Bihar Board Class 10th Hindi (व्याकरण एवं रचना) अलंकार) Solutions
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1. अलंकार किसे कहते हैं? उदाहरण सहित समझाइए।
अलंकार का शाब्दिक अर्थ है 'आभूषण'। जिस प्रकार आभूषण शरीर की सुंदरता बढ़ाते हैं, उसी प्रकार काव्य की शोभा बढ़ाने वाले शब्दों या अर्थ के विशेष प्रयोग को अलंकार कहते हैं। अलंकार काव्य को रोचक, प्रभावशाली और सजीव बनाते हैं।
उदाहरण: "पायो जी मैंने राम रतन धन पायो।"
यहाँ 'राम' को 'रतन' (रत्न) और 'धन' कहा गया है। यह रूपक अलंकार है, जहाँ उपमेय (राम) को उपमान (रतन, धन) के साथ पूर्ण रूप से समान बताकर काव्य में एक आध्यात्मिक सौंदर्य पैदा किया गया है।
2. अनुप्रास अलंकार की परिभाषा उदाहरण सहित लिखिए।
जहाँ एक ही वर्ण की आवृत्ति बार-बार होती है, उसे अनुप्रास अलंकार कहते हैं। इससे काव्य में लय और ध्वनि का सुंदर प्रभाव पैदा होता है।
उदाहरण: "कहलाने एकत बसत, अहि मयूर, मृग, बाघ।"
इस पंक्ति में 'म' वर्ण की आवृत्ति (मयूर, मृग) हुई है, जो अनुप्रास अलंकार बनाती है और पंक्ति को स्मरणीय बना देती है।
3. यमक अलंकार किसे कहते हैं? उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।
यमक अलंकार तब होता है जब एक ही शब्द बार-बार आए, लेकिन हर बार उसका अर्थ अलग-अलग हो। यह शब्दालंकार का एक प्रमुख प्रकार है।
उदाहरण: "कनक कनक ते सौ गुनी, मादकता अधिकाय।
वा खाए बौरात नर, या पाए बौराय॥"
यहाँ 'कनक' शब्द दो बार आया है। पहले 'कनक' का अर्थ है सोना (धातु) और दूसरे 'कनक' का अर्थ है धतूरा (एक मादक पौधा)। एक ही शब्द के भिन्न अर्थों ने यहाँ यमक अलंकार बनाया है और कवि ने धन के मोह और नशे की तुलना करके गहरा भाव व्यक्त किया है।
4. श्लेष अलंकार की परिभाषा दीजिए और उदाहरण सहित समझाइए।
श्लेष अलंकार में एक ही शब्द के एक से अधिक अर्थ निकलते हैं, लेकिन यह अलंकार अर्थ पर आधारित होता है। यमक और श्लेष में मुख्य अंतर यह है कि यमक में शब्द रूप समान होते हैं पर अर्थ भिन्न होते हैं, जबकि श्लेष में एक शब्द का प्रयोग एक बार होता है, लेकिन उसके कई अर्थ समझ में आते हैं।
उदाहरण: "रहिमन पानी राखिए, बिन पानी सब सून।
पानी गए न ऊबरै, मोती, मानुष, चून॥"
यहाँ 'पानी' शब्द एक बार प्रयुक्त हुआ है, लेकिन इसके तीन अर्थ हैं – 1. जल, 2. मोती की चमक (पानी), 3. इज्जत (प्रतिष्ठा)। एक शब्द से निकलने वाले इन विभिन्न अर्थों ने श्लेष अलंकार की सुंदर रचना की है और जीवन के लिए जल, प्रतिष्ठा और गुण तीनों के महत्व को दर्शाया है।
5. उपमा अलंकार के चार अंगों के नाम लिखिए।
उपमा अलंकार के चार अंग निम्नलिखित हैं:
- उपमेय: जिसकी उपमा (तुलना) दी जाए।
- उपमान: जिससे उपमा (तुलना) दी जाए।
- साधारण धर्म: उपमेय और उपमान में समानता रखने वाला गुण या विशेषता।
- वाचक शब्द: वह शब्द जो तुलना सूचित करे, जैसे – सा, सी, सम, समान, जैसा, ज्यों, मनो, इव आदि।
उदाहरण: "मुख चंद्रमा सा सुंदर है।"
यहाँ – उपमेय = मुख, उपमान = चंद्रमा, साधारण धर्म = सुंदरता, वाचक शब्द = सा।
6. रूपक अलंकार की परिभाषा उदाहरण सहित लिखिए।
रूपक अलंकार उपमा अलंकार का ही एक विस्तारित रूप है। इसमें उपमेय और उपमान में अभिन्नता या पूर्ण समानता दर्शाई जाती है। यहाँ वाचक शब्द (जैसे सा, समान) का प्रयोग नहीं होता, बल्कि उपमेय को ही उपमान कह दिया जाता है या उपमान को उपमेय पर आरोपित कर दिया जाता है।
उदाहरण: "चरण-कमल बंदौ हरि राई।"
यहाँ भगवान के चरण (उपमेय) को सीधे कमल (उपमान) कहा गया है। 'चरण' और 'कमल' में कोई वाचक शब्द नहीं है, बल्कि चरण को ही कमल मान लिया गया है। इससे भक्ति भाव और काव्यात्मक प्रभाव बढ़ जाता है।
7. अतिशयोक्ति अलंकार किसे कहते हैं? उदाहरण दीजिए।
अतिशयोक्ति अलंकार वह होता है जहाँ किसी बात का वर्णन इतना बढ़ा-चढ़ाकर किया जाए कि वह वास्तविकता से परे या असंभव-सा प्रतीत हो, लेकिन उससे काव्य में नाटकीय प्रभाव पैदा हो। इसमें अतिरंजना होती है।
उदाहरण: "हनुमान की पूँछ में लगन न पाई आग।
लंका सिगरी जल गई, गए निशाचर भाग॥"
यहाँ हनुमान जी की पूँछ में लगी आग से पूरी लंका नगरी जल गई, यह वर्णन वास्तविक से अधिक बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत किया गया है, जो अतिशयोक्ति अलंकार का सुंदर उदाहरण है। इससे हनुमान जी की शक्ति और घटना के प्रभाव को दर्शाया गया है।
8. निम्नलिखित काव्य-पंक्तियों में से अलंकार पहचानकर लिखिए:
(क) "तेरी दुनिया में जीने का सलीका नहीं है।"
अलंकार: मानवीकरण अलंकार
व्याख्या: यहाँ 'दुनिया' एक निर्जीव वस्तु है, लेकिन उसे 'तेरी' कहकर और उसमें 'जीने का सलीका' न होना बताकर उसे मानव के समान व्यवहार करने वाला बना दिया गया है। निर्जीव वस्तु में मानवीय भाव या क्रिया का आरोप मानवीकरण अलंकार है।
(ख) "मैया मैं तो चंद्र-खिलौना लैहों।"
अलंकार: रूपक अलंकार
व्याख्या: यहाँ बालक कृष्ण चंद्रमा को 'खिलौना' कह रहे हैं। चंद्रमा (उपमेय) को सीधे खिलौना (उपमान) कह दिया गया है, बिना किसी वाचक शब्द के। इससे चंद्रमा की सुंदरता और बालकृष्ण की बाल सुलभ इच्छा का सुंदर चित्रण हुआ है।
9. बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ):
i. 'मुदित महीपति मंदिर बैठे' में कौन-सा अलंकार है?
उत्तर: (B) अनुप्रास
व्याख्या: इस पंक्ति में 'म' वर्ण की आवृत्ति बार-बार हुई है (मुदित, महीपति, मंदिर), जो अनुप्रास अलंकार की पहचान है।
ii. 'पीपर पात सरिस मन डोला' में अलंकार है-
उत्तर: (B) उपमा
व्याख्या: यहाँ मन (उपमेय) की डोलने की स्थिति की तुलना पीपल के पत्ते (उपमान) से 'सरिस' (वाचक शब्द) के द्वारा की गई है। इसलिए यह उपमा अलंकार है।
iii. 'काली घटा का घमंड घटा' में कौन-सा अलंकार है?
उत्तर: (B) यमक
व्याख्या: यहाँ 'घटा' शब्द दो बार आया है। पहले 'घटा' का अर्थ है बादल और दूसरे 'घटा' का अर्थ है कम हुआ। एक ही शब्द के भिन्न अर्थ होने के कारण यह यमक अलंकार है।
iv. 'बंदौ गुरु पद पदुम परागा' में अलंकार है-
उत्तर: (A) रूपक
व्याख्या: यहाँ गुरु के चरणों (पद) को कमल (पदुम) कहा गया है और उनके गुणों को पराग बताया गया है। उपमेय (पद) और उपमान (पदुम) में अभेद दर्शाया गया है, इसलिए यह रूपक अलंकार है।
प्रश्न रूपक अलंकार की परिभाषा देते हुए उदाहरण प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर: जहाँ गुण की अत्यधिक समानता के कारण उपमेय (जिसकी उपमा दी जा रही है) पर उपमान (जिससे तुलना की जा रही है) का आरोप कर दिया जाए, वहाँ रूपक अलंकार होता है। इसमें उपमेय और उपमान को एक ही मान लिया जाता है, जैसे कि उपमेय ही उपमान बन गया हो।
उदाहरण 1: "चरण कमल बंदी हरिराई।"
यहाँ 'चरण' (उपमेय) पर 'कमल' (उपमान) का आरोप है। चरण को सीधे कमल कह दिया गया है क्योंकि उनकी कोमलता और सुंदरता में अत्यधिक समानता है।
उदाहरण 2: "मैया मैं तो चंद्र खिलौना लैहौं।"
यहाँ चंद्रमा (उपमेय) को खिलौना (उपमान) कहा गया है, यानी चंद्रमा पर खिलौने का आरोप है।
अन्य उदाहरण:
• सकल-प्राणियों वत्स मनोमयूर अहा नचा रहा।
• संत-हृदय गहहिं पय, परिहतारि विकार।
• पायो जी मैंने रतन घन पायो।
• सुख चपला सुख घन में, उलझा है चंचल मन कुरंग।
• बीती विभावरी जागरी, अंबर पनघट में डुबो रही, तारा-घट ऊषा-नागरी।
प्रश्न उत्प्रेक्षा अलंकार की परिभाषा देते हुए दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर: जहाँ उपमेय में उपमान की संभावना या कल्पना की जाए, वहाँ उत्प्रेक्षा अलंकार होता है। इसमें 'मानो', 'जनु', 'मनहुँ', 'जानो' आदि शब्दों का प्रयोग होता है, जो संभावना को दर्शाते हैं।
उदाहरण 1:
"कहती हुई यों उत्तरा के, नेत्र जल से भर गए।
हिम के कणों से पूर्ण मानो, हो गए पंकज नए।।"
यहाँ उत्तरा के आँसू भरे नेत्र (उपमेय) में कमल (पंकज) पर जमी हुई ओस (हिम कण) की संभावना 'मानो' शब्द से की गई है।
उदाहरण 2:
"उस काल मारे क्रोध के, तनु काँपने उनका लगा।
मानो हवा के जोर से सोता हुआ सागर जगा।।"
यहाँ क्रोध से काँपते शरीर (उपमेय) में जागते हुए सागर (उपमान) की संभावना 'मानो' शब्द द्वारा व्यक्त की गई है।
अन्य उदाहरण:
• "सोहत ओढ़े पीत पट, श्याम सलोने गात।
मनो नीलमणि सैल पर, आतप परयो प्रभात।।"
• "पाहुन ज्यों आए हों गाँव में शहर के।
मेघ आए बड़े बन-ठन के संवर के।।"
7. मानवीकरण
परिभाषा: जहाँ निर्जीव प्रकृति, पदार्थ या किसी अचेतन वस्तु को मनुष्य के समान सजीव, चेतन और क्रियाशील दिखाया जाए, अर्थात उसमें मानवीय भावनाओं, गुणों या क्रियाओं का आरोप किया जाए, वहाँ मानवीकरण अलंकार होता है।
उदाहरण 1: "मेघ आए बड़े बन-ठन के संवर के"
यहाँ बादलों (अचेतन प्रकृति) को मनुष्य की तरह सजने-संवरने और बन-ठन कर आने का गुण दिया गया है।
उदाहरण 2:
"दिवसावसान का समय
मेघमय आसमान से उतर रही
संध्या-सुंदरी परी-सी धीरे-धीरे"
यहाँ संध्या (एक समय) को एक सुंदरी परी के रूप में चित्रित किया गया है जो धीरे-धीरे उतर रही है।
अन्य उदाहरण:
• "खग-कुल कुल-कुल सा बोल रहा, किसलय का अंचल डोल रहा। लो यह लतिका भी भर लाई, मधु मुकुल नवल रस गागरी।"
• "तनकर भाला यह बोल उठा- राणा मुझको विश्राम न दे। मुझको शोणित की प्यास लगी, बढ़ने दे, शोणित पीने दे।"
• "मैं तो मात्र मृत्तिका हूँ।"
• "कार्तिक की एक हँसमुख सुबह, नदी-तट से लौटती गंगा नहाकर।"
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