Class 12 बाजार संतुलन Objective Questions Bihar Board

बिहार बोर्ड कक्षा 12 अर्थशास्त्र बाजार संतुलन

बिहार बोर्ड कक्षा 12वीं के अर्थशास्त्र विषय में बाजार संतुलन (Market Equilibrium) एक महत्वपूर्ण अध्याय है। यहाँ आपको इस अध्याय से संबंधित वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Objective Questions) मिलेंगे।

बाजार संतुलन की अवधारणा को समझने के लिए इन प्रश्नों का अभ्यास उपयोगी है। यह प्रश्न संतुलन कीमत, माँग एवं पूर्ति, अधिमाँग और अधिपूर्ति जैसे विषयों को कवर करते हैं।

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बाजार संतुलन: मुख्य अवधारणाएँ

बाजार संतुलन वह स्थिति है जहाँ किसी वस्तु की माँग और पूर्ति बराबर होती हैं। इस बिंदु पर न तो अधिमाँग (Excess Demand) रहती है और न ही अधिपूर्ति (Excess Supply)। इसी बिंदु पर निर्धारित कीमत को संतुलन कीमत और मात्रा को संतुलन मात्रा कहते हैं।

संतुलन कीमत का निर्धारण

संतुलन कीमत और मात्रा का निर्धारण बाजार में माँग और पूर्ति की शक्तियों के द्वारा होता है।
मान लीजिए, एक वस्तु की माँग फलन है: Qd = 100 - 10P
और पूर्ति फलन है: Qs = 50 + 10P
संतुलन की स्थिति में: Qd = Qs
अर्थात, 100 - 10P = 50 + 10P
इससे हमें संतुलन कीमत (P) = 2.5 और संतुलन मात्रा (Q) = 75 प्राप्त होती है।

माँग एवं पूर्ति वक्र में खिसकाव (Shift)

जब माँग या पूर्ति वक्र खिसकते हैं, तो संतुलन बिंदु परिवर्तित हो जाता है।

  • माँग वक्र में वृद्धि: यदि उपभोक्ताओं की आय बढ़ती है या वस्तु की प्रतिस्थापन वस्तु की कीमत बढ़ती है, तो माँग वक्र दायीं ओर खिसकता है। इससे नई संतुलन कीमत और मात्रा दोनों बढ़ जाती हैं।
  • पूर्ति वक्र में कमी: यदि कच्चे माल की कीमत बढ़ती है या उत्पादन तकनीक पुरानी हो जाती है, तो पूर्ति वक्र बायीं ओर खिसकता है। इससे संतुलन कीमत बढ़ती है और संतुलन मात्रा घटती है।

अधिमाँग और अधिपूर्ति

अधिमाँग (Excess Demand): यह स्थिति तब उत्पन्न होती है जब बाजार कीमत, संतुलन कीमत से कम होती है। इस स्थिति में माँग, पूर्ति से अधिक होती है। उपभोक्ता वस्तु के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं, जिससे कीमत में वृद्धि होती है और वह पुनः संतुलन कीमत की ओर बढ़ती है।
अधिपूर्ति (Excess Supply): यह स्थिति तब उत्पन्न होती है जब बाजार कीमत, संतुलन कीमत से अधिक होती है। इस स्थिति में पूर्ति, माँग से अधिक होती है। फर्में अपना माल बेचने के लिए कीमत कम करती हैं, जिससे कीमत पुनः संतुलन स्तर पर आ जाती है।

सरकारी हस्तक्षेप का प्रभाव

बाजार संतुलन पर सरकारी नीतियों का सीधा प्रभाव पड़ता है।

न्यूनतम समर्थन मूल्य (Price Floor)

यह संतुलन कीमत से ऊपर निर्धारित एक न्यूनतम कीमत है, जैसे कृषि उत्पादों के लिए। इसका परिणाम अधिपूर्ति के रूप में सामने आता है, क्योंकि इस कीमत पर पूर्ति, माँग से अधिक हो जाती है। सरकार को इस अतिरेक को खरीदना पड़ता है।

अधिकतम खुदरा मूल्य (Price Ceiling)

यह संतुलन कीमत से नीचे निर्धारित एक अधिकतम कीमत है, जैसे आवश्यक वस्तुओं के लिए। इसका परिणाम अधिमाँग या कमी के रूप में सामने आता है, क्योंकि इस कीमत पर माँग, पूर्ति से अधिक हो जाती है। इससे राशनिंग या काले बाजार की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

बिहार बोर्ड परीक्षा की तैयारी के लिए इन सभी बिंदुओं पर बनाए गए वस्तुनिष्ठ प्रश्नों का नियमित अभ्यास आवश्यक है। प्रश्नों को हल करते समय ग्राफ़ का प्रयोग करने और कारण सहित उत्तर समझने का प्रयास करें।