Bihar Board Class 10th Hindi (Godhuli Bhag 2 पद्य खण्ड) Chapter 7 हिरोशिमा) Solutions

Here we have provided Solution for Chapter 7 हिरोशिमा) of Hindi (Godhuli Bhag 2 पद्य खण्ड) subject for Class 10th students of Bihar Board of Secondary Education. There are various chapters in this Hindi (Godhuli Bhag 2 पद्य खण्ड) such as Chapter 1 राम बिनु बिरथे जगि जनमा, जो नर दुख में दुख नहिं मानै), Chapter 2 प्रेम अयनि श्री राधिका, करील के कुंजन ऊपर वारौं), Chapter 3 अति सूधो सनेह को मारग है, मो अंसुवानिहिं लै बरसौ), Chapter 4 स्वदेशी), Chapter 5 भारतमाता), Chapter 6 जनतंत्र का जन्म), Chapter 7 हिरोशिमा), Chapter 8 एक वृक्ष की हत्या), Chapter 9 हमारी नींद), Chapter 10 अक्षर(ज्ञान), Chapter 11 लौटकर आऊँग फिर) and Chapter 12 मेरे बिना तुम प्रभु). Summary of the same is given below:

Board NameBihar Board of Secondary Education
ClassClass 10th
Content TypeSolution
Solution forClass 10th students
SubjectHindi (Godhuli Bhag 2 पद्य खण्ड)
Chapter NameChapter 7 हिरोशिमा)
Total Number of Chapter in this Subject12

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Bihar Board Class 10th Hindi (Godhuli Bhag 2 पद्य खण्ड) Chapter 7 हिरोशिमा) Solutions

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हिरोशिमा

1. कवि ने हिरोशिमा की किस त्रासदी की ओर संकेत किया है?

कवि ने हिरोशिमा की उस भयानक त्रासदी की ओर संकेत किया है जो 6 अगस्त, 1945 को घटी थी। इस दिन अमेरिका ने जापान के हिरोशिमा शहर पर 'लिटिल बॉय' नामक परमाणु बम गिराया था। इस विस्फोट ने पल भर में पूरे शहर को तबाह कर दिया, लाखों लोग मारे गए और जो बचे उन्हें विकिरण से होने वाली भयानक बीमारियों का सामना करना पड़ा। कवि इस घटना के माध्यम से युद्ध की विभीषिका और मानवता पर हुए इस कलंक को दर्शाता है।

2. 'हिरोशिमा' कविता का मूल भाव स्पष्ट कीजिए।

इस कविता का मूल भाव युद्ध की विभीषिका और मानव द्वारा मानव पर किए गए अमानवीय अत्याचार को दर्शाना है। कवि हिरोशिमा पर गिराए गए परमाणु बम के विनाशकारी परिणामों को चित्रित करता है, जिसने न केवल एक शहर को मिट्टी में मिला दिया बल्कि पीढ़ियों तक के लिए जीवन को त्रासदी में धकेल दिया। कविता यह संदेश देती है कि ऐसी तकनीकी उन्नति जो विनाश का कारण बने, वह मानवता के लिए अभिशाप है। यह शांति, मानवीय मूल्यों और संवेदनशीलता की पुकार है।

3. 'हिरोशिमा की घटना विज्ञान का विद्रूप है' - इस कथन पर अपने विचार लिखिए।

यह कथन पूर्णतः सत्य है। विज्ञान का उद्देश्य मानव जीवन को सुखद और सरल बनाना है, न कि उसका विनाश करना। परंतु हिरोशिमा पर गिराया गया परमाणु बम विज्ञान के दुरुपयोग का चरम उदाहरण है। जिस ऊर्जा का उपयोग बिजली उत्पादन और चिकित्सा जैसे कल्याणकारी कार्यों के लिए किया जा सकता था, उसे एक ऐसे अस्त्र के निर्माण में लगाया गया जिसने निर्दोष नागरिकों, बच्चों, महिलाओं और बूढ़ों का जीवन नष्ट कर दिया। इस प्रकार, यह घटना विज्ञान के वास्तविक स्वरूप के विपरीत उसके विद्रूप (विकृत रूप) को प्रस्तुत करती है।

4. 'हिरोशिमा' कविता के आधार पर परमाणु बम के दुष्परिणामों का वर्णन कीजिए।

'हिरोशिमा' कविता के आधार पर परमाणु बम के दुष्परिणाम इस प्रकार हैं:

तात्कालिक विनाश: विस्फोट के साथ ही पूरा शहर धराशायी हो गया। भवन, पुल, सड़कें सब कुछ धूल में मिल गए। असंख्य लोग तत्काल जलकर राख हो गए।

दीर्घकालिक पीड़ा: जो लोग बच गए, उन्हें विकिरण के कारण अकथनीय शारीरिक पीड़ा झेलनी पड़ी। कैंसर जैसी घातक बीमारियाँ फैलीं और आनुवंशिक विकृतियाँ पीढ़ियों तक चलीं।

मानसिक आघात: इस घटना ने जीवित बचे लोगों के मन-मस्तिष्क पर गहरा सदमा छोड़ा। भय, असुरक्षा और दर्द की स्मृतियाँ उनका जीवनभर पीछा नहीं छोड़तीं।

प्रकृति का विनाश: पर्यावरण प्रदूषित हुआ, भूमि बंजर हो गई और वहाँ के जल स्रोत जहरीले हो गए, जिससे लंबे समय तक जीवन संकट में रहा।

5. 'हिरोशिमा' कविता के आधार पर बताइए कि युद्ध की विभीषिका किस प्रकार मानव-सभ्यता को नष्ट कर देती है?

युद्ध की विभीषिका मानव-सभ्यता को उसकी नींव से हिला देती है। हिरोशिमा की घटना इसका ज्वलंत उदाहरण है:

मानवीय मूल्यों का हनन: युद्ध संवेदनहीनता और घृणा को जन्म देता है। हिरोशिमा में निर्दोष नागरिकों का सामूहिक वध मानवता के सभी नैतिक मूल्यों को तार-तार कर देता है।

सांस्कृतिक विनाश: सदियों से बनी संस्कृति, कला, साहित्य और ऐतिहासिक धरोहर पल भर में नष्ट हो जाती है।

वैज्ञानिक प्रगति का दुरुपयोग: मानव बुद्धि द्वारा की गई खोजें, जो जीवन रक्षक होनी चाहिए थीं, विनाश के साधन बन जाती हैं। यह सभ्यता के पतन का संकेत है।

भविष्य की पीढ़ियों पर प्रभाव: युद्ध के दुष्परिणाम केवल एक पीढ़ी तक सीमित नहीं रहते। हिरोशिमा के बाद पैदा हुए बच्चों में भी विकृतियाँ देखी गईं, यानी सभ्यता का भविष्य अंधकारमय हो जाता है।

6. 'हिरोशिमा' कविता के आधार पर परमाणु बम विस्फोट के समय हुए दृश्य का वर्णन कीजिए।

कविता के आधार पर परमाणु बम विस्फोट के समय का दृश्य अत्यंत भयावह और दारुण था:

विस्फोट के साथ ही एक भीषण आग का गोला फूट पड़ा, जिसकी चमक सूर्य से भी तेज थी और जिसकी गर्मी ने सब कुछ भस्म कर दिया। एक विशालकाय कवंलपुंज (मशरूम बादल) आकाश में उठा। तीव्र वायुदाब लहर ने हर ठोस चीज को मिट्टी में मिला दिया। लोग अपने प्रियजनों का नाम पुकारते हुए जलने लगे। कुछ लोगों के शरीर की चमड़ी पिघलकर लटक गई। चारों ओर धुआँ, आग, राख और मानवीय चीखों का साम्राज्य था। पल भर में एक जीवंत शहर नरक में तब्दील हो गया।

7. 'हिरोशिमा' कविता के आधार पर बताइए कि कवि ने किन-किन प्रतीकों का प्रयोग किया है?

कवि ने हिरोशिमा की त्रासदी को गहराई से व्यक्त करने के लिए अनेक प्रभावशाली प्रतीकों का प्रयोग किया है:

'काली बारिश': विस्फोट के बाद हुई वह रेडियोधर्मी बारिश जो मृत्यु और विनाश का प्रतीक है।

'मशरूम बादल' या 'कवंलपुंज': परमाणु विस्फोट के बाद बनने वाला बादल, जो मानवीय अहंकार और विनाश की शक्ति का प्रतीक है।

'जलते हुए मानव': निर्दोष मानवता की पीड़ा और युद्ध की नृशंसता का प्रतीक।

'धरती का जलना': सम्पूर्ण प्रकृति और जीवन के आधार का विनाश।

'छाया जो दीवार पर अंकित है': विस्फोट की तीव्र ऊष्मा से किसी व्यक्ति की दीवार पर अंकित हो गई छाया, जो अचानक मिट जाने वाले अस्तित्व की स्थायी याद दिलाती है।

8. 'हिरोशिमा' कविता के आधार पर बताइए कि कवि ने किन-किन बिम्बों का प्रयोग किया है?

कवि ने कविता को मार्मिक और प्रभावशाली बनाने के लिए निम्नलिखित बिम्बों (चित्रों) का प्रयोग किया है:

दृश्य बिम्ब: 'मशरूम के आकार का बादल', 'जलते हुए मानव', 'काली बारिश', 'धरती का जलना', 'दीवार पर अंकित मानव-छाया'। ये बिम्ब पाठक के मन में घटना की भयावह तस्वीर उकेर देते हैं।

श्रव्य बिम्ब: 'चीखों की गूँज', 'सिसकियों की आवाज'। ये बिम्ब उस समय की दर्दनाक चीखों और कराहों को सुनने का अहसास कराते हैं।

स्पर्श बिम्ब: 'अत्यधिक गर्मी', 'पिघलती चमड़ी'। ये बिम्ब उस जलन और दर्द को महसूस कराते हैं जो पीड़ितों ने झेला।

घ्राण बिम्ब: 'जलते मांस की दुर्गंध', 'धुएँ की गंध'। ये बिम्ब उस वातावरण की भयानक गंध को महसूस कराते हैं।

9. 'हिरोशिमा' कविता के आधार पर बताइए कि कवि ने किन-किन अलंकारों का प्रयोग किया है?

कवि ने भाषा को प्रभावशाली बनाने के लिए निम्नलिखित अलंकारों का सुंदर प्रयोग किया है:

उपमा अलंकार: जैसे - 'मशरूम के आकार का बादल'। यहाँ बादल की तुलना मशरूम से की गई है।

पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार: शब्दों की पुनरावृत्ति से भाव को बल मिलता है। जैसे - 'जलते-जलते', 'चीखते-चीखते'।

मानवीकरण अलंकार: निर्जीव वस्तुओं को मानव के समान चेतन दिखाया गया है। जैसे - 'धरती जल उठी'। धरती जलना मानवीय क्रिया है।

अतिशयोक्ति अलंकार (काव्यिक): घटना की भयावहता को दर्शाने के लिए अतिशयोक्ति का प्रयोग। जैसे - 'सूरज भी हैरान था'।

प्रतीक अलंकार: 'काली बारिश', 'मशरूम बादल' आदि प्रतीकात्मक अलंकार के उदाहरण हैं।

बहुविकल्पीय प्रश्न

1. 'हिरोशिमा' कविता के रचयिता हैं-

(A) सुमित्रानंदन पंत
(B) सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला'
(C) सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय'
(D) महादेवी वर्मा

2. हिरोशिमा पर परमाणु बम कब गिराया गया था?

(A) 9 अगस्त, 1945
(B) 6 अगस्त, 1945
(C) 15 अगस्त, 1945
(D) 26 जुलाई, 1945

3. हिरोशिमा पर गिराए गए परमाणु बम का नाम क्या था?

(A) लिटिल बॉय
(B) फैट मैन
(C) बिग बेन
(D) नागासाकी बम

4. परमाणु बम विस्फोट के बाद आकाश में किस आकार का बादल उठा?

(A) गोलाकार
(B) मशरूम के आकार का
(C) स्तंभ के आकार का
(D) पहाड़ के आकार का

5. 'हिरोशिमा' कविता का मुख्य स्वर क्या है?

(A) प्रेम
(B) विरह
(C) युद्ध-विरोध और शांति
(D) प्रकृति चित्रण

6. विस्फोट के बाद हिरोशिमा में कैसी बारिश हुई?

(A) हल्की बूंदाबांदी
(B) मूसलाधार बारिश
(C) काली बारिश (रेडियोधर्मी)
(D) ओलावृष्टि

7. कविता में किसकी छाया दीवार पर अंकित होने की बात कही गई है?

(A) एक पेड़ की
(B) एक मनुष्य की
(C) एक पक्षी की
(D) एक पहाड़ की

8. 'हिरोशिमा' कविता किस काव्य-संग्रह से ली गई है?

(A) गुंजन
(B) आँगन के पार द्वार
(C) चिंता
(D) इत्यादि

हिरोशिमा - अज्ञेय

(क) कवि तथा कविता का नाम लिखें।

उत्तर:
कविता का नाम: हिरोशिमा
कवि का नाम: सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय'

(ख) पद्यांश का प्रसंग लिखें।

उत्तर:
प्रस्तुत पद्यांश 'हिरोशिमा' कविता से लिया गया है। इसमें कवि अज्ञेय ने द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान (6 अगस्त, 1945 को) जापान के हिरोशिमा शहर पर गिराए गए परमाणु बम के विध्वंसकारी दृश्य का मार्मिक वर्णन किया है। यह वर्णन एक साक्षी की तरह है, जो मानव द्वारा रची गई इस भीषण त्रासदी के बाद के भयानक परिणामों को दर्शाता है। कवि इस घटना के माध्यम से आधुनिक सभ्यता की विनाशलीला और मानवीय संवेदनाओं पर प्रहार को उजागर करते हैं।

(ग) पद्यांश का सरलार्थ लिखें।

उत्तर:
कवि कहते हैं कि अचानक एक भयंकर ज्वाला के साथ धरती को फाड़ता हुआ परमाणु बम रूपी एक सूरज प्रकट हुआ। यह धूप (बम की चमक और ताप) आकाश से नहीं, बल्कि धरती के भीतर से फूटकर निकली और अपनी प्रचंड गर्मी बिखेरते हुए पूरे हिरोशिमा शहर को जलाने लगी। विस्फोट की इतनी भीषण ज्वाला फैली कि सारा जन-जीवन क्रूर मृत्यु की गोद में समा गया। साधारण सूरज पूर्व दिशा से उगता है और एक दिशा में छाया बनाता है, लेकिन इस बम रूपी सूरज के उगने से हर जीव की जलकर बनी छायाएँ चारों ओर जमीन पर अंकित हो गईं। ऐसा लगा जैसे एक नहीं, बल्कि चारों दिशाओं से सूरज ही सूरज उग आया हो। कवि के अनुसार, ऐसा प्रतीत होता है मानो काल रूपी सूर्य के रथ के पहिए टूटकर शहर के बीचों-बीच बिखर गए हों, जिससे चारों ओर हाहाकार मच गया। यह आधुनिक मानव सभ्यता द्वारा रचा गया भयानक विनाश का दृश्य था।

(घ) भाव-सौंदर्य स्पष्ट करें।

उत्तर:
इस पद्यांश का भाव-सौंदर्य अत्यंत ही मार्मिक और चित्रात्मक है।

  1. विनाश का भयावह चित्रण: कवि ने परमाणु विस्फोट के तत्काल बाद के दृश्य को इतने सजीव शब्दों में चित्रित किया है कि पाठक के मन में उस भीषण त्रासदी की एक स्पष्ट छवि उभर आती है।
  2. प्रकृति और मानव-निर्मित विनाश का विरोधाभास: प्राकृतिक सूरज को जीवनदायी बताकर और बम रूपी सूरज को विनाशकारी बताकर कवि ने एक तीखा विरोधाभास पैदा किया है। यह बताता है कि मानव ने जीवन के प्रतीक को ही मृत्यु का साधन बना लिया।
  3. आधुनिक सभ्यता पर कटु प्रश्न: इस वर्णन के माध्यम से कवि मानव की तथाकथित विकसित सभ्यता पर एक गहरा प्रश्नचिह्न लगाते हैं। वे पूछते हैं कि क्या यही है हमारी प्रगति और बुद्धिमत्ता की परिणति?
  4. साक्ष्य का भाव: पूरा वर्णन एक गवाह की तरह है, जो इतिहास की इस काले अध्याय को याद दिलाता है ताकि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो।

(ङ) काव्य-सौंदर्य स्पष्ट करें।

उत्तर:

  1. भाषा: कविता की भाषा खड़ी बोली है, जिसमें तत्सम शब्दों (जैसे - भीषणतम, आण्विक, प्रचण्ड) के प्रयोग से भाव की गंभीरता और गाम्भीर्य बढ़ गया है।
  2. छंद: यह कविता मुक्त छंद में लिखी गई है, जो प्रयोगवादी कवियों की एक प्रमुख विशेषता है। इससे कवि को अपने भावों और विचारों को बिना किसी बंधन के अभिव्यक्त करने की स्वतंत्रता मिली है।
  3. अलंकार:
    • उपमा: 'आण्विक बम रूपी सूरज' - बम की तुलना सूरज से की गई है।
    • अनुप्रास: 'सूरज सूरज' में 'स' वर्ण की आवृत्ति है।
    • दृष्टांत: प्राकृतिक सूरज और बम रूपी सूरज के प्रभावों का वर्णन दृष्टांत के रूप में किया गया है।
  4. रस: पूरे वर्णन में वीभत्स रस और करुण रस की प्रधानता है, जो इस भयानक घटना के अनुरूप है।
  5. गुण: कविता में ओज गुण विद्यमान है, जो वीरता या प्रबलता के भाव को व्यक्त करता है, हालाँकि यहाँ यह विनाश की प्रबलता को दर्शाता है।
  6. प्रयोगवादी शैली: कविता में नए प्रतीकों (जैसे बम को सूरज कहना), नई भाषा-योजना और यथार्थ के कठोर चित्रण के कारण प्रयोगवाद की स्पष्ट झलक मिलती है।


वस्तुनिष्ठ प्रश्न

1. सही विकल्प चुनें

प्रश्न 1.
'हिरोशिमा' के कवि कौन हैं ?
(क) रामधारी सिंह दिनकर
(ख) कुँवर नारायण
(ग) 'अज्ञेय'
(घ) जीवानंद दास

उत्तर: (ग) 'अज्ञेय'

प्रश्न 2.
'अज्ञेय' किसका उपनाम है ?
(क) सच्चिदानंद वात्स्यायन
(ख) रामधारी सिंह
(ग) बदरी नारायण चौधरी
(घ) वीरेन डंगवाल

उत्तर: (क) सच्चिदानंद वात्स्यायन

प्रश्न 3.
'हिरोशिमा' कहाँ है ?
(क) जापान में
(ख) म्यानमार में
(ग) कोरिया में
(घ) चीन में

उत्तर: (क) जापान में

प्रश्न 4.
"हिरोशिमा' कविता में सूरज की संज्ञा किसे दी गई है ?
(क) जापान बम को
(ख) अणुबम को
(ग) हाइड्रोजन बम को
(घ) रडार को

उत्तर: (ख) अणुबम को

प्रश्न 5.
'अज्ञेय' किस काव्य-धारा के कवि हैं?
(क) रहस्यवाद
(ख) छायावाद
(ग) नयी कविता
(घ) प्रयोगवाद

उत्तर: (घ) प्रयोगवाद

प्रश्न 6.
किस काव्य-संकलन के प्रकाशन से हिन्दी में नयी हवा के झोंके आए?
(क) तार-सप्तक
(ख) हरी घास पर क्षण भर
(ग) चक्रवाल
(घ) इन दिनों

उत्तर: (क) तार-सप्तक

II. रिक्त स्थानों की पूर्ति करें-

प्रश्न 1.
'अज्ञेय' का असली नाम ............. है।

उत्तर: सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन

प्रश्न 2.
अज्ञेय कवि, कथाकार, नाटककार के अतिरिक्त सुधी ............ भी थे।

उत्तर: सम्पादक

प्रश्न 3.
हिरोशिमा कविता अणु बम विस्फोट की .............. में लिखी गई।

उत्तर: पृष्ठभूमि

प्रश्न 4.
अणु बम फटने पर मानव ही सब .............. हो गए।

उत्तर: भाप

प्रश्न 5.
धूप बरसी पर .......... से नहीं।

उत्तर: अंतरिक्ष

प्रश्न 6.
'अज्ञेय' हिन्दी में ......... प्रवृत्तियाँ लेकर आए।

उत्तर: नयी

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
हिन्दी काव्य में 'अज्ञेय' ने क्या किया?

उत्तर:
हिन्दी काव्य में 'अज्ञेय' ने छायावादोत्तर युग में एक नई क्रांति का सूत्रपात किया। वे प्रयोगवाद और नई कविता आंदोलन के प्रमुख स्तंभ थे। उन्होंने 1943 में 'तार सप्तक' नामक काव्य संग्रह का संपादन किया, जिसमें सात नए प्रयोगशील कवियों की रचनाएँ शामिल थीं। इसके माध्यम से उन्होंने हिंदी कविता में नए विषयों, नई भाषा-शैली, नए प्रतीकों और यथार्थ के कठोर चित्रण का मार्ग प्रशस्त किया, जिससे हिंदी काव्य में एक नई दिशा और ऊर्जा का संचार हुआ।

हिरोशिमा (कविता)

1. कवि ने हिरोशिमा की घटना को किस रूप में देखा है?

कवि ने हिरोशिमा की घटना को मानव सभ्यता के इतिहास में एक कलंक और भयावह त्रासदी के रूप में देखा है। यह घटना मानवीय विनाश की सीमा और विज्ञान के दुरुपयोग का प्रतीक बन गई है। कवि इसे एक ऐसी चेतावनी के रूप में प्रस्तुत करता है जो भविष्य में ऐसी विनाशलीला को दोबारा न होने देने की प्रेरणा देती है।

2. 'हिरोशिमा' कविता का मूल भाव स्पष्ट कीजिए।

कविता का मूल भाव मानवजाति के समक्ष परमाणु युद्ध की विभीषिका को उजागर करना और शांति का संदेश देना है। कवि हिरोशिमा पर गिराए गए परमाणु बम के विनाशकारी परिणामों का मार्मिक वर्णन करते हुए यह संदेश देता है कि मनुष्य को अपनी विनाशकारी शक्तियों पर नियंत्रण रखना चाहिए। यह कविता युद्ध के विरुद्ध, मानवीय संवेदनाओं के पक्ष में और विज्ञान के दुरुपयोग पर एक करारा प्रहार है।

3. 'हिरोशिमा की विभीषिका' से क्या तात्पर्य है?

'हिरोशिमा की विभीषिका' से तात्पर्य 6 अगस्त, 1945 को जापान के हिरोशिमा शहर पर अमेरिका द्वारा गिराए गए परमाणु बम 'लिटिल बॉय' के कारण हुए भीषण विनाश से है। इस विस्फोट ने पल भर में समूचे शहर को तबाह कर दिया, जिसमें लाखों निर्दोष लोग मारे गए और जो बचे वे विकिरण के कारण जीवन भर के लिए त्रासदी झेलने को मजबूर हुए। यह घटना मानव इतिहास की सबसे भयानक त्रासदियों में से एक है।

4. कवि ने 'हिरोशिमा' कविता के माध्यम से क्या संदेश दिया है?

कवि ने इस कविता के माध्यम से मुख्य रूप से शांति, मानवता और संवेदनशीलता का संदेश दिया है। वह मनुष्य को चेतावनी देता है कि विज्ञान और तकनीक का उपयोग विनाश के लिए नहीं, बल्कि मानव कल्याण के लिए होना चाहिए। हिरोशिमा की त्रासदी को याद रखकर हमें भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रयास करने चाहिए और एक शांतिपूर्ण विश्व का निर्माण करना चाहिए।

5. 'हिरोशिमा' कविता की भाषागत विशेषताएँ लिखिए।

इस कविता की भाषागत विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
1. सरल एवं व्यावहारिक खड़ी बोली: कविता की भाषा सरल, सहज और आम बोलचाल की खड़ी बोली है जो पाठक के हृदय तक सीधे पहुँचती है।
2. प्रतीकात्मकता एवं बिंब योजना: कवि ने 'अंगारों की बौछार', 'आग का गोला' जैसे प्रभावशाली बिंबों का प्रयोग कर विनाश के दृश्य को सजीव बना दिया है।
3. करुण रस की अभिव्यक्ति: पूरी कविता में हिरोशिमा के पीड़ितों के प्रति गहरी करुणा और संवेदना व्यक्त हुई है।
4. संवादात्मक शैली: कविता में कवि ने पाठकों से सीधे संवाद स्थापित करने का प्रयास किया है, जिससे संदेश और प्रभावशाली हो गया है।

बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर

1. 'हिरोशिमा' कविता के रचयिता हैं-

(क) सुमित्रानंदन पंत
(ख) सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला'
(ग) सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय'
(घ) महादेवी वर्मा

2. हिरोशिमा पर परमाणु बम कब गिराया गया?

(क) 9 अगस्त, 1945
(ख) 6 अगस्त, 1945
(ग) 15 अगस्त, 1945
(घ) 26 जनवरी, 1950

3. हिरोशिमा पर गिराए गए परमाणु बम का नाम क्या था?

(क) लिटिल बॉय
(ख) फैट मैन
(ग) बिग बेन
(घ) नागासाकी बम

4. 'हिरोशिमा' कविता का केंद्रीय भाव है-

(क) प्रकृति प्रेम
(ख) राष्ट्र प्रेम
(ग) युद्ध विरोध एवं शांति का संदेश
(घ) प्रेम और सौंदर्य

5. कवि के अनुसार हिरोशिमा की घटना क्या है?

(क) एक सामान्य घटना
(ख) वीरता की गाथा
(ग) मानव सभ्यता पर कलंक
(घ) विज्ञान की उपलब्धि

हिरोशिमा - अज्ञेय

1. कवि ने हिरोशिमा की क्या पहचान बताई है?

कवि ने हिरोशिमा की पहचान एक साक्षी और चेतावनी के रूप में बताई है। यह शहर मानव द्वारा रची गई विनाशलीला का एक जीवंत सबूत है। यह दुनिया को यह चेतावनी देता रहता है कि युद्ध और आणविक हथियारों की होड़ कितनी भयानक तबाही ला सकती है। हिरोशिमा का अस्तित्व ही मनुष्य को उसकी विनाशकारी शक्ति के दुरुपयोग के परिणामों की याद दिलाता है।

2. 'वह सब क्या हुआ?' कवि इस प्रश्न के द्वारा क्या जानना चाहता है?

इस प्रश्न के माध्यम से कवि उस भीषण घटना के मूल स्वरूप और उसकी भयावहता को जानना चाहता है। वह केवल इतिहास में दर्ज तथ्य नहीं, बल्कि उस दिन हुई मानवीय त्रासदी के बारे में पूछ रहा है। कवि यह समझना चाहता है कि आखिर कैसे एक पल में एक समृद्ध शहर तबाह हो गया, लोगों का जीवन कैसे राख में तब्दील हो गया, और उस पीड़ा का असर आज तक क्यों बना हुआ है। यह प्रश्न घटना की गहराई में जाकर उसके मानवीय पहलू को समझने की कोशिश है।

3. 'यह मानव है कि मानव को जलाता है' से कवि का क्या आशय है?

इस पंक्ति का आशय मानव की स्वयं के प्रति की गई क्रूरता और विनाशकारी प्रवृत्ति से है। कवि कहता है कि मनुष्य ने इतनी प्रगति कर ली है कि उसने सूर्य जैसी ऊर्जा (परमाणु बम) बना ली, लेकिन इस शक्ति का उपयोग वह अपने ही साथी मनुष्यों को नष्ट करने के लिए कर रहा है। यह एक कड़वा सच है कि मानवता का सबसे बड़ा शत्रु स्वयं मानव ही है, जो अपनी ही बनाई तकनीक से अपने आप को जलाने पर तुला हुआ है। यह पंक्ति मानवीय अंतर्विरोध और आत्मघाती प्रवृत्ति पर करारा व्यंग्य है।

4. 'साँस लेता हुआ संगमरमर' क्या है? इसका क्या अर्थ है?

'साँस लेता हुआ संगमरमर' हिरोशिमा में बचे हुए जीवित मानव शरीर हैं, जो उस विस्फोट से बच तो गए, लेकिन उसकी पीड़ा को झेल रहे हैं। संगमरमर ठंडा, निर्जीव और कठोर पत्थर होता है। कवि ने उन लोगों की तुलना संगमरमर से इसलिए की है क्योंकि वे शारीरिक और मानसिक रूप से जल चुके हैं, उनकी त्वचा विकृत हो गई है और वे भावनात्मक रूप से सुन्न हो गए हैं। फिर भी वे 'साँस ले रहे हैं', यानी जीवित हैं। यह अभिव्यक्ति उस अकथनीय पीड़ा और जीवित रहने के संघर्ष को दर्शाती है जो उस हमले के बाद के लोगों का हिस्सा बन गया।

5. 'वह सूरज' किसे कहा गया है और क्यों?

'वह सूरज' हिरोशिमा पर गिराए गए परमाणु बम को कहा गया है। कवि ने इसकी तुलना सूरज से दो कारणों से की है:
1. प्रकाश और ऊर्जा: जिस तरह सूरज प्रकाश और ऊर्जा का विशाल स्रोत है, उसी तरह परमाणु बम भी ऊर्जा का एक भयानक रूप है, जिसकी चमक और गर्मी असहनीय थी।
2. विरोधाभास: सूरज जीवनदायी है, वह धरती पर जीवन का आधार है। लेकिन यह 'मानव निर्मित सूरज' जीवन लेने वाला, विनाशकारी और मृत्यु का प्रतीक बन गया। यह विरोधाभास मानवीय प्रगति के काले पहलू को उजागर करता है।

6. 'हिरोशिमा' कविता का मूल भाव स्पष्ट कीजिए।

'हिरोशिमा' कविता का मूल भाव है - आधुनिक मानव द्वारा रची गई तकनीकी प्रगति और युद्ध की विनाशलीला के प्रति गहरा शोक, क्षोभ और चेतावनी। कवि हिरोशिमा की त्रासदी के माध्यम से पूरी मानव जाति को यह संदेश देना चाहता है कि युद्ध और हिंसा का रास्ता केवल तबाही लाता है। कविता इस बात पर जोर देती है कि मनुष्य ने जिस आणविक शक्ति का आविष्कार किया है, वह उसके लिए अभिशाप बन सकती है अगर उसका दुरुपयोग हुआ। यह कविता अतीत की एक दुखद घटना का स्मरण कराते हुए भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने की प्रबल अपील है।

7. 'हिरोशिमा' कविता की भाषागत विशेषताएँ लिखिए।

'हिरोशिमा' कविता की भाषागत विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
1. प्रतीकात्मक भाषा: कवि ने 'सूरज', 'संगमरमर', 'साखी' जैसे प्रतीकों का प्रयोग कर गहन अर्थ व्यक्त किए हैं।
2. चित्रात्मक शैली: 'साँस लेता हुआ संगमरमर' जैसे बिंबों से कवि ने पाठक के मन में एक सजीव और भयानक चित्र उकेरा है।
3. व्यंग्यात्मक प्रयोग: 'यह मानव है कि मानव को जलाता है' जैसी पंक्तियों में मानव की आत्मघाती प्रवृत्ति पर तीखा व्यंग्य है।
4. सरल एवं सशक्त खड़ी बोली: कविता की भाषा सीधी-सादी खड़ी बोली है, जो अपनी शक्ति और गंभीरता के कारण पाठक के हृदय को झकझोर देती है।
5. प्रश्नात्मक शैली: 'वह सब क्या हुआ?' जैसे प्रश्नों के माध्यम से कवि पाठक को घटना पर विचार करने के लिए प्रेरित करता है।

बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)

1. 'हिरोशिमा' कविता के रचयिता कौन हैं?

(A) सुमित्रानंदन पंत
(B) महादेवी वर्मा
(C) अज्ञेय
(D) नागार्जुन

2. कवि ने हिरोशिमा को किसका साक्षी बताया है?

(A) प्रेम का
(B) वीरता का
(C) मानवीय विभीषिका का
(D) प्रकृति का

3. 'साँस लेता हुआ संगमरमर' से कवि का क्या तात्पर्य है?

(A) हिरोशिमा की इमारतें
(B) विस्फोट से जले-भुने, पीड़ित लोग
(C) शहर में लगी मूर्तियाँ
(D) टूटे हुए पत्थर

4. 'वह सूरज' किसे कहा गया है?

(A) सचमुच के सूरज को
(B) परमाणु बम को
(C) आग के गोले को
(D) चमकती हुई मशाल को

5. कविता का केंद्रीय भाव क्या है?

(A) प्रकृति का सौंदर्य
(B) देशभक्ति
(C) युद्ध की विभीषिका एवं मानवता के प्रति चेतावनी
(D) प्रेम

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