Bihar Board Class 10th Sanskrit (संस्कृत पीयूषम् द्रतयपाठय भाग 2) Chapter 5 संसारमोहः) Solutions
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| Board Name | Bihar Board of Secondary Education |
| Class | Class 10th |
| Content Type | Solution |
| Solution for | Class 10th students |
| Subject | Sanskrit (संस्कृत पीयूषम् द्रतयपाठय भाग 2) |
| Chapter Name | Chapter 5 संसारमोहः) |
| Total Number of Chapter in this Subject | 11 |
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Bihar Board Class 10th Sanskrit (संस्कृत पीयूषम् द्रतयपाठय भाग 2) Chapter 5 संसारमोहः) Solutions
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बिहार बोर्ड कक्षा 10 संस्कृत (पीयूषम्)
अध्याय 5: संसारमोहः
प्रश्न 1.
भगवान नरसिंह का प्रिय भक्त कौन था?
(A) प्रहलाद
(B) राम
(C) श्याम
(D) मोहन
उत्तर: (A) प्रहलाद
व्याख्या: भगवान नरसिंह, जो विष्णु के अवतार हैं, के सबसे प्रसिद्ध और प्रिय भक्त प्रहलाद थे। उन्होंने अपने पिता हिरण्यकशिपु के अत्याचारों के बावजूद भगवान की भक्ति नहीं छोड़ी।
प्रश्न 2.
सभी प्राणियों को प्रहलाद कहाँ ले जाना चाहता था?
(A) रहे
(B) बैकुण्ठ
(C) वृन्दावन
(D) काशी
उत्तर: (B) बैकुण्ठ
व्याख्या: प्रहलाद एक दयालु भक्त थे। जब भगवान विष्णु ने उन्हें वरदान माँगने को कहा, तो उन्होंने केवल अपने लिए नहीं, बल्कि सभी प्राणियों के लिए मोक्ष और बैकुण्ठ (विष्णु का धाम) में स्थान माँगा।
प्रश्न 3.
कहाँ भूख नहीं लगता है?
(A) काशी
(B) नरक
(C) वृन्दावन
(D) बैकुण्ठ
उत्तर: (D) बैकुण्ठ
व्याख्या: बैकुण्ठ को दिव्य लोक माना जाता है, जहाँ सांसारिक कष्टों का अभाव है। वहाँ भूख-प्यास, शोक, बुढ़ापा या मृत्यु जैसी कोई समस्या नहीं होती है।
प्रश्न 4.
जजमान को जग कराना है। किसने कहा?
(A) शिष्य
(B) संन्यासी
(C) ब्राह्मण
(D) बनिया
उत्तर: (C) ब्राह्मण
व्याख्या: पाठ में एक ब्राह्मण अपने शिष्य से कहता है कि उन्हें अपने यजमान (यज्ञ कराने वाला व्यक्ति) को जगाना है, क्योंकि सुबह का समय हो गया है और धार्मिक कार्यों में देरी नहीं करनी चाहिए।
प्रश्न 5.
हमलोगों को शिष्यों को उपदेश देना है। किसने कहा?
(A) शिष्य
(B) संन्यासी
(C) ब्राह्मण
(D) बनिया
उत्तर: (B) संन्यासी
व्याख्या: यह वाक्य एक संन्यासी (साधु) ने कहा है। वह अपने साथी से कहता है कि उनका कर्तव्य है कि वे शिष्यों और लोगों को संसार के मोह से मुक्त होने का उपदेश दें।
प्रश्न 6.
संसार मोह क्या है?
(A) संसार में जन्म लेना
(B) संसार में घूमना
(C) संसार में रहना
(D) संसार से मुक्त न होना
उत्तर: (D) संसार से मुक्त न होना
व्याख्या: संसार मोह का अर्थ है संसार की अस्थायी वस्तुओं, सुखों और संबंधों में इतना अधिक लगाव हो जाना कि व्यक्ति उनसे मुक्त होना ही नहीं चाहता। यही मोह मुक्ति के मार्ग में सबसे बड़ी बाधा है।
प्रश्न 7.
प्रह्लाद ने विष्णु से क्या वरदान माँगा?
(A) मुक्ति
(B) भक्ति
(C) शक्ति
(D) सभी प्राणियों का वैकुंठवास
उत्तर: (D) सभी प्राणियों का वैकुंठवास
व्याख्या: प्रह्लाद ने स्वार्थहीन भक्ति का परिचय देते हुए भगवान विष्णु से वरदान माँगा कि सभी प्राणी (चाहे वह किसी भी योनि में हों) संसार के दुखों से मुक्त होकर वैकुंठ में निवास करें।
संस्कृत में वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1. संसारस्य मोह: कीदृश: भवति?
(A) सुखदः
(B) दुःखदः
(C) भयंकरः
(D) प्रीतिदायकः
उत्तर: (C) भयंकरः
व्याख्या: संसार का मोह भयंकर (डरावना) होता है, क्योंकि यह व्यक्ति को सच्चे लक्ष्य (मोक्ष) से भटका देता है और जन्म-मरण के चक्र में बाँधे रखता है।
प्रश्न 2. नृसिंहस्य प्रियः भक्त: कः आसीत्?
(A) प्रह्लादः
(B) नरहरिः
(C) अन्धकः
(D) हिरण्यकशिपु:
उत्तर: (A) प्रह्लादः
व्याख्या: भगवान नृसिंह (नरसिंह) के सबसे प्रिय भक्त प्रह्लाद ही थे। उनकी अटूट भक्ति के कारण ही भगवान ने स्तंभ से प्रकट होकर उनकी रक्षा की थी।
प्रश्न 3. वैकुंठे अनन्तः अस्ति
(A) भोजनस्य
(B) आनंदः
(C) अमृतम्
(D) बुभुक्षाः
उत्तर: (B) आनंदः
व्याख्या: वैकुंठ में अनन्त (अनंत, कभी न खत्म होने वाला) आनंद है। वहाँ दिव्य आनंद और शांति का साम्राज्य है, जो कभी समाप्त नहीं होता।
प्रश्न 4. भोजनस्य समस्या कुत्र नास्ति?
(A) पक्षिणः
(B) वराह
(C) वैकुंठे
(D) परिव्राजकाः
उत्तर: (C) वैकुंठे
व्याख्या: भोजन की समस्या वैकुंठ में नहीं है। वह दिव्य लोक है जहाँ सांसारिक आवश्यकताएँ जैसे भूख-प्यास नहीं होतीं, केवल आध्यात्मिक तृप्ति होती है।
प्रश्न 5. कः अचायत् सर्वप्राणिनां कृते वैकुंठे व्यवस्था भवेत् ?
(A) नृसिंहस्य
(B) प्रह्लादः
(C) वैकुंठे
(D) पशु-पक्षिणः
उत्तर: (B) प्रह्लादः
व्याख्या: प्रह्लाद ने ही भगवान से प्रार्थना की थी कि सभी प्राणियों के लिए वैकुंठ में व्यवस्था (स्थान) हो। यह उनकी सर्वव्यापी करुणा और नि:स्वार्थ भक्ति को दर्शाता है।
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