Bihar Board Class 10th Hindi (Godhuli Bhag 2 पद्य खण्ड) Chapter 10 अक्षर(ज्ञान) Solutions

Here we have provided Solution for Chapter 10 अक्षर(ज्ञान) of Hindi (Godhuli Bhag 2 पद्य खण्ड) subject for Class 10th students of Bihar Board of Secondary Education. There are various chapters in this Hindi (Godhuli Bhag 2 पद्य खण्ड) such as Chapter 1 राम बिनु बिरथे जगि जनमा, जो नर दुख में दुख नहिं मानै), Chapter 2 प्रेम अयनि श्री राधिका, करील के कुंजन ऊपर वारौं), Chapter 3 अति सूधो सनेह को मारग है, मो अंसुवानिहिं लै बरसौ), Chapter 4 स्वदेशी), Chapter 5 भारतमाता), Chapter 6 जनतंत्र का जन्म), Chapter 7 हिरोशिमा), Chapter 8 एक वृक्ष की हत्या), Chapter 9 हमारी नींद), Chapter 10 अक्षर(ज्ञान), Chapter 11 लौटकर आऊँग फिर) and Chapter 12 मेरे बिना तुम प्रभु). Summary of the same is given below:

Board NameBihar Board of Secondary Education
ClassClass 10th
Content TypeSolution
Solution forClass 10th students
SubjectHindi (Godhuli Bhag 2 पद्य खण्ड)
Chapter NameChapter 10 अक्षर(ज्ञान)
Total Number of Chapter in this Subject12

Studying Bihar Board Class 10th Hindi (Godhuli Bhag 2 पद्य खण्ड) Chapter 10 अक्षर(ज्ञान) solution will help you higher marks in this subject but you need to follow best practices to achieve higher marks, which are given after solutions, go through them once.

Bihar Board Class 10th Hindi (Godhuli Bhag 2 पद्य खण्ड) Chapter 10 अक्षर(ज्ञान) Solutions

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1. कवि ने किसे 'अमर' कहा है और क्यों?

कवि ने अक्षरों (वर्णों) को 'अमर' कहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि अक्षर हमेशा बने रहते हैं। जो ज्ञान या विचार अक्षरों के रूप में लिख दिए जाते हैं, वे समय के साथ नष्ट नहीं होते। पीढ़ी दर पीढ़ी वे ज्ञान का संचार करते रहते हैं और इस प्रकार अमर हो जाते हैं।

2. कवि ने अक्षरों को 'स्वर्गीय' क्यों कहा है?

कवि ने अक्षरों को 'स्वर्गीय' इसलिए कहा है क्योंकि वे मनुष्य को ज्ञान और आनंद का ऐसा उच्च स्तर प्रदान करते हैं जो साधारण भौतिक सुखों से ऊपर होता है। अक्षरों के माध्यम से मिलने वाला ज्ञान व्यक्ति के मन और आत्मा को शांति और उन्नति की ओर ले जाता है, जो स्वर्ग के सुख के समान है।

3. 'अक्षर' कविता का मूल भाव स्पष्ट कीजिए।

इस कविता का मूल भाव अक्षरों (शिक्षा और ज्ञान) की महत्ता को प्रतिपादित करना है। कवि बताते हैं कि अक्षर ही वह साधन हैं जो मनुष्य को अज्ञान के अंधकार से निकालकर ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाते हैं। ये अक्षर ही सभ्यता, संस्कृति और इतिहास के वाहक हैं। इनके बिना मनुष्य का जीवन पशु के समान है। अक्षरों के माध्यम से ही मनुष्य अपने विचारों को अमर बना सकता है और समाज की उन्नति में योगदान दे सकता है।

4. 'अक्षर' कविता के आधार पर अक्षरों की विशेषताएँ लिखिए।

कविता के आधार पर अक्षरों की प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार हैं:

  • अमरता: अक्षर कभी नष्ट नहीं होते, वे सदैव जीवित रहते हैं।
  • ज्ञान के स्रोत: ये अज्ञान के अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश फैलाते हैं।
  • स्वर्गीय आनंद: अक्षरों से प्राप्त ज्ञान मनुष्य को ऊँचा और दिव्य आनंद प्रदान करता है।
  • सभ्यता के निर्माता: मानव सभ्यता और संस्कृति का विकास अक्षरों के कारण ही संभव हुआ है।
  • मौन वक्ता: अक्षर चुप रहकर भी अपनी बात कहने की शक्ति रखते हैं।

5. निम्नलिखित पंक्तियों का भाव स्पष्ट कीजिए:
'अक्षरों से ही ज्ञान की ज्योति जगी है,
अक्षरों से ही सभ्यता का सूर्य उगा है।'

इन पंक्तियों का भाव यह है कि अक्षर ही मानव ज्ञान और सभ्यता के आधार हैं। जब मनुष्य ने अक्षरों का आविष्कार किया और उनके माध्यम से अपने विचारों को लिखित रूप देना शुरू किया, तभी से ज्ञान की रोशनी फैलनी शुरू हुई। इस ज्ञान ने ही मनुष्य को पशुता से ऊपर उठाकर सभ्य बनाया। अक्षरों के बिना न तो ज्ञान संचित हो सकता था और न ही आधुनिक सभ्यता का विकास संभव था।

6. 'अक्षर' कविता के रचयिता कौन हैं?

कविता 'अक्षर' के रचयिता श्री रामधारी सिंह 'दिनकर' जी हैं।

बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)

1. 'अक्षर' कविता के कवि कौन हैं?

A) सुमित्रानंदन पंत
B) मैथिलीशरण गुप्त
C) रामधारी सिंह 'दिनकर'
D) हरिवंश राय बच्चन

2. कवि ने अक्षरों को क्या कहा है?

A) नश्वर
B) अमर
C) साधारण
D) व्यर्थ

3. अक्षरों से क्या जगी है?

A) अंधकार
B) लालसा
C) ज्ञान की ज्योति
D) अहंकार

4. कवि के अनुसार अक्षर क्या करते हैं?

A) झूठ बोलते हैं
B) लड़ाई कराते हैं
C) अंधकार मिटाते हैं
D) धोखा देते हैं

5. 'अक्षर' कविता का मुख्य संदेश क्या है?

A) धन का महत्व
B) युद्ध की भयावहता
C) ज्ञान और अक्षरों का महत्व
D) प्रकृति का सौंदर्य

प्रश्न 1. कवि ने अक्षरों को किसके समान बताया है?

कवि ने अक्षरों को अमृत के समान बताया है। अक्षरों में ज्ञान का अमृत भरा होता है, जो मनुष्य को अज्ञान के अंधकार से निकालकर प्रकाश की ओर ले जाता है और उसे अमरत्व प्रदान करता है।

प्रश्न 2. कवि ने अक्षरों को किस प्रकार सजीव बताया है?

कवि ने अक्षरों को सजीव बताते हुए कहा है कि वे बोलते, गाते और नाचते हैं। जब हम अक्षरों को पढ़ते-लिखते हैं, तो वे हमारे मन में विचारों और भावनाओं का संचार करते हैं, जैसे कोई सजीव प्राणी हमसे संवाद कर रहा हो।

प्रश्न 3. अक्षरों का कौन-सा गुण उन्हें देवतुल्य बनाता है?

अक्षरों का ज्ञान प्रदान करने का गुण उन्हें देवतुल्य बनाता है। जिस प्रकार देवता मनुष्य को कल्याण का मार्ग दिखाते हैं, उसी प्रकार अक्षर भी हमें अज्ञानता से मुक्ति दिलाकर ज्ञान और प्रकाश का मार्ग दिखाते हैं।

प्रश्न 4. 'अक्षर ज्ञान' कविता का मूल भाव लिखिए।

इस कविता का मूल भाव यह है कि अक्षर या वर्ण मानव जीवन के लिए अमूल्य और दैवीय वरदान हैं। ये अक्षर ही ज्ञान के वाहक हैं जो मनुष्य को पशुता से मानवता और अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाते हैं। ये साक्षर व्यक्ति के मन में नए विचार जगाते हैं, उसे सभ्य बनाते हैं और उसके जीवन को सार्थकता प्रदान करते हैं।

प्रश्न 5. निम्नलिखित पंक्तियों का भाव स्पष्ट कीजिए-
(क) अक्षरों से ही तो मिलता है, जीवन को नया आसरा।
(ख) अक्षरों से ही तो मिलती है, जीवन को नई दिशा।

(क) भाव स्पष्टीकरण: इस पंक्ति का भाव यह है कि अक्षरों के ज्ञान के बिना मनुष्य का जीवन असहाय और निराश्रित होता है। अक्षर ही वह सहारा (आसरा) हैं जो उसे अज्ञान के संकट से बचाते हैं, उसे रोजगार देते हैं और जीवन को सुखद एवं सुरक्षित बनाने का मार्ग दिखाते हैं।

(ख) भाव स्पष्टीकरण: इस पंक्ति का तात्पर्य है कि अक्षरों के माध्यम से ही मनुष्य को जीवन जीने की सही दिशा मिलती है। वह अंधविश्वास और गलत राहों पर चलने के बजाय ज्ञान और विवेक से परिपूर्ण होकर सही निर्णय ले पाता है और एक उज्ज्वल भविष्य की ओर अग्रसर होता है।

प्रश्न 6. सही विकल्प चुनिए-
(क) अक्षरों से हमें क्या प्राप्त होता है?
1. धन
2. ज्ञान
3. शक्ति
4. स्वास्थ्य

सही उत्तर: 2. ज्ञान

(ख) अक्षर किसके समान हैं?
1. फूल के समान
2. अमृत के समान
3. सूर्य के समान
4. चाँद के समान

सही उत्तर: 2. अमृत के समान

(ग) अक्षरों से क्या मिलती है?
1. नई दिशा
2. नया घर
3. नया शहर
4. नया देश

सही उत्तर: 1. नई दिशा

(घ) अक्षर क्या करते हैं?
1. सोते हैं
2. बोलते, गाते और नाचते हैं
3. चलते हैं
4. उड़ते हैं

सही उत्तर: 2. बोलते, गाते और नाचते हैं

1. अक्षर किसे कहते हैं?

अक्षर का शाब्दिक अर्थ है - जिसका क्षय न हो। यहाँ कवि ने अक्षर का प्रयोग ज्ञान के अर्थ में किया है। ज्ञान वह शक्ति है जो मनुष्य को अज्ञान के अंधकार से निकालकर प्रकाश की ओर ले जाती है। यह मनुष्य को सही-गलत का विवेक देती है और उसके जीवन को सार्थक बनाती है।

2. कवि ने अक्षर को किसका प्रतीक माना है?

कवि ने अक्षर को ज्ञान का प्रतीक माना है। जिस प्रकार अक्षर (वर्ण) मिलकर शब्द, वाक्य और सम्पूर्ण विचारधारा बनाते हैं, उसी प्रकार ज्ञान के छोटे-छोटे तत्व मिलकर मनुष्य के चिंतन और व्यक्तित्व का निर्माण करते हैं। यह ज्ञान ही मनुष्य को पशुता से मानवता की ओर ले जाता है।

3. अक्षर किस प्रकार मनुष्य को महान बनाता है?

अक्षर अर्थात ज्ञान मनुष्य को उसके विचार, आचरण और कर्म के माध्यम से महान बनाता है। ज्ञान प्राप्त करने से मनुष्य का दृष्टिकोण विस्तृत होता है, वह संकीर्ण मानसिकता से ऊपर उठता है और परोपकार तथा समाज कल्याण के कार्यों के लिए प्रेरित होता है। एक ज्ञानवान व्यक्ति ही सही मायने में महान बन पाता है।

4. कवि ने अक्षर को अमृत क्यों कहा है?

कवि ने अक्षर (ज्ञान) को अमृत इसलिए कहा है क्योंकि यह मनुष्य को अमरत्व प्रदान करता है। ज्ञानी व्यक्ति अपने विचारों, आदर्शों और कृतित्व के माध्यम से सदियों तक लोगों के हृदय में जीवित रहता है। उसका नाम और यश मृत्यु के बाद भी अमर रहता है, जबकि शरीर नश्वर है।

5. अक्षर किस प्रकार मनुष्य को देवता बना देता है?

ज्ञान मनुष्य में दैवीय गुणों का विकास करता है। यह उसमें करुणा, त्याग, सहनशीलता, सत्यनिष्ठा और निस्वार्थ भावना जैसे दिव्य गुण पैदा करता है। एक ज्ञानी व्यक्ति स्वार्थ से ऊपर उठकर सम्पूर्ण मानवता की भलाई के लिए कार्य करता है, और यही गुण उसे एक साधारण मनुष्य से ऊपर उठाकर देवतुल्य बना देते हैं।

6. कवि ने अक्षर को सबसे बड़ा धन क्यों कहा है?

कवि ने अक्षर (ज्ञान) को सबसे बड़ा धन इसलिए कहा है क्योंकि यह एक ऐसी सम्पदा है जिसे कोई चुरा नहीं सकता, नष्ट नहीं कर सकता और न ही बाँटने से यह कम होती है। बल्कि, ज्ञान बाँटने से और बढ़ता है। यह धन मनुष्य को हर परिस्थिति में सही मार्गदर्शन देता है और उसके जीवन को वास्तविक समृद्धि से भर देता है।

7. अक्षर किस प्रकार मनुष्य को स्वतंत्र बनाता है?

अक्षर यानी ज्ञान मनुष्य को मानसिक गुलामी से मुक्ति दिलाकर स्वतंत्र बनाता है। अज्ञानता, अंधविश्वास, भय और पूर्वाग्रहों में जकड़ा व्यक्ति कभी स्वतंत्र नहीं हो सकता। ज्ञान उसे इन सबसे मुक्त करता है, तर्क और विवेक की शक्ति देता है, जिससे वह अपने निर्णय स्वयं ले सकता है और एक स्वतंत्र चेतना के साथ जीवन जी सकता है।

8. कवि ने अक्षर को सबसे बड़ा बल क्यों कहा है?

कवि ने अक्षर को सबसे बड़ा बल इसलिए कहा है क्योंकि शारीरिक शक्ति सीमित और क्षणभंगुर होती है, परन्तु ज्ञान की शक्ति असीमित और स्थायी होती है। ज्ञान का बल ही मनुष्य को कठिन से कठिन चुनौतियों का सामना करने, बुराइयों से लड़ने और न्याय की स्थापना के लिए प्रेरित करता है। यह वह आंतरिक शक्ति है जो बाहरी हथियारों से कहीं अधिक प्रभावशाली है।

9. अक्षर किस प्रकार मनुष्य को अमरत्व प्रदान करता है?

अक्षर (ज्ञान) मनुष्य को अमरत्व प्रदान करता है क्योंकि ज्ञानी व्यक्ति द्वारा किया गया कार्य, लिखा गया साहित्य या दिया गया विचार उसकी मृत्यु के बाद भी शाश्वत रहता है। लोग उसके ज्ञान और विचारों से सदियों तक प्रेरणा लेते हैं। इस प्रकार वह व्यक्ति अपने शरीर से नहीं, बल्कि अपने ज्ञान-रूपी अमर विरासत के माध्यम से हमेशा जीवित रहता है।

10. कवि ने अक्षर को सबसे बड़ा सुख क्यों कहा है?

कवि ने अक्षर को सबसे बड़ा सुख इसलिए कहा है क्योंकि भौतिक सुख अस्थायी होते हैं और इनसे तृप्ति नहीं मिलती। जबकि ज्ञान का सुख आत्मिक और स्थायी होता है। ज्ञान प्राप्ति से मनुष्य को आत्मसंतुष्टि, मन की शांति और आंतरिक आनंद की प्राप्ति होती है, जो किसी भी भौतिक सुख से कहीं बड़ा और टिकाऊ सुख है।

बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)

1. 'अक्षर' कविता के रचयिता कौन हैं?

(A) रामधारी सिंह 'दिनकर'
(B) सुमित्रानंदन पंत
(C) हरिवंशराय बच्चन
(D) सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला'

2. कवि ने अक्षर को किसका प्रतीक माना है?

(A) धन का
(B) ज्ञान का
(C) शक्ति का
(D) सुख का

3. अक्षर किसे महान बनाता है?

(A) राजा को
(B) मनुष्य को
(C) देवता को
(D) पशु को

4. कवि ने अक्षर को क्या कहा है?

(A) धन
(B) अमृत
(C) बल
(D) यश

5. अक्षर किस प्रकार का धन है?

(A) चुराया जा सकने वाला
(B) नष्ट किया जा सकने वाला
(C) न चुराया जा सकने वाला
(D) बेचा जा सकने वाला

6. अक्षर मनुष्य को किससे मुक्त करता है?

(A) गरीबी से
(B) बीमारी से
(C) मोह से
(D) अज्ञान से

7. कवि के अनुसार सबसे बड़ा बल क्या है?

(A) शस्त्र
(B) धन
(C) अक्षर
(D) स्वास्थ्य

8. अक्षर मनुष्य को क्या प्रदान करता है?

(A) धन
(B) अमरत्व
(C) पद
(D) शक्ति

9. कवि ने अक्षर को सबसे बड़ा सुख क्यों कहा है?

(A) क्योंकि इससे धन मिलता है
(B) क्योंकि यह आत्मिक सुख देता है
(C) क्योंकि इससे यश मिलता है
(D) क्योंकि इससे शक्ति मिलती है

10. 'अक्षर' कविता का मूल भाव क्या है?

(A) धन का महत्व
(B) ज्ञान का महत्व
(C) स्वास्थ्य का महत्व
(D) शक्ति का महत्व

अक्षर-ज्ञान (कविता)

प्रश्न 1. 'अक्षर-ज्ञान' कविता का सारांश अपने शब्दों में लिखें।

यह कविता एक बच्चे के अक्षर सीखने की कोमल और मार्मिक प्रक्रिया को चित्रित करती है। कवयित्री अनामिका ने बच्चे की पहली पाठशाला, यानी उसकी माँ के साथ के पलों को बहुत ही सूक्ष्मता से देखा है। कविता में बच्चा 'क' से 'घ' तक के अक्षरों से परिचित होता है, लेकिन 'ड' अक्षर पर आकर उसके हाथ रुक जाते हैं। वह इस अक्षर को लिखने में कठिनाई महसूस करता है। तब वह अपनी कल्पना से 'ड' के आकार को एक माँ और उसके पेट के बिंदु (.) को बेटा मान लेता है। माँ और बेटे के इस प्रेमपूर्ण संबंध को वह अक्षर में देखने लगता है, पर उसे ठीक से लिख नहीं पाता। लगातार कोशिश के बाद भी असफल होने पर उसकी आँखों में आँसू आ जाते हैं। कवयित्री इन आँसुओं को ही सृष्टि की विकास-कथा का 'प्रथम अक्षर' कहती हैं। इस तरह, एक साधारण अक्षर-ज्ञान की घटना के माध्यम से कविता सृजन, संघर्ष, विकास और माँ-बेटे के गहरे रिश्ते जैसे गंभीर विषयों को छूती है।

प्रश्न 2. ड के 'ड' को वह समझता है माँ
और उसके बगल के बिन्दु (.) को मानता है
गादी में बैठा Ser
माँ-बेठे सधते नहीं उससे
और उन्हें लिख लेने की
अनवरत कोशिश में
उसके आ जाते हैं आँसू।
पहली विफलता पर छलके ये आँसू ही
हैं शायद प्रथमाक्षर
सृष्टि की विकास-कथा के।
व्याख्या-

प्रस्तुत पंक्तियाँ अनामिका जी की कविता 'अक्षर-ज्ञान' से ली गई हैं। इनमें एक बच्चे की अक्षर सीखने की मनोवैज्ञानिक स्थिति का वर्णन है। बच्चा 'ड' अक्षर के आकार को एक माँ के रूप में और उसके साथ लगे बिंदु (.) को माँ की गोद में बैठे बेटे के रूप में देखता है। यह दर्शाता है कि बच्चे की कल्पना कितनी सजीव और भावनात्मक है। वह अक्षरों को केवल रेखाएँ नहीं, बल्कि जीवंत रिश्तों के रूप में समझता है।

हालाँकि, इस सुंदर कल्पना को कागज पर उतार पाना उसके लिए कठिन है। 'माँ' और 'बेटे' (यानी 'ड' और बिंदु) को एक साथ सही तरीके से लिखने की उसकी लगातार कोशिश विफल हो जाती है। इस पहली विफलता पर उसकी आँखों में आँसू छलक आते हैं। कवयित्री इन आँसुओं को गहरा अर्थ देती हुई कहती हैं कि शायद यही आँसू, यही संघर्ष और यही कोशिश सृष्टि की विकास-कथा का पहला अक्षर है। मानव सभ्यता का विकास भी ऐसे ही अनगिनत संघर्षों, कोशिशों और भावनाओं से होकर गुजरा है। इस प्रकार, बच्चे के आँसू एक छोटी सी घटना से आगे बढ़कर समस्त मानव विकास यात्रा का प्रतीक बन जाते हैं।

कवयित्री परिचय

अनामिका समकालीन हिंदी साहित्य की एक प्रमुख कवयित्री और लेखिका हैं। इनका जन्म 17 अगस्त, 1961 को बिहार के मुजफ्फरपुर में हुआ। इनके पिता श्री श्यामनंदन किशोर एक गीतकार एवं प्राध्यापक थे। अनामिका ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अंग्रेजी में एम.ए. और पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त की। वर्तमान में वे दिल्ली विश्वविद्यालय के सत्यवती कॉलेज में अंग्रेजी विभाग में प्राध्यापिका हैं।

अनामिका हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में सृजनात्मक लेखन करती हैं। इनकी प्रमुख रचनाएँ हैं – कविता संग्रह : 'गलत पते की चिट्ठी', 'बीजाक्षर', 'अनुष्टुप'। आलोचना : 'पोस्ट-एलिएट पोएट्री', 'स्त्रीत्व का मानचित्र'। इन्होंने 'कहती हैं औरतें' नाम से एक काव्य संकलन का संपादन भी किया है।

अनामिका को उनकी रचनात्मकता के लिए राष्ट्रभाषा परिषद् पुरस्कार, भारत भूषण अग्रवाल पुरस्कार, गिरिजा कुमार माथुर पुरस्कार तथा ऋतुराज साहित्यकार सम्मान आदि प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। स्त्री विमर्श पर उनकी पैनी दृष्टि और समाज के वंचित वर्गों के प्रति संवेदनशीलता उनके लेखन की विशेषता है।

पाठ का सार

प्रस्तुत कविता 'अक्षर-ज्ञान' कवयित्री अनामिका द्वारा रचित है, जो 'कवि ने कहा' श्रृंखला से ली गई है। यह कविता एक बच्चे के अक्षर सीखने की प्रक्रिया के माध्यम से गहन मानवीय भावनाओं और दार्शनिक विचारों को व्यक्त करती है। कविता में दिखाया गया है कि कैसे एक बच्चा माँ की मदद से 'क', 'ख', 'ग', 'घ' जैसे अक्षर सीखता हुआ 'ड' तक पहुँचता है। 'ड' का आकार उसे एक माँ और उसके बेटे जैसा लगता है। इस सुंदर कल्पना के बावजूद वह इस अक्षर को ठीक से नहीं लिख पाता, जिससे निराश होकर उसकी आँखें नम हो जाती हैं।

कवयित्री बच्चे के इन आँसुओं को सृष्टि के विकास का पहला अक्षर मानती हैं। उनका कहना है कि जिस प्रकार मानव सभ्यता ने अंधकार से ज्ञान की ओर लंबी और संघर्षपूर्ण यात्रा की है, उसी प्रकार हर बच्चे का अक्षर सीखना भी एक छोटी सी सृष्टि-रचना और विकास-यात्रा है। इस प्रकार यह कविता शिक्षण की एक साधारण घटना को विश्वब्रह्मांड के सृजन और विकास से जोड़कर एक असाधारण अर्थ प्रदान करती है।

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