Bihar Board 12th शीतयुद्ध Objective Questions

बिहार बोर्ड कक्षा 12वीं: शीतयुद्ध का दौर वस्तुनिष्ठ प्रश्न

बिहार बोर्ड इंटरमीडिएट परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए, इतिहास विषय के अध्याय 'शीतयुद्ध का दौर' से संबंधित वस्तुनिष्ठ प्रश्न यहाँ प्रस्तुत हैं। ये प्रश्न पाठ्यक्रम के महत्वपूर्ण बिंदुओं को कवर करते हैं।

मुख्य विषय-क्षेत्र:

  • शीतयुद्ध की उत्पत्ति एवं कारण
  • प्रमुख संकट: बर्लिन संकट, कोरिया युद्ध, क्यूबा मिसाइल संकट
  • गुटनिरपेक्ष आंदोलन में भारत की भूमिका

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शीतयुद्ध का दौर: महत्वपूर्ण प्रश्न अभ्यास

बिहार बोर्ड कक्षा 12वीं की इतिहास की परीक्षा में 'शीतयुद्ध का दौर' से कई वस्तुनिष्ठ प्रश्न पूछे जाते हैं। इस अध्याय को समझने के लिए निम्नलिखित बिंदुओं पर ध्यान देना आवश्यक है।

शीतयुद्ध की पृष्ठभूमि

द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद विश्व दो महाशक्तियों - अमेरिका और सोवियत संघ - के नेतृत्व में दो गुटों में बँट गया। इनके बीच विचारधारात्मक संघर्ष, यानी पूँजीवाद बनाम साम्यवाद, को ही शीतयुद्ध कहा गया।

  • ट्रूमन सिद्धांत (1947) और मार्शल योजना क्या थी?
  • सोवियत संघ ने कॉमिनफॉर्म और मोलोटोव योजना क्यों शुरू की?

प्रमुख संघर्ष एवं संकट

शीतयुद्ध के दौरान कई ऐसी घटनाएँ हुईं जहाँ दोनों गुट सीधे टकराव के कगार पर आ गए।

बर्लिन की नाकेबंदी (1948-49): सोवियत संघ ने पश्चिमी बर्लिन की सड़कों को बंद कर दिया। अमेरिका और उसके सहयोगियों ने हवाई मार्ग से आपूर्ति की, जिसे 'बर्लिन एयरलिफ्ट' कहा जाता है।

कोरिया युद्ध (1950-53): उत्तर कोरिया (सोवियत समर्थित) और दक्षिण कोरिया (अमेरिकी समर्थित) के बीच युद्ध शुरू हुआ। यह युद्ध 38वीं समानांतर रेखा को लेकर था।

गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM)

भारत के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू, मिस्र के नासिर और युगोस्लाविया के टीटो ने मिलकर इस आंदोलन की नींव रखी।

  • इसका उद्देश्य दोनों महाशक्ति गुटों से अलग रहकर स्वतंत्र विदेश नीति अपनाना था।
  • बांडुंग सम्मेलन (1955) गुटनिरपेक्ष आंदोलन के लिए एक अहम कदम था।
  • भारत ने हमेशा शांति और सह-अस्तित्व की नीति पर जोर दिया।

इन सभी टॉपिक्स से संबंधित वस्तुनिष्ठ प्रश्नों का नियमित अभ्यास करने से परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त किए जा सकते हैं। प्रश्नों के साथ-साथ घटनाओं के कारण और परिणाम को समझना भी जरूरी है।