Bihar Board Class 10th Social Science (हमारी अर्थव्यवस्था भाग 2) Chapter 7 उपभोक्ता जागरण एवं संरक्षण) Solutions
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| Board Name | Bihar Board of Secondary Education |
| Class | Class 10th |
| Content Type | Solution |
| Solution for | Class 10th students |
| Subject | Social Science (हमारी अर्थव्यवस्था भाग 2) |
| Chapter Name | Chapter 7 उपभोक्ता जागरण एवं संरक्षण) |
| Total Number of Chapter in this Subject | 7 |
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Bihar Board Class 10th Social Science (हमारी अर्थव्यवस्था भाग 2) Chapter 7 उपभोक्ता जागरण एवं संरक्षण) Solutions
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प्रश्न 1.
भारत उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम की घोषणा कब हुई ? (क) 1986
(ख) 1980
(ग) 1987
(घ) 1988
भारत में उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कानून, उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, वर्ष 1986 में पारित किया गया था। इसे अक्सर COPRA (Consumer Protection Act) के नाम से जाना जाता है। इस अधिनियम ने उपभोक्ताओं को कानूनी अधिकार दिए और उनकी शिकायतों के निवारण के लिए तीन स्तरीय मंच (जिला, राज्य और राष्ट्रीय) स्थापित किए।
प्रश्न 2.
उपभोक्ता अधिकार दिवस कब मनाया जाता है १ (क) 17 मार्च
(ख) 15 मार्च
(ग) 19 अप्रैल
(घ) 22 अप्रैल
पूरे विश्व में उपभोक्ताओं के अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए प्रतिवर्ष 15 मार्च को विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस मनाया जाता है। इस दिन की शुरुआत 15 मार्च, 1962 को अमेरिकी राष्ट्रपति जॉन एफ. केनेडी द्वारा उपभोक्ता अधिकारों पर दिए गए ऐतिहासिक भाषण से जुड़ी है। भारत में भी इस दिन विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से उपभोक्ता शिक्षा और सशक्तिकरण पर जोर दिया जाता है।
प्रश्न 3.
राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन न॑ क्या है ? (क) 100
() 1000-100
(1) 1800-11-4000
(4) 2000-114000
भारत सरकार के उपभोक्ता मामले विभाग द्वारा उपभोक्ताओं को मुफ्त सलाह और मार्गदर्शन प्रदान करने के लिए एक राष्ट्रीय हेल्पलाइन संचालित की जाती है। इसका टोल-फ्री नंबर 1800-11-4000 है। इस नंबर पर कॉल करके कोई भी उपभोक्ता अपने अधिकारों, शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया, या किसी भी धोखाधड़ी के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकता है।
प्रश्न 4.
स्वर्णाभूषणों की परिशुद्धता को सुनिश्चित करने के लिए किस मान्यता प्राप्त चिह्न का होना आवश्यक है ? (®) ISI Are
(ख) हॉल मार्क
(ग) एगमार्क
(घ) इनमें से कोई नहीं
सोने के आभूषणों की शुद्धता (कैरेट) और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए हॉलमार्क (Hallmark) एक बहुत ही महत्वपूर्ण और आवश्यक प्रमाणन चिह्न है। यह चिह्न ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) द्वारा प्रमाणित किया जाता है। हॉलमार्क आभूषण पर उसकी शुद्धता (जैसे 22K, 18K), BIS लोगो, प्रमाणन केंद्र का चिह्न और वर्ष के कोड को दर्शाता है, जिससे खरीदार को विश्वास होता है कि उसे उचित मूल्य पर शुद्ध सोना मिल रहा है।
प्रश्न 5.
यदि किसी वस्तु या सेवा का मूल्य 20 लाख से अधिक तथा करोड़ से कम है जो उपभोक्ता शिकायत करेगा (क) जिला फोरम
(ख) राज्य आयोग
(ग) राष्ट्रीय आयोग
(घ) इनमें से कोई नहीं
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत शिकायत दर्ज करने के लिए मुआवजे की राशि के आधार पर अलग-अलग स्तर के फोरम निर्धारित हैं। यदि शिकायत में मांगी गई राशि 20 लाख रुपये से अधिक लेकिन 1 करोड़ रुपये से कम है, तो उपभोक्ता को अपनी शिकायत राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में दर्ज करानी चाहिए। 20 लाख तक की राशि के लिए जिला फोरम और 1 करोड़ से अधिक के लिए राष्ट्रीय आयोग जिम्मेदार है।
प्रश्न 6.
उपभोक्ता द्वारा शिकायत करने के लिए आवेदन शुल्क कितना लगता है.? (क) 50 रु.
(ख) 70 रु.
(ग)10 रु. .
(घ) इनमें से कोई नहीं
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के नए प्रावधानों के अनुसार, अब उपभोक्ता को ई-फाइलिंग के माध्यम से अपनी शिकायत दर्ज कराने के लिए कोई आवेदन शुल्क नहीं देना पड़ता। पहले के नियमों में कुछ नाममात्र शुल्क था, लेकिन नए कानून ने इस प्रक्रिया को और सरल एवं निःशुल्क बना दिया है ताकि हर उपभोक्ता आसानी से न्याय पा सके।
॥. सही कथन में सही का (५) तथा गलत में (१0) का निशान लगाएँ।
प्रश्न 1. उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 को संक्षिप्त रूप में कोपरा (20/0२५) कहते हैं।
यह कथन सही है। उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 (Consumer Protection Act, 1986) को आमतौर पर इसके अंग्रेजी संक्षिप्त नाम COPRA से जाना जाता है। यह भारत में उपभोक्ता अधिकारों का आधार स्तंभ है।
प्रश्न 2.
राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन टेलीफोन नं. 15,000 है।
यह कथन गलत है। राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन का सही टोल-फ्री नंबर 1800-11-4000 है, न कि 15,000। नंबर 15000 किसी अन्य सेवा से संबंधित हो सकता है।
प्रश्न 3. भारत में सूचना पाने का अधिकार 2005 काबून बनाया गया।
यह कथन सही है। सूचना का अधिकार अधिनियम (Right to Information Act - RTI) भारतीय संसद द्वारा वर्ष 2005 में पारित किया गया था और यह 12 अक्टूबर, 2005 से पूरे देश में लागू हुआ। यह अधिनियम नागरिकों को सरकारी कार्यों में पारदर्शिता लाने का एक शक्तिशाली उपकरण प्रदान करता है।
प्रश्न 4. उपभोक्ता को खराब वस्तु या सेवा मिलने पर उत्पादक से मुआवजा पाने का अधिकार है, जो क्षति की मात्रा पर निर्भर करती है।
यह कथन सही है। उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत क्षतिपूर्ति या मुआवजे का अधिकार एक मौलिक अधिकार है। यदि कोई वस्तु दोषपूर्ण है या सेवा अपर्याप्त है, जिससे उपभोक्ता को शारीरिक, मानसिक या आर्थिक नुकसान हुआ है, तो उपभोक्ता निर्माता/विक्रेता/सेवा प्रदाता से उस नुकसान के अनुरूप मुआवजा पाने का हकदार है।
प्रश्न 5. SAAT APT की गुणवत्ता को प्रमाणित करने वाला चिह्न है।
यह कथन सही है। एगमार्क (AGMARK) भारत सरकार के कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) द्वारा प्रमाणित एक गुणवत्ता चिह्न है। यह मुख्य रूप से कृषि उत्पादों जैसे अनाज, दालें, तेल, फल, सब्जियों, अंडे, मधु आदि की शुद्धता और ग्रेड (गुणवत्ता के स्तर) की गारंटी देता है।
लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1.
आप किसी खाद्य पदार्थ संबंधी वस्तुओं को खरीदते समय कौन-कौन सी मुख्य बातों का ध्यान रखेंगे, बिन्दुवार उल्लेख करें।
खाद्य पदार्थ खरीदते समय एक जागरूक उपभोक्ता को निम्नलिखित बातों पर विशेष ध्यान देना चाहिए:
- अवयवों की सूची (List of Ingredients): पैकेट पर दी गई सामग्री की सूची पढ़ें, ताकि पता चल सके कि उसमें क्या-क्या मिला है।
- वजन का परिमाण (Net Weight/Quantity): पैकेट पर लिखे शुद्ध वजन की जाँच करें।
- निर्माता का नाम व पता (Manufacturer's Name & Address): यह जानकारी उत्पाद की विश्वसनीयता के लिए जरूरी है।
- निर्माण की तिथि (Date of Manufacturing/Packing): यह बताती है कि उत्पाद कब बना या पैक किया गया।
- इस्तेमाल की समाप्ति तिथि (Expiry Date/Use By Date): इस तिथि के बाद उत्पाद का सेवन नहीं करना चाहिए।
- शाकाहारी/मांसाहारी चिह्न (Vegetarian/Non-Vegetarian Logo): हरे रंग का बिंदु शाकाहारी और भूरे रंग का बिंदु मांसाहारी उत्पाद दर्शाता है।
- डाले गए रंग और खुशबू की घोषणा (Declaration of Added Colors & Flavors): कृत्रिम रंग या स्वाद होने पर इसकी जानकारी होनी चाहिए।
- पोषाहार का दावा (Nutritional Information): इसमें कैलोरी, प्रोटीन, वसा, विटामिन आदि की मात्रा दी होती है।
- स्वास्थ्य के प्रति हानिकारक चेतावनी (Health Warnings): जैसे "धूम्रपान स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है" या "अधिक चीनी का सेवन न करें"।
- गुणवत्ता प्रमाण चिह्न (Quality Marks): जैसे FSSAI लोगो (भारतीय खाद्य सुरक्षा मानक प्राधिकरण) का होना अनिवार्य है। आईएसआई या एगमार्क जैसे चिह्न भी गुणवत्ता सुनिश्चित करते हैं।
प्रश्न 2.
उपभोक्ता जागरण हेतु विभिन्न नारों को लिखें।
उपभोक्ता जागरूकता फैलाने के लिए प्रचलित कुछ प्रमुख नारे इस प्रकार हैं:
- जागरूक उपभोक्ता ही सुरक्षित उपभोक्ता है।
- ग्राहक सावधान! दुकानदार चौकन्ना!
- अपने अधिकार को पहचानो, अन्याय के खिलाफ आवाज उठाओ।
- जागो ग्राहक जागो, धोखाधड़ी को भगाओ।
- उपभोक्ता के रूप में अपने अधिकारों की रक्षा स्वयं करें।
- बिल जरूर लें, शिकायत का अधिकार बनाए रखें।
- सही तोल, सही मोल - यही है उपभोक्ता का गोल।
- गुणवत्ता चिह्न देखो, फिर सामान लेकर घर जाओ।
प्रश्न 3.
कुछ ऐसे कारकों की चर्चा करें जिससे उपभोक्ताओं का शोषण होता है।
बाजार में उपभोक्ताओं का शोषण निम्नलिखित कारकों या अनुचित व्यापारिक हथकंडों के कारण होता है:
- मिलावट (Adulteration): खाद्य पदार्थों जैसे दूध, घी, मसाले, तेल आदि में सस्ती या हानिकारक चीजें मिलाकर बेचना। यह स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा करता है।
- कम तौलना (Underweight/Short Measurement): बाट में हेराफेरी करके या पैकेट में कम मात्रा देकर ग्राहक को ठगना।
- नकली या निम्न गुणवत्ता की वस्तुएँ (Fake or Sub-standard Goods): मशहूर ब्रांड की नकल करके या खराब क्वालिटी का सामान अच्छे दामों पर बेचना।
- अनुचित मूल्य वसूली (Overcharging): एमआरपी से अधिक दाम वसूलना या कृत्रिम कमी पैदा करके ऊंची कीमतें लेना।
- गलत या भ्रामक विज्ञापन (False or Misleading Advertisement): वस्तु के गुणों को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाना या झूठे वादे करके उपभोक्ता को आकर्षित करना।
- अपूर्ण या गलत सूचना (Incomplete or Wrong Information): उत्पाद पर एक्सपायरी डेट, उपयोग के निर्देश या सामग्री की सही जानकारी न देना।
- अनैतिक वारंटी/गारंटी शर्तें (Unfair Warranty Terms): वस्तु खराब होने पर मरम्मत या बदलने से मना करना या अनावश्यक शर्तें लगाना।
- प्रदूषित वातावरण में बिक्री (Sale in Unhygienic Conditions): खुले में रखे गए खाद्य पदार्थ बेचना, जिससे बीमारी फैलने का खतरा रहता है।
प्रश्न 4.
उपभोक्ता के रूप में बाजार में उनके कुछ कर्तव्यों का वर्णन करें।
अधिकारों के साथ-साथ एक जिम्मेदार उपभोक्ता के कुछ महत्वपूर्ण कर्तव्य भी होते हैं:
- सतर्कता का कर्तव्य (Duty to be Alert): खरीदारी करते समय सजग रहना चाहिए। वस्तु की गुणवत्ता, ब्रांड, मात्रा, मूल्य और समाप्ति तिथि की जाँच स्वयं करें।
- सूचना माँगने का कर्तव्य (Duty to Ask for Information): वस्तु या सेवा के बारे में पूरी जानकारी, गारंटी की शर्तें, रिटर्न पॉलिसी आदि के बारे में विक्रेता से पूछें।
- रसीद लेने का कर्तव्य (Duty to Get a Cash Memo/Receipt): हर खरीदारी की रसीद अवश्य लें। यह खरीद का प्रमाण है और भविष्य में शिकायत करने के काम आती है।
- आवाज उठाने का कर्तव्य (Duty to Speak Up): यदि कोई धोखाधड़ी, अधिक दाम या खराब सामान मिले तो विक्रेता से तुरंत शिकायत करें। चुप रहकर अन्याय को न बढ़ने दें।
- सामूहिक हित का कर्तव्य (Duty for Collective Interest): केवल अपने लिए नहीं, बल्कि समाज के अन्य उपभोक्ताओं के हित के लिए भी अनैतिक व्यापार के खिलाफ आवाज उठाएं।
- पर्यावरण के प्रति कर्तव्य (Duty towards Environment): अत्यधिक पैकेजिंग वाले उत्पादों से बचें और प्लास्टिक के उपयोग को कम करने का प्रयास करें।
- गुणवत्ता चिह्नों को पहचानने का कर्तव्य (Duty to Recognize Quality Marks): ISI, हॉलमार्क, एगमार्क, FSSAI जैसे मानक चिह्नों को पहचानें और उन्हीं वस्तुओं को प्राथमिकता दें।
इन कर्तव्यों का पालन करके ही उपभोक्ता न केवल स्वयं की रक्षा कर सकता है बल्कि बाजार में उच्च गुणवत्ता और ईमानदारी को भी बढ़ावा दे सकता है।
प्रश्न 5.
उपभोक्ता कौन हैं ? संक्षेप में बतायें।
उपभोक्ता बाजार अर्थव्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण आधार है। सरल शब्दों में, वह व्यक्ति जो अपनी व्यक्तिगत या घरेलू आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए वस्तुओं या सेवाओं को खरीदता है और उनका उपयोग (उपभोग) करता है, उपभोक्ता कहलाता है। उदाहरण के लिए, घर के लिए सब्जी खरीदने वाला व्यक्ति, दवा लेने वाला मरीज, बिजली का बिल भरने वाला ग्राहक या बस का टिकट खरीदने वाला यात्री सभी उपभोक्ता हैं।
महात्मा गांधी ने उपभोक्ता के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा था, "उपभोक्ता हमारी दुकान में आने वाला सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति है। वह हम पर निर्भर नहीं है, बल्कि हम उस पर निर्भर हैं।" इसका अर्थ है कि व्यापार का अस्तित्व उपभोक्ता की जरूरतों और उसकी संतुष्टि पर टिका होता है।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1.
उपभोक्ता के कौन-कौन अधिकार हैं ? प्रत्येक अधिकार को सोदाहरण लिखें
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत उपभोक्ताओं को छह मौलिक अधिकार प्रदान किए गए हैं। प्रत्येक अधिकार का विवरण उदाहरण सहित इस प्रकार है:
- सुरक्षा का अधिकार (Right to Safety): इस अधिकार के तहत उपभोक्ता को ऐसी वस्तुओं और सेवाओं से सुरक्षा प्राप्त करने का अधिकार है, जो उसके जीवन, स्वास्थ्य या संपत्ति के लिए हानिकारक हो सकती हैं।
उदाहरण: एक दोषपूर्ण गैस स्टोव जिसमें लीकेज होने का खतरा है, या एक नकली दवा जो स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। उपभोक्ता ऐसे उत्पादों की बिक्री पर रोक लगवा सकता है और क्षतिपूर्ति मांग सकता है। - सूचना पाने का अधिकार (Right to be Informed): उपभोक्ता को वस्तु या सेवा के बारे में सभी आवश्यक जानकारी प्राप्त करने का अधिकार है, ताकि वह सही निर्णय ले सके।
उदाहरण: डिब्बाबंद खाद्य पदार्थ पर अवयवों की सूची, पोषण तत्व, निर्माण व समाप्ति तिथि, निर्माता का पता और एफएसएसएई लोगो का होना अनिवार्य है। बिना इस जानकारी के उत्पाद बेचना कानूनन गलत है। - चुनने का अधिकार (Right to Choose): उपभोक्ता को विभिन्न वस्तुओं और सेवाओं में से अपनी पसंद की वस्तु चुनने की स्वतंत्रता है। बाजार में एकाधिकार (मोनोपोली) इस अधिकार का उल्लंघन है।
उदाहरण: यदि किसी कस्बे में केवल एक ही एलपीजी गैस एजेंसी है और वह ग्राहकों को मजबूरन अपना सिलेंडर लेने के लिए दबाव डालती है, तो यह चुनने के अधिकार का हनन है। - सुनवाई का अधिकार (Right to be Heard): उपभोक्ता की शिकायतों और हितों पर उचित मंचों (जैसे उपभोक्ता फोरम) पर ध्यान दिया जाना चाहिए और उन पर विचार किया जाना चाहिए।
उदाहरण: यदि कोई उपभोक्ता किसी कंपनी के उत्पाद से असंतुष्ट है और शिकायत करता है, तो कंपनी को उसकी बात सुननी होगी। यदि वह नहीं सुनती, तो उपभोक्ता जिला फोरम में केस दायर कर सकता है, जहां उसकी शिकायत पर सुनवाई होगी। - शिकायत निवारण/क्षतिपूर्ति का अधिकार (Right to Seek Redressal): यदि उपभोक्ता को कोई नुकसान हुआ है, तो उसे उचित मुआवजा, मरम्मत, प्रतिस्थापन या सेवा की कीमत वापस पाने का अधिकार है।
उदाहरण: नया खरीदा गया फ्रिज एक हफ्ते में ही खराब हो गया और कंपनी उसे ठीक करने या बदलने से मना कर देती है। ऐसे में उपभोक्ता उपभोक्ता फोरम में शिकायत करके नया फ्रिज या अपना पैसा वापस पा सकता है। - उपभोक्ता शिक्षा का अधिकार (Right to Consumer Education): हर उपभोक्ता को अपने अधिकारों और कर्तव्यों के बारे में जानने का अधिकार है। सरकार और समाज का दायित्व है कि वह जागरूकता कार्यक्रमों, विज्ञापनों और पाठ्यक्रमों के माध्यम से उपभोक्ता शिक्षा प्रदान करे।
उदाहरण: स्कूलों में उपभोक्ता अधिकारों पर पाठ पढ़ाना, टीवी और अखबारों में जागरूकता अभियान चलाना, और राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर 1800-11-4000 का प्रचार करना इसी अधिकार को साकार करने के उदाहरण हैं।
इन अधिकारों का ज्ञान और उपयोग ही उपभोक्ता को बाजार में एक सशक्त भागीदार बनाता है।
1. उपभोक्ता कौन है?
उपभोक्ता वह व्यक्ति है जो अपनी व्यक्तिगत आवश्यकताओं या इच्छाओं की पूर्ति के लिए वस्तुओं या सेवाओं का क्रय करता है और उनका उपयोग करता है। उदाहरण के लिए, यदि आप अपने लिए एक किताब, कपड़े, या भोजन खरीदते हैं, तो आप एक उपभोक्ता हैं। उपभोक्ता बाजार अर्थव्यवस्था की मूल इकाई है।
2. उपभोक्ता जागरण से आप क्या समझते हैं?
उपभोक्ता जागरण का अर्थ है उपभोक्ताओं को उनके अधिकारों, कर्तव्यों और बाजार में उपलब्ध सुरक्षा तंत्रों के प्रति सचेत और शिक्षित करना। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उपभोक्ता धोखाधड़ी, मिलावट, अधिक मूल्य वसूली, या गलत माप-तौल जैसी अनुचित व्यापारिक प्रथाओं से अपनी रक्षा कर सकें। जागरूक उपभोक्ता सूचित निर्णय लेते हैं और अनुचित व्यवहार के विरुद्ध आवाज उठाते हैं।
3. उपभोक्ता संरक्षण कानून कब लागू हुआ?
भारत में मुख्य उपभोक्ता संरक्षण कानून, 'उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम', वर्ष 1986 में लागू हुआ था। इस अधिनियम का मुख्य उद्देश्य उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना और उन्हें शिकायत निवारण के लिए एक सरल, त्वरित और कम खर्चीला तंत्र प्रदान करना था। बाद में इसे और अधिक प्रभावी बनाने के लिए इसमें संशोधन किए गए हैं।
4. उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत उपभोक्ताओं को कौन-कौन से अधिकार प्राप्त हैं?
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत उपभोक्ताओं को निम्नलिखित छह मुख्य अधिकार प्रदान किए गए हैं:
- सुरक्षा का अधिकार: ऐसी वस्तुओं एवं सेवाओं के विरुद्ध सुरक्षा, जो जीवन, संपत्ति के लिए खतरनाक हों।
- सूचना पाने का अधिकार: वस्तुओं की गुणवत्ता, मात्रा, शुद्धता, मानक और मूल्य के बारे में पूरी जानकारी पाने का अधिकार।
- चुनाव का अधिकार: विभिन्न प्रकार की वस्तुओं और सेवाओं में से किसी एक को चुनने की स्वतंत्रता।
- सुनवाई का अधिकार: उपभोक्ता हितों का उचित ध्यान रखे जाने और उनकी शिकायतों पर विचार किए जाने का अधिकार।
- निवारण का अधिकार: अनुचित व्यापारिक प्रथाओं या शोषण के विरुद्ध उचित निवारण या मुआवजा पाने का अधिकार।
- उपभोक्ता शिक्षा का अधिकार: ज्ञान और कौशल प्राप्त करने का अधिकार ताकि वे सूचित उपभोक्ता बन सकें।
5. उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया क्या है?
शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया निम्नलिखित चरणों में पूरी की जा सकती है:
- शिकायत पत्र तैयार करना: शिकायतकर्ता को अपनी शिकायत लिखित रूप में तैयार करनी चाहिए, जिसमें समस्या, संबंधित वस्तु/सेवा, विक्रेता का विवरण, नुकसान की राशि और मांगे गए निवारण का स्पष्ट उल्लेख हो।
- संबंधित क्षेत्राधिकार का चयन: शिकायत उस जिला/राज्य/राष्ट्रीय उपभोक्ता फोरम में दायर की जाती है, जहां विक्रेता का कार्यालय है या जहां खरीदारी की गई थी या जहां शिकायतकर्ता रहता है।
- आवश्यक दस्तावेज संलग्न करना: बिल, वारंटी कार्ड, चालान, पत्राचार आदि की प्रतियां शिकायत के साथ संलग्न करनी चाहिए।
- शिकायत दायर करना: शिकायत पत्र और सभी दस्तावेज संबंधित उपभोक्ता फोरम में जमा कराए जाते हैं।
- सुनवाई एवं निर्णय: फोरम दोनों पक्षों को सुनता है और साक्ष्यों के आधार पर निर्णय देता है, जिसमें मुआवजा, वस्तु का प्रतिस्थापन या दोष सुधार जैसे आदेश शामिल हो सकते हैं।
नोट: 20 लाख रुपये तक के मामले जिला फोरम, 20 लाख से 1 करोड़ तक के मामले राज्य आयोग और 1 करोड़ से अधिक के मामले राष्ट्रीय आयोग में दायर किए जाते हैं।
6. बहुविकल्पीय प्रश्न
(क) उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम कब पारित हुआ?
सही उत्तर: (C) 1986
भारत का उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम वर्ष 1986 में पारित हुआ था। यह उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए एक मील का पत्थर साबित हुआ है।
(ख) उपभोक्ता के चुनाव के अधिकार का क्या अर्थ है?
सही उत्तर: (B) विभिन्न वस्तुओं में से अपनी पसंद की वस्तु खरीदने की स्वतंत्रता
चुनाव का अधिकार उपभोक्ता को यह स्वतंत्रता देता है कि वह बाजार में उपलब्ध विभिन्न प्रकार, गुणवत्ता और कीमत वाली वस्तुओं एवं सेवाओं में से अपनी पसंद का चयन कर सके।
(ग) उपभोक्ता शिक्षा का अधिकार किससे संबंधित है?
सही उत्तर: (A) उपभोक्ताओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक बनाना
उपभोक्ता शिक्षा का अधिकार उपभोक्ताओं को उनके अधिकारों और कर्तव्यों के बारे में जानकारी प्रदान करने से संबंधित है, ताकि वे धोखाधड़ी से बच सकें और सूचित निर्णय ले सकें।
(घ) जिला उपभोक्ता फोरम में कितनी राशि तक के मामले सुनवाई के लिए आते हैं?
सही उत्तर: (B) 20 लाख रुपये तक
जिला उपभोक्ता फोरम (जिला फोरम) 20 लाख रुपये तक के मूल्य के दावों या मुआवजे के मामलों की सुनवाई करता है।
1. उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम कब लागू हुआ?
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम भारत में 24 दिसंबर, 1986 को लागू हुआ। इस अधिनियम का मुख्य उद्देश्य उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना और उन्हें शोषण से बचाना है।
2. उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत उपभोक्ता को कौन-कौन से अधिकार प्राप्त हैं?
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत उपभोक्ताओं को निम्नलिखित छह मुख्य अधिकार प्राप्त हैं:
- सुरक्षा का अधिकार: असुरक्षित वस्तुओं एवं सेवाओं से सुरक्षा पाने का अधिकार।
- सूचना पाने का अधिकार: वस्तुओं की गुणवत्ता, मात्रा, शुद्धता, मानक और मूल्य के बारे में पूरी जानकारी पाने का अधिकार।
- चुनाव का अधिकार: विभिन्न वस्तुओं और सेवाओं में से अपनी पसंद का चयन करने का अधिकार।
- सुनवाई का अधिकार: उपभोक्ता हितों से जुड़े मामलों में अपनी बात रखने और सुनवाई पाने का अधिकार।
- निवारण का अधिकार: अनुचित व्यापारिक प्रथाओं या शोषण के विरुद्ध उचित निवारण या मुआवजा पाने का अधिकार।
- उपभोक्ता शिक्षा का अधिकार: उपभोक्ता के रूप में अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों के बारे में ज्ञान प्राप्त करने का अधिकार।
3. उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत शिकायत दर्ज करने की सीमा क्या है?
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत, शिकायत दर्ज करने की समय सीमा दो वर्ष है। यानी, जिस तारीख से उपभोक्ता को नुकसान हुआ है या अनुचित व्यवहार का पता चला है, उसके दो वर्ष के भीतर ही शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
4. उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत कितने स्तर पर फोरम गठित किए गए हैं?
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत विवादों के निपटारे के लिए तीन स्तर पर फोरम गठित किए गए हैं:
- जिला फोरम: यह जिला स्तर पर कार्य करता है और 20 लाख रुपये तक के मामलों की सुनवाई करता है।
- राज्य आयोग: यह राज्य स्तर पर कार्य करता है और 20 लाख से 1 करोड़ रुपये तक के मामलों की सुनवाई करता है।
- राष्ट्रीय आयोग: यह राष्ट्रीय स्तर पर कार्य करता है और 1 करोड़ रुपये से अधिक के मामलों की सुनवाई करता है।
5. उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत शिकायत कौन दर्ज कर सकता है?
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत निम्नलिखित व्यक्ति या समूह शिकायत दर्ज करा सकते हैं:
- कोई भी उपभोक्ता जिसे नुकसान हुआ हो।
- उपभोक्ता के कानूनी वारिस।
- स्वैच्छिक उपभोक्ता संगठन (रजिस्टर्ड)।
- केंद्र सरकार या राज्य सरकार।
- एक समूह में समान हित रखने वाले उपभोक्ता (सामूहिक शिकायत)।
6. उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत शिकायत कैसे दर्ज करें?
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया निम्नलिखित चरणों में पूरी की जा सकती है:
- शिकायत पत्र तैयार करना: शिकायतकर्ता को अपना नाम, पता, विपरीत पक्ष (विक्रेता/निर्माता/सेवा प्रदाता) का विवरण, शिकायत का कारण, नुकसान की राशि और मांगे गए निवारण का स्पष्ट विवरण देते हुए एक शिकायत पत्र तैयार करना चाहिए।
- संबंधित क्षेत्राधिकार वाले फोरम में जमा करना: इस शिकायत पत्र को, मामले के मूल्य के अनुसार, संबंधित जिला फोरम, राज्य आयोग या राष्ट्रीय आयोग में जमा करना होता है।
- सुनवाई एवं निर्णय: फोरम दोनों पक्षों को सुनकर मामले की जांच करता है और उचित निर्णय सुनाता है, जिसमें मुआवजा, वस्तु की मरम्मत या प्रतिस्थापन आदि शामिल हो सकते हैं।
बहुविकल्पीय प्रश्न
1. उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम कब लागू हुआ?
(A) 1985
(B) 1986
(C) 1987
(D) 1988
सही उत्तर: (B) 1986
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 24 दिसंबर, 1986 को लागू हुआ था।
2. उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत शिकायत दर्ज करने की सीमा क्या है?
(A) 6 माह
(B) 1 वर्ष
(C) 2 वर्ष
(D) 3 वर्ष
सही उत्तर: (C) 2 वर्ष
अधिनियम के तहत, नुकसान होने या अनुचित व्यवहार का पता चलने की तारीख से दो वर्ष के भीतर शिकायत दर्ज करनी होती है।
3. उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत कितने स्तर पर फोरम गठित किए गए हैं?
(A) दो
(B) तीन
(C) चार
(D) पाँच
सही उत्तर: (B) तीन
ये तीन स्तर हैं: जिला फोरम, राज्य आयोग और राष्ट्रीय आयोग।
4. उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत जिला फोरम कितने रुपये तक के मामले की सुनवाई कर सकता है?
(A) 10 लाख रुपये तक
(B) 20 लाख रुपये तक
(C) 50 लाख रुपये तक
(D) 1 करोड़ रुपये तक
सही उत्तर: (B) 20 लाख रुपये तक
जिला फोरम 20 लाख रुपये तक के मूल्य वाले उपभोक्ता विवादों की सुनवाई करने के लिए अधिकृत है।
5. उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत कौन शिकायत नहीं कर सकता है?
(A) उपभोक्ता
(B) उपभोक्ता संगठन
(C) सरकार
(D) व्यापारी
सही उत्तर: (D) व्यापारी
व्यापारी इस अधिनियम के तहत शिकायत नहीं कर सकता। यह अधिनियम केवल उपभोक्ताओं और उनके हितों को प्रतिनिधित्व करने वालों के लिए है।
Bihar Board Class 10 Social Science (हमारी अर्थव्यवस्था भाग 2)
Chapter 7 - उपभोक्ता जागरण एवं संरक्षण
प्रश्न 4. भारत में उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम पारित करने की आवश्यकता क्यों हुई?
उत्तर-
भारत में उपभोक्ताओं के साथ लंबे समय से विभिन्न प्रकार के अनुचित व्यवहार किए जाते रहे हैं। इनमें घटिया गुणवत्ता की वस्तुएँ बेचना, माप-तौल में कमी देना, नकली सामान बेचना, कालाबाजारी और जमाखोरी करना तथा भ्रामक विज्ञापनों के माध्यम से गुमराह करना शामिल था। इन सभी समस्याओं के कारण उपभोक्ताओं का आर्थिक शोषण हो रहा था और उनके हितों की रक्षा के लिए एक मजबूत कानूनी ढाँचे की कमी थी। समय-समय पर बनाए गए कानून पर्याप्त नहीं थे। इसलिए, उपभोक्ताओं को एक विशेष अधिकार देने, उन्हें जागरूक बनाने और उनकी शिकायतों के त्वरित व सरल निवारण के लिए एक व्यापक कानून की जरूरत महसूस हुई। इसी आवश्यकता को पूरा करने के लिए भारत सरकार ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 पारित किया।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1. भारत में उपभोक्ताओं का किस प्रकार शोषण किया जाता है ? उपभोक्ताओं के क्या अधिकार है तथा उनके संरक्षण के लिए सरकार ने क्या कदम उठाए हैं ?
उत्तर-
भारत में उपभोक्ता शोषण के प्रकार:
भारत में उपभोक्ताओं का शोषण कई तरीकों से होता है, जैसे:
- घटिया गुणवत्ता: टूट-फूट या निम्न स्तर का सामान बेचना।
- कम माप-तौल: तौलते समय पलड़ा कम करना या माप में गड़बड़ी करना।
- नकली उत्पाद: मिलावटी खाद्य पदार्थ, नकली दवाएँ या ब्रांडेड सामान की नकल बेचना।
- अधिक मूल्य वसूलना: एमआरपी से ज्यादा दाम लेना।
- भ्रामक विज्ञापन: झूठे दावों वाले विज्ञापनों से ग्राहकों को आकर्षित करना।
- अपूर्ण सेवा: बैंकिंग, स्वास्थ्य, शिक्षा जैसे क्षेत्रों में लापरवाही बरतना।
- कालाबाजारी व जमाखोरी: आवश्यक वस्तुओं को छिपाकर कृत्रिम कमी पैदा करना और ऊँचे दामों पर बेचना।
उपभोक्ताओं के अधिकार (उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 के अनुसार):
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 की धारा 6 के तहत उपभोक्ताओं को निम्नलिखित छह अधिकार प्रदान किए गए हैं:
- सुरक्षा का अधिकार: जीवन और संपत्ति के लिए खतरनाक वस्तुओं एवं सेवाओं की बिक्री के विरुद्ध संरक्षण पाने का अधिकार।
- सूचना का अधिकार: वस्तुओं या सेवाओं की गुणवत्ता, मात्रा, शुद्धता, मानक और मूल्य के बारे में पूरी जानकारी पाने का अधिकार।
- चुनने का अधिकार: विभिन्न वस्तुओं को देख-परखकर चुनने तथा प्रतिस्पर्धात्मक मूल्यों पर उन्हें प्राप्त करने का अधिकार।
- सुनवाई का अधिकार: उचित मंच पर अपनी शिकायत दर्ज कराने और उस पर विचार करवाने का अधिकार।
- निवारण का अधिकार: अनुचित व्यापारिक तरीकों एवं शोषण के विरुद्ध उचित न्याय या क्षतिपूर्ति पाने का अधिकार।
- शिक्षा का अधिकार: उपभोक्ता के रूप में अपने अधिकारों और कर्तव्यों के बारे में ज्ञान प्राप्त करने का अधिकार।
सरकार द्वारा उठाए गए कदम:
उपभोक्ताओं के संरक्षण के लिए सरकार ने निम्नलिखित महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं:
- कानूनी उपाय: उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 लागू किया गया, जिसमें क्षतिपूर्ति का प्रावधान है।
- त्रिस्तरीय न्यायिक व्यवस्था: शिकायत निवारण के लिए तीन स्तरों पर फोरम स्थापित किए गए:
- जिला स्तर: जिला उपभोक्ता विवाद निवारण फोरम (20 लाख रुपये तक के मामले)।
- राज्य स्तर: राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (20 लाख से 1 करोड़ रुपये तक के मामले)।
- राष्ट्रीय स्तर: राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (1 करोड़ रुपये से अधिक के मामले)।
- प्रशासनिक उपाय: उपभोक्ता हितों की देखरेख के लिए केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण परिषद और राज्य उपभोक्ता संरक्षण परिषदों की स्थापना की गई। सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के माध्यम से आवश्यक वस्तुएँ उपलब्ध कराई जाती हैं।
- तकनीकी उपाय: उत्पादों के मानकीकरण के लिए भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) और AGMARK जैसे प्रमाणन चिह्न अनिवार्य किए गए, ताकि गुणवत्ता सुनिश्चित हो सके।
- जागरूकता अभियान: 'जागो ग्राहक जागो' जैसे नारों के साथ उपभोक्ता शिक्षा और जागरूकता फैलाने के अभियान चलाए जाते हैं।
महत्वपूर्ण तथ्य (Points to Remember)
- समाज का प्रत्येक व्यक्ति एक उपभोक्ता है।
- उपभोक्ता जागरूकता आंदोलन सर्वप्रथम इंग्लैंड में प्रारंभ हुआ।
- उपभोक्ता अधिकारों की घोषणा सर्वप्रथम 1962 में संयुक्त राज्य अमेरिका में हुई।
- 15 मार्च को विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस के रूप में मनाया जाता है।
- राल्फ नाडर उपभोक्ता आंदोलन के प्रमुख प्रवर्तक माने जाते हैं।
- भारत में उपभोक्ता आंदोलन का उदय व्यापारियों के अनुचित व्यवसाय व्यवहार के कारण हुआ।
- भारत सरकार ने 1986 में उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम पारित किया।
- 24 दिसंबर को भारत में राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस के रूप में मनाया जाता है।
- सूचना का अभाव उपभोक्ता शोषण का एक प्रमुख कारण है।
- उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत त्रिस्तरीय न्यायिक तंत्र (जिला, राज्य, राष्ट्रीय) की स्थापना की गई है।
- सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) एक प्रशासनिक उपाय है।
- भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) हमारे देश की प्रमुख मानकीकरण संस्था है।
- ग्राहकों के पास रसीद न होना शिकायत दर्ज कराने में एक बड़ी बाधा है।
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