Bihar Board Class 10th Hindi (व्याकरण एवं रचना) अपठित गद्यांश) Solutions
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| Board Name | Bihar Board of Secondary Education |
| Class | Class 10th |
| Content Type | Solution |
| Solution for | Class 10th students |
| Subject | Hindi (व्याकरण एवं रचना) |
| Chapter Name | अपठित गद्यांश) |
| Total Number of Chapter in this Subject | 13 |
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Bihar Board Class 10th Hindi (व्याकरण एवं रचना) अपठित गद्यांश) Solutions
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1. देश-प्रेम है क्या? प्रेम ही तो है। इस प्रेम का आलंबन क्या है ? सारा देश अर्थात् मनुष्य, पशु, पक्षी, नदी, नाले, वन, पर्वत सहित सारी भूमि। यह प्रेम किस प्रकार का है ? यह साहचर्यगत प्रेम है। जिनके बीच हम रहते हैं, जिन्हें बराबर आँखों से देखते हैं, जिनकी बातें बराबर सुनते रहते हैं, जिनका हमारा हर घड़ी का साथ रहता है। सारांश यह है कि जिनके सात्रिध्य का हमें अभ्यास पड़ जाता है, उनके प्रति लोभ या राग हो सकता है। देश-प्रेम यदि वास्तव में यह अंतःकरण का कोई भाव है तो यही हो सकता है। यदि यह नहीं है तो वह कोरी बकवास या किसी और भाव के संकेत के लिए गढ़ा हुआ शब्द है।
(क) इस गद्यांश का शीर्षक दीजिए।
उत्तर: "देश-प्रेम का सही स्वरूप" या "सच्चा देश-प्रेम"।
(ख) साहचर्यगत प्रेम! से क्या आशय है-
उत्तर: साथ-साथ रहने के कारण उत्पन्न प्रेम।
(ग) अंत:करण का एक पर्यायवाची लिखिए।
उत्तर: हृदय।
(घ) आँख भर देखना' का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: इसका आशय है तृप्त होकर या जी भरकर देखना, अर्थात् किसी वस्तु या दृश्य को इतना गहराई से और आनंदपूर्वक देखना कि मन संतुष्ट हो जाए।
(ड) 'प्रेम हिसाब-किताब नहीं है में क्या व्यंग्य है ?
उत्तर: इस कथन में यह व्यंग्य है कि देश-प्रेम केवल आँकड़ों, आर्थिक स्थिति या लाभ-हानि के हिसाब से नहीं होता। जो लोग केवल देश की औसत आय जैसे आँकड़े बताकर देश-प्रेम का दावा करते हैं, वे वास्तव में देश से सच्चा प्रेम नहीं करते। प्रेम एक भावनात्मक लगाव है, जो हिसाब-किताब से परे होता है।
(च) देश-प्रेम का संबंध किससे है
उत्तर: मन के वेग से।
(छ) परिचय प्रेम का प्रवर्तक है' का क्या आशय है ?
उत्तर: इसका आशय है कि किसी व्यक्ति, वस्तु या स्थान से जितना अधिक और गहरा परिचय होता है, उसके प्रति प्रेम और लगाव उतना ही अधिक जागृत होता है। परिचय ही प्रेम की नींव रखता है।
(ज) देश-प्रेम के लिए पहली आवश्यकता क्या है १
उत्तर: देश-प्रेम के लिए पहली आवश्यकता है देश के प्राकृतिक सौंदर्य, संस्कृति, लोगों और उनके जीवन से गहरा परिचय और लगाव होना।
(झ) देश-प्रेम' का विग्रह करके समास का नाम लिखिए।
उत्तर: विग्रह: देश के लिए प्रेम। समास: तत्पुरुष समास।
(ज) वन के दो पर्यायवाची लिखिए।
उत्तर: अरण्य, कानन।
(ट) घड़ी' के दो अर्थ लिखिए।
उत्तर: 1. समय की एक निश्चित मात्रा (जैसे- एक घंटा)। 2. समय देखने का यंत्र (जैसे- हाथ की घड़ी)।
(ठ) निम्नलिखित वाक्य रचना की दृष्टि से किस प्रकार का है हितसाधन और हितचिंतन की प्रवृत्ति कोरे ज्ञान से भिन्न है।
उत्तर: यह वाक्य रचना की दृष्टि से सरल वाक्य है।
(ड) निम्नलिखित वाक्य का अर्थ की दृष्टि से प्रकार बताइए- इस प्रेम का आलंबन क्या है ?
उत्तर: यह वाक्य अर्थ की दृष्टि से प्रश्नवाचक वाक्य है।
2.गुरुदेव पूछते हैं कि भीष्म का अवतार क्यों नहीं माना गया। दिनकर जी महामना और उदार कवि थे। उनसे क्षमा मिल जाने की आशा से इतना तो कहा ही जा सकता है कि भीष्म अपने बम भोला नाथ गुरु परशुराम से अधिक संतुलित, विचारवान और ज्ञानी थे। पुराने रिकार्ड कुछ ऐसा सोचने को मजबूर कते है। फिर भी परशुराम को दस अवतारों में गिन लिया गया और बेचारे भीष्म को ऐसा कोई गौरव नहीं दिया गया। क्या कारण हो सकता है ?
(क) इस गद्बयांश का उपयुक्त शीर्षक दीजिए।
उत्तर: "भीष्म: अवतार क्यों नहीं?" या "भीष्म और परशुराम का तुलनात्मक अध्ययन"।
(ख) परशुराम में कौन-सी विशेषता भीष्म से अधिक थी.१
उत्तर: परशुराम में सीधी और स्पष्ट बात को सीधे तरीके से समझने की क्षमता भीष्म से अधिक थी। वे अन्याय को सहन नहीं करते थे और उसके विरुद्ध तत्काल कार्रवाई करते थे।
(ग) भीष्म का नाम भीष्म क्यों पड़ा?
उत्तर: अपने पिता की इच्छा पूरी करने के लिए उन्होंने आजीवन ब्रह्मचारी रहने और राजसिंहासन का दावा न करने की जो भयानक (भीषण) प्रतिज्ञा की, उसी के कारण उनका नाम 'देवव्रत' से बदलकर 'भीष्म' पड़ा।
(घ) भीष्म ने विवाह न करने की प्रतिज्ञा क्यों की थी?
उत्तर: भीष्म ने अपने पिता, राजा शांतनु, को उनकी प्रेयसी सत्यवती से विवाह करने का मार्ग प्रशस्त करने के लिए यह प्रतिज्ञा की थी। इससे यह सुनिश्चित हो गया कि भीष्म या उनके संतानों का सिंहासन पर कोई दावा नहीं होगा और सत्यवती के पुत्र ही भावी राजा बनेंगे।
(ड) खलने' का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: 'खलने' का आशय है - बुरा लगना, चुभना या मन को कष्ट पहुँचाना। यहाँ इसका प्रयोग यह बताने के लिए हुआ है कि क्या जीवन के अंत में भीष्म को यह बात बुरी नहीं लगी होगी कि उनकी भीषण प्रतिज्ञा के बाद भी कुरुवंश में असली रक्त संबंध नहीं रहा।
(च) मनीषी के दो पर्यायवाची लिखिए।
मनीषी के दो पर्यायवाची शब्द हैं - विचारक और बुद्धिमान।
(छ) अपहरण की गई कन्या के लिए कौन-से शब्द का प्रयोग हुआ है ?
अपहरण की गई कन्या के लिए प्रयुक्त शब्द है - अपहृता।
(ज) सत्यस्य वचनम्' और 'हितम्' में कौन-सा महत्त्वपूर्ण है ?
इस संदर्भ में, 'हितम्' (कल्याण) को 'सत्यस्य वचनम्' (सत्य वचन) से अधिक महत्त्वपूर्ण माना गया है।
(झ) कृष्ण ने वचन-सत्य और हित में से किसे चुना?
कृष्ण ने केवल वचन-सत्य का पालन करने के बजाय हित (सबका भला) को चुना।
(ज) भीष्म किस कमजोरी के कारण महान नहीं बन पाए ?
भीष्म ठीक समय पर सही निर्णय न ले पाने की कमजोरी के कारण महान नहीं बन पाए।
(ट) बालब्रह्मचारी से क्या तात्पर्य है ?
बालब्रह्मचारी से तात्पर्य उस व्यक्ति से है जो बचपन से ही ब्रह्मचर्य का पालन करता है और आजीवन संयमी जीवन व्यतीत करता है।
(ठ) 'लोक-कल्याण' में कौन-सा समास है ?
'लोक-कल्याण' में तत्पुरुष समास है।
(ड) आजीवन का विग्रह करके समास का नाम लिखिए।
विग्रह: जीवन भर।
समास का नाम: अव्ययीभाव समास।
(ढ) इस अनुच्छेद में प्रयुक्त अंग्रेजी शब्द छाँटिए।
अनुच्छेद में प्रयुक्त अंग्रेजी शब्द है - रिकॉर्ड।
(ण) विचारवान में प्रयुक्त प्रत्यय अलग कीजिए।
'विचारवान' शब्द में प्रयुक्त प्रत्यय है - वान्।
(त) 'संतुलित' में कौन-सा उपसर्ग है?
'संतुलित' शब्द में प्रयुक्त उपसर्ग है - सम्।
(थ) 'इत' प्रत्यय से बने कोई दो शब्द छाँटिए।
'इत' प्रत्यय से बने दो शब्द हैं - संतुलित और अपमानित।
(क) उचित शीर्षक दीजिए।
इस गद्यांश का एक उचित शीर्षक है - सद्गुण अपनाएँ, अवगुण स्वयं छूट जाएँगे।
(ख) 'अनायास' का अर्थ स्पष्ट कीजिए।
'अनायास' का अर्थ है - बिना किसी प्रयास के, स्वतः ही, अपने आप।
(ग) मितभाषी का विपरीतार्थक लिखिए।
मितभाषी का विपरीतार्थक (विलोम) शब्द है - वाचाल या अतिभाषी।
(घ) 'पृथक्' और 'अभ्यास' के कौन-कौन से पर्यायवाची शब्द प्रयुक्त हुए हैं ?
पृथक् का पर्यायवाची: भिन्न।
अभ्यास का पर्यायवाची: आदत।
(ङ) गंदी हवा को दूर करने का सर्वोत्तम उपाय क्या है ?
गंदी हवा को दूर करने का सर्वोत्तम उपाय है - खिड़की-दरवाजे खोलकर ताजी और स्वच्छ हवा को अंदर आने देना।
(च) अवगुण को दूर करने का सर्वोत्तम उपाय क्या है ?
अवगुण को दूर करने का सर्वोत्तम उपाय है - सद्गुणों को अपनाना और उन पर ध्यान केंद्रित करना।
(छ) 'धर्म जानता हूँ, उसमें प्रवृत्ति नहीं।' का आशय स्पष्ट कीजिए।
इसका आशय है कि व्यक्ति धर्म के नियमों और कर्तव्यों को जानता तो है, लेकिन उनका पालन करने में उसकी रुचि नहीं है। वह जानबूझकर भी धर्म के मार्ग पर नहीं चल पाता।
(ज) अवगुण कब अपनी मौत मर जाते हैं ?
अवगुण तब अपने आप समाप्त हो जाते हैं जब हम उन पर अधिक ध्यान न देकर, उन्हें बलवान बनाने वाले संकल्प-विकल्प नहीं करते और अपना ध्यान सद्गुणों को अपनाने में लगाते हैं।
(झ) लेखक अवगुणों को छोड़ने का संकल्प क्यों नहीं कराना चाहता?
लेखक का मानना है कि अवगुणों को छोड़ने का संकल्प करने से वे हमारे चिंतन के केंद्र में आ जाते हैं और और भी मजबूत हो जाते हैं। इसलिए बेहतर है कि हम सीधे सद्गुणों को अपनाने पर ध्यान दें।
(ज) 'अधर्म जानता हूँ, उसमें निवृत्ति नहीं।' का आशय स्पष्ट कीजिए।
इसका आशय है कि व्यक्ति अधर्म (गलत काम) के दुष्परिणामों को जानता है, फिर भी उससे अपने आप को रोक नहीं पाता और बार-बार उसी में फंस जाता है।
(ठ) 'तुरंत' या 'शीघ्र' के लिए किस नए शब्द का प्रयोग किया गया है ?
तुरंत या शीघ्र के लिए प्रयुक्त नया शब्द है - अचिरकाल।
(ड) चंचल स्वभाव को छोड़ने के लिए क्या करना चाहिए?
चंचल स्वभाव को छोड़ने के लिए अपने मन में अपने 'गंभीर स्वरूप' की कल्पना करनी चाहिए और बार-बार उसी चित्र को देखना चाहिए। इससे प्रकृति स्वतः बदलने लगेगी।
(ढ) 'अनायास' का संधि-विच्छेद कीजिए।
'अनायास' का संधि-विच्छेद है - अनु + आयास।
(द) अनायास, सद्गुण और प्रवृत्ति के विलोम लिखिए।
अनायास का विलोम: सायास (प्रयत्नपूर्वक)।
सद्गुण का विलोम: दुर्गुण या अवगुण।
प्रवृत्ति का विलोम: निवृत्ति।
(ण) 'महत्त्व' में प्रयुक्त प्रत्यय अलग कीजिए।
'महत्त्व' शब्द में प्रयुक्त प्रत्यय है - त्व।
(त) 'उत्तर' के दो भिन्न अर्थ लिखिए।
1. प्रश्न का जवाब।
2. दिशा का नाम (जैसे उत्तर दिशा)।
(थ) 'यथावकाश' में कौन-सा समास है ?
'यथावकाश' में अव्ययीभाव समास है।
(द) निम्नलिखित वाक्य किस प्रकार का है-
किसी कमरे में गंदी हवा और स्वच्छ वायु एक साथ रह ही नहीं सकती।
यह वाक्य सरल वाक्य है।
1. निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
सफलता का रहस्य है- कार्य में लगन। जो व्यक्ति अपने कार्य के प्रति लगनशील नहीं है, वह कभी सफल नहीं हो सकता। लगनशील व्यक्ति अपने कार्य में तन्मय हो जाता है। उसे कार्य के अतिरिक्त और कुछ सूझता ही नहीं। वह अपने कार्य में इतना खो जाता है कि उसे भूख-प्यास का भी ध्यान नहीं रहता। ऐसे व्यक्ति को सफलता अवश्य मिलती है।
(क) लेखक के अनुसार सफलता का रहस्य क्या है?
लेखक के अनुसार, सफलता का मुख्य रहस्य किसी भी कार्य में पूरी लगन और एकाग्रता के साथ जुटे रहना है। जो व्यक्ति अपने काम के प्रति समर्पित और लगनशील होता है, वही अंततः सफलता प्राप्त कर पाता है।
(ख) लगनशील व्यक्ति की क्या विशेषता होती है?
एक लगनशील व्यक्ति की सबसे बड़ी विशेषता यह होती है कि वह अपने कार्य में पूरी तरह तल्लीन और तन्मय हो जाता है। उसका ध्यान केवल अपने काम पर केंद्रित रहता है, जिससे वह बाहरी विचारों या शारीरिक आवश्यकताओं जैसे भूख-प्यास तक को भूल जाता है।
(ग) लगनशील व्यक्ति को क्या अवश्य मिलती है?
लेखक का मानना है कि एक सच्चे लगनशील व्यक्ति को उसके परिश्रम और समर्पण का फल अवश्य मिलता है, और वह फल है सफलता। उसकी मेहनत और एकाग्रता उसे अपने लक्ष्य तक पहुँचाने में सहायक होती है।
(घ) गद्यांश का उचित शीर्षक लिखिए।
इस गद्यांश का एक उपयुक्त और सारगर्भित शीर्षक है – "सफलता का रहस्य: लगन" या "लगनशीलता और सफलता"।
2. निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। वह समाज में रहकर ही अपना विकास कर सकता है। समाज के बिना उसका जीवन अधूरा है। समाज ही उसे सुरक्षा, शिक्षा और संस्कार प्रदान करता है। समाज में रहते हुए मनुष्य को कुछ कर्तव्यों का पालन करना पड़ता है। यदि वह अपने कर्तव्यों का पालन नहीं करता तो समाज में अव्यवस्था फैल सकती है।
(क) मनुष्य किस प्रकार का प्राणी है?
मनुष्य मूल रूप से एक सामाजिक प्राणी है। इसका अर्थ है कि वह अकेले नहीं, बल्कि दूसरे लोगों के साथ समूह या समाज में रहकर ही पूर्ण रूप से विकसित हो पाता है और अपना जीवन यापन कर पाता है।
(ख) समाज मनुष्य को क्या-क्या प्रदान करता है?
समाज मनुष्य के जीवन के लिए अनेक आवश्यक चीजें प्रदान करता है, जैसे कि सुरक्षा (शारीरिक और मानसिक), शिक्षा (ज्ञान और कौशल), और संस्कार (अच्छे आचरण और मूल्य) जो उसे एक बेहतर इंसान बनाते हैं।
(ग) मनुष्य को समाज में रहते हुए क्या करना पड़ता है?
समाज का एक जिम्मेदार सदस्य बनने के लिए मनुष्य को कुछ निश्चित कर्तव्यों का पालन करना पड़ता है। इनमें नियमों का पालन करना, दूसरों के अधिकारों का सम्मान करना और समाज के कल्याण में योगदान देना शामिल है।
(घ) यदि मनुष्य अपने कर्तव्यों का पालन नहीं करेगा तो क्या होगा?
यदि मनुष्य अपने सामाजिक कर्तव्यों की उपेक्षा करेगा, तो इससे समाज में अव्यवस्था और अशांति फैल सकती है। नियमों का उल्लंघन, आपसी विश्वास की कमी और सहयोग का अभाव समाज के ढाँचे को कमजोर कर सकता है।
3. निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
प्रकृति मानव की सबसे बड़ी मित्र है। यह हमें जीवनदायिनी वायु, पीने योग्य जल, खाने योग्य अन्न और रहने योग्य भूमि प्रदान करती है। प्रकृति के बिना मानव का अस्तित्व ही संभव नहीं है। परंतु आज मानव प्रकृति का दोहन कर रहा है। वह वनों को काट रहा है, नदियों को प्रदूषित कर रहा है। इससे प्रकृति का संतुलन बिगड़ रहा है।
(क) प्रकृति मानव की क्या है?
प्रकृति मानव जाति की सबसे बड़ी और सच्ची मित्र है, क्योंकि वह बिना किसी स्वार्थ के हमें जीवन के लिए आवश्यक सभी संसाधन प्रदान करती है।
(ख) प्रकृति हमें क्या-क्या प्रदान करती है?
प्रकृति हमें जीवन के मूलभूत और अनिवार्य तत्व प्रदान करती है, जैसे – साँस लेने के लिए शुद्ध वायु, पीने के लिए जल, भोजन के लिए अन्न, और रहने के लिए भूमि। ये सभी चीजें हमारे अस्तित्व की आधारशिला हैं।
(ग) आज मानव क्या कर रहा है?
दुर्भाग्य से, आज का मानव प्रकृति के साथ मित्रता का व्यवहार न करके उसका अनियंत्रित दोहन और शोषण कर रहा है। वह वनों की अंधाधुंध कटाई कर रहा है और नदियों, हवा व भूमि को प्रदूषित कर रहा है।
(घ) इससे क्या परिणाम हो रहा है?
मानव की इन स्वार्थपूर्ण गतिविधियों का सीधा दुष्परिणाम यह हो रहा है कि प्रकृति का सूक्ष्म और नाजुक संतुलन बिगड़ रहा है। इससे पर्यावरणीय समस्याएँ जैसे जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक आपदाएँ और संसाधनों की कमी उत्पन्न हो रही है।
1. निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए :
मनुष्य के लिए सबसे बड़ा आश्चर्य स्वयं मनुष्य है। वह अपनी बुद्धि के बल पर प्रकृति पर विजय प्राप्त करता है। विज्ञान और तकनीकी के क्षेत्र में उसकी प्रगति अद्भुत है। उसने चाँद पर कदम रखा है और मंगल ग्रह तक पहुँच गया है। कंप्यूटर और इंटरनेट ने तो उसकी शक्ति को असीमित बना दिया है। परंतु इन सबके बावजूद मनुष्य अभी भी अपने आप से संतुष्ट नहीं है। वह और अधिक पाने की चाह में भागता रहता है। इस दौड़ में वह अपने आस-पास के लोगों, प्रकृति और यहाँ तक कि अपने स्वास्थ्य को भी नजरअंदाज कर देता है। क्या यही सच्ची प्रगति है?
(क) मनुष्य के लिए सबसे बड़ा आश्चर्य क्या है?
उत्तर: मनुष्य के लिए सबसे बड़ा आश्चर्य स्वयं मनुष्य ही है। उसकी क्षमताएँ, बुद्धि और प्रकृति पर विजय पाने का हुनर उसे सबसे आश्चर्यजनक प्राणी बनाता है।
(ख) मनुष्य ने किन क्षेत्रों में अद्भुत प्रगति की है?
उत्तर: मनुष्य ने विज्ञान और तकनीकी के क्षेत्र में अद्भुत प्रगति की है। उसने अंतरिक्ष में चाँद पर कदम रखा, मंगल ग्रह तक पहुँच बनाई और कंप्यूटर व इंटरनेट जैसी क्रांतिकारी खोजों से अपनी शक्ति को असीमित कर दिया है।
(ग) मनुष्य की दौड़ का उसके जीवन पर क्या प्रभाव पड़ा है?
उत्तर: मनुष्य की और अधिक पाने की दौड़ ने उसके जीवन पर नकारात्मक प्रभाव डाला है। वह इस भागमभाग में अपने प्रियजनों, प्रकृति के साथ सामंजस्य और अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना भूल गया है, जिससे उसका जीवन असंतुलित हो गया है।
(घ) गद्यांश के अनुसार सच्ची प्रगति क्या है?
उत्तर: गद्यांश के अनुसार, सच्ची प्रगति केवल भौतिक उपलब्धियाँ नहीं है। असली प्रगति तब है जब मनुष्य तकनीकी विकास के साथ-साथ अपने मानवीय मूल्यों, प्रकृति के साथ तालमेल और आंतरिक संतुष्टि को भी बनाए रखे।
(ङ) ‘अद्भुत’ और ‘असीमित’ शब्दों के अर्थ लिखिए।
उत्तर:
- अद्भुत: आश्चर्यजनक, अत्यंत आश्चर्यकारी, विस्मय पैदा करने वाला।
- असीमित: जिसकी कोई सीमा न हो, अनंत, बेहद अधिक।
2. निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए :
पुस्तकें मनुष्य की सच्ची मित्र होती हैं। वे हमें ज्ञान देती हैं, मनोरंजन करती हैं और जीवन की समस्याओं का समाधान सुझाती हैं। एक अच्छी पुस्तक हमारे जीवन को बदल सकती है। यह हमें नई दिशा दे सकती है। पुस्तकों के बिना जीवन अधूरा है। आजकल लोग पुस्तकों से दूर होते जा रहे हैं। वे मोबाइल और इंटरनेट में व्यस्त रहते हैं। इससे उनकी सोचने-समझने की शक्ति कम हो रही है। पुस्तकें पढ़ने से एकाग्रता बढ़ती है और भाषा पर अच्छी पकड़ होती है।
(क) पुस्तकें हमारी सच्ची मित्र क्यों हैं?
उत्तर: पुस्तकें हमारी सच्ची मित्र इसलिए हैं क्योंकि वे हमेशा साथ देती हैं, बिना किसी स्वार्थ के ज्ञान और मार्गदर्शन प्रदान करती हैं तथा कठिन समय में मनोरंजन और समाधान का स्रोत बनती हैं।
(ख) एक अच्छी पुस्तक हमारे जीवन को कैसे बदल सकती है?
उत्तर: एक अच्छी पुस्तक नए विचारों और अनुभवों से हमारा सामना कराकर हमारी सोच को विस्तृत कर सकती है। यह हमें जीवन के प्रति नजरिया बदलने, निर्णय लेने और नई राह पर चलने की प्रेरणा देकर जीवन को बदल सकती है।
(ग) आजकल लोग पुस्तकों से दूर क्यों हो रहे हैं?
उत्तर: आजकल लोग डिजिटल उपकरणों जैसे मोबाइल फोन, इंटरनेट और सोशल मीडिया में अधिक समय बिताने लगे हैं, जिसके कारण वे पारंपरिक पुस्तकों से धीरे-धीरे दूर होते जा रहे हैं।
(घ) पुस्तकें पढ़ने से क्या-क्या लाभ हैं?
उत्तर: पुस्तकें पढ़ने से अनेक लाभ हैं:
- ज्ञान और सूचना में वृद्धि होती है।
- एकाग्रता और स्मरण शक्ति मजबूत होती है।
- भाषा कौशल, शब्दावली और अभिव्यक्ति की क्षमता बेहतर होती है।
- तनाव कम होता है और कल्पनाशक्ति का विकास होता है।
(ङ) ‘मनोरंजन’ और ‘एकाग्रता’ शब्दों के अर्थ लिखिए।
उत्तर:
- मनोरंजन: मन बहलाना, अवकाश के समय आनंददायक गतिविधियाँ करना।
- एकाग्रता: किसी एक कार्य या विषय पर पूरा ध्यान केंद्रित करना।
3. निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए :
प्रकृति मनुष्य की सबसे बड़ी देन है। प्रकृति हमें जल, वायु, भोजन और आवास सब कुछ प्रदान करती है। प्रकृति के बिना जीवन संभव नहीं है। परंतु आज मनुष्य प्रकृति का दोहन कर रहा है। वनों की कटाई, प्रदूषण और जल का दुरुपयोग प्रकृति के लिए खतरा बन गए हैं। इससे न केवल पर्यावरण को नुकसान हो रहा है बल्कि मनुष्य का अपना अस्तित्व भी खतरे में पड़ गया है। हमें प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाकर रहना चाहिए।
(क) प्रकृति मनुष्य की सबसे बड़ी देन क्यों है?
उत्तर: प्रकृति मनुष्य की सबसे बड़ी देन है क्योंकि यह जीवन के मूलभूत आवश्यकताओं जैसे शुद्ध हवा, पीने का पानी, पोषक भोजन और रहने के लिए संसाधन उपलब्ध कराती है। बिना प्रकृति के मनुष्य का अस्तित्व ही संभव नहीं है।
(ख) मनुष्य प्रकृति का दोहन कैसे कर रहा है?
उत्तर: मनुष्य प्रकृति का दोहन वनों की अंधाधुंध कटाई, नदियों व वायु को प्रदूषित करने, भूजल का अत्यधिक दोहन और प्लास्टिक जैसे अविघटित कचरे से पर्यावरण को नुकसान पहुँचाकर कर रहा है।
(ग) प्रकृति के दोहन से क्या-क्या खतरे उत्पन्न हो रहे हैं?
उत्तर: प्रकृति के दोहन से गंभीर खतरे उत्पन्न हो रहे हैं, जैसे:
- जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग।
- वन्य जीवों का आवास नष्ट होना और जैव विविधता की कमी।
- वायु, जल और भूमि प्रदूषण में वृद्धि।
- प्राकृतिक आपदाओं (बाढ़, सूखा) की आवृत्ति और तीव्रता में वृद्धि।
(घ) हमें प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाकर क्यों रहना चाहिए?
उत्तर: हमें प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाकर रहना चाहिए क्योंकि हम प्रकृति का हिस्सा हैं, उससे अलग नहीं। सामंजस्य से ही टिकाऊ विकास संभव है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वस्थ पर्यावरण सुनिश्चित करेगा और हमारा अपना जीवन भी सुरक्षित रहेगा।
(ङ) ‘दोहन’ और ‘सामंजस्य’ शब्दों के अर्थ लिखिए।
उत्तर:
- दोहन: अत्यधिक उपयोग करके किसी चीज का शोषण करना, संसाधनों का बिना सोचे-समझे इस्तेमाल।
- सामंजस्य: तालमेल, मेल-जोल, विभिन्न तत्वों के बीच सही संतुलन बनाए रखना।
1. निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
मनुष्य का जीवन एक संघर्ष है। संघर्ष से ही वह अपने जीवन को सफल बना सकता है। संघर्ष के बिना जीवन नीरस और निरर्थक है। संघर्ष से मनुष्य में आत्मविश्वास पैदा होता है। वह कठिनाइयों से लड़ना सीखता है। संघर्ष से ही मनुष्य अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकता है। जो व्यक्ति संघर्ष से डरते हैं, वे जीवन में कभी सफल नहीं हो पाते। संघर्ष मनुष्य को साहसी और बलवान बनाता है।
(क) मनुष्य का जीवन क्या है?
मनुष्य का जीवन एक निरंतर संघर्ष है। यह संघर्ष ही उसे जीवन में सफलता और उद्देश्य प्रदान करता है।
(ख) संघर्ष से मनुष्य में क्या पैदा होता है?
संघर्ष से मनुष्य के भीतर आत्मविश्वास और साहस का विकास होता है। यह उसे कठिन परिस्थितियों का सामना करने और उन पर विजय पाने की शक्ति देता है।
(ग) संघर्ष से डरने वाले व्यक्ति के बारे में लेखक क्या कहता है?
लेखक कहता है कि जो व्यक्ति संघर्ष से डरते हैं और उसका सामना नहीं करते, वे जीवन में कभी भी सफलता प्राप्त नहीं कर पाते। उनका जीवन नीरस और लक्ष्यहीन रह जाता है।
(घ) संघर्ष मनुष्य को क्या बनाता है?
संघर्ष मनुष्य को साहसी, बलवान और दृढ़निश्चयी बनाता है। यह उसे जीवन की चुनौतियों के लिए तैयार करता है और उसके चरित्र को मजबूत बनाता है।
(ङ) उपर्युक्त गद्यांश का उचित शीर्षक लिखिए।
गद्यांश का एक उचित शीर्षक है: "जीवन और संघर्ष" या "संघर्ष का महत्व"।
2. निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
शिक्षा मनुष्य के जीवन का आधार है। शिक्षा के बिना मनुष्य पशु के समान है। शिक्षा से ही मनुष्य का सर्वांगीण विकास होता है। शिक्षा मनुष्य को सभ्य और संस्कारवान बनाती है। शिक्षा से मनुष्य में नैतिक मूल्यों का विकास होता है। शिक्षित व्यक्ति ही समाज और देश की उन्नति में योगदान दे सकता है। शिक्षा से मनुष्य अज्ञान के अंधकार से मुक्त होता है।
(क) शिक्षा मनुष्य के जीवन का क्या है?
शिक्षा मनुष्य के जीवन का मूल आधार और नींव है। यह उसे एक सार्थक और विकसित जीवन जीने की दिशा प्रदान करती है।
(ख) शिक्षा के बिना मनुष्य कैसा है?
शिक्षा के अभाव में मनुष्य का जीवन एक पशु के समान हो जाता है, जिसमें सोच-विचार, नैतिकता और सभ्य व्यवहार का अभाव रहता है।
(ग) शिक्षा से मनुष्य में किन मूल्यों का विकास होता है?
शिक्षा से मनुष्य में नैतिक मूल्यों, सदाचार, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना का विकास होता है।
(घ) शिक्षित व्यक्ति किसमें योगदान दे सकता है?
एक शिक्षित व्यक्ति ही अपने ज्ञान और कौशल से समाज की प्रगति और राष्ट्र के विकास में सक्रिय योगदान दे सकता है।
(ङ) गद्यांश का उचित शीर्षक दीजिए।
इस गद्यांश के लिए एक उपयुक्त शीर्षक है: "शिक्षा का महत्व" या "मानव जीवन में शिक्षा"।
बहुविकल्पीय प्रश्न
1. निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर दिए गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनिए-
प्रकृति मानव जीवन की सबसे बड़ी शिक्षिका है। प्रकृति से ही मनुष्य ने जीवन जीने की कला सीखी है। प्रकृति की गोद में रहकर मनुष्य ने सहनशीलता, धैर्य और परिश्रम का पाठ पढ़ा है। प्रकृति का सौंदर्य मनुष्य के मन को शांति प्रदान करता है। प्रकृति से दूर रहने वाला मनुष्य तनावग्रस्त और अशांत रहता है। प्रकृति के सान्निध्य में मनुष्य का स्वास्थ्य भी ठीक रहता है।
(i) प्रकृति क्या है?
(A) मानव जीवन की सबसे बड़ी शिक्षिका
(B) मानव जीवन की सबसे बड़ी शत्रु
(C) मानव जीवन की सबसे बड़ी समस्या
(D) मानव जीवन की सबसे बड़ी बाधा
(ii) प्रकृति से मनुष्य ने क्या सीखा है?
(A) जीवन जीने की कला
(B) लड़ने की कला
(C) भागने की कला
(D) झूठ बोलने की कला
(iii) प्रकृति की गोद में रहकर मनुष्य ने किन गुणों का पाठ पढ़ा है?
(A) सहनशीलता, धैर्य और परिश्रम
(B) क्रोध, लालच और ईर्ष्या
(C) आलस्य, प्रमाद और कायरता
(D) स्वार्थ, छल और कपट
(iv) प्रकृति से दूर रहने वाला मनुष्य कैसा रहता है?
(A) तनावग्रस्त और अशांत
(B) प्रसन्न और शांत
(C) स्वस्थ और सबल
(D) धनी और संपन्न
(v) प्रकृति के सान्निध्य में मनुष्य का क्या ठीक रहता है?
(A) स्वास्थ्य
(B) धन
(C) व्यवसाय
(D) मकान
उत्तर:
(i) (A) मानव जीवन की सबसे बड़ी शिक्षिका
(ii) (A) जीवन जीने की कला
(iii) (A) सहनशीलता, धैर्य और परिश्रम
(iv) (A) तनावग्रस्त और अशांत
(v) (A) स्वास्थ्य
प्रश्न (क) उपयुक्त शीर्षक दीजिए।
उत्तर: कर्मयोगी लालबहादुर शास्त्री का जीवन-संघर्ष
(ख) शास्त्री जी के चरित्र की सबसे बड़ी विशेषता क्या थी?
उत्तर: लालबहादुर शास्त्री जी के चरित्र की सबसे बड़ी और प्रमुख विशेषता उनकी सादगी, सरलता और विनम्रता थी। ये गुण उनके व्यक्तित्व की नींव थे।
(ग) शास्त्री के व्यक्तित्व को आकर्षक बनाने वाले गुण कौन-कौन से थे?
उत्तर: शास्त्री जी के व्यक्तित्व को विशेष रूप से आकर्षक बनाने वाले गुण थे - विनम्रता, सादगी और सरलता। ये तीनों गुण मिलकर उनमें एक अनूठा और प्रभावशाली व्यक्तित्व निर्मित करते थे।
(घ) विनम्रता, सादगी और सरलता उबके व्यक्तित्व में एक विचित्र प्रकार का आकर्षण पैदा करती थी। रेखांकित शब्दों से विशेषण बनाइए।
उत्तर:
विनम्रता - विनम्र
सादगी - सादा
सरलता - सरल
आकर्षण - आकर्षक
(ड) किस गुण के कारण शास्त्री जी का जीवन गाँधी जी के करीब था?
उत्तर: शास्त्री जी के जीवन को महात्मा गांधी जी के जीवन के करीब लाने वाला प्रमुख गुण था - सादगी और सरलता का पालन। गांधी जी के रचनात्मक कार्यों में लगे रहने की प्रवृत्ति भी उन्हें गांधी जी के निकट लाती थी।
(a) “विनम्र ही पृथ्वी के वारिस होंगे का क्या आशय है?
उत्तर: इस कथन का आशय है कि अंततः इस धरती पर वही लोग टिक पाएंगे और इसके सुखों का उपभोग कर पाएंगे जिनके हृदय में विनम्रता है। अहंकारी और उद्दंड लोगों का अस्तित्व स्थायी नहीं होता।
(छ) शास्त्री जी ने स्वतंत्रता-आंदौलन में भाग लेने की शुरूआत कब से की?
उत्तर: लालबहादुर शास्त्री जी ने स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेना अपने विद्यार्थी जीवन से ही, मात्र 17 वर्ष की आयु में शुरू कर दिया था।
(ज) शास्त्री जी 1942 में किस सिलसिले में जेल गए?
उत्तर: सन् 1942 में, शास्त्री जी 'भारत छोड़ो आंदोलन' में सक्रिय भागीदारी के सिलसिले में गिरफ्तार हुए और जेल गए। यह उनकी सबसे लंबी जेल यात्रा थी।
(झ) इस अनुच्छेद से तत्सम तथा उर्दू के दो-दो शब्द छाँटिए।
उत्तर:
तत्सम शब्द: रचनात्मक, व्यवस्थापिका (या महत्वपूर्ण)
उर्दू शब्द: वारिस, परवरिश
(ज) 'ललक के दो पर्यायवाची लिखिए।
उत्तर: 'ललक' के दो पर्यायवाची शब्द हैं - उत्सुकता और आकांक्षा (या व्यग्रता)।
(5) शास्त्री जी ने जनसेवक के रूप में किस नगर की सेवा की?
उत्तर: जनसेवक के रूप में, शास्त्री जी ने इलाहाबाद (प्रयागराज) नगर की नगरपालिका में रहकर सेवा की थी।
(ठ) कौन-से सन् में शास्त्री जी संसद सभा के सदस्य बने ?
उत्तर: लालबहादुर शास्त्री जी सन् 1937 में संयुक्त प्रांत (यूपी) की व्यवस्थापिका सभा के लिए निर्वाचित हुए, जो उनके संसदीय जीवन की शुरुआत थी।
(ड) अछूतोद्धार का विग्रह करके समास का नाम लिखिए।
उत्तर:
विग्रह: अछूतों का उद्धार
समास का नाम: तत्पुरुष समास
प्रश्न (क) उचित शीर्षक दीजिए।
उत्तर: प्रकृति की गोद में एक सादा जीवन
(ख) गड़रिये के परिवार में कौन-कौन सदस्य हैं?
उत्तर: गड़रिये के परिवार में निम्नलिखित सदस्य हैं: एक बूढ़ा गड़रिया, उसकी पत्नी (स्त्री), और उनकी दो जवान कन्याएँ। माता-पिता का उल्लेख भी है।
(ग) गड़रिये का मकान कैसा है ?
उत्तर: गड़रिये का कोई स्थायी मकान नहीं है। वह बेमकान और बेघर जीवन जीता है। जहाँ जाता है, वहाँ घास-फूस की एक अस्थायी झोपड़ी बना लेता है।
(घ) लेखक ने किस दिव्य परिवार कहा है और क्यों?
उत्तर: लेखक ने गड़रिये के परिवार को 'दिव्य परिवार' कहा है क्योंकि उनका जीवन प्रकृति के साथ सामंजस्य में, सादगी, पवित्रता और निश्छल आनंद से भरा हुआ है। उन्हें भौतिक सुख-सुविधाओं की आवश्यकता नहीं है।
(ड) 'लावण्यमय' का अर्थ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: 'लावण्यमय' का अर्थ है - सौंदर्य से भरपूर, मनमोहक सुंदरता वाला, आकर्षक। यहाँ गड़रिये की कन्या के मुख की सुंदरता के लिए इस शब्द का प्रयोग हुआ है।
(च) गड़रिये के परिवार के सदस्य विपत्ति पड़ने पर किसकी आराधना करते हैं?
उत्तर: विपत्ति (जैसे भेड़ के बीमार होने) के समय, परिवार के सदस्य बिना कुछ बोले, शब्दरहित, मौन प्रार्थना करते हुए आकाश की ओर देखते हैं, यानी ईश्वर से प्रार्थना करते हैं।
(छ) गड़रिया किस कारण आनंद से नाचने लगा?
उत्तर: गड़रिया इसलिए आनंद से नाचने लगा क्योंकि उसकी बीमार भेड़ स्वस्थ हो गई थी और बारिश होने से प्रकृति भी उसके आनंद में शामिल हो रही थी।
(ज) 'ब्रह्मानंद का समाँ बाँधना' का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: इस मुहावरे का आशय है - ऐसा दिव्य और परम आनंदमय वातावरण उत्पन्न करना जो ईश्वरीय आनंद (ब्रह्मानंद) के समान हो। यहाँ गड़रिये के परिवार के नाच-गाने ने ऐसा ही वातावरण बना दिया था।
(झ) इस अनुच्छेद से दो विशेषण खोजिए।
उत्तर: अनुच्छेद से दो विशेषण हैं:
1. बूढ़ा (गड़रिया)
2. सफेद (ऊन/बाल)
(ज) स्त्री के दो भिन्न अर्थ लिखिए।
उत्तर: 'स्त्री' शब्द के दो भिन्न अर्थ हैं:
1. पत्नी
2. नारी या महिला
(5) युवावस्था का विग्रह करके समास का नाम लिखिए।
उत्तर:
विग्रह: युवा अवस्था
समास का नाम: कर्मधारय समास
(5) इस अनुच्छेद से दो उर्दू तथा दो तत्सम शब्द छाँटिए।
उत्तर:
उर्दू शब्द: खुदा, फुरसत
तत्सम शब्द: पवित्रता, अंत:करण (या युवावस्था)
(ड) 'पंडित' शब्द का पर्यायवाची लिखिए।
उत्तर: 'पंडित' शब्द का एक पर्यायवाची है - विद्वान।
(ढ) लेखक अज्ञान और ज्ञान में से किसे स्वीकार करना चाहता है ?
उत्तर: इस अनुच्छेद के संदर्भ में स्पष्ट नहीं है, लेकिन सामान्यतः लेखक ऐसे जीवन को दर्शाता है जो सरल 'अज्ञान' में नहीं, बल्कि प्रकृति और आत्मा के सच्चे ज्ञान से परिपूर्ण है।
(OT) 'आत्मानुभव' से क्या आशय है १
उत्तर: 'आत्मानुभव' का आशय है - अपने आत्मा या अस्तित्व का सीधा, व्यक्तिगत और वास्तविक अनुभव करना। यह किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि स्वयं के भीतर झांककर प्राप्त होने वाला ज्ञान है।
(त) 'माता-पिता' में कौन-सा समास है ?
उत्तर: 'माता-पिता' में द्वंद्व समास है, क्योंकि इसमें दोनों पद प्रधान होते हैं और 'और' शब्द का लोप होता है।
प्रश्न 1. अपठित गद्यांश किसे कहते हैं?
अपठित गद्यांश का अर्थ है वह गद्य लेख जिसे पहले कभी न पढ़ा गया हो। यह परीक्षा में दिया जाता है ताकि छात्र उसे पढ़कर, उसके अर्थ और भाव को समझकर, उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दे सकें। इसका उद्देश्य छात्रों की भाषा की समझ, तर्कशक्ति और विश्लेषण क्षमता का आकलन करना है।
प्रश्न 2. अपठित गद्यांश को हल करने की विधि लिखिए।
अपठित गद्यांश को हल करने के लिए निम्नलिखित चरणों का पालन करना चाहिए:
- गद्यांश का सावधानीपूर्वक पठन: पहले पूरे गद्यांश को ध्यान से दो-तीन बार पढ़ें ताकि उसका मुख्य विषय और भाव स्पष्ट हो जाए।
- कठिन शब्दों को समझना: यदि कोई कठिन शब्द आता है, तो वाक्य के संदर्भ से उसका अर्थ समझने का प्रयास करें।
- प्रश्नों को पढ़ना: गद्यांश को समझने के बाद, दिए गए सभी प्रश्नों को ध्यान से पढ़ें।
- उत्तर गद्यांश में खोजना: प्रश्न का उत्तर गद्यांश में ही ढूंढ़ें। अक्सर उत्तर सीधे या परोक्ष रूप से गद्यांश में ही मिल जाते हैं।
- स्पष्ट और संक्षिप्त उत्तर लिखना: उत्तर अपने शब्दों में लिखें, लेकिन वे स्पष्ट और संक्षिप्त होने चाहिए। अनावश्यक विस्तार से बचें।
- पुनरीक्षण: सभी उत्तर लिखने के बाद, उन्हें एक बार ज़रूर पढ़ लें ताकि किसी प्रकार की त्रुटि या अधूरापन न रह जाए।
प्रश्न 3. अपठित गद्यांश के प्रश्नों के उत्तर लिखते समय किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
अपठित गद्यांश के उत्तर लिखते समय निम्नलिखित बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए:
- उत्तर गद्यांश के भाव के अनुरूप और प्रासंगिक होने चाहिए।
- उत्तर पूर्ण और स्पष्ट होने चाहिए, आधे-अधूरे नहीं।
- भाषा सरल, सहज और व्याकरण की दृष्टि से शुद्ध होनी चाहिए।
- जहाँ तक संभव हो, उत्तर अपने शब्दों में लिखें, गद्यांश की पंक्तियों को हूबहू नहीं।
- वर्तनी (Spelling) की गलतियों से बचें।
- उत्तर की लंबाई प्रश्न के अनुरूप होनी चाहिए। एक-दो शब्दों के उत्तर वाले प्रश्नों के लिए लंबा उत्तर न लिखें और विस्तृत उत्तर वाले प्रश्नों के लिए संक्षिप्त उत्तर न दें।
प्रश्न 4. अपठित गद्यांश के प्रश्नों के उत्तर लिखते समय किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
इस प्रश्न का उत्तर ऊपर प्रश्न 3 में दिया जा चुका है। ध्यान रखें कि उत्तर गद्यांश के मूल भाव से अलग न हों, भाषा स्पष्ट हो और हर उत्तर प्रश्न के अनुरूप पूर्णता के साथ दिया जाए।
प्रश्न 5. निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
मनुष्य का जीवन संघर्षमय है। संघर्ष ही उसे सफलता के शिखर पर पहुँचाता है। जो व्यक्ति संघर्ष से डर जाता है, वह जीवन में कभी आगे नहीं बढ़ पाता। संघर्ष हमें कठिनाइयों से लड़ना सिखाता है और हमारे चरित्र को मजबूत बनाता है। इसलिए संघर्ष से घबराना नहीं चाहिए, बल्कि उसका सामना करना चाहिए।
1. मनुष्य का जीवन कैसा है?
मनुष्य का जीवन संघर्ष से भरा हुआ है, यानी यह संघर्षमय है। जीवन में सफलता पाने के लिए लगातार प्रयास और मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।
2. संघर्ष से डरने वाला व्यक्ति क्या नहीं कर पाता?
जो व्यक्ति संघर्ष से डर जाता है, वह जीवन में कभी प्रगति नहीं कर पाता। वह आगे नहीं बढ़ पाता और सफलता के मौके गँवा बैठता है।
3. संघर्ष हमें क्या सिखाता है?
संघर्ष हमें जीवन की कठिनाइयों और चुनौतियों का सामना करना सिखाता है। यह हमारे अंदर धैर्य, हिम्मत और लड़ने की शक्ति पैदा करता है।
4. संघर्ष के प्रति हमारा क्या रवैया होना चाहिए?
हमें संघर्ष से घबराना नहीं चाहिए। इसके विपरीत, हमें बहादुरी के साथ उसका सामना करना चाहिए और उसे अपनी ताकत बनाना चाहिए।
5. उपर्युक्त गद्यांश के लिए एक उचित शीर्षक दीजिए।
अपठित गद्यांश
प्रश्न (क) इस गद्यांश का शीर्षक दीजिए।
उत्तर: इस गद्यांश का एक उपयुक्त शीर्षक "अहंकार और प्रतिस्पर्धा का दुष्प्रभाव" या "प्रतिस्पर्धारहित शिक्षा की आवश्यकता" हो सकता है।
(ख) लेखक महत्त्वाकांक्षा की जगह कैसी शिक्षा चाहता है २
उत्तर: लेखक महत्त्वाकांक्षा और प्रतिस्पर्धा पर आधारित शिक्षा की जगह ऐसी शिक्षा चाहता है जो अहंकाररहित हो और जिसमें प्रेम, सहयोग और विनय के मूल्यों को सिखाया जाए। वह चाहते हैं कि बच्चों को दूसरों से आगे निकलने के बजाय मिल-जुलकर रहने की शिक्षा दी जाए।
(ग) महत्त्वाकांक्षा को राजनीति कहने का क्या आशय है १
उत्तर: महत्त्वाकांक्षा को राजनीति कहने का आशय यह है कि जो व्यक्ति सफलता और शक्ति पाने की महत्त्वाकांक्षा रखता है, वह अक्सर दूसरों को पीछे छोड़ने, उन पर हावी होने और सत्ता प्राप्त करने के लिए राजनीतिक हथकंडों का इस्तेमाल करने लगता है। इस प्रकार, महत्त्वाकांक्षा का अंतिम लक्ष्य शक्ति और प्रभुत्व प्राप्त करना हो जाता है, जो राजनीति का मूल स्वरूप है।
(घ) प्रेमी की पहचान क्या है ?
उत्तर: एक सच्चे प्रेमी की पहचान यह है कि वह हमेशा अपने प्रियजनों को अपने से आगे और बेहतर स्थान देना चाहता है। वह स्वयं पीछे रहकर दूसरों की उन्नति और खुशी में आनंदित होता है। प्रेमी में अहंकार नहीं होता, बल्कि त्याग और सेवा की भावना होती है।
(ड) प्रतिस्पर्धा से कौन-से दुर्गुण पैदा होते हैं ?
उत्तर: प्रतिस्पर्धा से कई हानिकारक दुर्गुण पैदा होते हैं, जैसे:
- अहंकार: स्वयं को श्रेष्ठ समझने की भावना।
- ईर्ष्या: दूसरों की सफलता से जलन महसूस करना।
- घृणा: प्रतिद्वंद्वी के प्रति द्वेष और नफरत की भावना।
- हिंसा: सफलता पाने के लिए किसी भी हद तक जाने की मानसिकता।
(व) लेखक बच्चों को प्रतियोगिता क्यों नहीं सिखाना चाहता?
उत्तर: लेखक बच्चों को प्रतियोगिता इसलिए नहीं सिखाना चाहता क्योंकि इससे बचपन से ही उनके मन में अहंकार का बीज बो दिया जाता है। यह अहंकार आगे चलकर ईर्ष्या, घृणा और हिंसा को जन्म देता है। प्रतियोगिता बच्चों के निर्दोष और सरल मन को दूषित कर देती है, जिससे उनका जीवन भर के लिए शांति और प्रेम से वंचित रह जाता है।
(छ) लेखक स्वर्ण-पदक और सम्मान का विरोध क्यों करता है ?
उत्तर: लेखक का मानना है कि स्वर्ण-पदक और सम्मान व्यक्ति के अहंकार को बढ़ावा देते हैं। इन्हें पाकर व्यक्ति स्वयं को विशेष और दूसरों से श्रेष्ठ समझने लगता है। यह भावना उसमें घमंड पैदा करती है और सहयोग व प्रेम की भावना को नष्ट कर देती है। इसलिए, वह ऐसे बाहरी प्रतीकों का विरोध करता है जो मनुष्य को अलग-थलग करते हैं।
(ज) लेखक शिक्षा में किस प्रकार का परिवर्तन चाहता है ?
उत्तर: लेखक शिक्षा प्रणाली में आमूल-चूल परिवर्तन चाहता है। वह चाहता है कि:
- प्रथम और अंतिम जैसी श्रेणियाँ समाप्त की जाएँ।
- परीक्षाओं की होड़ और दबाव खत्म किया जाए।
- स्वर्ण पदक और सम्मान जैसे अहंकार बढ़ाने वाले प्रतीकों को हटाया जाए।
- इनकी जगह प्रेम, सहयोग, विनय और अहंकाररहित जीवन जीने के मूल्यों को शिक्षा का केंद्र बनाया जाए।
(झ) दो उर्दू तथा तत्सम शब्द छाँटिए।
उत्तर:
उर्दू शब्द:
- कब्रिस्तान
- ज्या (जीवन)
तत्सम शब्द:
- महत्त्वाकांक्षा
- चित्त (मन)
(ज) दो ऐसे वाक्य छाँटिए, जिसमें निपात का प्रयोग हो।
उत्तर:
- राष्ट्रों में भी यही दौड़ है। (निपात - 'भी')
- सफलता ही जहाँ एकमात्र मूल्य है, वहाँ सत्य नहीं हो सकता। (निपात - 'ही', 'नहीं')
(ट) एक सरल, संयुक्त तथा मिश्र वाक्य छाँठिए।
उत्तर:
सरल वाक्य: अहिंसा प्रेम है।
संयुक्त वाक्य: आगे होने की दौड़ शिक्षालयों में ही शुरू होती है और फिर कब्रिस्तान तक चलती है।
मिश्र वाक्य: सम्मान वहाँ है, जहाँ पद है।
(ठ) निर्दोष, सरल, अहंकार, समर्थ, हिंसक के विल्लोम लिखिए।
उत्तर:
- निर्दोष - दोषी / सदोष
- सरल - जटिल / कठिन
- अहंकार - विनय / नम्रता
- समर्थ - असमर्थ
- हिंसक - अहिंसक
(ड) महत्त्वाकांक्षी, मूढ़, हिंसक, सफलता, आनंदित से भाववाचक संज्ञाएँ बनाइए।
उत्तर:
- महत्त्वाकांक्षी - महत्त्वाकांक्षा
- मूढ़ - मूढ़ता
- हिंसक - हिंसा
- सफलता - (यह पहले से ही भाववाचक संज्ञा है। इसका विशेषण रूप 'सफल' होगा।)
- आनंदित - आनंद
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