Bihar Board Class 10th Sanskrit (संस्कृत पीयूषम् द्रतयपाठय भाग 2) Chapter 6 मधुराष्टकम्) Solutions

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Bihar Board 10th Sanskrit Objective Answers

Chapter 6: मधुराष्टकम्

प्रश्न 1.
मथुराधिपति कौन हैं?
(A) श्रीराम
(8) ब्राह्मण
(८) श्रीकृष्ण
(0) इन्द्र

उत्तर: (८) श्रीकृष्ण
व्याख्या: मथुरा नगरी के अधिपति या स्वामी भगवान श्रीकृष्ण हैं। उन्हें ही मथुराधिपति कहा जाता है।

प्रश्न 2.
किनका सब कुछ मधुर है?
(A) श्रीराम
(8) ब्राह्मण
(८) इन्द्र
(0) श्रीकृष्ण

उत्तर: (0) श्रीकृष्ण
व्याख्या: 'मधुराष्टकम्' स्तोत्र के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण का हर अंग, हर क्रिया और हर वस्तु अत्यंत मनोहर एवं मधुर है।

प्रश्न 3.
मधुराष्टकम्‌ पाठ में किसके बारे में बतलाया गया है?
(A) spor
(8) ब्राह्मण
(८) श्रीराम
(0) इन्द्र

उत्तर: (A) श्रीकृष्ण
व्याख्या: इस पाठ में भगवान श्रीकृष्ण की मधुरता, उनके स्वरूप और लीलाओं का वर्णन किया गया है। 'spor' शब्द यहाँ 'श्रीकृष्ण' के लिए प्रयुक्त हुआ है।

प्रश्न 4.
किसके नजदीक जाने से भवसागर से मुक्ति मिल सकती है?
(A) श्रीराम
(8) श्रीकृष्ण
(८) ब्राह्मण
(0) इन्द्र

उत्तर: (8) श्रीकृष्ण
व्याख्या: भक्तों की मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण के चरणों की शरण में जाने से ही संसार रूपी भवसागर से मुक्ति प्राप्त हो सकती है।

प्रश्न 5.
कवि किसका दर्शनाभिलाषी है?
(A) श्रीराम
(8) ब्राह्मण
(८) श्रीकृष्ण
(0) इन्द्र

उत्तर: (८) श्रीकृष्ण
व्याख्या: 'मधुराष्टकम्' के रचयिता कवि श्री वल्लभाचार्य भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन करने की अभिलाषा रखते हैं।

प्रश्न 6.
भगवान कृष्ण का क्या-क्या मधुर है?
(A) SR
(8) मुली
(८) गोपी
(0) सबकुछ

उत्तर: (0) सबकुछ
व्याख्या: इस स्तोत्र में बताया गया है कि श्रीकृष्ण का अधर, वदन, नयन, हँसी, हृदय, चाल, वचन, वस्त्र आदि सब कुछ मधुर है।

संस्कृत में वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
कस्य अधरं, वदनं, नयन हसितं, हृदयं, बृत्यं, वचनं, वसनं आदि मधुरम्‌ अस्ति?
(A) au:
(8) गोपी:
(c) Fora
(0) वैकुंठे

उत्तर: (८) कृष्णस्य
व्याख्या: 'कृष्णस्य' (श्रीकृष्ण का) ओष्ठ, मुख, नेत्र, हँसी, हृदय, चाल, वाणी और वस्त्र आदि सभी मधुर हैं।

प्रश्न 2.
मधुर + अधियतेः + अखिलम्‌ -
(A) मधुराधीपतेरखिलम्‌
(8) मधुराधिपेतखिलम्‌
(८) मधूराधिपतेरखिलम्‌
(0) मधुराधिपतेरखिलम्‌

उत्तर: (0) मधुराधिपतेरखिलम्‌
व्याख्या: 'मधुर', 'अधिपतेः' (स्वामी का) और 'अखिलम्' (सम्पूर्ण) शब्दों के सन्धि-योग से बना सही रूप 'मधुराधिपतेरखिलम्' है, जिसका अर्थ है - 'मधुर स्वामी (श्रीकृष्ण) का सब कुछ मधुर है'।

प्रश्न 3.
'मधुराधिपते:' शब्द का अर्थ है
(») सम्पूर्ण
(8) अधोगति
(८) श्रीकृष्ण का
(0) चरणघूलि

उत्तर: (८) श्रीकृष्ण का
व्याख्या: 'मधुराधिपते:' शब्द 'मधुर' और 'अधिपते:' (स्वामी) से मिलकर बना है। इसका अर्थ 'मधुर स्वामी' अर्थात 'श्रीकृष्ण का' होता है।

प्रश्न 4.
स्वयं मघुरं ............. -मधघुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम्‌।
(४) माला
(8) लीला
(0) शिष्टे
(0) तिलक

उत्तर: (0) तिलक
व्याख्या: पद्य पंक्ति है - "स्वयं मधुरं तिलकं मधुरं, मधुराधिपतेरखिलं मधुरम्।" अर्थात, (श्रीकृष्ण) स्वयं मधुर हैं, उनका तिलक (भाल की सजावट) मधुर है, उस मधुर स्वामी का सब कुछ मधुर है।

प्रश्न 5.
यष्टि: + मधुरा ८
(») यष्टिमधुरा
(8) यष्टिमधुरा
(C) afeayRt
(0) यष्टिमधुरी

उत्तर: (8) यष्टिमधुरा
व्याख्या: 'यष्टि:' (बाँसुरी) और 'मधुरा' शब्दों की सन्धि करने पर 'यष्टिमधुरा' बनता है। विसर्ग (:) के बाद स्वर आने पर विसर्ग का 'र्' हो जाता है, इसलिए 'यष्टि:' + 'मधुरा' = 'यष्टिर्मधुरा' होगा, जिसे संक्षेप में 'यष्टिमधुरा' लिखा जाता है। इसका अर्थ है 'मधुर बाँसुरी'।

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