Bihar Board Class 12 भारतीय दर्शन Objective Questions Prakriti Sampraday
Bihar Board Class 12 भारतीय दर्शन: प्रकृति एवं सम्प्रदाय
बिहार बोर्ड कक्षा 12 के दर्शनशास्त्र (भारतीय दर्शन) विषय की तैयारी के लिए यहाँ वस्तुनिष्ठ प्रश्न उपलब्ध हैं। यह सामग्री 'भारतीय दर्शन की प्रकृति एवं सम्प्रदाय' इकाई पर केंद्रित है।
इस पृष्ठ पर आपको अध्याय के महत्वपूर्ण बिंदुओं पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs) मिलेंगे, जो परीक्षा की दृष्टि से उपयोगी हैं। नीचे दिए गए लिंक से आप संबंधित श्रेणी, कक्षा और विषय के अन्य संसाधनों तक पहुँच सकते हैं।
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भारतीय दर्शन की प्रकृति एवं सम्प्रदाय: वस्तुनिष्ठ प्रश्न अभ्यास
बिहार बोर्ड कक्षा 12 के दर्शनशास्त्र पाठ्यक्रम में 'भारतीय दर्शन की प्रकृति एवं सम्प्रदाय' एक मूलभूत इकाई है। इसके अंतर्गत भारतीय दार्शनिक चिंतन की विशेषताओं एवं विभिन्न दार्शनिक परंपराओं का अध्ययन किया जाता है।
भारतीय दर्शन की प्रकृति से संबंधित प्रश्न
भारतीय दर्शन का स्वरूप पश्चिमी दर्शन से भिन्न है। इसकी कुछ प्रमुख विशेषताएँ हैं:
- भारतीय दर्शन का मुख्य लक्ष्य मोक्ष की प्राप्ति है।
- यह जीवन के व्यावहारिक पक्ष पर बल देता है।
- इसमें आध्यात्मिक अनुभव को प्रमुखता दी गई है।
- श्रुति (वेद) को ज्ञान का प्रमुख स्रोत माना गया है।
वस्तुनिष्ठ प्रश्न अक्सर 'दर्शन' शब्द की व्युत्पत्ति, भारतीय दर्शन के प्रयोजन (पुरुषार्थ चतुष्टय) और इसकी मूलभूत मान्यताओं पर पूछे जाते हैं।
दार्शनिक सम्प्रदाय: आस्तिक एवं नास्तिक
भारतीय दर्शन को मुख्यतः दो श्रेणियों में बाँटा जाता है - आस्तिक सम्प्रदाय और नास्तिक सम्प्रदाय।
आस्तिक सम्प्रदाय
वेदों को प्रामाणिक मानने वाले छः प्रमुख दर्शन आस्तिक सम्प्रदाय के अंतर्गत आते हैं। इन्हें षड्दर्शन भी कहते हैं:
- सांख्य दर्शन - कपिल मुनि द्वारा प्रतिपादित। पुरुष एवं प्रकृति का सिद्धांत।
- योग दर्शन - पतंजलि द्वारा प्रतिपादित। अष्टांग योग का मार्ग।
- न्याय दर्शन - गौतम मुनि द्वारा प्रतिपादित। तर्कशास्त्र पर आधारित।
- वैशेषिक दर्शन - कणाद मुनि द्वारा प्रतिपादित। परमाणुवाद का सिद्धांत।
- पूर्व मीमांसा - जैमिनि द्वारा प्रतिपादित। वैदिक कर्मकांड पर बल।
- उत्तर मीमांसा (वेदांत) - बादरायण के ब्रह्मसूत्र पर आधारित। ब्रह्म एवं आत्मा की एकता।
नास्तिक सम्प्रदाय
वेदों की प्रामाणिकता को न मानने वाले तीन प्रमुख दर्शन हैं:
- चार्वाक दर्शन - भौतिकवादी दर्शन। 'यावत् जीवेत् सुखं जीवेत्' इसका मूल मंत्र है।
- जैन दर्शन - महावीर स्वामी द्वारा प्रतिपादित। अनेकांतवाद एवं स्याद्वाद।
- बौद्ध दर्शन - गौतम बुद्ध द्वारा प्रतिपादित। चार आर्य सत्य एवं अष्टांगिक मार्ग।
परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण बिंदु
बिहार बोर्ड परीक्षा में इस इकाई से वस्तुनिष्ठ प्रश्न पूछे जाते हैं। प्रत्येक सम्प्रदाय के संस्थापक, मुख्य ग्रंथ, मूलभूत सिद्धांत और दार्शनिक अवधारणाओं (जैसे सांख्य के 24 तत्त्व, योग के आठ अंग, चार्वाक दर्शन का भौतिकवाद) पर ध्यान देना आवश्यक है। नियमित अभ्यास से इन प्रश्नों को शीघ्रता एवं सटीकता से हल करने की क्षमता विकसित होती है।
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