Class 12 सत्ता के वैकल्पिक केंद्र Objective Questions Bihar Board

बिहार बोर्ड कक्षा 12 सत्ता के वैकल्पिक केंद्र ऑब्जेक्टिव प्रश्न

बिहार बोर्ड कक्षा 12 के राजनीति विज्ञान विषय के अध्याय 'सत्ता के वैकल्पिक केंद्र' के लिए यहाँ ऑब्जेक्टिव प्रश्न उपलब्ध हैं। इस अध्याय में यूरोपीय संघ, चीन, जापान, आसियान जैसे नए शक्ति केंद्रों का अध्ययन किया जाता है।

महत्वपूर्ण टॉपिक्स

  • यूरोपीय संघ (EU) का उदय और भूमिका
  • चीन की आर्थिक और राजनीतिक शक्ति के रूप में वृद्धि
  • आसियान (ASEAN) और उसकी नीतियाँ
  • जापान एवं दक्षिण कोरिया का वैश्विक प्रभाव

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सत्ता के वैकल्पिक केंद्र: अध्याय की मुख्य बातें

यह अध्याय द्वितीय विश्व युद्ध के बाद, विशेष रूप से शीत युद्ध की समाप्ति के पश्चात, वैश्विक सत्ता के नए केंद्रों के उदय की व्याख्या करता है। पारंपरिक अमेरिका-सोवियत संघ की द्विध्रुवीय व्यवस्था के अलावा अब अन्य क्षेत्रीय शक्तियाँ भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने लगी हैं। बिहार बोर्ड परीक्षा की दृष्टि से इन सभी केंद्रों को समझना आवश्यक है।

यूरोपीय संघ (European Union)

यूरोपीय संघ एक राजनीतिक और आर्थिक संघ है जिसकी शुरुआत 1993 में मास्ट्रिच संधि के बाद हुई। इसकी नींव 1957 में रोम की संधि से स्थापित यूरोपीय आर्थिक समुदाय (EEC) में देखी जा सकती है। यूरोपीय संघ के सदस्य देशों ने आपसी व्यापार, एकल मुद्रा (यूरो), और समान विदेश नीति के माध्यम से अपनी शक्ति को बढ़ाया है। इस प्रकार यह विश्व राजनीति में एक प्रमुख वैकल्पिक शक्ति बनकर उभरा है।

चीन का उदय (Rise of China)

1949 में साम्यवादी क्रांति के बाद चीन ने 1978 में देंग शियाओ पिंग द्वारा शुरू की गई आर्थिक सुधारों की नीति अपनाई। इस नीति ने चीन को 'खुली अर्थव्यवस्था' की ओर अग्रसर किया और उसे विश्व की एक प्रमुख आर्थिक शक्ति बना दिया। चीन की विदेश नीति, 'शांतिपूर्ण उदय' के सिद्धांत पर आधारित है, हालाँकि दक्षिण चीन सागर विवाद और भारत के साथ सीमा मुद्दे जैसे तनाव भी बने हुए हैं। 1962 का भारत-चीन युद्ध दोनों देशों के संबंधों का एक अहम पड़ाव था।

आसियान (ASEAN)

आसियान (दक्षिण-पूर्व एशियाई राष्ट्रों का संगठन) की स्थापना 1967 में बैंकॉक घोषणा के साथ हुई थी। इसके संस्थापक सदस्यों में इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलीपींस, सिंगापुर और थाईलैंड शामिल थे। आसियान का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में आर्थिक विकास, सामाजिक प्रगति और सांस्कृतिक विकास को गति देना है। 'आसियान वे' (ASEAN Way) इसकी एक独特 विधि है जो गैर-हस्तक्षेप, शांतिपूर्ण समाधान और आपसी परामर्श पर जोर देती है। भारत की 'लुक ईस्ट' और 'एक्ट ईस्ट' नीति आसियान देशों के साथ संबंधों को मजबूत करने पर केंद्रित है।

जापान और दक्षिण कोरिया

द्वितीय विश्व युद्ध में पराजय के बाद जापान ने अपना ध्यान आर्थिक पुनर्निर्माण पर केंद्रित किया और तीव्र गति से विकास कर एक तकनीकी महाशक्ति बन गया। इसी प्रकार, कोरियाई युद्ध के बाद दक्षिण कोरिया ने भी औद्योगिकरण और निर्यात-उन्मुख नीतियों के जरिए अद्भुत आर्थिक प्रगति की, जिसे 'हान नदी का चमत्कार' कहा जाता है। ये दोनों देश अमेरिका के साथ सुरक्षा गठजोड़ में भी शामिल हैं और एशिया-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण हैं।

ऑब्जेक्टिव प्रश्नों का अभ्यास क्यों जरूरी है?

बिहार बोर्ड परीक्षा में ऑब्जेक्टिव प्रश्नों का एक अलग ही महत्व है। इन प्रश्नों के नियमित अभ्यास से छात्रों को अध्याय के महत्वपूर्ण तथ्यों, जैसे कि संगठनों के नाम, संधियों के वर्ष, और नीतियों के उद्देश्यों को याद रखने में आसानी होती है। यह अभ्यास परीक्षा के पैटर्न से परिचित कराता है और वास्तविक परीक्षा में समय प्रबंधन में सहायक होता है। सत्ता के वैकल्पिक केंद्र जैसे अध्याय में विभिन्न क्षेत्रीय संगठनों और देशों की भूमिका को समझने के लिए वस्तुनिष्ठ प्रश्न एक कारगर तरीका हैं।