नाका (तत्पुरुष समास)
प्रश्न 2.
कहानी से व्यक्तिवाचक संज्ञा को चुनें।
उत्तर:
कहानी 'तिरिछ' से कुछ प्रमुख व्यक्तिवाचक संज्ञाएँ इस प्रकार हैं:
थापा, थपियाल साहब, एस. एच. ओ. राघवेन्द्र प्रताप सिंह, अग्निहोत्री, मैनेजर मेहता।
प्रश्न 3.
कहानी के शिल्प पर अपने शिक्षक से चर्चा करें और एक संक्षिप्त टिप्पणी लिख।
उत्तर:
कहानी 'तिरिछ' का शिल्प अत्यंत प्रभावशाली और विशिष्ट है। इसकी प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
1. भाषा-शैली: कहानी आत्मकथात्मक शैली में लिखी गई है, जिससे पाठक को घटनाओं की प्रामाणिकता और तीव्रता का अनुभव होता है। लेखक उदय प्रकाश ने जादुई यथार्थवाद का सशक्त प्रयोग किया है। इसमें तिरिछ जैसे प्रतीक के माध्यम से अंधविश्वास, सपने और कठोर यथार्थ को एक सूत्र में पिरोया गया है। भाषा सहज, व्यावहारिक किंतु गहरा प्रभाव छोड़ने वाली है।
2. संवाद: कहानी में संवादों का प्रयोग सारगर्भित और चरित्र-चित्रण में सहायक है। संवादों से पात्रों की मानसिकता, सामाजिक स्थिति और उनके द्वंद्व स्पष्ट होते हैं।
3. संरचना एवं प्रतीक: कहानी की संरचना रैखिक न होकर स्मृतियों और वर्तमान के बीच झूलती है। 'तिरिछ' स्वयं एक शक्तिशाली प्रतीक है जो मृत्यु, अंधविश्वास और अज्ञात भय का प्रतिनिधित्व करता है। गाँव और शहर का विरोधाभास भी कहानी के शिल्प का एक महत्वपूर्ण पहलू है।
4. विषय-प्रस्तुति: सामाजिक विसंगतियों, अंधविश्वासों और आधुनिकता की संवेदनहीनता जैसे गंभीर विषय को एक व्यक्तिगत त्रासदी के माध्यम से इतने प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना इस कहानी के शिल्प की सबसे बड़ी सफलता है।
निष्कर्षतः, 'तिरिछ' आधुनिक हिंदी कहानी के शिल्प में एक नए प्रयोग और गहरी मानवीय संवेदना को प्रस्तुत करने वाली एक उत्कृष्ट रचना है।
प्रश्न 4.
नीचे लिखे वाक््यों से संज्ञा एवं सर्वनाम चुनें
(क) लेकिन बहुत जल्द हमें वह नाला मिल गया।
(ख) तिरिछ उसमें जल रहा था।
(ग) मेरा अनुमान है कि उस समय पिताजी को बहुत प्यास लगी होगी।
(घ) उसने घंटी भी बजा दी।
उत्तर-
संज्ञा: नाला, तिरिछ, घंटी, पिताजी।
सर्वनाम: वह, हमें, उसने, मेरा।
व्याख्या: संज्ञा वे शब्द हैं जो किसी व्यक्ति, वस्तु, स्थान या भाव के नाम का बोध कराते हैं। दिए गए वाक्यों में 'नाला', 'तिरिछ', 'घंटी' वस्तुवाचक संज्ञाएँ हैं, जबकि 'पिताजी' व्यक्तिवाचक संज्ञा है। सर्वनाम वे शब्द हैं जो संज्ञा के स्थान पर प्रयुक्त होते हैं। 'वह', 'उसने', 'हमें' और 'मेरा' सर्वनाम शब्द हैं जो क्रमशः किसी व्यक्ति/वस्तु, कर्ता, सम्बन्ध और स्वामित्व को दर्शाते हैं। ध्यान दें कि 'प्यास' एक भाववाचक संज्ञा है, सर्वनाम नहीं।
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