Bihar Board Class 10th Sanskrit (संस्कृत पीयूषम् द्रतयपाठय भाग 2) Chapter 1 भवान्यष्टकम्ज) Solutions

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Board NameBihar Board of Secondary Education
ClassClass 10th
Content TypeSolution
Solution forClass 10th students
SubjectSanskrit (संस्कृत पीयूषम् द्रतयपाठय भाग 2)
Chapter NameChapter 1 भवान्यष्टकम्ज)
Total Number of Chapter in this Subject11

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Bihar Board Class 10th Sanskrit (संस्कृत पीयूषम् द्रतयपाठय भाग 2) Chapter 1 भवान्यष्टकम्ज) Solutions

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Bihar Board 10th Sanskrit (संस्कृत पीयूषम्) Solutions

Chapter 1: भवान्यष्टकम्ज

प्रश्न 1.

कवि किससे प्रार्थना करता है?
(A) गौरी
(B) लक्ष्मी
(C) सरस्वती
(D) कोई नहीं

उत्तर: (A) गौरी
व्याख्या: इस भवान्यष्टकम स्तोत्र में कवि माँ भवानी (जिनका एक नाम गौरी भी है) से ही प्रार्थना कर रहे हैं कि वे उनकी रक्षा करें और सभी कष्टों से मुक्ति दिलाएँ।

प्रश्न 2.

कवि किसको अपना मानता है?
(A) माता
(B) दुर्गा
(C) पत्नी
(D)

उत्तर: (B) दुर्गा
व्याख्या: कवि स्वयं को माँ दुर्गा का भक्त मानता है। वह माँ दुर्गा को ही अपनी सब कुछ, अपनी शरण और अपनी गति मानता है।

प्रश्न 3.

सभी की गति को कौन जानता है?
(अ) सरस्वती
(B) लक्ष्मी
(C) दुर्गा
(D) कोई नहीं

उत्तर: (C) दुर्गा
व्याख्या: माँ दुर्गा ही सर्वज्ञ हैं। वही सभी प्राणियों की गति (अर्थात उनके जीवन का लक्ष्य, उनकी दशा और दिशा) को जानती हैं और उनका मार्गदर्शन करती हैं।

प्रश्न 4.

ईश्वर का एक नाम लिखिए
(अ) दीपक
(B) महेश
(C) सोहन
(D) कोई वहीं

उत्तर: (B) महेश
व्याख्या: ईश्वर के अनेक नाम हैं। 'महेश' उनमें से एक प्रमुख नाम है, जिसका अर्थ है 'महान ईश्वर' या 'सर्वोच्च स्वामी'। यह भगवान शिव का एक नाम है।

प्रश्न 5.

भवान्ष्टकम्‌ पाठ में किसका वर्णन है ?
(A) गौरी
(B) लक्ष्मी
(C) सरस्वती
(D) कोई वहीं

उत्तर: (अ) दुर्गा
व्याख्या: 'भवान्यष्टकम' नाम से ही स्पष्ट है कि इस पाठ में माँ भवानी (दुर्गा) के गुणों, महिमा और भक्तों के प्रति उनकी कृपा का वर्णन किया गया है। यह एक स्तोत्र है जो माँ दुर्गा की स्तुति में गाया जाता है।

प्रश्न 6.

दुख से कौन ग्रसित है?
(A) ब्राह्मण
(B) शिक्षक
(C) कर्मचारी
(D) भक्त

उत्तर: (D) भक्त
व्याख्या: इस स्तोत्र में कवि स्वयं को एक ऐसा भक्त बताते हैं जो संसार के महान दुःखों से घिरा हुआ है और उन दुःखों से भयभीत है। वह माँ भवानी से इस दुःख से मुक्ति की प्रार्थना कर रहा है।

प्रश्न 7.

भक्त किसके शरण में है?
(अ) दुर्गा
(B) लक्ष्मी
(C) सरस्वती
(D) कोई नहीं

उत्तर: (A) गौरी
व्याख्या: भक्त ने स्वयं को पूर्णतः माँ गौरी (दुर्गा) के शरण में समर्पित कर दिया है। वह मानता है कि केवल माँ ही उसकी रक्षा कर सकती हैं और उसे शरण दे सकती हैं।

प्रश्न 8.

भवानी क्या है?
(A) अघटितघटनचतुरा
(B) मति
(C) भक्ति
(D) व्रती

उत्तर: (A) अघटितघटनचतुरा
व्याख्या: 'अघटितघटनचतुरा' माँ भवानी का एक विशेषण है। इसका अर्थ है - वह जो असंभव (अघटित) कार्यों को भी संभव (घटित) करने में निपुण (चतुर) हैं। माँ की शक्ति को दर्शाने वाला यह एक प्रसिद्ध पद है।

संस्कृत में वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.

सर्वेषां गति: का अस्ति?
(अ) शिवानी
(B) महारानी
(C) देवयानी
(D) भवानी

उत्तर: (D) भवानी
व्याख्या: स्तोत्र में आता है - "गतिस्त्वं गतिस्त्वं त्वमेका भवानि"। अर्थात, हे भवानी! आप ही गति हो, आप ही गति हो, आप ही एकमात्र गति हो। इसलिए सभी की गति (मुक्ति का मार्ग) माँ भवानी ही हैं।

प्रश्न 2.

महादुःखभीरू: कः अस्ति?
(A) भक्त:
(B) आसक्त:
(C) सन्तः
(D) महत्तः

उत्तर: (A) भक्त:
व्याख्या: 'महादुःखभीरू:' का अर्थ है - महान दुःखों से भयभीत। स्तोत्र के अनुसार, कवि (भक्त) स्वयं को संसार के विशाल दुःखों से डरा हुआ बताता है और माँ से सहायता माँगता है।

प्रश्न 3.

'भवान्यष्टकर्म्‌! पाठे कस्याः वर्णनम्‌ अस्ति?
(अ) दुर्गायाः
(B) शिवायाः
(C) ईश्वरस्य
(D) भवान्याः

उत्तर: (D) भवान्याः
व्याख्या: इस प्रश्न का उत्तर पाठ के नाम से ही स्पष्ट है। 'भवान्यष्टकम' पाठ में माँ भवानी (दुर्गा) के गुणों, कृपा और महिमा का ही वर्णन किया गया है।

प्रश्न 4.

गतिस्त्वं गतिस्त्वं त्वमेका ......... |
(A) गौरी
(B) भवानि
(C) विद्या
(D) दाता

उत्तर: (B) भवानि
व्याख्या: यह पंक्ति स्तोत्र की मूल पंक्ति है। इसका पूरा रूप है - "गतिस्त्वं गतिस्त्वं त्वमेका भवानि"। अर्थात, हे भवानी! आप ही (मेरी) गति हो, आप ही गति हो, आप ही एकमात्र (गति) हो।

प्रश्न 5.

ईश्वरस्य एक: नाम ................ .
(A) देव:
(B) प्रबुद्ध:
(C) अन्यत्‌
(D) महेशः

उत्तर: (D) महेशः
व्याख्या: ईश्वर के अनेक नामों में 'महेशः' एक प्रसिद्ध नाम है। 'महेश' शब्द 'महा' (महान) और 'ईश' (स्वामी) से मिलकर बना है, जिसका अर्थ है 'महान ईश्वर' या 'सर्वोच्च प्रभु'।

प्रश्न 6.

भक्त: कस्याः शरण्ये अस्ति?
(A) गौर्याः
(B) प्रबुद्धायाः
(C) भवान्याः
(D) अन्यत्‌

उत्तर : (C) भवान्याः
व्याख्या: इस स्तोत्र का भक्त पूरी तरह से माँ भवानी की शरण में है। वह मानता है कि माँ भवानी ही सच्ची शरण देने वाली (शरण्या) हैं और केवल उनकी शरण में ही दुःखों से मुक्ति मिल सकती है।

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