Bihar Board Class 10th Hindi (Godhuli Bhag 2 पद्य खण्ड) Chapter 8 एक वृक्ष की हत्या) Solutions
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| Board Name | Bihar Board of Secondary Education |
| Class | Class 10th |
| Content Type | Solution |
| Solution for | Class 10th students |
| Subject | Hindi (Godhuli Bhag 2 पद्य खण्ड) |
| Chapter Name | Chapter 8 एक वृक्ष की हत्या) |
| Total Number of Chapter in this Subject | 12 |
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Bihar Board Class 10th Hindi (Godhuli Bhag 2 पद्य खण्ड) Chapter 8 एक वृक्ष की हत्या) Solutions
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प्रश्न 1. कवि ने पेड़ को किसके समान बताया है?
कवि ने पेड़ को एक जीवित प्राणी के समान बताया है। उन्होंने पेड़ की तुलना एक मूक, निर्दोष और निश्छल इंसान से की है, जिसकी हत्या बेरहमी से कर दी जाती है। पेड़ को एक सजीव साथी, एक पुराने मित्र और एक स्थिर, विश्वसनीय सदस्य के रूप में चित्रित किया गया है जो बिना कुछ माँगे हमें छाया, फल और शांति देता रहता है।
प्रश्न 2. पेड़ की हत्या किस प्रकार की गई?
पेड़ की हत्या बहुत ही क्रूर और निर्मम तरीके से की गई। उसे अचानक, बिना किसी चेतावनी के कुल्हाड़ी के वार से मारा गया। यह हत्या इतनी तेज़ और अप्रत्याशित थी कि पेड़ के पास अपना बचाव करने या दर्द प्रकट करने का भी समय नहीं मिला। उसकी जड़ें उखड़ गईं, टहनियाँ टूट गईं और उसका सारा अस्तित्व एक पल में समाप्त हो गया।
प्रश्न 3. पेड़ की हत्या के बाद क्या-क्या हुआ?
पेड़ की हत्या के बाद का दृश्य बहुत ही दुखद और वीरान था:
- पेड़ का विशाल, सुंदर और जीवंत शरीर धराशायी हो गया।
- वह स्थान जहाँ पेड़ खड़ा था, एकदम सूना और खाली हो गया, मानो किसी प्रिय मित्र का अचानक चले जाना।
- चारों ओर एक गहरी सन्नाटा छा गया। पक्षियों का कलरव, पत्तों की सरसराहट सब बंद हो गई।
- धूप बिना रुकावट के सीधी जमीन पर पड़ने लगी, क्योंकि छाया देने वाला कोई नहीं बचा।
- प्रकृति का एक संतुलन टूट गया और पर्यावरण में एक खालीपन आ गया।
प्रश्न 4. पेड़ की हत्या से कवि को क्या अहसास हुआ?
पेड़ की हत्या से कवि को गहरा आघात और दुख हुआ। उन्हें यह अहसास हुआ कि मनुष्य कितना स्वार्थी और संवेदनहीन हो गया है। वह अपनी छोटी-छोटी जरूरतों के लिए प्रकृति के साथी का सफाया करने में भी नहीं हिचकिचाता। कवि को लगा मानो उसके अपने परिवार के किसी सदस्य की हत्या कर दी गई हो। इस घटना ने उन्हें मनुष्य की विनाशकारी प्रवृत्ति और प्रकृति के प्रति हमारी जिम्मेदारी के बारे में सोचने पर मजबूर कर दिया।
प्रश्न 5. 'एक वृक्ष की हत्या' कविता का प्रतिपाद्य स्पष्ट कीजिए।
कविता 'एक वृक्ष की हत्या' का मुख्य प्रतिपाद्य या संदेश है मनुष्य द्वारा प्रकृति के विनाश पर करुणामयी प्रतिक्रिया और एक चेतावनी। कवि वृक्ष को एक सजीव, संवेदनशील प्राणी के रूप में प्रस्तुत करते हुए उसकी निर्मम हत्या के माध्यम से मानव की संवेदनहीनता और स्वार्थ को उजागर करते हैं। कविता बताती है कि पेड़ हमारा मित्र, रक्षक और दाता है, फिर भी हम उसे बिना किसी दया भाव के नष्ट कर देते हैं। यह कविता पाठकों में पेड़ों के प्रति प्रेम, संरक्षण की भावना जगाना चाहती है और यह चेतावनी देती है कि प्रकृति का विनाश अंततः मानवता के लिए ही विनाशकारी सिद्ध होगा।
प्रश्न 6. निम्नलिखित पंक्तियों का भाव स्पष्ट कीजिए-
(क) क्या यही है इसका अन्त?
क्या यही इसकी सन्तान?
(ख) मैंने देखा एक वृक्ष की हत्या
मैं सिर्फ एक वृक्ष की हत्या नहीं देख रहा था
मैं देख रहा था अपने ही परिवार के किसी सदस्य की हत्या।
(क) भाव स्पष्टीकरण: इन पंक्तियों में कवि पेड़ के अंतिम समय के दृश्य को देखकर व्यथित हैं। जब पेड़ को काटा जाता है, तो उसकी लकड़ी के छोटे-छोटे टुकड़े (बुरादा) बिखर जाते हैं। कवि पूछते हैं कि क्या एक विशाल, जीवंत पेड़ का अंत सिर्फ यही बुरादा है? क्या यही उसकी संतान या विरासत है? यह प्रश्न मनुष्य की अर्थहीन विनाशलीला और प्रकृति के साथ किए जा रहे अन्याय पर एक तीखा व्यंग्य है।
(ख) भाव स्पष्टीकरण: इन पंक्तियों में कवि अपनी गहरी संवेदना व्यक्त कर रहे हैं। वे सिर्फ एक पेड़ को कटते नहीं देख रहे, बल्कि उसमें एक जीवित साथी को खोते हुए देख रहे हैं। पेड़ को 'परिवार के सदस्य' की संज्ञा देकर कवि यह बताना चाहते हैं कि प्रकृति और मनुष्य का रिश्ता अटूट और पारिवारिक है। पेड़ की हत्या उन्हें उतनी ही पीड़ा देती है, जितनी किसी अपने के जाने पर होती है। यह भाव प्रकृति के प्रति हमारी नैतिक जिम्मेदारी को रेखांकित करता है।
प्रश्न 7. सही विकल्प चुनिए-
(क) 'एक वृक्ष की हत्या' कविता के रचयिता हैं-
(i) अशोक वाजपेयी
(ii) केदारनाथ अग्रवाल
(iii) ऋतुराज
(iv) धूमिल
सही उत्तर: (iii) ऋतुराज
(ख) कवि ने पेड़ को क्या कहा है?
(i) मित्र
(ii) शत्रु
(iii) देवता
(iv) पिता
सही उत्तर: (i) मित्र
(ग) पेड़ की हत्या किससे की गई?
(i) बंदूक से
(ii) कुल्हाड़ी से
(iii) आरी से
(iv) छुरे से
सही उत्तर: (ii) कुल्हाड़ी से
(घ) पेड़ कटने के बाद क्या हुआ?
(i) पक्षी चहचहाने लगे
(ii) हवा तेज चलने लगी
(iii) चारों ओर सन्नाटा छा गया
(iv) नए पौधे उग आए
सही उत्तर: (iii) चारों ओर सन्नाटा छा गया
प्रश्न 8.
इस कविता में एक रूपक की रचना हुई है। रूपक'क्या है ? और “यहाँ उसका क्या स्वरूप है ? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
जब किसी वस्तु या व्यक्ति में दूसरी वस्तु या व्यक्ति के गुण और रूप इतने अधिक मिलते-जुलते हैं कि उनमें अंतर करना मुश्किल हो जाता है, तब उपमेय (जिसकी उपमा दी जा रही है) पर उपमान (जिससे उपमा दी जा रही है) का आरोप करके उन्हें एक ही बता दिया जाता है। इसे ही रूपक अलंकार कहते हैं। इसमें 'जैसे', 'सा', 'समान' जैसे वाचक शब्द नहीं होते।
इस कविता में, वृक्ष को एक बूढ़े चौकीदार के रूप में दर्शाया गया है। यहाँ वृक्ष उपमेय है और चौकीदार उपमान है। कवि ने वृक्ष के विभिन्न अंगों और गुणों को चौकीदार के अंगों और गुणों से इस तरह जोड़ा है कि दोनों में अभेद स्थापित हो गया है—जैसे वृक्ष का खुरदुरा तना चौकीदार की झुर्रियों वाली त्वचा है, उसकी सूखी डाल राइफल है, पत्तियाँ पगड़ी हैं, और जड़ें फटे जूते हैं। इस प्रकार पूरा वृक्ष ही एक चौकीदार बन गया है।
प्रश्न 9.
'एक वक्ष की हत्या कविता का सारांश अपने शब्दों में लिखें।
उत्तर-
कवि कुँवर नारायण की कविता 'एक वृक्ष की हत्या' पर्यावरण विनाश के गंभीर खतरे और मानव सभ्यता के भविष्य पर एक मार्मिक चिंतन प्रस्तुत करती है।
कविता की शुरुआत कवि के घर लौटने से होती है। उसे पता चलता है कि उसके घर के दरवाजे पर सदैव तैनात रहने वाला, एक बूढ़े चौकीदार के समान विश्वसनीय वृक्ष काट दिया गया है। कवि उस वृक्ष का सजीव चित्रण करते हुए बताता है कि कैसे उसका खुरदुरा तना चौकीदार की झुर्रियों भरी त्वचा था, सूखी डाल राइफल थी, पत्तियाँ फूलदार पगड़ी थीं और जड़ें फटे पुराने जूते थीं। वह हर मौसम में डटा रहता, दूर से ही 'कौन?' पूछता और कवि के जवाब देने पर शांत होकर उसे ठंडी छाँव देता था।
लेकिन अब वह वृक्ष नहीं है। यह घटना केवल एक पेड़ के कटने की नहीं, बल्कि एक बड़े संकट की शुरुआत है। कवि चेतावनी देता है कि यदि यह सिलसिला नहीं रुका, तो हमें अपने घर को लुटेरों से, शहर को हत्यारों से और देश को दुश्मनों से बचाना पड़ेगा। खतरा केवल इतना ही नहीं है। हमें नदियों को नाला बनने से, हवा को जहरीला होने से, जमीन को रासायनिक उर्वरकों से बचाना होगा, ताकि अनाज जहर न बने। सबसे बड़ी बात, हमें जंगल को रेगिस्तान बनने से रोकना होगा।
कवि का मानना है कि इन सभी समस्याओं की जड़ मनुष्य की सोच में आई खोट है। लालच और संवेदनहीनता ने मनुष्य को ही विनाशक बना दिया है। इसलिए सबसे पहले मनुष्य को जंगली बनने से रोककर, उसे सही अर्थों में मानवीय बनाना होगा। तभी मानवता और इस धरती का भविष्य सुरक्षित रह पाएगा।
भाषा की बात
प्रश्न 1.
निम्नलिखित अव्ययों का वाक््यों में प्रयोग करें अबकी, हमेशा, लेकिन, दूर, दरअसल, कहीं
उत्तर-
- अबकी - अबकी बार परीक्षा में बहुत अच्छे अंक आए।
- हमेशा - हमेशा अपने से बड़ों का आदर करना चाहिए।
- लेकिन - मैं तुम्हारी सहायता करना चाहता था, लेकिन समय नहीं मिला।
- दूर - स्टेशन यहाँ से दो किलोमीटर दूर है।
- दरअसल - दरअसल, वह घटना हम सबके लिए एक सबक थी।
- कहीं - तुम्हारी किताब कहीं मेज के नीचे पड़ी है।
प्रश्न 2.
कविता से विशेषणों का चुनाव करते हुए उनके लिए स्वतंत्र विशेष्य पद दें।
उत्तर-
- बूढ़ा - बूढ़ा आदमी
- पुराने - पुराने कपड़े
- खुरदुरा - खुरदुरा पत्थर
- सख़्त - सख़्त लकड़ी
- फूल पत्तीदार - फूल पत्तीदार साड़ी
- फटा पुराना - फटा पुराना बैग
- ठंडी - ठंडी हवा
प्रश्न 3.
निम्नांकित संज्ञा पदों का प्रकार बताते हुए वाक्य-प्रयोग करें: घर, चौकीदार, दरवाजा, डाल, चमड़ा, पगड़ी, बल-बूता, बारिश, वर्दी, दोस्त, पल, छाँव, अन्देशा, नादानी, जहर, मरूस्थल, जंगल।
उत्तर-
- घर (जातिवाचक संज्ञा) - हमारा घर शहर के बाहर है।
- चौकीदार (जातिवाचक संज्ञा) - चौकीदार रात भर जागकर पहरा देता है।
- दरवाजा (जातिवाचक संज्ञा) - कृपया दरवाजा बंद कर दीजिए।
- डाल (जातिवाचक संज्ञा) - आम के पेड़ की डाल टूट गई है।
- चमड़ा (जातिवाचक संज्ञा) - इस जूते का चमड़ा बहुत मजबूत है।
- पगड़ी (जातिवाचक संज्ञा) - उसने सफेद रंग की पगड़ी बाँध रखी है।
- बल-बूता (भाववाचक संज्ञा) - उसने अपने बल-बूते पर यह कंपनी खड़ी की।
- बारिश (जातिवाचक संज्ञा) - इस साल बारिश बहुत कम हुई।
- वर्दी (जातिवाचक संज्ञा) - स्कूल की वर्दी साफ और इस्त्री की हुई होनी चाहिए।
- दोस्त (जातिवाचक संज्ञा) - सच्चा दोस्त मुसीबत में काम आता है।
- पल (भाववाचक संज्ञा) - जीवन का हर पल कीमती है।
- छाँव (भाववाचक संज्ञा) - गर्मी में पेड़ की छाँव बहुत सुखद लगती है।
- अन्देशा (भाववाचक संज्ञा) - परीक्षा का परिणाम आने से पहले उसे बहुत अन्देशा था।
- नादानी (भाववाचक संज्ञा) - उसकी नादानी के कारण सबको नुकसान उठाना पड़ा।
- जहर (जातिवाचक संज्ञा) - साँप के काटने पर जहर फैल जाता है।
- मरूस्थल (जातिवाचक संज्ञा) - थार भारत का सबसे बड़ा मरूस्थल है।
- जंगल (जातिवाचक संज्ञा) - इस जंगल में कई तरह के जानवर रहते हैं।
प्रश्न 4.
कविता में प्रयुक्त निम्नांकित पदों के कारक स्पष्ट करें चमड़ा, पाँव, धूप, सर्दी, वर्दी, अन्देशा, शहर, नदी, खाना, मनुष्य।
उत्तर-
- चमड़ा - संबंध कारक (का, के, की)
- पाँव - अधिकरण कारक (में, पर)
- धूप - अधिकरण कारक (में)
- सर्दी - अधिकरण कारक (में)
- वर्दी - अधिकरण कारक (में)
- अन्देशा - अधिकरण कारक (का)
- शहर - कर्म कारक (को)
- नदी - कर्म कारक (को)
- खाना - कर्म कारक (को)
- मनुष्य - कर्म कारक (को)
काव्यांशों पर आधारित अर्थ-ग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर
1. अबकी घर लौठा तो देखा वह नहीं था वही बूढ़ा चौकीदार वृक्ष
जो हमैशा मिलता था घर के दरवाजे पर तैनात। पुराने चमड़े का बना उसका शरीर
वही सख्त जान
झुर्रियोंदार खुरदुरा तना मैलाकुचैला, राइफिल-सी एक सूखी डाल,
एक पगणड़ी फूलपत्तीदार,
पाँवों में फटा पुराना जूता,
चरमराता लेकिन अक्खड़ बल-बूता
धूप में बारिश में
गर्मी में सर्दी में
हमैशा चौकत्ना
अपनी खाकी वर्दी में
दूर से ही ललकारता, 'कौन ?'
मैं जवाब देता, “Stet!”
और पल भर को बैठ जाता
उसकी ठंढी छांव में
प्रश्न (क) कवि तथा कविता का नाम लिखिए।
(ख) पद्यांश का प्रसंग लिखें।
(ग) पद्यांश का सरलार्थ लिखें।
(घ) भाव-सौंदर्य स्पष्ट करें।
(ड) काव्य-सौंदर्य स्पष्ट करें।
उत्तर-
(क) कविता - एक वृक्ष की हत्या।
कवि - कुँवर नारायण।
(ख) प्रसंग- प्रस्तुत पद्यांश कवि कुँवर नारायण की प्रसिद्ध कविता 'एक वृक्ष की हत्या' से लिया गया है। इस अंश में कवि ने अपने घर के दरवाजे पर सदैव खड़े रहने वाले एक पुराने वृक्ष का मानवीकरण करते हुए उसे एक बूढ़े, ईमानदार चौकीदार के रूप में चित्रित किया है। यह चित्रण न केवल वृक्ष के प्रति कवि के गहरे लगाव को दर्शाता है, बल्कि उसके कट जाने से उत्पन्न खालीपन और क्षति की अनुभूति को भी स्पष्ट करता है।
(ग) सरलार्थ- कवि कहता है कि इस बार जब वह घर लौटा तो उसे वह वृक्ष नहीं दिखाई दिया, जो हमेशा एक बूढ़े चौकीदार की तरह घर के दरवाजे पर तैनात रहता था। उस वृक्ष का शरीर पुराने चमड़े जैसा सख्त और मजबूत था। उसका तना झुर्रियोंदार और खुरदुरा था। एक सूखी डाल राइफल की तरह लगती थी और पत्तियों से भरी टहनियाँ फूलदार पगड़ी जैसी थीं। उसकी जड़ें फटे पुराने जूते की तरह जमीन में धँसी हुई थीं। वह हर मौसम—धूप, बारिश, गर्मी, सर्दी में—अपनी खाकी वर्दी (पत्तियों का हरा रंग) में सदैव चौकन्ना रहता था। दूर से ही वह 'कौन?' पूछकर ललकारता था। कवि जवाब देता, "मैं हूँ!" और फिर एक पल के लिए उसकी ठंडी छाँव में बैठ जाता था।
(घ) भाव-सौंदर्य- इस अंश का भाव-सौंदर्य अत्यंत मार्मिक और प्रभावशाली है। कवि ने एक साधारण वृक्ष को एक संवेदनशील, जिम्मेदार और मानवीय गुणों से युक्त चौकीदार के रूप में देखा है। यह दृष्टि प्रकृति के प्रति गहरे प्रेम और सम्मान को व्यक्त करती है। वृक्ष की निष्ठा, दृढ़ता और सुरक्षा का भाव कवि के मन में एक सुखद एहसास पैदा करता था। उसके कट जाने से केवल एक पेड़ नहीं, बल्कि एक विश्वस्त रक्षक और साथी खो गया है—यही भाव पाठक के मन में करुणा और चिंता जगाता है।
(ड) काव्य-सौंदर्य-
- रूपक अलंकार- पूरे अंश में वृक्ष को चौकीदार के रूप में देखा गया है, जो एक सुंदर रूपक का निर्माण करता है।
- मानवीकरण- वृक्ष के विभिन्न अंगों को चौकीदार के अंगों से जोड़कर उसमें मानवीय चेतना और क्रियाएँ दर्शाई गई हैं।
- बिंब योजना- 'झुर्रियोंदार खुरदुरा तना', 'राइफिल-सी सूखी डाल', 'फूलपत्तीदार पगड़ी', 'फटा पुराना जूता' जैसे बिंब कवि की कल्पनाशीलता को दर्शाते हैं और चित्र को सजीव बनाते हैं।
- भाषा- भाषा सरल, व्यावहारिक और प्रवाहमयी है। खड़ी बोली में लिखित यह अंश आम बोलचाल के शब्दों का प्रयोग करता है।
- संवादात्मक शैली- 'कौन?' और 'मैं!' के बीच का संवाद कविता को जीवंत और नाटकीय बनाता है।
- प्रतीकात्मकता- वृक्ष के माध्यम से प्रकृति के संरक्षक तत्व का और उसके कटने के माध्यम से पर्यावरण विनाश का प्रतीकात्मक चित्रण हुआ है।
कंवर नारायण कैसे कवि हैं ?
कुँवर नारायण आधुनिक हिंदी साहित्य के प्रमुख कवि हैं। वे नयी कविता आंदोलन के संवेदनशील और विचारशील कवि के रूप में प्रसिद्ध हैं। उनकी कविताओं में मानवीय संवेदनाओं, सामाजिक यथार्थ और दार्शनिक गहराई का सुंदर समन्वय मिलता है।
“एक वृक्ष की हत्या' के कवि कौन हैं ?
इस कविता के कवि कुँवर नारायण जी हैं। वे हिंदी के प्रतिष्ठित कवि एवं साहित्यकार हैं, जिन्हें उनके साहित्यिक योगदान के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार तथा ज्ञानपीठ पुरस्कार जैसे सम्मान प्राप्त हुए हैं।
“एक वृक्ष की हत्या' किस काव्य-संग्रह से संकलित है ?
यह कविता कुँवर नारायण जी के प्रसिद्ध काव्य-संग्रह 'इन्हीं दिनों' से संकलित है। इस संग्रह में उनकी अनेक चर्चित कविताएँ शामिल हैं, जो समकालीन जीवन के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालती हैं।
कुँवर नारायण आधुनिक युग की किस काव्य-धारा के कवि हैं?
कुँवर नारायण आधुनिक युग की 'नयी कविता' धारा के प्रमुख कवि हैं। उनकी कविताएँ इस धारा की विशेषताओं जैसे नवीन बिम्ब, प्रतीकात्मकता, यथार्थपरक दृष्टि और गहन मानवीय संवेदना को प्रतिबिंबित करती हैं।
“एक वृक्ष की हत्या में वृक्ष को किस रूप में कवि ने प्रस्तुत किया है ?
इस कविता में कवि ने वृक्ष को एक जीवित मानव के रूप में प्रस्तुत किया है। वृक्ष को एक सजग प्रहरी, एक सैनिक और हमारे पर्यावरण व सभ्यता के रक्षक के रूप में चित्रित किया गया है, जिसकी हत्या करके मनुष्य अपने ही भविष्य को नष्ट कर रहा है।
कुँवर नारायण ने पेड़ की डाल की तुलना किससे की है ?
कवि ने पेड़ की डाल की तुलना राइफल से की है। इस तुलना के माध्यम से कवि यह दर्शाना चाहते हैं कि जिस प्रकार एक सैनिक राइफल लेकर सीमा की रक्षा करता है, उसी प्रकार यह वृक्ष अपनी डाल (राइफल) के साथ प्रकृति और हमारे पर्यावरण की रखवाली कर रहा है।
॥. रिक्ति स्थानों की पूर्ति करें
कुंवर नारायण का जन्म .............. में हुआ।
लखनऊ (उत्तर प्रदेश)
कुंवर नारायण के काव्य की विशेषताएं हैं नये विषय और ....... की विविधता है।
भाषा
घर को बचाना हो ....... .से।
लुटेरों
वृक्ष के काठे जाने के माध्यम से कवि ने .... प्रदूषण पर टिप्पणी की है।
पर्यावरण
'एक वृक्ष की हत्या' ............... कविता है।
समसामयिक (या प्रासंगिक)
अतिलघु उत्तरीय प्रश्न
कुँवर नारायण कैसे कवि हैं ?
कुँवर नारायण एक संवेदनशील, विचारशील और नयी कविता धारा के प्रतिनिधि कवि हैं। उनकी कविता मानवीय मूल्यों, सामाजिक सरोकारों और दार्शनिक चिंतन से परिपूर्ण है। वे परंपरा और आधुनिकता के बीच सार्थक सेतु निर्माण करने वाले कवि हैं।
कुंवर नारायण ने काव्य के अतिरिक्त किन विधाओं को समृद्ध किया है ?
कुँवर नारायण जी ने काव्य के अतिरिक्त कहानी, निबंध और आलोचना (समीक्षा) जैसी साहित्यिक विधाओं को भी समृद्ध किया है। उनकी गद्य रचनाएँ भी साहित्य जगत में बहुत समादृत हैं।
कुंवर नारायण की प्रमुख रचनाएँ कौन-कौन सी हैं ?
कुँवर नारायण की प्रमुख रचनाएँ निम्नलिखित हैं:
काव्य संग्रह: चक्रव्यूह, अपने सामने, इन्हीं दिनों, कोई दूसरा नहीं।
गद्य रचनाएँ: आश्रितों का विद्रोह (कहानी संग्रह), मेरे साक्षात्कार (साक्षात्कार)।
कवि को कौन-कौन पुरस्कार और सम्मान प्राप्त हुए हैं ?
कवि कुँवर नारायण को साहित्य जगत में उनके योगदान के लिए कई प्रतिष्ठित पुरस्कार और सम्मान प्राप्त हुए हैं। इनमें साहित्य अकादमी पुरस्कार, कुमार आशान पुरस्कार, प्रेमचंद पुरस्कार, व्यास सम्मान, कबीर सम्मान और लोहिया सम्मान प्रमुख हैं।
कवि घर लौटा तो कौन नहीं था?
कवि जब इस बार घर लौटा, तो उसने देखा कि घर के दरवाजे पर चौकीदार की तरह हमेशा तैनात रहने वाला वह बूढ़ा वृक्ष नहीं था। उस वृक्ष को काट दिया गया था, जिसकी उपस्थिति कवि के लिए परिचित और सुरक्षा का प्रतीक थी।
“एक वृक्ष की हत्या' कविता का वर्ण्य-विषय क्या है?
“एक वृक्ष की हत्या” कविता का मुख्य विषय पर्यावरण विनाश और बढ़ते प्रदूषण के साथ-साथ मानवीय मूल्यों के क्षरण को दर्शाना है। कवि एक वृक्ष की कटाई के माध्यम से यह बताता है कि हम किस तरह अपनी जड़ों, संस्कृति और प्रकृति के प्रति संवेदनहीन होते जा रहे हैं।
व्याख्या खण्ड
प्रश्न 1.
पंक्तियाँ: “अबकी घर लौटा तो देखा वह नहीं था
वही बूढ़ा चौकीदार वृक्ष
जो हमेशा मिलता था घर के दरवाजे पर तैनात।”
व्याख्या: ये पंक्तियाँ कवि कुँवर नारायण की कविता ‘एक वृक्ष की हत्या’ से ली गई हैं। कवि बताता है कि जब वह बहुत दिनों बाद अपने घर लौटा, तो उसे एक चौंकाने वाली कमी महसूस हुई। घर के दरवाजे पर हमेशा एक विश्वसनीय चौकीदार की तरह खड़ा रहने वाला बूढ़ा वृक्ष वहाँ नहीं था। इस वृक्ष के न रहने से कवि के मन में एक खालीपन और दुख का भाव है। यह वृक्ष सिर्फ एक पेड़ नहीं, बल्कि उसके लिए एक सजीव संरक्षक, एक परिचित साथी और घर की पहचान का हिस्सा था। इसकी हत्या के माध्यम से कवि यह संदेश देता है कि हम प्रकृति के साथ-साथ अपनी सांस्कृतिक विरासत और बुजुर्गों के प्रति सम्मान की भावना भी खो रहे हैं।
प्रश्न 2.
पंक्तियाँ: “पुराने चमड़े का बना उसका शरीर वही सख्त जान
झुर्रियोंदार खुरदुरा तना मैला-कुचैला राइफिल-सी एक सूखी डाल,
एक पगड़ी फूल-पत्तीदार,
पाँवों में फटा पुराना जूता,
चरमराता लेकिन अक्खड़ बल-बूता।”
व्याख्या: इन पंक्तियों में कवि ने बूढ़े वृक्ष का मानवीकरण करते हुए उसकी शारीरिक दशा का बहुत ही मार्मिक चित्रण किया है। कवि कहता है कि वृक्ष का तना पुराने चमड़े जैसा सख्त और झुर्रियोंदार है, जो उसकी वृद्धावस्था को दर्शाता है। उसकी एक सूखी डाल राइफिल की तरह दिखती है, मानो वह सुरक्षा का हथियार हो। फूल और पत्तियों से सजी उसकी टहनियाँ एक पगड़ी की तरह लगती हैं। उसकी जड़ें फटे हुए पुराने जूते की तरह हैं, जो चरमराती हैं, फिर भी वह पूरे अकड़ और ताकत के साथ खड़ा है। इस वर्णन के द्वारा कवि यह बताना चाहता है कि यह वृक्ष एक साधारण पेड़ नहीं, बल्कि एक बूढ़ा, अनुभवी, कर्तव्यनिष्ठ और बलशाली चौकीदार है, जो हर मौसम में अपनी ड्यूटी निभाता रहता है।
प्रश्न 3.
पंक्तियाँ: “धूप में बारिश में
गर्मी में सर्दी में,
हमेशा चौकन्ना
अपनी खाकी वर्दी में”
व्याख्या: इन पंक्तियों में कवि वृक्ष की निष्ठा और कर्तव्यपरायणता की तुलना एक सच्चे सिपाही से करता है। कवि कहता है कि यह बूढ़ा वृक्ष हर मौसम में – चाहे तेज धूप हो, मूसलाधार बारिश हो, भीषण गर्मी हो या कड़ाके की सर्दी – हमेशा सतर्क और तैनात रहता है। उसकी छाल खाकी वर्दी की तरह है, जो उसे एक अनुशासित प्रहरी का रूप देती है। इस तरह कवि यह दर्शाता है कि प्रकृति का यह अंग मनुष्य के लिए निस्वार्थ भाव से काम करता है और हमारी रक्षा करता है, ठीक उसी तरह जैसे एक सैनिक देश की रक्षा के लिए हर पल तैयार रहता है।
प्रश्न 4.
पंक्तियाँ: “दूर से ही ललकारता, ‘कौन?’
मैं जवाब देता, “दोस्त!”
और पल भर को बैठ जाता
उसकी ठंडी छाँव में।”
व्याख्या: इन पंक्तियों में कवि और वृक्ष के बीच के आत्मीय संबंध को दर्शाया गया है। कवि बताता है कि जब भी वह घर लौटता था, तो दूर से ही वह बूढ़ा वृक्ष उसे रोककर पूछता, “कौन?” यानी वह एक सच्चे चौकीदार की तरह पहचान कर रहा था। कवि उत्तर देता, “दोस्त!” यह जवाब सुनकर वृक्ष शांत हो जाता और कवि उसकी ठंडी, सुकून भरी छाँव में कुछ पल आराम कर लेता। यह दृश्य दर्शाता है कि वृक्ष और कवि के बीच केवल एक पेड़ और मनुष्य का ही नहीं, बल्कि दोस्ताना और विश्वास का गहरा रिश्ता था। वृक्ष में मानवीय चेतना और कर्तव्यबोध है।
प्रश्न 5.
पंक्तियाँ: “दरअसल शुरु से ही था हमारे अन्देशों में
कहीं एक जानी दुश्मन
कि घर को बचाना है लुटेरों से
शहर को बचाना है नादिरों से
देश को बचाना है देश के दुश्मनों से।”
व्याख्या: इन पंक्तियों में कवि मानव मन में छिपे भय और चिंताओं की ओर इशारा करता है। कवि कहता है कि हमारे मन में हमेशा से यह डर बना रहता है कि हमारे आस-पास कोई छिपा हुआ शत्रु मौजूद है। इसीलिए हमें अपने घर को चोर-लुटेरों से, शहर को बर्बर आक्रमणकारियों से और देश को विदेशी शत्रुओं से बचाने की चिंता सताती रहती है। इस संदर्भ में, कवि के लिए वह बूढ़ा वृक्ष इन सभी खतरों से सुरक्षा प्रदान करने वाला एक विश्वसनीय प्रहरी था। उसकी हत्या ने न सिर्फ एक पेड़ को काटा, बल्कि उस सुरक्षा के भाव को भी नष्ट कर दिया, जो हमें बाहरी और आंतरिक खतरों से बचाता था।
प्रश्न 6.
“बचाना है
नदियों को नाला हो जाने से
हवा को धुआँ हो जाने से।
खाने को जहर हो जाने से। ”
व्याख्या-
प्रस्तुत काव्य पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक के 'एक वृक्ष की हत्या' काव्य-पाठ से ली गयी हैं। इन पंक्तियों का प्रसंग कवि के द्वारा सुझाए गए उपायों से है। हम कैसे अपने अस्तित्व, इतिहास और अस्मिता की रक्षा कर सकते हैं ?
इन पंक्तियों के माध्यम से कवि कुंवर नारायण एक गहरी चेतावनी देते हैं। वे कहते हैं कि हमें अपने पर्यावरण और जीवन के मूल आधारों को बचाने की तत्काल आवश्यकता है। नदियाँ, जो जीवनदायिनी हैं, वे प्रदूषण के कारण गंदे नालों में तब्दील हो रही हैं। वायु, जो शुद्ध होनी चाहिए, वह कल-कारखानों और वाहनों के धुएँ से दूषित होकर साँस लेने लायक नहीं रही। इसी तरह, रसायनों और कीटनाशकों के अंधाधुंध प्रयोग से हमारा भोजन भी धीरे-धीरे जहर बनता जा रहा है। कवि इन सभी खतरों की ओर इशारा करते हुए मानवता को जागृत होने का आह्वान करते हैं। यदि हम अब भी नहीं चेते, तो प्रकृति के ये वरदान हमसे छिन जाएँगे और जीवन दूभर हो जाएगा।
प्रश्न 7.
बचाना है-जंगल को मरुस्थल
हो जाने से,
बचाना है-मनुष्य को जंगली
हो जाने से।
व्याख्या-
प्रस्तुत काव्य पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक के 'एक वृक्ष की हत्या' से ली गयी हैं। इन काव्य पंक्तियों का प्रसंग हमारी प्रकृति, राष्ट्र और मानव से जुड़ा हुआ है। कवि ने कविताओं के माध्यम से सभी को सतर्क और जागरूक होने का संदेश दिया है।
इन पंक्तियों में कवि ने वनों की कटाई के गंभीर परिणामों की ओर संकेत किया है। वन हमारे पारिस्थितिकी तंत्र की रीढ़ हैं। यदि वनों का इसी तेजी से विनाश होता रहा, तो हरे-भरे जंगल बंजर रेगिस्तान में बदल जाएँगे। जंगल के नष्ट होने से न केवल वन्य जीवों का आवास समाप्त होगा, बल्कि वर्षा चक्र भी बिगड़ेगा और पर्यावरण असंतुलन पैदा होगा। कवि आगे चेताते हैं कि इसका सीधा प्रभाव मनुष्य पर भी पड़ेगा। जंगल के खत्म होने से संसाधनों की कमी, अकाल और संघर्ष पैदा होगा। ऐसी स्थिति में मनुष्य अपनी सभ्यता और संस्कृति को भूलकर केवल जीवित रहने के लिए संघर्ष करने लगेगा, और वह फिर से एक प्रकार का 'जंगली' स्वरूप धारण कर लेगा। इस प्रकार कवि वन संरक्षण को मानव सभ्यता की रक्षा से जोड़कर देखते हैं।
एक वृक्ष की हत्या : कवि परिचय
कुँवर नारायण का जन्म 19 सितंबर 1927 ई० में लखनऊ, उत्तर प्रदेश में हुआ था। कुँवर नारायण ने कविता लिखने की शुरुआत सन् 1950 के आस-पास की। उन्होंने कविता के अलावा चिंतनपरक लेख, कहानियाँ और सिनेमा तथा अन्य कलाओं पर समीक्षाएँ भी लिखीं हैं, किंतु कविता उनके सृजन-कर्म में हमेशा मुख्य रही। उनकी प्रमुख रचनाएँ हैं - 'चक्रव्यूह', 'परिवेश : हम तुम', 'अपने सामने', 'कोई दूसरा नहीं', 'इन दिनों' (काव्य संग्रह); 'आत्मजयी' (प्रबंधकाव्य); 'आकारों के आस-पास' (कहानी संग्रह); 'आज और आज से पहले' (समीक्षा); 'मेरे साक्षात्कार' (साक्षात्कार) आदि। कुँवर नारायण जी को अनेक पुरस्कार एवं सम्मान प्राप्त हो चुके हैं जो इस प्रकार हैं - साहित्य अकादमी पुरस्कार, 'कुमारन आशान पुरस्कार', व्यास सम्मान, प्रेमचंद पुरस्कार, लोहिया सम्मान, कबीर सम्मान आदि।
कुँवर नारायण पूरी तरह नगर संवेदना के कवि हैं। विवरण उनके यहाँ नहीं के बराबर है, पर वैयक्तिक और सामाजिक ऊहापोह का तनाव पूरी व्यंजकता के साथ प्रकट होता है। आज का समय और उसकी यांत्रिकता जिस तरह हर सजीव के अस्तित्व को मिटाकर उसे अपने लपेटे में ले लेना चाहती है, कुँवर नारायण की कविता वहीं से आकार ग्रहण करती है और मनुष्यता और सजीवता के पक्ष में संभावनाओं के द्वार खोलती है। नयी कविता के दौर में, जब प्रबंधकाव्य का स्थान लंबी कविताएँ लेने लगी, तब कुँवर नारायण ने “आत्मजयी” जैसा प्रबंधकाव्य रचकर भरपूर प्रतिष्ठा प्राप्त की। उनकी कविताओं में व्यर्थ का उलझाव, अखबारी सतहीपन और वैचारिक धुंध के बजाय संयम, परिष्कार और साफ-सुथरापन है। भाषा और विषय की विविधता उनकी कविताओं के विशेष गुण माने जाते हैं। उनमें यथार्थ का खुरदुरापन भी मिलता है और उसका सहज सौंदर्य भी।
तुरंत काटे गए एक वृक्ष के बहाने पर्यावरण, मनुष्य और सभ्यता के विनाश की अंतर्व्यथा को अभिव्यक्त करती यह कविता आज के समय की अपरिहार्य चिंताओं और संवेदनाओं का रचनात्मक अभिलेख है। यह कविता कुँवर नारायण के कविता संग्रह 'इन दिनों' से संकलित है।
पाठ का सारांश (Summary in Hindi)
नई कविता काल के प्रखर कवि कुंवर नारायण नगर संवेदना के कवि हैं। उनकी रचनाओं में वैयक्तिक और सामाजिक उहापोह का तनाव पूरी व्यंजकता के साथ प्रकट होता है। आज का समय और उसकी यांत्रिकता जिस तरह हर सजीव के अस्तित्व को मिटाकर उसे अपने लपेटे में ले लेना चाहती है, कुँवर नारायण की कविता वहीं से आकार ग्रहण करती है और मनुष्यता और सजीवता के पक्ष में संभावनाओं के द्वार खोलती है। भाषा और विषय की विविधता उनकी कविताओं के विशेष गुण माने जाते हैं।
प्रस्तुत कविता 'एक वृक्ष की हत्या' में कवि ने एक अचानक काटे गए पेड़ के माध्यम से पर्यावरण विनाश, मनुष्य और उसकी सभ्यता के खतरे को व्यक्त किया है। कवि के घर के सामने वर्षों पुराना एक विशाल वृक्ष था, जिसे काट दिया गया है। कभी वह वृक्ष दूसरों को छाया देकर उनकी थकान मिटाता था और घर की रखवाली करता था, किंतु अब वह निर्जीव होकर पड़ा है। उसकी पुरानी छाल धूमिल हो गई थी और डालियाँ राइफल की तरह तनी रहती थीं। धूप, वर्षा, सर्दी, गर्मी हर मौसम में वह सजग रहता था। दूर से आने वाले मित्रों को वह पहचानकर एक नई ताजगी देता था और उनके मन की व्यथा हर लेता था। ऐसे मित्रतुल्य वृक्ष को दुश्मनों ने काट दिया। कवि इस घटना के जरिए यह संदेश देना चाहते हैं कि यदि हमें अपने गाँव, शहर और वातावरण को बचाना है, तो सबसे पहले पेड़ों को बचाना होगा। वृक्ष हमारे सच्चे मित्र हैं, और मित्र को दुश्मन के हाथों नहीं मरने देना चाहिए।
एक वृक्ष की हत्या (कविता का सारांश)
कवि हरिवंश राय बच्चन की यह कविता मानव द्वारा प्रकृति के विनाश पर एक मार्मिक प्रहार है। कवि एक वृक्ष की कटाई को एक साधारण घटना नहीं, बल्कि एक भयानक 'हत्या' के रूप में देखते हैं। वे बताते हैं कि वृक्ष केवल लकड़ी का ढेर नहीं है, बल्कि एक जीवंत प्राणी है जिसमें इतिहास, संस्कृति और अनेक जीवन समाए हुए हैं। उसकी जड़ें धरती माँ से जुड़ी हैं, उसकी शाखाएँ आकाश से बातें करती हैं। वह पक्षियों का घर, यात्रियों को छाया और पर्यावरण का संरक्षक है। एक वृक्ष को काटकर मनुष्य केवल एक पेड़ नहीं मारता, बल्कि एक पूरी सभ्यता, इतिहास और प्रकृति के साथ अपने पवित्र रिश्ते को नष्ट कर देता है। कविता का संदेश है कि प्रकृति का विनाश अंततः मानवता के विनाश का कारण बनेगा।
1. कवि ने वृक्ष को किन-किन विशेषणों से विभूषित किया है?
कवि ने वृक्ष को निम्नलिखित विशेषणों से सजाया है, जो उसके गुणों और महत्व को दर्शाते हैं:
- अक्खड़: जो हर मुसीबत का सामना डटकर करता है।
- बल-बूते वाला: शक्तिशाली और सामर्थ्यवान।
- सजीव सुथरा सुन्दर: जीवंत, स्वच्छ और आकर्षक।
- परिपूर्ण: जिसमें कोई कमी नहीं है, संपूर्ण।
- स्नेहिल: प्यार और स्नेह से भरपूर।
- विशाल: बहुत बड़ा और विस्तृत।
- महाकाय: विशालकाय शरीर वाला।
2. वृक्ष किन-किन रूपों में मानव जीवन में उपयोगी है?
वृक्ष मानव जीवन में अनेक रूपों में उपयोगी एवं अनिवार्य है:
- छाया दाता: धूप और गर्मी में थके हुए यात्रियों, राहगीरों और पशु-पक्षियों को शीतल छाया प्रदान करता है।
- आवास स्थल: पक्षियों के लिए घोंसले का और कई छोटे जीवों के लिए निवास स्थान है।
- पर्यावरण संरक्षक: वायु को शुद्ध करके ऑक्सीजन प्रदान करता है, प्रदूषण कम करता है और जलवायु को संतुलित रखता है।
- आर्थिक संसाधन: इसकी लकड़ी से फर्नीचर, घर और ईंधन प्राप्त होता है। फल, फूल, पत्तियाँ और औषधियाँ भी देता है।
- सांस्कृतिक प्रतीक: यह हमारी परंपराओं, त्योहारों और धार्मिक विश्वासों से जुड़ा हुआ है।
- मिट्टी का संरक्षक: इसकी जड़ें मिट्टी को बाँधकर उसे बहने से रोकती हैं, जिससे भूमि कटाव रुकता है।
3. वृक्ष की हत्या से क्या अभिप्राय है?
'वृक्ष की हत्या' से कवि का अभिप्राय केवल एक पेड़ काटने की साधारण क्रिया नहीं है। यह एक रूपक (मेटाफर) है। कवि वृक्ष को एक जीवित, सांस लेते प्राणी के रूप में देखते हैं, जिसमें एक आत्मा है। इसलिए उसे काटना एक निर्दोष प्राणी की हत्या के समान है। यह हत्या सिर्फ एक पेड़ की नहीं, बल्कि उसके साथ जुड़े पूरे इतिहास, संस्कृति, पर्यावरण और जीवन चक्र की हत्या है। यह मानव की स्वार्थपरता और प्रकृति के प्रति संवेदनहीनता को दर्शाता है।
4. वृक्ष की हत्या करने वालों को कवि ने क्या कहा है?
कवि ने वृक्ष की हत्या करने वालों को 'नादिरों' कहा है। नादिरशाह एक क्रूर और लुटेरा शासक था, जिसने भारत पर आक्रमण करके बर्बरता की थी। कवि कहते हैं कि जो लोग अपने स्वार्थ के लिए वृक्षों को काटते हैं, वे भी उसी तरह के क्रूर, लुटेरे और संवेदनहीन हैं। वे प्रकृति के साथ विश्वासघात करके उसका विनाश कर रहे हैं, ठीक उसी तरह जैसे नादिरशाह ने सभ्यता और संस्कृति को लूटा और नष्ट किया था।
5. वृक्ष के विनाश से क्या अन्धेरा छा जाएगा?
वृक्ष के विनाश से जो अन्धेरा छाएगा, वह केवल प्रकाश का अभाव नहीं होगा। यह एक प्रतीकात्मक अन्धेरा होगा:
- नैतिक अन्धेरा: मानवता से संवेदनशीलता और नैतिकता का अभाव हो जाएगा।
- पर्यावरणीय अन्धेरा: प्रदूषण बढ़ेगा, ऑक्सीजन की कमी होगी, जलवायु असंतुलित होगी और प्राकृतिक आपदाएँ बढ़ेंगी।
- आध्यात्मिक अन्धेरा: प्रकृति के साथ मनुष्य का पवित्र रिश्ता टूट जाएगा, जिससे आत्मिक शांति और सद्भावना का अभाव होगा।
- भविष्य का अन्धेरा: आने वाली पीढ़ियों के लिए जीवन के आवश्यक संसाधन समाप्त हो जाएँगे, उनका भविष्य अंधकारमय हो जाएगा।
बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)
1. 'एक वृक्ष की हत्या' कविता के रचयिता कौन हैं?
(A) सुमित्रानंदन पंत
(B) महादेवी वर्मा
(C) हरिवंश राय बच्चन
(D) मैथिलीशरण गुप्त
2. कवि ने वृक्ष को किसके समान क्रूर बताया है?
(A) औरंगजेब
(B) नादिरशाह
(C) हिटलर
(D) चंगेज खाँ
3. वृक्ष किसकी छाया में बैठकर विश्राम करते हैं?
(A) अपनी ही छाया में
(B) धरती की छाया में
(C) पहाड़ की छाया में
(D) बादल की छाया में
4. 'एक वृक्ष की हत्या' कविता का मूल भाव क्या है?
(A) वनों की उपयोगिता
(B) वृक्षारोपण का महत्व
(C) प्रकृति विनाश के प्रति चेतावनी
(D) मानवीय संवेदनाएँ
5. कवि के अनुसार वृक्ष क्या नहीं समझता?
(A) प्रेम
(B) दया
(C) छल-कपट
(D) क्रोध
शब्दार्थ
- अक्खड़: विपरीत परिस्थितियों में डटा रहने वाला, दृढ़।
- बल-बूता: शक्ति-सामर्थ्य।
- अन्देशा: आशंका, डर।
- नादिरों: नादिरशाह नामक ऐतिहासिक लुटेरे और आक्रमणकारी की तरह के क्रूर व्यक्ति।
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