Bihar Board Class 10th Social Science (खण्ड-ख) Chapter 3 प्राकृतिक आपदा एवं प्रबंधन: भूकंप एवं सुनामी) Solutions

Here we have provided Solution for Chapter 3 प्राकृतिक आपदा एवं प्रबंधन: भूकंप एवं सुनामी) of Social Science (खण्ड-ख) subject for Class 10th students of Bihar Board of Secondary Education. There are various chapters in this Social Science (खण्ड-ख) such as Chapter 1 प्राकृतिक आपदा: एक परिचय), Chapter 2 प्राकृतिक आपदा एवं प्रबंधन: बाढ़ सुखाड़), Chapter 3 प्राकृतिक आपदा एवं प्रबंधन: भूकंप एवं सुनामी), Chapter 4 जीवन रक्षक आकस्मिक प्रबंधन), Chapter 5 आपदा काल में वैकल्पिक संचार व्यवस्था) and Chapter 6 आपदा और सह अस्तित्व). Summary of the same is given below:

Board NameBihar Board of Secondary Education
ClassClass 10th
Content TypeSolution
Solution forClass 10th students
SubjectSocial Science (खण्ड-ख)
Chapter NameChapter 3 प्राकृतिक आपदा एवं प्रबंधन: भूकंप एवं सुनामी)
Total Number of Chapter in this Subject6

Studying Bihar Board Class 10th Social Science (खण्ड-ख) Chapter 3 प्राकृतिक आपदा एवं प्रबंधन: भूकंप एवं सुनामी) solution will help you higher marks in this subject but you need to follow best practices to achieve higher marks, which are given after solutions, go through them once.

Bihar Board Class 10th Social Science (खण्ड-ख) Chapter 3 प्राकृतिक आपदा एवं प्रबंधन: भूकंप एवं सुनामी) Solutions

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प्राकृतिक आपदा एवं प्रबंधन: भूकंप एवं सुनामी

1. भूकंप क्या है? इसके कारणों का उल्लेख करें।

भूकंप पृथ्वी की सतह का अचानक और तीव्र कंपन या हिलना है। यह पृथ्वी के भीतर गहराई में ऊर्जा के अचानक मुक्त होने के कारण होता है, जिससे भूकंपीय तरंगें उत्पन्न होती हैं और जमीन हिलने लगती है।

भूकंप के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:

  • प्लेट विवर्तनिकी: पृथ्वी की सतह कई विशाल प्लेटों में बंटी हुई है जो लगातार धीरे-धीरे खिसकती रहती हैं। जब ये प्लेटें आपस में टकराती, रगड़ खाती या एक-दूसरे से अलग होती हैं, तो उनके किनारों पर भारी दबाव बनता है। अचानक इस दबाव के मुक्त होने से भूकंप आता है।
  • ज्वालामुखी क्रिया: ज्वालामुखी के फटने से पहले मैग्मा का तेजी से ऊपर उठना और धरती के भीतर दबाव बनना भी भूकंप का कारण बन सकता है।
  • भूस्खलन: बड़े पैमाने पर पहाड़ी चट्टानों का खिसकना या गिरना भी धरती को हिला सकता है, जिससे स्थानीय भूकंप आते हैं।
  • मानवजनित गतिविधियाँ: बड़े बांधों के निर्माण से जल का भार, भूमिगत खनन, या भूगर्भ में परमाणु परीक्षण जैसी गतिविधियाँ भी भूकंप को ट्रिगर कर सकती हैं।

2. भूकंप के प्रभावों का वर्णन करें।

भूकंप एक विनाशकारी आपदा है जिसके प्रभाव अत्यंत गंभीर और दूरगामी होते हैं। इसके प्रमुख प्रभाव निम्नलिखित हैं:

  • जान-माल की हानि: इमारतों, पुलों आदि के गिरने से बड़ी संख्या में लोगों की मृत्यु हो सकती है और घायलों की संख्या बहुत अधिक होती है।
  • संपत्ति का विनाश: घर, स्कूल, अस्पताल, कार्यालय, ऐतिहासिक इमारतें और बुनियादी ढाँचा (सड़क, रेलवे, बिजली लाइन) पूरी तरह नष्ट हो सकते हैं।
  • भूस्खलन एवं हिमस्खलन: पहाड़ी क्षेत्रों में भूकंप से भूस्खलन हो सकता है, जो गाँवों को दबा सकता है और सड़कों को अवरुद्ध कर सकता है।
  • सुनामी: समुद्र के भीतर आए भूकंप से विशाल समुद्री लहरें (सुनामी) उत्पन्न होती हैं, जो तटीय इलाकों में भारी तबाही लाती हैं।
  • मृदा द्रवीकरण: पानी से संतृप्त मिट्टी भूकंप के झटकों से ठोस से तरल में बदल जाती है, जिससे इमारतें धंस जाती हैं या झुक जाती हैं।
  • आर्थिक एवं सामाजिक व्यवधान: व्यापार ठप्प हो जाता है, बेरोजगारी बढ़ती है, लोग बेघर हो जाते हैं और स्वास्थ्य सेवाएँ चरमरा जाती हैं, जिससे महामारी फैलने का खतरा रहता है।

3. भूकंप प्रबंधन से आप क्या समझते हैं?

भूकंप प्रबंधन का अर्थ है भूकंप से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए की जाने वाली सभी योजनाबद्ध गतिविधियाँ। इसमें तीन मुख्य चरण शामिल हैं:

  1. पूर्व तैयारी (Preparedness): भूकंप आने से पहले की तैयारी। इसमें जोखिम का आकलन, मजबूत भवन निर्माण, जन जागरूकता अभियान, आपातकालीन योजना बनाना और बचाव दलों को प्रशिक्षण देना शामिल है।
  2. प्रतिक्रिया (Response): भूकंप आने के तुरंत बाद की कार्रवाई। इसमें लोगों को बचाना, घायलों को प्राथमिक उपचार देना, राहत सामग्री पहुँचाना और संचार व्यवस्था बहाल करना शामिल है।
  3. पुनर्वास (Recovery): दीर्घकालिक प्रयास जिसमें बुनियादी ढाँचे का पुनर्निर्माण, अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाना और लोगों के मानसिक आघात को दूर करने में सहायता करना शामिल है।

सार यह है कि भूकंप प्रबंधन का लक्ष्य आपदा के प्रभाव को कम करके समुदाय की सुरक्षा और लचीलापन बढ़ाना है।

4. भूकंप के दौरान बचाव के उपाय लिखें।

भूकंप के झटके महसूस होते ही तुरंत सावधानी बरतनी चाहिए। निम्नलिखित उपाय जान बचा सकते हैं:

  • घर के अंदर: तुरंत किसी मजबूत टेबल, डेस्क या बेड के नीचे छिप जाएँ और उसके पैर को मजबूती से पकड़ लें। सिर को किसी तकिए या हाथों से सुरक्षित रखें। खिड़कियों, शीशे, बाहरी दीवारों और भारी फर्नीचर से दूर रहें।
  • बाहर खुले में: इमारतों, बिजली के खंभों, पेड़ों और अन्य ऊँची संरचनाओं से दूर खुले मैदान में चले जाएँ।
  • वाहन में: वाहन को धीरे से रोकें और अंदर ही बैठे रहें। पुल, फ्लाईओवर या इमारतों के पास न रुकें।
  • लिफ्ट का उपयोग न करें: भूकंप आने पर लिफ्ट का इस्तेमाल बिल्कुल न करें, बिजली जा सकती है और आप फंस सकते हैं। सीढ़ियों का प्रयोग करें।
  • शांत रहें: घबराएँ नहीं, दौड़ें नहीं। झटके रुकने के बाद ही बाहर निकलने का प्रयास करें।

5. सुनामी क्या है? इसके कारणों का उल्लेख करें।

सुनामी जापानी शब्द है जिसका अर्थ है "बंदरगाह की लहर"। यह समुद्र में उत्पन्न होने वाली अत्यंत ऊँची, शक्तिशाली और विनाशकारी लहरों की श्रृंखला है। ये लहरें सैकड़ों किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलती हैं और तट से टकराते समय 30 मीटर या उससे भी अधिक ऊँची हो सकती हैं।

सुनामी के प्रमुख कारण हैं:

  • समुद्र तल में भूकंप: यह सबसे प्रमुख कारण है। जब समुद्र तल में प्लेटों के खिसकने से भूकंप आता है, तो पानी का एक बड़ा द्रव्यमान अचानक ऊपर उठता या नीचे धंसता है, जिससे विशाल लहरें पैदा होती हैं।
  • ज्वालामुखी विस्फोट: समुद्र के भीतर या द्वीप पर स्थित ज्वालामुखी के विस्फोट से भी पानी में भारी हलचल होती है, जो सुनामी को जन्म दे सकती है।
  • भूस्खलन: समुद्री तट या समुद्र तल पर बड़े पैमाने पर चट्टानों या बर्फ का खिसकना और समुद्र में गिरना।
  • उल्कापात: दुर्लभ मामलों में, एक बहुत बड़ा उल्कापिंड या क्षुद्रग्रह समुद्र में गिरकर सुनामी ला सकता है।

6. सुनामी के प्रभावों का वर्णन करें।

सुनामी का प्रभाव अकल्पनीय विनाश लाने वाला होता है। इसके प्रमुख प्रभाव इस प्रकार हैं:

  • तत्काल जान-माल की हानि: ऊँची और तेज लहरें तट पर मौजूद लोगों, वाहनों और इमारतों को बहा ले जाती हैं, जिससे भारी जनहानि होती है।
  • पूर्ण विनाश: तटीय गाँव और शहर पूरी तरह से तबाह हो जाते हैं। घर, होटल, स्कूल और बंदरगाह नष्ट हो जाते हैं।
  • मृदा लवणीकरण: समुद्री नमकीन पानी जमीन के अंदर घुस जाता है, जिससे कृषि योग्य भूमि बंजर हो जाती है और पीने के पानी के स्रोत दूषित हो जाते हैं।
  • आर्थिक तबाही: मछली पकड़ने के उद्योग, पर्यटन और तटीय व्यापार को भारी नुकसान होता है। बुनियादी ढाँचे के नष्ट होने से आर्थिक गतिविधियाँ ठप्प पड़ जाती हैं।
  • पर्यावरणीय क्षति: समुद्री तट, मैंग्रोव वन और प्रवाल भित्तियाँ (कोरल रीफ) क्षतिग्रस्त हो जाते हैं, जिससे समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित होता है।
  • स्वास्थ्य संकट: गंदे पानी और सड़े हुए कचरे से हैजा, टाइफाइड जैसी बीमारियाँ फैलने का खतरा बढ़ जाता है।

7. सुनामी चेतावनी प्रणाली क्या है?

सुनामी चेतावनी प्रणाली एक ऐसी उन्नत तकनीकी प्रणाली है जिसका उद्देश्य समुद्र में सुनामी उत्पन्न होने की स्थिति में तटीय क्षेत्रों के निवासियों को पहले से चेतावनी देना है, ताकि लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचने का समय मिल सके।

यह प्रणाली मुख्य रूप से दो प्रकार की होती है:

  1. अंतर्राष्ट्रीय/क्षेत्रीय प्रणाली: प्रशांत सुनामी चेतावनी केंद्र (PTWC) जैसे केंद्र समुद्र तल में लगे सीस्मोमीटर और समुद्र सतह पर तैनात बोय (Buoys) से डेटा एकत्र करते हैं। ये उपकरण भूकंप की तीव्रता और समुद्र सतह में असामान्य बदलाव को मापते हैं। डेटा विश्लेषण के बाद संभावित सुनामी की चेतावनी जारी की जाती है।
  2. स्थानीय प्रणाली: तटीय देश अपने यहाँ भी चेतावनी केंद्र स्थापित करते हैं। भारत में, हैदराबाद स्थित भारतीय राष्ट्रीय सुनामी चेतावनी केंद्र (INCOIS) इसका काम करता है।

चेतावनी मिलते ही स्थानीय प्रशासन सायरन बजाकर, रेडियो, टीवी और मोबाइल एसएमएस के जरिए लोगों को तुरंत ऊँचे स्थानों पर जाने के लिए अलर्ट जारी करता है।

8. बहुविकल्पीय प्रश्न

i. भूकंप की तीव्रता मापने वाले यंत्र को कहते हैं-
A. बैरोमीटर
B. सीस्मोग्राफ
C. थर्मामीटर
D. हाइग्रोमीटर

ii. भूकंप का केंद्र कहाँ स्थित होता है?
A. पृथ्वी के केंद्र में
B. भूकंप का वह स्थान जहाँ से ऊर्जा निकलती है
C. पृथ्वी की सतह पर
D. इनमें से कोई नहीं

iii. सुनामी शब्द किस भाषा से लिया गया है?
A. हिंदी
B. जापानी
C. अंग्रेजी
D. चीनी

iv. भूकंप के समय क्या करना चाहिए?
A. लिफ्ट का उपयोग करें
B. खिड़की के पास खड़े हो जाएँ
C. मजबूत टेबल के नीचे छिप जाएँ
D. तुरंत बाहर भागें

v. सुनामी की चेतावनी देने वाला भारत का केंद्र कहाँ स्थित है?
A. नई दिल्ली
B. चेन्नई
C. हैदराबाद
D. कोलकाता

1. भूकंप का कारण है-

(क) पृथ्वी के आंतरिक भाग में प्लेटों का अचानक खिसकना
(ख) ज्वालामुखी का फटना
(ग) भूस्खलन
(घ) उपर्युक्त सभी

उत्तर: (घ) उपर्युक्त सभी
भूकंप का प्रमुख कारण पृथ्वी की सतह के नीचे स्थित विशाल चट्टानी प्लेटों का अचानक खिसकना या टकराना है। इसके अलावा, ज्वालामुखी विस्फोट के दौरान भी भूकंप आ सकते हैं। इसी प्रकार, बड़े पैमाने पर भूस्खलन भी स्थानीय स्तर पर भूकंपीय कंपन पैदा कर सकता है। इसलिए दिए गए सभी विकल्प भूकंप के संभावित कारण हैं।

2. भूकंप की तीव्रता मापी जाती है-

(क) सीस्मोग्राफ द्वारा
(ख) रिक्टर पैमाने द्वारा
(ग) ब्यूफोर्ट पैमाने द्वारा
(घ) इनमें से कोई नहीं

उत्तर: (ख) रिक्टर पैमाने द्वारा
भूकंप की तीव्रता, यानी उसकी शक्ति को मापने के लिए रिक्टर पैमाने (Richter Scale) का उपयोग किया जाता है। यह एक लघुगणकीय पैमाना है जो 1 से 10 तक की संख्या में भूकंप की ऊर्जा को दर्शाता है। ध्यान रहे, भूकंप की तरंगों को रिकॉर्ड करने वाले यंत्र को सीस्मोग्राफ कहते हैं, जबकि उस रिकॉर्ड से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर तीव्रता रिक्टर पैमाने पर निर्धारित की जाती है।

3. भूकंप के समय क्या करना चाहिए?

उत्तर: भूकंप के समय निम्नलिखित सावधानियां बरतनी चाहिए:
1. शांत रहें और घबराएं नहीं। तुरंत किसी मजबूत टेबल, डेस्क या बेड के नीचे छिप जाएं और उसके पैर को मजबूती से पकड़ लें।
2. अगर बाहर हैं, तो खुले मैदान की ओर भागें और इमारतों, बिजली के खंभों और पेड़ों से दूर रहें।
3. अगर वाहन में हैं, तो वाहन रोककर अंदर ही बैठे रहें और पुल या ऊंची इमारतों के नीचे से न गुजरें।
4. लिफ्ट का इस्तेमाल बिल्कुल न करें, सीढ़ियों का प्रयोग करें।
5. भूकंप रुकने के बाद ही इमारत से बाहर निकलें और गैस, बिजली के मेन स्विच बंद कर दें।

4. भूकंप के प्रभावों का वर्णन करें।

उत्तर: भूकंप के प्रभाव अत्यंत विनाशकारी हो सकते हैं, जिन्हें मुख्य रूप से निम्नलिखित श्रेणियों में देखा जा सकता है:
1. मानव जीवन एवं संपत्ति पर प्रभाव: भूकंप सीधे तौर पर इमारतों, पुलों, सड़कों को गिराकर जान-माल का भारी नुकसान पहुंचाता है। लोग मलबे में दब जाते हैं या घायल हो जाते हैं।
2. आर्थिक प्रभाव: बुनियादी ढांचे के नष्ट होने, उद्योग-व्यापार बंद होने और पुनर्निर्माण पर भारी खर्च के कारण अर्थव्यवस्था को गहरा झटका लगता है।
3. सामाजिक प्रभाव: लोग बेघर हो जाते हैं, स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा जाती हैं और महामारी फैलने का खतरा बढ़ जाता है। मनोवैज्ञानिक आघात भी एक गंभीर समस्या है।
4. प्राकृतिक प्रभाव: भूकंप से भूस्खलन, मिट्टी द्रवीकरण, सुनामी और कभी-कभी भूमि के स्वरूप में स्थायी परिवर्तन भी हो सकते हैं।

5. सुनामी क्या है?

उत्तर: सुनामी समुद्र के अंदर या तट के पास आने वाले शक्तिशाली भूकंप, ज्वालामुखी विस्फोट या बड़े भूस्खलन के कारण पैदा होने वाली विशाल और अत्यंत ऊर्जावान समुद्री लहरों की श्रृंखला है। ये लहरें सैकड़ों किलोमीटर प्रति घंटे की गति से यात्रा करती हैं और जब ये उथले तटीय क्षेत्रों से टकराती हैं, तो बहुत ऊंची (कई मीटर ऊंची) हो जाती हैं और तटवर्ती इलाकों में भारी तबाही मचाती हैं।

6. सुनामी के क्या कारण हैं?

उत्तर: सुनामी के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:
1. समुद्र तल में भूकंप: यह सबसे आम कारण है। जब समुद्र तल की टेक्टोनिक प्लेटें अचानक खिसकती हैं, तो पानी की सतह ऊपर-नीचे होती है, जिससे विशाल लहरें पैदा होती हैं।
2. समुद्र के भीतर ज्वालामुखी विस्फोट: ज्वालामुखी के फटने से समुद्र तल में अचानक हलचल होती है, जो पानी को विस्थापित कर सुनामी लहरें पैदा कर सकती है।
3. समुद्र तटीय या समुद्र के भीतर भूस्खलन: बड़े पैमाने पर चट्टानें या बर्फ समुद्र में गिरने से पानी में अचानक विस्थापन होता है, जिससे सुनामी उत्पन्न हो सकती है।
4. बड़े उल्कापिंड का समुद्र में गिरना: हालांकि दुर्लभ, लेकिन एक बड़े उल्कापिंड के समुद्र में गिरने से भी विशाल ऊर्जा मुक्त होकर सुनामी आ सकती है।

7. सुनामी की चेतावनी के लिए कौन-सी एजेंसी कार्य करती है?

उत्तर: सुनामी की चेतावनी देने के लिए एक वैश्विक और क्षेत्रीय नेटवर्क कार्य करता है। प्रशांत महासागर क्षेत्र के लिए प्रशांत सुनामी चेतावनी केंद्र (PTWC) प्रमुख एजेंसी है। भारत में, भारतीय राष्ट्रीय सुनामी चेतावनी केंद्र (ITEWC) हैदराबाद स्थित है, जो भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अंतर्गत कार्य करता है। यह केंद्र हिंद महासागर क्षेत्र में आने वाले भूकंपों पर नजर रखता है और संभावित सुनामी की चेतावनी जारी करता है।

8. सुनामी से बचाव के उपाय लिखें।

उत्तर: सुनामी से बचाव के लिए निम्नलिखित उपाय महत्वपूर्ण हैं:
1. चेतावनी के संकेतों को पहचानें: यदि आप तट पर हैं और तेज भूकंप महसूस हो, तो यह सुनामी का प्राकृतिक चेतावनी संकेत है। समुद्र का पानी अचानक सामान्य से बहुत दूर तक वापस चला जाए या असामान्य रूप से बढ़ जाए, तो तुरंत सतर्क हो जाएं।
2. तुरंत कार्रवाई करें: आधिकारिक चेतावनी मिलते ही या प्राकृतिक संकेत दिखते ही तटीय क्षेत्र को तुरंत छोड़ दें।
3. ऊंचाई की ओर भागें: पैदल या वाहन से तट से दूर, जमीन के अंदर और ऊंचे स्थान (जैसे पहाड़ी या ऊंची इमारत की ऊपरी मंजिल) पर चले जाएं।
4. सुरक्षित रहें: सुनामी की लहरें एक से अधिक बार आ सकती हैं। आधिकारिक रूप से खतरा टलने की घोषणा होने तक सुरक्षित स्थान पर ही रहें।
5. जागरूकता बढ़ाएं: तटीय समुदायों में सुनामी के खतरे और बचाव के रास्तों के बारे में जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएं।

प्राकृतिक आपदा एवं प्रबंधन: भूकंप एवं सुनामी

1. भूकंप क्या है? इसके कारणों का वर्णन करें।

उत्तर: भूकंप पृथ्वी की सतह का अचानक और तीव्र कंपन है। यह पृथ्वी के भीतरी भाग में ऊर्जा के अचानक मुक्त होने के कारण उत्पन्न होता है, जिससे भूकंपीय तरंगें पैदा होती हैं और जमीन हिलने लगती है।

भूकंप के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:

  • प्लेट विवर्तनिकी: पृथ्वी की सतह कई विशाल प्लेटों में बंटी है जो लगातार धीरे-धीरे खिसकती रहती हैं। जब ये प्लेटें आपस में टकराती हैं, एक-दूसरे से रगड़ खाती हैं या अलग होती हैं, तो उस स्थान पर भारी दबाव बनता है। जब यह दबाव एक सीमा से अधिक हो जाता है, तो अचानक ऊर्जा मुक्त होती है और भूकंप आता है।
  • भ्रंशन (Faulting): पृथ्वी की भीतरी चट्टानों में दबाव के कारण दरारें पड़ जाती हैं, जिन्हें भ्रंश कहते हैं। इन भ्रंश रेखाओं के सहारे चट्टानों के खंड अचानक खिसक जाते हैं, जिससे कंपन पैदा होता है। भारत में लातूर का भूकंप इसी का उदाहरण है।
  • ज्वालामुखी क्रिया: ज्वालामुखी के फटने से पहले मैग्मा (पिघली चट्टान) धरती के नीचे ऊपर की ओर बढ़ता है, जिससे चट्टानों पर दबाव पड़ता है और कंपन हो सकता है। ज्वालामुखी विस्फोट के समय भी भूकंप आते हैं।
  • मानवजनित कारण: बड़े बांधों के निर्माण से जल का भार, भूमिगत परमाणु परीक्षण, खानों में विस्फोट और भूमिगत जल का अत्यधिक दोहन भी छोटे स्तर के भूकंपों को जन्म दे सकता है।

2. भूकंप के प्रभावों का वर्णन करें।

उत्तर: भूकंप एक विनाशकारी आपदा है जिसके प्रभाव बहुत व्यापक और गंभीर होते हैं:

  • जान-माल की हानि: भवनों, पुलों आदि के गिरने से बड़ी संख्या में लोगों की मृत्यु हो सकती है और घायल हो सकते हैं।
  • संपत्ति का विनाश: घर, स्कूल, अस्पताल, कारखाने, सड़कें, रेलवे लाइनें पूरी तरह नष्ट हो सकती हैं, जिससे आर्थिक नुकसान होता है।
  • भूस्खलन एवं हिमस्खलन: पहाड़ी क्षेत्रों में भूकंप से भूस्खलन हो सकता है, जो गांवों को दबा सकता है और नदियों को रोक सकता है।
  • मृदा द्रवीकरण: तीव्र कंपन से संतृप्त मिट्टी (जैसे नदी किनारे की मिट्टी) ठोस से तरल में बदल जाती है, जिससे इमारतें धंस जाती हैं या झुक जाती हैं।
  • सुनामी: समुद्र के नीचे आए भूकंप से विशाल समुद्री लहरें (सुनामी) उत्पन्न हो सकती हैं, जो तटीय क्षेत्रों में भारी तबाही लाती हैं।
  • अग्नि दुर्घटनाएं: भूकंप से गैस लाइनों और बिजली के तारों के टूटने से आग लग सकती है, जो विनाश को और बढ़ा देती है।
  • सामाजिक व्यवधान: लोग बेघर हो जाते हैं, स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा जाती हैं, पीने के पानी और भोजन की कमी हो जाती है, जिससे महामारी फैलने का खतरा रहता है।

3. भूकंप के समय क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?

उत्तर: भूकंप के समय सतर्क रहकर और सही कदम उठाकर जानमाल के नुकसान को कम किया जा सकता है:

भूकंप आते समय (यदि घर के अंदर हों):

  • शांत रहें और घबराएं नहीं।
  • तुरंत किसी मजबूत टेबल, डेस्क या बेड के नीचे छिप जाएं और उसके पैर को मजबूती से पकड़ लें।
  • यदि ऐसी कोई जगह न हो, तो कमरे के कोने में या भारी फर्नीचर (जैसे सोफा) के बगल में बैठ जाएं और सिर व गर्दन को हाथों से ढक लें।
  • खिड़कियों, शीशे, अलमारियों और भारी चीजों से दूर रहें।
  • लिफ्ट का इस्तेमाल बिल्कुल न करें। सीढ़ियों से भी न भागें।
  • जब तक कंपन पूरी तरह बंद न हो जाए, तब तक सुरक्षित स्थान पर ही रहें।

भूकंप आते समय (यदि बाहर हों):

  • इमारतों, बिजली के खंभों, पेड़ों और ऊंची दीवारों से दूर खुले मैदान में चले जाएं।
  • यदि वाहन चला रहे हैं, तो धीरे-धीरे वाहन रोककर सड़क के किनारे खड़ा कर दें और वाहन के अंदर ही बैठे रहें। पुल या फ्लाईओवर के नीचे न रुकें।

भूकंप के बाद:

  • सबसे पहले अपने आस-पास के लोगों की सुरक्षा की जांच करें।
  • टूटी गैस लाइन या बिजली के तारों से सावधान रहें। गैस लीक की गंध आने पर तुरंत मेन वाल्व बंद कर दें।
  • बिजली के मेन स्विच को बंद कर दें।
  • रेडियो पर सूचनाएं सुनें और अफवाहों पर ध्यान न दें।
  • आफ्टरशॉक (बाद के झटकों) के लिए तैयार रहें, क्योंकि ये मुख्य भूकंप के बाद आ सकते हैं।

4. सुनामी क्या है? इसके कारणों का वर्णन करें।

उत्तर: सुनामी जापानी भाषा के शब्द 'त्सु' (बंदरगाह) और 'नामी' (लहर) से बना है, जिसका अर्थ है 'बंदरगाह की लहर'। यह समुद्र में उत्पन्न होने वाली अत्यधिक ऊर्जावान और विनाशकारी लहरों की एक श्रृंखला है, जो तट से टकराकर भारी तबाही मचाती है।

सुनामी के प्रमुख कारण हैं:

  • समुद्र तल में भूकंप: यह सुनामी का सबसे प्रमुख कारण है। जब समुद्र तल में प्लेटों के खिसकने से भूकंप आता है, तो पानी की सतह अचानक ऊपर उठती या नीचे धंसती है, जिससे विशाल लहरें पैदा होती हैं।
  • समुद्र तल में ज्वालामुखी विस्फोट: समुद्र के भीतर ज्वालामुखी फटने से भी पानी में अचानक हलचल होती है और सुनामी लहरें बन सकती हैं।
  • समुद्र तल में भूस्खलन: समुद्र की ढलान पर जमी तलछट या चट्टानें अचानक खिसककर नीचे गिरती हैं, तो पानी को विस्थापित करके सुनामी पैदा कर सकती हैं।
  • बड़े उल्कापिंड का समुद्र में गिरना: कोई बड़ा उल्कापिंड या खगोलीय पिंड अगर समुद्र में गिरे, तो उससे भी विशाल लहरें उठ सकती हैं, हालांकि यह दुर्लभ घटना है।

5. सुनामी के समय क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?

उत्तर: सुनामी एक खतरनाक आपदा है, लेकिन सही जानकारी और तैयारी से इसके प्रभाव को कम किया जा सकता है:

सुनामी चेतावनी के संकेत व सावधानियाँ:

  • प्राकृतिक चेतावनी: यदि तटीय क्षेत्र में तेज भूकंप आए, तो यह सुनामी का संकेत हो सकता है। समुद्र का पानी अचानक तेजी से कई मीटर पीछे हट जाए या असामान्य रूप से उफनने लगे, तो तुरंत सतर्क हो जाएं।
  • आधिकारिक चेतावनी: मौसम विभाग या आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा जारी सुनामी चेतावनी पर तुरंत ध्यान दें। रेडियो, टीवी या मोबाइल अलर्ट पर नजर रखें।
  • तुरंत कार्रवाई: चेतावनी मिलते ही तटीय इलाके को तुरंत छोड़ दें। पैदल या वाहन से तट से दूर ऊंचे और सुरक्षित स्थान (कम से कम 30 मीटर ऊंचाई या तट से 3 किमी दूर) पर चले जाएं।
  • समुद्र से दूर रहें: सुनामी की लहरें देखने के लिए कभी भी तट के पास न जाएं। पहली लहर के बाद भी तट पर न लौटें, क्योंकि बाद की लहरें अक्सर पहली से भी बड़ी और खतरनाक होती हैं।
  • मछली पकड़ने वालों के लिए: यदि नाव पर हैं और सुनामी की चेतावनी मिले, तो तट की ओर न आएं बल्कि समुद्र की गहराई में चले जाएं, क्योंकि गहरे पानी में सुनामी लहरों की ऊंचाई कम होती है।
  • सुरक्षित मार्ग जानें: पहले से ही अपने इलाके में सुनामी से बचने के लिए सुरक्षित ऊंचे स्थान और भागने के मार्ग के बारे में जानकारी रखें।

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