Bihar Board Class 10th Hindi (Varnika Bhag 2) Chapter 5 धरती कब तक घूमेगी (राजस्थानी)) Solutions

Here we have provided Solution for Chapter 5 धरती कब तक घूमेगी (राजस्थानी)) of Hindi (Varnika Bhag 2) subject for Class 10th students of Bihar Board of Secondary Education. There are various chapters in this Hindi (Varnika Bhag 2) such as Chapter 1 दही वाली मंगम्मा (कन्नड़)), Chapter 2 ढहते विश्वास (उड़िया)), Chapter 3 माँ (गुजराती)), Chapter 4 नगर (तमिल)) and Chapter 5 धरती कब तक घूमेगी (राजस्थानी)). Summary of the same is given below:

Board NameBihar Board of Secondary Education
ClassClass 10th
Content TypeSolution
Solution forClass 10th students
SubjectHindi (Varnika Bhag 2)
Chapter NameChapter 5 धरती कब तक घूमेगी (राजस्थानी))
Total Number of Chapter in this Subject5

Studying Bihar Board Class 10th Hindi (Varnika Bhag 2) Chapter 5 धरती कब तक घूमेगी (राजस्थानी)) solution will help you higher marks in this subject but you need to follow best practices to achieve higher marks, which are given after solutions, go through them once.

Bihar Board Class 10th Hindi (Varnika Bhag 2) Chapter 5 धरती कब तक घूमेगी (राजस्थानी)) Solutions

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Bihar Board Class 10 Hindi (Varnika Bhag 2)
Chapter 5 - धरती कब तक घूमेगी

प्रश्न 1.
सीता अपने ही घर में क्यों घुटन महसूस करती है ?

उत्तर-
सीता को अपने ही घर में घुटन महसूस होती है क्योंकि पति की मृत्यु के बाद परिवार का प्यार और एकता टूट गई। उसके तीनों बेटे अब केवल अपने-अपने छोटे परिवार (पत्नी और बच्चों) में ही व्यस्त रहते हैं। माँ की देखभाल के लिए उन्होंने एक महीने की पाली (बारी) बना दी है, जिससे सीता को हर महीने एक अलग बेटे के घर रहना पड़ता है। किसी भी बेटे के साथ रहते हुए उसे बहुओं की कड़वी बातें सुननी पड़ती हैं और उपेक्षा का अहसास होता है। अपने मन का दुःख वह किसी से कह नहीं पाती, इसीलिए अपने ही घर में उसे बंधन और घुटन महसूस होती है।

प्रश्न 2.
पाली बदलने पर अपने घर दादी माँ के खाने को लेकर बच्चे खुश होते हैं जबकि उनके माता-पिता नाखुशा बच्चे की खुशी और माता- पिता की नाखुशी के कारणों पर विचार करें।

उत्तर-
बच्चों की खुशी के कारण: बच्चे दादी सीता से बहुत प्यार करते हैं क्योंकि दादी उन्हें समान स्नेह देती हैं, डाँटती-फटकारती नहीं, और अक्सर अपनी थाली से उन्हें खाना खिलाती हैं। दादी का आना उनके लिए प्यार और मस्ती का समय होता है।

माता-पिता की नाखुशी के कारण: माता-पिता (सीता के बेटे और बहुएँ) इसलिए नाखुश होते हैं क्योंकि दादी के आने से घर का खर्च बढ़ जाता है। साथ ही, उन्हें लगता है कि दादी के लाड़-प्यार के कारण बच्चे उनकी (माता-पिता की) बात नहीं मानते और अनुशासनहीन हो जाते हैं। वे दादी को एक अतिरिक्त जिम्मेदारी और बोझ के रूप में देखते हैं।

प्रश्न 3.
“इस समय उसकी आँखों के आगे न तो अंधेरा था और न ही उसे घरती और आकाश के बीच घुटन हुई।' सप्रसंग व्याख्या करें।

उत्तर-
प्रस्तुत पंक्तियाँ साँवर दइया द्वारा रचित कहानी 'धरती कब तक घूमेगी' से ली गई हैं। यह कथन उस समय का है जब सीता ने अपने बेटों के फैसले (मासिक पचास रुपये देने का) के बाद, रात में चुपचाप घर छोड़ दिया है।

इस पल में सीता की आँखों के सामने अंधेरा नहीं है, अर्थात् निराशा और भय नहीं है। उसे अब धरती और आकाश के बीच घुटन (साँस का अवरोध) भी महसूस नहीं हो रही। ऐसा इसलिए है क्योंकि उसने उस दमघोंटू और अपमानजनक परिस्थिति से मुक्ति पा ली है जहाँ वह अपने ही बेटों के लिए बोझ बन गई थी। अब वह स्वतंत्र है और अपने बलबूते जीवन जीने का निश्चय कर चुकी है। यहाँ लेखक समाज की उस विडंबना को दर्शाता है जहाँ माता-पिता अपनी ही संतान पर बोझ बन जाते हैं और संतान का स्वार्थपरक व्यवहार एक दिन परिवार के बंधनों को तोड़ देता है।

प्रश्न 4.
सीता का चरित्र-चित्रण करें।

उत्तर-
सीता इस कहानी की मुख्य पात्र है, जिसका चरित्र निम्नलिखित विशेषताओं से बनता है:
1. सहनशील एवं धैर्यवान माँ: पति की मृत्यु के बाद बेटों और बहुओं की उपेक्षा, कटु वचन और पाली प्रथा को भी वह चुपचाप सहन करती है। वह धरती की तरह सब कुछ सह लेती है।
2. स्नेही दादी: वह अपने पोते-पोतियों से बहुत प्यार करती है और उनके सुख के लिए हमेशा तत्पर रहती है।
3. आत्मसम्मानी महिला: जब उसके बेटे उसे महज एक खर्चे के रूप में देखने लगते हैं और पैसे देने का प्रस्ताव रखते हैं, तो उसका आत्मसम्मान जाग उठता है।
4. निर्णय क्षमता: वह पलायनवादी नहीं है, बल्कि एक साहसिक निर्णय लेती है। वह गुलामी के जीवन को ठुकराकर स्वावलंबी बनने का रास्ता चुनती है और रातों-रात घर छोड़कर चली जाती है।
5. विधवा का दर्द: उसका चरित्र समाज में विधवा स्त्री की दयनीय एवं असहाय स्थिति को भी प्रतिबिंबित करता है, जो अपने ही घर में परायापन महसूस करती है।

प्रश्न 5.
कहानी के शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट करें।

उत्तर-
कहानी का शीर्षक 'धरती कब तक घूमेगी' अत्यंत सार्थक और प्रतीकात्मक है।

प्रतीकात्मक अर्थ: यहाँ 'धरती' दो अर्थों में प्रयुक्त हुई है। पहला, वास्तविक धरती जो निरंतर सूर्य के चारों ओर घूमती रहती है। दूसरा और मुख्य अर्थ है – एक माँ, जो धरती की तरह ही सहनशील, उदार और सबका भार वहन करने वाली होती है।

सार्थकता: शीर्षक एक विडंबनापूर्ण प्रश्न पूछता है: क्या माँ (धरती) अपने बेटों (मानवता) के स्वार्थ, उपेक्षा और अत्याचार को अनंत काल तक सहती रहेगी? कब तक वह इस तरह 'घूमती' (यानी एक बेटे से दूसरे बेटे के घर भटकती) रहेगी? सीता का चरित्र इसी प्रश्न को जन्म देता है। अंत में, जब सीता घर छोड़कर चली जाती है, तो यह संकेत मिलता है कि हर सहनशीलता की एक सीमा होती है। 'धरती' (माँ) भी एक दिन थक जाती है और बदलाव की ओर बढ़ जाती है। इस प्रकार, शीर्षक कहानी के मूल भाव – वृद्धावस्था में माता-पिता की उपेक्षा और उनके आत्मसम्मान की रक्षा – को पूरी तरह व्यक्त करता है।

प्रश्न 6.
कहानी का सारांश प्रस्तुत करें।

उत्तर-
यह कहानी राजस्थानी लेखक साँवर दइया द्वारा रचित है, जो सामाजिक मूल्यों में आ रही गिरावट और वृद्ध माता-पिता के प्रति संवेदनहीनता को दर्शाती है।

कहानी की नायिका सीता एक विधवा हैं, जिनके तीन बेटे हैं। पति की मृत्यु के बाद बेटे आपसी मतभेद के कारण अलग हो गए और माँ की जिम्मेदारी से बचने के लिए उन्होंने एक महीने की 'पाली' (बारी) बना दी। अब सीता को हर महीने एक बेटे के घर रहना पड़ता है। इस दौरान बहुओं की कड़वी बातें और बेटों की उदासीनता उसे अंदर ही अंदर घुटन देती है। केवल पोते-पोतियों का प्यार ही उसका सहारा है।

एक दिन तीनों बेटे तय करते हैं कि अब वे माँ को किसी के यहाँ न रखकर, हर महीने पचास-पचास रुपये देकर उसका खर्च चलाएँगे। यह फैसला सीता के लिए अंतिम चोट साबित होता है। उसे लगता है कि अब वह अपने बेटों के लिए महज एक 'खर्च' का मद बन गई है। अपने आत्मसम्मान को बचाने और इस दमघोंटू जीवन से मुक्ति पाने के लिए, वह एक रात चुपचाप घर छोड़कर चली जाती है। उसे अब न तो अंधेरा दिखाई देता है और न ही घुटन, क्योंकि उसने स्वतंत्रता और स्वावलंबन का रास्ता चुन लिया है।

कहानी का संदेश यह है कि माता-पिता, धरती की तरह सहनशील होते हैं, लेकिन संतान के स्वार्थपरक व्यवहार और उपेक्षा की एक सीमा होती है। आत्मसम्मान किसी भी उम्र में जरूरी है।

धरती कब तक घूमेगी (राजस्थानी)

प्रश्न 1. धरती कब तक घूमेगी' के कहानीकार हैं (क) सातकोड़ी होता. (ख) ईश्वर पेटलीकर (ग) श्री निवास (घ) साँवर दइया

उत्तर: (घ) साँवर दइया
व्याख्या: यह कहानी राजस्थानी भाषा के प्रसिद्ध कथाकार साँवर दइया द्वारा लिखी गई है। उनकी कहानियाँ राजस्थानी समाज के जीवन को बहुत ही सजीव ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

प्रश्न 2. “घरती कब तक घूमेगी” कहानी है (क) धार्मिक (ख) मनोवैज्ञानिक (ग) सामाजिक (घ) ऐतिहासिक

उत्तर: (ग) सामाजिक
व्याख्या: यह एक सामाजिक कहानी है क्योंकि इसमें समाज में बुजुर्गों के प्रति हो रहे दुर्व्यवहार, परिवारिक बिखराव और पारंपरिक मूल्यों के क्षरण जैसे सामाजिक मुद्दों को उठाया गया है।

प्रश्न 3. “घरती कब तक घूमेगी” की नायिका है (क) मंगम्मा (ख) पाप्पाति (ग) सीता (घ) वल्लिं अम्माल

उत्तर: (ग) सीता
व्याख्या: इस कहानी की मुख्य पात्र या नायिका सीता है, जो एक बूढ़ी माँ है और अपने तीन बेटों के स्वार्थी व्यवहार से पीड़ित है। पूरी कहानी उसकी मनोदशा और संघर्ष के इर्द-गिर्द घूमती है।

प्रश्न 4. साँवर दइया की कहानी “धरती कब तक घूमेगी” का विषय है (क) उड़िया समाज (ख) राजस्थानी समाज (ग) तमिल समाज (घ) गुजराती समाज

उत्तर: (ख) राजस्थानी समाज
व्याख्या: साँवर दइया राजस्थानी भाषा के लेखक हैं और उनकी यह कहानी राजस्थानी समाज के जीवन, रीति-रिवाजों और सामाजिक समस्याओं को प्रतिबिंबित करती है, हालाँकि इसका संदेश सार्वभौमिक है।

प्रश्न 5. सवाल तो ........... का ही है। (क) रोटी (ख) मकान (ग) कपड़ा (घ) दूकान

उत्तर: (क) रोटी
व्याख्या: कहानी में जब सीता के बेटे उसकी देखभाल की जिम्मेदारी से बचने की कोशिश करते हैं, तो मूल समस्या रोटी यानी जीवन-निर्वाह की बुनियादी आवश्यकता ही सामने आती है। यह वाक्य उसकी मूलभूत चिंता को दर्शाता है।


॥. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

प्रश्न 1. सांवर दइया ..........के कथाकार हैं।

उत्तर: 'धरती कब तक घूमेगी'

प्रश्न 2. 'धरती कब तक घूमेगी, एक ......... . .कहानी है।

उत्तर: सामाजिक

प्रश्न 3. ..-------- ती सब-कुछ बता देती हैं।

उत्तर: आँखें
व्याख्या: कहानी में सीता की आँखें उसके मन के दर्द, निराशा और एकाकीपन को बिना कुछ कहे ही व्यक्त कर देती हैं।

प्रश्न 4. अब ................तो सीता के हाथ में नहीं था।

उत्तर: मरना
व्याख्या: सीता इतनी दुखी और लाचार हो चुकी थी कि उसके लिए मरना भी एक विकल्प नहीं रह गया था। वह अपने बेटों के व्यवहार से पीड़ित होकर भी जीवित रहने को मजबूर थी।

प्रश्न 5. मौन के तीक्ष्ण कीलों का .......... .उग आया।

उत्तर: खेत
व्याख्या: यहाँ मौन यानी चुप्पी को तीखे कीलों के रूप में दर्शाया गया है। सीता के मन में जमा दुःख और अनकही बातें इन कीलों के समान हैं, जिनका एक पूरा खेत (यानी विशाल भावनात्मक बोझ) उसके भीतर उग आया है।

प्रश्न 6. सवाल तो .............. का ही है।

उत्तर: रोटी

प्रश्न 7. आज सीता के चारों ओर खुली ........... थी।

उत्तर: हवा
व्याख्या: जब सीता को अपने बेटों का स्वार्थी रवैया पूरी तरह समझ में आ गया, तो उसके मन से सारे भ्रम और अपेक्षाएँ खत्म हो गईं। अब उसके चारों ओर खुली हवा थी, यानी एक ऐसी खालीपन और स्वतंत्रता जो वास्तव में एक भयानक एकाकीपन था।


अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1. 'घरती कब तक घूमेगी कहानी की नायिका कौन है ?

उत्तर: 'धरती कब तक घूमेगी' कहानी की नायिका सीता है, जो एक वृद्ध माता है और उसके तीन विवाहित पुत्र हैं। पूरी कहानी उसके मानसिक संताप और परिवार द्वारा किए जा रहे उपेक्षापूर्ण व्यवहार पर केंद्रित है।

प्रश्न 2. सांवर दइया की कहानियों की विशेषता क्या-क्या है ?

उत्तर: साँवर दइया की कहानियों की मुख्य विशेषता राजस्थानी समाज का यथार्थपूर्ण और जीवंत चित्रण है। उनकी कहानियाँ सामाजिक समस्याओं, मानवीय संबंधों और स्थानीय जीवनशैली को गहन अर्थबोध के साथ प्रस्तुत करती हैं।

प्रश्न 3. धरती कब तक घूमेगी' कहानी के रचयिता कौन हैं?

उत्तर: 'धरती कब तक घूमेगी' कहानी के रचयिता राजस्थानी भाषा के प्रसिद्ध साहित्यकार साँवर दइया हैं। इस कहानी का हिंदी अनुवाद भी लेखक ने स्वयं किया है।

प्रश्न 4. धरती कब तक घूमेगी' कहानी का उद्देश्य क्या है?

उत्तर: इस कहानी का मुख्य उद्देश्य समकालीन समाज में बुजुर्गों के प्रति हो रहे दुर्व्यवहार और पारिवारिक मूल्यों के क्षरण को उजागर करना है। यह कहानी पाठकों को यह सोचने पर मजबूर करती है कि आधुनिकता और स्वार्थ के चलते हम अपने माता-पिता और संस्कारों से कितनी दूर होते जा रहे हैं।

प्रश्न 5. सीता के प्रति उसके बेटों और बहुओं का व्यवहार कैसा था?

उत्तर: सीता के प्रति उसके बेटों और बहुओं का व्यवहार पूरी तरह से स्वार्थी, उपेक्षापूर्ण और अमानवीय था। वे उसे एक बोझ समझते थे, उसकी भावनाओं की कोई कद्र नहीं करते थे और केवल पैसे के हिसाब से उसकी देखभाल की जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डालने में लगे रहते थे।

प्रश्न 6. सीता की आँखों के आगे अंधेरा कब छा गया?

उत्तर: सीता की आँखों के आगे अंधेरा तब छा गया जब उसके तीनों बेटों ने यह निर्णय सुनाया कि वे हर महीने उसे केवल पचास-पचास रुपये देंगे और उसे अपनी रोटी स्वयं बनानी होगी। यह सुनकर उसे एहसास हुआ कि उसके अपने ही बच्चे अब उसकी जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं हैं और उसकी वृद्धावस्था एक भयानक संघर्ष बनने वाली है।


धरती कब तक घूमेगी - लेखक परिचय

साँवर दइया राजस्थानी भाषा के एक प्रमुख एवं सम्मानित कहानीकार हैं। उनकी कहानियों में राजस्थानी समाज का जीवन अपनी समस्त विविधताओं, रंगों और गहरे अर्थबोध के साथ चित्रित हुआ है। प्रस्तुत कहानी 'धरती कब तक घूमेगी' मूल रूप से पत्रिका 'समकालीन भारतीय साहित्य' (अप्रैल-जून 1983) में प्रकाशित हुई थी। इस कहानी का राजस्थानी से हिंदी में अनुवाद लेखक ने स्वयं किया है, जिससे कहानी की मूल भावना और शैली सुरक्षित रह सके।

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