Bihar Board 12th न्याय, वैशेषिक, संख्य, योग दर्शन Objective Questions
Bihar Board Class 12th न्याय, वैशेषिक, संख्य एवं योग दर्शन के प्रश्न
बिहार बोर्ड कक्षा 12वीं के दर्शनशास्त्र विषय की तैयारी के लिए यहाँ न्याय, वैशेषिक, संख्य और योग दर्शन से संबंधित वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Objective Questions) दिए गए हैं। इन प्रश्नों का अभ्यास परीक्षा में बेहतर अंक प्राप्त करने में सहायक होगा।
नीचे दिए गए लिंक्स से आप अपनी कक्षा, विषय और अध्याय के अनुसार अन्य शैक्षणिक सामग्री प्राप्त कर सकते हैं।
Browse Bihar Board Class 12th न्याय, वैशेषिक, संख्य एवं योग दर्शन Objective Questions by Chapter
Select a chapter from the options below to access Bihar Board Class 12th न्याय, वैशेषिक, संख्य एवं योग दर्शन Objective Questions for that specific chapter. Each chapter page contains all available questions and study materials.
न्याय दर्शन के वस्तुनिष्ठ प्रश्न
न्याय दर्शन को तर्कशास्त्र के नाम से भी जाना जाता है। बिहार बोर्ड परीक्षा के लिए इन बिंदुओं पर ध्यान दें:
- प्रमाण: प्रत्यक्ष, अनुमान, उपमान और शब्द - इन चार प्रमाणों की परिभाषा और उदाहरण समझें।
- पंचावयव: प्रतिज्ञा, हेतु, उदाहरण, उपनय और निगमन - न्याय के इस पंचावयवी स्वरूप को याद रखें।
- हेत्वाभास: तर्क में होने वाली भूलों (Fallacies) के प्रकार, जैसे सव्यभिचार, विरुद्ध आदि।
परीक्षा में अक्सर प्रमाणों के प्रकार और हेत्वाभास पर ही प्रश्न पूछे जाते हैं।
वैशेषिक दर्शन के महत्वपूर्ण प्रश्न
वैशेषिक दर्शन सात पदार्थों (सप्तपदार्थ) और परमाणुवाद के लिए प्रसिद्ध है।
- सप्तपदार्थ: द्रव्य, गुण, कर्म, सामान्य, विशेष, समवाय और अभाव - इन सभी की पहचान करना सीखें।
- परमाणु सिद्धांत: सृष्टि की रचना के संदर्भ में परमाणु (Paramāṇu) की भूमिका को समझें।
- असत्कार्यवाद: कार्य का कारण में पहले से अस्तित्व में न होना, इस सिद्धांत का अर्थ स्पष्ट है।
संख्य दर्शन: पुरुष एवं प्रकृति
संख्य दर्शन एक द्वैतवादी दर्शन है। इसके प्रश्नों के लिए निम्नलिखित अवधारणाएँ आवश्यक हैं:
- पुरुष और प्रकृति: चेतन पुरुष और जड़ प्रकृति के बीच मूलभूत अंतर को समझना जरूरी है।
- त्रिगुण: प्रकृति के सत्त्व, रजस और तमस गुणों के गुण-धर्म याद रखें।
- तत्त्वों का उद्भव: महत्, अहंकार, पंचतन्मात्रा आदि के क्रमिक सृष्टि-विकास को समझें।
योग दर्शन के अभ्यास प्रश्न
योग दर्शन चित्त की वृत्तियों के निरोध का मार्ग बताता है।
- अष्टांग योग: यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि - इन आठ सोपानों के नाम और क्रम को याद रखें।
- चित्तवृत्ति: प्रमाण, विपर्यय, विकल्प, निद्रा और स्मृति - मन की इन पाँच वृत्तियों को पहचानें।
- ईश्वर: पतंजलि योग दर्शन में ईश्वर की विशेष अवधारणा तथा कैवल्य (मोक्ष) का लक्ष्य।
इन सभी दर्शनों के प्रश्नों का नियमित अभ्यास करते रहें। संख्य दर्शन का सैद्धांतिक ज्ञान और योग दर्शन का व्यावहारिक ज्ञान एक-दूसरे के पूरक हैं। दोनों को जोड़कर पढ़ने से अवधारणाएँ स्पष्ट होती हैं।